The unity of OBCs, SCs and STs is troubling Congress, and therefore they want the communities to fight each other: PM Modi in Pune
To empower the people of Pune, infrastructure, investment and industry - all three are required. We have worked on every aspect of it: PM Modi

भारत माता की जय,
भारत माता की जय,
भारत माता की जय।

आमचे आराध्यदैवत// छत्रपति शिवाजी महाराज// छत्रपति संभाजी महाराज// यांना मी //कोटि कोटि नमन करतो। अष्टविनायकाला //नमन करतो। पुण्यातील //लाडक्या बहिणी // आणि लाडक्या//भावांना माझा नमस्कार।

मैं देख रहा हूं कि वहां कोई सज्जन, हमारी मां की बहुत बढ़िया चित्र बनाकर लाए हैं। ये कोई सज्जन हैं जो मोदी को भी उठाकर खड़े हो गए हैं। मैं आपका बहुत आभारी हूं। ये बच्चे भी बहुत कुछ बनाकर ले आए हैं। कोई इनको कलेक्ट कर ले भाई। जो लाएं हैं। पीछे अपना नाम-पता लिख दें, ताकि मैं आपको चिट्ठी भेजूंगा। आपका ये प्यार मेरे लिए बहुत बड़ी पूंजी है। ये जो बाकी लोग बैनर लेकर खड़े हैं, पीछे वालों को दिखता नहीं है। आप तो सब समझदार हैं, हां, शाबाश! ये जो सज्जन लाएं हैं, जरा कोई कलेक्ट कर ले उनसे, पीछे। ताकि पीछे लोग परेशान न हों। आप अपना अता-पता लिख देना, मैं जरूर आपको चिट्ठी भेजूंगा। मैं आपका बहुत आभारी हूं। आपके इस प्यार के लिए।

साथियों,

मैं पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाके में गया हूं। और मैं विश्वास से कह सकता हूं कि ऐसा भरपूर जनसमर्थन पूरे महाराष्ट्र में और आज पुणे का ये स्नेह और प्यार। और मुझे यहां आने में देर हुई, इसलिए नहीं कि मैं देर से आया था, पूरे रास्ते भर इतनी तादाद में लोग खड़े थे कि उनको नमस्ते करते-करते आने में भी...मैं शायद फिर भी उन सबको न्याय नहीं कर पाया। लेकिन जो पूरे रास्ते भर जो मैंने उत्साह और उमंग देखा, नौजवानों का समर्थन देखा। साथियों, ये बता रहा है… महाराष्ट्र में फिर एक बार...महायुति सरकार। महाराष्ट्र में फिर एक बार... महाराष्ट्र में फिर एक बार...।

साथियों,

पुणे और बीजेपी का रिश्ता, विचार, संस्कार और आस्था का रिश्ता है। पुणे ने हमेशा बीजेपी के विचार और विज़न का भरपूर समर्थन किया है। मैं इस विश्वास के लिए पुणे की जनता का हृदय से आभारी हूं। मैं आपको ये भरोसा दिलाने आया हूं। महायुति की नई सरकार पुणे और महाराष्ट्र के विकास के लिए और तेजी से काम करेगी। आने वाले 5 वर्ष पुणे के विकास की नई उड़ान के वर्ष होंगे।

साथियों,

पुणे के लोगों को सशक्त बनाने लिए इंवेस्टमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री तीनों की जरूरत है। हमने इसके हर पहलू पर काम किया है। पिछले 10 वर्षों में विदेशी निवेश में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। औऱ पिछले ढाई वर्षो में जो भी कंपनी निवेश के लिए भारत आ रही है, उसकी पसंद की लिस्ट में हमारा महाराष्ट्र सबसे ऊपर है। पुणे और इस क्षेत्र को इस निवेश का एक बहुत बड़ा हिस्सा मिल रहा है। ये निवेश जब हमारे इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी क्षेत्रों में आया, तो यहां कंपनियों की संख्या बढ़ी। यहां मौजूदा कंपनियों का विस्तार भी हुआ। ये निवेश जब स्टार्टअप में हुआ, तो पुणे के उद्यमशील युवाओं को इससे लाभ हुआ, युवाओं के लिए भी रोजगार के अनगिनत अवसर पैदा हुए। पुणे का ऑटोमोबाइल उद्योग तो पूरे देश में हमेशा से ही धाक जमाता रहा है। यहां हो रहे निवेश ने, इस सेक्टर के लिए भी संभावनाओं के नए द्वार खोले हैं।

साथियों,

पुणे की कनेक्टिविटी को लेकर भी महायुती की सरकार बहुत गंभीरता से काम कर रही है। आपकी आकांक्षाएं, मेरे लिए आपका आदेश है। आपके सपने, मेरे लिए दिन रात मेहनत की प्रेरणा हैं। आपकी आवश्यकताएं, मेरी सरकार की योजनाओं का आधार हैं। आपका जीवन आसान हो, ये मेरी प्राथमिकता है, ये महायुति की प्राथमिकता है। इसलिए आज पुणे में मेट्रो रेल सेवा का लगातार विस्तार हो रहा है। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से स्वारगेट सेक्शन रूट पर मेट्रो चलनी शुरू हो गई है। स्वारगेट-कात्रज सेक्शन रूट पर तेजी से काम हो रहा है। ट्रैफिक की गति बढ़ाकर नई संभावनाओं को नई उड़ान देना, ये हमारा संकल्प है। इसके लिए इंट्रा-सिटी और इंटरसिटी, दोनों नेटवर्क पर काम हो रहा है। पुणे की ईस्ट और वेस्ट आउटर रिंग रोड पर भी 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए जा रहे हैं। खोपोली-खंडाला मिसिंग लिंक के लिए साढ़े 6 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च किए जाएंगे। पुणे आउटर रिंग रोड पर भी साढ़े 10 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। हम पुणे को 21वीं सदी के वेल कनेक्टेड सिटी बनाने की ओर आगे बढ़ रहे हैं।

साथियों,

आज कार्तिक एकादशी है। पंढरपुर में यात्रा है, तो पालखी मार्ग की चर्चा भी स्वाभाविक हो जाती है। जगदगुरु तुकाराम महाराज पालखी मार्ग और संत ज्ञानेश्वर महाराज पालखी मार्ग का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन मार्गों को तैयार करने में 11 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। आमचा वारकर्याणसाठी ही// आमची समर्पित सेवा आहे।

साथियों,

महाराष्ट्र में विकास कार्यों की ये गति अभूतपूर्व है। लेकिन, आपको याद रखना है, महायुति से पहले महाराष्ट्र में जो लोग सरकार चला रहे थे, उनके पास आपको बताने के लिए एक काम नहीं है। अघाड़ी के ढाई साल तो हमारे प्रोजेक्ट्स पर रोक लगाने में ही बीत गए। यही कांग्रेस और उसके साथियों का कल्चर है। इसीलिए, महाराष्ट्र भी जान गया है, विकास का केवल एक ही विकल्प है- महायुति की सरकार! भाजपा-महायुति //आहे// तर गति आहे// महाराष्ट्राची// प्रगति आहे।

साथियों,

आज महाराष्ट्र के लोग कांग्रेस की करतूतों का कालाचिट्ठा पड़ोसी राज्य कर्नाटका में देख रहे हैं। कर्नाटक में कांग्रेस ने झूठ का वही टेप रेकॉर्ड बजाकर वोट मांगे! हवा-हवाई वादे किए! सरकार बनी, तो कांग्रेस ने हाथ खड़े कर दिये। अब वादे पूरे करने की जगह कांग्रेस ने जनता से वसूली का अभियान चलाया हुआ है। कर्नाटक में आए दिन कोई न कोई घोटाला सामने आ रहा है। यानी, कर्नाटक में कांग्रेस जनता को खुलेआम लूट रही है। आरोप है कि लूट का यही पैसा महाराष्ट्र में भेजकर चुनाव लड़वाया जा रहा है। अगर हमें महाराष्ट्र को बचाना है, तो कांग्रेस नाम की इस आफत को दूर ही रखना है।

साथियों,

पूरा देश इन दिनों कांग्रेस का एक और विश्वासघात देख रहा है। कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा में आर्टिकल-370 फिर से लागू करने का प्रस्ताव पास किया है। जो लोग संविधान की किताबें देश को दिखा रहे हैं और महाराष्ट्र में कोरे कागजों वाली किताब बांट रहे हैं। जरा मैं उनको पूछना चाहता हूं। छह-सात दशक तक उन्होंने देश पर राज किया है। जरा बताएं, बाबासाहेब आंबेडकर ने बनाया संविधान पूरे हिंदुस्तान में लागू क्यों नहीं हुआ। छह-छह सात-सात दशक तक बाबासाहेब का संविधान पूरे हिंदुस्तान में लागू नहीं था। आपको भी सुनकर शायद आश्चर्य होता होगा, लेकिन ये सच्चाई है। जम्मू-कश्मीर में अलग विधान था। भारत का संविधान वहां नहीं चलता था। वहां का विधान अलग, वहां का प्रधान अलग, वहां का निशान अलग, छह-छह सात-सात दशक तक। पहली बार बाबासाहेब का संविधान जम्मू-कश्मीर में तब पहुंचा जब आपने मोदी को सेवा का अवसर दिया। इन्होंने 370 की ऐसी दीवार खड़ी कर दी थी। भारत का संविधान वहां घुस नहीं सकता था।

आपके आशीर्वाद से 140 करोड़ देशवासियों की प्रबल इच्छा से आपके इस सेवक मोदी ने 370 को जमीन में गाड़ दिया है। 370- जिसने कश्मीर को भारत से काटने का काम किया। 370- जिसने कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववाद को हवा दी, 370- जिसने कश्मीर में भारत का संविधान नहीं लागू होने दिया। बीजेपी ने उसे खत्म करके कश्मीर में तिरंगा फहराया है। हमने कश्मीर में शांति बहाली की, अलगाववादियों के मंसूबों को नाकाम किया। जिस लाल चौक में कभी हिंदुस्तान के तिरंगे को जूतों के नीचे रौंदा जाता था आज शान से लाल चौक में तिरंगा झंडा फहरता है। इस बार दिवाली में लोगों ने देखा है, कश्मीर के लाल चौक में दीये जगमगा रहे थे। हजारों दीये जगमगा रहे थे और लोग बड़ी शान से दिवाली का त्योहार मना रहे थे। लेकिन, कांग्रेस और उसके सभी चट्टे-बट्टे साथी फिर से जम्मू-कश्मीर में 370 लागू करने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव पास कर रही है। मैं पुणे के मेरे देशभक्त भाई-बहन मैं आपसे पूछता हूं और मैं आशा करता हूं कि आप पूरी ताकत से जवाब देंगे। कश्मीर में फिर से 370 लागू करना, ये किसकी मांग है? ये किसकी भाषा है? साथियों, पिछले 70 साल से ये भाषा सिर्फ और सिर्फ पाकिस्तान बोलता रहा है। और आज जो भाषा पाकिस्तान बोलता था वो भाषा कांग्रेस बोल रही है। उसके चट्टे-बट्टे बोल रहे हैं।

साथियों,

शाम का समय है, पुणे की नगरी है, देशवासियों को 370 का हमारा जो निर्णय है, जिसको उलटने का कांग्रेस खेल खेल रही है। उनको दीया दिखाना जरूरी है। आप अपना मोबाइल फोन निकालिए और अपने मोबाइल फोन से फ्लैश लाइट चलाइए, मंच वाले भी चलाएं। देख लें देश के लोग ये 370 हटाने का समर्थन है। देश अब कश्मीर को दूर रखने के लिए तैयार नहीं है। ये रोशनी दिखा रही है कि मेरे महाराष्ट्र के लोग उनकी देशभक्ति को कोई चुनौती नहीं दे सकता है। बोलिए, भारत माता की, भारत माता की, भारत माता की। साथियों, जम्मू-कश्मीर में 370 की वापसी की बात ना कभी ये देश स्वीकार करेगा और मेरा महाराष्ट्र, छत्रपति शिवाजी की धरती कभी स्वीकार नहीं कर सकती।

साथियों,

भाजपा-NDA की सरकार ने हमेशा मिडिल क्लास को प्राथमिकता दी है। मैं ये मानता हूं कि मिडिल क्लास देश की रीढ़ होता है। ये मिडिल क्लास ही है, जो ये वेल्थ क्रिएट करता है, वेल्थ जेनरेट करता है। अगर आज भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है तो इसमें सबसे बड़ा योगदान हमारे मध्यम वर्ग का ही है। मध्यम वर्ग प्रगति कर रहा है, तभी देश प्रगति कर रहा है। इसीलिए, बीते 10 वर्षों में हमने मध्यम वर्ग को ध्यान में रखते हुए नई नीतियां बनाईं, नए फैसले लिए! आज 7 लाख रुपए तक इनकम टैक्स ज़ीरो कर दिया गया है। सालाना 10-12 लाख रुपए तक पर टैक्स को बहुत कम किया गया है। इसका बहुत अधिक लाभ पुणे जैसे हमारे शहरों में काम करने वाले प्रोफेशनल्स को मिला है। हमारा ये भी प्रयास रहा है कि मिडिल क्लास को बीमारियों के इलाज पर कम से कम खर्च करना पड़े। पीएम जनऔषधि केंद्र में 80 परसेंट डिस्काउंट पर दवाओं से मिडिल क्लास के 30 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की बचत हुई है। हार्ट के स्टेंट्स, नी इंप्लांट्स, इनको सस्ता करना, इस फैसले से मेरे मिडिल क्लास के भाई-बहनों को बहुत फायदा हुआ है। इससे लोगों के 85 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा बचत हुई है। और अब तो हमने आयुष्मान योजना में भी मिडिल क्लास के बुजुर्गों को भी कवर कर लिया है। इसका बहुत बड़ा फायदा पुणे जैसे शहरों में रहने वाले 70 वर्ष की आयु से ऊपर के सीनियर सिटिजन्स को होगा। यहां उपस्थित मैं आप सबसे कहना चाहता हूं आपके परिवार में माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी, चाचा-चाची जो भी 70 साल से ऊपर के हैं, और अगर उनको बीमारी में कोई खर्च होता है, पहले वो जिम्मा आपके सिर पर था अब वो जिम्मेवारी आपकी नहीं है, ये उनका बेटा मोदी संभालेगा। आयुष्मान वय वंदना कार्ड से अब उन्हें 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। लोकसभा चुनाव के दौरान मैंने ये गारंटी आपको दी थी। और अब मोदी ने अपनी गारंटी पूरी करके दिखाई है।

साथियों,

हमारी सरकार गरीबों को तो पक्के घर बनाकर दे ही रही है, मिडिल क्लास के घरों के लिए भी सब्सिडी दे रही है। हमने रेरा जैसा कानून बनाकर मिडिल क्लास के सपनों के घरों को सुरक्षित किया है। साथियों, मिडिल क्लास का एक प्रमुख खर्च बच्चों की एजुकेशन पर होता है। हाल में ही हमने पीएम विद्यालक्ष्मी योजना शुरु की है। इस स्कीम के तहत, जो भी युवा हायर एजुकेशन में एडमिशन लेना चाहता है, बेटा हो या बेटी, बिना गारंटी के, अब आपको कुछ भी गिरवी नहीं रखना पड़ेगा, आपकी सबसे बड़ी गारंटी, आपका सेवक मोदी है। 10 लाख रुपए का लोन बिना गारंटी, आपके बच्चों की पढ़ाई के लिए और ये लोन बहुत सस्ता होगा और इसमें ब्याज पर छूट भी होगी। मिडिल क्लास परिवार बच्चों को मेडिकल की पढ़ाई के लिए बाहर भेजने में बहुत खर्च करते हैं। बीते 10 साल में मेडिकल लाइन में हमने एक लाख नई सीटें जोड़ी हैं। अब हमने तय किया है कि आने वाले 5 सालों में मेडिकल की 75 हज़ार नई सीटें और जोड़ी जाएंगी। इससे भी मिडिल क्लास के बच्चों का बहुत पैसा बचेगा, उन्हें पढ़ने के लिए बाहर नहीं जाना होगा।

साथियों,

पुणे तो स्टार्टअप्स का हब है। हाल में हमने स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए बहुत सारे कदम उठाए हैं। हमने स्पेस स्टार्टअप्स के लिए 1 हज़ार करोड़ रुपए का स्पेशल फंड बनाने का निर्णय लिया है। जो युवा साथी रिसर्च में जाना चाहते हैं, उनके लिए भी एक बहुत बड़ा रिसर्च फंड हमने बनाया है। नौजवानों को नौकरियां मिले, इसके लिए हमने विशेष पीएम पैकेज घोषित किया है। इसके तहत बड़ी-बड़ी कंपनियों में इंटर्नशिप की योजना शुरु भी हो चुकी है। कंपनियों में पहली जॉब पर प्रोत्साहन देने का काम भी हमारी सरकार कर रही है।

साथियों,

पुणे, महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी है। महायुति की सरकार ने महाराष्ट्र की संस्कृति के संरक्षण और प्रसार के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। महाराष्ट्र के लोग दशकों से मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा देने की मांग कर रहे थे। और मैं मानता हूं अगर पूरे हिंदुस्तान में मराठी भाषा के अभिजात दर्जे से पुणे को जितनी खुशी हुई होगी न शायद किसी और को नहीं हुई होगी। कांग्रेस की सरकारों ने, अघाड़ी के नेताओं ने हमेशा इसकी अनदेखी की। हमारी सरकार ने मराठी को आभिजात भाषा का दर्जा देकर अपना दायित्व निभाया है। हम महाराष्ट्र की विरासत को संरक्षित करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। जहां क्रांतिज्योति सावित्री बाई फुले ने लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोला था, वहां सावित्रीबाई फुले स्मारक बनाया जा रहा है। तुलापुर में धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज समाधिस्थल पर भव्य स्मारक बनाया जा रहा है। श्री संत संताजी जगनाडे महाराज समाधिस्थल को नए सिरे से विकसित किया जा रहा है। आंबेगाव शिवसृष्टि के काम को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। महायुति की सरकार ने आद्य क्रांतिगुरु लहुजी वस्ताद सालवे संग्रहालय बनाने का फैसला भी किया है। साथियों, ये काम बहुत पहले ही होने चाहिए थे। लेकिन विदेशी मानसिकता की गुलाम कांग्रेस ने महाराष्ट्र की संस्कृति से अपनी नफरत के कारण ये काम नहीं होने दिया।

साथियों,

कांग्रेस और उसके जैसे दलों ने हमेशा महाराष्ट्र का अपमान किया है। ये धरती छत्रपति शिवाजी महाराज की धरती है। लेकिन, कांग्रेस और उसके साथी कसीदे औरंगजेब की शान में पढ़ते हैं। ये लोग वीर सावरकर को गाली देते हैं। बाला साहब ठाकरे जैसे महाराष्ट्र के गौरव की सराहना करने में इनके मुंह पर ताला लग जाता है। और मैंने इनको चुनौती दी है। अघाड़ी वाले जरा मेरी चुनौती को स्वीकर करें। उनके युवराज के मुंह से वीर सावरकर की तारीफ में एक भाषण करवा दें जरा। मैं अघाड़ी के साथियों को कहता हूं अगर उनमें दम हो तो उनके युवराज के मुंह से बालासाहेब ठाकरे की जरा तारीफ करवाकर सुनाएं महाराष्ट्र को।

साथियों,

कांग्रेस एक ऐसी पार्टी है, जिसके पास न नीति है, न नीयत है, और नैतिकता का नामोनिशान नहीं है। कांग्रेस को केवल और केवल सत्ता चाहिए! सत्ता के लिए कांग्रेस ने देश का विभाजन करवाया। कांग्रेस ने देश को मत-मजहब, भाषा, और इलाके के आधार पर बांटा! सत्ता के लिए इन्होंने तुष्टीकरण का खतरनाक खेल खेला। और अब, वही कांग्रेस सत्ता के लिए दलित, पिछड़ा और आदिवासी को तोड़ने और बांटने का खेल खेल रही है। कांग्रेस के लोग SC, ST, OBC को अलग-अलग जातियों में बांटकर उनकी एकजुटता तोड़ना चाहते हैं। कांग्रेस ST की जातियों को आपस में लड़ाना चाहती है। कांग्रेस SC की जातियों को आपस में लड़ाना चाहती है। कांग्रेस OBC की जातियों को आपस में लड़ाना चाहती है। अलग-अलग जातियों को आपस में लड़ाकर, कांग्रेस पहले उन्हें कमजोर करेगी और बाद में उनका आरक्षण छीन लेगी। इसीलिए, आप सभी को बहुत सावधान रहना है। हमें याद रखना है- हम एक रहेंगे, तो सेफ़ रहेंगे। हम एक रहेंगे, तो... हम एक रहेंगे, तो...।

साथियों,

ये चुनाव महाराष्ट्र के साथ-साथ पूरे देश को दिशा देने का चुनाव है। अभी हाल ही में हरियाणा ने विकसित भारत के सपने पर मुहर लगाई है। अब भारत विरोधी ताकतों को पूरी तरह से मिटाने की ज़िम्मेदारी मेरे महाराष्ट्र की है, मेरे पुणे की है। इसलिए, मेरा आग्रह है, 20 नवंबर को महायुति के उम्मीदवारों के लिए भारी संख्या में मतदान करें। आपका एक-एक वोट महाराष्ट्र के बेहतर भविष्य की गारंटी बनेगा। आप इतनी बड़ी तादाद में आए, हम सबको आशीर्वाद दिए, मैं आप सबका हृदय से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

मेरे साथ दोनों हाथ ऊपर करके पूरी ताकत से बोलिए,
भारत माता की जय, भारत माता की जय, आवाज उन लोगों तक जानी चाहिए, जिनकी डोरें 370 पर बैठे पड़े हैं।

भारत माता की जय,
भारत माता की जय,
भारत माता की जय ।
बहुत-बहुत धन्यवाद।

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Today, India is becoming the key growth engine of the global economy: PM Modi
December 06, 2025
India is brimming with confidence: PM
In a world of slowdown, mistrust and fragmentation, India brings growth, trust and acts as a bridge-builder: PM
Today, India is becoming the key growth engine of the global economy: PM
India's Nari Shakti is doing wonders, Our daughters are excelling in every field today: PM
Our pace is constant, Our direction is consistent, Our intent is always Nation First: PM
Every sector today is shedding the old colonial mindset and aiming for new achievements with pride: PM

आप सभी को नमस्कार।

यहां हिंदुस्तान टाइम्स समिट में देश-विदेश से अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित हैं। मैं आयोजकों और जितने साथियों ने अपने विचार रखें, आप सभी का अभिनंदन करता हूं। अभी शोभना जी ने दो बातें बताई, जिसको मैंने नोटिस किया, एक तो उन्होंने कहा कि मोदी जी पिछली बार आए थे, तो ये सुझाव दिया था। इस देश में मीडिया हाउस को काम बताने की हिम्मत कोई नहीं कर सकता। लेकिन मैंने की थी, और मेरे लिए खुशी की बात है कि शोभना जी और उनकी टीम ने बड़े चाव से इस काम को किया। और देश को, जब मैं अभी प्रदर्शनी देखके आया, मैं सबसे आग्रह करूंगा कि इसको जरूर देखिए। इन फोटोग्राफर साथियों ने इस, पल को ऐसे पकड़ा है कि पल को अमर बना दिया है। दूसरी बात उन्होंने कही और वो भी जरा मैं शब्दों को जैसे मैं समझ रहा हूं, उन्होंने कहा कि आप आगे भी, एक तो ये कह सकती थी, कि आप आगे भी देश की सेवा करते रहिए, लेकिन हिंदुस्तान टाइम्स ये कहे, आप आगे भी ऐसे ही सेवा करते रहिए, मैं इसके लिए भी विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

इस बार समिट की थीम है- Transforming Tomorrow. मैं समझता हूं जिस हिंदुस्तान अखबार का 101 साल का इतिहास है, जिस अखबार पर महात्मा गांधी जी, मदन मोहन मालवीय जी, घनश्यामदास बिड़ला जी, ऐसे अनगिनत महापुरूषों का आशीर्वाद रहा, वो अखबार जब Transforming Tomorrow की चर्चा करता है, तो देश को ये भरोसा मिलता है कि भारत में हो रहा परिवर्तन केवल संभावनाओं की बात नहीं है, बल्कि ये बदलते हुए जीवन, बदलती हुई सोच और बदलती हुई दिशा की सच्ची गाथा है।

साथियों,

आज हमारे संविधान के मुख्य शिल्पी, डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर जी का महापरिनिर्वाण दिवस भी है। मैं सभी भारतीयों की तरफ से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

Friends,

आज हम उस मुकाम पर खड़े हैं, जब 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। इन 25 सालों में दुनिया ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। फाइनेंशियल क्राइसिस देखी हैं, ग्लोबल पेंडेमिक देखी हैं, टेक्नोलॉजी से जुड़े डिसरप्शन्स देखे हैं, हमने बिखरती हुई दुनिया भी देखी है, Wars भी देख रहे हैं। ये सारी स्थितियां किसी न किसी रूप में दुनिया को चैलेंज कर रही हैं। आज दुनिया अनिश्चितताओं से भरी हुई है। लेकिन अनिश्चितताओं से भरे इस दौर में हमारा भारत एक अलग ही लीग में दिख रहा है, भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। जब दुनिया में slowdown की बात होती है, तब भारत growth की कहानी लिखता है। जब दुनिया में trust का crisis दिखता है, तब भारत trust का pillar बन रहा है। जब दुनिया fragmentation की तरफ जा रही है, तब भारत bridge-builder बन रहा है।

साथियों,

अभी कुछ दिन पहले भारत में Quarter-2 के जीडीपी फिगर्स आए हैं। Eight परसेंट से ज्यादा की ग्रोथ रेट हमारी प्रगति की नई गति का प्रतिबिंब है।

साथियों,

ये एक सिर्फ नंबर नहीं है, ये strong macro-economic signal है। ये संदेश है कि भारत आज ग्लोबल इकोनॉमी का ग्रोथ ड्राइवर बन रहा है। और हमारे ये आंकड़े तब हैं, जब ग्लोबल ग्रोथ 3 प्रतिशत के आसपास है। G-7 की इकोनमीज औसतन डेढ़ परसेंट के आसपास हैं, 1.5 परसेंट। इन परिस्थितियों में भारत high growth और low inflation का मॉडल बना हुआ है। एक समय था, जब हमारे देश में खास करके इकोनॉमिस्ट high Inflation को लेकर चिंता जताते थे। आज वही Inflation Low होने की बात करते हैं।

साथियों,

भारत की ये उपलब्धियां सामान्य बात नहीं है। ये सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है, ये एक फंडामेंटल चेंज है, जो बीते दशक में भारत लेकर आया है। ये फंडामेंटल चेंज रज़ीलियन्स का है, ये चेंज समस्याओं के समाधान की प्रवृत्ति का है, ये चेंज आशंकाओं के बादलों को हटाकर, आकांक्षाओं के विस्तार का है, और इसी वजह से आज का भारत खुद भी ट्रांसफॉर्म हो रहा है, और आने वाले कल को भी ट्रांसफॉर्म कर रहा है।

साथियों,

आज जब हम यहां transforming tomorrow की चर्चा कर रहे हैं, हमें ये भी समझना होगा कि ट्रांसफॉर्मेशन का जो विश्वास पैदा हुआ है, उसका आधार वर्तमान में हो रहे कार्यों की, आज हो रहे कार्यों की एक मजबूत नींव है। आज के Reform और आज की Performance, हमारे कल के Transformation का रास्ता बना रहे हैं। मैं आपको एक उदाहरण दूंगा कि हम किस सोच के साथ काम कर रहे हैं।

साथियों,

आप भी जानते हैं कि भारत के सामर्थ्य का एक बड़ा हिस्सा एक लंबे समय तक untapped रहा है। जब देश के इस untapped potential को ज्यादा से ज्यादा अवसर मिलेंगे, जब वो पूरी ऊर्जा के साथ, बिना किसी रुकावट के देश के विकास में भागीदार बनेंगे, तो देश का कायाकल्प होना तय है। आप सोचिए, हमारा पूर्वी भारत, हमारा नॉर्थ ईस्ट, हमारे गांव, हमारे टीयर टू और टीय़र थ्री सिटीज, हमारे देश की नारीशक्ति, भारत की इनोवेटिव यूथ पावर, भारत की सामुद्रिक शक्ति, ब्लू इकोनॉमी, भारत का स्पेस सेक्टर, कितना कुछ है, जिसके फुल पोटेंशियल का इस्तेमाल पहले के दशकों में हो ही नहीं पाया। अब आज भारत इन Untapped पोटेंशियल को Tap करने के विजन के साथ आगे बढ़ रहा है। आज पूर्वी भारत में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और इंडस्ट्री पर अभूतपूर्व निवेश हो रहा है। आज हमारे गांव, हमारे छोटे शहर भी आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रहे हैं। हमारे छोटे शहर, Startups और MSMEs के नए केंद्र बन रहे हैं। हमारे गाँवों में किसान FPO बनाकर सीधे market से जुड़ें, और कुछ तो FPO’s ग्लोबल मार्केट से जुड़ रहे हैं।

साथियों,

भारत की नारीशक्ति तो आज कमाल कर रही हैं। हमारी बेटियां आज हर फील्ड में छा रही हैं। ये ट्रांसफॉर्मेशन अब सिर्फ महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, ये समाज की सोच और सामर्थ्य, दोनों को transform कर रहा है।

साथियों,

जब नए अवसर बनते हैं, जब रुकावटें हटती हैं, तो आसमान में उड़ने के लिए नए पंख भी लग जाते हैं। इसका एक उदाहरण भारत का स्पेस सेक्टर भी है। पहले स्पेस सेक्टर सरकारी नियंत्रण में ही था। लेकिन हमने स्पेस सेक्टर में रिफॉर्म किया, उसे प्राइवेट सेक्टर के लिए Open किया, और इसके नतीजे आज देश देख रहा है। अभी 10-11 दिन पहले मैंने हैदराबाद में Skyroot के Infinity Campus का उद्घाटन किया है। Skyroot भारत की प्राइवेट स्पेस कंपनी है। ये कंपनी हर महीने एक रॉकेट बनाने की क्षमता पर काम कर रही है। ये कंपनी, flight-ready विक्रम-वन बना रही है। सरकार ने प्लेटफॉर्म दिया, और भारत का नौजवान उस पर नया भविष्य बना रहा है, और यही तो असली ट्रांसफॉर्मेशन है।

साथियों,

भारत में आए एक और बदलाव की चर्चा मैं यहां करना ज़रूरी समझता हूं। एक समय था, जब भारत में रिफॉर्म्स, रिएक्शनरी होते थे। यानि बड़े निर्णयों के पीछे या तो कोई राजनीतिक स्वार्थ होता था या फिर किसी क्राइसिस को मैनेज करना होता था। लेकिन आज नेशनल गोल्स को देखते हुए रिफॉर्म्स होते हैं, टारगेट तय है। आप देखिए, देश के हर सेक्टर में कुछ ना कुछ बेहतर हो रहा है, हमारी गति Constant है, हमारी Direction Consistent है, और हमारा intent, Nation First का है। 2025 का तो ये पूरा साल ऐसे ही रिफॉर्म्स का साल रहा है। सबसे बड़ा रिफॉर्म नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी का था। और इन रिफॉर्म्स का असर क्या हुआ, वो सारे देश ने देखा है। इसी साल डायरेक्ट टैक्स सिस्टम में भी बहुत बड़ा रिफॉर्म हुआ है। 12 लाख रुपए तक की इनकम पर ज़ीरो टैक्स, ये एक ऐसा कदम रहा, जिसके बारे में एक दशक पहले तक सोचना भी असंभव था।

साथियों,

Reform के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए, अभी तीन-चार दिन पहले ही Small Company की डेफिनीशन में बदलाव किया गया है। इससे हजारों कंपनियाँ अब आसान नियमों, तेज़ प्रक्रियाओं और बेहतर सुविधाओं के दायरे में आ गई हैं। हमने करीब 200 प्रोडक्ट कैटगरीज़ को mandatory क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर से बाहर भी कर दिया गया है।

साथियों,

आज के भारत की ये यात्रा, सिर्फ विकास की नहीं है। ये सोच में बदलाव की भी यात्रा है, ये मनोवैज्ञानिक पुनर्जागरण, साइकोलॉजिकल रेनसां की भी यात्रा है। आप भी जानते हैं, कोई भी देश बिना आत्मविश्वास के आगे नहीं बढ़ सकता। दुर्भाग्य से लंबी गुलामी ने भारत के इसी आत्मविश्वास को हिला दिया था। और इसकी वजह थी, गुलामी की मानसिकता। गुलामी की ये मानसिकता, विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में एक बहुत बड़ी रुकावट है। और इसलिए, आज का भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पाने के लिए काम कर रहा है।

साथियों,

अंग्रेज़ों को अच्छी तरह से पता था कि भारत पर लंबे समय तक राज करना है, तो उन्हें भारतीयों से उनके आत्मविश्वास को छीनना होगा, भारतीयों में हीन भावना का संचार करना होगा। और उस दौर में अंग्रेजों ने यही किया भी। इसलिए, भारतीय पारिवारिक संरचना को दकियानूसी बताया गया, भारतीय पोशाक को Unprofessional करार दिया गया, भारतीय त्योहार-संस्कृति को Irrational कहा गया, योग-आयुर्वेद को Unscientific बता दिया गया, भारतीय अविष्कारों का उपहास उड़ाया गया और ये बातें कई-कई दशकों तक लगातार दोहराई गई, पीढ़ी दर पीढ़ी ये चलता गया, वही पढ़ा, वही पढ़ाया गया। और ऐसे ही भारतीयों का आत्मविश्वास चकनाचूर हो गया।

साथियों,

गुलामी की इस मानसिकता का कितना व्यापक असर हुआ है, मैं इसके कुछ उदाहरण आपको देना चाहता हूं। आज भारत, दुनिया की सबसे तेज़ी से ग्रो करने वाली मेजर इकॉनॉमी है, कोई भारत को ग्लोबल ग्रोथ इंजन बताता है, कोई, Global powerhouse कहता है, एक से बढ़कर एक बातें आज हो रही हैं।

लेकिन साथियों,

आज भारत की जो तेज़ ग्रोथ हो रही है, क्या कहीं पर आपने पढ़ा? क्या कहीं पर आपने सुना? इसको कोई, हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कहता है क्या? दुनिया की तेज इकॉनमी, तेज ग्रोथ, कोई कहता है क्या? हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कब कहा गया? जब भारत, दो-तीन परसेंट की ग्रोथ के लिए तरस गया था। आपको क्या लगता है, किसी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ को उसमें रहने वाले लोगों की आस्था से जोड़ना, उनकी पहचान से जोड़ना, क्या ये अनायास ही हुआ होगा क्या? जी नहीं, ये गुलामी की मानसिकता का प्रतिबिंब था। एक पूरे समाज, एक पूरी परंपरा को, अन-प्रोडक्टिविटी का, गरीबी का पर्याय बना दिया गया। यानी ये सिद्ध करने का प्रयास किया गया कि, भारत की धीमी विकास दर का कारण, हमारी हिंदू सभ्यता और हिंदू संस्कृति है। और हद देखिए, आज जो तथाकथित बुद्धिजीवी हर चीज में, हर बात में सांप्रदायिकता खोजते रहते हैं, उनको हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ में सांप्रदायिकता नज़र नहीं आई। ये टर्म, उनके दौर में किताबों का, रिसर्च पेपर्स का हिस्सा बना दिया गया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने भारत में मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम को कैसे तबाह कर दिया, और हम इसको कैसे रिवाइव कर रहे हैं, मैं इसके भी कुछ उदाहरण दूंगा। भारत गुलामी के कालखंड में भी अस्त्र-शस्त्र का एक बड़ा निर्माता था। हमारे यहां ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीज़ का एक सशक्त नेटवर्क था। भारत से हथियार निर्यात होते थे। विश्व युद्धों में भी भारत में बने हथियारों का बोल-बाला था। लेकिन आज़ादी के बाद, हमारा डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम तबाह कर दिया गया। गुलामी की मानसिकता ऐसी हावी हुई कि सरकार में बैठे लोग भारत में बने हथियारों को कमजोर आंकने लगे, और इस मानसिकता ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े डिफेंस importers के रूप में से एक बना दिया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री के साथ भी यही किया। भारत सदियों तक शिप बिल्डिंग का एक बड़ा सेंटर था। यहां तक कि 5-6 दशक पहले तक, यानी 50-60 साल पहले, भारत का फोर्टी परसेंट ट्रेड, भारतीय जहाजों पर होता था। लेकिन गुलामी की मानसिकता ने विदेशी जहाज़ों को प्राथमिकता देनी शुरु की। नतीजा सबके सामने है, जो देश कभी समुद्री ताकत था, वो अपने Ninety five परसेंट व्यापार के लिए विदेशी जहाज़ों पर निर्भर हो गया है। और इस वजह से आज भारत हर साल करीब 75 बिलियन डॉलर, यानी लगभग 6 लाख करोड़ रुपए विदेशी शिपिंग कंपनियों को दे रहा है।

साथियों,

शिप बिल्डिंग हो, डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग हो, आज हर सेक्टर में गुलामी की मानसिकता को पीछे छोड़कर नए गौरव को हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने एक बहुत बड़ा नुकसान, भारत में गवर्नेंस की अप्रोच को भी किया है। लंबे समय तक सरकारी सिस्टम का अपने नागरिकों पर अविश्वास रहा। आपको याद होगा, पहले अपने ही डॉक्यूमेंट्स को किसी सरकारी अधिकारी से अटेस्ट कराना पड़ता था। जब तक वो ठप्पा नहीं मारता है, सब झूठ माना जाता था। आपका परिश्रम किया हुआ सर्टिफिकेट। हमने ये अविश्वास का भाव तोड़ा और सेल्फ एटेस्टेशन को ही पर्याप्त माना। मेरे देश का नागरिक कहता है कि भई ये मैं कह रहा हूं, मैं उस पर भरोसा करता हूं।

साथियों,

हमारे देश में ऐसे-ऐसे प्रावधान चल रहे थे, जहां ज़रा-जरा सी गलतियों को भी गंभीर अपराध माना जाता था। हम जन-विश्वास कानून लेकर आए, और ऐसे सैकड़ों प्रावधानों को डी-क्रिमिनलाइज किया है।

साथियों,

पहले बैंक से हजार रुपए का भी लोन लेना होता था, तो बैंक गारंटी मांगता था, क्योंकि अविश्वास बहुत अधिक था। हमने मुद्रा योजना से अविश्वास के इस कुचक्र को तोड़ा। इसके तहत अभी तक 37 lakh crore, 37 लाख करोड़ रुपए की गारंटी फ्री लोन हम दे चुके हैं देशवासियों को। इस पैसे से, उन परिवारों के नौजवानों को भी आंत्रप्रन्योर बनने का विश्वास मिला है। आज रेहड़ी-पटरी वालों को भी, ठेले वाले को भी बिना गारंटी बैंक से पैसा दिया जा रहा है।

साथियों,

हमारे देश में हमेशा से ये माना गया कि सरकार को अगर कुछ दे दिया, तो फिर वहां तो वन वे ट्रैफिक है, एक बार दिया तो दिया, फिर वापस नहीं आता है, गया, गया, यही सबका अनुभव है। लेकिन जब सरकार और जनता के बीच विश्वास मजबूत होता है, तो काम कैसे होता है? अगर कल अच्छी करनी है ना, तो मन आज अच्छा करना पड़ता है। अगर मन अच्छा है तो कल भी अच्छा होता है। और इसलिए हम एक और अभियान लेकर आए, आपको सुनकर के ताज्जुब होगा और अभी अखबारों में उसकी, अखबारों वालों की नजर नहीं गई है उस पर, मुझे पता नहीं जाएगी की नहीं जाएगी, आज के बाद हो सकता है चली जाए।

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि आज देश के बैंकों में, हमारे ही देश के नागरिकों का 78 thousand crore रुपया, 78 हजार करोड़ रुपए Unclaimed पड़ा है बैंको में, पता नहीं कौन है, किसका है, कहां है। इस पैसे को कोई पूछने वाला नहीं है। इसी तरह इन्श्योरेंश कंपनियों के पास करीब 14 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। म्यूचुअल फंड कंपनियों के पास करीब 3 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। 9 हजार करोड़ रुपए डिविडेंड का पड़ा है। और ये सब Unclaimed पड़ा हुआ है, कोई मालिक नहीं उसका। ये पैसा, गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों का है, और इसलिए, जिसके हैं वो तो भूल चुका है। हमारी सरकार अब उनको ढूंढ रही है देशभर में, अरे भई बताओ, तुम्हारा तो पैसा नहीं था, तुम्हारे मां बाप का तो नहीं था, कोई छोड़कर तो नहीं चला गया, हम जा रहे हैं। हमारी सरकार उसके हकदार तक पहुंचने में जुटी है। और इसके लिए सरकार ने स्पेशल कैंप लगाना शुरू किया है, लोगों को समझा रहे हैं, कि भई देखिए कोई है तो अता पता। आपके पैसे कहीं हैं क्या, गए हैं क्या? अब तक करीब 500 districts में हम ऐसे कैंप लगाकर हजारों करोड़ रुपए असली हकदारों को दे चुके हैं जी। पैसे पड़े थे, कोई पूछने वाला नहीं था, लेकिन ये मोदी है, ढूंढ रहा है, अरे यार तेरा है ले जा।

साथियों,

ये सिर्फ asset की वापसी का मामला नहीं है, ये विश्वास का मामला है। ये जनता के विश्वास को निरंतर हासिल करने की प्रतिबद्धता है और जनता का विश्वास, यही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। अगर गुलामी की मानसिकता होती तो सरकारी मानसी साहबी होता और ऐसे अभियान कभी नहीं चलते हैं।

साथियों,

हमें अपने देश को पूरी तरह से, हर क्षेत्र में गुलामी की मानसिकता से पूर्ण रूप से मुक्त करना है। अभी कुछ दिन पहले मैंने देश से एक अपील की है। मैं आने वाले 10 साल का एक टाइम-फ्रेम लेकर, देशवासियों को मेरे साथ, मेरी बातों को ये कुछ करने के लिए प्यार से आग्रह कर रहा हूं, हाथ जोड़कर विनती कर रहा हूं। 140 करोड़ देशवसियों की मदद के बिना ये मैं कर नहीं पाऊंगा, और इसलिए मैं देशवासियों से बार-बार हाथ जोड़कर कह रहा हूं, और 10 साल के इस टाइम फ्रैम में मैं क्या मांग रहा हूं? मैकाले की जिस नीति ने भारत में मानसिक गुलामी के बीज बोए थे, उसको 2035 में 200 साल पूरे हो रहे हैं, Two hundred year हो रहे हैं। यानी 10 साल बाकी हैं। और इसलिए, इन्हीं दस वर्षों में हम सभी को मिलकर के, अपने देश को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करके रहना चाहिए।

साथियों,

मैं अक्सर कहता हूं, हम लीक पकड़कर चलने वाले लोग नहीं हैं। बेहतर कल के लिए, हमें अपनी लकीर बड़ी करनी ही होगी। हमें देश की भविष्य की आवश्यकताओं को समझते हुए, वर्तमान में उसके हल तलाशने होंगे। आजकल आप देखते हैं कि मैं मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान पर लगातार चर्चा करता हूं। शोभना जी ने भी अपने भाषण में उसका उल्लेख किया। अगर ऐसे अभियान 4-5 दशक पहले शुरू हो गए होते, तो आज भारत की तस्वीर कुछ और होती। लेकिन तब जो सरकारें थीं उनकी प्राथमिकताएं कुछ और थीं। आपको वो सेमीकंडक्टर वाला किस्सा भी पता ही है, करीब 50-60 साल पहले, 5-6 दशक पहले एक कंपनी, भारत में सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने के लिए आई थी, लेकिन यहां उसको तवज्जो नहीं दी गई, और देश सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में इतना पिछड़ गया।

साथियों,

यही हाल एनर्जी सेक्टर की भी है। आज भारत हर साल करीब-करीब 125 लाख करोड़ रुपए के पेट्रोल-डीजल-गैस का इंपोर्ट करता है, 125 लाख करोड़ रुपया। हमारे देश में सूर्य भगवान की इतनी बड़ी कृपा है, लेकिन फिर भी 2014 तक भारत में सोलर एनर्जी जनरेशन कपैसिटी सिर्फ 3 गीगावॉट थी, 3 गीगावॉट थी। 2014 तक की मैं बात कर रहा हूं, जब तक की आपने मुझे यहां लाकर के बिठाया नहीं। 3 गीगावॉट, पिछले 10 वर्षों में अब ये बढ़कर 130 गीगावॉट के आसपास पहुंच चुकी है। और इसमें भी भारत ने twenty two गीगावॉट कैपेसिटी, सिर्फ और सिर्फ rooftop solar से ही जोड़ी है। 22 गीगावाट एनर्जी रूफटॉप सोलर से।

साथियों,

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने, एनर्जी सिक्योरिटी के इस अभियान में देश के लोगों को सीधी भागीदारी करने का मौका दे दिया है। मैं काशी का सांसद हूं, प्रधानमंत्री के नाते जो काम है, लेकिन सांसद के नाते भी कुछ काम करने होते हैं। मैं जरा काशी के सांसद के नाते आपको कुछ बताना चाहता हूं। और आपके हिंदी अखबार की तो ताकत है, तो उसको तो जरूर काम आएगा। काशी में 26 हजार से ज्यादा घरों में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के सोलर प्लांट लगे हैं। इससे हर रोज, डेली तीन लाख यूनिट से अधिक बिजली पैदा हो रही है, और लोगों के करीब पांच करोड़ रुपए हर महीने बच रहे हैं। यानी साल भर के साठ करोड़ रुपये।

साथियों,

इतनी सोलर पावर बनने से, हर साल करीब नब्बे हज़ार, ninety thousand मीट्रिक टन कार्बन एमिशन कम हो रहा है। इतने कार्बन एमिशन को खपाने के लिए, हमें चालीस लाख से ज्यादा पेड़ लगाने पड़ते। और मैं फिर कहूंगा, ये जो मैंने आंकडे दिए हैं ना, ये सिर्फ काशी के हैं, बनारस के हैं, मैं देश की बात नहीं बता रहा हूं आपको। आप कल्पना कर सकते हैं कि, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, ये देश को कितना बड़ा फायदा हो रहा है। आज की एक योजना, भविष्य को Transform करने की कितनी ताकत रखती है, ये उसका Example है।

वैसे साथियों,

अभी आपने मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग के भी आंकड़े देखे होंगे। 2014 से पहले तक हम अपनी ज़रूरत के 75 परसेंट मोबाइल फोन इंपोर्ट करते थे, 75 परसेंट। और अब, भारत का मोबाइल फोन इंपोर्ट लगभग ज़ीरो हो गया है। अब हम बहुत बड़े मोबाइल फोन एक्सपोर्टर बन रहे हैं। 2014 के बाद हमने एक reform किया, देश ने Perform किया और उसके Transformative नतीजे आज दुनिया देख रही है।

साथियों,

Transforming tomorrow की ये यात्रा, ऐसी ही अनेक योजनाओं, अनेक नीतियों, अनेक निर्णयों, जनआकांक्षाओं और जनभागीदारी की यात्रा है। ये निरंतरता की यात्रा है। ये सिर्फ एक समिट की चर्चा तक सीमित नहीं है, भारत के लिए तो ये राष्ट्रीय संकल्प है। इस संकल्प में सबका साथ जरूरी है, सबका प्रयास जरूरी है। सामूहिक प्रयास हमें परिवर्तन की इस ऊंचाई को छूने के लिए अवसर देंगे ही देंगे।

साथियों,

एक बार फिर, मैं शोभना जी का, हिन्दुस्तान टाइम्स का बहुत आभारी हूं, कि आपने मुझे अवसर दिया आपके बीच आने का और जो बातें कभी-कभी बताई उसको आपने किया और मैं तो मानता हूं शायद देश के फोटोग्राफरों के लिए एक नई ताकत बनेगा ये। इसी प्रकार से अनेक नए कार्यक्रम भी आप आगे के लिए सोच सकते हैं। मेरी मदद लगे तो जरूर मुझे बताना, आईडिया देने का मैं कोई रॉयल्टी नहीं लेता हूं। मुफ्त का कारोबार है और मारवाड़ी परिवार है, तो मौका छोड़ेगा ही नहीं। बहुत-बहुत धन्यवाद आप सबका, नमस्कार।