प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एनबीएस योजना के तहत फॉस्फेटिक और पोटाश (पी एंड के) उर्वरक पर खरीफ सीजन, 2024 (01.04.2024 से 30.09.2024 तक) के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) दरें तय करने और 3 नए उर्वरक ग्रेड को शामिल करने के लिए उर्वरक विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। खरीफ सीजन 2024 के लिए अस्थायी बजटीय आवश्यकता लगभग 24,420 करोड़ रुपये होगी।

लाभ:

i. किसानों को रियायती, किफायती और उचित मूल्य पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

ii. उर्वरकों और इनपुट की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हालिया रुझानों को देखते हुए पीएंडके उर्वरकों पर सब्सिडी को युक्तिसंगत बनाना।

iii. एनबीएस में तीन नए ग्रेडों को शामिल करने से संतुलित मृदा स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी और किसानों को मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर उर्वरक चुनने के विकल्प मिलेंगे।

कार्यान्वयन रणनीति और लक्ष्य:

किसानों को सस्ती कीमतों पर इन उर्वरकों की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पीएंडके उर्वरकों पर सब्सिडी खरीफ 2024 के लिए अनुमोदित दरों (01.04.2024 से 30.09.2024 तक लागू) के आधार पर प्रदान की जाएगी।

पृष्ठभूमि:

सरकार उर्वरक उत्पादकों/आयातकों के माध्यम से किसानों को रियायती कीमतों पर 25 ग्रेड के पीएंडके उर्वरक उपलब्ध करा रही है। पीएंडके उर्वरकों पर सब्सिडी 01.04.2010 से एनबीएस योजना द्वारा नियंत्रित है। अपने किसान हितैषी विजन के अनुरूप, सरकार किसानों को सस्ती कीमतों पर पीएंडके उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उर्वरकों और इनपुट यानी यूरिया, डीएपी, एमओपी और सल्फर की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हालिया रुझानों को देखते हुए, सरकार ने फॉस्फेटिक और पोटाश (पी एंड के) उर्वरक पर 01.04.2024 से 30.09.2024 तक प्रभावी खरीफ 2024 के लिए एनबीएस दरों को मंजूरी देने का फैसला किया है। सरकार ने एनबीएस योजना के तहत 3 नए उर्वरक ग्रेड को शामिल करने का भी निर्णय लिया है। उर्वरक कंपनियों को अनुमोदित और अधिसूचित दरों के अनुसार सब्सिडी प्रदान की जाएगी, ताकि किसानों को सस्ती कीमतों पर उर्वरक उपलब्ध कराया जा सके।

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प्रधानमंत्री ने राष्ट्र और मानवता की सेवा में सर्वस्व समर्पण को दर्शाते हुए संस्कृत सुभाषित साझा किया
February 11, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र और मानवता की सेवा में सर्वस्व समर्पण को दर्शाने वाला एक संस्कृत सुभाषित साझा किया:

"यस्येमे हिमवन्तो महित्वा यस्य समुद्रं रसया सहाहुः।

यस्येमाः प्रदिशो यस्य बाहू कस्मै देवाय हविषा विधेम॥"

इसमें कहा गया है कि जिस राष्ट्र की महिमा का वर्णन स्वयं हिमालय करता है, जिसकी कीर्ति नदियों के साथ समुद्र तक प्रवाहित होती है और जिसकी भुजाओं के समान दिशाएं उसे नमन करती हैं, उस राष्ट्र को हम अपना सर्वस्व समर्पित करते हैं।

श्री मोदी ने कहा कि अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भी इसी भावना के साथ अपना संपूर्ण जीवन देश के हर नागरिक को सशक्त बनाने के लिए समर्पित किया था।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा:

“सर्वस्व समर्पण उस चेतना की अभिव्यक्ति है, जिसमें राष्ट्र और मानवता सर्वोपरि होती है। अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने भी इसी भावना से देश के जन-जन को सशक्त बनाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

यस्येमे हिमवन्तो महित्वा यस्य समुद्रं रसया सहाहुः।

यस्येमाः प्रदिशो यस्य बाहू कस्मै देवाय हविषा विधेम॥"