माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी तथा जापान की माननीय प्रधानमंत्री सुश्री ताकाइची सानाए ने 2 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली में भेंट की और वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में ऊर्जा लचीलेपन को सुदृढ़ करने के लिए ऊर्जा की बड़े पैमाने पर खपत करने वाली एशिया की अर्थव्यवस्थाओं तथा उत्तरदायी शक्तियों के रूप में साथ मिलकर कार्य करने का साझा संकल्प व्यक्त किया।

दोनों पक्षों ने ऊर्जा लचीलेपन को सुदृढ़ करने के लिए क्षेत्रीय पहलों जैसे दक्षिण एशिया में ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत का समर्थन तथा जापान की पार्टनरशिप ऑन वाइड एनर्जी एंड रिसोर्सेज़ रेज़िलिएंस (पावर एशिया) के महत्व पर बल दिया। दोनों नेताओं के बीच हुई चर्चा के आधार पर, भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय निम्नलिखित ठोस पहलों पर सहयोग करेंगे:

1. सामरिक भंडारण तंत्र में सहयोग

दोनों पक्षों ने अपने-अपने ज्ञान और अनुभव को साझा करने तथा जहाँ उपयुक्त हो, कच्चे तेल तथा पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण तंत्र एवं आरक्षित भंडार व्यवस्थाओं से संबंधित ठोस सहयोग को बढ़ावा देने के महत्व को दोहराया। सहयोग अन्य विषयों के साथ-साथ निम्नलिखित पर केंद्रित होगा:

 

• राष्ट्रीय भंडारण प्रणालियों एवं आरक्षित भंडारों से संबंधित व्यवस्थाएँ, जिनमें उद्योग-आधारित भंडार भी शामिल हैं

• उत्पादक देशों के साथ व्यवस्थाओं के संबंध में समन्वय

• आपातकालीन प्रतिक्रिया तथा बाजार स्थिरीकरण

2. ऊर्जा की खपत करने वाले देशों की आवाज़ मजबूत करना

दोनों पक्षों ने ऊर्जा की उपलब्धता और वहनीयता से संबंधित साझा चुनौतियों का समाधान करने के लिए सहयोग के महत्व को दोहराया। इसके लिए आपूर्ति की सुनिश्चितता, लचीलेपन की क्षमता बढ़ाने तथा अस्थिरता को कम करने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने बल दिया, जिससे तेल एवं प्राकृतिक गैस की खपत करने वाले देशों की सामूहिक आवाज़ को मजबूती प्रदान की जा सके। सहयोग अन्य विषयों के साथ-साथ मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों पर केंद्रित होगा:

 

• बाज़ार की प्रवृत्तियों से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान तथा बाज़ार स्थिरीकरण के लिए संयुक्त प्रयासों पर सहयोग

• तृतीय देशों से ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सहयोग के अवसरों का पता लगाना

• तृतीय देशों में अपस्ट्रीम ऊर्जा क्षेत्र में निवेश से संबंधित वाणिज्यिक सहयोग की संभावनाओं का पता लगाना

3. ऊर्जा परिवहन में सहयोग

दोनों पक्षों ने इस बात को दोहराया कि तेल एवं प्राकृतिक गैस के लचीले, आत्मनिर्भर तथा कुशल समुद्री परिवहन तंत्र दोनों देशों की ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधारस्तंभ है। साथ ही, दोनों पक्ष समुद्री ऊर्जा परिवहन मूल्य शृंखला के विभिन्न क्षेत्रों में, संयुक्त निवेश सहित, सहयोग के अवसरों का पता लगाने पर सहमत हुए।

 

4. संस्थागत सहयोग

दोनों पक्षों ने ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग सहित व्यापक सहयोग को और गहरा करने के उद्देश्य से, निम्नलिखित सहित संबंधित हितधारकों के बीच संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने के इरादे की पुष्टि की:

 

• भारतीय संस्थान: भारतीय राष्ट्रीय तेल कंपनियाँ, इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व्स लिमिटेड (आईएसपीआरएल) तथा अन्य संबंधित हितधारक।

• जापानी संस्थान: जापान ऑर्गनाइजेशन फॉर मेटल्स एंड एनर्जी सिक्योरिटी (जेओजीएमईसी), जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (जेबीआईसी) तथा अन्य संबंधित हितधारक।

5. बातचीत के लिए मंच

इस संयुक्त वक्तव्य में चिन्हित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से, दोनों पक्षों ने भारत–जापान ऊर्जा संवाद के तत्वावधान में गठित पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस पर भारत-जापान संयुक्त कार्य समूह के अंतर्गत नियमित विचार-विमर्श करने का निर्णय लिया। इस मंच के माध्यम से दोनों पक्ष नवीनतम ज्ञान एवं अनुभव का आदान-प्रदान करेंगे तथा परस्पर लाभकारी सहयोग के अवसरों का पता लगाएंगे।

 

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