मालदीव गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने अपने राष्ट्रपति उद्घाटन समारोह में हिस्सा लेने के लिए मालदीव आने के लिए भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का स्वागत और धन्यवाद किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस उद्घाटन समारोह में आमंत्रित करने के विशेष भाव के लिए राष्ट्रपति सोलिह को शुक्रिया अदा किया। उन्होंने शांति, समृद्धि और स्थिरता के लिए आवश्यक लोकतंत्र की मजबूती के लिए मालदीव गणराज्य के लोगों को भारत के लोगों की ओर से बधाई और प्रशंसा ज्ञापित की।

दोनों नेताओं ने भारत और मालदीव के रिश्तों के बीच लचीलेपन को दर्ज करते हुए मालदीव के राष्ट्रपति के तौर पर सोलिह के चुने जाने के साथ ही सहयोग और मित्रता के इन नजदीकी संबंधों के नवीकरण में भरोसा जताया।

अपनी बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने इस क्षेत्र की स्थिरता के लिए एक-दूसरे की चिंताओं और आकांक्षाओं को ध्यान में रखने और हिंद महासागर में सुरक्षा और शांति बनाए रखने के महत्व को लेकर सहमति जताई।

दोनों नेताओं ने इस क्षेत्र के अंदर और क्षेत्र से बाहर भी आतंकवाद से लड़ने में बढ़े हुए सहयोग के लिए अपना समर्थन और अटल प्रतिबद्धता जाहिर की।

राष्ट्रपति सोलिह अपने जिस देश का कार्यभार संभालने जा रहे हैं उसकी बुरी आर्थिक स्थिति से भी प्रधानमंत्री मोदी को अवगत करवाया। दोनों नेताओं ने उन तरीकों पर चर्चा की जिनमें भारत अपनी विकास भागीदारी जारी रख सके, विशेष तौर पर मालदीव के लोगों के लिए ली गई प्रतिज्ञाओं को पूरा करने में नई सरकार की मदद करने के सिलसिले में। राष्ट्रपति सोलिह ने दूरस्थ द्वीपों में जल व सीवरेज व्यवस्थाओं को स्थापित करने और आवास एवं बुनियादी ढांचा विकास की बढ़ी हुई जरूरत को विशेष तौर पर उभारकर बताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने टिकाऊ सामाजिक और आर्थिक विकास को प्राप्त करने के लिए मालदीव को सहयोग करने में भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को लेकर राष्ट्रपति सोलिह को आश्वस्त किया। उन्होंने हर संभव तरीके से मदद का हाथ आगे बढ़ाने में भारत की तत्परता के बारे में बताया और सुझाव दिया कि मालदीव की जरूरतों के मुताबिक ब्यौरों पर काम करने के लिए दोनों पक्षों को जल्द से जल्द मिलना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के पारस्परिक लाभ के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में मालदीव में निवेश करने के लिए भारतीय कंपनियों के अवसरों को दिए जा रहे विस्तार का स्वागत किया। दोनों ही देशों के नागरिक इन दोनों मुल्कों में बड़े पैमाने पर यात्रा करते हैं इस बात की पहचान करते हुए दोनों नेताओं ने आसान वीज़ा प्रक्रियाओं की व्यवस्था करने की जरूरत पर सहमति जताई।

प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति सोलिह को आमंत्रित किया कि वे जल्द से जल्द अपनी सुविधा मुताबिक भारत की राजकीय यात्रा करें। राष्ट्रपति सोलिह ने खुशी-खुशी उनका ये न्यौता स्वीकार किया।

मालदीव के विदेश मामलों के मंत्री आगे की वार्ताओं को आयोजित करने और राष्ट्रपति सोलिह की आगामी भारत यात्रा की तैयारी करने के लिए 26 नवंबर को भारत की आधिकारिक यात्रा करेंगे।

राष्ट्रपति सोलिह ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री निकट भविष्य में मालदीव की आधिकारिक यात्रा करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने साभार उनके आमंत्रण को स्वीकार किया।

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कैबिनेट ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को मंजूरी दी
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।