Didi cannot snatch away people’s right to vote in West Bengal: PM Modi

Published By : Admin | May 6, 2019 | 14:30 IST
The entire country stands together with the people of West Bengal during these trying times of ‘Cyclone Fani’: PM Modi
I called Mamata Didi twice to enquire about the situation in West Bengal but both the times my call was refused by the egoistic administration of Didi: PM Modi in West Bengal
Didi’s arrogant behavior and corrupt governance are going to bring the end of TMC’s regime in West Bengal very soon: Prime Minister Modi

भारत माता की जय
भारत माता की जय
झाड़ग्राम और मेदनीपुर के सभी बहनो भाइयो को… जय श्री राम। झाड़ग्राम की धरती से पश्चिम बंगाल के सभी जनों को जय श्री राम और स्पेशली ममता दीदी को भी जय श्री राम।
साथियो, दीदी ने जय श्री राम का अभिवादन करने भर से ही लोगों को जेल में डालना शुरू कर दिया है। मुझे लगा कि मैं भी डायरेक्ट दीदी को जय श्री राम बोल दूं, तो मुझे भी जेल में डाल दें तो यहां के निर्दोष लोग जो जेल में पड़े हैं मैं उनकी सेवा करूंगा।

पश्चिम बंगाल में राम नाम लेना भी अपराध हो गया है क्या? अरे दीदी, राम जी के आगे अच्छे-अच्छों का अहंकार चूर-चूर हो गया, आपका अहंकार कहां तक ठहर पाएगा। वामपंथियों का तो समझ में आता है, उनके तो विचार विदेशी हैं, संस्कार विदेशी हैं। यही कारण है की वो अपने नाम में लगे 'सीता' और 'राम' उसकी लाज भी नहीं रखते और रामायण का अपमान, महाभारत का अपमान, हमारे पुराने ग्रंथों का अपमान, ये उनके लिए एक फैशन हो गया है। लेकिन ममता दीदी आपने तो इन्हीं वामपंथियों के विरुद्ध लड़ाई लड़ी थी। मां, माटी और मानुष ने आपको शक्ति दी थी फिर आप जय श्री राम कहने वालों को जेल क्यों भेजने लगी हो? भाइयो बहनो, एक जगह पर एक और बात दीदी ने अपनी सभा में कही, उन्होंने कहा की भाजपा ने भगवान राम को पोलिंग एजेंट बना दिया है। मैं आज दीदी को साफ-साफ कहना चाहता हूं, भगवान राम हमारी रगों में हैं, हमारे संस्कारों में हैं। साथियो, लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान राम ने लक्ष्मण से कहा था, अपि स्वर्णमयी लंका न मे लक्ष्मण रोचते। जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी॥

यानी मुझे ये सोने की लंका जरा भी प्रभावित नहीं करती, मेरे लिए मां और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। भाइयो और बहनो, राम हमारी प्रेरणा हैं, राम हमारी प्रज्ञा है।

भाइयो-बहनो, और इसलिए हमारी राजनीति का रास्ता राष्ट्रवाद है, भारत भक्ति है। दीदी एजेंटों का गोरखधंधा तो आपने यहां पश्चिम बंगाल में बहुत चलाया है, बहुत चलाया है, बहुत चलाया है। पश्चिम बंगाल में एक ऐसा काम नहीं, जो टीएमसी के एजेंटों के बिना चल सकता है। आपका यह चौकीदार दिल्ली से गरीबों, पिछड़ों, आदिवासियों को सस्ता राशन मिले इसके लिए रुपये भेजता है। दीदी, अपने एजेंटों के माध्यम से उस पैसे में से टोलाबाजी करती है और मेरे आदिवासी भाइयो-बहनो तक खरा किस्म का चावल पहुंचाया जाता है। मुझे बताया गया है की यहां तो गरीबों के, आदिवासियों के राशन कार्ड भी दीदी के एजेंटों ने दबा दिए हैं। दीदी आखिर गरीबी गरीब से आपकी क्या दुश्मनी है?

साथियो, गरीबों के लिए आयुष्मान भारत योजना के तहत हर वर्ष 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की व्यवस्था आपके इस चौकीदार ने की है। देश के तमाम राज्यों में गरीबों को, जनजातीय परिवारों को इसका लाभ मिल रहा है, लेकिन यहां दीदी के एजेंटों को फायदा नहीं मिलाता तो योजना ही बंद कर दी। मैं फिर से पूछता हूं दीदी, ये गरीबों से इतनी नफरत क्यों है आपको? भाइयो और बहनो, आपके इस सेवक ने एक और योजना शुरू की है, पीएम किसान सम्मान योजना। इसके तहत देश भर के 12 करोड़ से ज्यादा छोटे किसानों के बैंक खाते में उनकी जो छोटी-छोटी जरूरतों के लिए सीधे पैसे ट्रांसफर किए जा रहे हैं। लेकिन यहां पश्चिम बंगाल में, इसमें टोलबाजी नहीं हो पा रही है इसीलिए दीदी लाभार्थी किसानों की लिस्ट देने में ही आनाकानी कर रही है। दीदी आखिर किसानों से किस बात का बदला ले रही हैं आप?

साथियो, जब ईश्वर चन्द्र विद्यासागर जी की इस महान धरती पर बेटियों से अत्याचार होता है, उनकी तस्करी की खबरें आती हैं तो बहुत दुख होता है। आपके इस चौकीदार ने मानव तस्करी के लिए कठोर कानून बनाया है। बलात्कार, रेप के केस में फांसी तक की सजा का प्रावधान किया है। लेकिन टीएमसी की सरकार इन कानूनों को ठीक से लागू ही नहीं होने देती है। दीदी, आखिर पश्चिम बंगाल की बेटियों से आपकी क्या दुश्मनी है? भाइयो और बहनो, अपनी पार्टी के एजेंटों और गुंडों के बल पर गुंडा तंत्र चला रही दीदी का पतन तो हो ही चुका है, उनकी जमीन तो खिसक ही चुकी है, अब उनकी पराजय भी तय है। पंचायत चुनाव तृणमूल कांग्रेस की, तृणमूल कांग्रेस की ‘हरमद वाहिनी’ को रोकने का काम झाड़ग्राम और मेदनीपुर ने किया था। टीएमसी के गुंडों ने तब भाजपा के कार्यकर्ताओं पर अत्याचार किए, हत्याएं की। हमारे अनेक कार्यकर्ताओं पर दीदी की पुलिस ने लाठियां भी बरसाई लेकिन आप सभी कमल खिलाने के लिए संकल्पित रहे। मैं आपको फिर विश्वास दिलाने आया हूं की भाजपा का हर कार्यकर्ता, हर शहीद के साथ खड़ा है, पूरा पश्चिम बंगाल आपके साथ खड़ा है।

साथियो, आज का पांचवां चरण हो या फिर इससे पहले के चरण, हर प्रकार की हिंसा, हर प्रकार की धमकी के बावजूद, भारी संख्या में लोग भाजपा के पक्ष में मतदान करने बूथ तक पहुंच रहे हैं। हमारे कार्यकर्ताओं पर हमला हुआ, उम्मीदवारों पर हमला हुआ, लेकिन वोट के लुटेरों को बंगाल की जनता द्वारा पूरा जवाब दिया जा रहा है। दीदी के गुंडों की तमाम कोशिशों के बावजूद एक संकल्प के साथ मतदाता वोट दे रहे हैं। ये संकल्प है चुप्पेचाप कमल छाप, चुप्पेचाप कमल छाप। आप मेरे साथ बोलिए चुप्प-चाप कमल छाप, पूरी ताकत से बोलिए कमल छाप। दसूरी बात आगे बताता हूं चुप्पेचाप कमल छाप और बूथ-बूथ से TMC साफ, बूथ-बूथ से TMC साफ, बूथ-बूथ से TMC साफ, बूथ-बूथ से TMC साफ, बूथ-बूथ से TMC साफ। मैं फिर से बुलवाता हूं चुप्पेचाप…कमल छाप, चुप्पेचाप…कमल छाप, चुप्पेचाप…कमल छाप, बूथ-बूथ से...TMC साफ, बूथ-बूथ से...TMC साफ।

भाइयो और बहनो, पश्चिम बंगाल के हर बूथ पर अब केंद्रीय सुरक्षाबलों की टीमें चुनाव आयोग ने तैनात की हैं। और दीदी का ‘चोमकी-धोमकी’, ये चोमकी और धोमकी वाला मॉडल अब नहीं चलेगा। ये जनता नहीं चलने देगी। अब चोमकी और धोमकी जनता की चलेगी। गण तंत्र में लूट तंत्र का राज नहीं चलेगा, नहीं चलेगा, नहीं चलेगा। पश्चिम बंगाल के लोगों को आजादी से वोट डालने का अधिकार दीदी छीन नहीं सकती।

साथियो, महामिलावट के दम पर दिल्ली जाने का जो सपना दीदी देख रही थी वो अब मिट्टी में मिलता दिख रहा है। आज पश्चिम बंगाल, पश्चिम बंगाल में दीदी दस के आकड़े तक पहुंचने के लिए जी-जान से ताकत लगा रही है। सबको दौड़ा रही है और गुस्से में आकर के हर दिन मोदी पर गलियां बरसा रही है, जो गलियां मन में आए बोल रही है। संतुलन ही खो दिया है। और उसका कारण क्या है मालूम है? ये संतुलन खोया है उसका कारण मालूम है? क्या कारण है? भाइयो-बहनो, ये जनसागर हैं ना उनको रिपोर्ट तो मिलती है, ये जो जुस्सा है पूरे बंगाल के हर कोने में है, इसी ने दीदी की नींद खरब कर दी है। सब नेताओं के दिमाग भी खराब हो रहे हैं, दीदी का भी दिमाग खराब हो रहा है। जिन गरीबों का सब कुछ टीएमसी के चिटफंड गिरोह ने लूटा, वो युवा जिनको परीक्षा पास करने के बावजूद नौकरी नहीं मिली, जिन कर्मचारियों को डीए नहीं मिला, गुंडागर्दी और सिंडिकेट राज के कारण जिन कामगारों की रोजी रोटी छिन गई, ये सब अब दीदी को दस सीटों तक भी पहुंचने नहीं देंगे। ये यहां के लोगों का तय है और साथियो, इसीलिए आज कल दीदी काफी डरी हुई है। बौखलाई हुई नजर आती है, ये एक डर उनका पीछा नहीं छोड़ रहा है। ये डर है लोकतंत्र का, ये डर है कानून का, ये डर है जनता की ताकत का, ये डर है जनता के फैसले का। जब दीदी को भी लोकतंत्र का डर सताये तो ये डर अच्छा है। जब दीदी को भी कानून का डर सताये तो ये डर अच्छा है। जब दीदी को भी जनता के फैसले का डर सताये तो ये डर अच्छा है। भाइयो और बहनो, ये पूरा क्षेत्र क्रांतिवीरों की धरती है। यहां अंग्रेजों के दमन और अत्याचार के विरुद्ध हमारे जनजातीय साथियो ने आजादी की लड़ाई लड़ी है। जंगल महल में स्वतंत्रता के लिए अगर हम सभी के पूर्वज ईस्ट इंडिया कंपनी से भिड़ सकते हैं, तो टीएमसी के जगाई मथाई क्या चीज़ होती हैं।

साथियो, आपका ये सेवक विकास की पंचधारा यानी बच्चों की पढ़ाई, युवा की कमाई, बुजुर्गों की दवाई, किसान को सिंचाई और जन-जन की सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए निकला है। भाइयो और बहनो, आजादी के बाद के दशकों में जो सरकारें थी उन्होंने आपके कल्याण के बारे में कभी सोचा नहीं था। आदिवासी परिवारों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए ही अटल जी की सरकार ने एक अलग मंत्रालय बनाया था। उन्हीं की प्रेरणा से जनजातीय कल्याण के लिए केंद्र सरकार ने इस बार 30 प्रतिशत से अधिक राशि का भी प्रावधान किया है। हमारा संकल्प है की गरीब, वंचित, आदिवासी के पास 2022 तक अपना पक्का घर होगा। हर गरीब, आदिवासी बहन के पास घर के चूल्हे में गैस का कनेक्शन होगा। हर गरीब, आदिवासी इलाके में पोषक आहार की और टीकाकरण की उचित व्यवस्था होगी। गांवों में, आदिवासी अंचलों में आधुनिक चिकित्सा केंद्र खोलने का काम कर चल रहा है।

साथियो, मैं आपको भी भरोसा देता हूं की कोई भी आपके अधिकार छीन नहीं पाएगा। किसी भी वनवासी के, जनजातीय समाज के अधिकार कम नहीं होंगे। आप कांग्रेस और टीएमसी और लेफ्ट वालों की अफवाहों से सतर्क रहिए। साथियो, हमारी सरकार में जन धन से लेकर वन धन योजना तक संपूर्णता के साथ आदिवासी बहनो भाइयो के लिए काम किया जा रहा है। वन धन योजना के माध्यम से ये सुनिश्चित किया जा रहा है की जंगल से आदिवासी जो उपज लेते हैं उसकी बेहतर कीमत उन्हें मिल पाए। इसके अलावा सरकार ने MSP के लिए वन उपजों की संख्या भी बढ़ाई है। पांच वर्ष पहले जहां सिर्फ 10 फसलों पर MSP मिलता था अब वो संख्या बढ़ा कर करीब-करीब 50 हो चुकी है। केंद्र की एनडीए सरकार ने ही बांस के कानून को भी बदला है। जिससे आप अपने खेतों में भी अपने खुद के खेत में बांस उगा कर उसको काट कर उस बांस को बेचकर आप पैसे कमा सकते हैं, पहले कानून आपको रोकता था हमने कानून बदल दिया।

साथियो, जनजातीय क्षेत्रों में एकलव्य मॉडल स्कूल खोले जा रहे हैं। हमारे युवाओं को खेल की अच्छी सुविधा मिले इसके लिए भी संस्थान बनाए जा रहे हैं। हमारे जनजाति वीर-वीरांगनाओं की शौर्य गाथाएं नई पीढ़ी को प्रेरित करे, इसके लिए देश भर में स्मारक स्थलों का निर्माण हो रहा है।

भाइयो और बहनो, जो अपने शहीदों को याद नहीं रखते, वो समाज, वो सभ्यताएं कभी विकास नहीं कर सकतीं। दुर्भाग्य से आजादी के 70 वर्षों में यही होता रहा है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था। लेकिन इन वंशवादियों ने, जिनके गुण गा-गा कर दीदी यहां तक पहुंची है और जिनके भरोसे दिल्ली के सपने देखती हैं, उन्होंने नेता जी को भुलाने की साजिश रची। हमने आजाद हिंद फौज के भारत की आजादी में योगदान को फिर से उचित स्थान दिया। इस बार आजाद हिंद सरकार की 75वीं जयंती लाल किले पर धूम-धाम से मनाई गई। इस बार गणतंत्र दिवस की परेड में आजाद हिंद फौज के सेनानी भी पहली बार परेड में शामिल हुए। भाइयो और बहनो, ये वो लोग हैं, जिन्होंने राष्ट्र की आजादी के लिए बलिदान दिए। हमारे भविष्य के लिए अपना वर्तमान दांव पर लगाया। हम सभी को ये गौरव नहीं मिल पाया, देश के लिए देश के लिए मरने का मौका नहीं मिला लेकिन जो हमारी अगली पीढ़ी है क्या उसके लिए सुरक्षित और समृद्ध भारत छोड़ना ये हमारी जिम्मेदारी है और आप मुझे बताइए क्या टीएमसी की वोटबैंक की सोच भारत को सुरक्षा दे सकती है? जो घुसपैठियों के चरणों में लोट-पोट है, वैसी विचारधारा क्या दुश्मनों से रक्षा कर सकती है? दिल्ली में टीएमसी और महामिलावटियों की मजबूर सरकार क्या देश को स्थिरता दे सकती है? ये काम कौन कर सकता है? कौन कर सकता है? कौन कर सकता है? कौन कर सकता है? कौन कर सकता है?

मोदी ये काम तभी कर पाएगा, जब आप पूरी शक्ति से दिल्ली में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार बनाएंगे, आप सभी को एक-एक बूथ पर कमल खिलाना है। आपका एक-एक वोट मोदी के खाते में जाएगा। याद रखिए, याद रखोगे, याद रखोगे?

चुपचाप-कमल छाप, चुपचाप-कमल छाप, चुपचाप- कमल छाप, बूथ-बूथ से टीएमसी साफ, बूथ-बूथ से टीएमसी साफ, बूथ-बूथ से टीएमसी साफ, चुप चाप... कमल छाप, बूथ-बूथ से…टीएमसी साफ।
भारत माता की जय
भारत माता की जय
आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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August 10, 2026

प्रधानमंत्री – मेरे यहां, मुझे यहां लगभग 12-13 साल हो गए इसी मकान में, अगर मैंने regularly और हर बार किसी को रिसिव किया है, किसी को मैं मिला हूं, तो खिलाड़ी हैं। पिछले 10-12 साल हो गए, आप लोगों के पुरुषार्थ के कारण, भारत को लगातार विजय दिलाने के आपके प्रयासों के कारण और उत्तरोत्तर सफलता में नई ऊंचाईयां पार करने की परंपरा के कारण, जो काम शायद हम स्कूलों में जाकर कहें कि नहीं नहीं भई खेलना चाहिए, ये करना चाहिए, वो काम स्कूलों में जाकर के हम कर सकते थे, उससे ज्यादा आपका मेडल उनको inspire करता है।

प्रधानमंत्री – तुमने मुझे वादा किया था पिछली बार कि तुम्हारी दोनों बेटियां खिलाड़ी बन जाएंगी?

खिलाड़ी - हाँ जी अभी वे उमर की छोटी हैं, अगले कॉमनवेल्थ में एक घर में तीन मेडल लाकर दिखाएंगी।

प्रधानमंत्री – पक्का।

खिलाड़ी – हाँ जी।

खिलाड़ी – जब मैं दौड़ रहा था, जब मेरा इवेंट था 29 को, तो उस दिन गुरुपूर्णिमा थी, तो उस दिन मेरे गुरू को मैंने एक गिफ्ट दे दिया।

प्रधानमंत्री – बड़ी शान बढ़ाई आपने। इतनी आंसू टपक रहे थे, मुझे लगता है कि आंसू के हर बूंद से जैसे गोल्ड मेडल टपक रहा है।

खिलाड़ी – मैं बहुत ज्यादा खुशी थी, इमोशनल भी थे उसी दिन, खुशी ज्यादा था और मैं इसलिए रोई थी कि मेरा पेरिस आलंपिक में मेरा 1 Kg में मेडल रह गई थी और एक प्लेयर्स की लाइफ में क्या क्या हमको फेस करना पड़ता है। तो ये 4 साल के अंदर में कितना क्या क्या कुछ मैंने फेस किया था, हर टाइम injury ही चल रहे थे और family problem, वो सब हो रहा था। तो बहुत मुश्किल से मैं ये 4 साल फेस किया था। तो वो सब जब पोडियम में जब मैं खड़ी थी सर और हमारी जो फ्लैग ऊपर जाते हैं और हमारे नेशनल एंथम जब बजते हैं तो सर हम रुक नहीं सकते सर, अपना आप आंसू निकलते हैं।

प्रधानमंत्री – बहुत बहुत बढ़िया

प्रधानमंत्री – आपके इस अचीवमेंट को सिर्फ आपका अचीवमेंट मानता हूं, ऐसा नहीं है, ये आपका विजय आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन जाता है।

खिलाड़ी – सब डर रहे थे हमसे कि इंडिया के साथ फाइट आ गई, अब तो हम पहली फाइट ही हार जायेंगे, हमारा मेडल भी नहीं आयेगा।

प्रधानमंत्री – यानी मान के चलते हैं।

खिलाड़ी – हाँ सर।

प्रधानमंत्री – क्या हुआ, वो restaurant वालों से झगड़ा कर रही थी?

खिलाड़ी – हम लोगों का जो इतना अच्छा परफॉर्मेंस था, लास्ट डे था और सब जीत के गए थे और पूरा इंडिया के लोग थे। तो थोड़ा सा मुझे बुरा लग रहा। तो मैंने उनको अच्छे से बोला रिक्वेस्ट किया था सर, फिर उन्होंने मान भी लिया, अभी चेंज भी हो गया सर।

प्रधानमंत्री – इस विजय की परिस्थिति खुशी, आनंद, अपने साथियों के साथ और गेम पूरे हो चुके हैं। तो हसी मजाक मस्ती का मूड ऐसे समय उस मैप पर नजर जाना और उसको रजिस्टर करना और तुरंत सिर्फ मेडल लेते समय देश खड़ा हो जाता है ऐसा नहीं, भीतर से देश का भाव मैं सच बताता हूँ ये वीडियो सामान्य नहीं है आपका, लंबे समय तक लोगों को याद रहेगा। ये बॉक्सिंग वालों से भी दुनिया के खिलाड़ी अब डरने लगे हैं।

खिलाड़ी – जरूर सर, पुरे सभी डरे हुए थे। एक के बाद एक गोल्ड मेडल गोल्ड मेडल आ रहे थे और मतलब पूरा लास्ट में ऐसे धमाका जैसा हो गया बिल्कुल। जिस तरीके से हम लोगों को सपोर्ट मिल रहा है, हमें बैक टू बैक कंपटीशन मिल रहा है वो एक बहुत बड़ी बात है और हमारे जितने भी यंग एथलीट है वो लोग सभी जैसे खेलो इंडिया स्कीम से आए हुए हैं और ये एक बहुत बड़ा changes ला रहा है पूरे स्पोर्ट्स में ही।

प्रधानमंत्री – अगर आप लोग खेलो इंडिया की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं और प्रतिष्ठा सिर्फ वहां जाकर के रिबिन काटने से नहीं होगी। आप वैसे ही खेलेंगे जैसे एक छोटा विद्यार्थी, एक छोटा नौजवान, छोटा खिलाड़ी खेलता है। यह बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन करेगा। क्योंकि अभी तो हमें बहुत आगे जाना है, बहुत मेडल लाना है। कारगिल विजय दिवस पर किसकी विजय हुई थी?

खिलाड़ी – उस दिन कारगिल डे था वैसे और जिस दिन मैंने पाकिस्तान के साथ फाइट किया था सर, वो उसी दिन का था। तो मैं एक इंडियन आर्मी से हूं, तो मैंने उस दिन मैं पहले से बहुत वो था कि सर पाकिस्तान को हराना है। तो मैंने वो पाकिस्तान एक तरफ मैंने 5-0 से हराया, तो मैंने हमारा इंडियन आर्मी का कारगिल हीरोज़ को मैंने डेडिकेट किया किया था सर।

प्रधानमंत्री – आपको यह याद रहना और आप स्वयं फौज से हैं तो, मैं जरूर मानता हूं कि देश के वीर जवानों को आपने जो भाव प्रकट किया ना कि, मैं कारगिल के विजेताओं को मेरा मेडल समर्पित करता हूं। उसने उस विजय पर चार चांद लगा दिए और जिसको पराजित करना था उसी को किया आपने।

खिलाड़ी – वो पाकिस्तान की बात चल रही है, मुझे किस्सा याद आ गया सर। 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे और मेरी पाकिस्तान के साथ पहली फाइट आ गई थी और वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे तो मिलिट्री वाले के फोन आए कि भई पाकिस्तान से नहीं हारना है। तो फिर मैं फर्स्ट राउंड 4-1 से जीत गया। सेकंड राउंड 3-2 से जीत गया, पर दोनों के सर लग गए आपस में, तो दोनों के लग गए कट और फाइट तो मैं जीत गया।

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – उसके बाद फिर दोनों चले गए हॉस्पिटल में टांके लगवाने के लिए। फिर 2014 में आप फर्स्ट टाइम प्रधानमंत्री जी बने थे और जो हमारे साथ आर्मी का कोच गया हुआ था उसका नाम नरेंद्र राणा था और फिर वो कई देर तक सोच के मेरे को बोला कि भाईजान एक बात बोलूं, मैं हां बोलो, बोला भाईजान आपका नाम नरेंद्र है। आपके कोच का नाम नरेंद्र है, आपके प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र है, तो मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है।

प्रधानमंत्री – सिर्फ आपने मेडल की संख्या बढ़ाई ऐसा नहीं है। आपने एक पीढ़ी को तैयार किया।

खिलाड़ी – मेरे मन में भी धक-धक धक-धक हो रहा है सर।

प्रधानमंत्री – आप चिंता मत कीजिए।

खिलाड़ी – पर..

प्रधानमंत्री – आप चाहें तो आपको बोलने में भी मेडल मिलने वाला है।

खिलाड़ी – मेरे फ्रेंड सर्कल में किसी ने बोला था कि मैं उनको कुछ बोलती थी भई तुम्हारे अच्छे के लिए तुम करो। तो अक्सर मुझे वो बोलते थे कि तू के मोदी ते मिल रही है?

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – हरियाणवी में बोल देते हैं सर कि क्या तू मोदी से मिली हुई है, कि तेरी बात माने। तो आज मैं आपसे मिली हूं सर। मैं उनको बोल पाऊंगी कि हां मैं मोदी जी से मिली हूं।

खिलाड़ी – कॉमनवेंल्थ गेम्स में मैंने सिल्वर मेडल जीता, फिर मैंने क्रेडिट साहब को दिया, सपना तो था एक बार मेडल जीत के लेके आने के लिए, बट ट्रेनिंग का सेंटर नहीं था, मैंने SAI आने के बाद मैं बहुत ट्रेनिंग करके मेडल जीत पा रहा, इसलिए बहुत खुशी से मैंने सर को क्रेडिट दिया था क्योंकि बहुत इंप्रूव हुआ।

प्रधानमंत्री – मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान का विषय है, मेहनत आपने की और मुझे याद किया, मैं आपका बहुत आभारी हूं दोस्त।

प्रधानमंत्री – वाराणसी में खेल तुम प्रैक्टिस कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – कैसा बना है स्टेडियम?

खिलाड़ी – सर अच्छा बना है, वहां पर मैं 10-12 दिन के लिए ट्रेनिंग करने गई थी, क्योंकि मैं मंदिर गई थी तो वहां पर ही ट्रेनिंग करके आई थी। और मैं वहां पे मतलब सेटल भी होना चाहती हूं क्योंकि मुझे काशी विश्वनाथ बहुत अच्छा लगता है सर।

प्रधानमंत्री – भोपाल में ट्रेनिंग कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – तो उज्जैन जाते थे कि नहीं?

खिलाड़ी – जी सर उज्जैन भी गई थी सर।

प्रधानमंत्री – अच्छा महाकाल के पास भी गई।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – काशी विश्वनाथ के पास हो आई एक बार।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – सावन महीना तो अभी है।

खिलाड़ी – वहां घर जाके फिर उसके बाद जाऊंगी सर।

प्रधानमंत्री – ठीक है।

खिलाड़ी – साई ने भी सर बहुत सपोर्ट किया है मुझे। इसके कारण ही मैं यहां तक पहुंची हूं सर। और मैं खेलो इंडिया स्कीम में भी थी 2018 में जो फर्स्ट खेलो इंडिया हुआ था, उसमें मेरा सिल्वर मेडल था, वहां पे भी मैंने आपको देखा था ओपनिंग सेरेमनी में, तो उसमें मेरा मेडल था, तो मेरे को स्कीम भी मिल गया और मैं यहां तक पहुंची हूं सर।

प्रधानमंत्री – स्पोर्ट्स व्यवस्था एक बात है, लेकिन देश मेडल तब प्राप्त करता है जब देश में स्पोर्ट्स कल्चर बनता है। दोस्तों आपने बहुत बड़ा काम किया है। देश का नाम रोशन किया है। आपको मैं बहुत बधाई देता हूं और आप विश्वास कीजिए आगे भी आप विजयी होंगे और फिर से एक बार यहीं पर हम मिलेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

प्रधानमंत्री – ये लगातार तीसरी बार देश को मेडल दिलवाया है।

खिलाड़ी – थैंक यू सर।

प्रधानमंत्री – बहुत आशीर्वाद बेटा।

खिलाड़ी – और थैंक यू सो मच मैं सर के हाथ से लड्डू खा रही मेरा कल बर्थडे था तो आज सर के हाथ से…

प्रधानमंत्री – बहुत बधाई वाह।

प्रधानमंत्री – मुस्कुराओ यार ।

प्रधानमंत्री – जो खेलेगा वो खिलेगा।