चांसलर मर्कल, 

मीडिया के सदस्य 

मैं चांसलर मर्कल का और जर्मनी का आभार व्यक्त करता हूँ मेरा और मेरी delegation का गरमजोशी और सम्मान की भावना से स्वागत के लिए। 

और विशेष करके इस लिए कि मेरी सरकार के पहले साल में उन्होंने भारत को विश्व के सबसे बड़े Trade Fair में Partner Country चुना। चांसलर मर्कल ने Hannover में मुझे, मेरे डेलीगेशन और भारत की कई कंपनीज के CEOs के साथ अपना बहुमूल्य समय दिया। और आज फिर से बर्लिन में मेरा और मेरे डेलीगेशन का हार्दिक स्वागत किया। 

मैं इस बात के लिए धन्यवाद देता हूं कि बड़े खुले मन और गहराई से भारत और जर्मनी के संबंधों के बारे में उन्होंने बातचीत की है। यह उनके जर्मनी के हितों पर ध्यान और भारत और जर्मनी के संबंधों के लिए प्रतिबद्धता का प्रतीक है। 

और उन्होंने कल Hannover में भारत के Lion के निमंत्रण को स्वीकार किया और आश्वस्त किया कि जर्मनी के ईगल द्वारा उसका ठोस उत्तर देंगी। मेरा विश्वास है कि धरती का राजा, Lion, और आकाश के राजा, eagle, की अच्छी जोड़ी बनेगी। 

जब मैं पिछली बार बर्लिन आया था तो उस शाम बर्लिन ने world cup final में सफलता प्राप्त की थी। मैं आज यह महसूस कर रहा हूँ कि भारत और जर्मनी की Strategic partnership को एक नयी उँचाई पर ले जाने में हम अवश्य सफल होंगे। 

भारत में जब कोई Technology, manufacturing या High Quality की बात करता है तो सबसे पहले जर्मनी का नाम ध्यान में आता है। तो यह स्वाभाविक है कि आज भारत जब आर्थिक विकास और रोजगार के लिए Make in India के नये रास्ते पर चला है तो उसे जर्मनी के साथ की अपेक्षा है। 

आर्थिक परिवर्तन या सामान्य व्यक्ति के जीवन में सुधार के किसी भी उद्देश्य के बारे में सोचें तो उसमें Technology, Skills, Innovation और Investment की बड़ी भूमिका होती है। मेरा जर्मनी आने का उद्देश्य यह था कि मैं जर्मन Industry को भारत में आने के लिए आमंत्रित करूँ और उन्हें आश्वस्त करूँ कि उन्हें एक खुले, आसान और स्थिर आर्थिक माहौल मिलेगा और जिसमें प्रवेश करने में और काम करने में मेरी तरफ से पूरी सहायता मिलेगी। 

चांसलर मर्कल और जर्मन Industry के उत्साह और रूचि को देखकर मैं बहुत प्रोत्साहित महसूस कर रहा हूँ। उनके फीडबैक से नीतियों को बनाने में मुझे बहुत लाभ होगा। 

मैंने यह निर्णय किया है कि जर्मन कंपनीस के लिए हम एक mechanism बनाएँगे ताकि उनको भारत में निवेश करने में, business करने में सुविधा हो। 

भारत का Make in India और हमारे युवाओं को रोजगार Skill Development पर आधारित है। जर्मनी विश्व में इस क्षेत्र में लीडर है। भारत में Skill Development हमें अपनी परिस्थितियों को देखते हुए करनी होगी। साथ ही साथ जर्मनी से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं और इस बारे में विस्तार से बातचीत हुई है। उसी प्रकार Science, Technology और Education में हम और घनिष्ठ संबंध और सहयोग बढ़ायेंगे। 

एक क्षेत्र, जो मेरे लिए निजी रूप से और देश के लिए बहुत बड़ी प्राथमिकता रखता है वह है Renewable energy और Energy Efficiency । जैसाकि मैंने पहले कहा कि हमने अगले 7 सालों में 175 गीगावाट का Renewable energy का बहुत बड़ा लक्ष्य रखा है। जर्मनी इस क्षेत्र में भारत का बड़े स्तर पर आर्थिक सहयोग कर रहा है। मैं चाहूंगा कि इसके साथ ही साथ जर्मनी, भारत में Clean Energy के उपकरण बनाने में भी आगे बढ़े। और साथ मिलकर climate change की चुनौती का सामना करें। 

भारत Manufacturing hub बनेगा और Infrastructure का विस्तार होगा तो trade के लिए भी लाभदायक होगा। आयात की जरूरत और बढ़ेगी। और स्वाभाविक है कि इससे जर्मनी की Industry को भी लाभ पहुंचेगा। 

इस संदर्भ में यह भी कहना चाहता हूं कि भारत और यूरोपीय यूनियन Broad Based Trade और Investment Agreement पर बातचीत दो साल से रूकी हुई है। मैंने चांसलर मर्कल से आग्रह किया है कि भारत और यूरोपीय यूनियन की बातचीत को जल्द से जल्द शुरू किया जाए तथा संतुलित और दोनों पक्षों के लिए लाभदायक FTA संपन्न किया जाए। 

भारत Advanced Technology और Defence Manufacturing के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाना चाहता है। आशा करता हूं कि जर्मन इंडस्ट्री इसमें गर्मजोशी से भाग लेंगी और आपकी सरकार से पूरा सहयोग मिलेगा। 

चांसलर मर्कल और मैंने अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भी बातचीत की है। भारत में हमारा यह मानना है कि यूरोप की आर्थिक गति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए और यूरोप में स्थिरता वैश्विक शांति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इन दोनों चुनौतियों पर जर्मनी के नेतृत्व की विश्व की अपेक्षा है। 

मैं ईरान से सफल बातचीत के लिए भी आपकी सराहना करता हूं। इससे पूरे क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव होगा। पश्चिम एशिया में अस्थिरता हमारे नागरिकों की सुरक्षा पर असर करती है। अफगानिस्तान में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विकास दोनों के लिए महत्व रखता है। इस शताब्दी में एशिया पैसिफिक क्या दिशा लेता है वह सबके लिए मायने रखता है। 

आतंक फैल रहा है और नये स्वरूप ले रहा है। इसका खतरा अब विश्व के सभी भूभाग में हम करीब से अनुभव कर रहे हैं। इस वैश्विक चुनौती के लिए व्यापक वैश्विक Strategy की आवश्यकता है। जिसमें भारत और जर्मनी मिलकर काम कर सकते हैं। आने वाले समय में समुद्री, साइबर और अंतरिक्ष सुरक्षा सभी के लिए चिंता का कारण बन सकते हैं और हमें इसमें सहयोग बढ़ाना है। 

मेरा मानना है कि भारत और जर्मनी दोनों ऐसे देश हैं जिन्हें UN Security Council में स्थाई सदस्यता का अधिकार है और इससे विश्व भी लाभान्वित होगा। हम दोनों चाहते हैं कि 70वीं वर्षगांठ एक उत्तम अवसर बने जिसमें UN Security Council Reform को पूरा किया जा सके। हम दोनों पेरिस में एक सफल COP-21 की अपेक्षा करते हैं। 

अंत में, मैं एक बार फिर कहना चाहूंगा कि सफल और Productive यात्रा के लिए मैं आप सभी का, विशेष रूप से चांसलर मर्कल का आभार प्रकट करता हूँ। और मैं अक्टूबर में चांसलर मर्कल की भारत की यात्रा का उत्सुकता से इंतज़ार करूंगा। 

Thank you. 

बर्लिन में जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री की जर्मनी यात्रा से संबंधित प्रश्न का उत्तरः

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी: आज पूरे विश्व का ध्यान भारत की तरफ जा रहा है। भारत दुनिया की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली Economy के रूप में उसने अपनी जगह बनाई है। भारत के पास तीन प्रमुख ऐसी सुविधाएं हैं, जो विश्व में किसी के पास नहीं है। Demographic Dividend, Democracy and Demand. और इन तीनों बातों को देखें तो भारत में manufacturing hub बनने की पूरी संभावना है। जहां low cost manufacturing हो, “zero defect-zero effect” के साथ हो और दुनिया के सभी investors के लिए भारत एक ऐसी जगह है कि जहां पर विपुल मात्रा में work force है।

जहां बहुत बड़ी मात्रा में domestic मांग है और जहां की democratic values हैं। जो जर्मनी और भारत दोनों समान रूप से share करते हैं। तो एक ऐसा माहौल है कि जिसके कारण विश्व के अनेक देशों को और जर्मनी को विशेष रूप से भारत अनुकूल है। जर्मनी की ताकत है manufacturing, विश्व की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए German companies और भारत देश का माहौल, ये दोनों मिलकर के काम करे तो विश्व की अनेक आवश्यकताओं को हम बहुत अच्छे ढंग से पूरा कर सकते हैं।

भारत का work force जो कि इस manufacturing sector में तैयार होगा। वो आने वाले दिनों में एक world work force के रूप में convert हो सकता है। भारत में रोजगार, ये सबसे बड़ी आवश्यकता है और इसलिए हमारा ध्यान manufacturing hub बनाने की दिशा में है।

Hannover fair में जितनी कंपनियां मिलीं बाद में चांसलर मर्केल ने एक शाम डिनर रखा था, यहां के industrial houses के साथ, उसमें भी विस्तार से चर्चा हुई है और मैं देख रहा हूं कि चाहे skill development का काम हो, चाहे vocational education की बात हो, चाहे railway में technology up-gradation हो, expansion हो, Defence manufacturing sector का काम हो, engineering sector की विकास की नई क्षितिज हो, सभी क्षेत्रों में आज German कंपनियां, भारत के साथ मिलकर के काम करने के लिए तैयार हैं। और मेरी और चांसलर मर्केल के बीच जो बातचीत हुई है, उसके कारण इन कंपनियों का भी विश्वास बढ़ा है और उन कंपनियों का भी विश्वास बढ़ा है।

मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में human resource development का काम हो, professional management का काम हो, manufacturing की दिशा में आगे बढ़ने की बात हो, सभी क्षेत्रों में जर्मनी और भारत सफलतापूर्वक आगे बढ़ेंगे, इस विश्वास के साथ मैं आज यहां से लौट रहा हूं।

वैश्विक आतंकवाद के मुद्दे से संबंधित प्रश्न का उत्तरः

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी: मैं मानता हूं कि terrorism ये मानवता के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है। जो भी मानवतवाद में विश्वास करते हैं। उनकी भाषा कोई भी हो, भू-भाग कोई भी हो, परंपराएं कोई भी हो लेकिन मानवतावादी शक्तियों का एक होना बहुत आवश्यक है और सभी मानवतावादी शक्तियों ने आतंकवाद के खिलाफ एक स्वर से, एक ही intensity के साथ बोलने की आवश्यकता है, collectively efforts करने की आवश्यकता है।

और हम देख रहे हैं आज से 25 साल पहले हम भारत के लोग दुनिया को आतंकवाद के खतरे की बात बताते थे तो कुछ लोग हमें कहते थे, ये आपका law and order problem है। आज दुनिया को समझ आया है कि कितना भयंकर रूप होता है और ये मानवता के खिलाफ एक लड़ाई है। जब तक हम मानवतावादी शक्तियों को एकत्र नहीं करते हैं और हम आतंकवाद के सामने समान रूप से व्यवहार नहीं करते हैं, उनको खुला मैदान मिल जाता है। उनको शस्त्र जहां से मिलते हो, उस पर से रोक कैसे लगे? आतंकवादियों को shelter देने वाली अगर सरकारें हैं तो उन सरकारों पर दबाव कैसे पैदा किया जाए? जितनी sensitivity nuclear weapon को लेकर के है, उतनी ही आतंकवाद को पनाह देने वालों देशों के प्रति भी होनी चाहिए। अगर ये ही एक मूड बनता है और हम आतंकवाद को और आतंकवाद को समर्थन करने वालों को isolate करना ये हमारी पहली strategy होनी चाहिए और दुनिया इस पर गंभीरता से सोचेगी।

दूसरा महत्वपूर्ण काम है United Nation में बहुत लंब अर्से से एक प्रस्ताव चर्चा पर pending पड़ा हुआ है। जिसमें आतंकवाद की definition होना बहुत आवश्यक है। मैं चाहूंगा कि जब United Nation अपने 70 साल पूर्ण करने जा रहा है। उस resolution को पारित करे, define करे और दुनिया के लोगों के लिए बंधनकर्ता चीजों का regulation तैयार करे। तब जाकर के एक platform पर से इस मानवता विरोधी पृवत्तियों के खिलाफ दुनिया को एकत्र किया जा सकता है। मैं चांसलर मर्केल के विचारों से परिचित हूं। वे आतंकवाद के खिलाफ उतने ही स्पष्ट विचार रखती हैं, जितना कि हम भारत के लोग पिछले 30 साल से आतंकवाद से परेशान हैं। हम अनुभव करते हैं और मैं मानता हूं कि अब पूरी दुनिया, जिस प्रकार से आतंकवाद फैल रहा है और अधिक सजग बनकर के और अधिक साथ मिलकर के इस मानवता की रक्षा के लिए काम करेंगी।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में, भारत की स्थायी सदस्यता से संबधित प्रश्न का उत्तर:

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी: एक विषय जो आपने पूछा है permanent membership, security council में, मैं दुनिया का इस बात की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। आप जानते हैं कि ये वर्ष UN के 70 साल हो रहे हैं और पूरा विश्व ये वर्ष प्रथम विश्व युद्ध की शताब्दी के वर्ष से गुजर रहा है। विश्व को मालूम होना चाहिए कि भारत के सैनिक प्रथम विश्व युद्ध में 75 thousand से ज्यादा सैनिक शहीद हुए थे और प्रथम विश्व युद्ध में 14 लाख से ज्यादा भारत के सैनिकों को हिस्सा लेना पड़ा था। उसमें भारत का कोई हित नहीं था, भारत की कोई योजना नही थी। UN के बाद आप देखिए Peace Keeping Force, सबसे ज्यादा सैनिक Peace Keeping Force में जो राष्ट्र भेजे जाते हैं, उनमें एक नाम भारत का है। Peace Keeping Force में भी UN के मार्गदर्शन में उत्तम से उत्तम कार्य करने के लिए बार-बार भारत की सराहना होती है और भारत जिसका इतिहास और संस्कृति कभी भी ये वो देश जिसने युद्ध नहीं किया है, आक्रमण नहीं किया है।

वो देश जहां अहिंसा के दूत महात्मा गांधी पैदा हुए थे, वो देश जहां गौतम बुद्ध पैदा हुए थे, जहां की संस्कृति, परंपरा, शांति को समर्पित है, उस देश को अगर United Nation में permanent membership security council न मिले, उसके लिए 70 साल तक उसको इंतजार करना पड़े, तब सवाल उठता है कि शांति पर भरोसा करने वाले, शांति के लिए जीने वाले, शांति जिनके DNA में है, ऐसे देश के प्रति अब न्याय होना चाहिए, समय बहुत चला गया है।

Thank you

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शांति और संवाद की हमारी एकजुट आवाज पूरी दुनिया तक पहुंचे: पश्चिम एशिया संघर्ष पर राज्यसभा में पीएम मोदी
March 24, 2026
होर्मुज स्ट्रेट में दुनिया के अनेक जहाज फंसे हैं, उनमें बहुत बड़ी संख्या में भारतीय क्रू मेंबर्स हैं। यह भी भारत के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है: प्रधानमंत्री
ऐसी चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील घड़ी में, यह अत्यंत आवश्यक है कि भारत की संसद के इस उच्च सदन से संपूर्ण विश्व के लिए शांति और संवाद का एक साझा एवं एकजुट स्वर गूँजे: प्रधानमंत्री
एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में निवास करते हैं और वहाँ कार्यरत हैं, उनके जीवन और जीविका की सुरक्षा भारत के लिए एक अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है : प्रधानमंत्री
पश्चिम एशिया में छिड़े इस युद्ध को तीन सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है और इस संघर्ष ने संपूर्ण विश्व के समक्ष एक गंभीर ऊर्जा संकट उत्पन्न कर दिया है: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और होर्मुज़ स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में व्यवधान पूरी तरह से अस्वीकार्य है: प्रधानमंत्री
भारत ने नागरिकों, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर तथा ऊर्जा और परिवहन से संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले हमलों की निंदा की है : प्रधानमंत्री
युद्ध की शुरुआत के बाद से अब तक, मैंने पश्चिम एशिया के अधिकांश देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो दौर की टेलीफोन वार्ता की है : प्रधानमंत्री
हम सभी खाड़ी देशों के साथ निरंतर संपर्क में हैं, साथ ही, हम ईरान, इजराइल और अमेरिका के साथ भी लगातार संवाद बनाए हुए हैं: प्रधानमंत्री
हमारा लक्ष्य संवाद और कूटनीति के माध्यम से इस क्षेत्र में शांति बहाल करना है: प्रधानमंत्री
हमने संबंधित पक्षों के साथ क्षेत्रीय तनाव को कम करने और होर्मुज़ स्ट्रेट में आवाजाही पुनः बहाल करने पर भी चर्चा की है: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने आश्वस्त करते हुए कहा कि युद्ध के इस कठिन वातावरण में भी भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारत कूटनीतिक माध्यमों से निरंतर प्रयास कर रहा है
युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज स्ट्रेट मैं जहाजों का आना-जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है, लेकिन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमारी सरकार ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से रास्ता बनाने का प्रयास किया है: प्रधानमंत्री
हमारा निरंतर प्रयास है कि जहाँ से भी संभव हो, भारत को तेल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके और देश ऐसे प्रत्येक प्रयास के सकारात्मक परिणामों का साक्षी बन रहा है: प्रधानमंत्री
पिछले कुछ दिनों में विश्व के कई देशों से कच्चे तेल और एलपीजी लेकर जहाज भारत पहुँचे हैं और इस दिशा में हमारे प्रयास आने वाले दिनों में भी निरंतर जारी रहेंगे : प्रधानमंत्री
हमारी अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है और सरकार तेजी से बदलती परिस्थितियों पर पैनी नजर रख रही है : प्रधानमंत्री
सरकार वर्तमान परिस्थितियों के अल्पकालिक, मध्यम और दीर्घकालिक प्रभावों के समाधान हेतु एक सुनियोजित रणनीति के साथ काम कर रही है: प्रधानमंत्री
सरकार ने उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियाँ कर ली हैं : प्रधानमंत्री
सरकार निरंतर यह प्रयास कर रही है कि किसी भी संकट का बोझ हमारे किसानों पर न पड़े : प्रधानमंत्री
मैं देश के किसानों को एक बार फिर आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हर चुनौती के समाधान के लिए सरकार पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ी है : प्रधानमंत्री

माननीय सभापति जी,

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और उससे बनी परिस्थितियों से हम सभी परिचित हैं। मैं आज संसद के उच्च सदन के सामने और देशवासियों के सामने इन विकट परिस्थितियों पर सरकार का पक्ष साझा करने के लिए उपस्थित हुआ हूं। पश्चिम एशिया में चल रहे इस युद्ध को तीन सप्ताह से अधिक का समय हो चुका है। इस युद्ध ने पूरे विश्व में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। भारत के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है। इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। इससे पेट्रोल, डीजल, गैस और फर्टिलाइजर जैसे जरूरी सामान के रूटीन सप्लाई प्रभावित हो रही है। गल्फ देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, वहां काम करते हैं। उनके जीवन और आजीविका की सुरक्षा भी भारत के लिए बहुत बड़ी चिंता है। होर्मुज स्ट्रेट में दुनिया के अनेक जहाज फंसे हैं, उनमें बहुत बड़ी संख्या में भारतीय क्रू मेंबर्स हैं। यह भी भारत के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। ऐसी विकट परिस्थिति में आवश्यक है कि भारत की संसद के इस उच्च सदन से शांति और संवाद की एकजुट आवाज पूरे विश्व में जाए।

सभापति जी,

युद्ध की शुरुआत के बाद से मैंने पश्चिम एशिया के ज्यादातर देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो राउंड फोन पर बात की है। हम गल्फ के सभी देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं। हम ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं। हमारा लक्ष्य डायलॉग और डिप्लोमेसी के माध्‍यम से क्षेत्र में शांति की बहाली का है। हमने डि एस्केलेशन और होर्मुज स्ट्रेट खोले जाने पर भी उनसे बात की है। कमर्शियल जहाजों पर हमला और होर्मुज स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जल मार्ग में रुकावट अस्वीकार्य है। भारत ने नागरिकों पर, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर पर, एनर्जी और ट्रांसपोर्ट से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का विरोध किया है। भारत डिप्लोमेसी के जरिए युद्ध के इस माहौल में भी भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए सतत प्रयास कर रहा है। भारत ने इस समस्या के समाधान के लिए संवाद का ही रास्ता सुझाया है। इस युद्ध में किसी के भी जीवन पर संकट मानवता के हित में नहीं है। इसलिए भारत का सतत प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रोत्साहित करने का है।

सभापति जी,

संकट की स्थिति में देश-विदेश में भारतीयों की सुरक्षा हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता है। युद्ध शुरू होने के बाद से लेकर अब तक 3 लाख 75 हज़ार से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान से ही अभी तक 1000 से अधिक भारतीय सुरक्षित वापस लौटे हैं। इनमें 700 से अधिक मेडिकल की पढ़ाई करने वाले युवा हैं। हमारी सरकार संकट के इस समय में पूरी संवेदनशीलता से कम कर रही है। सभी देशों ने वहां मौजूद भारतीयों की सुरक्षा का पूरा आश्वासन दिया है। हालांकि यह बहुत दुखद है कि हमलों के कारण कुछ भारतीयों की मृत्यु हुई है और कुछ घायल भी हुए हैं। ऐसे मुश्किल हालात में परिवारजनों को आवश्यक मदद दी जा रही है। जो घायल हैं, उनका बेहतर इलाज सुनिश्चित कराया जा रहा है।

सभापति जी,

होर्मुज स्ट्रेट विश्व व्यापार के सबसे बड़े रूट्स में से एक है। विशेष तौर पर कच्चे तेल, गैस और फर्टिलाइजर से जुड़ा परिवहन इस क्षेत्र से बहुत बड़ी मात्रा में होता है। युद्ध के बाद से ही होर्मुज स्ट्रेट मैं जहाजों का आना-जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है, लेकिन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमारी सरकार ने संवाद से, कूटनीति के माध्यम से रास्ते बनाने का प्रयास किया है। प्रयास यह है कि जहां से भी संभव हो, वहां से तेल और गैस की सप्लाई भारत पहुंचे। ऐसी हर कोशिश के नतीजे भी देश देख रहा है। बीते कुछ दिनों में दुनिया के अनेक देशों से कच्‍चा तेल और एलपीजी से भरे जहाज भारत आए हैं। इस दिशा में हमारे प्रयास आने वाले दिनों में भी जारी रहेंगे।

सभापति जी,

भारत का प्रयास है कि तेल हो, गैस हो, फर्टिलाइजर हो, ऐसे हर जरूरी सामान से जुड़े जहाज भारत तक सुरक्षित पहुंचे। लेकिन इस युद्ध से बनी वैश्विक परिस्थितियों अगर लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो गंभीर दुष्परिणाम तय है। इसलिए भारत अपनी रेसिलियंस बढ़ाने के लिए जो भी प्रयास बीते वर्षों में किए हैं, उनको और गति दे रहा है।

सभापति जी,

कोई भी संकट हो, वह हमारे हौसलों और हमारे प्रयास दोनों की परीक्षा लेता है। देश ऐसे संकटों का बेहतर तरीके से सामना कर सके, इसके लिए बीते 11 वर्षों में निरंतर निर्णय लिए गए हैं। एनर्जी इंपोर्ट का डायवर्सिफिकेशन ऐसे ही प्रयासों का हिस्सा है। पहले क्रूड ऑयल, एलएनजी, एलपीजी, ऐसी एनर्जी जरूरतों के लिए 27 देशों से इंपोर्ट किया जाता था। वहीं आज भारत 41 देशों से एनर्जी इंपोर्ट कर रहा है। बीते दशक में भारत ने संकट के ऐसे ही समय के लिए कच्चे तेल के भंडारों को भी प्राथमिकता दी है। हमारी तेल कंपनियां संकट के समय के लिए काफी मात्रा में पेट्रोल और डीजल का भंडार रखती हैं। बीते 11 वर्षों में 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक तक स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व भी डेवलप किया गया है और 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक के रिजर्व की व्यवस्था पर देश काम कर रहा है। साथ ही, बीते दशक में भारत की रिफायनिंग कैपेसिटी भी अच्छी-खासी बढ़ाई गई है। मैं आपके माध्यम से सदन को और देश को या यह देना चाहता हूं कि भारत के पास क्रूड ऑयल के पर्याप्त स्टोरेज के और निरंतर सप्लाई की व्यवस्थाएं हैं।

सभापति जी,

हमारी सरकार की कोशिश है कि ईंधन के किसी एक ही स्रोत पर ज्यादा निर्भरता ना रहे। सरकार घरेलू गैस सप्लाई में एलपीजी के अलावा पीएनजी पर भी बल दे रही है। बीते दशक में देश में पीएनजी कनेक्शन पर अभूतपूर्व काम हुआ है। बीते दिनों में इस काम को और तेज किया गया है। साथ ही, एलजी के घरेलू उत्पादन को भी बड़े पैमाने पर बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

सभापति जी,

बीते वर्षों में सरकार का निरंतर प्रयास रहा है कि हर सेक्टर में दूसरे देशों पर निर्भरता कम से कम हो। हम ज्यादा से ज्यादा आत्मनिर्भर हों, यही एकमात्र विकल्प है। जैसे भारत का 90% से अधिक तेल विदेशी जहाजों पर होता है, यह स्थिति किसी भी वैश्विक संकट में भारत की स्थिति को और भी गंभीर बना देती है। इसलिए सरकार ने मेड इन इंडिया जहाज बनाने के लिए करीब 70000 करोड़ रुपए का अभियान शुरू किया है। भारत आज शिप बिल्डिंग, शिप ब्रेकिंग, मेंटेनेंस एंड ओवरहालिंग, ऐसी हर सुविधा का निर्माण पर तेज गति से कम कर रहा है। भारत अपने डिफेंस सेक्टर को भी अधिक रेसिलियंट बना रहा है। बीते दशक में किए गए प्रयासों से भारत आज अपनी जरूरत के अधिकांश हथियार भारत में ही बना रहा है। एक समय था, जब भारत अपने जीवन रक्षक दावों के कच्चे माल यानी API के लिए भी दूसरे देशों पर बहुत अधिक निर्भर था। बीते वर्षों में देश ने भारत में ही API इकोसिस्टम बनाने के लिए अनेक प्रयास किए हैंं। इसी प्रकार रेयर अर्थ मिनिरल्स में विदेशी निर्भरता को कम करने के लिए भी बड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

आदरणीय सभापति जी,

वर्तमान संकट ने पूरी दुनिया की इकोनॉमी को हिला दिया है। अभी तक पश्चिम एशिया में जो नुकसान हुआ है, उससे रिकवर होने में भी दुनिया को बहुत समय लगेगा। भारत में इसका कम से कम दुष्प्रभाव हो, इसके लिए निरंतर प्रयास किया जा रहे हैं। हमारे इकोनॉमी के फंडामेंटल्‍स मजबूत हैं और सरकार पल-पल बदलते हालात पर नजर रखे हुए हैं। सरकार इसके शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म ऐसे हर प्रभाव के लिए एक रणनीति के साथ काम कर रही है। भारत सरकार ने एक इंटर मिनिस्ट्रियल ग्रुप भी बनाया है, यह ग्रुप नियमित मिलता है और हमारे इंपोर्ट एक्सपोर्ट में आने वाली हर दिक्कत का आकलन करता है और यह ग्रुप आवश्यक समाधान पर भी निरंतर काम करता रहा है। जैसे कोरोना के समय में अलग-अलग सेक्टर्स की चुनौतियों से निपटने के लिए एक्सपोर्ट्स और ऑफिसर्स के empowered groups बने थे, वैसे ही कल ही ऐसे 7 नए empowered groups का भी गठन किया गया है। यह ग्रुप सप्लाई चैन, पेट्रोल-डीजल, फर्टिलाइजर, गैस, महंगाई, ऐसे विषयों पर त्वरित और दूरगामी रणनीति के तहत कार्यवाही करने का काम करेंगे। मुझे पूरा भरोसा है कि इस साझा प्रयासों से हम परिस्थितियों का बेहतर सामना कर पाएंगे।

आदरणीय सभापति जी,

सरकार यह भी प्रयास कर रही है कि आने वाले बुवाई के सीजन में किसानों को पर्याप्त खाद मिलती रहे। सरकार ने खाद की पर्याप्त सप्लाई के लिए आवश्यक तैयारियां की हैं। सरकार का निरंतर प्रयास है कि किसानों पर किसी भी संकट का बोझ ना पड़े। मैं देश के किसानों को फिर आश्वस्त करूंगा कि सरकार हर चुनौती के समाधान के लिए उनके साथ खड़ी है।

आदरणीय सभापति जी,

यह राज्यों का सदन है। आने वाले समय में यह संकट हमारे देश की बड़ी परीक्षा लेने वाला है और इस परीक्षा में सफलता के लिए राज्यों का सहयोग बहुत आवश्यक है। इसलिए इस सदन के माध्यम से मैं देश के सभी राज्यों की सरकारों से भी कुछ आग्रह करना चाहता हूं। संकट के समय गरीबों पर, श्रमिकों पर, प्रवासी साथियों पर बहुत बड़ा असर पड़ता है। इसलिए पीएम गरीब कल्याण अन्‍न योजना का लाभ समय पर मिलता रहे, यह सुनिश्चित करना होगा। जहां प्रवासी श्रमिक साथी काम करते हैं, उनकी परेशानियों को दूर करने के लिए प्रोएक्टिव कदम उठाए जाएं। ऐसी स्थितियों पर नजर रखने के लिए राज्य सरकारें विशेष व्यवस्थाएं करें, तो इससे काफी सुविधा होगी। राज्य सरकारों को एक और चुनौती पर भी बहुत अधिक ध्यान देना होगा, ऐसे समय में कालाबाजारी करने वाले, जमाखोरी करने वाले बहुत एक्टिव हो जाते हैं। जहां से भी ऐसी शिकायतें आती हैं, वहां पर त्वरित कार्यवाही होनी चाहिए। जरूरी चीजों की सप्लाई निर्बाध चलती रहे, यह सुनिश्चित करना हर राज्‍य की प्राथमिकता होनी चाहिए।

आदरणीय सभापति जी,

मैं सभी राज्य सरकारों से एक अनुरोध और करना चाहता हूं। संकट चाहे कितना भी बड़ा हो, भारत की तेज ग्रोथ बनाए रखना, हम सभी का दायित्व है। हमें इसके लिए हर जरूरी कदम, हर जरूरी रिफॉर्म्स तेजी से करते रहने होंगे। यह राज्य सरकारों के पास बहुत बड़ा अवसर भी है। यह टीम इंडिया की भी बहुत बड़ी परीक्षा है। कोरोना के महासंकट में केंद्र और राज्यों ने टीम इंडिया बनकर कोविड मैनेजमेंट का एक बेहतरीन मॉडल सामने रखा था। अलग-अलग पॉलिटिकल पार्टी की सरकारें होने के बावजूद टेस्टिंग, वैक्सीनेशन से लेकर जरूरी चीजों की आपूर्ति टीम इंडिया के प्रयासों से ही निश्चित हो पाई थी। हमें उसी भावना के साथ आगे भी काम करना है। सभी राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के प्रयासों से देश इस गंभीर वैश्विक संकट का प्रभावी रूप से सामना कर पाएगा।

आदरणीय सभापति जी,

यह संकट अलग प्रकार का है और इसके समाधान भी अलग प्रकार से ही तय किया जा रहे हैं। हमें धीरज के साथ, संयम के साथ, शांत मन से हर चुनौती का मुकाबला करना है।

आदरणीय सभापति जी,

जैसा कि हम देख रहे हैं कि इस युद्ध को लेकर पल-पल में हालात बदल रहे हैं। इसलिए मैं देशवासियों से भी कहूंगा कि हमें हर चुनौती के लिए तैयार रहना ही होगा। इस युद्ध के दुष्प्रभाव लंबे समय तक रहने की प्रबल आशंका है। लेकिन मैं देशवासियों को भरोसा देता हूं, सरकार सतर्क है, तत्पर है और पूरी गंभीरता से रणनीति बना रही है, हर निर्णय ले रही है। देश की जनता का हित हमारे लिए सर्वोपरि है। यही हमारी पहचान है, यही हमारी ताकत है। इसी भावना के साथ मैं अपना वक्तव्य समाप्त करता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!