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भारत माता की जय । भारत माता की जय।

मंच पर विराजमान हरियाणा के राज्यभपाल आदरणीय श्री कप्ताैन सिंह जी, हरियाणा के मुख्यहमंत्री आदरणीय श्री हुडा जी, केन्द्रि सरकार में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्रीमान नितिन गडकरी जी, मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठन महानुभाव और विशाल संख्या में पधारे हुए प्यांरे भाइयो एवं बहनों।

कल पूरा देश जन्मानष्टामी का पर्व मना रहा था। आज जब श्रीकृष्ण> को याद करते हैं, तो कुरूक्षेत्र की याद बहुत स्वावभाविक आती है। यह कुरूक्षेत्र की धरती, जहां से नैतिकता के विजय का बिगुल बजा था। ये कुरूक्षेत्र की धरती ऐसी है जहां युद्ध के मैदान में शाश्व त शांति का संदेश दिया गया था। शायद विश्वा में गीता एकमात्र ग्रंथ ऐसा है, जिसकी रचना युद्ध की भूमि में हुई थी। ऐसे हरियाणा की धरती पर आज आने का मुझे सौभाग्य मिला।

प्रधानमंत्री बनने के बाद हरियाणा में मेरा पहला सरकारी कार्यक्रम है। लेकिन आप सबने जो उमंग, उत्सााह और प्यासर दिया है, इसके लिए मैं हरियाणा का बहुत-बहुत आभारी हूं। मैं हरियाणा के भाइयो-बहनों को विश्वा स दिलाता हूं, आपने जो प्याकर दिया है, आपने जो विश्वाेस दिया है, इसे मैं ब्याइज समेत लौटाऊँगा, विकास करके लौटाऊँगा। मैं हरियाणा को उतना ही जानता हूं, जितना मैं गुजरात को जानता हूं। कई वर्षों तक यहां रहने का मुझे अवसर मिला। यहां के जीवन को जानने का अवसर मिला। बहुत कुछ मुझे हरियाणा की धरती से सीखने को भी मिला है और मेरे लिए गर्व की बात है, मैं उस धरती से आया हूं, जिस धरती पर स्वाईमी दयानंद सरस्वलती का जन्मे हुआ था और हरियाणा के हर कोने में आज भी स्वा मी दयानंद सरस्वलती की शिक्षा-दीक्षा का हर परिवार में महात्य्म है। यहां के जीवन मूल्योंद में, यहां के सामाजिक जीवन में, स्वाामी दयानंद सरस्वंती की शिक्षा-दीक्षा की छाया आज भी हम महसूस करते हैं और इसलिए, जो मूल्योंय में विश्वाीस करते हैं, जो नैतिकता में विश्वाेस करते हैं, उनको इस धरती पर आदर होना बहुत स्वासभाविक है। यहां के लोगों के प्रति आदर होना बहुत स्वाोभाविक है। हरियाणा के व्यं्ग्या विनोद से मैं भली-भांति परिचित हूं। कितनी ही कठिन से कठिन बात को भी व्यंदग्य और विनोद से आगे बढ़ाना, यह हरियाणा की विशेषता मैंने देखी है और बड़े सहज ग्रामीण लहजे में।

इतना बड़ा यह समारोह किस बात का सबूत देता है, इतनी बड़ी भीड़ किस बात का संदेश देती है? भाइयो-बहनों, ये उत्साीह, ये उमंग, ये भीड़़ इस बात का भरोसा देती है, इस बात का संदेश देती है कि देश की जनता को विकास में कितना विश्वाैस है। सामान्यक मानवीय विकास उसकी प्राथमिकता बनी हुई है। चाहे किसान हो, मजदूर हो, टैक्सीी चलाने वाला रिक्शा चलाने वाला ड्राइवर हो, आप किसी से भी पूछिये, जब बात करते हैं तो उसको लगता है कि भाई, अब बहुत दिन हो गए, अब पिछड़े हुए रहना नहीं है। दुनिया आगे बढ़ रही है, हमें भी आगे बढ़ना है। अगर आगे बढ़ना है, विकास ही एक मार्ग है, जो हमें आगे ले जाएगा।

आज जो हमारी कठिनाइयां हैं, उन कठिनाइयों से मुक्ति भी विकास से ही आने वाली है। हमारे परिवार में नौजवानों को रोजगार चाहिए। अगर विकास नहीं होगा तो रोजगार के अवसर कहां से प्राप्तं होंगे और अगर रोजगार के अवसर प्राप्तो नहीं होंगे तो हमारे नौजवानों को रोजगार कहां से मिलेगा? कितनी ही ज्याादा जमीन क्यों न हो, किसान भी आज क्याऔ सोच रहा है? किसान भी ये सोचता है कि अगर तीन बेटे हैं तो एक बेटा तो खेती करेगा, दो बेटे शहर में चले जाएं, नौकरी करें, रोजगार कमा लें, यह किसान भी सोचने लगा है। इस धरती की सच्चाएई को समझ कर हमें देश को विकास की दिशा में ले जाना होगा और विकास की दिशा में जाना है तो एक बात निश्चित है, जो देश इंफ्रास्ट्रदक्चार को बल देता है, आधुनिक से आधुनिक इंफ्रास्ट्रनक्चेर को महत्वइ देता है, रास्तेब हो, रेल हो, एयरपोर्ट हो, इस व्यनवस्थान को जल्दी विकसित करता है, वहां की विकास की संभावनाएं बहुत तेज गति से बढ़ती है। अपना हरियाणा इसका उन्नकत उदाहरण है। कहीं बाहर जा कर इसे समझने की आवश्यपकता नहीं है। मैं हरियाणा के हर गली मोहल्लेा में घूमा हुआ इंसान हूं, इसलिए मुझे पता है। आपने देखा होगा, नेशनल हाइवे वन, जो पूरा उत्तइर से दक्षिण, हरियाणा के बीच से गुजरता है। आपने देखा होगा, इस रोड के दोनों तरफ जितना तेज गति से विकास हुआ है। लेकिन जैसे अंदर की तरफ जाते हैं हरियाणा में तो हमें वह कमी महसूस होती है। एक अच्छाद रोड बनने के कारण, नेशनल हाइवे वन, उसके दोनों तरफ तेज गति से विकास हुआ। उसी प्रकार से रास्तोंा का नेटवर्क जब बनता है तो विकास को वह गति देता है। हमारे शरीर में भी रक्ता पहुंचाने के लिए जैसे धमनी होती है, नसें होती हैं, जिसके माध्यकम से रक्तक चालन होता है और जीवन गति पाता है, उसी प्रकार से रास्ते, राष्ट्रय के जीवन में धमनी का काम करते हैं, जो विकास के सुदूर इलाके में पहुंचाने का काम करते हैं।

यह रास्ता हरियाणा और राजस्थाोन को जोड़ रहा है। हरियाणा और राजस्थाहन को जोड़ने का मतलब, सिर्फ इस पर गाडि़यां आएंगी जाएंगी, वो नहीं है। दो राज्योंन को इस प्रकार से जब एक अतिरिक्तऔ रास्ता़ मिल जाता है, और उसकी कैपिसिटी जब बढ़ जाती है, तो व्या्पार क्षेत्र के लिए, यातायात के लिए यह बहुत सुविधाजनक बनता है और इसके कारण न सिर्फ हरियाणा का भला होने वाला है बल्कि इसके साथ-साथ राजस्थािन का भी भला होने वाला है। हरियाणा और राजस्थाान का भला है तो देश का भी भला होने वाला है और इसलिए आपने जैसा हम पर विश्वाऔस रखा है, हमने इंफ्रास्ट्र क्च र को प्राथमिकता दी है और इंफ्रास्ट्राक्चनर भी पिछली शताब्दीे वाला नहीं चलेगा। कोई भी कांट्रेक्टसर है, ऐसे ही डामर डाल दिया, थोड़ा काला रंग हो गया, रोड बन गया। पहली बारिश में सब तबाह हो जाता है। पता नहीं पैसे किसकी जेब में जाते हैं। अब वक्तह बदला है। देश की जनता, दुनिया में जो बदलाव आ रहा है, देख रही है। उसे भी अपने क्षेत्र में अंतरराष्ट्री य स्तंर के , इंटरनेशनल लेवल के रास्तोंा की भूख जगी है। और हमें यह पूरा करना चाहिए। अगर हमें देश को आगे ले जाना है तो हमें आगे के बारे में सोचना होगा। इसलिए सिर्फ रास्तोंक के जाल, रास्तोंम के नेटवर्क, इसी मात्र से इंफ्रास्ट्र क्च।र का काम पूरा नहीं होता है। सिर्फ रेल के नेटवर्क से ही 21 वीं सदी के नेटवर्क का काम पूरा नहीं होगा। अगर हमें 21वीं सदी में आगे बढ़ना है तो आप्टिकल फाइबर का नेटवर्क लगाना पड़़ेगा, गैस ग्रिड करनी पड़ेगी, वाटर ग्रिड करनी पड़ेगी, बिजली की ग्रिड घर घर तक पहुंचानी पड़ेगी। आधुनिक से आधुनिक विज्ञान और उसकी कनेक्टिविटी हर गांव, हर घर तक पहुंचे, उस दिशा में हमें योजना बनानी होगी। हम बहुत तेजी से, हिन्दु स्ताेन के गांवों को आधुनिक विज्ञान का लाभ मिले, दूर-सुदूर गांवों के स्कूालों में बच्चों को अच्छीक शिक्षा मिले, टेक्नोबलोजी के माध्यघम से लांग डिस्टें स एजुकेशन का लाभ मिले, ब्रांडबैंड कनेक्टिविटी का जाल बिछे, आप्टिकल फाइबर नेटवर्क का जाल बिछाये जाएं, एक आधुनिक भारत के निर्माण के लिए, नई पीढ़ी की आवश्यककताओं की पूर्ति के लिए इन बातों पर बल देने की दिशा में हम प्रयासरत हैं।

भाइयो-बहनों, मैंने 15 अगस्तन को राष्ट्र के नाम अपने मन की कुछ बातें कही थी। लेकिन कुछ लोगों ने कहा कि 15 अगस्तप को लाल किले पर से मोदी जी ने भ्रष्टाुचार के खिलाफ कुछ बोला नहीं। मैंने एक बात कही थी, मैंने कहा था कि कुछ लोगों की ऐसी आदत हो गई है, कोई भी काम हो तो पूछते हैं, मेरा क्याा? और जब बात नहीं बनती है तो हाथ ऊपर कर कह देते हैं कि मुझे क्यात? ये तो मेरा क्याा, मुझे क्या, इसने देश को तबाह करके रखा हुआ है। यहां मौजूद कोई व्ययक्ति ऐसा नहीं होगा जो भ्रष्टााचार को समर्थन देता हो। आप मुझे बताइए, भ्रष्टाईचार से देश को मुक्ता कराना चाहिए या नहीं? इसके लिए कठोर कदम उठाने चाहिए या नहीं उठाने चाहिए? अगर मैं कठोर कदम उठाता हूँ तो क्या आपका आर्शीवाद है? आपके आर्शीवाद की ताकत से इस देश की इस बीमारी को हम हटा सकते हैं, निकाल सकते हैं। ये बीमारी इतनी भयानक है, इतनी फैल चुकी है, कैंसर से भी ज्यालदा। पूरे राष्ट्रश जीवन को तबाह करने वाली बीमारी है ये और इसलिए पूरे देश में एक मिजाज बनाना है और मैं अनुभव कर रहा हूं, देश अब लंबे अरसे तक बुराइयों को सहने के लिए तैयार नहीं है। देश लंबे अरसे तक बुराइयों को झेलने के लिए तैयार नहीं है।

मेरे हरियाणा के भाइयो-बहनो, जब चुनाव के दिनों में आपके बीच आने का अवसर मिला था, तब भी मैंने कहा था, कि हरियाणा का मुझ पर एक विशेष अधिकार है। और आज प्रधान सेवक के रूप में कार्यभार संभालने के बाद भी दुबारा मैं कहता हूं- हरियाणा का मुझ पर विशेष अधिकार है। भाइयो-बहनो, केन्द्र। सरकार की कई योजनाएं यहां कोई 4 साल पहले पूरी होनी चाहिए थी, कोई 2 साल पहले पूरी होनी चाहिए थी, वह विलंबित पड़ी हुई है। मैं हरियाणा के भाइयों-बहनों को विश्वाास दिलाता हूं कि भूतकाल में जिन परियोजनाओं को शुरू किया गया था, जो आज अटकी पड़ी हैं, उनको बहुत ही जल्दप प्रारंभ करके, बहुत ही तेज गति से पूर्ण हो, इसके लिए दिल्लीो में बैठी सरकार पूरा प्रयास करेगी।

हरियाणा के किसान देश के अन्न् के भंडार भरते हैं। भाइयो-बहनों, हमारा किसान देश के अन्नक के भंडार तो भरता है, लेकिन किसानों की जेब खाली रह जाती है। हमें देश की कृषि को उस दिशा में आगे ले जाना है, ताकि देश में अनाज के भंडार भी भरें और किसान का जेब भी भरे। हरियाणा ने देश के कृषि विकास में बहुत योगदान किया है। यहां के किसानों की मेहनत हिन्दुकस्ताान के नागरिकों का पेट भरने में कभी पीछे नहीं रही है। मैं हरियाणा के किसानों को नमन करता हूं। लेकिन मैं हरियाणा के किसानों को विश्वामस दिलाता हूं कि जैसे अटल बिहारी वापयेजी जी की सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़़क योजना के द्वारा हर गांव को पक्कीज सड़क से जोड़ने का बीड़ा उठाया था, हमने तय किया है प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, ताकि गांव-गांव यदि किसानों को पानी मिला तो किसान को किसी की भी जरूरत नहीं पड़ती है। एक बार पानी मिल गया तो किसान मिट्टी में से सोना पैदा कर देता है। किसान खेत में मजदूरी करके हिन्दु स्ता न के भाग्य को बदल सकता है और इसलिए अगर देश के गांव के जीवन को बदलना है, हमारी कृषि को आधुनिक बनाना है, वैज्ञानिक ढंग से हमारा किसान कृषि करता चले, कृषि के साथ ही पशुपालन भी हो, ताकि कभी भी वर्षा कमी अधिकता के कारण किसान को परेशान होने की नौबत न आए। पशुपालन के माध्यधम से अगर संकट के दिनों में एक साल गुजारने की नौबत आए तो हमारा किसान आराम से गुजार दे, उस प्रकार की उसकी व्य वस्थाम होनी चाहिए।

भाइयो-बहनों, आइए, विकास के मंत्र को हम हरियाणा के गांव-गांव, गली-गली, घर-घर पहुंचायें, जन-जन तक पहुंचायें, और हिन्दुकस्ताहन के अग्रिम राज्योंो में हरियाणा भी अपनी जगह बनाये। उसके लिए हम सब को मिल कर के दिल्लीम सरकार हो या राज्यज सरकार हो, कंधे से कंधा मिला कर के काम करें और हरियाणा के भाग्यत को बदलें। इसी अपेक्षा के साथ, आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं।

मेरे साथ बोलिये, भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय।

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“Sacrifice of Sahibzadas of Guru Gobind Singh Ji for India's civilization, culture, faith and religion is incomparable”
“Today we feel proud when we see the youth of India excelling in the world of startups. We feel proud when we see that the youth of India are innovating and taking the country forward”
“This is New India, which does not hold back from innovating. Courage and determination are the hallmark of India today”
“Children of India have shown their modern and scientific temperament in the vaccination program and since January 3, in just 20 days, more than 40 million children have taken the corona vaccine”

कार्यक्रम में उपस्थित मंत्रीपरिषद के हमारे साथी स्मृति ईरानी जी, डॉक्टर महेंद्रभाई, सभी अधिकारीगण, सभी अभिभावक एवं शिक्षकगण, और भारत के भविष्य, ऐसे मेरे सभी युवा साथियों!

आप सबसे बातचीत करके बहुत अच्छा लगा। आपसे आपके अनुभवों के बारे में जानने को भी मिला। कला-संस्कृति से लेकर वीरता, शिक्षा से लेकर इनोवेशन, समाजसेवा और खेल, जैसे अनेकविध क्षेत्रों में आपकी असाधारण उपलब्धियों के लिए आपको अवार्ड मिले हैं। और ये अवार्ड एक बहुत बड़ी स्‍पर्धा के बाद आपको मिले हैं। देश के हर कोने से बच्‍चे आगे आए हैं। उसमें से आपका नंबर लगा है। मतलब कि अवार्ड पाने वालों की संख्‍या भले कम है, लेकिन इस प्रकार से होनहार बालकों की संख्‍या हमारे देश में अपरम्‍पार है। आप सबको एक बार फिर इन पुरस्कारों के लिए बहुत बहुत बधाई। आज National Girl Child Day भी है। मैं देश की सभी बेटियों को भी बधाई देता हूं, शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों

आपके साथ-साथ मैं आपके माता-पिता और टीचर्स को भी विशेष रूप से बधाई देना चाहता हूँ। आज आप इस मुकाम पर पहुंचे हैं, इसके पीछे उनका भी बहुत बड़ा योगदान है। इसीलिए, आपकी हर सफलता आपके अपनों की भी सफलता है। उसमें आपके अपनों का प्रयास और उनकी भावनाएं शामिल हैं।

मेरे नौजवान साथियों,

आपको आज ये जो अवार्ड मिला है, ये एक और वजह से बहुत खास है। ये वजह है- इन पुरस्कारों का अवसर! देश इस समय अपनी आज़ादी के 75 साल का पर्व मना रहा है। आपको ये अवार्ड इस महत्वपूर्ण कालखंड में मिला है। आप जीवन भर, गर्व से कहेंगे कि जब मेरा देश आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा था, तब मुझे ये अवार्ड मिला था। इस अवार्ड के साथ आपको बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी भी मिली है। अब दोस्तों की, परिवार की, समाज की, हर किसी की आपसे अपेक्षाएँ भी बढ़ गई हैं। इन अपेक्षाओं का आपको दबाव नहीं लेना है, इनसे प्रेरणा लेनी है।

युवा साथियों, हमारे देश के छोटे छोटे बच्चों ने, बेटे-बेटियों ने हर युग में इतिहास लिखा है। हमारी आज़ादी की लड़ाई में वीरबाला कनकलता बरुआ, खुदीराम बोस, रानी गाइडिनिल्यू जैसे वीरों का ऐसा इतिहास है जो हमें गर्व से भर देता है। इन सेनानियों ने छोटी सी उम्र में ही देश की आज़ादी को अपने जीवन का मिशन बना लिया था, उसके लिए खुद को समर्पित कर दिया था।

आपने टीवी देखा होगा, मैं पिछले साल दीवाली पर जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में गया था। वहां मेरी मुलाकात श्रीमान बलदेव सिंह और श्रीमान बसंत सिंह नाम के ऐसे वीरों से हुई जिन्होंने आज़ादी के तुरंत बाद जो युद्ध हुआ था कश्‍मीर की धरती पर, अभी तो इनकी उम्र बहुत बड़ी है, तब वो बहुत छोटी उम्र के थे और उन्‍होंने उस युद्ध में बाल सैनिक की भूमिका निभाई थी। और हमारी सेना में पहली बार बाल-सैनिक के रूप में उनकी पहचान की गई थी। उन्होंने अपने जीवन की परवाह न करते हुए उतनी कम उम्र में अपनी सेना की मदद की थी।

इसी तरह, हमारे भारत का एक और उदाहरण है- गुरु गोविन्द सिंह जी के बेटों का शौर्य और बलिदान! साहिबज़ादों ने जब असीम वीरता के साथ, धैर्य के साथ, साहस के साथ पूर्ण समर्पण भाव से बलिदान दिया था तब उनकी उम्र बहुत कम थी। भारत की सभ्यता, संस्कृति, आस्था और धर्म के लिए उनका बलिदान अतुलनीय है। साहिबज़ादों के बलिदान की स्मृति में देश ने 26 दिसम्बर को 'वीर बाल दिवस' की भी शुरुआत की है। मैं चाहूँगा कि आप सब, और देश के सभी युवा वीर साहिबज़ादों के बारे में जरूर पढ़ें।

आपने ये भी जरूर देखा होगा, कल दिल्ली में इंडिया गेट के पास नेताजी सुभाषचंद्र बोस की डिजिटल प्रतिमा भी स्थापित की गई है। नेताजी से हमें सबसे बड़ी प्रेरणा मिलती है- कर्तव्य की, राष्ट्रप्रथम की! नेताजी से प्रेरणा लेकर हम सबको, और युवा पीढ़ी को विशेष रूप से देश के लिए अपने कर्तव्यपथ पर आगे बढ़ना है।

साथियों,

हमारी आजादी के 75 साल इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आज हमारे सामने अपने अतीत पर गर्व करने का, उससे ऊर्जा लेने का समय है। ये समय वर्तमान के संकल्पों को पूरा करने का है। ये समय भविष्य के लिए नए सपने देखने का है, नए लक्ष्य निर्धारित करके उन पर बढ़ने का है। ये लक्ष्य अगले 25 सालों के लिए हैं, जब देश अपनी आज़ादी के सौ साल पूरे करेगा।

अब आप कल्‍पना कीजिए, आज आप में से ज्‍यादातर लोग 10 और 20 के बीच की उम्र के हैं। जब आजादी के सौ साल होंगे तब आप जीवन के उस पड़ाव पर होंगे, तब ये देश कितना भव्‍य, दिव्‍य, प्रगतिशील, ऊंचाइयों पर पहुंचा हुआ, आपका जीवन कितना सुख-शांति से भरा हुआ होगा। यानी, ये लक्ष्य हमारे युवाओं के लिए हैं, आपकी पीढ़ी और आपके लिए हैं। अगले 25 सालों में देश जिस ऊंचाई पर होगा, देश का जो सामर्थ्य बढ़ेगा, उसमें बहुत बड़ी भूमिका हमारी युवा पीढ़ी की है।

साथियों,

हमारे पूर्वजों ने जो बोया, उन्‍होंने जो तप किया, त्‍याग किया, उसके फल हम सबको नसीब हुए हैं। लेकिन आप वो लोग हैं, आप एक ऐसे कालखंड में पहुंचे हैं, देश आज उस जगह पर पहुंचा हुआ है कि आप जो बोऐंगे उसके फल आपको खाने को मिलेंगे, इतना जल्‍दी से बदलाव होने वाला है। इसीलिए, आप देखते होंगे, आज देश में जो नीतियाँ बन रही हैं, जो प्रयास हो रहे हैं, उन सबके केंद्र में हमारी युवा पीढ़ी है, आप लोग हैं।

आप किसी सेक्टर को सामने रखिए, आज देश के सामने स्टार्टअप इंडिया जैसे मिशन हैं, स्टैंडअप इंडिया जैसे प्रोग्राम चल रहे हैं, डिजिटल इंडिया का इतना बड़ा अभियान हमारे सामने है, मेक इन इंडिया को गति दी जा रही है, आत्मनिर्भर भारत का जनआंदोलन देश ने शुरू किया है, देश के हर कोने में तेजी से आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर विस्तार ले रहा है, हाइवेज़ बन रहे हैं, हाइस्पीड एक्सप्रेसवेज़ बन रहे हैं, ये प्रगति, ये गति किसकी स्पीड से मैच करती है? आप लोग ही हैं जो इन सब बदलावों से खुद को जोड़कर देखते हैं, इन सबके लिए इतना excited रहते हैं। आपकी ही जेनेरेशन, भारत ही नहीं, बल्कि भारत के बाहर भी इस नए दौर को लीड कर रही है।

आज हमें गर्व होता है जब देखते हैं कि दुनिया की तमाम बड़ी कंपनियों के CEO, हर कोई उसकी चर्चा कर रहा है, ये CEO कौन हैं, हमारे ही देश की संतान हैं। इसी देश की युवा पीढ़ी है जो आज विश्‍व में छाई हुई है। आज हमें गर्व होता है जब देखते हैं कि भारत के युवा स्टार्ट अप की दुनिया में अपना परचम फहरा रहे हैं। आज हमें गर्व होता है, जब हम देखते हैं कि भारत के युवा नए-नए इनोवेशन कर रहे हैं, देश को आगे बढ़ा रहे हैं। अब से कुछ समय बाद, भारत अपने दमखम पर, पहली बार अंतरिक्ष में भारतीयों को भेजने वाला है। इस गगनयान मिशन का दारोमदार भी हमारे युवाओं के पर ही है। जो युवा इस मिशन के लिए चुने गए हैं, वो इस समय कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

साथियों,

आज आपको मिले ये अवार्ड भी हमारी युवा पीढ़ी के साहस और वीरता को भी celebrate करते हैं। ये साहस और वीरता ही आज नए भारत की पहचान है। कोरोना के खिलाफ देश की लड़ाई हमने देखी है, हमारे वैज्ञानिकों ने, हमारे वैक्सीन Manufacturers ने दुनिया में लीड लेते हुये देश को वैक्सीन्स दीं। हमारे हेल्थकेयर वर्कर्स ने मुश्किल से मुश्किल समय में भी बिना डरे, बिना रुके देशवासियों की सेवा की, हमारी नर्सेस गाँव गाँव, मुश्किल से मुश्किल जगहों पर जाकर लोगों को वैक्सीन लगा रही हैं, ये एक देश के रूप में साहस और हिम्मत की बड़ी मिसाल है।

इसी तरह, सीमाओं पर डटे हमारे सैनिकों की वीरता को देखिए। देश की रक्षा के लिए उनकी जांबाजी हमारी पहचान बन गई है। हमारे खिलाड़ी भी आज वो मुकाम हासिल कर रहे हैं, जो भारत के लिए कभी संभव नहीं माने जाते थे। इसी तरह, जिन क्षेत्रों में बेटियों को पहले इजाजत भी नहीं होती थी, बेटियाँ आज उनमें कमाल कर रही हैं। यही तो वो नया भारत है, जो नया करने से पीछे नहीं रहता, हिम्मत और हौसला आज भारत की पहचान है।

साथियों,

आज भारत, अपनी वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को मजबूत करने के लिए निरंतर कदम उठा रहा है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्थानीय भाषा में पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है। इससे आपको पढ़ने में, सीखने में और आसानी होगी। आप अपनी पसंद के विषय पढ़ पाएं, इसके लिए भी शिक्षा नीति में विशेष प्रावधान किए गए हैं। देश भर के हजारों स्कूलों में बन रही अटल टिंकरिंग लैब्स, पढ़ाई के शुरुआती दिनों से ही बच्चों में इनोवेशन का सामर्थ्य बढ़ा रही हैं।

साथियों,

भारत के बच्चों ने, युवा पीढ़ी ने हमेशा साबित किया है कि वो 21वीं सदी में भारत को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए कितने सामर्थ्य से भरे हुए हैं। मुझे याद है, चंद्रयान के समय, मैंने देशभर के बच्चों को बुलाया था। उनका उत्साह, उनका जोश मैं कभी भूल नहीं सकता। भारत के बच्चों ने, अभी वैक्सीनेशन प्रोग्राम में भी अपनी आधुनिक और वैज्ञानिक सोच का परिचय दिया है। 3 जनवरी के बाद से सिर्फ 20 दिनों में ही चार करोड़ से ज्यादा बच्चों ने कोरोना वैक्सीन लगवाई है। ये दिखाता है कि हमारे देश के बच्चे कितने जागरूक हैं, उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का कितना एहसास है।

साथियों,

स्वच्छ भारत अभियान की सफलता का बहुत बड़ा श्रेय भी मैं भारत के बच्चों को देता हूं। आप लोगों ने घर-घर में बाल सैनिक बनकर, स्‍वच्‍छाग्रही बनकर अपने परिवार को स्वच्छता अभियान के लिए प्रेरित किया। घर के लोग, स्वच्छता रखें, घर के भीतर और बाहर गंदगी ना हो, इसका बीड़ा बच्चों ने खुद उठा लिया था। आज मैं देश के बच्चों से एक और बात के लिए सहयोग मांग रहा हूं। और बच्‍चे मेरा साथ देंगे तो हर परिवार में परिवर्तन आएगा। और मुझे विश्‍वास है ये मेरे नन्‍हें-मुन्‍हें साथी, यही मेरी बाल सेना मुझे इस काम में बहुत मदद करेगी।

जैसे आप स्वच्छता अभियान के लिए आगे आए, वैसे ही आप वोकल फॉर लोकल अभियान के लिए भी आगे आइए। आप घर में बैठ करके, सब भाई-बहन बैठ करके एक लिस्‍ट बनाइए, गिनती करिए, कागज ले करके देखिए, सुबह से रात देर तक आप जो चीजों का उपयोग करते हैं, घर में जो सामान है, ऐसे कितने Products हैं, जो भारत में नहीं बने हैं, विदेशी हैं। इसके बाद घर के लोगों से आग्रह करें कि भविष्य में जब वैसा ही कोई Product खरीदा जाए तो वो भारत में बना हो। उसमें भारत की मिट्टी की सुगंध हो, जिसमें भारत के युवाओं के पसीने की सुगंध हो। जब आप भारत में बनी चीजें खरीदेंगे तो क्‍या होने वाला है। एकदम से हमारा उत्‍पादन बढ़ने लग जाएगा। हर चीज में उत्पादन बढ़ेगा। और जब उत्पादन बढ़ेगा, तो रोजगार के भी नए अवसर बनेंगे। जब रोजगार बढ़ेंगे तो आपका जीवन भी आत्मनिर्भर बनेगा। इसलिए आत्मनिर्भर भारत का अभियान, हमारी युवा पीढ़ी, आप सभी से भी जुड़ा हुआ है।

साथियों,

आज से दो दिन बाद देश अपना गणतन्त्र दिवस भी मनाएगा। हमें गणतन्त्र दिवस पर अपने देश के लिए कुछ नए संकल्प लेने हैं। हमारे ये संकल्प समाज के लिए, देश के लिए, और पूरे विश्व के भविष्य के लिए हो सकते हैं। जैसे कि पर्यावरण का उदाहरण हमारे सामने है। भारत पर्यावरण की दिशा में आज इतना कुछ कर रहा है, और इसका लाभ पूरे विश्व को मिलेगा।

मैं चाहूँगा कि आप उन संकल्पों के बारे में सोचें जो भारत की पहचान से जुड़े हों, जो भारत को आधुनिक और विकसित बनाने में मदद करें। मुझे पूरा भरोसा है, आपके सपने देश के संकल्पों से जुड़ेंगे, और आप आने वाले समय में देश के लिए अनगिनत कीर्तिमान स्थापित करेंगे।

इसी विश्वास के साथ आप सभी को एक बार फिर बहुत बहुत बधाई,

सभी मेरे बाल मित्रों को बहुत-बहुत प्‍यार, बहुत-बहुत बधाई, बहुत बहुत धन्यवाद !