Shri Modi at Interactive meet organized by IMC & AIBC, Mumbai

Published By : Admin | May 2, 2013 | 13:06 IST

 

दरणीय श्री मथुरादास भाई, श्रीमान निरजंन भाई, उपस्थित सभी महानुभाव..! मैं सबसे पहले आप सबसे क्षमा चाहता हूँ, मुझे शायद यहाँ आज यहाँ छह बजे पहुँचना था, लेकिन मुझे पहुंचने में थोड़ा विलंब हुआ, और विलंब इसलिए हुआ कि मैं कर्नाटक के चुनाव प्रचार के अभियान में था। आप जानते हो चुनाव प्रचार अभियान समय को किस तरफ ले जाता है, इसके कारण मुझे आने में विलंब हुआ। शायद चैम्बर का यह पहला कार्यक्रम ऐसा होगा कि जहाँ लोगों को नीचे बैठना पड़ा हो..! तो आपको हुई इस असुविधा के लिए भी, और वो भी लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा..! बहुत बड़ा एजेंडा निरंजन भाई बता रहे थे। कहाँ से शुरू करूँ, क्योंकि कहने को इतने विषय हैं..!

क बात सही है कि हमारे देश में राजनीति अपनी जगह पर चलती रहती है। राजनीतिक दल, राजनीतिक नेता, विरोध, ये सारी बातें होती रही हैं। लेकिन शायद पहली बार इस देश ने बड़ी प्रखरता से जनता के भीतर से एक आवाज उठ रही है, एक आक्रोश की अभिव्यक्ति हो रही है। जिन्हें जहाँ जगह मिलती है अगर ट्विटर पर मिले तो ट्विटर पर, फेसबुक पर मिले तो फेसबुक पर, जंतर-मंतर जा कर चिल्ला सकता है तो वहाँ चिल्ला करके, जहाँ भी उसे मौका मिलता है, वह अपना आक्रोश व्यक्त कर रहा है। और ये आक्रोश कुछ लेने के लिए लोग नहीं व्यक्त कर रहे हैं, ये सबसे बड़ी बात है..! ‘हमारी मांगे पूरी करो’ ये कह करके चलने वाले आंदोलन, उसके लिए चलने वाली लड़त बहुत होती है, लेकिन शायद आजादी के बाद बहुत ही कम ऐसे उदाहरण मिलेंगे जो इन दिनों नजर आते हैं कि लोग देश का बुरा नहीं देख पा रहे हैं और इस परिस्थिति को झेल नहीं पा रहे हैं..! सारे आक्रोश के भीतर की कथा ये है कि लोग देख रहे हैं कि नैया डूब रही है, वे परेशानी महसूस कर रहे हैं..! मित्रों, कुछ हो या ना हो, आज हो या कल हो, ये करें या वो करें... इश्यू वो नहीं है। लेकिन क्या हम हमारे देश को इस अवस्था में देखते रह जाएगें क्या..? क्या एक नागरिक के नाते ये समय की माँग नहीं है कि हम इस परिस्थितियों के पलटने के लिए एक माहौल क्रियेट करें, एक ऐसी अवस्था पैदा करें और संगठित रूप में करें..!

भाइयों-बहनों, मैं छोटी-छोटी चीजें देखता हूँ तो मैं परेशान हो जाता हूँ। और गुजरात एक्सपीरिंयस से ज्यादा मेरा कोई एक्पीरियंस नहीं है। मैं एक छोटे से राज्य का सेवक हूँ। मेरा प्रदेश बहुत गरीब है। मेरे राज्य में 15% आदिवासी जनसंख्या है। मेरे राज्य में बारह मास बहने वाली नदियाँ नहीं हैं, मुश्किल से एक तापी और नर्मदा के भरोसे हम गुजारा करते हैं। हमारी स्थिति ये है कि हमारे पास बहुत बड़ा रेगिस्तान है और उधर पाकिस्तान है..! 1600 किलोमीटर का समुद्री तट है। ये ऐसा प्रदेश है कि जिसके पास रॉ-मेटिरियल नहीं है, भूसंपदा हमारे पास नहीं है..! और ऐसी परिस्थितियों में भी अगर एक राज्य, वहाँ के लोग, निराशा छोड़ कर के आत्मविश्वास से भरे हुए मन के साथ अगर स्थितियाँ पलट सकते हैं, अगर छह करोड़ गुजराती कर सकते हैं, तो सवा सौ करोड़ देशवासी भी कर सकते हैं..! और उसकी पहली शर्त है कि इस जनता जर्नादन के प्रति भरोसा चाहिए। हमारी युवा शक्ति पर हमें विश्वास होना चाहिए। खेत-खलिहान में काम करने वाले हमारे किसान भाइयों के प्रति हमारा आदर भाव होना चाहिए। दिन-रात पसीना बहा करके मशीन के साथ मशीन के जैसी जिंदगी जीने वाले मजदूर के प्रति सम्मान का भाव होना चाहिए। माताओं-बहनों की डिग्निटी हम सबका दायित्व होना चाहिए। अगर ये माहौल हम क्रियेट करें, तो मैं गुजरात एक्सपीरिंयस से कह सकता हूँ कि ये सब संभव है..! हमारे पास कोई डायमंड की खदान नहीं है, लेकिन आज दुनिया में दस में से नौ डायमंड पर किसी ना किसी गुजराती का हाथ लगा होता है..! दुनिया के कोई भी धनी व्यक्ति के शरीर पर अगर डायमंड होगा, तो विश्वास कीजिए वो डायमंड वाया गुजरात आया होगा..! कहने का तात्पर्य ये है कि हम कर सकते हैं। हमारे पास आयन-ओर नहीं है, लेकिन आज स्टील इंडस्ट्री में हमारा लोहा मानना पड़ता है..! हम भी निराश हो कर के बैठ सकते थे कि अब क्या करें भाई, पानी नहीं है तो ठीक है, जब बारीश आएगी तब देखेंगे..! नहीं, पता है ईश्वर ने व्यवस्था की है, हमारे पास नहीं है पानी तो रोते रहेंगे क्या..?

मित्रों, जिस देश में गंगा-यमुना के तट हो, कृष्णा-गोदावरी हो, सिंधु का जल हो, सबकुछ हो, उसके बावजूद भी देश का एग्रीकल्चर ग्रोथ 2% - 3%, 2% - 3%..! अगर एग्रीकल्चर ग्रोथ नहीं होगा तो रूरल इकोनॉमी को बल नहीं मिलेगा। और अगर इस पूरे अर्थ चक्र को गति देनी है, उसको बल देना है तो हमें गाँव के व्यक्ति का पर्चेज़िंग पावर बढ़ाना पड़ेगा। गाँव के नागरिक की खरीद शक्ति बढ़नी चाहिए। और गाँव के नागरिक की खरीद शक्ति तब तक नहीं बढ़ती है, जब तक कि हम एग्रीकल्चर ग्रोथ में सारे स्टैगनेंसी को तोड़ कर बाहर नहीं निकलते हैं। और इसलिए गुजरात ने विकास के जिस मॉडल को पसंद किया है, उसे तीन हिस्सों में बाँटा है। वन थर्ड एग्रीकल्चर डेवलपमेंट, वन थर्ड मैन्यूफैक्चरिंग, एंड वन थर्ड सर्विस सेक्टर। यहाँ बैठे हुए सब लोग जानते हैं कि जब 1 मई, 1960 को गुजरात और महाराष्ट्र अलग हुए, उस समय के अखबार निकाल लिजिए, क्या बयान आते थे..? बयान यही आते थे कि क्या होगा गुजरात का..? ये कैसे आगे बढ़ेंगे..? इनके पास है क्या..? कोई नेचुरल रिसोर्सिस तो है नहीं, करेंगे कैसे सब..? ये चर्चा उस समय के अखबार में होती थी। और एक समय था कि गुजरात की छवि क्या थी..? वी वर ए ट्रेडर स्टेट..! एक जगह से लेते थे, दूसरी जगह पर देते थे, बीच में से निकालते थे। ये ही था हमारा..! आज इसका पूरा कैरेक्टर बदल कर के एक मैन्यूफैक्चरिंग स्टेट बन गया है। मित्रों, गुजरात की छवि थी एक अकाल पीड़ित राज्य की, वॉटर स्केरसिटी वाले स्टेट की..! एग्रीकल्चर ग्रोथ की कोई कल्पना नहीं कर सकता था..! लेकिन भाइयों-बहनो, पिछले दस साल का रिकार्ड कहता है, और एक आद बार बड़ा एग्रीकल्चर ग्रोथ होना कोई बड़ी बात नहीं है, होता है..! मानो पिछली बार अगर माइनस है और इस बार बारिश अच्छी हो गई तो 15-17% ग्रोथ एक साल में तो कर लेते हैं, लेकिन लगातार दस साल का एवरेज करीब-करीब 10% एग्रीकल्चर ग्रोथ, ये हिन्दुस्तान का रिकार्ड है..! पानी नहीं था तो हुआ कैसे..? मित्रों, गुजरात पहला राज्य था जिसने एक इनिश्यिेटिव लिया। हमारे देश में मनुष्य भी बीमार होता है तो उसका कोई हेल्थ कार्ड नहीं है। यहाँ पर इतने संपन्न लोग बैठे हैं, पर बहुत से लोग ऐसे होंगे जिनका अपना हेल्थ कार्ड नहीं होगा..! गुजरात के किसान के पास ‘सॉइल हेल्थ कार्ड’ है। उसकी जमीन की तबीयत कैसी है उसका उसको पता है। उसकी जमीन में क्या कमी है, किस प्रकार के क्रॉप के लिए अनुकूल है, किस प्रकार की डेफिश्यिेन्सी है, कौन सी दवाइयाँ चाहिए, कौन सा फर्टीलाइजर चाहिए, कौन सा न्यूट्रीशन वैल्यू एड करना पड़ेगा, ये सारी चीजों को उसको वैज्ञानिक तरीके से समझाया। मेहनत पड़ती है, लेकिन यदि सही दिशा में काम करो तो परिणाम भी मिलता है..! हमारे पास पानी नहीं था हमने जल संचय का अभियान चलाया। पर ड्रॉप, मॉर क्रॉप..! इस मंत्र को लेकर के हम चले। एक-एक बूंद से पैदावार करने का इरादा किया। गुजरात की 40-45 साल की यात्रा, पूरे राज्य में कोई 1200 हैक्टेयर भूमी में ड्रिप इरिगेशन हूआ था, चालीस साल में..! पिछले दस साल के अंदर हमने जो काम किया उसका परिणाम है कि आज नौ लाख हैक्टेयर भूमि में ड्रिप इरिगेशन है। किसी ने कल्पना की थी कि कच्छ जो रेगिस्तान है, वो आज मैंगो एक्सपोर्ट करता है, मित्रों..! बनासकांठा, अनार की खेती में उसने नाम कमाया है। पोटेटो, पूरी दुनिया का प्रति हैक्टेयर का जो रिकार्ड था, उस रिकार्ड को ब्रेक करने का काम बनासकांठा के किसानों ने किया..!

मूलभूत चीजों को अगर हम एड्रेस करें, तो हो सकता है..! और इसलिए हम जो अनेक प्रकार के इन्फ्रास्ट्रक्चर की चर्चा करते हैं, उसमें एग्रो इन्फ्रास्ट्रक्चर बहुत बड़ा महत्व का काम है। इस विषय में हमारे देश में बड़ी उदासीनता रही है। जिस प्रकार से एग्रो इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है, उसी प्रकार से एग्रो टैक्नोलॉजी की तरफ जाने की भी जरूरत है। आने वाले दिनों में हम उस पर बल दे रहे हैं। आज अगर इजराइल के अंदर दो साल के अंदर एक बार एग्रीकल्चर फेयर लगता है, तो हमारे देश के हजारों किसान करोड़ों रूपया खर्च करके उसे देखने के लिए इजराइल जाते हैं। अब ये कोई रॉकेट सांइस है कि सिर्फ इजराइल में ही हो सकता है..? हमने तय किया है कि 2014 में हम गुजरात में ग्लोबल लेवल का एग्रोटैक फेयर करने वाले हैं..! हम हमारे किसानों को एग्रीकल्चर में टैक्नोलॉजी का माहात्म्य बढ़ता जा रहा है ये उनको समझाना चाहते हैं, हम उनको वैल्यू एडीशन की चेन के साथ जोड़ना चाहते हैं और हम डेवलपमेंट के इन्टीग्रेटिड अप्रोच के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।

र्क कैसे होता है..? अभी हीरानंदानी जी कह रहे थे कि बिजली में आपने कैसे कमाल किया..! सवाल साफ है..! आज कल एक फैशन हो गई है, गुजरात के विकास को नकारा तो नहीं जा सकता, लेकिन राजनीतिक कारणों से स्वीकार भी नहीं किया जा सकता..! तो एक नई टर्मिनोलॉजी खोज ली गई है कि भाई, गुजरात तो पहले से ही आगे है, बहुत पहले से ही आगे है..! मित्रों, गुजरात में 2001 में जब मैं पहली बार मुख्यमंत्री बना तो लोग मुझे मिलते थे और एक ही बात का आग्रह करते थे। और तब तो मेरा शपथ लेना भी बाकी था। मैं गांधीनगर के सर्किट हाउस के एक कमरे में रहता था। दो-तीन दिन के बाद शपथ होना था, लेकिन ये मीडिया वालों ने प्रचारित कर दिया था कि अब तो हो गया है खेल पूरा..! तो लोग आना शुरू हो गए, और जो भी मुझे मिलता था, वो मुझे क्या कहता था, कि मोदी जी कुछ हो या ना हो, कुछ करो या ना करो, लेकिन एक काम कम से कम कर दो..! मैंने कहा क्या..? कम से कम शाम को खाना खाते समय तो बिजली दो..! मित्रों, ये सच्चाई है, गुजरात में डिनर के समय बिजली उपलब्ध नहीं थी। दसवीं के एक्ज़ाम हो, बच्चा पढ़ना चाहता हो, मगर बिजली नहीं थी..! माँ बीमार हो, पंखा चले तो अच्छा लगे, लेकिन पंखा नहीं चलता था..! सास भी कभी बहू थी, टीवी देखने का मन करता हो, लेकिन बिजली नहीं थी..! इस सच्चाई को हम नकार नहीं सकते। आज वो राज्य एनर्जी सरप्लस है। हमारे पास कोयले की खदाने नहीं हैं, उसके बाद भी आज हम एनर्जी सरप्लस हैं..! पिछले पाँच-सात साल में ही हमारी करीब 200% बढ़ोतरी हुई है और शायद आने वाले एक-दो साल में हम इतने आगे बढ़ जाएंगे कि हमें बिजली दान में देनी पड़ेगी..! देखिए महाराष्ट्र में बिजली का संकट है, लेकिन महाराष्ट्र कितना नुकसान भुगत रहा है इसको आप जानकर के हैरान हो जाओगे..! सरदार सरोवर डैम में बिजली का हाइड्रो प्रोजेक्ट है और उसका जो एग्रीमेंट है उस एग्रीमेंट के तहत जितनी बिजली पैदा होती है उसकी कम से कम बिजली गुजरात को मिलती है। मैक्सिमम मध्य प्रदेश को और सेकंड महाराष्ट्र को। आज हमारी जितनी सुविधा है और उससे हम जितनी भी बिजली पैदा करते हैं, उसका अधिकतम हिस्सा मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र को जाता है। लेकिन हमारा जो सरदार सरोवर डैम है उस पर गेट लगाने बाकी हैं, और कोई छह मंजिला इमारत के साइज के गेट हैं। गेट बने बनाए रेडी पड़े हैं, हमें भारत सरकार लगाने की इजाजत नहीं दे रही है..! मैं प्रधानमंत्री का पच्चीसों बार मिला हूँ, मैंने प्रधानमंत्री जी को कहा कि हमें गेट लगाने तो दो, लगाने में भी कम से कम तीन साल लगने वाले हैं..! और मानो अगर कोई रिहैबिलिटेशन का प्रोब्लम सॉल्व नहीं हुआ है, तो तीन साल में जिसको काम करना है, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश को, वे करेंगे। लेकिन मानो कि फिर भी रुक जाए, तो दरवाजे बंद मत करना, पानी नहीं रोकेंगे..! पर ताबूत को खड़ा तो करने दो..! तो प्रधानमंत्री कहते हैं कि हाँ मोदी जी, ये तो बड़ी सरल बात है, इसमें क्या है..? गेट लगा दो, दरवाजे बंद मत करना..! जब सब क्लीअर हो जाए तब दरवाजे बंद करना और पानी भरना..! मित्रों, अगर गेट लग जाएं, दरवाजे बंद होकर के पानी का संग्रह हो तो आज जितनी बिजली महाराष्ट्र को हम देते हैं, उससे डबल बिजली मुफ्त में वहाँ से मिल जाएगी, जिस पर महाराष्ट्र का अधिकार है..! आज 400 करोड़ रूपयों का नुकसान महाराष्ट्र इसलिए भुगत रहा है क्योंकि दिल्ली की सरकार निर्णय नहीं कर रही है..! और कन्वीस है, कोई मुझे कहता नहीं है कि मोदी जी, आपकी बात गलत है, ऐसा भी नहीं है..! जब भी मैं मिलता हूँ तो कहते हैं, अच्छा मोदी जी, अभी तक हुआ नहीं..? वो ऐसा पूछते हैं और हर बार यही पूछते हैं..! तो मैं जाकर कहता हूँ कि प्रधानमंत्री जी, आपने पिछली पूछा था कि अभी कुछ हुआ नहीं..? तो मैं कहने आया हूँ कि अभी कुछ हुआ नहीं..! ऐसे ही कहता हूँ मैं उनको..! ये महाराष्ट्र की बिजली के संकट के लिए हम बड़ी मदद कर सकते हैं, लेकिन वो काम नहीं हो रहा है। और क्यों नहीं हो रहा है इसका जवाब मुझे मिल नहीं रहा है। हम कोशिश कर रहे हैं..! कहने का तात्पर्य ये है कि विकास की उन मूलभूत धाराओं को जब तक हम पकड़ते नहीं हैं, तब तक हम परिणाम नहीं ला सकते हैं..!

मेरे प्रवास के दौरान मुझे आज कोई बता रहा था कि वर्ल्ड बैंक का एक रिपोर्ट आया है। उस रिपोर्ट में व्यापार-उद्योग के लिए विश्व में कौन-कौन सी सानुकूल जगहें हैं, उसका उसमें सर्वे रिपोर्ट है। सर्वे रिपोर्ट में उन्होंने सोलह स्थान चुने हैं, और मुंबई का उसमें दसवाँ नम्बर है, व्यापार-उद्योग के लिए अच्छे स्थान के रूप में। लेकिन अहमदाबाद का पाँचवां नम्बर है..! मित्रों, ये ऐसे-वैसे नहीं होता है..! आज ऐसे ही सरसरी नजर से मैंने देखा कि ‘इकोनॉमिक टाइम्स’ में एक आर्टिकल छपा है, पूरा तो मैं पढ़ नहीं पाया हूँ। भारत सरकार ने एक बहुत बड़ी हाई पावर कमेटी बनाई थी, गुड गवर्नेंस को लेकर के कैसे क्या किया जाए..! और प्रधानमंत्री कार्यालय उसको पूरी तरह मॉनिटर कर रहा था। मिस्टर पुलोक उसको देखते थे और बड़े-बड़े ब्यूरोक्रेट्स, बड़े-बड़े जोरदार केन्द्र के मंत्री, ऐसी एक कमेटी थी। उस कमेटी का रिपोर्ट आया है कि अच्छी सुशासन व्यवस्था करने के लिए क्या करना चाहिए..! और उन्होंने पाँच पांइट सजेस्ट किये हैं। आज के ‘इकोनॉमिक टाइम्स’ में हैं। उसको देख करके मुझे लगा कि भाई, इतनी मेहनत क्यों कर रहे हो, एक आधा घंटा मेरे यहाँ आ करके चले जाते, आपको सब मिल जाता..! जैसे उन्होंने कहा है कि भाई ब्यूरोक्रसी के टेन्योर में स्टेबिलिटी होनी चाहिए। मित्रों, गुजरात की सक्सेस का एक कारण ये है कि हमारे यहाँ एडमिनिस्ट्रेटिव स्टेबिलिटी है। मैं इधर-उधर अफसरों की बदली नहीं करता रहता..! एक बार काम देता हूँ, तीन साल वहाँ रखता हूँ और हिसाब माँगता हूँ कि बोलो भाई, क्या किया..? मेरे यहाँ लोगों के दिमाग से ये निकल गया कि काम नहीं करेंगे तो क्या करेंगे, ज्यादा से ज्यादा बदली कर देंगे..! नहीं, करना ही पड़ेगा, मैं ट्रान्सफर क्यों करूं..? ये उन्होंने सजेशन दिया, अब ये मेरे यहाँ आते तो पता चल जाता..! दूसरा उन्होंने कहा है कि भई, डिस्क्रिमिनेशन नहीं होना चाहिए, व्यक्ति आधारित निर्णय नहीं होना चाहिए, ऐसा एक सुझाव उन्होंने दिया है। मित्रों, पहले ही दिन से मैं कह रहा हूँ, राज्य तब प्रगति कर सकता है, अगर राज्य पॉलिसी ड्रिवन हो..! अगर आपका राज्य पॉलिसी ड्रिवन है, तो किसी भी व्यक्ति के हाथ में निर्णय करने का अधिकार रहता नहीं है, पॉलिसी कहती है कि ये इसको मिलेगा और इसको नहीं मिलेगा। लेकिन जब ग्रे एरिया होता है तब देना या नहीं देना, ये निर्णय उसके हाथ में आता है। और जैसे ही उस प्रकार से ये निर्णय हाथ में आता है, करप्शन भी आता है, लेथार्जी भी आती है, ब्यूरोक्रेटिक समस्याएं भी पैदा होती हैं..! लेकिन अगर लिखा हुआ है, ऑन-लाइन अवेलेबल है... गुजरात ने इसे सिद्घ कर दिया है..! तीसरा उन्होंने सुझाव दिया है, डिपार्टमेंट में को-ऑर्डिनेशन होना चाहिए, एक डिपार्टमेंट का दूसरे डिपार्टमेंट के साथ को-ऑर्डिनेशन होना चाहिए। अब ये बहुत सरल बात है, करना ही चाहिए..! आप जानते हो कि सरकार में एक डिपार्टमेंट दूसरे डिपार्टमेंट को भनक भी नहीं लगने देता कि वे क्या कर रहे हैं..! उस डिपार्टमेंट में भी एक चेम्बर वाला दूसरे चेम्बर वाले को पता नहीं चलने देता है..! चेम्बर में भी अगर छह टेबल है और अगर छोटे-मोटे छह अफसर बैठे हैं, तो एक टेबल वाला, दूसरे टेबल वाले को पता नहीं चलने देता कि वो क्या कर रहा है..! ऐसा पता नहीं क्या सिक्रेसी का माहौल बना दिया है..! मित्रों, हमने एक काम किया। हमने कहा, ओपननेस इन गवर्नेंस..! अभियान चलाया, हमने चिंतन शिविरें की और खुल कर के चर्चा शुरु की..! हमारे यहाँ सरकार कोई पॉलिसी लाने वाली हो, तो ऐसा लगता है पता नहीं क्या बड़ा जगत लूटने वाले हैं, साहब..! उसको बड़ा सीक्रेट रखते हैं और फिर बड़ा आकर्षण पैदा करते हैं कि कुछ होना है, कुछ होना है, कुछ होना है... फिर मीडिया को बुलाते हैं और धमाके के साथ जैसे कोई बहुत बड़ा शेर मार दिया हो ऐसे पॉलिसी डिक्लेयर करते हैं..! मुझे समझ नहीं कि आता इसमें क्या सरप्राइज एलिमेंट है, भाई..! क्या जरूरत है..? हमने एक काम किया, हमने कहा कि कोई भी ड्राफ्ट पॉलिसी होगी, उसको ऑन-लाइन डाल दो। और लोगों को कहो कि तीस दिन के अंदर इस पॉलिसी की जो कमियाँ हों, अच्छाइयाँ हों, बुराइयाँ हों, सब अपना सजेशन दो..! इससे क्या हुआ कि जितने भी इन्ट्रेस्टिड ग्रूप्स थे, सब अपनी-अपनी बात रखने लगे, तो हमें क्रॉस सेक्शन पता चल गया कि भाई, ये करने जैसा है और ये करने जैसा नहीं है..! हमें कोशिश ही नहीं करनी पड़ती है। मानो कि मैं कोई हाउसिंग पॉलिसी लाता हूँ, निरंजन भाई को अनुकूल होगा तो वो अपने अनुकूल सुझाव देंगे, दूसरा उनके खिलाफ होगा तो दूसरा सुझाव देगा और मैं इसमें से अच्छा निकाल लूंगा..! और उसके बाद हम पॉलिसी फ्रेम करते हैं। सरकार में अगर हमारी सोच में भी अगर मर्यादाएं हैं, तो ये खुलेपन के कारण एक नई एयर मिलती है, नए विचार मिलते हैं और उसके कारण बाय ऐन्ड लार्ज, करीब-करीब ज़ीरो ग्रे एरिया, अब मनुष्य इतना तो महान नहीं है कि भविष्य की सोच में कोई गलती होगी ही नहीं, लेकिन करीब-करीब ज़ीरो ग्रे एरिया की दिशा में हम आगे बढ़ते हैं और उसका हमें लाभ मिलता है। अब ये इतनी बड़ी कमेटी ने ऐसे पाँच सुझाव दिए हैं। ये सारे के सारे सुझाव, इसमें पाँच में से चार हम ऑलरेडी इम्पलीमेंट करते हैं और हम इसको प्रेक्टिस करते हैं..! हम चिंतन शिविर करते हैं। लोग मुझे पूछते हैं कि साब, ये ही ब्यूरोक्रेसी काम कैसे करती है..? काम इसलिए करती है कि हमने उसके अंदर ओनरशिप का भाव पैदा किया है। उसको लगता है कि ये सरकार मैं चला रहा हूँ, उसको लगता है कि ये निर्णय मेरा है, उसको लगता है कि अगर इस राज्य का भला होगा, तो मेरा भी भला होगा.... ये भाव पैदा किया है..! उन्होंने एक और बात कही है कि सरकारी अफसरों को इनोवेशन्स के लिए, इनिशियेटिव्स के लिए अवकाश देना चाहिए..! मित्रों, मेरे राज्य में एक स्कीम चलती है, स्कीम का नाम है ‘स्वान्त: सुखाय’। ये ‘स्वान्त: सुखाय’ स्कीम ऐसी है कि कोई भी मेरा सरकारी अधिकारी, उसको जिसमें आनंद आता है, उसको उत्साह रहता हो ऐसा खुद की पसंद का कोई भी काम, अपने डिपार्टमेंट का हो या ना हो, ऐसा एक काम साल में सिलेक्ट कर सकता है। और उसके लिए जितना समय उसको देना है, दे सकता है। अपने सरकारी काम के अतिरिक्त। मित्रों, मेरे यहाँ सैकड़ों सरकारी अधिकारी हैं जो इस प्रकार का अपनी पसंदगी का एक काम लेते हैं और उसको पूरा करते हैं। जैसे मैं बताऊँ, हमारा एक फॉरेस्ट ऑफिसर था, अब हमारा जो अंबाजी टैम्पल है वहाँ पानी की दिक्कत थी, तो उसने तय किया। अब वो फॉरेस्ट ऑफिसर था और आप जानते हो, फॉरेस्ट को नुकसान करने का अधिकार हम में से किसी को नहीं है, सिर्फ फॉरेस्ट वालों को ही है..! अब वहाँ हम चेकडैम बनाना चाहते थे, वहाँ पहाड़ों में से जो पानी आता है उसे रोकना चाहते थे। इस अफसर ने बीड़ा उठाया और खुद ने लोगों को जोड़ कर के बहुत बड़ी संख्या में चेकडैम तैयार किये। उसका परिणाम ये हुआ कि अंबाजी टैम्पल टाउन में पीने के पानी की समस्या दूर हो गई और उसको आनंद आया। अब आज उसकी ट्रांसफर हो गई है, लेकिन अपने रिश्तेदार भी आते हैं तो पहले वहाँ ले जाता है और चेकडैम दिखाता है, माता जी के दर्शन बाद में करवाता है..! उसको इतना आनंद आता है कि मैंने ये काम किया..! और ऐसे सैकड़ों अधिकारियों को हमने इनोवेटिव, इनोवेशन, इनिश्यिेटिव्स लेने के लिए हमने प्रोत्साहित किया है..! मित्रों, ये सारी बातें गुजरात में हो रही हैं और मैं हैरान हूँ कि ‘इकोनॉमिक टाइम्स’ में बहुत बढ़िया ढंग से उसको प्रस्तुत किया गया है, भारत सरकार की रिपोर्ट के नाते..! इसमें केवल गुजरात का नाम होता तो छपता नहीं, मैं बता रहा हूँ, कुछ और ही छप जाता..! मित्रों, कहने का तात्पर्य ये है कि हम इन चीजों को कर सकते हैं..!

ग्रीकल्चर में, जैसा मैंने कहा कि हम इकोनॉमी को भी तीन हिस्सों में बांट कर के काम कर रहे हैं, एग्रीकल्चर को भी हम तीन मूलभूत आधार के ऊपर डेवलप कर रहे हैं। एक रेगयूलर फार्मिंग, दूसरा पशुपालन, दूध उत्पादन और तीसरा वृक्षों की खेती। कृषि के अंदर प्रीप्लान्टेशन का एक बहुत बड़ा अवकाश पैदा हुआ है। हमारे यहाँ खेतों के किनारों पर बाड़ लगाते हैं लेकिन उसकी जगह यदि पेड़ लगा दें, तो जमीन बर्बाद हुए बिना भी बहुत बड़ी सफलता मिल सकती है। खेड़ा और आणंद डिस्ट्रिक्ट में हमने बहुत सफलता पूर्वक ये इस काम को किया है और धीरे-धीरे पूरे राज्य में इसको हम आगे बढ़ा रहे हैं। और इसके कारण, आज मानो किसी के घर में बेटी पैदा हुई है। बेटी पैदा होते ही अगर उसने पाँच वृक्ष बो दिए तो मित्रों, मैं विश्वास से कहता हूँ कि जिस दिन बेटी की शादी करनी होगी तो उन पाँच वृक्षों को बेच कर वो आराम से शानदार रूप से बेटी की शादी कर सकता है..! जब तक हम चीजों को जोड़ते नहीं है..! आज भी विश्वास होता है कि हाँ भाई, चलिए बेटी का जन्म हुआ है तो पाँच पेड़ लगा दें, बेटी भी बड़ी होगी, पेड़ भी बड़े होंगे और सरकार ने अनुमति दी है कि इस प्रकार के पेड़ बेच सकते हो, तो शादी का खर्चा भी निकल जाएगा..! हमारी ग्रीनरी भी बढ़ेगी, उसकी शादी हो जाएगी, संसार ठीक से चलेगा और राज्य प्रगति करेगा..! चीजें बहुत छोटी-छोटी होती हैं, लेकिन जब इन्वॉल्व होते हैं तो परिवर्तन आता है..!

दूध उत्पादन..! मित्रों, हमने पशु की जो केयर की है, आपको जानकर के हैरानी होगी..! हमारे देश में आज भी कई प्रदेश ऐसे हैं कि जहाँ मनुष्य के कैट्रेक्ट ऑपरेशन के लिए कैम्प लगाने पड़ते हैं, चेरिटेबल ट्रस्टों को डोनेशन देना पड़ता है, बड़े-बड़े शहरों से डॉक्टरों को गाँवों में जाकर कैट्रेक्ट के ऑपरेशन करने पड़ते हैं, ये आज भी हमारे देश में होता है। आपको जानकर के आनंद होगा कि हम पशु आरोग्य मेला लगाते हैं। उस पशु आरोग्य मेले में गुजरात एक ऐसा राज्य है, पूरी दुनिया में वी आर द फर्स्ट स्टेट, जहाँ पर पशु का कैट्रेक्ट ऑपरेशन भी होता है और डेंटल ट्रीटमेंट भी होती है। इतनी बारीकी से काम करने से क्या हुआ है, कि आज मेरे राज्य में ये कैटल केयर के कारण 121 डिजीज ऐसे हैं जो आज पूरी तरह इरेडिकेट हो गए हैं, जो पशुओं को परेशान करते थे..! अब कोई मुझे कहे भाई, कि ये मानवता का काम है कि नहीं है..? ये करूणा का काम है कि नहीं है..? इंक्लूसिव ग्रोथ का इससे बड़ा नमूना क्या हो सकता है कि जिस राज्य में पशु की आँख की भी चिंता होती है, मित्रों..! चीजें की जा सकती हैं..!

म सर्विस सेक्टर को भी उतना ही बल देना चाहते हैं। गुजरातीज आर बेस्ट टूरिस्ट, बट गुजरात वाज नेवर अ टूरिस्ट डेस्टिनेशन..! इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है..! और गुजराती इतने बढ़िया टूरिस्ट हैं, आप दुनिया के किसी भी देश में जाइए, ‘केम छो’ आपको मिल ही जाएगा..! और आप देखना साहब, फाइव स्टार होटल में घर से लाया हुआ डब्बा खोल कर के थेपला निकलेगा, निकालेगा, निकालेगा..! लेकिन गुजरात वाज नेवर अ टूरिस्ट डेस्टिनेशन..! आपको जानकर के हैरानी होगी मित्रों, पूरे हिन्दुस्तान में पर स्क्वेयर किलोमीटर हैरिटेज प्रापर्टी अगर सबसे ज्यादा कहीं है तो गुजरात में है..! अब हमने इस पर बल दिया, हमने जोर लगाया, टूरिज्म को बढ़ावा देंगे। सर्विस सेक्टर को बढ़ावा देना था, हॉस्पिटैलिटी को बढ़ावा देना था..! हिन्दुस्तान का टूरिज्म का जो एवरेज ग्रोथ है, पिछले तीन साल में गुजरात का टूरिज्म ग्रोथ हिन्दुस्तान के ग्रोथ से डबल हो गया है..! और लोग एक दूसरे को मिलते हैं तो अपने आप कहने लगते हैं, ‘कुछ दिन तो गुजारों गुजरात में..’, ‘कच्छ नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा..’, आम आदमी बोलने लगा है ये और हमारे टूरिज्म का डेवलपमेंट हुआ है..! हम गुजरात के लोग रोते रहे हैं, रेगिस्तान है, रेगिस्तान है..! मित्रों, इसी रण को हमने हिन्दुस्तान का तोरण बना दिया है। आज हमारा व्हाइट रण देखने के लिए हजारों की तादाद में लोग आते हैं। पाकिस्तान की सीमा पर व्हाइट रण में एक महीने के लिए हम एक बड़ा टैंट सिटी खड़ा करते हैं और देश भर के लोग ऑन-लाइन बुकिंग करवाते हैं, दो-दो साल का बुकिंग नहीं मिलता, मित्रों..! और कच्छ के करोड़ों रूपये के हैंडिक्राफ्ट की बिक्री होने लगी है, गरीबों को रोजी-रोटी मिलने लगी है। चीजें बदली जा सकती हैं और हम उस दिशा में आगे काम कर रहे हैं..!

हाँ चाइना की बड़ी चर्चा हो रही थी। मैं मानता हूँ परेशान होने की जरूरत नहीं है। देखिए, पूरे विश्व का ध्यान एशिया पर केन्द्रित हुआ है। हर एक को लगता है कि भाई, नेक्स्ट सेंचुरी एशिया की है। पूरे आर्थिक जीवन पर एशियन कंट्रिज़ का दबदबा रहने वाला है। लेकिन फिर सवाल उठता है कि कौन आगे जाएगा, हिन्दुस्तान जाएगा कि चाइना जाएगा..! हमारी दो शक्तियाँ ऐसी हैं जिन पर हमें ध्यान केन्द्रित करना चाहिए और विश्व के सामने डंके की चोट पर इन बातों को लेकर जाना चाहिए। एक है, हम विश्व के सबसे नौजवान देश हैं, चीन नहीं है..! हमारी 65% पॉपूलेशन बिलो 35 है। ये जो डेमोग्राफिक डिवीजन है, ये हमें चाइना से आगे जाने के लिए एक बहुत बड़ी शक्ति देता है। अगर हम उस पर ध्यान केन्द्रित करते हैं तो हम सारी व्यवस्थाओं को बदल सकते हैं..! और दूसरी हमारी एक ताकत है, जिस ताकत को हमें अहसास करना होगा..! वो दूसरी ताकत हैं डेमोक्रटिक डिविडेंड..! मित्रों, पूरा विश्व लोकतांत्रिक परंपराओं में विश्वास करता है और उसमें हम चाइना से कई कदम आगे निकल जाते हैं..! और जब मैं डेमोक्रेसी की बात करता हूँ, तो वो ज्यूडिशियल सिस्टम तक आता है। हमारा देश ऐसा है कि जहाँ न्याय उस भाषा में मिलता है जो आम आदमी सहजता से उस पर विश्वास कर सकता है। चाइना में न्याय चाइनीज़ भाषा में मिलता है और उस ड्रांइग का हर कोई अलग-अलग अर्थ निकाल सकता है. वो एक ऐसी लैंग्वेज है..! और इसके कारण विदेश के लोग चिंतित रहते हैं। हम एक एश्योरेंस दे सकते हैं, क्योंकि व्यापार-रोजगार में कोई भी डिस्प्यूट हुआ तो जस्टिस चाहिए। ये व्यवस्था हम दे सकते हैं..! अगर इन चीजों पर हमने बल दिया तो बहुत बड़ा लाभ होता है। और एक बात है, जिसमें हम लोगों की कमी है..! वो कमी क्या है..? देखिए, आज चीन ने बल दिया है स्किल डेवलपमेंट पर..! हमारे देश में और आज पूरी दुनिया में, आप ओबामा का भाषण सुनोगे तो भी स्किल डेवलपमेंट की बात करेंगे, यू.के. की लीडरशिप को सुनोगे तो वो भी स्किल डेवलपमेंट का कहेंगे, ईस्टर्न वर्ल्ड की ओर देखोगे तो वो भी स्किल डेवलपमेंट कहेंगे... हर तरफ यह चर्चा है..! और मित्रों, ये बात सही है कि हिन्दुस्तान अगर इतना नौजवान है तो सर्टिफिकेट से काम नहीं चलेगा। मेरे पास डबल एम.ए. का सर्टिफिकेट हो या ट्रिपल एम.ए. का हो, उससे बात नहीं बनती है, स्किल चाहिए..! और भाइयों-बहनों, हमारे कांग्रेस के मित्र तो हमें दिन-रात अखबारों में गालियाँ देते रहते हैं, लेकिन अभी पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री जी ने हमें एक अवॉर्ड दिया। स्किल डेवलपमेंट के अंदर हिन्दुस्तान में उत्तम से उत्तम इनोवेटिव काम करने के लिए गुजरात सरकार को प्रधानमंत्री का अवॉर्ड मिला है, दोस्तों..! भारत सरकार ने स्किल डेवलपमेंट के काम के लिए दो साल पहले एक कमेटी बना करे के उसे आउटसोर्स किया था, कि कोई ये बड़े बुद्घिमान लोग हैं और वो कुछ बना कर के देंगे, ऐसा कुछ..! तो दो साल हो गए, कुछ दिया नहीं किसी ने, आखिरकार गुजरात का जो कौशल्य वर्धन केन्द्र का जो मॉडल था, उसको भारत सरकार ने अडाप्ट कर लिया। हम कहते हैं कि भई, बाकी जगह पर खर्चा करने से पहले एक बार पूछ लिया करो..!

तीन बातों की ओर बल देने की आवश्यकता मैं समझता हूँ। और मैं समझता हूँ कि चाइना की स्पर्धा को हम अगर स्पर्धा के रूप में लेना चाहते हैं, तो भारत ने अपनी सोच में, अपनी योजना में, अपनी कल्पकता में तीन बातों को मूलभूत रूप से जोड़ना चाहिए। एक स्किल, दूसरा स्केल, और तीसरा स्पीड..! हम छोटा-छोटा करेंगे तो नहीं होगा, बहुत बड़ी मात्रा में सोचना चाहिए, बहुत विशाल फलक पर, बड़े कैनवास पर सोचना चाहिए..! हम क्या करते हैं कि 0.1% आगे जाएंगे, 0.2% आगे जाएंगे... कभी तो कहते हैं कि 0.001% आगे जाएंगे। इससे कुछ नहीं होता है, बहुत बड़ा सोचना चाहिए..! एक दिन प्रधानमंत्री जी से मेरी बात हो रही थी। मैंने कहा देखिए साहब, आखिरकार पूरे चीन की चर्चा कहीं नहीं हो रही है, वो भी दुनिया को दिखाते हैं तो शंघाई ही दिखाते हैं, पूरा चाइना थोड़े ही दिखाते हैं..! तो हमने कहा कि हमें भी व्यूहात्मक तरीके से पूरे विश्व के सामने अपनी ताकत दिखाने के लिए कुछ चीजें करनी चाहिए। ये 26 जनवरी को हमारे मिलिट्री पावर का ‘शो ऑफ स्ट्रेंथ’ क्या होता है..! क्या हमारी वो मिसाइल विजय चौक से निकले तभी देश सुरक्षित होता है क्या..? वो दुनिया को दिखाने के लिए होता है कि बेटे, हम भी दम वाले हैं..! इसीलिए तो होता है..! और हमारे लोगों का भी विश्वास बढ़ता है कि हमारे पास भी मिलीट्री पावर है..! और इसलिए 26 जनवरी को बहुत बड़ी परेड में हमारी ताकत का प्रदर्शन होता है। उसी प्रकार से बिजनेस वर्ल्ड में भी आवश्यकता होती है। तो मैंने प्रधानमंत्री से कहा कि साहब, एक छोटा सा काम कर दीजिए। अहमदाबाद-मुंबई हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन शुरू करवाइए..! उससे दुनिया को हमारी ताकत का परिचय होगा। वो कोई ट्रेन में बैठने के लिए आने वाला नहीं है..! हम भी कुछ कम नहीं हैं, वो भी दिखाना पड़ता है..! अभी मैंने एक सपना देखा है, मैं पूरा करूंगा उसको..! मैं एक ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ बनाना चाहता हूँ..! भारत को एक करने का भगीरथ काम किया था सरदार पटेल ने। उस सरदार पटेल की मुझे विशाल प्रतिमा खड़ी करनी है और उसको मैंने नाम दिया है ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’..! और ये ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ की क्या कल्पना है मेरी..? ये जो ‘स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी’ है, उससे इसकी साइज डबल होगी..! मित्रों, ये दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी, 182 मीटर्स, कोई साठ-पैंसठ मंजिला मकान से भी बड़े सरदार पटेल खड़े होंगे। और मित्रों, मैं देखना चाहता हूँ दुनिया उसके चरणों में आकर के बैठे..! ये मिजाज चाहिए..! हाँ, होता है, करते हैं, आता हूँ... आपके पास समाज के लिए कुछ करने का इरादा भी चाहिए और कठोर परिश्रम भी करना पड़ता है। साहस चाहिए, निर्णय करने का साहस चाहिए, तो आप स्थितियाँ बदल सकते हैं..! हमारे देश में गंगा और यमुना की सफाई के लिए पता नहीं क्या कुछ खर्च नहीं हुआ है..! और कित-कितने प्रधानमंत्री आकर के गए..! हमने एक छोटा सा काम किया है। छोटा सा ही प्रयास है, हमने साबरमती रीवरफ़्रन्ट बनाया। किसी समय हमारी साबरमति गंदे नाले जैसी थी, आज जा कर कोई देखे साहब, हिन्दुस्तान में पहला ये ऐसा प्रोजेक्ट हुआ है और सफल हुआ है। और काम ऐसा किया है कि उसका खर्चा निकल जाएगा। हम तो पक्के अहमदाबादी है ना, सिंगल फेयर डबल जर्नी..! मित्रों, कहने का तात्पर्य ये है कि हमें सचमुच में इन तीन बातों की ओर आग्रह से सोचना चाहिए। स्किल के विषय में कोई काम्प्रॉमाइज़ नहीं होना चाहिए। स्किल अपग्रेडेशन निरंतर होते रहना चाहिए। हमारे काम का स्केल बहुत बड़ा होना चाहिए, मित्रों..! अब जैसे हमने सोलर एनर्जी का किया। अब सोलर एनर्जी विषय ऐसा है कि कोई सोचता होगा कि भई, एक-दो मेगावाट, एक मॉडल खड़ा कर दें, फोटो-वोटो निकलवा के दुनिया को दिखा दो, यार..! हमने कहा, ऐसा नहीं हेागा। हमें दुनिया का सबसे बड़ा सोलर पार्क बनाना है। अगर मेरे गुजरात के पास इतना बड़ा रेगिस्तान है तो किस काम का..! उसी रेगिस्तान को हम ऊर्जावान क्यों नहीं बना सकते..? और मित्रों, आज एशिया का सबसे बड़ा सोलर पार्क हमने बना दिया। और जिस गति से हम काम कर रहे हैं, आने वाले दिनों में ये दुनिया का सबसे बड़ा सोलर प्लांट बनेगा..! अब सूरज कोई सिर्फ मेरे यहाँ ही होता है क्या..? कुछ नेता आजकल ऐसा भाषण करते हैं कि हम क्या करें, मोदी जी के पास ये भी है, मोदी जी के पास वो भी है, हमारे पास तो कुछ भी नहीं है..! अरे रोते ही बैठते हो यार, सूरज तो है ना..! तुम्हारे पास सूरज है कि नहीं है, तो करके दिखाओ ना..! किसी ने पर्दा तो लगाया नहीं तुम्हारे स्टेट में..! मित्रों, तय करना चाहिए किस प्रकार से काम करना है।

दूसरी बात है, पुराने जमाने में एक आदत लग गई थी, सबकुछ सरकार करेगी..! सरकार सब कब्जा करने में ही लगी हुई थी, बैंकों का राष्ट्रीयकरण करो, ट्रांसपोर्टेशन का, पता नहीं क्या कुछ कर दिया..! अब उन गलतियों को सुधारा गया और उसको रिफॉर्म कहा गया। ये भी बड़ा कमाल है देश में..! तुम कल तक बांई ओर जाते थे, गलत जा रहे थे, अब राइट जा रहे हो, तो ये कहो ना भाई, कि अपनी गलती ठीक की तुमने..! लेकिन नहीं कहेंगे, रिफॉर्म किया..! पहले ऐसा जाता था, अब ऐसे जा रहे हैं..! नहीं भाई, गलती की थी तुमने। और देश को तुम पैंतालिस साल तक उल्टे रास्ते पर ही ले गए थे..! और फिर भी अभी-अभी बीच में बम्प आते हैं, स्पीड ही नहीं आ रही है..! जब तक हम पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल की ओर नहीं जाते हैं, और मैं तो तीन ‘पी’ की जगह चार ‘पी’ की वकालत करता हूँ, ‘पीपीपीपी’..! सिर्फ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप नहीं, पीपल-पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप। इस ‘पी-फोर’ फार्मूला को लेकर हमें काम करना होगा और सौ करोड़ का देश है मित्रों, क्या सामर्थ्य पड़ा हुआ है देश में, एक बार उनको जोड़ दो तो दुनिया बदल जाएगी, दोस्तों..! और मैं ये कहने की हिम्मत इसलिए कर रहा हूँ क्योंकि गुजरात में हमने जिन चीजों को हाथ लगाया, ईश्चर की कृपा से हमें उन सारी चीजों में सफलता मिली है..! और इससे मुझे लगता है कि अगर कच्छ में हमारे यहाँ एग्रीकल्चर रेवोल्यूशन आ सकता है, तो मेरे देश में भी आ सकता है। आयन-ओर ना होने के बाद भी हम स्टील इंडस्ट्री को लीड कर सकते हैं, तो सारे देश में भी हो सकता है। लेकिन आज देश तो कोयले में डूबा हुआ है..! मुझे तो डर है कि कहीं सुप्रीम कोर्ट के हाथ काले ना हो जाएं..! सुप्रीम कोर्ट को इतना इन्टरवेन करना पड़े, हर चीज में सुप्रीम कोर्ट को डंडा चलाना पड़े और किसी को किसी पर विश्वास नहीं है मित्रों, देखिए आप, सी.बी.आई. के नाम की माला जपी जाती थी उस सी.बी.आई. को क्या बना कर रखा है आपने, क्या हालत करके रखी है..! सारी ये हमारी कन्सिट्यूशनल इंस्टीट्यूशन्स है उसको डीग्रेड किया जा रहा है। अगर हम हमारी वैधानिक संस्थाओं को, संवैधानिक संस्थाओं को सामर्थ्य नहीं देंगे तो व्यवस्थाएं खत्म हो जाएंगी, और लोकतंत्र में तो व्यवस्थाओं से ही चलता है, व्यक्ति आधारित लोकतंत्र नहीं होता है। व्यक्ति तो आएंगे और जाएंगे, लोकतंत्र की तो व्यवस्था ही ये है। लोकतंत्र व्यवस्था केंद्रित होना चाहिए, व्यक्ति केंद्रित नहीं होना चाहिए..! और जब तक आप आईडियाज़ को इंस्टीटूशनलाइज़ नहीं करते, तब तक आपको परिणाम नहीं मिलता है। गुजरात की सफलता का एक सबसे बड़ा रहस्य ये है कि गुजरात ने हर आइडिया को इंस्टीटूशनलाइज़ किया है। मोदी रहे या ना रहे, काम चलता रहेगा..! इन्डीविजुअल के व्हिम पर प्रदेश नहीं चल सकता, अगर वो इंस्टीटूशनलाइज़्ड है तो उसकी कमियों को भी ठीक करने की व्यवस्था उसमें से अपने आप पनपती है। अनुभव रहते ये इंस्टीट्यूशन जितनी स्ट्रॉंग बनती जाती है, उतना परिणाम भी ज्यादा अच्छा मिलता है। और ट्रांसपेरेंसी होनी चाहिए, अगर ट्रांसपेरेंसी है तो परिणाम भी अच्छा मिलता है..!

मित्रों, कहने को बहुत सारे विषय हैं। मैं कोई ज्यादा तय करके तो बोलता नहीं हूँ। आइए, गुजरात आपका है, स्वागत है..! आपकी आवाज मुझ तक पहुँच गई है। टेन्योर जनता देती है। आप अच्छा काम करो, तो टेन्योर जनता देगी..! जनता सब समझती है, उसके लिए कोई संविधान में लिखा नहीं होता है, टेन्योर जनता देती है। देखिए, फैडरल सिस्टम हमारी सबसे बड़ी ताकत है, उसको जरा भी खरोच नहीं आने देनी चाहिए। भारत की एकता और अखंडितता के लिए फैडरल स्ट्रक्चर की सैंक्टिटी हमारी प्राइम रिस्पॉन्सबिलिटी होनी चाहिए। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि आज दिल्ली में जो लोग बैठे हैं, वे फैडरल स्ट्रक्चर को हर बार कुछ ना कुछ नुकसान कर रहे हैं, और मैं मानता हूँ कि ये देश के लिए बहुत बड़ा खतरा है..! मित्रों, मैं समझता हूँ कि बहुत कुछ हो चुका है, काफी बातें हुई हैं..!

धोलेरा..! देखिए मित्रों, गुजरात में हम नए शहर बना रहे हैं। आपको भी मेरी प्रार्थना है अगर वैबसाइट पर आप ‘धोलेरा एसएलआर’, इस पर आप जाएंगे तो बहुत डीटेल मिलेगी। हम अहमदाबाद से 80 किलोमीटर दूर समुद्र तट की तरफ एक नया पूरा शहर बना रहे हैं, जहाँ पूरी तरह सारी व्यवस्थाएं होंगी। और वो कैसा शहर होगा..? जैसा मैंने कहा ना कि मेरा स्केल और स्पीड वाला मामला तो रहता ही है हर चीज में..! मित्रों, आज जो दिल्ली है, हजारों साल के बाद आज जो दिल्ली बना है, उसकी जो साइज है, ये हमारा जो नया धोलेरा बनेगा उसकी साइज दिल्ली से डबल है। आज जो शंघाई है, उस शंघाई से छह गुना ज्यादा बड़ा हमारा वो धोलेरा बनने वाला है..! तो मित्रों, उस लेवल पर हम सोच रहे हैं और हमें विश्वास है कि नए शहर बनेंगे, सामान्य मानवी की जो आवश्यकता है, व्यवस्था है उसको बल मिलेगा..!

हुत-बहुत धन्यवाद..! मैं चेम्बर के मित्रों का, मथुरादास भाई का, आपने मुझे यहाँ आने का अवसर दिया, मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूँ, धन्यवाद..!

 

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India and Korea together convey a message of peace and stability: PM Modi during the India-Republic of Korea Joint Press Meet
April 20, 2026

Your Excellency President Lee,

Distinguished delegates from both countries,
Friends from the media,

Namaskar!

It gives me great pleasure to welcome President Lee on his first visit to India. His life stands as an inspiring example of resilience, service, and dedication. Each challenge he has faced has further strengthened his resolve to serve the people. Although this is his first visit to India, his warmth and affinity for the country has been evident since our very first meeting.

Friends,

This visit of the President of Korea to India, after a gap of eight years, is of great significance. Democratic values, a market economy, and respect for the rule of law are deeply embedded in the DNA of both our nations. We also share a common outlook on the Indo-Pacific region. On the basis of these shared principles, our relationship has become more dynamic and wide-ranging over the past decade.

And today, with President Lee’s visit, we are set to transform this trusted partnership into a futuristic partnership. From chips to ships, from talent to technology, and from environment to energy, we will realize new opportunities for cooperation across all sectors. Together, we will ensure the progress and prosperity of both our nations.

Friends,

Bilateral trade between India and Korea has today reached twenty-seven billion dollars. We have taken several important decisions today to take this to fifty billion dollars by 2030.

To facilitate financial flows between the two countries, we have launched the India-Korea Financial Forum. To strengthen business cooperation, we have established an Industrial Cooperation Committee. To enhance collaboration in critical technologies and supply chains, we are initiating an Economic Security Dialogue.

To facilitate the entry of Korean companies, especially SMEs, into India, we will also establish a Korean Industrial Township. Furthermore, within the next year, we will upgrade the India-Korea Trade Agreement.

Friends,

Today, we are laying the foundation for the success stories of the next decade. To further deepen our partnership in AI, semiconductors, and information technology, we are launching the India-Korea Digital Bridge. We are also signing MoUs in sectors such as shipbuilding, sustainability, steel, and ports.

Through mutual cooperation in culture and the creative industries, we will also set new milestones in film, animation, and gaming. Today’s Business Forum will serve as a platform to translate these opportunities into tangible outcomes.

Friends,

India and Korea share cultural ties that go back thousands of years. The story of Princess Suriratna of Ayodhya and King Kim Suro of Korea, dating back two millennia, is a part of our shared heritage.

Today, K-pop and K-dramas are becoming highly popular in India. Similarly, the recognition of Indian cinema and culture is growing in Korea as well. We are delighted that President Lee himself is an admirer of Indian cinema. To further strengthen this cultural connect, we will organize the India-Korea Friendship Festival in 2028.

At the same time, to further strengthen people-to-people ties, we will also promote cooperation in education, research, and tourism.

Friends,

In this period of global tensions, India and Korea together convey a message of peace and stability. We are pleased that today Korea is joining the International Solar Alliance and the Indo-Pacific Oceans Initiative. Through our shared efforts, we will continue to contribute to a peaceful, progressive, and inclusive Indo-Pacific.

We also agree that reforms in global institutions are necessary to address contemporary global challenges.

Your Excellency,

Nearly a hundred years ago, India’s great poet, Rabindranath Tagore, referred to Korea as the "Lamp of the East.” Today, as we work towards realizing our vision of a developed India by 2047, Korea stands as an important partner in this journey.

Let us, through our partnership, pave the way for the progress and prosperity not only of our two nations, but of the entire world.

Thank you very much.