The youth of Bihar has the ability to transform the state: PM #ParivartanRally
Bihar has decided to fight against those who ruled and ruined the state: PM #ParivartanRally
India will prosper only when Bihar develops: PM #ParivartanRally
If Bihar elects NDA Govt, our first priority will be to provide 24/7 electricity all villages: PM #ParivartanRally
We have come up with Mudra bank, Jan Dhan Yojana, social security schemes for the welfare of people: PM #ParivartanRally
Elect a stable NDA Govt with 2/3rd majority for development of Bihar: PM #ParivartanRally

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय

मंच पर विराजमान हमारे वरिष्ठ नेता डॉ. सी पी ठाकुर जी, औरंगाबाद के सांसद श्रीमान सुशील जी, रालोसपा के सह-प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण जी, एवं औरंगाबाद से विधान पार्षद राजेंद्र कुमार सिंह, भाजपा, औरंगाबाद के अध्यक्ष पुरुषोत्तम जी, लोजपा के श्री अनूप ठाकुर, रालोसपा के श्री अशोक मेहता, हम पार्टी के श्री अजय सिंह, और इस चुनाव में औरंगाबाद से भाजपा के उम्मीदवार श्री रामाधार सिंह, नवीननगर के उम्मीदवार गोपाल नारायण सिंह, कुटुम्बा से हम पार्टी के उम्मीदवार संतोष कुमार सुमन जी, ओबारा से लोजपा के उम्मीदवार चंद्रभूषण वर्मा जी, भाजपा के उम्मीदवार श्री मनोज शर्मा जी, रविगंज से लोजपा के उम्मीदवार श्री प्रमोद कुमार सिंह, गुरुवा से भाजपा के उम्मीदवार राजीव डांगी जी, शेरघाटी से हम पार्टी के उम्मीदवार श्री मुकेश कुमार; मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ महानुभाव और विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे भाईयों और बहनों

मुझे औरंगाबाद आने का ये पहला सौभाग्य मिला है और इस ऐसी चमचमाती धूप में आप लोगों ने इतना ताप होने के बावजूद जो मुझे आशीर्वाद और प्यार दिया है, मैं आपको नमन करता हूँ। आपका आशीर्वाद ही मेरी सबसे बड़ी पूँजी है। मुझे दूर-दूर तक, जहाँ तक मेरी नज़र जाती है, लोग ही लोग नज़र आ रहे हैं। मैं नहीं मानता हूँ कि वहां तक मेरी आवाज़ पहुँच रही होगी जहाँ लोग खड़े हैं। चुनाव में रैलियां तो बहुत देखी हैं लेकिन यहाँ तो आंधी है। ये चुनाव 21वीं सदी में बिहार की जगह कहाँ होगी, न कि हिन्दुस्तान के नक़्शे पर बल्कि दुनिया के नक़्शे पर बिहार की जगह कहाँ होगी, इसके लिए यह चुनाव है।

कौन विधायक बने, न बने, किसकी सरकार बने, किसकी न बने, कौन पार्टी जीते, कौन न जीते, ये चुनाव इस बात के लिए नहीं है बल्कि इस बात के लिए है कि बिहार का भविष्य क्या होगा। ये चुनाव इस बात का है कि नौजवानों का भाग्य कौन बदलेगा, बिहार को विकास की नई ऊंचाईयों पर कौन ले जाएगा। इसलिए इस चुनाव में जब आप मतदान करें तो आप इस ‘महास्वार्थबंधन’ के इतिहास को पहले जान लें; ये लोग क्यों इकठ्ठा आए हैं। महास्वार्थबंधन बनाने वाले ये तीनों लोगों ने बिहार में कभी-न-कभी राज किया है। कांग्रेस ने 45 साल तक राज किया; लालू जी और नीतीश जी, बड़े भाई, छोटे भाई ने 25 साल राज किया और तीनों ने मिलाकर के 60 साल तक बिहार में राज किया। मुझे बताईये कि 60 साल कम समय है क्या? दुनिया में कुछ देश जो 30-40 साल पैदा हुआ, आज वे दुनिया में नंबर – 1 तक पहुँच गए और इन्होंने ने 60 साल सरकार चलाई लेकिन बिहार के नौजवान को रोजगार तक नहीं दे पाए।

बिहार ने दो-दो रेल मंत्री दिए। लालू जी और नीतीश जी, दोनों रेल मंत्री रहे अब मुझे बताईये कि अगर आपको कोलकाता जाना है तो टिकट मिलता है क्या? ट्रेन में जगह मिलती है क्या? जिन लोगों ने ऐसी सरकारें चलाई हो, ऐसे लोगों पर और भरोसा कर सकते हैं क्या? 16 को मतदान है। भारी संख्या में मतदान करें ताकि बिहार के भाग्य का रास्ता खुल जाए। आपका मिज़ाज ही परिवर्तन लाने वाला है इस बार बिहार में भाग्य बदलने का जिम्मा मेरे नौजवानों ने उठाया है। सारे बिहार का जवान एकजुट हो गया है कि अब बिहार को बर्बाद नहीं होने देना है।

आप मुझे बताईये कि ये जो सब लोग चुनाव लड़ रहे हैं, लालू जी हों, नीतीश जी हों, मैडम सोनिया जी हों, इन लोगों को अपने 60 वर्षों के काम का हिसाब देना चाहिए कि नहीं? बिहार में इन्होंने क्या सब काम किये, ये बताना चाहिए कि नहीं? लेकिन पूरा चुनाव देख लीजिये, अभी तक इन तीनों ने बिहार के लिए क्या किया, इस पर एक शब्द भी बोलते नहीं हैं। इनका एक ही काम है – मोदी को गाली देना। सुबह-सुबह डिक्शनरी खोल के बैठ जाएंगे कि आज मोदी को कौन सी नई गाली देंगे। अब तो डिक्शनरी भी खाली हो गई है और उन्होंने फैक्ट्री खोल कर रखी है, नई-नई गालियां बनाने की फैक्ट्री और उस फैक्ट्री से रोज माल लेकर निकलते हैं और दिन-रात मोदी को गालियां देते हैं। क्या ये चुनाव है? चुनाव में काम का हिसाब देना चाहिए कि नहीं? उनके पास कहने को कुछ बचा नहीं है। कोई भी सरकार जब चुनाव में जाती है तो उसका दायित्व बनता है कि वो जनता को अपने काम का हिसाब दे लेकिन ये अपना हिसाब नहीं दे रहे।

60 साल इन्होंने बर्बादी लाने का काम किया है। उद्योग-धंधे अगर नहीं आएंगे तो नौजवानों को रोजगार मिलेगा क्या? नौजवानों को रोजगार चाहिए और इनका पलायन बंद होना चाहिए। अभी कुछ दिन पहले मैं फ़रीदाबाद मेट्रो स्टेशन पर उद्घाटन के सिलसिले में गया था। मेट्रो में सफ़र के दौरान यात्री नमस्ते करने आते थे तो सभी यात्रियों से मैं उनके बारे में पूछता था और आपको जानकर आश्चर्य होगा कि मुझे जितने नौजवान मिले, उसमें एकाध कोई और हो तो हो, बाकि सारे नौजवान बिहार के थे। मैंने पूछा क्या कर रहे हो तो उन्होंने कहा कि नौकरी के लिए आया हूँ और किसी कारखाने में इंटरव्यू है तो वहीँ जा रहा हूँ। सारे लोग नौकरी की तलाश में थे और ज्यादातर नौजवान थे। वे मुझे कह रहे थे कि नौकरी के लिए आये तो हैं लेकिन चुनाव के समय जाने वाले हैं और इस सरकार को हटाने वाले हैं। पूरे देश में ये मिज़ाज है बिहारियों का।

अभी अमेरिका में भी मुझे बिहार के कुछ लोग मिले थे। उनसे मिलकर इतना गर्व हुआ कि मेरे देश के नागरिकों ने अमेरिका में आकर के ख़ुद को इतना आगे बढ़ाया है। ये सारे बिहार के थे। अगर बिहार के लोग अमेरिका और हिन्दुस्तान के किसी कोने में जाकर कमाल कर सकते हैं तो बिहार में क्यों नहीं कर पा रहे हैं। इसका कारण है कि बिहार में उन्हें अवसर नहीं मिल रहा है। बिहार की जवानी बिहार को बदलने के लिए दीवानी बन गई है और इसी के साथ बिहार को बर्बाद करने वालों की रवानगी भी तय हो गई है। आप मुझे बताएं कि बिहार के मुख्यमंत्री जी ने ये कहा था न कि वो हर घर में 24 घंटे बिजली पहुंचाएंगे? उन्होंने ये भी कहा था कि 2015 के चुनाव तक अगर हर घर बिजली नहीं पहुंचा पाया तो वोट मांगने नहीं आऊंगा; ऐसा कहा था? अब आप बताईये कि क्या हुआ? बिजली तो नहीं आई लेकिन वोट मांगने आये कि नहीं आये? धोखा किया न; वादे से मुकर गए न? क्या ऐसे लोगों पर भरोसा किया जा सकता है?

इसलिए मैं कहता हूँ कि अब बिहार ऐसी सरकार झेल नहीं सकता है जो बिहार को बर्बाद करने के लिए बने। मैं हैरान हूँ। हम जब जंगलराज को याद करते हैं तो लालू जी परेशान नहीं होते हैं लेकिन नीतीश जी परेशान हो जाते हैं। आपने ही तो लालू राज को जंगलराज कहा था और लालू जी के साथ बैठ गए। इसलिए अब आप जंगलराज बोलने से डरते हो और कोई अन्य बोले तो परेशान हो जाते हो। जंगलराज में कौन सा उद्योग चला – अपहरण का उद्योग। त्यौहार के समय लोग शाम में घर से बाहर निकलने से डरते थे; नई गाड़ी खरीदने के बाद डरते थे कि कहीं कोई उठा कर न ले जाए और अगर मांगने गए तो मार खाने का डर। अब आप बताएं कि बिहार को दुबारा उस स्थिति में लेकर जाना है क्या?

इसके आसार नजर आ रहे हैं। जनवरी से जुलाई तक बिहार में 4000 घटनाएं अपहरण की हुई हैं। अब आप मुझे बताईये कि क्या फिर से ये अपहरण के दिन आने देने हैं? कल रात की घटना लीजिये, एक पुलिस अफ़सर को गोलियों से भून दिया गया। उसका गुनाह सिर्फ़ इतना था कि वो कुछ लोगों को रोक कर पूछना चाहता था कि कौन हो और कहाँ जा रहे हो। सिर्फ़ इतनी बात पर उस पर गोलियां चलाई गई और वो भी पटना में, सरकार के सीने पर और एक पुलिस अफ़सर को। जहाँ एक पुलिस अफ़सर सुरक्षित नहीं है, वहां आम लोग सुरक्षित होंगे क्या? अभी तो उनके साथ बैठने का ये हाल है, चुनाव नतीजे आ गए और अगर आपने गलती कर दी तो सोचिए कि बिहार का क्या हाल होगा।

मैं आपसे कहने आया हूँ कि आप बिहार को बर्बाद होने से बचाईये। बिहार में वो ताकत है कि अगर बिहार आगे बढ़ गया तो सारा हिन्दुस्तान आगे बढ़ जाएगा लेकिन 60 साल तक बिहार की इस ताकत को दरकिनार किया गया। बिजली के क्षेत्र में हमने 24 घंटे बिजली देने का बीड़ा उठाया है। मैंने कहा है कि 2022 में जब भारत की आज़ादी के 75 साल होंगे, तब हम हिन्दुस्तान में 24 घंटे बिजली देने का काम पूरा कर देंगे। अकेले आपके औरंगाबाद जिले को बिजली के लिए 300 करोड़ रूपया देने का निर्णय कर लिया है। पूरे बिहार को 6000 करोड़ रूपया देने का निर्णय कर लिया है। जब मैं पूरे हिन्दुस्तान का अंदाज़ा लगा रहा था तो मैंने अफ़सरों को बुलाया और पूछा कि कितने गाँव हैं जहाँ बिजली नहीं है। उन्होंने हिसाब लगाया तो 18,000 गाँव ऐसे हैं जहाँ अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। फिर जब मैंने पूछा कि सबसे ज्यादा गाँव किस राज्य के हैं तो आपको ये जानकर हैरानी होगी कि बिहार के 4000 गाँव आज भी अँधेरे में हैं।

हमारी सरकार बनी तो सबसे पहले मेरा काम होगा – इन 4000 गांवों में बिजली पहुँचाना। ऐसा नहीं है कि पैसे नहीं हैं लेकिन उनके इरादे सही नहीं हैं। सरकार चलाना उनकी रुचि का विषय नहीं है और इसलिए वे 24 घंटे राजनीति करते रहते हैं। भूतकाल में पंचवर्षीय योजना के तहत भारत सरकार ने बिहार को बिजली के लिए करीब 8000 करोड़ रूपया देने का निर्णय किया लेकिन ये सरकार ऐसी थी कि उसमें से 1200-1300 करोड़ से ज्यादा ले नहीं पाई। अगर इनमें पैसे उठाकर काम करने की ताक़त नहीं है तो क्या ये आपका भला कर पाएंगे क्या? लेकिन अब बिहार के भाग्य को बदलने और जीवन में बदलाव लाने के उद्देश्य से मैं आपके पास आया हूँ।

आज मैं कोई भी हिसाब लगाता हूँ, जैसे सबसे ज्यादा शौचालय कहाँ बने हैं तो नाम आता है बिहार का। ये शौचालय अमीरों के घर में नहीं बने हैं बल्कि गरीबों के घर में बने हैं ताकि हमारी गरीब मां-बहनों को खुले में शौच के लिए न जाना पड़े। अब आप देखें कि ये गरीबों की बात करने वालों ने शौचालय क्यों नहीं बनाये? दिल्ली में हमारी सरकार बनाने के बाद हमने शौचालय बनाने का काम शुरू किया और पिछले एक साल में 95 लाख शौचालय बनाने का काम पूरा कर दिया है और आगे भी ये काम तेज़ गति से चल रहा है।

मुझे बताईये कि अमीरों का खाता होता है न लेकिन गरीब कभी बैंक में नहीं जा पता था। हमने जन-धन के माध्यम से ऐसा अभियान चलाया कि इस देश के हर गरीब परिवार का बैंक खाता खोल दिया गया और आज पहली बार गरीब को लगने लगा है कि वे साहूकारों के पास जाने की बजाय बैंक के पास जा सकते हैं। ब्याज के कारण मरने के बजाय वे सम्मान से जी सकते हैं।

हम मुद्रा योजना लेकर आए जिसके तहत जो छोटे-छोटे व्यवसाय करने वाले लोग हैं, दूध बेचते हैं, सब्ज़ी बेचते हैं, पशुपालन करते हैं, धोबी का काम करते हैं, नाई का काम करते हैं, कपड़े बेचते हैं, अख़बार बेचते हैं, ऐसे लोगों को पैसों की बहुत जरुरत पड़ती है; घर में कोई बीमार हो जाए या मेहमान आ जाएं तो भी औरों से पैसे मांगने पड़ते हैं; उन्हें पैसे उपलब्ध कराये गए। इन्हें बैंकों से पैसा नहीं मिल पाता है। मुद्रा योजना से अकेले बिहार में 3 लाख लोगों को पैसे देने का काम पूरा कर दिया। पूरे हिन्दुस्तान में करीब-करीब 26 हज़ार करोड़ रूपया बैंकों से इन गरीबों को देने का काम हमने किया है। गरीब को ताक़तवर बनाना है, उनकी आर्थिक शक्ति बढ़ानी है।

हमने अभी बीमा योजना शुरू की; हर महीने में सिर्फ़ एक रूपया अर्थात 12 महीने में 12 रूपया कल जब मैं नवादा में था कि वहां एक मुस्लिम परिवार ने 12 रुपये वाली स्कीम ली थी और उसके परिवार में अचानक कुछ हो गया; महीना भर हुआ था और उसे 2 लाख रुपये का चेक आ गया। गरीब के लिए कैसे काम होता है, ये हमारी सरकार ने करके दिखाया है।

मेरा एक और सपना है जिसे पूरा करने के लिए बिहार में एक ऐसी सरकार चाहिए जो बिहार का भला करना चाहती है। मैं चाहता हूँ कि 2022 में सबके पास अपना एक घर हो। गरीबों को घर मिले, ये बहुत बड़ा बीड़ा हमने उठाया है घर में पानी का नल हो, नल में जल हो, बिजली हो, शौचालय हो और नजदीक में गरीब बच्चों के पढने के लिए अच्छी शिक्षा की व्यवस्था हो। इस काम को करने के लिए अगर राज्य सरकार ऐसी होगी कि हम केंद्र से बात नहीं करेंगे, हम उसे घुसने नहीं देंगे तो क्या ये संभव हो पाएगा?

मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि आप भाजपा और एनडीए के हमारे साथियों, राम विलास पासवान, जीतन राम मांझी, उपेन्द्र कुशवाहा को इस चुनाव में विजयी बनाईए और बिहार के भाग्य को बदलने का फ़ैसला कर लीजिए। बिहार में तीन-तीन पीढ़ी बर्बाद हो गई लेकिन अब इसे बर्बाद होने नहीं देना है। ये चुनाव है, एक तरफ जंगलराज और दूसरी तरफ विकासराज। सारी समस्याओं का समाधान विकास में ही रखा है इसलिए मैं कहता हूँ कि विकास के लिए वोट दीजिये दलित हों, पीड़ित हों, शोषित हों, वंचित हों, गरीब हो, इन सबका भला विकास से ही होगा। जवानों को रोजगार मिलेगा तो परिवारों की स्थिति अपने आप बदल जाएगी। इस काम को पूरा करने के लिए बिहार में दो-तिहाई बहुमत के साथ एनडीए की सरकार बनाईए।

आज पूरी दुनिया में हिन्दुस्तान का डंका बज रहा है। अमेरिका, भूटान, रूस, चीन में भारत का गुणगान हो रहा है कि नहीं? ये मोदी के कारण नहीं बज रहा है बल्कि सवा सौ करोड़ हिन्दुस्तानियों के कारण बज रहा है। आपने ऐसा काम किया है जिस काम के कारण दुनिया में हिन्दुस्तान का डंका बज रहा है। आपने 30 साल के बाद पूर्ण बहुमत वाली सरकार चुनी है। इसके कारण दुनिया के किसी भी नेता से मिलता हूँ, उनसे हाथ मिलाता हूँ और गले लगाता हूँ तो उन्हें मोदी नहीं बल्कि सवा सौ करोड़ हिन्दुस्तानी दिखाई देते हैं। आज वे सब भारत का लोहा मानने लगे हैं। हिन्दुस्तान में बिहार का डंका बजाने, बिहार का जय-जयकार करने के लिए बिहार में भी आपको दो-तिहाई बहुमत से सरकार बनानी पड़ेगी। ये सारी दुनिया बिहार की ताक़त को मान लेगी और विकास के रास्ते खुल जाएंगे और बिहार बदल जाएगा। यहाँ आया हुआ एक-एक व्यक्ति 50-50 लोगों को समझाएगा और उन्हें वोट डालने के लिए प्रेरित करेगा और एनडीए की सरकार बनाएगा। मेरे साथ मुट्ठी बंद करके बोलिये -

भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद।

 

 

 

 

 

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भारत माता की... भारत माता की.. भारत माता की...

भारतीय जनता पार्टी के नवीन अध्यक्ष माननीय नितिन नबीन जी,
पूर्व अध्यक्ष जे पी नड्डा जी, भाजपा परिवार के अन्य सभी वरिष्ठजन, देशभर से आए कार्यकर्ता साथी, देवियों और सज्जनों...
सर्वप्रथम माननीय नितिन नबीन जी को दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल का अध्यक्ष चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई देता हूं। बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

बीते कई महीनों से संगठन पर्व यानि कि पार्टी की छोटी सी इकाई से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने की एक व्यापक प्रक्रिया शतप्रतिशत लोकतांत्रिक तरीके से भारतीय जनता पार्टी के संविधान के स्पिरिट को और उसमें बताई गई हर बात को ध्यान में ऱखकर के लगातार चल रही थी। आज उसका विधि-पूर्वक समापन हुआ है। संगठन पर्व का ये विशाल आयोजन, भारतीय जनता पार्टी की लोकतांत्रिक आस्था, संगठनात्मक अनुशासन और कार्यकर्ता-केन्द्रित सोच का प्रतीक है। मैं देशभर के कार्यकर्ताओं का इस प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

बीते एक-डेढ़ वर्षों में डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की एक सौ पच्चीसवीं जयंती का पर्व, अटल जी की सौवीं जन्म-जयंती, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष… ऐसे महापर्व हम मनाते रहे है...ये वो प्रेरणाएं हैं, जो देश के लिए जीने के हमारे संकल्प को और मजबूत करती हैं। हमारा नेतृत्व परंपरा से चलता है...अनुभव से समृद्ध होता है...और जनसेवा, राष्ट्र-सेवा के भाव से संगठन को आगे बढ़ाता है।

साथियों,

अटल जी, आडवाणी जी और मुरली मनोहर जोशी जी के नेतृत्व में बीजेपी ने शून्य से लेकर शिखर तक का सफर देखा है। इस सदी में वेंकैया नायडू जी और नितिन गडकरी जी सहित, हमारे कई वरिष्ठ साथियों ने संगठन को विस्तार दिया है। राजनाथ जी के नेतृत्व में पहली बार...बीजेपी ने अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया है। फिर अमित भाई के नेतृत्व में...देश के अनेक राज्यों में भाजपा की सरकारें बनीं, लगातार दूसरी बार केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी। फिर जेपी नड्डा जी के नेतृत्व में भाजपा पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक और सशक्त हुई है। केंद्र में लगातार तीसरी बार, भाजपा-NDA की सरकार बनी। मैं पूर्व के सभी अध्यक्षों का उनके अमूल्य योगदान के लिए देश के कोटि-कोटि कार्यकर्ताओं की तरफ से और मेरी तरफ से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

आप जानते हैं...आज भाजपा का जितना फोकस संगठन के विस्तार पर है उतनी ही बड़ी प्राथमिकता कार्यकर्ता के निर्माण की भी है। भाजपा एक ऐसी पार्टी है, जहां लोगों को लगता होगा की नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं, तीसरी बार प्रधानमंत्री बने, पचास साल की छोटी आयु में मुख्यमंत्री बन गए, 25 साल से लगातार हेड ऑफ द गवर्नमेंट रहे हैं.. ये सब अपनी जगह पर है, लेकिन इन सबसे भी बड़ी चीज मेरे जीवन में है मैं भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता हूं ये सबसे बड़ा गर्व है। और जब बात पार्टी के विषयों की आती है...तब माननीय नितिन नबीन जी, मैं एक कार्यकर्ता हूं और वे मेरे बॉस हैं। अब माननीय नितिन नबीन जी, हम सभी के अध्यक्ष हैं। और उनका दायित्व सिर्फ भाजपा को ही संभालना, इतना नहीं है, एनडीए के सभी साथियों के बीच भी उन्हें तालमेल का बहुत बड़ा दायित्व को भी देखना होता है।

साथियों,

माननीय नितिन जी के संपर्क में जो भी आया है, वो उनकी सरलता और सहजता की चर्चा ज़रूर करता है। बीजेपी युवा मोर्चा का दायित्व हो, अलग-अलग राज्यों में प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी हो या फिर बिहार सरकार में काम करने का अनुभव हो नितिन जी ने हमेशा जब-जब, जो-जो, जहां-जहां जो-जो जिम्मेवारी मिली, अपनेआप को उन्होंने साबित किया है। जिम्मेवारी देने वालों को भी उनके कार्य ने गर्व से भर दिया है।

साथियों,

ये इक्कीसवीं सदी है और देखते ही देखते इक्कीसवीं सदी के पहले 25 वर्ष पूरे भी हो चुके हैं। आने वाले 25 वर्ष बहुत महत्वपूर्ण हैं। ये वो कालखंड है, जब विकसित भारत का निर्माण होना है, और होना तय है। इस महत्वपूर्ण कालखंड की शुरुआत में...हमारे माननीय नितिन नबीन जी...बीजेपी की विरासत को आगे बढ़ाएंगे। मैं आजकल के युवाओं की भाषा में कहूं...तो नितिन जी खुद भी एक प्रकार से मिलेनियल हैं...वो उस जेनरेशन से हैं,...जिसने भारत में बड़े आर्थिक, सामाजिक और टेक्नोलॉजिकल परिवर्तन होते देखे हैं। वो उस जनरेशन से हैं...जिसने बचपन में रेडियो से सूचनाएं पाईं...और आज AI के भी एक्टिव यूज़र हैं। नितिन जी के पास युवा ऊर्जा भी है...और संगठन में कार्य का लंबा अनुभव भी है। ये हमारे दल के हर कार्यकर्ता के लिए बहुत उपयोगी होगा।

साथियों,

इस वर्ष जनसंघ की स्थापना को 75 वर्ष हो रहे हैं। और मैं आज इन 75 वर्ष लगातार लक्ष्यावधि कार्यकर्ताओं ने अनेक परिवारों ने, अनेक पीढ़ियों ने जो त्याग, तपस्या और बलिदान दिए हैं मैं उनको आदरपूर्वक नमन करता हूं। जनसंघ रूपी वटवृक्ष से ही भाजपा का जन्म हुआ...और भाजपा दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बन चुकी है। और यह सिर्फ भाजपा के कार्यकर्ताओं के लिए गर्व का विषय है, इतना नहीं है, एक-एक राजनीतिक समीक्षकों को दुनिया को ये बात बतानी चाहिए कि भारत एक ऐसा देश है जिसकी रगों में इतनी मजबूती से लोकतंत्र चल रहा है कि जहां दुनिया की सबसे बड़ी पोलिटिकल पार्टी है। साथियों, बीजेपी एक संस्कार है। बीजेपी एक परिवार है, हमारे यहां मेंबरशिप से भी ज्यादा रिलेशनशिप होती है। बीजेपी एक ऐसी परंपरा है...जो पद से नहीं, प्रक्रिया से चलती है।
हमारे यहां पदभार एक व्यवस्था है...और कार्यभार एक जीवन भर की ज़िम्मेदारी है। हमारे यहां अध्यक्ष बदलते हैं... लेकिन आदर्श नहीं बदलते। नेतृत्व बदलता है...लेकिन दिशा नहीं बदलती।

साथियों,

भाजपा का स्वरूप नेशनल है, भाजपा का स्पिरिट नेशनल है। क्योंकि हमारा जुड़ाव लोकल है, हमारी जड़ें ज़मीन के नीचे गहरी हैं। इसलिए, भाजपा रीजनल एस्पिरेशन्स को प्लेटफॉर्म देती है, उन्हें नेशनल एंबिशन्स का आधार बनाती है। और इसलिए आज देश के कोने-कोने के लोग भाजपा के साथ हैं। भाजपा के साथ जुड़ रहे हैं। और इतना ही नहीं और जो भी अपनी राजनीति का प्रारंभ करना चाहते है उसको भी भाजपा का प्रवेश द्वार सबसे उत्तम और सबसे सुरक्षित लगता है।

साथियों,

जनता-जनार्दन की सेवा... हमारे लिए हमेशा सर्वोपरि रही है। हमने सत्ता को सुख का नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम बनाया है। इसलिए, भाजपा पर जनता का विश्वास निरंतर मज़बूत होता गया है। अगर बीते 11 वर्षों की ही बात करें...तो भाजपा की यात्रा जन विश्वास अर्जित करने की अद्भुत यात्रा रही है। बीते 11 वर्षों में बीजेपी ने...हरियाणा, असम, त्रिपुरा और ओडिशा में...पहली बार अपने सामर्थ्य से सरकारें बनाईं। पश्चिम बंगाल और तेलंगाना में भाजपा...जनता की एक बड़ी आवाज बनकर उभरी है। अक्सर होता ये है...कि लंबे कार्यकाल के बाद सरकारों के लिए टिके रहना मुश्किल होता है। लेकिन बीजेपी ने इस ट्रेंड को भी तोड़ दिया है। गुजरात हो, मध्य प्रदेश हो, महाराष्ट्र हो, बिहार हो...इन सभी राज्यों में, कई-कई कार्यकाल के बावजूद बीजेपी पहले से भी बड़े जनादेश के साथ सरकार में लौटी है।

साथियों,

बीते डेढ़-दो वर्षों में तो, भाजपा पर जनता का भरोसा और मज़बूत हुआ है। विधानसभा हो या स्थानीय निकाय...बीजेपी की स्ट्राइक रेट अभूतपूर्व रही है। इस दौरान, देश में 6 राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं। इनमें से चार चुनाव बीजेपी-NDA ने जीते हैं।

साथियों,

आज भाजपा, सिर्फ संसद और विधानसभा की ही नहीं...बल्कि नगर-पालिकाओं और नगर-निगमों में भी पहली पसंद है। और इसका ताज़ा उदाहरण महाराष्ट्र है। हाल में जो मेयर और पार्षदों के चुनाव परिणाम सामने आए हैं...वो अभूतपूर्व हैं। बीजेपी, महाराष्ट्र के स्थानीय निकायों में नंबर वन पार्टी बनी है। कुल 29 में से 25 बड़े शहरों की जनता ने बीजेपी-एनडीए को चुना है। कुल जितने पार्षद जीते हैं, उनमें से 50 परसेंट बीजेपी के हैं। ऐसे ही केरला में भी आज बीजेपी के करीब सौ पार्षद हैं। केरला की राजधानी तिरुवनंतपुरम की जनता ने मेयर चुनाव में 45 साल बाद लेफ्ट से सत्ता छीनी और भाजपा पर भरोसा किया। मुझे पूरा विश्वास है... कि आने वाले विधानसभा चुनावों में भी लोग, केरला में बीजेपी को अवसर ज़रूर देंगे।

साथियों,

बीजेपी निरंतर जीत रही है...उसका विस्तार हो रहा है...ये निश्चित तौर पर हम सभी के लिए गर्व का विषय है। लेकिन ये हम सभी के लिए बहुत बड़े दायित्व बोध भी है और दायित्व बोध का समय भी है। कभी भाजपा ने पार्टी विद ए डिफरेंस के रूप में अपनी यात्रा शुरु की थी...आज बीजेपी, पार्टी ऑफ गवर्नेंस भी है। देश की आजादी के बाद शासन के अलग-अलग मॉडल देखे हैं। कांग्रेस के परिवारवाद का मॉडल...लेफ्ट का मॉडल... क्षेत्रीय दलों का मॉडल...अस्थिर सरकारों का दौर...ये सब मॉडल देश देख चुका है.. लेकिन आज देश, स्थिरता, सुशासन और संवेदनशीलता वाला भाजपा का विकास मॉडल देख रहा है।

साथियों,

ये भाजपा ही है जिसने सामाजिक न्याय के नारे को...सच्चे स्वरूप में ज़मीन पर उतारा है। हमने गरीब कल्याण की योजनाओं को सरकारी फाइलों से निकालकर...गरीब के घर तक पहुंचाया है। साथियो., मैं आपको कुछ उदाहरण देता हूं... आज़ादी के 70 वर्ष बाद, सिर्फ तीन करोड़ ग्रामीण परिवारों तक ही पाइप से पानी पहुंच पाया था। माताओं-बहनों की पीड़ा, पानी के लिए उनके संघर्ष की सुध लेने वाला कोई नहीं था। और मुझे याद है जब मैं गुजरात में राजनीतिक क्षेत्र में नहीं आया था, सामाजिक जीवन में काम करता था। हमारे यहां एक धंधुका करके स्थान है वहां मैं जाता था तो वहां के लोग मुझे कहते थे कि आप यहां रात को मत रुकिए और जब भी आपका दौरा हो तो सुबह 10:00 बजे के बाद आइए, नॉर्मली मेरा नेचर रहता था कि हर नए स्थान पर जाकर रात में रुकूं कार्यकर्ताओं से मिलूं लेकिन धंधुका वाले मना करते थे, क्यों… वह कहते थे पानी नहीं है शुवह आपको स्नान करने के लिए पानी नहीं दे पाएंगे, वहां तो कहावत चलती थी कि बेटी को बंदूकें दो लेकिन धंधुके मत दो यानी उसको बंदूक से मार दो लेकिन उसकी धंधुके में शादी मत करो पानी नहीं था। यह दर्द मैंने देखा है। मैं धरती की सच्चाई से जुड़ा था, माताओं- बहनों के पीड़ा अपनी आंखों के सामने देखी थी, और तब हम जल जीवन मिशन लेकर आए...और सिर्फ 5-6 साल में 12 करोड़ से ज्यादा परिवारों को नल से जल की सुविधा से जोड़ा।

साथियों,

ये हमारी सरकार है...जिसने धुएं से बीमार होती, बहनों की पीड़ा समझी। वरना पहले तो एलपीजी गैस को भी अमीरों का ही सौभाग्य मान लिया गया था। भाजपा ने पूरी संवेदनशीलता के साथ हर घर को एलपीजी गैस कनेक्शन से जोड़ने का अभियान चलाया। और वर्ष 2014 तक जहां सिर्फ 14 करोड़ एलपीजी कनेक्शन थे...आज देश में तैंतीस करोड़ से अधिक गैस कनेक्शन हैं। ऐसे ही, गांव की बहनों को लखपति दीदी बनाने का अभियान है। ये भी इसलिए संभव हो पाया...क्योंकि भाजपा बहनों-बेटियों के सपनों के प्रति संवेदनशील है।

साथियों,

एक जमाना था जब हम भी सुनते थे कि फलाना परिवार तो लखपति परिवार है ढिकना परिवार तो लखपति परिवार है। यानी लखपति होना बहुत बड़ी बात मानी जाती थी.. ये मोदी है जो सपने देखता है कि मेरे गांव की गरीब मां भी लखपति दीदी बनेगी।

साथियो,

दशकों तक आदिवासी समाज को सिर्फ वोट बैंक से जोड़कर देखा गया। लेकिन संवेदनशील भाजपा ने...भाजपा के हमारे संस्कारों ने समाज के प्रति समान भाव की हमारी परंपरा के कारण भाजपा ने आदिवासियों में भी सबसे पिछड़ी जनजातियों की पीड़ा को समझा। उनके विकास के लिए पीएम जन-मन योजना बनाई। और पीएम जन-मन योजना के लाभार्थी इतने बिखरे हुए हैं, और एक दो एक दो दूर के जंगलों में पड़े हैं। उनसे म्युनिसिपलटी की सीट भी जीती नहीं जा सकती है। वोट के हिसाब से कोई उनकी तरफ देखेगा नहीं। लेकिन जब बोट से उठकर संवेदनाएं होती हैं, समाज का कल्याण हमारे संस्कार होते हैं तो पीएम जनमन योजना जन्म लेती है। आदिवासियों में भी अति पिछड़े...संख्या में भले ही कम है...लेकिन उनके प्रति हमारी संवेदना में कोई कमी नहीं है।

साथियों,

हमारा नॉर्थ ईस्ट...वहां वोटर उतने नहीं है, सीटें भी उतनी नहीं हैं... इसलिए कांग्रेस की सरकारों में उन्हें बरसों तक उपेक्षित रखा गया। लेकिन संवेदनशील भाजपा ने, नॉर्थ ईस्ट को दिल से भी जोड़ा और दिल्ली से भी जोड़ा। एक और उदाहरण आकांक्षी जिलों का है। हमारे देश में सौ से अधिक जिले ऐसे थे..जिनको कांग्रेस सरकारें पिछड़ा घोषित करके भूल गई थीं। इन जिलों को पनिशमेंट पोस्टिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था। यानि जिन अधिकारियों को सज़ा देनी होती थी, तो उन्हें वहां भेजा जाता था। हमारी भाजपा सरकार ने इन जिलों को आकांक्षी जिले घोषित किया। और प्राथमिकता के आधार पर इनके विकास के लिए काम किया। आज ये आकांक्षी जिले, विकास के कई पैरामीटर्स पर अन्य जिलों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्य के एवरेज के बराबर आकर खड़े हो गए हैं।

साथियों,

भाजपा का मंत्र है- पिछड़ों को प्राथमिकता...पिछड़ों को प्राथमिकता, जिनकी किसी ने सुध नहीं ली, हमने उनकी साधना की है। जिनको किसी ने पूछा नहीं...मोदी ने उन्हें पूजा है। हमारी कार्य-संस्कृति...सर्व-समावेशी है...सर्वांगीण है...सर्व-स्पर्शी है...सर्व-हितकारी है...सर्व-कल्याणकारी है। और ये कार्य-संस्कृति गरीब को समान अवसर देने वाली है, गरीब को सशक्त करने वाली है। इसी वजह से सिर्फ एक दशक में 25 करोड़ लोगों ने गरीबी को पराजित किया है। और ये 25 करोड़ लोग कौन हैं? इनमें सबसे अधिक दलित, पिछड़े और आदिवासी परिवार हैं।

साथियों,

बीते वर्षों में जन-विश्वास की जो पूंजी हमने अर्जित की है. उस भरोसे को कायम रखना बहुत बड़ी ज़रूरत है। देश की जनता...2047 तक विकिसत भारत बनाने के लिए संकल्पित है। इसलिए, बीते 11 वर्षों में रिफॉर्म्स की जो यात्रा हमने शुरू की है...वो अब रिफॉर्म एक्सप्रेस बन चुकी है। हमें राज्यों के स्तर पर, शहरों के स्तर पर...जहां भी भाजपा-NDA सरकारें हैं, वहां रिफॉर्म्स की गति तेज़ करनी है। भाजपा, सिटी गवर्नेंस का भी एक नया मॉडल देश के सामने प्रस्तुत करे, इस लक्ष्य के साथ हमें आगे बढ़ना चाहते हैं।

साथियों,

जब हम सत्ता में नहीं भी थे...तब भी हम अपने मूल आदर्शों से कभी नहीं भटके। हम राष्ट्र प्रथम के भाव से...नेशन फर्स्ट के भाव से डटे रहे। जूझते रहे, संकटों को झेलते रहे, जज्बा बढ़ाते रहे और जीतते भी रहे। हम वो लोग हैं, हमारा वो चरित्र है, हमारे वो संस्कार है खुद से बड़ा दल और दल से बड़ा देश...ये भाजपा के हर कार्यकर्ता का संस्कार है …भाजपा के हर कार्यकर्ता का जीवन मंत्र है। इसी भाव के साथ...बीते 11 वर्षों में हमने अनेक चुनौतियों पर विजय पाई है। जम्मू कश्मीर से आर्टिकल-370 की दीवार गिराना हो...तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाना हो...इनको कभी असंभव माना जाता था। आज ये हकीकत बन चुके हैं। आज देश में माओवादी आतंक भी अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।

साथियों,

आगे भी हमें...हर चुनौती का पूरे सामर्थ्य से सामना करना है। आज देश के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती...घुसपैठियों की है, आबादी के असंतुलन की है। दुनिया के धनवान देश, समर्थ देश वे भी अपने देश में जो घुसपैठियों हैं उनकी जांच पड़ताल कर रहे हैं, और उनको पकड़-पकड़ कर निकाल रहे हैं, और दुनिया उनको पूछती नहीं है कि तुम घुसपैठियों को क्यों निकाल रहे हो तुम तो लोकतंत्र का झंडा लेकर घूम रहे थे। तुम तो पूरी दुनिया के नवाब बनके बैठे थे क्यों निकाल रहे हो। दुनिया में कोई अपने देश में घुसपैठियों को स्वीकार नहीं करता।

भारत भी घुसपैठियों को अपने गरीबों, हमारे नौजवानों के हक कभी भी लूटने नहीं दे सकता। घुसपैठिए, देश की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं। उनकी पहचान करके, उन्हें वापस उनके देश भेजना बहुत आवश्यक है। इसके अलावा...ऐसे राजनीतिक दल, जो वोट बैंक की राजनीति में घुसपैठियों को बचा रहे हैं...या उन्हें कवर दे रहे हैं...उन्हें हमें पूरी शक्ति से जनता के सामने बेनकाब करना ही होगा उनको एक्सपोज़ करना ही होगा।

साथियों,

एक और बड़ी चुनौती अर्बन नक्सल की भी है। अर्बन नक्सल का दायरा, इंटरनेशनल हो रहा है। और यहां अर्बन नक्सल की बहुत चतुराई होती है ये मीडिया वाले इतने बैठे हैं ना अगर साल में एक-आध बार भी एक-आध बार भी अगर मोदी की किसी अच्छी चीज को ट्वीट कर दिया क्या टीवी पर बोल दिया या अखबार में लिख दिया तो उस पत्रकार की तो ऐसी फजीहत कर देते है उसके पीछे ऐसे पड़ जाते हैं, उसे अछूत बना देते हैं। भविष्य में वो कभी बोल ना सके ऐसा कर देते हैं। ये अर्बन-नक्सल की स्टाइल है। हमको भी सालों तक ऐसा अछूत बनाकर रख दिया पूरे देश में भाजपा को, अब देश समझ गया है अर्बन-नक्सल के कारनामे… भारत को नुकसान पहुंचाने के लिए अर्बन नक्सली लगातार कोशिशें कर रहे हैं...साजिशें कर रहे हैं। अर्बन नक्सलियों के इस गठजोड़ को हमें संगठन की ताकत से, वैचारिक ताकत से और हमारी परिणामकारी इतिहास को बुलंदी देकर के उनको परास्त करना है, उनको तोड़ना है।

साथियों,

देश के लिए परिवारवाद बहुत बड़ा अभिशाप है। और जब मैं परिवारवाद की बात करता हूं तो अर्बन नक्सल मैदान में आ जाते हैं, वो मुझे कहते हैं कि फलाने का बेटा ढिकना का बेटा। वो बात को डायवर्ट करते हैं। किसी के बेटे की प्रतिभा का हम विरोधी नहीं है. किसी की बेटी की प्रतिभा का हम विरोध नहीं है, लेकिन दुर्भाग्य से...कांग्रेस और देश के अनेक क्षेत्रीय राजनीतिक दलों पर...आज अलग-अलग परिवारों का कब्जा हो गया है। पार्टी का जन्म किसी और ने किया, पार्टी मेंं लगातार एक के बाद एक उनके परिवार के लोग ही अध्यक्ष होते हैं, पार्टी की पूरी निर्णय प्रक्रिया उन परिवार के हाथ में होती है। पार्टी का कोई भी कार्यकर्ता हो उसे विचार से कोई लेना-देना नहीं उनको उस परिवार के प्रति समर्पित रहना पड़ता है। ये परिवारवाद खतरनाक है। ये लोकतंत्र का दुश्मन है। और इस परिवारवादी राजनीति ने देश के नौजवानों के लिए दरवाजे बंद कर दिए हैं। उनके आगे आने के सारे मौके खत्म कर दिए हैं। और इसलिए देश के उन युवाओं को अवसर मिलने ही चाहिए...जो राजनीति के माध्यम से नए समाधान देने के लिए आगे आना चाहते हैं। और इसलिए मैंने कहा है कि मैं एक लाख ऐसे नौजवानों को राजनीति में लाना चाहता हूं जिनके परिवार में वे पहली बार वो राजनीति में आए हैं।

साथियों,

अपने इन प्रयासों के बीच, हमें हर उस बुराई से दूर रहना है…और ये बात जरा मैं गंभीरता से बताना चाहता हूं। जनता हमें आशीर्वाद दे रही है और निरंतर आशीर्वाद दे रही है। हम जो कुछ भी हैं जनता-जनार्दन के आशीर्वाद के कारण हैं। जो कुछ भी है मेहनतकश, समर्पित कार्यकर्ताओं के परिश्रम के कारण हैं। और इसलिए जब इतने बढ़ रहे हैं। इतना सम्मान मिल रहा है, इतनी स्वीकृति मिल रही है तब हमारा दायित्व अनेक गुना बढ़ जता है। और पल-पल हमें सोचना चाहिए कि वो कौन से कारण हैं जिसने कांग्रेस पार्टी को बर्बाद कर दिया। वो कौन सी बुराइयां कांग्रेस में घुस गई जो आज कांग्रेस को तबाही के कगार पर लाकर के खड़ा कर दिया। हमें उन सारी बुराइयों से बचना है। ये बुराइयां किसी भी सूरत में हमारे भीतर नहीं आनी चाहिए। हमें इससे बच के रहना है। और जहां-जहां हम बच के रहते हैं, हमें कोई मुकाबला नहीं कर पाता है।

साथियों

आज देश को याद भी नहीं होगा...कि 1984 में कांग्रेस को चार सौ से अधिक सीटें मिली थीं…नेहरू जी के जमाने से भी ज्यादा... और देश ने करीब-करीब 50 प्रतिशत वोट दिया था कांग्रेस को। लेकिन आज कांग्रेस सौ सीटों के लिए तरस गई है। कांग्रेस अपने इस घनघोर पतन की कभी समीक्षा नहीं करती...क्योंकि अगर समीक्षा करेंगे, ये पतन के कारणों की ओर जाएंगे तो फिर उसी परिवार पर सवाल उठेंगे, जिस परिवार ने कांग्रेस पर कब्जा करके रखा है। और इसलिए बहाने ढूंढ़ते रहते हैं। पतन की तरफ सही कारण ढूंढ़ने की हिम्मत तक खो चुके हैं वो लोग

साथियों,

वहीं दूसरी तरफ भाजपा है। हम हार और जीत के बाद समीक्षा करते हैं। मैं आपको फिर महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों का उदाहरण दूंगा। महाराष्ट्र में हम निकाय चुनाव जीतने के बाद जश्न में डूबे नहीं... बल्कि मैं तो अभी पढ़ रहा था...कि उसी दिन से, हमारे माहराष्ट्र के कार्यकर्ता आने वाले पंचायत के चुनावों की तैयारियों के लिए बैठक शुरू कर दी थी। मुझे याद है 2002 हमने भव्य विजय प्राप्त की थी गुजरात में। चारों तरफ आनंद-उत्सव का माहौल था, देश भर का मीडिया भी वहां मौजूद था, अर्बन-नक्सल तो बड़ी संख्या में आए थे। वो बेचारे हमारी पराजय का जश्न मनाना चाहते थे। तो वे ढूंढ रहे थे सारी चीजें। और मैं एक मीटिंग में बैठा था, तो उनको बड़ा आश्चर्य हुआ कि यहां पर इतना जलसा चल रहा है और ये कैसा मुख्यमंत्री है कि आज ही चुनाव नतीजा आया है और ये बैठा है। और मैं क्या कर रहा था... मैं कार्यालय में मीटिंग ले रहा था। और मैंने पूछा कि अच्छा बताओ भाई कि इतने हार क्यों गए... ये भाजपा है... जो जीत का जश्न मनाते समय भी अपनी कमियों की लगातार समीक्षा करता है। और कमियों से ऊपर उठने के लिए हर समय का उपयोग करता है। लोकतंत्र में इसी स्वस्थ परंपरा को, इसी डेडिकेशन को हम सब कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है हमें आगे बढ़ाना है। हमें ध्यान रखना है, कि जो कांग्रेस की बुराइयों से बचेगा, वही देश में आगे बढ़ेगा।

साथियों,

आज भाजपा परिवार को अपना नया मुखिया मिला है। ऊर्जावान मुखिया मिला है। अनुभवी मुखिया मिला है। औऱ भाजपा परिवार की हमारी ताकत...हर कार्यकर्ता का परिश्रम है...उसकी सामूहिक चेतना है। बूथ पर जो हमारा कार्यकर्ता पूरे सालभर जुटा रहता है...वही हमारी सच्ची ताकत है। हमें याद रखना है...हम सबसे जुड़ें, हम सबको जोड़ें...कल्याणकारी योजनाओं से हर लाभार्थी को लाभ पहुंचाएं। ये हमारा ध्येय होना चाहिए। इसी आग्रह के साथ, माननीय नितिन नबीन जी को...बीजेपी के कोटि-कोटि कार्यकर्ताओं की तरफ से पुन: बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। और साथियों आज का पल हम सबके लिए बहुत विशेष पल है। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष जी अब हमारा मार्गदर्शन करने वाले हैं। उनका एक-एक शब्द हमारे लिए आगे की दिशा होगी, हमारे आगे की कार्यरचना के लिए उनका मार्गदर्शन हमारी अमूल्य पूंजी होगी। मैं भी एक कार्यकर्ता के तौर पर, मैं पहले नए अध्यक्ष जी को मेरे काम का हिसाब दे रहा था, मैंने हिसाब दिया, अब वो मेरा सीआर लिखेंगे, लेकिन अब मेरे आगे के कार्य के लिए मैं उनके मार्गदर्शन की प्रतीक्षा कर रहा हूं, मैं उनको सुनने के लिए बहुत ही उत्सुक हूं, आतुर हूं। फिर एक बार बहुत-बहुत धन्यवाद।