Text of PM’s address at launching ceremony of DD Kisan Channel

Published By : Admin | May 26, 2015 | 21:21 IST

देश के कोने कोने से आए हुए किसान भाईयों और बहनों, कृषि क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिक, अर्थवेयत्ता और उपस्थित सभी महानुभाव और इस कार्यक्रम में देश भर के लोग भी टीवी चैनलों के माध्यम से जुड़े हुए हैं, मैं उऩको भी प्रणाम करता हूं।

कई लोगों को लगता होगा, इतने channels चल रहे हैं, नया क्या ले आए हैं। कभी-कभी लगता है कि हमारे देश में टीवी चैनलों का Growth इतना बड़ा तेज है, लेकिन जब बहुत सारी चीजें होती हैं, तब जरूरत की चीज खोजने में जरा दिक्कत जाती है। अगर आज खेल-कूद के लिए अगर आपको कोई जानकारी चाहिए, तो टीवी Channel के माध्यम से सहजता से आपको मिल जाती है। भारत के खेल नहीं दुनिया के खेल का भी अता-पता चल जाता है। और आपने देखा है कि Sports से संबंधित चैनलों के कारण हमारे यहां कई लोगों की Sports के भिन्न-भिन्न विषयों में रूचि बढ़ने लगी है, जबकि हमारे स्कूल Colleges में उतनी मात्रा में Sports को प्राथमिकता नहीं रही है, लेकिन उन चैनलों को योगदान, जिन्होंने Sports के प्रति नई पीढ़ी में रूचि पैदा की और उसके सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिले, पहले Sports को Sports के रूप में देखा जाता था। लेकिन धीरे-धीरे पता चलने लगा लोगों को भी, ये बहुत बड़ा अर्थशास्त्र है। लाखों लोगों की रोजी रोटी जुड़ी है, और खेल के मैदान में खेल खेलने वाले तो बहुत कम होंगे, लेकिन खिलाड़ियों के पीछे हजारों लोगों की फौज होती है, जो भिन्न-भिन्न प्रकार के कामों को करती हैं, यानी एक इतना बड़ा Institution है, इन व्यवस्थाओं के माध्यम से पता चला है, किसान हिन्दुस्तान में इतना बड़ा वर्ग है। उसके पास कृषि के क्षेत्र में चीजें कैसे पहुंचे। ये बात हमें मान करके चलना पड़ेगा कि अगर हमारे देश को आगे ले जाना है, तो हमारे देश के गांवों को आगे ले जाना ही पड़ेगा। गांव को आगे ले जाना है तो पेशे को प्राथमिकता देते हुए उसके बढ़ावा देना ही पड़ेगा। ये सीधा-साधा भारत के आर्थिक जीवन से जुड़ा हुआ सत्य है।

लेकिन दिनों दिन हालत क्या हुई है, आपको जानकर हैरानी होगी, हमारे देश के किसानों ने कितना बड़ा पराक्रम किया हुआ है, कितना सारा समाज जीवन को दिया हुआ है, पुराने Gadgets का जो लोग स्टडी करते हैं, आज से दो सौ साल पहले साऊथ इंडिया में, दक्षिण भारत में Consumer का इलाके के किसानों का Study हुई और आज आप हैरान होंगे दो सौ साल पहले जबकि यूरिया भी नहीं था, पोटास भी नहीं था, इतनी सुविधाएं भी नहीं थी, उस समय वहां का किसान एक हैक्टर पर 15 से 18 टन paddy का उत्पादन करता था। कहने का तात्पर्य यह है कि उस समय हमारे पूर्वजों के पास ज्ञान-विज्ञान नये प्रयोग तो कुछ न कुछ तो था, दो सौ साल पहले हमारे देश में गेहूं कुछ इलाकों में करीब-करीब 12 से 15 टन का उत्पादन प्रति हेक्टर हमारे किसान ने किया था। आज पूरे देश में औसत उत्पादन कितना है प्रति हेक्टर, सब प्रकार के धान मिला दिया जाए, औसत उत्पादन है प्रति हेक्टर दो टन। जनसंख्या बढ़ रही है, जमीन बढ़ती नहीं है, आवश्यकता बढ़ रही हैं, तब हमारे पास उपाय क्या बचता है, हमारे पास उपाय वही बचता है कि हम उत्पादकता बढ़ाएं, प्रति हेक्टर हमारे उत्पादकता बढ़ेगी तो हमारे आय बढ़ेगी।

आज देश में Average प्रति हेक्टर दो टन का उत्पादन है। विश्व का Average तीन टन का है। क्या कम से कम हिन्दुस्तान सभी किसान मिल करके वैज्ञानिक, टेक्नोलॉजी, बीज सप्लाई करने वाले, दवाई सप्लाई करने वाले, सब लोग मिल के क्या यह सोच सकते हैं कि प्रति हेक्टर तीन टन उत्पादन कैसे पहुंचाएं, अब यूं दो से तीन होना, लगता बहुत छोटा है, लेकिन वह छोटा नहीं, बहुत कठिन काम है, बहुत कठिन काम है, लेकिन सपने देखें तो सही, हर तहसील में स्पर्धा क्यों न हों कि बताओं भाई आज हमारी तहसील में इतनी भूमि जोती गई, क्या कारण है कि हम दो टन से सिर्फ इतना ही बढ़ पाए, और ज्यादा क्यों न बढ़ पाए।

देश में एक कृषि उत्पादन में अगर तहसील को यूनिट मानें तो एक बहुत बड़ी स्पर्धा का माहौल बनाने की आवश्यकता है और तहसील को यूनिट में इसलिए कहता हूं कि Climatic Zone होते हैं, कछ इलाके ऐसे होते है कुछ ही फसलें होती है, कुछ मात्रा नही हो सकती, कुछ इलाके ऐसे होते हैं, जहां कुछ फसल होती है अधिक मात्रा में होती है। लेकिन अगर तहसील इकाई होगी, तो स्पर्धा के लिए सुविधा रहती है और अगर हमारे देश के किसान को लाल बहादुर शास्त्री जी ये कहें जय जवान जय किसान का मंत्र दें। लाल बहादुर शास्त्री जी के पहले हम लोग गेहूं विदेशों से मंगवा करके खाते थे। सरकारी अफसरों के जिम्मे उस कालखंड के जो सरकारी अफसर हैं, वो आज शायद Senior most हो गये होंगे या तो Retired हो गए होंगे। District Collector का सबसे पहला काम रहता था कि कांडला पोर्ट पर या मुंबई के पोर्ट पर विदेश से जो गेहूं आया है, उसको पहुंचाने की व्यवस्था ठीक हुई है या नहीं, पहुंचा कि नहीं पहुंचा इसी में उनका दिमाग खपा रहता था, जवाब उन्हीं से मागा जाता था। देश बाहर से मंगवा करके खाना खाते था, यह हकीकत है।

देश के किसानों के सामने लाल बहादुर शास्त्री जी के ने लक्ष्य रखा, जय जवान, जय किसान का मंत्र दिया और युद्ध की विभिषिका का Background था, देश भक्ति का ज्वार था और लाल बहादुर जी की सादी- सरल भाषा में हुई है। हमारे देश के किसानों ने इस बात को पकड़ लिया, और देश के किसानों ने तय कर लिया कि हम अन्न के भंडार भर देंगे। हमारे देश के किसान ने उसके बाद कभी भी हिन्दुस्तान को भूखा नहीं मरने दिया। किसान की जेब भरे या न भरे, देश के नागरिकों का पेट भरने में कभी कमी नहीं रखी है। इस सच्चाई को समझने के बावजूद, हम बदले हुए युग को देखते हुए हम परिवर्तन नहीं लाएंगे तो परिस्थितियां नहीं पलटेंगी। एक समय था हमारे यहां कहा जाता था उत्तम से उत्तम खेती, मध्यम व्यापार और कनिष्ठ नौकरी ये हमारे घर-घर की गूंज थी, लेकिन समय रहते आज अगर किसी किसान के घर में जाईये तीन बच्चे हैं उससे पूछिए भाई क्या सोचा है ये तो पढ़ने में अच्छा है, जरा समझदार है, उसको तो कहीं नौकरी पर लगा देंगे। ये भी शायद कही काम कर लेगा, लेकिन ये छोटे वाला हैं न, वो ज्यादा समझता नहीं, सोच रहा हूं उसको खेती में लगा दूं। यानी ये घऱ में भी सोच बनी है कि जो तेज तर्रार बच्चा है उसको कहीं नौकरी करने के लिए भेज दूं। और जो ठीक है भाई और कहीं बेचारे को कहीं मिलता नहीं खेती कर लेगा, पेट गुजारा कर लेगा, जो खेती उत्तम मानी जाती था, वो खेती कनिष्ठ थी, और जो नौकरी कनिष्ठ मानी जाती थी, चक्र ही उलट गया, मुझे लगता है कि इसको फिर से हमें एक बार उल्टा करना है, और प्रयास करें तो सफलता मिल सकती है।

मेरा अपना एक अनुभव है गुजरात का मुख्‍यमंत्री होने के नाते मुझे एक बार जूनागढ़ Agriculture university में बुलाया गया था और प्रगतिशील किसानों को सम्‍मानित करना था। मैं जब जाने वाला था तो मैं सोच रहा था कि क्‍या उनके सामने क्‍या बात कहूंगा, दिमाग.. रास्‍ते में प्रवास करते हुए मैं चल रहा था और मेरे Mind में ऐसा बैठ गया था कि यह तो सभी बहुत वृद्ध किसान होंगे, बड़ी आयु के होंगे, तो उनके लिए ऐसी बात बताऊं, वैसी बात बताऊं तो जहां में पहुंचा। और Audience देखा तो मैं हैरान था। करीब-करीब सभी 35 से नीचे की उम्र के थे और मैंने उस दिन करीब 12 या 15 किसान को ईनाम दिया। वे सारे young थे, Jeans pant और T- shirt में आए हुए थे। मैंने उनको पूछा भई क्‍या पढ़े-लिखे थे.. सारे पढ़े-लिखे थे भाई। तो मैंने कहा कि खेती में वापस कैसे आ गए। तो बोले कुछ जो बदलाव आया है, उसका हम फायदा ले रहे हैं। अगर हम फिर से एक बार आधुनिक विज्ञान को, technology को गांव और खेत खलियान तक पहुंचा देंगे तो देश का सामान्‍य व्‍यक्ति, देश का नौजवान जो खेती से भागता चला गया है, वो फिर से खेती के साथ जुड़ सकता है और देश की अर्थव्‍यवस्‍था को एक नई गति दे सकता है। लेकिन इसके लिए हमें एक विश्‍वास पैदा करना पड़ेगा एक माहौल पैदा करना पड़ेगा।

हिंदुस्‍तान के 50 प्रतिशत से ज्‍यादा ऐसे किसान होंगे गांव में, जिन्‍हें यह पता नहीं होगा कि सरकार में Agriculture Department होगा, कोई Agriculture Minister होता है। सरकार में Agriculture के संबंध में कुछ नीतियां, कुछ पता नहीं होता। हमारे देश की कृषि किसानों के नसीब पर छोड़ दी गई है। और वो भी स्‍वभाव से इसी Mood का है, पर पता नहीं भाई अब कुदरत रूठ गई है। पता नहीं अब ईश्‍वर नाराज है यही बात मानकर बेचारा अपनी जिंदगी गुजार रहा है।

यह इतना क्षेत्र बड़ा उपेक्षित रहा है, उस क्षेत्र को हमने vibrant बनाना है, गतिशील बनाना है और उसके लिए अनेक प्रकार के काम चल रहे हैं। मैंने तो देखा है कि किसान अपने खेत में फसल लेने के बाद जो बाद की चीजें रह जाती हैं उसको जला देता है। उसको लगता है कि भई कहां उठाकर ले जाओगे, इसको कौन लेगा, वो खेत में ही जला देता है। उसे पता नहीं था कि यही चीजें अगर, मैं थोड़े-थोड़े टुकड़े करके फिर से गाढ़ दूं, तो वो ही खाद बन सकती है, वो ही मेरी पैदावर को बढ़ा सकती है। लेकिन अज्ञान के कारण वो जलाता है। यहां भी कई किसान बैठे होंगे वे भी अपनी ऐसी चीजें जलाते होंगे खेतों में। यह आज भी हो रहा है अगर थोड़ा उनको guide करे कोई, हमने देखा होगा केले की खेती करने वालों को, केला निकालने के बाद वो जो गोदा है उसको लगता है बाद में उसका कोई उपयोग ही नहीं है। लेकिन आज विज्ञान ने उस केले में से ही उत्‍तम प्रकार का कागज बनाना शुरू किया है, उत्‍तम प्रकार के कपड़े बनाना शुरू किया है। अगर उस किसान को वो पता होगा, तो केले की खेती के बाद भी कमाई करेगा और उस कमाई के कारण उसको कभी रोने की नौबत नहीं आएगी। एक बार मानो केला भी विफल हो गया हो ।

मैं एक प्रयोग देखने गया था, यानी केला निकालने के बाद उसका जो खाली खड़ा हुआ, यह उसका जो पौधे का हिस्‍सा रहता है अगर उसको काटकर के जमीन के अंदर गाढ़ दिया जाए, तो दूसरी फसल को 90 दिन तक पानी की जरूरत नहीं पड़ती। उस केले के अंदर उतना Water Content रहता है कि 90 दिन तक बिना पानी पौधा जिंदा रह सकता है। लेकिन अगर यह बातें नहीं पहुंची तो कोई यह मानेगा कि यार अब इसको उठाने के लिए और मुझे याद है वो खेत में से उठाने के‍ लिए वो खर्च करता था, ले जाओ भई। जैसे- जैसे उसको पता चलने लगा तो उसकी value addition करने लगा chain बनाने लगा।

हमारे देश में कृषि में multiple utility की दिशा में हम कैसे जाए, multiple activity में कैसे जाए, जिसके कारण हमारा किसान जो मेहनत करता है उसको लाभ हो। कभी-कभी किसान एक फसल डाल देता है, लेकिन अगर कोई वैज्ञानिक तरीके से उसको समझाए। इस फसल के बगल में इसको डाल दिया जाए, तो उस फसल को बल मिलता है और तुम्‍हारी यह फसल मुफ्त में वैसे ही खड़ी हो जाएगी। जो आप में से किसानों को मालूम है कि इस प्रकार की क्‍या व्‍यवस्‍था होगी। अब बहुत से किसान है उसको मालूम नहीं है वो बेचारा एक चीज डालता है तो बस एक ही डालता है। उसे पता नहीं होता है कि बीच में बीच में यह चीज डालें। वो अपने आप में एक दूसरे को compensate करते हैं और मुझे एक अतिरिक्‍त income हो जाती है। इन चीजों को उन तक पहुंचना है। हमारे देश के किसान का एक स्‍वभाव है। किसान का स्‍वभाव क्‍या है। कोई भी चीज उसके पास लेकर जाओ, वे Outright कभी Reject नहीं करता है। देखते ही नहीं-नहीं बेकार है, ऐसा नहीं करता है। वो Outright select भी नहीं करता। आपकी बात सुनेगा, अपना सवाल पूछेगा, पचास बार देखेगा, तीन बार आपके पास आएगा, उतना दिमाग खपाता रहेगा। लेकिन फिर भी स्वीकार नहीं करेगा। किसान तब स्वीकार करता है जब वे अपने आंखों से सफलता को देखता है। ये उसका स्वभाव है और इसलिए जब तक किसान के अंदर विश्वास नहीं भर देते उसको भरोसा नहीं होता। हां भाई जो व्यवस्था क्योंकि इसका कारण नहीं है की वह साहसिक नहीं है लेकिन उसे मामलू है एक गलती है गई मतलब साल बिगड़ गया। साल बिगड़ गया 18-20 साल की बच्ची हुई है हाथ पीले करने के सपने तय किये हैं अगर एक साल बिगड़ गया तो बच्ची की शादी चार साल रुक जाती है। ये उसकी पीड़ा रहती है और इसलिए किसान तुरंत हिम्मत नहीं करता है, सोचता है किसान के पास यह बात कौन पहुंचाये।

इन समस्याओं का समाधान करने के लिए किसान तक अनुभवों की बात पहुंचाने के लिए और किसान के माध्यम से पहुंचाने के लिए एक प्रयास ये है किसान चैनल और इसलिए एक बात हमें माननी होगी कि हमारे कृषि क्षेत्र में बहुत बड़ा बदलाव लाना जरूरी है। आज global Economy है हम satellite पर ढेर सारा पैसा खर्च करते हैं एक के बाद एक satellite छोड़ रहे हैं । उन satellite के Technology का space Technology का सबसे बड़ा अगर लाभ हुआ है तो वो लाभ हुआ है मौसम की जानकारियां अब करीब-करीब सही निकलने लगी है। पहले मौसम की जानकारियां किसान को भरोसा नहीं होता था, यार ठीक है ये तो कहता था धूप निकलेगा नहीं निकला। लेकिन अब ये जो खर्चा कर रही है सरकार ढेर सारे satellite छोड़ रही है। ये अरबों- खरबों रुपये का खर्च हुआ है इसका अगर सबसे बड़ा लाभ मिल सकता है तो किसान को मिल सकता है। वो मौसम की खबर बराबर ले सकता है। मैं जिस किसान चैनल के माध्यम से, मैं हमारे किसानों को आदत डालना चाहता हूं कि वे इस मौसम विज्ञान को तो अवश्य टीवी पर देखें और मैं हमारे प्रसार भारती के मित्रों और किसान चैनल वालों को भी कहूंगा कि एक बार किसान को विश्वास हो गया कि हां भाई ये बारिश के संबंध में, हवा चलने के संबंध में, धूप निकलने के संबंध में बराबर जानकारी आ रही है तो उसका बराबर मालूम है कि ऐसी स्थिति में क्या करनी चाहिए वो अपने आप रास्ता खोज लेगा और परिस्थितियों को संभाल लेगा ये मुझे पता है।

आज ये व्यवस्था नहीं है आज general nature का आता है वो भी मोटे तौर पर जानकारी आती है उसमें रुचि नहीं है। मैं इस Technology में मेरी आदत है वेबसाइट पर जाने की लेकिन बारिश के दिनों में मैं कोई खबर सबसे पहले नहीं देखता हूं, वेबसाइट पर जाकर सबसे पहले मैं उस समय 5-6 दुनिया के जितनी महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं थी। जहां से मौसम की जानकारी मिलती थी, तुरंत देखता था हर बार। 5-6 जगह पर रोज सुबह मॉर्निंग में मेरा यही कार्यक्रम रहता था। मैं देखता था कि भाई पूरे विश्व में मौसम की स्थिति क्या है, बारिश कब आएगी, बारिश के दिनों के बात है।

मैं चाहता हूं कि सामान्य मानवीय इससे जुड़े, दूसरा आज global economy है। एक देश है उससे हमें अगर पता चलता है कि वहां इस बार मुंगफली बहुत पैदा होती थी। लेकिन इस बार उसकी मुंगफली एक दम से कम हो गई है। तो भारत के किसान को पता चलेगा कि भाई सबसे ज्यादा मुंगफली देने वाला देश था उसकी तो हालत खराब है। मतलब Globally मुंगफली के Market मरने वाला है। किसान सोच सकता है कि भई उसके यहां तो दो महीने पहले फसल क्योंकि बारिश हरेक जगह तो अलग-अलग है तो निर्णय कर पायेगा कि भाई इस बार मौका है। उसके तो सब बुरा हो गया है मैं उसमें से कुछ कर सकता हूं मैं अगर मुंगफली पर चला जाउं तो मेरा Market पक्का हो जाएगा और वो चला जाएगा। हम पूरे वैश्विक दृष्टि से दुनिया के किस Belt में किसानों का क्या हाल है किस प्रकार का वहां पैदावार की स्थिति है, बारिश की स्थिति क्या है, बदलाव क्या आ रहा है, उसके आधार पर हम तय कर सकते हैं।

हमारे देश में जो खजूर की खेती करते हैं, अरब देशों में हम से दो महीने बाद फसल आती है। हमारे देश में जो लोग इसके खेती करते हैं उनको दो महीने पहले Market मिल जाता है और उसके कारण अरब देशों में जो क्वालिटी है उसकी क्वालिटी हमारी तुलना में ज्यादा अच्छी है क्योंकि natural crop वहीं का है। लेकिन उसके वाबजूद हमारे यहां खजूर की खेती करने वालों को फायदा मिल जाते है क्यों, क्योंकि हम दो महीने पहले आ जाते हैं। हम ये..ये global economy की जो चीजें हैं उसको अगर गहराई से समझ करके हम अपने किसानों को guide करें तो उसको पता चलेगा वर्ना कभी क्या होता है किसान को मुसीबत। एक बार हवा चल पड़ती है कि टमाटर की खेती बहुत अच्छी है तो किसान बेचारा आंख बंद करके टमाटर की खेती में लग जाता है और जब टमाटर बहुत ज्यादा पैदा हो जाती है तो दाम टूट जाता है। दाम टूट जाता है टमाटर लंबे दिन रहता नहीं तो वो घाटे में चला जाता है और इसलिए कृषि में उत्पादन के साथ उसकी अर्थनीति के साथ जोड़कर ही चलना पड़ेगा और उसमें एक मध्य मार्ग काम करने के लिए सरकारी तंत्र किसान चैनल के माध्यम से प्रतिदिन आपके साथ जुड़ा रह सकता है। आपको शिक्षित कर सकता है, आपका मार्गदर्शन करता है, आपकी सहायता कर सकता है।

हमें अगर बदलाव लाना है तो जिस प्रकार से विश्व में बदलते बदलावों को समझकर अपने यहां काम करना होगा। मौसम को समझकर काम की रचना कर सकते हैं। उसी प्रकार से हम Technology के द्वारा बहुत कुछ कर सकते हैं। आज दुनिया में कृषि के क्षेत्र में Technology के क्षेत्र में बहुत काम किया है। हर किसान के पास यह संभव नहीं है कि दुनिया में Technology कहा है वो देखने के लिए जाए..विदेश जाए जाकर के देखें, नहीं है। मैं चाहूंगा कि इस किसान चैनल के माध्यम से नई-नई Technology क्या आई है वो नई-नई Technology किसान के लिए सिर्फ मेहनत बचाने के लिए नहीं उस Technology के कारण परिणाम बहुत मिलता है। Technology का Intervention कभी-कभी बहुत Miracle कर देता है। हम उसकी ओर कैसे जाए?

उसी प्रकार से राष्ट्र की आवश्यकता की ओर हम ध्यान कैसे दें। आज भी, लाल बहादुर शास्त्री ने कहा किसान ने बात उठा ली। अन्‍न के भंडार भर दिये। आज malnutrition हमारी चिंता का विषय है, कुपोषण यह हमारी चिंता का विषय है और कुपोषण से मुक्ति में एक महत्‍वपूर्ण आधार होता है प्रोटीन। ज्‍यादातर हमारे यहां परिवारों को गरीब परिवारों को प्रोटीन मिलता है दाल में से। Pulses में से। लेकिन देश में Pulses का उत्‍पादन बढ़ नहीं रहा है। प्रति हेक्‍टेयर भी नहीं बढ़ रहा है। और उसकी खेती भी कम हो रही है। अगर हमें हमारे देश के गरीब से गरीब व्‍यक्ति को प्रोटीन पहुंचाना है तो Pulses पहुंचानी पड़ेगी। Pulses ज्‍यादा मात्रा में तब पहुंचेगी जब हमारे यहां Pulses की ज्‍यादा खेती होगी, Pulses का उत्‍पादन ज्‍यादा होगा। हमारी University से भी मैं कहता हूं Agriculture University एक-एक अलग-अलग Pulses को लेकर हम उसमें Research कैसे करे? Genetic Engineering कैसे करें? हम प्रति हेक्‍टेयर उसका उत्‍पादन कैसे बढ़ाए? जो उत्‍पादति चीजों हो उसका प्रोटीन content कैसे बढ़े? उस पर हम कैसे काम करें, ताकि हमारे किसान को सही दाम भी मिले?

देश को आज Pulses Import करनी पड़ती है। हम ठान ले कि दस साल के भीतर-भीतर ऐसी मेहनत करे, जब 2022 में जब हिंदुस्‍तान आजादी के 75 साल मनाएगा उस समय हमें Pulses Import न करना पड़े। हमारी दाल वगैरह import न करनी पड़े। हम किसान मिलकर के यह काम कर सकते हैं, हम एक Mission Mode में काम कर सकते हैं और दुनिया में बहुत प्रयोग हुए हैं, दुनिया में बहुत प्रयोग हुए हैं, उसकी आवश्‍यकता है।

आज हमारे देश में Oil Import करना पड़ रहा है। एक तरफ हमारा किसान जो पैदावर करता है, उसके दाम नहीं मिलते और दसूरी तरफ देश की जरूरत है, वो पैदा नहीं होता। हमें विदेश से Oil लाने के लिए तो पैसा देना पड़ता है लेकिन किसान को देने को हमारे पास कुछ बचता नहीं है। अगर हमारा Oil Import बंद हो जाए, खाने का तेल, क्‍या हम उत्‍पादन नहीं कर सकते, हम Target नहीं कर सकते।

इन चीजों को हमारे किसान को हम कैसे समझाए और मुझे विश्‍वास है कि एक बार किसान को यह समझ में आ गई कि यह देश की आवश्‍यकता है, इसके दाम कभी गिरने वाले नहीं है, तो मैदान में आ जाएंगे। इस देश के पास करीब-कीरब 1200 टापू हैं। 1200 टापू है हिंदुस्‍तान के समुद्री तट पर। टापुओं पर उस प्रकार की खेती संभव होती है, जहां से हम हमारी तेल की Requirement पूरी कर सकते हैं। आज हम तेल बाहर से लाते हैं। हमारे किसान, हमारे पंजाब के किसान तो कनाडा में जाइये, खेती वहीं करते हैं, अफ्रीका में जाइये हमारे देश के किसान जाकर के खेती करते हैं। हमारे देश के किसान हमारे टापुओं पर जाकर कर सकते हैं खेती। कभी वैज्ञानिक अध्‍ययन होना चाहिए। और मैं चाहूंगा कि हमारे जो किसान चैनल है कभी जाकर के देखे तो सही, टापुओं का रिकॉर्डिंग करके दिखाए लोगों को कि यह टापू है, इतना बड़ा है, इस प्रकार की वहां प्राकृतिक संपदा वहाँ पड़ी है, यहां ऐसी ऐसी संभावना है। Climate उस प्रकार का है कि जो हमारे Oil seeds की जो requirement है उसे पूरा कर सके। वैज्ञानिक तरीके से हो, मैं इसका वैज्ञानिक नहीं हूं। मैं इसके लिए कुछ कह नहीं सकता। लेकिन मैं एक विचार छोड़ रहा हूं इस विचार पर चिंतन हो। सही हो तो आगे बढ़ाया जाए, नहीं है तो प्रधानमंत्री को वापस दे दिया जाए। मुझे कुछ नुकसान नहीं होगा। लेकिन प्रयास तो हो।

मैं चाहता हूं कि इस किसान चैनल के माध्‍यम से एक व्‍यापक रूप से देश के कृषि जगत में बदलाव कैसे आए। आर्थिक रूप से हमारी कृषि समृद्ध कैसे हो और जब हम कृषि की बात करते हैं तब बारिश के सीजन वाली कृषि से आप भटक नही सकते 12 महीने, 365 दिन का चक्र होता है।

हमारे सागर खेडू, समुद्र में जो हमारे लोग हैं, उनको भी सागर खेडू बोलते हैं…fishermen. वो एक बहुत बड़ा आर्थिक क्षेत्र है। वो Within India भी लोगों की आवश्‍यकता पूरी करती हैं और Export करके हिंदुस्‍तान की तिजौरी भी भरते हैं। अब इसके माध्‍यम से fisheries क्षेत्र को कैसे आगे बढ़ाए। बहुत कम लोगों को मालूम होगा। Ornamental Fish का दुनिया में बहुत बड़ा market है। जो घरों के अंदर Fish रखते हैं, रंग-बिरंगी Fish देखने के लिए लोग बैठते हैं उसका दुनिया में बहुत बड़ा Market है खाने वाला Fish नहीं, Ornamental Fish और उसको, उसके farm बनाए जा सकते हैं, उसकी रचनाएं की जा सकती है, उसकी Training हो सकती है। एक बहुत बड़ा नई पीढ़ी के लिए एक पसंदीदा काम है।

हमारी कृषि को तीन हिस्‍सों में बांटना चाहिए और हर किसान ने अपने कृषि के Time Table को तीन हिस्‍सों में बांटना चाहिए, ऐसा मेरा आग्रह है और प्रयोग करके देखिए। मैं विश्‍वास से कहता हूं कि मैं जो सलाह दे रहा हूं उसको स्‍वीकार करिए, आपको कभी सरकार के सामने देखने की जरूरत तक नहीं पड़ेगी। हमारी कृषि आत्‍म-निर्भर बन सकती है, हमारा किसान स्वावलंबी बन सकता है और हमारे कदम वहीं होने चाहिए, सरकारों पर dependent नहीं होना चाहिए और मैं इसलिए कहता हूं कृषि को तीन हिस्‍सों में बांटकर चलना चाहिए एक-तिहाई जो आप परंपरागत रूप से करते हैं वो खेती, एक-तिहाई Animal husbandry चाहे आप गाय रखें, भैंस रखे, दूध का उत्‍पादन करे, मुर्गी रखें, अंडे रखे, लेकिन एक तिहाई उसके लिए आपकी ताकत लगाइए और एक तिहाई आप अपने ही खेत में timber की खेती करें, पेड़ उगाए, जिससे फर्नीचर के लिए जो लकड़ी लगती है न वो बने। आज हिंदुस्‍तान को timber Import करना पड़ रहा है। जंगल हम काट नहीं सकते तो उपाय यही है और उसके लिए भी जमीन खराब करने की जरूरत नहीं है। आज हमारे देश की हजारों-लाखों हेक्‍टेयर भूमि कहां बर्बाद हो रही है। दो पड़ोसी किसान हो तो एक तो हमारे देश में सब छोटे किसान है, बड़े किसान नहीं है, छोटे किसान है और देश का पेट भरने का काम भी छोटे किसान करते हैं। बड़े किसान नहीं करते, छोटे किसान करते हैं। दो-तीन बीघा भूमि है, पड़ोसी के पास तीन बीघा है, तीनों भाई हैं, लेकिन बीच में ऐसी दीवार बना देते हैं, बाढ़ लगा देते हैं कि दो-तीन मीटर उसकी जमीन खराब होती है, दो-तीन मीटर इसकी खराब होती है। सिर्फ इसी के लिए अगर एक बार हम इस बाढ़ में से बाहर आ जाए और अगर पेड़ लगा दें एक पेड़ इस वाले का, एक पेड़ उस वाले का, एक इसका और एक उसका और आधे इसके आधे उसके। अब मुझे बताइये कि जमीन बच जाएगी कि नहीं बच जाएगी। लाखों एकड़ भूमि आज बर्बाद हो रही है। मैं किसानों से आग्रह करता हूं कि अड़ोस-पड़ोस से अपने भाई हो या और कोई हो दो खेतों के बीच में जो बाढ़ में दो-दो मीटर, पाँच-पांच, सात-सात मीटर जमीन खराब होती है उसकी जगह पर पेड़ लगा दें। और वो भी timber और सरकार आपको permission दें। आपके घर में बेटी पैदा हुई हो पेड़ लगा दीजिए, बेटी की शादी हो पेड़ काट दीजिए, शादी उतने ही खर्चें में हो जाएगी। और इसलिए मैं कहता हूं एक-तिहाई timber की खेती, एक-तिहाई हम regular जो खेती करते हैं वो और एक-तिहाई देश को Milk की बहुत जरूरत है। हम पशु-पालन कर सकते हैं और हमारी माताएं-बहनें करती हैं। 365 दिन का हमारा आर्थिक चक्र हम बना सकते हैं। और एक बार यह बनाएंगे, मैं नहीं मानता हूं हमारे कृषि क्षेत्र को हम परेशान होने देंगे। लेकिन इस काम के लिए हमने इस चैनल का भरपूर उपयोग करना है। लोगों को प्रशिक्षित करना है, उनमें विश्वास पैदा करना है।

उसी प्रकार से हमारे देश के हर तहसील में मैं कहता हूं एक-दो, एक-दो प्रगतिशील किसान हैं, प्रयोग करते हैं, सफलतापूर्वक करते हैं। उनके खेतों का Live Telecast, Video Conferencing खेत से ही हो सकता है। खेत में इस सरकार जाए, चैनल वहां लगाए, वो किसान दिखाएं घूम-घूम कर, देशभर के किसान देखें उसके पत्र-व्‍यवहार की व्‍यवस्‍था कर दी जाए। सारे देश के किसान उसको पूछते रहेंगे कि भई आप यह कर रहे हैं मुझे बताइये कैसे हो सकता है, मेरे यहां भी हो सकता है। हमारे देश में प्रगतिशील किसानों ने ऐसे पराक्रम किये हैं। मैंने कई किसानों को जानता हूं जिन्‍होंने Guinness Book of World Records में अपना नाम दर्ज कराया। मैं एक किसान को जानता हूं मुस्लिम नौजवान है, पिता जी तो खेती नहीं करते थे वो खेती में गया और आलू की पैदावर प्रति हेक्‍टेयर सबसे ज्‍यादा पैदा करके दुनिया में नाम कमाया उसने। अगर मेहनत करते हैं तो हम स्थितियों को बदल सकते हैं। और इसलिए मैं कहता हूं कि हम किसान चैनल के माध्‍यम से जहां भी अच्‍छा हुआ है, प्रयोग हुए हैं उसको हम करना चाहते हैं। आप पंजाब में जाइये हर गांव में एक-आध किसान ऐसा है जो Technology में master है। वो जुगाड़ करके ऐसी-ऐसी चीज बना देता है और वो जुगाड़ शब्‍द ही Popular है।

मैं पंजाब में मेरी पार्टी का काम करता था तो मैं चला जाता था खेतों में किसानों के साथ देखने के लिए, समझने के लिए, हरेक के पास मोटर साईकिल का पुर्जा है उठाकर के कहीं और लगा दिया है, मारूति कार का पुर्जा कहीं और लगा दिया है। और वो अपना पानी निकाल रहा था। ऐसे प्रयोगशील होते हैं। किसान इतनी Technology को करते हैं जी, मैं समझता हूं कि और लोगों को इसका परिचय Technology का परिचय दो। एक बार हम इन चीजों को जोड़े और दूसरी तरफ हमारी universities किसान चैनल को आधुनिक से आधुनिक चीजें मुहैया कराने का एक network बनाना चाहिए। और कभी किसान चैनल भी competition क्‍यों न करे। बस इस प्रकार की competition करे। अब जैसे यह चैनल वाले होते हैं गायकों को ढूंढते हैं, नाचने वाले को ढूंढते हैं, competition करते हैं, तो उत्तम प्रकार की खेती करने वालो के लिए भी competition हो सकती है, उनके भी प्रयोग हो सकते हैं, वो आएं, दिखाएं, समझाएं, मैं समझता हूं कि ये चैनल सबसे ज्यादा पॉपुलर हो सकते हैं और एक बार और प्रसार भारती मेरे शब्द लिख करके रखे, अगर आप सफल हो गए और मुझे विश्वास है कि जिस लगन से आपने कम समय पर काम किया है। ये सिर्फ technology नहीं है और कोई और चैनल चलाने के लिए technology सिर्फ चलती है, खेतों में जाना पड़ा है, गांव में जाना पड़ा है, किसानों से मिलना पड़ा है, आपका मटेरियल तैयार करना पड़ा है, मैं जानता हूं कि कितनी मेहनत इसमें लगी है तब जाकर चैनल का रूप आया है। लेकिन अगर बढ़िया ढंग से चली तो तीन साल के बाद आपको चलाना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए मुश्किल हो जाएगा कि जो 24 घंटे वाले हैं न वह भी अपनी चालू कर देंगे। उनको उसकी ताकत समझ आएगी। आज उनके यहां इसको मौका नहीं है, लेकिन आप अगर सफल हो गए तो दूसरी 20 चैनल किसानों के लिए आ जाएगी और एक ऐसी competition का माहौल होगा, मेरे किसान का भाग्य खुल जाएगा।

और इसलिए मैं आज इस किसान के माध्यम से आपने जो नई शुरूआत की है देश के गांव और गरीब किसान को जोड़ने का प्रयास किया है, जिसे मैं आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ना चाहता हूं, मैं जिसे satellite की technology के साथ जोड़ना चाहता हूं, जिसको अपना भविष्य बनाने का रास्ता बनाने के लिए तैयार करना चाहता हूं उस काम को हम सफलतापूर्वक करेंगे।

उसी एक विश्वास के साथ मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं देश के सभी किसान भाइयों और बहनों को मेरी हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद।

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শ্রী রাম জন্মভূমি মন্দিরের ধ্বজারোহণ উৎসবে প্রধানমন্ত্রীর বক্তব্যের বাংলা অনুবাদ

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শ্রী রাম জন্মভূমি মন্দিরের ধ্বজারোহণ উৎসবে প্রধানমন্ত্রীর বক্তব্যের বাংলা অনুবাদ
Commendable performance of India’s marine exports amid uncertain times

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উত্তর প্রদেশের হরদোই-এ গঙ্গা এক্সপ্রেসওয়ের উদ্বোধনী অনুষ্ঠানে প্রধানমন্ত্রীর ভাষণ
April 29, 2026
This transformative infrastructure project will boost connectivity and drive progress across Uttar Pradesh: PM
Just as Maa Ganga has been the lifeline of UP and this country for thousands of years, similarly, in this era of modern progress, this expressway passing near her, will become the new lifeline of UP's development: PM
Recently, I had the opportunity to dedicate the Delhi-Dehradun Expressway to the nation.
I had then remarked that these emerging expressways are the lifelines shaping the destiny of a developing India, and these modern pathways are today heralding India's bright future: PM
Ganga Expressway will not only connect one end of UP to the other, it will also bring limitless possibilities of the NCR closer: PM

ভারত মাতার জয়।

 

মা গঙ্গার জয় ।

 

মা গঙ্গার জয় ।

 

মা গঙ্গার জয় । 

 

উত্তরপ্রদেশের রাজ্যপাল আনন্দীবেন প্যাটেল, মুখ্যমন্ত্রী শ্রী যোগী আদিত্যনাথজি, উপ-মুখ্যমন্ত্রী কেশব প্রসাদ মৌর্যজি, ব্রিজেশ পাঠকজি, কেন্দ্রীয় মন্ত্রিসভায় আমার সহকর্মী জিতিন প্রসাদজি, পঙ্কজ চৌধুরীজি, উত্তরপ্রদেশ সরকারের মন্ত্রী্রা, সাংসদ ও বিধায়করা, অন্যান্য জনপ্রতিনিধিরা এবং আমার প্রিয় ভাই ও বোনেরা, যাঁরা বিপুল সংখ্যায় এখানে সমবেত হয়েছেন। 

সবার প্রথমে, আমি ভগবান নরসিংহের এই পবিত্র ভূমিতে শ্রদ্ধা নিবেদন করি। মা গঙ্গা এখান দিয়ে বয়ে গেছেন। মাত্র কয়েক কিলোমিটার দূরেই তাঁর আশীর্বাদ বর্ষিত হচ্ছে। তাই, এই পুরো অঞ্চলটি কোনো তীর্থস্থানের চেয়ে কম নয়। আমি বিশ্বাস করি উত্তর প্রদেশকে দেওয়া এক্সপ্রেসওয়ের উপহারটিও মা গঙ্গারই একটি আশীর্বাদ। এখন, আপনারা মাত্র কয়েক ঘণ্টার মধ্যেই সঙ্গমে যেতে পারবেন এবং কাশীতে বাবার দর্শন সেরে ফিরেও আসতে পারবেন। 

 

বন্ধুগণ, 

 

হাজার হাজার বছর ধরে মা গঙ্গা যেমন উত্তর প্রদেশ এবং এই দেশের জীবনরেখার ভূমিকা পালন করছেন, তেমনি এই আধুনিক উন্নয়নের যুগে তাঁর পাশ দিয়ে যাওয়া এই এক্সপ্রেসওয়েটি উত্তর প্রদেশের বিকাশের জন্য একটি নতুন লাইফলাইন হয়ে উঠবে। কাকতালীয় ভাবে, গত চার-পাঁচ দিন ধরে আমি মা গঙ্গার সান্নিধ্যে রয়েছি। ২৪শে এপ্রিল, যখন আমি বাংলায় ছিলাম, তখন মা গঙ্গার দর্শন করেছিলাম, এবং তারপর গতকাল ছিলাম কাশীতে। আজ সকালে আবারও বাবা বিশ্বনাথ, মা অন্নপূর্ণা এবং মা গঙ্গার দর্শনের সৌভাগ্য আমার হয়েছে। আর এখন মা গঙ্গার নামাঙ্কিত এই এক্সপ্রেসওয়েটি উদ্বোধন করার সুযোগ পেয়েছি। উত্তর প্রদেশ সরকার এই এক্সপ্রেসওয়েটির নামকরণ মা গঙ্গার নামে করেছে, এর জন্য আমি আনন্দিত। এটি আমাদের উন্নয়নের স্বপ্নর প্রতিফলন। আমাদের ঐতিহ্যও এর মাধ্যমে প্রকাশিত হয়। গঙ্গা এক্সপ্রেসওয়ের জন্য আমি উত্তর প্রদেশের লক্ষ লক্ষ মানুষকে অভিনন্দন জানাই। 

 

বন্ধুরা,

 

গণতন্ত্রের উৎসবের নিরীখেও আজ একটি গুরুত্বপূর্ণ দিন। বাংলায় এখন দ্বিতীয় দফার ভোটগ্রহণ চলছে এবং যে খবর আমরা পাচ্ছি , তাতে জানা যাচ্ছে এবার ভোটারদের উপস্থিতি অনেক বেশি। প্রথম পর্বের মতোই, মানুষ দলে দলে ভোট দিতে বাড়ি থেকে আসছেন; সামাজিক মাধ্যমগুলিতে দীর্ঘ লাইনের ছবি ছড়িয়ে পড়ছে। বাংলায় ভোটগ্রহণ হচ্ছে এক ভয়মুক্ত পরিবেশে, যা গত ছয়-সাত দশকে অকল্পনীয় ছিল। মানুষ নির্ভয়ে ভোট দিচ্ছেন। এটি দেশের সংবিধান এবং শক্তিশালী গণতন্ত্রের পবিত্র প্রতীক। নিজেদের অধিকারের প্রতি সচেতন হয়ে বিপুল সংখ্যায় ভোট দেওয়ার জন্য আমি বাংলার মহান জনসাধারণকে কৃতজ্ঞতা জানাই। ভোটগ্রহণ শেষ হতে এখনও বেশ কয়েক ঘন্টা বাকি। আমি বাংলার জনগণকে গণতন্ত্রের এই উৎসবে সমান উৎসাহে অংশগ্রহণ করার জন্য আহ্বান জানাচ্ছি।

 

বন্ধুগণ,  

 

কিছুদিন আগে বিহারে অনুষ্ঠিত নির্বাচনে বিজেপি-এনডিএ বিপুল ভোটে জয়লাভ করে ইতিহাস সৃষ্টি করেছে। গতকালই গুজরাটের পুর নিগম, পৌরসভা, জেলা পঞ্চায়েত, টাউন কাউন্সিল এবং ব্লক স্তরে পঞ্চায়েত নির্বাচনের ফলাফল ঘোষিত হয়েছে। আর আপনারা, উত্তর প্রদেশে আমার সহনাগরিকরা, এটা জেনে আনন্দিত হবেন যে বিজেপি ৮০ থেকে ৮৫ শতাংশ পৌরসভা ও পঞ্চায়েতে জয়লাভ করেছে। এই পাঁচটি রাজ্য নির্বাচনেও বিজেপি ঐতিহাসিক বিজয়ের হ্যাটট্রিক অর্জন করবে সেই বিশ্বাস আমার রয়েছে। ৪ঠা মে-র ফলাফল বিকশিত ভারত গড়ার সংকল্পকে আরও শক্তিশালী করবে এবং দেশের উন্নয়নে নতুন উৎসাহের সঞ্চার করবে। 

 

বন্ধুগণ,  

দেশের দ্রুত উন্নয়নের জন্য আমাদের দ্রুততার সঙ্গে আধুনিক পরিকাঠামোও তৈরি করতে হবে। ২০২১ সালের ডিসেম্বরে আমি গঙ্গা এক্সপ্রেসওয়ের শিলান্যাস করতে শাহজাহানপুরে এসেছিলাম। আপনারা দেখছেন, উত্তর প্রদেশের দীর্ঘতম গ্রিন করিডোর এক্সপ্রেসওয়ে, এবং দেশের অন্যতম বৃহত্তম এক্সপ্রেসওয়ে তৈরির কাজ, পাঁচ বছরের মধ্যেই শেষ হয়েছে। শীঘ্রই গঙ্গা এক্সপ্রেসওয়ে মিরাট ছাড়িয়ে হরিদ্বার পর্যন্ত সম্প্রসারিত হবে। এর সুবিধা যাতে অন্যরাও পান, তার জন্য, ফারুখাবাদ লিঙ্ক এক্সপ্রেসওয়ে তৈরি করা হবে, যা এটিকে অন্যান্য এক্সপ্রেসওয়ের সঙ্গে যুক্ত করবে। এটিই ডাবল-ইঞ্জিন সরকারের স্বপ্ন! এই গতিতেই বিজেপি সরকার কাজ করে! এটিই বিজেপি সরকারের কাজ করার ধরণ! আজ হারদোইতে এর উদ্বোধন করা হচ্ছে। আবার গঙ্গা এক্সপ্রেসওয়ের নির্মাণকাজ সম্পন্ন হওয়ার পাশাপাশি এর সম্প্রসারণ পরিকল্পনার কাজও শুরু হয়ে গেছে। 

ভাই ও বোনেরা, 

মাত্র কিছুদিন আগে দিল্লি-দেরাদুন এক্সপ্রেসওয়ে উদ্বোধন করার সুযোগ আমার হয়েছিল। আমি তখন বলেছিলাম , এই নবনির্মিত এক্সপ্রেসওয়েগুলো উন্নয়নশীল ভারতের হস্তরেখার মতো, এই আধুনিক হস্তরেখাগুলো ভারতের উজ্জ্বল ভবিষ্যতের সূচনা করছে। 

বন্ধুগণ, 

এখন আর সেই দিন আর নেই যখন একটা রাস্তার জন্য দশকের পর দশক অপেক্ষা করতে হতো! একবার ঘোষণা করা হলে, ফাইলগুলো বছরের পর বছর পড়ে থাকত! নির্বাচনের আগে শিলান্যাস হত, আর তারপর সরকার আসত আর যেত, কিন্তু কোনো কাজই হতো না। কখনও কখনও, পুরোনো ফাইল খুঁজে বের করতে ঊর্ধ্বতন কর্মকর্তাদের বছর দুয়েক লেগে যেত।  

 

বন্ধুগণ,  

 

ডাবল-ইঞ্জিন সরকারের সময়ে নির্ধারিত সময়ের মধ্যেই প্রকল্পের শিলান্যাস ও উদ্বোধন হয়। তাই, আজ যদি উত্তরপ্রদেশের এক্সপ্রেসওয়েগুলোর চেয়েও দ্রুতগামী কিছু থেকে থাকে, তবে তা হলো এই রাজ্যের উন্নয়নের গতি।

বন্ধুগণ,  

এই এক্সপ্রেসওয়েটি শুধু একটি হাইস্পিড রাস্তা নয়। এটি নতুন সম্ভাবনা, স্বপ্ন এবং সুযোগের প্রবেশদ্বার। গঙ্গা এক্সপ্রেসওয়ে প্রায় ৬০০ কিলোমিটার লম্বা। পশ্চিম উত্তর প্রদেশের মিরাট, বুলন্দশহর, হাপুর, আমরোহা, সম্ভল ও বাদাউন; মধ্য উত্তর প্রদেশের শাহজাহানপুর, হারদোই, উন্নাও ও রায়বেরেলি; এবং পূর্ব উত্তর প্রদেশের প্রতাপগড় ও প্রয়াগরাজসহ পার্শ্ববর্তী জেলাগুলিতে যোগাযোগ তৈরি করে গঙ্গা এক্সপ্রেসওয়ে এই অঞ্চলের লক্ষ লক্ষ মানুষের জীবন বদলে দেবে।

 

বন্ধুগণ,  

এই অঞ্চল গঙ্গা নদী ও তার উপনদীগুলোর উর্বর মাটিতে আশীর্বাদপুষ্ট। কিন্তু পূর্ববর্তী সরকারগুলোর অবহেলার কারণে এখানকার কৃষকরা চরম দুর্দশার সম্মুখীন হতেন! তাদের ফসল প্রধান বাজারগুলোতে পৌঁছাতে পারছিল না। হিমঘরের অভাব ছিল, সরবরাহ ব্যবস্থা ছিল অপর্যাপ্ত, এবং কৃষকরা তাদের কঠোর পরিশ্রমের ন্যায্য মূল্য পেতেন না। এখন, সেই অসুবিধাগুলো দ্রুত সমাধান হয়ে যাবে। গঙ্গা এক্সপ্রেসওয়ের মাধ্যমে কম সময়ে প্রধান বাজারগুলোতে পৌছে যাবার সুযোগ তৈরি হবে। এখানে কৃষির জন্য প্রয়োজনীয় পরিকাঠামো গড়ে তোলা সম্ভব হবে। এতে আমাদের কৃষকদের আয় বাড়বে।  

বন্ধুগণ,  

গঙ্গা এক্সপ্রেসওয়ে শুধু উত্তরপ্রদেশের এক প্রান্তকে অন্য প্রান্তের সঙ্গে যুক্ত করবে না, এটি এনসিআর অর্থাৎ জাতীয় রাজধানী অঞ্চলের বিপুল সম্ভাবনাকে আরও কাছে নিয়ে আসবে। গঙ্গা এক্সপ্রেসওয়ের ওপর দিয়ে গাড়ি চলাচল করবে এবং এর দুই পাশে নতুন শিল্পের সুযোগ তৈরি হবে। এর জন্য হারদোইয়ের মতো জেলাগুলিতে শিল্প করিডোর গড়ে তোলা হচ্ছে। হারদোই, শাহজাহানপুর, উন্নাও সহ ১২টি জেলাতেই নতুন শিল্প আসবে। ওষুধ, বস্ত্রের মতো বিভিন্ন শিল্পের ক্লাস্টার গড়ে উঠবে। যুবসম্প্রদায়ের জন্য কর্মসংস্থানের নতুন সুযোগও তৈরি হবে। 

 

বন্ধুগণ,

মুদ্রা যোজনা এবং ওডিওপি-র মতো প্রকল্পের ফলে আমাদের যুবসমাজ নতুন নতুন রেকর্ড গড়ছে। এখানে ক্ষুদ্র শিল্প এবং অতি ক্ষুদ্র, ক্ষুদ্র ও মাঝারী শিল্পোদ্যোগ-কে উৎসাহিত করা হচ্ছে। উন্নত যোগাযোগ ব্যবস্থার ফলে এই উদ্যোগগুলির জন্যও নতুন নতুন সুযোগ তৈরি হবে। মিরাটের ক্রীড়া শিল্প, সম্ভলের হস্তশিল্প, বুলন্দশহরের মৃৎশিল্প, হরদোইয়ের তাঁতশিল্প, উন্নাওয়ের চর্মশিল্প, প্রতাপগড়ের আমলকী থেকে উৎপাদিত সামগ্রী —এ সবই দেশ বিদেশের বাজারে পৌঁছাবে। এর ফলে লক্ষ লক্ষ পরিবারের আয় বাড়বে। বলুন তো, পূর্ববর্তী সমাজবাদী পার্টির সরকারের আমলে কেউ কি ভেবেছিলেন, হরদোই এবং উন্নাওয়ের মতো জেলায় শিল্প করিডোর তৈরি হবে? কেউ কি কখনো ভেবেছিলেন, আমাদের হরদোইয়ের মধ্যে দিয়ে একটি এক্সপ্রেসওয়ে যাবে? এই কাজ শুধুমাত্র বিজেপি সরকারের আমলেই সম্ভব।  

বন্ধুগণ, 

একসময় উত্তর প্রদেশকে একটি অনগ্রসর এবং “বিমারু” রাজ্য বলা হতো। সেই উত্তর প্রদেশই আজ ১ লক্ষ কোটি ডলারের অর্থনীতি হওয়ার পথে এগিয়ে চলেছে। এটি অনেক বড় এক লক্ষ্য। কিন্তু এর পেছনে রয়েছে সমানভাবে নানা উদ্যোগ গ্রহণ। কারণ উত্তর প্রদেশের রয়েছে বিপুল সম্ভাবনা। দেশের বিপুল যুবক যুবতীর সম্ভাবনা রয়েছে উত্তর প্রদেশে। আমরা এই শক্তিকে কাজে লাগিয়ে উত্তর প্রদেশকে একটি উৎপাদন কেন্দ্র হিসেবে গড়ে তুলছি। উত্তর প্রদেশে নতুন শিল্প ও কারখানা গড়ে উঠবে। যখন এখানে বড় আকারের বিনিয়োগ হবে, কেবল তখনই অর্থনৈতিক বিকাশের দরজা খুলবে এবং যুবসম্প্রদায়ের জন্য কর্মসংস্থানের সুযোগ তৈরি হবে। 

 

ভাই ও বোনেরা,   

এই পরিকল্পনাগুলি বাস্তবায়নের জন্য সাম্প্রতিক বছরগুলোতে নিরন্তর কাজ করা হচ্ছে। আপনারা নিজেরাই বুঝতে পারছেন, যে উত্তর প্রদেশ থেকে আগে সকলে কাজের খোজে অন্য জায়গায় চলে যেতেন, আজ তা বিনিয়োগকারীদের সম্মেলন এবং শিল্প করিডোরের জন্য পরিচিতি লাভ করছে। উত্তর প্রদেশে বিনিয়োগকারী সম্মেলনে দেশ ও বিশ্বের বিভিন্ন কোম্পানি আসে। উত্তর প্রদেশে হাজার হাজার কোটি টাকা বিনিয়োগ করা হচ্ছে। আজ যদি ভারত বিশ্বের দ্বিতীয় বৃহত্তম মোবাইল নির্মাতা হয়, তবে এতে উত্তর প্রদেশের বড় অবদান রয়েছে। ভারত আজ যত মোবাইল তৈরি করছে, তার অর্ধেকই আমাদের উত্তর প্রদেশে তৈরি হচ্ছে। মাত্র কয়েক সপ্তাহ আগে, আমি নয়ডায় একটি সেমিকন্ডাক্টর প্ল্যান্টের শিলান্যাস করেছি। 

 

বন্ধুগণ, 

আপনারা সকলেই জানেন, এআই-এর এই যুগে সেমিকন্ডাক্টর একটি বিরাট ক্ষেত্র হয়ে উঠছে। উত্তর প্রদেশ এক্ষেত্রেও নেতৃত্ব দিচ্ছে। ভবিষ্যতে এই রাজ্যের মানুষের জন্য প্রচুর সুযোগ-সুবিধা তৈরি হবে। 

 

বন্ধুগণ, 

আজ উত্তর প্রদেশের শিল্পোন্নয়ন ভারতের কৌশলগত শক্তিতে পরিণত হচ্ছে। বর্তমানে দেশের দুটি প্রতিরক্ষা করিডোরের মধ্যে একটি উত্তর প্রদেশে । বড় বড় প্রতিরক্ষা সরঞ্জাম উৎপাদনকারী সংস্থাগুলো এখানে তাদের কারখানা স্থাপন করছে। বিশ্বজুড়ে স্বীকৃত ব্রাহমোসের মতো ক্ষেপণাস্ত্র আজ উত্তর প্রদেশেই তৈরি হচ্ছে। প্রতিরক্ষা সরঞ্জাম তৈরির জন্য প্রয়োজনীয় ছোট ছোট যন্ত্রাংশ সরবরাহ করছে অতি ক্ষুদ্র, ক্ষুদ্র ও মাঝারি শিল্প উদ্যোগ বা এমএসএমই। এতে উত্তর প্রদেশের এমএসএমই ক্ষেত্র প্রভূত লাভবান হচ্ছে। এমনকি ছোট ছোট জেলার যুবসম্প্রদায়ও এখন বড় শিল্পের সঙ্গে যুক্ত হওয়ার স্বপ্ন দেখতে পারেন।  

 

বন্ধুগণ,   

আজ উত্তর প্রদেশ এত দ্রুত উন্নতি করছে কারণ ইউপি পুরনো রাজনীতি বদলে একটি নতুন পরিচয় তৈরি করেছে। মনে রাখবেন, একটা সময় ছিল যখন ইউপি মানেই ছিল রাস্তার গর্ত। আজ সেই ইউপিই দেশের সবচেয়ে বেশি এক্সপ্রেসওয়ের রাজ্যে পরিণত হয়েছে। আগে পার্শ্ববর্তী জেলাগুলিতে যাওয়াও খুব ঝামেলার ছিল। কিন্তু আজ উত্তর প্রদেশে ২১টি বিমানবন্দর রয়েছে, যার মধ্যে ৫টি আন্তর্জাতিক বিমানবন্দর। এখন নয়ডা আন্তর্জাতিক বিমানবন্দরেরও উদ্বোধন হয়ে গেছে। গঙ্গা এক্সপ্রেসওয়ে থেকে নয়ডা আন্তর্জাতিক বিমানবন্দর মাত্র কয়েক ঘণ্টার দূর।  

 

ভাই ও বোনেরা,  

আমাদের উত্তর প্রদেশ ভগবান রাম ও ভগবান কৃষ্ণের ভূমি। কিন্তু পূর্ববর্তী সরকারগুলির অপকর্মের জন্য উত্তর প্রদেশ অপরাধ ও জঙ্গলরাজের মাধ্যমে পরিচিত হত। উত্তর প্রদেশের মাফিয়াদের নিয়ে সিনেমা তৈরি হত। কিন্তু এখন উত্তর প্রদেশের আইন-শৃঙ্খলা পরিস্থিতি সারা দেশে উদাহরণ হিসেবে তুলে ধরা হয়।

 

ভাই ও বোনেরা, 

সমাজবাদী পার্টির সদস্যদের হাত থেকে সম্পদ বণ্টনের ক্ষমতা চলে গেছে, তাই তারা উত্তর প্রদেশের এই বিকাশ পছন্দ করছেন না। তারা উত্তর প্রদেশকে আবার পুরনো যুগে ফিরিয়ে নিয়ে যেতে চান। তারা আবারও সমাজকে বিভক্ত করতে চান।

 

বন্ধুগণ,  

 

সমাজবাদী পার্টি যেমন উন্নয়ন-বিরোধী, একই ভাবে মহিলা-বিরোধীও । সম্প্রতি দেশ আবারও এসপি এবং কংগ্রেসের মতো দলগুলোর আসল চেহারা দেখেছে। কেন্দ্রে এনডিএ সরকার সংসদে নারী শক্তি বন্দন সংশোধনী এনেছিল। এই সংশোধনীটি পাশ হলে, ২০২৯ সালের নির্বাচন থেকেই বিধানসভা এবং লোকসভায় মহিলাদের জন্য সংরক্ষণের সুযোগ তৈরি হত! আমাদের অনেক মা ও বোন দিল্লি এবং লখনৌতে পৌঁছে সাংসদ ও বিধায়ক হতেন। সেটিও আবার অন্য কোনো শ্রেণীর আসন না কমিয়েই! কিন্তু সমাজবাদী পার্টি —এসপি এই সংশোধনী বিলের বিরুদ্ধে ভোট দিয়েছে।    

 

বন্ধুগণ, 

 

এই বিলটি সব রাজ্যেও আসন সংখ্যা বাড়িয়ে দিত। আমরা সংসদে স্পষ্টভাবে বলেছিলাম , সব রাজ্যে আসন সংখ্যা একই অনুপাতে বাড়বে। কিন্তু ডিএমকে-র মতো দল, যারা উত্তরপ্রদেশকে কটু কথা বলে রাজনীতি করে, তারা আপত্তি জানিয়েছিল যে উত্তরপ্রদেশের আসন কেন বাড়বে। দেখুন, সমাজবাদী পার্টিও সংসদে একই সুরে কথা বলছিল। এই এসপি সদস্যরা এখান থেকে আপনাদের ভোট নেয়, আর সংসদে তাদের পক্ষ নেয় যারা উত্তরপ্রদেশের মানুষকে গালি দেয়। এই কারণেই উত্তরপ্রদেশের মানুষ বলেন, সমাজবাদী পার্টি কখনও উন্নতি করতে পারবে না। এই লোকেরা সবসময় মহিলা-বিরোধী রাজনীতি করবে। তারা সবসময় তোষণ এবং অপরাধীদের পক্ষ নেবে। এসপি কখনও পরিবারতন্ত্র এবং জাতপাতের রাজনীতির ঊর্ধ্বে উঠতে পারবে না। তারা সবসময় উন্নয়ন-বিরোধী রাজনীতি করবে। উত্তরপ্রদেশকে অবশ্যই এসপি এবং তার সহযোগীদের বিষয়ে সতর্ক থাকতে হবে। 

বন্ধুগণ, 

   

আজ দেশ একটি সংকল্প নিয়ে এগিয়ে চলেছে—বিকশিত ভারত গড়ার সংকল্প! এই সংকল্প পূরণে উত্তর প্রদেশের একটি অত্যন্ত বড় ভূমিকা রয়েছে। আপনারা দেখছেন, আজ সমগ্র বিশ্ব যুদ্ধ, অশান্তি এবং অস্থির এক পরিস্থিতির মধ্যে রয়েছে। বিশ্বের বড় বড় দেশগুলিতে অবস্থা বেশ খারাপ। কিন্তু ভারত ঠিক একই গতিতে উন্নয়নের পথে এগিয়ে চলেছে। বাইরের শত্রুদের জন্য এটা পছন্দের নয়। দেশের মধ্যে থাকা ক্ষমতালোভী কিছু মানুষও ভারতকে ছোট করার চেষ্টা করছে। তবুও, আমরা কেবল সুরক্ষিতই নই, উন্নয়নের নতুন রেকর্ডও তৈরি করছি। আমরা আত্মনির্ভর ভারতের অভিযানকে বাস্তবায়িত করছে। আমরা সবচেয়ে আধুনিক পরিকাঠামো নির্মাণ করছি। গঙ্গা এক্সপ্রেসওয়ে এই পথে আরও একটি শক্তিশালী পদক্ষেপ। গঙ্গা এক্সপ্রেসওয়ে আমাদের কাছে যে সম্ভাবনা নিয়ে আসবে, উত্তর প্রদেশের মানুষ তাদের কঠোর পরিশ্রম এবং প্রতিভা দিয়ে তাকে যে কাজে লাগাবেন, সে বিষয়ে আমি আত্মবিশ্বাসী। এই আশা রেখে, আমি আবারও আপনাদের সকলকে অনেক অভিনন্দন জানাই। অনেক ধন্যবাদ!     

 

ভারত মাতার জয়।

 

ভারত মাতার জয়।

 

বন্দে মাতরম। বন্দে মাতরম। বন্দে মাতরম। বন্দে মাতরম। বন্দে মাতরম।

 

আপনাদের অনেক ধন্যবাদ!