Text of PM’s address at launching ceremony of DD Kisan Channel

Published By : Admin | May 26, 2015 | 21:21 IST
Share
 
Comments

देश के कोने कोने से आए हुए किसान भाईयों और बहनों, कृषि क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिक, अर्थवेयत्ता और उपस्थित सभी महानुभाव और इस कार्यक्रम में देश भर के लोग भी टीवी चैनलों के माध्यम से जुड़े हुए हैं, मैं उऩको भी प्रणाम करता हूं।

कई लोगों को लगता होगा, इतने channels चल रहे हैं, नया क्या ले आए हैं। कभी-कभी लगता है कि हमारे देश में टीवी चैनलों का Growth इतना बड़ा तेज है, लेकिन जब बहुत सारी चीजें होती हैं, तब जरूरत की चीज खोजने में जरा दिक्कत जाती है। अगर आज खेल-कूद के लिए अगर आपको कोई जानकारी चाहिए, तो टीवी Channel के माध्यम से सहजता से आपको मिल जाती है। भारत के खेल नहीं दुनिया के खेल का भी अता-पता चल जाता है। और आपने देखा है कि Sports से संबंधित चैनलों के कारण हमारे यहां कई लोगों की Sports के भिन्न-भिन्न विषयों में रूचि बढ़ने लगी है, जबकि हमारे स्कूल Colleges में उतनी मात्रा में Sports को प्राथमिकता नहीं रही है, लेकिन उन चैनलों को योगदान, जिन्होंने Sports के प्रति नई पीढ़ी में रूचि पैदा की और उसके सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिले, पहले Sports को Sports के रूप में देखा जाता था। लेकिन धीरे-धीरे पता चलने लगा लोगों को भी, ये बहुत बड़ा अर्थशास्त्र है। लाखों लोगों की रोजी रोटी जुड़ी है, और खेल के मैदान में खेल खेलने वाले तो बहुत कम होंगे, लेकिन खिलाड़ियों के पीछे हजारों लोगों की फौज होती है, जो भिन्न-भिन्न प्रकार के कामों को करती हैं, यानी एक इतना बड़ा Institution है, इन व्यवस्थाओं के माध्यम से पता चला है, किसान हिन्दुस्तान में इतना बड़ा वर्ग है। उसके पास कृषि के क्षेत्र में चीजें कैसे पहुंचे। ये बात हमें मान करके चलना पड़ेगा कि अगर हमारे देश को आगे ले जाना है, तो हमारे देश के गांवों को आगे ले जाना ही पड़ेगा। गांव को आगे ले जाना है तो पेशे को प्राथमिकता देते हुए उसके बढ़ावा देना ही पड़ेगा। ये सीधा-साधा भारत के आर्थिक जीवन से जुड़ा हुआ सत्य है।

लेकिन दिनों दिन हालत क्या हुई है, आपको जानकर हैरानी होगी, हमारे देश के किसानों ने कितना बड़ा पराक्रम किया हुआ है, कितना सारा समाज जीवन को दिया हुआ है, पुराने Gadgets का जो लोग स्टडी करते हैं, आज से दो सौ साल पहले साऊथ इंडिया में, दक्षिण भारत में Consumer का इलाके के किसानों का Study हुई और आज आप हैरान होंगे दो सौ साल पहले जबकि यूरिया भी नहीं था, पोटास भी नहीं था, इतनी सुविधाएं भी नहीं थी, उस समय वहां का किसान एक हैक्टर पर 15 से 18 टन paddy का उत्पादन करता था। कहने का तात्पर्य यह है कि उस समय हमारे पूर्वजों के पास ज्ञान-विज्ञान नये प्रयोग तो कुछ न कुछ तो था, दो सौ साल पहले हमारे देश में गेहूं कुछ इलाकों में करीब-करीब 12 से 15 टन का उत्पादन प्रति हेक्टर हमारे किसान ने किया था। आज पूरे देश में औसत उत्पादन कितना है प्रति हेक्टर, सब प्रकार के धान मिला दिया जाए, औसत उत्पादन है प्रति हेक्टर दो टन। जनसंख्या बढ़ रही है, जमीन बढ़ती नहीं है, आवश्यकता बढ़ रही हैं, तब हमारे पास उपाय क्या बचता है, हमारे पास उपाय वही बचता है कि हम उत्पादकता बढ़ाएं, प्रति हेक्टर हमारे उत्पादकता बढ़ेगी तो हमारे आय बढ़ेगी।

आज देश में Average प्रति हेक्टर दो टन का उत्पादन है। विश्व का Average तीन टन का है। क्या कम से कम हिन्दुस्तान सभी किसान मिल करके वैज्ञानिक, टेक्नोलॉजी, बीज सप्लाई करने वाले, दवाई सप्लाई करने वाले, सब लोग मिल के क्या यह सोच सकते हैं कि प्रति हेक्टर तीन टन उत्पादन कैसे पहुंचाएं, अब यूं दो से तीन होना, लगता बहुत छोटा है, लेकिन वह छोटा नहीं, बहुत कठिन काम है, बहुत कठिन काम है, लेकिन सपने देखें तो सही, हर तहसील में स्पर्धा क्यों न हों कि बताओं भाई आज हमारी तहसील में इतनी भूमि जोती गई, क्या कारण है कि हम दो टन से सिर्फ इतना ही बढ़ पाए, और ज्यादा क्यों न बढ़ पाए।

देश में एक कृषि उत्पादन में अगर तहसील को यूनिट मानें तो एक बहुत बड़ी स्पर्धा का माहौल बनाने की आवश्यकता है और तहसील को यूनिट में इसलिए कहता हूं कि Climatic Zone होते हैं, कछ इलाके ऐसे होते है कुछ ही फसलें होती है, कुछ मात्रा नही हो सकती, कुछ इलाके ऐसे होते हैं, जहां कुछ फसल होती है अधिक मात्रा में होती है। लेकिन अगर तहसील इकाई होगी, तो स्पर्धा के लिए सुविधा रहती है और अगर हमारे देश के किसान को लाल बहादुर शास्त्री जी ये कहें जय जवान जय किसान का मंत्र दें। लाल बहादुर शास्त्री जी के पहले हम लोग गेहूं विदेशों से मंगवा करके खाते थे। सरकारी अफसरों के जिम्मे उस कालखंड के जो सरकारी अफसर हैं, वो आज शायद Senior most हो गये होंगे या तो Retired हो गए होंगे। District Collector का सबसे पहला काम रहता था कि कांडला पोर्ट पर या मुंबई के पोर्ट पर विदेश से जो गेहूं आया है, उसको पहुंचाने की व्यवस्था ठीक हुई है या नहीं, पहुंचा कि नहीं पहुंचा इसी में उनका दिमाग खपा रहता था, जवाब उन्हीं से मागा जाता था। देश बाहर से मंगवा करके खाना खाते था, यह हकीकत है।

देश के किसानों के सामने लाल बहादुर शास्त्री जी के ने लक्ष्य रखा, जय जवान, जय किसान का मंत्र दिया और युद्ध की विभिषिका का Background था, देश भक्ति का ज्वार था और लाल बहादुर जी की सादी- सरल भाषा में हुई है। हमारे देश के किसानों ने इस बात को पकड़ लिया, और देश के किसानों ने तय कर लिया कि हम अन्न के भंडार भर देंगे। हमारे देश के किसान ने उसके बाद कभी भी हिन्दुस्तान को भूखा नहीं मरने दिया। किसान की जेब भरे या न भरे, देश के नागरिकों का पेट भरने में कभी कमी नहीं रखी है। इस सच्चाई को समझने के बावजूद, हम बदले हुए युग को देखते हुए हम परिवर्तन नहीं लाएंगे तो परिस्थितियां नहीं पलटेंगी। एक समय था हमारे यहां कहा जाता था उत्तम से उत्तम खेती, मध्यम व्यापार और कनिष्ठ नौकरी ये हमारे घर-घर की गूंज थी, लेकिन समय रहते आज अगर किसी किसान के घर में जाईये तीन बच्चे हैं उससे पूछिए भाई क्या सोचा है ये तो पढ़ने में अच्छा है, जरा समझदार है, उसको तो कहीं नौकरी पर लगा देंगे। ये भी शायद कही काम कर लेगा, लेकिन ये छोटे वाला हैं न, वो ज्यादा समझता नहीं, सोच रहा हूं उसको खेती में लगा दूं। यानी ये घऱ में भी सोच बनी है कि जो तेज तर्रार बच्चा है उसको कहीं नौकरी करने के लिए भेज दूं। और जो ठीक है भाई और कहीं बेचारे को कहीं मिलता नहीं खेती कर लेगा, पेट गुजारा कर लेगा, जो खेती उत्तम मानी जाती था, वो खेती कनिष्ठ थी, और जो नौकरी कनिष्ठ मानी जाती थी, चक्र ही उलट गया, मुझे लगता है कि इसको फिर से हमें एक बार उल्टा करना है, और प्रयास करें तो सफलता मिल सकती है।

मेरा अपना एक अनुभव है गुजरात का मुख्‍यमंत्री होने के नाते मुझे एक बार जूनागढ़ Agriculture university में बुलाया गया था और प्रगतिशील किसानों को सम्‍मानित करना था। मैं जब जाने वाला था तो मैं सोच रहा था कि क्‍या उनके सामने क्‍या बात कहूंगा, दिमाग.. रास्‍ते में प्रवास करते हुए मैं चल रहा था और मेरे Mind में ऐसा बैठ गया था कि यह तो सभी बहुत वृद्ध किसान होंगे, बड़ी आयु के होंगे, तो उनके लिए ऐसी बात बताऊं, वैसी बात बताऊं तो जहां में पहुंचा। और Audience देखा तो मैं हैरान था। करीब-करीब सभी 35 से नीचे की उम्र के थे और मैंने उस दिन करीब 12 या 15 किसान को ईनाम दिया। वे सारे young थे, Jeans pant और T- shirt में आए हुए थे। मैंने उनको पूछा भई क्‍या पढ़े-लिखे थे.. सारे पढ़े-लिखे थे भाई। तो मैंने कहा कि खेती में वापस कैसे आ गए। तो बोले कुछ जो बदलाव आया है, उसका हम फायदा ले रहे हैं। अगर हम फिर से एक बार आधुनिक विज्ञान को, technology को गांव और खेत खलियान तक पहुंचा देंगे तो देश का सामान्‍य व्‍यक्ति, देश का नौजवान जो खेती से भागता चला गया है, वो फिर से खेती के साथ जुड़ सकता है और देश की अर्थव्‍यवस्‍था को एक नई गति दे सकता है। लेकिन इसके लिए हमें एक विश्‍वास पैदा करना पड़ेगा एक माहौल पैदा करना पड़ेगा।

हिंदुस्‍तान के 50 प्रतिशत से ज्‍यादा ऐसे किसान होंगे गांव में, जिन्‍हें यह पता नहीं होगा कि सरकार में Agriculture Department होगा, कोई Agriculture Minister होता है। सरकार में Agriculture के संबंध में कुछ नीतियां, कुछ पता नहीं होता। हमारे देश की कृषि किसानों के नसीब पर छोड़ दी गई है। और वो भी स्‍वभाव से इसी Mood का है, पर पता नहीं भाई अब कुदरत रूठ गई है। पता नहीं अब ईश्‍वर नाराज है यही बात मानकर बेचारा अपनी जिंदगी गुजार रहा है।

यह इतना क्षेत्र बड़ा उपेक्षित रहा है, उस क्षेत्र को हमने vibrant बनाना है, गतिशील बनाना है और उसके लिए अनेक प्रकार के काम चल रहे हैं। मैंने तो देखा है कि किसान अपने खेत में फसल लेने के बाद जो बाद की चीजें रह जाती हैं उसको जला देता है। उसको लगता है कि भई कहां उठाकर ले जाओगे, इसको कौन लेगा, वो खेत में ही जला देता है। उसे पता नहीं था कि यही चीजें अगर, मैं थोड़े-थोड़े टुकड़े करके फिर से गाढ़ दूं, तो वो ही खाद बन सकती है, वो ही मेरी पैदावर को बढ़ा सकती है। लेकिन अज्ञान के कारण वो जलाता है। यहां भी कई किसान बैठे होंगे वे भी अपनी ऐसी चीजें जलाते होंगे खेतों में। यह आज भी हो रहा है अगर थोड़ा उनको guide करे कोई, हमने देखा होगा केले की खेती करने वालों को, केला निकालने के बाद वो जो गोदा है उसको लगता है बाद में उसका कोई उपयोग ही नहीं है। लेकिन आज विज्ञान ने उस केले में से ही उत्‍तम प्रकार का कागज बनाना शुरू किया है, उत्‍तम प्रकार के कपड़े बनाना शुरू किया है। अगर उस किसान को वो पता होगा, तो केले की खेती के बाद भी कमाई करेगा और उस कमाई के कारण उसको कभी रोने की नौबत नहीं आएगी। एक बार मानो केला भी विफल हो गया हो ।

मैं एक प्रयोग देखने गया था, यानी केला निकालने के बाद उसका जो खाली खड़ा हुआ, यह उसका जो पौधे का हिस्‍सा रहता है अगर उसको काटकर के जमीन के अंदर गाढ़ दिया जाए, तो दूसरी फसल को 90 दिन तक पानी की जरूरत नहीं पड़ती। उस केले के अंदर उतना Water Content रहता है कि 90 दिन तक बिना पानी पौधा जिंदा रह सकता है। लेकिन अगर यह बातें नहीं पहुंची तो कोई यह मानेगा कि यार अब इसको उठाने के लिए और मुझे याद है वो खेत में से उठाने के‍ लिए वो खर्च करता था, ले जाओ भई। जैसे- जैसे उसको पता चलने लगा तो उसकी value addition करने लगा chain बनाने लगा।

हमारे देश में कृषि में multiple utility की दिशा में हम कैसे जाए, multiple activity में कैसे जाए, जिसके कारण हमारा किसान जो मेहनत करता है उसको लाभ हो। कभी-कभी किसान एक फसल डाल देता है, लेकिन अगर कोई वैज्ञानिक तरीके से उसको समझाए। इस फसल के बगल में इसको डाल दिया जाए, तो उस फसल को बल मिलता है और तुम्‍हारी यह फसल मुफ्त में वैसे ही खड़ी हो जाएगी। जो आप में से किसानों को मालूम है कि इस प्रकार की क्‍या व्‍यवस्‍था होगी। अब बहुत से किसान है उसको मालूम नहीं है वो बेचारा एक चीज डालता है तो बस एक ही डालता है। उसे पता नहीं होता है कि बीच में बीच में यह चीज डालें। वो अपने आप में एक दूसरे को compensate करते हैं और मुझे एक अतिरिक्‍त income हो जाती है। इन चीजों को उन तक पहुंचना है। हमारे देश के किसान का एक स्‍वभाव है। किसान का स्‍वभाव क्‍या है। कोई भी चीज उसके पास लेकर जाओ, वे Outright कभी Reject नहीं करता है। देखते ही नहीं-नहीं बेकार है, ऐसा नहीं करता है। वो Outright select भी नहीं करता। आपकी बात सुनेगा, अपना सवाल पूछेगा, पचास बार देखेगा, तीन बार आपके पास आएगा, उतना दिमाग खपाता रहेगा। लेकिन फिर भी स्वीकार नहीं करेगा। किसान तब स्वीकार करता है जब वे अपने आंखों से सफलता को देखता है। ये उसका स्वभाव है और इसलिए जब तक किसान के अंदर विश्वास नहीं भर देते उसको भरोसा नहीं होता। हां भाई जो व्यवस्था क्योंकि इसका कारण नहीं है की वह साहसिक नहीं है लेकिन उसे मामलू है एक गलती है गई मतलब साल बिगड़ गया। साल बिगड़ गया 18-20 साल की बच्ची हुई है हाथ पीले करने के सपने तय किये हैं अगर एक साल बिगड़ गया तो बच्ची की शादी चार साल रुक जाती है। ये उसकी पीड़ा रहती है और इसलिए किसान तुरंत हिम्मत नहीं करता है, सोचता है किसान के पास यह बात कौन पहुंचाये।

इन समस्याओं का समाधान करने के लिए किसान तक अनुभवों की बात पहुंचाने के लिए और किसान के माध्यम से पहुंचाने के लिए एक प्रयास ये है किसान चैनल और इसलिए एक बात हमें माननी होगी कि हमारे कृषि क्षेत्र में बहुत बड़ा बदलाव लाना जरूरी है। आज global Economy है हम satellite पर ढेर सारा पैसा खर्च करते हैं एक के बाद एक satellite छोड़ रहे हैं । उन satellite के Technology का space Technology का सबसे बड़ा अगर लाभ हुआ है तो वो लाभ हुआ है मौसम की जानकारियां अब करीब-करीब सही निकलने लगी है। पहले मौसम की जानकारियां किसान को भरोसा नहीं होता था, यार ठीक है ये तो कहता था धूप निकलेगा नहीं निकला। लेकिन अब ये जो खर्चा कर रही है सरकार ढेर सारे satellite छोड़ रही है। ये अरबों- खरबों रुपये का खर्च हुआ है इसका अगर सबसे बड़ा लाभ मिल सकता है तो किसान को मिल सकता है। वो मौसम की खबर बराबर ले सकता है। मैं जिस किसान चैनल के माध्यम से, मैं हमारे किसानों को आदत डालना चाहता हूं कि वे इस मौसम विज्ञान को तो अवश्य टीवी पर देखें और मैं हमारे प्रसार भारती के मित्रों और किसान चैनल वालों को भी कहूंगा कि एक बार किसान को विश्वास हो गया कि हां भाई ये बारिश के संबंध में, हवा चलने के संबंध में, धूप निकलने के संबंध में बराबर जानकारी आ रही है तो उसका बराबर मालूम है कि ऐसी स्थिति में क्या करनी चाहिए वो अपने आप रास्ता खोज लेगा और परिस्थितियों को संभाल लेगा ये मुझे पता है।

आज ये व्यवस्था नहीं है आज general nature का आता है वो भी मोटे तौर पर जानकारी आती है उसमें रुचि नहीं है। मैं इस Technology में मेरी आदत है वेबसाइट पर जाने की लेकिन बारिश के दिनों में मैं कोई खबर सबसे पहले नहीं देखता हूं, वेबसाइट पर जाकर सबसे पहले मैं उस समय 5-6 दुनिया के जितनी महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं थी। जहां से मौसम की जानकारी मिलती थी, तुरंत देखता था हर बार। 5-6 जगह पर रोज सुबह मॉर्निंग में मेरा यही कार्यक्रम रहता था। मैं देखता था कि भाई पूरे विश्व में मौसम की स्थिति क्या है, बारिश कब आएगी, बारिश के दिनों के बात है।

मैं चाहता हूं कि सामान्य मानवीय इससे जुड़े, दूसरा आज global economy है। एक देश है उससे हमें अगर पता चलता है कि वहां इस बार मुंगफली बहुत पैदा होती थी। लेकिन इस बार उसकी मुंगफली एक दम से कम हो गई है। तो भारत के किसान को पता चलेगा कि भाई सबसे ज्यादा मुंगफली देने वाला देश था उसकी तो हालत खराब है। मतलब Globally मुंगफली के Market मरने वाला है। किसान सोच सकता है कि भई उसके यहां तो दो महीने पहले फसल क्योंकि बारिश हरेक जगह तो अलग-अलग है तो निर्णय कर पायेगा कि भाई इस बार मौका है। उसके तो सब बुरा हो गया है मैं उसमें से कुछ कर सकता हूं मैं अगर मुंगफली पर चला जाउं तो मेरा Market पक्का हो जाएगा और वो चला जाएगा। हम पूरे वैश्विक दृष्टि से दुनिया के किस Belt में किसानों का क्या हाल है किस प्रकार का वहां पैदावार की स्थिति है, बारिश की स्थिति क्या है, बदलाव क्या आ रहा है, उसके आधार पर हम तय कर सकते हैं।

हमारे देश में जो खजूर की खेती करते हैं, अरब देशों में हम से दो महीने बाद फसल आती है। हमारे देश में जो लोग इसके खेती करते हैं उनको दो महीने पहले Market मिल जाता है और उसके कारण अरब देशों में जो क्वालिटी है उसकी क्वालिटी हमारी तुलना में ज्यादा अच्छी है क्योंकि natural crop वहीं का है। लेकिन उसके वाबजूद हमारे यहां खजूर की खेती करने वालों को फायदा मिल जाते है क्यों, क्योंकि हम दो महीने पहले आ जाते हैं। हम ये..ये global economy की जो चीजें हैं उसको अगर गहराई से समझ करके हम अपने किसानों को guide करें तो उसको पता चलेगा वर्ना कभी क्या होता है किसान को मुसीबत। एक बार हवा चल पड़ती है कि टमाटर की खेती बहुत अच्छी है तो किसान बेचारा आंख बंद करके टमाटर की खेती में लग जाता है और जब टमाटर बहुत ज्यादा पैदा हो जाती है तो दाम टूट जाता है। दाम टूट जाता है टमाटर लंबे दिन रहता नहीं तो वो घाटे में चला जाता है और इसलिए कृषि में उत्पादन के साथ उसकी अर्थनीति के साथ जोड़कर ही चलना पड़ेगा और उसमें एक मध्य मार्ग काम करने के लिए सरकारी तंत्र किसान चैनल के माध्यम से प्रतिदिन आपके साथ जुड़ा रह सकता है। आपको शिक्षित कर सकता है, आपका मार्गदर्शन करता है, आपकी सहायता कर सकता है।

हमें अगर बदलाव लाना है तो जिस प्रकार से विश्व में बदलते बदलावों को समझकर अपने यहां काम करना होगा। मौसम को समझकर काम की रचना कर सकते हैं। उसी प्रकार से हम Technology के द्वारा बहुत कुछ कर सकते हैं। आज दुनिया में कृषि के क्षेत्र में Technology के क्षेत्र में बहुत काम किया है। हर किसान के पास यह संभव नहीं है कि दुनिया में Technology कहा है वो देखने के लिए जाए..विदेश जाए जाकर के देखें, नहीं है। मैं चाहूंगा कि इस किसान चैनल के माध्यम से नई-नई Technology क्या आई है वो नई-नई Technology किसान के लिए सिर्फ मेहनत बचाने के लिए नहीं उस Technology के कारण परिणाम बहुत मिलता है। Technology का Intervention कभी-कभी बहुत Miracle कर देता है। हम उसकी ओर कैसे जाए?

उसी प्रकार से राष्ट्र की आवश्यकता की ओर हम ध्यान कैसे दें। आज भी, लाल बहादुर शास्त्री ने कहा किसान ने बात उठा ली। अन्‍न के भंडार भर दिये। आज malnutrition हमारी चिंता का विषय है, कुपोषण यह हमारी चिंता का विषय है और कुपोषण से मुक्ति में एक महत्‍वपूर्ण आधार होता है प्रोटीन। ज्‍यादातर हमारे यहां परिवारों को गरीब परिवारों को प्रोटीन मिलता है दाल में से। Pulses में से। लेकिन देश में Pulses का उत्‍पादन बढ़ नहीं रहा है। प्रति हेक्‍टेयर भी नहीं बढ़ रहा है। और उसकी खेती भी कम हो रही है। अगर हमें हमारे देश के गरीब से गरीब व्‍यक्ति को प्रोटीन पहुंचाना है तो Pulses पहुंचानी पड़ेगी। Pulses ज्‍यादा मात्रा में तब पहुंचेगी जब हमारे यहां Pulses की ज्‍यादा खेती होगी, Pulses का उत्‍पादन ज्‍यादा होगा। हमारी University से भी मैं कहता हूं Agriculture University एक-एक अलग-अलग Pulses को लेकर हम उसमें Research कैसे करे? Genetic Engineering कैसे करें? हम प्रति हेक्‍टेयर उसका उत्‍पादन कैसे बढ़ाए? जो उत्‍पादति चीजों हो उसका प्रोटीन content कैसे बढ़े? उस पर हम कैसे काम करें, ताकि हमारे किसान को सही दाम भी मिले?

देश को आज Pulses Import करनी पड़ती है। हम ठान ले कि दस साल के भीतर-भीतर ऐसी मेहनत करे, जब 2022 में जब हिंदुस्‍तान आजादी के 75 साल मनाएगा उस समय हमें Pulses Import न करना पड़े। हमारी दाल वगैरह import न करनी पड़े। हम किसान मिलकर के यह काम कर सकते हैं, हम एक Mission Mode में काम कर सकते हैं और दुनिया में बहुत प्रयोग हुए हैं, दुनिया में बहुत प्रयोग हुए हैं, उसकी आवश्‍यकता है।

आज हमारे देश में Oil Import करना पड़ रहा है। एक तरफ हमारा किसान जो पैदावर करता है, उसके दाम नहीं मिलते और दसूरी तरफ देश की जरूरत है, वो पैदा नहीं होता। हमें विदेश से Oil लाने के लिए तो पैसा देना पड़ता है लेकिन किसान को देने को हमारे पास कुछ बचता नहीं है। अगर हमारा Oil Import बंद हो जाए, खाने का तेल, क्‍या हम उत्‍पादन नहीं कर सकते, हम Target नहीं कर सकते।

इन चीजों को हमारे किसान को हम कैसे समझाए और मुझे विश्‍वास है कि एक बार किसान को यह समझ में आ गई कि यह देश की आवश्‍यकता है, इसके दाम कभी गिरने वाले नहीं है, तो मैदान में आ जाएंगे। इस देश के पास करीब-कीरब 1200 टापू हैं। 1200 टापू है हिंदुस्‍तान के समुद्री तट पर। टापुओं पर उस प्रकार की खेती संभव होती है, जहां से हम हमारी तेल की Requirement पूरी कर सकते हैं। आज हम तेल बाहर से लाते हैं। हमारे किसान, हमारे पंजाब के किसान तो कनाडा में जाइये, खेती वहीं करते हैं, अफ्रीका में जाइये हमारे देश के किसान जाकर के खेती करते हैं। हमारे देश के किसान हमारे टापुओं पर जाकर कर सकते हैं खेती। कभी वैज्ञानिक अध्‍ययन होना चाहिए। और मैं चाहूंगा कि हमारे जो किसान चैनल है कभी जाकर के देखे तो सही, टापुओं का रिकॉर्डिंग करके दिखाए लोगों को कि यह टापू है, इतना बड़ा है, इस प्रकार की वहां प्राकृतिक संपदा वहाँ पड़ी है, यहां ऐसी ऐसी संभावना है। Climate उस प्रकार का है कि जो हमारे Oil seeds की जो requirement है उसे पूरा कर सके। वैज्ञानिक तरीके से हो, मैं इसका वैज्ञानिक नहीं हूं। मैं इसके लिए कुछ कह नहीं सकता। लेकिन मैं एक विचार छोड़ रहा हूं इस विचार पर चिंतन हो। सही हो तो आगे बढ़ाया जाए, नहीं है तो प्रधानमंत्री को वापस दे दिया जाए। मुझे कुछ नुकसान नहीं होगा। लेकिन प्रयास तो हो।

मैं चाहता हूं कि इस किसान चैनल के माध्‍यम से एक व्‍यापक रूप से देश के कृषि जगत में बदलाव कैसे आए। आर्थिक रूप से हमारी कृषि समृद्ध कैसे हो और जब हम कृषि की बात करते हैं तब बारिश के सीजन वाली कृषि से आप भटक नही सकते 12 महीने, 365 दिन का चक्र होता है।

हमारे सागर खेडू, समुद्र में जो हमारे लोग हैं, उनको भी सागर खेडू बोलते हैं…fishermen. वो एक बहुत बड़ा आर्थिक क्षेत्र है। वो Within India भी लोगों की आवश्‍यकता पूरी करती हैं और Export करके हिंदुस्‍तान की तिजौरी भी भरते हैं। अब इसके माध्‍यम से fisheries क्षेत्र को कैसे आगे बढ़ाए। बहुत कम लोगों को मालूम होगा। Ornamental Fish का दुनिया में बहुत बड़ा market है। जो घरों के अंदर Fish रखते हैं, रंग-बिरंगी Fish देखने के लिए लोग बैठते हैं उसका दुनिया में बहुत बड़ा Market है खाने वाला Fish नहीं, Ornamental Fish और उसको, उसके farm बनाए जा सकते हैं, उसकी रचनाएं की जा सकती है, उसकी Training हो सकती है। एक बहुत बड़ा नई पीढ़ी के लिए एक पसंदीदा काम है।

हमारी कृषि को तीन हिस्‍सों में बांटना चाहिए और हर किसान ने अपने कृषि के Time Table को तीन हिस्‍सों में बांटना चाहिए, ऐसा मेरा आग्रह है और प्रयोग करके देखिए। मैं विश्‍वास से कहता हूं कि मैं जो सलाह दे रहा हूं उसको स्‍वीकार करिए, आपको कभी सरकार के सामने देखने की जरूरत तक नहीं पड़ेगी। हमारी कृषि आत्‍म-निर्भर बन सकती है, हमारा किसान स्वावलंबी बन सकता है और हमारे कदम वहीं होने चाहिए, सरकारों पर dependent नहीं होना चाहिए और मैं इसलिए कहता हूं कृषि को तीन हिस्‍सों में बांटकर चलना चाहिए एक-तिहाई जो आप परंपरागत रूप से करते हैं वो खेती, एक-तिहाई Animal husbandry चाहे आप गाय रखें, भैंस रखे, दूध का उत्‍पादन करे, मुर्गी रखें, अंडे रखे, लेकिन एक तिहाई उसके लिए आपकी ताकत लगाइए और एक तिहाई आप अपने ही खेत में timber की खेती करें, पेड़ उगाए, जिससे फर्नीचर के लिए जो लकड़ी लगती है न वो बने। आज हिंदुस्‍तान को timber Import करना पड़ रहा है। जंगल हम काट नहीं सकते तो उपाय यही है और उसके लिए भी जमीन खराब करने की जरूरत नहीं है। आज हमारे देश की हजारों-लाखों हेक्‍टेयर भूमि कहां बर्बाद हो रही है। दो पड़ोसी किसान हो तो एक तो हमारे देश में सब छोटे किसान है, बड़े किसान नहीं है, छोटे किसान है और देश का पेट भरने का काम भी छोटे किसान करते हैं। बड़े किसान नहीं करते, छोटे किसान करते हैं। दो-तीन बीघा भूमि है, पड़ोसी के पास तीन बीघा है, तीनों भाई हैं, लेकिन बीच में ऐसी दीवार बना देते हैं, बाढ़ लगा देते हैं कि दो-तीन मीटर उसकी जमीन खराब होती है, दो-तीन मीटर इसकी खराब होती है। सिर्फ इसी के लिए अगर एक बार हम इस बाढ़ में से बाहर आ जाए और अगर पेड़ लगा दें एक पेड़ इस वाले का, एक पेड़ उस वाले का, एक इसका और एक उसका और आधे इसके आधे उसके। अब मुझे बताइये कि जमीन बच जाएगी कि नहीं बच जाएगी। लाखों एकड़ भूमि आज बर्बाद हो रही है। मैं किसानों से आग्रह करता हूं कि अड़ोस-पड़ोस से अपने भाई हो या और कोई हो दो खेतों के बीच में जो बाढ़ में दो-दो मीटर, पाँच-पांच, सात-सात मीटर जमीन खराब होती है उसकी जगह पर पेड़ लगा दें। और वो भी timber और सरकार आपको permission दें। आपके घर में बेटी पैदा हुई हो पेड़ लगा दीजिए, बेटी की शादी हो पेड़ काट दीजिए, शादी उतने ही खर्चें में हो जाएगी। और इसलिए मैं कहता हूं एक-तिहाई timber की खेती, एक-तिहाई हम regular जो खेती करते हैं वो और एक-तिहाई देश को Milk की बहुत जरूरत है। हम पशु-पालन कर सकते हैं और हमारी माताएं-बहनें करती हैं। 365 दिन का हमारा आर्थिक चक्र हम बना सकते हैं। और एक बार यह बनाएंगे, मैं नहीं मानता हूं हमारे कृषि क्षेत्र को हम परेशान होने देंगे। लेकिन इस काम के लिए हमने इस चैनल का भरपूर उपयोग करना है। लोगों को प्रशिक्षित करना है, उनमें विश्वास पैदा करना है।

उसी प्रकार से हमारे देश के हर तहसील में मैं कहता हूं एक-दो, एक-दो प्रगतिशील किसान हैं, प्रयोग करते हैं, सफलतापूर्वक करते हैं। उनके खेतों का Live Telecast, Video Conferencing खेत से ही हो सकता है। खेत में इस सरकार जाए, चैनल वहां लगाए, वो किसान दिखाएं घूम-घूम कर, देशभर के किसान देखें उसके पत्र-व्‍यवहार की व्‍यवस्‍था कर दी जाए। सारे देश के किसान उसको पूछते रहेंगे कि भई आप यह कर रहे हैं मुझे बताइये कैसे हो सकता है, मेरे यहां भी हो सकता है। हमारे देश में प्रगतिशील किसानों ने ऐसे पराक्रम किये हैं। मैंने कई किसानों को जानता हूं जिन्‍होंने Guinness Book of World Records में अपना नाम दर्ज कराया। मैं एक किसान को जानता हूं मुस्लिम नौजवान है, पिता जी तो खेती नहीं करते थे वो खेती में गया और आलू की पैदावर प्रति हेक्‍टेयर सबसे ज्‍यादा पैदा करके दुनिया में नाम कमाया उसने। अगर मेहनत करते हैं तो हम स्थितियों को बदल सकते हैं। और इसलिए मैं कहता हूं कि हम किसान चैनल के माध्‍यम से जहां भी अच्‍छा हुआ है, प्रयोग हुए हैं उसको हम करना चाहते हैं। आप पंजाब में जाइये हर गांव में एक-आध किसान ऐसा है जो Technology में master है। वो जुगाड़ करके ऐसी-ऐसी चीज बना देता है और वो जुगाड़ शब्‍द ही Popular है।

मैं पंजाब में मेरी पार्टी का काम करता था तो मैं चला जाता था खेतों में किसानों के साथ देखने के लिए, समझने के लिए, हरेक के पास मोटर साईकिल का पुर्जा है उठाकर के कहीं और लगा दिया है, मारूति कार का पुर्जा कहीं और लगा दिया है। और वो अपना पानी निकाल रहा था। ऐसे प्रयोगशील होते हैं। किसान इतनी Technology को करते हैं जी, मैं समझता हूं कि और लोगों को इसका परिचय Technology का परिचय दो। एक बार हम इन चीजों को जोड़े और दूसरी तरफ हमारी universities किसान चैनल को आधुनिक से आधुनिक चीजें मुहैया कराने का एक network बनाना चाहिए। और कभी किसान चैनल भी competition क्‍यों न करे। बस इस प्रकार की competition करे। अब जैसे यह चैनल वाले होते हैं गायकों को ढूंढते हैं, नाचने वाले को ढूंढते हैं, competition करते हैं, तो उत्तम प्रकार की खेती करने वालो के लिए भी competition हो सकती है, उनके भी प्रयोग हो सकते हैं, वो आएं, दिखाएं, समझाएं, मैं समझता हूं कि ये चैनल सबसे ज्यादा पॉपुलर हो सकते हैं और एक बार और प्रसार भारती मेरे शब्द लिख करके रखे, अगर आप सफल हो गए और मुझे विश्वास है कि जिस लगन से आपने कम समय पर काम किया है। ये सिर्फ technology नहीं है और कोई और चैनल चलाने के लिए technology सिर्फ चलती है, खेतों में जाना पड़ा है, गांव में जाना पड़ा है, किसानों से मिलना पड़ा है, आपका मटेरियल तैयार करना पड़ा है, मैं जानता हूं कि कितनी मेहनत इसमें लगी है तब जाकर चैनल का रूप आया है। लेकिन अगर बढ़िया ढंग से चली तो तीन साल के बाद आपको चलाना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए मुश्किल हो जाएगा कि जो 24 घंटे वाले हैं न वह भी अपनी चालू कर देंगे। उनको उसकी ताकत समझ आएगी। आज उनके यहां इसको मौका नहीं है, लेकिन आप अगर सफल हो गए तो दूसरी 20 चैनल किसानों के लिए आ जाएगी और एक ऐसी competition का माहौल होगा, मेरे किसान का भाग्य खुल जाएगा।

और इसलिए मैं आज इस किसान के माध्यम से आपने जो नई शुरूआत की है देश के गांव और गरीब किसान को जोड़ने का प्रयास किया है, जिसे मैं आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ना चाहता हूं, मैं जिसे satellite की technology के साथ जोड़ना चाहता हूं, जिसको अपना भविष्य बनाने का रास्ता बनाने के लिए तैयार करना चाहता हूं उस काम को हम सफलतापूर्वक करेंगे।

उसी एक विश्वास के साथ मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं देश के सभी किसान भाइयों और बहनों को मेरी हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद।

Modi Masterclass: ‘Pariksha Pe Charcha’ with PM Modi
Share your ideas and suggestions for 'Mann Ki Baat' now!
Explore More
Do things that you enjoy and that is when you will get the maximum outcome: PM Modi at Pariksha Pe Charcha

Popular Speeches

Do things that you enjoy and that is when you will get the maximum outcome: PM Modi at Pariksha Pe Charcha
Quad validates PM’s India-first approach (By S Jaishankar)

Media Coverage

Quad validates PM’s India-first approach (By S Jaishankar)
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Text of PM’s address on Completion of 20 years of Indian School of Business, Hyderabad
May 26, 2022
Share
 
Comments
Acknowledges the role of students of ISB in the economic and business landscape of the country
“Today the world is realising that India means business”
“I would like to ask you to link your personal goals with the goals of the country”
“Due to the continuous political instability in the last three decades, the country has seen a lack of political willpower and stayed away from reforms and big decisions”
“In the system now government reforms, bureaucracy performs and people’s participation leads to transformation”
“To make India future-ready, we have to ensure that India becomes self-reliant. All you business professionals have a big role in this”

तेलंगाना की राज्यपाल श्रीमती तमिलसाई सौन्दर्यराजन सौंदरराजन जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्री जी कृष्ण रेड्डी जी, तेलंगाना सरकार के मंत्री, इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नस एग्जीक्यूटिव बोर्ड के चेयरमैन, डीन, अन्य प्रोफेसर्स, टीचर्स, पेरेंट्स और मेरे प्यारे युवा साथियों !

आज इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नस ने अपनी गौरवमयी यात्रा का एक अहम माइलस्टोन पार किया है। हम सभी ISB की स्थापना के 20 साल पूरे होने को सेलिब्रेट कर रहे हैं। आज अनेक साथियों को अपनी डिग्री मिली है, गोल्ड मेडल मिले हैं। ISB को सफलता के इस पड़ाव पर पहुंचाने में अनेकों लोगों की तपस्या रही है। मैं आज उन सभी को याद करते हुए आप सभी को, ISB के प्रोफेसर्स, फेकल्टी, सभी स्टूडेंट्स को, पेरेन्ट्स को, आई एस बी के एल्यूमनाइज को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।

साथियों,

साल 2001 में अटल जी ने इसे देश को समर्पित किया था। तब से लेकर आज तक लगभग 50 हज़ार एक्ज़ीक्यूटिव यहाँ से ट्रेन होकर निकले हैं। आज आई एस बी एशिया के टॉप बिजनेस स्कूलों में से एक है। आई एस बी से निकलने वाले जो प्रोफेशनल्स हैं। वे देश के बिजनेस को गति दे रहे हैं, बड़ी-बड़ी कंपनियों का मैनेजमेंट संभाल रहे हैं। यहाँ के स्टूडेंट्स ने अनेक स्टार्ट अप्स बनाए हैं, अनेकों यूनिकॉर्न्स निर्माण में उनकी भूमिका रही है। ये आई एस बी के लिए उपलब्धि तो है ही पूरे देश के लिए गर्व का विषय भी है।

साथियों,

मुझे बताया गया है कि ये हैदाराबाद और मोहाली कैंपस की पहली जॉइंट ग्रेजुएशन सेरेमनी है। आज जो स्टूडेंट्स पास होकर निकल रहे हैं, उनके लिए ये इसलिए भी खास है क्योंकि इस समय देश अपनी आजादी के 75 वर्ष का पर्व मना रहा है, अमृत महोत्सव मना रहा है। हम बीते 75 साल की उपलब्धियों को देख रहे हैं और आने वाले 25 साल के संकल्पों का रोडमैप भी बना रहे हैं। आज़ादी के इस अमृतकाल में, आने वाले 25 साल के लिए जो संकल्प हमने लिए हैं, उसकी सिद्धि में आप सभी की बहुत बड़ी भूमिका है। और आज भारत में जो आशा है, लोगों में जो आत्मविश्वास है, नए भारत के निर्माण के लिए जो इच्छाशक्ति है, वो आपके लिए भी अनेक संभावनाओं के द्वार खोल रही है। आप खुद देखिए, आज भारत G20 देशों के समूह में फास्टेस्ट ग्रोइंग इकॉनमी है। Smartphone date consumer के मामले में भारत पहले नंबर पर है। Internet users की संख्या को देखें तो भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है। Global Retail Index में भी भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Startup Ecosystem भारत में है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Consumer Market भारत में है। ऐसी कई चीजें मैं आपके सामने रख सकता हूँ, गिना सकता हूँ। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में हम सबने और दुनिया ने भारत का सामर्थ्य देखा है। सदी की इस सबसे बड़ी आपदा में ग्लोबल सप्लाई चेन्स में इतना बड़ा disruption हुआ, फिर युद्ध ने भी इस संकट को और बढ़ा दिया। इन सबके बीच भी, भारत आज ग्रोथ के एक बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है। पिछले साल भारत में अब तक का सबसे ज्यादा, रेकॉर्ड FDI आया। आज दुनिया ये महसूस कर रही है कि India means business. और ये केवल अकेले सरकार के प्रयासों के कारण संभव नहीं हुआ है। इसमें ISB जैसे बिज़नेस स्कूल्स का, यहाँ से निकलने वाले प्रोफेशनल्स का, देश के युवा का भी बहुत बड़ा योगदान है। चाहे स्टार्टअप्स हों, या traditional business हो, चाहे manufacturing हो या सर्विस सेक्टर हो, हमारे युवा ये साबित कर रहे हैं कि वो दुनिया को लीड कर सकते हैं। मैं सही बता रहा हूँ ना, आपको भरोसा है कि नहीं अपने आप पर। मुझे आप पर भरोसा है। आपको अपने आप पर है?

साथियों,

इसीलिए आज दुनिया भारत को, भारत के युवाओं को, और भारत के products को एक नए सम्मान और नए भरोसे के साथ देख रही है।

साथियों,

भारत जिस स्केल पर लोकतांत्रिक तरीके से अनेक चीजें अपने यहाँ कर सकता है, जिस तरीके से हम यहाँ कोई नीति या निर्णय लागू कर सकते हैं, वो पूरी दुनिया के लिए अध्ययन का सीखने का विषय बन जाता है। और इसलिए हम अक्सर Indian solutions को globally implement होते हुए देखते हैं। और इसलिए मैं आज इस महत्वपूर्ण दिन पर आपसे कहूंगा कि आप अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों को, देश के लक्ष्यों के साथ जोड़िए। आप जो सीखते हैं, आपका जो भी अनुभव होता है, आप जो भी initiatives लेते हैं, उससे देशहित कैसे सधेगा, इस बारे में हमेशा सोचना चाहिए, जरूर सोचिये। आज देश में चाहे Ease of Doing Business के लिए अभियान हो, डेढ़ हजार से ज्यादा पुराने कानूनों और हजारों compliances को समाप्त करने का काम हो, टैक्स के अनेकों कानूनों को समाप्त करके GST जैसी पारदर्शी व्यवस्था का निर्माण हो, Entrepreneurs और innovation को बढ़ावा देना हो, नई स्टार्ट अप पॉलिसी हो, ड्रोन पॉलिसी हो, अनेक नए सेक्टर्स को खोलना हो, 21वीं सदी की आवश्यकताओं को पूरा करने वाली नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को लागू करना हो, ये सारे बड़े बदलाव आप जैसे युवाओं के लिए ही तो हो रहे हैं। आप जैसे युवाओं की तरफ से आने वाले जो solutions हैं, उन solutions को implement करने के लिए, आपके idea को देश की ताकत बनाने के लिए हमारी सरकार हमेशा देश की युवा शक्ति के साथ खड़ी है।

साथियों,

आपने सुना होगा कई बार मैं एक बात को बार-बार दोहराता भी हूँ और अक्सर मैं कहता हूँ Reform, Perform, Transform की बात करता हूँ। ये मंत्र, देश में आज जो governance है, उसे define करता है। ये आप जैसे मैनेजमेंट के स्टूडेंटस, प्रोफेशनल्स के लिए भी बहुत अहम है। मैं ये सारी बातें आपको इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि आप लोग यहाँ से निकलने के बाद बहुत सारे Policy decisions लेने वाले हैं। Policy सिर्फ ड्रॉइंग बोर्ड पर अच्छी हो, कागज़ पर बेहतर हो, जमीन पर अगर नतीजे ना दें, तो उसका कोई लाभ नहीं होता। इसलिए पॉलिसी का आकलन, Implementation और End Result के आधार पर होना चाहिए। Reform, Perform, Transform के मंत्र ने कैसे Policies को, देश की Governance को Redefine किया है, ये भी मैं चाहूँगा कि आप जैसे नौजवानों ने जानना बहुत जरूरी है।

साथियों,

बीते 8 साल की तुलना अगर आप उससे पहले के 3 दशक से करेंगे तो, एक बात जरूर नोट करेंगे। हमारे देश में रिफॉर्म्स की ज़रूरत तो हमेशा से महसूस की जाती रही थी लेकिन Political willpower की हमेशा कमी रहती थी। पिछले तीन दशकों में लगातार बनी रही राजनीतिक अस्थिरता के कारण देश ने लंबे समय तक Political willpower की कमी देखी। इस वजह से देश reforms से, बड़े फैसले लेने से दूर ही रहा है। 2014 के बाद से हमारा देश राजनीतिक इच्छाशक्ति को भी देख रहा है और लगातार Reforms भी हो रहे हैं। हमने दिखाया है कि अगर ईमानदारी के साथ, इच्छाशक्ति के साथ reform की प्रक्रिया को आगे बढ़ाई जाए तो जनसमर्थन अपने आप बढ़ता है। Fintech का उदाहरण हमारे सामने है। जिस देश में कभी बैंकिंग ही एक privilege मानी जाती थी, उसी देश में fintech सामान्य नागरिकों के जीवन को बदल रही है। जहाँ कभी बैंकों के प्रति भरोसा कायम करने के लिए बहुत सारी मेहनत करनी पड़ती थी, वहाँ अब दुनिया की 40 प्रतिशत डिजिटल ट्रांजेक्शन हिन्दुस्तान में हो रही हैं। हमारे Health Sector को भी ये माना जाता था कि ये किसी बड़ी चुनौती को respond नहीं कर पाएगा। लेकिन Health Sector में reform की देश की इच्छाशक्ति का परिणाम हमने 100 साल की सबसे बड़ी महामारी के दौरान अनुभव किया है। कोरोना ने जब दस्तक दी तब हमारे पास PPE किट्स बनाने वाले मैन्युफेक्चरर ना के बराबर थे, कोरोना स्पेसिफिक ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी नहीं था। लेकिन देखते ही देखते 1100 से अधिक PPE manufacturers का नेटवर्क भारत में तैयार हो गया। कोरोना की टेस्टिंग के लिए भी शुरुआत में कुछ दर्जन लैब्स थीं। बहुत कम समय में देश में ढाई हज़ार से अधिक टेस्ट लैब्स का नेटवर्क बन गया। कोविड वैक्सीन्स के लिए तो हमारे यहाँ चिंता जताई जा रही थी कि हमें विदेशी वैक्सीन मिल पाएगी भी या नहीं। लेकिन हमने अपनी वैक्सीन्स तैयार कीं। इतनी वैक्सीन्स बनाईं कि भारत में भी 190 करोड़ से ज्यादा डोज़ लगाई जा चुकी हैं। भारत ने दुनिया के 100 से अधिक देशों को भी वैक्सीन्स भेजी हैं। इसी प्रकार मेडिकल एजुकेशन में भी हमने एक के बाद एक अनेक रिफार्म किए। इसी का परिणाम है कि बीते 8 सालों में मेडिकल कॉलेज की संख्या 380 से बढ़कर 600 से भी अधिक हो गई है। देश में मेडिकल की ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट की सीटें 90 हज़ार से बढ़कर डेढ़ लाख से ऊपर हो चुकी हैं।

साथियों,

पिछले आठ वर्षों में देश ने जो इच्छाशक्ति दिखाई है, उसकी वजह से एक और बड़ा बदलाव आया है। अब ब्यूरोक्रेसी भी पूरी शक्ति से Reforms को जमीन पर उतारने में जुटी है। सिस्टम वही है, लेकिन अब नतीजे बहुत संतोषजनक मिल रहे हैं। और इन आठ वर्षों में जो सबसे बड़ी प्रेरणा बनी है, वो है जनभागीदारी। देश की जनता खुद आगे बढ़कर Reforms को गति दे रही है। और हमने ये स्वच्छ भारत अभियान में देखा है। और अब वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत अभियान में भी हम जनभागीदारी की ताकत को देख रहे हैं। जब जनता सहयोग करती है तो नतीजे अवश्य मिलते हैं, जल्दी मिलते हैं। यानि सरकारी व्यवस्था में सरकार reform करती है, ब्यूरोक्रेसी perform करती है और जनता के सहयोग से transformation होता है।

साथियों,

ये आपके लिए एक बहुत बड़ी केस स्टडी है, Reform, Perform, Transform की जो ये डायनिमिक्स है, वो आपके लिए रिसर्च का विषय है। ISB जैसे बड़े संस्थान को अध्ययन करके, analysis करके दुनिया के सामने इसे लाना चाहिए। यहाँ से जो युवा साथी पढ़कर निकल रहे हैं, उन्हें भी Reform, Perform, Transform के इस मंत्र को हर क्षेत्र में लागू करने का प्रयास करना चाहिए।

साथियों,

मैं आपका ध्यान, देश के sports ecosystem में आए ट्रांसफॉर्मेशन की तरफ भी दिलाना चाहता हूँ। आखिर क्या कारण है कि 2014 के बाद हमें खेल के हर मैदान में अभूतपूर्व प्रदर्शन देखने को मिल रहा है? इसका सबसे बड़ा कारण है हमारे एथलीट्स का आत्मविश्वास। आत्मविश्वास तब आता है, जब सही टैलेंट की खोज होती है, जब टैलेंट की handholding होती है, जब एक transparent selection होता है, ट्रेनिंग का, कंपीटिशन का एक बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मिलता है। खेलो इंडिया से लेकर ओलंपिक्स पोडियम स्कीम तक ऐसे अनेक रिफॉर्म्स के चलते आज sports को Transform होते हम अपनी आंखों के सामने देख सकते हैं, अनुभव कर सकते हैं।

साथियों,

मैनेजमेंट की दुनिया में performance, value addition, productivity और motivation, इन बातों पर भी बहुत चर्चा होती है। अगर आपको पब्लिक पॉलिसी में इसका उत्तम उदाहरण देखना है, तो आपको aspirational district program को ज़रूर स्टडी करना चाहिए। हमारे देश में 100 से अधिक ऐसे जिले थे, जो विकास की दौड़ में काफी पीछे थे। देश के लगभग सभी राज्यों में एकाद दो-एकाद दो कहीं पर थोड़े ज्यादा ऐसे aspirational district हैं। विकास से जुड़े हर पैरामीटर में ये जिले बहुत कम स्कोर करते थे। इसका सीधा प्रभाव देश की ओवरऑल performance पर, रेटिंग पर, ओवरऑल प्रदर्शन पर बड़ा नेगेटिव असर पड़ता था। इनको ये समझकर कुछ हो नहीं रहा है, बदलाव दिख नहीं रहा है, हालात बुरे हैं, और इसलिए सरकारें क्या करती थीं। उसको पिछड़ा घोषित कर देती थी।, ये तो backward district है, अगर यही सोच है तो उनके मन में भी हो जाता आया आता ऐसी ही रहेगा कुछ बदलाव नही होगा। सरकारी सिस्टम में जिन अफसरों को सबसे कम प्रोडक्टिव माना जाता था, निकम्मा माना जाता था, उनको अक्सर इन जिलों में तैनात करने देना और जाओ बई तुम तुम्हारा जानो तुम्हारा नसीब जाने पडे रहो।

लेकिन साथियों,

हमने अप्रोच बदली। जिसे कल तक backward district कहते थे। हमने कहा ये backward नहीं है ये aspirational district है हमने उनको aspirational घोषित किया, और हमने तय किया कि हम इन जिलों में विकास की आकांक्षा जगाएंगे, एक नई भूख जगाएंगे। देश के Efficient, युवा अधिकारियों को चिन्हित करके इन जिलों में भेजा गया। इन जिलों में होने वाले हर काम को विशेष तौर पर मॉनीटर किया गया, डैस्क बोर्ड पर रियल टाइम मॉनिटरिंग करने की व्यव्सथा की है। जहाँ-जहाँ कमियाँ नजर आती थी उन कमियों को दूर करने का प्रयास किया गया है। और साथियों आपको जानकर के खुशी होगी आज स्थिति ये है कि इनमें से कई जिले आज देश के दूसरे बेहतर समझे जाने वाले जिलों से कहीं ज्यादा अच्छा परफॉर्म कर रहे हैं। जिन्हें कभी पिछड़े जिले कहते थे देश के development parameters को प्रभावित करते थे, वो आज aspirational district बनकर, देश के विकास को गति दे रहे हैं। अब हमने राज्यों से कहा है इस अप्रोच को और विस्तार दें। हर जिले में ऐसे ब्लॉक्स होते हैं जो विकास के मामले में दूसरों से पिछड़ गए हैं। ऐसे ब्लॉक्स को identify करके aspirational blocks अभियान को अब आगे बढ़ाया जा रहा है। देश में हो रहे ये बदलाव, इनकी जानकारी, आपको policy decisions में, मैनेजमेंट में बहुत मदद करेगी।

साथियों,

आपके लिए ये सब जानना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि आज देश में ‘business' के मायने भी बदल रहे हैं और ‘business’ का दायरा भी बढ़ रहा है। आज भारत में economic landscape, small, medium, cottage और यहाँ तक की informal enterprises तक में फैल रहा है। ये बिजनेस लाखों-लाख लोगों को रोजगार के अवसर दे रहे हैं। इनका सामर्थ्य बहुत ज्यादा है, इनमें आगे बढ़ने का कमिटमेंट बहुत ज्यादा है। इसलिए आज जब देश आर्थिक विकास के नए अध्याय को लिख रहा है तो हमें एक और बात याद रखनी होगी। हमें छोटे व्यापारियों, small business का भी उतना ही ध्यान रखना होगा। हमें उन्हें ज्यादा बड़े प्लेटफॉर्म देने होंगे, Grow करने के लिए ज्यादा बेहतर मौके देने होंगे। हमें उन्हें देश-विदेश में नए-नए बाजारों से जोड़ने में मदद करनी होगी। हमें उन्हें ज्यादा से ज्यादा टेक्नोलॉजी से जोड़ना होगा। और यहीं पर इसी बात पर ISB जैसे संस्थान, ISB के Students की भूमिका बहुत अहम हो जाती है। एक future business leader के तौर पर आप सभी को हर बिजनेस को और बड़ा और विस्तार देने करने के लिए आगे आना होगा, जिम्मेवारियाँ संभालनी होगी। और आप देखिएगा, आप छोटे business को grow करने में मदद करेंगे तो आप लाखों entrepreneurs के निर्माण में मदद करेंगे, करोड़ों परिवारों की मदद करेंगे। भारत को future-ready बनाने के लिए हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि भारत आत्मनिर्भर बने। और इसमें आप भी बिजनेस प्रोफेशनल्स की बहुत बड़ी भूमिका है। और ये आपके लिए एक तरह से देश की सेवा का अहम उदाहरण होगा।

साथियों,

देश के लिए कुछ करने का, देश के लिए कुछ कर गुजरने का आपका जज्बा, देश को नई ऊँचाई पर ले जाएगा। मुझे ISB पर, ISB के Students पर, आप सभी नौजवानों पर बहुत भरोसा है, बहुत विश्वास है। आप एक purpose के साथ इस प्रतिष्ठित संस्थान से बाहर निकलें। आप अपने goals को राष्ट्र के संकल्पों के साथ जोड़िए। हम जो कुछ भी करेंगे, उससे एक राष्ट्र के रूप में सशक्त होंगे, इस कमिटमेंट के साथ जब आप कोई भी प्रयास करेंगे तो सफलता आपके कदम पर होगी। एक बार फिर आज जिन-जिन साथियों को मुझे मैडल देने का अवसर मिला है और भी जो लोगों ने सिद्धियाँ प्राप्त की हैं उनको उनके परिवारजनों को अनेक-अनेक शुभकामनाएँ देता हूँ। और ISB भरत की विकास यात्रा में ऐसी पीढ़ियों को तैयार करता रहे, ऐसी पीढ़ियां राष्ट्र के लिए समर्पित भाव से कार्य करती रहे, इसी एक अपेक्षा के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद !