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श्रीमान राज्‍यपाल महोदय जी, आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी, मंत्रिपरिषद के मेरे साथी, वित्‍त एवं रक्षा मंत्री श्रीमान अरूण जेटली जी, नौसेना के अध्‍यक्ष श्रीमान धवन जी, मंच पर विराजमान सभी वरिष्‍ठ महानुभाव, उपस्थित जल सेना, थल सेना, नभ सेना के सभी प्रमुख अधिकारी, देवियों एवं सज्‍जनों, कल हमने आजादी का पर्व मनाया। लेकिन, उस आजाद भारत की रक्षा का काम हमारे सेना के जवान कर रहे हैं, चाहे वो नौसेना हो, थल सेना हो या वायुसेना हो। लेकिन बदलते हुए युग में, बाहुबल से ही सिर्फ रक्षा नहीं होती है। विज्ञान और टेक्‍नोलोजी के युग में बाहुबल के साथ रक्षा के क्षेत्र में बुद्धि बल का महात्‍म्‍य बहुत बढ़ गया है।

आज जो आईएनएस कोलकाता, नौसेना के माध्‍यम से राष्‍ट्र को समर्पित हो रहा है, वह भारत के बुद्धिबल का भी परिचायक है। भारत के ही टेक्‍नीशियनों ने, भारत के ही इंजीनियरों ने, भारत के ही रक्षा विशेषज्ञों ने इसका निर्माण किया है। अब तक भारत में युद्ध क्षेत्र के लिए संरक्षा क्षेत्र के लिए जिन भी चीजों का निर्माण हुआ है, उसमें आईएनएस कोलकाता सबसे बड़ा इंडिजेनस निर्माण कार्य है। मैं इसके लिए देश के इस युवा बुद्धि बल को, उनके सामर्थ को भी हृदय से अभिनंदन करता हूं। और जब हम आज आईएनएस कोलकाता राष्‍ट्र को समर्पित करते हैं, उसी पल हम विश्‍व को भारत की इस बुद्धि धन का परिचय भी दिला रहे हैं, भारत की निर्माण क्षमता का भी परिचय दिला रहे हैं। युद्ध लड़ना, युद्ध जीतना कुछ मात्रा में अब कठिन नहीं भी है । लेकिन युद्ध हो ही नहीं, उसकी गारंटी तो तब होती है, जब आपका सैन्‍य बल आधुनिक हो, सामर्थवान हो, शस्‍त्रास्‍त्रों से लैस हों, विश्‍व की किसी भी ताकत से अधिक सामर्थवान हो। अगर ये आपका सामर्थ है तो युद्ध कभी आता ही नहीं है। और इसलिए हमारी सेनाओं के सामर्थ के लिए आधुनिक व्‍यवस्‍थाएं उपलब्‍ध कराने का एक हेतु, युद्ध का निवारण भी होता है। एक बार सामर्थ की अनुभूति हो, कभी कोई भारत की तरफ आंख ऊंची कर देखने की हिम्‍मत नहीं कर सकता है। और इसलिए भारत अपनी शक्ति को उस दिशा में बढ़़ाना चाहता है। ताकि किसी को भी भारत के सामर्थ को देखते ही, हमारे जवानों के सामर्थ को देखते ही, हमारे बाहुबल, बुद्धिबल का , सामर्थ को देखते ही कभी उसे भारत की ओर आंख करने का दु:साहस नहीं होगा। यह मुझे विश्‍वास है।

मैं महाराष्‍ट्र की धरती पर खड़ा हूं। यहां के समुद्र तट से जब नौसेना की बात करता हूं तब छत्रपति शिवाजी महाराज का स्‍मरण होना बहुत स्‍वाभाविक है। नौसेना के उदय में, नौसेना की कल्‍पना में सबसे प्रथम यदि किसी का योगदान था तो छत्रपति शिवाजी महाराज का था। और तब भारत छोटे छोटे जहाजों से जब विश्‍व व्‍यापार की ओर बढ़ रहा था तब छत्रपति शिवाजी महाराज को यह ध्‍यान आया था कि विश्‍व व्‍यापार के लिए भी सामुद्रिक सुरक्षा का महात्‍म्‍य है। और उसी में से सर्वप्रथम नौसेना का प्रारंभ इसी समुद्र तट पर हुआ था। बढ़ते-बढ़ते आज इसने एक वैश्विक रूप ले लिया है। सामुद्रिक तट से जुड़े हुए सभी राष्‍ट्र नौसेना की आवश्‍यकता को माना है। भारत का तो विशाल समुद्री तट है। विश्‍व व्‍यापार बढ़ता जा रहा है। विश्‍व व्‍यापार के लिए भी सामुद्रिक सुरक्षा बहुत महत्‍वपूर्ण बनी है और उसमें भारत अपनी भूमिका निभा रहा है। यह आईएनएस कोलकाता एक प्रकार से समुद्र में तैरता हुआ कम्‍यूनिकेशन का एक बहुत बड़ा, आधुनिक से आधुनिक संपुट है। यह हमारे ही नवयुवकों ने एक तैरती हुई साामुद्रिक व्‍यवस्‍था में टेक्‍नोलोजी को तैयार किया है। यह आने वाले दिनों में व्‍यापार जगत से जुड़े हुए लोगों के लिए भी, सामुद्रिक व्‍यापार से जुड़े हुए लोगों के लिए भी, इस कम्‍यूनिकेशन टेक्‍नोलोजी के माध्‍यम से एक सुरक्षा की गारंटी का अहसास होगा।

भारत सामर्थवान बने, भारत शक्तिशाली बने, हमारे सेना के जवान राष्‍ट्ररक्षा में कभी भी पीछे न रहे, हमारे सेना के जवान राष्‍ट्र रक्षा में कभी भी पीछे न रहे, उनको कभी यह महसूस न हो कि दुनिया की तुलना में हमारे संसाधन कम पड़ रहे हैं। हमारी व्‍यवस्‍थाएं कम पड़ रही हैं, यह कभी उसे महसूस न हो, इसके लिए उसके सामर्थ के साथ आधुनिक टेक्‍नोलोजी, आधुनिक, संसाधनों को भी जोड़ने का हमारा मकसद है और उसी मकसद के तहत आज राष्‍ट्र के चरणों में ये आईएनएस कोलकाता का समर्पण राष्‍ट्र की सैन्‍य शक्ति को बढ़ावा देगा, नौसेना के आत्‍म विश्‍वास को बढावा देगा और इस तरह के निर्माण कार्य के अंदर भारत की युवा टेलेंट को भी प्रोत्‍साहन देगा। ऐसा मुझे पूरा विश्‍वास है।

इस नई सरकार ने अपने बजट में डिफेन्‍स आफसेट के लिए विश्‍व की तकनीक को लाने के लिए, विश्‍व के डिफेन्‍स के क्षेत्र में उद्योगकारों को लाने के लिए, महत्‍वपूर्ण फैसले लिए हैं। और उस फैसलों के कारण आज देश, सुरक्षा के क्षेत्र के लिए बहुत बड़ी मात्रा में उसे इंपोर्ट करना पड़ता है। हर छोटी-मोटी चीज विदेशों से लानी पड़ती है। इस एक निर्णय के कारण भारत अपने रक्षा संसाधनों में आने वाले वर्षों में आत्‍म निर्भर बनेगा। हमारे ही जवान, हमारी युवा पीढ़ी अनेक इनोवेशन करेगी। निर्माण कार्य होगा और वो भी एक दिन कभी आएगा जब भारत, जो आज सुरक्षा के लिए जिन चीजों का इंपोर्ट करता है, हम वह सपना देखते हैं कि दुनिया के अनेक देशों को भारत एक्‍सपोर्ट करने की ताकत वाला बन जाए। यह हमारी सुरक्षा के लिए और अधिक उपयोगी होगा। उन विचारों को ले कर यह सरकार आगे बढ़ रही है। मैं आप सबको इस अवसर पर विशेष कर नौसेना के जवानों को बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूं। और उन्‍हें विश्‍वास दिलाता हूं कि सेना में यह हमारे जवान जो यूनिफार्म में खड़े हैं, सवा सौ करोड़ का देश जो भले ही यूनिफार्म में नहीं हैं लेकिन यूनाइट होकरके आपके पास खड़ा है, आपके पीछे खड़ा है। कंधे से कंधा मिला कर खड़ा है। आपका गौरव गान करता है। और यही तो राष्‍ट्र की शक्ति होती है। जिस राष्‍ट्र की शक्ति के माध्‍यम से हम विश्‍व के सामने सर ऊंचा कर के खड़े रह सकते हैं।

मुझे विश्‍वास है नौसेना के हमारे सारे जवान, नौसेना के हमारे सभी सेनानायक भारत की शक्ति का, भारत के समर्थन का, सवा सौ करो़ड़ देशवासियों की उनके प्रति जो श्रद्धा है, उस श्रद्धा के अनुकूल राष्‍ट्र रक्षा में कभी भी कमी नहीं रखेंगे, ऐसा मुझे विश्‍वास है। मैं नौसेना के सभी जवानों को, सेनानायकों को हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं, शुभकामनाएं देता हूं।

भारत माता की जय।

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ଲୋକପ୍ରିୟ ଅଭିଭାଷଣ

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‘କୋଭିଡ଼-୧୯ ସମ୍ମୁଖ ଯୋଦ୍ଧାଙ୍କ ପାଇଁ ଅନୁକୂଳ କ୍ରାଶ କୋର୍ସ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ’ର ଶୁଭାରମ୍ଭ ଅବସରରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଉଦବୋଧନ
June 18, 2021
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ଦୁଇରୁ ତିନି ମାସରେ ଏହି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ଅନ୍ତର୍ଗତ ପ୍ରଶିକ୍ଷିତ ହେବେ ଏକ ଲକ୍ଷରୁ ଅଧିକ ଯୁବକଯୁବତୀ : ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
26ଟି ରାଜ୍ୟର 111ଟି କେନ୍ଦ୍ରରୁ 6ଟି ଅନୁକୂଳ କୋର୍ସ ଆରମ୍ଭ
ଭୂତାଣୁ ଉପସ୍ଥିତ ରହିଛି ଏବଂ ଏହା ରୂପ ବଦଳାଇବାର ସମ୍ଭାବନା ଅଛି, ଆମକୁ ପ୍ରସ୍ତୁତ ରହିବାକୁ ପଡ଼ିବ : ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
କରୋନା ସମୟ କୌଶଳ, ପୁନଃକୌଶଳ ଓ ଅତିରିକ୍ତ କୌଶଳ ହାସଲର ଗୁରୁତ୍ବକୁ ପ୍ରମାଣିତ କରିଛି : ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ଏହି ମହାମାରୀ ବିଶ୍ବର ପ୍ରତ୍ୟେକ ରାଷ୍ଟ୍ର, ସଂସ୍ଥା, ସମାଜ, ପରିବାର ଓ ବ୍ୟକ୍ତିବିଶେଷଙ୍କ ସାମର୍ଥ୍ୟର ପରୀକ୍ଷା ନେଇଛି : ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ଜୁନ 21 ତାରିଖ ଠାରୁ 45 ବର୍ଷରୁ କମ ବୟସ୍କ ଲୋକମାନଙ୍କୁ 45 ବର୍ଷରୁ ଊର୍ଦ୍ଧ୍ବ ବୟସ୍କ ଲୋକମାନଙ୍କ ଭଳି ଟିକାକରଣ ସୁବିଧା ଯୋଗାଇ ଦିଆଯିବ : ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ଗ୍ରାମାଞ୍ଚଳର ସ୍ବାସ୍ଥ୍ୟକେନ୍ଦ୍ରଗୁଡ଼ିକରେ ନିୟୋଜିତ ଆଶା, ଏଏନଏମ, ଅଙ୍ଗନଓ୍ବାଡ଼ି ଓ ସ୍ବାସ୍ଥ୍ୟ କର୍ମୀଙ୍କ କାର୍ଯ୍ୟକୁ ପ୍ରଶଂସା କଲେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ

ନମସ୍କାର, କେନ୍ଦ୍ର ମନ୍ତ୍ରିମଣ୍ଡଳରେ ମୋର ସହଯୋଗୀ ଶ୍ରୀମାନ ମହେନ୍ଦ୍ର ନାଥ ପାଣ୍ଡେ ମହାଶୟ, ଆର. କେ ସିଂହ ମହାଶୟ, ଅନ୍ୟ ସମସ୍ତ ବରିଷ୍ଠ ମନ୍ତ୍ରୀଗଣ, ଏହି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ସହିତ ସାମିଲ ହୋଇଥିବା ସମସ୍ତ ଯୁବ ସାଥୀ, ପେଶାଦାର ଗଣ, ଅନ୍ୟ ମହାନୁଭବ ଏବଂ ଭାଇ ଓ ଭଉଣୀମାନେ,

କରୋନା ବିରୋଧରେ ମହାଯୁଦ୍ଧରେ ଆଜି ଏକ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଅଭିଯାନର ଆଉ ଏକ ପର୍ଯ୍ୟାୟ ପ୍ରାରମ୍ଭ ହେଉଛି। କରୋନାର ପ୍ରଥମ ଲହର ସମୟରେ ଦେଶରେ ହଜାର ହଜାର ପେଶାଦାରମାନେ, କୌଶଳ ବିକାଶ ଅଭିଯାନ ସହିତ ସାମିଲ ହୋଇଥିଲେ। ଏହି ପ୍ରୟାସ ଦେଶକୁ କରୋନା ମୁକାବିଲା କରିବା ପାଇଁ ବଡ଼ ଶକ୍ତି ଦେଇଥିଲା। ଏବେ କରୋନାର ଦ୍ୱିତୀୟ ଲହର ପରେ ଯେଉଁ ଅନୁଭବ ମିଳିଛି, ସେହି ଅନୁଭବ ଆଜିର ଏହି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମର ପ୍ରମୁଖ ଆଧାର ପାଲଟିଛି। କରୋନାର ଦ୍ୱିତୀୟ ଲହରରେ ଆମେମାନେ ଦେଖିଲେ ଯେ, କରୋନା ଭୁତାଣୁର ପରିବର୍ତିତ ଏବଂ ବାରମ୍ବାର ପରିବର୍ତନ ହେଉଥିବା ସ୍ୱରୂପ କେଉଁ ପ୍ରକାରର ଆହ୍ୱାନ ସବୁକୁ ଆମ ସମ୍ମୁଖକୁ ଆଣିପାରେ। ଏହି ଭୂତାଣୁ ଏବେ ମଧ୍ୟ ଆମ ମାନଙ୍କ ଗହଣରେ ଅଛି ଆଉ ଯେ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଏହା ରହିଛି, ଏହାର ମ୍ୟୁଟେଂଟ ହେବାର ସମ୍ଭାବନା ମଧ୍ୟ ରହିଛି। ତେଣୁ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ପ୍ରକାରର ଚିକିତ୍ସା, ସମସ୍ତ ସାବଧାନତା ଅବଲମ୍ବନ କରି ଆଗାମୀ ଆହ୍ୱାନ ଗୁଡ଼ିକର ମୁକାବିଲା କରିବା ପାଇଁ ଆମ୍ଭମାନଙ୍କୁ ଦେଶର ପ୍ରସ୍ତୁତିକୁ ଆହୁରି ଅଧିକ ବଢ଼଼ାଇବାକୁ ହେବ। ଏହି ଲକ୍ଷ୍ୟକୁ ନେଇ ଆଜି ଦେଶରେ 1 ଲକ୍ଷ ଆଗଧାଡ଼ିର କରୋନା ଯୋଦ୍ଧା ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିବାର ମହାଅଭିଯାନ ଆରମ୍ଭ କରାଯାଉଛି।

ସାଥୀଗଣ,

ଏହି ମହାମାରୀ ଦୁନିଆର ପ୍ରତ୍ୟେକ ଦେଶ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ସଂସ୍ଥା, ପ୍ରତ୍ୟେକ ସମାଜ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ପରିବାର, ପ୍ରତ୍ୟେକ ବ୍ୟକ୍ତିଙ୍କର ସାମର୍ଥ୍ୟକୁ, ତାଙ୍କର ଧୈର୍ଯ୍ୟର ସୀମାକୁ ବାରମ୍ବାର ପରୀକ୍ଷା କରିଛି। ଅନ୍ୟପଟେ, ଏହି ମହାମାରୀ ବିଜ୍ଞାନ, ସରକାର, ସମାଜ, ସଂସ୍ଥା ଏବଂ ବ୍ୟକ୍ତି ରୂପରେ ଆମକୁ ଆମର କ୍ଷମତା ଗୁଡ଼ିକୁ ବିସ୍ତାରିତ କରିବାରେ ମଧ୍ୟ ସତର୍କ କରିଛି। ପିପିଇ କିଟ୍ସ ଏବଂ ପରୀକ୍ଷଣର ଭିତିଭୂମିରୁ ନେଇ କୋଭିଡ଼ କେୟାର ଏବଂ ଚିକିତ୍ସା ସହିତ ଜଡ଼ିତ ମେଡିକାଲ ଭିତିଭୂମିର ଆଜି ଯେଉଁ ବଡ଼ ନେଟୱର୍କ ଭାରତରେ ନିର୍ମାଣ ହୋଇଛି, ସେହି କାର୍ଯ୍ୟ ଏବେ ମଧ୍ୟ ଚାଲୁ ରହିଛି ଆଉ ତାହା ହେଉଛି ଏହାର ପରିଣାମ। ଆଜି ଦେଶର ଦୂର-ଦୂରାନ୍ତରେ ଡାକ୍ତରଖାନା, ଭେଂଟିଲେଟର, ଅମ୍ଳଜାନ କନସେନଟ୍ରେଟର୍‍ ପହଞ୍ଚାଇବାର ପ୍ରୟାସ ମଧ୍ୟ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ କରାଯାଉଛି। ଦେଢ଼ ହଜାରରୁ ଅଧିକ ଅମ୍ଳଜାନ ପ୍ଲାଂଟ ନିର୍ମାଣ କରିବାର କାର୍ଯ୍ୟ ଯୁଦ୍ଧକାଳୀନ ଭିତ୍ତିରେ ଜାରି ରହିଛି ଏବଂ ଦେଶର ପ୍ରତ୍ୟେକ ଜିଲ୍ଲାରେ ପହଞ୍ଚିବାର ପ୍ରୟାସ ଚାଲିଛି । ଏହି ପ୍ରୟାସଗୁଡ଼ିକ ମଧ୍ୟରେ ଏକ କୁଶଳୀ ମାନବ ସମ୍ବଳର ବଡ଼ ସେତୁ ରହିବା, ସେହି ସେତୁରେ ନୂଆ-ନୂଆ ଲୋକ ଯୋଡ଼ି ହେବା, ଏହା ମଧ୍ୟ ହେଉଛି ସେତିକି ପରିମାଣରେ ଜରୁରୀ। ଏହାକୁ ଦୃଷ୍ଟିରେ ରଖି, କରୋନା ସହିତ ବର୍ତମାନ ଲଢ଼ୁଥିବା ସେନାକୁ ସହଯୋଗ କରିବା ପାଇଁ, ଦେଶରେ ପ୍ରାୟ 1 ଲକ୍ଷ ଯୁବକଙ୍କୁ ପ୍ରଶିକ୍ଷିତ କରିବାର ଲକ୍ଷ୍ୟ ରଖାଯାଇଛି । ଏହି କୋର୍ସ ଦୁଇ-ତିନି ମାସ ମଧ୍ୟରେ ଶେଷ ହୋଇଯିବ, ତେଣୁ ଏହି ଲୋମାମାନେ ମଧ୍ୟ ତୁରନ୍ତ କାର୍ଯ୍ୟ କରିବା ପାଇଁ ମଧ୍ୟ ଉପଲବ୍ଧ ହୋଇଯିବେ ଆଉ ଏକ ପ୍ରଶିକ୍ଷିତ ସହାୟକ ଭାବେ ବର୍ତମାନର ବ୍ୟବସ୍ଥାକୁ ବହୁମାତ୍ରାରେ ସହାୟତା ଦେବେ, ସେମାନଙ୍କର ବୋଝକୁ ହାଲୁକା କରିବେ। ଦେଶର ପ୍ରତ୍ୟେକ ରାଜ୍ୟ ଏବଂ କେନ୍ଦ୍ରଶାସିତ ପ୍ରଦେଶର ଦାବି ଆଧାରରେ, ଦେଶର ଶ୍ରେଷ୍ଠ ବିଶେଷଜ୍ଞମାନେ କ୍ରାଶ କୋର୍ସର ଡିଜାଇନ କରିଛନ୍ତି। ଆଜି 6 ଟି ନୂତନ ଅନୁକୂଳ କୋର୍ସର ଶୁଭାରମ୍ଭ କରାଯାଉଛି। ନର୍ସିଂ ସହିତ ଜଡ଼ିତ ସାଧାରଣ କାର୍ଯ୍ୟ ହେଉ, ଘରୋଇ ଯତ୍ନ ହେଉ, କ୍ରିଟିକାଲ କେୟାରରେ ସହାୟତା ହେଉ, ନମୁନା ସଂଗ୍ରହ ହେଉ, ମେଡିକାଲ ଟେକ୍ନିସିଆନ ହୁଅନ୍ତୁ, ନୂଆ-ନୂଆ ଉପକରଣର ତାଲିମ ହେଉ, ଏଥିପାଇଁ ଯୁବକମାନଙ୍କୁ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରାଯାଉଛି। ଏଥିରେ ନବ ଯୁବକମାନଙ୍କର ଦକ୍ଷତା ମଧ୍ୟ ରହିବ ଏବଂ ଯେଉଁମାନେ ପୂର୍ବରୁ ଏହି ପ୍ରକାର କାର୍ଯ୍ୟରେ ପ୍ରଶିକ୍ଷିତ ହୋଇ ସାରିଛନ୍ତି, ସେମାନଙ୍କର ଦକ୍ଷତା ମଧ୍ୟ ଅହୁରି ବୃଦ୍ଧି ହେବ। ଏହି ଅଭିଯାନ ଦ୍ୱାରା, କୋଭିଡ ବିରୋଧରେ ଲଢୁଥିବା ଆମର ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ସେବା କ୍ଷେତ୍ରର ଆଗୁଆ ଯୋଦ୍ଧାଙ୍କୁ ନୂତନ ଶକ୍ତି ମଧ୍ୟ ମିଳିବ ଆଉ ଆମର ଯୁବକମାନଙ୍କ ପାଇଁ ରୋଜଗାରର ନୂଆ ସୁଯୋଗ ଲାଗି ସୁବିଧା ମଧ୍ୟ ପ୍ରସ୍ତୁତ ହେବ।

ସାଥୀଗଣ,

ଦକ୍ଷତା, ପୁନଃଦକ୍ଷତା ଏବଂ ଅପ୍‍-ସ୍କିଲିଂ, ଏହି ମନ୍ତ୍ର ହେଉଛି କେତେ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ, ଏହି କରୋନା ସମୟରେ ପୁଣି ସିଦ୍ଧ କରିଛି। ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ସେବା କ୍ଷେତ୍ର ଲାଗି ଦକ୍ଷ ଲୋକମାନେ ହିଁ ଥିଲେ, ସେମାନେ କରୋନା ମୁକାବିଲା ପାଇଁ ବହୁତ କିଛି ନୂଆ କଥା ମଧ୍ୟ ଶିଖିଛନ୍ତି। ଅର୍ଥାତ ଏକ ପକ୍ଷରେ ସେମାନେ ନିଜକୁ ପୁନଃ ଦକ୍ଷତା ସମ୍ପନ୍ନ କଲେ, ଏହା ସହିତ ସେମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ଯେଉଁ ଦକ୍ଷତା ପୂର୍ବରୁ ଥିଲା, ତାକୁ ମଧ୍ୟ ସେମାନେ ବିସ୍ତାର କରିଛନ୍ତି। ପରିବର୍ତିତ ପରିସ୍ଥିତି ଅନୁସାରେ ନିଜ ଦକ୍ଷତାକୁ ଅପ୍‍-ଗ୍ରେଡ ଅବା ମୂଲ୍ୟଯୁକ୍ତ କରିବା, ଏହା ହେଉଛି ଦକ୍ଷତା ବିକାଶ (ଅପ୍‍-ସ୍କିଲିଂ), ଆଉ ଏହା ହେଉଛି ସମୟର ଆହ୍ୱାନ, ଆଉ ଯେଉଁ ଗତିରେ ଟେକ୍ନୋଲୋଜି ସମସ୍ତଙ୍କ ଜୀବନର ପ୍ରତ୍ୟେକ କ୍ଷେତ୍ର ମଧ୍ୟକୁ ପ୍ରବେଶ କରୁଛି ସେତେବେଳେ କ୍ରମାଗତ ଭାବେ ଗତିଶୀଳ ବ୍ୟବସ୍ଥା ଅପ୍‍-ସ୍କିଲିଂ ଅନିର୍ବାଜ୍ୟ ହୋଇ ପଡ଼ିଛି। ଦକ୍ଷତା, ପୁନଃଦକ୍ଷତା ଏବଂ ଅପ୍‍-ସ୍କିଲିଂର ଏହି ମହତ୍ୱକୁ ଅନୁଭବ କରି ଦେଶରେ ସ୍କିଲ୍‍ ଇଣ୍ଡିଆ ମିଶନ ଆରମ୍ଭ କରାଯାଇଥିଲା । ପ୍ରଥମ ଥର ପାଇଁ ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ଭାବେ କୌଶଳ ବିକାଶ ମନ୍ତ୍ରଣାଳୟ ଗଠନ କରିବା ହେଉ, ସାରା ଦେଶରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ କୌଶଳ ବିକାଶ କେନ୍ଦ୍ର ଖୋଲିବା ହେଉ, ଆଇଟିଆଇ ସଂଖ୍ୟା ବୃଦ୍ଧି ହେଉ, ସେଗୁଡ଼ିକରେ ଲକ୍ଷ-ଲକ୍ଷ ନୂଆ ଆସନ ସଂଖ୍ୟା ବୃଦ୍ଧି କରିବା ହେଉ, ଏହା ଉପରେ କ୍ରମାଗତ ଭାବେ କାର୍ଯ୍ୟ କରାଯାଇଛି। ଆଜି ସ୍କିଲ୍‍ ଇଣ୍ଡିଆ ମିଶନ ପ୍ରତ୍ୟେକ ବର୍ଷ ଲକ୍ଷ-ଲକ୍ଷ ଯୁବକମାନଙ୍କୁ ଆଜିର ଆବଶ୍ୟକତା ଅନୁସାରେ ତାଲିମ ଦେବାରେ ବହୁତ ବଡ଼ ସହାୟତା କରୁଛି। ଦେଶରେ ଏହି କଥାକୁ ନେଇ ବହୁତ ବଡ଼ ଚର୍ଚ୍ଚା ହୋଇ ପାରିନାହିଁ, ଯେ ଦକ୍ଷତା ବିକାଶର ଏହି ଅଭିଯାନ, କରୋନାର ଏହି ସମୟରେ ଦେଶକୁ କେତେ ବଡ଼ ଶକ୍ତି ଦେଇଛି। ଗତ ବର୍ଷ ଯେତେବେଳେ କରୋନାର ଆହ୍ୱାନ ଆମ ସମ୍ମୁଖକୁ ଆସିଲା, ସେତେବେଳଠାରୁ ହିଁ କୌଶଳ ବିକାଶ ମନ୍ତ୍ରଣାଳୟ ସାରା ଦେଶର ଲକ୍ଷ-ଲକ୍ଷ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟକର୍ମୀଙ୍କୁ ପ୍ରଶିକ୍ଷିତ କରିବାରେ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଭୂମିକା ତୁଲାଇଛି। ଚାହିଦା ଅନୁକୂଳ ଦକ୍ଷତା ସେଟ୍‍ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିବାର ଯେଉଁ ଭାବନା ସହିତ ଦେଶ ଏହି ମନ୍ତ୍ରଣାଳୟ ପ୍ରତିଷ୍ଠା କରିଥିଲା, ତାହା ଉପରେ ଆଜି ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ କାର୍ଯ୍ୟ ହେଉଛି।

ସାଥୀଗଣ,

ଆମର ଜନସଂଖ୍ୟାକୁ ଦୃଷ୍ଟିରେ ରଖି ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟସେବା କ୍ଷେତ୍ରରେ ଡାକ୍ତର, ନର୍ସ ଏବଂ ପାରାମେଡିକାଲ ସହିତ ଜଡ଼ିତ ଯେଉଁ ବିଶେଷ ସେବା ରହିଛି, ତାହାକୁ ସମ୍ପ୍ରସାରିତ କରି ଚାଲିବା ମଧ୍ୟ ସେତିକି ଆବଶ୍ୟକ। ଏହାକୁ ନେଇ ବିଗତ କିଛି ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ଏକ ଦୂରଦୃଷ୍ଟି ସମ୍ପନ୍ନ ଅଭିବ୍ୟକ୍ତି ସହିତ କାର୍ଯ୍ୟ କରାଯାଇଛି। ବିଗତ 7 ବର୍ଷରେ ନୂତନ ଏମ୍ସ, ନୂତନ ମେଡିକାଲ କଲେଜ ଏବଂ ନୂତନ ନର୍ସିଂ କଲେଜ ପ୍ରତିଷ୍ଠା ଉପରେ ବହୁତ ଅଧିକ ଗୁରୁତ୍ୱ ଦିଆଯାଇଛି। ସେଗୁଡ଼ିକ ମଧ୍ୟରୁ ଅଧିକାଂଶ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ଷମ ହେବା ଆରମ୍ଭ ହୋଇଯାଇଛି। ଏହିଭଳି ଭାବେ, ଡାକ୍ତରୀ ଶିକ୍ଷା ଏବଂ ଏହା ସହିତ ଜଡ଼ିତ ସଂସ୍ଥାନରେ ସଂସ୍କାରକୁ ପ୍ରୋତ୍ସାହିତ କରାଯାଉଛି। ଆଜି ଯେଉଁ ଗତିରେ, ଯେଉଁ ଗମ୍ଭୀରତାର ସହିତ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ପେଶାଦାରମାନଙ୍କୁ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିବା ଉପରେ କାର୍ଯ୍ୟ ଚାଲୁ ରହିଛି, ତାହା ହେଉଛି ଅଭୂତପୂର୍ବ।

ସାଥୀଗଣ,

ଆଜିର ଏହି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମରେ, ମୁଁ ଆମର ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟସେବା କ୍ଷେତ୍ରର ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ ସୁଦୃଢ଼ ସ୍ତମ୍ଭ ବିଷୟରେ ମଧ୍ୟ ନିଶ୍ଚିତ ଚର୍ଚ୍ଚା କରିବାକୁ ଚାହିଁବି। ପ୍ରାୟତଃ, ଆମର ଏହି ସାଥୀମାନଙ୍କର ଚର୍ଚ୍ଚା କରିବାକୁ ଆମେ ଭୁଲି ଯାଇଥାଉ। ଏହି ସାଥୀମାନେ ହେଉଛନ୍ତି- ଆମର ଆଶା-ଏଏନଏମ୍‍-ଅଙ୍ଗନୱାଡ଼ି ଏବଂ ଗାଁ-ଗାଁରେ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟକେନ୍ଦ୍ରରେ ମୁତୟନ ଆମର ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟକର୍ମୀ। ଆମର ଏହି ସାଥୀ ସଂକ୍ରମଣ ରୋକିବା ଠାରୁ ନେଇ ବିଶ୍ୱର ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ଟିକାକରଣ ଅଭିଯାନ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ସବୁଥିରେ ବହୁତ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଭୂମିକା ତୁଲାଉଛନ୍ତି। ପାଣିପାଗର ସ୍ଥିତି, ଭୌଗୋଳିକ ପରିସ୍ଥିତି କେତେ ମଧ୍ୟ ବିପରୀତ ହେଉ, ଏହି ସାଥୀମାନେ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଦେଶବାସୀଙ୍କ ସୁରକ୍ଷା ପାଇଁ ଦିନରାତି ଲାଗି ରହିଛନ୍ତି। ଗାଁରେ ସଂକ୍ରମଣର ବ୍ୟାପକତାକୁ ରୋକିବାରେ, ଦୂର-ଦୂରାନ୍ତ କ୍ଷେତ୍ରରେ, ପାହାଡ଼ ଏବଂ ଜନଜାତୀୟ ଅଞ୍ଚଳରେ ଟିକାକରଣ ଅଭିଯାନକୁ ସଫଳତା ପୂର୍ବକ କାର୍ଯ୍ୟକାରୀ କରିବାରେ ଆମର ଏହି ସାଥୀମାନେ ବହୁତ ବଡ଼ ଭୂମିକା ତୁଲାଉଛନ୍ତି। 21 ଜୁନରୁ ଦେଶରେ ଟିକାକରଣ ଅଭିଯାନର ସମ୍ପ୍ରସାରଣ ହେଉଛି, ତାକୁ ମଧ୍ୟ ଆମର ଏହି ସାଥୀମାନେ ବହୁତ ଶକ୍ତି ପ୍ରଦାନ କରୁଛନ୍ତି, ବହୁତ ଉର୍ଜ୍ଜା ଦେଉଛନ୍ତି। ମୁଁ ଆଜି ସାର୍ବଜନିକ ଭାବେ ଏମାନଙ୍କର ଭୂରି-ଭୂରି ପ୍ରଶଂସା କରୁଛି, ଆମର ଏହି ସମସ୍ତ ସାଥୀମାନଙ୍କୁ ପ୍ରଶଂସା କରୁଛି।

ସାଥୀଗଣ,

21 ଜୁନରୁ ଯେଉଁ ଟିକାକରଣ ଅଭିଯାନ ଆରମ୍ଭ ହେଉଛି, ତାହା ସହିତ ଜଡ଼ିତ ଅନେକ ମାର୍ଗଦର୍ଶିକା ଜାରି କରାଯାଇଛି। ଏବେ 18 ବର୍ଷରୁ ଅଧିକ ବୟସର ସାଥୀମାନଙ୍କୁ ସେହି ସୁବିଧା ମିଳିବ, ଯାହା ଏ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ 45 ବର୍ଷରୁ ଅଧିକ ଆମର ମହାନୁଭବମାନଙ୍କୁ ମିଳୁଥିଲା। କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର, ପ୍ରତ୍ୟେକ ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ ଟିକା ଦେବାପାଇଁ, ମାଗଣା ଟିକା ଦେବାଲାଗି ପ୍ରତିବଦ୍ଧ ଅଟନ୍ତି । ଆମକୁ ଆମର କରୋନା ପ୍ରୋଟୋକଲ ଉପରେ ମଧ୍ୟ ସମ୍ପୁର୍ଣ୍ଣ ଧ୍ୟାନ ରଖିବାର ଅଛି। ମାସ୍କ ଏବଂ ଦୁଇ ଗଜର ଦୂରତା, ଏହା ମଧ୍ୟ ବହୁତ ଆବଶ୍ୟକ। ଶେଷରେ ମୁଁ ଏହି କ୍ରାଶ କୋର୍ସ କରିବାକୁ ଯାଉଥିବା ସମସ୍ତ ଯୁବକମାନଙ୍କୁ ବହୁତ-ବହୁତ ଶୁଭକାମନା ଜଣାଉଛି। ମୋର ବିଶ୍ୱାସ ରହିଛି ଯେ, ଆପଣମାନଙ୍କର ଏହି ନୂତନ ଦକ୍ଷତା, ଦେଶବାସୀଙ୍କ ଜୀବନ ବଞ୍ଚାଇବାରେ କ୍ରମାଗତ ଭାବେ କାର୍ଯ୍ୟରେ ଆସିବ ଏବଂ ଆପଣଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ନିଜ ଜୀବନର ଏକ ନୂତନ ପ୍ରବେଶ ଦିଗରେ ଏକ ବହୁତ ଆତ୍ମସନ୍ତୋଷ ଆଣିଦେବ, କାରଣ ଆପଣ ଯେତେବେଳେ ପ୍ରଥମ ଥର ପାଇଁ ରୋଜଗାର ନିମନ୍ତେ ଜୀବନର ଶୁଭାରମ୍ଭ କରୁଛନ୍ତି ସେତେବେଳେ ଆପଣ ମଣିଷ ଜୀବନ ରକ୍ଷା ଦିଗରେ ନିଜକୁ ସାମିଲ କରୁଛନ୍ତି। ଲୋକଙ୍କ ଜୀବନ ବଞ୍ଚାଇବା କାର୍ଯ୍ୟରେ ସାମିଲ ହେଉଛନ୍ତି। ବିଗତ ଦେଢ଼ ବର୍ଷ ଧରି ଦିନ-ରାତି କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଥିବା ଆମର ଡାକ୍ତର, ଆମର ନର୍ସମାନେ ଏତେ ବଡ଼ ବୋଝ ସେମାନେ ସହିଛନ୍ତି, ଆପଣମାନଙ୍କ ଆସିବା ଦ୍ୱାରା ସେମାନଙ୍କୁ ବହୁତ ସହାୟତା ମିଳିବାକୁ ଯାଉଛି। ସେମାନଙ୍କୁ ଏକ ନୂତନ ଶକ୍ତି ମିଳିବାକୁ ଯାଉଛି। ଏଥିପାଇଁ ଏହି କ୍ରାଶ କୋର୍ସ ଆପଣମାନଙ୍କ ଜୀବନରେ ଏକ ନୂଆ ସୁଯୋଗ ନେଇ ଆସୁଛି। ମାନବତାର ସେବା ପାଇଁ ଲୋକ କଲ୍ୟାଣର ଏହି ସୁଯୋଗ ଆପଣମାନଙ୍କ ପାଇଁ ଉପଲବ୍ଧ ହେଉଛି। ଏହି ପବିତ୍ର କାର୍ଯ୍ୟ ଲାଗି, ମାନବ ସେବାର କାର୍ଯ୍ୟ ପାଇଁ ଈଶ୍ୱର ଆପଣମାନଙ୍କୁ ବହୁତ ଶକ୍ତି ଦିଅନ୍ତୁ । ଆପଣ ଶୀଘ୍ରରୁ ଅତିଶୀଘ୍ର ଏହି କୋର୍ସ ବିଷୟରେ ଅତି ସୂକ୍ଷ୍ମ ଭାବେ ଶିକ୍ଷା ଲାଭ କରନ୍ତୁ । ନିଜେ ନିଜକୁ ଉତମ ବ୍ୟକ୍ତି କରିବା ପାଇଁ ପ୍ରୟାସ କରନ୍ତୁ। ଆପଣଙ୍କ ପାଖରେ ସେହି ଦକ୍ଷତା ଥାଉ ଯାହା ପ୍ରତ୍ୟେକଙ୍କ ଜୀବନ ବଞ୍ଚାଇବାର କାର୍ଯ୍ୟରେ ଆସୁ। ଏଥିପାଇଁ ମୋ ତରଫରୁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ବହୁତ-ବହୁତ ଶୁଭକାମନା।

ବହୁତ-ବହୁତ ଧନ୍ୟବାଦ!