‘भारत-यूके विजन 2035’

Published By : Admin | July 24, 2025 | 19:12 IST

भारत और ब्रिटेन के प्रधानमंत्रियों ने 24 जुलाई, 2025 को लंदन में द्विपक्षीय बैठक के दौरान नए "भारत-ब्रिटेन विजन 2035" को साझा स्वीकृति प्रदान कर दी है, जो पुनर्जीवित साझेदारी की पूर्ण क्षमता को प्राप्त करने के लिए उनकी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। यह महत्वाकांक्षी एवं भविष्य-केंद्रित समझौता, तेजी से बदलते वैश्विक दौर में आपसी विकास, समृद्धि और एक समृद्ध, सुरक्षित व सतत विश्व को आकार देने के लिए दोनों देशों के साथ मिलकर काम करने के संकल्प को रेखांकित करता है।

विस्तारित महत्वाकांक्षा: भारत और ब्रिटेन ने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने के बाद से सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण साझेदारियों तथा विकास को गति दी है। नया दृष्टिकोण इसी सहभागिता को आगे बढ़ाता है और द्विपक्षीय सहयोग को विस्तार देने तथा विविधतापूर्ण बनाने के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करता है।

रणनीतिक दृष्टिकोण: भारत-ब्रिटेन के बीच प्रमुख साझेदारियां वर्ष 2035 तक दोनों देशों के संबंधों को पुनर्परिभाषित करेंगी और दोनों पक्षों के लिए परिवर्तनकारी अवसर तथा विशेष लाभ प्रदान करेंगी। भारत-ब्रिटेन विजन 2035 स्पष्ट रणनीतिक लक्ष्य लेकर चलेगा और यह मील के पत्थर स्थापित करता है, जिससे भविष्य में निरंतर सहयोग व नवाचार के लिए मार्ग प्रशस्त होता है।

व्यापक परिणाम: भारत-ब्रिटेन विजन 2035 के स्तंभों को एक-दूसरे को सुदृढ़ करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे एक ऐसी संयुक्त साझेदारी का निर्माण होगा जो परिणामों की एक विस्तृत और गहन श्रृंखला में अपनी हिस्सेदारी के योग से भी अधिक बड़ी होगी, इसमें शामिल हैं:

• ब्रिटेन और भारत में विकास तथा नौकरियां एक महत्वाकांक्षी व्यापार समझौते पर आधारित हैं, जो दोनों देशों के लिए बाजार व अवसरों को खोलेगा।

• वैश्विक प्रतिभा की अगली पीढ़ी को पोषित करने के लिए शिक्षा और कौशल साझेदारी, ब्रिटेन तथा भारतीय विश्वविद्यालयों के बीच अंतरराष्ट्रीय शिक्षा सहयोग को आगे ले जाना, जिसमें एक-दूसरे के देशों में अग्रणी विश्वविद्यालयों के परिसरों की स्थापना भी शामिल है।

• प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल पर आधारित अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी एवं अनुसंधान का विकास करना, जो भविष्य के दूरसंचार, एआई व महत्वपूर्ण खनिजों पर केंद्रित हो और अर्धचालक, क्वांटम, जैव-प्रौद्योगिकी तथा उन्नत सामग्रियों पर भविष्य के सहयोग के लिए आधार तैयार करे।

• एक परिवर्तनकारी जलवायु साझेदारी, स्वच्छ ऊर्जा में तेजी लाने, बड़े पैमाने पर जलवायु वित्त जुटाने और लचीलेपन को बढ़ने पर केंद्रित है।

• रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग बढ़ाना, जिसमें हिंद-प्रशांत और उसके बाहर शांति, सुरक्षा व समृद्धि के लिए साझा प्रतिबद्धता शामिल है।

भारत-ब्रिटेन विजन 2035 निरंतर उच्च-स्तरीय राजनीतिक सहभागिता पर आधारित होगा। दोनों देश रणनीतिक दिशा देने और निगरानी व्यवस्था प्रदान करने के लिए दोनों प्रधानमंत्रियों की नियमित बैठकों के प्रति अपनी वचनबद्धता की पुष्टि करते हैं। भारत-ब्रिटेन विजन 2035 के कार्यान्वयन की समीक्षा भारत के विदेश मंत्री और ब्रिटेन के विदेश मंत्री द्वारा वार्षिक रूप से की जाएगी। विषय केंद्रित मंत्रिस्तरीय तंत्र प्रौद्योगिकी, व्यापार, निवेश और वित्तीय क्षेत्र में सहयोग सहित विभिन्न क्षेत्रों के मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। इस तरह के सहयोग यह सुनिश्चित करेंगे कि साझेदारी गतिशील, उत्तरदायी और साझा रणनीतिक हितों के अनुरूप बनी रहे।

भारत और ब्रिटेन नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था एवं सार्थक सुधार के माध्यम से बहुपक्षवाद को मजबूत करने के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं। दोनों देश सुरक्षा परिषद सहित संयुक्त राष्ट्र व राष्ट्रमंडल, विश्व व्यापार संगठन, विश्व स्वास्थ्य संगठन, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष तथा विश्व बैंक जैसी बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ये संस्थाएं समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करें और उभरती चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हों।

लोगों के बीच आपसी संपर्क ब्रिटेन-भारत संबंधों के हर पहलू का आधार है। दोनों देश अपने नागरिकों और प्रवासी समुदायों की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने के लिए शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा वाणिज्य दूतावास संबंधी मामलों में सहयोग बढ़ाएंगे।

भारत और ब्रिटेन विजन 2035 के विभिन्न स्तंभों के अंतर्गत समयबद्ध कार्रवाई के साथ अपने द्विपक्षीय सहयोग को गहन व विविधतापूर्ण बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दोनों देशों को व्यापार, अनुसंधान, नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और ज्ञान पर आधारित भविष्य के लिए एक तीव्र साझेदारी के लिए तैयारी कर रहे हैं।

विकास

पिछले एक दशक में भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) पर हस्ताक्षर और दोहरे योगदान समझौते पर बातचीत का समझौता द्विपक्षीय संबंधों में एक मील का पत्थर है। यह व्यापार समझौता दोनों देशों में आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा, जिससे रोजगार और समृद्धि की बढ़ोतरी होगी। दोनों पक्ष द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) को शीघ्र संपन्न करने की दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुक्त व्यापार समझौता, विकास के लिए संयुक्त महत्वाकांक्षी साझेदारी की शुरुआत मात्र है। ब्रिटेन व भारत दोनों देशों के लिए सतत दीर्घकालिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने हेतु की जा रही पहल को आगे ले जाने पर सहमत हुए हैं। दोनों पक्ष नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य एवं जीवन विज्ञान, महत्वपूर्ण व उभरती प्रौद्योगिकियों, पेशेवर और व्यावसायिक सेवाओं, वित्तीय सुविधाओं, रचनात्मक उद्योगों तथा रक्षा जैसे प्राथमिकता वाले विकास क्षेत्रों में नवाचार, अनुसंधान और नियामक सहयोग में एक-दूसरे की सहायता करेंगे। दोनों पक्ष निम्नलिखित के लिए मिलकर कार्य करेंगे:

1. भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के बाद दोनों देशों के बीच वस्तुओं व सेवाओं के क्षेत्र में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाना जारी रखना और सभी दिशाओं में अधिक महत्वाकांक्षी प्रवाह का लक्ष्य रखना।

2. एक नई संयुक्त आर्थिक और व्यापार समिति (जेईटीसीओ) के माध्यम से व्यापार व निवेश पर ब्रिटेन-भारत संबंधों को आगे बढ़ाया जाएगा, जो भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक व्यापार समझौते (सीईटीए) के कार्यान्वयन को भी सुनिश्चित करेगा। आर्थिक एवं वित्तीय संवाद (ईएफडी) और सुदृढ़ वित्तीय बाजार संवाद (एफएमडी) व्यापक आर्थिक नीति, वित्तीय विनियमन तथा निवेश पर सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रमुख मंच के रूप में कार्य करते रहेंगे। ये सहयोग भारत और ब्रिटेन के बीच एक अधिक लचीली, समावेशी तथा विकासोन्मुखी आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देने में सहायक होंगे।

3. व्यापारिक व्यक्तियों को नियमित आधार पर मिलने के लिए मंच और अवसर प्रदान करके ब्रिटेन तथा भारतीय व्यापार समुदाय के बीच मजबूत साझेदारी का निर्माण करना।

4. भारत एवं ब्रिटेन के बीच पूंजी बाजार संपर्क बढ़ाना और बीमा, पेंशन तथा परिसंपत्ति प्रबंधन क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देना।

5. वित्तीय सेवाओं, हरित वित्त और परिसंपत्ति प्रबंधन तथा निवेश में नवाचार एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे सहयोग के नए क्षेत्रों को शामिल करके भारत-ब्रिटेन वित्तीय साझेदारी (आईयूकेएफपी) के निरंतर कार्य को आगे बढ़ाना। इसके अलावा, चयनित क्षेत्रों में द्विपक्षीय व्यापार प्रवाह को बढ़ाने और भारत में बुनियादी ढांचे में निवेश को आगे ले जाने के लिए ब्रिटेन-भारत अवसंरचना वित्तपोषण ब्रिज (यूकेआईआईएफबी) का निर्माण किया जाएगा।

6. पारस्परिक रूप से पहचाने गए क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन पर नियमित संवाद तंत्र के माध्यम से प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षित आर्थिक विकास को बढ़ावा देना।

7. स्थापित की गई ब्रिटेन-भारत विधिक व्यवसाय समिति के माध्यम से घनिष्ठ द्विपक्षीय सहयोग हेतु प्रतिबद्धता की पुष्टि करके भारतीय और ब्रिटेन विधिक व्यवसायों के बीच संबंधों को गहरा करना।

8. ब्रिटेन और भारत के बीच संपर्क में सुधार, दोनों देशों के बीच हवाई यात्रा एवं मार्गों का विस्तार, ब्रिटेन-भारत हवाई सेवा समझौते को नवीनीकृत करने की दिशा में काम करना तथा परिवहन बुनियादी ढांचे पर सहयोग बढ़ाना।

9. अंतर्राष्ट्रीय अवैध वित्त के प्रवाह को रोकने और अंतर्राष्ट्रीय कर सहयोग तथा कर पारदर्शिता मानकों को व्यवस्थित करने के लिए बहुपक्षीय मंचों एवं सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों में कार्य करने की स्थिति का उपयोग करके एक लचीली वैश्विक आर्थिक व वित्तीय प्रणाली की रक्षा करना और उसे आगे ले जाना। दोनों पक्ष विश्व व्यापार संगठन को केंद्र में रखते हुए नियम-आधारित, भेदभाव रहित, निष्पक्ष, खुले, समावेशी, समतामूलक और पारदर्शी बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को बेहतर करने की पुष्टि करते हैं। दोनों पक्ष विकासशील सदस्यों व अल्प विकसित देशों (एलडीसी) के लिए विशेष और विभेदक व्यवहार संबंधी विश्व व्यापार संगठन के प्रावधानों को विश्व व्यापार संगठन तथा उसके समझौतों का एक अभिन्न अंग मानते हैं।

10. ब्रिटेन के विकास वित्त संस्थान, ब्रिटिश अंतर्राष्ट्रीय निवेश (बीआईआई) और ब्रिटेन-भारत विकास पूंजी निवेश साझेदारी के माध्यम से निवेश के माध्यम से समावेशी विकास को उत्प्रेरित करना, जिससे हरित विकास जैसे पारस्परिक हित के बाजार व क्षेत्र निर्मित किए जा सकें और ब्रिटेन-भारत निवेश गलियारे को बढ़ावा दिया जा सके। दोनों सरकारों ने द्विपक्षीय निवेश साझेदारी की सामर्थ्य को स्वीकार किया है और हरित उद्यमों, जलवायु शमन, तकनीकी स्टार्ट-अप तथा जलवायु अनुकूलन में नए निवेश को जुटाने के लिए काम करेंगे।

11. ब्रिटेन और भारत त्रिपक्षीय विकास सहयोग पर मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें टिकाऊ, जलवायु स्मार्ट नवाचार व डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना तथा डिजिटल गवर्नेंस जैसी सफलता की गाथाएं शामिल हैं।

12. सहयोगात्मक अनुसंधान, उच्च स्तरीय द्विपक्षीय सहभागिता, क्षमता निर्माण, अग्रणी संस्थानों के बीच सहयोग व भारत-ब्रिटेन ‘क्रिएटिव इकोनॉमी वीक’ श्रृंखला जैसे समावेशी मंचों के माध्यम से रचनात्मक एवं सांस्कृतिक उद्योगों में पारस्परिक विकास को बढ़ावा देना। नवाचार, उद्यमशीलता और सांस्कृतिक वस्तुओं एवं सेवाओं हेतु निवेश में वृद्धि के माध्यम से आर्थिक विकास तथा अवसरों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संस्कृति सहयोग समझौते के कार्यक्रम को लागू करना।

प्रौद्योगिकी और नवाचार

यह रणनीतिक साझेदारी नवाचार-आधारित विकास को गति देगी और भविष्य की तकनीकों को आकार देने में दोनों देशों की भूमिका को सशक्त करेगी। ब्रिटेन और भारत एक सुरक्षित, टिकाऊ तथा समृद्ध भविष्य तैयार करने के लिए प्रौद्योगिकी, विज्ञान, अनुसंधान एवं नवाचार की शक्ति का उपयोग करेंगे। दोनों पक्ष ब्रिटेन-भारत प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल, विज्ञान एवं नवाचार परिषद और स्वास्थ्य तथा जीवन विज्ञान साझेदारी के आधार पर कार्य करेंगे। दोनों देश महत्वपूर्ण व उभरती प्रौद्योगिकियों, स्वास्थ्य एवं स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करेंगे, जिससे राष्ट्रीय लचीलापन बढ़ेगा, व्यापार तथा निवेश में वृद्धि होगी। इन प्रयासों से उच्च मूल्य व गुणवत्ता वाली नौकरियां पैदा होंगी। दोनों पक्ष इस सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए निम्न कार्य करेंगे:

1. ब्रिटेन-भारत अनुसंधान एवं नवाचार गलियारे का उपयोग करके अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना। दोनों देशों के इकोसिस्टम को एकीकृत करके और लोगों व कार्यक्रमों जैसे कि कैटापल्ट, नवाचार केंद्र, स्टार्ट-अप, इनक्यूबेटर, अनुसंधान एवं नवाचार सुपरग्रुप तथा त्वरक कार्यक्रमों के बीच साझेदारी बढ़ाना। इसके अलावा अनुसंधान और नवाचार उत्पादकता को गति देने के प्रयासों को एकजुट करना।

2. वैश्विक एआई क्रांति के लाभों का लाभ उठाया जाएगा और ब्रिटेन-भारत संयुक्त एआई केंद्र के माध्यम से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, जो विश्वसनीय वास्तविक दुनिया के एआई नवाचारों तथा व्यापक रूप से अपनाने को बढ़ावा देगा। ऐसे ओपन सोर्स समाधान बनाने के लिए सहयोग करें, जिनका लाभ ब्रिटेन और भारत के व्यवसाय प्रभावशाली एआई समाधान बनाने तथा उनका विस्तार करने हेतु उठा सकें।

3. संयुक्त अनुसंधान, विकास एवं नवाचार के माध्यम से अगली पीढ़ी के सुरक्षित डिजाइन वाले दूरसंचार को आगे बढ़ाना, उन्नत कनेक्टिविटी और साइबर लचीलेपन पर रणनीतिक सहयोग करना। दोनों देशों में डिजिटल समावेशन को विस्तार देने और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए एक भारत-ब्रिटेन कनेक्टिविटी इनोवेशन सेंटर की स्थापना करें। 6जी के लिए आईटीयू और 3जीपीपी जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर मिलकर काम करें।

4. चौथी औद्योगिक क्रांति को गति देने के लिए लचीली व टिकाऊ महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाएं सुनिश्चित करें। वित्तपोषण मानकों और नवाचार में बदलाव लाने के लिए महत्वपूर्ण खनिजों पर एक ब्रिटेन-भारत संयुक्त उद्योग गिल्ड की स्थापना करें। दोनों पक्ष मिलकर प्रसंस्करण, अनुसंधान एवं विकास, पुनर्चक्रण, आपूर्ति श्रृंखलाओं हेतु जोखिम प्रबंधन व बाजार विकास को प्राथमिकता देंगे और वृत्तीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को बढ़ावा देंगे तथा आगे की गतिविधियों का पता लगाने की क्षमता को आगे बढ़ाएंगे।

5. जैव-विनिर्माण, जैव-आधारित सामग्रियों और उन्नत जैव-विज्ञान की क्षमता को इस्तेमाल करने तथा स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा व टिकाऊ कृषि में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ब्रिटेन-भारत जैव-प्रौद्योगिकी साझेदारी का उपयोग करना। वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटना तथा बायोफाउंड्री, बायोमैन्युफैक्चरिंग, बायोप्रिंटिंग, फेमटेक और कोशिका एवं जीन थेरेपी सहित अत्याधुनिक नवाचार के अनुप्रयोग द्वारा स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करना।

6. अर्धचालक, क्वांटम, उन्नत सामग्री और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में टीएसआई के माध्यम से नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देना।

7. अंतरिक्ष अनुसंधान एवं नवाचार तथा वाणिज्यिक अवसरों में सहयोग की संभावना तलाशने के लिए अपने-अपने अंतरिक्ष समुदायों को एक साथ लाना।

8. भविष्य की महामारियों को रोकने और लचीली चिकित्सा आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा के लिए वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में ब्रिटेन-भारत नेतृत्व को मजबूत करना। स्वास्थ्य एवं जीवन विज्ञान संयुक्त कार्य समूह महामारी की तैयारी, डिजिटल स्वास्थ्य, वन हेल्थ व रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर संयुक्त कार्रवाई को आगे ले जाया जाए और उभरते खतरों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाया जाए। दोनों पक्ष मिलकर मजबूत एवं चुस्त आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण करेंगे और टीकों, चिकित्सा व चिकित्सा प्रौद्योगिकियों के तेजी से विकास, उत्पादन तथा तैनाती को सक्षम करने, जीवन की रक्षा करने व वैश्विक लचीलापन को मजबूत करने के लिए नियामक ढांचे के बीच अधिक सहयोग की दिशा में काम करेंगे।

9. साझा समृद्धि, आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए ब्रिटेन व भारत के बीच रणनीतिक व्यापार एवं आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाना। लाइसेंसिंग और निर्यात नियंत्रण संबंधी मुद्दों को सुलझाने, रक्षा, सुरक्षा तथा एयरोस्पेस क्षेत्रों सहित महत्वपूर्ण, उभरती व अन्य उच्च-स्तरीय प्रौद्योगिकियों में उच्च-मूल्य वाले व्यापार को खोलने एवं सक्षम बनाने के लिए नियमित रणनीतिक निर्यात और प्रौद्योगिकी सहयोग वार्ता आयोजित करना।

रक्षा और सुरक्षा

भारत-ब्रिटेन रक्षा साझेदारी के सुदृढ़ होने से अंतर्राष्ट्रीय वातावरण पहले से अधिक सुरक्षित होगा और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी। भारत और ब्रिटेन के रक्षा उद्योग की पूरक शक्तियां सहयोग के उत्कृष्ट अवसर प्रदान करती हैं। दोनों पक्ष सशस्त्र बलों के साथ संबंधों को बढ़ाने व रक्षा क्षमता सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं, जो निम्नलिखित हैं:

1. 10 वर्षीय रक्षा औद्योगिक रोडमैप को अपनाने तथा इसके कार्यान्वयन और प्रगति की निगरानी के लिए वरिष्ठ अधिकारी स्तर पर एक संयुक्त तंत्र के माध्यम से सामरिक व रक्षा उद्योग सहयोग को बढ़ावा देना।

2. इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन कैपेबिलिटी पार्टनरशिप (ईपीसीपी) और जेट इंजन एडवांस्ड कोर टेक्नोलॉजीज (जेईएसीटी) जैसे सहयोग कार्यक्रमों के माध्यम से उन्नत प्रौद्योगिकियों व जटिल हथियारों में सहयोग को गहरा करना, नवाचार तथा सह-विकास का सहयोग देना।

3. मौजूदा विदेश और रक्षा 2+2 वरिष्ठ अधिकारी स्तर की वार्ता को अगले उच्च स्तर तक उन्नत करके रणनीतिक एवं परिचालन रक्षा मामलों पर समन्वय को बेहतर करना।

4. गैर-पारंपरिक समुद्री सुरक्षा खतरों पर हिंद महासागर में क्षमता और लचीलापन बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र (आरएमएससीई) की स्थापना के माध्यम से हिंद-प्रशांत महासागर पहल (आईपीओआई) के तहत सहयोग करना।

5. तीनों सेनाओं में सैन्य संयुक्त अभ्यास जारी रखकर और प्रशिक्षण के अवसरों का विस्तार करके आपसी सहभागिता व तत्परता को बढ़ावा दें। एक-दूसरे के प्रशिक्षण संस्थानों में सैन्य प्रशिक्षकों की नियुक्ति करें। हिंद महासागर क्षेत्र में ब्रिटिश सशस्त्र बलों की उपस्थिति को रसद सहायता प्रदान करने के लिए भारत को एक क्षेत्रीय केंद्र के रूप में पुनः स्थापित करें।

6. जलगत प्रणालियों व प्रत्यक्ष ऊर्जा हथियारों सहित नई क्षमताओं के उद्गम पर अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना; और शिक्षा जगत के साथ संबंध विकसित करना।

7. आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की निंदा करें। संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार, व्यापक एवं निरंतर तरीके से आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करें। कट्टरपंथ व हिंसक उग्रवाद का सामना करना; आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही का मुकाबला करना; आतंकवादी उद्देश्यों के लिए नई तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के दोहन को रोकना; आतंकवादी भर्ती से निपटना; सूचना साझाकरण, न्यायिक सहयोग, क्षमता निर्माण सहित इन क्षेत्रों में द्विपक्षीय व बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करना। विश्व स्तर पर प्रतिबंधित आतंकवादियों, आतंकी संगठनों और उनके प्रायोजकों के विरुद्ध निर्णायक तथा ठोस कार्रवाई करने के लिए सहयोग बढ़ाना।

8. आपराधिक खतरों की साझा समझ, न्याय और कानून प्रवर्तन में सहयोग व अपराधियों को रोकने तथा कानून के शासन को बनाए रखने के लिए सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को साझा करके आतंकवाद, साइबर अपराध तथा अवैध वित्तीय प्रवाह सहित अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराध से नागरिकों की रक्षा करना।

9. साइबर सुरक्षा खतरों से निपटने तथा नागरिकों एवं प्रमुख सेवाओं की सुरक्षा के लिए हमारी आपसी समझ को बढ़ाकर और सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को साझा करके साइबर लचीलापन बढ़ाना। साइबर सुरक्षा कंपनियों के लिए सहायता एवं अवसरों के माध्यम से विकास को बढ़ावा देना; साइबर व डिजिटल शासन पर सहयोग; और उभरती प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित विकास पर टीएसआई के तहत साझेदारी।

10. सुरक्षा और अनियमित प्रवासन पर अंकुश लगाने में सहयोग की पुष्टि करना, जिसमें प्रवासन व गतिशीलता साझेदारी को पूर्ण रूप से क्रियान्वित करना भी शामिल है। भारत और ब्रिटेन का लक्ष्य आपराधिक संगठनों द्वारा शोषण को रोकना तथा ब्रिटेन-भारत के बीच के संबंध को सुरक्षित रखना है, जो दोनों देशों के लोगों के बीच स्थायी संबंधों को दर्शाता है।

जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा

जलवायु कार्रवाई पर साझेदारी सतत, लचीले विकास और धरती की सुरक्षा के लिए साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। जलवायु परिवर्तन कार्रवाई पर सहयोग भारत और ब्रिटेन के अपने-अपने महत्वाकांक्षी नेट-जीरो लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा, जिससे वैश्विक जलवायु एजेंडे पर आगे की कार्रवाई होगी। यह हरित वस्तुओं एवं सेवाओं में व्यापार तथा निवेश को विस्तार देगा और हरित विनिर्माण को बढ़ावा देगा। स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु पर साझेदारी से होगा:

1. भारत में जलवायु कार्रवाई के लिए समय पर, पर्याप्त और किफायती वित्त जुटाना। दोनों देश विकासशील देशों द्वारा जलवायु कार्रवाई के लिए किफायत के साथ धन जुटाने हेतु बेहतर, बड़े और अधिक प्रभावी एमडीबी की दिशा में वैश्विक वित्तीय प्रणालियों में सुधार के उद्देश्य से सहयोग करेंगे।

2. महत्वाकांक्षी ऊर्जा सुरक्षा एवं स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को आगे बढ़ाना, जिसमें ऊर्जा भंडारण व ग्रिड परिवर्तन पर सहयोग शामिल है; ब्रिटेन के गैस और बिजली बाजार कार्यालय (ओएफजीईएम) तथा भारत के केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) के बीच एक कार्यबल के लिए काम करना; भारत-ब्रिटेन अपतटीय पवन कार्यबल का गठन; उद्योग जगत हेतु निम्न कार्बन मार्गों को आगे बढ़ाने के लक्ष्य के साथ कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (सीसीटीएस) का विकास; परमाणु सुरक्षा एवं अपशिष्ट तथा डीकमीशनिंग पर असैन्य परमाणु सहयोग को आगे बढ़ाना, जिसमें एक उन्नत भारत-ब्रिटेन परमाणु सहयोग समझौते के तहत छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों जैसी अगली पीढ़ी की परमाणु प्रौद्योगिकियों पर सहभागिता शामिल है। संपूर्ण रूप से, ब्रिटेन-भारत ऊर्जा सहयोग निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों में अवसरों का लाभ उठाएगा तथा मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण में सहायता करेगा।

3. स्वच्छ परिवहन, ऊर्जा एवं जीवन विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग को गहरा करके हरित विकास और एक टिकाऊ व समृद्ध भविष्य के लिए स्केलेबल नवाचारों में तेजी लाना, साथ ही एआई, नवीकरणीय ऊर्जा, हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण, बैटरी तथा कार्बन कैप्चर पर संयुक्त गतिविधियों को आगे बढ़ाना। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए गहन तकनीकी समाधान विकसित करने और विकास हेतु नए बाजार बनाने के लिए प्रमुख नेट जीरो इनोवेशन पार्टनरशिप के माध्यम से उद्यमियों को संयुक्त रूप से सहायता देना।

4. जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता को कम करने व अनुकूलन योजना को सशक्त बनाकर, वित्त जुटाकर, प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देकर तथा आपदा तैयारी को बढ़ाकर लचीले विकास को बढ़ाने के लिए सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों का आदान-प्रदान और सहयोग करना।

5. भारत-ब्रिटेन वन साझेदारी के अंतर्गत कृषि वानिकी और वन उत्पादों की ट्रेसेबिलिटी पर सहयोग के माध्यम से प्रकृति एवं टिकाऊ भूमि उपयोग को बहाल करने में सहयोग करना।

6. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, गठबंधन आपदा रोधी अवसंरचना, एक सूर्य एक विश्व एक ग्रिड (ओएसओडब्ल्यूओजी), सड़क परिवहन में महत्वपूर्ण खोज, शून्य उत्सर्जन वाहन संक्रमण परिषद (जेडईवीटीसी) पर गहन सहयोग के माध्यम से जलवायु एवं ऊर्जा पारेषण पर सहयोग बढ़ाना। ग्लोबल क्लीन पावर अलायंस (जीसीपीए) के माध्यम से मिलकर काम करने की संभावनाओं का पता लगाना।

शिक्षा

ब्रिटेन व भारत की शिक्षा प्रणालियां और दोनों देशों के लोगों एवं संस्कृतियों के बीच समृद्ध आदान-प्रदान दोनों पक्षों के सहयोग के अन्य सभी क्षेत्रों का आधार हैं। भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और मई 2025 में हस्ताक्षरित सांस्कृतिक सहयोग कार्यक्रम के तहत ब्रिटेन पारस्परिक विकास तथा विस्तार प्रदान करने में भारत के पसंदीदा भागीदार देशों में से एक है। लोगों के बीच आपसी संबंध भारत-ब्रिटेन साझेदारी का स्वर्णिम सूत्र हैं। सशक्त नींव पर निर्मित भारत तथा ब्रिटेन के बीच बौद्धिक साझेदारी, उभरते अवसरों के प्रति संवेदनशील होगी और यह प्रौद्योगिकी की तीव्र प्रगति के अनुकूल होकर शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देगी। इससे एक कुशल एवं दूरदर्शी प्रतिभा समूह का निर्माण होगा, जो वैश्विक चुनौतियों का सामना करने और सभी के लिए एक सुरक्षित व टिकाऊ भविष्य में योगदान देने के लिए तैयार होगा। दोनों पक्ष करेंगे:

1. वार्षिक मंत्रिस्तरीय भारत-ब्रिटेन शिक्षा वार्ता के माध्यम से शैक्षिक संबंधों के लिए रणनीतिक दिशा निर्धारित करना, जो सहयोग के नए क्षेत्रों को बढ़ावा देगा और हमारी शैक्षणिक साझेदारी को गहरा करेगा। दोनों पक्ष पारस्परिक रूप से मान्यता प्राप्त योग्यताओं की समीक्षा करने तथा ब्रिटेन में एजुकेशन वर्ल्ड फोरम और भारत में राष्ट्रीय शिक्षा नीति मंच जैसे कार्यक्रमों में भाग लेने के माध्यम से ज्ञान साझा करने के लिए मिलकर काम करेंगे।

2. भारत में अग्रणी ब्रिटिश विश्वविद्यालयों और संस्थानों के अंतर्राष्ट्रीय शाखा परिसरों को खोलने तथा महत्वपूर्ण विषय क्षेत्रों में संयुक्त व दोहरी डिग्री पाठ्यक्रम प्रदान करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा साझेदारी को प्रोत्साहित करना, जिससे दोनों देशों की भविष्य की अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा मिलेगा।

3. भारत-ब्रिटेन हरित कौशल साझेदारी के माध्यम से युवाओं में निवेश करना तथा उन्हें भविष्य के लिए कौशल प्रदान करना, जिससे भारत व ब्रिटेन की विशेषज्ञता एक साथ आएगी, दोनों देशों में कौशल अंतराल की पहचान होगी और उसे पाटा जाएगा, ऐसी संयुक्त गतिविधियां शुरू की जाएंगी, जो पारस्परिक रूप से लाभकारी व टिकाऊ हों, विकास के अवसर पैदा होंगे तथा पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव डालेंगे। योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता पर मौजूदा भारत-ब्रिटेन समझौता ज्ञापन को लागू करना जारी रखा जाएगा।

4. युवाओं एवं विद्यार्थियों के बीच आदान-प्रदान और समझ को प्रोत्साहित करना, युवा पेशेवर योजना व स्टडी इंडिया कार्यक्रम जैसी मौजूदा योजनाओं की सफलता को बढ़ावा देने तथा अधिकतम करने के लिए सभी क्षेत्रों में साझेदारी में कार्य करना।

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
India's Merchandise Exports Defy Global Headwinds, Rise 15 Per Cent In April–14 June Period

Media Coverage

India's Merchandise Exports Defy Global Headwinds, Rise 15 Per Cent In April–14 June Period
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
भारत न केवल फास्ट- ग्रोइंग इकोनॉमी है, बल्कि एक क्रेडिबल इकोनॉमी भी है: पीएम मोदी
June 22, 2026
India is not only a fast-growing economy, but also a credible one: PM
Along with being a rising power, India is also a reliable power: PM
For India, Nation First is the highest guiding principle: PM
Maoist terror is breathing its last in India: PM
The shift in mindset from "this can never be done" to "this will be done" is India's greatest achievement: PM
The government is empowering the poor and middle-class: PM
The collective efforts of 140 crore Indians will realise the dream of a Viksit Bharat: PM

स्वर साधना, मनोकामना, आराधना। एक बहुत ही शुभ शुरुआत के बाद। अच्छा होता आप ही का कार्यक्रम चलता। आप सबको नमस्कार।

रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के सभी दर्शक और अब तो बहुत सारी भाषाओं में भी है, तो उन सबको भी मेरा प्रणाम! मैं इस समिट में हिस्सा लेने आए सभी साथियों का भी अभिनंदन करता हूं। 24 घंटे चलने वाले चैनलों में ब्रेकिंग न्यूज इसका बहुत बड़ा महत्व होता है। और आजकल तो दुनिया में ही, पूरी दुनिया में कहीं पर भी नजर डालो, पूरी दुनिया ब्रेकिंग न्यूज के मोड पर ही है, और इतनी भागदौड़ में आप सभी, इस समिट को होस्ट कर रहे हैं, इसका हिस्सा बने हैं। और इसलिए आप विशेष बधाई के पात्र हैं। और इस बार आपकी चर्चा का विषय भी उतना ही अहम है...Great Power India: Nation First...

साथियों,

हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है...यतो धर्मस्ततो जयः ! यानि जय का, शक्ति का, मूल धर्म है। और धर्म यानि ड्यूटी, धर्म यानि जस्टिस, धर्म यानि समभाव, धर्म यानि संवाद, धर्म यानि संवेदना और यही तो नेशन फर्स्ट की भावना में भी समाहित है। भारत, अपनी पावर को इसी लैंस से देखता है, इसी तराज़ू पर तौलता है।

साथियों,

भारत की एक और विशेषता है और अब तो दुनिया ने भी मान लिया है। हम किसी क्षणिक घटना पर उतावले होने वाले देश नहीं है, हम वो हैं जिसने विकास और विनाश, देखा भी झेला भी है। हम वो देश हैं, जिसके जेहन में युगों की मेमरी चिप लगी हुई है, हम युगों की मेमरी चिप वाले नेशन हैं। और इसलिए भारत आज जो कर रहा है, और ये मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ, भारत जो कर रहा है वो आने वाले एक हज़ार वर्ष का फ्यूचर लिखने वाला है। और यही दुनिया के लिए सबसे बड़ी भारत की गारंटी है। भारत, Fast-Growing Economy भी है। एक Credible Economy भी है। और भारत, rising power के साथ-साथ और अभी आप तो ढेर सारी डिक्शनरी लेकर बैठ गए थे, सुपर पावर तक ले गए। लेकिन मैं इतना जरूर कहूँगा कि भारत Reliable power है। मैं अभी दो-तीन दिन पहले G7 समिट से लौटा हूं और दुनिया का हर नेता हर देश इस बात को भली-भांति समझता है कि आज के भारत के लिए नेशन फर्स्ट ही सबसे बड़ा मंत्र है, सबसे बड़ा सिद्धांत है।

साथियों,

कुछ दिन पहले ही, हमारी सरकार को 12 साल पूरे हो चुके हैं। उसके लिए भी अर्नब ने आपको तालियाँ बजाने के लिए मजबूर कर दिया। पिछले बारह वर्षों की जो भी सिद्धियां देश की रही हैं, उनके मूल में अगर आप तराजू से तौलोगे, हर निर्णय, हर कदम, हर प्रयास उनके मूल में राष्ट्र प्रथम की भावना ही केंद्र में है। स्वच्छ भारत अभियान से लेकर मेक इन इंडिया खादी खरीदने पर जोर स्थानीय वस्तुएं खरीदने पर जोर ये सारे Initiative इसलिए सफल हुए क्योंकि देश की जनता ने देश को सबसे ऊपर रखते हुए अपना कर्तव्य निभाया। देश के नागरिकों को मैं सलाम करता हूँ।

साथियों,

यहां हमारे साथी श्रीधर वेंबु जी बैठे हैं। जब हमारे उद्यमी नेशन फर्स्ट की भावना के साथ चलते हैं, जब वो देश की आवश्यकताओं को समझते हुए अपने लक्ष्य बनाते हैं तो संस्थाएं भी बनती हैं और देश भी समृद्ध होता है। श्रीधर वेंबु जी ने क्या काम किया है, शायद यहाँ बातों में कितना निकला होगा मुझे मालूम नहीं, लेकिन अभी मैं फ़्रांस में vivatech में गया था, करीब डेढ़ 2 लाख नौजवान वहाँ होंगे, चलने के लिए भी मैं और फ्रांस के राष्ट्रपति अलग अलग स्टॉल पर जा रहे थे, देखने के लिए भई नौजवानों ने क्या काम किया है। तो हम जोहो के स्टॉल पर गए, मैं हैरान था जी, और गर्व होता था कि जोहो के स्टाल पर यूरोप के नौजवानों की जो भीड़ लगी थी और वो समझना चाहते है कि क्या है ये दुनिया में नई चीज, भारत में शायद उतनी चर्चा नहीं होगी, जितनी मैंने वहाँ फ्रांस में देखी, बधाई हो आपको।

साथियों,

सरकार की नीति और निर्णयों में नेशन फर्स्ट का क्या प्रभाव होता है, इसका एक उदाहरण हमारा आदिवासी क्षेत्र है। मैं आज कोई फिलोस्फी झाड़ने वाला नहीं हूँ, कुछ बातें जो हुई है वो हल्की फुल्की बता दूंगा और उससे आप अंदाज लगा लेंगे कि काम कैसे होता है। मैं आदिवासी क्षेत्र की बात करता हूँ। भारत के 10 करोड़ से अधिक आबादी की चर्चा, मतलब कि आदिवासी समाज की चर्चा और हम सबको पता है कि दशकों से माओवादी आतंक वहाँ अपने डेरा तंबू डालकर बैठ हुआ था। जहां 21वीं सदी में भी इन आतंकियों ने एक भी सुविधा पहुंचने नहीं दी, सरकारी एक वेहिकल नहीं गुजर सकता था वहाँ से। गोलियों से भून दिया जाता था। अनेक सरकारें आई-गईं, कई पीढ़ियां आई-गईं, लगता था कि हिंसा का ये दुर्भाग्य ऐसे ही रहेगा। आप कल्पना कर सकते हैं, 2004 से 2014 के बीच, मैं उस दस साल का हिसाब बताता हूँ, 2004 से 2014 के बीच माओवादी आंतक के कारण, 17 हज़ार से भी अधिक हिंसक घटनाएं हुईं थीं। और करीब-करीब 7 हज़ार से ज्यादा जानें गईं थी।

साथियों,

आज आपके लिए वन लाइन न्यूज होगा या टीवी पर आधे घंटे डिबेट होगी कि माओवाद आतंकवाद खत्म हो गया, चीजें ऐसी नहीं होती। उसके लिए खपना पड़ता है और इसलिए मैं बताना चाहता हूँ। और इसलिए मैं बताना चाहता हूं और आजकल जो लोग, कुछ लोग संविधान दिखाते रहते हैं, लेकिन जब ये लोग सरकार में थे और नक्सल प्रभावित इलाकों में संविधान का नाम लेने पर गोली मार दी जाती थी और तब ये लोग चुप बैठे थे, तब उनके हाथो में संविधान नहीं दिखता था, कांप रहे थे उनके हाथ। उस दर्दनाक स्थिति से कांग्रेस को कोई खास फर्क नहीं पड़ता था।

साथियों,

2014 के बाद, हालात को बदलने के लिए हम राष्ट्र प्रथम के भाव से आगे बढ़े, हम निकल पड़े। बोलते नहीं थे, बताते भी नहीं थे, करते जरूर थे। हमने संकल्प लिया कि नक्सलवाद-माओवाद को जड़ से उखाड़ फेकेंगे और आज पूरा देश नतीजा देख रहा है, आज देश में माओवादी आतंक, अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।

और साथियों,

कई बार अंतिम परिणाम इतना बड़ा और व्यापक होता है कि उसके पीछे की मेहनत पर ध्यान नहीं जाता। रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को मैं खासतौर पर इसके बारे में बताना चाहता हूं।

साथियों,

जिन नक्सल प्रभावित इलाकों में दिन में जाने से भी, यानी सामान्य मानवी डरा रहता था, उसको लगता था कहीं अपहरण हो जाएगा तो, कभी वसूली का डर रहता था, कभी साथ में जो कुछ भी है वो लूट लेने का डर रहता था। और जहां पर विकास की बात बोल तक नहीं सकते थे आप, लेकर के जा नहीं सकते थे, सब नामुमकिन था, ऐसे क्षेत्रों में हम हम विकास का संकल्प लेकर आगे बढ़े। वहां बीते 12 वर्षों में हमारी सरकार ने 12 हज़ार किलोमीटर से अधिक की सड़कें बनाईं। और कई बार तो हमने देखा, कई बार तो हमने देखा कि सड़क बनाने के जो हमारा साजो सामान होता है उसको जला दिया जाता था। कांट्रेक्टर को भगा दिया जाता था। अगर 25 लोग रोड पर काम करते तो 200 लोग पुलिस सुरक्षा रखते थे ताकि काम चले। यह सब इसलिए करते थे- तय किया था।

साथियों,

साढ़े 9 हज़ार से अधिक मोबाइल टावर बनाए। एक टावर नहीं लगने और लगा हुआ टावर तोड़ देते थे। क्योंकि उनको हमेशा वहां आक्रोश पैदा करना था। करीब 45,000 गांव में मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाई। नक्सल प्रभावित जिलों में 1800 से अधिक बैंक ब्रांच खोली गई। करीब 75,000 बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट और 6000 से अधिक नए पोस्ट ऑफिस बनाए गए। सिर्फ बम, बंदूक और गोली के सहारे काम नहीं किया है साथियों, हमने दिलों को जीतने के लिए, ईश्वर ने जो भी शक्ति दी थी उसको खपाया था।

साथियों,

हम बुलंद इरादों के साथ नक्सल प्रभावित इलाकों में जनसामान्य की आशा, आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए जा रहे थे। आप हैरान हो जाएंगे एक मशहूर नक्सली, करोड़ों रुपए का इनाम थे उसके, उसकी मां के पास हम पहली बार राशन कार्ड लेकर गए। बेटा अपनी मां को राशन कार्ड लेने नहीं देता था, आतंकवाद अपना चलाने के लिए। इतनी घटनाएं हैं, मैं हैरान था। और सरकार चुप बैठी थी, उनको संविधान उस समय तो दिखता नहीं था। लेकिन इन सारे प्रयासों का परिणाम यह आया कि जन सामान्य में एक विश्वास का नया दौर आया। आज आप देखिए बस्तर जैसे इलाकों में बम बंदूक नहीं बस्तर ओलंपिक्स की धूम है। और अब तक इस ओलंपिक के दो एडिशन हो चुके हैं। पहली बार डेढ़ लाख से अधिक युवाओं ने और दूसरी बार करीब 4 लाख युवाओं ने बस्तर ओलंपिक्स में हिस्सा लिया। यानी जहां कभी टेरर था, वहां टैलेंट को अवसर मिल रहा है, वहां स्पोर्ट्स फल-फूल रहा है।

साथियों,

12 वर्षों के इस सेवाकाल की एक और बड़ी सिद्धि रही है, यह सिद्धि है, निराशा से निकलकर आशा-आकांक्षा सबसे भरे भारत का निर्माण।

साथियों,

नक्सल कहीं और होगा लेकिन घटनाओं की पीड़ा हिंदुस्तान के हर कोने में होती थी और जिस समय नक्सल खत्म होने की बातें आने लगी तो विश्वास सिर्फ नक्सली इलाके का नहीं, हिंदुस्तान के कोने-कोने में जगने लगा। 2014 से पहले के 10 वर्षों में जो कांग्रेस सरकार चली, उससे नाराजगी केवल गवर्नेंस की नहीं थी। तब देश की निराशा इससे कहीं अधिक थी, देश उम्मीद खो चुका था, लोगों को लगता था कि कुछ हो ही नहीं सकता, कुछ बदल ही नहीं सकता।

साथियों,

पिछले 12 वर्षों में भारत ने उसी निराशा को आशा में बदला है और मुझे इस बात का सबसे ज्यादा संतोष है। आज हर किसी को यह लगता है कि थोड़ी और मेहनत करेंगे, तो यह हो सकता है। वो दिन चले गए जब एक ही बात सुनाई देती थी, कतई नहीं हो सकता, कतई नहीं हो सकता, वो जमाना चला गया, आज ये होकर रहेगा। ये जो भाव आया है यही भारत की असली सिद्धि है, और यही रियल पावर है। चुनौतियां तो आज भी बहुत है और हमेशा रहेगी और चुनौतियां बहुरूपिया होती है, वो नए-नए अवतार में सामने आती रहती है, अरे आएगी, जिस रूप में आएगी, जंग उससे भी लड़ लेंगे जी और जीत भी लेंगे। लेकिन यह हो सकता है और हम यह करके रहेंगे, जब इस भाव से देश आगे बढ़ता है, तब सपने पूरे होते हैं।

साथियों,

मैं यहां भारत के 100 से ज्यादा जिलों और 500 से ज्यादा ब्लॉक्स की चर्चा करना चाहूंगा। यह विकास के हर पैरामीटर पर पीछे छूट गए थे और पहले की सरकार ने इन पर पिछड़ा होने का ठप्पा लगा दिया था, यह तो बैकवर्ड डिस्ट्रिक्ट है, ये तो बैकवर्ड इलाका है। हमने देश के इस बहुत बड़े क्षेत्र को पिछड़ेपन की निराशा से बाहर निकालकर डेवलपमेंट की एस्पिरेशन जगाई। सबसे पहले तो हमने पहचान ही बदल दी, हमने कहा ये एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट है, ये एस्पिरेशनल ब्लॉक है, हमने एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट का प्रोग्राम बनाया, एस्पिरेशनल ब्लॉक का प्रोग्राम बनाया और सरकार ने विकास के हर पैरामीटर पर बहुत बारीकी से काम शुरू किया। इस डिस्ट्रिक्ट में ये तीन पहलू है, पहले उसमें से बाहर निकलो। यहां छह पहलू है, पहले इसमें से बाहर निकलो। बड़ा फोकस वे में काम शुरू किया। आज यह एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट और ब्लॉक्स राज्य की ओवरऑल ग्रोथ को आगे बढ़ाने का काम करने लगे हैं। जो पहले ग्रोथ को पीछे खींचते थे, इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट में बहुत बड़ी आबादी गरीब थी, अभाव में थी। बीते वर्षों में 25 करोड़ गरीबों ने गरीबी को परास्त किया है। तो इसमें इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट की एक बहुत बड़ी भूमिका है।

साथियों,

हम देखते हैं कि जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो सिर्फ घर का वो व्यक्ति ठीक होता है ऐसा नहीं है। जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो पूरा परिवार ठीक हो जाता है। ऐसे ही, जब घर का कोई एक बेटा-बेटी कुछ अचीव करता है, तो सिर्फ वो व्यक्ति अचीव करके नहीं आता, वो पूरा परिवार, पूरा परिवार अचीवमेंट से भर जाता है, विश्वास बदल जाता है। ऐसे ही, जब कोई गरीबी से बाहर आता है, तो सम्पूर्ण समाज का फायदा होता है, देश का फायदा होता है। 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, निओ मिडिल क्लास में आए हैं, तो इसका फायदा केवल उन परिवारों तक नहीं रहता, बल्कि मिडिल क्लास का भी इसमें फायदा होता है। क्योंकि यह नया कंज्यूमर है, जो इकोनॉमी को ड्राइव करता है, उससे अल्टीमेटली मिडिल क्लास के लिए अवसर बनते हैं। यानी गरीबी कम होना केवल वेलफेयर का ही विषय नहीं है, यह अवसरों के विस्तार की गाथा है, नई एस्पिरेशंस की प्रेरणा है।

साथियों,

पिछले 12 वर्ष में जो इतना विशाल मिडिल क्लास देश में तैयार हुआ है, वो सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता रहा है। मिडिल क्लास की Ease of Living के लिए सरकार ने हर स्तर पर काम किया है। अब जैसे अपने घर का सपना है। हर मिडिल क्लास परिवार की एक इच्छा रहती है कि भई खुद का घर हो, हर किसी को पूछोगे एक मन में रहता है मेरा अपना घर हो। 2014 में अगर किसी परिवार को अपना घर खरीदना होता था, तो होम लोन डबल डिजिट के इंटरेस्ट रेट पर मिलता था। लेकिन आज किसी भी बैंक से होम लोन 7-8 परसेंट के रेट पर मिल जाता है। पहले लोन लेना भी किसी युद्ध जीतने जैसा था, युद्ध जीतने में जितनी ताकत लगती थी, उतनी लोन लेने में लगती थी। आज यह घर बैठे ही संभव हो पा रहा है। मैं यहीं की बात बताता हूं, यह दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोग जानते हैं कि कैसे शहरी मिडिल क्लास के हजारों घर अधूरे अटके हुए थे। पैसे दे दिए थे, पूरे जिंदगी भर की कमाई बिल्डर को दे दी थी। उसने भी बढ़िया-बढ़िया पम्पलेट दिखाए, सपने दिखाए। अभी किराए पर घर में रहते हैं, तो किराया भी देना है, घर जल्दी मिलेगा। उधर किराया रहता है, घर मिल नहीं रहा, घर बन नहीं रहा, यह बहुत बुरा हाल था। इन अधूरे घरों को पूरा करने के लिए हमने 25 हजार करोड़ रुपए का स्पेशल फंड बनाया। और आपको जानकर खुशी होगी कि देश में बरसों से अटके करीब 60 हजार घरों को डिलीवरी किया जा चुका है।

साथियों,

एक और चीज है, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है। यह जरूरत है, कनेक्टिविटी की, ट्रांसपोर्ट की। आज आप सोशल मीडिया में देखिए, दुनियाभर से जो भी टूरिस्ट आता है, भारत आता है, वो हमारे मेट्रो सिस्टम को देखकर हैरान रह जाता है।

साथियों,

वर्ष 2014 में करीब 28 लाख लोग, हर रोज मेट्रो से सफर करते थे। आज करीब एक करोड़ अठाइस लाख लोग हर रोज मेट्रो से सफर कर रहे हैं। अब वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत जैसी हाई स्पीड ट्रेन्स देश को कनेक्ट कर रही हैं। अच्छी सड़कों, अच्छे हाईवे से, समय तो बच ही रहा है, गाड़ियों की मैंटेनेंस पर होने वाला खर्चा भी कम हुआ है। बीते वर्षों में एयरपोर्ट्स की संख्या डबल हुई है। इससे कई छोटे-छोटे शहरों में भी मिडिल क्लास को हवाई यात्रा की सुविधा पहली बार मिली है।

साथियों,

पिछले 12 साल, मिडिल क्लास के लिए कमाई के साथ-साथ बचत के भी रहे हैं। 2013-14 में, लगभग 2 लाख रुपए तक की आय होने पर टैक्स लगता था, आप सबको वो नसीब रहा होगा। और यह टैक्स मिडिल क्लास देता रहता था। आज 12 लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। यानी टैक्स फ्री इनकम कई गुणा बढ़ गई है।

साथियों,

GST रिफॉर्म्स के कारण भी मिडिल क्लास को बहुत सुविधा हुई है। टैक्स फाइलिंग का समय और खर्चा भी बच गया है। क्योंकि यह बहुत ही आसान हो गया है। घर बैठे ही ITR फाइल हो रहे हैं, अगर कोई सेटलमेंट का इश्यू है, तो वो फेसलेस हो रहा है।

साथियों,

मिडिल क्लास परिवारों में एक बड़ा खर्चा डायबिटीज या ऐसी लाइफस्टाइल से जुड़े इलाज का भी रहता है। जन औषधि केंद्रों पर 80 परसेंट डिस्काउंट पर ऐसी दवाएं मिल रही हैं। अगर आपका पहले हजार रुपया खर्चा होता था, तो आज 200 रुपये में काम हो जाता है, 800 रुपये बच रहा है और इससे बीते वर्षों में करीब 40 हज़ार करोड़ रुपए की बचत देश के अनेक परिवारों की हुई है। मिडिल क्लास के बजट का एक बड़ा हिस्सा बुजुर्गों के इलाज पर भी जाता है। आज 70 वर्ष से ऊपर के हर नागरिक के लिए 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध है।

साथियों,

एक सामान्य स्वभाव है कि जब कोई सुविधा लगातार मिलती है, तो इंसान पहले की परेशानी भूल जाता है। अब 2 लाख रुपये पर आप टैक्स देते थे, अब 12 लाख तक नहीं देना पड़ रहा, लेकिन जब मैं कहूं, तब ताली बजती है। और बस में, ट्रेन में थोड़ी देर भी अगर कुछ मुसीबत आ गई, तो ढेर सारी गालियां देना शुरू हो जाते हैं और यही क्‍लास सबसे ज्यादा बोलता है।

साथियों,

मैंने जैसा कहा ना कि भई पुरानी तकलीफे भूल जाता है आदमी। आप लोगों को आज ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट से जुड़ी परेशानियां बिल्कुल याद नहीं होंगी। पहले ड्राइविंग लाइसेंस लेना होता था, तो कितनी दिक्कत होती थीं, पासपोर्ट लेना होता था, तो क्‍या-क्‍या कुछ नहीं करना पड़ता था, कितने पापड़ बेलने पड़ते थे। आज ड्राइविंग लाइसेंस लेना भी आसान हुआ है और तत्काल पासपोर्ट भी औसतन 3 दिन में ही मिल जाता है।

साथियों,

मैं जानता हूं, हमारी सरकार जिस तरह काम कर रही है, उसने देश के लोगों की एस्पिरेशन बहुत बढ़ा दी है। एक काम हुआ, तो लोगों की डिमांड वहीं खत्म नहीं हो जाती है। वो उससे भी बेहतर काम चाहते है, उससे भी अपग्रेड सुविधा चाहते हैं। अगर पहले डिमांड नई सड़क की थी, तो सड़क बनने के बाद लोग पूछते हैं, मेट्रो कब आएगी? पहले अपेक्षा होती थी कि ट्रेन समय पर पहुंच जाए, ट्रेन में बैठने की साफ-सुथरी जगह मिल जाए। आज डिमांड है कि हमारे रूट पर वंदे भारत क्यों नहीं चल रही है?

साथियों,

कुछ लोगों को ये असंतोष लगता है, यह एस्पिरेशन है, हमारे देश में एक फौज ऐसी है, उसको लगता है कि यह सब मामला कुछ गड़बड़ है। लेकिन लोग आखिरकार यह अपेक्षाएं किसके पास करेंगे भई, जो करता है, उससे ही करेंगे ना! सामान्‍य लोग हीनहीं, पूरी कांग्रेस पार्टी कहती है कि जरा मोदी जी, यह हो जाना चाहिए, यह होना चाहिए, कहते रहते हैं ना! उनको भरोसा है, करेगा तो ये ही करेगा!

साथियों,

एस्पिरेशंस वहीं होती है, जहां लोगों को लगता है कि सपने पूरे हो सकते हैं। और भारत के युवाओं की, भारत के गरीब और मिडिल क्लास की यही एस्पिरेशन है। आज भाजपा-एनडीए सरकारों की ऊर्जा बनी हुई है।

साथियों,

एक तरफ, देश का बहुत बड़ा वर्ग एस्पिरेशनल है, तो दूसरी तरफ, राजनीति की एक टोली है, जिसका जीवन मंत्र बन गया है- ऑलवेज अगेंस्ट! यह टोली, क्रॉनिक डिससैटिस्फैक्शन यानी स्थाई असंतोष से भरी हुई है। आज मैं रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को जरा इस टोली के लक्षण बताने जा रहा हूं। Symptoms पता चलेगा, तो आपको समझ आ जाएगा कि मैं क्या कह रहा हूं। आप आसानी से पहचान लेंगे। जैसे मैं उदाहरण देता हूं, आप समझ जाएंगे। इनको आप अक्सर कहते सुनेंगे, अरे फलां जगह तो चौबीस घंटे बिजली आती है, यहां क्यों नहीं? और अगले ही दिन ये लोग डैम्स का, सोलर पार्क का, थर्मल का, न्यूक्लियर प्लांट का विरोध करने के लिए ढपली लेकर के आ जाएंगे। यानी पहले दिन बिजली क्‍यों नहीं और दूसरे दिन तुम हाइड्रो पावर का डैम क्यों बना रहे हो, यह जमात ऐसी है। यह वो लोग हैं, जो खनिजों के खनन का विरोध करते थे, लेकिन आज पूछते हैं कि भारत का रेयर अर्थ मिनरल्स भंडार कहां है, सप्लाई चेन कहां है? और भारत में फलाने देश की तरह, इलेक्ट्रिक व्हीकल का इकोसिस्टम क्यों नहीं है? यह वही लोग हैं, जो कभी डेटा या आटा, इसकी डिबेट चलाते थे। पहले डाटा कि आटा, डाटा कि आटा, बड़ा मजा आता था। आज यही लोग पूछते हैं कि बताओ मोदी जी, AI में क्या काम हुआ? हद देखिए, एक सांस में कहते हैं, एक ही सांस में कहते हैं कि AI में यह होना चाहिए था, वो होना चाहिए था, हुआ क्यों नहीं? लेकिन दूसरी सांस में वही लोग कहते मिलेंगे, अरे यह डेटा सेंटर क्यों बना रहे हो? यह सेमीकंडक्टर प्लांट क्यों लगा रहे हो? और फिर यह लोग उसके 100 नुकसान गिनाने के लिए घंटे-घंटे भर सोशल मीडिया के स्‍क्रीन पर दिखेंगे, टीवी डिबेट पर दिखेंगे, अखबारों में भरे रहेंगे।

साथियों,

यह लोग करप्शन को लेकर दुनियाभर के इंडेक्स उठाकर लाते हैं, भारत को कटघरे में खड़ा करते हैं, इनके इकोसिस्टम का मीडिया भी 24-24 घंटे उछालता रहता है, लेकिन जब करप्शन के विरुद्ध एक्शन होता है, जब कार्रवाई होती है, तो यही लोग चिल्लाते हैं, सबसे पहले हल्ला मचाने का काम कौन करते हैं, यही गलत हो रहा है, फलाना गया ढीकना गया, रेड कर दी, जांच कर दी, harass कर दिया। सवाल उठाए जाते हैं, कार्रवाई ऐसे क्यों हो रही है, वैसे क्यों नहीं, अब क्यों हो रही है, तब क्यों नहीं, A पर क्यों हो रही है, B पर क्यों नहीं हो रही है, यही उनका खेल है।

साथियों,

इन लोगों का कैरेक्टर समझना देश के लिए बहुत जरूरी है। खासतौर पर मेरे देश के युवाओं को इनको पहचानने की जरूरत है और हमारी जेन जी को तो बहुत जल्दी समझना चाहिए, जल्दी समझो वरना अब सूर्यवंशी आया है, वो तेज गति से समझाता है।

साथियों,

यह लोग एक तरफ कहेंगे कि देश की सेनाओं को छूट नहीं है, हथियार नहीं मिल रहे हैं, लेकिन जब सरकार कोई डिफेंस डील करेगी, कोई आधुनिक हथियार खरीदती है, तो सबसे पहले आकर कहते हैं कि यह क्यों खरीदा? यह दुनिया भर में भारत की कूटनीति पर सवाल करेंगे, लेकिन जब भारत कूटनीति के लिए, सुरक्षा के लिए कहीं कोई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाने लगेगा, तो यह लोग ढोल-ढपली लेकर हल्ला मचाना शुरू कर देते हैं।

साथियों,

आज भारत जिस अहम कालखंड में है, इसमें ऐसे लोगों को पहचानना होगा, उनके कुतर्क को समझना होगा और उनसे सतर्क रहना बहुत जरूरी होगा। और आज दुर्भाग्य से, आज देश के मुख्य विपक्षी दल, कांग्रेस पर, ऐसे ही लोगों का कब्जा हो गया है। कांग्रेस कभी नेशन फर्स्ट की बात करेगी, यह सोचना भी अब झूठे सपने जैसा हो गया है। कल्पना ही नहीं कर सकते क्या कभी कांग्रेस में यह फिर से आएगी बात, जो गांधी जी के जमाने में थी।

साथियों,

आज दुनिया पुरानी धाराओं को चैलेंज कर रही है, डिसरप्शन्स की स्केल बहुत बड़ी हो गई है, लेकिन इसका एक और पक्ष है। यह चुनौतियां, नए अवसर भी ला रही है। भारत के हर युवा, हर उद्यमी, हर इनोवेटर, हर स्टार्टअप को, इन्हीं अवसरों पर फोकस करना है और इसमें सरकार, नेशन फर्स्ट की भावना के साथ पूरी तरह देश के लोगों के साथ है। भारत आज रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार हो चुका है। यह गति आगे और तेज होगी, मैं रिपब्लिक टीवी के इस मंच से देशवासियों से फिर कहूंगा कि हमारा सपना जितना बड़ा है, हमारे प्रयास भी उतने ही विराट होंगे और 140 करोड़ देशवासियों का यही साझा प्रयास, विकसित भारत बनाकर रहेगा। और आप सब लोग, मैं विश्वास से कहता हूं, अपनी आंखों से विकसित भारत देखने वाले हैं। आने वाली पीढ़ियों तक इंतजार करना पड़े, इस प्रकार से मैं काम नहीं करता, आप खुद अपनी आंखों से देखकर के जाएंगे। इसी विश्वास के साथ, मैं फिर एक बार रिपब्लिक टीवी को, उसके दर्शकों को और आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं! बहुत-बहुत धन्यवाद!