हमारे साझा मूल्यों को बनाए रखने, जोखिमों का समाधान करने और विश्वास बनाने के संदर्भ में शासन और मानक स्थापित करने के लिए सामूहिक वैश्विक प्रयासों की आवश्यकता है: प्रधानमंत्री
एआई स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और अन्य कई क्षेत्रों में सुधार करके लाखों लोगों के जीवन को बदलने में मदद कर सकता है: प्रधानमंत्री
हमें एआई-संचालित भविष्य के लिए अपने लोगों को कौशल प्रदान करने और दोबारा कौशल प्रदान करने में निवेश करने की आवश्यकता है: प्रधानमंत्री
हम सार्वजनिक भलाई के लिए एआई अनुप्रयोग विकसित कर रहे हैं: प्रधानमंत्री
भारत यह सुनिश्चित करने के लिए अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा करने को तैयार है कि एआई का भविष्य हमेशा के लिए हो और सभी के लिए हो: प्रधानमंत्री

आज की चर्चाओं से एक बात सामने आई है - सभी हितधारकों के दृष्टिकोण और उद्देश्यों में एकता है।

मैं "एआई फाउंडेशन" और "सस्टेनेबल एआई काउंसिल" की स्थापना के निर्णय का स्वागत करता हूं। मैं इन पहलों के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति और अपने प्रिय मित्र मैक्रों को बधाई देता हूं और अपना पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन देता हूं।

हमें "एआई के लिए वैश्विक साझेदारी" को भी वास्तव में वैश्विक स्वरूप देना होगा। इसमें ग्लोबल साउथ और उसकी प्राथमिकताओं, चिंताओं और जरूरतों को अधिक समावेशी बनाया जाना चाहिए।

इस एक्शन समिट की गति को आगे बढ़ाने के लिए भारत को अगले समिट की मेजबानी करने में खुशी होगी।

धन्यवाद।

 

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प्रधानमंत्री ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्, गुरु सेवा को बताया ज्ञान प्राप्ति का मार्ग
May 12, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने संस्कृत में एक सुभाषितम को साझा किया, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि केवल गुरु की समर्पित सेवा से ही ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने संस्कृत में एक सुभाषितम साझा किया-

"यथा खात्वा खनित्रेण भूतले वारि विन्दति।

तथा गुरुगतां विद्यां शुश्रूषुरधिगच्छति॥"

सुभाषितम् यह बताता है कि जिस प्रकार पानी प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत और धैर्य से धरती को खोदना पड़ता है, उसी प्रकार ज्ञान भी केवल गुरु की निष्ठापूर्वक सेवा करने, विश्वास, समर्पण, अनुशासन और ईमानदारी के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर पोस्ट किया:

"यथा खात्वा खनित्रेण भूतले वारि विन्दति।

तथा गुरुगतां विद्यां शुश्रूषुरधिगच्छति॥"