चांसलर मर्कल, 

मीडिया के सदस्य 

मैं चांसलर मर्कल का और जर्मनी का आभार व्यक्त करता हूँ मेरा और मेरी delegation का गरमजोशी और सम्मान की भावना से स्वागत के लिए। 

और विशेष करके इस लिए कि मेरी सरकार के पहले साल में उन्होंने भारत को विश्व के सबसे बड़े Trade Fair में Partner Country चुना। चांसलर मर्कल ने Hannover में मुझे, मेरे डेलीगेशन और भारत की कई कंपनीज के CEOs के साथ अपना बहुमूल्य समय दिया। और आज फिर से बर्लिन में मेरा और मेरे डेलीगेशन का हार्दिक स्वागत किया। 

मैं इस बात के लिए धन्यवाद देता हूं कि बड़े खुले मन और गहराई से भारत और जर्मनी के संबंधों के बारे में उन्होंने बातचीत की है। यह उनके जर्मनी के हितों पर ध्यान और भारत और जर्मनी के संबंधों के लिए प्रतिबद्धता का प्रतीक है। 

और उन्होंने कल Hannover में भारत के Lion के निमंत्रण को स्वीकार किया और आश्वस्त किया कि जर्मनी के ईगल द्वारा उसका ठोस उत्तर देंगी। मेरा विश्वास है कि धरती का राजा, Lion, और आकाश के राजा, eagle, की अच्छी जोड़ी बनेगी। 

जब मैं पिछली बार बर्लिन आया था तो उस शाम बर्लिन ने world cup final में सफलता प्राप्त की थी। मैं आज यह महसूस कर रहा हूँ कि भारत और जर्मनी की Strategic partnership को एक नयी उँचाई पर ले जाने में हम अवश्य सफल होंगे। 

भारत में जब कोई Technology, manufacturing या High Quality की बात करता है तो सबसे पहले जर्मनी का नाम ध्यान में आता है। तो यह स्वाभाविक है कि आज भारत जब आर्थिक विकास और रोजगार के लिए Make in India के नये रास्ते पर चला है तो उसे जर्मनी के साथ की अपेक्षा है। 

आर्थिक परिवर्तन या सामान्य व्यक्ति के जीवन में सुधार के किसी भी उद्देश्य के बारे में सोचें तो उसमें Technology, Skills, Innovation और Investment की बड़ी भूमिका होती है। मेरा जर्मनी आने का उद्देश्य यह था कि मैं जर्मन Industry को भारत में आने के लिए आमंत्रित करूँ और उन्हें आश्वस्त करूँ कि उन्हें एक खुले, आसान और स्थिर आर्थिक माहौल मिलेगा और जिसमें प्रवेश करने में और काम करने में मेरी तरफ से पूरी सहायता मिलेगी। 

चांसलर मर्कल और जर्मन Industry के उत्साह और रूचि को देखकर मैं बहुत प्रोत्साहित महसूस कर रहा हूँ। उनके फीडबैक से नीतियों को बनाने में मुझे बहुत लाभ होगा। 

मैंने यह निर्णय किया है कि जर्मन कंपनीस के लिए हम एक mechanism बनाएँगे ताकि उनको भारत में निवेश करने में, business करने में सुविधा हो। 

भारत का Make in India और हमारे युवाओं को रोजगार Skill Development पर आधारित है। जर्मनी विश्व में इस क्षेत्र में लीडर है। भारत में Skill Development हमें अपनी परिस्थितियों को देखते हुए करनी होगी। साथ ही साथ जर्मनी से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं और इस बारे में विस्तार से बातचीत हुई है। उसी प्रकार Science, Technology और Education में हम और घनिष्ठ संबंध और सहयोग बढ़ायेंगे। 

एक क्षेत्र, जो मेरे लिए निजी रूप से और देश के लिए बहुत बड़ी प्राथमिकता रखता है वह है Renewable energy और Energy Efficiency । जैसाकि मैंने पहले कहा कि हमने अगले 7 सालों में 175 गीगावाट का Renewable energy का बहुत बड़ा लक्ष्य रखा है। जर्मनी इस क्षेत्र में भारत का बड़े स्तर पर आर्थिक सहयोग कर रहा है। मैं चाहूंगा कि इसके साथ ही साथ जर्मनी, भारत में Clean Energy के उपकरण बनाने में भी आगे बढ़े। और साथ मिलकर climate change की चुनौती का सामना करें। 

भारत Manufacturing hub बनेगा और Infrastructure का विस्तार होगा तो trade के लिए भी लाभदायक होगा। आयात की जरूरत और बढ़ेगी। और स्वाभाविक है कि इससे जर्मनी की Industry को भी लाभ पहुंचेगा। 

इस संदर्भ में यह भी कहना चाहता हूं कि भारत और यूरोपीय यूनियन Broad Based Trade और Investment Agreement पर बातचीत दो साल से रूकी हुई है। मैंने चांसलर मर्कल से आग्रह किया है कि भारत और यूरोपीय यूनियन की बातचीत को जल्द से जल्द शुरू किया जाए तथा संतुलित और दोनों पक्षों के लिए लाभदायक FTA संपन्न किया जाए। 

भारत Advanced Technology और Defence Manufacturing के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाना चाहता है। आशा करता हूं कि जर्मन इंडस्ट्री इसमें गर्मजोशी से भाग लेंगी और आपकी सरकार से पूरा सहयोग मिलेगा। 

चांसलर मर्कल और मैंने अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भी बातचीत की है। भारत में हमारा यह मानना है कि यूरोप की आर्थिक गति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए और यूरोप में स्थिरता वैश्विक शांति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इन दोनों चुनौतियों पर जर्मनी के नेतृत्व की विश्व की अपेक्षा है। 

मैं ईरान से सफल बातचीत के लिए भी आपकी सराहना करता हूं। इससे पूरे क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव होगा। पश्चिम एशिया में अस्थिरता हमारे नागरिकों की सुरक्षा पर असर करती है। अफगानिस्तान में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विकास दोनों के लिए महत्व रखता है। इस शताब्दी में एशिया पैसिफिक क्या दिशा लेता है वह सबके लिए मायने रखता है। 

आतंक फैल रहा है और नये स्वरूप ले रहा है। इसका खतरा अब विश्व के सभी भूभाग में हम करीब से अनुभव कर रहे हैं। इस वैश्विक चुनौती के लिए व्यापक वैश्विक Strategy की आवश्यकता है। जिसमें भारत और जर्मनी मिलकर काम कर सकते हैं। आने वाले समय में समुद्री, साइबर और अंतरिक्ष सुरक्षा सभी के लिए चिंता का कारण बन सकते हैं और हमें इसमें सहयोग बढ़ाना है। 

मेरा मानना है कि भारत और जर्मनी दोनों ऐसे देश हैं जिन्हें UN Security Council में स्थाई सदस्यता का अधिकार है और इससे विश्व भी लाभान्वित होगा। हम दोनों चाहते हैं कि 70वीं वर्षगांठ एक उत्तम अवसर बने जिसमें UN Security Council Reform को पूरा किया जा सके। हम दोनों पेरिस में एक सफल COP-21 की अपेक्षा करते हैं। 

अंत में, मैं एक बार फिर कहना चाहूंगा कि सफल और Productive यात्रा के लिए मैं आप सभी का, विशेष रूप से चांसलर मर्कल का आभार प्रकट करता हूँ। और मैं अक्टूबर में चांसलर मर्कल की भारत की यात्रा का उत्सुकता से इंतज़ार करूंगा। 

Thank you. 

बर्लिन में जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री की जर्मनी यात्रा से संबंधित प्रश्न का उत्तरः

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी: आज पूरे विश्व का ध्यान भारत की तरफ जा रहा है। भारत दुनिया की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली Economy के रूप में उसने अपनी जगह बनाई है। भारत के पास तीन प्रमुख ऐसी सुविधाएं हैं, जो विश्व में किसी के पास नहीं है। Demographic Dividend, Democracy and Demand. और इन तीनों बातों को देखें तो भारत में manufacturing hub बनने की पूरी संभावना है। जहां low cost manufacturing हो, “zero defect-zero effect” के साथ हो और दुनिया के सभी investors के लिए भारत एक ऐसी जगह है कि जहां पर विपुल मात्रा में work force है।

जहां बहुत बड़ी मात्रा में domestic मांग है और जहां की democratic values हैं। जो जर्मनी और भारत दोनों समान रूप से share करते हैं। तो एक ऐसा माहौल है कि जिसके कारण विश्व के अनेक देशों को और जर्मनी को विशेष रूप से भारत अनुकूल है। जर्मनी की ताकत है manufacturing, विश्व की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए German companies और भारत देश का माहौल, ये दोनों मिलकर के काम करे तो विश्व की अनेक आवश्यकताओं को हम बहुत अच्छे ढंग से पूरा कर सकते हैं।

भारत का work force जो कि इस manufacturing sector में तैयार होगा। वो आने वाले दिनों में एक world work force के रूप में convert हो सकता है। भारत में रोजगार, ये सबसे बड़ी आवश्यकता है और इसलिए हमारा ध्यान manufacturing hub बनाने की दिशा में है।

Hannover fair में जितनी कंपनियां मिलीं बाद में चांसलर मर्केल ने एक शाम डिनर रखा था, यहां के industrial houses के साथ, उसमें भी विस्तार से चर्चा हुई है और मैं देख रहा हूं कि चाहे skill development का काम हो, चाहे vocational education की बात हो, चाहे railway में technology up-gradation हो, expansion हो, Defence manufacturing sector का काम हो, engineering sector की विकास की नई क्षितिज हो, सभी क्षेत्रों में आज German कंपनियां, भारत के साथ मिलकर के काम करने के लिए तैयार हैं। और मेरी और चांसलर मर्केल के बीच जो बातचीत हुई है, उसके कारण इन कंपनियों का भी विश्वास बढ़ा है और उन कंपनियों का भी विश्वास बढ़ा है।

मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में human resource development का काम हो, professional management का काम हो, manufacturing की दिशा में आगे बढ़ने की बात हो, सभी क्षेत्रों में जर्मनी और भारत सफलतापूर्वक आगे बढ़ेंगे, इस विश्वास के साथ मैं आज यहां से लौट रहा हूं।

वैश्विक आतंकवाद के मुद्दे से संबंधित प्रश्न का उत्तरः

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी: मैं मानता हूं कि terrorism ये मानवता के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है। जो भी मानवतवाद में विश्वास करते हैं। उनकी भाषा कोई भी हो, भू-भाग कोई भी हो, परंपराएं कोई भी हो लेकिन मानवतावादी शक्तियों का एक होना बहुत आवश्यक है और सभी मानवतावादी शक्तियों ने आतंकवाद के खिलाफ एक स्वर से, एक ही intensity के साथ बोलने की आवश्यकता है, collectively efforts करने की आवश्यकता है।

और हम देख रहे हैं आज से 25 साल पहले हम भारत के लोग दुनिया को आतंकवाद के खतरे की बात बताते थे तो कुछ लोग हमें कहते थे, ये आपका law and order problem है। आज दुनिया को समझ आया है कि कितना भयंकर रूप होता है और ये मानवता के खिलाफ एक लड़ाई है। जब तक हम मानवतावादी शक्तियों को एकत्र नहीं करते हैं और हम आतंकवाद के सामने समान रूप से व्यवहार नहीं करते हैं, उनको खुला मैदान मिल जाता है। उनको शस्त्र जहां से मिलते हो, उस पर से रोक कैसे लगे? आतंकवादियों को shelter देने वाली अगर सरकारें हैं तो उन सरकारों पर दबाव कैसे पैदा किया जाए? जितनी sensitivity nuclear weapon को लेकर के है, उतनी ही आतंकवाद को पनाह देने वालों देशों के प्रति भी होनी चाहिए। अगर ये ही एक मूड बनता है और हम आतंकवाद को और आतंकवाद को समर्थन करने वालों को isolate करना ये हमारी पहली strategy होनी चाहिए और दुनिया इस पर गंभीरता से सोचेगी।

दूसरा महत्वपूर्ण काम है United Nation में बहुत लंब अर्से से एक प्रस्ताव चर्चा पर pending पड़ा हुआ है। जिसमें आतंकवाद की definition होना बहुत आवश्यक है। मैं चाहूंगा कि जब United Nation अपने 70 साल पूर्ण करने जा रहा है। उस resolution को पारित करे, define करे और दुनिया के लोगों के लिए बंधनकर्ता चीजों का regulation तैयार करे। तब जाकर के एक platform पर से इस मानवता विरोधी पृवत्तियों के खिलाफ दुनिया को एकत्र किया जा सकता है। मैं चांसलर मर्केल के विचारों से परिचित हूं। वे आतंकवाद के खिलाफ उतने ही स्पष्ट विचार रखती हैं, जितना कि हम भारत के लोग पिछले 30 साल से आतंकवाद से परेशान हैं। हम अनुभव करते हैं और मैं मानता हूं कि अब पूरी दुनिया, जिस प्रकार से आतंकवाद फैल रहा है और अधिक सजग बनकर के और अधिक साथ मिलकर के इस मानवता की रक्षा के लिए काम करेंगी।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में, भारत की स्थायी सदस्यता से संबधित प्रश्न का उत्तर:

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी: एक विषय जो आपने पूछा है permanent membership, security council में, मैं दुनिया का इस बात की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। आप जानते हैं कि ये वर्ष UN के 70 साल हो रहे हैं और पूरा विश्व ये वर्ष प्रथम विश्व युद्ध की शताब्दी के वर्ष से गुजर रहा है। विश्व को मालूम होना चाहिए कि भारत के सैनिक प्रथम विश्व युद्ध में 75 thousand से ज्यादा सैनिक शहीद हुए थे और प्रथम विश्व युद्ध में 14 लाख से ज्यादा भारत के सैनिकों को हिस्सा लेना पड़ा था। उसमें भारत का कोई हित नहीं था, भारत की कोई योजना नही थी। UN के बाद आप देखिए Peace Keeping Force, सबसे ज्यादा सैनिक Peace Keeping Force में जो राष्ट्र भेजे जाते हैं, उनमें एक नाम भारत का है। Peace Keeping Force में भी UN के मार्गदर्शन में उत्तम से उत्तम कार्य करने के लिए बार-बार भारत की सराहना होती है और भारत जिसका इतिहास और संस्कृति कभी भी ये वो देश जिसने युद्ध नहीं किया है, आक्रमण नहीं किया है।

वो देश जहां अहिंसा के दूत महात्मा गांधी पैदा हुए थे, वो देश जहां गौतम बुद्ध पैदा हुए थे, जहां की संस्कृति, परंपरा, शांति को समर्पित है, उस देश को अगर United Nation में permanent membership security council न मिले, उसके लिए 70 साल तक उसको इंतजार करना पड़े, तब सवाल उठता है कि शांति पर भरोसा करने वाले, शांति के लिए जीने वाले, शांति जिनके DNA में है, ऐसे देश के प्रति अब न्याय होना चाहिए, समय बहुत चला गया है।

Thank you

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महामहिम, माननीय मीसेस अजरेल अर्नेस्ता,

नेशनल असेंबली के अध्यक्ष, माननीय मिसेस सिलवान लेमियाएल,

सरकारी व्यवसाय के प्रतिनिधि,

माननीय नेता प्रतिपक्ष मिस्त्र बाणो जरज,

नेशनल असेंबली के माननीय सदस्य,

और मेरे प्यारे भाइयों और बहनों ,

नमस्कार!

बॉन एप्रेमिडी!

इस नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री के रूप में आपके सामने उपस्थित होना विशेष सम्मान की बात है। अध्यक्ष महोदया, आपके गर्मजोशी भरे शब्दों के लिए मैं आपका धन्यवाद।

मैं आज पहले ब्लू होराइजन के “गार्जियन के साथ मुझे सम्मानित करने के लिए राष्ट्रपति एर्मिनी और सेशेल्स के लोगों को भी धन्यवाद देता हूं। यह उन सभी को प्रोत्साहित करेगा जो पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। मैं अपने साथ भारत के 1.4 अरब लोगों की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं लेकर आया हूं।

हिंद महासागर क्षेत्र का जो पहला देश है जहां मैंने प्रधानमंत्री के रूप में दौरा किया था, वह 2015 में सेशेल्स था। प्रधानमंत्री के रूप में यह मेरी पहली अफ्रीका यात्रा भी थी। मैं यहां इसलिए आया क्योंकि मेरा मानना था कि सेशेल्स हिंद महासागर के लिए भारत के दृष्टिकोण में एक विशेष स्थान रखता है। आज, जब मैं एक दशक बाद यहां फिर आया हूं, तो वह दृढ़ विश्वास पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है।

और आप जब अपनी स्वतंत्रता के पचास वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं तो मुझे आपके साथ जुड़कर प्रसन्नता हो रही है। इस विशेष अवसर पर आपको और सेशेल्स के लोगों को शुभकामनाएं।

माननीय सदस्यगण,

इस नेशनल असेंबली को संबोधित करना एक दुर्लभ विशेषाधिकार है। इस विशेष सम्मान के लिए आपका धन्यवाद। मैं इस अवसर पर इस आठवीं नेशनल असेंबली के नवनिर्वाचित सदस्यों को बधाई देता हूं। अध्यक्ष महोदया, इस प्रतिष्ठित सदन की पहली महिला अध्यक्ष बनने पर मैं आपको भी शुभकामनाएं देता हूं।

माननीय सदस्यगण,

आज यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि हमारी दोस्ती पचास साल पहले हमारे राजनयिक संबंधों की स्थापना के साथ शुरू नहीं हुई थी। इसकी शुरुआत बहुत पहले हो गई थी। अगस्त 1770 में, सेंट ऐनी द्वीप पर थेलेमाक जहाज पर सवार होने वालों में पांच भारतीय थे। उस यात्रा ने कई और लोगों को रास्ता दिखाया जो उसका अनुसरण कर रहे थे। समय के साथ, उनकी कहानियाँ आधुनिक सेशेल्स की कहानी का हिस्सा बन गईं।

यह हमें याद दिलाता है कि हमारे बीच के बंधन सरकारों द्वारा नहीं बनाए गए थे। वे लोगों द्वारा बनाए गए थे, परिवारों द्वारा पोषित किए गए थे और पीढ़ियों तक कायम रहे। हिंद महासागर ने इसे संभव बनाया। हिंद महासागर भारत और सेशेल्स को अलग नहीं करता है। यह हमें जोड़ता है। इसीलिए हम अजनबी बनकर नहीं मिलते बल्कि हम पुराने दोस्त के रूप में मिलते हैं।

माननीय सदस्यगण,

सेशेल्स की सबसे बड़ी शक्ति वहां के लोग हैं। पीढ़ियों से, दुनिया के सभी हिस्सों से लोग यहां पहुंचे। वे अपने साथ विभिन्न भाषाएँ, रीति-रिवाज, मान्यताएँ और परंपराएँ लेकर आये। और साथ में, उन्होंने एक साझा पहचान बनाई जो गर्व से सेशेलोइस है।

जैसा कि इस नेशनल असेंबली का आदर्श वाक्य है - विविधता में एकता। इसे क्रियोल संगीत की धुनों में सुना जा सकता है। इसे मौत्या नृत्य की लय में देखा जा सकता है। इसे फेस्टिवल क्रेओल के दौरान अनुभव किया जा सकता है।

जब राष्ट्र अपनी विरासत की समृद्धि का उत्सव मनाता है, तो हमारी संस्कृतियों के बीच संबंध रोजमर्रा की जिंदगी में भी दिखाई देते हैं। इन्हें कारी कोको, समोसा और चटनी के स्वाद में महसूस किया जा सकता है। वे नवरात्रि के दौरान गरबा नृत्य, दीपावली और थाई पोंगल के उत्सवों में पाए जा सकते हैं। यह क्रियोल भावना है जो हमें अपनी दोस्ती के भविष्य में बहुत आत्मविश्वास देती है।

माननीय सदस्यगण,

समुद्री पड़ोसियों के रूप में, हम मानते हैं कि एक की सुरक्षा दूसरे की सुरक्षा में वृद्धि करती है। एक की समृद्धि दूसरे की समृद्धि में योगदान करती है और क्षेत्र की स्थिरता से हम सभी को लाभ होता है।

यह वर्ष हमारी साझेदारी की मज़बूती का एक शक्तिशाली अनुस्मारक प्रदान करता है। पचास साल पहले, आपकी आजादी की शुरुआत में, एक भारतीय नौसैनिक जहाज, आईएनएस नीलगिरि, दोस्ती और एकजुटता के प्रतीक के रूप में पोर्ट विक्टोरिया में मौजूद था। और आज, आईएनएस तरकश और आईएनएस इक्षक आपके साथ स्वर्ण जयंती का उत्सव मनाने के लिए पोर्ट विक्टोरिया में मौजूद हैं।

पचास साल बीतने से कई चीजें बदल गई हैं। लेकिन इससे एक-दूसरे के लिए हमारी प्रतिबद्धता नहीं बदली है। दशकों से, हमारे रक्षा बलों, तट रक्षकों और समुद्री एजेंसियों ने एक साथ मिलकर प्रशिक्षण के साथ काम किया है। भारत सेशेल्स रक्षा बलों और सेशेल्स तट रक्षक की व्यावसायिकता और समर्पण को गहराई से महत्व देता है। वे आपके अपने विशाल समुद्री क्षेत्र के साथ-साथ व्यापक हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण, हाइड्रोग्राफी और समुद्री क्षेत्र की जागरूकता में हमारा सहयोग एक सुरक्षित और अधिक सुरक्षित क्षेत्र के लिए हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मैंने आज सुबह राष्ट्रपति एर्मिनी - टन पैट - से मुलाकात की और हमारी साझेदारी में हासिल की गई उल्लेखनीय प्रगति की समीक्षा की। हमने भविष्य के लिए अपने साझा दृष्टिकोण पर भी चर्चा की। हमारा दृष्टिकोण महासागर के विचार - क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति में शामिल है।

यह दृष्टिकोण मानता है कि हमारा भविष्य आपस में जुड़ा हुआ और एक-दूसरे पर निर्भर है। और, हम एक सुरक्षित तथा अधिक सुरक्षित हिंद महासागर क्षेत्र के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।

माननीय सदस्यगण,

जब लोग मानचित्र को देखते हैं, तो वे सेशेल्स को हिंद महासागर में द्वीपों के एक समूह के रूप में देख सकते हैं। लेकिन हम कुछ ज्यादा ही बड़ा देखते हैं। हम एक ऐसे राष्ट्र को देखते हैं जिसका क्षितिज उसके तटों से कहीं आगे तक फैला हुआ है। आपका समुद्री क्षेत्र लगभग 1.4 मिलियन वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ है।

यह सेशेल्स को एक छोटा द्वीप देश नहीं - बल्कि एक बड़ा महासागरीय देश बनाता है। समुद्री अर्थव्यवस्था के वैश्विक चर्चाओं का हिस्सा बनने से बहुत पहले, सेशेल्स पहले से ही इसका नेतृत्व कर रहा था। चाहे समुद्री इकोसिस्टम की रक्षा करना हो या ब्लू बॉन्ड्स जैसे नवाचारों को आगे बढ़ाना हो, आपके देश ने महत्वपूर्ण वैश्विक वार्तालापों को आकार देने में सहायता की है। साथ मिलकर, हम मत्स्य पालन, समुद्री विज्ञान, तटीय प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा और टिकाऊ पर्यटन में साझेदारी कर सकते हैं।

मुझे कल, प्रतिष्ठित कोको डे मेर पेड़ का पौधा लगाने का सम्मान मिला। सेशेल्स की तरह ही - यह अद्वितीय, मूल्यवान है और दुनिया में एक विशेष स्थान रखता है। इस प्राकृतिक आश्चर्य की रक्षा और संरक्षण के लिए आपके द्वारा किए जा रहे प्रयास एक बड़े दर्शन को प्रदर्शित करते हैं - कि मानवता को प्रकृति के साथ सद्भाव में रहना चाहिए।

यह भावना भारत में भी गहराई से प्रतिध्वनित होती है। आइए हम यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करें कि आने वाली पीढ़ियों को ऐसे महासागर विरासत में मिलें जो उन महासागरों की तुलना में अधिक स्वस्थ, सुरक्षित और प्रचुर मात्रा में हों जिनका हम आज आनंद ले रहे हैं।

माननीय सदस्यगण,

ग्लोबल साउथ और विशेष रूप से द्वीप राष्ट्र, जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित हैं। इसका प्रभाव हमारी तटरेखाओं, समुद्री इकोसिस्टम, मौसम के मिजाज और हमारे समुदायों पर पहले से ही दिखाई दे रहा है। हम दोनों का दृढ़ विश्वास है कि जिन लोगों ने जलवायु परिवर्तन में सबसे कम योगदान दिया है, उन्हें इसके परिणामों का सबसे बड़ा बोझ नहीं उठाना चाहिए।

जलवायु कार्रवाई को निष्पक्षता, जिम्मेदारी और समानता द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए। यही जलवायु न्याय का सार है।

भारत ने उदाहरण पेश करके नेतृत्व करने की कोशिश की है। पिछले दशक में, हमने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े विस्तार की दिशा में कार्य किया है। हमने मिशन लाइफ यानी पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली के माध्यम से स्थायी जीवन शैली का समर्थन किया है। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन और एक पेड माँ के नाम जैसी हमारी पहलों के माध्यम से हमने हरित संक्रमण को बढ़ावा देने के लिए भागीदार देशों के साथ काम किया है।

भारत सेशेल्स के साथ काम करना जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि छोटे द्वीप विकासशील देशों की चिंताओं पर उस प्रकार ध्यान दिया जाए जिसके वे हकदार हैं।

माननीय सदस्यगण,

सेशेल्स और भारत दोनों एक ऐसी दुनिया चाहते हैं जहां विकास अधिक समावेशी हो। हम दोनों एक ऐसी दुनिया की तलाश में हैं जहां अंतरराष्ट्रीय संस्थान समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करें। हमारा मानना है कि हमारे साझा भविष्य को सामूहिक, समावेशी और निष्पक्ष रूप से आकार दिया जाना चाहिए।

इस विश्वास ने हमारे जी-20 की अध्यक्षता के दौरान भारत के प्रयासों को निर्देशित किया। इसी भावना से हमने ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में रखने के लिए काम किया। इसी भावना से हमने जी-20 के स्थायी सदस्य के रूप में अफ्रीकी संघ का स्वागत किया। यही वह भावना है जो ग्लोबल साउथ को एकजुट करती है और यही परिकल्पना है कि भारत और सेशल्स एक साथ आगे बढ़ते रहेंगे।

माननीय सदस्यगण,

जैसा कि हम पिछले पचास वर्षों की उपलब्धियों का उत्सव मना रहे हैं, हमें आगे भी देखना चाहिए। सेशेल्स का भविष्य उसके युवाओं द्वारा आकार लिया जाएगा। हमें गर्व है कि सेशेल्स के विद्यार्थियों, पेशेवरों, अधिकारियों और सुरक्षा बलों ने दशकों तक भारत में प्रशिक्षण और अध्ययन किया है।

वास्तव में, यह कहा जाता है कि सेशेल्स में हर पचास लोगों में से एक ने भारत में कुछ प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वे कौशल, दोस्ती और अनुभवों के साथ घर लौटे हैं जो आज भी हमारी साझेदारी को मजबूत कर रहे हैं।

मुझे युवाओं के लिए इंटर्नशिप प्रदान करने की आपकी इग्नाइट पहल के बारे में जानकर खुशी हुई। यह एक उत्कृष्ट रूपरेखा है और हम इस क्षेत्र में सहयोग के लिए नए रास्ते तलाश सकते हैं।

इस तरह के सहयोग का मुख्य फोकस क्षेत्र डिजिटल नवाचार हो सकता है। भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) ने प्रदर्शित किया है कि कैसे प्रौद्योगिकी अवसर का विस्तार कर सकती है, शासन में सुधार कर सकती है, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे सकती है और करोड़ों लोगों के लिए सेवाएं प्रदान कर सकती है।

हमें अपने अनुभवों और विशेषज्ञता को साझा करने में खुशी होगी क्योंकि आप अपने स्वयं के डिजिटल परिवर्तन को आगे बढ़ा रहे हैं। मुझे विश्वास है कि सेशेल्स के युवा इन अवसरों को उसी दृढ़ संकल्प के साथ अपनाएंगे जिसने स्वतंत्रता के पहले पचास वर्षों का मार्गदर्शन किया था।

माननीय सदस्यगण,

आज, जैसा कि मैं इस ऐतिहासिक स्वर्ण जयंती वर्ष में आपके सामने उपस्थित हूं, हमारे लोग ढाई शताब्दियों से भी अधिक पुरानी दोस्ती का उत्सव मना रहे हैं। कुछ साझेदारियाँ इतनी गहरी नींव पर बनी होती हैं। और इतनी गर्मजोशी, विश्वास और सद्भावना के साथ कुछ साझेदारियाँ बढ़ी हैं।

जैसे-जैसे हम भविष्य की ओर देखते हैं, आइए हम इन नींवों पर निर्माण करना जारी रखें। भारत आपका विश्वसनीय भागीदार बना रहेगा। हम आपकी उपलब्धियों का उत्सव मनाएंगे। हम आपकी आकांक्षाओं का समर्थन करेंगे। और हम आपके साथ एक दोस्त के रूप में उपस्थित रहेंगे।

पिछले पचास साल उल्लेखनीय रहे हैं। लेकिन मेरा दृढ़ विश्वास है कि सेशेल्स की कहानी के सबसे अच्छे अध्याय अभी लिखे जाने बाकी हैं। और हमारी सबसे अच्छी दोस्ती अभी होनी शेष है।