“This is indeed a Mahakumbh in its truest form creating an unprecedented energy and vibe”
“Any Indian visiting the Start-up Mahakumbh will witness the unicorns and decacorns of the future”
“Startup has become a social culture and no one can stop a social culture”
“More than 45 percent start-ups in the country are women-led”
“I believe that Indian solutions for global applications will become a helping hand for many nations in the world”

প্রধানমন্ত্রী শ্রী নরেন্দ্র মোদী আজ নতুন দিল্লির ভারত মন্ডপমে স্টার্ট-আপ মহাকুম্ভের উদ্বোধন করেছেন। এই উপলক্ষে আয়োজিত একটি প্রদর্শনীও ঘুরে দেখেন তিনি। 

সমাবেশে প্রধানমন্ত্রী স্টার্ট-আপ মহাকুম্ভের গুরুত্ব এবং ২০৪৭ সালের মধ্যে উন্নত ভারত গঠনের দিক-নির্দেশিকা তুলে ধরেন। প্রধানমন্ত্রী বলেন, গত কয়েক দশক ধরে ভারত তথ্য প্রযুক্তি ও সফটওয়্যার ক্ষেত্রে উল্লেখযোগ্য সাফল্য অর্জন করেছে। উদ্ভাবন ও স্টার্ট আপের এক সংস্কৃতির সূচনা হয়েছে। সম্মেলনে বিনিয়োগকারী, ইনকিউবেটর, শিক্ষাবিদ, গবেষক, শিল্পমহলের সদস্য এবং বর্তমান ও ভবিষ্যৎ উদ্যোক্তাদের উপস্থিতির উল্লেখ করে তিনি বলেন, প্রকৃত অর্থেই এ এক মহাকুম্ভ, যা থেকে অভুতপূর্ব শক্তি ও স্পন্দন বিচ্ছুরিত হচ্ছে। প্রদর্শনী ঘুরে দেখার অভিজ্ঞতা ভাগ করে নিয়ে প্রধানমন্ত্রী বলেন, এই স্টার্ট আপ মহাকুম্ভে যাঁরা এসেছেন, তাঁরা ভবিষ্যতের ইউনিকর্ন ও ডেকাকর্নগুলির সাক্ষী থাকছেন।

 

সঠিক নীতির সুবাদে দেশে স্টার্ট আপ ব্যবস্থাপনার দ্রুত বিকাশ হয়েছে বলে উল্লেখ করে প্রধানমন্ত্রী বলেন, প্রথম দিকে সমাজে স্টার্ট আপ সম্পর্কে একধরনের অনিচ্ছা ও উদাসীনতা ছিল। সময়ের সঙ্গে সঙ্গে উদ্ভাবনী ভাবনা-চিন্তা, স্টার্ট আপ ইন্ডিয়ার মাধ্যমে এক সুযোগ্য মঞ্চ পেয়েছে। এই ব্যবস্থাপনাকে আরও শক্তিশালী করতে তিনি উদ্ভাবনী চিন্তা-ভাবনার সঙ্গে অর্থের যোগানের উৎসগুলিকে সংযুক্ত করার পরামর্শ দেন। শিক্ষা প্রতিষ্ঠানগুলিতে ইনকিউবেটর গড়ে তোলার ফলে টিয়ার ২ আর টিয়ার ৩ শহরগুলির যুব সম্প্রদায় উপকৃত হয়েছে বলে মন্তব্য করেন তিনি। প্রধানমন্ত্রী বলেন, স্টার্ট আপ এখন এক সামাজিক সংস্কৃতিতে পরিণত হয়েছে। কারোর সাধ্য নেই একে থামায়।

প্রধানমন্ত্রী বলেন, এই স্টার্ট আপ বিপ্লবে নেতৃত্ব দিচ্ছে ছোট শহরগুলি। কৃষি, বস্ত্র, ওষুধপত্র, পরিবহণ, মহাকাশ, যোগ ব্যায়াম, আয়ুর্বেদ সহ বিভিন্ন ধরনের ক্ষেত্রে স্টার্ট আপগুলি গড়ে উঠেছে। মহাকাশ ক্ষেত্রের স্টার্ট আপগুলি সম্পর্কে প্রধানমন্ত্রী বলেন, মহাকাশযানের উৎক্ষেপণ থেকে শুরু করে মহাকাশের ৫০টিরও বেশি ক্ষেত্রে ভারতীয় স্টার্ট আপগুলি কাজ করছে। 

 

স্টার্ট আপগুলির মানসিকতার পরিবর্তনের উল্লেখ করে প্রধানমন্ত্রী বলেন, আগে মনে করা হতো কোনো ব্যবসা শুরু করতে গেলে অনেক টাকা লাগে, এখন এই ধারণা বদলেছে। দেশের যুব সমাজকে তিনি কর্মপ্রার্থী হওয়ার বদলে কর্মদাতা হওয়া ওঠার আহ্বান জানান। 

প্রধানমন্ত্রী বলেন, ভারত আজ বিশ্বের তৃতীয় বৃহত্তম স্টার্ট আপ পরিমন্ডলের সৃষ্টি করেছে। এখানে ১ লক্ষ ২৫ হাজার স্টার্ট আপ রয়েছে, যার সঙ্গে সরাসরি যুক্ত ১২ লক্ষ তরুণ তরুণী। তিনি উদ্যোক্তাদের দ্রুত পেটেন্ট নেওয়ার পরামর্শ দেন। তিনি বলেন, জেম পোর্টালের মাধ্যমে ছোট ব্যবসা ও স্টার্ট আপগুলিকে ২০ হাজার কোটি টাকার বরাত দেওয়া হয়েছে। 

 

স্টার্ট আপগুলির উপর ডিজিটাল ইন্ডিয়া কর্মসূচির প্রভাব উল্লেখ করে প্রধানমন্ত্রী বলেন, কলেজগুলি এই নিয়ে সমীক্ষা করতে পারে। অর্থ-প্রযুক্তি সংক্রান্ত স্টার্ট আপগুলি উদ্ভাবনী পণ্য ও পরিষেবার মাধ্যমে দেশের ডিজিটাল পরিষেবার প্রসার ঘটিয়েছে। এক্ষেত্রে ইউপিআই ব্যাপকভাবে সহায়তা করেছে। তিনি জানান, জি২০ শীর্ষ সম্মেলনের সময়ে ভারত মন্ডপমের একটি শিবিরে ইউপিআই-এর কাজকর্ম বোঝানো এবং তার পরীক্ষামূলক প্রয়োগ দেখানো হচ্ছিল। বিশ্ব নেতারা এবং শিল্পমহলের কর্তা ব্যক্তিরা প্রভূত আগ্রহ নিয়ে সেই শিবিরের সামনে ভীড় করেছিলেন। প্রধানমন্ত্রী বলেন, ইউপিআই অর্থনৈতিক অন্তর্ভুক্তিকরণকে গতি দিয়েছে, গ্রামীণ ও শহুরে জীবনের মধ্যেকার ফারাক কমিয়েছে এবং প্রযুক্তির গণতন্ত্রীকরণ ঘটিয়েছে। দেশের ৪৫ শতাংশেরও বেশি স্টার্ট আপের নেতৃত্বে মহিলারা থাকায় প্রধানমন্ত্রী সন্তোষ প্রকাশ করেন। 

প্রধানমন্ত্রী বলেন, উদ্ভাবনের সংস্কৃতি গড়ে ওঠা শুধু বিকশিত ভারতের জন্যই নয়, সামগ্রিক মানবতার স্বার্থেও জরুরি। স্টার্ট আপ ২০-র আওতায় ভারত বিশ্বজুড়ে থাকা স্টার্ট আপগুলির জন্য একটি প্ল্যাটফর্ম গড়ে তোলার প্রয়াস হাতে নিয়েছে বলে জানিয়ে স্টার্ট আপগুলিকে বিকাশের চালিকাশক্তি বলে উল্লেখ করেন তিনি। কৃত্রিম মেধার ক্ষেত্রে ভারতের মুন্সিয়ানার কথাও তুলে ধরেন প্রধানমন্ত্রী। 

 

প্রধানমন্ত্রী বলেন, কৃত্রিম মেধার আবির্ভাবে তরুণ উদ্ভাবক ও বিশ্বজোড়া বিনিয়োগকারীদের সামনে অপরিসীম সম্ভাবনার সৃষ্টি হয়েছে। এই প্রসঙ্গে তিনি ন্যাশনাল কোয়ান্টাম মিশন, ইন্ডিয়া এআই মিশন এবং সেমি কনডাকটর মিশনের উল্লেখ করেন। কিছুদিন আগে মার্কিন সেনেটে কৃত্রিম মেধা নিয়ে তিনি যে বক্তব্য রেখেছেন, তার উল্লেখ করে প্রধানমন্ত্রী বলেন, ভারত এক্ষেত্রে বিশ্বকে নেতৃত্বদানের ভূমিকায় থাকবে। 

প্রধানমন্ত্রী বলেন, হ্যাকাথন প্রভৃতির মাধ্যমে সারা বিশ্ব এখন ভারতের যুব সমাজের কাছ থেকে শিক্ষা গ্রহণ করতে চাইছে। ভারতীয় পরিবেশে পরীক্ষিত সমাধান সারা বিশ্বে গ্রহণযোগ্য বলে মনে করা হয়। সূর্যোদয়ের এই ক্ষেত্রকে উৎসাহ দিতে ন্যাশনাল রিসার্চ ফাউন্ডেশন এবং গবেষণা ও পরিকল্পনা বাবদ ১ লক্ষ কোটি টাকার একটি তহবিল গড়ে তোলা হয়েছে বলে তিনি জানান। 

 

প্রধানমন্ত্রী স্টার্ট আপগুলিকে সমাজের উন্নয়নে কাজ করতে এবং বিভিন্ন প্রতিষ্ঠানকে স্টার্ট আপ ক্ষেত্রের উন্নয়নে এগিয়ে আসার আহ্বান জানান। বিভিন্ন ইনকিউবেশন সেন্টার, স্কুল, কলেজে ঘুরে তাদের অভিজ্ঞতা ও অন্তর্দৃষ্টি ভাগ করে নিতে শিল্পমহলের কর্তা ব্যক্তিদের অনুরোধ জানান প্রধানমন্ত্রী। বিভিন্ন সরকারি সমস্যার সমাধানে হ্যাকাথনের মাধ্যমে দেশের যুব সমাজকে কীভাবে যুক্ত করা হয়েছে তার বিবরণ তিনি। 

প্রধানমন্ত্রী বলেন, দেশের যুব সমাজের অবদানের জন্যই ভারত একাদশতম স্থান থেকে উঠে এসে আজ বিশ্বের পঞ্চম বৃহত্তম অর্থনীতিতে পরিণত হয়েছে। তাঁর সরকারের তৃতীয় মেয়াদে ভারতীয় অর্থনীতিকে বিশ্বের প্রথম তিনটি স্থানের মধ্যে নিয়ে যেতে স্টার্ট আপগুলির গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা রয়েছে বলে মন্তব্য করেন তিনি। যুব সমাজকে ভবিষ্যতের জন্য আন্তরিক শুভেচ্ছা জানান প্রধানমন্ত্রী। 

 

অনুষ্ঠানে কেন্দ্রীয় শিল্প বাণিজ্য মন্ত্রী শ্রী পীযূষ গোয়েল, কেন্দ্রীয় প্রতিমন্ত্রী শ্রীমতী অনুপ্রিয়া প্যাটেল প্রমুখ উপস্থিত ছিলেন।

 

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Text of PM’s remarks during inauguration of Swaminarayan Hindu Temple in Paris
September 06, 2026

पूज्य महंत स्वामी, फ्रांस सरकार के सम्मानित प्रतिनिधिगण, उपस्थित अतिथिगण, इंडियन कम्युनिटी के मेरे साथी, देश दुनिया से जुड़े सभी हरि भक्त, देवियों और सज्जनों, जय स्वामीनारायण!

आज फ्रांस की राजधानी पेरिस में भव्य स्वामीनारायण मंदिर का लोकार्पण हो रहा है। यह लोकार्पण भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है। पूज्य संत जनों और सनातन परंपरा के श्रेष्ठ जनों के आशीर्वाद के साथ आज इस लोकार्पण का मंच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव का मंच बन गया है। भगवान स्वामीनारायण की कृपा और हमारे संतों का स्नेह, संतों का आशीर्वाद, मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे पुण्य अवसरों से जुड़ने का अवसर हमेशा मिलता रहता है। आज भी मैं भले ही पेरिस में आप सबके बीच उपस्थित नहीं हूं, लेकिन मन से और हृदय से, मैं स्वयं को आपके बीच ही अनुभव कर रहा हूं।

साथियों,

आज इस अवसर पर मैं परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं। प्राचीन काल में भारत का जो सांस्कृतिक आध्यात्मिक वैभव था, उन्होंने उसके पुनर्जागरण का एक अभियान शुरू किया था। आज उसका प्रकाश यूरोप समेत पूरी दुनिया में फैल रहा है। 2024 में अबू धाबी में भव्य मंदिर का लोकार्पण हुआ था। आज वहां हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं और अब यहां पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण सृजन की यह निरंतरता, यह संतों की संकल्प शक्ति का ही प्रमाण है। मैं पुनीत कार्य के लिए पूज्य महंत स्वामी का आभार प्रकट करता हूं, मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं BAPS स्वामीनारायण संस्था को और करोड़ों हरि भक्तों को इस अवसर पर हृदय की गहराई से बधाई देता हूं।

साथियों,

BAPS के माध्यम से जब अलग-अलग देश में मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो वहां भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी साथ-साथ ही जाते हैं और भारत का विचार कहता है ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ अर्थात हमारे मन समान हो, हमारे हृदय साथ जुड़े। इसलिए आज जब फ्रांस में इतना भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, यह फ्रांस की विविधता को तो समृद्ध करेगा ही, इससे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों को भी ऊर्जा मिलेगी।

साथियों,

बीते वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। मेरे मित्र, प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश एक Special Global Strategic Partnership बना रहे हैं। Technology, AI और Defence से लेकर Space और Climate Action तक हम एक नई गति और नई ऊर्जा के साथ मिलकर के आगे बढ़ रहे हैं। हम 2026 को India-France Year of Innovation के रूप में भी सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत-फ्रांस की ये Strategic Partnership इसलिए भी खास है, क्योंकि ये हमारे पुराने सांस्कृतिक-राजनैतिक सम्बन्धों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। इतिहास गवाह है, फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी मन-मंदिर में जीवित है। भाषा से जुड़े विषयों में रुचि रखने वाले लोग यह भी जानते हैं कि फ्रेंच स्कॉलर्स ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में कितनी अहम भूमिका निभाई है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमाँ रोलाँ की की लेखनी हमारी सोसाइटीज़ को और करीब लाई है। पेरिस से पुडुचेरी के अरबिंदो आश्रम तक 'The mother' की spiritual journey, उसने कितने ही भारतीय और फ्रेंच साधकों को inspire किया है।

साथियों,

दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी भी फ्रांस आए थे। इस्कॉन के जरिए भारत फ्रांस के बीच आध्यात्मिक सम्बन्धों का नया अध्याय उन्होंने शुरू किया था। आज योग भी भारत-फ्रांस के people to people कनेक्ट का एक माध्यम बन चुका है। 'इंटरनेशनल योगा डे' पर एफिल टॉवर के सामने से आने वाली तस्वीरें फ्रांस में योग की लोकप्रियता का उदाहरण बनती हैं और अब BAPS के इस भव्य मंदिर के जरिए, हमारे उन सांस्कृतिक सम्बन्धों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।

साथियों,

इन दिनों, भारत फ्रांस Joint Ventures की संभावनाओं पर बातें होती हैं। स्वामीनारायण मंदिर ने इस संभावना में भी एक नया आयाम जोड़ा है। यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' है और 'बिल्ट इन फ्रांस' है। इसके काफी पत्थरों को भारत में तराशा गया है। भारत की प्राचीन प्रतिभा यहाँ फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग से आकर जुड़ चुकी है। पेरिस में इस भव्य मंदिर ने आकार लिया है। इसलिए, मैं आशा करता हूँ, यह मंदिर सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संभावनाओं का भी प्रतीक बनकर उभरेगा।

साथियों,

स्वामीनारायण मंदिर हमेशा से भक्ति के साथ-साथ सेवा का माध्यम भी रहे हैं। मुझे बताया गया है, यह मंदिर भी सेवा प्रकल्पों का वैसा ही केंद्र बनेगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ से भारतीय संस्कृति के जो स्वर निकलेंगे, उनका लाभ पूरे यूरोप में लोगों को मिलेगा। भविष्य में मुझे जब भी समय मिलेगा, मैं इस मंदिर में दर्शन करने का प्रयास अवश्य करूंगा। इन्हीं शब्दों के साथ, एक बार फिर आज के इस लोकार्पण समारोह में सम्मिलित सभी अतिथिगणों को, सभी परिवारों को, सभी हरि भक्तों को और पूरी Indian Diaspora को मेरी ओर से इस शुभारंभ पर्व की ढेरों शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

मर्सी बोकू!

जय स्वामीनारायण!