Gujarat Chief Minister Narendra Modi is a huge chess fan. During a public function in Gandhinagar last month, Modi, in the presence of world chess champion Viswanthan Anand, said: “I am the president of Gujarat Cricket Association (GCA) but I give more time to chess than cricket.”
And why not? Gujarat is trying to break Mexico’s world record of highest number of chess players playing the game simultaneously at the same time and at the same venue. El Zscalo, Mexico City’s central square, holds the record with 13,446 players assembling to play chess on October 21, 2006. Now Gujarat government, the Gujarat State Chess Association and NIIT are planning to accumulate 20,000 chess players at Sardar Patel Stadium in Navarangpura on December 24 and break Mexico’s record by many miles. Former world champion Anatoly Karpov was the guest of honour in Mexico and current world champion Anand will be the guest of honour at the Sardar Patel Stadium on that historic day.
On Wednesday, when top table tennis players from the state met the Chief Minister to apprise him of their achievements in a small function at his Gandhinagar office, Modi again reiterated his stand towards chess and asked all TT players to play chess to be mentally sharp. He also urged that every household should have a chess board and everybody should play chess. He also appraised the small gathering about Gujarat’s record-breaking effort in December.
His love for chess apart, the Chief Minister was highly impressed with the achievements of the TT players as well, especially junior India number one and a member of the core TT team practising for the Commonwealth Games Harmeet Desai. Chief Minister was highly appreciative of the Gujarat team’s performance at various national and international level and asked them to keep up the good work.
India international Pathik Mehta and Gujarat number one in men’s Jignesh Jaiswal and women’s top seed Divya Gohil were also present on the occasion. Other promising players present on the occasion were Frenaz Chippia, Nargis Malubhai, Sapna Sharma, Steffi Gomes and Kushal Sangtani. The players were accompanied by president of Gujarat State Table Tennis Association (GSTTA) Vipul Mittra and secretary Haresh Sangtani. Chief Minister also obliged autograph seekers and he was seen signing on the players T-shirts in Gujarati.
Apart from other details, the GSTTA also appraised the CM about a senior national table tennis championships which they plan to host at the newly-built Kokhra Sports Complex in Maninagar later this year.
The Dehradun-Delhi Economic Corridor will transform the entire region: PM Modi in Uttarakhand
April 14, 2026
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The Delhi-Dehradun Economic Corridor, being inaugurated today, is a world-class infrastructure project that will deepen connectivity, boost the economy and tourism: PM
With the completion of 25 years since its formation, Uttarakhand has now entered its 26th year; Today, with the inauguration of the Delhi-Dehradun Expressway, another major milestone has been added: PM
The Dehradun-Delhi Economic Corridor will transform the entire region: PM
The Corridor will save time, travel will become cheaper and faster, people will spend less on petrol and diesel, and fares and freight costs will decrease;it will also facilitate employment: PM
Our mountains, these forest areas, this heritage of Devbhoomi, these are very, very sacred places; It is our duty to keep such places clean: PM
Plastic bottles, heaps of garbage in these areas hurt the sanctity of Devbhoomi ; it is very essential that we keep these sites of Devbhoomi, our pilgrimage sites, clean and beautiful: PM
भारत माता की जय।
भारत माता की जय।
भारत माता की जय।
उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह जी, यहां के लोकप्रिय और कर्मठ युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी नितिन गड़करी जी, अजय टमटा जी, टेक्नॉलोजी के माध्यम से जुड़े उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, गर्वनर आनंदी बेन, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी, मंच पर उपस्थित प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट जी, पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी जी, पूर्व मुख्यमंत्री भाई रमेश पोखरियाल, विजय बहुगुना जी, तीरथ सिंह रावत जी, त्रिवेंद्र सिंह रावत जी, उत्तराखंड सरकार के सभी मंत्रीगण, सांसद और विधायकगण और विशाल संख्या में पधारे मेरे प्यारे भाईयों बहनों।
देवभूमि उत्तराखंड़ की इस पावन धरती पर आप सभी को मेरा प्रणाम। बहुत बडी संख्या में आए हुए पूज्य संतगण को भी प्रणाम। उत्तराखंड का प्यारा भुलों-भैबंदों, बौड़ी-भूलियों, स्याणा-बुजुर्गों, आप सबु तैं नमस्कार! मेरो प्यारो दाजी भाई, दीदी-बैनी, आमा-बाबा सबई लाई मेरो तरफ़ देखी ढोग दिनछू।
इस कार्यक्रम से टेक्नोलॉजी के जरिये भी दिल्ली, यूपी से अनेक लोग जुड़े हैं, मैं सभी का अभिनन्दन करता हूं। सबसे पहले तो मैं आप सबकी क्षमा चाहता हूं, उत्तरप्रदेश और दिल्ली के कार्यक्रम में जुड़े हुए लोगों की भी क्षमा मांगता हूं, कि मुझे यहां पहुंचने में एक घंटे से भी ज्यादा देर हो गई, सब स्थान पर लंबे समय तक आप सबको इंतजार करना पड़ा, और कारण यही था, मैं निकला तो समय पर था, लेकिन करीब-करीब 12 किलोमीटर का रोड शो, काली मंदिर से लेकर के यहां तक, इतना उत्साह इतना उमंग, कि मेरे लिए तेज गति से गाड़ी चलाना बड़ा मुश्किल हो गया। तो धीरे-धीरे लोगों को प्रणाम करते-करते, जनता जनार्दन के आशीर्वाद लेते लेते यहां पहुंचने में मुझे एक घंटे से भी ज्यादा देरी हो गई, और इसके लिए मैं आपकी क्षमा मांगता हूं, और ऐसी धूप में 12 किलोमीटर ये जन सैलाब, ये उत्तराखंड़ का प्यार, माताओं-बहनों का आशीर्वाद, मैं आज उत्तराखंड़ से एक नई ऊर्जा लेकर के जाऊंगा, नई प्रेरणा लेकर के जाऊंगा और मैं इसके लिए हर किसी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।
साथियों,
आज देश में पर्व त्योहार की उमंग है। विभिन्न हिस्सों में नववर्ष का आगमन हुआ है। मैं देशवासियों को बैसाखी, बोहाग बीहू और पुथांडु की शुभकामनाएं देता हूं!
साथियों,
अगले कुछ ही दिनों में, यमुनोत्री, गंगोत्री, बाबा केदारनाथ, बद्रीनाथ धाम की यात्रा भी शुरू होने जा रही है। इस पवित्र समय का, देश के कोटि-कोटि आस्थावान, श्रद्धाभाव से इंतज़ार करते हैं। मैं पंच बद्री, पंच केदार, पंच प्रयाग और यहां के आराध्य देवों को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूं। मैं संतला माता को भी नमन करता हूं। यहां आने से पहले मुझे, मां डाट काली के दर्शन करने का सौभाग्य मिला है। देहरादून शहर पर, मां डाट काली की बड़ी कृपा है। दिल्ली-देहरादून इकनॉमिक कॉरिडोर के इतने बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने में, माता डाट काली का आशीर्वाद बहुत बड़ी शक्ति रहा है।
साथियों,
उत्तराखंड राज्य अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरा करने के साथ ही छब्बीसवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। आज दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के साथ इस प्रगति में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ी है। आपको याद होगा, बाबा केदार के दर्शन के बाद मेरे मुंह से अनायास निकला था, कि इस शताब्दी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा। मुझे बहुत खुशी है कि डबल इंजन सरकार की नीतियों, और उत्तराखंड के लोगों के परिश्रम से, ये युवा राज्य, विकास के नए आयाम जोड़ रहा है। ये प्रोजेक्ट भी, उत्तराखंड के विकास को नई गति देगा। इस एक्सप्रेसवे का बहुत बड़ा हिस्सा यूपी से होकर गुजरता है। इससे गाजियाबाद, बागपत, बड़ौत, शामली और सहारनपुर जैसे अनेक शहरों को भी बहुत फायदा होगा। टूरिज्म के लिहाज से ये प्रोजेक्ट बहुत अहम है। मैं पूरे देश को इस प्रोजेक्ट की बहुत-बहुत बधाई देता हूं।
साथियों,
आज डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर की जयंती भी है। मैं बाबा साहेब को कोटि-कोटि देशवासियों की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। बीते दशक में हमारी सरकार ने जो नीतियां बनाईं, जो निर्णय लिए, वो संविधान की गरिमा को पुनर्स्थापित करने वाले रहे हैं। आर्टिकल 370 हटने के बाद आज पूरे देश में भारत का संविधान लागू है। जिन दर्जनों जिलों में माओवाद-नक्सलवाद खत्म हुआ है, वहां भी अब संविधान की भावना के अनुरूप काम हो रहा है। देश में समान नागरिक संहिता लागू हो, ये हमारे संविधान की अपेक्षा है। उत्तराखंड ने संविधान की इस भावना को आगे बढ़कर और उस भावना को आगे बढ़ाकर पूरे देश को राह दिखाई है।
साथियों,
बाबा साहेब का जीवन, गरीबों को, वंचितों को, शोषितों को न्यायपूर्ण व्यवस्था देने के लिए समर्पित था। हमारी सरकार आज उसी भावना के साथ, हर गरीब, हर वंचित को सच्चा सामाजिक न्याय देने में जुटी है। और सामाजिक न्याय का एक बहुत बड़ा माध्यम, देश का संतुलित विकास है, सबको सुविधा है, सबकी समृद्धि है। इसलिए ही बाबा साहेब आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की, औद्योगीकरण की भरपूर वकालत करते थे।
साथियों,
भविष्य की दशा और दिशा क्या होगी, अक्सर लोग, इसके लिए हाथ की रेखाओं को देखते हैं, दिखाते हैं। जो भविष्य वक्ता होते हैं ना, वो हस्त रेखाएं देखते हैं, और हर व्यक्ति के भविष्य के विषय में बताते हैं। मैं इस विज्ञान को तो नहीं जानता हूं, लेकिन कहते हैं कि ये भी एक शास्त्र है। अब ये तो हो गई व्यक्ति के भाग्य की जो उसके हाथ में रेखाएं हैं उसकी बात, लेकिन मैं अगर इसी संदर्भ मे बात को, इसी संदर्भ को राष्ट्र-जीवन से जोड़कर के देखूं, तो राष्ट्र की भाग्य रेखाएं कौन सी होती हैं? राष्ट्र की भाग्य रेखाएं ये हमारी ये सड़कें होती हैं, हमारे हाईवे होते हैं, हमारे एक्सप्रेसवे होते हैं, एयरवे, रेलवे, वॉटरवे, ये हमारे राष्ट्र की भाग्य रेखाएं होती हैं। और बीते एक दशक से हमारा देश, विकसित भारत बनाने के लिए विकास की ऐसी ही भाग्य रेखाओं के निर्माण में जुटा हुआ है। ये विकास रेखाएं सिर्फ आज की सुविधाएं नहीं हैं, ये आने वाली पीढ़ियों की समृद्धि की गारंटी हैं और ये मोदी की भी गारंटी है। बीते दशक से हमारी सरकार राष्ट्र की इन विकास-रेखाओं पर अभूतपूर्व निवेश कर रही है। मैं आपको एक आंकड़ा देता हूं। अभी नितिन जी ने बहुत सारे आंकड़ें सिर्फ उत्तराखंड़ से संबंधित बताए हैं आपको। देखिए साल 2014 तक ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए साल में, पूरे देश में, 2 लाख करोड़ रुपए भी खर्च नहीं होते थे। ये मैं पूरे हिन्दुस्तान की बात बताता हूं, 2 लाख करोड़ भी नहीं होते थे, आज ये छह गुना अधिक, 12 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा हो चुका है। यहां उत्तराखंड में ही, सवा दो लाख करोड़ रुपए से अधिक के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है। 2014 के पहले पूरे देश के लिए 2 लाख करोड़, आज अकेले उत्तराखंड़ के लिए सवा दो लाख करोड़ रूपया। कभी उत्तराखंड के गांवों में सड़क के इंतज़ार में पीढ़ियां बदल जाती थीं। आज डबल इंजन सरकार के प्रयासों से, अब सड़क गांव तक पहुंच रही है, जो गांव पहले वीरान पड़ गए थे, वो फिर से जीवंत हो रहे हैं। चारधाम महामार्ग परियोजना हो, रेल परियोजनाओं का विस्तार हो, केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे हो, विकास की ये रेखाएं, इस क्षेत्र के कोने-कोने में जीवन की भी भाग्य रेखाएं बन रही हैं।
साथियों,
21वीं सदी का भारत आज जिस स्पीड और जिस स्केल पर काम कर रहा है, उसकी पूरी दुनिया चर्चा कर रही है। मैं आपको उत्तराखंड, पश्चिमी यूपी और दिल्ली का ही उदाहरण देता हूं। कुछ सप्ताह पहले ही, दिल्ली मेट्रो का विस्तार हुआ, मेरठ में मेट्रो-सेवा की शुरुआत हुई, दिल्ली-मेरठ नमो-भारत रेल देश को समर्पित की गई, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की शुरुआत हुई, हवाई जहाजों के लिए MRO फेसिलिटी पर काम शुरू हुआ, और आज, देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे शुरु हो रहा है।
साथियों,
इतने छोटे से रीजन में ये सब इतने कम समय में हो रहा है। कल्पना कीजिए, देश में कितने बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है। और इसलिए ही मैं कहता हूं - 21वीं सदी का भारत, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जिस नए युग में प्रवेश कर रहा है, वो अभूतपूर्व है, अकल्पनीय है।
साथियों,
आज भारत के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने वाले, अनेक इकोनॉमिक कॉरिडोर्स, उस पर काम चल रहा है। जैसे दिल्ली-मुबंई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, बेंगलुरू-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, ईस्ट कोस्ट इकोनॉमिक कॉरिडोर, अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, ऐसे बहुत से इकोनॉमिक कॉरिडोर देश में बनाए जा रहे हैं। ये इकोनॉमिक कॉरिडोर, प्रगति के नए द्वार हैं, गेटवे हैं, डोर हैं। और इनसे उम्मीदों की डोर भी जुड़ी हुई है। ये इकोनॉमिक कॉरिडोर, सड़क के अलावा नए-नए व्यापार-कारोबार का मार्ग बनाते हैं। फैक्ट्रियों के लिए, गोदामों के लिए पूरा नेटवर्क, उसका आधार तैयार करते हैं।
साथियों,
देहरादून-दिल्ली इकोनॉमिक कॉरिडोर से भी इस पूरे क्षेत्र का कायाकल्प होने जा रहा है। पहला फायदा तो ये है कि इससे समय बचेगा, आना-जाना सस्ता और तेज होगा, लोगों का पेट्रोल-डीजल कम खर्च होगा, किराया-भाड़ा कम होगा, और दूसरा बड़ा फायदा रोजगार का होगा। अभी इसके निर्माण में 12 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए, तो हज़ारों श्रमिकों को काम मिला है। साथ ही, जो इंजीनियर हैं, अन्य स्किल्ड वर्कफोर्स हैं, ट्रांसपोर्ट से, उससे जुड़े साथी हैं, उनको भी बहुत बड़ी मात्रा में काम मिला है। किसानों और पशुपालकों की उपज भी, अब तेज़ गति से, बड़ी मंडियों और बड़े बाज़ारों तक पहुंचेगी।
साथियों,
इस शानदार एक्सप्रेस-वे से उत्तराखंड के टूरिज्म को बहुत ही बड़ा फायदा होगा। देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, मसूरी और चारधाम यात्रा के लिए ये सबसे प्रमुख मार्ग बनेगा। और हम सभी जानते हैं, जब टूरिज्म का विकास होता है, तो हर कोई कुछ न कुछ कमाता है। होटल हो, ढाबे वाले हो, टैक्सी हो, ऑटो हो, होम स्टे हो, सबको इसका फायदा होता है।
साथियों,
मुझे खुशी है कि आज उत्तराखंड, विंटर टूरिज्म, विंटर स्पोर्टस और wed in india, शादी के लिए, बहुत बेहतरीन डेस्टिनेशन बनता जा रहा है।
साथियों,
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए बारहमासी पर्यटन बहुत जरूरी है। इसलिए मेरा सर्दियों में होने वाली धार्मिक यात्राओं को लेकर बहुत आग्रह रहा है। और मुझे खुशी है कि हर साल इन यात्राओं में लोगों की संख्या बढ़ रही है। आपको याद होगा, मैं 2023 में आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा पर गया था। पहले बहुत जाता था, बीच में बिल्कुल जा नहीं पाया, कई वर्षों के बाद मैं गया, और मुझे मुख्यमंत्री जी बता रहे थे, गर्वनर साहब बीच मे आए, वो भी बता रहे थे कि 2023 में वहां गया और उसके बाद, बहुत बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां जा रहे हैं। पहले वहां कुछ सौ लोग ही सर्दियों में यात्रा के लिए जाते थे। साल 2025 में, करीब-करीब 40 हजार से अधिक लोगों ने इन पवित्र स्थानों की यात्रा की है। कभी एक हजार नहीं होते थे, अगर चालीस हजार पहुंचते हैं तो यहां के लोगों की रोजी-रोटी की कितनी बड़ी ताकत आ जाती है। इसी तरह साल 2024 में शीतकालीन चारधाम यात्रा में, करीब अस्सी हज़ार श्रद्धालु आए थे। 2025 में ये संख्या डेढ़ लाख पार कर चुकी है।
साथियों,
हम ऐसा विकसित भारत बनाने में जुटे हैं, जहां प्रगति भी हो, प्रकृति भी हो और संस्कृति भी हो। और इसलिए, आज होने वाले हर निर्माण को, इन्हीं त्रिवेणी, प्रगति, प्रकृति और सांस्कृति की त्रिवेणी, इन्हीं मूल्यों के आधार पर विकसित किया जा रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर से इंसानों को भी सुविधा हो, और वहां रहने वाले वन्यजीवों को भी असुविधा न हो, ये हमारा प्रयास है। और इसलिए ही इस एक्सप्रेसवे पर, करीब 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर भी बनाया गया है। हाथियों को भी असुविधा न हो, इसका भी ध्यान रखा गया है।
वैसे साथियों,
मैं आज देशभर के सभी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों से भी एक आग्रह करना चाहता हूं। हमारे पहाड़, ये वन क्षेत्र, ये देवभूमि की धरोहर, ये बहुत ही बहुत पवित्र स्थान हैं। ऐसे स्थानों को साफ-सुथरा रखना, ये हम सभी का कर्तव्य है। यहां रहने वालों का भी और यात्री के रूप में आने वालों का भी। इन इलाकों में प्लास्टिक की बोतलें, कूड़े-कचरे का ढेर, ये देवभूमि की पवित्रता को ठेस पहुंचाता है। इसलिए बहुत आवश्यक है कि हम देवभूमि के इन स्थलों को, हमारे इन तीर्थ स्थलों को स्वच्छ रखें, सुंदर रखें।
साथियों,
अगले वर्ष हरिद्वार में कुंभ का भी आयोजन होना है। हमें आस्था के इस संगम को दिव्य-भव्य और स्वच्छ बनाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़नी है।
साथियों,
उत्तराखंड में नंदा देवी राजजात यात्रा भी होती है। ये आस्था का उत्सव तो है ही, ये हमारी सांस्कृतिक चेतना का भी जीवंत उदाहरण है। जहां मां नंदा को बेटी मानकर पूरे सम्मान के साथ विदा किया जाता है। इस यात्रा में बहनों-बेटियों की भागीदारी, इसे विशेष बनाती है। मैं मां नंदा को प्रणाम करते हुए, देशभर की बहनों-बेटियों को भी विशेष संदेश देना चाहता हूं। विकसित भारत के निर्माण में आपकी बहुत बड़ी भूमिका है। इस देश की बेटियों की, इस देश की माताओं की, बहनों की बहुत बड़ी भूमिका मैं देख रहा हूं। और बहनों-बेटियों की सुविधा, सुरक्षा और लोकतंत्र में भागीदारी, ये डबल इंजन सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता है। आप अभी देख रही हैं, कि दुनिया में कितना बड़ा संकट आया है। इससे दुनिया के विकसित देशों में भी कितना हाहाकार मचा है। ऐसे मुश्किल हालात में भी, सरकार का निरंतर प्रयास है कि हमारी बहनों को कम से कम परेशानी हो।
साथियों,
बहनों-बेटियों की भागीदारी का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव अब देश के सामने है। 4 दशकों के इंतज़ार के बाद संसद ने, नारीशक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था। इससे विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं के लिए तैंतीस प्रतिशत आरक्षण तय हो गया। सभी दलों ने आगे आकर इस महत्वपूर्ण कानून को समर्थन दिया। अब महिलाओं को ये जो हक मिला है ना, इस हक को लागू करने में देर नहीं होनी चाहिए। अब ये लागू होना चाहिए। अब जो 2029 में लोकसभा के चुनाव होंगे, अब तब से लेकर विधान सभा के भी चुनाव आते रहेंगे, जो भी चुनाव आते रहेंगे, 2029 से ही ये लागू हो जाना चाहिए। ये देश की भावना है, ये देश की हर बहन-बेटी की इच्छा है। मातृशक्ति की इसी इच्छा को नमन करते हुए, 16 अप्रैल से संसद में विशेष चर्चा तय की गई है। देश की बहनों-बेटियों के हक से जुड़े इस काम को, सभी राजनीतिक दल मिलकर के सर्वसम्मति से आगे बढ़ाएं, उसको पूरा करे। और मैंने आज देश की सभी बहनों के नाम एक खुला पत्र लिखा है, सोशल मीडिया में शायद ये मेरा पत्र आप तक पहुंचा होगा, हो सकता है टीवी और अखबार वाले भी इस पत्र का जिक्र करते होंगे। मैंने बड़े आग्रह के साथ देश की माताओं-बहनों को इस कार्य में भागीदार बनने के लिए निमंत्रित किया है। मुझे पक्का विश्वास है कि पत्र मेरे देश की माताएं-बहनें जरूर पढ़ेंगी। एक एक शब्द पर मनन करेंगी, और इतना बड़ा पवित्र कार्य करने के लिए 16-17-18 को संसद में आने वाले सभी सांसदों को उनके आशीर्वाद भी मिलेंगे। मैं आज देवभूमि से देश के सभी दलों से फिर अपील करूंगा कि नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का जरूर समर्थन करें। 2029 में हमारे देश की 50 प्रतिशत जनसंख्या हमारी माताएं-बहनें, हमारी बेटियां, उनको उनका हक हम देकर रहें।
साथियों,
मैं उत्तराखंड आउं और फौज की बात ना हो, तो बात अधूरी ही रहती है। ये गढ़ी कैंट, ये सभा स्थल, ये उत्तराखंड की महान सैन्य परंपरा का प्रमाण है। यहां पास ही देश की रक्षा सुरक्षा से जुड़े कई संस्थान हैं, 1962 की लड़ाई में, शहीद जसवंत सिंह रावत जी के शौर्य को देश कभी भुला नहीं सकता।
साथियों,
सेना के सामर्थ्य को सशक्त करना हो, या हमारे सैनिक परिवारों की सुविधा और सम्मान हो, हमारी सरकार इसके लिए निरंतर प्रयासरत है। वन रैंक वन पेंशन के माध्यम से हमारी सरकार ने, अब तक करीब सवा लाख करोड़ रुपए पूर्व फौजियों को उनके खाते में जमा कर दिए हैं। उत्तराखंड के भी हजारों परिवारों को इसका लाभ मिला है। इसके अलावा, इस वर्ष पूर्व फौजियों के लिए health scheme का बजट भी छत्तीस प्रतिशत बढ़ाया गया है। 70 वर्ष और इससे अधिक के ex-servicemen के लिए, दवाईयों की door step home delivery भी शुरू की गई है। पूर्व फौजियों के बच्चों की एजुकेशन ग्रांट भी डबल की गई है। और बेटियों के विवाह के लिए जो सहायता मिलती है, उसको भी 50 हज़ार से बढ़ाकर एक लाख रुपए किया गया है।
साथियों,
देशभक्ति, देवभक्ति और प्रगति, ऐसे हर आयाम को जोड़ते हुए, हमें देश को विकसित बनाना है। एक बार फिर दिल्ली-वासियों को, उत्तर प्रदेश वासियों को, और एक प्रकार से देशवासियों को, इस शानदार एक्सप्रेसवे की मैं बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।