उन्होंने भारत में होने वाले पांच महत्त्वपूर्ण परिवर्तनों के बारे में बताया
“लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसका खुलापन है। हालांकि, हमें इस खुलेपन का दुरुपयोग करने वाले कुछ निहित स्वार्थों को अनुमति नहीं देनी चाहिये”
“भारत की डिजिटल क्रांति की जड़ें हमारे लोकतंत्र, हमारी जनवादिता और हमारी बढ़ती अर्थव्यवस्था में निहित है”
“हम डेटा का इस्तेमाल लोगों को शक्तिसम्पन्न करने के स्रोत के रूप में करते हैं। व्यक्तिगत अधिकारों की मजबूत गारंटी के साथ लोकतांत्रिक संरचना में ऐसा करने का भारत के पास बेमिसाल अनुभव है”
“भारत की लोकतांत्रिक परंपरा बहुत पुरानी है; उसके आधुनिक संस्थान मजबूत हैं और हम हमेशा विश्व को एक परिवार मानते रहे हैं”
प्रधानमंत्री ने लोकतांत्रिक देशों को साथ काम करने के लिये एक रोड-मैप दिया, जो राष्ट्रीय अधिकारों को मान्यता दें, साथ ही कारोबार, निवेश और वृहद लोक कल्याण को प्रोत्साहित करें
“यह जरूरी है कि सभी लोकतांत्रिक देश क्रिप्टो-करेंसी पर साथ काम करें और यह सुनिश्चित करें कि यह गलत हाथों तक न पहुंच पाये, जो हमारे युवाओं को पथभ्रष्ट कर सकते हैं”

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सिडनी-डायलॉग के उद्घाटन में मुख्य व्याख्यान दिया। श्री मोदी ने भारत की प्रौद्योगिकी के क्रमिक और त्वरित विकास के विषय पर चर्चा की। उनके सम्बोधन के पहले ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री श्री स्कॉट मॉरिसन ने आरंभिक संबोधन किया ।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र और उभरते हुई डिजिटल दुनिया में भारत की केंद्रीय भूमिका को पहचाना गया है। डिजिटल युग के लाभों को मद्देनजर रखते हुये प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि दुनिया समुद्री सतह से लेकर साइबर और अंतरिक्ष तक नये तरह के संघर्षों और जोखिमों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसका खुलापन है। हालांकि, हमें इस खुलेपन का दुरुपयोग करने वाले कुछ निहित स्वार्थों को अनुमति नहीं देनी चाहिये।”

प्रधानमंत्री ने भारत की मजबूती और डिजिटल संप्रभुता की चर्चा करते हुए कहा कि भारत साझा समृद्धि तथा सुरक्षा के लिये साझेदारों के साथ काम करने के लिये तैयार है। “भारत की डिजिटल क्रांति की जड़ें हमारे लोकतंत्र, हमारी जनवादिता और हमारी बढ़ती अर्थव्यवस्था में निहित है। इसे हमारे युवाओं की उद्यमिता और नवाचार से शक्ति मिलती है। हम अतीत की चुनौतियों को अवसर के रूप में बदल रहे हैं ताकि भविष्य में पदार्पण करने के लिये कमर कस लें।”

प्रधानमंत्री ने भारत में होने वाले पांच परिवर्तनों को गिनाया। पहला, दुनिया की सबसे विस्तृत जन सूचना अवसंरचना भारत में बनाई जा रही है। एक अरब 30 करोड़ से अधिक भारतीयों के पास विशिष्ट डिजिटल पहचान है, छह लाख गांवों को जल्द ब्रॉडबैंड से जोड़ दिया जायेगा और विश्व की सबसे कारगर भुगतान संरचना, यूपीआई भारत के पास है। दो, सुशासन, समावेश, अधिकारिता, संपर्कता, लाभों का अंतरण और जनकल्याण के लिये डिजिटल प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल। तीन, भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा और सबसे तेजी से विकसित होने वाला स्टार्ट-अप इको-सिस्टम है। चार, भारत के उद्योग और सर्विस सेक्टर, यहां तक कि कृषि क्षेत्र भी विशाल डिजिटल परिवर्तन से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम 5जी और 6जी जैसी दूरसंचार प्रौद्योगिकी में स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करने के लिये निवेश कर रहे हैं। कृत्रिम बौद्धिकता और मशीन-लर्निंग, खासतौर से मानव-केंद्रित तथा कृत्रिम बौद्धिकता के नैतिक उपयोग के क्षेत्र में भारत अग्रणी देशों में शामिल है। हम क्लाउड प्लेटफॉर्म्स और क्लाउड कंप्यूटिंग में मजबूत क्षमतायें विकसित कर रहे हैं।”

भारत की लचीली और डिजिटल सम्प्रभुता के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा, “हम हार्डवेयर पर ध्यान दे रहे हैं। हम प्रेरक तत्त्वों का एक पैकेज तैयार कर रहें, ताकि सेमी-कंडक्टर के मुख्य निर्माता बन सकें। इलेक्ट्रॉनिकी और दूरसंचार में हमारा उत्पादन प्रेरक योजनाओं से जुड़ा है। भारत में अपना केंद्र बनाने के लिये ये क्षेत्र पहले से ही स्थानीय और विश्व भर में फैली कंपनियां और संस्थायें आकर्षित कर रहे हैं।” उन्होंने डेटा सुरक्षा, निजता और सुरक्षा के लिये भारत की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “साथ ही, हम डेटा का इस्तेमाल लोगों को शक्तिसम्पन्न करने के स्रोत के रूप में करते हैं। व्यक्तिगत अधिकारों की मजबूत गारंटी के साथ लोकतांत्रिक संरचना में ऐसा करने का भारत के पास बेमिसाल अनुभव है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि वाई2के समस्या से जूझने में भारत का योगदान और को-विन प्लेटफॉर्म को पूरी दुनिया के लिये सहज रूप से उपलब्ध करने की पेशकश भारत के मूल्यों तथा उसके विजन की मिसाल हैं। उन्होंने कहा, “भारत की लोकतांत्रिक परंपरा बहुत पुरानी है; उसके आधुनिक संस्थान मजबूत हैं। और, हम हमेशा विश्व को एक परिवार मानते रहे हैं।”

श्री मोदी ने कहा कि जनकल्याण, समावेशी विकास और सामाजिक अधिकारिता के लिये प्रौद्योगिकी तथा नीति के उपयोग में भारत का अपार अनुभव है, जो विकासशील देशों के लिये बहुत सहायक हो सकता है। उन्होंने कहा, “हम देशों को और वहां के लोगों को शक्तिसम्पन्न बनाने में मिलकर काम कर सकते हैं तथा उन सबको इस सदी के अवसरों के लिये तैयार कर सकते हैं।”

लोकतांत्रिक देशों को मिलकर काम करने के लिये एक रोडमैप पेश करते हुये श्री मोदी ने “भावी प्रौद्योगिकी में अनुसंधान और विकास में मिलकर निवेश करने; विश्वस्त निर्माण आधार और विश्वस्त आपूर्ति श्रृंखला के विकास; साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में आसूचना और परिचालन सहयोग को मजबूत करने, लोक-मान्यता को तोड़ने-मरोड़ने को रोकने; हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों के तकाजों पर खरा उतरने वाले तकनीकी और शासन मानकों तथा नियमों के विकास; एवं, डेटा शासन और सीमाओं से परे आने-जाने वाले आंकड़ों की सुरक्षा के लिये मानकों तथा नियमों की रचना के सम्बंध में” सहयोगात्मक स्वरूप का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उभरती संरचना को “राष्ट्रीय अधिकारों को मान्य करना चाहिये तथा साथ ही कारोबार, निवेश और वृहद जनकल्याण को प्रोत्साहन देना चाहिये।”

इस संदर्भ में उन्होंने क्रिप्टो-करेंसी का उदाहरण दिया और कहा, “यह जरूरी है कि सभी लोकतांत्रिक देश क्रिप्टो-करेंसी पर साथ काम करें और यह सुनिश्चित करें कि यह गलत हाथों तक न पहुंच पाये, जो हमारे युवाओं को पथभ्रष्ट कर सकते हैं।”

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Prime Minister meets Padma Vibhushan awardee, legendary actress, Vyjayanthimala
March 04, 2024

The Prime Minister, Shri Narendra Modi met with Padma Vibhushan awardee, legendary actress, Vyjayanthimala and said that she is admired across India for her exemplary contribution to the world of Indian cinema.

In a X post, the Prime Minister said;

“Glad to have met Vyjayanthimala Ji in Chennai. She has just been conferred the Padma Vibhushan and is admired across India for her exemplary contribution to the world of Indian cinema.”