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श्रीमान राज्‍यपाल महोदय जी, आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी, मंत्रिपरिषद के मेरे साथी, वित्‍त एवं रक्षा मंत्री श्रीमान अरूण जेटली जी, नौसेना के अध्‍यक्ष श्रीमान धवन जी, मंच पर विराजमान सभी वरिष्‍ठ महानुभाव, उपस्थित जल सेना, थल सेना, नभ सेना के सभी प्रमुख अधिकारी, देवियों एवं सज्‍जनों, कल हमने आजादी का पर्व मनाया। लेकिन, उस आजाद भारत की रक्षा का काम हमारे सेना के जवान कर रहे हैं, चाहे वो नौसेना हो, थल सेना हो या वायुसेना हो। लेकिन बदलते हुए युग में, बाहुबल से ही सिर्फ रक्षा नहीं होती है। विज्ञान और टेक्‍नोलोजी के युग में बाहुबल के साथ रक्षा के क्षेत्र में बुद्धि बल का महात्‍म्‍य बहुत बढ़ गया है।

आज जो आईएनएस कोलकाता, नौसेना के माध्‍यम से राष्‍ट्र को समर्पित हो रहा है, वह भारत के बुद्धिबल का भी परिचायक है। भारत के ही टेक्‍नीशियनों ने, भारत के ही इंजीनियरों ने, भारत के ही रक्षा विशेषज्ञों ने इसका निर्माण किया है। अब तक भारत में युद्ध क्षेत्र के लिए संरक्षा क्षेत्र के लिए जिन भी चीजों का निर्माण हुआ है, उसमें आईएनएस कोलकाता सबसे बड़ा इंडिजेनस निर्माण कार्य है। मैं इसके लिए देश के इस युवा बुद्धि बल को, उनके सामर्थ को भी हृदय से अभिनंदन करता हूं। और जब हम आज आईएनएस कोलकाता राष्‍ट्र को समर्पित करते हैं, उसी पल हम विश्‍व को भारत की इस बुद्धि धन का परिचय भी दिला रहे हैं, भारत की निर्माण क्षमता का भी परिचय दिला रहे हैं। युद्ध लड़ना, युद्ध जीतना कुछ मात्रा में अब कठिन नहीं भी है । लेकिन युद्ध हो ही नहीं, उसकी गारंटी तो तब होती है, जब आपका सैन्‍य बल आधुनिक हो, सामर्थवान हो, शस्‍त्रास्‍त्रों से लैस हों, विश्‍व की किसी भी ताकत से अधिक सामर्थवान हो। अगर ये आपका सामर्थ है तो युद्ध कभी आता ही नहीं है। और इसलिए हमारी सेनाओं के सामर्थ के लिए आधुनिक व्‍यवस्‍थाएं उपलब्‍ध कराने का एक हेतु, युद्ध का निवारण भी होता है। एक बार सामर्थ की अनुभूति हो, कभी कोई भारत की तरफ आंख ऊंची कर देखने की हिम्‍मत नहीं कर सकता है। और इसलिए भारत अपनी शक्ति को उस दिशा में बढ़़ाना चाहता है। ताकि किसी को भी भारत के सामर्थ को देखते ही, हमारे जवानों के सामर्थ को देखते ही, हमारे बाहुबल, बुद्धिबल का , सामर्थ को देखते ही कभी उसे भारत की ओर आंख करने का दु:साहस नहीं होगा। यह मुझे विश्‍वास है।

मैं महाराष्‍ट्र की धरती पर खड़ा हूं। यहां के समुद्र तट से जब नौसेना की बात करता हूं तब छत्रपति शिवाजी महाराज का स्‍मरण होना बहुत स्‍वाभाविक है। नौसेना के उदय में, नौसेना की कल्‍पना में सबसे प्रथम यदि किसी का योगदान था तो छत्रपति शिवाजी महाराज का था। और तब भारत छोटे छोटे जहाजों से जब विश्‍व व्‍यापार की ओर बढ़ रहा था तब छत्रपति शिवाजी महाराज को यह ध्‍यान आया था कि विश्‍व व्‍यापार के लिए भी सामुद्रिक सुरक्षा का महात्‍म्‍य है। और उसी में से सर्वप्रथम नौसेना का प्रारंभ इसी समुद्र तट पर हुआ था। बढ़ते-बढ़ते आज इसने एक वैश्विक रूप ले लिया है। सामुद्रिक तट से जुड़े हुए सभी राष्‍ट्र नौसेना की आवश्‍यकता को माना है। भारत का तो विशाल समुद्री तट है। विश्‍व व्‍यापार बढ़ता जा रहा है। विश्‍व व्‍यापार के लिए भी सामुद्रिक सुरक्षा बहुत महत्‍वपूर्ण बनी है और उसमें भारत अपनी भूमिका निभा रहा है। यह आईएनएस कोलकाता एक प्रकार से समुद्र में तैरता हुआ कम्‍यूनिकेशन का एक बहुत बड़ा, आधुनिक से आधुनिक संपुट है। यह हमारे ही नवयुवकों ने एक तैरती हुई साामुद्रिक व्‍यवस्‍था में टेक्‍नोलोजी को तैयार किया है। यह आने वाले दिनों में व्‍यापार जगत से जुड़े हुए लोगों के लिए भी, सामुद्रिक व्‍यापार से जुड़े हुए लोगों के लिए भी, इस कम्‍यूनिकेशन टेक्‍नोलोजी के माध्‍यम से एक सुरक्षा की गारंटी का अहसास होगा।

भारत सामर्थवान बने, भारत शक्तिशाली बने, हमारे सेना के जवान राष्‍ट्ररक्षा में कभी भी पीछे न रहे, हमारे सेना के जवान राष्‍ट्र रक्षा में कभी भी पीछे न रहे, उनको कभी यह महसूस न हो कि दुनिया की तुलना में हमारे संसाधन कम पड़ रहे हैं। हमारी व्‍यवस्‍थाएं कम पड़ रही हैं, यह कभी उसे महसूस न हो, इसके लिए उसके सामर्थ के साथ आधुनिक टेक्‍नोलोजी, आधुनिक, संसाधनों को भी जोड़ने का हमारा मकसद है और उसी मकसद के तहत आज राष्‍ट्र के चरणों में ये आईएनएस कोलकाता का समर्पण राष्‍ट्र की सैन्‍य शक्ति को बढ़ावा देगा, नौसेना के आत्‍म विश्‍वास को बढावा देगा और इस तरह के निर्माण कार्य के अंदर भारत की युवा टेलेंट को भी प्रोत्‍साहन देगा। ऐसा मुझे पूरा विश्‍वास है।

इस नई सरकार ने अपने बजट में डिफेन्‍स आफसेट के लिए विश्‍व की तकनीक को लाने के लिए, विश्‍व के डिफेन्‍स के क्षेत्र में उद्योगकारों को लाने के लिए, महत्‍वपूर्ण फैसले लिए हैं। और उस फैसलों के कारण आज देश, सुरक्षा के क्षेत्र के लिए बहुत बड़ी मात्रा में उसे इंपोर्ट करना पड़ता है। हर छोटी-मोटी चीज विदेशों से लानी पड़ती है। इस एक निर्णय के कारण भारत अपने रक्षा संसाधनों में आने वाले वर्षों में आत्‍म निर्भर बनेगा। हमारे ही जवान, हमारी युवा पीढ़ी अनेक इनोवेशन करेगी। निर्माण कार्य होगा और वो भी एक दिन कभी आएगा जब भारत, जो आज सुरक्षा के लिए जिन चीजों का इंपोर्ट करता है, हम वह सपना देखते हैं कि दुनिया के अनेक देशों को भारत एक्‍सपोर्ट करने की ताकत वाला बन जाए। यह हमारी सुरक्षा के लिए और अधिक उपयोगी होगा। उन विचारों को ले कर यह सरकार आगे बढ़ रही है। मैं आप सबको इस अवसर पर विशेष कर नौसेना के जवानों को बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूं। और उन्‍हें विश्‍वास दिलाता हूं कि सेना में यह हमारे जवान जो यूनिफार्म में खड़े हैं, सवा सौ करोड़ का देश जो भले ही यूनिफार्म में नहीं हैं लेकिन यूनाइट होकरके आपके पास खड़ा है, आपके पीछे खड़ा है। कंधे से कंधा मिला कर खड़ा है। आपका गौरव गान करता है। और यही तो राष्‍ट्र की शक्ति होती है। जिस राष्‍ट्र की शक्ति के माध्‍यम से हम विश्‍व के सामने सर ऊंचा कर के खड़े रह सकते हैं।

मुझे विश्‍वास है नौसेना के हमारे सारे जवान, नौसेना के हमारे सभी सेनानायक भारत की शक्ति का, भारत के समर्थन का, सवा सौ करो़ड़ देशवासियों की उनके प्रति जो श्रद्धा है, उस श्रद्धा के अनुकूल राष्‍ट्र रक्षा में कभी भी कमी नहीं रखेंगे, ऐसा मुझे विश्‍वास है। मैं नौसेना के सभी जवानों को, सेनानायकों को हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं, शुभकामनाएं देता हूं।

भारत माता की जय।

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Text of PM’s address at inauguration of Bharat Drone Mahotsav at Pragati Maidan, Delhi
May 27, 2022
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“Exactly 8 years ago we started implementing new mantras of good governance in India following the path of minimum government - maximum governance”
“Technology has helped a lot in furthering the vision of saturation and in ensuring last-mile delivery”
“We have made technology a key tool to impart new strength, speed and scale to the country”
“Today we are making technology available to the masses first”
“When technology goes to the masses, possibilities of its use also increase accordingly”
“Promotion of drone technology is another medium of advancing our commitment to good governance and ease of living”

मंच पर उपस्थित केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगीगण, भारत ड्रोन महोत्सव में देशभर से जुटे सभी अतिथिगण, यहां उपस्थित अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी को भारत ड्रोन महोत्सव इस आयोजन के लिए मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं देख रहा हूं कि सभी वरिष्ठ लोग यहां मेरे सामने बैठे हैं। मुझे आने में विलंब हो गया। विलंब इसलिए नहीं हुआ कि मैं देर से आया। यहां तो मैं समय पर आ गया था। लेकिन ये ड्रोन की जो प्रदर्शनी लगी है। उसे देखने में मेरा मन ऐसा लग गया कि मुझे समय का ध्यान ही नहीं रहा। इतना लेट आया फिर भी मैं मुश्किल से दस प्रतिशत चीजों को देख पाया और मैं इतना प्रभावित हुआ, अच्छा होता मेरे पास समय होता मैं पूरा एक-एक स्टॉल पर जाता और नौजवानों ने जो काम किया है उसको देखता, उनकी कथा सुनता। सब तो नहीं कर पाया, लेकिन जो भी मैं कर पाया, मैं आप सबसे आग्रह करुंगा, मैं सरकार के भी सभी विभागों से आग्रह करूंगा कि आपके अलग-अलग स्तर के जितने अधिकारी हैं, जो पॉलिसी मेकिंग में जिनका रोल रहता है। वे जरूर दो-तीन घंटे यहां निकालें, एक-एक चीज को समझने की कोशिश करें। यहां उनको टेक्नोलॉजी को देखने को मिलेगा और उनको अपने दफ्तर में ही पता चलेगा कि ये टेक्नोलॉजी अपने यहां ऐसे उपयोग में हो सकती है। यानि गवर्नेंस में भी अनेक ऐसे initiatives हैं, जो हम इसके आधार पर चला सकते हैं। लेकिन मैं वाकई में कहता हूं कि मेरे लिए एक बहुत ही सुखद अनुभव रहा आज, और भारत के नौजवानों और मुझे खुशी इस बात की होती थी कि जिन-जिन स्टॉल पर गया तो बड़े गर्व से कहता था, साहब ये मेक इन इंडिया है, ये सब हमने बनाया है।

साथियों,

इस महोत्सव में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए हमारे किसान भाई-बहन भी हैं, ड्रोन इंजीनियर भी हैं, स्टार्ट अप्स भी हैं, विभिन्न कंपनियों के लीडर्स भी यहां मौजूद हैं। और दो दिनों में यहां हज़ारों लोग इस महोत्सव का हिस्सा बनने वाले हैं, मुझे पक्का विश्वास है। और अभी मैं एक तो मैंने प्रदर्शनी भी देखी, लेकिन जो actually ड्रोन के साथ अपना कामकाज चलाते हैं। और उसमें मुझे कई युवा किसानों से मिलने का मौका मिला, जो खेती में ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग कर रहे हैं। मैं उन युवा इंजीनियर्स से भी मिला, जो ड्रोन टेक्नोलॉजी को प्रोत्साहित कर रहे हैं। आज 150 drone pilot certificate भी यहां दिए गए हैं। मैं इन सभी drone pilots को और इस काम में जुड़े हुए सभी को अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

ड्रोन टेक्नोलॉजी को लेकर भारत में जो उत्साह देखने को मिल रहा है, वो अद्भुत है। ये जो ऊर्जा नज़र आ रही है, वो भारत में ड्रोन सर्विस और ड्रोन आधारित इंडस्ट्री की लंबी छलांग का प्रतिबिंब है। ये भारत में Employment Generation के एक उभरते हुए बड़े सेक्टर की संभावनाएं दिखाती है। आज भारत, स्टार्ट अप पावर के दम पर दुनिया में ड्रोन टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा एक्सपर्ट बनने की ओर तेज गति से आगे बढ़ रहा है।

साथियों,

ये उत्सव, सिर्फ एक टेक्नोलॉजी का नहीं बल्कि नए भारत की नई गवर्नेंस का, नए प्रयोगों के प्रति अभूतपूर्व Positivity का भी उत्सव है। संयोग से 8 वर्ष पहले यही वो समय था, जब भारत में हमने सुशासन के नए मंत्रों को लागू करने की शुरुआत की थी। मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस के रास्ते पर चलते हुए, ease of living, ease of doing business को हमने प्राथमिकता बनाया। हमने सबका साथ, सबका विकास के मंत्र पर चलते हुए देश के हर नागरिक, हर क्षेत्र को सरकार से कनेक्ट करने का रास्ता चुना। देश में सुविधाओं का, पहुंच का, डिलीवरी का एक जो divide हमें अनुभव होता था, उसके लिए हमने आधुनिक Technology पर भरोसा किया, उसे एक महत्वपूर्ण bridge के रूप में व्यवस्था का हिस्सा बनाया। जिस technology तक देश के एक बहुत छोटे से वर्ग की पहुंच थी, हमारे यहां ये मान लिया गया टेक्नोलॉजी यानि एक बड़े रहीस लोगों को कारेबार है। सामान्य मानवीय की जिंदगी में उसका कोई स्थान नहीं है। उस पूरी मानसिकता को बदलकर के हमने टेक्नोलॉजी को सर्वजन के लिए सुलभ करने की दिशा में अनेक कदम उठाए हैं, और आगे भी उठाने वालें हैं।

साथियों,

जब टेक्नोलॉजी की बात आती है तो हमने देखा है, हमारे यहां कुछ लोग टेक्नोलॉजी का डर दिखाकर उसे नकारने का प्रयास भी करते हैं। ये टेक्नोलॉजी आएगी तो ऐसा हो जाएगा, वैसा हो जाएगा। अब ये बात सही है कि एक जमाने में पूरे शहर में एक टॉवर हुआ करता था। उसकी घड़ी के घंट बजते थे और गांव का समय तय होता था तक किसने सोचा था कि हर गली हर एक की कलाई पर घड़ी लगेगी। तो जब परिवर्तन आया होगा तो उनको भी अजूबा लगा होगा और आज भी कुछ लोग होंगे, जिनको मन करता होगा कि हम भी गांव में एक टॉवर बना दें और वहां हम भी एक घड़ी लगा दें। किसी जमाने में उपयोगी होगा यानि जो बदलाव होता है। उस बदलाव के साथ हमें अपने को बदलना व्यवस्थाओं को बदलना तभी प्रगति संभव होती है। हमने हाल ही में कोरोना वैक्सीनेशन के दौरान भी बहुत अनुभव किया है। पहले की सरकारों के समय टेक्नोलॉजी को problem का हिस्सा समझा गया, उसको anti-poor साबित करने की कोशिशें भी हुईं। इस कारण 2014 से पहले गवर्नेंस में टेक्नोलॉजी के उपयोग को लेकर एक प्रकार से उदासीनता का ही वातावरण रहा। किसी ने इक्के-दुक्के व्यक्ति ने अपनी रूचि के अनुसार कर लिया तो कर लिया, व्यवस्था का स्वभाव नहीं बना। इसका सबसे अधिक नुकसान देश के गरीब को हुआ है, देश के वंचित को हुआ है, देश के मिडिल क्लास को हुआ है, और जो aspirations के जज्बे से भरे हुए लोग थे उनको निराशा की गर्त में जिंदगी गुजारने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

साथियों,

हम इस बात का इन्कार नहीं करते कि नई टेक्नोलॉजी disruption लाती है। वो नए माध्यम खोजती है, वो नये अध्याय लिखती है। वो नए रास्ते, नई व्यवस्था भी बनाती है। हम सभी ने वो दौर देखा है कि जीवन से जुड़े कितने ही आसान विषयों को कितना मुश्किल बना दिया गया था। मुझे नहीं पता कि आप में से कितने लोगों ने बचपन में राशन की दुकान पर अनाज के लिए, केरोसीन के लिए, चीनी के लिए लाइन लगाई होगी। लेकिन एक समय ऐसा था कि घंटों इसी काम में लाइन में लगे हुए गुजर जाते थे। और मुझे तो अपना बचपन याद है कि हमेशा एक डर रहता था कि कहीं ऐसा तो नहीं कि मेरा नंबर आने तक अनाज खत्म हो जाएगा, दुकान बंद होने का समय तो नहीं हो जाएगा? ये डर 7-8 साल पहले हर गरीब के जीवन में रहा ही रहा होगा। लेकिन मुझे संतोष है कि आज टेक्नोलॉजी की मदद से हमने इस डर को समाप्त कर दिया है। अब लोगों में एक भरोसा है कि जो उनके हक का है, वो उन्हें मिलेगा ही मिलेगा। टेक्नोलॉजी ने last mile delivery को सुनिश्चित करने में, saturation के विजन को आगे बढ़ाने में बहुत बड़ी मदद की है। और मैं जानता हूं कि हम इसी गति से आगे बढ़कर अंत्योदय के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। बीते 7-8 वर्षों का अनुभव मेरा विश्वास और मजबूत करता है। मेरा भरोसा बढ़ता जा रहा है। जनधन, आधार और मोबाइल की त्रिशक्ति- JAM इस ट्रिनिटी की वजह से आज हम देशभर में पूरी पारदर्शिता के साथ गरीब को उसके हक की चीजें जैसे राशन जैसी बातें हम पहुंचा पा रहे हैं। इस महामारी के दौरान भी हमने 80 करोड़ गरीबों को मुफ्त राशन सुनिश्चित किया है।

साथियों,

ये हमारे टेक्नोल़ॉजी सॉल्यूशन को Correctly डिजाइन करने, Efficiently डेवलप करने और Properly Implement करने की शक्ति है कि आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन अभियान सफलता से चला रहा है। आज देश ने जो Robust, UPI फ्रेमवर्क डेवलप किया है, उसकी मदद से लाखों करोड़ रुपए गरीब के बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर हो रहे हैं। महिलाओं को, किसानों को, विद्यार्थियों को अब सीधे सरकार से मदद मिल रही है। 21वीं सदी के नए भारत में, युवा भारत में हमने देश को नई strength देने के लिए, speed और scale देने के लिए, टेक्नोलॉजी को अहम टूल बनाया है। आज हम टेक्नोलॉजी से जुड़े सही Solutions डेवलप कर रहे हैं और उनको Scale Up करने का कौशल भी हमने विकसित किया है। देश में ड्रोन टेक्नोलॉजी को प्रोत्साहन good governance के ease of living के इसी कमिटमेंट को आगे बढ़ाने का एक और माध्यम है। ड्रोन के रूप में हमारे पास एक और ऐसा स्मार्ट टूल आ गया है, जो बहुत जल्द सामान्य से सामान्य भारतीय के जीवन का हिस्सा बनने जा रहा है। हमारे शहर हों या फिर देश के दूर-दराज गांव-देहात वाले इलाके, खेत के मैदान हों या फिर खेल के मैदान, डिफेंस से जुड़े कार्य हों या फिर डिज़ास्टर मैनेजमेंट, हर जगह ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ने वाला है। इसी तरह टूरिज्म सेक्टर हो, मीडिया हो, फिल्म इंडस्ट्री हो, ड्रोन इन क्षेत्रों में क्वालिटी और Content, दोनों को बढ़ाने में मदद करेगा। अभी जितना इस्तेमाल हो रहा है, ड्रोन का उससे कहीं ज्यादा इस्तेमाल हम आने वाले दिनों में देखने वाले हैं। मैं सरकार में हर महीने एक प्रगति कार्यक्रम चलाता हूं। सभी राज्यों के मुख्य सचिव स्क्रीन पर होते हैं टीवी के और अनेक विषयों की चर्चा होती है, और मैं उनसे आग्रह करता हूं कि ड्रोन से जो प्रोजेक्ट चल रहा है। मुझे वहां का पूरा लाइव demonstration दीजिए। तो मैं बड़ी आसानी से चीजों को coordinate करके वहां निर्णय करने की सुविधा बढ़ जाती है। जब केदारनाथ के पुनर्निर्माण का काम शुरू हुआ, अब हर बार तो मेरे लिए केदारनाथ जाना मुश्किल था तो मैं regularly केदारनाथ में कैसे काम चल रहा है, कितनी तेज गति से तो वहां से ड्रोन के द्वारा regularly मेरे दफ्तर में बैठकर के उसकी जब भी रिव्यू मिटिंग होती थी तो मैं ड्रोन की मदद से केदारनाथ के डेवलपमेंट के काम को regular मॉनिटर करता था। यानि आज सरकारी कामों की क्वालिटी को भी देखना है। तो मुझे जरूरी नहीं की मैं पहले से बता दूं कि मुझे वहां इंस्पेक्शन के लिए जाना है, तो फिर तो सबकुछ ठीक-ठाक हो ही जाएगा। मैं ड्रोन भेज दूं, पता वो ही लेकर के आ जाता है और उनको पता तक नहीं चलता है कि मैंने जानकारी ले ली है।

साथियों,

गांव में भी किसान के जीवन को आधुनिक सुविधाजनक, अधिक संपन्न बनाने में भी ड्रोन टेक्नोलॉजी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है। आज गांवों में अच्छी सड़कें पहुंची हैं, बिजली-पानी पहुंचा है, ऑप्टिकल फाइबर पहुंच रहा है, डिजिटल टेक्नोलॉजी का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। लेकिन फिर भी गांव में ज़मीन से जुड़े, खेती से जुड़े अधिकतर काम के लिए पुराने सिस्टम से काम चलाना पड़ता है। उस पुराने सिस्टम में हर प्रकार का wastage है, परेशानियां भी बहुत हैं, और productivity तो पता नहीं तय ही नहीं कर पाते कुछ हुआ कि नहीं हुआ। इसका सबसे अधिक नुकसान हमारे गांव के लोगों को होता है, हमारे किसानों को होता है, और उसमें भी ज्यादा हमारे छोटे किसानों को होता है। छोटे किसान की ज़मीन और उसके संसाधन इतने नहीं होते कि वो विवादों को चुनौती दे पाएं और कोर्ट कचहरी के चक्कर काट पाएं। अब देखिए, लैंड रिकॉर्ड से लेकर सूखा-बाढ़ राहत में फसल के डैमेज तक हर जगह रैवेन्यू डिपार्टमेंट के कर्मचारियों पर ही व्यवस्था निर्भर है। Human Interface जितना अधिक है, उतना ही अधिक भरोसे की भी कमी हो जाती है, और उसी में से विवाद पैदा होते हैं। विवाद होते हैं तो समय और धन की बर्बादी भी होती है। इंसान के अंदाज़े से आकलन होते हैं तो उतना सटीक अंदाज़ा भी नहीं लग पाता। इन सारी मुश्किलों से पार पाने का ड्रोन अपने आप में एक सशक्त प्रभावी माध्यम के रूप में एक नया टूल हमारे सामने आया है।

साथियों,

ड्रोन टेक्नोलॉजी कैसे एक बड़ी क्रांति का आधार बन रही है, इसका एक उदाहरण पीएम स्वामित्व योजना भी है। इस योजना के तहत पहली बार देश के गांवों की हर प्रॉपर्टी की डिजिटल मैपिंग की जा रही है, डिजिटल प्रॉपर्टी कार्ड लोगों को दिए जा रहे हैं। इसमें Human Intervention कम हुआ है, और भेदभाव की गुंजाइश खत्म हुई है। इसमें बड़ी भूमिका ड्रोन की रही है। थोड़ी देर पहले मुझे भी स्वामित्व ड्रोन उड़ाने का, उसकी टेक्नोलॉजी समझने का अवसर मिला है। थोड़ी देर उसके कारण भी हो गई। मुझे खुशी है कि ड्रोन की मदद से अभी तक देश में लगभग 65 लाख प्रॉपर्टी कार्ड generate हो चुके हैं। और जिसको ये कार्ड मिल गया है, उसको संतोष है कि हां मेरे पास मेरी जितनी जमीन है, मेरे पास सही डिटेल मिल गई है। पूरे संतोष के साथ उन्होंने इस बात को कहा है। वरना हमारे यहां अगर छोटी सी जगह की नाप-नपाई भी होती है, तो उसमें सहमति बनाने के लिए सालों-साल लग जाते हैं।

साथियों,

आज हम देख रहे हैं कि हमारे किसान ड्रोन टेक्नोलॉजी की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, उनमें एक उत्साह दिख रहा है, वो इसे अपनाने के लिए तैयार हैं। ये ऐसे ही नहीं हुआ है। ये इसलिए है क्योंकि पिछले 7-8 साल में जिस तरह कृषि क्षेत्र में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाया गया है, उस वजह से टेक्नोलॉजी किसानों के लिए हौव्वा नहीं रह गई है, और एक बार किसान उसको देखता है थोड़ा अपने हिसाब से उसका लेखा जोखा कर लेता है और अगर उसका विश्वास बैठ गया तो स्वीकार करने में देर नहीं करता है। अभी मैं बाहर जब किसानों से बात कर रहा था तो मध्यप्रदेश के एक इंजीनियर मुझे बता रहे थे कि मुझे तो लोग अब ड्रोन वाला करके बुलाते हैं। बोले मैं इंजीनियर हुआ, लेकिन अब तो मेरी पहचान ड्रोन वाले की हो गई है। उन्होंने मुझे कहा कि साहब देखिए मैनें उनको कहा कि आप क्या भविष्य क्या देखते हैं? तो उन्होंने मुझे कहा कि साहब देखिए जब pulses मामला है ना हमारे यहां उसकी खेती बढ़ेगी। और उसमें कारण एक ड्रोन होगा, मैनें कहा कैसे? उन्होंने कहा साहब pulses की खेती होती है तब उसकी फसल की ऊंचाई ज्यादा हो जाती है तो किसान अंदर जाकर के दवाई ववाई के लिए उसका मन नहीं करता है, मैं कहां जाऊंगा, वो छिड़काव करता आधी तो मेरे शरीर पर पड़ती है, और बोले इसलिए वो उस फसल की तरफ वो जाता ही नहीं है। बोले अब ड्रोन के कारण ऐसी जो फसलें हैं, जो मनुष्य के ऊंचाई से भी कभी-कभी ऊंची होती हैं। ड्रोन के कारण उसकी देखभाल, उसकी दवाई का छिड़काव, बोले इतना आसान होने वाला है कि हमारे देश का किसान आसानी से pulses की खेती की तरफ जाएगा। अब एक व्यक्ति गांव के अंदर किसानों के साथ जुड़ने के साथ काम करता है। तो चीज़ों में कैसे बदलाव आता है। उसका अनुभव उसको सुनने को मिलता है।

साथियों,

आज हमने जो agriculture sector में टेक्नोलॉजी को लाने का प्रायास किया है। Soil Health Cards ये अपने आप में हमारे किसानों के लिए बहुत बड़ी ताकत बनकर के उभरा है। और मैं तो चाहुंगा जैसे ये ड्रोन की सेवाएं हैं, गांव-गांव soil tasting के लैब बन सकती है, नए रोजगार के क्षेत्र खुल सकते हैं। और किसान अपना हर बार soil tasting कराकर के तय कर सकता है कि मेरी इस मिट्टी में ये आवश्यकता है, ये जरूरत है। माइक्रो इरीगेशन, स्प्रिंकल ये सारी बातें आधुनिक सिंचाई व्यवस्था का हिस्सा बन रही हैं। अब देखिए फसल बीमा योजना, फसल बीमा योजना के अंदर सबसे बड़ा काम हमारी GPS जैसी तकनीक का उपयोग हो, e-NAM जैसी डिजिटल मंडी की व्यवस्था हो, नीम कोटेड यूरिया हो या फिर टेक्नोलॉजी के माध्यम से सीधे किसानों के खाते में पैसा जमा करने की बात हो। बीते 8 साल में जो ये प्रयास हुए हैं, उसने किसानों का टेक्नोलॉजी के प्रति भरोसा बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है। आज देश का किसान टेक्नोलॉजी के साथ कहीं ज्यादा Comfortable है, उसे ज्यादा आसानी से अपना रहा है। अब ड्रोन टेक्नोलॉजी हमारे कृषि सेक्टर को दूसरे लेवल पर ले जाने वाली है। किस ज़मीन पर कितनी और कौन सी खाद डालनी है, मिट्टी में किस चीज़ की कमी है, कितनी सिंचाई करनी है, ये भी हमारे यहां अंदाज़े से होता रहा है। ये कम पैदावार और फसल बर्बाद होने का बड़ा कारण रहा है। लेकिन स्मार्ट टेक्नोलॉजी आधारित ड्रोन यहां भी बहुत काम आ सकते हैं। यही नहीं, ड्रोन ये भी पहचानने में सफल होते हैं कि कौन सा पौधा, कौन सा हिस्सा बीमारी से प्रभावित है। और इसलिए वो अंधाधुंध-स्प्रे नहीं करता, बल्कि स्मार्ट-स्प्रे करता है। इससे महंगी दवाओं का खर्च भी बचता है। यानि ड्रोन तकनीक से छोटे किसान को ताकत भी मिलेगी, तेज़ी भी मिलेगी और छोटे किसान की तरक्की भी सुनिश्चित होगी। औऱ आज जब हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, तो मेरा भी यही सपना है कि भारत में हर हाथ में स्मार्टफोन हो, हर खेत में ड्रोन हो और हर घर में समृद्धि हो।

साथियों,

हम देश के गांव-गांव में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स का नेटवर्क सशक्त कर रहे हैं, टेलीमेडिसिन को प्रमोट कर रहे हैं। लेकिन गांवों में दवाओं और दूसरे सामान की डिलीवरी एक बड़ी चुनौती रही है। इसमें भी ड्रोन से डिलीवरी बहुत कम यानि बहुत कम समय में और तेज गति से डिलीवरी होने की संभावना बनने वाली है। ड्रोन से कोविड वैक्सीन की डिलीवरी से इसका फायदा हमने अनुभव भी किया है। ये दूर-सुदूर के आदिवासी, पहाड़ी, दुर्गम क्षेत्रों तक उत्तम स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में बहुत मददगार सिद्ध हो सकता है।

साथियों,

टेक्नोलॉजी का एक और पक्ष है, जिस पर मैं आपका ध्यान जरूर आकर्षित करना चाहता हूं। पहले के समय में टेक्नोलॉजी और उससे हुए Invention, Elite Class के लिए माने जाते थे। आज हम टेक्नोलॉजी को सबसे पहले Masses को उपलब्ध करा रहे हैं। ड्रोन टेक्नोलॉजी भी एक उदाहरण है। कुछ महीने पहले तक ड्रोन पर बहुत सारे restrictions थे। हमने बहुत ही कम समय में अधिकतर restrictions को हटा दिया है। हम PLI जैसी स्कीम्स के जरिए भारत में ड्रोन मैन्यूफेक्चरिंग का एक सशक्त इकोसिस्टम बनाने की तरफ भी बढ़ रहे हैं। टेक्नोलॉजी जब Masses के बीच में जाती है, तो उसके इस्तेमाल की संभावनाएं भी ज्यादा से ज्यादा बढ़ जाती हैं। आज हमारे किसान, हमारे स्टूडेंट, हमारे स्टार्ट अप्स, ड्रोन से क्या-क्या कर सकते हैं, इसकी नई-नई संभावनाओं को तलाशने लगे हुए हैं। ड्रोन अब किसानों के पास जा रहा है, गांवों में जा रहा है तो भविष्य में विभिन्न कार्यों में ज्यादा इस्तेमाल की संभावना भी बढ़ी है। आप देखिएगा अब शहरों में ही नहीं गांव-देहात में भी ड्रोन के तरह-तरह के उपयोग निकलेंगे, हमारे देशवासी इसमें और इनोवेशन करेंगे। मुझे विश्वास है, आने वाले दिनों में ड्रोन टेक्नोलॉजी में और Experiment होंगे, इसके नए-नए इस्तेमाल होंगे।

साथियों,

भारत की ऐसी ही संभावनाओं, ऐसी ही scale को tap करने के लिए आज मैं देश और दुनिया के सभी investors को फिर आमंत्रित करता हूं। ये भारत के लिए भी और दुनिया के लिए यहां से बेहतरीन ड्रोन टेक्नोलॉजी के निर्माण का सही समय है। मैं एक्सपर्ट्स से, टेक्नोलॉजी की दुनिया के लोगों से भी अपील करूंगा कि ड्रोन टेक्नोलॉजी का ज्यादा से ज्यादा विस्तार करें, उसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक लेकर जाएं। मैं देश के सभी युवाओं से भी आह्वान करुंगा कि ड्रोन के क्षेत्र में नए स्टार्ट अप्स के लिए आगे आएं। हम मिलकर ड्रोन टेक से सामान्य जन को empower करने में अपनी भूमिका निभाएंगे, और मुझे विश्वास है अब मैं पुलिस के काम में भी सुरक्षा की दृष्टि से ड्रोन बहुत बड़ी सेवा कर पाएगा। बड़े-बड़े जैसे कुंभ मेले जैसे अवसर होते हैं। बहुत बड़ी मात्रा में ड्रोन से मदद मिल सकती है। कहीं ट्रैफिक जाम की समस्याएं हैं, ड्रोन से सोल्यूशन निकाले जा सकते हैं। यानि इतनी आसानी से इन चीजों को उपयोग होने वाला है। हमें इन टेक्नोलॉजी के साथ अपनी व्यवस्थाओं को जोड़ना है, और जितना इन व्यवस्थाओं को साथ जुड़ेंगे। मुझे बराबर याद है, मैं आज यहां देख रहा था कि वो ड्रोन से जंगलों में पेड़ उगाने के लिए जो seeds हैं, उसकी गोली बनाकर के ऊपर से ड्रॉप करते हैं। जब ड्रोन नहीं था, तो मैंने एक प्रयोग किया था। मेरे तो सारे देसी प्रयोग होते हैं। तो उस समय तो टेक्नोलॉजी नहीं थी। मैं चाहता था, जब मैं गुजरात में मुख्यमंत्री था, तो जो ये हमारे कुछ पहाड़ हैं लोग वहां जाएंगे, पेड़-पैधे लगाएंगे तो जरा मुश्किल काम है आशा करना। तो मैंने क्या किया, मैंने जो गैस के गुब्बारे होते हैं, जो हवा में उड़ते हैं। मैंने गैस के गुब्बारे वालों की मदद ली और मैंने कहा कि उस गुब्बारे में seeds डाल दीजिए और ये जो पहाड़ी हैं, वहां जाकर के गुब्बारे छोड़ दीजिए, गुब्बारे जब नीचे गिरेंगे तो seeds फैल जाएंगे और जब आसमान से बारिश आएगी, अपना नसीब होगा तो उसमें से पेड़ निकल आएगा। आज ड्रोन से वो काम बड़ी आसानी से हो रहा है। जियो ट्रेकिंग हो रहा है। वो बीज कहां पर गया, उसका जियो ट्रेकिंग हो रहा है और वो बीज वृक्ष में परिवर्तित हो रहा है कि नहीं हो रहा है। उसका हिसाब-किताब किया जा सकता है। यानि एक प्रकार से मानों forest fire हम आसानी से ड्रोन की मदद से उसे मॉनिटर कर सकते हैं, एक छोटी सी भी घटना नजर आती है तो हम तुरंत एक्शन ले सकते हैं। यानि कल्पना भर की चीजें हम उसके भी द्वारा कर सकते हैं, हमारी व्यवस्थाओं को विस्तार कर सकते हैं। मुझे विश्वास है कि आज ये ड्रोन महोत्सव जिज्ञासा की दृष्टि से तो अनेकों के काम आएगा ही आएगा, लेकिन जो भी इसको देखेंगे जरूर कुछ नया करने के लिए सोचेंगे, जरूर उसमें परिवर्तन लाने के लिए प्रयास करेंगे, व्यवस्थाओं में जोड़ने के लिए प्रयास करेंगे और ultimately हम technology driven delivery हम बहुत तेजी से कर पाएंगे। इस विश्वास के साथ मैं फिर से एक बार आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद।