भारत माता की जय । भारत माता की जय।

मंच पर विराजमान हरियाणा के राज्यभपाल आदरणीय श्री कप्ताैन सिंह जी, हरियाणा के मुख्यहमंत्री आदरणीय श्री हुडा जी, केन्द्रि सरकार में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्रीमान नितिन गडकरी जी, मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठन महानुभाव और विशाल संख्या में पधारे हुए प्यांरे भाइयो एवं बहनों।

कल पूरा देश जन्मानष्टामी का पर्व मना रहा था। आज जब श्रीकृष्ण> को याद करते हैं, तो कुरूक्षेत्र की याद बहुत स्वावभाविक आती है। यह कुरूक्षेत्र की धरती, जहां से नैतिकता के विजय का बिगुल बजा था। ये कुरूक्षेत्र की धरती ऐसी है जहां युद्ध के मैदान में शाश्व त शांति का संदेश दिया गया था। शायद विश्वा में गीता एकमात्र ग्रंथ ऐसा है, जिसकी रचना युद्ध की भूमि में हुई थी। ऐसे हरियाणा की धरती पर आज आने का मुझे सौभाग्य मिला।

प्रधानमंत्री बनने के बाद हरियाणा में मेरा पहला सरकारी कार्यक्रम है। लेकिन आप सबने जो उमंग, उत्सााह और प्यासर दिया है, इसके लिए मैं हरियाणा का बहुत-बहुत आभारी हूं। मैं हरियाणा के भाइयो-बहनों को विश्वा स दिलाता हूं, आपने जो प्याकर दिया है, आपने जो विश्वाेस दिया है, इसे मैं ब्याइज समेत लौटाऊँगा, विकास करके लौटाऊँगा। मैं हरियाणा को उतना ही जानता हूं, जितना मैं गुजरात को जानता हूं। कई वर्षों तक यहां रहने का मुझे अवसर मिला। यहां के जीवन को जानने का अवसर मिला। बहुत कुछ मुझे हरियाणा की धरती से सीखने को भी मिला है और मेरे लिए गर्व की बात है, मैं उस धरती से आया हूं, जिस धरती पर स्वाईमी दयानंद सरस्वलती का जन्मे हुआ था और हरियाणा के हर कोने में आज भी स्वा मी दयानंद सरस्वलती की शिक्षा-दीक्षा का हर परिवार में महात्य्म है। यहां के जीवन मूल्योंद में, यहां के सामाजिक जीवन में, स्वाामी दयानंद सरस्वंती की शिक्षा-दीक्षा की छाया आज भी हम महसूस करते हैं और इसलिए, जो मूल्योंय में विश्वाीस करते हैं, जो नैतिकता में विश्वाेस करते हैं, उनको इस धरती पर आदर होना बहुत स्वासभाविक है। यहां के लोगों के प्रति आदर होना बहुत स्वाोभाविक है। हरियाणा के व्यं्ग्या विनोद से मैं भली-भांति परिचित हूं। कितनी ही कठिन से कठिन बात को भी व्यंदग्य और विनोद से आगे बढ़ाना, यह हरियाणा की विशेषता मैंने देखी है और बड़े सहज ग्रामीण लहजे में।

इतना बड़ा यह समारोह किस बात का सबूत देता है, इतनी बड़ी भीड़ किस बात का संदेश देती है? भाइयो-बहनों, ये उत्साीह, ये उमंग, ये भीड़़ इस बात का भरोसा देती है, इस बात का संदेश देती है कि देश की जनता को विकास में कितना विश्वाैस है। सामान्यक मानवीय विकास उसकी प्राथमिकता बनी हुई है। चाहे किसान हो, मजदूर हो, टैक्सीी चलाने वाला रिक्शा चलाने वाला ड्राइवर हो, आप किसी से भी पूछिये, जब बात करते हैं तो उसको लगता है कि भाई, अब बहुत दिन हो गए, अब पिछड़े हुए रहना नहीं है। दुनिया आगे बढ़ रही है, हमें भी आगे बढ़ना है। अगर आगे बढ़ना है, विकास ही एक मार्ग है, जो हमें आगे ले जाएगा।

आज जो हमारी कठिनाइयां हैं, उन कठिनाइयों से मुक्ति भी विकास से ही आने वाली है। हमारे परिवार में नौजवानों को रोजगार चाहिए। अगर विकास नहीं होगा तो रोजगार के अवसर कहां से प्राप्तं होंगे और अगर रोजगार के अवसर प्राप्तो नहीं होंगे तो हमारे नौजवानों को रोजगार कहां से मिलेगा? कितनी ही ज्याादा जमीन क्यों न हो, किसान भी आज क्याऔ सोच रहा है? किसान भी ये सोचता है कि अगर तीन बेटे हैं तो एक बेटा तो खेती करेगा, दो बेटे शहर में चले जाएं, नौकरी करें, रोजगार कमा लें, यह किसान भी सोचने लगा है। इस धरती की सच्चाएई को समझ कर हमें देश को विकास की दिशा में ले जाना होगा और विकास की दिशा में जाना है तो एक बात निश्चित है, जो देश इंफ्रास्ट्रदक्चार को बल देता है, आधुनिक से आधुनिक इंफ्रास्ट्रनक्चेर को महत्वइ देता है, रास्तेब हो, रेल हो, एयरपोर्ट हो, इस व्यनवस्थान को जल्दी विकसित करता है, वहां की विकास की संभावनाएं बहुत तेज गति से बढ़ती है। अपना हरियाणा इसका उन्नकत उदाहरण है। कहीं बाहर जा कर इसे समझने की आवश्यपकता नहीं है। मैं हरियाणा के हर गली मोहल्लेा में घूमा हुआ इंसान हूं, इसलिए मुझे पता है। आपने देखा होगा, नेशनल हाइवे वन, जो पूरा उत्तइर से दक्षिण, हरियाणा के बीच से गुजरता है। आपने देखा होगा, इस रोड के दोनों तरफ जितना तेज गति से विकास हुआ है। लेकिन जैसे अंदर की तरफ जाते हैं हरियाणा में तो हमें वह कमी महसूस होती है। एक अच्छाद रोड बनने के कारण, नेशनल हाइवे वन, उसके दोनों तरफ तेज गति से विकास हुआ। उसी प्रकार से रास्तोंा का नेटवर्क जब बनता है तो विकास को वह गति देता है। हमारे शरीर में भी रक्ता पहुंचाने के लिए जैसे धमनी होती है, नसें होती हैं, जिसके माध्यकम से रक्तक चालन होता है और जीवन गति पाता है, उसी प्रकार से रास्ते, राष्ट्रय के जीवन में धमनी का काम करते हैं, जो विकास के सुदूर इलाके में पहुंचाने का काम करते हैं।

यह रास्ता हरियाणा और राजस्थाोन को जोड़ रहा है। हरियाणा और राजस्थाहन को जोड़ने का मतलब, सिर्फ इस पर गाडि़यां आएंगी जाएंगी, वो नहीं है। दो राज्योंन को इस प्रकार से जब एक अतिरिक्तऔ रास्ता़ मिल जाता है, और उसकी कैपिसिटी जब बढ़ जाती है, तो व्या्पार क्षेत्र के लिए, यातायात के लिए यह बहुत सुविधाजनक बनता है और इसके कारण न सिर्फ हरियाणा का भला होने वाला है बल्कि इसके साथ-साथ राजस्थािन का भी भला होने वाला है। हरियाणा और राजस्थाान का भला है तो देश का भी भला होने वाला है और इसलिए आपने जैसा हम पर विश्वाऔस रखा है, हमने इंफ्रास्ट्र क्च र को प्राथमिकता दी है और इंफ्रास्ट्राक्चनर भी पिछली शताब्दीे वाला नहीं चलेगा। कोई भी कांट्रेक्टसर है, ऐसे ही डामर डाल दिया, थोड़ा काला रंग हो गया, रोड बन गया। पहली बारिश में सब तबाह हो जाता है। पता नहीं पैसे किसकी जेब में जाते हैं। अब वक्तह बदला है। देश की जनता, दुनिया में जो बदलाव आ रहा है, देख रही है। उसे भी अपने क्षेत्र में अंतरराष्ट्री य स्तंर के , इंटरनेशनल लेवल के रास्तोंा की भूख जगी है। और हमें यह पूरा करना चाहिए। अगर हमें देश को आगे ले जाना है तो हमें आगे के बारे में सोचना होगा। इसलिए सिर्फ रास्तोंक के जाल, रास्तोंम के नेटवर्क, इसी मात्र से इंफ्रास्ट्र क्च।र का काम पूरा नहीं होता है। सिर्फ रेल के नेटवर्क से ही 21 वीं सदी के नेटवर्क का काम पूरा नहीं होगा। अगर हमें 21वीं सदी में आगे बढ़ना है तो आप्टिकल फाइबर का नेटवर्क लगाना पड़़ेगा, गैस ग्रिड करनी पड़ेगी, वाटर ग्रिड करनी पड़ेगी, बिजली की ग्रिड घर घर तक पहुंचानी पड़ेगी। आधुनिक से आधुनिक विज्ञान और उसकी कनेक्टिविटी हर गांव, हर घर तक पहुंचे, उस दिशा में हमें योजना बनानी होगी। हम बहुत तेजी से, हिन्दु स्ताेन के गांवों को आधुनिक विज्ञान का लाभ मिले, दूर-सुदूर गांवों के स्कूालों में बच्चों को अच्छीक शिक्षा मिले, टेक्नोबलोजी के माध्यघम से लांग डिस्टें स एजुकेशन का लाभ मिले, ब्रांडबैंड कनेक्टिविटी का जाल बिछे, आप्टिकल फाइबर नेटवर्क का जाल बिछाये जाएं, एक आधुनिक भारत के निर्माण के लिए, नई पीढ़ी की आवश्यककताओं की पूर्ति के लिए इन बातों पर बल देने की दिशा में हम प्रयासरत हैं।

भाइयो-बहनों, मैंने 15 अगस्तन को राष्ट्र के नाम अपने मन की कुछ बातें कही थी। लेकिन कुछ लोगों ने कहा कि 15 अगस्तप को लाल किले पर से मोदी जी ने भ्रष्टाुचार के खिलाफ कुछ बोला नहीं। मैंने एक बात कही थी, मैंने कहा था कि कुछ लोगों की ऐसी आदत हो गई है, कोई भी काम हो तो पूछते हैं, मेरा क्याा? और जब बात नहीं बनती है तो हाथ ऊपर कर कह देते हैं कि मुझे क्यात? ये तो मेरा क्याा, मुझे क्या, इसने देश को तबाह करके रखा हुआ है। यहां मौजूद कोई व्ययक्ति ऐसा नहीं होगा जो भ्रष्टााचार को समर्थन देता हो। आप मुझे बताइए, भ्रष्टाईचार से देश को मुक्ता कराना चाहिए या नहीं? इसके लिए कठोर कदम उठाने चाहिए या नहीं उठाने चाहिए? अगर मैं कठोर कदम उठाता हूँ तो क्या आपका आर्शीवाद है? आपके आर्शीवाद की ताकत से इस देश की इस बीमारी को हम हटा सकते हैं, निकाल सकते हैं। ये बीमारी इतनी भयानक है, इतनी फैल चुकी है, कैंसर से भी ज्यालदा। पूरे राष्ट्रश जीवन को तबाह करने वाली बीमारी है ये और इसलिए पूरे देश में एक मिजाज बनाना है और मैं अनुभव कर रहा हूं, देश अब लंबे अरसे तक बुराइयों को सहने के लिए तैयार नहीं है। देश लंबे अरसे तक बुराइयों को झेलने के लिए तैयार नहीं है।

मेरे हरियाणा के भाइयो-बहनो, जब चुनाव के दिनों में आपके बीच आने का अवसर मिला था, तब भी मैंने कहा था, कि हरियाणा का मुझ पर एक विशेष अधिकार है। और आज प्रधान सेवक के रूप में कार्यभार संभालने के बाद भी दुबारा मैं कहता हूं- हरियाणा का मुझ पर विशेष अधिकार है। भाइयो-बहनो, केन्द्र। सरकार की कई योजनाएं यहां कोई 4 साल पहले पूरी होनी चाहिए थी, कोई 2 साल पहले पूरी होनी चाहिए थी, वह विलंबित पड़ी हुई है। मैं हरियाणा के भाइयों-बहनों को विश्वाास दिलाता हूं कि भूतकाल में जिन परियोजनाओं को शुरू किया गया था, जो आज अटकी पड़ी हैं, उनको बहुत ही जल्दप प्रारंभ करके, बहुत ही तेज गति से पूर्ण हो, इसके लिए दिल्लीो में बैठी सरकार पूरा प्रयास करेगी।

हरियाणा के किसान देश के अन्न् के भंडार भरते हैं। भाइयो-बहनों, हमारा किसान देश के अन्नक के भंडार तो भरता है, लेकिन किसानों की जेब खाली रह जाती है। हमें देश की कृषि को उस दिशा में आगे ले जाना है, ताकि देश में अनाज के भंडार भी भरें और किसान का जेब भी भरे। हरियाणा ने देश के कृषि विकास में बहुत योगदान किया है। यहां के किसानों की मेहनत हिन्दुकस्ताान के नागरिकों का पेट भरने में कभी पीछे नहीं रही है। मैं हरियाणा के किसानों को नमन करता हूं। लेकिन मैं हरियाणा के किसानों को विश्वामस दिलाता हूं कि जैसे अटल बिहारी वापयेजी जी की सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़़क योजना के द्वारा हर गांव को पक्कीज सड़क से जोड़ने का बीड़ा उठाया था, हमने तय किया है प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, ताकि गांव-गांव यदि किसानों को पानी मिला तो किसान को किसी की भी जरूरत नहीं पड़ती है। एक बार पानी मिल गया तो किसान मिट्टी में से सोना पैदा कर देता है। किसान खेत में मजदूरी करके हिन्दु स्ता न के भाग्य को बदल सकता है और इसलिए अगर देश के गांव के जीवन को बदलना है, हमारी कृषि को आधुनिक बनाना है, वैज्ञानिक ढंग से हमारा किसान कृषि करता चले, कृषि के साथ ही पशुपालन भी हो, ताकि कभी भी वर्षा कमी अधिकता के कारण किसान को परेशान होने की नौबत न आए। पशुपालन के माध्यधम से अगर संकट के दिनों में एक साल गुजारने की नौबत आए तो हमारा किसान आराम से गुजार दे, उस प्रकार की उसकी व्य वस्थाम होनी चाहिए।

भाइयो-बहनों, आइए, विकास के मंत्र को हम हरियाणा के गांव-गांव, गली-गली, घर-घर पहुंचायें, जन-जन तक पहुंचायें, और हिन्दुकस्ताहन के अग्रिम राज्योंो में हरियाणा भी अपनी जगह बनाये। उसके लिए हम सब को मिल कर के दिल्लीम सरकार हो या राज्यज सरकार हो, कंधे से कंधा मिला कर के काम करें और हरियाणा के भाग्यत को बदलें। इसी अपेक्षा के साथ, आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं।

मेरे साथ बोलिये, भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय।

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July 11, 2026

नमस्ते !
की ओरा New Zealand!

हम भारत के लोग सुनते आए थे, 20 साल के बाद। लेकिन आज चालीस साल बाद कोई भारतीय पीएम न्यूज़ीलैंड की धरती पर आया है। ये मेरा सौभाग्य है। मैं न्यूजीलैंड के सभी निवासियों के लिए, आप सभी लोगों के लिए, 140 करोड़ भारतीयों की शुभकामनाएं लेकर आया हूं।

साथियों,

ये प्रधानमंत्री के रूप में भले ही मेरा पहला न्यूज़ीलैंड दौरा है। लेकिन 25-30 साल पहले, जब मैं किसी सरकार में भी हिस्सा नहीं था, सार्वजनिक जीवन में मुझे कोई जानता नहीं था, तब भी मुझे यहां न्यूजीलैंड आने का अवसर मिला था। और उस समय, मुझे किसी ने गिफ्ट में तीन चीजें दी थीं जो मैं वापस इंडिया लेकर के गया था। एक, यह मफ़लर। एक कैप, और एक दस्ताना। क्योंकि ठंड का मौसम था।

और उसमें से एक चीज़ मैं अभी यहां इस कार्यक्रम में भी लेकर आया हूं। यह मफ़लर जो आप देख रहे हैं, यह 25-30 साल पहले मुझे न्यूजीलैंड के एक साथी ने दिया था। इतने साल में मैंने कई बार इसका उपयोग किया, और आज भी इसे बहुत संभाल कर के रखा है। जैसे आपके प्यार को संभाल के रखता हूं।

इस बार जब मेरा यहां आने का कार्यक्रम बना, तो मैं विशेष तौर पर इसे अपने साथ लेकर के आया क्योंकि खबर थी कि ठंड ज्यादा है।

साथियों,

भारत और न्यूज़ीलैंड के रिश्ते में यादें भी हैं, दोस्ती भी है, वैल्यूज़ भी हैं और एक कमिटमेंट भी है। इस रिश्ते को न्यूज़ीलैंड की एक सुंदर परंपरा अच्छे से डिफाइन करती है। यहाँ सदियों से एक शब्द लोगों को जोड़ता आया है - वाका। वाका सिर्फ़ एक नाव का नाम नहीं है, वाका हमारी शेयर्ड जर्नी की प्रतीक है। और आज भारत-न्यूजीलैंड की यही वाका एक नई यात्रा पर निकलने के लिए तैयार है।

हमारे सामने अवसरों से भरा खुला समुद्र है, हवाएँ हमारे साथ हैं, समंदर की विशाल लहरें हमारे साथ हैं, इच्छाशक्ति का नीला आसमान हमारे साथ है, पाने को काफी कुछ है, और मैं जानता हूं, हम सफल होंगे।

साथियों,

मुझे इस यात्रा की सफलता पर पूरा भरोसा है, जानते हैं क्यों? मोदी नहीं, क्योंकि इसके असली नाविक आप सभी हैं। ऑकलैंड से वेलिंगटन तक, क्राइस्टचर्च से क्वीन्सटाउन तक, न्यूज़ीलैंड के कोने-कोने में फैला भारतीय समुदाय इस शेयर्ड जर्नी का एक नाविक है।

साथियों,

आगे बढ़ने से पहले, मैं अपने मित्र, प्राइम मिनिस्टर क्रिस्टोफर लक्सन, न्यूज़ीलैंड सरकार के सभी साथियों और यहां लेबर पार्टी के मंबर्स का अभिनंदन करूंगा।

ये दिखाता है कि भारत-न्यूज़ीलैंड रिश्ते को कितना बड़ा बाइ-पार्टिसन सपोर्ट है। इससे ये भी पता चलता है कीवी इंडियन कम्यूनिटी की अचीवमेंट्स आपका कंट्रीब्यूशन कितना बड़ा है। आप यहां आए किवी इंडियन कम्यूनिटी के इस उत्सव का हिस्सा बने इससे ये सेलिब्रेशन और वाइब्रेंट हो गया है।

आपने जिस गर्मजोशी से जिस स्नेह और उत्साह से, आप ने हम सभी का स्वागत किया है मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

वैसे एक्सीलेंसी, किवी इंडियन कम्यूनिटी में भी सुपरहिट हैं। भारत के इंडिपेंडेंस डे पर आपने क्रिस हिपकिंस के साथ मिलकर दमादम मस्त कलंदर गाने पर जो डांस किया वो काफी वायरल हुआ। आपके वो मूव, Kiwi Indians के दिलों में छप गए हैं।

साथियों,

न्यूज़ीलैंड वाकई एक अद्भुत देश है। यहां पीस है, प्रॉसपैरिटी है, नेचर है, कल्चर है, और न्यूज़ीलैंड की असली ताकत, यहां के स्थानीय लोग हैं। न्यूज़ीलैंड के लोगों ने दिखाया है कि कोई देश जब एक जूनून, एक जज्बे के साथ आगे बढ़ता है, तो वो दुनिया को इंस्पायर करता है।

यहां जो किवी इंडियन कम्यूनिटी है, आप सभी को भी न्यूज़ीलैंड के दिलदार लोगों ने बहुत प्रेम से अपनाया है, अपनी टीम का हिस्सा बनाया है। उन्होंने आपके टैलेंट, आपके विजन पर ट्रस्ट किया है। और आज देखिए, न्यूज़ीलैंड की इकॉनॉमी हो, यहां की सोसायटी हो, किवी इंडियन्स नए-नए रंग भर रहे हैं।

न्यूजीलैंड वो जगह है जहां निखिल रविशंकर Air New Zealand के CEO बन सकते हैं। जहां आनंद सत्यानंद गवर्नर जनरल बन सकते हैं जहां क्रिकेट टीम में रचिन रविंद्र, ईश सोढी और एजाज़ पटेल जैसे टैलेंट को अवसर मिल सकता है।

न्यूजीलैंड वो जगह है जहां की सड़कों में भी भारतीय शहरों को सम्मान दिया गया है। कहीं खंडाला है। कहीं बॉम्बे हिल्स हैं। कहीं कोरोमंडल है।

कलकत्ता स्ट्रीट, दिल्ली क्रिसेंट, अमृतसर स्ट्रीट, ऐसे कितने ही नाम हैं। यहां रहते-रहते आप भी पूरे के पूरे Kiwi हो गए हैं। जैसे मुझे बताया गया है कि किसी भी विषय पर बात शुरू कीजिए थोड़ी ही देर में बात मौसम पर पहुँच जाती है!

साथियों,

मैं न्यूज़ीलैंड की लीडरशिप से जब भी मिला हूं, वो आप सभी की बहुत प्रशंसा करते हैं। प्रशंसा आपकी होती है, और माथा मेरा ऊंचा होता है।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, कि भारत, हज़ारों वर्षों पुरानी सभ्यता है जो आज अपनी प्राचीनता को सहेजते हुए आधुनिकता को स्वीकार कर रहा है। हर युग में हर दौर में भारत ने खुद को ट्रांसफॉर्म किया है और इसका कारण है, हमारी सीखने की ललक।

भारत सबसे सीखता है हमारे लिए सामने वाले देश की जनसंख्या नहीं जनकल्याण की भावना मायने रखती है और इसलिए हमने न्यूज़ीलैंड से भी बहुत कुछ सीखा है और अब भी सीख रहे हैं।

न्यूज़ीलैंड, दुनिया का वो देश है जिसने सबसे पहले महिलाओं को वोटिंग का राइट दिया था। आज हम देखते हैं कि न्यूज़ीलैंड की सोसायटी में वीमेन, बहुत बड़े पैमाने में कंट्रीब्यूट कर रही हैं। भारत भी आज Women Led Development के मंत्र के साथ महिलाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल रहा है।

साथियों,

रूरल इकॉनॉमी, कैसे किसी देश की तकदीर बदल सकती है ये न्यूज़ीलैंड ने करके दिखाया है। न्यूज़ीलैंड की ताकत, एग्रीकल्चर के इर्द-गिर्द बनाया गया एक एफिशियंट इकोसिस्टम है। ट्रेसेबिलिटी हो, फूड सेफ्टी हो, कंप्लायंस सिस्टम हो ये बहुत बड़ी प्रेरणा है। ये भारत जैसे, छोटे किसानों वाले बड़े एग्रीकल्चर नेशन के लिए बहुत बड़ी सीख है।

न्यूज़ीलैंड ने ज़ेस्प्री मॉडल से दिखाया है कि छोटे किसान भी बाज़ार के एक बड़े ब्रैंड बन सकते हैं। न्यूज़ीलैंड की क्लाइमेट-स्मार्ट प्रिसिजन फार्मिंग टेक्नॉलॉजी में भी हमारे लिए सीखने को बहुत कुछ है।

साथियों,

यहां के मानुका हनी को लिक्विड गोल्ड कहा जाता है। जैसे यहां हनी ट्रेडिशन और टेस्ट के अलावा हेल्थ एंड वेलनेस से जुड़ा है वैसे ही भारत के आयुर्वेद में भी हनी का बहुत बड़ा महत्व है। आपको ये जानकर अच्छा लगेगा कि भारत में भी हम बी-कीपिंग को लेकर एक मिशन चला रहे हैं। इससे भारत में हनी प्रोडक्शन में काफी बढ़ोतरी हुई है।

और आजकल तो हिमालय की ऊंचाइयों से जो हनी आता है, वो गोल्ड क्या, डायमंड बनता जा रहा है। मैं समझता हूं, न्यूजीलैंड से हम हनी प्रोडक्शन और बढ़ाने के बारे में भी बहुत कुछ सीख सकते हैं।

साथियों,

इस साल इंडिया–न्यूजीलैंड स्पोर्टिंग रिलेशन्स के सौ साल पूरे हो रहे हैं। सौ साल पहले हमारी हॉकी टीम न्यूजीलैंड खेलने आई थी। उस टूर में मेजर ध्यानचंद के शानदार परफॉर्मेंस की हर तरफ चर्चा हुई थी। उनकी हॉकी ने न्यूजीलैंड के लोगों का भी दिल जीत लिया था।

साथियों,

कंटेंट क्रिएटर्स की भाषा में कहूं, तो ये कोलैब का जमाना है। न्यूज़ीलैंड और भारत स्पोर्ट्स में भी बहुत ही शानदार कोलैब कर सकते हैं। जैसे एक उदाहरण रग्बी का है। मुझे अभी-अभी बताया गया है कि कुछ देर पहले ही ऑल ब्लैक ने रग्बी के मैच में शानदार जीत दर्ज की है। भारत रग्बी में न्यूजीलैंड से सीखना चाहता है। भारत भी रग्बी में आगे आए, इसके लिए हमें हमें कोच चाहिए, एक्सपर्ट्स चाहिए, इसमें न्यूज़ीलैंड इसमें हमारी बहुत help कर सकता है। हाल ही में भुवनेश्वर में “न्यूज़ीलैंड रग्बी” और “रग्बी इंडिया” के coaching program को मैं एक अच्छी शुरुआत मानता हूं।

साथियों,

आज यहां आने से पहले, मैं यहाँ न्यूज़ीलैंड के एक स्पोर्ट्स स्टार्टअप event में गया था। स्पोर्ट्स टेक में हो रहे इनोवेशन्स ने नए ideas ने वाकई मुझे प्रभावित किया। मुझे विश्वास है कि हम स्पोर्ट्स टेक में साथ मिलकर काफी कुछ कर सकते हैं।

भारत और न्यूज़ीलैंड का फ्यूचर, आपस में जुड़ा हुआ है। इसका एक उदाहरण, स्पेस सेक्टर भी है। भारत का चंद्रयान जब मून के साउथ पोल पर लैंड किया, पूरा न्यूजीलैंड नाच रहा था उस दिन। और उस दिन हम सबको गर्व हुआ।

अब आपको मैं गर्व की एक और बात बताता हूं। आपको गर्व दिलाने में इस सक्सेस में न्यूजीलैंड की टेक्नॉलजी का भी योगदान रहा है। न्यूजीलैंड की स्पेस कंपनी ने कई अवसरों पर हमारे साथ मिलकर काम किया है। हम इस सहयोग को और आगे ले जाने के लिए काम कर रहे हैं।

साथियों,

स्पेस सेक्टर ये बताने के लिए काफी है कि भारत और न्यूज़ीलैंड की इकॉनॉमी, एक-दूसरे को कितना कुछ दे सकती हैं। यही हमारे ट्रेड अग्रीमेंट की भी स्पिरिट है। ये ट्रेड अग्रीमेंट विकसित भारत की तरफ हमारी यात्रा को गति देगा। और भारत और न्यूज़ीलैंड दोनों के बिजनेस को नए अवसर देगा।

साथियों,

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच एक और बहुत बड़ी सम्मानता है। ये समानता, हमारे इंडिजनेस कल्चर की है, इंडिजनेस कल्चर को सेलिब्रेट करने, उसको संरक्षण देने की है। और आज मैं माओरी समाज को विशेष रूप से याद करना चाहता हूं।

मैंने हाका को केवल एक performance के रूप में ही नहीं देखा। मैंने हाका में, एक समाज की आत्मा देखी है। उसमें साहस है, आत्मसम्मान है, अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा है, और पूरे समुदाय की सामूहिक शक्ति का एहसास है।

साथियों,

माओरी संस्कृति में एक बहुत सुंदर शब्द है- मना-कितांगा। इसका मतलब है, सम्मान देना, अपनापन देना, और पूरे मन से उसकी देखभाल करना। भारत में भी हम कहते हैं 'अतिथि देवो भवः।'

शब्द अलग हैं, परिवेश अलग हैं, पहनावा अलग हैं, भाषाएं अलग हैं, लेकिन भावना बिल्कुल एक ही है।

ऐसे ही माओरी संस्कृति में परिवार के लिए एक सुंदर शब्द है—फानो यानि परिवार। इसमें कई पीढ़ियाँ होती हैं। रिश्ते होते हैं। पूरा समुदाय होता है। भारत भी, परिवार को केवल एक सामाजिक व्यवस्था नहीं मानता, हमारे लिए फैमिली, एक इंस्टीट्यूशन है।

साथियों,

माओरी परंपरा का एक और सुंदर विचार है— काईत्या कितांगा। ये हमें सिखाती है कि हम प्रकृति के मालिक नहीं हैं। हम उसके संरक्षक हैं। भारत में भी कहा गया है— 'माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः।' पृथ्वी हमारी माता है। इसी सोच को आधार बनाते हुए हम भारत में धरती मां के संरक्षण के लिए, एक पेड़ मां के नाम, प्राकृतिक खेती मिशन, जैसे अनेकों अभियान चला रहे हैं।

साथियों,

मैं जानता हूं, हजारों किलोमीटर दूर रहते हुए भी आपके दिल के किसी न किसी कोने में, दिनभर की प्रक्रिया में कहीं न कहीं हिंदुस्तान झलकता ही रहता है, हिंदुस्तान बसता ही है। सही है कि नहीं है? शरीर यहां होगा, मन? और इसीलिए, आप भारत की हर उपलब्धि पर भी नज़र रखते हैं।

और जब क्रिकेट स्टेडियम में बैठकर के देखते हैं, तो बहुत सी चीज़ें देखने की छूट जाती हैं। लेकिन घर में टी.वी. पर बैठकर के जब देखते हैं, तो हर बारीकी का पता चलता है। वैसा ही, आपको भी भारत की हर बारीकी का पता चलता है। और यही बात हमें सबसे खास बनाती है।

भारतीय देश से बाहर जिस देश में रहते हैं, वहां उस देश की प्रगति में मदद करते हैं, और अपने देश के विकास की भी जानकारी रखते हैं।

साथियों,

हम जितना प्यार जन्मभूमि को करते हैं, उतना ही समर्पण कर्मभूमि को भी करते हैं।

साथियों,

वैश्विक चुनौतियों के बीच, आज भारत जिस तेजी से विकास कर रहा है वो अभूतपूर्व है। मैं आपके सामने देश की उपलब्धियों का भारत के सामर्थ्य का एक गुलदस्ता प्रस्तुत करुंगा। यह गुलदस्ता मैं आपके लिए लेकर के आया हूँ। और मैं पक्का मानता हूँ इस गुलदस्ते में आपकी पसंद का कोई न कोई फूल ज़रूर होगा, जो आपको सुंदर भी लगेगा और गर्व से भर भी देगा।

तो आप तैयार हैं? गुलदस्ता पेश करूँ? अब आपको ढूँढना है आपका फूल कहाँ है उसमें, या तो सारे के सारे फूल आपके हैं।

साथियों,

भारत आज दुनिया की fastest growing major economy है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा Vaccine Producer है। भारत Mobile Data Consumption में दुनिया के अग्रणी देशों में है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Mobile Manufacturer है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Telecom Market है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Wheat Producer है। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा Milk Producer है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Fish Producer है।

साथियों,

इतना ही नहीं, आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Automobile Market है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Startup Ecosystem बन चुका है। भारत बहुत जल्द दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Renewable Energy Producer बनने जा रहा है। Solar Energy Capacity में भी भारत दुनिया के बड़े देशों में शामिल हो चुका है।

साथियों,

आज का भारत, दुनिया को विकास के नए मॉडल भी दे रहा है। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े Digital Identity Platform का सफल संचालन कर रहा है। आज भारत में UPI के माध्यम से हर महीने अरबों Digital Transactions हो रहे हैं। भारत के Digital Public Infrastructure में आज दुनिया के दर्जनों देश दिलचस्पी दिखा रहे हैं। Drone Technology और Space Economy में भारत नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

ये उस नए भारत की तस्वीर हैं, जो दिखाती हैं कि कैसे भारत न्यूजीलैंड की तरह की इकॉलॉजी और इकॉनॉमी दोनों में बैलेंस बनाकर चल रहा है।

साथियों,

भारत की इस ग्रोथ का एक और पहलू भी है, ये पहलू हमारी विरासत है, हमारी हैरिटेज है। भारत, जितना महत्व अपनी इकॉनॉमी और इकॉलॉजी को देता है, उतना ही फोकस, अपनी हैरिटेज पर भी करता है।

साथियों,

भारत कैसे काम करता है, इसका उदाहरण श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवित्र स्वरूप हैं। जब अफगानिस्तान में संकट आया, तो हम गुरू ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूपों को पूरे मान के साथ भारत लेकर आए।

साथियों,

हमारे महान सिख गुरुओं ने पूरी मानवता को सेवा, साहस, समानता और करुणा का संदेश दिया है। दुनिया के हर हिस्से में गुरुद्वारे, सेवा के सेंटर हैं। कोई भूखा आए, उसे भोजन मिलता है। कोई संकट में हो, उसे सहारा मिलता है।

इसी माहौल में सिख कम्युनिटी के कुछ भाइयों और बहनों ने हमें बताया था कि श्री हरमंदिर साहिब में सेवा के लिए FCRA से जुड़ी कुछ परेशानियां आ रही हैं। हमने उस समस्या का तुरंत समाधान किया।

साथियों,

आप सभी श्री हेमकुंड साहिब जी के बारे में भी जानते हैं। हैं। हिमालय की ऊंचाइयों पर है। साल का लंबा समय बर्फ की चोटियों से घिरा रहता है। वहाँ अगर कोई दर्शन करने के लिए जाना चाहे तो बड़ा कठिन मार्ग है, बहुत कम लोग जा पाते हैं। खास करके हमारे सिख भाई-बहन वहाँ यात्रा के लिए जाते हैं।

वहाँ दर्शन के लिए जाने में, खास करके हमारे बुज़ुर्गों को, हमारे सिख भाई-बहनों को सहूलियत हो, इसलिए सरकार हेमकुंड साहिब तक रोपवे भी बनवा रही है।

साथियों,

हमारी ही सरकार ने साहिबजादों के शौर्य और बलिदान की अमर स्मृति में प्रति वर्ष 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ मनाना प्रारंभ किया है। आज यह दिवस पूरे देश के लिए, प्रेरणा का पर्व बन चुका है। आज केरलम से लेकर असम तक का बच्चा भी चारो साहिबजादों और माता गुजरी के बलिदान के बारे में जानने लगा है।

‘वीर बाल दिवस’ ने भारत के अनगिनत बच्चों के मन में युवाओं के हृदय में अटूट साहस का संचार किया है।

साथियों,

मैं आपसे पवित्र जोड़े साहब की भी बात करूंगा। मेरी सरकार में मेरे एक साथी हैं, श्रीमान हरदीप पुरी जी। पुरी परिवार के पूर्वज श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के सेवादार थे। हरदीप पुरी जी ने मुझे यह बताया था की उनके परिवार ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और माता साहिब कौर जी के “जोड़े साहब” 300 साल से संजो के रखे हैं।

बंटवारे के समय पुरी साहब के पूर्वज इन्हें सुरक्षित दिल्ली ले आए थे। पवित्र “जोड़े साहब” को उनका परिवार सिख संगत को सौंपना चाहता था जिससे की ज़्यादा से ज़्यादा लोग इनके दर्शन कर सकें।

फिर हमने एक समिति बनाई, जो सिख परंपराओं को जानते हैं, जानकारों की हमने advice ली और हमने निर्णय लिया कि इन पवित्र जोड़े साहब को वहां ले जाया जाए जहां श्री गुरु गोविंद सिंह जी के चरण पहली बार पावन भूमि पर आए, जहां उनका जन्म हुआ, यानी हमारे श्री पटना साहिब।

मुझे बहुत खुशी है कि अब यह पवित्र जोड़े साहब पटना साहिब की पावन भूमि पर है और यह मेरा सौभाग्य है कि उस पवित्र अवसर का मुझे साक्षी बनने का, वहां मौजूद रहने का सौभाग्य मिला था। मैं आपसे भी आग्रह करूंगा कि जब भी भारत जाएं, पटना साहिब में उनके दर्शन जरूर करें।

साथियों,

आज मैं यहां से बहुत सारा विश्वास, बहुत सारा प्यार, और बहुत सारी स्मृतियां लेकर जा रहा हूं। और मैं आपसे ये भी कहूंगा, इस बार भारतीय पीएम को न्यूज़ीलैंड आने में 40 साल लगे हैं, लेकिन अब इतना लंबा इंतज़ार आपको नहीं करना पड़ेगा। अब 40 साल नहीं लगेंगे, ये मोदी की गारंटी है।

और मोदी की गारंटी मतलब, गारंटी पूरा होने की गारंटी।

साथियों,

मैं आपसे एक आग्रह भी करना चाहता हूं। हमने कुछ समय पहले, हमारी इंडियन डायस्पोरा के बच्चों के लिए एक नया प्रयोग किया है। हमारे बच्चे भारत को समझें और भारत की विविधता की बात दुनिया तक पहुँचे, इसके लिए हमने भारत को जानो क्विज की शुरुआत की है। अभी इसका कर्टेन रेजर ही हुआ है, और हमारे साथियों ने इसमें ही जिस एनर्जी से पार्टिसिपेट किया है, मैं वही देखकर बहुत प्रभावित हूं।

अब हम इस इवेंट के सिक्स्थ एडिशन को और हाईटेक बना रहे हैं। बहुत सारे इवेंट्स इस बार ऐप के माध्यम से होने वाले हैं। मेरा आग्रह है कि यहाँ जितने भी युवा साथी हैं, वो इस कार्यक्रम का हिस्सा बनें। भारत को जाने और भारत की विरासत को न्यूजीलैंड के लोगों से जोड़ें।

साथियों,

मैं एक शानदार फ्यूचर सामने देख रहा हूं, जिसमें विकसित भारत की रोशनी भी है, और न्यूज़ीलैंड की प्रॉसपैरिटी भी है। इसी विश्वास के साथ, आप सभी का फिर से बहुत-बहुत धन्यवाद।

प्राइम मिनिस्टर लक्सन और उनकी टीम का आभार! न्यूज़ीलैंड की जनता का धन्यवाद!

एक बार फिर मेरे साथ बोलिए, भारत माता की जय! वंदे मातरम्!

थैंक यू !
की ओरा !