"बिना किसी तनाव के उत्सव के मूड में परीक्षा के लिए उपस्थित हों"
"प्रौद्योगिकी को एक अवसर के रूप में लें, चुनौती के रूप में नहीं"
"राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए परामर्श विस्तृत रहा है। इस पर पूरे भारत के लोगों से सलाह ली गई”
“20वीं सदी की शिक्षा प्रणाली और अवधारणा 21वीं सदी में हमारे विकास पथ को निर्धारित नहीं कर सकती। हमें समय के साथ बदलना होगा"
“शिक्षकों और अभिभावकों के अधूरे सपनों को छात्रों पर नहीं थोपा जा सकता। बच्चों के लिए अपने सपनों को पूरा करना महत्वपूर्ण है"
"प्रेरणा के लिए कोई इंजेक्शन या फॉर्मूला नहीं है। इसके बजाय, अपने आप को बेहतर तरीके से खोजें और पता करें कि आपको किससे खुशी मिलती है और उस पर काम करें”
"वही करें जो आपको पसंद हों और तभी आपको अधिकतम परिणाम मिलेगा"
"आप एक विशेष पीढ़ी के हैं। हां, प्रतिस्पर्धा ज्यादा है लेकिन मौके भी ज्यादा हैं”
"बेटी परिवार की ताकत होती है। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हमारी नारी शक्ति को उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देखने से बेहतर और क्या होगा”
"दूसरों के गुणों की सराहना करने और उनसे सीखने की क्षमता विकसित करें"
“जब मैं आपसे जुड़ता हूं तो मुझे आपकी आकांक्षाओं और सपनों की झलक मिलती है और मैं अपने जीवन को उसके अनुसार ढालने की कोशिश करता हूं। इसलिए, यह कार्यक्रम मुझे आगे बढ़ने में मदद करता है"

परीक्षा पे चर्चा (पीपीसी) के 5वें संस्करण में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ बातचीत की। बातचीत से पहले प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर छात्रों के प्रदर्शनों का निरीक्षण किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान, श्रीमती अन्नपूर्णा देवी, डॉ. सुभाष सरकार, डॉ. राजकुमार रंजन सिंह और श्री राजीव चंद्रशेखर सहित राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों, शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों की वर्चुअल तौर पर उपस्थिति थी। पूरी बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने एक संवादात्मक, जोशीला और संवादी स्वर बनाए रखा।

 

सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने पिछले साल वर्चुअल बातचीत के बाद अपने युवा मित्रों को संबोधित करने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पीपीसी उनका पसंदीदा कार्यक्रम है। उन्होंने कल से शुरू होने वाले विक्रम संवत नव वर्ष के बारे में बताया और छात्रों को आने वाले कई त्योहारों के लिए बधाई दी। प्रधानमंत्री ने पीपीसी के 5वें संस्करण में एक नई प्रथा की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा जो प्रश्न शामिल नहीं किए जा सके, नमो ऐप पर वीडियो, ऑडियो या टेक्स्ट मैसेज के जरिए उनके उत्तर दिए जाएंगे।

 

पहला सवाल दिल्ली की खुशी जैन ने किया। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से, वडोदरा की किनी पटेल ने भी परीक्षा को लेकर तनाव और दबाव के बारे में पूछा। प्रधानमंत्री ने उनसे कहा कि वे तनाव में न रहें क्योंकि यह उनके द्वारा दी जाने वाली पहली परीक्षा नहीं है। उन्होंने कहा, "एक तरह से आप परीक्षा-प्रमाणित हैं।" पिछली परीक्षाओं से उन्हें जो अनुभव मिला है, उससे उन्हें आगामी परीक्षाओं से निपटने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि अध्ययन का कुछ हिस्सा छूट सकता है, लेकिन उन्हें इस पर जोर न देने के लिए कहा। उन्होंने सुझाव दिया कि उन्हें अपनी तैयारी की ताकत पर ध्यान देना चाहिए और अपने दिन-प्रतिदिन की दिनचर्या में तनावमुक्त और स्वाभाविक रहना चाहिए। दूसरों की नकल के रूप में कुछ भी करने की कोशिश करने का कोई मतलब नहीं है, लेकिन अपनी दिनचर्या के साथ रहें और उत्सव की तरह निश्चिंतता से काम करें।

 

अगला प्रश्न कर्नाटक के मैसूर के तरुण ने किया। उन्होंने पूछा कि यूट्यूब, आदि जैसे ध्यान भटकाने वाले कई ऑनलाइन माध्यम के बावजूद अध्ययन को एक ऑनलाइन मोड में कैसे आगे बढ़ाया जाए। दिल्ली के शाहिद अली, तिरुवनंतपुरम, केरल की कीर्तना और कृष्णागिरी, तमिलनाडु के एक शिक्षक चंद्रचूड़ेश्वरन के मन में भी यही सवाल था। प्रधानमंत्री ने कहा कि समस्या ऑनलाइन या ऑफलाइन अध्ययन के तरीकों से नहीं है। ऑफ़लाइन अध्ययन में भी, मन बहुत भटक सकता है। उन्होंने कहा, "यह माध्यम की नहीं बल्कि मन की समस्या है।" उन्होंने कहा कि चाहे ऑनलाइन हो या ऑफलाइन, जब मन पढ़ाई में लगा हो तो ध्यान भटकाने वाली चीजों से छात्रों को परेशानी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी विकसित होगी और छात्रों को शिक्षा में नई तकनीकों को अपनाना चाहिए। सीखने के नए तरीकों को एक अवसर के रूप में लिया जाना चाहिए, चुनौती के रूप में नहीं। ऑनलाइन आपके ऑफलाइन सीखने को बढ़ावा दे सकता है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन संग्रह के लिए है और ऑफलाइन का संबंध क्षमता विकसित करने तथा काम करने से है। उन्होंने डोसा बनाने का उदाहरण दिया। कोई भी ऑनलाइन डोसा बनाना सीख सकता है लेकिन तैयारी और खपत ऑफलाइन होगी। उन्होंने कहा कि वर्चुअल दुनिया में रहने की तुलना में अपने बारे में सोचने और खुद के साथ रहने में बहुत खुशी होती है।

 

पानीपत, हरियाणा की एक शिक्षिका सुमन रानी ने पूछा कि नई शिक्षा नीति के प्रावधान छात्रों के जीवन को विशेष रूप से और समाज को कैसे सशक्त बनाएंगे, और यह कैसे नये भारत का मार्ग प्रशस्त करेगा। पूर्वी खासी हिल्स, मेघालय की शीला ने भी इसी तर्ज पर प्रश्न पूछा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक 'राष्ट्रीय' शिक्षा नीति है न कि 'नई' शिक्षा नीति। उन्होंने कहा कि विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद नीति का मसौदा तैयार किया गया था। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड होगा। "राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए परामर्श विस्तृत रहा है। इस पर पूरे भारत के लोगों से सलाह ली गई।” उन्होंने आगे कहा, यह नीति सरकार ने नहीं बल्कि नागरिकों, छात्रों और इसके शिक्षकों ने देश के विकास के लिए बनाई है। उन्होंने कहा कि पहले, शारीरिक शिक्षा और प्रशिक्षण पाठ्येतर गतिविधियां थीं। लेकिन अब वे शिक्षा का हिस्सा बन गई हैं और नई प्रतिष्ठा प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने कहा कि 20वीं सदी की शिक्षा प्रणाली और अवधारणा 21वीं सदी में हमारे विकास पथ को निर्धारित नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि अगर हम बदलती प्रणालियों के साथ विकसित नहीं हुए तो हम पीछे छूट जाएंगे और पीछे की ओर चले जाएंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति किसी के जुनून का अनुसरण करने का अवसर देती है। उन्होंने ज्ञान के साथ कौशल के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के हिस्से के रूप में कौशल को शामिल करने का यही कारण है। उन्होंने विषयों के चुनाव में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) द्वारा प्रदान किए गए लचीलेपन के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि एनईपी के उचित क्रियान्वयन से नए अवसर तैयार होंगे। उन्होंने पूरे देश के स्कूलों से छात्रों द्वारा आविष्कृत नई तकनीकों को लागू करने के नए तरीके खोजने का आग्रह किया।

 

गाजियाबाद, यूपी की रोशनी ने पूछा कि परिणामों के बारे में अपने परिवार की अपेक्षाओं से कैसे निपटें और क्या पढ़ाई को उतनी ही गंभीरता से लेना चाहिए जितना कि माता-पिता महसूस करते हैं या इसका एक उत्सव की तरह आनंद उठाना चाहिए। भटिंडा, पंजाब की किरण प्रीत कौर ने इसी तरह का सवाल पूछा। प्रधानमंत्री ने अभिभावकों और शिक्षकों से कहा कि वे अपने सपनों को छात्रों पर थोपे नहीं। प्रधानमंत्री ने कहा, “शिक्षकों और अभिभावकों के अधूरे सपनों को छात्रों पर नहीं थोपा जा सकता। प्रत्येक बच्चे के लिए अपने सपनों को पूरा करना महत्वपूर्ण है।” उन्होंने माता-पिता और शिक्षकों से यह स्वीकार करने का आग्रह किया कि प्रत्येक छात्र में कोई न कोई विशेष क्षमता होती है और उसका पता लगाना चाहिए। उन्होंने छात्र से कहा कि अपनी ताकत को पहचानें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।

दिल्ली के वैभव कन्नौजिया ने पूछा कि जब हमारे पास अधिक बैकलॉग है तो कैसे प्रेरित रहें और सफल हों। ओडिशा के माता-पिता सुजीत कुमार प्रधान, जयपुर की कोमल शर्मा और दोहा के एरोन एबेन ने भी इसी विषय पर सवाल पूछा था। प्रधानमंत्री ने कहा, "प्रेरणा के लिए कोई इंजेक्शन या फॉर्मूला नहीं है। इसके बजाय, अपने आप को बेहतर तरीके से खोजें और पता करें कि आपको किससे खुशी मिलती है और वही काम करें।" उन्होंने छात्रों से उन चीजों की पहचान करने के लिए कहा जो उन्हें स्वाभाविक रूप से प्रेरित करती हैं, उन्होंने इस प्रक्रिया में स्वायत्तता पर जोर दिया और छात्रों से कहा कि वे अपने संकटों के लिए सहानुभूति प्राप्त करने का प्रयास न करें। उन्होंने छात्रों को अपने आस-पास देखने की सलाह दी कि कैसे बच्चे, दिव्यांग और प्रकृति अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा, "हमें अपने परिवेश के प्रयासों और शक्तियों का निरीक्षण करना चाहिए और उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।" उन्होंने अपनी पुस्तक एग्जाम वॉरियर से यह भी याद किया कि कैसे 'परीक्षा' के लिए एक पत्र लिखकर और अपनी ताकत व तैयारी के साथ परीक्षा को चुनौती देकर प्रेरित महसूस किया जा सकता है।

तेलंगाना के खम्मम की अनुषा ने कहा कि वह विषयों को समझती हैं जब शिक्षक उन्हें पढ़ाते हैं लेकिन थोड़ी देर बाद भूल जाती हैं कि इससे कैसे निपटना है। गायत्री सक्सेना ने नमो ऐप के जरिए याददाश्त और समझ को लेकर भी सवाल किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर चीजों को पूरे ध्यान से सीखा जाएगा तो कुछ भी नहीं भुलाया जा सकेगा। उन्होंने छात्र से वर्तमान में जीने को कहा। वर्तमान के बारे में यह सचेतनता उन्हें बेहतर ढंग से सीखने और याद रखने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान बेहद महत्वपूर्ण होता है और जो वर्तमान में जीता है और उसे पूरी तरह से समझता है वह जीवन का अधिकतम लाभ उठाता है। उन्होंने उनसे स्मृति की शक्ति को संजोने और उसका विस्तार करते रहने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि एक स्थिर दिमाग चीजों को याद करने के लिए सबसे उपयुक्त है।

 

झारखंड की श्वेता कुमारी ने कहा कि वह रात में पढ़ना पसंद करती हैं लेकिन दिन में पढ़ने के लिए कहा जाता है। राघव जोशी ने नमो ऐप के जरिए पढ़ाई के लिए उचित समय सारिणी के बारे में भी पूछा। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी के प्रयास के परिणाम का मूल्यांकन करना और समय कैसे व्यतीत किया जा रहा है, इसका मूल्यांकन करना अच्छा है। उन्होंने कहा कि आउटपुट और परिणाम का विश्लेषण करने की यह आदत शिक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अक्सर हम उन विषयों के लिए अधिक समय देते हैं जो हमारे लिए आसान और रुचिकर होते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए 'मन, दिल और शरीर के साथ होने वाली धोखाधड़ी' पर काबू पाने के लिए सोच-समझकर प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "ऐसी चीजें करें जो आपको पसंद हों और तभी आपको अधिकतम परिणाम मिलेगा।"

 

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर की एरिका जॉर्ज ने पूछा कि वैसे लोगों के लिए क्या किया जाना चाहिए जो जानकार तो हैं लेकिन किसी कारणवश सही परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए। गौतमबुद्धनगर के हरि ओम मिश्रा ने पूछा कि उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षा के लिए अध्ययन की मांगों को कैसे संभालना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि परीक्षा के लिए पढ़ना गलत है। उन्होंने कहा कि अगर कोई पूरे मन से पाठ्यक्रम का अध्ययन करता है, तो अलग-अलग परीक्षाएं मायने नहीं रखती हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा उत्तीर्ण करने के बजाय विषय में महारत हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि एथलीट खेल के लिए प्रशिक्षण लेते हैं न कि प्रतियोगिता के लिए। उन्होंने कहा, "आप एक विशेष पीढ़ी के हैं। हां, प्रतिस्पर्धा अधिक है लेकिन अवसर भी अधिक हैं।” उन्होंने छात्र से प्रतियोगिता को अपने समय का सबसे बड़ा उपहार मानने के लिए कहा।

 

गुजरात के नवसारी के माता-पिता सीमा चेतन देसाई ने प्रधानमंत्री से पूछा कि ग्रामीण लड़कियों के उत्थान में समाज कैसे योगदान दे सकता है। श्री मोदी ने कहा कि जब से लड़कियों की शिक्षा को नजरअंदाज किया गया, तब से लेकर अब तक स्थिति में काफी बदलाव आया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लड़कियों की उचित शिक्षा सुनिश्चित किए बिना कोई भी समाज सुधार नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि बेटियों के अवसरों और सशक्तिकरण को संस्थागत बनाया जाना चाहिए। बेटियां हमारी मूल्यवान धरोहर बन रही हैं और यह बदलाव स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव के वर्ष में, स्वतंत्र भारत के इतिहास में भारत में सबसे अधिक संसद सदस्य हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, "बेटी परिवार की ताकत होती है। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हमारी नारी शक्ति को उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देखने से बेहतर और क्या हो सकता है।”

 

दिल्ली की पवित्रा राव ने पूछा कि नई पीढ़ी को पर्यावरण की सुरक्षा में योगदान के लिए क्या करना चाहिए? चैतन्य ने पूछा कि अपनी कक्षा एवं पर्यावरण को स्वच्छ और हरा-भरा कैसे बनाया जाए। प्रधानमंत्री ने छात्रों को धन्यवाद दिया और इस देश को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने का श्रेय उन्हें दिया। बच्चों ने विरोधियों की अवहेलना की और प्रधानमंत्री की स्वच्छता की प्रतिज्ञा को सही मायने में समझा। उन्होंने कहा कि हम जिस पर्यावरण का आनंद ले रहे हैं वह हमारे पूर्वजों के योगदान के कारण है। इसी तरह हमें आने वाली पीढ़ी के लिए भी एक बेहतर माहौल छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह नागरिकों के योगदान से ही संभव हो सकता है। उन्होंने "पी3 मूवमेंट" - प्रो प्लैनेट पीपल एंड लाइफस्टाइल फॉर द एनवायरनमेंट- लाइफ के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें 'यूज एंड थ्रो' संस्कृति से दूर होकर सर्कुलर इकोनॉमी की जीवनशैली की ओर बढ़ना होगा। प्रधानमंत्री ने अमृत काल के महत्व पर जोर दिया जो देश के विकास में छात्र के सर्वोत्तम वर्षों के साथ मेल खाता है। उन्होंने कर्तव्य पालन के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने टीकाकरण में अपना कर्तव्य निभाने के लिए छात्रों की प्रशंसा की।

 

अंत में प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम का संचालन करने वाले छात्रों को बुलाया और उनके कौशल और आत्मविश्वास की सराहना की। उन्होंने दूसरों में गुणों की सराहना करने और उनसे सीखने की क्षमता विकसित करने की आवश्यकता को दोहराया। हमें ईर्ष्या के बजाय सीखने की प्रवृत्ति रखनी चाहिए। जीवन में सफलता के लिए यह क्षमता महत्वपूर्ण है।

 

उन्होंने इस व्यक्तिगत टिप्पणी के साथ अपने वक्तव्य का समापन किया कि उनके लिए पीपीसी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब वे युवा छात्रों के साथ बातचीत करते हैं तो वे खुद को 50 साल छोटा महसूस करते हैं। एक स्पष्ट रूप से उत्साहित प्रधानमंत्री ने निष्कर्ष के रूप में बताया, “मैं आपकी पीढ़ी के साथ जुड़कर आपसे सीखने की कोशिश करता हूं। जैसे-जैसे मैं आपसे जुड़ता हूं, मुझे आपकी आकांक्षाओं और सपनों की झलक मिलती है और मैं अपने जीवन को उसके अनुसार ढालने की कोशिश करता हूं। इसलिए यह कार्यक्रम मुझे बढ़ने में मदद करता है। मुझे अपनी मदद करने और बढ़ने के लिए समय देने के लिए मैं आप सभी का धन्यवाद करता हूं"।

 

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Prime Minister congratulates Abelardo de la Espriella on his victory in the Colombian presidential elections
June 26, 2026

Prime Minister Shri Narendra Modi congratulated Abelardo de la Espriella on his victory in the Colombian presidential elections.

The Prime Minister noted that India deeply values its close friendship with Colombia which continues to grow in all areas. “I convey my best wishes for a successful tenure and look forward to working together to further deepen our bilateral relations in the years ahead”, Shri Modi added.

Shri Modi posted on X;

Heartiest congratulations, Abelardo de la Espriella, on your victory in the Colombian presidential elections.

India values its close friendship with Colombia which continues to grow in all areas. I convey my best wishes for a successful tenure and look forward to working together to further deepen our bilateral relations in the years ahead.

@ABDELAESPRIELLA