1. आज जर्मनी के संघीय गणराज्य एवं भारत गणराज्य की सरकारों ने संघीय चांसलर श्री ओलाफ स्कोल्ज और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सह-अध्यक्षता में, अंतर-सरकारी परामर्श के छठे दौर का आयोजन किया। दोनों नेताओं के अलावा, दोनों प्रतिनिधिमंडलों में अनुबंध में उल्लिखित मंत्रालयों के मंत्री और अन्य उच्च स्तर के प्रतिनिधि शामिल थे।

2. आज जब भारत अपनी आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है, जर्मनी और भारत के बीच संबंध दृढ़ता के साथ परस्पर विश्वास, दोनों देशों के लोगों की सेवा से जुड़े आपसी हितों एवं लोकतंत्र के साझा मूल्यों, कानून के शासन एवं मानवाधिकारों और वैश्विक चुनौतियों के खिलाफ बहुपक्षीय प्रतिक्रियाओं में निहित हैं।

3. दोनों सरकारों ने संयुक्त राष्ट्र के साथ एक प्रभावी नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के महत्व और सभी देशों की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान सहित, संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में निहित अंतरराष्ट्रीय कानून के मूलभूत सिद्धांतों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए बहुपक्षवाद को मजबूत करने व उसमें सुधार करने, विश्व स्तर पर शांति एवं स्थिरता की रक्षा करने, अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने और संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान तथा विभिन्न देशों की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता के मूलभूत सिद्धांतों की रक्षा करने के लिए अपनी सरकारों के दृढ़ संकल्प की पुष्टि की।

4. दोनों नेताओं ने कोविड-19 महामारी के प्रभाव से अर्थव्यवस्था को उबारने की ऐसी प्रक्रिया के प्रति अपनी वचनबद्धता को रेखांकित किया जो इस धरती की सुरक्षा सुनिश्चित करे। उन्होंने वैश्विक औसत तापमान में वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने और तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.5 डिग्री के ऊपर सीमित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाने एवं नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में एक उपयुक्त बदलाव को बढ़ावा देने के उद्देश्यों के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अर्थव्यवस्था को उबारने की प्रक्रिया को पेरिस समझौते के तहत दोनों देशों द्वारा सतत विकास के लिए 2030 के एजेंडे और राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप सभी के लिए एक अपेक्षाकृत अधिक लचीला, पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ, जलवायु के अनुकूल और समावेशी भविष्य का निर्माण करना चाहिए।

साझे मूल्यों और क्षेत्रीय एवं बहुपक्षीय हितों की साझेदारी

5. संयुक्त राष्ट्र को केन्द्र में रखकर एक नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति सम्मान के महत्व के बारे में पूरी तरह आश्वस्त, जर्मनी और भारत ने एक कारगर और संशोधित बहुपक्षवाद के महत्व को रेखांकित किया। दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन, गरीबी, वैश्विक खाद्य सुरक्षा, भ्रामक सूचना, अंतरराष्ट्रीय संघर्ष एवं संकट और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद जैसे लोकतंत्र के लिए खतरे जैसी वैश्विक चुनौतियों के आलोक में बहुपक्षीय प्रणाली में सुधार के अपने आह्वान को दोहराया। “चार देशों के समूह” के पुराने सदस्य के रूप में, दोनों सरकारें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बहुप्रतीक्षित सुधार के लिए अपने प्रयासों को तेज करने के प्रति समर्पित हैं ताकि इसे इस उद्देश्य के लिए उपयुक्त और समकालीन वास्तविकताओं के अनुरूप बनाया जा सके। दोनों सरकारों ने इसके लिए प्रासंगिक चुनावों में एक दूसरे का समर्थन करने के लिए जरूरत को रेखांकित किया। जर्मनी ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत के शीघ्र प्रवेश के लिए अपने पूर्ण समर्थन को दोहराया।

 

6. दोनों पक्षों ने आसियान की केंद्रीयता को पहचानते हुए एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्व पर बल दिया। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए जर्मन संघीय सरकार के नीतिगत दिशानिर्देशों, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग के लिए यूरोपीय संघ की रणनीति और भारत द्वारा प्रतिपादित इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव को स्वीकार किया। दोनों पक्षों ने हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर सहित सभी समुद्री क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस) 1982 के अनुसार निर्बाध वाणिज्य और आवागमन की आजादी के महत्व को रेखांकित किया। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में जर्मनी की बढ़ती संलग्नता में एक महत्वपूर्ण मील के पत्थर के रूप में, दोनों पक्षों ने जनवरी 2022 में जर्मन नौसेना के जहाज ‘बायर्न’ द्वारा मुंबई बंदरगाह पहुंचने का स्वागत किया। जर्मनी भी एक दोस्ताना यात्रा के क्रम में भारतीय नौसेना के एक जहाज का अगले साल जर्मन बंदरगाह पर स्वागत करने के लिए सहमत हुआ।

7. भारत और जर्मनी विशेष रूप से मई 2021 में पोर्टो में भारत तथा यूरोपीय संघ के नेताओं की बैठक के बाद से भारत एवं यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने का स्वागत करते हैं। दोनों देश इस सहयोग को और अधिक मजबूत करने पर सहमत हुए। दोनों देश भारत-यूरोपीय संघ कनेक्टिविटी साझेदारी के कार्यान्वयन के लिए तत्पर हैं। दोनों पक्षों ने भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद के शुभारंभ पर संतोष व्यक्त किया। यह परिषद व्यापार, विश्वसनीय प्रौद्योगिकी और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने में घनिष्ठ सहयोग को बढ़ावा देगा।

8. दोनों पक्षों ने बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (बिम्सटेक) जैसे क्षेत्रीय संगठनों के साथ-साथ जी20 जैसे बहुपक्षीय मंचों के साथ सहयोग पर जोर दिया। इस संबंध में, भारत और जर्मनी विशेष रूप से 2023 में भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान घनिष्ठ सहयोग के लिए तत्पर हैं। जर्मनी ने भारत की जी20 संबंधी प्राथमिकताओं की प्रस्तुति का स्वागत किया और साझी वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए मजबूत जी20 कार्रवाई पर मिलकर काम करने पर सहमत हुए।

9. दोनों पक्षों ने वर्तमान में जर्मनी द्वारा जी7 की अध्यक्षता के दौरान ऊर्जा संबंधी उपयुक्त बदलाव सहित विभिन्न मामलों में जी7 और भारत के बीच घनिष्ठ सहयोग को रेखांकित किया। दोनों देशों ने जलवायु के अनुरूप ऊर्जा नीतियों, नवीकरणीय ऊर्जा की तेजी से तैनाती और स्थायी ऊर्जा तक पहुंच से जुड़े अवसरों और चुनौतियों पर गौर करने के लिए संयुक्त रूप से काम करने के उद्देश्य से जर्मनी द्वारा जी7 की अध्यक्षता के तहत और अन्य सरकारों के साथ एक संवाद स्थापित करने पर सहमत हुए। इसमें विशेष रूप से ऊर्जा के क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने संबंधी अनुकूलन को भी शामिल किया जा सकता है।

10. जर्मनी ने यूक्रेन पर रूसी सेनाओं के गैर-कानूनी और अकारण आक्रमण की अपनी कड़ी निंदा को दोहराया।

जर्मनी और भारत ने यूक्रेन में जारी मानवीय संकट पर गंभीर चिंता व्यक्त की। दोनों देशों ने यूक्रेन में नागरिकों की मौत की स्पष्ट शब्दों में निंदा की। दोनों देशों ने शत्रुता को तत्काल समाप्त करने की जरूरत को दोहराया। दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि समकालीन वैश्विक व्यवस्था संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतर्राष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सम्मान एवं राज्यों की क्षेत्रीय अखंडता पर आधारित है। दोनों देशों ने यूक्रेन में संघर्ष के विनाशकारी नतीजों और इसके व्यापक क्षेत्रीय एवं वैश्विक प्रभावों पर चर्चा की। दोनों पक्ष इस मुद्दे पर घनिष्ठ रूप से जुड़े रहने पर सहमत हुए।

11. अफगानिस्तान के मामले में, दोनों पक्षों ने मानवीय स्थिति, लक्षित आतंकवादी हमलों सहित हिंसा के दोबारा उभार, मानवाधिकारों एवं मौलिक स्वतंत्रता के नियमित उल्लंघन और लड़कियों एवं महिलाओं की शिक्षा में आ रही बाधाओं के बारे में अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की। दोनों देशों ने शांतिपूर्ण, सुरक्षित और स्थिर अफगानिस्तान के प्रति अपने मजबूत समर्थन को दोहराया और अफगानिस्तान के लोगों को मानवीय सहायता प्रदान करना जारी रखने की पुष्टि की।

12. दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के प्रस्ताव 2593 (2021) के महत्व की फिर से पुष्टि की, जो अन्य बातों के साथ-साथ स्पष्ट रूप से यह मांग करता है कि अफगान क्षेत्र का उपयोग आतंकवादी कृत्यों को आश्रय प्रदान करने, प्रशिक्षण देने, योजना बनाने या वित्तपोषण के लिए नहीं किया जाना चाहिए। वे अफगानिस्तान की स्थिति पर आपस में परामर्श जारी रखने पर भी सहमत हुए।

 

 

13. दोनों नेताओं ने परोक्ष रूप से चलाए जाने वाले आतंकवाद और सीमा पार आतंकवाद सहित सभी किस्म के आतंकवाद की कड़ी निंदा की। उन्होंने सभी देशों से आतंकवादियों के सुरक्षित पनाहगाहों एवं उनके बुनियादी ढांचे को खत्म करने, आतंकवादियों के नेटवर्क एवं वित्तपोषण पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून सहित अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार रोक लगाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया। दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की 1267 प्रतिबंध समिति द्वारा प्रतिबंधित समूहों सहित सभी आतंकवादी समूहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई का आह्वान किया। दोनों पक्षों ने आतंकवादी समूहों और व्यक्तियों के खिलाफ प्रतिबंधों एवं हिदायतों, कट्टरपंथ का मुकाबला करने, और आतंकवादियों के इंटरनेट के उपयोग व आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही के बारे में सूचनाओं के निरंतर आदान-प्रदान के लिए भी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

14. दोनों नेताओं ने एफएटीएफ सहित सभी देशों द्वारा धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) विरोधी और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने पर अंतरराष्ट्रीय मानकों को बनाए रखने के महत्व पर भी जोर दिया, जो वैश्विक सहयोग के ढांचे को आगे बढ़ाएगा व मजबूत करेगा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को सुदृढ़ करेगा।

15. दोनों सरकारों ने संयुक्त व्यापक कार्य योजना से जुड़ी वार्ता के पूरा होने, उसकी बहाली और पूर्ण कार्यान्वयन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। जर्मनी और भारत ने इस संदर्भ में आईएईए की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना भी की।

16. सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने की दृष्टि से, दोनों पक्ष वर्गीकृत सूचनाओं के आदान-प्रदान से जुड़े एक समझौते पर बातचीत शुरू करने पर सहमत हुए। दोनों पक्षों ने वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का संयुक्त रूप से समाधान करने के लिए रणनीतिक साझेदार के रूप में द्विपक्षीय सुरक्षा एवं रक्षा सहयोग को और अधिक मजबूत करने की जरूरत को स्वीकार किया। दोनों पक्ष सुरक्षा और रक्षा से जुड़े मुद्दों से संबंधित द्विपक्षीय आदान-प्रदान को तेज करने पर सहमत हुए। इसके अलावा, दोनों पक्ष सक्रिय रूप से यूरोपीय संघ के तहत और अन्य भागीदारों के साथ अनुसंधान, सह-विकास और सह-उत्पादन की गतिविधियों को द्विपक्षीय आधार पर बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में, दोनों पक्ष नियमित रूप से द्विपक्षीय साइबर परामर्श जारी रखने और रक्षा प्रौद्योगिकी उप-समूह (डीटीएसजी) की बैठक को फिर से आयोजित करने पर सहमत हुए। दोनों सरकारों ने दोनों देशों के बीच रक्षा सामानों सहित उच्च-तकनीक के व्यापार को बढ़ाने के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।

हरित और सतत विकास के लिए साझेदारी

17. दोनों सरकारों ने इस धरती की सुरक्षा और किसी को भी पीछे छोड़े बिना साझा, सतत एवं समावेशी विकास के प्रति अपनी संयुक्त जिम्मेदारी को स्वीकार किया। दोनों नेताओं ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सतत विकास और जलवायु कार्रवाई के संबंध में भारत-जर्मन सहयोग वैश्विक औसत तापमान में वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से ऊपर 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने और पूर्व-औद्योगिक स्तरों से ऊपर तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के प्रयासों सहित पेरिस समझौते और एसडीजी के तहत भारत व जर्मनी की प्रतिबद्धताओं द्वारा निर्देशित है। दोनों देश इन प्रतिबद्धताओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए तत्पर हैं और इस संबंध में, हरित और सतत विकास के लिए भारत-जर्मन साझेदारी की स्थापना के इरादे की संयुक्त घोषणा का स्वागत किया। इस साझेदारी का उद्देश्य द्विपक्षीय, त्रिपक्षीय एवं बहुपक्षीय सहयोग को तेज करने और इसे पेरिस समझौते तथा एसडीजी के कार्यान्वयन पर दोनों पक्षों की मजबूत प्रतिबद्धता से जोड़ना होगा। यह देखते हुए कि एसडीजी की प्राप्ति और भारत और जर्मनी द्वारा ग्लासगो में कॉप26 के दौरान घोषित जलवायु से संबंधित कुछ लक्ष्यों की समय-सीमा 2030 में समाप्त हो रही है, दोनों देश एक-दूसरे से सीखने और अपने संबंधित उद्देश्यों की पूर्ति को सुविधाजनक बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे। जर्मनी इस साझेदारी के तहत 2030 तक कम से कम 10 बिलियन यूरो की नई और अतिरिक्त प्रतिबद्धताओं के दीर्घकालिक लक्ष्य के साथ भारत को अपने वित्तीय और तकनीकी सहयोग व अन्य सहायता को सुदृढ़ करने का इरादा रखता है। यह अन्य बातों के साथ-साथ जलवायु कार्रवाई और सतत विकास के क्षेत्र में दोनों देशों के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की पूर्ति में सहायता प्रदान करेगा, जर्मन-भारतीय अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) को और बढ़ावा देगा, निजी निवेश को प्रोत्साहित करेगा और इस प्रकार आगे के वित्त पोषण को सुगम बनाने का लक्ष्य रखेगा। भारत और जर्मनी ने मौजूदा और भविष्य की प्रतिबद्धताओं के तेजी से कार्यान्वयन के महत्व पर बल दिया।

18. दोनों पक्ष अंतर सरकारी परामर्श (आईजीसी) के ढांचे के भीतर एक द्विवार्षिक मंत्रिस्तरीय तंत्र बनाने पर सहमत हुए जो इस साझेदारी को उच्चस्तरीय राजनीतिक दिशा प्रदान करेगा। जलवायु कार्रवाई, सतत विकास, ऊर्जा के क्षेत्र में बदलाव, विकास संबंधी सहयोग और त्रिपक्षीय सहयोग के क्षेत्र में सभी मौजूदा द्विपक्षीय प्रारूपों व पहल से साझेदारी में योगदान होगा और मंत्रालय स्तरीय तंत्र की प्रगति के बारे में जानकारी मिलेगी।

19. दोनों पक्ष ऊर्जा के क्षेत्र में बदलाव, नवीकरणीय ऊर्जा, सतत शहरी विकास, हरित गतिशीलता, चक्रीय अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने संबंधी कार्रवाई, जलवायु संबंधी लचीलापन एवं अनुकूलन, कृषि-इकोलॉजिकल परिवर्तन, जैव विविधता के संरक्षण एवं सतत उपयोग, पर्यावरण संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में मानकों को चिन्हित करने की दिशा में काम करेंगे और नियमित आधार पर साझेदारी के उद्देश्यों से संबंधित प्रगति का जायजा लेंगे।

20. हरित और सतत विकास के लिए भारत-जर्मन साझेदारी के प्रदेय के रूप में, दोनों पक्ष निम्नलिखित बातों पर सहमत हुए:

i. इंडो-जर्मन एनर्जी फोरम (आईजीईएफ) द्वारा समर्थित इंडो-जर्मन ग्रीन हाइड्रोजन टास्क फोर्स के इनपुट के आधार पर एक इंडो-जर्मन ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप विकसित करना।

ii. एक न्यायसंगत ऊर्जा के क्षेत्र में बदलाव को सुगम बनाने के लिए बिजली ग्रिड, भंडारण और बाजार के उद्देश्यों एवं उससे संबंधित चुनौतियों सहित नवीन सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक इंडो-जर्मन अक्षय ऊर्जा साझेदारी स्थापित करना। यह साझेदारी सौर प्रौद्योगिकियों के लिए एक चक्रीय अर्थव्यवस्था के निर्माण में भी सहयोग करेगी। जर्मनी ने उच्च गुणवत्ता वाली परियोजना की तैयारी और धन की उपलब्धता के आधार पर 2020 से लेकर 2025 के दौरान एक बिलियन यूरो तक के रियायती ऋण सहित वित्तीय और तकनीकी सहयोग प्रदान करने का इरादा व्यक्त किया।

iii. आय, खाद्य सुरक्षा, जलवायु लचीलापन, बेहतर मिट्टी, जैव विविधता, वनों को पुनर्जीवित करने और पानी की उपलब्धता के मामले में भारत में ग्रामीण आबादी और छोटे स्तर के किसानों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से “कृषि इकोलॉजी और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन” विषय पर एक दूरगामी सहयोग स्थापित करना और वैश्विक स्तर पर भारतीय अनुभव को बढ़ावा देना। जर्मनी ने उच्च गुणवत्ता वाली परियोजना की तैयारी और धन की उपलब्धता के आधार पर 2025 तक 300 मिलियन यूरो तक के रियायती ऋण सहित वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग प्रदान करने का इरादा व्यक्त किया।

iv. लेह-हरियाणा ट्रांसमिशन लाइन जैसे हरित ऊर्जा गलियारों और कार्बन न्यूट्रल लद्दाख की परियोजना के मामले में और आगे सहयोग की संभावनाओं का पता लगाना।

v. गरीबी उन्मूलन, जैव विविधता को संरक्षित एवं बहाल करने और जलवायु परिवर्तन को रोकने एवं कम करने के एक महत्वपूर्ण उपाय के तौर पर बॉन चैलेंज के तहत वन परिदृश्य को पुनर्जीवित करने में सहयोग को मजबूत करना और गहरी राजनीतिक साझेदारी एवं संवाद तथा स्वस्थ इकोसिस्टम के क्षेत्र को बढ़ाने और उनके नुकसान, विखंडन एवं गिरावट को समाप्त करने के लिए त्वरित कार्रवाई की एक रूपरेखा के रूप में इकोसिस्टम के पुनर्जीवन से संबंधित संयुक्त राष्ट्र दशक (2021-2030) को भी स्वीकार करना।

vi. वायु प्रदूषण को कम करने के मामले में हरित प्रौद्योगिकियों के सफल एवं सतत उपयोग के लिए उपयुक्त परिस्थितियों के निर्माण में सहयोग को मजबूत करना।

vii. विकास संबंधी सहयोग के लिए व्यक्तिगत सामर्थ्य और अनुभवों के आधार पर त्रिपक्षीय सहयोग के लिए मिलकर काम करना और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) तथा जलवायु संबंधी लक्ष्यों की पूर्ति में सहयोग करने के लिए तीसरे देशों में टिकाऊ, व्यावहारिक और समावेशी परियोजनाओं की पेशकश करना।

21. इसके अलावा और हरित एवं सतत विकास के लिए भारत-जर्मन साझेदारी के संदर्भ में, दोनों पक्षों ने मौजूदा पहल की प्रगति का स्वागत किया जिनमें शामिल हैं:

i. इंडो-जर्मन एनर्जी फोरम की शुरुआत 2006 में हुई थी और इस साझेदारी के तहत प्रमुख सहयोग कार्यक्रम शुरू किए गए थे। दोनों देश इसके सामरिक आयाम एवं निजी क्षेत्र की भागीदारी को और बढ़ाने पर सहमत हुए।

ii. भारत-जर्मन पर्यावरण मंच (आईजीईएनवीएफ), जिसकी अंतिम बैठक फरवरी 2019 में दिल्ली में हुई थी, के तहत सहयोग। दोनों देशों ने अपने संघीय ढांचे को ध्यान में रखते हुए प्रांतीय और नगरपालिका प्राधिकरणों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने का प्रयास करेंगे।

iii. जैव विविधता पर संयुक्त कार्य समूह की पिछली बैठक फरवरी 2021 में हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों ने सीबीडी कॉप15 में घोषित मजबूत लक्ष्यों के साथ 2020 के बाद के वैश्विक जैव विविधता संबंधी ढांचे को अपनाने के प्रति अपने समर्थन को रेखांकित किया था और मूर्त सहयोग की स्थापना की दिशा में काम करने का इरादा व्यक्त किया था।

iv. अपशिष्ट और चक्रीय अर्थव्यवस्था से संबंधित संयुक्त कार्य समूह द्वारा विशेष रूप से दोनों देशों के बीच सहयोग एवं अनुभवों के आदान-प्रदान को और तेज करने के लिए अच्छे अवसर निर्मित किए गए हैं। दोनों देश एसडीजी लक्ष्य 14.1 में निर्धारित समुद्री पर्यावरण में अपशिष्ट, विशेष रूप से प्लास्टिक, को रोकने और विशेष रूप से सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) 8.2 (तकनीकी उन्नयन एवं नवाचार), 11.6 (नगरपालिका एवं अन्य अपशिष्ट प्रबंधन) और 12.5 (पुनर्चक्रण और कचरे में कमी) के कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करने के महत्वाकांक्षी उद्देश्यों व नीतियों के प्रभावी एवं कुशल कार्यान्वयन का समर्थन करके भारत-जर्मन पर्यावरण सहयोग को जारी रखने और उसे तेज करने पर सहमत हुए। भारत और जर्मनी प्लास्टिक प्रदूषण से संबंधित वैश्विक स्तर पर कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते की स्थापना के लिए यूएनईए में निकट सहयोग करने पर सहमत हुए।

v. ग्रीन अर्बन मोबिलिटी से संबंधित इंडो-जर्मन पार्टनरशिप का शुभारंभ 2019 में किया गया और तदनुसार मौलिक विकास सहयोग पोर्टफोलियो विकसित किया गया है। मेट्रो, लाइट मेट्रो, कम उत्सर्जन वाले ईंधन और इलेक्ट्रिक बस प्रणाली, गैर-मोटर चालित परिवहन जैसे परिवहन के स्थायी साधनों के एकीकरण का समर्थन करने के लिए त्वरित कार्रवाई और सहयोग की परिकल्पना की गई है, और 2031 तक साझेदारी के तहत संयुक्त कार्य के लिए ठोस लक्ष्यों पर काम करने को ध्यान में रखकर सभी के लिए भरोसेमंद आवागमन के लिए प्रारंभिक एकीकृत योजना की सुविधा प्रदान की गई है।

vi. देश के पहले एसडीजी शहरी सूचकांक और डैशबोर्ड (2021-22) को विकसित करने में नीति आयोग और बीएमजेड के बीच सहयोग का उद्देश्य शहर के स्तर पर सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के स्थानीयकरण को मजबूत करना व डेटा-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया के साथ-साथ राज्य और जिला स्तर पर सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के आगे के कार्यान्वयन के लिए विभिन्न योजनाओं को बढ़ावा देना है।

22. दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय स्मार्ट सिटी नेटवर्क के तहत शहरी विकास से संबंधित अपने सफल सहयोग को जारी रखने के इरादे को दोहराया। स्मार्ट सिटी के विषय में बहुपक्षीय अनुभव साझा करने और सीखने को बढ़ावा देने के लिए, दोनों पक्ष 2022 में एक पारस्परिक स्मार्ट सिटी ऑनलाइन-संगोष्ठी के आयोजन पर सहमत हुए।

23. दोनों पक्ष पेरिस समझौते और एजेंडा 2030 द्वारा निर्धारित उद्देश्यों को हासिल करने के लिए टिकाऊ एवं अनुकूल शहरों की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करते हुए, सतत शहरी विकास से संबंधित संयुक्त भारत-जर्मन कार्य समूह की बैठक को नियमित रूप से जारी रखने पर सहमत हुए।

24. दोनों पक्षों ने कृषि, खाद्य उद्योग एवं उपभोक्ता संरक्षण से संबंधित संयुक्त कार्य समूह, जिसकी अंतिम बैठक मार्च 2021 में हुई थी, की रचनात्मक भूमिका की पुष्टि की। दोनों पक्षों ने अब तक प्राप्त परिणामों के बारे में संतोष व्यक्त किया और टिकाऊ कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा, कृषिगत प्रशिक्षण एवं कौशल, कटाई के बाद के प्रबंधन व कृषि से जुड़ी लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में मौजूदा समझौता ज्ञापनों के आधार पर निरंतर सहयोग की इच्छा व्यक्त की।

25. दोनों सरकारों ने टिकाऊ कृषि उत्पादन के लिए एक बुनियादी आधार के रूप में उच्च गुणवत्ता वाले बीजों तक किसानों की पहुंच को बढ़ावा देने में योगदान देने के लिए भारतीय बीज क्षेत्र में सफल प्रमुख परियोजना के अंतिम चरण की सराहना की। दोनों देशों ने अगस्त 2021 में शुरू की गई द्वितीय द्विपक्षीय सहयोग परियोजना का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य भारत के कृषि बाजार के विकास को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए चल रहे सुधार के प्रयासों का समर्थन करना है।

26. दोनों पक्षों ने मौजूदा सहयोग समझौतों के आधार पर खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग की गतिविधियों को विकसित करने की इच्छा व्यक्त की।

27. दोनों पक्षों ने जर्मन कृषि व्यवसाय गठबंधन (जीएए) और भारतीय कृषि कौशल परिषद (एएससीआई) के बीच हस्ताक्षर किए गए “कृषि में भारत-जर्मन उत्कृष्टता केंद्र” की स्थापना से संबंधित समझौता ज्ञापन को स्वीकार किया, जिसका उद्देश्य किसानों और श्रमिकों के बीच के अंतर को पाटते हुए और उनके कौशल का उन्नयन करते हुए भारत में कृषि के क्षेत्र में व्यावहारिक कौशल विकास को बढ़ावा देना है।

28. दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि खाद्य एवं कृषि के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी और ज्ञान का हस्तांतरण अपेक्षाकृत अधिक टिकाऊ खाद्य प्रणालियों की कुंजी है और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में "बुंडेसिंस्टिट्यूट फर रिसिकोबेवर्टुंग" (बीएफआर) और एफएसएसएआई के बीच अनुसंधान परियोजनाओं के बारे में लक्षित सहयोग पर विचार किया जा सकता है।

29. अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए): दोनों पक्ष सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारतीय और जर्मन के बीच रणनीतिक प्राथमिकताओं एवं संबद्ध वैश्विक सहयोग के प्रयासों पर तालमेल करके पारस्परिक सहयोग एवं समर्थन को और अधिक मजबूत करने पर सहमत हुए।

30. इंसुरेजिलिएंस ग्लोबल पार्टनरशिप एंड कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर: दोनों पक्ष जलवायु एवं आपदा संबंधी खतरों के खिलाफ जोखिम से जुड़े वित्त एवं बीमा समाधानों के साथ-साथ आपदा संबंधी जोखिम के प्रबंधन की वैश्विक पहल के माध्यम से क्षमता निर्माण में सहयोग को मजबूत करने पर सहमत हुए। जर्मनी ने इंसुरेजिलिएंस ग्लोबल पार्टनरशिप का सदस्‍य बनने की भारत की घोषणा का स्‍वागत किया।

31. दोनों पक्षों ने निजी क्षेत्र को संगठित करने के लिए विशेष रूप से डेवलोपीपीपी और संरचित वित्त पोषण प्रणाली के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) और जलवायु संबंधी लक्ष्यों में नवाचार एवं निवेश के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी के संदर्भ में भारतीय और जर्मन निजी क्षेत्र के साथ सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।

32. दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र 2023 जल सम्मेलन की तैयारियों की सराहना की और सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) 6 एवं अन्य जल संबंधी लक्ष्यों व सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा के लक्ष्यों के प्रति अपने समर्थन को रेखांकित किया।

व्यापार, निवेश और डिजिटल रूपांतरण के लिए साझेदारी

33. जर्मनी और भारत ने नियम-आधारित, खुले, समावेशी, मुक्त और निष्पक्ष व्यापार के निरंतर अनुपालन तथा उसके महत्व को रेखांकित करते हुए बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के केंद्र के रूप में और विकासशील देशों को वैश्विक व्यापार प्रणाली के तौर पर एकीकृत करने के केंद्रीय स्तंभ के रूप में विश्व व्यापार संगठन के महत्व पर प्रकाश डाला। दोनों सरकारें विश्व व्यापार संगठन के सिद्धांतों एवं कार्यों, विशेष रूप से अपीलीय निकाय की स्वायत्तता के साथ-साथ दो स्तरीय अपीलीय निकाय को संरक्षित करने, को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से इसमें सुधार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

34. जर्मनी और भारत व्यापार एवं निवेश के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भागीदार हैं। दोनों पक्षों ने एक मुक्त व्यापार समझौते, एक निवेश संरक्षण समझौते और भौगोलिक संकेतों संबंधी एक समझौते पर यूरोपीय संघ और भारत के बीच आगामी वार्ता के प्रति अपना मजबूत समर्थन व्यक्त किया तथा द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश के विस्तार के लिए ऐसे समझौतों की व्यापक क्षमता को रेखांकित किया।

35. जर्मनी और भारत ने व्यापार एवं मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के मार्गदर्शक सिद्धांतों और बहुराष्ट्रीय उद्यमों के लिए ओईसीडी दिशानिर्देशों को एक स्थायी एवं समावेशी आर्थिक सुधार के एक अनिवार्य हिस्से के रूप में लागू करने के महत्व पर बल दिया। दोनों सरकारों का लक्ष्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक लचीला, विविधतापूर्ण, जिम्मेदार और टिकाऊ बनाना है। दोनों सरकारों ने आपूर्ति श्रृंखलाओं द्वारा अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण, श्रम तथा सामाजिक मानकों को बनाए रखते हुए आर्थिक लाभ प्रदान करना जारी रखना सुनिश्चित करने के लिए एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत को रेखांकित किया।

36. दशकों में वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी नौकरियों और सामाजिक संकटों में से एक की पृष्ठभूमि में, दोनों पक्षों ने स्थायी श्रम बाजारों का निर्माण करने और एक लचीला, समावेशी, लैंगिक समानता एवं संसाधन की दृष्टि से कुशल रिकवरी की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से मिलकर काम करने के महत्व को स्वीकार किया। इसका लक्ष्य एक स्थायी भविष्य के निर्माण में योगदान देते हुए रोजगार एवं गरिमापूर्ण कार्य को बढ़ावा देना, कामकाजी उम्र के सभी लोगों को आने वाले कल के कार्यों को करने में सक्षम बनाने वाली कौशल संबंधी नीतियों और गरीबी से लड़ सकने तथा असमानताओं को कम करने वाली उत्तरदायी सामाजिक सुरक्षा प्रणाली की शुरुआत करना है।

37. जर्मनी ने 2017 में भारत द्वारा अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के करार 138 और 182 की पुष्टि का स्वागत किया। दोनों पक्षों ने सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) 8.7 के अनुरूप बाल एवं जबरिया श्रम के खिलाफ लड़ने के महत्व को रेखांकित किया और इन क्षेत्रों में अपने सहयोग को मजबूत करने का इरादा व्यक्त किया। दोनों पक्षों ने प्लेटफॉर्म इकोनॉमी जैसे कार्य के नए स्वरूपों में गरिमापूर्ण कार्य तथा पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और उसे बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय नीतियों के संबंध में विचारों का और आगे आदान-प्रदान का स्वागत किया।

38. दोनों पक्षों ने तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन के एक प्रमुख प्रेरक के रूप में डिजिटल रूपांतरण के महत्व को स्वीकार किया। इंडो-जर्मन डिजिटल डायलॉग इंटरनेट गवर्नेंस, उभरती प्रौद्योगिकियों और डिजिटल बिजनेस मॉडल जैसे डिजिटल विषयों पर सुविधाजनक सहयोग का एक महत्वपूर्ण साधन है। साथ ही, दोनों पक्षों ने उद्योग आधारित भारत-जर्मन डिजिटल विशेषज्ञ समूह जैसी अन्य मौजूदा पहल के साथ तालमेल से लाभ उठाने के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।

39. कराधान के क्षेत्र में, दोनों पक्षों ने 8 अक्टूबर 2021 को ओईसीडी समावेशी फ्रेमवर्क ऑन बेस इरोजन एंड प्रॉफिट शिफ्टिंग (बीईपीएस) में दो-स्तंभ-समाधान के संबंध में हुए समझौते का स्वागत किया। दोनों सरकारों ने अपनी साझा राय व्यक्त की कि यह समाधान सरल होना चाहिए, प्रक्रिया समावेशी होगी और सभी व्यवसायों के लिए एक निष्पक्ष व्यवस्था की स्थापना करके अंतरराष्ट्रीय कर प्रणालियों के स्थिरीकरण में योगदान देगी जोकि जमीनी स्तर पर नुकसान पहुंचाने वाली होड़ पर रोक लगाएगी, आक्रामक कर योजना को समाप्त करेगी और इस बात की गारंटी देगी कि बहुराष्ट्रीय उद्यम अंततः करों के अपने उचित हिस्से का भुगतान करेंगे। जर्मनी और भारत ने दोनों स्तंभों के त्वरित और प्रभावी कार्यान्वयन का समर्थन करने की इच्छा व्यक्त की। भारत और जर्मनी ने दोहरे कर परिहार समझौते में संशोधन करने वाले प्रोटोकॉल को शीघ्रता से पूरा करने के प्रति अपनी वचनबद्धता व्यक्त की।

40. द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश के क्षेत्र में, दोनों पक्षों ने इंडो-जर्मन फास्ट ट्रैक मैकेनिज्म, जो वर्तमान और भविष्य के निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ साबित हुआ है, के सफल प्रारूप को जारी रखने के लिए अपनी तत्परता को रेखांकित किया। फास्ट ट्रैक मैकेनिज्म की अर्ध-वार्षिक बैठकों के अलावा, दोनों पक्ष व्यापार करने में आसानी के संबंध में दोनों पक्षों की कंपनियों और निवेशकों के क्षेत्र विशेष से संबंधित सामान्य समस्याओं पर चर्चा करने के लिए नियमित रूप से एक-दूसरे के साथ जुड़ेंगे।

41. दोनों पक्षों ने कॉरपोरेट प्रबंधकों (“प्रबंधक कार्यक्रम") के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम को लागू करके द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देना जारी रखने के प्रति अपनी तत्परता की पुष्टि की। इस संदर्भ में, दोनों पक्षों ने एक संयुक्त आशय की घोषणा पर हस्ताक्षर करने का स्वागत किया जिसके द्वारा उन्होंने उद्योग के अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम को लागू करने में लगातार मिलकर काम करने की व्यवस्था की। दोनों पक्षों ने संतोष के साथ इस तथ्य को रेखांकित किया कि इस सहयोग ने द्विपक्षीय वाणिज्य एवं व्यापार के विकास, व्यावसायिक अधिकारियों के बीच व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक संपर्कों को मजबूत करने और दोनों देशों के बीच आपसी समझ को गहरा करने की दिशा में ठोस परिणाम प्राप्त करने में योगदान दिया है।

42. भारत ने रेलवे के क्षेत्र में जर्मन कंपनियों की तकनीकी विशेषज्ञता को स्वीकार किया। रेलवे के क्षेत्र में भविष्य के सहयोग पर संघीय आर्थिक मामलों एवं ऊर्जा मंत्रालय और भारतीय रेल मंत्रालय के बीच 2019 में हस्ताक्षरित संयुक्त आशय की घोषणा से आगे बढ़ते हुए, दोनों पक्षों ने 2030 तक नेट जीरो में बदलने की भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षा के समर्थन में उच्च गति एवं ऊर्जा के मामले में दक्ष प्रौद्योगिकियों में सहयोग को निरंतर जारी रखने के प्रति अपनी रुचि को रेखांकित किया।

43. जर्मनी और भारत ने मानकीकरण, मान्यता, अनुरूपता मूल्यांकन और बाजार निगरानी के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के अपने निरंतर प्रयासों के लिए ग्लोबल प्रोजेक्ट क्वालिटी इंफ्रास्ट्रक्चर (जीपीक्यूआई) के तहत भारत-जर्मन कार्य समूह की सराहना की। दोनों पक्षों ने इस कार्य समूह की 8वीं वार्षिक बैठक के दौरान हस्ताक्षरित 2022 के लिए कार्य योजना को रेखांकित किया जो डिजिटलीकरण, स्मार्ट एवं टिकाऊ खेती/कृषि और चक्रीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाओं की पहचान करता है।

44. दोनों सरकारों ने स्टार्ट-अप के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा व्यक्त की और इस संदर्भ में स्टार्ट-अप इंडिया और जर्मन एक्सेलेरेटर (जीए) के बीच चल रहे सहयोग की सराहना की। दोनों पक्षों ने 2023 से इंडिया मार्केट एक्सेस प्रोग्राम की पेशकश करके अपने समर्थन को और बढ़ाने के जीए के इरादे का स्वागत किया और दोनों स्टार्ट-अप समुदायों के लिए बढ़ाए हुए समर्थन के लिए जीए के साथ साझेदारी में जुड़ाव का एक साझा मॉडल विकसित करने के स्टार्ट-अप इंडिया के प्रस्ताव का स्वागत किया।

राजनीतिक एवं शैक्षणिक आदान-प्रदान, वैज्ञानिक सहयोग, कामगारों और लोगों की आवाजाही के लिए साझेदारी

45. दोनों सरकारों ने छात्रों, शिक्षाविदों और पेशेवर कामगारों सहित दोनों देशों के लोगों के बीच सक्रिय पारस्परिक आदान-प्रदान का स्वागत किया। दोनों पक्षों ने अपनी उच्च शिक्षा प्रणालियों के अंतरराष्ट्रीयकरण का विस्तार करने, दोनों देशों के नवाचार एवं अनुसंधान संबंधी परिदृश्य को आपस में और आगे जोड़ने तथा व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण की दोहरी संरचनाओं को मजबूत करने के एक-दूसरे के प्रयासों का समर्थन करने पर सहमति व्यक्त की।

46. जर्मनी और भारत ने शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बढ़ते आदान-प्रदान पर संतोष व्यक्त किया और इस दिशा में आगे सहयोग करने का इरादा व्यक्त किया। दोनों सरकारों ने जर्मन विश्वविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रम में चयनित भारतीय छात्रों को सक्षम बनाने के लिए डिजिटल प्रारंभिक पाठ्यक्रम (स्टूडिएनकोलेग) स्थापित करने के कदम की सराहना की। भारत सरकार स्टडी इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों के तहत छात्रों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करेगी और भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) में जर्मन छात्रों को प्रवेश की सुविधा प्रदान करेगी। दोनों सरकारों ने संयुक्त डिग्री एवं दोहरी डिग्री के रूप में भारतीय और जर्मन विश्वविद्यालयों के बीच आपसी सहयोग का पता लगाने के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर किए जा रहे प्रयासों का भी स्वागत किया।

47. इस तथ्य को स्वीकार करते हुए कि भारत-जर्मन रणनीतिक अनुसंधान और विकास साझेदारी को उत्प्रेरित करने की दिशा में अकादमिक-उद्योग सहयोग महत्वपूर्ण है, दोनों पक्षों ने भारत-जर्मन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र (आईजीएसटीसी) द्वारा जर्मन औद्योगिक इकोसिस्टम में युवा भारतीय शोधकर्ताओं को औद्योगिक अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से औद्योगिक फेलोशिप का समर्थन करने, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जारी परियोजनाओं में महिला शोधकर्ताओं के लेटरल एंट्री की सुविधा के लिए विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान में महिला भागीदारी (वाइजर) कार्यक्रम में महिलाओं की संलग्नता बढ़ाने और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत-जर्मन सहयोग के लिए एक समावेशी इकोसिस्टम का निर्माण करते हुए प्रारंभिक करियर फेलोशिप को जोड़ने की हालिया पहल का स्वागत किया।

48. दोनों देशों ने द्विपक्षीय विज्ञान सहयोग की आधारशिलाओं में से एक के रूप में डार्मस्टाट में एंटीप्रोटॉन एवं आयन अनुसंधान के लिए अंतरराष्ट्रीय सुविधा (फेयर) की पूर्ति के प्रति विशेष रूप से अपना समर्थन व्यक्त किया।

49. दोनों सरकारों ने व्यापक प्रवासन और आवाजाही संबंधी साझेदारी पर जर्मनी और भारत के बीच द्विपक्षीय समझौते पर वार्ता को अंतिम रूप देने का स्वागत किया, जैसा कि आज के अंग्रेजी भाषा में मसौदा समझौते के आरंभ द्वारा प्रलेखित है। दोनों पक्षों ने तेजी से इस समझौते पर हस्ताक्षर करने और इसे लागू करने के लिए कार्रवाई करने पर सहमत हुए। उन्होंने छात्रों, पेशेवरों और शोधकर्ताओं की दो-तरफा आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के साथ-साथ अवैध प्रवास की चुनौतियों का समाधान करने में इस समझौते के महत्व पर प्रकाश डाला।

50. दोनों सरकारों ने कुशल स्वास्थ्य एवं देखभाल से जुड़े कर्मियों के प्रवास के संबंध में जर्मन संघीय रोजगार एजेंसी (बीए) और केरल राज्य द्वारा प्लेसमेंट समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। एक समग्र "ट्रिपल-विन अप्रोच" को लागू करके, इस समझौते का उद्देश्य मूल देश और मेजबान देश के साथ-साथ प्रवासियों को भी व्यक्तिगत रूप से लाभ पहुंचाना है। जर्मनी और भारत के श्रम बाजारों के साथ-साथ स्वयं प्रवासियों के हितों के बारे में उचित विचार करते हुए, दोनों देशों ने केरल राज्य के साथ प्लेसमेंट समझौते से परे जाकर भारत के अन्य राज्यों के साथ विभिन्न व्यावसायिक समूहों के बीच अपने सहयोग के विस्तार के लक्ष्य का स्वागत किया।

51. दोनों सरकारों ने काम पर सुरक्षा और स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में जर्मन सामाजिक दुर्घटना बीमा (डीजीयूवी) और भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) द्वारा एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का भी स्वागत किया, जो काम से संबंधित दुर्घटनाओं एवं बीमारियों में कमी लाना और पेशेगत सुरक्षा तथा स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए जर्मन सामाजिक दुर्घटना बीमा (डीजीयूवी) और भारत के कारखाना सलाह सेवा और श्रम संस्थान महानिदेशालय (डीजीएफएएसएलआई) द्वारा समझौता ज्ञापन को संभव बनाएगा।

 

52. दोनों सरकारों ने जर्मनी और भारत के बीच व्यापक सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं शैक्षिक सहयोग तथा गोएथे-इंस्टीट्यूट, जर्मन शैक्षणिक विनिमय सेवा (डीएएडी), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और इस संबंध में अन्य संबद्ध संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका की भी सराहना की। दोनों देशों ने शैक्षिक और संवाद प्रारूपों के माध्यम से ऐसे संपर्कों को सुविधाजनक बनाने में जर्मन राजनीतिक प्रतिष्ठानों की भूमिका को स्वीकार किया।

वैश्विक स्वास्थ्य के लिए साझेदारी

53. इस तथ्य को स्वीकार करते हुए कि कोविड-19 महामारी खुले समाज और बहुपक्षीय सहयोग के लचीलेपन को परखने के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती पेश कर रही है और इसके लिए बहुपक्षीय प्रतिक्रिया की जरूरत है, दोनों सरकारें एक-स्वास्थ्य-दृष्टिकोण अपनाते हुए चिकित्सा आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने, स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति के लिए वैश्विक तैयारियों को मजबूत करने और भविष्य के जूनोटिक खतरों को कम करने के लिए आपस में सहयोग करने पर सहमत हुईं। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्य और भविष्य की महामारियों के खिलाफ प्रतिक्रिया देने की क्षमता के मामले में निर्देश देने वाले एवं समन्वय करने वाले प्राधिकरण के रूप में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) में सुधार एवं उसकी मजबूती के लिए अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। दोनों देशों ने आर्थिक रूप उबरने की प्रक्रिया का समर्थन करने के लिए व्यापार एवं पर्यटन के प्रयोजन से लोगों की मुक्त आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के महत्व को स्वीकार किया और कोविड-19 टीकों व टीकाकरण प्रमाणपत्रों को पारस्परिक मान्यता प्रदान करने के मामले में आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।

54. दोनों पक्षों ने अत्यधिक रोगजनक जीवों के परीक्षण के लिए बांदा, उत्तर प्रदेश में जैव सुरक्षा स्तर IV प्रयोगशाला (बीएसएल-4) की स्थापना के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए भारत के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) और जर्मनी के रॉबर्ट-कोच-संस्थान (आरकेआई) के बीच सहयोग का स्वागत किया।

55. दोनों सरकारों ने केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत गणराज्य की सरकार और जर्मनी के संघीय गणराज्य (बीएफएआरएम) के ड्रग्स एवं चिकित्सा उपकरणों के लिए संघीय संस्थान और संघीय गणराज्य जर्मनी (पीईआई) के पॉल-एर्लिच-इंस्टीट्यूट के बीच एक संयुक्त आशय की घोषणा पर हस्ताक्षर के जरिए चिकित्सीय उत्पाद विनियमन के क्षेत्र में आपसी सहयोग को मजबूत करने का इरादा व्यक्त किया।

56. दोनों नेताओं ने छठे आईजीसी में हुए विचार-विमर्श पर संतोष व्यक्त किया और भारत-जर्मन रणनीतिक साझेदारी को और विस्तार देने तथा मजबूत करने के लिए अपनी पूर्ण प्रतिबद्धता की पुष्टि की। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने चांसलर स्कोल्ज को उनके गर्मजोशी भरे आतिथ्य और छठे आईजीसी के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी के लिए धन्यवाद दिया। भारत अगले आईजीसी की मेजबानी के लिए उत्सुक है। 

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Text of PM’s address at the News18 Rising Bharat Summit
February 27, 2026
Developed nations are eager to sign trade deals with India because a confident India is rising beyond doubt and despair: PM
In the last 11 years, a new energy has flowed into the nation's consciousness, India is determined to regain its rightful strength: PM
India's Digital Public Infrastructure has today become a subject of global discussion: PM
Today, every move India makes is closely watched and analysed across the world, the AI Summit is a clear example of this: PM
Nation-building never happens through short-term thinking; It is shaped by a long-term vision, patience and timely decisions: PM

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।