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“If we clean up the garbage, at least Rs. 6500 will be saved in the pockets of the underprivileged. They will be saved from diseases. One, who cannot find work, will be saved from unemployment. Getting rid of the garbage is an important task for the health of the poor. That is why the service to this nation means the service to the poor.”

There has been a deep effect of PM Modi’s efforts on the cleanliness drive in his constituency of Varanasi. Being a public representative, he himself handled the cleanliness drive, twice. The First time he participated in Shramdaan at the Assi Ghat to clean up the garbage and the second time he held the broom and participated in the cleaning drive at the Jagannath temple on the occasion of Good governance day.


It is the result of PM Modi’s agility that in the past two and a half years, enough work has been done to keep kashi clean and beautiful. Many tasks are being carried out in the city for waste management & cleanliness with a cost of Rs. 108.26 crores. The ILFS & ECOPAL companies have been put in charge of door-to-door collection, cleaning and carriage of household refuse. For this task, a sum of Rs 45 crores has been allotted. Under the ‘Namami Gange’ scheme, ILFS will work on cleaning of all ghats. This will incur an expense of Rs. 5 crores per year.

NTPC has begun work at the Karsada Waste Disposal plant, which is pending for 7 years, with a cost of Rs. 7 crore. And now it has begun producing organic manure. In the same way, IOCL has begun operation of Electricity from decentralized waste plant with a capacity of 10 Metric Tonne, in Bhavnia Pokhari. Such plants are being set-up at 9 other places in Varanasi with a cost of Rs. 19 Crores.

Under the Swachh Bharat Mission, Varanasi Municipal Corporation has been provided with Road sweeping machine, garbage truck, compactor & waste collection bins. More than 50 public urinals & 153 Public toilets have been constructed. Also, 2263 personal toilets have been constructed and 8122 more have been approved.

It is quite evident that swachhta mission has a very positive effect on this historical and sacred city. The people have also welcomed this initiative of the Prime Minister.

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Swachhata is a way to serve the poor of India: PM Modi
September 23, 2017
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विशाल संख्‍या में पधारे हुए मेरे प्यारे भाइयो और बहनों। 

इतनी सवेरे, सवेरे, इतना बड़ा जन-सागर! मैं कल्‍पना नहीं कर सकता हूं कि चारों तरफ लोग ही लोग नजर आ रहे हैं! मैं सबसे पहले आप सबसे क्षमा चाहता हूं, क्‍योंकि हमने जो व्‍यवस्‍था करी थी वो व्‍यवस्‍था कम पड़ गई और बहुत लोग धूप में खड़े हैं, उनको कष्‍ट हो रहा है, उसके बावजूद भी आशीर्वाद देने के लिए आए हैं। मैं उनका आभार भी व्‍यक्‍त करता हूं; और मैं उनसे क्षमा भी चाहता हूं। लेकिन जो धूप में खड़े हैं उनको मैं विश्‍वास दिलाता हूं कि ये ताप में आप जो तप रहे हैं, ये आपकी तपस्‍या हम कभी बेकार नहीं जाने देंगे। 

भाइयो, बहनों, मैं उत्‍तर प्रदेश सरकार को, विशेष रूप से उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री जी को, हृदयपूर्वक बहुत-बहुत बधाई देता हूं। क्‍योंकि आज उन्‍होंने एक पशुधन आरोग्‍य मेले की योजना की। और ये पशुधन आरोग्‍य मेला, मैं जब वहां गया तो करीब-करीब 1700 पशु अलग-अलग जगह से, अलग-अलग जगह से यहां आए हैं और उन पशुओं के आरोग्‍य के लिए, पशुओं के आरोग्‍य के लिए वहां पर सारे expert doctor आए हैं। और वो डॉक्‍टर बंधु भी पशु के आरोग्‍य की चिंता कर रहे हैं। और मुझे विश्‍वास है कि जैसे उत्‍तर प्रदेश सरकार ने कोशिश किया, अब वे पूरे उत्‍तर प्रदेश में पशुधन आरोग्‍य मेला लगाएंगे और पशुधन आरोग्‍य मेले के द्वारा हमारा गरीब किसान, जो पशु की देखभाल करने में कभी-कभी संकोच करता है, आर्थिक कारणों से कभी-कभी वो कर नहीं पाता है, और इसलिए ऐसे, ऐसे किसानों को ये पशुधन आरोग्‍य सेवा के कारण बहुत बड़ी राहत होगी। 

और हम जानते हैं कि कृषि के क्षेत्र में, कृषि के क्षेत्र में हमारे किसानों को आय में अगर सबसे ज्‍यादा कोई मदद पहुंचाता है, तो वो मदद पशुपालन, दूध उत्‍पादन के द्वारा पहुंचती है। और इसलिए पशुपालन और दूध उत्‍पादन के द्वारा, हमारे आरोग्‍य पशु मेले के द्वारा आने वाले दिनों में गांव, गरी‍ब किसान, हमारे पशुपालक; उनके लिए बहुत ही उत्‍तम सेवा होगी, सुविधा होगी। और इस काम के लिए मैं उत्‍तर प्रदेश की सरकार को हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं। 

भाइयो, बहनों, राजनीति का स्‍वभाव होता है कि वे उसी काम को करना पसंद करते हैं जिसमें वोट की संभावना होती है। अपनी वोट बैंक मजबूत बनाने के लिए वो अपना काम किया करते हैं। लेकिन भाइयो, बहनों हम अलग संस्‍कारों से पले-बढ़े हैं, हमारा चरित्र अलग है। हमारे लिए दल से बड़ा देश है और दल से बड़ा देश होने के कारण हमारी प्राथमिकताएं वोट के हिसाब से नहीं होती हैं। 

आज ये पशुधन आरोग्‍य मेला- उन पशुओं की सेवा कर रहे हैं, जिन पशुओं को कभी वोट देने के लिए नहीं जाना है। ये किसी के वोटर नहीं हैं। और आज तक, 70 साल में पशुधन के लिए इस प्रकार का अभियान कभी चलाया नहीं गया है। आरोग्‍य सेवा मिलने के कारण पशुपालन में एक नई सुविधा मिलेगी, एक नई व्‍यवस्‍था मिलेगी। 

आज हमारा देश दूध उत्‍पादन में काफी आगे है। लेकिन प्रति-पशु दुनिया में जो दूध मिलता है, उसकी तुलना में हमारे यहां पशु दूध बहूत कम देता है। और उसके कारण पशु-पालन महंगा हो जाता है। प्रति-पशु अगर दूध उत्‍पादन बढ़ाने में हम सफल होते हैं, तो मुझे विश्‍वास है कि हमारे किसानों को पशु-पालन में रुचि बढ़ेगी और दूध उत्‍पादन के द्वारा एक नई आर्थिक क्रांति को भी जन्‍म मिलेगा।

भाइयो, बहनों, मेरा जन्‍म गुजरात में हुआ, मेरा कार्यक्षेत्र गुजरात रहा, और मैंने देखा है कि वहां सहकारी प्रवृत्ति के माध्‍यम से दूध के लिए जो काम हुआ है, उस काम ने वहां के किसानों के जीवन को एक नई ताकत दी है। मुझे बताया गया कि लखनऊ-कानपुर के इलाके में गुजरात से आई हुई बनास डेयरी ने किसानों से दूध खरीदने का प्रारंभ किया है। और उसके कारण पहले किसानों को जो दूध मिलता था, उससे अनेक गुना दूध आज किसानों को दूध के दाम मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में मुझे बताया गया कि काशी क्षेत्र के किसानों का दूध भी बनास डेयरी खरीदने के लिए शुरू करने वाली है। 

मुझे विश्‍वास है कि जब ये दूध खरीदने का काम शुरू होगा, डेयरी के माध्‍यम से शुरू होगा, fat के आधार पर खरीद करना शुरू होगा तो इस काशी क्षेत्र के किसानों को भी बहुत बड़ी मात्रा में दूध के दामों में बढ़ोत्‍तरी होगी और उनकी आय में भी बढ़ोत्‍तरी होगी। और इसलिए किसानों के लिए, पशु-पालकों के लिए, दूध उत्‍पादकों के लिए, गुजरात सरकार की मदद से, बनास डेयरी की मदद से; उत्‍तर प्रदेश सरकार ने जो अभियान चलाया है; मैं उत्‍तर प्रदेश सरकार को और उत्‍तर प्रदेश के किसानों को ये शुभकामनाएं देता हूं कि दूध उत्‍तपदन , पशु-पालन का काम आगे बढ़ाने में हम सब मिल करके प्रयास करें। 

भाइयो, बहनों, 2022, भारत की आजादी के 75 साल होंगे। और भारत की आजादी के 75 साल 2022 में हो रहे हैं, तब, हमारे देश की आजादी के दीवानों ने जो सपने देखे थे, उन सपनों को पूरा करने के लिए हम सबने मिल करके संकल्‍प करना चाहिए। पांच साल के लिए, उस संकल्‍प के लिए, अपनी शक्ति और समय लगना चाहिए, उन संकल्‍प को पूरा करके रहना चाहिए। अगर हिन्‍दुसतान के सवा सौ करोड़ नागरिक एक-एक संकल्‍प लेते हैं तो देश पांच साल के भीतर-भीतर सवा सौ करोड़ कदम आगे बढ़ जाएगा। और इसलिए भाइयो-बहनों, 2022, आजादी का संकल्‍प। 

हमारा संकल्‍प है 2022 तक हम हमारे किसानों की आय double करें, दोगुना करें। और उसके लिए पशु-पालन एक मार्ग है, खेती में आधुनिकता लाना एक मार्ग है, soil health card के द्वारा जमीन की जांच हो, परख हो और किसान को पूरी उसकी मदद मिले, इस काम को बल देने के दिशा में काम कर रहे हैं। 

उत्‍तर प्रदेश में भी नई सरकार बनने के बाद जिस तेजी से किसानों को जिस प्रकार से soil health card देने का काम चला है, वो आने वाले दिनों में हमारे किसानों की भलाई के लिए काम आने वाला है। 

उसी प्रकार से हम में से कोई गंदगी में जीना पसंद नहीं करता है। कोई इंसान नहीं होगा जो गंदगी को नफरत नहीं करता है। हर किसी को गंदगी के प्रति नफरत है। लेकिन स्‍वच्‍छता ये हमारी जिम्‍मेदारी है, ये स्‍वभाव हमारे देश में पनपा नहीं है। हम गंदगी करते हैं, स्‍वच्‍छता कोई और करेगा; इसी हमारी मानसिकता का परिणाम है कि हमें भारत को जैसा स्‍वच्‍छ बनाना चाहिए, हमारे गांवों को जैसा स्‍वच्‍छ बनाना चाहिए, हमारे नगरों को जैसा स्‍वच्‍छ बनाना चाहिए; हम नहीं बना पा रहे हैं। आप में से कोई इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि स्‍वच्‍छता, ये हर नागरिक की जिम्‍मेवारी है। स्‍वच्‍छता, ये हर परिवार की जिम्‍मेवारी है और इसलिए ये स्‍वच्‍छता, ये सिर्फ इसलिए अच्‍छा गांव लगे, अच्‍छा मोहल्‍ला लगे; इतने से काफी नहीं है। स्‍वच्‍छता हमारे आरोग्‍य के लिए बहुत जरूरी है। भांति-भांति की जो बीमारियां बढ़ रही हैं, उसके मूल में गंदगी होती है। 

अभी यूनिसेफ ने 10,000 परिवारों का सर्वे किया भारत में। Toilet बनाने वाली बात को लेकर सर्वे किया और मैंने कल एक अखबार में पढ़ा कि यूनिसेफ ने कहा है, अगर toilet घर में है तो सालाना 50,000 रुपया जो बीमारी के पीछे खर्च होता है, वो बच जाता है। आज मुझे यहां पड़ोस में ही एक छोटे से गांव में toilet बनाने के काम करने का सौभाग्‍य मिला। और गांव के लोगों ने तय किया है कि वे 2 अक्‍तूबर तक गांव को open defecation free बनाएंगे। गांव का एक भी व्‍यक्ति 2 अक्‍तूबर के बाद खुले में शौच करने नहीं जाएगा; ये संकल्‍प गांव के लोगों ने लिया है। मुझे खुशी हुई कि नवरा‍त्रि के इस पावन पर्व में मुझे शौचालय की ईंट रखने का सद्भाग्‍य मिला; मेरे लिए वह भी एक पूजा है। स्‍वचछता मेरे लिए पूजा है, स्‍वच्‍छता मेरे देश में गरीबों को बीमारी से मुक्‍त कराएगी। स्‍वच्‍छता मेरे देश में गरीबों को आरोग्‍य के कारण जो आर्थिक बोझ आता है, उससे मुक्ति दिलाएगी। और इसलिए ये गरीबों की भलाई करने का मेरा अभियान है और उसमें जो लोग साथ दे रहे हैं, मैं उनको बधाई देता हूं। 

आज मुझे खुशी हुई, सामान्‍य रूप से हमारे देश में शौचालय शब्‍द प्रचलित है। लेकिन आज मैंने जिस गांव में जा करके शौचालय की नींव रखी; वहां जितने शौचालय बने हुए थे उस पर लिखा हुआ है, इज्‍जतघर। ये शब्‍द मुझे इतना अच्‍छा लगा, ये शौचालय सच्‍चेमुच में एक इज्‍जतघर है; खास करके हमारी बहन-बेटियों के लिए ये इज्‍जतघर है। और जहां इज्‍जतघर है, वहां घर की भी इज्‍जत है। जहां इज्‍जतघर है, वहां गांव की भी इज्‍जत है और इसलिए ये इज्‍जतघर शब्‍द देने के लिए, शौचालय को इज्‍जतघर से पहचानने के लिए, मैं उत्‍तर प्रदेश सरकार को इस काम के लिए भी बधाई देता हूं। उन्‍होंने शौचालय की प्रतिष्‍ठा बढ़ा दी है। इज्‍जतघर नाम आने वाले दिनों में जो भी इज्‍जत के लिए जागृत है, जिसको भी इज्‍जत की चिंता है, वो जरूर इज्‍जतघर बनाएगा, वो जरूर इज्‍जत का उपयोग करेगा और इज्‍जतवान बनेगा, ऐसा मेरा विश्‍वास है। 

भाइयो-बहनों, हमारे देश में आज भी करोड़ों परिवार ऐसे हैं, उनके पास रहने के लिए अपना घर नहीं है, अपनी छत नहीं है। वे ऐसे गुजारा करते हैं कि जो किसी भी इंसान के लिए बहुत ही दयनीय होता है। भाइयो, बहनों, ये हमारा दायित्‍व है कि हम- हमारे गरीब से गरीब व्‍यक्ति को एक छत दें, गरीब से गरीब को रहने के लिए घर दें। 

और इसलिए भाइयो, बहनों, हमने एक बहुत बड़ा बीड़ा उठाया है। मैं जानता हूं जो काम हमने उठाया है, बहुत मुश्किल काम है। लेकिन अगर मुश्किल काम मोदी नहीं करेगा तो कौन करेगा? और इसलिए भाइयो, हमने तय किया है, 2022-भारत की आजादी के 75 साल होंगे, हिन्‍दुस्‍तान के हर गरीब को उसका घर देंगे। चाहे गरीब शहर में रहने वाला हो, चाहे गरीब गांव में रहने वाला हो। जिसके पास भी घर नहीं होगा, उसको घर देने का बहुत बड़ा बीड़ा हमने उठाया है। और जब करोड़़ों की तादाद में घर बनेंगे, एक प्रकार से भारत में इतने घर बनाने हैं, यूरोप का एक जैसे नया छोटा देश हमें हिन्‍दुस्‍तान में बनाना है; इतनी संख्‍या में हमें नए घर बनाने हैं। और जब नए घर बनेंगे; ईंटा लगेगी, सीमेंट लगेगा, लोहा लगेगा, लकड़़ी लगेगी, नए-नए लोगों को रोजगार मिलेगा, मिस्‍त्री को काम मिलेगा, एक रोजगार का नया अवसर पैदा होगा जब करोड़ों-करोड़ों घर बनेंगे। 

आज मुझे खुशी है कि उत्‍तर प्रदेश में पहले जो सरकार थी उसको हम चिट्ठियां लिखते रहते थे। हम कहते थे कि आप हमें सूची दो, लिस्‍ट बनाओ, आपके राज्‍य में कितने परिवार हैं जिनके पास घर नहीं है; भारत सरकार योजना बनाना चाहती है। मुझे दुख के साथ कहना पड़ता है कि पिछली सरकार, उसको गरीबों के घर बनाने में रुचि नहीं थी। हमने इतना दबाव डाला, इतना दबाव डाला, तब जा करके मुश्किल से 10,000 लोगों की सूची दी। लेकिन जब योगीजी की सरकार आई तो धड़ाधड़ उन्‍होंने काम शुरू किया और आज लाखों की तादाद में नाम उन्‍होंने register करवा दिए। इतना ही नहीं, आज मुझे जिनको घर बनने वाले हैं, उनके लिए राशि देने का भी मुझे सौभाग्‍य मिला।

भाइयो, बहनों, चाहे स्‍वच्‍छता की बात हो, चाहे गांवों में बिजली पहुंचाने की बात हो, चाहे स्‍कूलों में toilet बनाने की बात हो, चाहे गांव को खुले में शौच करने से मुक्‍त करने की बात हो, चाहे घर-घर में बिजली पहुंचाने की बात हो, चाहे घर-घर में लोगों को शुद्ध पीने का पानी पहुंचाने की बात हो, ये सारे काम ऐसे हैं जिसकी तरफ पहले हमारे देश में उदासीनता रही।

अगर मेरे गांव, गरीब किसान की जिंदगी बदलती है, हमारे मध्‍यमवर्गीय परिवार की जिंदगी बदलती है, तो देश हम जैसा बनाना चाहते हैं, वैसा बनके रहेगा और उसकी पहली शर्त है हमारे मध्‍यमवर्गीय परिवारों को मदद मिले। हमारे गरीब परिवारों को मदद मिले, उनकी जिंदगी में बदलाव आए। और इसलिए हमने उन सारी योजनाओं को बदल दिया है, उन सारी योजनाओं को ताकत दी है, जिसके कारण हमारे देश में एक बहुत बड़ा बदलाव आए।

भाइयो, बहनों, बनारस में भी स्‍वच्‍छता को ले करके कल कई project को लोकार्पण करने का मुझे अवसर मिला। करीब 600 करोड़ रुपयों की लागत से वहां पर sewage treatment plant, और हमने size इतनी बनाई है कि आज से 20 साल के बाद भी बनारस का विकास-विस्‍तार होगा तो भी ये व्‍यवस्‍था कम नहीं पड़ेगी, 20 साल के बाद भी कम नहीं पड़ेगी, इतना बड़ा काम हमने तय किया है। 

हमने कूड़े-कचरे को waste में से wealth, इस पर भी बल दिया है। और waste में से wealth का बल देने के साथ-साथ हमने ये तय किया है कि कूड़े-कचरे से बिजली उत्‍पादन करने का काम किया जाएगा और कूड़े-कचरे से बिजली उत्‍पादन करके 40 हजार घरों में बिजली पहुंचा पाएंगे। हमने एक LED bulb का अभियान चलाया। अकेले काशी में जितने LED bulb लोगों के घरों में लगे हैं, इसके कारण हर परिवार का बिजली का बिल कम हुआ है। और जब मैंने हिसाब लगाया तो अफसरों ने मुझे बताया, अकेले काशी में जिन्‍होंने LED bulb लगाया है, उनका जो बिजली का बिल कम होगा, वो साल भर में हर व्‍यक्ति के पैसे जो बचेंगे, उसका total होगा सवा सौ करोड़ रुपया। आप कल्‍पना कर सकते हैं, सामान्‍य मानवी की जेब में पैसे बचें, किसी के 500 बचेंगे, किसी के 1000 बचेंगे, किसी को 250 बचेंगे, और पूरे शहर के सवा सौ करोड़ रुपया बचना, ये अपने-आप में गरीब और मध्‍यम वर्ग के बोझ को कम करने का हमारा उत्‍तम प्रयास है। 

इतना ही नहीं, काशी में जो street light लगी है, वो भी अब LED bulb लगा है। और काशी में street light लगने के कारण, LED bulb के कारण, अकेले काशी में करीब-करीब 13 करोड़ रुपयों का‍ बिजली का बिल कम हुआ है। काशी नगर-निगम के 13 करोड़ रुपया बचे हैं। इन 13 करोड़ रुपयों का उपयोग अब काशी के विकास के लिए और कामों में होगा। सरल उपाय, सिर्फ पुराने लट्टू को बदल के LED का लट्टू लगा दिया, और सवा सौ करोड़ रुपया नागरिकों के, 13 करोड़ रुपया नगर-निगम के, ये बच जाना, अपने-आप में हम किस प्रकार से स्विचिता ला रहे हैं। 

भाइयो, बहनों, काला धन हो, भ्रष्‍टाचार हो, बेईमानी हो; उसके खिलाफ मैंने एक बहुत बड़ी लड़ाई छेड़ी है। इस देश के सामान्‍य ईमानदार आदमी को इसलिए मुसीबत झेलनी पड़ती है क्‍योंकि बेईमान, ईमानदार की इमानदारी को लूट रहे हैं। और इसलिए भाइयो, बहनों, ईमानदारी का ये अभियान आज एक उत्‍सव के रूप में पनप रहा है। जिस प्रकार से जीएसटी में छोटे-छोटे व्‍यापारी भी जुड़ रहे हैं,‍ जिस प्रकार से आधार के साथ लोग जुड़ रहे हैं, और जो पैसे कहीं निगल जाते थे, वो सारे पैसे, जनता के पाई-पाई का खर्चा, जनता की भलाई के लिए होगा; ये काम हमने करना प्रारंभ किया है। बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। और इसलिए मेरे भाइयो, बहनों, यहां के गांव, गरीब और किसान का विकास, हमारे शहरों का विकास; विकास, एक मात्र मंत्र ले करके हम चल रहे हैं, और इतनी बड़ी तादाद में आ करके आप ने आशीर्वाद दिया, मैं हृदय से आपका आभार व्‍यक्‍त करता हूं। 

हमारे महेन्‍द्र पांडे जी का ये संसदीय क्षेत्र है और जो ऊर्जा, जो उत्‍साह और उमंग आपने दिखाया है, इसके लिए मैं आपका हृदय से आभार व्‍यक्‍त करता हूं। मैं फिर एक बार योगी सरकार के महत्‍वपूर्ण कदमों की बधाई देता हूं, और जिस सफलतापूर्वक छह महीने के भीतर-भीतर उन्‍होंने उत्‍तर प्रदेश में बदलाव लाने का बीड़ा उठाया है, सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं; उनको मैं बहुत-बहत बधाई देता हूं, बहुत-बहत धन्‍यवाद देता हूं।

मेरे साथ जोर से बोलिए- भारत माता की – जय 

पूरी ताकत से बोलिए – भारत माता की – जय

भारत माता की – जय 

भारत माता की – जय 

भारत माता की – जय 

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।