Share
 
Comments 2 Comments
PM Narendra Modi attends the Visitors' Conference at Rashtrapati Bhavan
Society is becoming technology driven. It is essential to understand the importance of this & look towards affordable technology: PM
Our focus must now be on innovation. It is the key to achieve one's dreams: PM Modi
Institutions of higher education should give primacy to innovation in learning: PM Narendra Modi
Finding solutions to challenges like global warming & converting waste to wealth are key to rise of India: PM Modi
Science is universal but technology must be local: PM Modi
The biggest strength of #MakeInIndia is human capital. Skill development is extremely vital: PM
Our President is a walking talking university. He is an ocean of knowledge: PM Narendra Modi

परम आदरणीय राष्‍ट्रपति जी, मंत्रिपरिषद के मेरे साथी, उपस्‍थित सभी वरिष्‍ठ महानुभाव। मैं आदरणीय राष्‍ट्रपति जी का बहुत आभारी हूं कि आपने इस व्‍यवस्‍था को प्राणवान बनाया। वरना आना-मिलना, कुछ इधर से कुछ उधर से और फिर Bye bye. इस ritual से बाहर इस व्‍यवस्‍था को निकाल करके इसमें प्राण भरने की कोशिश हुई है और समय की मांग के अनुसार उसमें participation, involvement, coordination इस पर अधिक बल दिया गया है। ये जो व्‍यवस्‍था विकसित हुई है और उसके मंथन में से जो अमृत प्राप्‍त हो रहा है वो भविष्‍य में राष्‍ट्र की विकास यात्रा के रोड मैप को तैयार करेगा। उसमें ज्ञान और अनुभव के सामर्थ्‍य को जोड़ेगा और समय सीमा में परिवर्तन लाने के प्रयासों को बल देगा। मैं हमेशा सोचता हूं कि प्राथमिक शिक्षा व्‍यक्‍ति के जीवन के निर्माण में बहुत बड़ी भूमिका अदा करते हैं। प्राथमिक शिक्षा इंसान को जड़ों से जोड़ती है लेकिन higher education आसमान छूने के अरमान जगाती है और इसलिए जितना महत्‍मय प्राथमिक शिक्षा के माध्‍यम से जीवन को तैयार करना, प्राथमिक शिक्षा के माध्‍यम से जड़ों से जोड़ना, उतना ही higher education के माध्‍यम से आसमान को छूने वाले अरमान कैसे जगे। अगर प्राथमिक शिक्षा व्‍यक्‍ति घरतर पर ज्‍यादा बल देती है तो higher education राष्‍ट्र घरतर का आधार बनती है।

राष्‍ट्र कैसे शक्‍तिशाली बनेगा उसका एक road map, उसकी एक blue print इस कालखंड में तैयार होती है और उस अर्थ में आप लोगों का योगदान, आपके द्वारा institutions का योगदान, राष्‍ट्र के विकास की यात्रा को, राष्‍ट्र निर्माण के प्रयासों को समयानुकूल जिन ताकतों की आवश्‍यकता है उसको जोड़ने के लिए काम आता है। शायद इसके पूर्व की कोई शताब्‍दी ऐसी नहीं होगी जिस पर technology का इतना प्रभाव रहा हो। एक प्रकार से पूरा समाज जीवन technology driven हुआ है और तब जाकर के हमारे लिए भी आवश्‍यक होता है कि technology के इस महत्‍मय को स्‍वीकार करते हुए, भविष्‍य को ध्‍यान में रखते हुए हम affordable technology की तरफ आगे कैसे बढ़े? हम sustainable technology पर बल कैसे दे और ये करना है तो हमें innovation पर बल देना होगा। Millions of million challenges are there. लेकिन जैसा अभी बताया गया कि Billions minds are also there. लेकिन जब तक वो mind innovation के साथ नहीं जुड़ता है वो अगर सिर्फ उपभोक्‍ता ही बना रहता है तो मैं नहीं मानता हूं कि इतने सारे mind को हम खुराक भी दे पाएंगे, उसको जो दिमागी खुराक चाहिए वो भी नहीं दे पाएंगे और इसलिए हम भाग्‍यवान है कि हमारे पास Billions of Billion mind है। लेकिन जब तक हम innovation के लिए कोई अगर हम proper environment नहीं देते हैं, mechanism develop नहीं करते हैं। resource mobilise नहीं करते हैं तो कभी-कभी विचार धरे के धरे रह जाते हैं और इसलिए सपनों को साकार करने का एक मार्ग होता है innovation. हमारी institutions innovation को प्राथमिकता देने में कितनी कामयाब हो रही है।

अब आज Global Warming, Environment ये सारे issues की चर्चा हो रही है दुनिया में। कुछ लोगों के लिए Global Warming एक चिंता का विषय है, तो कुछ लोगों के लिए Global Warming एक market का कारण है। उन्‍होंने उसको एक market opportunity में convert करने की सोची है। वे चाहते हैं कि हम technology में innovation करेंगे और Global Warming के नाम पर दुनिया की market को capture करेंगे। भारत जैसे देश के लिए ये आवश्‍यकता बन जाती है कि हम भावी पीढ़ी की रक्षा के लिए क्‍या वो innovation दुनिया के सामने ला सकते हैं। जो अच्‍छा भी हो और सस्‍ता भी हो और सामान्‍य मानविकी के जीवन के साथ सहजता से adoptable हो। अगर ये व्‍यवस्‍थाएं हम विकसित करते हैं तब तो ये Billions of Billion people एक कदम चलकर के भी climate change की इतनी बड़ी समस्‍या के समाधान के लिए रास्‍ते खोज सकते हैं।

आज दुनिया में एक culture develop हुआ – throw away culture. लेकिन दुनिया में जो संकट पैदा हुआ है उसके कारण अब throw away culture चिंता का कारण बना है और उसके कारण reuse कैसे करना, recycle कैसे करना, इस पर मंथन चल रहे हैं। भारत जैसा इतना बड़ा देश, हम waste को wealth में create करने के लिए क्‍या innovation कर सकते हैं। मान लिजिए हमें 50 million मकान बनाने हैं। आज जिस material के आधार पर मकान बना रहे हैं क्‍या हम उतने मकान बनाने के लिए material provide कर सकते हैं। हम जानते हैं इन दिनों नदी की रेत बालू smuggling होता है। एक राज्‍य दूसरे राज्‍य में smuggling करता है क्‍योंकि उसको construction के लिए रेत उपलब्‍ध नहीं है। environment के कारण भी ऐसे हैं कि रेत लेना भी मुश्किल होता जा रहा है। तब जाकर के हमारे innovation के लिए सबसे बड़ी challenge है कि हम मकानों की रचना में किस material को provide करेंगे। जो हमारे पास waste पड़ा होगा। वो ही well creation का कारण बनेगा। हम innovation को कैसे लाएं। हम कभी कभी बाहरी तथा उधारी चीजों को तुरंत adopt कर देते हैं। जिस जगह पर मुश्किल से सप्‍ताह में एक दिन सूरज के दर्शन होते हैं वो जब मकान की रचना करेगा जो चारों तरफ शीशे लगाएगा ताकि कहीं से किरण मिल जाए कहीं चली न जाए मेरे नसीब में आ जाए। लेकिन हम भी वेसा करेंगे तो हमें क्‍या करना पड़ता है कि एक curtain लगाओ, दो curtain लगाओ, पांच curtain लगाओ, temperature, यानी हममें हमारे requirement के अनुसार हमारे architecture को develop करना पड़ेगा। जब तक हम हमारे requirement के अनुसार हमारे architecture को develop नहीं करते हैं और हम borrow की गई व्‍यवस्‍था को स्‍वीकार करेंगे। तो शायद हम संकट को बढ़ाने के लिए हिससेदार बनेंगे और इसलिए Science is universal but technology must be local ये जब तक हम apply नहीं करते हैं अब मान लीजिए मुझे असम के अन्‍दर पानी निकालना या पानी पहुंचाना है तो मैं 50 बार सोचूंगा कि मुझे स्‍टील की पाइप की जरूरत है क्‍या वहां और मेरा answer है कि स्‍टील की पाइप के बिना bamboo को पाइप में convert कर कर के पानी पहुंचाया जा सकता है और स्‍टील से उसकी लाइफ ज्‍यादा होती है। कहने का तात्‍पर्य यह है कि मुझे वहां बांबू से काम चलता है तो मुझे स्‍टील ले जाने की क्‍या जरूरत है और इसलिए समाज जीवन की जो स्‍वाभाविक आवश्‍यकताएं हैं। उसको हम कैसे उस प्रकार से उपयोग करें। हम एक virtual platform तैयार कर सकते हैं क्‍या, एक वेबसाइड इन प्रिंट हमारे सामने आई है। हम एक ऐसा virtual platform तैयार करें जो globally इस प्रकार के सहज प्रयोग हो रहे हैं। उनको हम invite करेंगे। हम उस पर seminar करें चर्चा करें और उसमें हो सकता है कुछ चीजें हमारे लिए sparking point बनें। हमें कुछ करने के लिए प्रेरणा दे सकते हैं। क्‍या हम इसका उपयोग कर सकते हैं। अगर हम इस प्रकार से लोगों को जोड़ते हैं तो अधिक प्रयास करते हैं तो परिणाम मिलता है। हमारी institutions आज हम जानते हैं जो हमारे यहां student आते हैं तो वे किस प्रकार से आते हैं। एक चिंता का विषय है कि ज्‍यादातर student जो अब हमारे पास पहुंच रहे हैं। वे entrance exam कैसे पार करना उसी में उनकी mastery होती है। वे उस प्रकार के classes को attend करते हैं। जो आपको exam पार कराने का रास्‍ता दिखाते हैं और उसके कारण हम उनकी real talent और capability से अनभिज्ञ रह जाते हैं। वो admission ले लेता है और उसको मालूम है कि हमारा base ऐसा है कि पाइपलाइन के इस दौर के अन्‍दर प्रवेश कर गया तो दूसरी तरफ निकलना ही निकलना है। दूसरा कोई रास्‍ता ही नहीं है। हमारे यहां कोई आईएस अफसर 24सौ घंटे पढ़ाई करके exam पास करके अन्‍दर आ गया तो उधर सेक्रेटरी बन कर ही निकलेगा। ये जो स्थिति है और इसलिए हमें लगातार हमारे यहां रैंकिंग करने की पद्धति बदल सकते हैं क्‍या। वरना हम investment करते जाएं, समाज का है मैं सरकार की बात नहीं कर रहा हूं। हम investment करते जाएं लेकिन ultimate product जो हैं वो हमारे काम न आएं उसका तो हम गुजारा कर लें। लेकिन वह खुद का गुजारा तो टीचर बन के भी कर लेता है। आज हमारा देश इतनी बड़ी मात्रा में डिफेंस equipment import करता है। देश का बहुत बड़ा बजट डिफेंस सेक्‍टर में लगा है। क्‍या मेरे देश की technical institutions वो research और innovation में lead नहीं कर सकते हैं कि जो डिफेंस equipment manufacturing के लिए जो resource mobilisation है उसमें सबसे बड़ी ताकत है talent of human resource. उस human resource की capability इतनी हो कि दुनिया के किसी भी डिफेंस manufacturing वाले लोग हैं उसको यह पहले ध्‍यान में आना चाहिए the best talent is here. मैं manufacturing में ही करूंगा और मुझे cheap talent मिल जाती है तो मैं ग्‍लोबल मार्केट के अन्‍दर affordable रूप में खड़ा हो जाऊंगा। मैं मार्केट में खड़ा हो जाऊंगा और इसका मतलब यह हुआ कि मुझे अगर मेरे देश की defence requirement के लिए इतना import है तो अगर मेरी इतनी institutions मिलकर करके तय करें तब हिन्‍दुस्‍तान के दस साल के अन्‍दर defence equipment इम्‍पोर्ट करने में हम 50% कम कर देंगे। मैं समझता हूं कि भारत सरकार को इतना बजट बचेगा कि इसी education system को बढ़ावा देने में कोई हर्ज नहीं होगा। कितना बड़ा फायदा होगा। हम आत्‍मनिर्भर बनेंगे और इसलिए हम लोगों को जब तक ये हम नहीं सोचते कि हमारी आवश्‍यकताएं क्‍या हैं।

आज solar energy की तरफ सबका ध्‍यान गया है। 175 Gigawatt बहुत बड़ा ambitious plan है। दुनिया के किसी भी देश के व्‍यक्‍ति के साथ जब भारत 175 Gigawatt renewal energy की बात करता है तो पांच मिनट तो समझ नहीं पाता है कि मैं Megawatt बोल रहा हूं कि Gigawatt बोल रहा हूं। उनको अचरज हो रहा है। क्‍या कोई देश इतना बड़ा initiative ले सकता है। लेकिन अगर हम technology में innovation करें। हम solar manufacturing में solar के equipment manufacturing में हम नए innovation कर करके हम maximum power generation की दिशा में कैसे जा सकते हैं, हम उसको और cost effective कैसे बना सकते हैं, हम कितनी बड़ी देश की सेवा कर सकते हैं?

अभी मैं एक science magazine देख रहा था। पढ़-वढ़ तो पाता नहीं हूं ज्‍यादा तो उसमें एक चीज मेरे ध्‍यान में आई हैं। एक प्रयोग चल रहा है wind energy के संबंध में। तो जो wind turbines है अब वो हवा में जो humidity है उसको भी capture कर रहे हैं। अब वो wind के कारण power तो generate करते हैं, लेकिन उसी व्‍यवस्‍था से वो humidity को capture करके उसमें से पानी में convert करते हैं और एक wind mill 24 घंटे में 10,000 लीटर sweet water हवा में से लेकर के दे सकता है। मतलब कि मान लीजिए रेगिस्‍तान के इलाके के गांव हैं अगर वहां हमारी ऐसी wind mill लगती है जहां wind velocity भी है और अगर मैं 10,000 लीटर sweet water देता हूं मतलब मैं health के सारे problems का solution करता हूं, जीवन जीने की quality of life में बदलाव लाता हूं। क्‍या मैं multiple activity वाली मेरी technology, एक में से अनेक लाभ इस दिशा में हम कुछ कर सकते हैं और हमारे पास हमारे नौजवान है। दुनिया के किसी भी देश में जाए तो इस प्रकार के पराक्रम कर सकते हैं। क्‍या हम भारत में वो अवसर दे सकते हैं? हमारी सभी institutions, वे अपना in house incubation centre को कैसे develop करे और corporate world को उसकी partnership कैसे दी जाए? ताकि corporate world की जो आवश्‍यकता है जो commercial में जाने वाले हैं, अगर incubation centre with education institution होगा और ये तीनों का अगर मेलजोल होगा तो मैं समझता हूं कि हम नए-नए research के लिए commercial field में जाने के लिए तुरंत निर्णय कर सकते हैं और एक-दूसरे को बल दे सकते हैं।

हम ‘मेक इन इंडिया’ की बात करते हैं। ‘मेक इन इंडिया की सबसे बड़ी ताकत क्‍या है? Raw material हमारे हैं, ऐसा हम दावा नहीं कर सकते। लेकिन हमारे पास human capital इतना strong हमारा base है कि हम ‘मेक इन इंडिया’ के लिए दुनिया में claim कर सकते हैं और उसके लिए skill development चाहिए। हम जिन विषयों पर काम करे, मान लिजिए मेरी petroleum university है। gas base economy की दिशा में देश आगे बढ़ रहा है। अगर gas base economy की दिशा में मेरा देश आगे बढ़ रहा है तो मुझे छोटे से गांव में भी गैस से संबंधित जो technology, repairing, pipe repairing, safety majors इसके लिए छोटे-छोटे लोगों की जरूरत पड़ेगी। क्‍या हमारी institutions आखिरी छोर पर हमें किस प्रकार के human resource development चाहिए उसका syllabus तैयार करके skill development करने वाली institution तक उसको linkage करे तो मेरी university professional लोगों को तैयार करेगी, मेरी university expert साइंटिस्‍टों को तैयार करेगी, technicians को तैयार करेगी। लेकिन back up के लिए मुझे जिस प्रकार के human resource की जरूरत होगी वो भी simultaneous तैयार होगा। कितना बड़ा बदलाव आ सकता है, लेकिन हमारा काम टुकड़ों में होता है। जब तक हम holistic approach नहीं करते, integrated approach नहीं करते हैं तब ये टुकड़ों से जो व्‍यवस्‍था बनती है तो हमारी कठिनाई बढ़ जाती है और इसलिए हमारे लिए ये भी आवश्‍यक है। जिस प्रकार से कोई देश in isolation नहीं चल सकता, उसी प्रकार से कोई institution in isolation नहीं चल सकता। हमारे लिए आवश्‍यक है कि समग्र दुनिया कहां जा रही है, उस दुनिया में हम कहां जा सकते हैं, उस जगह पर पहुंचने के लिए हमारे wage and means क्‍या है, हमारे resources क्‍या है, हमारी capability क्‍या है। और उसमें हम five year plan बना करके, ten year plan बना करके इन चीजों पर focus करेंगे, हम इतना पहुंचेंगे, तब तो जा करके होगा। otherwise मुझे याद है मैं जब नया-नया गुजरात में CM बना, तो मेरा focus था ITIs एक प्रकार का वो technology word का शिशु मंदिर है। बाल मंदिर कह दीजिए। मैंने उस पर focus किया, तो मैं हैरान था। वहां पर जो Auto mobile के courses थे, वो courses चल रहे थे जो गाडि़यां बनती ही नहीं है। अब कार वैसी available नहीं है, लेकिन आपका student बेचारा admission ले करके एक साल भर उन चीजों को पढ़ता है। यानी कि हमें यह बदलाव लाने के लिए आप जहां पर है वहां से पीछे क्‍या हो सकता है, आप बहुत बड़ा contribution कर सकते हैं।

यह जो Imprint के माध्‍यम से आप बहुत बड़ा contribution कर सकते हैं। और इसलिए हम एक नये vision के साथ एक लम्‍बी सोच के साथ इन चीजों को कैसे करें और हम लोग भाग्‍यवान है कि हमारे राट्रपति जी स्‍वयं में अपने आप में एक चलती-फिरती university है। कोई मुझे पूछे कि प्रधानमंत्री बनने का आपका सबसे बड़ा फायदा क्‍या है, तो मैं कहूंगा सबसे बड़ा मेरा फायदा है राष्‍ट्रपति जी के निकट जाने का। जब भी मिलता हूं, ज्ञान का भंडार होता है। मैं सच बताता हूं जी। इतनी चीजें बारीकी से बताते हैं वो। उसके साथ उनका experience होता है। आप लोगों के सीधा-सीधा उनका मार्गदर्शन है आपको। उनके मार्गदर्शन में आप लोगों का काम करना है। मैं नहीं मानता हूं कि अब कोई हमें रोक सकता है। Sky is the limit, अब आप राष्‍ट्रपति जी के आदेशों के अनुसार इच्‍छा के अनुसार चीजों को करेंगे, मैं मानता हूं राट्र लाभांवित होगा। मेरी आप सबको बहुत शुभकामनाएं हैं। मैं राष्‍ट्रपति जी का बहुत आभारी हूं कि मुझे आप सबके बीच आने का अवसर दिया। बहुत बहुत धन्‍यवाद।

Modi Govt's #7YearsOfSeva
Explore More
It is now time to leave the 'Chalta Hai' attitude & think of 'Badal Sakta Hai': PM Modi

Popular Speeches

It is now time to leave the 'Chalta Hai' attitude & think of 'Badal Sakta Hai': PM Modi
429 Lakh Metric Tonnes of wheat procured at MSP, benefiting about 48.2 Lakh farmers

Media Coverage

429 Lakh Metric Tonnes of wheat procured at MSP, benefiting about 48.2 Lakh farmers
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Corona period has proved importance of skill, re-skill and up-skill: PM Modi
June 18, 2021
Share
 
Comments
One lakh youth will be trained under the initiative in 2-3 months: PM
6 customized courses launched from 111 centres in 26 states
Virus is present and possibility of mutation is there, we need to stay prepared: PM
Corona period has proved importance of skill, re-skill and up-skill: PM
The pandemic has tested the strength of every country, institution, society, family and person of the world: PM
People below 45 years of age will get the same treatment for vaccination as for people above 45 years of age from June 21st: PM
PM Lauds ASHA workers, ANM, Anganwadi and health workers deployed in the dispensaries in the villages

नमस्कार, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्रीमान महेंद्र नाथ पांडे जी, आर के सिंह जी, अन्य सभी वरिष्ठ मंत्रीगण, इस कार्यक्रम में जुड़े सभी युवा साथी, प्रोफेशनल्स, अन्य महानुभाव और भाइयों और बहनों,

कोरोना के खिलाफ महायुद्ध में आज एक महत्वपूर्ण अभियान का अगला चरण प्रारंभ हो रहा है। कोरोना की पहली वेव के दौरान देश में हजारों प्रोफेशनल्स, स्किल डवलपमेंट अभियान से जुड़े। इस प्रयास ने देश को कोरोना से मुकाबला करने की बड़ी ताकत दी। अब कोरोना की दूसरी वेव के बाद जो अनुभव मिले हैं, वो अनुभव आज के इस कार्यक्रम का प्रमुख आधार बने हैं। कोरोना की दूसरी वेव में हम लोगों ने देखा कि कोरोना वायरस का बदलना और बार-बार बदलता स्वरूप किस तरह की चुनौतियां हमारे सामने ला सकता है। ये वायरस हमारे बीच अभी भी है और जब तक ये है, इसके म्यूटेट होने की संभावना भी बनी हुई है। इसलिए हर इलाज, हर सावधानी के साथ-साथ आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए हमें देश की तैयारियों को और ज्यादा बढ़ाना होगा। इसी लक्ष्य के साथ आज देश में 1 लाख फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स तैयार करने का महाअभियान शुरु हो रहा है।

साथियों,

इस महामारी ने दुनिया के हर देश, हर संस्था, हर समाज, हर परिवार, हर इंसान के सामर्थ्य को, उनकी सीमाओं को बार-बार परखा है। वहीं, इस महामारी ने साइंस, सरकार, समाज, संस्था और व्यक्ति के रूप में भी हमें अपनी क्षमताओं का विस्तार करने के लिए सतर्क भी किया है। पीपीई किट्स और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर कोविड केयर और ट्रीटमेंट से जुड़े मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का जो बड़ा नेटवर्क आज भारत में बना है, वो काम अब भी चल रहा है और वो इसी का परिणाम है। आज देश के दूर-सुदूर में अस्पतालों तक भी वेंटिलेटर्स, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स पहुंचाने का भी तेज गति से प्रयास किया जा रहा है। डेढ़ हजार से ज्यादा ऑक्सीजन प्लांट्स बनाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है और हिन्दुस्तान के हर जिले में पहुंचने का एक भगीरथ प्रयास है। इन प्रयासों के बीच एक स्किल्ड मैनपावर का बड़ा पूल होना, उस पूल में नए लोग जुड़ते रहना, ये भी उतना ही जरूरी है। इसी को देखते हुए, कोरोना से लड़ रही वर्तमान फोर्स को सपोर्ट करने के लिए, देश में करीब 1 लाख युवाओं को ट्रेन करने का लक्ष्य रखा गया है। ये कोर्स दो-तीन महीने में ही पूरा हो जाएगा, इसलिए ये लोग तुरंत काम के लिए उपलब्ध भी हो जाएंगे और एक ट्रेन्ड सहायक के रूप में वर्तमान व्यवस्था को काफी कुछ सहायकता देंगे, उनका बोझ हल्का करेंगे। देश के हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की मांग के आधार पर, देश के टॉप एक्सपर्ट्स ने क्रैश कोर्स डिजायन किया है। आज 6 नए कस्टमाइज़्ड कोर्स लॉन्च किए जा रहे हैं। नर्सिंग से जुड़ा सामान्य काम हो, होम केयर हो, क्रिटिकल केयर में मदद हो, सैंपल कलेक्शन हो, मेडिकल टेक्निशियन हों, नए-नए उपकरणों की ट्रेनिंग हो, इसके लिए युवाओं को तैयार किया जा रहा है। इसमें नए युवाओं की स्किलिंग भी होगी और जो पहले से इस प्रकार के काम में ट्रेन्ड हो चुके हैं, उनकी अप-स्किलिंग भी होगी। इस अभियान से, कोविड से लड़ रही हमारी हेल्थ सेक्टर की फ्रंटलाइन फोर्स को नई ऊर्जा भी मिलेगी और हमारे युवाओं रोजगार के नए अवसर के लिए उनके लिए सुविधा भी बनेगी।

साथियों,

Skill, Re-skill और Up-Skill, ये मंत्र कितना महत्वपूर्ण है, ये कोरोना काल ने फिर सिद्ध किया है। हेल्थ सेक्टर के लोग Skilled तो थे ही, उन्होंने कोरोना से निपटने के लिए बहुत कुछ नया सीखा भी। यानि एक तरह से उन्होंने खुद को Re-skill किया। इसके साथ ही, उनमें जो स्किल पहले से थी, उसका भी उन्होंने विस्तार किया। बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी स्किल को अपग्रेड या वैल्यू एडिशन करना, ये Up-Skilling है, और समय की यही मांग है और जिस गति से टेक्नोलॉजी जीवन के हर क्षेत्र में प्रवेश कर रही है तब लगातार dynamic व्यवस्था Up-Skilling की अनिवार्य हो गई है। Skill, Re-skill और Up-Skill, के इसी महत्व को समझते हुए ही देश में Skill India Mission शुरु किया गया था। पहली बार अलग से कौशल विकास मंत्रालय बनाना हो, देशभर में प्रधानमंत्री कौशल विकास केंद्र खोलना हो, ITI's की संख्या बढ़ाना हो, उनमें लाखों नई सीट्स जोड़ना हो, इस पर लगातार काम किया गया है। आज स्किल इंडिया मिशन हर साल लाखों युवाओं को आज की जरूरत के हिसाब से ट्रेनिंग देने में बहुत बड़ी मदद कर रहा है। इस बात की देश में बहुत चर्चा नहीं हो पाई, कि स्किल डवलपमेंट के इस अभियान ने, कोरोना के इस समय में देश को कितनी बड़ी ताकत दी। बीते साल जब से कोरोना की चुनौती हमारे सामने आई है, तब से ही कौशल विकास मंत्रालय ने देशभर के लाखों हेल्थ वर्कर्स को ट्रेन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। Demand Driven Skill Sets तैयार करने की जिस भावना के साथ इस मंत्रालय को बनाया गया था, उस पर आज और तेजी से काम हो रहा है।

साथियों,

हमारी जनसंख्या को देखते हुए, हेल्थ सेक्टर में डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिक्स से जुड़ी जो विशेष सेवाएं हैं, उनका विस्तार करते रहना उतना ही आवश्यक है। इसे लेकर भी पिछले कुछ वर्षों में एक फोकस्ड अप्रोच के साथ काम किया गया है। बीते 7 साल में नए AIIMS, नए मेडिकल कॉलेज और नए नर्सिंग कॉलेज के निर्माण पर बहुत ज्यादा बल दिया गया। इनमें से अधिकांश ने काम करना शुरू भी कर दिया है। इसी तरह, मेडिकल एजुकेशन और इससे जुड़े संस्थानों में रिफॉर्म्स को प्रोत्साहित किया जा रहा है। आज जिस गति से, जिस गंभीरता से हेल्थ प्रोफेशनल्स तैयार करने पर काम चल रहा है, वो अभूतपूर्व है।

साथियों,

आज के इस कार्यक्रम में, मैं हमारे हेल्थ सेक्टर के एक बहुत मजबूत स्तंभ की चर्चा भी जरूर करना चाहता हूं। अक्सर, हमारे इन साथियों की चर्चा छूट जाती है। ये साथी हैं- हमारे आशा-एनम-आंगनवाड़ी और गांव-गांव में डिस्पेंसरियों में तैनात हमारे स्वास्थ्य कर्मी। हमारे ये साथी संक्रमण को रोकने से लेकर दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान तक में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मौसम की स्थितियां, भौगौलिक परिस्थिति कितनी भी विपरीत हों, ये साथी एक-एक देशवासी की सुरक्षा के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं। गांवों में संक्रमण के फैलाव को रोकने में, दूर-सुदूर के क्षेत्रों में, पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान को सफलता पूर्वक चलाने में हमारे इन साथियों ने बहुत बड़ी भूमिका अदा की है। 21 जून से जो देश में टीकाकरण अभियान का विस्तार हो रहा है, उसे भी हमारे ये सारे साथी बहुत ताकत दे रहे हैं, बहुत ऊर्जा दे रहे हैं। मैं आज सार्वजनिक रूप से इनकी भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूं, इन हमारी सभी साथियों की सराहना करता हूं।

साथियों,

21 जून से जो टीकाकरण अभियान शुरू हो रहा है, उससे जुड़ी अनेक गाइडलाइंस जारी की गई हैं। अब 18 साल से ऊपर के साथियों को वही सुविधा मिलेगी, जो अभी तक 45 साल से ऊपर के हमारे महानुभावों को मिल रही थी। केंद्र सरकार, हर देशवासी को टीका लगाने के लिए, 'मुफ्त' टीका लगाने के लिए, प्रतिबद्ध है। हमें कोरोना प्रोटोकॉल का भी पूरा ध्यान रखना है। मास्क और दो गज़ की दूरी, ये बहुत ज़रूरी है। आखिर में, मैं ये क्रैश कोर्स करने वाले सभी युवाओं को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। मुझे विश्वास है, आपकी नई स्किल्स, देशवासियों का जीवन बचाने में लगातार काम आएगी और आपको भी अपने जीवन का एक नया प्रवेश एक बहुत ही संतोष देगा क्योंकि आप जब पहली बार रोजगार के लिए जीवन की शुरूआत कर रहे थे तब आप मानव जीवन की रक्षा में अपने आप को जोड़ रहे थे। लोगों की जिन्दगी बचाने के लिए जुड़ रहे थे। पिछले डेढ़ साल से रात-दिन काम कर रहे हमारे डॉक्टर, हमारी नर्सिस इतना बोझ उन्होंने झेला है, आपके आने से उनको मदद मिलने वाली है। उनको एक नई ताकत मिलने वाली है। इसलिए ये कोर्स अपने आप में आपकी जिन्दगी में एक नया अवसर लेकर के आ रहा है। मानवता की सेवा का लोक कल्याण का एक विशेष अवसर आपको उपलब्ध हो रहा है। इस पवित्र कार्य के लिए, मानव सेवा के कार्य के लिए ईश्वर आपको बहुत शक्ति दे। आप जल्द से जल्द इस कोर्स की हर बारीकी को सीखें। आपने आप को उत्तम व्यक्ति बनाने का प्रयास करें। आपके पास वो स्किल हो जो हर किसी की जिन्दगी बचाने के काम आए। इसके लिए मेरी तरफ से आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं।

बहुत-बहुत धन्यवाद !