प्रशासक

Published By : Admin | May 15, 2014 | 16:18 IST

बीजेपी के सर्वोत्कृष्ट संगठन मैन से शासन-कला में भारत के सबसे उम्दा कलाकार के रूप में नरेन्द्र मोदी का उद्भव साहस और दृढ संकल्प की एक कहानी कहता है।

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7 अक्टूबर 2001 को नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। एक राजनीतिक कार्यकर्ता और आयोजक से उनके बहुत जल्द एक प्रशासक में बदलने और सरकार चलाने के अनुभव ने उन्हें पद के लिए प्रशिक्षित होने का समय दिया। श्री मोदी को प्रशासकीय मामलों का मार्गनिर्देशन करना पड़ा, बीजेपी के लिए प्रतिकूल परिस्थितियों में काम करना पड़ा और साथ ही पहले दिन से ही एक विरोधी राजनीतिक वातावरण का सामना करना पड़ा। यहाँ तक कि उनके पार्टी सहयोगियों ने भी उन्हें एक बाहरी व्यक्ति समझा जिसे प्रशासन का कोई ज्ञान नहीं है। लेकिन उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया।

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पहले सौ दिन

गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर नरेन्द्र मोदी के पहले सौ दिन दिखाते हैं कि कैसे अपनी जिम्मेदारियों से परिचित होते हुए श्री मोदी ने प्रशासन को सुधारने की एक अपरम्परागत प्रणाली की भी शुरुआत की और बीजेपी की यथास्थिति को बदलने के लिए ऐसे विचारों को प्रस्तुत किया जो ज़रा हट के हैं। इन्हीं सौ दिनों में हमने नरेन्द्र मोदी को गुजरात में प्रशासनिक लालफीताशाही में कटौती करने के लिए नौकरशाहों के साथ काम करते और कच्छ में आए विनाशकारी भूकंप के बाद पुनर्वास प्रयासों को तेज करने के लिए प्रक्रियाओं को सरल करते हुए देखा।

पहले सौ दिनों ने नरेन्द्र मोदी के सिद्धांतों- फिजूलखर्ची ख़त्म करना, उदाहरण देकर नेतृत्व करना, एक अच्छा श्रोता और एक तेजी से सीखने वाला बनना, को समझने में भी मदद की। पहले सौ दिन समावेशी मूल्य प्रणाली में उनके विश्वास को भी प्रकट करते हैं, जो कि इस बात से ज़ाहिर है कि वे लड़कियों को शिक्षा देने और उन गाँवों को विकास के लिए धनराशि देकर प्रोत्साहित करने को प्राथमिकता देते हैं जो प्रतियोगिता के ऊपर आम सहमति को चुनते हैं।

आखिर में, सत्ता में आये पहले तीन महीनों में, उन्होंने अपने राज्य में लोगों को सशक्त किया और उन्हें प्रशासन में साझेदार बनाया. उन्होंने भूकंप पीड़ितों के साथ कच्छ में दिवाली मनाई और पुनर्वास प्रयासों को मिशन मोड में आगे बढाया. श्री मोदी ने दिखाया कि कैसे गुजरात पूरी तरह से विकास और सुशासन की राजनीति पर ध्यान देकर एक संकट से जल्दी से संभल सकता है.

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विकास और प्रशासन का एक उदाहरण के तौर पर एक वाइब्रेंट गुजरात के निर्माण का रास्ता नरेन्द्र मोदी के लिए आसान नहीं था। ये रास्ता प्राकृतिक और मानव-निर्मित दोनों मुश्किलों और चुनौतियों से भरा था, कुछ तो उनकी खुद की पार्टी के अन्दर से भी थीं। लेकिन उनके मजबूत नेतृत्व ने उन्हें मुश्किल हालातों में भी टिकाये रखा। इससे पहले कि नरेन्द्र मोदी बिजली सुधार के कार्य को शुरू करते 2002 की घटनाओं ने उनकी परीक्षा ले ली।

जिंदगियों के दुर्भाग्यपूर्ण नुक्सान और गुजरात की बहाली की क्षमता को लेकर विश्वास की कमी ने किसी कमज़ोर व्यक्ति को जिम्मेदारियों को छोड़ने और दफ्तर से इस्तीफ़ा देने को मजबूर कर दिया होता। हालाँकि नरेन्द्र मोदी एक अलग नैतिक तंतु से बने थे। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की तीव्र आलोचना का सामना किया और साथ ही सुशासन के अपने उद्देश्य को आगे बढाने के लिए राजनीतिक विरोधियों के भारी दबाव को भी सहा।.

और वहां प्रकाश था: ज्योतिग्राम योजना

गुजरात के बिजली सेक्टर को सुधारने के लिए ज्योतिग्राम की शुरुआत एक उदाहरण है कि कैसे श्री नरेन्द्र मोदी ने भारी राजनीतिक विरोधों के बीच मजबूत नेतृत्व का प्रदर्शन किया। ज्योतिग्राम पूरे गुजरात में बहुत बड़े शहरों से दूर-दराज के आदिवासी गाँवों तक चौबीसों घंटे बिजली पहुँचाने का एक क्रांतिकारी विचार था।

किसान तुरंत ही इस योजना के विरोध में खड़े हो गए। किसान लॉबियों के साथ कई उच्च स्तर की मुलाकातों के बाद भी नरेन्द्र मोदी चौबीसों घंटे बिजली मुहैय्या कराने के अपने सपने पर कायम रहे और इस तरह उन्होंने ज्योतिग्राम की राज्यव्यापी सफलता को सुनिश्चित किया। ज्योतिग्राम के ज़रिये नरेन्द्र मोदी ने दिखा दिया कि सुशासन को लेकर उनकी समावेशी पद्धति और उनका नेतृत्व मिलकर समाज के हर तबके की किस्मत बदल सकता है। आज तक “सबका साथ, सबका विकास” उनका नारा रहा है।

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राजनीति के ऊपर सरकार

नरेन्द्र मोदी ने हमेशा ही प्रशासन को राजनीति से ज़रूरी माना है। वे कभी भी राजनीतिक मतभेदों को विकास से जुडी चुनौतियों का समाधान ढूढने के रास्ते में नहीं आने देते हैं। सरदार सरोवर परियोजना का समापन और जिस तरह से नरेन्द्र मोदी ने ये सुनिश्चित किया कि नर्मदा का पानी गुजरात में बहे, ये दिखाता है कि सुशासन में आम सहमति और समझ का संतुलन चाहिए होता है।

श्री मोदी ने योजना को तेजी से आगे बढाने के लिए चतुराई से महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के पडोसी राज्यों के साथ समझौता किया और इस प्रक्रिया में कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों को अपनी पहल के समर्थन में शामिल किया, ऐसी हिस्सेदारी आज के राजनीतिक माहौल में मुश्किल से ही देखने को मिलती है।

पीने के पानी और सिंचाई दोनों के लिए जल प्रबंधन का विकेंद्रीकरण करके श्री मोदी ने दिखा दिया कि सरकार का काम बड़ी-बड़ी परियोजनाएं बनाना ही नहीं है बल्कि सेवा पहुँचाने तक की ज़िम्मेदारी को पूरा करना भी है।.

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प्रगति से एक क्लिक दूर

नरेंद्र मोदी द्वारा योजनाओं के क्रियान्वयन पर फोकस और उसके विस्तार पर ध्यान देने से यह समझने में मदद मिलती है, कि क्यों पिछले दशक में उनके ज्यादातर प्रयास सही तरीके से सर्विस डिलीवरी के संबंध में थे।

यह विविध क्षेत्रों जैसे ई-न्यायालयों में भू-स्थानिक मानचित्रण तथा ‘स्वागत’ जैसे उपक्रमों में प्रौद्योगिकी के अभिनव प्रयोग से साबित होता है।

श्री मोदी अपने ATVT जैसे विकेंद्रीकरण के प्रयासों के लिए जाने जाते रहे हैं। नरेंद्र मोदी का यह दृढ़ विश्वास है कि ज्यादा कानून बनाने की बजाय कार्य किए जाएं। यह इससे भी परिलक्षित होता है कि कैसे सिंगल विंडो सिस्टम से इंडस्ट्री लाभान्वित हुई, जिसको पर्यावरण क्लीयरेंस जैसे मामलों में पारदर्शिता और कुशलता से मदद मिली।

सफलता के तीन स्तंभ

नरेंद्र मोदी ने गुजरात की सफलता की कहानी कृषि, इंडस्ट्री और सेवाओं के आधार पर रखी। उनके कार्यकाल के दौरान गुजरात के कृषि क्षेत्र में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उन्होंने कृषि महोत्सव जैसे उपक्रमों से राज्य के किसानों के जीवन को रूपांतरित किया। उनके द्विवार्षिक वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन से रेकॉर्ड निवेश हुआ, जिससे रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए। उनके नेतृत्व में गुजरात, मीडियम और स्माल-स्केल इंडस्ट्रीज के लिए स्वर्ग बनकर उभरा।

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संस्थानों का महत्व

एक प्रशासक के रूप में श्री नरेन्द्र मोदी की क्षमताओं का दो बार परीक्षण हुआ। वर्ष 2006 में सूरत में भयंकर बाढ़ के दौरान और फिर वर्ष 2008 में गुजरात के कई शहरों में हुए आतंकी हमलों के दौरान। दोनों ही अवसरों पर मोदी के सर्वोत्तम संस्थागत प्रयासों ने अंतर पैदा किया।

आपदा प्रबंधन का संस्थागत दृष्टिकोण, जिसने 2001-2002 में कच्छ में पुनर्वास प्रयासों के दौरान आकार लिया, वह हिंद महासागर में आई सूनामी और उत्तराखंड में विनाशकारी बाढ़ के दौरान भी कारगर रहा ।

कानून प्रवर्तन के लिए संस्थागत दृष्टिकोण की सहायता से नरेंद्र मोदी की निगरानी में गुजरात पुलिस ने रेकार्ड समय में 2008 बम विस्फोट मामले को सुलझाया। प्रशासन और शासन के क्षेत्रों में एक असली नेता की निशानी वह संस्थागत विरासत है, जिसे वह पीछे छोड़ता है। इस मामले में नरेंद्र मोदी की प्रगतिशील सोच से विभिन्न संस्थानों की स्थापना हुई।
श्री मोदी की संस्थागत विरासत से यह दृढ़ विश्वास परिलक्षित होता है कि सुशासन केवल आज की समस्याओं के समाधान के बारे में ही नहीं है, बल्कि इसका संबंध भविष्य की आशंका और चुनौतियों के लिए तैयारी रहने से भी है।.

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अभिसरण ( कन्वर्जेंस) में भरोसा

जबकि श्री नरेन्द्र मोदी भारत के अगले प्रधानमंत्री के रूप में पद संभालने के लिए तैयार है, प्रशासन और शासन के लिए उनका दृष्टिकोण अपने संसृत सोच के साथ है। श्री मोदी का दर्शन "न्यूनतम सरकार, अधिकतम सुशासन" जो उनके लिए एक पंच-अमृत का निर्माण है, यह एक साझा मिशन से सरकारी कार्यों में मंत्रालयों और विभागों के बीच दीवारों को नष्ट करने से जाहिर होता है।

श्री मोदी के अनुसार भारत में सरकार के लिए मौलिक चुनौती संसृत सोच और निष्पादन के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण है। पिछले कुछ वर्षों में श्री मोदी के विभिन्न प्रयासों में - अगली पीढ़ी के शहरी बुनियादी ढांचे में निवेश करने के लिए ऊर्जा के गैर परंपरागत स्रोतों के विकास से लेकर, एक प्रशासन और शासन को एकाग्र करने के एक प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। यह अभिसरण आने वाले वर्षों में भारत को अच्छी स्थिति में लाएगा।

वर्ष 2001 से लेकर 2015 के दौरान भारत में गवर्नेंस के बेहतरीन प्रैक्टिसनर के तौर पर नरेंद्र मोदी का विकास राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में उनकी सरकार द्वारा प्राप्त किए गए विभिन्न पुरस्कारों से परिलक्षित होता है।.

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साल 2001 से 2013 के बीच श्री नरेंद्र मोदी ने शासन की दिशा में बेहतरीन काम किया और यह उनकी सरकार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिले पुरस्कारों में दिखाई देता है।

प्रशंसापत्र

""हर कोई जानता है कि मोदी एक मजबूत नेता और कुशल प्रशासक हैं, मेरी शुभकामनाएं और प्रार्थना हमेशा उनके साथ हैं। मैं उनके सुखद भविष्य की कामना करता हूँ और आशा करता हूं कि भारत के लिए उनके सभी सपनें और योजनाएं, सच हों" - रजनीकांत, सुपरस्टार

"मैंने नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है, वह एक अच्छे इंसान हैं, उन्होंने गुजरात में अच्छा काम किया है" - एच एच श्री श्री रवि शंकर जी, आध्यात्मिक नेता और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक

"नरेन्द्रभाई मेरे भाई की तरह है हम सब उन्हें प्रधानमंत्री बनने देखना चाहते हैं। दीवाली के शुभ अवसर पर, मुझे आशा है कि हमारी इच्छाएं सच हो जाएंगी" – लता मंगेशकर, प्रसिद्ध गायक

"अभी देश के महत्वपूर्ण कार्यालयों में ईमानदार व्यक्तियों की जरूरत है। एक शब्द में कहा जाए तो हमें नरेंद्र मोदी की जरूरत है।" - श्री अरुण शौरी, पूर्व केंद्रीय मंत्री, पत्रकार और लेखक

"श्री नरेंद्र मोदी को भगवान ने उचित समय पर हमारे पास भेजा है। वह अगले प्रधानमंत्री बनेंगे और देश का नाम रोशन करेंगे।" - श्री चो रामास्वामी, संपादक, “तुगलक”

भारत के 14 वें प्रधानमंत्री के रूप में श्री नरेन्द्र मोदी के साथ भारत के सबसे सफलतम मुख्यमंत्रियों और प्रशासकों में से एक होने का समृद्ध अनुभव है।.

 

डिस्कलेमर :

यह उन कहानियों या खबरों को इकट्ठा करने के प्रयास का हिस्सा है जो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और लोगों के जीवन पर उनके प्रभाव पर उपाख्यान / राय / विश्लेषण का वर्णन करती हैं।

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भारत में नई चेतना का संचार करने वाले नेता: नरेन्द्र दामोदरदास मोदी
June 14, 2026

नरेन्द्र दामोदरदास मोदी का साधारण पृष्ठभूमि से दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेतृत्व तक का सफर, अंततः उस व्यक्ति की कहानी है जिसने भारत का खुद पर, अपनी क्षमताओं पर और अपने भविष्य पर विश्वास फिर से जगाया।

किसी राष्ट्र की नियति उसके नेताओं की नियति से गहराई से जुड़ी होती है। मजबूत और निर्णायक नेतृत्व में राष्ट्र आगे बढ़ते हैं और समृद्ध होते हैं, जबकि कमजोर, अनिर्णायक और भ्रष्ट नेतृत्व के दौर में उनका क्षरण होने लगता है। जनता किसी राष्ट्र की जीवन-ऊर्जा होती है, लेकिन नेता वही होते हैं जो इस सामूहिक ऊर्जा को सही और उत्पादक दिशा देते हैं। अपने संस्थापकों और नेताओं के बिना किसी राष्ट्र की कल्पना नहीं की जा सकती। जब हम संयुक्त राज्य अमेरिका के बारे में सोचते हैं, तो थॉमस जेफरसन, जॉर्ज वॉशिंगटन, अब्राहम लिंकन, जॉन एफ. केनेडी और एफ.डी. रूजवेल्ट जैसे प्रमुख नेताओं के नाम हमारे मन में आते हैं। इसी तरह, भारतीय राष्ट्र का निर्माण भी महात्मा गांधी, बी.आर. आंबेडकर और वीर सावरकर जैसे महान संस्थापक पुरोधाओं के विजन पर हुआ है।

मजबूत नेतृत्व जनता के मनोबल को ऊंचा उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि दूरदर्शी नेता राष्ट्र को समृद्धि और गौरव के मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं। नेतृत्व का महत्व किसी राष्ट्रीय संकट के समय सबसे अधिक होता है, ठीक वैसे ही जैसे भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार ने प्रलय के दौरान मनु महाराज के विशाल जहाज का मार्गदर्शन कर उसे सुरक्षित बचाया था। संकट की घड़ी में नेता ही राष्ट्र का मार्गदर्शन करते हैं और उसे कठिनाइयों से बाहर निकालते हैं। श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने भी भारतीय राजनीति में ऐसे ही एक संकटपूर्ण दौर के दौरान केंद्र में अपनी प्रमुख भूमिका स्थापित की।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ऐसे समय राष्ट्रीय परिदृश्य पर उभरे, जब भारतीय राजनीति गहरे संकट के दौर से गुजर रही थी और देश पर एक नाममात्र के प्रधानमंत्री को थोपे जाने की स्थिति बन गई थी। सरकार पॉलिसी पैरालिसिस से जूझ रही थी। भ्रष्टाचार राष्ट्रीय राजनीतिक व्यवस्था में गहराई तक जड़ें जमा चुका था और कोलगेट, 2जी स्पेक्ट्रम तथा कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे घोटाले बार-बार सामने आने वाली घटनाएं बन गए थे। मीडिया, कारोबारी जगत और राजनेताओं के बीच एक अपवित्र गठजोड़ बन गया था, जो बिना किसी भय के सार्वजनिक धन की लूट में लगा हुआ था। उद्यमी, उद्योग जगत और अकादमिक क्षेत्र निराशा के माहौल में डूब चुके थे तथा भारतीय राज्य व्यवस्था पर उनका भरोसा कमजोर पड़ने लगा था। आम लोगों के मन में भी अपनी सांस्कृतिक विरासत को लेकर गर्व की भावना क्षीण होती जा रही थी।

उस निर्णायक मोड़ पर श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी एक स्पष्ट, सशक्त और दूरदर्शी विजन के साथ राष्ट्रीय मंच पर उभरे। उन्होंने युवाओं, महिलाओं और अनुभवी पीढ़ी सहित समाज के विभिन्न वर्गों को नई प्रेरणा दी। पीएम नरेन्द्र मोदी ने नेतृत्व और राजनीतिक व्यवस्था के प्रति लोगों के मन में आशा, विश्वास और भरोसे को फिर से स्थापित किया। उन्होंने अर्थव्यवस्था की रफ्तार को नई ऊर्जा दी, उद्यमिता और उद्योग जगत को प्रोत्साहित किया तथा नौकरशाही में भी नई कार्यसंस्कृति और उत्साह का संचार किया। स्वयं साधारण पृष्ठभूमि से आने के कारण पीएम मोदी को भारतीय समाज की गहरी समझ थी और आरएसएस प्रचारक के रूप में उन्होंने भारतीय संस्कृति तथा उसकी मूल चेतना को भी निकटता से समझा था।

भारत के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं में शामिल, उनका प्रशासनिक और चुनावी रिकॉर्ड बेदाग रहा। पीएम मोदी अपने साथ "मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस" का मंत्र लेकर आए।

पीएम मोदी ने सरकारी सेवाओं के तेज डिजिटलीकरण के माध्यम से फाइनेंस में मौजूद जड़ता को कम किया और सरकार को आम नागरिकों की उंगलियों तक पहुंचा दिया। अपने कार्यकाल की शुरुआत में ही उन्होंने गजेटेड अधिकारियों से दस्तावेजों के सत्यापन की अनिवार्यता को समाप्त कर आम नागरिकों के लिए सेल्फ-अटेस्टेशन की व्यवस्था लागू की। यह आम नागरिकों की प्रगति में बाधा बनने वाली नौकरशाही अड़चनों के प्रति उनकी सूक्ष्म समझ को दर्शाता है। उनके द्वारा शुरू किए गए सुधारात्मक उपायों के कारण अंतरराष्ट्रीय बिजनेस इंडिकेटर्स में भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ। पीएम मोदी ने एक दक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह सरकार के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता दिखाई है। अब नियम और नीतियां बंद एसी कमरों में नहीं, बल्कि लोगों के बीच बनती हैं।

पीएम मोदी ने सत्ता संभालने के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था को एक मैन्युफैक्चरिंग हब में बदलने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए लगातार कार्य किया है। पीएम मोदी ने स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव्स (PLI) जैसी पहलों की शुरुआत की। सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए पीएम मोदी ने ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और शिपिंग पोर्ट्स को मंजूरी दी, साथ ही ब्राउनफील्ड एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और स्टेशनों के निर्माण को भी गति दी। पीएम मोदी ने नए IIT और IIM स्थापित कर भारत के हायर एजुकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया। पीएम मोदी ने "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास" के मंत्र के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों का भारतीय सरकार के प्रति विश्वास फिर से मजबूत किया। उनकी संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पारंपरिक चूल्हों के धुएं से माताओं और बहनों को होने वाली परेशानी को समझते हुए उन्होंने पीएम उज्ज्वला योजना की शुरुआत की।

पीएम मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से स्वच्छता और सैनिटेशन को जनचर्चा का हिस्सा बनाया। इस योजना के तहत बनाए गए शौचालयों के जरिए पीएम मोदी ने हमारी माताओं और बहनों को गरिमापूर्ण जीवन उपलब्ध कराने का प्रयास किया। पीएम नरेन्द्र मोदी के भागीरथ प्रयासों के परिणामस्वरूप भारत की महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए नारीशक्ति वंदन अधिनियम पारित किया गया।

राष्ट्रवाद की भावना से ओत-प्रोत पीएम मोदी ने देश में एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण का नेतृत्व किया। औपनिवेशिक विरासत के अवशेष रहे इंडियन पीनल कोड (IPC) और सीआरपीसी (Code of Criminal Procedure) को समाप्त कर भारतीय न्याय संहिता का मार्ग प्रशस्त किया गया। पीएम मोदी निरंतर हमारे पवित्र तीर्थस्थलों के पुनर्निर्माण और विकास में जुटे हुए हैं। उनके प्रयासों से अयोध्या और काशी जैसे हमारे सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक केंद्रों को नई पहचान और भव्य स्वरूप मिला। पीएम मोदी ने ब्रांड एंबेसडर की तरह आयुर्वेद के स्वदेशी ज्ञान को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दिया और आयुर्वेद को प्रमुख चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित करने के लिए नीतियां तैयार कीं।

पीएम मोदी अपने उल्लेखनीय कार्यों, अटूट समर्पण और विकसित भारत के प्रति प्रतिबद्धता के माध्यम से हर भारतीय को 2047 तक विकसित भारत के अपने विजन में सहभागी बनने के लिए प्रेरित करते हैं।

फिर भी, किसी नेता की वास्तविक पहचान केवल उसकी बनाई गई नीतियों या स्थापित संस्थाओं से नहीं होती, बल्कि उससे होती है कि वह अपने लोगों में कितना आत्मविश्वास पैदा करता है। पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उस आत्मविश्वास को पुनर्स्थापित करने का प्रयास किया है—शासन-व्यवस्था में विश्वास, भारत की सभ्यतागत विरासत में विश्वास, सामान्य नागरिकों की क्षमताओं में विश्वास और राष्ट्र के भविष्य में विश्वास।

अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने और गरीबों के सशक्तिकरण से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने, सांस्कृतिक गौरव को पुनर्स्थापित करने और वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई देने तक, पीएम मोदी के नेतृत्व ने समकालीन भारत पर एक अमिट छाप छोड़ी है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने गवर्नेंस को एक राष्ट्रीय जनआंदोलन का स्वरूप दिया है, जिससे लाखों लोग देश की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार बनने के लिए प्रेरित हुए हैं।

जैसे-जैसे भारत 2047 में अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी की ओर बढ़ रहा है, विकसित भारत का विजन अब कोई दूर का सपना नहीं रह गया है; यह एक सामूहिक राष्ट्रीय मिशन बन चुका है। इतिहास उन नेताओं को याद रखता है जो तब आगे आते हैं जब उनके राष्ट्र को उनकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है, ऐसे नेता जो केवल अपने समय का नेतृत्व ही नहीं करते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की नियति को भी आकार देते हैं।

नरेन्द्र दामोदरदास मोदी का साधारण पृष्ठभूमि से दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेतृत्व तक का सफर, अंततः उस व्यक्ति की कहानी है जिसने भारत का खुद पर, अपनी क्षमताओं पर और अपने भविष्य पर विश्वास फिर से जगाया। एक अधिक सशक्त, आत्मविश्वासी और आकांक्षी भारत की नींव रखी जा चुकी है। अब राष्ट्र के सामने इस गति को आगे बढ़ाने और विकसित भारत के सपने को साकार करने का दायित्व है।

जब भारत और भी बड़ी संभावनाओं की दहलीज पर खड़ा है, तब रॉबर्ट फ्रॉस्ट के शब्द नए अर्थों और नई प्रासंगिकता के साथ गूंजते हैं,

"ये वन मनोहर हैं, गहरे हैं और रहस्यमय भी,

लेकिन मुझे अपने वादे निभाने हैं,

और विश्राम से पहले मुझे अभी मीलों चलना है,

और विश्राम से पहले मुझे अभी मीलों चलना है।"

भारत के लिए ये वादे उसके लोगों, उसकी सभ्यता और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हैं। पिछले बारह वर्षों की उपलब्धियां उस यात्रा की मजबूत नींव हैं। यह यात्रा अभी जारी है और आगे का मार्ग अनिश्चितताओं से नहीं, बल्कि अवसरों, उद्देश्य और विकसित भारत के संकल्प से परिपूर्ण है।

(रेखा गुप्ता दिल्ली की मुख्यमंत्री हैं।)