Eight years of BJP dedicated to welfare of poor, social security: PM Modi

Published By : Admin | May 21, 2022 | 14:29 IST
This is the time for BJP, to fix goals for the next 25 years, to consistently work for the people of India to fulfil their aspirations: PM Modi
8 years of BJP-led NDA government dedicated to poor's welfare & social security, says PM Modi
Attempts will be made to deviate you from country's development issues but you have to stick to them: PM Modi to BJP karyakartas

नमस्कार !

भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय पदाधिकारी बैठक में उपस्थित भाजपा के सभी साथियों,
देश भर से हमारे साथ जुड़े हमारे सहयोगी, सबसे पहले तो हमें देश के कोने कोने में मातृभूमि की सेवा में लगे हुए, जन-जन के कल्याण में खप रहे भाजपा के कोटि-कोटि कार्यकर्ताओं का अभिनंदन करता हूं। जनसंघ से लेकर जो हमारी यात्रा शुरू हुई भाजपा के रूप में फली-फूली इस पार्टी के इस रूप को इसके स्वरूप को और इसके विस्तार को देखते हैं तब गर्व तो होता ही है, लेकिन इसके निर्माण में खुद को खपाने वाले पार्टी के सभी मनीषियों, सभी विभूतियों उन सभी को मैं आज नमन करता हूं।

साथियों,

हम राजस्थान की धरती पर हैं, मुझे भी आप सबके बीच में रह कर के इस कार्यक्रम में शरीक होने का अवसर मिला होता, मेरे लिए भी वो प्रेरणा का कारण बनता, ऊर्जा का स्रोत मिलता। क्योंकि मैं जब भी कार्यकर्ताओं से मिला हूं, कार्यकर्ता छोटा हो बड़ा हो बहुत कुछ जानने को मिलता है बहुत की बातों से अनेक पहलू समझने को मिलते हैं। कार्यकर्ता के द्वारा जो इनफॉरमेशन आती है वो बहुत ही सटीक इनफॉरमेशन आती है, और जब मिलते है तो बहुत कुछ बातें भी होती हैं, तो मेरे मन में तो कसक रह जाएगी कि मैं नहीं पहुंच पाया, लेकिन वर्चुअली आप सबका दर्शन कर रहा हूं आप सबसे बात कर रहा हूं। साथियों राजस्थान की धरती पर हैं तब हम सब को श्रद्धेय सुंदर सिंह जी भंडारी की याद आना बहुत ही स्वाभाविक है आज ये वर्ष सुंदर सिंह भंडारी जी का जन्म शताब्दी वर्ष भी है। हम सब ऐसे प्रेरणा पुरुष का हृदय से अभिवादन करते हैं प्रणाम करते हैं।

साथियो,


राजस्थान की धरती, राजस्थान की बात हो, राजस्थान भारतीय जनता पार्टी की विकास यात्रा की चर्चा हो तो मैं इस बात को गर्व से कह सकता हूं कि मुझे ऐसे-ऐसे दिग्गजों के साथ काम करने का मौका मिला, ऐसे-ऐसे दिग्गजों की उंगली पकड़ कर चलने का सौभाग्य मिला, औन उन सब का स्मरण आना बहुत स्वाभाविक है। श्रद्धेय स्वर्गीय भैरों सिंह शेखावत जी की बात हों, आदरणीय जगदीश प्रसाद माथुर जी का स्मरण आना, भानु कुमार शास्त्री जी, हमारे रघुवीर सिंह कौशल जी, हमारे भंवर लाल शर्मा जी, हमारे गंगाराम कोली जी, अनगिनत नाम ऐसे सभी वरिष्ठ जनों की उंगली पकड़ कर चलने का मुझे सौभाग्य मिला। ये सारे वो लोग है जिन्होंने पार्टी को दिशा दिखाई है, पार्टी के लिए अपना पूरा जीवन खपा दिया।

ऐसे ही अनगिनत समर्पित जीवन का आज स्मरण होना बहुत ही स्वाभाविक है। और इसलिए जब कमलपुष्प की रचना हुई है, मैं पार्टी को अभिनंदन करता हूं, आज कमल पुष्प पर हमारे बूथ स्तर के कार्यकर्ता को पुराने कार्यकर्ताओं के जीवन की जो कथाएं हैं उसमें प्रस्तुत करते हैं वो अपनेआप में प्रेरक हैं। अतः मैं आप सभी से कहता हूं कि कभी भी मन में आलस आ जाए, पल भर के लिए उस कमल पुष्प को मोबाइल फोन पर खोलकर के देखिए, ऐसी प्रेरणा की कथाएं हैं, ऐसी प्रेरक जीवन की घटनाएं हैं, हमें मार्गदर्शन के लिए प्रेरणा के लिए कुछ करने की जरूरत ही नहीं है। एक-एक का जीवन, एक-एक पल का काम कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्वरूप है।

साथियो,


21वीं सदी का ये समय भारत के लिए बहुत अहम समय है। और आप को याद होगा मैंने लाल किले से कहा था, यही समय है और सही समय है। आज हम सभी देख रहे हैं कि दुनिया में भारत के प्रति किस तरह की विशेष भावना जागृत हुई है। दुनिया आज भारत को बहुत उम्मीदों से देख रही है। ठीक वैसे ही भारत में भाजपा के प्रति, जनता का एक विशेष स्नेह जुड़ा हुआ अनुभव हो रहा है। देश की जनता भाजपा को बहुत विश्वास से, बहुत उम्मीद से देख रही है। देश की जनता की ये आशा-आकांक्षा हमारा दायित्व बहुत ज्यादा बढ़ा देती है।

आजादी के इस अमृतकाल में देश अपने लिए अगले 25 वर्षों के लक्ष्य तय कर रहा है। भाजपा के लिए ये समय है, अगले 25 वर्षों के लक्ष्य तय करने का, उनके लिए निरंतर काम करने का। देश के लोगों की जो उम्मीदें हैं, हमें वो पूरी करनी हैं। देश के सामने जो चुनौतियां हैं, हमें देश के लोगों के साथ मिलकर हर चुनौतियों को पार करना है उन्हें परास्त करना है और विजय के संकल्प के साथ आगे बढ़ना है। और हम जानते हैं कि इसका मार्ग क्या है। हमारा दर्शन है पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद और अंत्योदय। हमारा चिंतन है डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की सांस्कृतिक राष्ट्रनीति। हमारा मंत्र है 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास'।

साथियो,


मैं अलग तरीके से एक बात बताना चाहता हूं, मान लीजिए, आप कल्पना कीजिए किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति, जब लंबे उपचार के बाद भी ठीक नहीं होता तो बीमारी को ही अपनी नियति मान लेता है। वो बीमारी से बनी उन परिस्थितियों को स्वीकार कर लेता है। उसके साथ जीना सीख लेता है वो सोचता है कि किसी भी तरह चलो भाई दिन कट जाए। व्यक्ति का जीवन जैसा होता है न कभी-कभी राष्ट्र का भी जीवन वैसा होता है। हमारे देश में भी एक लंबा कालखंड ऐसा रहा जब लोगों की सोच मजबूरन ऐसी हो गई थी कि बस और कोई सहारा न बचा अब तो इसी में गुजारा करना है बस किसी तरह समय निकल जाए। जिंदगी गुजर जाए। ना सरकार से उनको अपेक्षा थी और ना ही सरकार उनके प्रति कोई जवाबदेही समझती थी।

साथियो,


देश की जनता 2014 में एक नया इतिहास लिखने का फैसला किया। फैसला जनता का था। 2014 के बाद, भाजपा, देश को इस सोच से बाहर निकालकर लाई है। आज निराशा नहीं आशा और अपेक्षा का युग है। साथियों, आज भारत के लोग Aspirations से भरे हुए हैं। वो नतीजे चाहते हैं, सरकारों को काम करते हुए देखना चाहते हैं, अपनी आंखों के सामने परिणाम प्राप्त करना चाहता है परिणाम देखना चाहता है। राजनीतिक नफा-नुकसान से अलग, मैं इसे जनमानस में आया बहुत बड़ा Positive Change मानता हूं। जब देश के 130 करोड़ लोगों की आकांक्षाएं इस प्रकार से जग जाती है तो निश्चित रूप से सरकारों की जवाबदेही भी बढ़ जाती है उनके लिए काम करना अनिवार्य हो जाता है। सार्वजनिक जीवन में हर व्यक्ति के लिए जन जागृति अनिवार्य रूप से काम करने के लिए प्रेरित भी करती है और दबाव भी बनाती है। और इसलिए देश के लोगों की बढ़ती हुई Aspirations में, मैं देश के उज्जवल भविष्य को भलीभांति देख रहा हूं। और जब ये सारे चित्र मेरे सामने मैं देख पा रहा हूं आत्मविश्वास से भरे हुए देश के युवाओं को देखता हूं, कुछ कर गुजरने के हौसले के साथ भागीदारी के विश्वास के साथ आगे बढ़ती बहन-बेटियों को देखता हूं तो मेरा आत्मविश्वास भी कई गुना बढ़ जाता है।

साथियो,


जब अपेक्षाएं बढ़ती हैं, तो अपेक्षित परिणाम लाने के लिए परिश्रम की पराकाष्ठा करने का जज्बा भी बढ़ता है। यही जज्बा देश को आजादी के इस अमृतकाल में नई ऊंचाई पर ले जाएगा। साथियों, आजादी के इस अमृतकाल में देश जिन बड़े लक्ष्यों पर काम कर रहा है, तब, हमें कुछ बातें और भी याद रखनी जरूरी हो जाती है। भाजपा का कार्यकर्ता होने के नाते हमें चैन से बैठने का कोई हक नहीं है, कोई अधिकार नहीं है। नहीं तो दुनिया कहेगी, सच्चाई भी है कि आज देश के 18 राज्यों में भाजपा की सरकार है, हमारे 1300 से अधिक विधायक और 400 से अधिक सांसद हैं। राज्य सभा में भी वर्षों के बाद कोई दल 100 के आंकड़ों को छूने जा रहा है, वो नसीब भी भाजपा के पास है। यदि इन सारी सफलताओं को जब सामने देखते हैं तो स्वाभाविक मन करेगा कि अब बहुत हो गया। लेकिन साथियों, अगर हमें सत्ता भोग ही करना होता, तो भारत जैसे विशाल देश में कोई भी सोच सकता है कि भाई, इतना सारा ले गया, इतना सारा प्राप्त कर लिया, यार अब तो बैठो अब तो आराम करते हैं, चलो यार। जी नहीं ये रास्ता हमारे ले नहीं है, वो रास्ता हमें मंजूर नहीं, जिन्होंने हमारे देश के लिए, हमारी पार्टी के लिए जीवन खपाया है, उन्होंने हमें आराम करने की इजाजत नहीं दी है, इसलिए हमें आराम नहीं करना है।

साथियो,


इतना सब विजय पताका फहर रही है तो भी आज भी हम अधीर हैं, आज भी हम बेचैन हैं, आज भी हम आतुर हैं, क्योंकि हमारा मूल लक्ष्य, भारत को उस उंचाई पर पहुंचाना है जिसका सपना देश की आजादी के लिए मर-मिटने वालों ने देखा था। जिन सपनों को लेकर के वीर गले में फांसी के फंदे लगाकर के मातृभूमि के लिए आहूति दी। हमें अपने स्वतंत्रता सेनानियों का ऋण कभी चुका नहीं सकते दोस्तो, लेकिन दिन रात मेहनत कर सकते हैं, खुद को देश के लिए खपा सकते हैं। और मुझे खुशी है कि भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता, आज इन भावनाओं से प्रेरित होकर के नित्य नूतन प्राण शक्ति लेकर के अविरत न थके न झुके काम कर रहा है। जिस पार्टी के पास कर्तव्य पथ पर चलने वाले कोटि-कोटि कार्यकर्ता हो वो कौन होगा जिसको गर्व नहीं होगा, मुझे आप सब के लिए गर्व है।

साथियो,


इस महीने केंद्र की भाजपा सरकार के, एनडीए सरकार के 8 वर्ष पूरे हो रहे हैं। ये आठ वर्ष संकल्प के रहे हैं, सिद्धियों के रहे हैं। ये 8 वर्ष सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को समर्पित रहे हैं। ये 8 वर्ष, देश के छोटे किसानों, देश के श्रमिकों, देश के मध्यम वर्ग की अपेक्षाओं को पूरा करने वाले रहे हैं। ये 8 वर्ष, देश के संतुलित विकास, सामाजिक न्याय और सामाजिक सुरक्षा के लिए भी रहे हैं। और ये 8 वर्ष, देश की माताओं-बहनों-बेटियों के सशक्तिकरण, उनकी गरिमा बढ़ाने के प्रयासों के नाम रहे हैं।

साथियो,


सरकार पर, सरकार की व्यवस्थाओं पर, सरकार के डिलिवरी मैकेनिज्म पर किसी समय देश का जो भरोसा उठ गया था, उसे 2014 के बाद जनता-जनार्दन के आशीर्वाद से भाजपा सरकार उसे वापस लेकर आई है। आज गरीब से गरीब भी ये नहीं सोचता कि ये सरकारी योजना तो सिर्फ सिफारिश वालों के लिए है, जान-पहचान वालों के लिए है, जो पैसे खर्च कर सकता है उनके लिए है। आज वो अपने आसपास लोगों को योजनाओं का लाभ मिलते देख रहा है। वो आज बहुत विश्वास से कहता है कि एक ना एक दिन मुझे भी इस योजना का लाभ अवश्य मिलेगा। और ये बहुत विश्वास से कहता है। साथियों, इसलिए इस बार आपको याद होगा, मैंने 15 अगस्त को लाल किले से शत-प्रतिशत लाभार्थियों तक पहुंचने की बात की थी।

काम कठिन है, मैं जानता हूं। देश बहुत विशाल है, जिम्मेवारियां बहुत बड़ी हैं। कई काम है जो राज्य सरकारों पर डिपेंडेंट हैं। कई काम है जो स्थानीय निकायों पर डिपेंडेंट हैं। भांति-भांति के प्रभाव भी है, इसके बावजूद भी साथियों जब ये ठान लेंगे कि हमें हर लाभार्थी तक पहुंचना है, एक भी व्यक्ति के छूटने की गुंजाइश को समाप्त कर देना है, तो तय लक्ष्य तक जरूर पहुंचेंगे। और इसके लिए मैं लगातार एक बात सरकारी अधिकारियों से अन्य राज्य सरकारों से करता रहता हूं रहता हूं, सैचुरेशन की बात करता हूं। सैचुरेशन का यह सिर्फ पूर्णता का आंकड़ा भर नहीं है, लेकिन जब हम सैचुरेशन की बात करते हैं तो सैचुरेशन पर बल देना ये भेदभाव, भाई-भतीजावाद, तुष्टिकरण, भ्रष्टाचार के चंगुल से देश को बाहर निकालने का माध्यम है।

भारत के सामान्य नागरिक को सरकारी दफ्तरों के चक्कर से मुक्ति दिलाने का जो अभियान बीते 8 साल से देश में चल रहा है, सैचुरेशन का अभियान उसको औऱ सशक्त करेगा। और इसलिए, आज राष्ट्रीय पदाधिकारियों की इस बैठक में, हम सभी को इस संकल्प के साथ आगे बढ़ना है कि हम जिस भी क्षेत्र के होंगे, जो भी हमारा कार्यक्षेत्र रहा है, वहां कोई भी गरीब, कोई भी समझदार नागरिक योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहेगा। इसके लिए भाजपा को नए जागरूकता अभियान शुरू करना चाहिए। चुनाव के समय जैसे आप हर बूथ तक जाते हैं, हर परिवार तक जाते हैं, उसी स्पीरिट से हर घर तक जाना होगा। एक-एक नागरिक तक पहुंचना होगा। हर घर भाजपा, हर गरीब का कल्याण, हमें इसी भावना के साथ लगातार काम करना होगा। आप में से बहुत सारे लोग जानते होंगे, और खासकर के जब राजस्थान में बैठे हैं तो शायद ये कहावत जरूर आपके कान तक पहुंची होगी राजस्थान में अक्सर एक कहावत कही जाती है- अम्मर को तारो, हाथ सै कोनी टूटे। यानि आसमान का तारा हाथ से नहीं टूटता है। साथियों, ये कहावत अपनी जगह पर सही है, और इसलिए हमें भूलना नहीं चाहिए कि हमारा लक्ष्य आसमान जितना ऊंचा है, इतनी आसानी से नहीं मिलेगा लेकिन, मेहनत करेंगे तो उसे प्राप्त जरूर करेंगे।

साथियो,


जिस एक और विषय पर हमें निरंतर कार्य करते रहना है, वो है देश में विकासवाद की राजनीति की चौतरफा-चहुं-दिशा में स्थापना होनी चाहिए। कोई भी दल हो उसको भी विकासवाद की राजनीति पर आने के लिए मजबूर कर देना, साथियों हम बड़े गर्व से कह सकते हैं कि ये भारतीय जनता पार्टी ही है जिसने विकासवाद की राजनीति को देश की राजनीति की मुख्यधारा बना दिया है। आज कोई भी चुनाव हो, विकास पर विश्वास करने वाले लोग हो या न हो, समाज को तोड़ने की राजनीति करने वाले लोग हो तो भी। शॉर्टकट ढूंढकर के सत्ता पाने के नुस्खे आजमाने वाले लोग हो तो भी, चाहते हो या न चाहते हों, लेकिन चुनाव में हर किसी को विकास के नाम पर बात करनी ही पड़ती है। चुनाव के मैदान में विकास की चर्चा करनी ही पड़ती है। और गर्व है भारतीय जनता पार्टी पर कि हमने राजनीति को विकासवाद की धारा के साथ प्रमुख रूप से बल दिया है। लेकिन साथियों हमें ये भी देखना है कि जो लोग विकासवाद की राजनीति से बच नहीं सकते, मजबूरन विकासवाद पर आना ही पड़ रहा है, उन्होंने राजनीति में विकासवाद को भी विकृति की दिशा में धकेल दिया। ये राजनीतिक दल तात्कालिक लाभ के लिए फायदे के लिए देश के उज्ज्वल भविष्य के साथ, राज्य के उज्ज्वल भविष्य के साथ, देश की युवा पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ करती है उसे खोखला करने का ही काम करती है। ये राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के लिए समाज में जो छोटे-मोटे तनाव होते हैं, कुछ कमजोरियां होती हैं, कुछ पर्सनल होते हैं उन्हें ढूंढ-ढूंढ़ कर के उसमें जहर डालने का काम करते हैं। उन कमजोरी को उभार रहे हैं, कभी जाति के नाम पर, कभी क्षेत्रवाद के नाम पर लोगों को भड़का रहे हैं। साथियों, एक भारत श्रेष्ठ भारत का सपना लेकर के चल रही भारतीय जनता पार्टी के लिए ये भी अनिवार्य है कि देश के लोगों को लगातार हमें सावधान करते रहना है। इस प्रकार के लोगों से सचेत करना होगा, और इस प्रकार के दलों से सचेत करना होगा।

साथियो,


हमें एक और बात हमेशा याद रखनी है। हम सब को याद है जनसंघ के जमाने से ही जब हम कहीं हाशिए पर खड़े थे। तब हमें कोई जानता भी नहीं था, न उस नगर में जानता था, न उस राज्य में जानता था न उस जिले में जानता था। फिर भी उस जमाने में जब हमारे बातों को कोई कान पर ले इसकी संभावना भी नहीं थी उस समय भी, जनसंघ के समय में हमारे कार्यकर्ता, हमारी पुरानी पीढ़ियां, जिन नीतियों पर ड़टे रहे, जिन नीतियों को लेकर चलते रहे, कार्यक्रम करते रहे उसकी मुख्यधारा थी राष्ट्र भक्ति, राष्ट्र हित, राष्ट्र सेवा राष्ट्र निर्माण यही प्राथमिकता थी ई। हम सत्ता से कोसों दूर थे, फिर भी, उस जमाने के हमारे छोटे-छोटे कार्यकर्ताओं का मातृभूमि के प्रति प्रेम, राष्ट्र सर्वोपरि की निष्ठा, उसमें इतनी ताकत थी, कि सत्ता पर बैठे उन पर काबिज बड़े-बड़े लोगों को भी भारतीय जनसंघ की उस राष्ट्र भक्ति और राष्ट्रीय विचारधारा को वो कभी चुनौती नहीं दे पा रहे थे। जाने अनजाने में भी उसके महत्व को समझना पड़ता था। स्वीकार नहीं करते थे, समझना पड़ता था और आज भाजपा की नीतियां उसी राष्ट्रभक्ति से प्रेरित होकर विकास पर केंद्रित हुई है, विश्वास पर केंद्रित है। इसलिए साथियों हमें कभी कोई शॉर्ट-कट नहीं लेना है। हमें देशहित से जुड़े जो भी बुनियादी विषय हैं, जो Core-Issues हैं उन्हीं पर आगे बढ़ना है।

कदम को दाएं-बाएं जाने नहीं देना है, जुबां को इधर-उधर फिसलने नहीं देना है। और ये Core-Issues क्या हैं? गरीब का कल्याण, गरीब का जीवन आसान बनाने के लिए, गरीब को सशक्त करने के लिए हमें लगातार काम करना है। हमें कभी भी भटकना नहीं है। और मैं आपको सतर्क भी करूंगा, आपसे आग्रह भी करूंगा कि आपको विकास से जुड़े मुख्य मुद्दों से भटकाने की लाख कोशिशें होंगी. लेकिन आपको देश के विकास से जुड़े विषयों पर ही टिके रहना है। हम देखते ही हैं कि आजकल किस तरह कुछ पार्टियों का इकोसिस्टम पूरी शक्ति से देश को मुख्य मुद्दों से भटकाने में लगा हुआ है। हमें कभी ऐसी पार्टियों के जाल में नहीं फंसना है। मैं जानता हूं कि आप अपने संवादों में, बातचीत में, संबोधनों में पत्रकार वार्ता में अगर आप कहते हैं कि हमारी सरकार ने 2014 के बाद गरीबों के लिए 3 करोड़ घर बनाए, ठीक है उस खबर को फ्रंट पेज पर नहीं छापा। टीवी के परदे पर नहीं दिखाया। अगर आप कहें कि 50 करोड़ से ज्यादा लोगों को 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की व्यवस्था हमने की है, हो सकता है कि उसे कान पर न भी ले, 8 हजार से ज्यादा जन औषधि केंद्रों की बात अगर हम करें तो हो सकता है टीवी में, मीडिया में अखबार में, सुर्खियों में नजर ना भी आएं।

मैं जानता हूं कि आप 10 करोड़ से ज्यादा छोटे किसानों के बैंक खाते में सीधे पैसे ट्रांसफर करने की बात करेंगे, हो सकता है उसको भी नजरंदाज कर दिया जाएगा, उसको भी किसी अखबार के पन्नों पर नहीं दिखाया जाएगा, टीवी पर नहीं बताया जाएगा, हो सकता है मैं जानता हूं कि आप हर घर जल की बात करेंगे, हर गांव तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी की बात करेंगे, आप देश में डिजिटल क्रांति की बात करेंगे, थिंकटैंक की बात करेंगे, डिजिटल ट्रांजेक्शन की बात करेंगे, यही वो सिस्टम है इस पर तवज्जो नहीं देने देगी। इस बात को आगे नहीं बढ़ने देगी। आप प्रधानमंत्री म्यूजियम बनाएंगे, डेमोक्रेसी के ट्रू स्पीरिट को हिंदुस्तान की आजादी के अमृत महोत्सव में लाकर के खड़ा कर देंगे, आंखें मूंद ली जाएगी, चूटकी तक ली जाएगी, होगा, आप जितने भी अच्छे काम करेंगे कोई पब्लिसिटी नहीं मिलेगी,कोई हेडलाइन नहीं बनेगी। टीवी पर वो बात चमकेगी नहीं लेकिन, इस सब के बावजूद भी साथियों हमें अपने मार्ग पर डटे रहना विकास के मुद्दों पर टिके रहना है, देशहित के मुद्दों पर टिके रहना है। कभी न कभी मजबूरन उनको भी इन मुद्दों की सकारात्मक रूप में स्वीकृति देनी ही पड़ेगी। बस हम इस इकोसिस्टम के गब्बारों में उसको एड्रेस करने की कोशिश न करने लगें। साथियों, ऐसा करके ही इस अमृतकाल में हम देश की राजनीति को पूरी तरह विकास पर केंद्रित कर पाएंगे।

साथियो,


एक और कोशिश जो हम सब को करनी है, वो है ज्यादा से ज्यादा लोगों को भाजपा से जोड़ने की। करोड़ों की सदस्य संख्या हमारा गर्व बढ़ाती है, लेकिन हमें फिर भी रुकना नहीं है, हर क्षेत्र के लोग, हर समाज के लोग, हर कोई भाजपा को अपना माने, अपने सपनों का प्रतिबिंब भाजपा में देखे, अपने संकल्पों का सामर्थ्य भाजपा में देखे, भारतीय जनता पार्टी ऐसा वटवृक्ष हो, ऐसा गुलदस्ता हो कि समाज के हर व्यक्ति को उसमें अपने सपने नजर आए। साथियों हर किसी को जागरूक करना है, सिर्फ सदस्य ही नहीं बनाना है बल्कि राष्ट्रनीति के पथ पर चलने वाले कर्मठ युवा कार्यकर्ताओं को मंच देना है, अवसर देना है। जिसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं रहा हो, ऐसे परिवारों को भी अवसर देना है। अगर मैं आज के युवाओं की भाषा में कहूं, तो जो भारत के समृद्ध भविष्य के कोड लिखने के लिए लालायित हैं, ऐसे हर युवा को हर बेटे-बेटी को हमें भाजपा के साथ जोड़ना है। हमें ये याद रखना है कि परिवारवाद की राजनीति में उस राजनीति से विश्वासघात खाने वाले देश के युवाओं का विश्वास सिर्फ और सिर्फ भाजपा ही लौटा सकती है।

साथियो,


हम सभी जानते हैं कि आजादी के बाद से ही वंशवाद और परिवारवाद ने देश का कितना भयंकर नुकसान किया है। परिवारवादी पार्टियों ने देश में भ्रष्टाचार को, धांधली को, भाई-भतीजावाद को, इसी को आधार बनाकर देश का बहुत मूल्यवान समय बर्बाद किया है। ये परिवारवादी पार्टियां आज भी देश को पीछे ले जाने पर तुली हुई हैं। उनका सार्वजनिक जीवन परिवार से शुरू होता है और परिवार के लिए चलता है, परिवार की खातिर ही करता है। भाजपा को इन परिवारवादी पार्टियों से निरंतर मुकाबला करना है। लोकतंत्र के लिए ये सबसे घातक परंपरा है। अगर लोकतंत्र बचाना है, लोकतंत्र को सामर्थ्यवान बनाना है, लोकतंत्र को मूल्यनिष्ठ बनाना है, तो हमें ये वंशवाद, परिवारवाद की राजनीति के खिलाफ अतिरिक्त संघर्ष करना ही है दोस्तों। इस अमृतकाल में देश को, हमारा यह भी संकल्प है कि देश को लोकतांत्रिक मूल्यों से जरा भी हटने नहीं देंगे। लोकतंत्र की रक्षा करेंगे और वंशवादी, परिवारवादी शक्तियों को देश की जनता नकार दें, देश की जनता का हम विश्वास जीतेंगे। और साथियों अपने इस प्रयास में हमें भारतीय जनता पार्टी में लोकतांत्रिक मूल्यों की जो मर्यादित परंपरा है मजबूत नींव है उसे निरंतर मजबूत करते ही रहना है।

साथियो,


अटल जी की एक प्रसिद्ध कविता की पंक्तियां हैं- अटल जी ने लिखा था… काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूँ… गीत नया गाता हूँ।.. ये अटल जी के व्यक्तित्व के साथ ही भाजपा की इतने वर्षों की तपस्या का सार भी है। साथियों ये भाजपा है यह ठहरा हुआ पानी नहीं है। भाजपा निरंतर प्रवाहमान है। हमने एक दल के रूप में खुद को लगातार evolve किया है, वंशवाद, परिवारवाद के कीचड़ में भी हमने कमल को खिलाया है, जो लोकतंत्र की मूलभूत पंखुड़ियों की तरह प्रकाशमान है। साथियों, नई चुनौतियों के साथ अपनी नीति-रणनीति हम निरंतर, जब भी जरूरत पड़ी, देश हित को आवश्यक मानकर हम आधुनिकता की ओर आगे बढ़ते हैं। और आज भाजपा ने सिर्फ नूतन को ही नहीं अपनाया, बल्कि पुरातन से निकले संस्कारों को भी उतना ही सम्मान दिया है। हमने अपने पूर्वजों की ज्ञानशक्ति पर भरोसा किया है। मैं आपको एक उदाहरण देना चाहता हूं। हम सब जानते हैं कि पूज्य महात्मा गांधी, बापू, आज़ाद भारत में स्वाबलंबन आधारित नीतियों को देखना चाहते थे। लेकिन दशकों तक सिर्फ गांधी जी का नाम ही लिया गया, काम बिल्कुल उनके विजन के विपरीत किया गया। वो देश में स्वाबलंबन चाहते थे, लेकिन भारत को पॉलिसी से लेकर प्रैक्टिस तक विदेशों पर निर्भर बना दिया गया। अब आज देश देख रहा है कि भाजपा सरकारों के समय स्थितियां कैसे बदल रही हैं। आज देश पहली बार आत्मनिर्भरता के रास्ते पर चल पड़ा है। आज हर भारतीय लोकल के लिए वोकल हो रहा है, स्थानीय उत्पादों पर गर्व कर रहा है।

साथियो,


ये भाजपा ही है जिसने भारत की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को पहली बार राष्ट्रीय स्वाभिमान से जोड़ा है। नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी में स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता देना, हर क्षेत्रीय भाषा के प्रति हमारे कमिटमेंट को दिखाता है। भाजपा, भारतीय भाषाओं को भारतीयता की आत्मा मानती है और राष्ट्र के बेहतर भविष्य की कड़ी मानती है। इसका जिक्र आज मैं विशेष तौर पर इसलिए करना चाहता हूं, क्योंकि बीते कुछ समय से देश में भाषा के आधार पर नए विवाद खड़े करने की कोशिश की जा रही है। हमें इससे देशवासियों को निरंतर सतर्क करना है। भाजपा, भारत की हर भाषा में भारतीय संस्कृति का प्रतिबिंब देखती है, हर भाषा को पूजनीय मानती है।

साथियो,


आजादी का ये अमृतकाल, भाजपा के प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए कर्तव्यकाल की तरह है। हमें अपने कर्तव्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी है। कर्तव्य पथ पर चलते हुए भारत, आने वाले वर्षों में उस उज्ज्वल भविष्य को प्राप्त करेगा, जिसका वो हमेशा से हकदार रहा है। मुझे भाजपा के प्रत्येक कार्यकर्ता पर पूरा भरोसा है, मुझे देश के प्रत्येक नागरिक पर पूरा भरोसा है। साथियों, दो दिन आप अनेक विषयों पर चर्चा करने वाले है, हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरनीय नड्डा जी के मार्गदर्शन में नित नूतन विचारों से आगे बढ़ रही भारतीय जनता पार्टी न कभी रुकने का न कभी थकने का, न कभी चैन से बैठने का, चरैवेति… चरैवेति… चरैवेति के मंत्र को लेकर के ये दो दिन की चर्चा के बाद आप जब जाएंगे, जहां भी जाएंगे आप एक ऊर्जा का स्रोत बनकर के जाएंगे, ये मेरा पूरा विश्वास है। आप सभी को अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं। और मैं आज रूबरू नहीं आ पाया, आपके बीच नहीं बैठ पाया, उसकी कसक मन में रखते हुए भी आप जो भी निर्णय करेंगे, जो भी योजना बनाएंगे, मैं भी एक कार्यकर्ता हूं, एक कार्यकर्ता के नाते, आप वहां जो भी निर्णय लेंगे, मैं अपने सर आंखों पर चढ़ा कर के मैं भी एक कार्यकर्ता के रूप में उन सब कामों में पूरी ताकत से जुड़ता रहूंगा। ये विश्वास देते हुए एक बार फिर शुभकामनाएं देते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद !

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PM Modi's interview to Prabhat Khabar
May 19, 2024

प्रश्न- भाजपा का नारा है-‘अबकी बार 400 पार’, चार चरणों का चुनाव हो चुका है, अब आप भाजपा को कहां पाते हैं?

उत्तर- चार चरणों के चुनाव में भाजपा और एनडीए की सरकार को लेकर लोगों ने जो उत्साह दिखाया है, उसके आधार पर मैं कह सकता हूं कि हम 270 सीटें जीत चुके हैं. अब बाकी के तीन चरणों में हम 400 का आंकड़ा पार करने वाले हैं. 400 पार का नारा, भारत के 140 करोड़ लोगों की भावना है, जो इस रूप में व्यक्त हो रही है. दशकों तक जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 को देश ने सहन किया. लोगों के मन में यह स्वाभाविक प्रश्न था कि एक देश में दो विधान कैसे चल सकता है. जब हमें अवसर मिला, हमने आर्टिकल 370 को खत्म कर जम्मू-कश्मीर में भारत का संविधान लागू किया. इससे देश में एक अभूतपूर्व उत्साह का प्रवाह हुआ. लोगों ने तय किया कि जिस पार्टी ने आर्टिकल 370 को खत्म किया, उसे 370 सीटें देंगे. इस तरह भाजपा को 370 सीट और एनडीए को 400 सीट देने का लोगों का इरादा पक्का हुआ. मैं पूरे देश में जा रहा हूं. उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम मैंने लोगों में 400 पार नारे को सच कर दिखाने की प्रतिबद्धता देखी है. मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूं कि इस बार जनता 400 से ज्यादा सीटों पर हमारी जीत सुनिश्चित करेगी.

प्रश्न- लोग कहते हैं कि हम मोदी को वोट कर रहे हैं, प्रत्याशी के नाम पर नहीं. लोगों का इतना भरोसा है, इस भरोसे को कैसे पूरा करेंगे?

उत्तर- देश की जनता का यह विश्वास मेरी पूंजी है. यह विश्वास मुझे शक्ति देता है. यही शक्ति मुझे दिन रात काम करने को प्रेरित करती है. मेरी सरकार लगातार एक ही मंत्र पर काम कर रही है, वंचितों को वरीयता. जिन्हें किसी ने नहीं पूछा, मोदी उनको पूजता है. इसी भाव से मैं अपने आदिवासी भाई-बहनों, दलित, पिछड़े, गरीब, युवा, महिला, किसान सभी की सेवा कर रहा हूं. जनता का भरोसा मेरे लिए एक ड्राइविंग फोर्स की तरह काम करता है.

देखिए, जो संसदीय व्यवस्था है, उसमें पीएम पद का एक चेहरा होता है, लेकिन जनता सरकार बनाने के लिए एमपी को चुनती है. इस चुनाव में चाहे भाजपा का पीएम उम्मीदवार हो या एमपी उम्मीदवार, दोनों एक ही संदेश लेकर जनता के पास जा रहे हैं. विकसित भारत का संदेश. पीएम उम्मीदवार नेशनल विजन की गारंटी है, तो हमारा एमपी उम्मीदवार स्थानीय आकांक्षाओं को पूरा करने की गारंटी है.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक टीम की तरह काम करती है और इस टीम के लिए उम्मीदवारों के चयन में हमने बहुत ऊर्जा और समय खर्च किया है. हमने उम्मीदवारों के चयन का तरीका बदल दिया है. हमने किसी सीट पर उम्मीदवार के चयन में कोई समझौता नहीं किया, न ही किसी तरह के दबाव को महत्व दिया. जिसमें योग्यता है, जिसमें जनता की उम्मीदों को पूरा करने का जज्बा है, उसका चयन किया गया है. हमें मिल कर हर सीट पर कमल खिलाना है. भाजपा और एनडीए की यह टीम 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हमेशा समर्पित रहेगी.

प्रश्न- आपने 370 को हटाया, राम मंदिर बनवा दिया. अब तीसरी बार आपकी सरकार अगर लौटती है, तो कौन से वे बड़े काम हैं, जिन्हें आप पहले पूरा करना चाहेंगे?

उत्तर- जब आप चुनाव जीत कर आते हैं, तो आपके साथ जनता-जनार्दन का आशीर्वाद होता है. देश के करोड़ों लोगों की ऊर्जा होती है. जनता में उत्साह होता है. इससे आपके काम करने की गति स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है. 2024 के चुनाव में जिस तरीके से भाजपा को समर्थन मिल रहा है, ऐसे में ज्यादातर लोगों के मन में यह सवाल आ रहा है कि तीसरी बार सरकार में आने के बाद क्या बड़े काम होने वाले हैं.

यह चर्चा इसलिए भी हो रही है, क्योंकि 2014 और 2019 में चुनाव जीतने के बाद ही सरकार एक्शन मोड में आ गयी थी. 2019 में हमने पहले 100 दिन में ही आर्टिकल 370 और तीन तलाक से जुड़े फैसले लिये थे. बैंकों के विलय जैसा महत्वपूर्ण फैसला भी सरकार बनने के कुछ ही समय बाद ले लिया गया था. हालांकि इन फैसलों के लिए आधार बहुत पहले से तैयार कर लिया गया था.

इस बार भी हमारे पास अगले 100 दिनों का एक्शन प्लान है, अगले पांच वर्षों का रोडमैप है और अगले 25 वर्षों का विजन है. मुझे देशभर के युवाओं ने बहुत अच्छे सुझाव भेजे हैं. युवाओं के उत्साह को ध्यान में रखते हुए हमने 100 दिनों के एक्शन प्लान में 25 दिन और जोड़ दिये हैं. 125 में से 25 दिन भारत के युवाओं से जुड़े निर्णय के होंगे. हम आज जो भी कदम उठा रहे हैं, उसमें इस बात का ध्यान रख रहे हैं कि इससे विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करने में कैसे मदद मिल सकती है.

प्रश्न- दक्षिण पर आपने काफी ध्यान दिया है. लोकप्रियता भी बढ़ी है. वोट प्रतिशत भी बढ़ेगा, लेकिन क्या सीट जीतने लायक स्थिति साउथ में बनी है?

उत्तर- देखिए, दक्षिण भारत में बीजेपी अब भी सबसे बड़ी पार्टी है. पुद्दुचेरी में हमारी सरकार है. कर्नाटक में हम सरकार में रह चुके हैं. 2024 के चुनाव में मैंने दक्षिण के कई जिलों में रैलियां और रोड शो किये हैं. मैंने लोगों की आंखों में बीजेपी के लिए जो स्नेह और विश्वास देखा है, वह अभूतपूर्व है. इस बार दक्षिण भारत के नतीजे चौंकाने वाले होंगे.

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में हम सबसे ज्यादा सीटें जीतेंगे. लोगों ने आंध्र विधानसभा में एनडीए की सरकार बनाने के लिए वोट किया है. कर्नाटक में भाजपा एक बार फिर सभी सीटों पर जीत हासिल करेगी. मैं आपको पूरे विश्वास से कह रहा हूं कि तमिलनाडु में इस बार के परिणाम बहुत ही अप्रत्याशित होंगे और भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में होंगे.

प्रश्न- ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भाजपा को बहुत उम्मीदें हैं. भाजपा कितनी सीटें जीतने की उम्मीद करती है?

उत्तर- मैं ओडिशा और पश्चिम बंगाल में जहां भी जा रहा हूं, मुझे दो बातें हर जगह देखने को मिल रही हैं. एक तो भाजपा पर लोगों का भरोसा और दूसरा दोनों ही राज्यों में वहां की सरकार से भारी नाराजगी. लोगों की आकांक्षाओं को मार कर राज करने को सरकार चलाना नहीं कह सकते. ओडिशा और पश्चिम बंगाल में लोगों की आकांक्षाओं, भविष्य और सम्मान को कुचला गया है. पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार भ्रष्टाचार, गुंडागर्दी का दूसरा नाम बन गयी है. लोग देख रहे हैं कि कैसे वहां की सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को ताक पर रख दिया है.

संदेशखाली की पीड़ितों की आवाज दबाने की कोशिश की गयी. लोगों को अपने त्योहार मनाने से रोका जा रहा है. टीएमसी सरकार लोगों तक केंद्र की योजनाओं का फायदा नहीं पहुंचने दे रही. इसका जवाब वहां के लोग अपने वोट से देंगे. पश्चिम बंगाल के लोग भाजपा को एक उम्मीद के तौर पर देख रहे हैं. बंगाल में इस बार हम बड़ी संख्या में सीटें हासिल करेंगे. मैं ओडिशा के लोगों से कहना चाहता हूं कि उनकी तकलीफें जल्द खत्म होने वाली हैं. चुनाव नतीजों में हम ना सिर्फ लोकसभा की ज्यादा सीटें जीतेंगे, बल्कि विधानसभा में भी भाजपा की सरकार बनेगी.

पहली बार ओडिशा के लोगों को डबल इंजन की सरकार के फायदे मिलेंगे. बीजेडी की सरकार हमारी जिन योजनाओं को ओडिशा में लागू नहीं होने दे रही, हमारी सरकार बनते ही उनका फायदा लोगों तक पहुंचने लगेगा. बीजेडी ने अपने कार्यकाल में सबसे ज्यादा नुकसान उड़िया संस्कृति और भाषा का किया है. मैंने ओडिशा को भरोसा दिया है कि राज्य का अगला सीएम भाजपा का होगा, और वह व्यक्ति होगा, जो ओडिशा की मिट्टी से निकला हो, जो ओडिशा की संस्कृति, परंपरा और उड़िया लोगों की भावनाओं को समझता हो.

ये मेरी गारंटी है कि 10 जून को ओडिशा का बेटा सीएम पद की शपथ लेगा. राज्य के लोग अब एक ऐसी सरकार चाहते हैं, जो उनकी उड़िया पहचान को विश्व पटल पर ले जाए, इसलिए उनका भरोसा सिर्फ भाजपा पर है.

प्रश्न- बिहार और झारखंड में पार्टी का प्रदर्शन कैसा रहेगा, आप क्या उम्मीद करते हैं?

उत्तर- मेरा विश्वास है कि इस बार बिहार और झारखंड में भाजपा को सभी सीटों पर जीत हासिल होगी. दोनों राज्यों के लोग एक बात स्पष्ट रूप से समझ गये हैं कि इंडी गठबंधन में शामिल पार्टियों को जब भी मौका मिलेगा, तो वे भ्रष्टाचार ही करेंगे. इंडी ब्लॉक में शामिल पार्टियां परिवारवाद से आगे निकल कर देश और राज्य के विकास के बारे में सोच ही नहीं सकतीं.

झारखंड में नेताओं और उनके संबंधियों के घर से नोटों के बंडल बाहर निकल रहे हैं. यह किसका पैसा है? ये गरीब के हक का पैसा है. ये पैसा किसी गरीब का अधिकार छीन कर इकट्ठा किया गया है. अगर वहां भ्रष्टाचार पर रोक रहती, तो यह पैसा कई लोगों तक पहुंचता. उस पैसे से हजारों-लाखों लोगों का जीवन बदल सकता था, लेकिन जनता का वोट लेकर ये नेता गरीबों का ही पैसा लूटने लगे. दूसरी तरफ जनता के सामने केंद्र की भाजपा सरकार है, जिस पर 10 साल में भ्रष्टाचार का एक भी दाग नहीं लगा.

आज झारखंड में जिहादी मानसिकता वाले घुसपैठिये झुंड बना कर हमला करते हैं और झारखंड सरकार उन्हें समर्थन देती है. इन घुसपैठियों ने राज्य में हमारी बहनों-बेटियों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है. वहीं अगर बिहार की बात करें, तो जो पुराने लोग हैं, उन्हें जंगलराज याद है. जो युवा हैं, उन्होंने इसका ट्रेलर कुछ दिन पहले देखा है.

आज राजद और इंडी गठबंधन बिहार में अपने नहीं, नीतीश जी के काम पर वोट मांग रहा है. इंडी गठबंधन के नेता तुष्टीकरण में इतने डूब चुके हैं एससी-एसटी-ओबीसी का पूरा का पूरा आरक्षण मुस्लिम समाज को देना चाहते हैं. जनता इस साजिश को समझ रही है. इसलिए, भाजपा को वोट देकर इसका जवाब देगी.

प्रश्न- संपत्ति का पुनर्वितरण इन दिनों बहस का मुद्दा बना हुआ है. इस पर आपकी क्या राय है?

उत्तर- शहजादे और उनके सलाहकारों को पता है कि वे सत्ता में नहीं आने वाले. इसीलिए ऐसी बात कर रहे हैं. यह माओवादी सोच है, जो सिर्फ अराजकता को जन्म देगी. इंडी गठबंधन की परेशानी यह है कि वे तुष्टीकरण से आगे कुछ भी सोच नहीं पा रहे. वे किसी तरह एक समुदाय का वोट पाना चाहते हैं, इसलिए अनाप-शनाप बातें कर रहे हैं. लूट-खसोट की यह सोच कभी भी भारत की संस्कृति का हिस्सा नहीं रही. वे एक्सरे कराने की बात कर रहे हैं, उनका प्लान है कि एक-एक घर में जाकर लोगों की बचत, उनकी जमीन, संपत्ति और गहनों का हिसाब लिया जायेगा. कोई भी इस तरह की व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेगा. पिछले 10 वर्षों में हमारा विकास मॉडल लोगों को अपने पैरों पर खड़ा करने का है. इसके लिए हम लोगों तक वे मूलभूत सुविधाएं पहुंचा रहे हैं, जो दशकों पहले उन्हें मिल जाना चाहिए था. हम रोजगार के नये अवसर तैयार कर रहे हैं, ताकि लोग सम्मान के साथ जी सकें.

प्रश्न- भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है. भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है. आम आदमी को इसका लाभ कैसे मिलेगा?

उत्तर- यह बहुत ही अच्छा सवाल है आपका. तीसरे कार्यकाल में भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगी. जब मैं यह कहता हूं कि तो इसका मतलब सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है. दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था सम्मान के साथ देशवासियों के लिए समृद्धि भी लाने वाला है. दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का मतलब है बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी का विस्तार, ज्यादा निवेश और ज्यादा अवसर. आज सरकार की योजनाओं का लाभ जितने लोगों तक पहुंच रहा है, उसका दायरा और बढ़ जायेगा.

भाजपा ने तीसरे टर्म में आयुष्मान भारत योजना का लाभ 70 वर्ष से ऊपर के सभी बुजुर्गों को देने की गारंटी दी है. हमने गरीबों के लिए तीन करोड़ और पक्के मकान बनाने का संकल्प लिया है. तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने की बात कही है. जब अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, तो हमारी योजनाओं का और विस्तार होगा और ज्यादा लोग लाभार्थी बनेंगे.

प्रश्न- आप लोकतंत्र में विपक्ष को कितना जरूरी मानते हैं और उसकी क्या भूमिका होनी चाहिए?

उत्तर- लोकतंत्र में सकारात्मक विपक्ष बहुत महत्वपूर्ण है. विपक्ष का मजबूत होना लोकतंत्र के मजबूत होने की निशानी है. इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि पिछले 10 वर्षों में विपक्ष व्यक्तिगत विरोध करते-करते देश का विरोध करने लगा. विपक्ष या सत्ता पक्ष लोकतंत्र के दो पहलू हैं, आज कोई पार्टी सत्ता में है, कभी कोई और रही होगी, लेकिन आज विपक्ष सरकार के विरोध के नाम पर कभी देश की सेना को बदनाम कर रहा है, कभी सेना के प्रमुख को अपशब्द कह रहा है. कभी सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाता है, तो कभी एयरस्ट्राइक पर संदेह जताता है. सेना के सामर्थ्य पर उंगली उठा कर वे देश को कमजोर करना चाहते हैं.

आप देखिए, विपक्ष कैसे पाकिस्तान की भाषा बोलने लगा है. जिस भाषा में वहां के नेता भारत को धमकी देते थे, वही आज कांग्रेस के नेता बोलने लगे हैं. मैं इतना कह सकता हूं कि विपक्ष अपनी इस भूमिका में भी नाकाम हो गया है. वे देश के लोगों का विश्वास नहीं जीत पा रहे, इसलिए देश के खिलाफ बोल रहे हैं.

प्रश्न- झारखंड में बड़े पैमाने पर नोट पकड़े गये, भ्रष्टाचार से इस देश को कैसे मुक्ति मिलेगी?

उत्तर- देखिए, जब कोई सरकार तुष्टीकरण, भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के दलदल में फंस जाती है तो इस तरह की चीजें देखने को मिलती हैं. मैं आपको एक आंकड़ा देता हूं. 2014 से पहले, कांग्रेस के 10 साल के शासन में ईडी ने छापे मार कर सिर्फ 35 लाख रुपये बरामद किये थे. पिछले 10 वर्ष में इडी के छापे में 2200 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए हैं. यह अंतर बताता है कि जांच एजेंसियां अब ज्यादा सक्रियता से काम कर रही हैं.

आज देश के करोड़ों लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से सीधे खाते में पैसे भेजे जा रहे हैं. कांग्रेस के एक प्रधानमंत्री ने कहा था कि दिल्ली से भेजे गये 100 पैसे में से लाभार्थी को सिर्फ 15 पैसे मिलते हैं. बीच में 85 पैसे कांग्रेस के भ्रष्टाचार तंत्र की भेंट चढ़ जाते थे. हमने जनधन खाते खोले, उन्हें आधार और मोबाइल नंबर से लिंक किया, इसके द्वारा भ्रष्टाचार पर चोट की. डीबीटी के माध्यम से हमने लाभार्थियों तक 36 लाख करोड़ रुपये पहुंचाये हैं. अगर यह व्यवस्था नहीं होती, तो 30 लाख करोड़ रुपये बिचौलियों की जेब में चले जाते. मैंने संकल्प लिया है कि मैं देश से भ्रष्टाचार को खत्म करके रहूंगा. जो भी भ्रष्टाचारी होगा, उस पर कार्रवाई जरूर होगी. मेरे तीसरे टर्म ये कार्रवाई और तेज होगी.

प्रश्न- विपक्ष सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों- इडी और सीबीआइ के दुरुपयोग का आरोप लगा रहा है. इस पर आपका क्या कहना है?

उत्तर- आपको यूपीए का कार्यकाल याद होगा, तब भ्रष्टाचार और घोटाले की खबरें आती रहती थीं. उस स्थिति से बाहर निकलने के लिए लोगों ने भाजपा को अपना आशीर्वाद दिया, लेकिन आज इंडी गठबंधन में शामिल दलों की जहां सरकार है, वहां यही सिलसिला जारी है. फिर जब जांच एजेंसियां इन पर कार्रवाई करती हैं तो पूरा विपक्ष एकजुट होकर शोर मचाने लगता है. एक घर से अगर करोड़ों रुपये बरामद हुए हैं, तो स्पष्ट है कि वो पैसा भ्रष्टाचार करके जमा किया गया है. इस पर कार्रवाई होने से विपक्ष को दर्द क्यों हो रहा है? क्या विपक्ष अपने लिए छूट चाहता है कि वे चाहे जनता का पैसा लूटते रहें, लेकिन एजेंसियां उन पर कार्रवाई न करें.

मैं विपक्ष और उन लोगों को चुनौती देना चाहता हूं, जो कहते हैं कि सरकार किसी भी एजेंसी का दुरुपयोग कर रही है. एक भी ऐसा केस नहीं हैं जहां पर कोर्ट ने एजेंसियों की कार्रवाई को गलत ठहराया हो. भ्रष्टाचार में फंसे लोगों के लिए जमानत पाना मुश्किल हो रहा है. जो जमानत पर बाहर हैं, उन्हें फिर वापस जाना है. मैं डंके की चोट पर कहता हूं कि एजेंसियों ने सिर्फ भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्यवाही की है.

प्रश्न- विपक्ष हमेशा इवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, आपकी क्या राय है?

उत्तर- विपक्ष को अब यह स्पष्ट हो चुका है कि उसकी हार तय है. यह भी तय हो चुका है कि जनता ने उन्हें तीसरी बार भी बुरी तरह नकार दिया है. ये लोग इवीएम के मुद्दे पर अभी-अभी सुप्रीम कोर्ट से हार कर आये हैं. ये हारी हुई मानसिकता से चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए पहले से बहाने ढूंढ कर रखा है. इनकी मजबूरी है कि ये हार के लिए शहजादे को दोष नहीं दे सकते. आप इनका पैटर्न देखिए, चुनाव शुरू होने से पहले ये इवीएम पर आरोप लगाते हैं. उससे बात नहीं तो इन्होंने मतदान प्रतिशत के आंकड़ों का मुद्दा उठाना शुरू किया है. जब मतगणना होगी तो गड़बड़ी का आरोप लगायेंगे और जब शपथ ग्रहण होगा, तो कहेंगे कि लोकतंत्र खतरे में है. चुनाव आयोग ने पत्र लिख कर खड़गे जी को जवाब दिया है, उससे इनकी बौखलाहट और बढ़ गयी है. ये लोग चाहे कितना भी शोर मचा लें, चाहे संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठा लें, जनता इनकी बहानेबाजी को समझती है. जनता को पता है कि इसी इवीएम से जीत मिलने पर कैसे उनके नरेटिव बदल जाते हैं. इवीएम पर आरोप को जनता गंभीरता से नहीं लेती.

प्रश्न- आपने आदिवासियों के विकास के लिए अनेक योजनाएं शुरू की हैं. आप पहले प्रधानमंत्री हैं, जो भगवान बिरसा की जन्मस्थली उलिहातू भी गये. आदिवासी समाज के विकास को लेकर आपका विजन क्या है?

उत्तर- इस देश का दुर्भाग्य रहा है कि आजादी के बाद छह दशक तक जिन्हें सत्ता मिली, उन लोगों ने सिर्फ एक परिवार को ही देश की हर बात का श्रेय दिया. उनकी चले, तो वे यह भी कह दें कि आजादी की लड़ाई भी अकेले एक परिवार ने ही लड़ी थी. हमारे आदिवासी भाई-बहनों का इस देश की आजादी में, इस देश के समाज निर्माण में जो योगदान रहा, उसे भुला दिया गया. भगवान बिरसा मुंडा के योगदान को ना याद करना कितना बड़ा पाप है. देश भर में ऐसे कितने ही क्रांतिकारी हैं जिन्हें इस परिवार ने भुला दिया.

जिन आदिवासी इलाकों तक कोई देखने तक नहीं जाता था, हमने वहां तक विकास पहुंचाया है. हम आदिवासी समाज के लिए लगातार काम कर रहे हैं. जनजातियों में भी जो सबसे पिछड़े हैं, उनके लिए विशेष अभियान चला कर उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है. इसके लिए सरकार ने 24 हजार करोड़ रुपये की योजना बनायी है.

भगवान बिरसा मुंडा के जन्म दिवस को भाजपा सरकार ने जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया. एकलव्य विद्यालय से लेकर वन उपज तक, सिकेल सेल एनीमिया उन्मूलन से लेकर जनजातीय गौरव संग्रहालय तक, हर स्तर पर विकास कर रहे हैं. एनडीए के सहयोग से पहली बार एक आदिवासी बेटी देश की राष्ट्रपति बनी है.अगले वर्ष भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जन्म जयंती है. भाजपा ने संकल्प लिया है कि 2025 को जनजातीय गौरव वर्ष के रूप में मनाया जायेगा.

प्रश्न- देश के मुसलमानों और ईसाइयों के मन में भाजपा को लेकर एक अविश्वास का भाव है. इसे कैसे दूर करेंगे?

उत्तर- हमारी सरकार ने पिछले 10 वर्षों में एक काम भी ऐसा नहीं किया है, जिसमें कोई भेदभाव हुआ हो. पीएम आवास का घर मिला है, तो सबको बिना भेदभाव के मिला है. उज्ज्वला का गैस कनेक्शन मिला है, तो सबको मिला है. बिजली पहुंची है, तो सबके घर पहुंची है. नल से जल का कनेक्शन देने की बात आयी, तो बिना जाति, धर्म पूछे हर किसी को दी गयी. हम 100 प्रतिशत सैचुरेशन की बात करते हैं. इसका मतलब है कि सरकार की योजनाओं का लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचे, हर परिवार तक पहुंचे. यही तो सच्चा सामाजिक न्याय है.

इसके अलावा मुद्रा लोन, जनधन खाते, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, स्टार्ट अप- ये सारे काम सबके लिए हो रहे हैं. हमारी सरकार सबका साथ सबका विकास के विजन पर काम करती है. दूसरी तरफ, जब कांग्रेस को मौका मिला, तो उसने समाज में विभाजन की नीति अपनायी. दशकों तक वोटबैंक की राजनीति करके सत्ता पाती रही, लेकिन अब जनता इनकी सच्चाई समझ चुकी है.

भाजपा को लेकर अल्पसंख्यकों में अविश्वास की बातें कांग्रेसी इकोसिस्टम का गढ़ा हुआ है. कभी कहा गया कि बीजेपी शहरों की पार्टी है. फिर कहा गया कि बीजेपी ऐसी जगहों में नहीं जीत सकती, जहां पर अल्पसंख्यक अधिक हैं. आज नागालैंड सहित नॉर्थ ईस्ट के दूसरे राज्यों में हमारी सरकार है, जहां क्रिश्चियन समुदाय बहुत बड़ा है. गोवा में बार-बार भाजपा को चुना जाता है. ऐसे में अविश्वास की बात कहीं टिकती नहीं.

प्रश्न- झारखंड और बिहार के कई इलाकों में घुसपैठ बढ़ी है, यहां तक कि डेमोग्रेफी भी बदल गयी है. इस पर कैसे अंकुश लगेगा?

उत्तर- झारखंड को एक नयी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. जेएमएम सरकार की तुष्टीकरण की नीति से वहां घुसपैठ को जम कर बढ़ावा मिल रहा है. बांग्लादेशी घुसपैठियों की वजह से वहां की आदिवासी संस्कृति को खतरा पैदा हो गया है, कई इलाकों की डेमोग्राफी तेजी से बदल रही है. बिहार के बॉर्डर इलाकों में भी यही समस्या है. झारखंड में आदिवासी समाज की महिलाओं और बेटियों को टारगेट करके लैंड जिहाद किया जा रहा है. आदिवासियों की जमीन पर कब्जे की एक खतरनाक साजिश चल रही है.

ऐसी खबरें मेरे संज्ञान में आयी हैं कि कई आदिवासी बहनें इन घुसपैठियों का शिकार बनी हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है. बच्चियों को जिंदा जलाया जा रहा है. उनकी जघन्य हत्या हो रही है. पीएफआइ सदस्यों ने संताल परगना में आदिवासी बच्चियों से शादी कर हजारों एकड़ जमीन को अपने कब्जे में ले लिया है. आदिवासियों की जमीन की सुरक्षा के लिए, आदिवासी बेटी की रक्षा के लिए, आदिवासी संस्कृति को बनाये रखने के लिए भाजपा प्रतिबद्ध है.

Following is the clipping of the interview:

 

 Source: Prabhat Khabar