गांधीनगर, दि. 23/8/2013

उपस्थित सभी महानुभाव,

अहमदाबाद और गांधीनगर जिले से पधारे हुए शिक्षा क्षेत्र के साथ जुड़े सभी मित्रों, और इसी कार्यक्रम के साथ अभी गुजरात के सभी जिलों में ऐसा ही कार्यक्रम चल रहा है, मंत्रिमंडल के मेरे सभी साथी उस कार्यक्रम में अभी उपस्थित हैं और टैक्नोलॉजी की मदद से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा राज्य के सभी जिलों में अभी सारे मित्र मेरी बात सुन रहे हैं और इसलिए जिले के कोने-कोने में बैठे सभी लोगों को भी मैं इस समारोह में याद करता हूँ, मंत्रिमंडल के मेरे सभी साथियों को भी याद करता हूँ..!

मित्रों, देश भ्रष्टाचार से तंग आ चुका है, चारों ओर भ्रष्टाचार के अच्छे-अच्छों को हिला दे ऐसी खबरें रोजमर्रा की घटना हो गई है और लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या भ्रष्टाचार पर काबू किया जा सकेगा..? और आज जब मैं शिक्षक मित्रों की भर्ती के कार्यक्रम में आया हूँ तब हम सब को पता है मित्रों, हिन्दुस्तान में यह बहुत ही सामान्य बात है कि इस नौकरी के लिए यह दाम, उस नौकरी के लिए यह दाम, तबादला करना हो तो यह दाम... इसका पूरा बाजार चलता है..! मित्रों, मैं बहुत ही हिम्मत के साथ कहता हूँ कि आज राज्य में 8800 शिक्षकों की भर्ती का निर्णय हो रहा है और कहीं से भी एक पैसे के भ्रष्टाचार की भी कोई शिकायत आई नहीं है..! आज भी यहाँ जो लोग बैठे हैं उनको भी मैं कहता हूँ कि कहीं भी किसी को कुछ भी करना पड़ा हो तो बिना किसी हिचकिचाहट के वो बात मुझ तक पहुँचाना। मित्रों, ये हिम्मत मुझ में इसलिए है कि अगर एक बार निर्णय करते हैं तो इस व्यापक रोग से देश को मुक्त किया जा सकता है इसका जीता-जागता उदाहरण मेरे सामने बैठा है। पारदर्शी प्रणाली के साथ सरकारी नौकरी में भर्ती संभव है, बिना एक पैसे की लेनदेन के बगैर, पूर्ण पारदर्शी प्रक्रिया के साथ भी तबादले हो सकते हैं। और मेरे लिए एक अच्छी बात है मित्रों, मुझे किसी सगे-संबंधियों की चिंता करनी नहीं है..! यह छह करोड़ गुजरातियों ही मेरा परिवार है और इसलिए ये सारा लाभ मेरे परिवार को ही है..!

हम शिक्षा को अग्रता क्रम देते हैं..! चीन में एक कहावत है कि यदि आप एक साल के लिए सोचते हैं तो अनाज बोइए, दस साल के लिए सोच रहे हैं तो फलों को बोइए, लेकिन अगर आप पीढ़ियों के बारे में सोच रहे हैं तो मनुष्य को बोइए..! शिक्षा मनुष्य को बोने का एक महाअभियान है..! उत्तम मनुष्य के निर्माण का, उत्तम नागरिक के निर्माण का एक महाअभियान यानि शिक्षा..! जो एक शिक्षक के रूप में जिम्मेदारी लेता है वह एक पूरी पीढ़ी का सर्जन करता है..! उसके नीचे एक पीढ़ी तैयार होती है। इस राष्ट्र का भविष्य कैसा होगा वह इस पीढ़ियों की शिक्षा और संस्कार पर निर्भर करता है और उनकी शिक्षा और संस्कार शिक्षा को समर्पित सभी पर निर्भर करता है। और ऐसे एक पवित्र काम के साथ आज आप जुड़ रहे हो, मैं आपका स्वागत करता हूँ, आपको अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूँ..!

2001 में जब मैंने गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था तब आम चर्चा ऐसी थी के इस आदमी को कोई अनुभव तो है नहीं, नगरपालिका का सदस्य भी नहीं रहा है, किसी गाँव में पंचायत का सरपंच भी रहा नहीं है, ये भाई करेंगे क्या..? और उन लोगों की बात सही भी थी कि मेरे पास सरकार चलाने का कोई अनुभव नहीं था। सरकार किसे कहते हैं, प्रशासनिक तंत्र क्या होता है उसकी मुझे कोई समझ नहीं थी। लेकिन मित्रों, आज गुजरात गर्व के साथ कह सकता है कि अच्छी सरकार किसे कहते हैं..! और इसका मुख्य कारण है मेरे भीतर जीवित विद्यार्थी..! आज भी मेरे अंदर एक विद्यार्थी के जैसी तत्परता है, जिज्ञासा है, आतुरता है..! और जिसके भीतर एक विद्यार्थी जिंदा हो उसकी विकास यात्रा अटूट रहती है, अखंड रहती है..! और मित्रों, शिक्षक तभी सच्चा शिक्षक बन सकता है जिसके भीतर एक विद्यार्थी की आत्मा बसती हो। जिस पल को वह ये सोचता है कि अब मैं विद्यार्थी नहीं रहा, अब तो मैं शिक्षक बन गया हूँ तो समझना कि वह विद्यार्थी तो रहा ही नहीं है, लेकिन शिक्षक के रूप में भी समाप्त हो चूका है..! सच्चे, अच्छे शिक्षक की गारंटी ही यह है कि उसके भीतर विद्यार्थी भाव बसता है या नहीं, उसके अंतरमन में विद्यार्थी जीवित है या नहीं..! वही जिज्ञासा, वही तत्परता, वही उमंग, वही उत्साह, पूरा भावजगत जो एक विद्यार्थी के आसपास लिपटा हुआ रहता है, वो भावजगत उसके भीतर जीवित हो..! और मित्रों, विद्यार्थी भाव का भीतर जीवित होने का अर्थ है कि हमारे सामने बैठा हुआ विद्यार्थी भी हमारा शिक्षक हो सकता है..! उसकी भी कोई बात ऐसी हो सकती है जो हमारे लिए सीखने जैसी हो..! उसका एक आचरण भी हमारे लिए शिक्षक का काम कर जाए..! और जब सर्वदूर से ज्ञान प्राप्ति, जानकारी की प्राप्ति, अनुभव की प्राप्ति, यह सारा क्रम जारी रहे तो उत्तम शिक्षक बनने की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। पी.टी.सी. कर लिया, बी.एड. कर लिया, एम.एड. कर लिया मतलब जीवन का पूर्ण विराम नहीं आता है, वहाँ से तो हमें एक ‘सेन्स ऑफ रिस्पॉन्सिबिलिटी’ की भावना जाग्रत होती है। यदि मैं बी.एड. या एम.एड. करता हूँ तो वो कोई अंतिम नहीं है, पूर्णता नहीं है। वह मुझे ‘सेन्स ऑफ रिस्पॉन्सिबिलिटी’, एक शिक्षक के रूप में अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराता है और वह सिर्फ बीजारोपण होता है, उसके आधार पर मेरे भीतर शिक्षक का वटवृक्ष उगाने की जिम्मेदारी मेरी होती है। नित्य अभ्यास के द्वारा मुझे खाद-पानी डालना पड़ता है और तब ही उत्तम शिक्षक बना जा सकता है..!

Shri Narendra Modi Hands Over Employment Letters to Vidya Sahayaks

मैंने ऐसे शिक्षक देखे हैं के जिनके पिताजी शिक्षक हो, वह खुद भी शिक्षक हो और पढ़ाने जाए तब पिताजी के जमाने की नोट साथ में ले जाए..! क्योंकि सिलेबस वही चलता हो..! कोई विद्यार्थी कभी उस शिक्षक को स्विकार कर ही नहीं सकता। लेकिन अगर शिक्षक प्राणवान हो, उसकी उपस्थिति मात्र से ही चैतन्य उत्पन्न होता हो, उसकी मौजूदगी ही माहौल को बदल देती हो तो वह शिक्षक असरदार होता है, प्रभावकारी होता है और प्रेरक भी होता है..! मित्रों, कई बार ईश्वर ने शरीर सौष्ठव दिया हो तो प्रभाव पैदा किया जा सकता है, माँ-बाप के पास अच्छे पैसे हों तो अच्छे कपडे पहनकर भी प्रभाव तो पैदा किया जा सकता है। लेकिन प्रभाव पैदा करने से प्रेरक नहीं बना जा सकता..! प्रेरक तभी बना जा सकता है जब अपने जीवन के भीतर से कोई आवाज दूसरों को सुनाई देती हो, किसी मूल्य का अनुभव कोई कर सकता हो, उसे शब्दों की आवश्यकता ना हो, नि:शब्द हो..! और ये अगर मन की अवस्था हो तो हम इस काम को पूरा कर सकते हैं..!

2001 में मैंने जब कार्य यात्रा शुरू की, तब शुरुआत में जब मैंने सरकार के अधिकारियों से पूछा कि क्या हाल है और उसमें भी जब ‘कन्या केलवणी’ (कन्या शिक्षा) के बारे में जाना तो मुझे झटका लगा कि हमारे इस गुजरात में कन्या शिक्षा की ये हालत..? और तब से हमने एक अभियान उठाया कि सरकारी प्राथमिक स्कूल का माहात्म्य बढ़े। अब तो आठवीं कक्षा तक भी सरकारी स्कूल बन गई है, ग्रांट वाली माध्यमिक स्कूल हैं और सरकारी स्कूल भी है। समाज में एक हवा बन गई है कि सरकारी मतलब सब बेकार..! सरकारी अस्पताल, नहीं जा सकते, प्राइवेट में जाना अच्छा है, ज्यादा खर्च करना पड़े तो भी... सरकारी बस में नहीं बैठना, जीप में पैंतीस भरे हो तो भी जाने का... यह धारणा बन गई है..! मित्रों, उसमें विश्वास कैसे पैदा हो..! और मैं इसका सर्वोत्तम उदाहरण हूँ, मित्रों..! यह नरेन्द्र मोदी नामक व्यक्तित्व जो आपके सामने खड़ा है ना, वो सरकारी स्कूल की ही प्रोडक्ट है..! आपके जैसे ही सरकारी स्कूल के शिक्षकों ने मुझे पढ़ाया-लिखाया, बड़ा किया..! इसका अर्थ ये हुआ मित्रों, कि यह सामर्थ्य पड़ा है। आज भी, मैं तीन-चार साल पहले अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के एक कार्यक्रम में गया था। कॉर्पोरेशन की स्कूल और 1 से 10 कक्षा के छात्रों में एक सरकारी म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन की प्राथमिक स्कूल का विद्यार्थी नंबर ले आया था..! इसका मतलब कि वहाँ आने वाले छात्रों में भी तेज और ओज होता है, सिर्फ मूर्तिकार की जरुरत होती है, गढ़ाई करने वाले की जरूरत होती है, मित्रों..! और एक शिक्षक के नाते मैं जब विद्यार्थी को गढ़ता हूँ, समाज का गठन करता हूँ तब राष्ट्र का गठन करता हूँ, यह अगर मन का भाव हो तो काम करने का आनंद भी विशेष होता है..!

मित्रों, गुजरात में बच्चे पढ़ने के लिए स्कूल जाए इसके लिए हमने आवाहन किया। शत प्रतिशत बच्चे स्कूल में भरती क्यों ना हो..? हमें सफलता मिली..! लेकिन भरती हुई तो हमारे ध्यान में आया कि शिक्षक कम पड़ रहे हैं। पूरानी सरकारों को तो आसान था कि विद्यार्थी स्कूल में ही नहीं आते थे तो शिक्षकों की चिंता ही नहीं थी..! हम विद्यार्थियों को लाए, तो फिर शिक्षकों को भी लाना पड़ा..! मित्रों, लाखों की संख्या में शिक्षकों की भर्ती की। विद्यार्थी आए, शिक्षक आए तो ध्यान में आया कि कमरे चाहिए..! हजारों कमरे बनाए..! गुजरात में लगभग 32,000 स्कूल और मुझे लगता है कि 74,000 से अधिक नए कमरे बनाए..! कारण, नीचे से ही संख्या बढ़ने लगी..! फिर ध्यान में आया कि सातवीं के बाद बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं, तो आठवीं शुरू करो, भाई..! फिर ध्यान में आया कि पड़ोसी गांवों में पढ़ने के लिए जाते हैं तो साइकिल दो, लड़कियों को बस के मुफ्त पास दो..! कुछ भी करो लेकिन शिक्षित करो, ये अभियान चलाया..! फिर लगा कि स्कूलों को थोड़ा आधुनिक बनाना चाहिए, तो प्रत्येक स्कूल को बिजली मिले इसकी चिंता की, कम्प्यूटर मिले इसकी चिंता की, ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी मिले इसकी चिंता की..! स्कूल आधुनिक बने इसके लिए लॉंग डिस्टन्स एज्युकेशन के लिए कोशिश की..! उत्तम कार्यक्रमों और उत्तम शिक्षकों के द्वारा विभिन्न स्कूलों में कम्प्यूटर पर सीख सकें इसके लिए प्रयास किए। एक के बाद एक सुधार, एक के बाद एक बुनियादी सुविधाओं में वृद्धि का पूरा क्रम चला। फिर ध्यान में आया कि प्रिन्सिपल की एक अलग कैडर हो तो बेहतर रहेगा, वरना उस शिक्षक का ज्यादातर समय कागजी कार्यवाही में ही चला जाता है और बच्चों को नुकसान होता है, अकसर उस क्लास के विद्यार्थी पीछे रह जाते हैं। प्राचार्यों की अलग कैडर बनाई, उनकी अलग से भर्ती करने लगे, प्रमोशन से भी कुछ लोगों को लेने लगे..! कुल मिलाकर बुनियादी शिक्षा को व्यवस्था की दृष्टि से, बुनियादी सुविधाओं की दृष्टि से, मैनपावर की दृष्टि से, टैक्नोलॉजी की दृष्टि से, बजट की दृष्टि से, हर तरह से सुसज्ज करने का एक अभियान शुरू किया..! और हमने देखा मित्रों, कि 2001 से जिन बच्चों को स्कूल में भरती करने लगे और जोर लगाया, उसके कारण अब स्थिति यह बन गई कि उनमें से ज्यादातर ने दसवीं-बारहवीं कक्षा पास कर ली, अब उसे गाँव छोड़ कर कहीं और पढ़ने जाना है। तो उसमें अगला स्टेज क्या आया कि पूरे गुजरात में हजारों विद्यार्थी रह सके ऐसी हॉस्टल बनाओ..! और हमने हजारों विद्यार्थियों की हॉस्टल बनाने के लिए पिछले बजट में 200 करोड़ रुपयों का विशाल बजट खर्च किया..! क्यों..? यह जो बुनियादी स्तर से बच्चों को स्कूल में लाने की जिद्दोजहद शुरू की है, उसकी शिक्षा छूटनी नहीं चाहिए, जिसे पढ़ना है उसे अवकाश मिलना चाहिए..! और उस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं..! बच्चे आगे जाने लगे तो उनको उच्चतर शिक्षा चाहिए..! एक जमाना था 2001 में कि इस राज्य में 11 युनिवर्सिटियां थी, आज 46 युनिवर्सिटियां हैं..! 1960 में गुजरात का जन्म हुआ, 1960 से 2001, 40 वर्ष में 11 युनिवर्सिटी, आज दस साल में 46 युनिवर्सिटी..! इसे विकास कहा जा सकता है..? आप समझ सकते हैं, दूसरे नहीं समझ पाते हैं..!

मित्रों, शिक्षा के उपर इतना ध्यान केन्द्रित किया है हमने, इतने सारे नवीनतम प्रयोग किए हैं और हमारा प्रयास है कि गुजरात में बुनियादी शिक्षा उत्तमता की ओर बढ़े..! और ये सारी व्यवस्थाएं करने के बाद हमने देखा कि भाई, शिक्षक है, विद्यार्थी है, क्लास रूम है, कम्प्यूटर है, बिजली है, पंखे हैं, पानी है, किताबें हैं, सब है... लेकिन बच्चे की स्थिति क्या है वो तो जांच करो..! मूलभूत आधार कहाँ है..? और इसके लिए हमने शुरू किया, ‘गुणोत्सव’..! मुख्यमंत्री सहित सभी लोग तीन दिन स्कूल में जाते हैं, हरेक बच्चे को पूछते हैं कि भाई, तुम्हें पढ़ना आता है, लिखना आता है, गणित आता है, स्पेलिंग आते हैं..? और हिन्दुस्तान में गुजरात पहला ऐसा राज्य है जहाँ सरकारी स्कूलों का ग्रेडेशन किया गया है..! इस देश में बिजनेस स्कूल का ग्रेडेशन होता है, ‘ए’ ग्रेड, ‘बी’ ग्रेड, ‘सी’ ग्रेड, की बिजनेस स्कूल। इस देश में इंजीनियरिंग कॉलेज का ग्रेडेशन होता है, मेडिकल कॉलेज का ग्रेडेशन होता है, आई.आई.टी. का ग्रेडेशन होता है, आई.आई.एम. का ग्रेडेशन होता है, लेकिन यह राज्य ऐसा है कि जिसने प्राथमिक स्कूलों का ग्रेडेशन किया और कलेक्टर कलेक्टर समेत सब लोगों को शामिल किया कि आपके जिले में ‘ए’ ग्रेड की स्कूल कितनी हैं, ‘बी’ ग्रेड की कितनी, ‘सी’ ग्रेड की कितनी, ‘डी’ ग्रेड की कितनी, ‘ई’ और ‘एफ’ तक गए..! और निर्धारित करवाया गया कि अब ‘सी’ में से ‘बी’ में कैसे आओगे, बताईए..? ‘बी’ में से ‘ए’ ग्रेड में कैसे लाओगे आपकी स्कूल को..? और उसमें से कुछ स्कूलों का तो डी.एन.ए. ही ऐसा था कि कमजोरी जाए ही नहीं..! तो हमने ऐसे शिक्षकों को खोजा और उनकी स्पेशल ट्रेनिंग करवाई। कहीं लगा कि थोड़ा मिक्स-अप करो, दो यहाँ से उठाओ, दो अच्छे यहाँ लाओ, दो वहाँ ले जाओ, लेकिन कुछ करो..! मित्रों, इतने सूक्ष्म प्रयास इसलिए किए हैं कि गुजरात के आने वाले कल को गढ़ना है..! मित्रों, इस गुजरात को विश्व की नई ऊंचाईयों तक पहुंचाना है और उसकी नींव में प्राथमिक स्कूल की शिक्षा है। शहर हो या गाँव, जंगल हो, आदिवासी क्षेत्र हो या मछुआरों का समुद्री किनारा, हर जगह सर्वोत्तम शिक्षा मिले इसकी कोशिश की है..!

मित्रों, जीवन में शिक्षक बनना सौभाग्य की बात होती है..! कुछ लोगों को लगता होगा कि जब छोटे थे और घर पर मेहमान आते थे तो मम्मी-पापा कहते थे कि इसे डॉक्टर बनाना है, इसे इंजीनियर बनाना है, तब तो अभी हम पाँचवीं में भी ना आए हों..! दिमाग में रहता है, यहाँ बैठे लगभग सभी के मन में होगा कि माँ-बाप की इच्छा थी कि डॉक्टर या इंजीनियर बने, अब बने गये शिक्षक..! तो बहुत सारा समय आपका इसी में जाएगा कि यार, नहीं हो पाया, डॉक्टर नहीं बना..! अरे, जाने दो यार, उस साल पेपर्स इतने कठिन थे ना... परीक्षक ही ऐसे थे ना... यानि, बहाने तो बहुत मिल जाते हैं..! मित्रों, जो हुआ सो हुआ, अब आपको तय ही करना पड़े, बीते हुए कल को भूलकर आज जहाँ खड़े हो वहीं से भव्य सपने कैसे देखें, भव्य इमारत कैसे बनाई जाए, इसकी शुरुआत करनी चाहिए..! नहीं तो आप उस बोझ ले करके चलोगे कि मुझे तो ये बनना था, वो बनना था, अब क्या करें, जैसी किस्मत..! फिर घड़ी देखता रहता है..! मित्रों, हमें तय करना पड़े कि हमें करना क्या है..? मित्रों, जब स्कूल की घंटी बजती है तो ऊर्जा मिलती है या मानसिक तनाव पैदा होता है उसका निर्णय करना पड़े..! स्कूल की घंटी बजते ही पूरा माहौल पक्षीयों के कलरव जैसा बन जाता हो तो मित्रों, वह घंटारव जीवन का नया नाद बनता है..! लेकिन अगर वही आपको बोझ लगता है कि यार, ये अभी कहाँ... तो हो गया समजो..! और जिसको शाम की आखिरी घंटी बजे उसका आनंद हो तो समझने का कि उसे अभी शिक्षक बनना बाकी है..! उसे ऐसा होना चाहिए कि अरे, अभी तो मुझे पढ़ाना बाकी है और घंटी बज गई..? मित्रों, ये सारे हमारे मन की अवस्था के मापदंड हैं..! मित्रों, हमारा विद्यार्थी रविवार की छुट्टी आते ही दु:खी हो जाए कि अरे, कल तो छुट्टी है, मुझे नहीं आना है, आप नहीं मिलेंगे..? अगर ऐसा होता है तो आप समझना कि आप सही मायने में उसके गार्डियन बने हैं। लेकिन शनिवार को स्कूल के छूटने के समय अगर विद्यार्थी को लगे कि वाह, अब तो सोमवार को आना है..! तो मान लेना मित्रों, ना ही वह स्कूल की इमारत, ना मुख्यमंत्री, ना बजट, ना शिक्षा विभाग, अगर इसके लिए कोई जिम्मेदार है तो वह शिक्षक है..! अगर उमंग के साथ बच्चे आते हैं तो उसका श्रेय मुख्यमंत्री को नहीं जाता है, उसका श्रेय सरकार के बजट को नहीं जाता है, उसका श्रेय उस शिक्षक को जाता है जिसने अपनी जान उस बच्चे में डाल दी है..! अगर इस भावना के साथ शिक्षक की भूमिका निभाएंगे तो मित्रों, मुझे विश्वास है कि आने वाले कल के गुजरात के लिए जो सपने हमने संजोए हैं उन सपनों को पूरे करने का सामर्थ्यवान मानव बल आपके द्वारा निर्माण होगा, एक अर्थ में आप गुजरात के सच्चे निर्माता बनोगे ऐसी मेरी आप सभी को शुभकामनाएं हैं..!

गुजरात के सभी कोने में जो मित्र बैठे हैं, सभी जिलों में जो बैठे हैं और आज जिन्हें नियुक्ति पत्र मिलने वाले हैं उन सभी मित्रों को बहुत बहुत अभिनंदन और मुझे भरोसा है कि वे सभी इस राज्य के निर्माण के लिए सभी संभव प्रयास करेंगे, ऐसी शुभकामना के साथ,

जय जय गरवी गुजरात..!

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दमन ‘मिनी इंडिया’ का जीवंत उदाहरण बन गया है: पीएम मोदी
June 05, 2026
हेल्थकेयर, एविएशन, टूरिज्म और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट्स की शुरुआत दमन के लिए विकास को नई गति देने वाली पहल है, जो केंद्र शासित प्रदेश के लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगी: पीएम
आज जारी किए गए आंकड़े भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं। FY 2025-26 में 7.7% और 31 मार्च को समाप्त तिमाही में 7.8% की ग्रोथ दर्ज की गई है: पीएम
वैश्विक स्तर पर गंभीर चुनौतियों के बावजूद, 140 करोड़ भारतीयों के सामूहिक प्रयासों ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत न केवल मजबूती से आगे बढ़ रहा है, बल्कि दुनिया से एक कदम आगे भी बना हुआ है: पीएम
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे सरकार के हेल्थकेयर पर फोकस को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। पहले भारत में अधिकांश डिलिवरी अस्पतालों के बाहर होती थीं, लेकिन आज देश में 90% से अधिक डिलिवरी अस्पतालों में हो रही हैं: पीएम
मिशन इंद्रधनुष की बदौलत भारत में बच्चों के टीकाकरण का कवरेज 2014 से पहले के 60% से बढ़कर आज करीब 90% तक पहुंच गया है: पीएम

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव के एडमिनिस्ट्रेटर प्रफुल्ल भाई पटेल, संसद में मेरी सहयोगी कलाबेन डेलकर, दमन Municipal Council की President दीपिका टंडेल जी, दमन जिला पंचायत के अध्यक्ष धर्म बाबू पटेल, सिलवासा Municipal Council के अध्यक्ष सोमनाथ देवरे जी, दादरा नगर हवेली जिला पंचायत के अध्यक्ष निशा भावसार जी, दीव Municipal Council के अध्यक्ष हरीश कपाड़िया जी, दीव जिला पंचायत के अध्यक्ष कोटिया रंजिताबेन और यहां इतनी विशाल संख्या में पधारे मेरे प्यारे भाइयों-बहनों,

आप जैसे यहां इकट्ठे हुए हैं, वैसे ही लक्षद्वीप में भी बहुत बड़ी तादाद में लोग वीडियो के माध्यम से हमारे साथ जुड़े हुए हैं, क्योंकि आज लक्षद्वीप के विकास की भी एक नई शुरुआत, एक नए प्रकल्‍प, जो पूरे लक्षद्वीप के जीवन में एक क्रांतिकारी काम करने वाले हैं, उसके लिए भी कुछ योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है।

साथियों,

कुछ साल पहले, जब मैं आपके बीच आया था, तो मैंने कहा था यह हमारा दमन तेजी से मिनी इंडिया बन रहा है और आज मैं देख रहा हूं, बाईं तरफ पूरा बंगाल है और दाहिने तरफ पूरा असम है। दमन मिनी इंडिया का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। यहां की विविधता, अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों का यहां निवास करना, पूरे भारत की सुंदर सी झलक आपके बीच आकर के मिल जाती है। आप सब इतनी बड़ी संख्या में हमें आशीर्वाद देने आए, मैं इसके लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।

भाइयों-बहनों,

मुझे कई बार दमन और दीव आने का अवसर मिला है। दादरा और नगर हवेली भी आता रहता हूं और जब मैं मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री नहीं था, तब तो बहुत बार आता था। लेकिन अब जब मैं यहां आता हूं और यहां के सुशासन को देखकर, गवर्नेंस मॉडल को देखकर बहुत अच्छा लगता है। हर बार मुझे लगता है कि पिछली बार के मुकाबले यह क्षेत्र विकास की राह पर मीलों आगे बढ़ गया है।

साथियों,

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव ने दशकों से विकास के सपने देखे थे। जो सपने पहले देखे, वो पीढ़ियां तो चली गईं। लेकिन आज जो पीढ़ी है, वो अपनी आंखों के सामने देख रही है कि उनके मां-बाप, दादा-दादी जो सपने देखते थे, वो आज सपने पूरे होते हुए आप अपनी आंखों से देख रहे हैं। आज भी यहां कनेक्टिविटी, हेल्थ, एजूकेशन, टूरिज्‍म और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर इन से जुड़ी अनेक परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ है। विकास के यह काम दमन और पूरी यूनियन टेरिटरी के लिए यहां के लोगों के जीवन को आसान बनाएंगे। इनसे युवाओं के लिए नए अवसर तैयार होंगे। इन कामों के पीछे प्रफुल्ल भाई पटेल की दृष्टि, उनकी और उनकी टीम की मेहनत साफ-साफ नजर आती है। मैं इसके लिए भी प्रफुल्ल भाई और उनकी पूरी टीम की सराहना करता हूं। मैं सभी को लक्षद्वीप के लोगों को, दादरा-नगर हवेली के लोगों को अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं, आप सबको बधाई देता हूं।

साथियों,

आज आपके बीच आया हूं, तो एक सुखद खबर आई है। मैं तो आज सुबह दिल्ली से निकल चुका था, लेकिन अभी जो आंकड़े सामने आए हैं, जो खबर आई है, वो सचमुच में प्रसन्नता करने वाली है और मैं भी चाहता हूं, यह खुशी आपके साथ भी बाटूं। आज जो आंकड़े आए हैं, उन आंकड़ों से साफ है कि भारत की अर्थव्यवस्था की नींव कितनी मजबूत है। वर्ष 2025-26 में यानी जो फाइनेंशियल ईयर पिछला पूरा हुआ, वर्ष 2025-26 में भारत ने 7.7 परसेंट की ग्रोथ रेट हासिल की है, 7.7 और पिछला क्वार्टर जो 31 मार्च को खत्म हुआ, उसमें भी भारत की ग्रोथ 7.8 परसेंट रही है, 7.8 और यह दुनिया में तेज गति से आगे बढ़ने वाली बडी इकोनॉमी है। हर भारतीय को गर्व हो, यह है उसकी गति। आज देश जिस रिफॉर्म एक्‍सप्रेस पर चल रहा है, आज देश में इंफ्रास्ट्रक्चर का जो इतना विकास हो रहा है, गरीब कल्‍याण को लेकर इतने बड़े स्‍तर जो काम चल रहा है, इन सारे प्रयासों का परिणाम है कि आज देश बड़ी इकोनॉमी में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है और हम सब जानते हैं, दुनिया संकटों में घिरी हुई है, सारी दुनिया की अर्थव्यवस्था सवालिया निशानों के नीचे दबी पड़ी है, वैश्विक संकट के इस बुरे से बुरे दौर में भी 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक प्रयासों से भारत खुद को संभाल तो पा ही रहा है, लेकिन साथ-साथ सबसे आगे रहने में भी उसके प्रयास सफल होते जा रहे हैं। मैं देशवासियों को आर्थिक क्षेत्र की इस नई ऊंचाई को प्राप्त करने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं और मैं देश को फिर आश्‍वस्‍त करता हूं कि देश दुनिया भर में चल रहे इन संकटों का सामना करते हुए Reform, Perform और Transform के रास्ते पर ऐसे ही दृढ़ संकल्प के साथ, तेज गति से आगे बढ़ता ही रहेगा, यह मेरी देशवासियों को गारंटी है।

साथियों,

आज हमारे लिए विकास जितना जरूरी है, उतना ही अहम है हमारे विकास का मॉडल सस्टेनेबल हो। आज वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे के दिन हमारे यहां यूनियन टेरिटरी स्टेट इस संकल्प को साकार कर रहा है। आज एक ओर यहां हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं को लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। साथ ही यहां करीब एक लाख एक पेड़ मां के नाम, एक लाख पौधे भी लगाए जा रहे हैं। मुझे गर्व है कि एक ऐसा केंद्र शासित प्रदेश हैं, जिसने सरकारी इमारतों में शत प्रतिशत, 100 परसेंट सौर ऊर्जा के इस्तेमाल की उपलब्धि हासिल की है। आज दीव में दिन में जितनी बिजली की डिमांड होती है, वो सोलर पॉवर से ही पूरी हो रही है और हमें तो इसे और आगे लेकर के जाना है। घरों में भी सोलर ऊर्जा से बिजली मिले, यही नहीं अतिरिक्त बिजली से परिवार की आय भी हो, इसके लिए रूफटॉप सोलर प्लांट्स लगाने की पहल शुरू हुई है। मैं इन उपलब्धियों के लिए भी आप सबकी सराहना करता हूँ।

साथियों,

साथ-साथ मुझे यह भी बताया गया है, दमन के लोग इन दिनों यहाँ स्वच्छता अभियान भी चला रहे हैं। यह दिखाता है कि स्वच्छता किस तरह दमन के जनजीवन में संस्कार बन चुका है और यह संस्कार स्वच्छता में नजर आ रहे हैं। मैं इस जनभागीदारी के आपके प्रयासों के लिए दमन के लोगों का अभिनंदन करता हूँ।

साथियों,

दादरा नगर हवेली, दमन और दीव, यह संघ शासित प्रदेश होने के साथ ही भारत की पहचान और विरासत भी हैं। इसलिए, इसके विकास के लिए हमारे लक्ष्य भी साधारण नहीं हैं। मुझे याद है, जब मैं पिछले साल सिलवासा आया था, तब मैंने आपको सिंगापुर का उदाहरण दिया था। मैंने कहा था कि एक समय सिंगापुर मछुआरों का छोटा सा गांव था। लेकिन, सिंगापुर के लोगों ने एक सपना देखा, वहां के लोगों ने बड़ा लक्ष्य तय किया और आज वही सिंगापुर दुनिया का सबसे बड़ा बिज़नस हब बन चुका है। आज दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव भी वही सपना देख रहे हैं। ये नमो एयरपोर्ट, दमणगंगा नदी पर बनने वाला आइकॉनिक ब्रिज, ‘बीच फ्रंट’ उस पर बनने वाला कन्वेंशन सेंटर, ऐसे सभी इनफ्रास्ट्रक्चर के जरिए हम भविष्य के बड़े संकल्पों की नींव रख रहे हैं। इन प्रोजेक्ट्स के जरिए आप लोगों की आवाजाही आसान होगी। यहाँ बिज़नेस के लिए नई संभावनाएं बनेंगी। दमन के दोनों किनारों पर विकास की गति और तेज होगी।

साथियों,

यहाँ hospitality economy से जुड़े अवसर बढ़ेंगे और साथ ही ट्रांसपोर्ट नगर जैसी सुविधा से व्यापार, लॉजिस्टिक्स को भी नई गति मिलेगी।

साथियों,

इस क्षेत्र में ब्लू इकॉनमी के लिए हमने जो विज़न तैयार किया है, वो विज़न भी हाइटेक इनफ्रास्ट्रक्चर की ताकत से ही साकार होगा। इसीलिए, लक्षद्वीप के कलपेनी और कदमत द्वीपों में भी आज ही आधुनिक पोर्ट्स की आधारशिला रखी जा रही है। यह सभी प्रयास ब्लू इकॉनमी में देश की ताकत को बढ़ाएँगे और जैसा मैंने कहा यह लक्षद्वीप का भाग्‍य बदलने वाले initiative हैं।

साथियों,

भाजपा की सरकार में, एनडीए की हमारी सरकार में हमारे लिए विकास की पहली कसौटी है- गरीब, वंचित, आदिवासी और मिडिल क्लास के जीवन में बदलाव! इसके लिए, हेल्थ सेक्टर हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता है। बीते वर्षों में देश हेल्थ केयर के लिए होलिस्टिक विजन लेकर आगे बढ़ा। हमने इलाज से जुड़ी हर चिंता का समाधान किया है। आज गरीब से गरीब के पास भी आयुष्मान कार्ड की सुविधा है। उनके पास 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज का भरोसा है। बीमारी की समय से जांच हो सके, इसके लिए, प्रधानमंत्री आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की व्यवस्था है। जन औषधि केन्द्रों के जरिए सस्ती दवाइयाँ भी मिल रही हैं। ये सुविधाएं और बेहतर हों, और आधुनिक हों, इसके लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के जरिए आज स्वास्थ्य सेवाओं को टेक्नॉलॉजी से जोड़ा जा रहा है।

साथियों,

आयुष्मान कार्ड और जन औषधि केंद्रों से ही गरीब और मध्यम वर्ग के करीब सवा दो लाख करोड़ रुपए खर्च होने से बचे हैं।

भाइयों-बहनों,

केंद्र सरकार की नीतियों का बहुत लाभ इस क्षेत्र के लोगों को भी हुआ है। एक समय यहां इलाज की अच्छी सुविधाओं का भी अभाव था। यहाँ मेडिकल कॉलेज तक नहीं था। लेकिन, अब मेडिकल कॉलेज भी है और उसमें post-graduation की पढ़ाई भी शुरू हो गई है। सिलवासा का नमो हॉस्पिटल पिछले साल से हजारों लोगों की सेवा कर रहा है। आज दमन में भी नमो हॉस्पिटल का लोकार्पण हुआ है। इस क्षेत्र के लोगों को भी अब और बेहतर हेल्थ केयर का लाभ मिलेगा।

साथियों,

हमारी सरकार कैसे स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए चल रही है, इसका एक प्रमाण नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के नतीजों में भी मिलता है। एक समय भारत में ज़्यादातर बच्चों की डिलिवरी अस्पताल में नहीं होती थी। आज देश में 90 प्रतिशत से अधिक डिलिवरी अस्पतालों में हो रही है, जिसके कारण माता मृत्यु या नवजात की मृत्यु में बहुत बड़ी रुकावट आई है। मिशन इंद्रधनुष की वजह से बच्चों के टीकाकरण के क्षेत्र में भी भारत ने अच्छी प्रगति की है। 2014 से पहले केवल 60 प्रतिशत बच्चों का पूर्ण टीकाकरण हो पाता था। आज यह आंकड़ा बढ़कर करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच गया है। स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव आया है। 2014 से पहले 30 प्रतिशत से भी कम परिवार स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़े हुए थे। आज आयुष्मान भारत, उन आंकड़ों को भी बदल दिया है। अब 60 प्रतिशत से अधिक परिवारों को ये सुरक्षा मिल रही है।

साथियों,

स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार के इन प्रयासों का लाभ अगर किसी को सबसे ज्यादा मिला है, तो वो मेरे देश की नारी शक्ति है।

साथियों,

पहले इस क्षेत्र के युवाओं को हायर एजुकेशन के लिए भी बाहर जाना पड़ता था। लेकिन, आज यहाँ नेशनल लेवल के, एक नहीं कई इंस्टीट्यूट बन चुके हैं। पिछले वर्षों में यहां स्कूलों की नई बिल्डिंग्स बनी हैं, स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम भी बने हैं। 40 हजार से अधिक विद्यार्थियों को इनका लाभ मिल रहा है। मुझे खुशी है कि केंद्र शासित प्रदेश धीरे-धीरे एजुकेशन के क्षेत्र में आगे आ रहा है। स्वामी विवेकानंद एजुकेशन हब जैसे कई निर्माण यहाँ हो रहे हैं।

भाइयों-बहनों,

इस शिक्षा क्रांति में हमारी बेटियाँ पीछे न रहें, ये भी हमारा संकल्प है। इसके लिए कई बड़े प्रयास किए जा रहे हैं। सरस्वती साइकिल स्कीम, सरस्वती विद्या योजना, यहां की बेटियों को बहुत मदद कर रही है।

साथियों,

आज भारत की कोशिश है कि देश के युवाओं को डिग्री के साथ ही सही दिशा भी मिले। उन्हें ऐसा एक्सपोजर मिले, जो लोकल टैलेंट को ग्लोबल अवसरों से जोड़े। डिजाइन, लॉ, इंजीनियरिंग, मेडिकल एजुकेशन, आईटी, ड्रोन और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में हमारी आज की तैयारी भारत की वर्कफोर्स को मजबूत बनाएगी। इसलिए प्रोफेशनल संस्थानों का विस्तार बहुत महत्वपूर्ण है।

साथियों,

आज NIFT के अठारहवें campus की आधारशिला रखी गई है। ये संस्थान यहां के युवाओं को ग्लोबल एक्सपोजर से जोड़ेगा। आई.टी.आई. दमन में ड्रोन टेक्नीशियन जैसे नए कोर्सेस भी शुरू हुए हैं। पीएम विश्वकर्मा और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, इनसे जुड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम्स का लाभ भी युवाओं को मिल रहा है।

साथियों,

देश में खेलों को भी नई सोच के साथ आगे बढ़ाया गया। हमारे खेल अब केवल बड़े शहरों या बड़े स्टेडियमों तक सीमित नहीं हैं। खेलो इंडिया जैसे प्रयासों ने युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का नया मंच दिया है। इससे छोटे-छोटे क्षेत्रों में नेशनल लेवल पर खेल के जगत में हमारे बच्चे आगे आ रहे हैं और इसका भी लाभ इस क्षेत्र को हुआ है। दीव आज beach sports का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। घोघला बीच पर हुए Beach Games ने भी देश का ध्यान इस क्षेत्र की ओर खींचा है। आज यहां आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार काम हो रहा है। खानवेल में फुटबॉल सेंटर और दमन में वॉलीबॉल ट्रेनिंग सेंटर यहां खेल संस्कृति को मजबूत कर रहे हैं।

साथियों,

आज देश का बहुत बड़ा फोकस टूरिज्म पर भी है। हमारा प्रयास है कि टूरिज्म से स्थानीय कला और संस्कृति को बढ़ावा मिले। छोटे-छोटे स्थानों को भी बड़े-बड़े अवसरों से जोड़ा जा सके। ‘देखो अपना देश’ जैसे प्रयास ने लोगों को देश की विविधता के बारे में जानने के लिए प्रेरित किया है। आज भारत में हैरिटेज टूरिज्म, ‘बीच टूरिज्म’, इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, इन सेक्टर्स को नई ऊर्जा मिल रही है।

साथियों,

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव में तो पर्यटन भी इतनी असीम संभावनाओं वाला एक क्षेत्र है। इस क्षेत्र को प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत वरदान मिला है। इसीलिए पर्यटन को लेकर देश ने जिन नीतियों पर काम किया है, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव को उसका बड़ा लाभ मिल रहा है। 2021 में यहां करीब 6 लाख टूरिस्ट आए थे। 2025 में ये संख्या बढ़कर लगभग 50 लाख तक पहुंच गई है। यानी कुछ ही वर्षों में टूरिज्म फुटफॉल में करीब 10 गुना बढ़ोतरी हुई है। यह बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर सुविधाओं, साफ-सुथरे ‘बीच’ की वजह से संभव हुआ है। दमन नाइट मार्केट, रामसेतु सी-फ्रंट, नमोपथ सी-फ्रंट, नानी दमन फोर्ट, गंगेश्वर टेंपल कॉम्प्लेक्स, ऐसे अनेक स्थान आज इस पूरे क्षेत्र की नई पहचान बना रहे हैं।

साथियों,

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, इसके सपनों को पूरा करने के लिए हमें यहाँ की औद्योगिक ताकत को भी बढ़ाना है। यह भी गर्व की बात है कि इस यूनियन टेरिटरी ने man-made fibre के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। दादरा और नगर हवेली को National Man-Made Fibre Capital के रूप में पहचाना जाता है। प्लास्टिक एक्सपोर्ट में भी ये क्षेत्र लगातार आगे बढ़ रहा है। सरकार ने यहां इंडस्ट्रीज और MSMEs को सपोर्ट देने के लिए भी लगातार प्रयास किए हैं। यहां MSMEs और अन्य इंडस्ट्रीज को करोड़ों रुपए से अधिक की आर्थिक सहायता दी गई है। केंद्र शासित प्रदेश के लघु उद्योगों और कुटीर उद्योगों के लिए नए अवसर खुल रहे हैं। मुझे विश्वास है, आने वाले समय में ये क्षेत्र मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब बनेगा।

साथियों,

जब विकास के विजन के साथ संवेदनशील गवर्नेंस जुड़ता है, तो परिवर्तन तेज गति से जमीन पर उतरता है। दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव में हमारे इन प्रयासों का प्रभाव देखकर संतोष होता है। मुझे इस धरती के लोगों पर पूरा विश्वास है। यहां के युवा, यहां की माताएं-बहनें, यहां के किसान, कारीगर, श्रमिक और उद्यमी, आने वाले वर्षों में इस विकास यात्रा को और आगे ले जाएंगे। मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ, आपके सपनों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी। इसी विश्वास के साथ, मैं एक बार फिर विकास परियोजनाओं के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मेरे साथ बोलिए भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद।