শেয়ার
 
Comments
These elections in Bihar will change the fortune of the state: PM Modi #ParivartanRally
Bihar will lead the world in second green revolution: PM Modi #ParivartanRally
NDA’s vision - electricity, water & roads for people, medicine for elderly, education & jobs for youth: PM #ParivartanRally
The 'Mahaswarthbandhan' is arrogant and deceitful: PM Narendra Modi #ParivartanRally
The 'Mahaswarthbandhan' has four players, one is Lalu yadav, second is Nitish Kumar, third is Sonia Ganghi & fourth 'Tantrik': PM
The more mud you spread, more the Lotus will bloom: PM Modi #ParivartanRally
Loktantrik Nitish Kumar & Tantrik Lalu Yadav must answer that who made migrants of the youth of Bihar: PM #ParivartanRally

मंच पर विराजमान केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्रीमान गिरिराज सिंह जी, सांसद श्रीमान लालन पासवान जी, श्रीमान विश्वनाथ भगत जी, श्रीमान सत्यानन्द शर्मा जी, श्रीमान राजीव रंजन जी, हम पार्टी के श्रीमान विश्वजीत पासवान जी, श्री रविशंकर प्रसाद जी, श्री पी सी विद्यार्थी जी, श्रीमान राजू पासवान जी, श्रीमान छोटेलाल राजवंशी जी, श्री प्रेम रंजन पटेल जी, श्री भूपेन्द्र सहनी जी और इस चुनाव में आपके आशीर्वाद से जो इस विजय यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं, लोजपा के उम्मीदवार श्रीमान अरूण कुमार, लोजपा के उम्मीदवार श्रीमति दीपिका कुमारी, मोकामा से लोजपा के उम्मीदवार श्रीमान कन्हैया कुमार सिंह, नालंदा से भाजपा के उम्मीदवार श्रीमान कौशलेन्द्र कुमार, इस्लामपुर से भाजपा के उम्मीदवार श्रीमान वीरेन्द्र गोप, बख्तियारपुर से भाजपा के उम्मीदवार श्रीमान रणविजय सिंह, राजगीर से भाजपा के उम्मीदवार श्रीमान सत्यदेव नारायण आर्य, बिहारशरीफ से भाजपा के उम्मीदवार श्रीमान सुनील कुमार, अफसावा से लोजपा के उम्मीदवार श्रीमान छोटेलाल यादव, मेरे साथ बोलिये – भारत माता की जय

मुझे समझ नहीं आ रहा है कि एक सभा है कि चार सभाएं हैं। इस ताप में आज नालंदा ने कमाल कर दिया। चुनाव का नतीज़ा तो 8 तारीख को आएगा और उसके बाद उनका क्या होगा, ये सब जानते हैं लेकिन आज इस सभा की ख़बर सुनने के बाद लोकतांत्रिक नीतीश जी का क्या होगा। भाईयों-बहनों, ये बिहार की जनता की सूझ-बूझ है, ये मतदाताओं का राजनीतिक बड़प्पन है कि ये बड़ी आसानी से दूध का दूध और पानी का पानी कर सकते हैं। एक प्रकार से बिहार के नागरिकों की सोच राजहंस जैसी सोच है जो सच्चे मोती को परखने में पावरफुल है। मैं अभी जो माहौल देख रहा हूँ, ये सिर्फ़ चुनाव के विजय का, लोकतांत्रिक नीतीश जी या लालू जी के पराजय का माहौल नहीं है, ये सोनिया जी को दर्पण दिखाने का माहौल नहीं है, बल्कि ये माहौल उन लोगों को सजा देने का है जिन्होंने 60 साल तक बिहार को बर्बाद किया।

बिहार की जनता यह चुनाव किसी को पराजित करने के लिए नहीं बल्कि बिहार का भाग्य बदलने के लिए लड़ रही है और उन्होंने बिहार का भाग्य बदलने का फैसला कर लिया है। ये ऐसा इलाक़ा है जहाँ चाहे कोई भी हो, उसे नालंदा का पता होता है कि इसका कितना गौरवशाली इतिहास रहा है। हिन्दुस्तान का कोई बच्चा ऐसा नहीं होगा जिसने नालंदा के बारे में कभी सुना नहीं हो। आप कल्पना कर सकते हैं कि कितनी महान विरासत के आप धनी हैं जिस बिहार के पास नालंदा जैसी विरासत हो और जिस विरासत के कारण पूरा हिन्दुस्तान सदियों से सीना चौड़ा करके जी रहा हो, आजादी के बाद उस नालंदा की चिंता होनी चाहिए थी लेकिन सत्ता में डूबे लोगों को नालंदा की याद नहीं आई।

पूरा विश्व नालंदा की धरती पर ज्ञान की प्यास बुझाने आता था। दूर-सुदूर से लोग सालों तक यात्रा करके नालंदा आते थे और आखिरी तक ज्ञान पिपासा के लिए वो यही तक डूबे रहते थे लेकिन क्या हो गया जो नालंदा की यह धरती दुनिया को ज्ञान देती थी, बिहार के नौजवान को पढ़ने के लिए कहीं और जाना पड़ता है। शिक्षा के लिए उसे अपना नालंदा छोड़ना पड़ता है अपना गाँव, खेत-खलिहान, दोस्तों और अपने बूढ़े मां-बाप को छोड़ना पड़ता है। लोकतांत्रिक नीतीश जी को लगता है कि अब बिहार को सिर्फ़ तांत्रिक बचा सकता है। बिहार को तांत्रिकों की जरुरत नहीं है, इसे लोकतंत्र की ताकत ही बचा सकती है। बिहार के नौजवान में वो ताकत है और इसलिए बिहार को बचाने के लिए किसी जंतर-मंतर की जरुरत नहीं है।

आप बताएं कि बिहार के चुनाव का मुद्दा क्या होना चाहिए? लेकिन उनके भाषण में देखिए, कहते हैं, हम सफ़ेद कबूतर को काटेंगे, काले कबूतर को काटेंगे, क्या ये चुनाव का मुद्दा है? लोग पूछते हैं कि मोदी जी, नवराति के कारण पिछले 10 दिन आप बिहार गये नहीं, फिर भी नीतीश जी, लालू जी, दिन-रात आप पर कीचड़ क्यों उछाल रहे हैं, आप ही के पीछे क्यों पड़ गए हैं? इसका कारण है कि पिछले 20 साल से ये अगड़े-पिछड़े की राजनीति करते रहे, वे पिछड़ों के मसीहा बन गए, जातिवाद का जहर घोलते रहे और ये सपने देख रहे थे कि हम जो ये जहर लेकर निकले हैं, कभी न कभी हम प्रधानमंत्री बन जाएंगे। अब उनको परेशानी ये है कि 30 साल तक वे ये सब करते रहे और अचानक अति पिछड़ा और एक चाय वाले का बेटा प्रधानमंत्री कैसे बन गया। ये जहर इस बात का है कि एक गरीब परिवार का बेटा प्रधानमंत्री कैसे बन गया और इसलिए ये सभी मुझे अपमानित करते रहते हैं लेकिन मेरा कहना है कि आप जुल्म करके देखो, जनता हमारे साथ है और हम सेवा करके देखेंगे।

आजकल आरक्षण के नाम पर झूठ चलाया जा रहा है। मैं गुजरात में 14 साल मुख्यमंत्री रहा, मध्यप्रदेश में हम 15 साल से राज कर रहे हैं, हम झारखंड, छतीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र, गोवा, हरियाणा में राज कर रहे हैं, किसी भी आरक्षण को कोई खरोच तक नहीं आई। हमने समाज को हमेशा साथ लेकर चलने का प्रयास किया है दलित, पीड़ित, शोषित और वंचित, जिन्हें बाबा अम्बेडकर ने हक़ दिया है, उन्हें हम साथ लेकर चलते रहे हैं। हमने गरीबी और पिछड़ापन देखा है, इस परिस्थिति में कैसे गुजारा करना पड़ता है, इस दर्द को मैं जी चुका हूँ और इसलिए उसकी रक्षा के लिए बाबा अम्बेडकर ने जो दिया है, उसको कोई हाथ नहीं लगा सकता है।

अटल जी की सरकार इतने समय रही, कभी ऐसा हमने हाथ नहीं लगाया लेकिन वे झूठा प्रचार कर रहे हैं क्योंकि उनके पास विकास का मुद्दा नहीं है। इस चुनाव में उनको इस प्रकार की चीज़ें बनानी पड़ती है। ये पहला चुनाव ऐसा है जिसमें ये बड़े भाई-छोटे भाई ने 80 प्रतिशत चुनाव आउटसोर्स कर दिया है और ये आउटसोर्स हुआ है दिल्ली में। दिल्ली के एयर-कंडिशन्ड रूम में रोज नई-नई कथाएं गढ़ने वाले, भ्रम फ़ैलाने वाले और झूठ को प्रचलित करने वाला एक कॉन्ट्रैक्ट दिया है। सिर्फ़ 20 प्रतिशत ही चुनाव उनका बिहार में बचा है, 80 प्रतिशत वे आउटसोर्स कर चुके हैं। लोगों को भ्रमित करने का प्रयास करके ही ये खुद को भ्रमित कर रहे हैं। मैं बिहार का पानी पीता-पीता घूम रहा हूँ, मैं देख रहा हूँ कि ये जन सैलाब भाजपा और एनडीए की विजय का बिगुल बजा रहा है।

आप बताएं कि आज पूरे विश्व में हिन्दुस्तान का डंका बज रहा है कि नहीं? अमेरिका, जर्मनी, कनाडा, चीन, चारों तरफ हिन्दुस्तान की जय-जयकार हो रही है कि नहीं? ये मोदी के कारण नहीं हो रहा है बल्कि ये सवा सौ करोड़ देशवासियों के कारण हो रहा है। आज अगर दिल्ली में आपने हमें पूर्ण बहुमत नहीं दिया होता तो दुनिया में हिन्दुस्तान का डंका नहीं बज सकता था। ये डंका इसलिए बजता है क्योंकि देशवासियों ने 30 साल के बाद दिल्ली में पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाई है। दुनिया में कितना ही महान और ताक़तवर देश क्यों न हो, लेकिन उसका नेता जब मोदी से हाथ मिलाता है तो उसे मोदी नहीं बल्कि सवा सौ करोड़ हिन्दुस्तानी दिखाई देते हैं।

अगर आप बिहार का डंका बजाना चाहते हो तो दो-तिहाई बहुमत के साथ एनडीए की सरकार बनाईए। आप देखिये कि दुनिया को बिहार का लोहा मानना पड़ेगा, ये मेरा आपको विश्वास है। इस चुनाव में एक तरफ हम विकास की राजनीति लेकर आए हैं और दूसरी तरफ जंगलराज की राजनीति की बगावत हो रही है। आपको चुनना है कि आपको कौन सी राजनीति चाहिए। बड़े भाई-छोटे भाई ने 25 साल सरकार चलाई, उनको अपने काम का हिसाब देना चाहिए कि नहीं? इनके पास एक ही काम है – बस मोदी को गाली देना, क्या लोकतंत्र ऐसे चलता है?

जहाँ तक रही बात महास्वार्थबंधन की तो मैं सोच रहा था कि इसमें तीन लोग हैं, एक लालू जी, दूसरे लोकतांत्रिक नीतीश कुमार, तीसरे सोनिया जी लेकिन अब पता चला कि ये तीन लोगों का गठबंधन नहीं है, ये चार लोगों का गठबंधन है, एक है आरजेडी, दूसरा है जेडीयू, तीसरी है कांग्रेस, और चौथा है तांत्रिक। 18वीं सदी की सोच लेकर के 21वीं सदी का बिहार बनाया जा सकता है क्या? क्या जंतर-मंतर से बिहार बनेगा क्या? बिहार को इस 18वीं सदी की सोच से मुक्ति दिलानी है, आधुनिक दिशा में जाना है। हमें जंतर-मंतर नहीं बल्कि कंप्यूटर चाहिए; हमारे नौजवानों के हाथ में लैपटॉप होना चाहिए न कि ताबीज। इसलिए मैं कहने आया हूँ कि हम बिहार को अगड़ा बनाना चाहते हैं। ये पिछड़ा बिहार का कलंक हमें मिटाना है और मैं अगड़े बिहार की लड़ाई के लिए आपके साथ खड़ा हूँ।

हमने 1 लाख 25 हज़ार करोड़ रूपये का विकास पैकेज दिया। लालू जी के युवराज को कहा जाए कि 1 लाख 25 हज़ार करोड़ रूपये लिखो, तो उसमें कितने जीरो होते हैं, उन्हें ये भी नहीं पता। जिनको 1 लाख 25 हज़ार करोड़ रूपया लिखना नहीं आता, वे इतने पैसों से विकास कार्य कर पाएंगे क्या? हमने कुल मिलाकर 1 लाख 65 हज़ार करोड़ रूपये का विकास पैकेज दिया, इससे बिहार का भाग्य बदलेगा कि नहीं?

हमारे लोकतांत्रिक नीतीश कुमार कहते हैं कि ये गठबंधन बहुत पवित्र है। नीतीश कुमार ने लालू जी को एक चिट्ठी लिखी थी। नीतीश कुमार ने लालू जी पर भ्रष्टाचार जातिवाद, संप्रदायवाद, कुशासन के कितने गंभीर आरोप लगाए थे। इन दोनों को पहचानने के लिए इससे ज्यादा किसी और सबूत की जरुरत है क्या? महास्वार्थबंधन की तीन पहचान है – दंभ, दगा और दमन यही इनकी पहचान है। बिहार में दमन की राजनीति का दौर ख़त्म। आज बिहार के नौजवानों और नागरिकों से मैं अनुरोध करने आया हूँ कि आप विकास के लिए मतदान कीजिये।

बिहार के लिए विकास का मेरा छह-सूत्रीय कार्यक्रम है – बिहार राज्य की भलाई के लिए तीन सूत्र है, बिजली, पानी एवं सड़क; बिहार के परिवारों के लिए तीन सूत्र है, पढ़ाई, कमाई और बुजुर्गों को दवाई। मेरे भाईयों-बहनों, विकास के इस छह-सूत्रीय कार्यक्रम को लेकर मैं आपके पास आया हूँ। लोकतांत्रिक नीतीश कुमार कहते हैं कि मोदी बाहरी हैं। मैं उनसे पूछना चाहता हूँ कि बिहार के नौजवानों को बिहार से बाहर किसने धकेल दिया, उन्हें किसने मजबूर किया? आपने मेरे बिहार के नौजवान को बाहरी बना दिया है। हम बिहार के नौजवानों को बाहरी बनाना नहीं चाहते, वो बिहार के भाग्य निर्माता बनें, हम इस दिशा में काम करना चाहते हैं। यहाँ उद्योग-धंधे हो, रोजगार के अवसर हों और इसलिए मेरे नौजवानों, पूरी ताकत से मतदान कीजिये, 25 साल से बैठे कुशासकों को भयंकर से भयंकर सजा दीजिए।

हिमालय में जब बर्फबारी होती है तो बिहार में तुरंत ठंड आती है। जो हिमालय में होता है, उसका असर बिहार पर तुरंत होता है। अभी कुछ दिनों पहले जम्मू-कश्मीर, लेह-लद्दाख में चुनाव में बाकि सभी राजनीतिक पार्टियां साफ़ हो गई अकेली भाजपा रह गई। जिस कांग्रेस के पास 22 सीटें थी, वो 5 पर आ गई। ये विजय की हवा बह रही है जो बिहार में भी पहुँच गई है। लद्दाख दिवाली माना रहा है और इस बार 8 तारीख को बिहार दो-दो दिवाली मनाएगा। लालू जी और नीतीश जी समझ लें कि आप जितना कीचड़ उछालोगे, कमल उतना ही ज्यादा खिलने वाला है। मेरे साथ दोनों मुट्ठी बंद करके पूरी ताकत से बोलिये -   

भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!       

बहुत-बहुत धन्यवाद!

Pariksha Pe Charcha with PM Modi
Explore More
আমাদের ‘চলতা হ্যায়’ মানসিকতা ছেড়ে ‘বদল সাকতা হ্যায়’ চিন্তায় উদ্বুদ্ধ হতে হবে: প্রধানমন্ত্রী

জনপ্রিয় ভাষণ

আমাদের ‘চলতা হ্যায়’ মানসিকতা ছেড়ে ‘বদল সাকতা হ্যায়’ চিন্তায় উদ্বুদ্ধ হতে হবে: প্রধানমন্ত্রী
Over 17.15 crore Covid-19 vaccine doses given to states, UTs for free: Govt

Media Coverage

Over 17.15 crore Covid-19 vaccine doses given to states, UTs for free: Govt
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
শেয়ার
 
Comments
At this moment, we have to give utmost importance to what doctors, experts and scientists are advising: PM
Do not believe in rumours relating to vaccine, urges PM Modi
Vaccine allowed for those over 18 years from May 1: PM Modi
Doctors, nursing staff, lab technicians, ambulance drivers are like Gods: PM Modi
Several youth have come forward in the cities and reaching out those in need: PM
Everyone has to take the vaccine and always keep in mind - 'Dawai Bhi, Kadai Bhi': PM Modi

আমার প্রিয় দেশবাসী, নমস্কার, আজ আপনাদের সঙ্গে ‘মন কি বাত’ এমন এক সময় করছি যখন করোনা আমাদের সবার ধৈর্য ও আমাদের সবার দুঃখ সহ্য করার সীমার পরীক্ষা নিচ্ছে। আমাদের অনেক নিজেদের লোক অসময়ে আমাদের ছেড়ে চলে গেছেন । করোনার প্রথম ঢেউ সাফল্যের সঙ্গে মোকাবিলা করার পরে দেশ আত্মবিশ্বাসে ভরপুর হয়ে উঠেছিল, কিন্তু এই তুফান দেশকে নাড়িয়ে দিয়েছে। বন্ধুরা, বিগত দিনে এই সংকটের সঙ্গে মোকাবিলা করার জন্য আমরা বিভিন্ন দপ্তরের বিশেষজ্ঞের সঙ্গে দীর্ঘ আলোচনা করেছি। আমাদের ওষুধ প্রস্তুতকারক শিল্পের লোকেরা হোক, টিকা উৎপাদকরা হোক, অক্সিজেনের উৎপাদনের সঙ্গে যুক্ত লোকেরাই হোক বা চিকিৎসা জগতের অভিজ্ঞরা, নিজেদের গুরুত্বপূর্ণ পরামর্শ সরকারকে দিয়েছেন। এই সময় আমাদের এই লড়াই জেতার জন্য বিশেষজ্ঞ আর বৈজ্ঞানিক পরামর্শকে অগ্রাধিকার দিতে হবে। রাজ্য সরকারের প্রচেষ্টাকে এগিয়ে নিয়ে যাবার জন্য ভারত সরকার সম্পূর্ণ শক্তি দিয়ে পাশে দাঁড়িয়েছে। রাজ্য সরকারগুলিও নিজেদের দায়িত্ব পালন করার চেষ্টা চালিয়ে যাচ্ছে। বন্ধুরা, করোনার বিরুদ্ধে এই সময় দেশের ডাক্তার আর স্বাস্থ্যকর্মীরা অনেক বড় লড়াই করে যাচ্ছেন। বিগত এক বছরে ওঁদের এই অসুখ নিয়ে সব রকমের অভিজ্ঞতা হয়েছে। এই সময় মুম্বাইয়ের বিখ্যাত ডাক্তার শশাঙ্ক যোশী জি আমাদের সঙ্গে রয়েছেন। ডাক্তার শশাঙ্ক জির করোনার চিকিৎসা আর এর সঙ্গে যুক্ত গবেষণার তৃণমূলস্তরে অভিজ্ঞতা আছে। তিনি ইন্ডিয়ান কলেজ অফ ফিজিশিয়ানস এর ডিন ছিলেন। আসুন কথা বলি ডাক্তার শশাঙ্কের জি সঙ্গে:-
মোদিজী - নমস্কার ডাক্তার শশাঙ্ক জি
ডাক্তার - নমস্কার স্যার।
মোদিজী - কিছুদিন আগেই আপনার সঙ্গে কথা বলার সুযোগ হয়েছিল। আপনার মতামতের স্পষ্টতা আমার খুব ভালো লেগে ছিল। আমার মনে হয়েছে দেশের সমস্ত নাগরিকের আপনার মতামত জানা প্রয়োজন। যেসব কথা শুনতে পাই, সেগুলোই একটি প্রশ্নের আকারে আপনার সামনে তুলে ধরছি। ডাক্তার শশাঙ্ক আপনারা এই সময় দিন রাত জীবন রক্ষার কাজে নিযুক্ত আছেন। সবার আগে আমি চাইবো যে আপনি দ্বিতীয় ঢেউএর বিষয়ে সবাইকে বলুন। চিকিৎসার দিক থেকে এটা কিভাবে আলাদা। আর কি কি সাবধানতা জরুরি।
ডাক্তার শশাঙ্ক - ধন্যবাদ স্যার, এই যে দ্বিতীয় ঢেউ এসেছে, এটা দ্রুততার সঙ্গে এসেছে। যতটা প্রথম ঢেউ ছিল তার থেকে এই ভাইরাস বেশি দ্রুততার সঙ্গে বেড়ে চলেছে। কিন্তু ভালো কথা এই যে তার থেকেও দ্রুত গতিতে সুস্থও হচ্ছে আর মৃত্যু হার অনেক কম। এর মধ্যে দু'তিনটে তফাৎ আছে। প্রথমত, এটা যুবক যুবতীদের আর বাচ্চাদের মধ্যেও অল্প দেখা দিচ্ছে, । প্রথমে যেমন লক্ষণ ছিল শ্বাসকষ্ট, শুকনো কাশি, জ্বর সেগুলো তো সব আছেই । তার সঙ্গে গন্ধ পাওয়া, স্বাদ না থাকাও আছে। আর লোকেরা একটু ভয়ে আছেন। ভীতসন্ত্রস্ত হওয়ার কোন প্রয়োজন নেই ৮0 থেকে ৯0 শতাংশ লোকের মধ্যে এগুলির কোন লক্ষণ দেখা যাচ্ছে না। এই মিউটেশন - মিউটেশন যা বলা হচ্ছে ঘাবড়ানোর কিছু নেই। এই মিউটেশন হতেই থাকে যেভাবে আমরা জামা কাপড় বদলাই সেই ভাবেই ভাইরাস নিজের রং বদলাচ্ছে। আর সেই জন্যেই একেবারেই ভয় পাওয়ার কিছু নেই। আমরা এই ঢেউটাও পার হয়ে যাব। ওয়েভ আসে যায়, আর এই ভাইরাস আসা যাওয়া করতে থাকে। তো এটাই আলাদা আলাদা লক্ষণ। আর চিকিৎসার দিক থেকে আমাদের সতর্ক থাকতে হবে। ১৪ থেকে ২১ দিনের এইযে কোভিডের টাইম টেবিল আছে। এই সময়ের মধ্যেই ডাক্তারি পরামর্শ নেওয়া জরুরি।
মোদিজী- ডাক্তার শশাঙ্ক, আমার জন্য আপনি যে বিশ্লেষণ করে বলেছিলেন তা খুবই উৎসাহজনক। আমি অনেক চিঠি পেয়েছি। যার মধ্যে চিকিৎসার বিষয়েও মানুষের মধ্যে অনেক আশঙ্কা আছে। কিছু ওষুধের চাহিদা খুব বেশি। এজন্য আমি চাই যে কোভিডের চিকিৎসার ব্যাপারেও আপনি অবশ্যই লোকেদের বলুন।
ডাক্তার শশাঙ্ক - হ্যাঁ স্যার, ক্লিনিক্যাল ট্রিটমেন্ট লোকেরা অনেক দেরিতে শুরু করেন। মনে করেন নিজে থেকেই রোগ সেরে যাবে। এই ভরসাতেই থাকেন। আর মোবাইলে আসা বার্তা উপর ভরসা রাখেন। অথচ যদি সরকারি নির্দেশ পালন করেন তাহলে এই কঠিন পরিস্থিতির সম্মুখীন হতে হয় না। কোভিডে ক্লিনিক ট্রিটমেন্ট প্রটোকল আছে, যার মধ্যে তিন রকমের তীব্রতা আছে। হালকা বা মাইল্ড কোভিড, মধ্যম বা মডারেট কোভিড, আর তীব্র বা Severe কোভিড। যেটা হালকা কোভিড, সেটার জন্য আমরা অক্সিজেনের মনিটরিং করে থাকি। পালসের মনিটরিং করে থাকি, জ্বরের মনিটরিং করে থাকি, জ্বর বেড়ে গেলে কখনো কখনো প্যারাসিটামল এর মত ওষুধের ব্যবহার করে থাকি। আর নিজেদের ডাক্তারের সঙ্গে যোগাযোগ করা উচিত। যদি মডারেট কোভিড হয়ে থাকে, মধ্যম কোভিড হোক বা তীব্র গভীর হোক, সেক্ষেত্রে ডাক্তারি পরামর্শ নেওয়া খুবই জরুরী। সঠিক এবং সস্তা ওষুধ পাওয়া যাচ্ছে। এরমধ্যে স্টেরয়েড আছে সেটা প্রাণ বাঁচাতে পারে, যেটা ইনহেলার দিতে পারে। ট্যাবলেটও দেওয়া যেতে পারে। আর এর সঙ্গেই প্রাণবায়ু ౼ অক্সিজেন সেটাও দিতে হয়। আর এই জন্য ছোট ছোট চিকিৎসা আছে। কিন্তু সচরাচর যেটা হচ্ছে, একটা নতুন পরীক্ষামূলক ওষুধ আছে, যার নাম রেমডেসিভির। এই ওষুধে অবশ্যই একটা জিনিস হয়, সেটা হল হাসপাতালে দু-তিনদিন কম থাকতে হয়। আর সুস্থ হওয়ার ক্ষেত্রে অল্পবিস্তর সাহায্য পাওয়া যায়। আর এই ওষুধ কখন কাজ করে, যখন প্রথমে ৯ থেকে ১0 দিনে দেওয়া হয়ে থাকে। আর এটা পাঁচদিনই দিতে হয়। এই যে লোকেরা রেমডিসিভিরের পেছনে দৌড়চ্ছে, এর কোনো দরকার নেই। এই ওষুধটার কাজ অল্পই। যাঁদের অক্সিজেনের প্রয়োজন হয়, যারা হাসপাতালে ভর্তি হন, আর ডাক্তার যখন বলেন তখন নিতে হয়। তাই এটা সবাইকে বোঝানো খুবই জরুরী। আমরা প্রাণায়াম করব, আমাদের শরীরে যে Lungs আছে সেটাকে একটু এক্সপ্যান্ড করব, আর আমাদের রক্ত পাতলা করার যে ইনজেকশন আছে যেটাকে আমরা হেপারিন বলে থাকি। এইসব ছোট ছোট ওষুধ দিলে ৯৮% লোক ঠিক হয়ে যান। তাই পজিটিভ থাকা অত্যন্ত জরুরী। ট্রিটমেন্ট প্রোটোকলে ডাক্তারের পরামর্শ নেওয়া খুবই জরুরী। আর যেসব দামি দামি ওষুধ আছে, সেগুলির পিছনে দৌড়ানোর কোন প্রয়োজন নেই। স্যার, আমাদের কাছে ভালো চিকিৎসা ব্যবস্থা আছে। প্রাণবায়ু অক্সিজেন আছে। ভেন্টিলেটরেরও সুবিধা আছে। সবকিছুই আছে স্যার। আর কখনো কখনো যদি এই ওষুধ পাওয়া যায় তাহলে চাহিদাসম্পন্ন লোকেদেরই দেওয়া উচিত। তাই এই বিষয়ে অনেক ভুল ধারণা আছে। আর এর জন্য স্পষ্ট করে বলতে চাই স্যার যে আমাদের কাছে বিশ্বের সবথেকে ভাল চিকিৎসার ব্যবস্থা আছে। আপনি দেখবেন সুস্থতার হার ভারতে সবথেকে ভালো আপনি যদি ইউরোপের সঙ্গে তুলনা করেন। আমেরিকাতে রোগী সেরে উঠছেন আমাদের ট্রিটমেন্ট প্রটোকলে স্যার।
মোদিজী - ডাক্তার শশাঙ্ক আপনাকে অনেক অনেক ধন্যবাদ। ডাক্তার শশাঙ্ক আমাদের যা জানালেন তা অত্যন্ত জরুরী এবং আমাদের সব কাজে লাগবে। বন্ধুরা আমি আপনাদের সকলের কাছে অনুরোধ করছি, আপনাদের যদি যেকোনো তথ্য জানার থাকে, আর কোনো আশংকা থাকে তাহলে সঠিক সুত্র থেকে জেনে নেবেন। আপনাদের যে পারিবারিক চিকিৎসক আছেন, আশেপাশের যে ডাক্তার আছেন আপনারা তাদের ফোন করে যোগাযোগ করুন। এবং সঠিক পরামর্শ নিন। আমি দেখতে পাচ্ছি যে আমাদের অনেক ডাক্তারই নিজেরাই এই দায়িত্ব নিচ্ছেন। অনেক ডাক্তার সোশ্যাল মিডিয়ার মাধ্যমে লোকেদের সচেতন করছেন। ফোনে, হোয়াটসঅ্যাপেও কাউন্সেলিং করছেন। অনেক হাসপাতালের ওয়েবসাইট আছে সেখানে এই সংক্রান্ত বিষয়ে জানার ব্যবস্থা আছে। আর সেখানে আপনারা ডাক্তারের পরামর্শও নিতে পারবেন। এটা খুবই প্রশংসনীয়। আমার সঙ্গে শ্রীনগর থেকে ডাক্তার নাবিদ নাজির শাহ্ রয়েছেন। ডাক্তার নাবিদ শ্রীনগরের এক সরকারী মেডিকেল কলেজের প্রফেসর। নবীদ জি নিজের তত্ত্বাবধানে অনেক করোনা পেশেন্টকে সারিয়ে তুলেছেন। আর রমজানের এই পবিত্র মাসে ডাক্তার নাবিদ নিজের কর্তব্য পালন করছেন। তিনি আমার সঙ্গে কথা বলার জন্য সময় বের করেছেন। আসুন ওঁর সঙ্গে কথা বলি।
মোদিজী - নাবিদ জি নমস্কার।
নাবিদ - নমস্কার স্যার।
মোদিজী - ডাক্তার নাবিদ ‘’মন কি বাত’’ এর আমাদের শ্রোতারা এই কঠিন সময়ে প্যানিক ম্যানেজমেন্টের বিষয়ে জানতে চেয়েছেন। আপনি আপনার অভিজ্ঞতা থেকে তাঁদের কি পরামর্শ দেবেন ?
নাবিদ - দেখুন যখন করোনা শুরু হয়েছিল, তখন কাশ্মীরে যে প্রথম কোভিড হসপিটাল হিসেবে চিহ্নিত হয়েছিল সেটা ছিল আমাদের সিটি হসপিটাল। যেটা আসলে মেডিকেল কলেজের অধীনে। সে সময়টা এক ভয়ের পরিবেশ ছিল। কোভিডের সংক্রমণ হলেই লোকেরা মনে করতেন তাঁদের মৃত্যদণ্ড দেওয়া হয়েছে। আর এর ফলে আমাদের হাসপাতালের চিকিৎসক মহল এবং প্যারা মেডিকেল কর্মীদের মধ্যেও ভয়ের সঞ্চার হয়েছিল যে তাঁরা এই রোগীদের কিভাবে চিকিৎসা করবে? সংক্রমণ হওয়ার মত বিপদ নেই তো! কিন্তু যেমন যেমন সময় এগিয়েছে, আমরাও দেখলাম যে, যদি সম্পূর্ণভাবে আমরা সুরক্ষা সংক্রান্ত পোষাক পরি এবং সুরক্ষা বিধি মেনে চলি তাহলে আমরাও সুরক্ষিত থাকতে পারবো। আর আমাদের যে বাকি কর্মীরা আছেন তারাও সুরক্ষিত থাকতে পারেন। আর এর পরে আমরা দেখতে পেলাম রোগী বা কিছু লোক অসুস্থ ছিলেন যাঁরা উপসর্গ হীন, যাদের মধ্যে রোগের কোনো লক্ষণ ছিল না। আমরা দেখলাম ৯0 থেকে ৯৫ শতাংশের বেশি সমস্ত রোগী কোনো ওষুধ ছাড়াই সুস্থ হয়ে উঠেছেন। প্রাথমিক পর্যায়ে মানুষের মধ্যে করোনার যে ভয় ছিল সময়ের সঙ্গে সঙ্গে সেটা অনেক কমে গিয়েছে। আজ যখন করোনার এই দ্বিতীয় ঢেউ এসেছে তখনও আমাদের আতঙ্কিত হওয়ার প্রয়োজন নেই। এই সময়েও যে সুরক্ষা বিধি আছে আর মান্য বিধি আছে, যদি সেগুলো ওপর আমরা গুরুত্ব দিই, যেমন মাস্ক পরা, হাতে স্যানিটাইজার ব্যবহার করা, এ ছাড়াও শারীরিক দূরত্ব বজায় রাখা বা জমায়েত এড়িয়ে যেতে পারি তাহলে আমরা আমাদের দৈনন্দিন কাজকার্মও খুব ভালোভাবে করে যেতে পারব। তাহলে এই রোগের হাত থেকে সুরক্ষিত থাকতে পারবো।
মোদিজী - ডাক্তার নাবিদ, টিকার ব্যাপারেও মানুষের মধ্যে নানা রকম প্রশ্ন আছে যেমন টিকার মাধ্যমে কতটা সুরক্ষা পাওয়া যাবে ? টিকা নেওয়ার পর কতটা নিশ্চিন্ত থাকতে পারবো? আপনি এ প্রসঙ্গে কিছু বলুন যাতে শ্রোতাদের উপকার হয়।
ডাক্তার নাবিদ - যখন করোনার সংক্রমণের সন্মুখিন হলাম, তখন থেকে আজ পর্যন্ত আমাদের কাছে কোভিড-19 এর সঠিক কার্যকরী চিকিৎসা পদ্ধতি নেই। ফলে আমরা দুটো জিনিস দিয়ে এই রোগের বিরুদ্ধে লড়াই করতে পারি। একটা রোগ প্রতিরোধ ব্যবস্থা, আর আমরা প্রথম থেকেই বলে আসছি যে যদি কোন যথাযথ টিকা আমাদের কাছে আসে তাহলে সেটা আমাদের এই রোগের হাত থেকে মুক্তি দিতে পারে। আর এখন আমাদের দেশে দুটো টিকা এইসময় আছে, কোভ্যাকসিন এবং কোভিশিল্ড। যেগুলো এখানেই তৈরি হওয়া ভ্যাকসিন। কোম্পানিগুলো যখন পরীক্ষা নিরীক্ষা করেছে, তখন দেখা গেছে যে সেগুলির কার্যকারিতা ৬০% এর বেশি। আর যদি আমরা জম্মু- কাশ্মীরের কথা বলি তাহলে আমাদের এই কেন্দ্রশাসিত অঞ্চলে এখনো পর্যন্ত ১৫ থেকে ১৬ লক্ষ মানুষ এই টিকা নিয়েছেন। হ্যাঁ সোশ্যাল মিডিয়াতে অনেক ভ্রান্ত ধারণা বা গুজব ছড়ান হয়েছে যে এগুলোর পার্শ্ব প্রতিক্রিয়া আছে। কিন্তু এখনো পর্যন্ত আমাদের এখানে যে সমস্ত টিকা প্রয়োগ হয়েছে সেখানে কোন পার্শ্ব প্রতিক্রিয়া পাওয়া যায়নি। সাধারণত টিকা নেওয়ার পর কারও জ্বর আসা, সারা শরীর ব্যথা বা লোকাল সাইড অর্থাৎ ইনজেকশনের জায়গায় ব্যথা হওয়া এমনই পার্শ্ব প্রতিক্রিয়া আমরা প্রত্যেকের মধ্যে দেখেছি। তেমন কোনো বিরূপ প্রতিক্রয়া আমরা দেখি নি। আর হ্যাঁ, দ্বিতীয় কথা মানুষের মধ্যে এই আশঙ্কাও ছিল যে কিছু লোক টিকাকরণের পরে পজিটিভ হয়েছেন। সেখানে কোম্পানী থেকেই বলা ছিল টিকাকরণের পরেও সংক্রমণের সম্ভাবনা থাকতে পারে এবং পজেটিভ হতে পারে। কিন্তু সেক্ষেত্রে রোগের ভয়াবহতা কম থাকবে। অর্থাৎ তিনি পজেটিভ হতে পারেন কিন্তু জীবনহানির আশংকা কম। তাই টিকাকরণ নিয়ে ভ্রান্ত ধারণা মাথা থেকে সরিয়ে ফেলা উচিত। পয়লা মে থেকে আমাদের সমগ্র দেশে যাদের ১৮ বছরের বেশি বয়স তাদের ভ্যাকসিন দেওয়ার কর্মসূচি শুরু হবে। তাই সবার কাছে এটাই আবেদন করব যার যখন সময় আসবে, আপনারা আসুন টিকা নিন এবং নিজেকেও রক্ষা করুন। আর সামগ্রিকভাবে আমাদের সমাজ ও আমাদের এলাকা এর ফলে কোভিড ১৯ র সংক্রমণ থেকে সুরক্ষিত হয়ে উঠবে।
মোদিজী - ডাক্তার নাবিদ আপনাকে অনেক অনেক ধন্যবাদ। এবং আপনাকে রমজানের পবিত্র মাসে অনেক অনেক শুভকামনা জানাই।
ডাক্তার নাবিদ - অনেক অনেক ধন্যবাদ।
মোদিজী - বন্ধুগণ করোনার এই সংকটকালে ভ্যাকসিনের গুরুত্ব সকলেই উপলব্ধি করতে পারছেন। এর জন্য আমি চাই যে ভ্যাকসিন নিয়ে কোনরকম অপপ্রচারে কান দেবেন না। আপনারা সকলেই জানেন যে ভারত সরকারের তরফ থেকে সমস্ত রাজ্য সরকারকে ফ্রি ভ্যাক্সিন পাঠানো হয়েছে যার সুফল ৪৫ বছর বয়সের ঊর্ধ্বের লোকেরা পেতে পারবেন। এখন তো পয়লা মে থেকে দেশে ১৮ বছরের ঊর্ধ্বে সকল ব্যক্তির টিকা পাবেন। এবার দেশের কর্পোরেট সেক্টর কোম্পানিগুলোও নিজেদের কর্মচারীদের টিকা দেওয়ার অভিযানে অংশগ্রহণ করতে পারবেন। আমি এটাও বলতে চাই যে ভারত সরকারের পক্ষ থেকে বিনামূল্যে টিকার যে কর্মসূচি এখন চলছে সেটা আগামী দিনেও চলবে। আমি রাজ্যগুলোকেও বলতে চাইছি যে তারা ভারত সরকারের এই বিনামূল্যে টিকা অভিযানের সুবিধা নিজের নিজের রাজ্যের যত বেশি সংখ্যক মানুষের কাছে পৌঁছে দিক। বন্ধুগণ, আমরা সবাই জানি এই রোগের প্রকোপের ফলে আমাদের পক্ষে নিজেকে, নিজের পরিবারকে দেখাশোনা করা মানসিকভাবে কতটা দুরূহ হয়ে ওঠে। কিন্তু আমাদের হাসপাতালের নার্সিং কর্মীদের তো সেই কাজটাই একনাগাড়ে অসংখ্য রোগীদের জন্য একসঙ্গে করতে হয়। এই সেবাভাবই আমাদের সমাজের সবচেয়ে বড় শক্তি। নার্সিং সেবাদান আর পরিশ্রমের ব্যাপারে সবথেকে ভালো বলতে পারবেন কোন নার্স। এইজন্য আমি রায়পুরের ডাক্তার বি আর আম্বেদকর মেডিকেল কলেজ হাসপাতালে সেবারত সিস্টার ভাবনা ধুপ জি কে ‘’মন কি বাত’’এ আমন্ত্রণ জানিয়েছি। তিনি অসংখ্য করোনা রোগীদের দেখাশোনা করেছেন। আসুন ওঁর সঙ্গে কথা বলি।
মোদি - নমস্কার ভাবনা জি।
ভাবনা - মাননীয় প্রধানমন্ত্রী জি নমস্কার।
মোদি - ভাবনা জি ?
ভাবনা - ইয়েস স্যার।
মোদি - ‘’মন কি বাত’’ এর শ্রোতাদের আপনি অবশ্যই এটা বলুন যে আপনার পরিবারে এতগুলো দায়িত্ব পালন, এতগুলো অর্থাৎ মাল্টি টাস্ক, আর তার পরেও আপনি করোনা রোগীদের সেবা করছেন, করোনা রোগীদের সঙ্গে কাজ করে আপনার যে অভিজ্ঞতা দেশবাসী অবশ্যই শুনতে চাইবেন। কারণ যারা সিস্টার হন , যারা নার্স হন তারা রোগীদের সবথেকে কাছের হয়ে থাকেন, আর সব থেকে দীর্ঘ সময় তাঁরা রোগীদের সঙ্গে থাকেন। তাই তাঁরা সমস্ত জিনিস খুব সূক্ষ্ম ভাবে বুঝতে পারেন। আপনি বলুন।
ভাবনা - জি স্যার। আমার টোটাল কোভিড অভিজ্ঞতা দু মাসের স্যার। আমরা ১৪ দিন ডিউটি করি আর ১৪ দিন পরে আমাদের রেস্ট দেওয়া হয়, তারপর দুই মাস পরে আমাদের এই কোভিড ডিউটি রিপিট হয় স্যার। যখন আমার প্রথম কোভিড ডিউটি পড়ল তখন আমি সবার প্রথমে আমার পরিবারের সদস্যদের এই কোভিড ডিউটির কথা জানাই। সেটা মে মাসের কথা, আমি যখনি এটা জানালাম সবাই ভয় পেয়ে গেল, বললেন ঠিক করে কাজ করতে, একটা আবেগঘন পরিস্থিতির তৈরি হয়েছিল। মাঝে যখন আমার মেয়ে জিজ্ঞেস করেছিল যে মা তুমি কোভিড ডিউটিতে যাচ্ছ সেইসময়টা আমার জন্য খুব আবেগের ছিল। কিন্তু যখন আমি কোভিড রোগীদের পাশে গেলাম, দেখলাম তাঁরা আরো বেশি ভীতিগ্রস্ত। কোভিডের নামে সবাই এত ভয় পেয়েছিল, যে ওঁরা বুঝতেই পারছিল না যে ওঁদের সঙ্গে কি হতে চলছে? আর আমরা এরপর কি করবো। আমরা ওঁদের ভয় দূর করার জন্য ওঁদের খুব ভালো স্বাস্থ্যকর পরিবেশ দিয়েছি, স্যার। কোভিড ডিউটির প্রথমেই আমাদের পিপিই কিট পরতে বলা হয়েছিল, পিপিই কিট পরে ডিউটি করা খুব কঠিন কাজ। স্যার, আমাদের জন্য খুবই কষ্টদায়ক ছিল। আমি দু মাসের ডিউটিতে সব জায়গায় ১৪ দিন করে ডিউটি করেছি ওয়ার্ডে আইসিইউ তে, আইসোলেশনে এ স্যার।
মোদি জি – অর্থাৎ সব মিলিয়ে আপনি প্রায় একবছর এই কাজটা করছেন।
ভাবনা – ইয়েস স্যার, ওখানে যাওয়ার আগে আমি জানতাম না আমার সহকর্মী কারা, আমরা দলগতভাবে কাজ করেছি। রোগীদের যে সব সমস্যা ছিল আমরা নিজেদের মধ্যে আলোচনা করে নিতাম। আমরা রোগীদের সম্বন্ধে জানলাম, ওঁদের লজ্জা দূর করলাম। অনেক লোক এমন ছিল যাঁরা কোভিডের নামে ভয় পেত। যখন আমরা তাঁদের ইতিহাস লিখতাম, কোভিডের সমস্ত উপসর্গ তাঁদের মধ্যে পাওয়া যেত কিন্তু ওঁরা ভয়ের জন্য নমুনা পরীক্ষা করাতে চাইতেন না। তখন আমরা ওঁদের বোঝাতাম, স্যার যখন তীব্রতা বেড়ে যেত , ততক্ষনে ওঁদের ফুসফুস সংক্রমিত হয়ে থাকতো এবং আইসিইউ এর প্রয়োজন হতো। তখন সঙ্গে তাঁদের পুরো পরিবার আসতো। এরকম এক দুটো কেস আমি দেখেছি স্যার। আর শুধু এটাই করিনি। সমস্ত বয়সের সঙ্গেই কাজ করেছি স্যার আমি। যার মধ্যে ছোট বাচ্চাও ছিল। মহিলা, পুরুষ, প্রবীণ সব রকম রোগী ছিল স্যার। ওদের সবার সঙ্গেই আমি কথা বলেছি। তো সবাই বলে যে আমি ভয়ের কারণে আসতে পারিনি। সবার কাছ থেকেই আমরা এই উত্তর পেয়েছি স্যার। তাই আমরা ওঁদের বুঝিয়েছি স্যার। যে ভয় পাওয়ার কিছু নেই। আপনারা আমাদের সহযোগিতা করুন। আমরাও আপনাদের সহযোগিতা করব। আপনার যে নিয়মগুলি আছে সেটা মেনে চলুন। আমরা এইটুকুই ওঁদের জন্য করতে পেরেছি স্যার।
মোদিজী - ভাবনা জি, আপনার সঙ্গে কথা বলে আমার খুব ভালো লেগেছে, আপনি অনেক কথা জানালেন। আপনার নিজের অভিজ্ঞতার কথা বললেন তাই অবশ্যই দেশবাসীর কাছে এর একটা ইতিবাচক বার্তা পৌঁছবে। আপনাকে অনেক অনেক ধন্যবাদ ভাবনা জি।
ভাবনা - থ্যাংক ইউ সো মাচ স্যার থ্যাংক ইউ সো মাচ। জয় হিন্দ।
মোদিজী - জয় হিন্দ।
ভাবনা জী এবং আপনাদের মত হাজার হাজার নার্স ভাই বোনেরা নিজেদের দায়িত্ব খুব ভালোভাবে পালন করছেন। এটা আমাদের সবার জন্যই প্রেরণাদায়ক।আপনারা আপনাদের নিজেদের স্বাস্থের দিকেও ভাল করে নজর দিন। নিজেদের পরিবারের দিকেও মনোযোগ দিন।
বন্ধুরা, বেঙ্গালুরু থেকে সিস্টার সুরেখা জী এখন আমাদের সঙ্গে আছেন।সুরেখা জী কে সি জেনারেল হাসপাতালের সিনিয়ার নার্সিং অফিসার .আসুন তাঁর অভিজ্ঞতাও শুনি-
মোদী জী- নমস্কার সুরেখা জী,
সুরেখা- আমি আমাদের দেশের প্রধান মন্ত্রীর সঙ্গে কথা বলতে পেরে সত্যি গর্বিত ও সম্মানিত বোধ করছি।
মোদীজী- সুরেখা জী আপনি ও আপনার সহকর্মী নার্স এবং হাসপাতালের কর্মীরা অসাধারণ কাজ করছেন। ভারতবর্ষ আপনাদের কাছে কৃতজ্ঞ। কোভিড -১৯ এর বিরুদ্ধে যারা লড়াই করছেন সেই সব নাগরিকদের আপনি কি বলতে চান?
সুরেখা জী- হ্যাঁ স্যার, একজন দায়িত্বশীল নাগরিক হওয়ার সুবাদে আমি সবাইকে বলতে চাই যে নিজের প্রতিবেশিদের সঙ্গে ভাল ব্যবহার করুন। প্রাথমিক পর্যায়ে পরীক্ষা ও সঠিক ট্র্যাকিং মৃত্যুহার কমাতে সাহায্য করবে, এবং আরো বলতে চাই যে যদি কোন লক্ষণ দেখেন তবে সঙ্গে সঙ্গে নিজেকে আলাদা রাখুন ও নিকটবর্তী কোন চিকিৎসকের পরামর্শ নিয়ে অবিলম্বে চিকিৎসা শুরু করুন।সমাজে এই রোগ সম্বন্ধে সচেতনতা জরুরী, আমাদের আশাবাদী হওয়া উচিত,ভয় পাবেন না ও দুশিন্তা করবেন না। এতে রোগীর অবস্থা আরো খারাপ হয়ে যায়।আমরা আমাদের সরকারের কাছে কৃতজ্ঞ ও একটা টিকার জন্য গর্বিতও। আমি টিকা নিয়েছি। আমি আমার অভিজ্ঞতা থেকে ভারতের নাগরিকদের একটা কথা বলতে চাইব যে কোন টিকাই সঙ্গে সঙ্গে ১০০ ভাগ নিরাপত্তা দিতে পারেনা । প্রতিরোধ ক্ষমতা বাড়তে ও সময় লাগে। টিকা নিতে ভয় পাবেন না। নিজেরা টিকা নিন, এর সামান্য কিছু পার্শ্ব প্রতিক্রিয়া আছে। আমি বলতে চাই সবাই বাড়িতে থাকুন, সুস্থ থাকুন, অসুস্থ মানুষদের থেকে দূরে থাকুন, বার বার নাকে মুখে চোখে অকারণে হাত দেবেন না। শারীরিক দুরত্ব বজায় রাখুন, সঠিক ভাবে মাস্ক পরুন, বারবার হাত ধুয়ে নিন এবং ঘরোয়া শুশ্রুষাগুলি যতটা সম্ভব পালন করুন। আয়ূর্বেদিক কোয়াত পান করুন,গরম জলের ভাপ নিন গার্গল করুন ও নিশ্বাস প্রশ্বাসের কিছু ব্যায়াম করতে পারেন, সবশেষ কিন্তু শেষ কথা নয়, সামনের সারিতে থাকা কোভিড যোদ্ধাদের প্রতি শ্রদ্ধা রাখুন। আমরা আপনাদের সমর্থন ও সহযোগিতা চাই। আমরা এক সঙ্গে লড়াই করব, এভাবেই আমরা অতিমারীকে হারাতে পারব। মানুষের জন্য এটাই আমার বার্তা স্যার।
মোদীজী- ধন্যবাদ সুরেখা জী ।
সুরেখা জী--ধন্যবাদ স্যার ।
সুরেখা জী, সত্যিই আপনি খুব কঠিন সময়ে হাল ধরে আছেন। আপনি নিজের যত্ন নিন। আপনার পরিবারের প্রতিও আমার অনেক অনেক শুভেচ্ছা রইল। আমি দেশবাসীকেও বলতে চাই যে যেমনটা ভাবনা জী ও সুরেখা জী নিজেদের অভিজ্ঞতা থেকে বললেন, করোনার সঙ্গে লড়বার জন্য ইতিবাচক মানসিকতা বজায় রাখা খুব জরুরী, দেশবাসীকে এটা বজায় রাখতে হবে।
বন্ধুরা, ডাক্তার এবং নার্সিং স্টাফেরদের সঙ্গে সঙ্গে ল্যাব টেকনিশিয়ান ও অ্যাম্বুলেন্স ড্রাইভারদের মতো ফ্রন্টলাইন ওয়ার্কাররাও ঈশ্বরের মতো কাজ করছেন । যখন কোনো আম্বুল্যান্স কোনো রোগীর কাছে পৌঁছয় তখন তাকে দেবদূত বলে মনে হয়। এঁদের সবার কাজের ব্যাপারে এঁদের অভিজ্ঞতার ব্যাপারে দেশের সবার জানা উচিত।আমার সঙ্গে এখন এমনই এক ভদ্রলোক আছেন শ্রী প্রেম বর্মা , যিনি একজন অ্যাম্বুল্যান্স ড্রাইভার, এঁর নাম শুনেই তা বোঝা যায়। প্রেম বর্মা জী নিজের কাজ, নিজের কর্তব্য সম্পুর্ণ প্রেম ও নিষ্ঠা র সঙ্গে করেন। আসুন ওঁর সাথে কথা বলি-
মোদী জী- নমস্কার প্রেম জী,
প্রেম জী- নমস্কার মোদীজি,
মোদীজী- ভাই প্রেম ,
প্রেম জী- হ্যাঁ স্যার ,
মোদীজী- আপনি আপনার কাজের ব্যাপারে
প্রেম জী- হ্যাঁ স্যার ,
মোদী জী- একটু বিস্তারিত ভাবে জানান, আপনার যা অভিজ্ঞতা সেটাও জানান,
প্রেম জী-আমি ক্যাটের অ্যাম্বুলেন্স ড্রাইভার, যখনই কন্ট্রোল আমাদের ট্যাবে কল করে, ১০২ থেকে যখন কল গুলো আসে আমরা রোগীদের কাছে চলে যাই। এইভাবে আমি দু বছর ধরে ক্রমাগত এই কাজটিই করে আসছি। নিজের কিট পরে নিজের গ্লাভস মাস্ক পরে, রোগী যেখানে ড্রপ করতে বলেন, যেকোনো হসপিটালে, আমরা যত তাড়াতাড়ি সম্ভব তাকে সেখানে পৌঁছে করি।
মোদীজী- আপনি টিকার দুটো ডোজই পেয়ে গেছেন নিশ্চয়।
প্রেম জী- হ্যাঁ স্যার
মোদীজী- তাহলে অন্যরা টিকা নিক। এইব্যাপারে আপনি কি বলতে চান?
প্রেম জী- নিশ্চয় স্যার। সবারই এই ডোজ নেওয়া উচিত আর এটা পরিবারের জন্যেও ভালো। এখন আমার মা বলেন এই চাকরী ছেড়ে দাও। আমি বলেছি, মা, যদি আমি চাকরি ছেড়ে বসে থাকি তবে রোগীদের কে কিভাবে পৌঁছে দেবে? কারন এই করোনার সময়ে সবাই পালাচ্ছে।সবাই চাকরি ছেড়েছুড়ে চলে যাচ্ছে। মা ও আমায় বলেন এই চাকরি ছেড়ে দিতে। আমি বলেছি না মা আমি চাকরি ছাড়ব না।
মোদীজী- মাকে কষ্ট দেবেন না, মাকে বুঝিয়ে বলবেন,
প্রেম জী- হ্যাঁ ,
মোদী জি- কিন্তু এই যে আপনি মায়ের কথা বললেন,
প্রেম জী- হ্যাঁ,
মোদী জী- এটা খুবই মর্মস্পর্শী,
প্রেম জী- হ্যাঁ
মোদীজী-আপনার মাকেও,
প্রেম জী- হ্যাঁ
মোদীজী- আমার প্রণাম জানাবেন,
প্রেম জী- নিশ্চয়,
মোদীজী- হ্যাঁ
প্রেম জী- হ্যাঁ
মোদীজি-প্রেম জী আমি আপনার মাধ্যমে ,
প্রেম জী- হ্যাঁ
মোদীজী- এই যারা অ্যাম্বুল্যান্স চালায় আমাদের সেই ড্রাইভাররাও
প্রেম জী- হ্যাঁ
মোদীজী - বড় ঝুঁকি নিয়ে কাজ করছেন,
প্রেম জী- হ্যাঁ,
মোদীজী- আর সবার মায়েরা কি ভাবেন,
প্রেম জী- নিশ্চয় স্যার,
মোদীজী- এই কথা যখন শ্রোতা দের কাছে পৌঁছবে।
প্রেম জী- হ্যাঁ,
মোদীজি- আমি নিশ্চিত জানি যে তাদের ও হৃদয় স্পর্শ করবে।
প্রেম জী- হ্যাঁ,
মোদীজি- প্রেম জি অনেক অনেক ধন্যবাদ আপনি তো প্রায় প্রেমের গঙ্গা বইয়ে দিচ্ছেন।
প্রেম জী- ধন্যবাদ স্যার,
মোদীজী- ধন্যবাদ ভাই,
প্রেম জী- ধন্যবাদ,
বন্ধুরা, প্রেমজী এবং আরো এরকম হাজার হাজার মানুষ,আজ নিজের জীবন বাজি রেখে মানুষের সেবা করে চলেছেন।করোনার বিরুদ্ধে এই লড়াইয়ে যতো জীবন বাঁচছে তাতে অ্যম্বুলেন্স ড্রাইভারদের ও বিশাল বড় অবদান আছে। প্রেম জী আপনাকে ও সারাদেশে আপনার সব সঙ্গীকে আমি অনেক অনেক সাধুবাদ জানাই। আপনি সময়ে পৌঁছোন, জীবন বাঁচান।
আমার প্রিয় দেশবাসী,এটা ঠিক যে করোনায় বহু মানুষ সংক্রমিত হচ্ছেন , কিন্তু করোনায় সুস্থ হয়ে ওঠা মানুষের সংখ্যাও কিন্তু ততোটাই।গুরুগ্রামের প্রীতি চতুর্বেদী ও সম্প্রতি করোনা কে হারিয়ে দিয়েছেন। প্রীতি জী “মন কি বাত” এ আমাদের সাথে যুক্ত হচ্ছেন। তাঁর অভিজ্ঞতা আমাদের সবার খুব কাজে লাগবে।
মোদীজী- প্রীতি জি নমস্কার
প্রীতি জি- নমস্কার স্যার আপনি কেমন আছেন?
মোদীজী- আমি ভাল আছি, সবথেকে আগে আমি আপনাকে কোভিড-১৯ এ
প্রীতি জি – হ্যাঁ
মোদীজী- সাফল্যের সঙ্গে লড়বার জন্যে
প্রীতি জি –হ্যাঁ
মোদীজী-প্রশংসা জানাই
প্রীতি জি – অনেক ধন্যবাদ স্যার
মোদীজী- আপনার স্বাস্থ্য আরো দ্রুত ভালো হয়ে উঠুক এই কামনা করি
প্রীতি জি –ধন্যবাদ স্যার
মোদীজী- প্রীতি জি
প্রীতি জি –হ্যাঁ স্যার
মোদীজী- এতে কি শুধু আপনিই অসুস্থ হয়েছিলেন নাকি আপনার পরিবারের অন্যান্য সদস্যরাও সংক্রমিত হয়েছিলেন?
প্রীতি – না না স্যার আমারি শুধু হয়েছিল।
মোদিজি- যাক ঈশ্বরের অসীম কৃপা। আচ্ছা আমি চাই
প্রীতি –হ্যাঁ স্যার।
মোদিজি- যে আপনি যদি আপনার কষ্টের সময়ের অভিজ্ঞতার কথা সবাইকে জানান তবে হয়তো শ্রোতারাও এই রকম সময়ে কিভাবে নিজেদের সামলাবেন তার একটা পথনির্দেশ পাবেন।
প্রীতি ---হ্যাঁ স্যার নিশ্চয়।স্যার গোড়ার দিকে আমার খুব কুঁড়েমি , খুব আলস্য আলস্য লাগত আর তার পরে না আমার গলা একটু একটু খুশ খুশ করতে লাগল, এরপর আমার মনে হল যে এগুলো লক্ষণ , তাই আমি টেস্ট করাবার জন্যই টেস্ট করালাম , পরের দিন রিপোর্ট আসা মাত্রই যেই দেহলাম আমি পজিটিভ, আমি নিজেকে কোয়ারান্টিন করে ফেললাম।একটা ঘরে আইসোলেট করে আমি ডাক্তারদের সাথে পরামর্শ করলাম ।ওদের বলে দেওয়া ওষুধও শুরু করে দিলাম।
মোদীজি- তাহলে আপনার এই পদক্ষেপ নেবার কারণে আপনার পরিবার রক্ষা পেল।
প্রীতি- হ্যাঁ স্যার, সবারই টেষ্ট পরে করানো হয়ে ছিল। সবাই নেগেটিভ ছিল। আমিই পজিটিভ ছিলাম। আগেই আমি নিজেকে একটা ঘরে আইসোলেট করে নিয়ে ছিলাম। নিজের প্রয়োজনের সব জিনিসপত্র নিয়ে আমি নিজেই ঘরে বন্ধ ছিলাম। তার সঙ্গে সঙ্গে আমি ডাক্তারদের দেওয়া ওষুধ ও শুরু করে দিয়ে ছিলাম।স্যার আমি না ওষুধের সঙ্গে যোগ ব্যায়াম, আয়ূর্বেদিক ও শুরু করে দিয়ে ছিলাম, আর আমি কোয়াত খাওয়াও শুরু করেছিলাম। আর স্যার রোগ প্রতিরোধ ক্ষমতা তৈরি করবার জন্য আমি যখনই খেতাম হেলদি ফুড, মানে প্রোটিন সমৃদ্ধ খাবার খেতাম। আমি প্রচুর ফ্লুইড খেয়েছি, স্টিম নিয়েছি গার্গল করেছি আর গরম জল খেয়েছি। আমি সারাদিন ধরে এই সব করেছি রোজ। আর স্যার সব থেকে বড় কথা আমি বলতে চাই যে একদম ঘাবড়াবেন না। মানসিক ভাবে খুব স্ট্রং থাকতে হবে, যার জন্য আমি যোগ ব্যায়াম , ব্রিদিং এক্সারসাইজ করতাম, ওটা করলে আমার খুব ভাল লাগতো।
মোদীজী- হ্যাঁ আচ্ছা প্রীতি জী যখন আপনার এই প্রক্রিয়া সম্পুর্ণ হয়ে গেল। আপনি সংকট মুক্ত হলেন
প্রীতি- হ্যাঁ
মোদীজি- এখন আপনার রিপোর্টও নেগেটিভ
প্রীতি- হ্যাঁ স্যার
মোদীজী- তাহলে আপনি আপনার স্বাস্থের জন্য, এখন কি করছেন?
প্রীতি- স্যার প্রথমত আমি যোগ ব্যায়াম বন্ধ করিনি
মোদীজি- হ্যাঁ
প্রীতি-ঠিক আছে, আমি এখোনো কোয়াত খাচ্ছি আর নিজের রোগ প্রতিরোধ ক্ষমতা ভাল রাখবার জন্য আমি সুষম স্বাস্থ্যকর খাবার খাচ্ছি এখনো।
মোদীজি-হ্যাঁ
প্রীতি- আমি যেমন আগে নিজেকে খুব অবহেলা করতাম সেদিকে এখন খুব মনোযোগ দিচ্ছি ।
মোদিজি- ধন্যবাদ প্রীতি জি
প্রীতি- অনেক ধন্যবাদ স্যার
মোদীজি-আপনি আমাদের যা জানালেন আমার মনে হয় এটা বহু মানুষের কাজে লাগবে , আপনি সুস্থ থাকুন আপনার পরিবারের লোকেরা সুস্থ থাকুক, আপনাকে আমার অনেক অনেক শুভেচ্ছা ।
আমার প্রিয় দেশবাসী, আজ যেমন আমাদের চিকিৎসা পরিষেবার সঙ্গে যুক্ত লোকেরা, সামনের সারিতে থাকা কর্মীরা দিন রাত সেবার কাজ করে যাচ্ছেন ।তেমনই সমাজের অন্য লোকেরাও এই সময়ে পিছিয়ে নেই। দেশ আবার একবার একজোট হয়ে করোনার বিরুদ্ধে লড়াই করছে । এই সময়ে আমি দেখতে পাচ্ছি কেউ কোয়ারান্টিনে থাকা পরিবারের জন্য ওষুধ পৌঁছে দিচ্ছে , কেউ সব্জী দুধ ফল ইত্যাদি পৌঁছে দিচ্ছে । কেউ বিনা মূল্যে রোগীদের অ্যাম্বুল্যান্স পরিষেবা দিচ্ছে। এই কঠিন সময়েও দেশের বিভিন্ন প্রান্তে স্বেচ্ছাসেবী সংস্থাগুলি এগিয়ে এসে অন্যের সাহায্যের জন্য যেটুকু করা সম্ভব করার চেষ্টা করছে। এবার গ্রামেও নতুনভাবে সচেতনতা দেখা যাচ্ছে । কঠোর ভাবে কোভিড নিয়মের পালন করে মানুষ নিজের গ্রামকে করোনা থেকে বাঁচাচ্ছেন, যারা বাইরে থেকে আসছেন তাদের জন্যেও সঠিক ব্যাবস্থা করা হচ্ছে। শহরেও তরুণ প্রজন্ম এগিয়ে এসেছেন। নিজেদের এলাকায় যাতে করোনা কেস না বাড়ে তার জন্য স্থানীয় বাসিন্দারা মিলিত প্রচেষ্টা চালিয়ে যাচ্ছেন।অর্থাৎ এক দিকে দেশ দিনরাত হাসপাতাল, ভেন্টিলেটর আর ওষুধ নিয়ে কাজ করছে তো অন্য দিকে দেশের মানুষ ও জানপ্রাণ দিয়ে করোনার চ্যালেঞ্জের সঙ্গে যুদ্ধ করছে।এই চিন্তাটা আমাদের অনেক শক্তি দেয়, অনেক বিশ্বাস দেয়। যা যা চেষ্টা হচ্ছে তা বিরাট বড় সমাজ সেবা। এতে সমাজের শক্তি বাড়ে।
আমার প্রিয় দেশবাসী আজ মন কি বাত এর পুরো আলোচনাটাই আমি করোনা মহামারীর ওপরেই রেখেছিলাম কারণ এই রোগকে হারানোই এখন আমাদের প্রাথমিকতা। আজ ভগবান মহাবীর জয়ন্তীও। এর জন্য আমি প্রত্যেক দেশবাসীকে শুভেচ্ছা জানাই।ভগবান মহাবীরের বার্তা আমাদের তপস্যা ও আত্মসংযমের প্রেরনা দেয়। এখন রমজানের পবিত্র মাসও চলছে, সামনে বুদ্ধপূর্ণিমা। গুরু তেগবাহাদুরের চারশোতম প্রকাশ পর্বও আছে। আর একটি গুরুত্বপূর্ণ দিন পঁচিশে বৈশাখ –রবীন্দ্রজয়ন্তীও আছে, এগুলো সবই আমাদের নিজেদের কর্তব্য করে যাওয়ার প্রেরণা দেয়। একজন নাগরিক হওয়ার সুবাদে আমরা আমাদের নিজেদের জীবনে যতটা কুশলতার সঙ্গে নিজেদের কর্তব্য পালন করব, ততই দ্রুতগতিতে সংকট মুক্ত হয়ে আমরা ভবিষ্যতের পথে এগিয়ে যাব। এই কামনার সঙ্গে আমি আপনাদের সবাইকে আবার একবার বলতে চাই যে টিকা সবাইকে নিতে হবে এবং সাবধান ও থাকতে হবে। ‘দবাই ভী- কড়াই ভী’। এই মন্ত্র কখোনোই ভুললে চলবেনা। আমরা একসঙ্গে খুব তাড়াতাড়ি এই বিপদ থেকে বেরিয়ে আসব। এই বিশ্বাস সহ আপনাদের সবাইকে অনেক অনেক ধন্যবাদ। নমস্কার।