चांसलर मर्कल, 

मीडिया के सदस्य 

मैं चांसलर मर्कल का और जर्मनी का आभार व्यक्त करता हूँ मेरा और मेरी delegation का गरमजोशी और सम्मान की भावना से स्वागत के लिए। 

और विशेष करके इस लिए कि मेरी सरकार के पहले साल में उन्होंने भारत को विश्व के सबसे बड़े Trade Fair में Partner Country चुना। चांसलर मर्कल ने Hannover में मुझे, मेरे डेलीगेशन और भारत की कई कंपनीज के CEOs के साथ अपना बहुमूल्य समय दिया। और आज फिर से बर्लिन में मेरा और मेरे डेलीगेशन का हार्दिक स्वागत किया। 

मैं इस बात के लिए धन्यवाद देता हूं कि बड़े खुले मन और गहराई से भारत और जर्मनी के संबंधों के बारे में उन्होंने बातचीत की है। यह उनके जर्मनी के हितों पर ध्यान और भारत और जर्मनी के संबंधों के लिए प्रतिबद्धता का प्रतीक है। 

और उन्होंने कल Hannover में भारत के Lion के निमंत्रण को स्वीकार किया और आश्वस्त किया कि जर्मनी के ईगल द्वारा उसका ठोस उत्तर देंगी। मेरा विश्वास है कि धरती का राजा, Lion, और आकाश के राजा, eagle, की अच्छी जोड़ी बनेगी। 

जब मैं पिछली बार बर्लिन आया था तो उस शाम बर्लिन ने world cup final में सफलता प्राप्त की थी। मैं आज यह महसूस कर रहा हूँ कि भारत और जर्मनी की Strategic partnership को एक नयी उँचाई पर ले जाने में हम अवश्य सफल होंगे। 

भारत में जब कोई Technology, manufacturing या High Quality की बात करता है तो सबसे पहले जर्मनी का नाम ध्यान में आता है। तो यह स्वाभाविक है कि आज भारत जब आर्थिक विकास और रोजगार के लिए Make in India के नये रास्ते पर चला है तो उसे जर्मनी के साथ की अपेक्षा है। 

आर्थिक परिवर्तन या सामान्य व्यक्ति के जीवन में सुधार के किसी भी उद्देश्य के बारे में सोचें तो उसमें Technology, Skills, Innovation और Investment की बड़ी भूमिका होती है। मेरा जर्मनी आने का उद्देश्य यह था कि मैं जर्मन Industry को भारत में आने के लिए आमंत्रित करूँ और उन्हें आश्वस्त करूँ कि उन्हें एक खुले, आसान और स्थिर आर्थिक माहौल मिलेगा और जिसमें प्रवेश करने में और काम करने में मेरी तरफ से पूरी सहायता मिलेगी। 

चांसलर मर्कल और जर्मन Industry के उत्साह और रूचि को देखकर मैं बहुत प्रोत्साहित महसूस कर रहा हूँ। उनके फीडबैक से नीतियों को बनाने में मुझे बहुत लाभ होगा। 

मैंने यह निर्णय किया है कि जर्मन कंपनीस के लिए हम एक mechanism बनाएँगे ताकि उनको भारत में निवेश करने में, business करने में सुविधा हो। 

भारत का Make in India और हमारे युवाओं को रोजगार Skill Development पर आधारित है। जर्मनी विश्व में इस क्षेत्र में लीडर है। भारत में Skill Development हमें अपनी परिस्थितियों को देखते हुए करनी होगी। साथ ही साथ जर्मनी से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं और इस बारे में विस्तार से बातचीत हुई है। उसी प्रकार Science, Technology और Education में हम और घनिष्ठ संबंध और सहयोग बढ़ायेंगे। 

एक क्षेत्र, जो मेरे लिए निजी रूप से और देश के लिए बहुत बड़ी प्राथमिकता रखता है वह है Renewable energy और Energy Efficiency । जैसाकि मैंने पहले कहा कि हमने अगले 7 सालों में 175 गीगावाट का Renewable energy का बहुत बड़ा लक्ष्य रखा है। जर्मनी इस क्षेत्र में भारत का बड़े स्तर पर आर्थिक सहयोग कर रहा है। मैं चाहूंगा कि इसके साथ ही साथ जर्मनी, भारत में Clean Energy के उपकरण बनाने में भी आगे बढ़े। और साथ मिलकर climate change की चुनौती का सामना करें। 

भारत Manufacturing hub बनेगा और Infrastructure का विस्तार होगा तो trade के लिए भी लाभदायक होगा। आयात की जरूरत और बढ़ेगी। और स्वाभाविक है कि इससे जर्मनी की Industry को भी लाभ पहुंचेगा। 

इस संदर्भ में यह भी कहना चाहता हूं कि भारत और यूरोपीय यूनियन Broad Based Trade और Investment Agreement पर बातचीत दो साल से रूकी हुई है। मैंने चांसलर मर्कल से आग्रह किया है कि भारत और यूरोपीय यूनियन की बातचीत को जल्द से जल्द शुरू किया जाए तथा संतुलित और दोनों पक्षों के लिए लाभदायक FTA संपन्न किया जाए। 

भारत Advanced Technology और Defence Manufacturing के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाना चाहता है। आशा करता हूं कि जर्मन इंडस्ट्री इसमें गर्मजोशी से भाग लेंगी और आपकी सरकार से पूरा सहयोग मिलेगा। 

चांसलर मर्कल और मैंने अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भी बातचीत की है। भारत में हमारा यह मानना है कि यूरोप की आर्थिक गति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए और यूरोप में स्थिरता वैश्विक शांति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इन दोनों चुनौतियों पर जर्मनी के नेतृत्व की विश्व की अपेक्षा है। 

मैं ईरान से सफल बातचीत के लिए भी आपकी सराहना करता हूं। इससे पूरे क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव होगा। पश्चिम एशिया में अस्थिरता हमारे नागरिकों की सुरक्षा पर असर करती है। अफगानिस्तान में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विकास दोनों के लिए महत्व रखता है। इस शताब्दी में एशिया पैसिफिक क्या दिशा लेता है वह सबके लिए मायने रखता है। 

आतंक फैल रहा है और नये स्वरूप ले रहा है। इसका खतरा अब विश्व के सभी भूभाग में हम करीब से अनुभव कर रहे हैं। इस वैश्विक चुनौती के लिए व्यापक वैश्विक Strategy की आवश्यकता है। जिसमें भारत और जर्मनी मिलकर काम कर सकते हैं। आने वाले समय में समुद्री, साइबर और अंतरिक्ष सुरक्षा सभी के लिए चिंता का कारण बन सकते हैं और हमें इसमें सहयोग बढ़ाना है। 

मेरा मानना है कि भारत और जर्मनी दोनों ऐसे देश हैं जिन्हें UN Security Council में स्थाई सदस्यता का अधिकार है और इससे विश्व भी लाभान्वित होगा। हम दोनों चाहते हैं कि 70वीं वर्षगांठ एक उत्तम अवसर बने जिसमें UN Security Council Reform को पूरा किया जा सके। हम दोनों पेरिस में एक सफल COP-21 की अपेक्षा करते हैं। 

अंत में, मैं एक बार फिर कहना चाहूंगा कि सफल और Productive यात्रा के लिए मैं आप सभी का, विशेष रूप से चांसलर मर्कल का आभार प्रकट करता हूँ। और मैं अक्टूबर में चांसलर मर्कल की भारत की यात्रा का उत्सुकता से इंतज़ार करूंगा। 

Thank you. 

बर्लिन में जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री की जर्मनी यात्रा से संबंधित प्रश्न का उत्तरः

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी: आज पूरे विश्व का ध्यान भारत की तरफ जा रहा है। भारत दुनिया की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली Economy के रूप में उसने अपनी जगह बनाई है। भारत के पास तीन प्रमुख ऐसी सुविधाएं हैं, जो विश्व में किसी के पास नहीं है। Demographic Dividend, Democracy and Demand. और इन तीनों बातों को देखें तो भारत में manufacturing hub बनने की पूरी संभावना है। जहां low cost manufacturing हो, “zero defect-zero effect” के साथ हो और दुनिया के सभी investors के लिए भारत एक ऐसी जगह है कि जहां पर विपुल मात्रा में work force है।

जहां बहुत बड़ी मात्रा में domestic मांग है और जहां की democratic values हैं। जो जर्मनी और भारत दोनों समान रूप से share करते हैं। तो एक ऐसा माहौल है कि जिसके कारण विश्व के अनेक देशों को और जर्मनी को विशेष रूप से भारत अनुकूल है। जर्मनी की ताकत है manufacturing, विश्व की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए German companies और भारत देश का माहौल, ये दोनों मिलकर के काम करे तो विश्व की अनेक आवश्यकताओं को हम बहुत अच्छे ढंग से पूरा कर सकते हैं।

भारत का work force जो कि इस manufacturing sector में तैयार होगा। वो आने वाले दिनों में एक world work force के रूप में convert हो सकता है। भारत में रोजगार, ये सबसे बड़ी आवश्यकता है और इसलिए हमारा ध्यान manufacturing hub बनाने की दिशा में है।

Hannover fair में जितनी कंपनियां मिलीं बाद में चांसलर मर्केल ने एक शाम डिनर रखा था, यहां के industrial houses के साथ, उसमें भी विस्तार से चर्चा हुई है और मैं देख रहा हूं कि चाहे skill development का काम हो, चाहे vocational education की बात हो, चाहे railway में technology up-gradation हो, expansion हो, Defence manufacturing sector का काम हो, engineering sector की विकास की नई क्षितिज हो, सभी क्षेत्रों में आज German कंपनियां, भारत के साथ मिलकर के काम करने के लिए तैयार हैं। और मेरी और चांसलर मर्केल के बीच जो बातचीत हुई है, उसके कारण इन कंपनियों का भी विश्वास बढ़ा है और उन कंपनियों का भी विश्वास बढ़ा है।

मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में human resource development का काम हो, professional management का काम हो, manufacturing की दिशा में आगे बढ़ने की बात हो, सभी क्षेत्रों में जर्मनी और भारत सफलतापूर्वक आगे बढ़ेंगे, इस विश्वास के साथ मैं आज यहां से लौट रहा हूं।

वैश्विक आतंकवाद के मुद्दे से संबंधित प्रश्न का उत्तरः

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी: मैं मानता हूं कि terrorism ये मानवता के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है। जो भी मानवतवाद में विश्वास करते हैं। उनकी भाषा कोई भी हो, भू-भाग कोई भी हो, परंपराएं कोई भी हो लेकिन मानवतावादी शक्तियों का एक होना बहुत आवश्यक है और सभी मानवतावादी शक्तियों ने आतंकवाद के खिलाफ एक स्वर से, एक ही intensity के साथ बोलने की आवश्यकता है, collectively efforts करने की आवश्यकता है।

और हम देख रहे हैं आज से 25 साल पहले हम भारत के लोग दुनिया को आतंकवाद के खतरे की बात बताते थे तो कुछ लोग हमें कहते थे, ये आपका law and order problem है। आज दुनिया को समझ आया है कि कितना भयंकर रूप होता है और ये मानवता के खिलाफ एक लड़ाई है। जब तक हम मानवतावादी शक्तियों को एकत्र नहीं करते हैं और हम आतंकवाद के सामने समान रूप से व्यवहार नहीं करते हैं, उनको खुला मैदान मिल जाता है। उनको शस्त्र जहां से मिलते हो, उस पर से रोक कैसे लगे? आतंकवादियों को shelter देने वाली अगर सरकारें हैं तो उन सरकारों पर दबाव कैसे पैदा किया जाए? जितनी sensitivity nuclear weapon को लेकर के है, उतनी ही आतंकवाद को पनाह देने वालों देशों के प्रति भी होनी चाहिए। अगर ये ही एक मूड बनता है और हम आतंकवाद को और आतंकवाद को समर्थन करने वालों को isolate करना ये हमारी पहली strategy होनी चाहिए और दुनिया इस पर गंभीरता से सोचेगी।

दूसरा महत्वपूर्ण काम है United Nation में बहुत लंब अर्से से एक प्रस्ताव चर्चा पर pending पड़ा हुआ है। जिसमें आतंकवाद की definition होना बहुत आवश्यक है। मैं चाहूंगा कि जब United Nation अपने 70 साल पूर्ण करने जा रहा है। उस resolution को पारित करे, define करे और दुनिया के लोगों के लिए बंधनकर्ता चीजों का regulation तैयार करे। तब जाकर के एक platform पर से इस मानवता विरोधी पृवत्तियों के खिलाफ दुनिया को एकत्र किया जा सकता है। मैं चांसलर मर्केल के विचारों से परिचित हूं। वे आतंकवाद के खिलाफ उतने ही स्पष्ट विचार रखती हैं, जितना कि हम भारत के लोग पिछले 30 साल से आतंकवाद से परेशान हैं। हम अनुभव करते हैं और मैं मानता हूं कि अब पूरी दुनिया, जिस प्रकार से आतंकवाद फैल रहा है और अधिक सजग बनकर के और अधिक साथ मिलकर के इस मानवता की रक्षा के लिए काम करेंगी।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में, भारत की स्थायी सदस्यता से संबधित प्रश्न का उत्तर:

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी: एक विषय जो आपने पूछा है permanent membership, security council में, मैं दुनिया का इस बात की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। आप जानते हैं कि ये वर्ष UN के 70 साल हो रहे हैं और पूरा विश्व ये वर्ष प्रथम विश्व युद्ध की शताब्दी के वर्ष से गुजर रहा है। विश्व को मालूम होना चाहिए कि भारत के सैनिक प्रथम विश्व युद्ध में 75 thousand से ज्यादा सैनिक शहीद हुए थे और प्रथम विश्व युद्ध में 14 लाख से ज्यादा भारत के सैनिकों को हिस्सा लेना पड़ा था। उसमें भारत का कोई हित नहीं था, भारत की कोई योजना नही थी। UN के बाद आप देखिए Peace Keeping Force, सबसे ज्यादा सैनिक Peace Keeping Force में जो राष्ट्र भेजे जाते हैं, उनमें एक नाम भारत का है। Peace Keeping Force में भी UN के मार्गदर्शन में उत्तम से उत्तम कार्य करने के लिए बार-बार भारत की सराहना होती है और भारत जिसका इतिहास और संस्कृति कभी भी ये वो देश जिसने युद्ध नहीं किया है, आक्रमण नहीं किया है।

वो देश जहां अहिंसा के दूत महात्मा गांधी पैदा हुए थे, वो देश जहां गौतम बुद्ध पैदा हुए थे, जहां की संस्कृति, परंपरा, शांति को समर्पित है, उस देश को अगर United Nation में permanent membership security council न मिले, उसके लिए 70 साल तक उसको इंतजार करना पड़े, तब सवाल उठता है कि शांति पर भरोसा करने वाले, शांति के लिए जीने वाले, शांति जिनके DNA में है, ऐसे देश के प्रति अब न्याय होना चाहिए, समय बहुत चला गया है।

Thank you

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हम ऐसी नीतियां बना रहे हैं जो जनता, विकास और प्रगति के पक्ष में होंः प्रधानमंत्री

World Leaders Forum का ये प्रतिष्ठित मंच, Business और Industry की दुनिया के सभी जाने माने दिग्गज, पॉलिसी मेकर्स, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों।

आप सबके बीच आकर के खुश होना बहुत स्वाभाविक भी है। इस साल समिट का फोकस Shared Future पर है। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। और इन अनुभवों ने एक बात बहुत स्पष्ट कर दी है, कोई चाहे या ना चाहे, हर देश का भविष्य, उसका फ्यूचर, एक-दूसरे से जुड़ा हुआ ही है, Isolation में कुछ संभव नहीं है। इसीलिए Shared Futures की ये theme, आज और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। और भारत तो हमेशा से इसी भावना को लेकर चला है। जी-20 की अध्यक्षता में इसलिए ही भारत का मंत्र रहा, One Earth, One Family, One Future. Shared Future की ये भावना और इसके साथ जुड़ा दायित्वबोध, 21वीं सदी के इस विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान देता है।

साथियों,

आज दुनिया में growth को लेकर के कई तरह की चिंताएं हैं। दुनिया ने बड़ा भयंकर एक रूप देखा है इन दिनों। Resources का वेपनाइजेशन हो रहा है। अविश्वास का वातावरण विश्व के लिए अनेक नई चुनौतियां लेकर के आ रहा है। लेकिन ऐसे समय में भी, दुनिया भारत को growth और hope के bright spot के रूप में देख रही है। भारत ने पिछले 10-12 साल में अपनी 25 करोड़ आबादी को गरीबी से बाहर निकाला है। इतना ही नहीं, अगर आने वाले दिनों की चर्चा करें, तो IMF का forecast है कि भारत दुनिया की fastest growing major economy बना रहेगा। और भारत निरंतर वो कदम उठा रहा है, जो उसके विकास को गति दे रहे हैं।

Friends,

अभी पिछले हफ्ते ही, 15 अगस्त को मैंने लाल किले से सप्त-धारा की सप्त-शक्तियों की बात की है। मैन्यूफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, फूड प्रोसेसिंग, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी समेत, मैंने ऐसे सात सेक्टर्स की बात की है, जिन पर भारत का आज बहुत ज्यादा फोकस है। और इसलिए भारत आज, Policy level पर, नेक्स्ट जनरेशन reforms कर रहा है, ताकि हमारा future सुरक्षित हो। Governance पर reforms कर रहा है, Ease of Living के लिए reforms कर रहा है। पिछली बार जब मैं इसी मंच के माध्यम से आपसे जुड़ा था, तब भी मैंने कहा था, ये Reforms हमारे लिए Compulsion नहीं है। ये हमारा commitment है, ये हमारा conviction है।

साथियों,

2014 में, जब हमारी सरकार बनी, तो उसके बाद से ही रिफॉर्म्स ने कैसे देश की दिशा और दशा बदली है, मैं इसका एक बहुत दिलचस्प उदाहरण आपको देना चाहता हूं। यहां मौजूद शायद ही किसी को PLP के बारे में पता होगा, कोई है, जिसको PLP के बारे में पता है? अपना हाथ उठाएं। यहां इतने मीडिया के दिग्गज बैठे हैं, PLP आपको पता है? और आप सुनकर के हैरान हो जाएंगे। PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट, इसके बारे में किसी को पता नहीं है। और एक दूसरा टर्म आपने जरूर सुना है PLI, ये ज्यादातर लोगों को पता होगा। PLI- यानी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव।

साथियों,

ये दोनों टर्म, भारत के दो अलग-अलग Time Period को डिफाइन करते हैं। आजकल Explainer का जमाना है, तो मैं आपको Explain करता हूं।

साथियों,

आज की युवा पीढ़ी को ये सुनकर हैरानी होगी, कि हमारे देश में एक समय ऐसा भी था, कि अगर कोई कंपनी तय लिमिट से ज्यादा प्रॉडक्शन कर दे, तो उसे पनिशमेंट दिया जाता था। ये पहले की लाइसेंस राज वाली सरकारों का, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल था। ऐसे भी उदाहरण रहे हैं कि अगर किसी फैक्ट्री ने ज्यादा डिमांड देखते हुए ज्यादा प्रॉडक्शन कर दिया, तो उसे नोटिस भेज दिया जाता था। मजबूरी में वो कंपनी अपना प्रॉडक्ट मार्केट में बेचने के बजाय, उसे खुद ही नष्ट कर देती थी।

साथियों,

आज जो लोग Make In India और आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजाक उड़ाते हैं, उनके पुरखों की सोच यही थी, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट। ऐसा करने के पीछे एक विशेष तरह की विकृत मानसिकता काम करती थी। ऐसी मानसिकता वाले लोग हमेशा चाहते थे कि जरूरी चीजों की किल्लत बनी रहे। देश के नागरिकों को अभाव में रखना उनकी पॉलिसी थी। वो चाहते थे कि जनता उनके सामने हाथ जोड़े, हाथ फैलाए, आप समझ गए मैं किन लोगों की बात कर रहा हूं। लोगों से हाथ जुड़वाने के बाद उपकार करना, उन सरकारों का तरीका था, इसलिए वो प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल पर चलते थे। आप कल्पना कर सकते हैं, ऐसे करके उन लोगों ने Employment Generation के बेसिक principal का गला घोंट दिया था। और हैरानी ये, इन लोगों के दरबारियों ने again I repeat, इन लोगों के दरबारियों ने, कभी इसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाई।

साथियों,

हर reform की शुरुआत सबसे पहले, आपके सोचने के तरीके, आपके मानसिक, किस रेंज में आप काम कर रहे हैं, इस सोच के reform से ही होती है। जहां पहले production बढ़ाने पर पनिशमेंट मिलता था, वहीं आज हमारी सरकार production बढ़ाने पर incentive दे रही है। और आज PLI स्कीम की सक्सेस दुनिया देख रही है। सिर्फ इस एक योजना की वजह से, मैं सारी योजनाओं की बात नहीं करता हूं, एक की बात करता हूं, करीब ढाई लाख करोड़ रुपए का actual investment हुआ है। 22 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का production और sales हुई है। 15 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का exports हुआ है, और 14 लाख से ज्यादा direct और indirect jobs बनी हैं। और मैं फिर याद दिलाउंगा, ये आंकड़े सिर्फ एक स्कीम के हैं। आप सोचिए, पहले का लाइसेंस राज वाली सरकार का पनिशमेंट मॉडल जहां बेरोजगारी बढ़ाता था, वहीं आज का हमारा incentive मॉडल लाखों नई जॉब्स क्रिएट कर रहा है।

साथियों,

आज भारत में ये तेज विकास, ये तेज रिफॉर्म इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि भारत में और जिसका अभी सत्य ने उल्लेख किया, political stability है, हमारी policy में continuity है। पहले देश में रिफॉर्म्स की बात करने वाले घोषणा तो कर देते थे, बाद में भूल जाते थे। लेकिन हमने रिफॉर्म्स को लेकर एक क्लियर रोडमैप बनाया। इस रोडमैप की प्रमुख दिशा रही है- गवर्नेंस लेवेल के रिफॉर्म्स हों! इसके लिए, आज 21वीं सदी के भारत में, हम सिर्फ regulations नहीं बदल रहे हैं, हम regulation की पूरी philosophy बदल रहे हैं। पहले regulations की अप्रोच थी- “Prohibited unless permitted.” यानी जब तक सरकार इजाजत ना दे, तब तक आप वो काम नहीं कर सकते। हम इस approach को बदलकर, “Permitted unless prohibited” की तरफ ले जा रहे हैं। यानी, जो काम कानून ने स्पष्ट रूप से मना नहीं किया है, उसके लिए हर कदम पर permission की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए। और इसके पीछे सोच बहुत सीधी है, सरकार और नागरिक के रिश्ते का आधार, Suspicion नहीं, trust होना चाहिए।

साथियों,

यही सोच आपको Jan Vishwas बिल में भी दिखाई देती है। मैं मानता हूं, हर procedural गलती को criminal offence मान लेना ठीक नहीं है। इसीलिए अनेक offences को decriminalise किया गया है। कई मामलों में जेल की जगह केवल आर्थिक penalty का प्रावधान किया गया है। Government और enterprise के रिश्ते में, हम इसी reform mindset को आगे बढ़ा रहे हैं। बीते वर्षों में 40 हजार से ज्यादा compliances हटाए गए हैं, 40 thousand. डेढ़ हजार से ज्यादा, 15 hundred, डेढ़ हजार से ज्यादा, पुराने और बेकार हो चुके कानून हमने खत्म किए, और जब इन सारे reforms को एक साथ देखते हैं, तो अंदाजा होता है, हमारी industries और businesses के कंधों से कितना बड़ा बोझ कम हुआ है।

साथियों,

गवर्नेंस रिफॉर्म्स की इस प्रक्रिया, उस पर हम निरंतर काम कर रहे है। अभी संसद के मॉनसून सत्र में हमने ‘बैंकर्स बुक एविडेंस बिल’ पारित किया है। और वो भी तब जब विपक्ष ने संसद में लगातार गतिरोध बनाया हुआ था। हमने देश की सेवा करने का काम रूकने नहीं दिया। अब इस कानून ने 19वीं सदी के अंग्रेजी कानून को रिप्लेस किया है। अब बैंकों के डिजिटल रिकॉर्ड्स की स्वीकार्यता को कानूनी मान्यता दी गई है। इससे कानूनी उलझनें कम होंगी, सिस्टम में पारदर्शिता होगी, Ease of Doing Business बढ़ेगा।

साथियों,

गवर्नेंस में रिफॉर्म का एक मतलब ये भी है कि सिस्टम ऐसे बनें, जिसमें एक-एक मानव जीवन और उसके समय के प्रति संवेदनशीलता हो। मैं रेलवे का उदाहरण देता हूं। हमारी रेलवेज में भी इसी अप्रोच के साथ काम हुआ है। आज साढ़े 6 हजार से ज्यादा रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की व्यवस्था है। 10 हजार से ज्यादा लेवल क्रॉसिंग गेट्स को भी इंटरलॉकिंग से जोड़ा जा चुका है। इससे ह्यूमन एरर से होने वाले हादसों की आशंका बहुत कम हुई है।

साथियों,

जब 2014 में हमारी सरकार आई, तो करीब 9 हजार फाटक ऐसे थे जो Un-Manned थे। इन्हें हटाना कोई रॉकेट साइंस नहीं था। Un-Manned क्रॉसिंग्स की वजह से हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, लेकिन पहले की सरकारों को इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता था। हमने मिशन मोड में, गत दस वर्ष में, इन Un-Manned क्रॉसिंग्स को समाप्त कर दिया। हमने रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज बनाने की गति भी कई गुना बढ़ा दी। और इसी का नतीजा है कि 2014 के पहले के मुकाबले ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या में Ninety Percent तक की कमी आई है, 90, Ninety Percent. 12 साल पहले जहां एक साल में करीब डेढ़ सौ रेल दुर्घटनाएं होती थीं, वहीं अब इनकी संख्या घटकर 15-20 रह गई है। और हम इसे और कम से कम करने का प्रयास लगातार कर रहे हैं।

साथियों,

Railways में स्वच्छता भी गवर्नेंस रिफॉर्म का एक बड़ा उदाहरण है। एक समय था, जब रेल पटरियों पर गंदगी और human waste एक बड़ी समस्या हुआ करती थी। आज स्थिति पूरी तरह बदल गई है। 2014 से पहले हमारी ट्रेनों में जहां लगभग 12 हजार बायो-टॉयलेट्स लगाए गए थे, वहीं 2014 के बाद ट्रेनों में 3 लाख 60 हजार से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स लगाए गए हैं। यानी, 97 प्रतिशत से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स पिछले 12 वर्षों में लगे हैं। ये बदलाव सिर्फ सफाई का नहीं, यात्रियों की गरिमा, स्वच्छता और आधुनिक भारत के निर्माण की दिशा में गवर्नेंस का एक नया मॉडल है। ये करोड़ों यात्रियों को बेहतर अनुभव देने का अभियान भी है।

साथियों,

गवर्नेंस की क्वालिटी का एक और पैमाना, और वो पैमाना है - समय। जो प्रोजेक्ट शुरू हो, वो समय पर पूरा हो। और जो सर्विस लोगों को मिले, वो भी समय की कसौटी पर खरी उतरे। दिल्ली-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल सिस्टम इसका बहुत अच्छा उदाहरण है। इस कॉरिडोर पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चल रही हैं। ये हमारे देश में पहले कभी सोचा नहीं जा सकता था। अब तक 4 करोड़ से ज्यादा यात्री इसमें ट्रैवल कर चुके हैं। और इसका एक और अहम फैक्टर है, जिसकी चर्चा नहीं होती है। दिल्ली मेरठ नमो भारत रैपिड रेल की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। वरना हम तो हर चीज में कहते हैं, लेट हो तो कहते थे, ये तो इंडियन टाइम है। वक्त बदला है, ये मैं छोटी-छोटी चीजें इसलिए बताता हूं, कि हमें अंदाज आए कि कितने बड़े व्यापक स्तर पर काम हो रहा है। इसी तरह, Delhi Metro की पंक्चुअलिटी। Delhi Metro की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। और ये punctuality, New York, Hong Kong और Paris जैसे शहरों की Metro से करीब-करीब बराबर हो चुकी है। ये सिर्फ समय पर चलती हुई Metro और नमो रेपिड रेल की कहानी नहीं है, ये समय के साथ बदलते हुए भारत की पहचान है। मैं जानता हूं कि अभी भी, और र्मैं कोई इतने से संतोष मानकर बैठने वाला व्यक्ति नहीं हूं, अभी भी इस दिशा में हमें बहुत कुछ करना है, बहुत कुछ बाकी है, लेकिन हम लगातार कर रहे हैं। लेकिन एक शुरूआत तो हुई है और ये शुरुआत सराहनीय है।

साथियों,

हमारे रिफॉर्म्स रोडमैप का एक और बड़ा आयाम है- पॉलिसी लेवल पर होने वाले रिफॉर्म्स! आज हम ऐसी policies बना रहे हैं, जो pro-people हों, Pro-growth हों, pro development हों! पॉलिसीज़ देश और देश के लोगों की जरूरत के हिसाब से होनी चाहिए न कि पॉलिसीज़ बनाकर देश को उनके हिसाब से चलने को मजबूर होना पड़े! मैं आपको एक और Interesting उदाहरण देना चाहता हूं। कुछ साल पहले तक हमारे यहाँ देश का नक्शा बनाना भी गैर-कानूनी था, मैप बनाए तो गैर कानूनी था, आप जेल चले जाएंगे। बिना परमिशन के आप देश में मैपिंग का काम भी नहीं कर सकते थे। आप सोचिए, विदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के जरिए भारत के किसी भी कोने को मैप कर सकती थी, लेकिन भारत में भारतीयों पर भारत का मैप बनाने पर पाबंदी लगी हुई थी।

साथियों,

आज टेक्नोलॉजी के इस दौर में, इस एक पाबंदी से कितने स्टार्टअप्स की हत्या हो सकती थी! कितने ideas implement होने से वंचित रह सकते थे! हमने इस व्यवस्था को भी बदला। हमने Geospatial डेटा का Deregulation किया और आज Geospatial डेटा कितने ही स्टार्टअप्स का आधार बन रहा है।

साथियों,

आज आप लगातार ड्रोन्स की उपयोगिता बढ़ते हुए देख रहे हैं। एग्रीकल्चर में, डिफेंस में, डिलिवरी में, शूटिंग में, कंटेंट क्रिएशन में, ये सब संभव ही नहीं होता, अगर सरकार ने इससे जुड़े नियमों में Reform नहीं किए होते। पहले देश में ड्रोन फ्लाइंग पूरी तरह नियमों में, बंधनों में जकड़ी हुई थी। हमने उसे बंधनों से आजाद किया, और आज भारत की ड्रोन इंडस्ट्री, एक अभूतपूर्व उड़ान के साथ आगे बढ़ रही है।

साथियों,

पहले border areas को लेकर सरकारों की सोच थी कि बॉर्डर पर roads और infrastructure बढ़ेगा, तो उसका फायदा दुश्मन भी उठा सकता है। हमने इस सोच को बदला। हमने कहा, Border infrastructure कमजोरी नहीं, देश की ताकत है। और इसीलिए आज border areas में roads, bridges और tunnels का network तेजी से बढ़ रहा है। सिर्फ 2024 और 2025 में ही, BRO के 250 infrastructure projects देश को समर्पित किए गए हैं। सोच बदली, तो border infrastructure की तस्वीर भी बदल गई।

साथियों,

एक उदाहरण न्यूक्लियर रिफॉर्म्स का भी है। एक ऐसे समय में, जब विकास पूरी तरह से energy dependent है, बंदिशों और प्रतिबंधों के कारण, देश अपने न्यूक्लियर potential का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा था। हमने शांति बिल के जरिए इसमें भी बड़ा रिफॉर्म किया है। आज भारत में न्यूक्लियर एनर्जी में प्राइवेट सेक्टर के लिए रास्ता खुल चुका है। इसी तरह, हमने एक बड़ा पॉलिसी रिफॉर्म डिफेंस सेक्टर में भी किया। 200 साल के पहले जो व्यवस्था चली आ रही थी, उसे बदलकर हमने 40 से ज्यादा ordnance फैक्ट्रीज़ को मर्ज करके 7 फैक्ट्रीज़ बना दी। और उसका परिणाम हमें देखने को मिल रहा है। आज भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए भी आत्मनिर्भर बन रहा है, और 2014 की तुलना में, हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट 55 गुना बढ़ा है। और इसलिए, कई बार रिफॉर्म्स हमारे जीवन में इस तरह घुल-मिल जाते हैं कि हमारा उनकी तरफ ध्यान ही नहीं जाता। आप सोचिए, आपका कोई सामान्य दिन आज कैसे बीतता है। आप सुबह उठते हैं, फोन पर घर का सामान ऑर्डर कर देते हैं, और जब तक ऑफिस के लिए रेडी होते हैं, वो सारा सामान आपके घर आकर के पहुंच जाता है। आपकी गली के स्ट्रीट वेंडर से लेकर, आपकी गाड़ी के शो रूम तक, आपकी सारी पेमेंट्स, सिर्फ एक क्यूआर कोड स्कैन करके हो जाती है। अगर आपकी बेटी, किसी दूसरे शहर में पढ़ती है, तो आप फोन से उसे पैसे भेज सकते हैं, और वो पैसा, कुछ सेकंड्स में उसके पास भी पहुंच जाता है। कई बार तो बिटिया क्यूआर ही शेयर कर देती है कि ‘पापा-मां मैंने ये ड्रेस ले ली है, इसकी पेमेंट कर दीजिए, और आप उसकी शॉपिंग अपने घर बैठे-बैठे करवा देते हैं। ये चीजें Remarkable हैं, लेकिन अब ये कोई भारत के लोगों को कम से कम हैरानी नहीं होती, बाहर के लोग आते हैं, उनको आश्चर्य होता है, अच्छा ऐसे होता है। भारत के लोगों का रूटीन हो गया है। ये भारत के सामान्य मानवी के जीवन का हिस्सा बन चुका है। आप सोचिए, 2014 से पहले ऐसी कितनी ही बातें क्या पॉसिबल थीं?

साथियों,

भारत ने बीते 10-12 सालों में Ease of Living से जुड़े जो रिफॉर्म्स किए हैं, उसकी वजह से लोगों का, खासतौर पर हमारे मिडिल क्लास का जो जीवन बदला है, वो दुनिया के कई विकसित देशों में आज भी एक सपना ही है।

साथियों,

आज दुनिया का सबसे सस्ता डेटा भारत में है, हम सस्ते और अच्छे स्मार्टफोन्स बना रहे हैं। अभी सत्या ने उसका वर्णन किया। भारत दुनिया के fastest 5G rollouts करने वाले देशों में से एक है। हमने आधार को बैंकिंग, मोबाइल कनेक्टिविटी और सर्विसेज से जोड़कर, ई-के.वाई.सी और Digital Authentication जैसी सर्विसेज को पॉसिबल किया है। आज आपको अगर बैंक अकाउंट खोलना है, तो उसके लिए बैंक जाने तक की जरूरत नहीं है। सरकार ने बैंक को ही, आपके पास पहुंचा दिया है। आज चाहे कोई बिल जमा करना हो, कोई टिकट करानी हो, किसी सरकारी दफ्तर में जाने की जरूरत नहीं पड़ती, ये सारा काम ऑनलाइन हो जाता है। इनकम टैक्स की फाइलिंग का काम आसान हुआ है। ऐसी व्यवस्था बनी है कि फॉर्म में मैक्सिमम जानकारियां पहले से भरी होती हैं। आप ये इन्फॉर्मेशन वेरिफाई करते हैं, कुछ जोड़ना है तो जोड़ देते हैं, और सबमिट करते हैं, आपका काम पूरा हो जाता है। पहले जो रिफंड आने में महीनों लगते थे, अब वो भी कुछ ही दिनों में आ जाता है।

साथियों,

आज ई-संजीवनी की मदद से, शायद इसकी चर्चा अभी बहुत कम होती है, ई-संजीवनी की मदद से, गांव के दूर दराज के लोग भी, कहीं से भी डॉक्टर्स के साथ सीधी अपनी चर्चा करके अपने उपचार का रास्ता लेते हैं। और इससे जिन लोगों को अस्पताल जाने के लिए कई किलोमीटर का सफर करना पड़ता था, आज डॉक्टर उनके घर पर, उनकी स्क्रीन पर उपलब्ध है। अब तक ये आंकड़ा भी आपको जरूर आश्चर्य करेगा। यानी भारत ने टेक्नोलॉजी को किस प्रकार से अडाप्ट किया है, सामान्य मानवीय के जीवन को कैसे सरल किया है। अब तक ईं-संजीवनी के तहत करीब-करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशंस हो चुकी हैं।

साथियों,

आज भारत में Travel Experience बदल रहा है, भारत के नागरिकों की यात्राएं पूरी तरह बदल गई हैं। यहां इस हॉल में ऐसा व्यक्ति खोजना मुश्किल होगा, जिसने एयरपोर्ट पर डिजी यात्रा का इस्तेमाल ना किया हो। ऐसे ही आजकल बहुत सारा काम Seamless तरीके से हो रहा है। हाइवे पर फास्ट टैग चल रहे हैं, ताकि आप बिना रुके टोल देकर आगे बढ़ सकें। Ease of Living का सही अर्थ यही है। समय की बचत हो रही है, जीवन आसान हो रहा है, और करोड़ों लोग अपनी प्रगति पर फोकस कर पा रहे हैं।

साथियों,

Politics में अक्सर वही फैसले headlines बनते हैं, जिनका असर आज दिखाई दे, यानी उसकी उमर 24 घंटे हो। पहले की सरकारों ने इलेक्शन सामने देख कर भी घोषणाएं करने का फॉर्मूला अपनाया। लेकिन ऐसी घोषणाओं से देश नहीं बदला। देश बदलने वाले फैसले वो होते हैं, जिनका प्रभाव जमीन पर दिखे, जो वर्तमान और भविष्य, दोनों को ध्यान में रखकर के लिए गए होने चाहिए।

साथियों,

पीएम कुसुम योजना और पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना इसका बहुत बड़ा यूनीक Example है। कुसुम योजना से किसानों को बिजली की चिंता से मुक्ति मिली है। और सूर्यघर योजना से मिडिल क्लास को बहुत फायदा हुआ है।

साथियों,

मैं ये जानता हूं कि अगर मैंने ये अनाउंस कर दिया होता कि आज से लाखों-लाख परिवारों के लिए बिजली मुफ्त है, तो सारा मीडिया, सारी स्क्रीन्स, सारे न्यूजपेपर्स, बड़ी-बड़ी हेडलाइन बनाकर के खबर दे देते कि मोदी जी ने आज अनाउंस कर दिया है। लेकिन हमने कुछ दूसरे अप्रोच से काम शुरू किया। हमने हर घर की छत पर एक सूरज उगाने की ठान ली, और आज देश के 50 लाख से ज्यादा परिवार, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जुड़े हैं। सरकार ने 22 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा इन परिवारों को दिए हैं, ये सोलर सिस्टम लगाने के लिए, ताकि उनकी छत पर सोलर प्लांट लगाकर सोलर पावर पैदा की जा सके। अब ये परिवार, एक्स्ट्रा बिजली को, बिजली ग्रिड में बेचकर, पैसे भी कमा रहे हैं। खुद का बिल तो जीरो हुआ, कमाई भी होने लगी। इस योजना से लोगों के सपनों को भी विस्तार मिल रहा है। बिजली बिल कम हुआ है, तो अब घर में फ्रिज, कूलर, वाशिंग मशीन, टीवी जैसी चीजें लोग खरीदकर रखने लगे हैं। अब ये डर नहीं होता कि बिजली कटौती की वजह से दूध फट जाएगा, अब चिंता नहीं रहती है। अब स्कूल जाने वाले बच्चे रातभर चैन से सो पाते हैं। मैं फिर कहता हूं- इलेक्शन हो या ना हो, लेकिन ये सूर्यघर और उसकी रोशनी बनी रहेगी, इस प्लांट का फायदा, सालों तक देश के परिवारों को होता रहेगा।

साथियों,

आने वाले समय में Ease of Living और Ease of Doing Business का और विस्तार होगा। देश के Youth के लिए, नारीशक्ति के लिए, Farmers के लिए, गरीब और Middle Class के लिए, हमारी सरकार लगातार काम करती रहेगी, हमारी Reform Express और अधिक गति से आगे बढ़ने वाली है। विकसित भारत का लक्ष्य पूरा करने के लिए, हम पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करते रहेंगे। और मैं, मेरे लिए भारत का future अगर सुनिश्चित हो गया ना, तो दुनिया के future में भी स्थिरता लाने का बहुत बड़ा काम इसी धरती से होने वाला है। इस आत्मविश्वास के साथ भारत जितना स्टेबल होगा, भारत का future जितना सुरक्षित होगा, विश्व को सुरक्षत्व का एहसास देने की ताकत यहीं से पैदा होने वाली है। इस सामर्थ्य के साथ, इसी संकल्प के साथ, मैं एक बार फिर, आज के इस कार्यक्रम में मुझे आमंत्रित करने के लिए, Economic Times की पूरी टीम का हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। वन्दे मातरम् !