2024 से 2029 तक की अवधि के लिए रूस के सुदूर पूर्व में व्यापार, आर्थिक और निवेश क्षेत्रों में भारत-रूस सहयोग का कार्यक्रम और साथ ही रूसी संघ के आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग का सिद्धांत
रूस के सुदूर पूर्व क्षेत्र और भारत के बीच व्यापार एवं संयुक्त निवेश की परियोजनाओं में और अधिक वृद्धि को सुविधाजनक बनाना।
2.
जलवायु परिवर्तन और निम्न-कार्बन विकास के मुद्दों पर भारत गणराज्य के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा रूसी संघ के आर्थिक विकास मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन
जलवायु परिवर्तन और निम्न-कार्बन विकास के मुद्दों पर संयुक्त कार्य समूह की स्थापना।
कम लागत वाली प्रौद्योगिकियों को विकसित करने हेतु सूचना/सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान और अनुसंधान का सह-आयोजन।
3.
भारतीय सर्वेक्षण विभाग और रूसी संघ की राज्य पंजीकरण, भूमि करपंजी (कैडस्टर) और मानचित्रकला (कार्टोग्राफी) संबंधीसंघीय सेवा के बीच समझौता ज्ञापन
भूगणित (जियोडसी), मानचित्रकला (कार्टोग्राफी)और स्थानिक डेटा अवसंरचना में ज्ञान एवं अनुभव का आदान-प्रदान; व्यावसायिक प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण; वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग।
4.
ध्रुवीय क्षेत्रों में अनुसंधान एवं लॉजिस्टिक्स के मामले में सहयोग के संबंध में भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागर अनुसंधान केन्द्रऔर आर्कटिक एवं अंटार्कटिक अनुसंधान संस्थान के बीच समझौता ज्ञापन
संसाधनों एवं डेटा को साझा करके ध्रुवीय वातावरण और उनकी परिवर्तनशीलता के अध्ययन में सहयोग; ध्रुवीय क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स; संयुक्त अनुसंधान; कर्मियों का आदान-प्रदान; और ध्रुवीय क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों एवं परियोजनाओं में भागीदारी।
5.
भारत के प्रसार भारतीऔर रूस के एएनओ "टीवी-नोवोस्ती" (रूस टुडे टीवी चैनल)के बीच प्रसारण संबंधी सहयोग एवं साझेदारी के संबंध में समझौता ज्ञापन
कार्यक्रमों, कार्मिकों और प्रशिक्षण के आदान-प्रदान सहित प्रसारण के क्षेत्र में सहयोग।
6.
भारत गणराज्य सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के भारतीय भेषज संहिता (फार्माकोपिया) आयोगऔर रूसी संघ के स्वास्थ्य मंत्रालय के संघीय राज्य बजटीय संस्थान “औषधीय उत्पादों के विशेषज्ञ मूल्यांकन का वैज्ञानिक केंद्र” के बीच समझौता ज्ञापन
सूचना के आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण के जरिए मानव उपयोग हेतु उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
7.
भारतीय अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केन्द्र और रूसी संघ के चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता न्यायालय के बीच सहयोग समझौता
वाणिज्यिक प्रकृति के नागरिक कानून से संबंधित विवादों के निपटारे को सुविधाजनक बनाना।
8.
इन्वेस्ट इंडिया और जेएससी “रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष की प्रबंधन कंपनी” के बीच संयुक्त निवेश संवर्धन की रुपरेखा से संबंधित समझौता
निवेश संबंधी सहयोग को प्रोत्साहन और बढ़ावा देकर भारतीय बाजार में रूसी कंपनियों के निवेश को सुविधाजनक बनाना।
9.
भारतीय व्यापार संवर्धन परिषद और अखिल रूस सार्वजनिक संगठन “बिजनेस रूस” के बीच समझौता ज्ञापन
द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना, बी2बी बैठकें आयोजित करना, व्यापार संवर्धन कार्यक्रम; और व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों का आदान-प्रदान।
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में ₹24,815 करोड़ की दो रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी
April 18, 2026
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय आर्थिक मामलों की समिति ने आज रेल मंत्रालय की लगभग 24,815 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली दो परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में निम्नलिखित शामिल हैं:
इस बढ़ी हुई लाइन क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। ये मल्टीट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को सुव्यवस्थित करेंगे और भीड़भाड़ को कम करेंगे। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नए भारत की परिकल्पना के अनुरूप हैं। इसका उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मुख्य योजना के अंतर्गत बनाई गई हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से बहु-मार्गीय संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।
उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश राज्यों के 15 जिलों को कवर करने वाली ये 02 (दो) परियोजनाएं भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क को लगभग 601 किलोमीटर तक बढ़ाएंगी।
प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क में सुधार होगा, जिनमें दूधेश्वरनाथ मंदिर, गढ़मुक्तेश्वर गंगा घाट, दरगाह शाह विलायत जामा मस्जिद (अमरोहा), नैमिषारण्य (सीतापुर), अन्नवरम, अंतर्वेदी, द्रक्षरामम आदि शामिल हैं।
प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, अनाज, सीमेंट, पीओएल, लोहा और इस्पात, कंटेनर, उर्वरक, चीनी, रासायनिक लवण, चूना पत्थर आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन का साधन होने के नाते, जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की रसद लागत को कम करने में मदद करेगा, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन (180.31 करोड़ किलोग्राम) में कमी आएगी, जो 7.33 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है।
गाजियाबाद – सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन (403 किमी)
गाजियाबाद-सीतापुर एक मौजूदा दोहरी लाइन खंड है जो दिल्ली-गुवाहाटी उच्च घनत्व नेटवर्क (एचडीएन 4) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यह परियोजना देश के उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों के बीच संपर्क सुधारने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस खंड की मौजूदा लाइन क्षमता का 168% तक उपयोग हो रहा है और परियोजना शुरू न होने की स्थिति में इसके 207% तक होने का अनुमान है।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, हापुड, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर जिलों से होकर गुजरती है।
परियोजना का मार्ग गाजियाबाद (मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स), मुरादाबाद (पीतल के बर्तन और हस्तशिल्प), बरेली (फर्नीचर, वस्त्र, इंजीनियरिंग), शाहजहांपुर (कालीन और सीमेंट से संबंधित उद्योग) और रोजा (तापीय विद्युत संयंत्र) जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से होकर गुजरता है।
सुगम परिवहन के लिए, परियोजना की रूपरेखा हापुड़, सिंभाओली, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर और सीतापुर के भीड़भाड़ वाले स्टेशनों को बाईपास करने के लिए बनाई गई है और तदनुसार, बाईपास खंडों पर छह नए स्टेशन प्रस्तावित हैं।
परियोजना खंड के पास/पास प्रमुख पर्यटक/धार्मिक स्थान दूधेश्वरनाथ मंदिर, गढ़मुक्तेश्वर गंगा घाट, दरगाह शाह विलायत जामा मस्जिद (अमरोहा), और नैमिषारण्य (सीतापुर) हैं।
इस परियोजना से कोयला, खाद्यान्न, रासायनिक खाद, तैयार इस्पात आदि के 35.72 मीट्रिक टन प्रति वर्ष के अतिरिक्त माल परिवहन का अनुमान है।
अनुमानित लागत: लगभग 14,926 करोड़ रुपये।
रोजगार सृजन: 274 लाख मानव दिन।
कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 128.77 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड की कमी। यह 5.15 करोड़ पेड़ों के बराबर है।
लॉजिस्टिक लागत में बचत: सड़क परिवहन की तुलना में प्रति वर्ष 2,877.46 करोड़ रुपये की बचत।
राजमुंदरी (निदादावोलु) - विशाखापत्तनम (दुव्वाडा) खंड हावड़ा - चेन्नई उच्च घनत्व नेटवर्क (एचडीएन) का हिस्सा है।
प्रस्तावित परियोजना हावड़ा-चेन्नई उच्च घनत्व नेटवर्क (एचडीएन) मार्ग के चौगुने विस्तार की पहल का हिस्सा है।
यह परियोजना आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी, कोनासीमा, काकीनाडा, अनाकापल्ले और विशाखापत्तनम जिलों से होकर गुजरती है।
विशाखापत्तनम को आकांक्षी जिला कार्यक्रम में एक आकांक्षी जिला माना गया है।
यह पूर्वी तट पर स्थित विशाखापत्तनम, गंगावरम, मछलीपटनम और काकीनाडा जैसे प्रमुख पत्तनों को जोड़ती है।
परियोजना का मार्ग पूर्वी तटरेखा के साथ-साथ चलता है और यह पूर्वी तटीय रेल गलियारे के सबसे व्यस्त, मुख्य रूप से माल ढुलाई के खंडों में से एक है।
इस खंड की लाइन क्षमता का उपयोग पहले ही 130% तक पहुंच चुका है, जिसके कारण बार-बार जाम और परिचालन में देरी हो रही है। क्षेत्र में पत्तनों और उद्योगों के प्रस्तावित विस्तार के कारण लाइन की क्षमता में और वृद्धि होने की उम्मीद है।
परियोजना के इस खंड में गोदावरी नदी पर 4.3 किमी लंबा रेल पुल, 2.67 किमी लंबा वायडक्ट, 3 बाईपास शामिल हैं और नया मार्ग मौजूदा मार्ग से लगभग 8 किमी छोटा है, जिससे संपर्क और परिचालन दक्षता में सुधार होगा।
प्रस्तावित खंड अन्नवरम, अंतर्वेदी और द्रक्षरामम आदि जैसे प्रमुख स्थलों तक पहुंच में सुधार करके पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।
कोयला, सीमेंट, रासायनिक खाद, लोहा और इस्पात, खाद्यान्न, कंटेनर, बॉक्साइट, जिप्सम, चूना पत्थर आदि सहित 29.04 मीट्रिक टन प्रति वर्ष के अतिरिक्त माल परिवहन का अनुमान है।
अनुमानित लागत: लगभग 9,889 करोड़ रुपये।
रोजगार सृजन: 135 लाख मानव दिन।
कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 51.49 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड की कमी। यह 2.06 करोड़ पेड़ों के बराबर है।
लॉजिस्टिक लागत में बचत: सड़क परिवहन की तुलना में प्रति वर्ष 1,150.56 करोड़ रुपये की बचत।
आर्थिक सशक्तिकरण:
आकांक्षी जिले - विशाखापत्तनम जिले को बेहतर संपर्क मिलेगा।
पर्यटन और उद्योगों के माध्यम से इस क्षेत्र में अतिरिक्त आर्थिक अवसर उपलब्ध होंगे।
रेल संपर्क में सुधार के कारण नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा प्राप्त होगी।