Text of PM’s address at 25th Foundation Day of NASSCOM

Published By : Admin | March 1, 2015 | 13:10 IST

सभी महानुभाव!

मैं सबसे पहले तो आपकी क्षमा याचना करता हूं, क्‍योंकि पहले यह कार्यक्रम आज सुबह तय हुआ था। लेकिन मुझे आज कश्‍मीर जाना पड़ा और उसके कारण मैंने Request की थी कि अगर समय बदला जाए तो ठीक होगा। आपने समय बदला और मुझे आप सबको मिलने का अवसर दिया, इसलिए मैं NASSCOM का बहुत आभारी हूं।

शायद ही कोई संगठन इतना जल्‍दी एक Movement बन जाए, आमतौर पर Membership होती है, सब Meetings होती है, सरकार को Memorandum दिये जाते हैं, सरकार से अपेक्षाएं की जाती है, कभी राजी-नराजी प्रकट की जाती है, लेकिन NASSCOM का Character वो नहीं रहा। यह संस्‍था से ज्‍यादा एक बड़ा आंदोलन बन गया और प्रारंभ में जिसने कुछ मोतियों को NASSCOM के धागे के साथ जोड़ दिया। आज धीरे-धीरे भारत का गौरवगान करने वाली एक बहुत बड़ी सुंदर माला बन गया है ।

जब NASSCOM की चर्चा आएगी तो Dewang की जरूर चर्चा आएगी। मेरा Dewang से अच्‍छा परिचय था और जब Y2k को लेकर के बड़ा तूफान खड़ा हो गया था, सारी दुनिया चिंतित थी और उस समय अटल जी की सरकार थी हमारे प्रमोद जी IT विभाग को देखते थे और बड़ा इतना Hype था Y2k के कारण पता नहीं कैसे क्‍या हो जाएगा। और उस समय Dewang के साथ काम करने का अवसर आया था, लेकिन खैर बहुत लम्‍बे समय हमारे बीच रह नहीं वो। मैं उनको आदरपूर्वक अंजली देता हूं और NASSCOM जितनी तेज गति से प्रगति करेगा उतने ही Dewang के ideas हमें हर बार याद आते रहेंगे।

25 साल के कार्यकाल में जब NASSCOM प्रारंभ हुआ तो मैं समझता हूं शायद यह क्षेत्र Hundred Million की Economy से ज्‍यादा नहीं होगा, आज Hundred forty Six Billion तक पहुंच गया। 25 साल में इतना बड़ा Jump, लेकिन ज्‍यादातर जब IT sector की चर्चा होती है, यह तो बात माननी पड़ेगी कि आज IT में जहां हम पहुंचे हैं उसका एक कारण, जो प्रमुख कारण है मुझे लगता है, वो प्रमुख कारण है कि इसमें सरकार कहीं नहीं है। हम जितने दूर रहे उतने ही अच्‍छे है। यह जो सारा करिश्‍मा है वो हमारी युवा पीढ़ी का है। 20, 22, 25 साल के नौजवान जिन्‍होंने उस समय इस क्षेत्र में प्रवेश किया। NASSCOM के इस Network के माध्‍यम से लाखों नौजवानों को रोजगार मिला, उनको अवसर मिले। देश की economy को लाभ हुआ। भारत को आधुनिक बनाने की दिशा में कुछ कदम हम भी चले।

लेकिन इन सबसे भी अलग एक बात जो मुझे हमेशा लगती है इस IT के कारण पूरी दुनिया को भारत की तरफ देखने का रवैया बदलना पड़ा। पहले दुनिया हमें पिछड़े, अंधश्रद्धा में डूबे हुए, सांप-सपेरे वाले, इसी हमारे देश की पहचान बनी हुई थी। लेकिन हमारे नौजवानों ने Computer पर उंगलियां घुमाते-घुमाते सारी दुनिया के दिमाग को बदल दिया और विश्‍व को भारत की एक नई पहचान देने में इस क्षेत्र का एक बहुत बड़ा योगदान है और इसके लिए इस क्षेत्र के साथ जुड़े हुए सभी भारत की इतनी बड़ी महान सेवा के लिए अनेक-अनेक अभिनंदन के अधिकारी है। मैं आपको बधाई देता हूं।

आज जिन महानुभावों ने इस क्षेत्र में योगदान किया है, जिन्‍होंने Innovation के द्वारा, नई-नई Application के द्वारा, अपने start-up Industries को भी बहुत ऊंचाई पर पहुंचाया है। जिन्‍होंने इस क्षेत्र से जो कुछ भी कमाया समाज सेवा के लिए लगाया है जैसे हमारे अजीम प्रेमजी, उन सबका मुझे सम्‍मान करने का अवसर मिला। मैं उन सबको हृदय से बधाई देता हूं। उनके Achievement के लिए NASSCOM को जन्‍म देने वालों से लेकर के NASSCOM को यहां तक पहुंचाने वालों को और NASSCOM के कारण अपने को भी आपको बहुत ऊंचाईयों पर ले जाने वालों को भी मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं और मुझे विश्‍वास है कि आप लोगों का यह सा‍हस, आप लोगों का यह प्रयास नई पीढ़ी को भी प्रेरणा देगा और अनेक नई चीजों को करने के लिए आश्‍वस्‍त करेंगे।

आपका कार्यक्रम है IT- India Tomorrow और आप Innovations पर बल दे रहे हैं। हम भी कुछ दिनों से Digital India की दिशा में चीजों को Synchronize करने का प्रयास कर रहे हैं। वक्‍त इतना तेजी से बदल चुका है कि जितना महत्व Highways का है, उतना ही महत्व i- Ways का है, Information ways. Highways बन गए तो प्रगति होगी और गारंटी जब तक i-way नहीं जुड़ता है अधूरी रह जाती है और इसलिए जब Digital India इस बात को लेकर के चल रहे हैं तो हमारी कल्‍पना है। Digital दृष्टि से जो Infrastructure चाहिए भारत के हर नागरिक को वो व्‍यवस्‍था कैसे उपलब्‍ध हो। उतना वो विस्‍तार होना चाहिए। हम Digital India की जब बात करते है तब Citizen Centric सेवाएं उसको उपलब्‍ध कराने की व्‍यवस्‍था, हम कैसे विकसित करें। हम Digital India की बात करते है, तब Governance में हम किस प्रकार से बदलाव लाएं और मेरा यह मत रहा है। Good Governance का एक पर्याय बन गया है E-Governance और जब मैं E-Governance कहता हूं तब मेरी दृष्टि से वो Easy Governance भी है, Economical Governance भी है। और उस रूप में Governance की सारी परिभाषाएं बदलती जा रही है। हम उसको कैसे आगे बढ़ाएं। हम आज जहां भी पहुंचे हैं, संतोष है ऐसा लगता है, लेकिन जरूरत के हिसाब से देखें तो अभी हम बहुत पीछे हैं। बहुत कुछ करना बाकी है। इतना बड़ा देश, इतने सारे लोग, आप कल्‍पना कर सकते हैं जिस देश में बहुत ही निकट भविष्‍य में 100 करोड़ Mobile Phones लोगों के हाथ में होंगे। Hundred crore क्‍या? अब जितना जल्‍दी आपकी field के लोग Mobile app जितनी तेजी से तैयार करेंगे। मैं समझता हूं उतना तेजी से आप Market को Capture करेंगे और मैं जो यह सलाह दे रहा हूं उसके लिए कोई Consultancy Fee नहीं है।

सिर्फ Banking लीजिए. मैं नहीं मानता हूं कि Bank में कोई जाने वाला है। Mobile Banking पर दुनिया चलने वाली है। हम उसको कैसे आगे बढ़ाएं, Mobile Governance पर चलने वाला है सारी सुविधाएं, सारी आवश्‍यकताएं, इंसान वहीं से प्राप्‍त करना चाहता है। आप तो देखते होंगे कि आज Astrologers भी Mobile पर सुबह क्‍या करना है, क्‍या नहीं करना, बता देते हैं। हर कोई समझता है कि इसका क्‍या उपयोग हो सकता है। हर कोई अपने-अपने तरीके से विकसित कर सकता है NASSCOM ने कभी Agenda नहीं रखा होगा कि Astrology और IT को क्‍या किया जाए, लेकिन लोगों ने कर लिया होगा।

कहने का तात्‍पर्य यह है कि पूजा-पाठ करना है तो भी उनको IT का सहारा लेना है। उसको दुनिया की Latest से Latest जानकारी चाहिए तो भी वो IT का सहारा ले रहा है। अपनी कोई समस्‍या का समाधान करना है तो भी IT से, Shopping करना है तो भी IT से, वह आज एक प्रकार से इस पर Dependent हो गया है और आपके परिवार में जो 18 से नीचे के जितने बच्‍चे हैं उनका एक ही गुरू है Google गुरू, वो सब चीज उसको ही पूछते हैं, वो आपको नहीं पूछेंगे। घर में भी अंदर चर्चा चलती होगी दो भाईयों के बीच में तो अंदर जाकर के पूछ करके आए देखो यह है तो यह इस रूप में उसने स्‍थान ले लिया है। इसलिए हम कल्पना कर सकते हैं कि इसमें व्याप्त की कितनी संभावनाएं पड़ी है और भारत का एक स्‍वभाव है इन चीजों को Adapt करना यह भारत के Nature में है।

हमारे यहां सामान्‍य से सामान्‍य व्‍यक्ति भी.. मैं अपना एक अनुभव बताऊं और मेरे लिए वो बड़ा surprise था। मैं गुजरात में मुख्‍यमंत्री था तो एक तहसील ऐसा था कि जहां मुझे पांच-छह साल वहां काम करने के बाद भी जाने का अवसर नहीं मिला था। मेरा स्‍वभाव रहता था कि मैं ज्‍यादा से ज्‍यादा स्‍थान पर पहुंचु, इलाके में जाऊं, लोगों से मिलूं, यह मेरा आग्रह रहता था। मैं हमारे सरकारी अफसरों को कहता कि भई वहां मुझे जाना है कोई कार्य्रक्रम बनाओ। अब वहां कोई कार्यक्रम बने इतना कोई विकास ही नहीं हुआ था क्‍या करें। मैंने कहा ऐसे ही चला जाऊंगा भई, कुछ करो। एक बस का Route चालू करने का कार्यक्रम बनाओ। मुझे वहां जाना है, खैर फिर तय हुआ कि वहां एक Chilling Centre बनाएंगे Milk Collection के लिए एक छोटा-सा Centre कोई 20-25 लाख का छोटा-सा इमारत बनाकर के Chilling Centre खड़ा किया।

मैंने कहा ठीक है, मैं उदघाटन के लिए आता हूं। जंगल विस्‍तार से सब आदिवासी लोग रहते हैं और forest होने के कारण वहां आम सभा करने के लिए भी जगह नहीं थी। कोई तीन किलोमीटर एक स्‍कूल था उस स्‍कूल के मैदान में एक आम सभा रखी तो यहां Chilling Centre का उद्घाटन करना और वहां जाना तो वहां पर जो Milk देने वाली कुछ आदिवासी महिलाएं थी। वो भी उस दिन उद्घाटन के समय Chilling Centre में करीब 25 महिलाएं उन्‍होंने बुलाकर रखी थी। हम सारा कार्यक्रम किया और मैं देख रहा था वो पच्‍चीसों महिलाएं Mobile Phone से फोटो निकाल रही थी। मानें आप कल्‍पना कर सकते हैं कि जहां 25 लाख का एक Chilling Centre बनाना एक बहुत बड़ी घटना सरकार के लिए थी। वहां सामान्‍य महिला वो भी आदिवासी महिला जो दूध भरने आई थी, उसके पास Mobile Phone था और फोटो निकाल रहीं थी और मैं उनके पास गया, मैंने कहा आप मेरा फोटो निकालकर के क्‍या करोगे? उन्‍होंने जो जवाब दिया वो मैं समझता हूं कि आपको भी चौंकाने वाला है। उन्‍होंने कहा हम जाकर के उसको Download कराएंगे। अब यह आपको भी अंदाज नहीं होगा कि आप कहां-कहां पहुंचे हैं। अगर इस शक्ति को पहचान लिया आपने कि आपका जो आखिरी client है वो आपसे दो कदम आगे है, उस need को पूरा करने के लिए सरकार Infrastructure खड़ा करे , आप नए Innovations करें। आपके Innovations को सरकार Adopt करे। और देखते ही देखते Revolution हो सकता है।

और मैं मानता हूं कि आने वाले दिनों में GDP की संभावना वाले अनेक क्षेत्र हैं, उसमें एक connectivity क्षेत्र, GDP increase करने वाला बहुत बड़ा क्षेत्र बनने वाला है। जितनी ज्‍यादा, जितनी अच्‍छी, जितनी तेज connectivity, उतनी अधिक GDP की संभावनाएं, यह होने वाला है। इतनी बड़ी तेजी से दुनिया बदल रही है, उस दुनिया को हम कैसे Capture करे। आने वाले दिनों में.. मेरे मन में एक सवाल है आप नाराज मत होना क्‍योंकि आपने बहुत किया है, देश का सम्‍मान बढ़ाया है, फिर भी, जो अच्‍छा करता है उसी से तो अपेक्षाएं होती है, जो अच्‍छा नहीं करता उसको कौन पूछेगा, भई हां ठीक है बहुत अच्‍छा, ले लो ईनाम ले लो। आप अच्‍छा कर रहे हैं, इसलिए मेरी अपेक्षाएं ज्‍यादा है। आप अच्‍छा नहीं करते तो मैं कुछ नहीं मांगता आपसे।

क्या आपके मन में सवाल नहीं उठता है दोस्‍तों कि Google मेरे देश में क्‍यों न बना ? क्‍या Talent में कमी है क्‍या, यहां से जो गए उन्‍होंने जरूर बनाया। मैं नहीं मानता हूं कि सरकार यह रूकावट है। हौंसले बुलंद हों, दुनिया में हम पहुंचने के लिए हम उस level की Innovations पर जाएं ताकि जगत को चलाने में हमारी व्‍यवस्‍थाएं एक Role Play करें और यह हो सकता है दोस्‍तों, मुश्किल काम नहीं है। Hollywood के फिल्‍म से भी कम खर्चे में अगर मेरे देश के नौजवान Mars पर पहुंच सकते हैं, तो मैं समझता हूं कि आप भी कर सकते हैं मेरे दोस्‍तो! यह innovation के बहुत बड़े challenge के रूप में लेना चाहिए। कहीं और सब चीजें बनें फिर हम सिर्फ client बने, अच्‍छे client बने और अच्‍छे बने यह हमारा मकसद नहीं हो सकता। हमें इससे आगे जाना है। एक क्षेत्र ऐसा है, जिसमें बहुत संभावनाएं पड़ी है ऐसा मैं मानता हूं।

मैं दुनिया के जितने राजनेताओं को प्रधानमंत्री बनने के बाद मिला। शायद 50 से ज्‍यादा राजनेताओं से मिला हूं। उसमें 25 से 30 राजनेताओं से मेरी जो बात हुई है वो Cyber Security की उनकी चिंता सारी दुनिया परेशान है Cyber Security को लेकर। क्‍या मेरे हिंदुस्‍तान का नौजवान दुनिया को चैन की नींद सोने के लिए Cyber Security के लिए Full Proof Innovations लेकर के आ सकता है क्‍या? बहुत बड़ा Market होगा आप लिखकर के रखिए यह। firewall से भी काफी आगे बढ़ना पड़ेगा। हमें उस स्थिति में पहुंचना पड़ेगा और जिसके संबंध में जानते ही दुनिया को लगेगा कि, हां यार हम चिंतित थे, अब शायद हमें रास्‍ता मिल गया। सारी दुनिया की जो ताकत है, उस ताकत को Cyber Safety की जरूरत खड़ी हुई है। Cyber Security की जरूरत पड़ी है। क्‍या NASSCOM के द्वारा ऐसे एक Task-force बनाकर के, हम Globally क्‍या दे सकते हैं। यह बात सही है कि यह dynamic अवस्‍था है। आप एक करे तो वो दूसरा करता है, आप दूसरा करे तो, तीसरा करता है, लेकिन शायद जगत को एक बहुत बड़ा चिंतामुक्‍त करने का काम हम कर सकते हैं। मैं डरा नहीं रहा हूं, मैं इस विषय का मास्‍टर नहीं हूं। मैं एक Client हूं, मैं client के रूप में बात करता हूं, सामान्‍य ग्राहक। अगर हम यह security प्रदान नहीं करेंगे, वो दिन दूर नहीं होगा कि बहुत बड़ा वर्ग मोबाइल को छूने से भी दूर रहेगा। उसको लगेगा कि नहीं, नहीं भईया यह पता नहीं बातें कहां चली जाएंगी, कोई चीजें कहां Record हो जाएंगी अरे नहीं नहीं भईयां वो मैं नहीं करता, मेरे पास मत.. यह दिन आएंगें। और तब जाकर के इस process को इतना बड़ा धक्‍का लगेगा, जिसकी हम कल्‍पना नहीं कर सकते और इसलिए आवश्‍यक है हम Assurance पैदा करे विश्‍वास पैदा करे कि भई चिंता मत करो यह जो इस technology से तुम जुड़े हो, सुरक्षित है, चिंता मत करो.. तुम्‍हारी privacy को भी problem नहीं है।

तुम्‍हारे अपने Documents को भी Problem नहीं है। उसी प्रकार से जैसा E-Business बढ़ा, जो भी वो Portal बनाकर के आते हैं वो आगे बढ़ रहे हैं। अब जितनी बड़ी मात्रा में E-Database तैयार हो रहा है, Digital Database तैयार हो रहा है, आने वाले दिनों में आपको अपने Status से नीचे आकर के एक नया Business शुरू करना पड़ेगा। Status, मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मैं शब्द प्रयोग ऐसा करने वाला हूं। Public Life में तो आप ऊंचे जाने वाले हैं, व्‍यापारिक जगत में ऊंचे जाने वाले हो। ऐसे दिन आएंगे जब आपको Cloud godown शुरू करने होंगे। अब आप अपने पिताजी को कहेंगे कि मैं Godown शुरू करने जा रहा हूँ, तो वे कहेंगे कि तुम्‍हारी बुद्धि खराब हो गई है क्‍या? Godown खोलोगे क्‍या? लेकिन आने वाले दिनों में Cloud Godown का एक बहुत बड़ा business खड़ा होने वाला है। बहुत बड़ी मात्रा में लोग अपने Documents, अपनी सारी व्‍यवस्‍थाएं और बैंक, बैंक भी पूरा का पूरा Data आपके Cloud Godown में रखने के लिए तैयार हो जाएगा, जिस पल उसको विश्‍वास हो जाएगा कि आप Security Provide करते हैं, Safety Provide करते हैं। Cloud locker आने वाले दिनों में Important Document के लिए, Even कल जो हमने Gold Bond की बात कही है, Gold Bond लेने के बाद बहुत लोग होंगे जो Gold Bond को Cloud locker में रख देंगे। Cloud Godown and Cloud locker यह इतनी बड़ी Market की संभावना वाला क्षेत्र बन रहा है। मैं समझता हूं उस पर हमें व्‍यापक रूप से सोचना होगा और सरकारों को भी अब सरकारों को अपने दफ्तरों में फाइलों के ढ़ेर रखने की आवश्‍यकता नहीं होगी। वे अपने Cloud Godown में चीजें रखते रहेंगे और सालों-साल सुरक्षित उसको रखें वो दिन आने वाले हैं।

मैं स्‍वयं, मैं शायद पहला politician हूं, जो Sound Cloud का उपयोग करता हूं और मेरा अनुभव इतना अच्‍छा है, Sound cloud का। वरना मैं पहले Yahoo के अगल-बगल में ही घूमता रहता था, YouTube के अगल-बगल में घूमता रहता था। अब मैं चला गया वहां और मैंने देखा है मैं बहुत तेजी से एक बहुत बड़े जग‍त के साथ जुड़ गया। हम इन शक्तियों को अगर पहचानते हैं और उन शक्तियों को जोड़ करने की दिशा में प्रयास करते हैं तो बहुत बड़ा लाभ आने वाले दिनों में हो सकता है, ऐसा मुझे लगता है।

हमारे रविंशकर जी ने कहा कि अमीर और गरीब की चर्चा का एक नया पैरामीटर आने वाला है और वो है Digital Divide. Digital Divide से भी अमीरी और गरीबी नापी जाएगी और इसलिए समाज में दो तबके पैदा न हो, digital divide की अवस्‍था पैदा न हो उसको हमने आगे बढ़ाना पड़ेगा। मैंने देखा है सरकार में एक बहुत बड़ी समस्‍या रहती है एक तो silos में काम करने की उनकी पहले से ही आदत रही है और अब उनकी digital activity भी silos में पड़ी है। और मैं मानता हूं, मैं तो technician नहीं हूं, मुझे लगता आप कर सकते हैं, फिर वही आप कर सकते हैं इसलिए कहने का मन करता है।

किसी भी language को किसी भी language में Translate करने वाले Software आपने बनाए हैं। उसकी लेखनी अलग है, उसका grammar अलग है, लेकिन Translation हो जाता है software से। मतलब Interpretation के लिए आपके पास बढि़या-सा Talent है जिसका उपयोग करते हो। सरकार के सामने यह समस्‍या है, किसी ने 15 साल पहले कोई Software लिया तो यह सारा Material उस भाषा के Software में है। 10 साल पीछे कोई दूसरा Software लिया तो उसमें है। यह इतना बिखरा पड़ा है और इतने अलग-अलग लोग माल हमको देकर चले गए हैं। अब उस समय जो लोग थे उनको लेने की जरूरत होगी शायद और लेने में भी मजा आता होगा। क्‍या हमारी यह जो बिखरी हुई चीजें हैं, हरेक का अलग-अलग Software है। अगर Language को आप Interpret कर सकते हैं बड़ी आसानी से एक software से, क्‍या इस challenge को उठाकर हमारी यह जो Raw data पड़ा है, अलग-अलग form में पड़ा है, उसको हम चाहे इस प्रकार से उसको synchronize करना, उसको Interpret करना, उसको उस form में रखना क्‍या इस काम को कर सकते हैं क्‍या। देश के Governance में एक बहुत बड़ा बदलाव आ सकता है इससे, क्‍योंकि आज मैं नया software लूं और लोगों को कहूं कि भई अब वो बदलो, वो फैंक दो इसमें डालो सारा। तो भई वो कहेंगे कि ठीक है साहब हम data entry करते रहेंगे। मैं नहीं चाहता हूं कि सरकारे data entry में ही लगी रहे। हमें बदलाव चाहिए और technology के उपयोग से क्‍या होता है देखा होगा आपने। बहुत-सी बातें होती हैं जो लिखने, पढ़ने, देखने को मिलती नहीं है, लेकिन मैं बताता हूं।

हम लोगों ने गैस सिलेंडर की जो सब्सिडी है वो Direct Benefit Transfer करने की Scheme बनाई। 80 percent ग्राहक तक हम पहुंच गए। करीब 12 crore लोगों को हम Direct Benefit Transfer कर रहे हैं और यह काम हमने 30 दिन में पूरा कर दिया, कैसे? Just it with the help of technology. कितना बड़ा achievement और मैं मानता हूं आने वाले दिनों में यह जो भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ाई है न, उसमें technology बहुत बड़ा Role play कर रही है। इतनी transparency लाई जा सकती है, हम चाहते हैं यह लाना और इससे बड़ी देश की सेवा क्‍या हो सकती है। यह सिर्फ गैस का जो हमने direct transfer किया है न, मेरा मोटा-मोटा अंदाज है शायद 10 percent लीकेज तो मैंने बंद कर ही दिया है। Can you imagine ten percent यानी thousands of crore rupee है।

अभी हमने Coal Auction किया है। पूरा technology का उपयोग किया, इतने बड़े बोर्ड पर public में उसको रखा। जिसको बैठना था, सारे पत्रकार भी बैठे थे। Auction हो रहा था। 204 coal blocks, जिसको Supreme Court ने सितंबर महीने में कह दिया कि भ्रष्‍टाचार हुआ है, रद्द करो। सब फायदा मुफ्त का उठा कर ले गए और आपको मालूम होगा कि एक जगह से चिट्ठी जाती थी, कोयले की खदान मिल जाती थी। Supreme Court ने निर्णय किया, हमने उसका फायदा उठाया। हमने तीन महीने के अंदर सारी योजना बनाई, Ordinance लाए, कुछ लोगों की नाराजगी स्वाभाविक है कि Ordinance क्‍यों लाए ? CAG ने कहा था कि यह जो coal block का आवंटन हुआ है, उसमें एक लाख 86 हजार करोड़ रुपये का घपला हुआ है। उस समय जब एक लाख 86 करोड़ अखबारों में हैडलाइन आई तो इस देश के नागरिक मानने को तैयार नहीं थे कि यार यह तो ऐसे ही लिख दिया होगा। CAG शायद सरकार से, उसकी भिड़ गई होगी। हम भी politically बोलते तो थे लेकिन मन में रहता था कि यार इतना होगा क्‍या? देखा भाई जिसने समंदर देखा नहीं है, जिसने गांव का तालाब देखा है उसको कोई पूछे कि समंदर कैसा है? तो वो क्‍या बोलेगा, क्‍या बोलेगा बेचारा। किसी को पूछेगा कि बताओ तो भई तो वो कहेगा कि तुम्‍हारे गांव में जो तालाब है न इससे बहुत बड़ा होता है। कितना बड़ा होता है, बोले बहुत बड़ा होता है। फिर पूछेगा.. ऐसे हमारी भी मुसीबत है.. हम तो कल्‍पना ही नहीं कर सकता है। अभी हमने 19 ब्‍लॉक का auction किया और technology का प्रयोग करके किया पूरी तरह e-auction था, सब लोग अपनी बोली computer से बोल रहे थे। 204 में से सिर्फ 19 का हुआ है, CAG का कहना है सिर्फ 204 में एक लाख 86 हजार करोड़ रूपये का घपला हुआ है। 19 का किया और अब तक एक लाख 10 हजार करोड़ रुपया की बोली, बोल चुके हैं। Technology से Transparency कैसे आती है इसका यह जीता जागता उदाहरण है और कहीं किसी ने उंगली नहीं उठाई है जी। एक सवाल नहीं खड़ा हुआ है। अगर हम ईमानदारी से आधुनिक विज्ञान का उपयोग करते हुए, नेक इरादे से चीजों को करें। क्‍या आने वाले दिनों में आप इसमें योगदान कर सकते हैं और मैं मानता हूं कि आप लोग कर सकते हैं और आपसे मेरी अपेक्षाएं हैं।

अभी हमने एक कल्‍पना रखी है हम जानते हैं कि Tourism का sector. अभी हमारे चंद्रशेखर जी Two trillion Dollar का हिसाब बता रहे थे। आज दुनिया में Tourism का Business three trillion dollar का है और तेज गति से बढ़ने वाला business है। आज जो Tourist है वो न टेलिफोन करके जानकारी लेता है, न किताब पढ़कर निकलता है, वो Google Map से चलता है वो Destination Google से तय करता है, वो IT profession के द्वारा व्‍यवस्‍था के द्वारा चलता है। क्‍या हम भारत का Tourism में हमारे इस Profession के माध्‍यम से एक बहुत बड़ी marketing कर सकते हैं? हम पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकते हैं क्‍या? और भारत में गरीब से गरीब को रोजगार देने में Tourism बहुत बड़ी ताकत रखता है और एक बार उसको सही चीजें प्राप्‍त हो। मगर इन चीजों को वो मेहनत करके करे, Database तैयार करके करे, easily accessible व्‍यवस्‍थाएं विकसित करे। आप कल्‍पना कर सकते हैं हम कहां से कहां पहुंच सकते हैं। हमारे नौजवानों को मैं आग्रह करता हूं।

मैंने सरकार में अभी यह निर्णय किया है Heritage cities के लिए। मैं चाहता हूं कि देश में 50 ऐसे Heritage Cities में Virtual Museum तैयार किया जा सकता है क्‍या? देखिए यह किसी भी देश की विरासत को बचाने, संभालने में museum का बहुत बड़ा role होता है, लेकिन आज भारत के पास इतने पैसे नहीं है। कि हम world class museum को create करे, लेकिन virtual museum बना सकते हैं। मैं, नौजवानों आपसे आग्रह करता हूं, आइए virtual museum बनाइए, virtual museum बनाकर के एक बहुत बड़ा market खड़ा करे, tourism के साथ जोड़े और भारत सरकार तैयार है इस प्रकार के virtual museum को आने वाले दिनों में खरीदने के लिए तैयार है। एक बहुत बड़े Business की संभावनाएं हैं, Research करने वाली University मिल जाएगी, Professors मिल जाएंगे और फिर आप उसमें से तैयार करिए और इतना User friendly बनाएंगे, आप देखिए tourism को बढ़ावा देने के लिए यह virtual museum और Economical रहेगा। आप एक Museum खड़ा करे उसका खर्चा और एक Virtual Museum का बहुत फर्क पड़ जाता है। क्‍या हम इस काम को कर सकते हैं क्‍या? आने वाले दिनों में अगर इन चीजों का काम कर सकते हैं तो मेरा आपसे आग्रह है कि आप करे, बाकी तो शिक्षा है, Health है यह काम ऐसे है कि बड़े बहुत ही अनिवार्य हैं।

Remotest to Remote Area में हम अगर अच्‍छी शिक्षा पहुंचाने चाहते हैं तो Technology बहुत बड़ी ताकत है। Long Distance education के द्वारा उत्‍तम से उत्‍तम शिक्षा हम दे सकते हैं और हम अगर उसका उपयोग करे हम बहुत बड़ी सेवा कर सकते हैं आप Corporate Social responsibility के नाम पर कई काम कर रहे हैं, मेरा एक आग्रह है स्‍वच्‍छता के लिए आप करें, लेकिन उसके साथ-साथ मुझे बताया गया कि 1800 members हैं आपके NASSCOM के, क्‍या 1800 Member कंपनियां कम से कम एक का उस कंपनी के मालिक या उसके partner जिस primary school में पढ़े हैं, जहां भी बचपन में गांव में होंगे, शहर में, जहां भी पढ़े हैं कम-से-कम उस स्‍कूल को आप एक E-library donate कर सकते हैं क्‍या? आप हमारी नई पीढि़यों को जानकारी का खजाना खोल दीजिए उनके सामने। आज Minimum 20 लाख किताबें E-Library के लिए आसानी से उसको उपलब्‍ध हो जाएगी। आज गांव में दो हजार किताबों की Library बनाना कठिन है, लेकिन आप जहां पढ़े हैं आपको एक Attachment होगा, आपका भी मन करता होगा, जिस स्‍कूल ने मुझे बड़ा बनाया, मैं भी उसके लिए कुछ करूं। आप देखिए देखते ही देखते वो Viral की तरह फैलेगा और फिर E-Library की लिए बहुत बड़ा business खुल जाएगा। यह है कि E-Library का structure बनाकर के दे देते हैं, E-Library service provide करते हैं। science magazine आज हमारा विद्यार्थी कहां से खर्चा करेगा। Even medical students के लिए science magazine महंगे पड़ते हैं, लेकिन हम E-Library Provide करे तो वो कितना सारा कर सकता है इसका आप अंदाज कर सकते हैं। और इसलिए हम Corporate Social Responsibility के नाते ही अपने व्यक्तिगत जीवन में जहाँ नाता रहा वहां कुछ करें, आप देखिये उनके लिए भी बहुत बड़ी चीज़ होगी और आने वाले दिनों में बहुत बड़ा लाभ होगा और Dynamic आप उसमें उत्तरोत्तर सुधार करवा सकते हैं क्योंकि आप इस field में हैं। दूसरा जब मैं सूचना की बात करता हूँ E-Waste इसके विषय में awareness नहीं है देखिये हमारे देश में environment की समस्याएं इसलिए आई कि जिस जगह कारखाना लगा दिया, They were not conscious about it. हमें E-Waste के सम्बन्ध में और NASSCOMM को विषय उठाना चाहिए और लोगो के लिए Awareness Campaign चलाना चाहिए online चलाना चाहिये, E-Waste के Solutions देने चाहिए, सरकार के साथ मिलकर के कोई project बनाया जा सकता है। Campaign चलाना चाहिए, वर्ना हम कहाँ से कहाँ पहुँच जायेंगे।

कभी कभार इन दिनों हमारे यहाँ पहले अच्छा पेन रखना एक Status था, अच्छी घड़ी रखना एक Status था लेकिन अब अच्छा फ़ोन रखना एक स्टेटस हो गया है और एक दूसरे को मिलते रहते हैं और कहते है अच्छा-अच्छा तूने ले लिया Apple-6. अगर ये नहीं है तो लगता है कुछ नहीं है। बहुत साल पहले की बात है इमरजेंसी के दिन थे मैं Underground था, पुलिस हमें खोज रही थी। एक परिवार में मैं रह रहा था उनके एक भाई UK में रहते थे वो आये हुए थे शाम को पहुंचें तो सभी भाई बैठे थे, तो उन्होंने कहा कि में एक घड़ी लाया हूँ, दो-ढाई लाख की घड़ी होगी शायद सबने देखी, सुबह हम चाय-पानी के लिए बैठे थे और उनके एक छोटे भाई थे वो बड़े मजाकिया थे, तो उन्होंने उनसे पुछा कि time कितना हो गया, तो उन्होंने कहा कि आठ बज गए हैं, बोले नहीं-नहीं ज़रा ठीक से देखिये, उन्होंने बोला कि आठ ही बजे है, फिर वो बोले की आप ज़रा ध्‍यान से देखिये वो फिर बोले की आठ ही बजे है, तो दूसरे भाई बोले की अच्छा, मेरी 250 रुपये की घड़ी है उसमें भी आठ ही बजे हैं।

हमारे देश में 1500 रूपए के मोबाइल वाला भी जो उपयोग देता है 25000 रूपए वाला भी उतना ही उपयोग देता है। लाल बटन, नीला बटन, Green button इससे ही एक मैं मानता हूँ कि सचमुच में हमें मोबाइल revolution लाना है, mobile app का revolution लाना है तो एक बहुत बड़े वर्ग को, 80 percent utility नहीं है 80 percent.. एवरेज मैं कह रहा हूँ, कितना ही बढ़िया सॉफ्टवेर वाला मोबाइल ले आईये, लेकिन उसका उपयोग ही नहीं करेंगे तो फायदा क्या होगा। क्या school-colleges में इसके बारे में awareness कार्यक्रम हो सकते हैं क्या? इसको करना चाहिए। वरना मैं मानता हूँ कि यह एक अलग प्रकार का E- Waste हैं। कोई भी पैसा अगर कहीं पर dead money के रूप में पड़ा है तो मैं मानता हूँ कि वो देश का नुकसान है। अगर मेरा 25,000 रूपए का मेरा मोबाइल फ़ोन हो और मैं उसका 80 प्रतिशत use नहीं करता मतलब कि वो मेरा dead money है सीधा- साधा इकोनॉमिक्स है, हमें लोगों को तैयार करना है और यह काम यही field के लोग कर सकते हैं. उसकी utility से ताकत बढ़ती है देश की, सामान्य लोगों की भी ताकत बढ़ती है और उस दिशा में हम कैसे काम करें इस दिशा में हमे सोचना है। आप जानते है कि मैं social मीडिया में काफी active रहा हूँ और काफी समय से active रहा हूँ, इस दुनिया की जब से शुरुआत हुई तभी से इसमें मेरी रुचि थी।

My gov.in मैंने मेरे कार्यालय से जोड़कर के मैंने देखा है कि मैं कोई भी चीज वहां question करता हूं, हजारों लोग मुझे respond करते हैं। मुझे कहीं भाषण करने जाना है और मैं पूछता हूं कि मुझे थोड़ा idea दीजिए, हजारों लोग तुरंत मुझे idea देते हैं। आपने देखा होगा यह जनधन योजना, प्रधानमंत्री जनधन योजना.. यह शब्‍द एक नागरिक ने दिया है, competition से आया है, my gov.in पर आया। अभी my gov.in के द्वारा मैं competition launch करने जा रहा हूं शायद एक दो दिन में कर लूंगा, मैं आपको भी निमंत्रित करता हूं इसमें आइए।

PMO कार्यालय के लिए Mobile App कैसा होगा, ideas पहली competition का मेरा level है Ideas. और जो Best ideas आएंगे यह Google के साथ मिलकर के हम कर रहे हैं, जो Best ideas होंगे ऐसे लोगों की टीम को फिर Google office America जाने का निमंत्रण मिलेगा और दूसरा है education, Idea को implement करने वाला पूरा software तैयार करना। मैं चाहूंगा कि मेरे कार्यालय को भी इस India tomorrow जो innovation को लेकर के आप चले हैं तो मुझे भी आप लोग मदद करे।

फिर एक बार मैं नहीं जानता मैंने ज्‍यादा ही समय ले लिया। मुझे यहां आकर अच्छा लगा, बहुत बहुत धन्‍यवाद।

Explore More
ভারতের ৭৭তম স্বাধীনতা দিবস উপলক্ষে লালকেল্লার প্রাকার থেকে দেশবাসীর উদ্দেশে প্রধানমন্ত্রীর ভাষণ

জনপ্রিয় ভাষণ

ভারতের ৭৭তম স্বাধীনতা দিবস উপলক্ষে লালকেল্লার প্রাকার থেকে দেশবাসীর উদ্দেশে প্রধানমন্ত্রীর ভাষণ
Indian bull market nowhere near ending, says Chris Wood of Jefferies

Media Coverage

Indian bull market nowhere near ending, says Chris Wood of Jefferies
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
মুম্বাইয়ে ইন্ডিয়ান নিউজ পেপার্স সোসাইটি টাওয়ার-এর উদ্বোধনে প্রধানমন্ত্রীর ভাষণের বঙ্গানুবাদ
July 13, 2024
“Role of newspapers is very important in the journey to Viksit Bharat in the next 25 years”
“The citizens of a country who gain confidence in their capabilities start achieving new heights of success. The same is happening in India today”
“INS has not only been a witness to the ups and downs of India’s journey but also lived it and communicated it to the people”
“A country’s global image directly affects its economy. Indian publications should enhance their global presence”

মহারাষ্ট্রের মাননীয় রাজ্যপাল শ্রী রমেশ বাইসজি, মুখ্যমন্ত্রী শ্রী একনাথ শিন্ডে, উপ-মুখ্যমন্ত্রী ভাই দেবেন্দ্র ফড়নবিশ ও অজিত দাদা পাওয়ার, ইন্ডিয়ান নিউজ পেপার্স সোসাইটির সভাপতি শ্রী রাকেশ শর্মা, বিশিষ্ট অতিথিবৃন্দ, ভদ্রমহিলা ও ভদ্রমহোদয়গণ !

প্রথমেই আমি ইন্ডিয়ান নিউজ পেপার্স সোসাইটির প্রতিটি সদস্যকে আন্তরিক অভিনন্দন জানাই। আজ মুম্বাইতে আপনাদের একটি প্রশস্ত ও আধুনিক ভবন হল। এই নতুন ভবন আপনাদের কাজের দক্ষতা বাড়াবে এবং কাজের পরিবেশ সহজ করবে বলে আমার আশা। এতে আমাদের গণতন্ত্রও শক্তিশালী হবে। ইন্ডিয়ান নিউজ পেপার্স সোসাইটি এমন একটি প্রতিষ্ঠান যার সূচনা হয়েছিল স্বাধীনতার আগে, দেশের যাত্রাপথের প্রতিটি চড়াই-উৎরাই আপনারা খুব কাছ থেকে দেখেছেন এবং সাধারণ মানুষের কাছে তা পৌঁছে দিয়েছেন। তাই একটি সংগঠন হিসেবে আপনাদের কাজ যত বেশি উপযোগী হবে, দেশও তত বেশি উপকৃত হবে।

বন্ধুরা,

গণমাধ্যম শুধুমাত্র দেশের পরিস্থিতির নিষ্ক্রিয় পর্যবেক্ষক নয়, আপনারা যাঁরা সংবাদমাধ্যমে রয়েছেন, তাঁরা দেশের পরিস্থিতি পরিবর্তনে এবং জাতিকে পথ দেখাতে গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা পালন করেন। আজ ভারত এমন এক সময়ে এসে দাঁড়িয়েছে, যেখানে তার আগামী ২৫ বছরের যাত্রা অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ হয়ে উঠেছে। আগামী ২৫ বছরের মধ্যে ভারতকে উন্নত রাষ্ট্রে পরিণত করতে হলে সংবাদপত্র ও সংবাদমাধ্যমের ভূমিকা সমান তাৎপর্যপূর্ণ। গণমাধ্যমই দেশের নাগরিকদের মধ্যে সচেতনতা বাড়ায়। গণমাধ্যম প্রতিনিয়ত নাগরিকদের তাঁদের অধিকারের কথা স্মরণ করিয়ে দেয় এবং গণমাধ্যমই মানুষকে তাঁদের সম্ভাবনা উপলব্ধি করতে শেখায়। দেশের নাগরিকরা যখন নিজেদের সম্ভাবনার ওপর আস্থা পোষণ করেন, তখনই তাঁরা সাফল্যের নতুন শিখর স্পর্শ করতে পারেন। আজ ভারতেও তাই হচ্ছে। আপনাদের একটা ছোট্ট উদাহরণ দিই। একটা সময় ছিল যখন কিছু নেতা খোলাখুলি বলতেন যে ডিজিটাল লেনদেনে সড়গড় হওয়া ভারতবাসীর সাধ্যের বাইরে। তাঁরা ভাবতেন, এ দেশে আধুনিক প্রযুক্তি কাজ করতে পারবে না। কিন্তু বিশ্ববাসী আজ ভারতের মানুষের প্রজ্ঞা ও সামর্থ্যের সাক্ষী হচ্ছে। আজ ভারত বিশ্বজুড়ে ডিজিটাল লেনদেনে একের পর এক রেকর্ড ভাঙছে। 

 

আজ ভারতের ইউপিআই এবং আধুনিক ডিজিটাল জন-পরিকাঠামোর জন্য জীবনযাত্রার সহজতা বেড়েছে, এক জায়গা থেকে অন্য জায়গায় টাকা পাঠানো সহজতর হয়েছে। আজ ভারতীয়রা বিশ্বের বিভিন্ন জায়গা থেকে, বিশেষত উপসাগরীয় দেশগুলি থেকে অনেক কম খরচে নিজের দেশে অর্থ পাঠাতে পারেন। এর আংশিক কৃতিত্ব এই ডিজিটাল বিপ্লব দাবি করতে পারে। বিশ্বের বড় বড় দেশগুলি আমাদের এই প্রযুক্তি এবং তার বাস্তবায়নের মডেল বোঝার চেষ্টা করছে। এই বিশাল সাফল্য শুধুমাত্র সরকারের একার জন্য আসেনি। এই সাফল্যে সংবাদমাধ্যমে থাকা আপনাদের সবার অবদান রয়েছে। আর তাই, এর জন্য আপনাদেরও অভিনন্দন জানানো উচিত। 

বন্ধুরা,

সংবাদমাধ্যমের স্বাভাবিক ভূমিকাই হল বিভিন্ন গুরুত্বপূর্ণ বিষয়ে আলোচনা ও মতবিনিময়ের পরিসর সৃষ্টি করা। সংবাদমাধ্যমে কী নিয়ে আলোচনা হবে তা প্রায়শই সরকারি নীতির ওপর নির্ভর করে। আপনারা জানেন, সাধারণত সরকারের যে কোন কাজ করার আগে ভোটের অঙ্ক কষে নেওয়া হয়। কিন্তু আমরা এই মানসিকতার বদল ঘটিয়েছি। আপনাদের মনে আছে যে কয়েক দশক আগে আমাদের দেশে ব্যাঙ্কের জাতীয়করণ করা হয়েছিল। কিন্তু প্রকৃত সত্য হল, দেশের ৪০ থেকে ৫০ কোটি গরীব মানুষের ২০১৪ সাল পর্যন্ত কোনো ব্যাঙ্ক অ্যাকাউন্টই ছিল না। ব্যাঙ্ক জাতীয়করণ যখন হয়েছিল তখন কী বলা হয়েছিল, আর ২০১৪ সালের বাস্তবতাই বা কী বলছিল? দেশের অর্ধেকই ছিল ব্যাঙ্কিং ব্যবস্থার বাইরে। এই বিষয়টি নিয়ে কি কখনও আমাদের দেশে আলোচনা হয়েছে? কিন্তু আমরা ‘জন ধন যোজনা’কে একটি আন্দোলন হিসেবে গ্রহণ করেছিলাম। আমরা প্রায় ৫০ কোটি মানুষকে ব্যাঙ্কিং ব্যবস্থার সঙ্গে যুক্ত করেছি। এটাই ডিজিটাল ইন্ডিয়া এবং দুর্নীতি দমনের প্রয়াসে আমাদের সবথেকে বড় মাধ্যম হয়ে উঠেছে। একইভাবে আমরা যদি ‘স্বচ্ছতা অভিযান’, ‘স্টার্ট-আপ ইন্ডিয়া’ এবং ‘স্ট্যান্ড-আপ ইন্ডিয়া’র দিকে তাকাই, তাহলে দেখব এগুলির সঙ্গে ভোটব্যাঙ্কের রাজনীতির কোনো সংযোগ নেই। কিন্তু পরিবর্তনশীল ভারতে দেশের সংবাদমাধ্যম এগুলিকে জাতীয় আলোচনার বিষয়বস্তু করে তুলেছে। ‘স্টার্ট-আপ’ শব্দটি ২০১৪ সালের আগে বেশিরভাগ মানুষ শোনেনইনি, সংবাদমাধ্যমের আলোচনার সূত্রেই আজ এই শব্দটি ঘরে ঘরে পৌঁছে গেছে। 

 

বন্ধুরা,

আপনারা সবাই দীর্ঘদিন সংবাদমাধ্যমের সঙ্গে যুক্ত, খুবই অভিজ্ঞ। আপনাদের সিদ্ধান্ত দেশের সংবাদমাধ্যমকে পথ দেখায়। তাই, এই অনুষ্ঠানের মাধ্যমে আমি আপনাদের কাছে কয়েকটি অনুরোধ রাখছি। 

বন্ধুরা,

সরকার যখন কোনো কর্মসূচি শুরু করে, তখন তা কেবল সরকারের থাকে না। সরকার যদি কোনো নির্দিষ্ট আদর্শের ওপর গুরুত্ব দেয়, তখন তা কেবলমাত্র সরকারের আদর্শ হয়ে থাকে না। যেমন ধরুন, আমাদের দেশ ‘অমৃত মহোৎসব’ উদযাপন করেছে, ‘হর ঘর তিরঙ্গা’ প্রচারাভিযানে যোগ দিয়েছে। সরকার এই অভিযানগুলি শুরু করেছিল বটে, কিন্তু পরে সমগ্র দেশ তা গ্রহণ করে এগুলিকে এগিয়ে নিয়ে গেছে। একইভাবে আজ দেশে পরিবেশের ওপর বিশেষ জোর দেওয়া হচ্ছে। এটা এমন একটা বিষয় যা রাজনীতির ঊর্ধ্বে, এর সঙ্গে মানবতার ভবিষ্যৎ জড়িত। উদাহরণ হিসেবে ‘এক পেড় মা কে নাম’ বা মায়ের জন্য একটি গাছ প্রচারাভিযান সবে শুরু হয়েছে। ভারতের এই কর্মসূচি নিয়ে সারা বিশ্বে আলোচনা চলছে। আমি যখন জি-৭-এ এই বিষয়টি উত্থাপন করেছিলাম, তখন সবাই খুব কৌতুহল প্রকাশ করেছিলেন কারণ, প্রত্যেকেই তাঁদের মায়ের সঙ্গে ঘনিষ্ঠভাবে যুক্ত এবং তাঁরা মনে করেছিলেন যে এই অভিযান মানুষের মধ্যে সাড়া ফেলবে। দেশের যত বেশি সংবাদমাধ্যম এই প্রয়াসের সঙ্গে যুক্ত হবে, ভবিষ্যৎ প্রজন্মও তত বেশি উপকৃত হবে। আমি অনুরোধ করব, এই ধরনের প্রয়াসকে আপনারা দেশের প্রয়াস হিসেবে দেখুন এবং এর প্রচারের ব্যবস্থা করুন। এটা কেবলমাত্র সরকারের প্রয়াস নয়, সারা দেশের প্রয়াস। এই বছর আমরা দেশের সংবিধানের ৭৫তম বার্ষিকী উদযাপন করছি। নাগরিকদের মধ্যে সংবিধানের প্রতি কর্তব্যবোধ ও সচেতনতা বৃদ্ধিতে আপনারা গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা পালন করতে পারেন। 

 

বন্ধুরা,

আর একটি বিষয় পর্যটনের সঙ্গে সম্পর্কিত। শুধুমাত্র সরকারি নীতির মাধ্যমে পর্যটনের বিকাশ হয় না। আমরা যখন সবাই মিলে দেশকে একটি ব্র্যান্ড হিসেবে তুলে ধরতে পারি, তখনই পর্যটনের বিকাশ ঘটে এবং দেশের সম্মানও বৃদ্ধি পায়। আপনারা নিজেদের মতো করেও দেশে পর্যটনের প্রচার করতে পারেন। যেমন ধরুন, যদি মহারাষ্ট্রের সমস্ত সংবাদপত্র সেপ্টেম্বর মাসে বাংলার পর্যটনের প্রচার করার সিদ্ধান্ত নেয়, তখন মহারাষ্ট্রের বাসিন্দারা বাংলায় ঘুরতে যেতে উৎসাহিত হতে পারেন। এতে বাংলার পর্যটনের বিকাশ হবে। আবার, তিনমাস পর আপনারা সবাই মিলে তামিলনাড়ুকে তুলে ধরার সিদ্ধান্ত নিতে পারেন। তখন দেখবেন, মহারাষ্ট্রের যেসব মানুষ বেড়ানোর পরিকল্পনা করছেন, তাঁরা ঘুরতে যাওয়ার জন্য তামিলনাড়ুকে বেছে নেবেন। এইভাবে সারা দেশের পর্যটনের বিকাশ ঘটতে পারে। আপনারা যদি এই কাজটি করেন, সেক্ষেত্রে অন্যান্য রাজ্যেও মহারাষ্ট্রের পর্যটনের বিকাশের জন্য প্রয়াস চালানো যেতে পারে। এর ফলে প্রতিটি রাজ্যের মানুষের অন্য রাজ্যের প্রতি আকর্ষণ ও কৌতুহলের সৃষ্টি হবে এবং শেষ পর্যন্ত যে রাজ্যে আপনি এই প্রয়াস শুরু করেছেন, সেই রাজ্য উপকৃত হবে। 

আমি আপনাদের বিশ্বব্যাপী উপস্থিতি বাড়ানোরও অনুরোধ জানাব। আমাদের বিশ্বের নিরিখে ভাবতে হবে। আমরা ১৪০ কোটি মানুষের দেশ। এত বড় একটা দেশ, এখানে এত সামর্থ্য ও সম্ভাবনা। খুব অল্পদিনের মধ্যেই আমরা বিশ্বের তৃতীয় বৃহত্তম অর্থনীতি হতে চলেছি। আপনারা ভারতের সাফল্য বিশ্বের বিভিন্ন কোণে পৌঁছে দেওয়ার দায়িত্ব নিতে পারেন। আপনারা জানেন, বিদেশে একটি জাতির ভাবমূর্তি সরাসরি তার অর্থনীতি ও বিকাশের ওপর প্রভাব ফেলে। আজ বিদেশে বসবাসকারী ভারতীয় বংশোদ্ভূতদের সামাজিক মর্যাদা ও বিশ্বাসযোগ্যতা বেড়েছে কারণ, বিশ্বজুড়ে ভারতের ভাবমূর্তি উজ্জ্বল হয়েছে। বিশ্বের অগ্রগতিতে ভারত উল্লেখযোগ্য অবদান রাখছে। আমাদের সংবাদমাধ্যম এই দৃষ্টিকোণ থেকে যত বেশি কাজ করবে, আমাদের দেশ ততই উপকৃত হবে। কাজেই আমি চাই, আপনারা আপনাদের প্রকাশনাগুলি রাষ্ট্রসঙ্ঘের যত বেশি ভাষায় পারেন, ছড়িয়ে দিন। আপনাদের মাইক্রো-সাইট, সোশ্যাল মিডিয়া অ্যাকাউন্টগুলিও এইসব ভাষায় হতে পারে। বর্তমানে কৃত্রিম বুদ্ধিমত্তার সহায়তায় এইসব কাজ অনেক সহজ হয়ে গেছে। 

বন্ধুরা,

আপনাদের আমি অনেক পরামর্শ দিলাম। আমি জানি, আপনাদের পত্র-পত্রিকায় জায়গা খুব সীমিত। কিন্তু আজকাল প্রতিটি সংবাদপত্র ও প্রকাশনারই ডিজিটাল সংস্করণ রয়েছে। সেখানে স্থানের সীমাবদ্ধতা বা বিতরণের সমস্যা নেই। আমি নিশ্চিত যে আপনারা আমার পরামর্শগুলি বিবেচনা করবেন, নতুন পরীক্ষানিরীক্ষা চালাবেন এবং গণতন্ত্রকে আরও শক্তিশালী করবেন। আমার দৃঢ় বিশ্বাস যে রাষ্ট্রসঙ্ঘের বিভিন্ন ভাষায় আপনারা যদি দুটি পৃষ্ঠার একটি ছোট্ট সংস্করণও প্রকাশ করেন, তাহলেও তা বিশ্বের বহু মানুষের কাছে পৌঁছবে, বিভিন্ন দূতাবাসেও তা পড়া হবে। আপনাদের ডিজিটাল সংস্করণগুলি ভারতের বার্তা বিশ্বের কাছে পৌঁছে দেওয়ার চমৎকার উৎস হতে পারে। আপনারা যত ভালোভাবে এই কাজ করবেন, দেশ তত এগিয়ে যাবে। এই বিশ্বাসের সঙ্গে আপনাদের সবাইকে অজস্র ধন্যবাদ জানাই! আপনাদের সবার সঙ্গে দেখা করার সুযোগ পেয়ে আমি আনন্দিত। আপনাদের সবাইকে আন্তরিক শুভেচ্ছা। ধন্যবাদ!

প্রধানমন্ত্রী মূল ভাষণটি হিন্দিতে দিয়েছিলেন