Text of PM’s address at 25th Foundation Day of NASSCOM

Published By : Admin | March 1, 2015 | 13:10 IST

सभी महानुभाव!

मैं सबसे पहले तो आपकी क्षमा याचना करता हूं, क्‍योंकि पहले यह कार्यक्रम आज सुबह तय हुआ था। लेकिन मुझे आज कश्‍मीर जाना पड़ा और उसके कारण मैंने Request की थी कि अगर समय बदला जाए तो ठीक होगा। आपने समय बदला और मुझे आप सबको मिलने का अवसर दिया, इसलिए मैं NASSCOM का बहुत आभारी हूं।

शायद ही कोई संगठन इतना जल्‍दी एक Movement बन जाए, आमतौर पर Membership होती है, सब Meetings होती है, सरकार को Memorandum दिये जाते हैं, सरकार से अपेक्षाएं की जाती है, कभी राजी-नराजी प्रकट की जाती है, लेकिन NASSCOM का Character वो नहीं रहा। यह संस्‍था से ज्‍यादा एक बड़ा आंदोलन बन गया और प्रारंभ में जिसने कुछ मोतियों को NASSCOM के धागे के साथ जोड़ दिया। आज धीरे-धीरे भारत का गौरवगान करने वाली एक बहुत बड़ी सुंदर माला बन गया है ।

जब NASSCOM की चर्चा आएगी तो Dewang की जरूर चर्चा आएगी। मेरा Dewang से अच्‍छा परिचय था और जब Y2k को लेकर के बड़ा तूफान खड़ा हो गया था, सारी दुनिया चिंतित थी और उस समय अटल जी की सरकार थी हमारे प्रमोद जी IT विभाग को देखते थे और बड़ा इतना Hype था Y2k के कारण पता नहीं कैसे क्‍या हो जाएगा। और उस समय Dewang के साथ काम करने का अवसर आया था, लेकिन खैर बहुत लम्‍बे समय हमारे बीच रह नहीं वो। मैं उनको आदरपूर्वक अंजली देता हूं और NASSCOM जितनी तेज गति से प्रगति करेगा उतने ही Dewang के ideas हमें हर बार याद आते रहेंगे।

25 साल के कार्यकाल में जब NASSCOM प्रारंभ हुआ तो मैं समझता हूं शायद यह क्षेत्र Hundred Million की Economy से ज्‍यादा नहीं होगा, आज Hundred forty Six Billion तक पहुंच गया। 25 साल में इतना बड़ा Jump, लेकिन ज्‍यादातर जब IT sector की चर्चा होती है, यह तो बात माननी पड़ेगी कि आज IT में जहां हम पहुंचे हैं उसका एक कारण, जो प्रमुख कारण है मुझे लगता है, वो प्रमुख कारण है कि इसमें सरकार कहीं नहीं है। हम जितने दूर रहे उतने ही अच्‍छे है। यह जो सारा करिश्‍मा है वो हमारी युवा पीढ़ी का है। 20, 22, 25 साल के नौजवान जिन्‍होंने उस समय इस क्षेत्र में प्रवेश किया। NASSCOM के इस Network के माध्‍यम से लाखों नौजवानों को रोजगार मिला, उनको अवसर मिले। देश की economy को लाभ हुआ। भारत को आधुनिक बनाने की दिशा में कुछ कदम हम भी चले।

लेकिन इन सबसे भी अलग एक बात जो मुझे हमेशा लगती है इस IT के कारण पूरी दुनिया को भारत की तरफ देखने का रवैया बदलना पड़ा। पहले दुनिया हमें पिछड़े, अंधश्रद्धा में डूबे हुए, सांप-सपेरे वाले, इसी हमारे देश की पहचान बनी हुई थी। लेकिन हमारे नौजवानों ने Computer पर उंगलियां घुमाते-घुमाते सारी दुनिया के दिमाग को बदल दिया और विश्‍व को भारत की एक नई पहचान देने में इस क्षेत्र का एक बहुत बड़ा योगदान है और इसके लिए इस क्षेत्र के साथ जुड़े हुए सभी भारत की इतनी बड़ी महान सेवा के लिए अनेक-अनेक अभिनंदन के अधिकारी है। मैं आपको बधाई देता हूं।

आज जिन महानुभावों ने इस क्षेत्र में योगदान किया है, जिन्‍होंने Innovation के द्वारा, नई-नई Application के द्वारा, अपने start-up Industries को भी बहुत ऊंचाई पर पहुंचाया है। जिन्‍होंने इस क्षेत्र से जो कुछ भी कमाया समाज सेवा के लिए लगाया है जैसे हमारे अजीम प्रेमजी, उन सबका मुझे सम्‍मान करने का अवसर मिला। मैं उन सबको हृदय से बधाई देता हूं। उनके Achievement के लिए NASSCOM को जन्‍म देने वालों से लेकर के NASSCOM को यहां तक पहुंचाने वालों को और NASSCOM के कारण अपने को भी आपको बहुत ऊंचाईयों पर ले जाने वालों को भी मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं और मुझे विश्‍वास है कि आप लोगों का यह सा‍हस, आप लोगों का यह प्रयास नई पीढ़ी को भी प्रेरणा देगा और अनेक नई चीजों को करने के लिए आश्‍वस्‍त करेंगे।

आपका कार्यक्रम है IT- India Tomorrow और आप Innovations पर बल दे रहे हैं। हम भी कुछ दिनों से Digital India की दिशा में चीजों को Synchronize करने का प्रयास कर रहे हैं। वक्‍त इतना तेजी से बदल चुका है कि जितना महत्व Highways का है, उतना ही महत्व i- Ways का है, Information ways. Highways बन गए तो प्रगति होगी और गारंटी जब तक i-way नहीं जुड़ता है अधूरी रह जाती है और इसलिए जब Digital India इस बात को लेकर के चल रहे हैं तो हमारी कल्‍पना है। Digital दृष्टि से जो Infrastructure चाहिए भारत के हर नागरिक को वो व्‍यवस्‍था कैसे उपलब्‍ध हो। उतना वो विस्‍तार होना चाहिए। हम Digital India की जब बात करते है तब Citizen Centric सेवाएं उसको उपलब्‍ध कराने की व्‍यवस्‍था, हम कैसे विकसित करें। हम Digital India की बात करते है, तब Governance में हम किस प्रकार से बदलाव लाएं और मेरा यह मत रहा है। Good Governance का एक पर्याय बन गया है E-Governance और जब मैं E-Governance कहता हूं तब मेरी दृष्टि से वो Easy Governance भी है, Economical Governance भी है। और उस रूप में Governance की सारी परिभाषाएं बदलती जा रही है। हम उसको कैसे आगे बढ़ाएं। हम आज जहां भी पहुंचे हैं, संतोष है ऐसा लगता है, लेकिन जरूरत के हिसाब से देखें तो अभी हम बहुत पीछे हैं। बहुत कुछ करना बाकी है। इतना बड़ा देश, इतने सारे लोग, आप कल्‍पना कर सकते हैं जिस देश में बहुत ही निकट भविष्‍य में 100 करोड़ Mobile Phones लोगों के हाथ में होंगे। Hundred crore क्‍या? अब जितना जल्‍दी आपकी field के लोग Mobile app जितनी तेजी से तैयार करेंगे। मैं समझता हूं उतना तेजी से आप Market को Capture करेंगे और मैं जो यह सलाह दे रहा हूं उसके लिए कोई Consultancy Fee नहीं है।

सिर्फ Banking लीजिए. मैं नहीं मानता हूं कि Bank में कोई जाने वाला है। Mobile Banking पर दुनिया चलने वाली है। हम उसको कैसे आगे बढ़ाएं, Mobile Governance पर चलने वाला है सारी सुविधाएं, सारी आवश्‍यकताएं, इंसान वहीं से प्राप्‍त करना चाहता है। आप तो देखते होंगे कि आज Astrologers भी Mobile पर सुबह क्‍या करना है, क्‍या नहीं करना, बता देते हैं। हर कोई समझता है कि इसका क्‍या उपयोग हो सकता है। हर कोई अपने-अपने तरीके से विकसित कर सकता है NASSCOM ने कभी Agenda नहीं रखा होगा कि Astrology और IT को क्‍या किया जाए, लेकिन लोगों ने कर लिया होगा।

कहने का तात्‍पर्य यह है कि पूजा-पाठ करना है तो भी उनको IT का सहारा लेना है। उसको दुनिया की Latest से Latest जानकारी चाहिए तो भी वो IT का सहारा ले रहा है। अपनी कोई समस्‍या का समाधान करना है तो भी IT से, Shopping करना है तो भी IT से, वह आज एक प्रकार से इस पर Dependent हो गया है और आपके परिवार में जो 18 से नीचे के जितने बच्‍चे हैं उनका एक ही गुरू है Google गुरू, वो सब चीज उसको ही पूछते हैं, वो आपको नहीं पूछेंगे। घर में भी अंदर चर्चा चलती होगी दो भाईयों के बीच में तो अंदर जाकर के पूछ करके आए देखो यह है तो यह इस रूप में उसने स्‍थान ले लिया है। इसलिए हम कल्पना कर सकते हैं कि इसमें व्याप्त की कितनी संभावनाएं पड़ी है और भारत का एक स्‍वभाव है इन चीजों को Adapt करना यह भारत के Nature में है।

हमारे यहां सामान्‍य से सामान्‍य व्‍यक्ति भी.. मैं अपना एक अनुभव बताऊं और मेरे लिए वो बड़ा surprise था। मैं गुजरात में मुख्‍यमंत्री था तो एक तहसील ऐसा था कि जहां मुझे पांच-छह साल वहां काम करने के बाद भी जाने का अवसर नहीं मिला था। मेरा स्‍वभाव रहता था कि मैं ज्‍यादा से ज्‍यादा स्‍थान पर पहुंचु, इलाके में जाऊं, लोगों से मिलूं, यह मेरा आग्रह रहता था। मैं हमारे सरकारी अफसरों को कहता कि भई वहां मुझे जाना है कोई कार्य्रक्रम बनाओ। अब वहां कोई कार्यक्रम बने इतना कोई विकास ही नहीं हुआ था क्‍या करें। मैंने कहा ऐसे ही चला जाऊंगा भई, कुछ करो। एक बस का Route चालू करने का कार्यक्रम बनाओ। मुझे वहां जाना है, खैर फिर तय हुआ कि वहां एक Chilling Centre बनाएंगे Milk Collection के लिए एक छोटा-सा Centre कोई 20-25 लाख का छोटा-सा इमारत बनाकर के Chilling Centre खड़ा किया।

मैंने कहा ठीक है, मैं उदघाटन के लिए आता हूं। जंगल विस्‍तार से सब आदिवासी लोग रहते हैं और forest होने के कारण वहां आम सभा करने के लिए भी जगह नहीं थी। कोई तीन किलोमीटर एक स्‍कूल था उस स्‍कूल के मैदान में एक आम सभा रखी तो यहां Chilling Centre का उद्घाटन करना और वहां जाना तो वहां पर जो Milk देने वाली कुछ आदिवासी महिलाएं थी। वो भी उस दिन उद्घाटन के समय Chilling Centre में करीब 25 महिलाएं उन्‍होंने बुलाकर रखी थी। हम सारा कार्यक्रम किया और मैं देख रहा था वो पच्‍चीसों महिलाएं Mobile Phone से फोटो निकाल रही थी। मानें आप कल्‍पना कर सकते हैं कि जहां 25 लाख का एक Chilling Centre बनाना एक बहुत बड़ी घटना सरकार के लिए थी। वहां सामान्‍य महिला वो भी आदिवासी महिला जो दूध भरने आई थी, उसके पास Mobile Phone था और फोटो निकाल रहीं थी और मैं उनके पास गया, मैंने कहा आप मेरा फोटो निकालकर के क्‍या करोगे? उन्‍होंने जो जवाब दिया वो मैं समझता हूं कि आपको भी चौंकाने वाला है। उन्‍होंने कहा हम जाकर के उसको Download कराएंगे। अब यह आपको भी अंदाज नहीं होगा कि आप कहां-कहां पहुंचे हैं। अगर इस शक्ति को पहचान लिया आपने कि आपका जो आखिरी client है वो आपसे दो कदम आगे है, उस need को पूरा करने के लिए सरकार Infrastructure खड़ा करे , आप नए Innovations करें। आपके Innovations को सरकार Adopt करे। और देखते ही देखते Revolution हो सकता है।

और मैं मानता हूं कि आने वाले दिनों में GDP की संभावना वाले अनेक क्षेत्र हैं, उसमें एक connectivity क्षेत्र, GDP increase करने वाला बहुत बड़ा क्षेत्र बनने वाला है। जितनी ज्‍यादा, जितनी अच्‍छी, जितनी तेज connectivity, उतनी अधिक GDP की संभावनाएं, यह होने वाला है। इतनी बड़ी तेजी से दुनिया बदल रही है, उस दुनिया को हम कैसे Capture करे। आने वाले दिनों में.. मेरे मन में एक सवाल है आप नाराज मत होना क्‍योंकि आपने बहुत किया है, देश का सम्‍मान बढ़ाया है, फिर भी, जो अच्‍छा करता है उसी से तो अपेक्षाएं होती है, जो अच्‍छा नहीं करता उसको कौन पूछेगा, भई हां ठीक है बहुत अच्‍छा, ले लो ईनाम ले लो। आप अच्‍छा कर रहे हैं, इसलिए मेरी अपेक्षाएं ज्‍यादा है। आप अच्‍छा नहीं करते तो मैं कुछ नहीं मांगता आपसे।

क्या आपके मन में सवाल नहीं उठता है दोस्‍तों कि Google मेरे देश में क्‍यों न बना ? क्‍या Talent में कमी है क्‍या, यहां से जो गए उन्‍होंने जरूर बनाया। मैं नहीं मानता हूं कि सरकार यह रूकावट है। हौंसले बुलंद हों, दुनिया में हम पहुंचने के लिए हम उस level की Innovations पर जाएं ताकि जगत को चलाने में हमारी व्‍यवस्‍थाएं एक Role Play करें और यह हो सकता है दोस्‍तों, मुश्किल काम नहीं है। Hollywood के फिल्‍म से भी कम खर्चे में अगर मेरे देश के नौजवान Mars पर पहुंच सकते हैं, तो मैं समझता हूं कि आप भी कर सकते हैं मेरे दोस्‍तो! यह innovation के बहुत बड़े challenge के रूप में लेना चाहिए। कहीं और सब चीजें बनें फिर हम सिर्फ client बने, अच्‍छे client बने और अच्‍छे बने यह हमारा मकसद नहीं हो सकता। हमें इससे आगे जाना है। एक क्षेत्र ऐसा है, जिसमें बहुत संभावनाएं पड़ी है ऐसा मैं मानता हूं।

मैं दुनिया के जितने राजनेताओं को प्रधानमंत्री बनने के बाद मिला। शायद 50 से ज्‍यादा राजनेताओं से मिला हूं। उसमें 25 से 30 राजनेताओं से मेरी जो बात हुई है वो Cyber Security की उनकी चिंता सारी दुनिया परेशान है Cyber Security को लेकर। क्‍या मेरे हिंदुस्‍तान का नौजवान दुनिया को चैन की नींद सोने के लिए Cyber Security के लिए Full Proof Innovations लेकर के आ सकता है क्‍या? बहुत बड़ा Market होगा आप लिखकर के रखिए यह। firewall से भी काफी आगे बढ़ना पड़ेगा। हमें उस स्थिति में पहुंचना पड़ेगा और जिसके संबंध में जानते ही दुनिया को लगेगा कि, हां यार हम चिंतित थे, अब शायद हमें रास्‍ता मिल गया। सारी दुनिया की जो ताकत है, उस ताकत को Cyber Safety की जरूरत खड़ी हुई है। Cyber Security की जरूरत पड़ी है। क्‍या NASSCOM के द्वारा ऐसे एक Task-force बनाकर के, हम Globally क्‍या दे सकते हैं। यह बात सही है कि यह dynamic अवस्‍था है। आप एक करे तो वो दूसरा करता है, आप दूसरा करे तो, तीसरा करता है, लेकिन शायद जगत को एक बहुत बड़ा चिंतामुक्‍त करने का काम हम कर सकते हैं। मैं डरा नहीं रहा हूं, मैं इस विषय का मास्‍टर नहीं हूं। मैं एक Client हूं, मैं client के रूप में बात करता हूं, सामान्‍य ग्राहक। अगर हम यह security प्रदान नहीं करेंगे, वो दिन दूर नहीं होगा कि बहुत बड़ा वर्ग मोबाइल को छूने से भी दूर रहेगा। उसको लगेगा कि नहीं, नहीं भईया यह पता नहीं बातें कहां चली जाएंगी, कोई चीजें कहां Record हो जाएंगी अरे नहीं नहीं भईयां वो मैं नहीं करता, मेरे पास मत.. यह दिन आएंगें। और तब जाकर के इस process को इतना बड़ा धक्‍का लगेगा, जिसकी हम कल्‍पना नहीं कर सकते और इसलिए आवश्‍यक है हम Assurance पैदा करे विश्‍वास पैदा करे कि भई चिंता मत करो यह जो इस technology से तुम जुड़े हो, सुरक्षित है, चिंता मत करो.. तुम्‍हारी privacy को भी problem नहीं है।

तुम्‍हारे अपने Documents को भी Problem नहीं है। उसी प्रकार से जैसा E-Business बढ़ा, जो भी वो Portal बनाकर के आते हैं वो आगे बढ़ रहे हैं। अब जितनी बड़ी मात्रा में E-Database तैयार हो रहा है, Digital Database तैयार हो रहा है, आने वाले दिनों में आपको अपने Status से नीचे आकर के एक नया Business शुरू करना पड़ेगा। Status, मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मैं शब्द प्रयोग ऐसा करने वाला हूं। Public Life में तो आप ऊंचे जाने वाले हैं, व्‍यापारिक जगत में ऊंचे जाने वाले हो। ऐसे दिन आएंगे जब आपको Cloud godown शुरू करने होंगे। अब आप अपने पिताजी को कहेंगे कि मैं Godown शुरू करने जा रहा हूँ, तो वे कहेंगे कि तुम्‍हारी बुद्धि खराब हो गई है क्‍या? Godown खोलोगे क्‍या? लेकिन आने वाले दिनों में Cloud Godown का एक बहुत बड़ा business खड़ा होने वाला है। बहुत बड़ी मात्रा में लोग अपने Documents, अपनी सारी व्‍यवस्‍थाएं और बैंक, बैंक भी पूरा का पूरा Data आपके Cloud Godown में रखने के लिए तैयार हो जाएगा, जिस पल उसको विश्‍वास हो जाएगा कि आप Security Provide करते हैं, Safety Provide करते हैं। Cloud locker आने वाले दिनों में Important Document के लिए, Even कल जो हमने Gold Bond की बात कही है, Gold Bond लेने के बाद बहुत लोग होंगे जो Gold Bond को Cloud locker में रख देंगे। Cloud Godown and Cloud locker यह इतनी बड़ी Market की संभावना वाला क्षेत्र बन रहा है। मैं समझता हूं उस पर हमें व्‍यापक रूप से सोचना होगा और सरकारों को भी अब सरकारों को अपने दफ्तरों में फाइलों के ढ़ेर रखने की आवश्‍यकता नहीं होगी। वे अपने Cloud Godown में चीजें रखते रहेंगे और सालों-साल सुरक्षित उसको रखें वो दिन आने वाले हैं।

मैं स्‍वयं, मैं शायद पहला politician हूं, जो Sound Cloud का उपयोग करता हूं और मेरा अनुभव इतना अच्‍छा है, Sound cloud का। वरना मैं पहले Yahoo के अगल-बगल में ही घूमता रहता था, YouTube के अगल-बगल में घूमता रहता था। अब मैं चला गया वहां और मैंने देखा है मैं बहुत तेजी से एक बहुत बड़े जग‍त के साथ जुड़ गया। हम इन शक्तियों को अगर पहचानते हैं और उन शक्तियों को जोड़ करने की दिशा में प्रयास करते हैं तो बहुत बड़ा लाभ आने वाले दिनों में हो सकता है, ऐसा मुझे लगता है।

हमारे रविंशकर जी ने कहा कि अमीर और गरीब की चर्चा का एक नया पैरामीटर आने वाला है और वो है Digital Divide. Digital Divide से भी अमीरी और गरीबी नापी जाएगी और इसलिए समाज में दो तबके पैदा न हो, digital divide की अवस्‍था पैदा न हो उसको हमने आगे बढ़ाना पड़ेगा। मैंने देखा है सरकार में एक बहुत बड़ी समस्‍या रहती है एक तो silos में काम करने की उनकी पहले से ही आदत रही है और अब उनकी digital activity भी silos में पड़ी है। और मैं मानता हूं, मैं तो technician नहीं हूं, मुझे लगता आप कर सकते हैं, फिर वही आप कर सकते हैं इसलिए कहने का मन करता है।

किसी भी language को किसी भी language में Translate करने वाले Software आपने बनाए हैं। उसकी लेखनी अलग है, उसका grammar अलग है, लेकिन Translation हो जाता है software से। मतलब Interpretation के लिए आपके पास बढि़या-सा Talent है जिसका उपयोग करते हो। सरकार के सामने यह समस्‍या है, किसी ने 15 साल पहले कोई Software लिया तो यह सारा Material उस भाषा के Software में है। 10 साल पीछे कोई दूसरा Software लिया तो उसमें है। यह इतना बिखरा पड़ा है और इतने अलग-अलग लोग माल हमको देकर चले गए हैं। अब उस समय जो लोग थे उनको लेने की जरूरत होगी शायद और लेने में भी मजा आता होगा। क्‍या हमारी यह जो बिखरी हुई चीजें हैं, हरेक का अलग-अलग Software है। अगर Language को आप Interpret कर सकते हैं बड़ी आसानी से एक software से, क्‍या इस challenge को उठाकर हमारी यह जो Raw data पड़ा है, अलग-अलग form में पड़ा है, उसको हम चाहे इस प्रकार से उसको synchronize करना, उसको Interpret करना, उसको उस form में रखना क्‍या इस काम को कर सकते हैं क्‍या। देश के Governance में एक बहुत बड़ा बदलाव आ सकता है इससे, क्‍योंकि आज मैं नया software लूं और लोगों को कहूं कि भई अब वो बदलो, वो फैंक दो इसमें डालो सारा। तो भई वो कहेंगे कि ठीक है साहब हम data entry करते रहेंगे। मैं नहीं चाहता हूं कि सरकारे data entry में ही लगी रहे। हमें बदलाव चाहिए और technology के उपयोग से क्‍या होता है देखा होगा आपने। बहुत-सी बातें होती हैं जो लिखने, पढ़ने, देखने को मिलती नहीं है, लेकिन मैं बताता हूं।

हम लोगों ने गैस सिलेंडर की जो सब्सिडी है वो Direct Benefit Transfer करने की Scheme बनाई। 80 percent ग्राहक तक हम पहुंच गए। करीब 12 crore लोगों को हम Direct Benefit Transfer कर रहे हैं और यह काम हमने 30 दिन में पूरा कर दिया, कैसे? Just it with the help of technology. कितना बड़ा achievement और मैं मानता हूं आने वाले दिनों में यह जो भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ाई है न, उसमें technology बहुत बड़ा Role play कर रही है। इतनी transparency लाई जा सकती है, हम चाहते हैं यह लाना और इससे बड़ी देश की सेवा क्‍या हो सकती है। यह सिर्फ गैस का जो हमने direct transfer किया है न, मेरा मोटा-मोटा अंदाज है शायद 10 percent लीकेज तो मैंने बंद कर ही दिया है। Can you imagine ten percent यानी thousands of crore rupee है।

अभी हमने Coal Auction किया है। पूरा technology का उपयोग किया, इतने बड़े बोर्ड पर public में उसको रखा। जिसको बैठना था, सारे पत्रकार भी बैठे थे। Auction हो रहा था। 204 coal blocks, जिसको Supreme Court ने सितंबर महीने में कह दिया कि भ्रष्‍टाचार हुआ है, रद्द करो। सब फायदा मुफ्त का उठा कर ले गए और आपको मालूम होगा कि एक जगह से चिट्ठी जाती थी, कोयले की खदान मिल जाती थी। Supreme Court ने निर्णय किया, हमने उसका फायदा उठाया। हमने तीन महीने के अंदर सारी योजना बनाई, Ordinance लाए, कुछ लोगों की नाराजगी स्वाभाविक है कि Ordinance क्‍यों लाए ? CAG ने कहा था कि यह जो coal block का आवंटन हुआ है, उसमें एक लाख 86 हजार करोड़ रुपये का घपला हुआ है। उस समय जब एक लाख 86 करोड़ अखबारों में हैडलाइन आई तो इस देश के नागरिक मानने को तैयार नहीं थे कि यार यह तो ऐसे ही लिख दिया होगा। CAG शायद सरकार से, उसकी भिड़ गई होगी। हम भी politically बोलते तो थे लेकिन मन में रहता था कि यार इतना होगा क्‍या? देखा भाई जिसने समंदर देखा नहीं है, जिसने गांव का तालाब देखा है उसको कोई पूछे कि समंदर कैसा है? तो वो क्‍या बोलेगा, क्‍या बोलेगा बेचारा। किसी को पूछेगा कि बताओ तो भई तो वो कहेगा कि तुम्‍हारे गांव में जो तालाब है न इससे बहुत बड़ा होता है। कितना बड़ा होता है, बोले बहुत बड़ा होता है। फिर पूछेगा.. ऐसे हमारी भी मुसीबत है.. हम तो कल्‍पना ही नहीं कर सकता है। अभी हमने 19 ब्‍लॉक का auction किया और technology का प्रयोग करके किया पूरी तरह e-auction था, सब लोग अपनी बोली computer से बोल रहे थे। 204 में से सिर्फ 19 का हुआ है, CAG का कहना है सिर्फ 204 में एक लाख 86 हजार करोड़ रूपये का घपला हुआ है। 19 का किया और अब तक एक लाख 10 हजार करोड़ रुपया की बोली, बोल चुके हैं। Technology से Transparency कैसे आती है इसका यह जीता जागता उदाहरण है और कहीं किसी ने उंगली नहीं उठाई है जी। एक सवाल नहीं खड़ा हुआ है। अगर हम ईमानदारी से आधुनिक विज्ञान का उपयोग करते हुए, नेक इरादे से चीजों को करें। क्‍या आने वाले दिनों में आप इसमें योगदान कर सकते हैं और मैं मानता हूं कि आप लोग कर सकते हैं और आपसे मेरी अपेक्षाएं हैं।

अभी हमने एक कल्‍पना रखी है हम जानते हैं कि Tourism का sector. अभी हमारे चंद्रशेखर जी Two trillion Dollar का हिसाब बता रहे थे। आज दुनिया में Tourism का Business three trillion dollar का है और तेज गति से बढ़ने वाला business है। आज जो Tourist है वो न टेलिफोन करके जानकारी लेता है, न किताब पढ़कर निकलता है, वो Google Map से चलता है वो Destination Google से तय करता है, वो IT profession के द्वारा व्‍यवस्‍था के द्वारा चलता है। क्‍या हम भारत का Tourism में हमारे इस Profession के माध्‍यम से एक बहुत बड़ी marketing कर सकते हैं? हम पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकते हैं क्‍या? और भारत में गरीब से गरीब को रोजगार देने में Tourism बहुत बड़ी ताकत रखता है और एक बार उसको सही चीजें प्राप्‍त हो। मगर इन चीजों को वो मेहनत करके करे, Database तैयार करके करे, easily accessible व्‍यवस्‍थाएं विकसित करे। आप कल्‍पना कर सकते हैं हम कहां से कहां पहुंच सकते हैं। हमारे नौजवानों को मैं आग्रह करता हूं।

मैंने सरकार में अभी यह निर्णय किया है Heritage cities के लिए। मैं चाहता हूं कि देश में 50 ऐसे Heritage Cities में Virtual Museum तैयार किया जा सकता है क्‍या? देखिए यह किसी भी देश की विरासत को बचाने, संभालने में museum का बहुत बड़ा role होता है, लेकिन आज भारत के पास इतने पैसे नहीं है। कि हम world class museum को create करे, लेकिन virtual museum बना सकते हैं। मैं, नौजवानों आपसे आग्रह करता हूं, आइए virtual museum बनाइए, virtual museum बनाकर के एक बहुत बड़ा market खड़ा करे, tourism के साथ जोड़े और भारत सरकार तैयार है इस प्रकार के virtual museum को आने वाले दिनों में खरीदने के लिए तैयार है। एक बहुत बड़े Business की संभावनाएं हैं, Research करने वाली University मिल जाएगी, Professors मिल जाएंगे और फिर आप उसमें से तैयार करिए और इतना User friendly बनाएंगे, आप देखिए tourism को बढ़ावा देने के लिए यह virtual museum और Economical रहेगा। आप एक Museum खड़ा करे उसका खर्चा और एक Virtual Museum का बहुत फर्क पड़ जाता है। क्‍या हम इस काम को कर सकते हैं क्‍या? आने वाले दिनों में अगर इन चीजों का काम कर सकते हैं तो मेरा आपसे आग्रह है कि आप करे, बाकी तो शिक्षा है, Health है यह काम ऐसे है कि बड़े बहुत ही अनिवार्य हैं।

Remotest to Remote Area में हम अगर अच्‍छी शिक्षा पहुंचाने चाहते हैं तो Technology बहुत बड़ी ताकत है। Long Distance education के द्वारा उत्‍तम से उत्‍तम शिक्षा हम दे सकते हैं और हम अगर उसका उपयोग करे हम बहुत बड़ी सेवा कर सकते हैं आप Corporate Social responsibility के नाम पर कई काम कर रहे हैं, मेरा एक आग्रह है स्‍वच्‍छता के लिए आप करें, लेकिन उसके साथ-साथ मुझे बताया गया कि 1800 members हैं आपके NASSCOM के, क्‍या 1800 Member कंपनियां कम से कम एक का उस कंपनी के मालिक या उसके partner जिस primary school में पढ़े हैं, जहां भी बचपन में गांव में होंगे, शहर में, जहां भी पढ़े हैं कम-से-कम उस स्‍कूल को आप एक E-library donate कर सकते हैं क्‍या? आप हमारी नई पीढि़यों को जानकारी का खजाना खोल दीजिए उनके सामने। आज Minimum 20 लाख किताबें E-Library के लिए आसानी से उसको उपलब्‍ध हो जाएगी। आज गांव में दो हजार किताबों की Library बनाना कठिन है, लेकिन आप जहां पढ़े हैं आपको एक Attachment होगा, आपका भी मन करता होगा, जिस स्‍कूल ने मुझे बड़ा बनाया, मैं भी उसके लिए कुछ करूं। आप देखिए देखते ही देखते वो Viral की तरह फैलेगा और फिर E-Library की लिए बहुत बड़ा business खुल जाएगा। यह है कि E-Library का structure बनाकर के दे देते हैं, E-Library service provide करते हैं। science magazine आज हमारा विद्यार्थी कहां से खर्चा करेगा। Even medical students के लिए science magazine महंगे पड़ते हैं, लेकिन हम E-Library Provide करे तो वो कितना सारा कर सकता है इसका आप अंदाज कर सकते हैं। और इसलिए हम Corporate Social Responsibility के नाते ही अपने व्यक्तिगत जीवन में जहाँ नाता रहा वहां कुछ करें, आप देखिये उनके लिए भी बहुत बड़ी चीज़ होगी और आने वाले दिनों में बहुत बड़ा लाभ होगा और Dynamic आप उसमें उत्तरोत्तर सुधार करवा सकते हैं क्योंकि आप इस field में हैं। दूसरा जब मैं सूचना की बात करता हूँ E-Waste इसके विषय में awareness नहीं है देखिये हमारे देश में environment की समस्याएं इसलिए आई कि जिस जगह कारखाना लगा दिया, They were not conscious about it. हमें E-Waste के सम्बन्ध में और NASSCOMM को विषय उठाना चाहिए और लोगो के लिए Awareness Campaign चलाना चाहिए online चलाना चाहिये, E-Waste के Solutions देने चाहिए, सरकार के साथ मिलकर के कोई project बनाया जा सकता है। Campaign चलाना चाहिए, वर्ना हम कहाँ से कहाँ पहुँच जायेंगे।

कभी कभार इन दिनों हमारे यहाँ पहले अच्छा पेन रखना एक Status था, अच्छी घड़ी रखना एक Status था लेकिन अब अच्छा फ़ोन रखना एक स्टेटस हो गया है और एक दूसरे को मिलते रहते हैं और कहते है अच्छा-अच्छा तूने ले लिया Apple-6. अगर ये नहीं है तो लगता है कुछ नहीं है। बहुत साल पहले की बात है इमरजेंसी के दिन थे मैं Underground था, पुलिस हमें खोज रही थी। एक परिवार में मैं रह रहा था उनके एक भाई UK में रहते थे वो आये हुए थे शाम को पहुंचें तो सभी भाई बैठे थे, तो उन्होंने कहा कि में एक घड़ी लाया हूँ, दो-ढाई लाख की घड़ी होगी शायद सबने देखी, सुबह हम चाय-पानी के लिए बैठे थे और उनके एक छोटे भाई थे वो बड़े मजाकिया थे, तो उन्होंने उनसे पुछा कि time कितना हो गया, तो उन्होंने कहा कि आठ बज गए हैं, बोले नहीं-नहीं ज़रा ठीक से देखिये, उन्होंने बोला कि आठ ही बजे है, फिर वो बोले की आप ज़रा ध्‍यान से देखिये वो फिर बोले की आठ ही बजे है, तो दूसरे भाई बोले की अच्छा, मेरी 250 रुपये की घड़ी है उसमें भी आठ ही बजे हैं।

हमारे देश में 1500 रूपए के मोबाइल वाला भी जो उपयोग देता है 25000 रूपए वाला भी उतना ही उपयोग देता है। लाल बटन, नीला बटन, Green button इससे ही एक मैं मानता हूँ कि सचमुच में हमें मोबाइल revolution लाना है, mobile app का revolution लाना है तो एक बहुत बड़े वर्ग को, 80 percent utility नहीं है 80 percent.. एवरेज मैं कह रहा हूँ, कितना ही बढ़िया सॉफ्टवेर वाला मोबाइल ले आईये, लेकिन उसका उपयोग ही नहीं करेंगे तो फायदा क्या होगा। क्या school-colleges में इसके बारे में awareness कार्यक्रम हो सकते हैं क्या? इसको करना चाहिए। वरना मैं मानता हूँ कि यह एक अलग प्रकार का E- Waste हैं। कोई भी पैसा अगर कहीं पर dead money के रूप में पड़ा है तो मैं मानता हूँ कि वो देश का नुकसान है। अगर मेरा 25,000 रूपए का मेरा मोबाइल फ़ोन हो और मैं उसका 80 प्रतिशत use नहीं करता मतलब कि वो मेरा dead money है सीधा- साधा इकोनॉमिक्स है, हमें लोगों को तैयार करना है और यह काम यही field के लोग कर सकते हैं. उसकी utility से ताकत बढ़ती है देश की, सामान्य लोगों की भी ताकत बढ़ती है और उस दिशा में हम कैसे काम करें इस दिशा में हमे सोचना है। आप जानते है कि मैं social मीडिया में काफी active रहा हूँ और काफी समय से active रहा हूँ, इस दुनिया की जब से शुरुआत हुई तभी से इसमें मेरी रुचि थी।

My gov.in मैंने मेरे कार्यालय से जोड़कर के मैंने देखा है कि मैं कोई भी चीज वहां question करता हूं, हजारों लोग मुझे respond करते हैं। मुझे कहीं भाषण करने जाना है और मैं पूछता हूं कि मुझे थोड़ा idea दीजिए, हजारों लोग तुरंत मुझे idea देते हैं। आपने देखा होगा यह जनधन योजना, प्रधानमंत्री जनधन योजना.. यह शब्‍द एक नागरिक ने दिया है, competition से आया है, my gov.in पर आया। अभी my gov.in के द्वारा मैं competition launch करने जा रहा हूं शायद एक दो दिन में कर लूंगा, मैं आपको भी निमंत्रित करता हूं इसमें आइए।

PMO कार्यालय के लिए Mobile App कैसा होगा, ideas पहली competition का मेरा level है Ideas. और जो Best ideas आएंगे यह Google के साथ मिलकर के हम कर रहे हैं, जो Best ideas होंगे ऐसे लोगों की टीम को फिर Google office America जाने का निमंत्रण मिलेगा और दूसरा है education, Idea को implement करने वाला पूरा software तैयार करना। मैं चाहूंगा कि मेरे कार्यालय को भी इस India tomorrow जो innovation को लेकर के आप चले हैं तो मुझे भी आप लोग मदद करे।

फिर एक बार मैं नहीं जानता मैंने ज्‍यादा ही समय ले लिया। मुझे यहां आकर अच्छा लगा, बहुत बहुत धन्‍यवाद।

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୭୭ତମ ସ୍ବାଧୀନତା ଦିବସ ଅବସରରେ ଲାଲକିଲ୍ଲା ପ୍ରାଚୀରରୁ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ନରେନ୍ଦ୍ର ମୋଦୀଙ୍କ ଅଭିଭାଷଣର ମୂଳ ପାଠ

ଲୋକପ୍ରିୟ ଅଭିଭାଷଣ

୭୭ତମ ସ୍ବାଧୀନତା ଦିବସ ଅବସରରେ ଲାଲକିଲ୍ଲା ପ୍ରାଚୀରରୁ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ନରେନ୍ଦ୍ର ମୋଦୀଙ୍କ ଅଭିଭାଷଣର ମୂଳ ପାଠ
Indian bull market nowhere near ending, says Chris Wood of Jefferies

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ମୁମ୍ବାଇଠାରେ ଭାରତୀୟ ସମ୍ବାଦପତ୍ର ସୋସାଇଟି ଟାୱାରଠାରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ପ୍ରଦତ୍ତ ଅଭିଭାଷଣ
July 13, 2024
ଆଗାମୀ ୨୫ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ବିକଶିତ ଭାରତ ଯାତ୍ରାରେ ଖବରକାଗଜର ଭୂମିକା ଅତ୍ୟନ୍ତ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ
ଯେଉଁ ଦେଶର ନାଗରିକମାନେ ନିଜ ସାମର୍ଥ୍ୟ ଉପରେ ବିଶ୍ୱାସ ରଖନ୍ତି, ସେମାନେ ସଫଳତାର ନୂଆ ଶିଖର ହାସଲ କରିବା ଆରମ୍ଭ କରିଦିଅନ୍ତି। ଆଜି ଭାରତରେ ମଧ୍ୟ ଏହା ଘଟୁଛି।
ଆଇଏନ୍ଏସ୍ କେବଳ ଭାରତର ଯାତ୍ରାର ଉତ୍ଥାନ-ପତନର ସାକ୍ଷୀ ହୋଇନାହିଁ ବରଂ ଏହାକୁ ଲୋକଙ୍କ ନିକଟରେ ପହଞ୍ଚାଇଛି
ଏକ ଦେଶର ବିଶ୍ୱସ୍ତରୀୟ ଭାବମୂର୍ତ୍ତି ଏହାର ଅର୍ଥନୀତିକୁ ସିଧାସଳଖ ପ୍ରଭାବିତ କରିଥାଏ। ଭାରତୀୟ ପ୍ରକାଶନଗୁଡ଼ିକ ସେମାନଙ୍କର ବିଶ୍ୱସ୍ତରୀୟ ଉପସ୍ଥିତି ବୃଦ୍ଧି କରିବା ଉଚିତ।

ମହାରାଷ୍ଟ୍ର ରାଜ୍ୟପାଳ ଶ୍ରୀମାନ ରମେଶ ବ୍ୟାସଜୀ, ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀମାନ୍ ଏକନାଥ ସିନ୍ଦେଜୀ, ଉପ ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଭାଇ ଦେବେନ୍ଦ୍ର ଫଡ଼ନଭୀସଜୀ, ଅଜିତ ଦାଦା ପାୱାରଜୀ, ଇଣ୍ଡିଆନ୍ ନ୍ୟୁଜ୍‌ପେପର ସୋସାଇଟିର ସଭାପତି ଭାଇ ରାକେଶ ଶର୍ମାଜୀ, ସମସ୍ତ ବରିଷ୍ଠ ମହାନୁଭବଗଣ, ଭଦ୍ରମହିଳା ଓ ସଜ୍ଜନମଣ୍ଡଳୀ!

ସର୍ବ ପ୍ରଥମେ ମୁଁ ଇଣ୍ଡିଆନ୍ ନ୍ୟୁଜ୍‌ପେପର ସୋସାଇଟିର ସମସ୍ତ ସଦସ୍ୟମାନଙ୍କୁ ବହୁତ ବହୁତ ଅଭିନନ୍ଦନ ଜ୍ଞାପନ କରୁଛି । ଆଜି ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ମୁମ୍ବାଇରେ ଏକ ବିଶାଳ ଏବଂ ଆଧୁନିକ ଭବନ ପ୍ରାପ୍ତ ହୋଇଛି । ମୁଁ ଆଶା କରୁଛି ଯେ ଏହି ନୂତନ ଭବନ ଆପଣମାନଙ୍କ କାମକାର୍ଯ୍ୟକୁ ବିସ୍ତାରିତ କରିବାରେ ସହାୟକ ହେବ । ଆପଣମାନଙ୍କର ଇଜ୍ ଅଫ୍ ୱାର୍କିଂ ବଢ଼ିବ । ଏହା ଫଳରେ ଆମର ଲୋକତନ୍ତ୍ରକୁ ବଳ ପ୍ରାପ୍ତ ହେବ । ଇଣ୍ଡିଆନ ନ୍ୟୁଜ୍‌ପେପର ସୋସାଇଟି ତ ସ୍ୱାଧୀନତା ପୂର୍ବରୁ ଏହାର ଅସ୍ତିତ୍ୱ ଜାହିର କରିଥିବା ସଂସ୍ଥାମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରୁ ଅନ୍ୟତମ । ଏବଂ ସେଥିପାଇଁ ଆପଣମାନେ ସଭିଏଁ ଦେଶର ଏହି ଯାତ୍ରାର ପ୍ରତ୍ୟେକ ଉତ୍ତରଣ- ଅବରୋହଣକୁ ଅତି ନିକଟରୁ ଲକ୍ଷ୍ୟ କରିଛନ୍ତି । ସେହି ସମୟ ସହିତ ଆପଣମାନେ ଜୀବନ ବଞ୍ôଚଛନ୍ତି ଏବଂ ଆଜିର ଜନସାଧାରଣଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ଏକଥା ସୂଚୀତ କରିଛନ୍ତି । ସେଥିପାଇଁ ଏକ ସଂଗଠନ ଭାବରେ ଆପଣମାନଙ୍କ କାମ ଯେତିକି ପ୍ରଭାବୀ ହେବ, ଦେଶକୁ ଏହାର ସେତିକି ସୁଫଳ ପ୍ରାପ୍ତ ହେବ ।

ସାଥୀଗଣ,

ଗଣମାଧ୍ୟମ କେବଳ ଦେଶର ପରିସ୍ଥିତିର ମୁକଦର୍ଶନ ହୋଇ ନଥାଏ । ଗଣମାଧ୍ୟମର ଆପଣମାନେ ସଭିଏଁ, ପରିସ୍ଥିତିକୁ ପରିବର୍ତ୍ତନ କରିବାରେ, ଦେଶକୁ ଦିଗ ପ୍ରଦର୍ଶନ କରିବାରେ ପ୍ରମୁଖ ଭୂମିକା ନିର୍ବାହ କରିଆସିଛନ୍ତି । ଆଜି ଭାରତ ଏପରି ଏକ କାଳଖଣ୍ଡରେ ଆସି ପହଞ୍ôଚଛି, ଯେତେବେଳେ ଏହାର ଆଗାମୀ ୨୫ ବର୍ଷର ଯାତ୍ରା ବେଶ୍ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣର୍ । ଏହି ୨୫ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ଭାରତ ବିକଶିତ ରାଷ୍ଟ୍ରରେ ପରିଣତ ହେବ, ଏଥିପାଇଁ ପତ୍ରପତ୍ରିକାମାନଙ୍କର ଭୂମିକା ମଧ୍ୟ ସେତିକି ମହାନ୍ ହେବ । ଗଣମାଧ୍ୟମ ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ ସଜାଗ କରିଥାଏ । ଗଣମାଧ୍ୟମ ନାଗରିକମାନଙ୍କୁ ସେମାନଙ୍କର ଅଧିକାର ସମ୍ପର୍କରେ ଚେତାଇ ଦେଇଆସୁଛି । ଏବଂ ଏହି ଗଣମାଧ୍ୟମ ଯାହା ଦେଶର ଲୋକମାନଙ୍କୁ ଏକଥା ମଧ୍ୟ ଆଶ୍ୱାସନା ଦେଉଛି ଯେ ଏହାର କେତେ ସାମର୍ଥ୍ୟ ରହିଛି । ଆପଣମାନେ ଏକଥା ଦେଖୁଛନ୍ତି, ଯେଉଁ ଦେଶର ନାଗରିକମାନଙ୍କର ନିଜର ସାମର୍ଥ୍ୟକୁ ନେଇ ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସ ଆସିଯାଏ ସେମାନେ ସଫଳତାର ନୂତନ ଶୀର୍ଷ ପ୍ରାପ୍ତ କରିବା ଆରମ୍ଭ କରିଥାନ୍ତି । ଭାରତରେ ମଧ୍ୟ ଆଜି ଏହା ଘଟିଚାଲିଛି । ମୁଁ ଏହାର ଗୋଟିଏ ଛୋଟିଆ ଉଦାହରଣ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଦେବାକୁ ଚାହୁଁଛି । ଏପରି ଏକ ସମୟ ଥିଲା, ଯେତେବେଳେ କିଛି ନେତା ଖୋଲାଖୋଲି ଭାବରେ କହୁଥିଲେ ଡିଜିଟାଲ କାରବାର ଭାରତର ଲୋକମାନଙ୍କ ସାମର୍ଥ୍ୟର ବାହାର କଥା । ସେପରି ଲୋକ ଚିନ୍ତା କରୁଥିଲେ ଯେ ଆଧୁନିକ ପ୍ରଯୁକ୍ତି ଭଳି କଥା ଏ ଦେଶରେ ଚାଲିପାରିବ ନାହିଁ । କିନ୍ତୁ ଭାରତର ଜନସାଧାରଣ ଚିନ୍ତାଶୀଳ ଭାବରେ ସେମାନଙ୍କର ସାମର୍ଥ୍ୟ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱକୁ ପ୍ରଦର୍ଶନ କରୁଛନ୍ତି । ଆଜି ଭାରତ ଡ଼ିଜିଟାଲ କାରବାର କ୍ଷେତ୍ରରେ ବିଶ୍ୱରେ ବଡ଼ ବଡ଼ ରେକର୍ଡ ହାସଲ କରିଚାଲିଛି । ଆଜି ଭାରତ ୟୁପିଆଇ କାରଣୁୁ ଆଧୁନିକ ଡିଜିଟାଲ ଜନ ସଂସାଧନ କାରଣରୁ ଲୋକମାନଙ୍କ ଇଜ୍ ଅଫ୍ ଲିଭିଂ ବୃଦ୍ଧି ପାଇଚାଲିଛି । ଲୋକମାନଙ୍କ ପାଇଁ ଗୋଟିଏ ସ୍ଥାନରୁ ଅନ୍ୟ ସ୍ଥାନ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ପଇସା ପଠାଇବା ସହଜସାଧ୍ୟ ହୋଇପାରିଛି । ଆଜି ବିଶ୍ୱବ୍ୟାପୀ ଆମର ଯେଉଁ ଦେଶବାସୀ ବସବାସ କରୁଛନ୍ତି, ବିଶେଷ କରି ଉପସାଗରୀୟ ଦେଶମାନଙ୍କରେ, ସେମାନେ ସବୁଠାରୁ ଅଧିକ ରିମିଟାନ୍ସ ପଠାଉଛନତି ଏବଂ ଏଥିପାଇଁ ପୂର୍ବରୁ ସେମାନେ ଯେତିକି ଟଙ୍କା ଖର୍ଚ୍ଚ କରୁଥିଲେ, ତାହା ଯଥେଷ୍ଟ ମାତ୍ରାରେ ହ୍ରାସ ପାଇଛି ଏବଂ ଏହା ପଛରେ ଥିବା ଏକମାତ୍ର କାରଣ ହେଉଛି ଡିଜିଟାଲ ବିପ୍ଳବ । ବିଶ୍ୱର ବଡ଼ ବଡ଼ ଦେଶ ଆମଠାରୁ ପ୍ରଯୁକ୍ତି ଏବଂ ଆମର ପ୍ରବର୍ତ୍ତନ ପଦ୍ଧତିର ମଡେଲକୁ ଜାଣିବାକୁ ବୁଝିବାକୁ ପ୍ରୟାସ କରୁଛନ୍ତି । ଏଭଳି ଏବଂ ଏତେ ବଡ଼ ସଫଳତାର କାରଣ କେବଳ ସରକାରଙ୍କର ନୁହେଁ, ଏହା କଦାପି ନୁହେଁ । ଏହି ସଫଳତାରେ ଆପଣମାନଙ୍କର ସମସ୍ତଙ୍କର, ଗଣମାଧ୍ୟମର ଲୋକମାନଙ୍କର ମଧ୍ୟ ଏଥିରେ ସହଭାଗୀତା ରହିଛି ଏବଂ ସେଥିପାଇଁ ଆପଣମାନେ ସଭିଏଁ ଅଭିନନ୍ଦନର ପାତ୍ର ।

 

ସାଥୀଗଣ,

ଗଣମାଧ୍ୟମର ସାଧରଣ ଭୂମିକା ହେଉଛି, ଆଲୋଚନା ସୃଷ୍ଟି କରିବା, ଗମ୍ଭୀର ପ୍ରସଙ୍ଗ ଉପରେ ଚର୍ଚ୍ଚାକୁ ସାମର୍ଥ୍ୟ ପ୍ରଦାନ କରିବା । କିନ୍ତୁ, ଗଣମାଧ୍ୟମର ଆଲୋଚନାର ଦିଗ ବି ଅନେକ ସମୟରେ ନୀତିର ଦିଗ ଉପରେ ନିର୍ଭରଶୀଳ ହୋଇଥାଏ । ଆପଣମାନେ ସଭିଏଁ ଜାଣନ୍ତି, ସରକାରଙ୍କର ସକଳ କାର୍ଯ୍ୟର ସୁଫଳ ଅଛି, କୁଫଳ ବି ଅଛି । କିନ୍ତୁ ଭୋଟର ଗୁଣ-ଭାଗ ମଧ୍ୟ ଏଥିରେ ରହିଛି । ଆମେ ଆସିବା ପରେ ଏଭଳି ଚିନ୍ତାଧାରାକୁ ବଦଳାଇଦେଲୁ । ଆପଣମାନଙ୍କର ସ୍ମରଣ ଥିବ, ଆମ ଦେଶରେ ଦଶନ୍ଧି ଦଶନ୍ଧି ପୂର୍ବରୁ ବ୍ୟାଙ୍କ୍‌ଗୁଡ଼ିକର ରାଷ୍ଟ୍ରୀୟକରଣ କରାଯାଇଥିଲା । କିନ୍ତୁ ଏହା ପର ସତ୍ୟ ଏହା ଥିଲା ଯେ ୨୦୧୪ ମସିହା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଦେଶରେ ୪୦-୫୦ କୋଟି ଗରିବ ଲୋକ ବସବାସ କରୁଥିଲେ ଯେଉଁମାନଙ୍କର କୌଣସି ବ୍ୟାଙ୍କ୍ ଜମାଖାତା ନଥିଲା । ଏବେ ଯେତେବେଳେ ରାଷ୍ଟ୍ରୀୟକରଣ ହେଲା ସେତେବେଳେ ଯାହା କୁହାଯାଉଥିଲା ଏବଂ ୨୦୧୪ରେ ଯାହା ଦେଖାଗଲା,ଅର୍ଥାତ୍‌, ଦେଶର ଅର୍ଦ୍ଧେକ ଲୋକ ବ୍ୟାଙ୍କିଙ୍ଗ୍ ବ୍ୟବସ୍ଥା ବାହାରେ ଅଛନ୍ତି । ଏହା କେବେ ଦେଶରେ ଏକ ପ୍ରସଙ୍ଗ ଭାବେ ଆଲୋଚିତ ହୋଇଥିଲା? କିନ୍ତୁ ଆମେ ଜନଧନ ଯୋଜନାକୁ ଏକ ଆନ୍ଦୋଳନ ଭାବରେ ଗ୍ରହଣ କଲୁ । ଆମେ ପାଖାପାଖି ୫୦ କୋଟି ଲୋକଙ୍କୁ ବ୍ୟାଙ୍କିଙ୍ଗ୍ ବ୍ୟବସ୍ଥା ସହିତ ଯୋଡ଼ିଲୁ । ଡିଜିଟାଲ ଇଣ୍ଡିଆ ଏବଂ ଭ୍ରଷ୍ଟାଚାର ବିରୋଧୀ ପ୍ରଚେଷ୍ଟାରେ ଏହି କାମ ଆମର ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ମାଧ୍ୟମ ହେଲା । ଏହିଭଳି ଭାବରେ, ସ୍ୱଚ୍ଛତା ଅଭିଯାନ, ଷ୍ଟାର୍ଟ ଅପ୍ ଅଭିଯାନ, ଷ୍ଟାଣ୍ଡ୍ ଅପ୍ ଅଭିଯାନ ଭଳି ଅଭିଯାନଗୁଡ଼କୁ ଯଦି ଆମେ ଦେଖିବା! ଏସବୁ ଭୋଟ୍ ବ୍ୟାଙ୍କ୍ ରାଜନୀତିରେ କୌଣସି ସ୍ଥାନରେ ଫିଟ୍ ହେଉନଥିଲା । କିନ୍ତୁ, ପରିବର୍ତ୍ତନଶୀଳ ଭାରତରେ, ଦେଶର ଗଣମାଧ୍ୟମ ଏହାକୁ ଦେଶର ଜାତୀୟ ଆଲୋଚନାର ଅଂଶବିଶେଷରେ ପରିଣତ କରିଥିଲା । ଯେଉଁ ଷ୍ଟାର୍ଟ ଅପ୍ ଶବ୍ଦ ୨୦୧୪ ମସିହା ପୂର୍ବରୁ ଅଧିକତର ଲୋକ ଜାଣି ସୁଦ୍ଧା ନଥିଲେ, ଗଣମାଧ୍ୟମରେ ହୋଇଥିବା ଆଲୋଚନା ହିଁ ତାହାକୁ ଘରେ ଘରେ ପହଞ୍ଚାଇଥିଲା ।

ସାଥୀଗଣ,

ଆପଣମାନେ ଗଣମାଧ୍ୟମର ବଡ଼ ବଡ଼ ବ୍ୟକ୍ତିତ୍ୱ, ଅନୁଭବୀ ମଧ୍ୟ । ଆପଣମାନଙ୍କ ନିର୍ଣ୍ଣୟ ଦେଶର ଗଣମାଧ୍ୟମକୁ ମଧ୍ୟ ଦିଶା ନିର୍ଦ୍ଦେଶ କରିଆସୁଛି । ସେଥିପାଇଁ ଆଜିର ଏହି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମରେ ମୋର ଆପଣମାନଙ୍କୁ କିଛି ନିବେଦନ କରିବାର ଅଛି ।

ସାଥୀଗଣ,

ସରକାର ଯଦି କୌଣସି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ଆରମ୍ଭ କରୁଛନ୍ତି ତେବେ ଏହା ଜରୁରି ନୁହେଁ ଯେ ତାହା କେବଳ ସରକାରୀ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ । ସରକାର ଯେକୌଣସି ଚିନ୍ତାଧାରା ଉପରେ ଗୁରୁତ୍ୱ ଆରୋପ କରନ୍ତି ତାହା ଜରୁରି ନୁହେଁ ଯେ ତାହା କେବଳ ସରକାରଙ୍କ ବିଚାର । ଯେମିତିକି ଦେଶରେ ଅମୃତ ମହୋତ୍ସବ ପାଳନ କରାଗଲା, ଦେଶବ୍ୟାପୀ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଘରେ ତ୍ରିରଙ୍ଗା ଅଭିଯାନ ଚାଲିଲା, ସରକାର ଏହାର ଶୁଭାରମ୍ଭ ଅବଶ୍ୟ କରିଥିଲେ, କିନ୍ତୁ ପୂରା ଦେଶ ଏହାକୁ ଆପଣାଇଥିଲା ଏବଂ ଆଗକୁ ଆଗେଇ ନେଇଥିଲା । ଏହିଭଳି ଭାବରେ, ଆଜି ଦେଶ ପରିବେଶ ଉପରେ ଏତେ ପ୍ରାଧାନ୍ୟ ଦେଉଛି । ଏହା ରାଜନୀତି ଠାରୁ ହଟି ମାନବ ସମାଜର ଭବିଷ୍ୟତ ସହିତ ଜଡ଼ିତ ଏକ ପ୍ରସଙ୍ଗ । ଯେମିତିକି, ଏବେ ‘ଗୋଟିଏ ଚାରା, ମା’ନାମରେ’, ଏହି ଅଭିଯାନ ଆରମ୍ଭ କରାଯାଇଛି । ଭାରତରେ ଏହି ଅଭିଯାନ ସମ୍ପର୍କରେ ସାରା ବିଶ୍ୱରେ ଆଲୋଚନା ହେଉଛି । ମୁଁ ଏବେ ଯେତେବେଳେ ଜି-୭ ସମ୍ମିଳନୀରେ ଯୋଗଦେବାକୁ ଯାଇଥିଲି, ଯେତେବେଳେ ମୁଁ ଏହି ପ୍ରସଙ୍ଗକୁ ସମସ୍ତଙ୍କ ସମ୍ମୁଖରେ ରଖିଥିଲି ସେତେବେଳେ ସମସ୍ତଙ୍କ ମନରେ ଉତ୍ସୁକତା ଥିବାର ମୁଁ ଲକ୍ଷ୍ୟ କରିଥିଲି । କାରଣ ପ୍ରତ୍ୟେକ ବ୍ୟକ୍ତିଙ୍କର ନିଜ ମା’ପ୍ରତି ଏକ ବିଶେଷ ଶ୍ରଦ୍ଧା ରହିଥାଏ । ତାଙ୍କୁ ଲାଗେ ଯେ ଏହା ଅବଶ୍ୟ ସଫଳ ହେବ । ଏକଥା ସଭିଏଁ କହୁଛନ୍ତି । ଯଦି ଦେଶର ଅଧିକରୁ ଅଧିକ ଗଣମାଧ୍ୟମ ସଂସ୍ଥା ଏହା ସହିତ ସଂଶ୍ଳିଷ୍ଟ ହେବେ, ତେବେ ଆଗାମୀ ପିଢ଼ିଙ୍କ ପାଇଁ ଏହା ବହୁତ ବଡ଼ କାମ ହେବ । ମୋର ଆପଣମାନଙ୍କୁ ନିବେଦନ, ଏହିଭଳି ପ୍ରତ୍ୟେକ ପ୍ରୟାସକୁ ଆପଣମାନେ ଦେଶର ଉପକ୍ରମ ବୋଲି ହେତୁକରି ଏହାକୁ ଆଗକୁ ବଢ଼ାନ୍ତୁ । ଏହା କେବଳ ସରକାରଙ୍କର କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ନୁହେଁ, ଏହା ଦେଶର କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ । ଚଳିତ ବର୍ଷ ଆମେ ସମ୍ବିଧାନର ୭୫ତମ ବର୍ଷ ପୂର୍ତ୍ତି ମନାଉଛୁ । ସମ୍ବିଧାନ ପ୍ରତି ଦେଶର ନାଗରିକମାନଙ୍କର କର୍ତ୍ତବ୍ୟବୋଧ ବଢ଼ୁ, ସେଥିପ୍ରତି ସେମାନଙ୍କ ମନରେ ଜାଗରୁକତା ବୃଦ୍ଧି ପାଉ, ଏଥରେ ଆପଣମାନେ ସମସ୍ତେ ବହୁତ ବଡ଼ ଭୂମିକା ନିର୍ବାହ କରିପାରିବେ ।

 

ସାଥୀଗଣ,

ଆଉ ଗୋଟିଏ ପ୍ରସଙ୍ଗ ଯାହା ପର୍ଯ୍ୟଟନ ସହିତ ଜଡ଼ିତ । ପର୍ଯ୍ୟଟନ କେବଳ ସରକାରଙ୍କ ନୀତି ଦ୍ୱାରା ଆଗକୁ ବଢ଼ି ପାରିବନାହିଁ । ଯେତେବେଳେ ଆମେ ସମସ୍ତେ ମିଳିମିଶି ଦେଶର ବ୍ରାଣ୍ଡିଂ ଏବଂ ମାର୍କେଟିଂ କରିବା, ସେତେବେଳେ ଦେଶର ସମ୍ମାନ ବୃଦ୍ଧି ପାଇବା ସହିତ ଦେଶର ପର୍ଯ୍ୟଟନ ମଧ୍ୟ ବୃଦ୍ଧି ପାଇପାରିବ । ଦେଶରେ ପର୍ଯ୍ୟଟନ ଶିଳ୍ପକୁ ବଢ଼ାଇବା ସକାଶେ ଆପଣମାନେ ନିିଜ ନିଜ ଉପାୟମାନ ବାହାର କରିପାରିବେ । ଏବେ ଯେମିତି ଭାବନ୍ତୁ, ମହାରାଷ୍ଟର ସମସ୍ତ ସମ୍ବାଦପତ୍ର ମିଳିମିଶି ଏକଥା ସ୍ଥିର କରିବେ ଯେ ଭାଇ, ଆମେ ସେପ୍ଟେମ୍ବର ମାସରେ ବଙ୍ଗଳାର ପର୍ଯ୍ୟଟନକୁ ନିଜ ଆଡ଼ୁ ପ୍ରମୋଟ କରିବା । ଯେତେବେଳେ ବହାରାଷ୍ଟ୍ରର ଲୋକ ଚାରିଆଡ଼ୁଯେତେବେଳେ ବଙ୍ଗଳା- ବଙ୍ଗଳା ଦେଖିବେ ଏବଂ ମନରେ ଭାବିବେ ଯେ ଏବର୍ଷ ଆମେ ବଙ୍ଗ ପ୍ରଦେଶ ବୁଲି ଯିବା, ସେତେବେଳେ ବଙ୍ଗଳାର ପର୍ଯ୍ୟଟନ ଶିଳ୍ପ ବୃଦ୍ଧି ପାଇବ । ଭାବନ୍ତୁ ଆପଣ ତିନି ମାସ ପରେ ସ୍ଥିର କରିବେ ଯେ ତାମିଲନାଡ଼ୁର ପ୍ରତ୍ୟେକ ବସ୍ତୁ ଉପର ଆମେ ସଭିଏଁ ମିଳିମିଶି ଫୋକସ୍ କରିବା । ଆପଣମାନେ ଦେଖିବେ, ମହାରାଷ୍ଟ୍ରର ଲୋକମାନେ ପର୍ଯ୍ୟଟନ ସମ୍ପର୍କରେ ଅଧିକ ଆଗ୍ରହୀ ହୋଇପଡ଼ିବେ ଏବଂ ତାମିଲନାଡ଼ୁ ବୁଲି ଯିବାକୁ ଆଗ୍ରହୀ ହେବେ । ଦେଶର ପର୍ଯ୍ୟଟନ ଶିଳ୍ପକୁ ଆଗକୁ ବଢ଼ାଇବା ଦିଗରେ କିଛି ଉପାୟ ରହିଛି ଏବଂ ଯେତେବେଳେ ଆପଣମାନେ ତାହା କରିବେ, ସେତେବେଳେ ସେହିସବୁ ରାଜ୍ୟରେ ମହାରାଷ୍ଟ୍ର ପ୍ରତି ମଧ୍ୟ ଅଭିଯାନ ଆରମ୍ଭ ହେବ, ଆକର୍ଷଣ ବଢ଼ିବ । ଯେତେବେଳେ ରାଜ୍ୟ ରାଜ୍ୟ ମଧ୍ୟରେ ପରସ୍ପର ପ୍ରତି ଆକର୍ଷଣ ବୃଦ୍ଧି ପାଇବ, ଜିଜ୍ଞାସା ବଢ଼ିବ ଏବଂ ସର୍ବୋପରି ଏହାର ଫାଇଦା ଯେଉଁସବୁ ରାଜ୍ୟମାନଙ୍କ ପ୍ରତି ଆପଣମାନେ ଏଭଳି ପ୍ରୟାସ କରୁଛନ୍ତି ତାହାକୁ ମିଳିବ ଅନ୍ୟ କିଛି ଅତିରିକ୍ତ ପ୍ରୟାସରେ ତାହା ସାକାର ହୋଇପାରିବ ।

ସାଥୀଗଣ,

ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ନିଜର ବୈଶ୍ୱିକ ଉପସ୍ଥିତିକୁ ବୃଦ୍ଧି କରିବା ନେଇ ମୋର ମଧ୍ୟ ଏକ ନିବେଦନ ଅଛି । ଆମମାନଙ୍କୁ ଚିନ୍ତା କରିବାକୁ ପଡ଼ିବ ଯେ ଦୁନିଆରେ ଆମେ କେବଳ ଏକୁଟିଆ ବସବାସ କରୁନାହୁଁ । ଗଣମାଧ୍ୟମ ଦୃଷ୍ଟିରୁ ଆମେ ୧୪୦ କୋଟି ଜନସଂଖ୍ୟା ବିଶିଷ୍ଟ ଏକ ରାଷ୍ଟ୍ର । ଏତେ ବଡ଼ ଦେଶ, ଏତେ ବିଶାଳ ସାମର୍ଥ୍ୟ ଏବଂ ସମ୍ଭାବନା ଏବଂ ଖୁବ୍ କମ୍ ସମୟ ଭିତରେ ଆମେ ଭାରତକୁ ବିଶ୍ୱର ତୃତୀୟ ବୃହତ୍ତମ ଅର୍ଥନୀତି ଭାବରେ ଦେଖିବାକୁ ଯାଉଛୁ । ଯଦି ଭାରତର ସଫଳତା, ବିଶ୍ୱର କୋଣ ଅନୁକୋଣ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ପହଞ୍ଚାଇବାର ଦାୟିତ୍ୱ ଆପଣମାନେ ଖୁବ୍ ନିଷ୍ଠାର ସହିତ ପାଳନ କରିବେ ତେବେ ତାହା ସହଜସାଧ୍ୟ ହୋଇପାରିବ । ଆପଣମାନେ ଜାଣନ୍ତି ଯେ ବିଦେଶରେ ରାଷ୍ଟ୍ରର ଛବି ପ୍ରଭାବ ସିଧାସଳଖ ଭାବରେ ଏହାର ଅର୍ଥନୀତି ଏବଂ ବିକାଶ ଉପରେ ପଡ଼ିଥାଏ । ଆଜି ଆପଣମାନେ ଦେଖୁନ୍ତୁ, ବିଦେଶରେ ଭାରତୀୟ ମୂଳ ଅଧିବାସୀ ଲୋକମାନଙ୍କ ମର୍ଯ୍ୟାଦା ବଢ଼ିଛି, ବିଶ୍ୱସନୀୟତା ବଢ଼ିଛି, ସମ୍ମାନ ବଢ଼ିଛି । କାରଣ, ବିଶ୍ୱରେ ଭାରତର ସଫଳତା ବଢ଼ିଛି । ଭାରତ ମଧ୍ୟ ବୈଶ୍ୱିକ ପ୍ରଗତିରେ ଅଧିକ ଯୋଗଦାନ କରିପାରିଛି । ଆମର ଗଣମାଧ୍ୟମ ଏହି ଦୃଷ୍ଟିକୋଣରୁ ଯେତିକି ଅଧିକ କାମ କରିବ, ଦେଶକୁ ସେତିକି ଫାଇଦା ହେବ ଏବଂ ସେଥିପାଇଁ ମୁଁ ଚାହେଁ ଯେ ଯେତେସବୁ ଜାତିସଂଘ ସ୍ୱୀକୃତ ଭାଷା ରହିଛି, ସେଥିରେ ମଧ୍ୟ ଆପଣ ନିଜର ପବ୍ଲିକେଶନ୍ସର ବିସ୍ତାର କରନ୍ତୁ । ଆପଣଙ୍କ ମାଇକ୍ରୋସାଇଟ୍ସ, ସୋସିଆଲ ମିଡିଆ ଆକାଉଣ୍ଟସ୍ ଏହିସବୁ ଭାଷାରେ ମଧ୍ୟ ହୋଇପାରିବ ଏବଂ ଆଜିକାଲି ତ କୃତ୍ରିମ ପ୍ରଜ୍ଞାର ଯୁବ । ଏହିସବୁ କାମ ଆପଣମାନଙ୍କ ଲାଗି ଖୁବ୍ ସହଜ ।

 

ସାଥୀଗଣ,

 ମୁଁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଏତେ ସବୁ ପରାମର୍ଶ ଦେଇସାରିଛି । ମୁଁ ଜାଣେ, ଆପଣମାନଙ୍କ ସମ୍ବାଦପତ୍ରରେ, ପତ୍ରପତ୍ରିକାମାନଙ୍କରେ, ବହୁତ ଲିମିଟେଡ୍ ସ୍ଥାନ ଥାଏ । କିନ୍ତୁ, ଆଜିକାଲି ପ୍ରତ୍ୟେକ ସମ୍ବାଦପତ୍ରର ଗୋଟିଏ ଗୋଟିଏ ଡିଜିଟାଲ ପବ୍ଲିକେଶନ ମଧ୍ୟ ଉପଲବ୍ଧ ରହିଛି । ସେଥିରେ ନା ସ୍ପେସ୍‌ର ସଂକଟ ନା ବିତରଣର କୌଣସି ସମସ୍ୟା । ମୋର ବିଶ୍ୱାସ, ଆପଣମାନେ ସମସ୍ତେ ଏହି ପରାମର୍ଶ ଉପରେ ବିଚାର କରିବେ । ନୂଆ ନୂଆ ପରୀକ୍ଷା ନୀରିଡ଼ା କରିବେ, ଏବଂ ଲୋକତନ୍ତ୍ରକୀ ମଜଭୁତ ବନେଇବେ । ଏବଂ ମୋର ଦୃଢ଼ ବିଶ୍ୱାସ ଯେ ଆପଣମାନଙ୍କ ନିମନ୍ତେ ଗୋଟିଏ ଦୁଇ ପୃଷ୍ଠିଆ ହେଉ ପଛେ, ବିଶ୍ୱର ମିଳିତ ଜାତିସଂଘର ଅନ୍ୟୂନ କିଛି ଭାଷାରେ ରହିଥାଉ ପଛେ, ବିଶ୍ୱର ଅଧିକତର ବର୍ଗ ଏହାକୁ ଦେଖି ଥାଆନ୍ତି, ପଢ଼ିଥାଆନ୍ତି.. . ଦୂତାବାସଗୁଡ଼ିକ ତାହା ଉପରେ ନଜର ପକାଇଥାନ୍ତି ଏବଂ ଭାରତର ଏଭଳି କଥା ପହଞ୍ଚାଇବାର ସବୁଠାରୁ ବଳିଷ୍ଠ ମାଧ୍ୟମ ହେଲା ଏହି ଡିଜିଟାଲ ସଂସ୍କରଣ । ଆପଣମାନେ ଯେତିକି ସଶକ୍ତ ହୋଇ କାମ କରିବେ, ଦେଶ ସେତିକି ଆଗକୁ ବଢ଼ିବ । ଏହି ବିଶ୍ୱାସର ସହିତ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ବହୁତ ବହୁତ ଧନ୍ୟବାଦ! ଏବଂ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଭେଟିବାର ମଧ୍ୟ ମୋତେ ଏହା ଗୋଟିଏ ଅବସର ପ୍ରଦାନ କରିଛି । ମୋର ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଶୁଭକାମନା! ଧନ୍ୟବାଦ!