मा. मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के वरद हस्तों से

६३वें वन महोत्सव तथा श्री गोविंद गुरु स्मृति वन का लोकार्पण कार्यक्रम

मानगढ़ हिल, संतरामपुर तालुका, पंचमहाल

३० जुलाई, २०१२

 गोविंद गुरू की प्रेरणा से देश की आजादी की लड़ाई में जिन्होंने अपना रक्त बहाया है ऐसी इस पवित्र भूमि पर आए हुए मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा गुजरात से आए हुए मेरे सभी प्यारे आदिवासी भाइयों और बहनों...

हली बार ऐसा हो रहा होगा कि वन में कोई सरकार वन महोत्सव कर रही हो..! गुजरात सरकार ने एक विशेषता खड़ी की है, और विशेषता यह है कि वन महोत्सव के जरिए मात्र पर्यावरण और वृक्षों की बात करके रूकने के बजाए इस वन महोत्सव को सांस्कृतिक विरासत के साथ जोड़ा जाये, आम आदमी की श्रद्घा के साथ जोड़ा जाये और एक बार कोई बात श्रद्घा के साथ जुड़ जाती है, तो फिर उसके बाद उसके लिए कोई अभियान चलाने नहीं पड़ते। क्या आपने कहीं भी देखा है कि भाई, तुलसी को नुकसान न पहुँचाएं ऐसा बोर्ड कभी लगाना पड़ता है? नहीं, कारण कि सभी के मन में यह बात बैठ गई है कि तुलसी अत्यंत पवित्र होती है, भगवान का रूप होती है इसलिए उसे नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए। यह सब के दिमाग में बैठ गया है। एक बार किसी बात को लेकर श्रद्घा पैदा हो जाती है तो फिर समाज खुद ही उसका संरक्षण भी करता है, संर्वधन भी करता है। और इसलिए इस राज्य सरकार ने वन महोत्सव की कल्पना को ही बदल दिया है। दूसरी बात ये कि ये वन महोत्सव इतने सालों से चल रहे हैं तो वे समाज के लिए स्थायी रूप से उपयोगी गहना क्यों न बने? मात्र एक समारोह करके पांच-पचास वृक्षों को लगा कर चला जाया जाए या उसे एक यादगार स्मृति के रूप में तैयार करें, राज्य की संपत्ति को बढ़ाएं, सामाजिक जीवन की आवश्यकताओं में एक सुविधा प्रदान करना, ऐसे एक शुभ उद्देश्य को लेकर, एक सुखद उद्देश्य के लिए यह सरकार वन माहोत्सव कार्यक्रमों को भी समाज के लिए स्थायी रूप से व्यवस्थाएं विकसीत करने वाले एक नए रूप के साथ आई है।

प अंबाजी जाओ तो अंबाजी में धर्मशाला मिल जाती है, अंबाजी में मंदिर का आसरा मिल जाता है, पर परिवार के साथ किसी जगह पर खुले में बैठना हो तो जगह नहीं मिलती। वन महोत्सव तो करना ही था, तो हमने तय किया सालों पहले, कि अंबाजी के पास में कोई एक पहाड़ी हो, जिसे कोई देखता भी नहीं था और जाता भी नहीं था, वहाँ हम मांगल्य वन बनाएं। धीरे धीरे मांगल्य वन इनता बड़ा हो गया कि भादव की पूनम पर लाखों लोग जब अंबाजी के दर्शन के लिए जाते हैं तो ये मांगल्य वन उनके लिए मंगलकारी साबित हो गया है, आर्शीवाद रूप बन गया है। जैन समाज के यात्री, खास तौर पर दिगम्बर समाज, तारंगाजी की यात्रा करने जाते हों। तारंगा जा कर आप पहाड़ी को देखें तो एक भी झाड़ वहाँ देखने को नहीं मिलता और एक पट्टा तो एसा है कि जहाँ धूल ही उड़ती हो, वीरान भूमि, पत्थरों के ढेर... उसके बीच कोने खोपचे में पड़े मंदिर, ऐसी भग्नावस्था..! तांरगाजी जैसा तीर्थ स्थल, वहाँ हमने तय किया कि ‘तीर्थंकर वन’ बनाया जाएगा और 24 वें तीर्थंकर जिनको जिस पेड़ के नीचे बोध हो गया था, उस वृक्ष को बोया जाएगा और जो तीर्थ यात्री वहाँ भगवान महावीर की उपासना के लिए तांरगाजी आते हैं उन्हें कहा गया कि उन पौधों में थोड़ा-थोड़ा पानी चढ़ाते हुए जाएं, ये भी एक पुण्य का काम है और आज तीर्थंकर वन तैयार हो गया है। भाइयों और बहनों, श्रावण का महिना चल रहा है, भोलेनाथ को सब याद करते हैं। आप सोमनाथ जाओ तो समुद्र की खारी हवा चलती है, वहाँ भी हराभरा क्यों ना हो? सोमनाथ के मंदिर में कोई आता है, देश भर के लोग आते हैं तो सोमनाथ के मंदिर का वातावरण मनभावन क्यों ना बनाएं? एक वन महोत्सव हमने सोमनाथ में किया। हरिहर वन बनाया और केवल हरिहर वन ही नहीं बनाया, भगवान सोमनाथ को, भोलेनाथ को जो वृक्ष पसंद हों ऐसे वृक्ष भी लगाए गए, बेल के वृक्षों का घन खड़ा कर दिया गया। शामलाजी में हमारा कालिया, आपके आदिवासी भील समाज का कालिया, शामलाजी में विराजता है। उदयपुर या श्रीनाथजी आते जाते लोग अगर समय हो तो शामलाजी का चक्कर लगाते हैं, पर रूकते नहीं हैं। हमने शामलाजी में इस कालिया का वन बनाया, शामल वन बनाया और केवल इतना ही नहीं, विष्णु भगवान को रोज सुबह कमल के पुष्प चढ़ाए जाते हैं, ये ताजे पुष्प इस कालिया वन में मिले इसके लिए व्यवस्था की गई। आज कोई भी यात्री वहाँ जाए और अब तो वहाँ कैसा सुमेल है, टेक्नोलोजी का उपयोग किया गया है जिसके उपयोग से वहाँ जानेवाले बच्चे बॉटनी का अध्ययन कर सके और कियोस्क में एक्जाम देने के बाद स्वयं मार्क्स भी मिल सके ऐसी व्यवस्था की गई है। बच्चे शामलाजी के दर्शन भी करते हैं और साथ साथ इस बॉटनिकल गार्डन का दर्शन भी कर लेते हैं। भाइयों और बहनों, पालिताणा। तीर्थ क्षेत्र की यात्रा के लिए लोग आते हैं, पालिताणा के ऊपर जाते हैं, रास्ते में एक सुंदर अच्छी जगह चाहिए। हमने वहाँ पावक वनबनाया और पावक वन की विशेषता ऐसी की गई कि उसमें पूरे शरीर की रचना की गई और कौन सा औषधीय वृक्ष किस प्रकार के रोग के लिए काम में आता है... जैसे घुटना हो, तो शरीर में घुटने के पास वृक्ष लगाया, ह्दय की बीमारी में काम आने वाले वृक्ष को जहाँ ह्दय हो वहाँ बना दिया, आंख की बीमारी में काम करने वाला वृक्ष हो तो जहाँ आंख होती है वहाँ बना दिया..! गरीब से गरीब, अनपढ़ से अनपढ़, सामान्य से सामान्य व्यक्ति को भी समझ में आ सकता है कि शरीर के लिए उपयोगी कौन कौन से वृक्ष हैं, औषधी के रूप में कैसे उपयोग होता है और आज लोग इसके अभ्यास के लिए वहाँ आते हैं। घंटे दो घंटे वन में घूमें तो उन्हें ये पता चल जाता है कि इस वृक्ष का क्या महत्व है..! भाइयों और बहनों, ऐसे तो अनेक अभिनव प्रयोग किए हैं। चोटीला जाओ तो भक्ति वनदेखने को मिलता है। आप पावागढ़ आईये तो यहाँ पावागढ़ के अंदर विरासत वनबनाया गया है। वर्ल्ड हेरिटेज की जगह हो चंपानेर की, एक तरफ मां काली विराजमान हो और इन दोनों की साक्षी के रूप में खड़ा हो ऐसा हमने विरासत वन बनाया है।

र आज जब वन महोत्सव की बात आई तब गोविंद गुरू, भाइयों आदिवासियों की छाती गज भर फूल जाए ऐसा नाम, किसी भी भारत भक्त का सिर ऊंचा हो जाए ऐसा नाम। लेकिन बदकिस्मती से इतिहास के पन्नों में इस नाम को मिटा दिया गया। ज़्यादा से ज़्यादा पांच-पचास परिवार, या दो-चार महंत ही इन्हें याद करते होंगे इतना सीमित कर दिया था। इस क्षेत्र के लोग बारह महीने में एक बार शायद भक्तिभाव के कारण पूर्णिमा के मेले में आते हों उतनी ही उनकी गणना रह गई।  भाइयों और बहनों, यह एक एतिहासिक घटना है और इसकी शताब्दी पूरी होने जा रही है तब 1913 में, आज से निन्यानवे साल पहले, जिनका अब शताब्दी वर्ष शुरू हुआ है, इसी भूमि पर गोविंद गुरु की प्रेरणा से नि:शस्त्र समाज सुधारक के रूप में काम करने वाले भक्तों का समूह, संत सभा के लोग, इस संत सभा के लोग समाज को सुधारने का काम करते थे, अंग्रेज सल्तनत के सामने अपनी आवाज उठाते थे और गोविंद गुरू से ये अंग्रेज सल्तनत काँप गई। पंचमहल जिले के संतरामपुरा-दाहोद क्षेत्र में भेखधारी एक समाज सुधारक, वह चलता जाये, फिरता जाये, मिलता जाये, बात करता जाये और लोगों में एक नई चेतना जगाता जाये और उसका परिणाम क्या आया? सीधे लंदन तक खबर पहुंची कि यह एक ऐसा आदमी है जिसके पीछे पीछे ये आदिवासी भाईयों अपना जीवन कुर्बान कर देने के लिए तैयार हो गये हैं, आदिवासी अपनी जिंदगी देने को तैयार हो गये हैं और ये जो इतना बड़ा तोप का गोला यदि अंग्रेजों की ओर घूम गया तो उनका कत्लेआम हो जाएगा ऐसा डर था। गोविंद गुरू को सीधा करने के लिए षडंयत्र रचे गए। स्पेशल लोग नियुक्त किए गए, और यह तय किया गया कि गोविंद गुरू को खत्म कर दिया जाए। लेकिन गोविंद गुरू के भक्त ऐसे थे कि वे आदिवासी भाइयों ने भारत माता की आजादी के लिए अंग्रेजों के सामने झुकना पंसद नहीं किया, अंग्रेजों की फौज आई तो भागना पंसद नहीं किया, अंग्रेजो की फौज आई तो गोविंद गुरू को अकेला छोड़ कर भाग जाने की कोशिश नहीं की, बल्कि अंग्रेजों के सामने गए मेरे वीर आदिवासी, अंग्रेजों के सामने लड़े। उनकी तोप की नलियाँ थीं और बंदूक की नलियाँ थीं, गोलियोँ की बौछार चल रही थी और एक के बाद एक मेरे आदिवासी भाई शहीद होते गए पर गोविंद गुरू पर आंच ना आए इसके लिए अपना बलिदान देते गए। लाशों के ढेर लग गए। आप सोचो, जलियांवाला बाग से दोगुने लोग यहाँ शहीद हुए थे। जलियांवाला बाग का नाम तो इतिहास के पन्नों में शामिल है, पर मानगढ़ का कोई उल्लेख न हो इस तरीके से इतिहास को भूला दिया गया है, मेरे आदिवासी भाइयों को भूला दिया गया है। देश की आजादी के लिए मरने वाले बिरसा मुंडा हो कि गोविंद गुरू की प्रेरणा से शहीद होने वाले पन्द्रह सौ से ज्यादा मेरे भील युवा हों, इन सभी लोगों ने भारत माता को आजाद करवाने के लिए अपने जीवन समर्पित कर दिये थे, बलिदान दिया था पर इतिहास में इन्हें भुला दिया गया। और आज इस बात को ठोक बजाकर दुनिया के सामने मुझे लाना है। जब उनकी शताब्दी जब मनाई जाएगी, पूरा वर्ष आदिवासी समाज के लोग यहाँ आएगें, यात्राएं निकलती रहेंगी, लगातार यात्राएं चलेंगी और 2013 में जब शताब्दी वर्ष पूर्ण होगा तब हमें गर्व होगा कि महात्मा गांधी की शताब्दी हर कोई मनाता है, पंडित नेहरू की शताब्दी हर कोई मनाता है, महापुरुषों की शताब्दी हर कोई मनाता है पर कोई तो चाहिए जो गोविंद गुरू को, इस महान विरासत को, इस शहादत को, उन 1500 से ज्यादा अनाम लोग जिनकी किसी को खबर नहीं है वे अगर यहाँ शहीद हुए हों तो उन शहादत की शताब्दी भी मनानी चाहिए। गुजरात में कोई तो ऐसा है जिसको उनकी याद आयी है और उसे मनाना है। कुछ लोगों को ये लगता है कि ये सब तो चुनाव आ रहे हैं इसलिए हो रहा है। अब भैया, यह शताब्दी क्या हमने तय की थी..? चुनाव और शताब्दी दोनों साथ में आ जाएं तो क्या वह हमारा कसूर है..? वह 1912 में हुआ था और ये 2012 में आया, इसमें हमारा कोई अपराध है, भाई? और इन सारी बातों को चुनाव के साथ जोड़ कर, उसे राजनीति का रूप देकर, इन बलिदानों के महत्व को छोटा करने वाले लोग शहीदों का अपमान कर रहे हैं..!

भाइयों और बहनों, श्यामजी कृष्ण वर्मा, हिंदुस्तान में सशस्त्र क्रांति का जिसने नेतृत्व किया, वीर सावरकर जैसे महापुरूष जिसने दिए, मदन लाल धींगरा जैसे लोगों में वीरता को प्रेरित किया, भगतसिंह-सुखदेव-आजाद जैसे लोग जिनको प्रेरणा मानते थे वे श्याम कृष्ण वर्मा, अपने गुजरात के कच्छ का बेटा, अंग्रेजों के सामने लंदन में अंग्रेजों की नाक के नीचे आजादी की लड़ाई लड़ते थे, इस देश की सशस्त्र क्रांति करने वाले लोगों को शिष्यवृत्ति के द्वारा तैयार करते थे। वह श्यामजी कृष्ण वर्मा 1930 में जब गुजर गए तब लिख कर गए थे कि मुझे तो जीते जी आजादी देखने को नहीं मिल सकी, पर मेरी अस्थियों को संभाल कर रखना, मेरी हड्डियों को संभाल कर रखना और जब मेरा देश आजाद हो जाए तो मेरी अंतिम इच्छा है कि मेरी अस्थियां मेरे आजाद हिंदुस्तान की धरती पर ले जाई जाए, जिससे मुझे मोक्ष मिले, मुझे शांति मिले। ऐसा श्यामजी कृष्ण वर्मा लिख कर गए थे। 1930 में उनका स्वर्गवास हुआ और 1947 में देश आजाद हुआ। 15 अगस्त को तिरंगा झंडा फहराया गया उसके दूसरे ही दिन दिल्ली सरकार ने आदमी को भेज कर अस्थियां हिंदुस्तान लानी चाहिए थीं। मगर उन्हें शहीदों की पड़ी ही नहीं थी, देश के लिए जीने वाले, देश के लिए मरने वालों की परवाह नहीं थी और इसलिए श्यामजी कृष्ण वर्मा की अस्थियां वहाँ पड़ी रहीं। भाइयों और बहनों, ये सौभाग्य मुझे मिला, भारतमात के इस सपूत की अस्थियां मैं कंधे पर उठा कर विदेश की धरती से 2003 में यहाँ लेकर आया। और आज श्याम कृष्ण वर्मा का एक अत्यंत प्रेरक स्मारक कच्छ के मांडवी में बनाया गया है। कोई भी भारत माता को प्रेम करने वाला नागरिक वहाँ जाएं तो उसे देखते ही लगेगा कि ऐसे ऐसे थे हमारे वीर पुरूष..! आज हर साल हजारों की संख्या में विद्यार्थी श्यामजी कृष्ण वर्मा के इस स्मारक की मुलाकात लेते हैं, देश-दुनिया के पर्यटक श्यामजी कृष्ण वर्मा के इस स्मारक को देखने आते हैं। एक दिन ऐसा आएगा कि गोविंद गुरू की स्मृति में यहाँ जो स्मारक बना है, उनकी शहादत को याद किया है ऐसा ये शहीद वन स्मृति वन बना है, यहाँ भी देश और दुनिया के लोग उन पन्द्रह सौ से ज्यादा मेरे शहीद भील कुमारों पर हमेशा पुष्प वर्षा करने के लिए इस धरती पर आएंगे, ऐसा वातावरण बनाने का काम मैंने किया है।

भाइयों और बहनों, आजादी को इतने साल हो गए, इतने सारे समाज सुधारक हुए। आप देखिए  हमने वहाँ एक  छोटा सा प्रदर्शन रखा है। उस जमाने में गोविंद गुरू की कैसी प्रेरणा देते थे, कैसे वचन कहते थे..! ये वचन आज भी काम में आए ऐसे शब्द वे उस समय कहते थे,एक-एक बात पर अमल हो इसके लिए भगत पंथ चला कर भक्तों को तैयार करके समाज सुधार का काम करते थे। और जीवन के कितने साल जेल में बिताए, अहमदाबाद की साबरमती जेल में भी रहे। अंग्रेज सरकार को डर लगा तो हैदराबाद की जेल में भेज दिया, हैदराबाद की जेल में जिंदगी गुजारने पर मजबूर किये गए थे। ये गोविंद गुरू, उन्हें भूला दिया गया है। आदिवासियों के कल्याण के लिए अपना जीवन खपा देने वाले व्यक्ति को इस देश में भूलाया नहीं जाएगा। आने वाली पीढिय़ां याद रखे इसके लिए हमने सकंल्प किया है और यह बात हम पहुँचाना चाहते हैं। शहादत व्यर्थ नहीं जा सकती और जब भील कुमारों को पता चलेगा कि उनके पूर्वजों ने कितना बड़ा बलिदान दिया था, तब जैसे एकलव्य से प्रेरणा ली जाती है वैसे ही गोविंद गुरू से भी प्रेरणा मिलेगी ऐसा मुझे विश्वास है।

भाइयों और बहनों, आजादी के इतने सारे सालों में आदिवासियों का कल्याण करने में ये सभी सरकारें निष्फल रही हैं। आदिवासियों के नाम पर विपुल मात्रा में वोट ले गए, पर आदिवासियों के जीवन में बदलाव नहीं आया। इस सरकार ने प्रयास किया है कि आदिवासियों के घर तक पीने का पानी कैसे पहुंचे, आदिवासियों के खेतों तक सिंचाई का पानी कैसे पहुंचे, आदिवासियों को रहने के लिए घर कैसे मिले, पेड़ों के नीचे जिंदगी गुजारने वाले आदिवासियों को अपना घर किस तरह से मिले ये चिंता इस सरकार ने की है। भाइयों और बहनों, शून्य से सोलह तक के गरीबी रेखा के नीचे जीवन गुजारने वाले सभी आदिवासियों को मकान देने का काम पूरा कर दिया गया है। और अब उठाने वाले हैं, सत्तरह से बीस के बीच आने वाले लगभग दो लाख से ज्यादा आदिवासीयों को घर देने का काम, जो आने वाले दिसंबर तक हम पूरा करने वाले हैं। आप सोचिए, पचास सालों में जो काम कोई नहीं कर सका है, वो काम करने के लिए संघर्ष उठाया है और ये काम का लाभ लोगों को मिले इसके लिए काम किया है। 15,000 करोड़ रूपये का पैकेज, वनबंधु कल्याण योजना में नियत किए गए थे 15,000 करोड़ और पहुँचाया 18,000 करोड़ और अब तो मामला 40,000 करोड़ रूपये तक पहुँच गया है, 40,000 करोड़ रुपये मेरी आदिवासी जनता के लिए। भाइयों और बहनों, समाज को लड़वाने के लिए आरक्षण के नाम पर दंगे करवाते हैं, सब कुछ करते हैं, दूसरों को उकसाने की बातें करते हैं। लेकिन मेरे आरक्षण का लाभ कैसे मिल सकता है, भाइयों? मेरे आदिवासी बेटे को डॉक्टर बनना है, मेरे आदिवासी बेटे को इंजीनियर बनना है, तो पहले बारहवीं कक्षा तक की विज्ञान प्रवाह की स्कूल तो होनी चाहिए की नहीं..? आपको जानकर दु:ख होगा भाइयों-बहनों, उमरगांव से अंबाजी तक की पूरी आदिवासी पट्टी में विज्ञान संकाय की एक भी बारहवीं कक्षा नहीं थी। मैं जब 2001 में आया तब इस राज्य में 45 तालुके ऐसे थे जहाँ पर बारहवीं कक्षा में विज्ञान संकाय वाला विद्यालय ही नहीं था। जब बारहवीं कक्षा में विज्ञान संकाय ही नहीं है तो डॉक्टर या इंजीनियर कैसे बना जा सकता है? आरक्षण का लाभ कैसे मिलेगा? और आरक्षण के नाम पर झगड़ा करके अपनी राजनीति चलाते रहते हो लेकिन आदिवासियों का भला कभी नहीं किया। भाइयों और बहनों, हमने उन 45 के 45 तालुकाओं में विज्ञान संकाय की बारहवीं कक्षा के विद्यालय प्रारंभ करवाए और इसका परिणाम ये आया कि आज मेडिकल, इंजीनियरिंग की आदिवासियों की सभी सीटें भरने लगी। आदिवासी लडक़े इंजीनियर बने, आदिवासी लडक़े डॉक्टर बने इस दिशा में हमने काम किया। नर्सिंग की कॉलेज प्रारंभ की, आदिवासी क्षेत्र में आई.टी.आई. प्रारंभ की, आदिवासियों के बच्चे आज पढ़ें और आगे बढें इसकी चिंता की।

क जमाना था, मेरे पंचमहाल तालुका के आदिवासी 44 डिग्री तापमान होने पर भी रोड का काम करने के लिए, डामर का काम करने के लिए शहरों में तपते थे, चिलचिलाती धूप में डामर की सड़क बनाने का काम करते थे, ऐसे दिन थे। आज मुझे गर्व के साथ कहना है कि दाहोद और पंचमहाल जिले का एक भी ऐसा तालुका नहीं है कि जहाँ पर मेरे आदिवासी आज रोड कांन्ट्रेक्टर नहीं बने हो। जेसीबी लाने लगे हैं । अभी एक सदभावना मिशन के कार्यक्रम में मेरे इस गरीब समाज के लोग मुझे मिलने आए थे, बक्षीपंच के गधे चराने वाले और गधे पर मिट्टी उठा कर ले जाने वाले लोग मुझे मिलने आए थे। और मेरे लिए एक खिलौना लेकर आए थे, सदभावना मिशन में प्लास्टिक का खिलौना मुझे भेंट दिया। मैं हँस पड़ा, मैंने कहा कि आप लोगों ने मुझे यह प्लास्टिक की जेसीबी मशीन का खिलौना क्यों दिया? मेरे परिवार में तो खेलने वाला कोई नहीं है, मुझे हँसी आ गई। तो मुझे कहा कि साहब, हम ये जेसीबी का खिलौना इसलिए लाए हैं कि पहले हम गधे चराते थे, आपकी सरकार में ऐसी प्रगति हुई कि हमारे घर में भी जेसीबी आ गई उसका नमूना आपको बताने के लिए लाए हैं, उसका आभार व्यक्त करने के लिए आएं हैं। आज मेरे पंचमहाल के, दाहोद के आदिवासी तथा सभी तालुका में देखना मित्रों, आज मेरे आदिवासी रोड के कान्ट्रेक्टर बन गए हैं, कल तक मजदूरी करते थे। मेरा डांग जिला, आदिवासी भाइयों, इनके कल्याण के लिए कोई योजना ही नहीं थी। हमने डांग जिले में दूध  उत्पादन के काम शुरू किए, गाय-भैंसे देने की दिशा में काम किए। आज मेरे डांग जिले का आदिवासी स्वावलम्बी हो गया है। हमने दाहोद जिले में अभियान शुरू किया है, दूध उत्पादन करने की क्षमता बढ़े, दुधारी पशु उपलब्ध हों इसके लिए काम शुरू किए। हम एक ओर आदिवासी भाइयों को दूध उत्पादन के लिए गाय-भैंस प्रदान कर रहे हैं, वहीं दिल्ली सरकार ने क्या शुरू किया है, जानते हैं? दिल्ली सरकार ने कसाईखानों को सब्सिडी देने का काम शुरू किया है। पचास करोड़ रूपया कसाईखानों के लिए सब्सिडी दे रहे हैं तथा गाय का मांस विदेश में भेजो तो सब्सिडी दी जाती है और लाखों टन गाय का मांस विदेश भेजने का काम ये दिल्ली की सरकार कर रही है। यह देश तो ऐसा है कि जब 1857 की क्रांति हुई थी, वह गाय की चर्बी के ऊपर क्रांति हुई थी, बुलेट पर गाय की चर्बी है इतनी बात मात्र से हिंदुस्तान जाग गया था। इसी हिन्दुस्तान में आज दिल्ली की सरकार गाय का मांस विदेश भेजने के लिए प्रोत्साहक इनाम दे रही है..! इस बदकिस्मती के साथ देश जी रहा है तब मेरे भाइयों-बहनों, गौ माता की रक्षा के लिए गोविंद गुरू ने जिदंगी दे दी थी। गाँव-गाँव जाकर गौ पालन के लिए ज्ञान देने का काम गोविंद गुरू ने किया था। इन गोविंद गुरू से प्रेरणा लेकर इतने लोग शहीद हो गए और अंग्रेज सरकार के नाक में दम कर दिया था उस मानगढ़ भूला नहीं सकते। इस मानगढ़ ने ही गुजरात का सम्मान बढ़ाया है, इस गुजरात का गौरव बढ़ाने का काम मानगढ़ के मेरे शहीदों ने किया है। उस शहादत याद करते हुए यह ‘शहीद स्मृति वन’ हमने समर्पित किया है।

भाइयों और बहनों, पर्यावरण के सामने लडऩा है तो वृक्ष बचाने पड़ेंगे, वृक्ष लगाने पड़ेंगे। बारिश की खींच के चलते जीव कैसा व्याकुल हो जाता है..? समाज का कोई ऐसा वर्ग नहीं है जो बारिश की खींच के चलते दु:खी नहीं होता हो। राजा हो या रंक हो, बरसात कम हो तो हर कोई दु:खी होता है, हर एक के मन में पीड़ा होती है कि भाई, अब बरसात हो तो अच्छा है। कुछ निकम्मे लोग भी होते हैं, ये लोग यज्ञ करते हैं, यज्ञ करके भगवान से प्रार्थना करते हैं कि बरसात न हो तो अच्छा है, तो हमें चुनाव में आसानी रहे, बोलो ऐसी बात..! अरे भाई, चुनाव जीतने के लिए इस जनता को दु:ख में नहीं डाल सकते, इस जनता को कष्ट हो ऐसा नहीं कर सकते। अरे, चुनाव तो आएंगे और जाएंगे, पर मेरा ये समाज तो अविनाशी है। यदि इसे पानी ईश्चर की कृपा से नहीं मिलेगा तो कितनी विपदाएं आएंगी, हम सब प्रार्थना करें, गोविंद गुरू के धाम में प्रार्थना करें कि ईश्वर हमें बरसात का प्रसाद दें और हमारा गुजरात हराभरा बनने कि दिशा में आगे बढ़े, इसका अवसर हम लें। बरसात तो ईश्वर की दी हुई सबसे बड़ी कृपा है, इसके बिना जीवन संभव ही नहीं हो सकता। इस पानी के लिए पूजा इस समाज के भविष्य की गारंटी का एक साधन है। भाइयों और बहनों, विकास का मार्ग हमने लिया है, विकास के मार्ग पर जाना है, हमारे आदिवासियों की जिंदगी बदलनी है..! अभी भारत सरकार ने एक आंकड़ा जारी किया। भारत सरकार ने कहा कि पूरे देश में जो बेरोजगारी है, इसमें कम से कम बेरोजगारी कहीं है तो उस राज्य का नाम है गुजरात। यदि हमने विकास नहीं किया होता तो राज्य के नौजवानों को रोजगार नहीं मिला होता। और अगर नौजवानों को रोजगार नहीं मिलता है तो उनके परिवार की स्थिति नहीं बदलेगी और इसलिए हमारा प्रयास है कि युवाओं को रोजगार मिले। वनबंधु कल्याण योजना के जरिए, स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम के जरिए, कौशल वर्धन के कार्यक्रमों के जरिए प्रत्येक नौजवान को काम सिखाना है ताकि पत्थर पर लात मार कर पानी निकाल सके ऐसी ताकत इनमें आए। इस ताकत को खड़ी करने का काम उठाया है।

भाइयों और बहनों, मानगढ़ जैसा वीरान प्रदेश, यहाँ पहुँचना भी कठिन है और एक पर्वत की छोटी सी चोटी पर जिस तरह से मैंने जन सैलाब देखा, हैलिकाप्टर से मैं देख रहा था कि कितने सारे आदमी खड़े थे, अंदर तो कुछ भी नहीं है। इतना बड़ा जन सैलाब, गोविंद गुरू की याद ताजा करने का हमारा जो सपना था उसका बीज बोया गया है, दोस्तों। अब गोविंद गुरू को कैसा भी ताकतवर आदमी आए तो भी भूला नहीं पाएगा। इतिहास के पन्नों से शहादत की बात को मिटाने की कोशिश करने वाले लोग अब नाकाम होंगे ऐसा ये दृश्य मुझे नजर आ रहा है। इतिहास के पन्नों से शहादत को कोई मिटा नहीं सकेगा, सशस्त्र क्रांति के वीरों को भूला नहीं जा सकता, भारत के वीरत्व को भूला नहीं जा सकता, आदिवासियों के बलिदान का भूला नहीं जा सकता, आदिवासियों की यशगाथा को भूला नहीं जा सकता और ये बड़ा काम गोविंद गुरू की धरती पर हमने किया है। मेरे आदिवासी भाइयों और बहनों, आओ, सिर्फ जंगलों को बचाना ही नहीं है, वृक्ष भी बढ़ाने हैं। यहाँ आपने देखा होगा कि एक एक गाँव को, किसी को पन्द्रह लाख, किसी को बीस लाख रूपये मिल रहे हैं। ये सरकार की योजना का लाभ लें। इतने सारे वृक्ष उगाओ, प्रत्येक वृक्ष से पैसा कमाओ, ये सरकार आपको पैसे देती है, लाखों रूपये देती है। एक एक गाँव को पन्द्रह-पन्द्रह, बीस-बीस लाख रूपया मिलता है वो आपने देखा मेरे सामने। इतने सारे रूपयों की वर्षा हो रही हो तो वृक्ष उगाने की बात में हम कमी न बरतें। वन विभाग के मित्रों को भी मानगढ़ जैसी इस जगह पर गोविंद गुरू की याद में... और यह सारी नौकरी से ऊपर की बात है। नौकरी में तो सब चलता है, पर आपने आज एतिहासिक काम किया है, सिर्फ नौकरी नहीं की है, दोस्तों। और किसी एतिहासिक काम के साक्षी बनने में जीवन का अपूर्व आनंद मिलता है। आप भी भविष्य में आपके संतानों को यहाँ दिखाने लाएंगे कि मैं जब नौकरी करता था तब हमने यह एक महान एतिहासिक काम किया था, ऐसा भाव पैदा होने वाला है। पीढ़ी दर पीढ़ी ये संस्कार पहुँचने वाले हैं और इस काम को जब हमने महसूस किया है तब फिर एक बार मेरे साथ ‘गोविंद गुरू अमर रहे’ का नारा लगाएं, फिर मैं कहूँगा ‘शहीदों’ तब आप ‘अमर रहो’ कहना...

 

गोविंद गुरू, अमर रहो... गोविंद गुरू, अमर रहो...!

हीदो, अमर रहो...हीदो, अमर रहो...हीदो, अमर रहो...!

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
Chronic therapies power 11% growth in Indian pharma market in May

Media Coverage

Chronic therapies power 11% growth in Indian pharma market in May
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
दमन ‘मिनी इंडिया’ का जीवंत उदाहरण बन गया है: पीएम मोदी
June 05, 2026
हेल्थकेयर, एविएशन, टूरिज्म और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट्स की शुरुआत दमन के लिए विकास को नई गति देने वाली पहल है, जो केंद्र शासित प्रदेश के लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगी: पीएम
आज जारी किए गए आंकड़े भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं। FY 2025-26 में 7.7% और 31 मार्च को समाप्त तिमाही में 7.8% की ग्रोथ दर्ज की गई है: पीएम
वैश्विक स्तर पर गंभीर चुनौतियों के बावजूद, 140 करोड़ भारतीयों के सामूहिक प्रयासों ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत न केवल मजबूती से आगे बढ़ रहा है, बल्कि दुनिया से एक कदम आगे भी बना हुआ है: पीएम
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे सरकार के हेल्थकेयर पर फोकस को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। पहले भारत में अधिकांश डिलिवरी अस्पतालों के बाहर होती थीं, लेकिन आज देश में 90% से अधिक डिलिवरी अस्पतालों में हो रही हैं: पीएम
मिशन इंद्रधनुष की बदौलत भारत में बच्चों के टीकाकरण का कवरेज 2014 से पहले के 60% से बढ़कर आज करीब 90% तक पहुंच गया है: पीएम

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव के एडमिनिस्ट्रेटर प्रफुल्ल भाई पटेल, संसद में मेरी सहयोगी कलाबेन डेलकर, दमन Municipal Council की President दीपिका टंडेल जी, दमन जिला पंचायत के अध्यक्ष धर्म बाबू पटेल, सिलवासा Municipal Council के अध्यक्ष सोमनाथ देवरे जी, दादरा नगर हवेली जिला पंचायत के अध्यक्ष निशा भावसार जी, दीव Municipal Council के अध्यक्ष हरीश कपाड़िया जी, दीव जिला पंचायत के अध्यक्ष कोटिया रंजिताबेन और यहां इतनी विशाल संख्या में पधारे मेरे प्यारे भाइयों-बहनों,

आप जैसे यहां इकट्ठे हुए हैं, वैसे ही लक्षद्वीप में भी बहुत बड़ी तादाद में लोग वीडियो के माध्यम से हमारे साथ जुड़े हुए हैं, क्योंकि आज लक्षद्वीप के विकास की भी एक नई शुरुआत, एक नए प्रकल्‍प, जो पूरे लक्षद्वीप के जीवन में एक क्रांतिकारी काम करने वाले हैं, उसके लिए भी कुछ योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है।

साथियों,

कुछ साल पहले, जब मैं आपके बीच आया था, तो मैंने कहा था यह हमारा दमन तेजी से मिनी इंडिया बन रहा है और आज मैं देख रहा हूं, बाईं तरफ पूरा बंगाल है और दाहिने तरफ पूरा असम है। दमन मिनी इंडिया का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। यहां की विविधता, अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों का यहां निवास करना, पूरे भारत की सुंदर सी झलक आपके बीच आकर के मिल जाती है। आप सब इतनी बड़ी संख्या में हमें आशीर्वाद देने आए, मैं इसके लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।

भाइयों-बहनों,

मुझे कई बार दमन और दीव आने का अवसर मिला है। दादरा और नगर हवेली भी आता रहता हूं और जब मैं मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री नहीं था, तब तो बहुत बार आता था। लेकिन अब जब मैं यहां आता हूं और यहां के सुशासन को देखकर, गवर्नेंस मॉडल को देखकर बहुत अच्छा लगता है। हर बार मुझे लगता है कि पिछली बार के मुकाबले यह क्षेत्र विकास की राह पर मीलों आगे बढ़ गया है।

साथियों,

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव ने दशकों से विकास के सपने देखे थे। जो सपने पहले देखे, वो पीढ़ियां तो चली गईं। लेकिन आज जो पीढ़ी है, वो अपनी आंखों के सामने देख रही है कि उनके मां-बाप, दादा-दादी जो सपने देखते थे, वो आज सपने पूरे होते हुए आप अपनी आंखों से देख रहे हैं। आज भी यहां कनेक्टिविटी, हेल्थ, एजूकेशन, टूरिज्‍म और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर इन से जुड़ी अनेक परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ है। विकास के यह काम दमन और पूरी यूनियन टेरिटरी के लिए यहां के लोगों के जीवन को आसान बनाएंगे। इनसे युवाओं के लिए नए अवसर तैयार होंगे। इन कामों के पीछे प्रफुल्ल भाई पटेल की दृष्टि, उनकी और उनकी टीम की मेहनत साफ-साफ नजर आती है। मैं इसके लिए भी प्रफुल्ल भाई और उनकी पूरी टीम की सराहना करता हूं। मैं सभी को लक्षद्वीप के लोगों को, दादरा-नगर हवेली के लोगों को अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं, आप सबको बधाई देता हूं।

साथियों,

आज आपके बीच आया हूं, तो एक सुखद खबर आई है। मैं तो आज सुबह दिल्ली से निकल चुका था, लेकिन अभी जो आंकड़े सामने आए हैं, जो खबर आई है, वो सचमुच में प्रसन्नता करने वाली है और मैं भी चाहता हूं, यह खुशी आपके साथ भी बाटूं। आज जो आंकड़े आए हैं, उन आंकड़ों से साफ है कि भारत की अर्थव्यवस्था की नींव कितनी मजबूत है। वर्ष 2025-26 में यानी जो फाइनेंशियल ईयर पिछला पूरा हुआ, वर्ष 2025-26 में भारत ने 7.7 परसेंट की ग्रोथ रेट हासिल की है, 7.7 और पिछला क्वार्टर जो 31 मार्च को खत्म हुआ, उसमें भी भारत की ग्रोथ 7.8 परसेंट रही है, 7.8 और यह दुनिया में तेज गति से आगे बढ़ने वाली बडी इकोनॉमी है। हर भारतीय को गर्व हो, यह है उसकी गति। आज देश जिस रिफॉर्म एक्‍सप्रेस पर चल रहा है, आज देश में इंफ्रास्ट्रक्चर का जो इतना विकास हो रहा है, गरीब कल्‍याण को लेकर इतने बड़े स्‍तर जो काम चल रहा है, इन सारे प्रयासों का परिणाम है कि आज देश बड़ी इकोनॉमी में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है और हम सब जानते हैं, दुनिया संकटों में घिरी हुई है, सारी दुनिया की अर्थव्यवस्था सवालिया निशानों के नीचे दबी पड़ी है, वैश्विक संकट के इस बुरे से बुरे दौर में भी 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक प्रयासों से भारत खुद को संभाल तो पा ही रहा है, लेकिन साथ-साथ सबसे आगे रहने में भी उसके प्रयास सफल होते जा रहे हैं। मैं देशवासियों को आर्थिक क्षेत्र की इस नई ऊंचाई को प्राप्त करने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं और मैं देश को फिर आश्‍वस्‍त करता हूं कि देश दुनिया भर में चल रहे इन संकटों का सामना करते हुए Reform, Perform और Transform के रास्ते पर ऐसे ही दृढ़ संकल्प के साथ, तेज गति से आगे बढ़ता ही रहेगा, यह मेरी देशवासियों को गारंटी है।

साथियों,

आज हमारे लिए विकास जितना जरूरी है, उतना ही अहम है हमारे विकास का मॉडल सस्टेनेबल हो। आज वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे के दिन हमारे यहां यूनियन टेरिटरी स्टेट इस संकल्प को साकार कर रहा है। आज एक ओर यहां हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं को लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। साथ ही यहां करीब एक लाख एक पेड़ मां के नाम, एक लाख पौधे भी लगाए जा रहे हैं। मुझे गर्व है कि एक ऐसा केंद्र शासित प्रदेश हैं, जिसने सरकारी इमारतों में शत प्रतिशत, 100 परसेंट सौर ऊर्जा के इस्तेमाल की उपलब्धि हासिल की है। आज दीव में दिन में जितनी बिजली की डिमांड होती है, वो सोलर पॉवर से ही पूरी हो रही है और हमें तो इसे और आगे लेकर के जाना है। घरों में भी सोलर ऊर्जा से बिजली मिले, यही नहीं अतिरिक्त बिजली से परिवार की आय भी हो, इसके लिए रूफटॉप सोलर प्लांट्स लगाने की पहल शुरू हुई है। मैं इन उपलब्धियों के लिए भी आप सबकी सराहना करता हूँ।

साथियों,

साथ-साथ मुझे यह भी बताया गया है, दमन के लोग इन दिनों यहाँ स्वच्छता अभियान भी चला रहे हैं। यह दिखाता है कि स्वच्छता किस तरह दमन के जनजीवन में संस्कार बन चुका है और यह संस्कार स्वच्छता में नजर आ रहे हैं। मैं इस जनभागीदारी के आपके प्रयासों के लिए दमन के लोगों का अभिनंदन करता हूँ।

साथियों,

दादरा नगर हवेली, दमन और दीव, यह संघ शासित प्रदेश होने के साथ ही भारत की पहचान और विरासत भी हैं। इसलिए, इसके विकास के लिए हमारे लक्ष्य भी साधारण नहीं हैं। मुझे याद है, जब मैं पिछले साल सिलवासा आया था, तब मैंने आपको सिंगापुर का उदाहरण दिया था। मैंने कहा था कि एक समय सिंगापुर मछुआरों का छोटा सा गांव था। लेकिन, सिंगापुर के लोगों ने एक सपना देखा, वहां के लोगों ने बड़ा लक्ष्य तय किया और आज वही सिंगापुर दुनिया का सबसे बड़ा बिज़नस हब बन चुका है। आज दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव भी वही सपना देख रहे हैं। ये नमो एयरपोर्ट, दमणगंगा नदी पर बनने वाला आइकॉनिक ब्रिज, ‘बीच फ्रंट’ उस पर बनने वाला कन्वेंशन सेंटर, ऐसे सभी इनफ्रास्ट्रक्चर के जरिए हम भविष्य के बड़े संकल्पों की नींव रख रहे हैं। इन प्रोजेक्ट्स के जरिए आप लोगों की आवाजाही आसान होगी। यहाँ बिज़नेस के लिए नई संभावनाएं बनेंगी। दमन के दोनों किनारों पर विकास की गति और तेज होगी।

साथियों,

यहाँ hospitality economy से जुड़े अवसर बढ़ेंगे और साथ ही ट्रांसपोर्ट नगर जैसी सुविधा से व्यापार, लॉजिस्टिक्स को भी नई गति मिलेगी।

साथियों,

इस क्षेत्र में ब्लू इकॉनमी के लिए हमने जो विज़न तैयार किया है, वो विज़न भी हाइटेक इनफ्रास्ट्रक्चर की ताकत से ही साकार होगा। इसीलिए, लक्षद्वीप के कलपेनी और कदमत द्वीपों में भी आज ही आधुनिक पोर्ट्स की आधारशिला रखी जा रही है। यह सभी प्रयास ब्लू इकॉनमी में देश की ताकत को बढ़ाएँगे और जैसा मैंने कहा यह लक्षद्वीप का भाग्‍य बदलने वाले initiative हैं।

साथियों,

भाजपा की सरकार में, एनडीए की हमारी सरकार में हमारे लिए विकास की पहली कसौटी है- गरीब, वंचित, आदिवासी और मिडिल क्लास के जीवन में बदलाव! इसके लिए, हेल्थ सेक्टर हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता है। बीते वर्षों में देश हेल्थ केयर के लिए होलिस्टिक विजन लेकर आगे बढ़ा। हमने इलाज से जुड़ी हर चिंता का समाधान किया है। आज गरीब से गरीब के पास भी आयुष्मान कार्ड की सुविधा है। उनके पास 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज का भरोसा है। बीमारी की समय से जांच हो सके, इसके लिए, प्रधानमंत्री आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की व्यवस्था है। जन औषधि केन्द्रों के जरिए सस्ती दवाइयाँ भी मिल रही हैं। ये सुविधाएं और बेहतर हों, और आधुनिक हों, इसके लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के जरिए आज स्वास्थ्य सेवाओं को टेक्नॉलॉजी से जोड़ा जा रहा है।

साथियों,

आयुष्मान कार्ड और जन औषधि केंद्रों से ही गरीब और मध्यम वर्ग के करीब सवा दो लाख करोड़ रुपए खर्च होने से बचे हैं।

भाइयों-बहनों,

केंद्र सरकार की नीतियों का बहुत लाभ इस क्षेत्र के लोगों को भी हुआ है। एक समय यहां इलाज की अच्छी सुविधाओं का भी अभाव था। यहाँ मेडिकल कॉलेज तक नहीं था। लेकिन, अब मेडिकल कॉलेज भी है और उसमें post-graduation की पढ़ाई भी शुरू हो गई है। सिलवासा का नमो हॉस्पिटल पिछले साल से हजारों लोगों की सेवा कर रहा है। आज दमन में भी नमो हॉस्पिटल का लोकार्पण हुआ है। इस क्षेत्र के लोगों को भी अब और बेहतर हेल्थ केयर का लाभ मिलेगा।

साथियों,

हमारी सरकार कैसे स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए चल रही है, इसका एक प्रमाण नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के नतीजों में भी मिलता है। एक समय भारत में ज़्यादातर बच्चों की डिलिवरी अस्पताल में नहीं होती थी। आज देश में 90 प्रतिशत से अधिक डिलिवरी अस्पतालों में हो रही है, जिसके कारण माता मृत्यु या नवजात की मृत्यु में बहुत बड़ी रुकावट आई है। मिशन इंद्रधनुष की वजह से बच्चों के टीकाकरण के क्षेत्र में भी भारत ने अच्छी प्रगति की है। 2014 से पहले केवल 60 प्रतिशत बच्चों का पूर्ण टीकाकरण हो पाता था। आज यह आंकड़ा बढ़कर करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच गया है। स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव आया है। 2014 से पहले 30 प्रतिशत से भी कम परिवार स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़े हुए थे। आज आयुष्मान भारत, उन आंकड़ों को भी बदल दिया है। अब 60 प्रतिशत से अधिक परिवारों को ये सुरक्षा मिल रही है।

साथियों,

स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार के इन प्रयासों का लाभ अगर किसी को सबसे ज्यादा मिला है, तो वो मेरे देश की नारी शक्ति है।

साथियों,

पहले इस क्षेत्र के युवाओं को हायर एजुकेशन के लिए भी बाहर जाना पड़ता था। लेकिन, आज यहाँ नेशनल लेवल के, एक नहीं कई इंस्टीट्यूट बन चुके हैं। पिछले वर्षों में यहां स्कूलों की नई बिल्डिंग्स बनी हैं, स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम भी बने हैं। 40 हजार से अधिक विद्यार्थियों को इनका लाभ मिल रहा है। मुझे खुशी है कि केंद्र शासित प्रदेश धीरे-धीरे एजुकेशन के क्षेत्र में आगे आ रहा है। स्वामी विवेकानंद एजुकेशन हब जैसे कई निर्माण यहाँ हो रहे हैं।

भाइयों-बहनों,

इस शिक्षा क्रांति में हमारी बेटियाँ पीछे न रहें, ये भी हमारा संकल्प है। इसके लिए कई बड़े प्रयास किए जा रहे हैं। सरस्वती साइकिल स्कीम, सरस्वती विद्या योजना, यहां की बेटियों को बहुत मदद कर रही है।

साथियों,

आज भारत की कोशिश है कि देश के युवाओं को डिग्री के साथ ही सही दिशा भी मिले। उन्हें ऐसा एक्सपोजर मिले, जो लोकल टैलेंट को ग्लोबल अवसरों से जोड़े। डिजाइन, लॉ, इंजीनियरिंग, मेडिकल एजुकेशन, आईटी, ड्रोन और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में हमारी आज की तैयारी भारत की वर्कफोर्स को मजबूत बनाएगी। इसलिए प्रोफेशनल संस्थानों का विस्तार बहुत महत्वपूर्ण है।

साथियों,

आज NIFT के अठारहवें campus की आधारशिला रखी गई है। ये संस्थान यहां के युवाओं को ग्लोबल एक्सपोजर से जोड़ेगा। आई.टी.आई. दमन में ड्रोन टेक्नीशियन जैसे नए कोर्सेस भी शुरू हुए हैं। पीएम विश्वकर्मा और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, इनसे जुड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम्स का लाभ भी युवाओं को मिल रहा है।

साथियों,

देश में खेलों को भी नई सोच के साथ आगे बढ़ाया गया। हमारे खेल अब केवल बड़े शहरों या बड़े स्टेडियमों तक सीमित नहीं हैं। खेलो इंडिया जैसे प्रयासों ने युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का नया मंच दिया है। इससे छोटे-छोटे क्षेत्रों में नेशनल लेवल पर खेल के जगत में हमारे बच्चे आगे आ रहे हैं और इसका भी लाभ इस क्षेत्र को हुआ है। दीव आज beach sports का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। घोघला बीच पर हुए Beach Games ने भी देश का ध्यान इस क्षेत्र की ओर खींचा है। आज यहां आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार काम हो रहा है। खानवेल में फुटबॉल सेंटर और दमन में वॉलीबॉल ट्रेनिंग सेंटर यहां खेल संस्कृति को मजबूत कर रहे हैं।

साथियों,

आज देश का बहुत बड़ा फोकस टूरिज्म पर भी है। हमारा प्रयास है कि टूरिज्म से स्थानीय कला और संस्कृति को बढ़ावा मिले। छोटे-छोटे स्थानों को भी बड़े-बड़े अवसरों से जोड़ा जा सके। ‘देखो अपना देश’ जैसे प्रयास ने लोगों को देश की विविधता के बारे में जानने के लिए प्रेरित किया है। आज भारत में हैरिटेज टूरिज्म, ‘बीच टूरिज्म’, इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, इन सेक्टर्स को नई ऊर्जा मिल रही है।

साथियों,

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव में तो पर्यटन भी इतनी असीम संभावनाओं वाला एक क्षेत्र है। इस क्षेत्र को प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत वरदान मिला है। इसीलिए पर्यटन को लेकर देश ने जिन नीतियों पर काम किया है, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव को उसका बड़ा लाभ मिल रहा है। 2021 में यहां करीब 6 लाख टूरिस्ट आए थे। 2025 में ये संख्या बढ़कर लगभग 50 लाख तक पहुंच गई है। यानी कुछ ही वर्षों में टूरिज्म फुटफॉल में करीब 10 गुना बढ़ोतरी हुई है। यह बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर सुविधाओं, साफ-सुथरे ‘बीच’ की वजह से संभव हुआ है। दमन नाइट मार्केट, रामसेतु सी-फ्रंट, नमोपथ सी-फ्रंट, नानी दमन फोर्ट, गंगेश्वर टेंपल कॉम्प्लेक्स, ऐसे अनेक स्थान आज इस पूरे क्षेत्र की नई पहचान बना रहे हैं।

साथियों,

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, इसके सपनों को पूरा करने के लिए हमें यहाँ की औद्योगिक ताकत को भी बढ़ाना है। यह भी गर्व की बात है कि इस यूनियन टेरिटरी ने man-made fibre के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। दादरा और नगर हवेली को National Man-Made Fibre Capital के रूप में पहचाना जाता है। प्लास्टिक एक्सपोर्ट में भी ये क्षेत्र लगातार आगे बढ़ रहा है। सरकार ने यहां इंडस्ट्रीज और MSMEs को सपोर्ट देने के लिए भी लगातार प्रयास किए हैं। यहां MSMEs और अन्य इंडस्ट्रीज को करोड़ों रुपए से अधिक की आर्थिक सहायता दी गई है। केंद्र शासित प्रदेश के लघु उद्योगों और कुटीर उद्योगों के लिए नए अवसर खुल रहे हैं। मुझे विश्वास है, आने वाले समय में ये क्षेत्र मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब बनेगा।

साथियों,

जब विकास के विजन के साथ संवेदनशील गवर्नेंस जुड़ता है, तो परिवर्तन तेज गति से जमीन पर उतरता है। दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव में हमारे इन प्रयासों का प्रभाव देखकर संतोष होता है। मुझे इस धरती के लोगों पर पूरा विश्वास है। यहां के युवा, यहां की माताएं-बहनें, यहां के किसान, कारीगर, श्रमिक और उद्यमी, आने वाले वर्षों में इस विकास यात्रा को और आगे ले जाएंगे। मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ, आपके सपनों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी। इसी विश्वास के साथ, मैं एक बार फिर विकास परियोजनाओं के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मेरे साथ बोलिए भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद।