আয়ুষ্মান ভারত ডিজিটাল মিশন সহজে ব্যবহারযোগ্য এমন একটি প্ল্যাটফর্ম তৈরি করবে, যেটির ডিজিটাল স্বাস্থ্য ইকোসিস্টেমের মধ্যে অন্যান্য স্বাস্থ্য সম্পর্কিত পোর্টালগুলির সঙ্গে সমন্বয় থাকবে
জন ধন – আধার ও মোবাইল – এই ত্রিমুখী ব্যবস্থার উল্লেখ করে প্রধানমন্ত্রী বলেন, বিশ্বের কোথাও এত বড় মাপের পারস্পরিক সম্পর্ক যুক্ত পরিকাঠামো নেই
রেশন থেকে পুষ্টি সর্বত্রই ডিজিটাল পরিকাঠামো দ্রুত ও স্বচ্ছতার সঙ্গে সাধারণ মানুষের কাছে পরিষেবা পৌঁছে দিচ্ছে
টেলিমেডিসিন ক্ষেত্রেও অভাবনীয় অগ্রগতি হয়েছে
আয়ুষ্মান ভারত – পিএমজেএওয়াই দরিদ্র মানুষের জীবনে একটি বড় সমস্যার সমাধান করেছে। এখনও পর্যন্ত ২ কোটিরও বেশি দেশবাসী, যাঁদের অর্ধেক মহিলা এই কর্মসূচির সুবিধা নিয়েছেন
আয়ুষ্মান ভারত – ডিজিটাল মিশন সারা দেশে হাসপাতালগুলির সঙ্গে ডিজিটাল স্বাস্থ্য পরিষেবার ক্ষেত্রে পারস্পরিক যোগসূত্র গড়ে তুলবে
সরকারি স্বাস্থ্য পরিষেবা দেশের বর্তমান ও ভবিষ্যতের লক্ষ্যে বড় বিনিয়োগ
আমাদের স্বাস্থ্য পরিকাঠামো যখন সংহত ও শক্তিশালী হবে, তা পর্যটন ক্ষেত্রের বিকাশ ঘটাবে

প্রধানমন্ত্রী শ্রী নরেন্দ্র মোদী আজ ভিডিও কনফারেন্সের মাধ্যমে আয়ুষ্মান ভারত ডিজিটাল মিশনের সূচনা করেন। 

এই উপলক্ষে প্রধানমন্ত্রী বলেন, স্বাস্থ্য পরিষেবা পরিকাঠামোকে মজবুত করে তোলার লক্ষ্যে গত সাত বছর ধরে যে অভিযান চলছে, আজ তা এক নতুন পর্যায়ে প্রবেশ করছে। “আজ আমরা এমন এক মিশনের সূচনা করছি, যার ফলে ভারতের স্বাস্থ্য ক্ষেত্রে আমূল পরিবর্তন নিয়ে আসার সম্ভবনা রয়েছে” বলে প্রধানমন্ত্রী অভিমত প্রকাশ করেন।

প্রধানমন্ত্রী বলেন, ১৩০ কোটি আধার, ১১৮ কোটি মোবাইল গ্রাহক, প্রায় ৮০ কোটি ইন্টারনেট ব্যবহারকারী এবং প্রায় ৪৩ কোটি জন ধন ব্যাঙ্ক অ্যাকাউন্ট নিয়ে যে পরিকাঠামো গড়ে উঠেছে, তা বিশ্বের আর কোথাও নেই। বিশ্বে এত বড় মাপের ডিজিটাল পরিকাঠামো সাধারণ মানুষের কাছে রেশন থেকে পুষ্টি সব পরিষেবা দ্রুত ও স্বচ্ছতার সঙ্গে পৌঁছে দিচ্ছে। “প্রশাসনিক ক্ষেত্রের সংস্কারে যেভাবে আজ প্রযুক্তির প্রয়োগ হচ্ছে, তা অভাবনীয়” বলে প্রধানমন্তী মন্তব্য করেন।

আরোগ্য সেতু অ্যাপ করোনা সংক্রমণ প্রতিরোধে গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা নিয়েছে বলে উল্লেখ করে প্রধানমন্ত্রী নিঃশুল্ক টিকাকরণ অভিযানের আওতায় রেকর্ড প্রায় ৯০ কোটি টিকার ডোজ দিয়ে যে সাফল্য অর্জিত হয়েছে, তার পেছনে কো-উইন ব্যবস্থার ভূমিকার প্রশংসা করেন।

স্বাস্থ্য ক্ষেত্রে প্রযুক্তির ব্যবহার সম্পর্কে বলতে গিয়ে প্রধানমন্ত্রী জানান, করোনার সময় টেলিমেডিসিন ক্ষেত্রে অভাবনীয় অগ্রগতি হয়েছে। তিনি জানান, ই-সঞ্জিবনী ব্যবস্থার মাধ্যমে এখনও পর্যন্ত প্রায় ১২৫ কোটি পরামর্শ দেওয়া হয়েছে। প্রকৃত পক্ষে ই-সঞ্জিবনী ব্যবস্থার মাধ্যমে দেশের প্রত্যন্ত অঞ্চলের হাজার হাজার মানুষ বাড়িতে থেকেই শহরগুলির বড় হাসপাতালের চিকিৎসকদের কাছ থেকে পরামর্শ নিয়েছেন। 

প্রধানমন্ত্রী বলেন, আয়ুষ্মান ভারত – প্রধানমন্ত্রী জন আরোগ্য যোজনা (পিএমজেএওয়াই) দরিদ্র মানুষের জীবনে একটি বড় সমস্যার সমাধান করেছে। এখনও পর্যন্ত দেশের ২ কোটিরও বেশি মানুষ এই কর্মসূচির সুবিধা নিয়েছেন। সুবিধাপ্রাপকদের অর্ধেকই মহিলা বলেও তিনি জানান। প্রধানমন্ত্রী জোর দিয়ে বলেন, অসুস্থতা এমন একটি বিষয়, যা পরিবারকে নিদারুণ দারিদ্র্যের দিকে ঠেলে দেয়। আর এর সর্বাধিক প্রভাব পড়ে পরিবারের মহিলাদের ওপর। আসলে মহিলারা সর্বদাই নিজেদের স্বাস্থ্যের বিষয়টিকে অবহেলা করেন। শ্রী মোদী আরও বলেন, তিনি ব্যক্তিগতভাবে আয়ুষ্মান ভারত কর্মসূচির কয়েকজন সুফলভোগীর সঙ্গে কথা বলেছেন এবং তাঁদের মুখ থেকে এই কর্মসূচির সুযোগ-সুবিধা সম্পর্কে জেনেছেন। তিনি বলেন, স্বাস্থ্য পরিষেবা ক্ষেত্রে এ ধরনের উদ্যোগ দেশের বর্তমান ও ভবিষ্যতের নিরিখে বড় বিনিয়োগ। 

শ্রী মোদী আরও বলেন, আয়ুষ্মান ভারত – ডিজিটাল ভারত এখন থেকে দেশের হাসপাতালগুলির ডিজিটাল স্বাস্থ্য পরিষেবার সঙ্গে যোগসূত্র গড়ে তুলবে। এমনকি, এই ব্যবস্থার ফলে হাসপাতালে ভর্তি হওয়া ও চিকিৎসা পরিষেবা ব্যবস্থা আরও সহজ হয়ে উঠবে। পক্ষান্তরে, সাধারণ মানুষ লাভবান হবেন। ডিজিটাল স্বাস্থ্য মিশনের মাধ্যমে প্রত্যেককে ডিজিটাল পরিচয়পত্র দেওয়া হবে এবং তাঁদের স্বাস্থ্য সম্পর্কিত যাবতীয় তথ্য ডিজিটাল পদ্ধতিতে সুরক্ষিত থাকবে বলেও প্রধানমন্ত্রী জানান। 

ভারতে একটি সার্বিক এবং সুসংহত স্বাস্থ্য মডেল গড়ে তোলার কাজ চলছে বলে জানিয়ে প্রধানমন্ত্রী বলেন, এই ব্যবস্থার মাধ্যমে রোগ প্রতিকারের উপর গুরুত্ব দেওয়ার পাশাপাশি, অসুস্থতার ক্ষেত্রে সহজে ও সুলভে চিকিৎসা পরিষেবা পৌঁছে দেওয়া যাবে। স্বাস্থ্য-শিক্ষা ক্ষেত্রে অভাবনীয় সংস্কারের প্রসঙ্গ উল্লেখ করে প্রধানমন্ত্রী বলেন, গত ৭-৮ বছরের তুলনায় এখন চিকিৎসক ও আধা-চিকিৎসকদের সংখ্যা ক্রমশ বাড়ছে। দেশে এইমস্ চিকিৎসা প্রতিষ্ঠান এবং অন্যান্য আধুনিক স্বাস্থ্য প্রতিষ্ঠানগুলির মধ্যে সুসংবদ্ধ নেটওয়ার্ক গড়ে তোলা হচ্ছে। এমনকি, প্রতি তিনটি লোকসভা কেন্দ্রে অন্ততপক্ষে একটি করে মেডিকেল কলেজ স্থাপনের কাজ চলছে। গ্রামে স্বাস্থ্য পরিষেবা সম্পর্কে প্রধানমন্ত্রী জানান, প্রাথমিক স্বাস্থ্য কেন্দ্র ও রোগী কল্যাণ কেন্দ্রগুলির পরিষেবার মান বাড়ানো হচ্ছে। সারা দেশে গ্রামগুলিতে এ ধরনের ৮০ হাজারেরও বেশি কেন্দ্র চালু রয়েছে বলেও প্রধানমন্ত্রী জানান। 

বিশ্ব পর্যটন দিবসে ডিজিটাল স্বাস্থ্য মিশন কর্মসূচির সূচনা হচ্ছে বলে উল্লেখ করে প্রধানমন্ত্রী বলেন, পর্যটনের সঙ্গে স্বাস্থ্য ক্ষেত্রের গভীর সম্পর্ক রয়েছে। “তাই, আমাদের স্বাস্থ্য পরিকাঠামো সংহত ও শক্তিশালী হয়ে উঠলে, তা পক্ষান্তরে পর্যটন ক্ষেত্রের বিকাশেও সহায়ক হবে” বলে শ্রী মোদী অভিমত প্রকাশ করেন। 

 

সম্পূর্ণ ভাষণ পড়তে এখানে ক্লিক করুন

Explore More
শ্রী রাম জন্মভূমি মন্দিরের ধ্বজারোহণ উৎসবে প্রধানমন্ত্রীর বক্তব্যের বাংলা অনুবাদ

জনপ্রিয় ভাষণ

শ্রী রাম জন্মভূমি মন্দিরের ধ্বজারোহণ উৎসবে প্রধানমন্ত্রীর বক্তব্যের বাংলা অনুবাদ
India’s AI moment: Sarvam turns unicorn at $1.5 billion valuation

Media Coverage

India’s AI moment: Sarvam turns unicorn at $1.5 billion valuation
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Today, the world does not suffer from a shortage of resources; it suffers from a shortage of trust: PM Modi at G7 Summit in Evian, France
June 16, 2026

राष्ट्रपति मैक्रों,
Your Excellencies,

नमस्कार!

G-7 समिट में हमारे गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए मैं राष्ट्रपति मैक्रों का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।

Friends,

आज का विश्व पहले से कहीं अधिक inter-connected और inter-dependent है। किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि केवल उसकी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती। Mobility, data, capital, technology, ये सभी हमें आपस में जोड़ते हैं।

ऐसे समय में Partnerships का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। लेकिन साझेदारियाँ तभी सफल होती हैं जब उनके केंद्र में विश्वास हो। आज सबसे महत्वपूर्ण Strategic Asset कोई mineral, technology या market नहीं, बल्कि आपसी विश्वास है।

विश्वास कि टेक्नॉलजी और supply chains को हथियार के रूप में नहीं, global good के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। विश्वास कि विकास के अवसर कुछ देशों तक सीमित नहीं रहेंगे। विश्वास कि वैश्विक संस्थान सभी देशों की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होंगे।

Friends,

पिछली सदी में मानवता को दो विश्व युद्धों से गुज़रना पड़ा। अनेक बलिदानों के बाद विश्व समुदाय ने शांति, स्थिरता और समृद्धि की ओर बढ़ने के लिए व्यवस्थाएं विकसित की। इन व्यवस्थाओं का आधार भी trust ही था।

किन्तु अनेक दशकों से, अनेक पीढ़ियों के योगदान से बनाए गए विश्वास को आज चोट पहुँच रही है। कोविड ने हमें आईना दिखाया कि trust और solidarity के दावे कितने खोखले थे।

Today the world does not suffer from a shortage of resources; it suffers from a shortage of trust. And the future of our partnerships depends on building this trust.

अमेरिका के राष्ट्रपति रोनल्ड रेगन ने कहा था: Trust but Verify. यह आज के समय में भी प्रासंगिक है। भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम नए युग के अनुरूप trusted rules based order का निर्माण करें।

Friends,

भारत ने सदैव विश्व को एक परिवार के रूप में देखा है। हमारे सभी प्रयास “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” यानि, welfare and happiness for all के मूल सिद्धांत पर आधारित रहे हैं।

भारत का अनुभव दिखाता है कि विकास सबसे अधिक प्रभावी तब होता है जब वह लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ा हो। यही सिद्धांत हमारी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का भी आधार है। इसी सोच के साथ भारत ने International Solar Alliance, Coalition for Disaster Resilient Infrastructure, ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस, Mission LiFE, और “एक पेड़ माँ के नाम” जैसी वैश्विक पहलों को आगे बढ़ाया है।

संकट के समय भारत ने First Responder के रूप में सभी देशों की सहायता करना अपना दायित्व समझा है। कोविड महामारी के दौरान भारत ने डेढ़ सौ से अधिक देशों को दवाइयाँ और vaccines उपलब्ध कराईं।

श्रीलंका में cyclone हो, अफगानिस्तान में भूकंप हो, मोज़ाम्बिक में floods हों, या क्यूबा और जमैका में hurricane, भारत ने सदैव "Humanity First" के सिद्धांत पर कार्य किया है। हमारी विकास साझेदारियाँ भी इसी भावना को प्रतिबिंबित करती हैं। हमारे प्रयास पार्टनर देशों में capacity building और कौशल विकास पर केन्द्रित रहे हैं।

भारत का मानना है: The true test of partnership is not what we build for others, but what we enable others to build for themselves.

Friends,

आज ग्लोबल साउथ की विश्व समुदाय से बहुत उम्मीदें हैं। किन्तु उनकी अपेक्षा सहारे की नहीं, साथ की है। वे वैश्विक विकास के लाभार्थी नहीं, उसके भागीदार बनना चाहते हैं।

हमें donor–recipient की सोच से आगे बढ़कर, equal पार्टनर्स के रूप में काम करना होगा। उनके पास-पास नहीं, साथ-साथ चलना होगा। साझेदारी को dependency के बजाय, dignity से जोड़ना होगा। इन प्रयासों से हम भावी पीढ़ियों के सतत विकास की मजबूत नींव रख सकेंगे।

Friends,

अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ और वैश्विक एकजुटता तभी सार्थक बन सकती हैं, जब हम साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान करें। भारत का दृढ विश्वास है कि विश्व के विभिन्न हिस्सों में चल रहे तनावों और युद्धों का स्थायी समाधान dialogue, diplomacy और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मार्ग से ही संभव है।

हम west asia में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं। इस संघर्ष से west asia में हमारे मित्र देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है। होर्मुज़ स्ट्रेट में maritime ट्रेड में आई बाधा के कारण पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा। भारत के कई civilians को जान गंवानी पड़ी। Global maritime ट्रेड के माध्यम से सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा हमारा दायित्व है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें, और Seafarers बिना भय के अपना कार्य कर सकें।

Friends,

भारत इन विषयों पर सभी पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

बहुत-बहुत धन्यवाद।