মান্যবৰ,

প্ৰাকৃতিক দুৰ্যোগ মানৱতাৰ বাবে এক বৃহৎ প্ৰত্যাহ্বান হৈ আহিছে। এই বছৰো প্ৰাকৃতিক দুৰ্যোগে বিশ্বৰ বৃহৎ সংখ্যক লোকক প্ৰভাৱিত কৰিছে। এই কথা স্পষ্ট যে প্ৰাকৃতিক দুৰ্যোগৰ মোকাবিলাৰ বাবে আমি বৈশ্বিক সহযোগিতা শক্তিশালী কৰিব লাগিব।

এই ভাৱনাৰ সৈতে ভাৰতে জি-২০ৰ অধ্যক্ষতাৰ সময়ত দুৰ্যোগ প্ৰশমনৰ বাবে এক কৰ্মী গোট গঠন কৰা হৈছিল। এই গুৰুত্বপূৰ্ণ কাৰ্যসূচী অগ্ৰাধিকাৰৰ ভিত্তিত আগবঢ়াই নিয়াৰ বাবে মই দক্ষিণ আফ্ৰিকাক অভিনন্দন জনাইছো।

বন্ধুসকল,

দুৰ্যোগ প্ৰশমনৰ ক্ষেত্ৰত আমাৰ দৃষ্টিভংগী সঁহাৰিকেন্দ্ৰিকতকৈও অধিক বিকাশকেন্দ্ৰিক হোৱা উচিত। ভাৰতৰ এই চিন্তাধাৰাৰ বাবেই 'ক্ষতিশংকা প্ৰতিৰোধী আন্তঃগাঁথনিৰ বাবে মৈত্ৰী' গঠন কৰা হৈছিল। জি-২০ দেশসমূহে চিডিআৰআইৰ সৈতে একেলগ হৈ বিত্ত, প্ৰযুক্তি আৰু দক্ষতা বিকাশৰ দিশত কাম কৰিব পাৰে। ই এক শক্তিশালী ভৱিষ্যতৰ নিশ্চয়তা প্ৰদান কৰিব পাৰে।

বন্ধুসকল,

ভাৰতে বিশ্বাস কৰে যে মহাকাশ প্ৰযুক্তিৰ দ্বাৰা সমগ্ৰ মানৱ জাতি উপকৃত হ'ব। সেয়েহে ভাৰতে জি-২০ত মুক্ত উপগ্ৰহ তথ্য অংশীদাৰিত্বৰ প্ৰস্তাৱ আগবঢ়াইছে। ইয়াৰ জৰিয়তে জি-২০ দেশসমূহৰ মহাকাশ সংস্থাসমূহৰ উপগ্ৰহ তথ্য আৰু বিশ্লেষণ গ্ল’বেল ছাউথৰ দেশসমূহৰ বাবে অধিক সুগম, আন্তঃ-কাৰ্যক্ষম আৰু উপযোগী কৰি তুলিব পৰা যাব।

বন্ধুসকল,

গোলকীয় উন্নয়য়ৰ বাবে বহনক্ষমতা আৰু স্বচ্ছ শক্তিৰ প্ৰয়োজন। এইবোৰ সুনিশ্চিত কৰিবলৈ, গুৰুত্বপূৰ্ণ খনিজ পদাৰ্থৰ এক বৃহৎ ভূমিকা আছে। এয়া মানৱতাৰ এক অংশীদাৰ সম্পত্তি। সেয়ে ভাৰতে জি-২০ৰ গুৰুত্বপূৰ্ণ খনিজ ঘুৰ্ণন উদ্যোগৰ প্ৰস্তাৱ ৰাখিছে। ইয়াৰ অধীনত, পুনঃব্যৱহাৰ, নগৰ খনি আৰু ছেকেণ্ড লাইফ বেটাৰী আদি উদ্ভাৱনক প্ৰোৎসাহিত কৰা হ'ব।

পৰিচালনাত বিনিয়োগ হ'লে প্ৰাথমিক খনিৰ ওপৰত নিৰ্ভৰশীলতা হ্ৰাস হ'ব। ইয়াৰ দ্বাৰা যোগান শৃংখলৰ ওপৰত চাপ হ্ৰাস হ'ব আৰু প্ৰকৃতিৰ বাবেও ই ভাল হ'ব। এই প্ৰচেষ্টাই যুটীয়া গৱেষণা, প্ৰযুক্তিগত মানদণ্ড আৰু গ্ল'বেল ছাউথত পৰীক্ষামূলক ৰিচাইক্লিং সুবিধা সমৰ্থন কৰিব।

বন্ধুসকল,

নতুন দিল্লীত জি-২০ সন্মিলনৰ সময়ত আমি সংকল্প লৈছিলো যে ২০৩০ চনৰ ভিতৰত আমি পুনৰ নৱীকৰণযোগ্য শক্তিৰ ব্যৱহাৰ তিনিগুণ বৃদ্ধি কৰিম আৰু শক্তি দক্ষতাৰ হাৰ দুগুণ কৰিম। এই লক্ষ্যত উপনীত হ'বলৈ, উন্নত দেশসমূহে সময়বদ্ধভাৱে ব্যয়সাধ্য জলবায়ু বিত্ত আৰু প্ৰযুক্তি প্ৰদানৰ প্ৰতিশ্ৰুতি পূৰণ কৰিব লাগিব।

 

বন্ধুসকল,

জলবায়ু পৰিৱৰ্তন আৰু অন্যান্য প্ৰত্যাহ্বানৰ বাবে আমাৰ কৃষি খণ্ড আৰু খাদ্য সুৰক্ষাৰ প্ৰতি ভাবুকি ক্ৰমান্বয়ে গুৰুতৰ হৈ পৰিছে। বহু দেশত কৃষকসকলৰ বাবে সাৰ, প্ৰযুক্তি, ঋণ, বীমা আৰু বজাৰ প্ৰৱেশৰ প্ৰত্যাহ্বান ক্ৰমাৎ বৃদ্ধি পাইছে। ভাৰতে নিজৰ স্তৰত এই প্ৰত্যাহ্বানসমূহ মোকাবিলা কৰাৰ প্ৰয়াস কৰিছে।

ভাৰতত আমি বিশ্বৰ সৰ্ববৃহৎ খাদ্য সুৰক্ষা আৰু পুষ্টি সমৰ্থন কাৰ্যসূচী ৰূপায়ণ কৰিছো। ভাৰতে বিশ্বৰ সৰ্ববৃহৎ স্বাস্থ্য বীমা কাৰ্যসূচী আৰু সৰ্ববৃহৎ শস্য বীমা আঁচনিও আৰম্ভ কৰিছে। আমি শ্ৰী-অন্ন অৰ্থাৎ মিলেটৰ ওপৰত জোৰ দিছো, যি পুষ্টি আৰু পৰিৱেশ, দুয়োটাৰ বাবে ছুপাৰফুড।

দিল্লী জি-২০ সন্মিলনৰ সময়ত এই সকলো বিষয়ৰ ওপৰত আমি ডেকান নীতিৰ ওপৰত সহমত প্ৰকাশ কৰিছিলো। এতিয়া আমি এই নীতিসমূহৰ ওপৰত অগ্ৰসৰ হৈ জি-২০ ৰ ৰোডমেপ প্ৰস্তুত কৰিব লাগে।

বন্ধুসকল,

সুস্থিৰতা অৱহেলাৰে গঢ়িব নোৱাৰি

জি-২০য়ে পুষ্টি, জনস্বাস্থ্য, বহনক্ষম কৃষি আৰু ডিজাইনৰ প্ৰিপেইড-নেছক সংযুক্ত কৰি এক শক্তিশালী বিশ্বজোৰা সুৰক্ষা ব্যৱস্থা গঢ়ি তোলাৰ বাবে এনে ব্যাপক কৌশলৰ প্ৰোৎসাহন কৰিব লাগে।

সকলোকে বহুত বহুত ধন্যবাদ।

 

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Text of PM’s remarks during inauguration of Swaminarayan Hindu Temple in Paris
September 06, 2026

पूज्य महंत स्वामी, फ्रांस सरकार के सम्मानित प्रतिनिधिगण, उपस्थित अतिथिगण, इंडियन कम्युनिटी के मेरे साथी, देश दुनिया से जुड़े सभी हरि भक्त, देवियों और सज्जनों, जय स्वामीनारायण!

आज फ्रांस की राजधानी पेरिस में भव्य स्वामीनारायण मंदिर का लोकार्पण हो रहा है। यह लोकार्पण भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है। पूज्य संत जनों और सनातन परंपरा के श्रेष्ठ जनों के आशीर्वाद के साथ आज इस लोकार्पण का मंच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव का मंच बन गया है। भगवान स्वामीनारायण की कृपा और हमारे संतों का स्नेह, संतों का आशीर्वाद, मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे पुण्य अवसरों से जुड़ने का अवसर हमेशा मिलता रहता है। आज भी मैं भले ही पेरिस में आप सबके बीच उपस्थित नहीं हूं, लेकिन मन से और हृदय से, मैं स्वयं को आपके बीच ही अनुभव कर रहा हूं।

साथियों,

आज इस अवसर पर मैं परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं। प्राचीन काल में भारत का जो सांस्कृतिक आध्यात्मिक वैभव था, उन्होंने उसके पुनर्जागरण का एक अभियान शुरू किया था। आज उसका प्रकाश यूरोप समेत पूरी दुनिया में फैल रहा है। 2024 में अबू धाबी में भव्य मंदिर का लोकार्पण हुआ था। आज वहां हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं और अब यहां पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण सृजन की यह निरंतरता, यह संतों की संकल्प शक्ति का ही प्रमाण है। मैं पुनीत कार्य के लिए पूज्य महंत स्वामी का आभार प्रकट करता हूं, मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं BAPS स्वामीनारायण संस्था को और करोड़ों हरि भक्तों को इस अवसर पर हृदय की गहराई से बधाई देता हूं।

साथियों,

BAPS के माध्यम से जब अलग-अलग देश में मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो वहां भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी साथ-साथ ही जाते हैं और भारत का विचार कहता है ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ अर्थात हमारे मन समान हो, हमारे हृदय साथ जुड़े। इसलिए आज जब फ्रांस में इतना भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, यह फ्रांस की विविधता को तो समृद्ध करेगा ही, इससे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों को भी ऊर्जा मिलेगी।

साथियों,

बीते वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। मेरे मित्र, प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश एक Special Global Strategic Partnership बना रहे हैं। Technology, AI और Defence से लेकर Space और Climate Action तक हम एक नई गति और नई ऊर्जा के साथ मिलकर के आगे बढ़ रहे हैं। हम 2026 को India-France Year of Innovation के रूप में भी सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत-फ्रांस की ये Strategic Partnership इसलिए भी खास है, क्योंकि ये हमारे पुराने सांस्कृतिक-राजनैतिक सम्बन्धों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। इतिहास गवाह है, फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी मन-मंदिर में जीवित है। भाषा से जुड़े विषयों में रुचि रखने वाले लोग यह भी जानते हैं कि फ्रेंच स्कॉलर्स ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में कितनी अहम भूमिका निभाई है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमाँ रोलाँ की की लेखनी हमारी सोसाइटीज़ को और करीब लाई है। पेरिस से पुडुचेरी के अरबिंदो आश्रम तक 'The mother' की spiritual journey, उसने कितने ही भारतीय और फ्रेंच साधकों को inspire किया है।

साथियों,

दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी भी फ्रांस आए थे। इस्कॉन के जरिए भारत फ्रांस के बीच आध्यात्मिक सम्बन्धों का नया अध्याय उन्होंने शुरू किया था। आज योग भी भारत-फ्रांस के people to people कनेक्ट का एक माध्यम बन चुका है। 'इंटरनेशनल योगा डे' पर एफिल टॉवर के सामने से आने वाली तस्वीरें फ्रांस में योग की लोकप्रियता का उदाहरण बनती हैं और अब BAPS के इस भव्य मंदिर के जरिए, हमारे उन सांस्कृतिक सम्बन्धों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।

साथियों,

इन दिनों, भारत फ्रांस Joint Ventures की संभावनाओं पर बातें होती हैं। स्वामीनारायण मंदिर ने इस संभावना में भी एक नया आयाम जोड़ा है। यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' है और 'बिल्ट इन फ्रांस' है। इसके काफी पत्थरों को भारत में तराशा गया है। भारत की प्राचीन प्रतिभा यहाँ फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग से आकर जुड़ चुकी है। पेरिस में इस भव्य मंदिर ने आकार लिया है। इसलिए, मैं आशा करता हूँ, यह मंदिर सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संभावनाओं का भी प्रतीक बनकर उभरेगा।

साथियों,

स्वामीनारायण मंदिर हमेशा से भक्ति के साथ-साथ सेवा का माध्यम भी रहे हैं। मुझे बताया गया है, यह मंदिर भी सेवा प्रकल्पों का वैसा ही केंद्र बनेगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ से भारतीय संस्कृति के जो स्वर निकलेंगे, उनका लाभ पूरे यूरोप में लोगों को मिलेगा। भविष्य में मुझे जब भी समय मिलेगा, मैं इस मंदिर में दर्शन करने का प्रयास अवश्य करूंगा। इन्हीं शब्दों के साथ, एक बार फिर आज के इस लोकार्पण समारोह में सम्मिलित सभी अतिथिगणों को, सभी परिवारों को, सभी हरि भक्तों को और पूरी Indian Diaspora को मेरी ओर से इस शुभारंभ पर्व की ढेरों शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

मर्सी बोकू!

जय स्वामीनारायण!