PM Modi attends inauguration of the birth centenary celebrations of Rani Gaidinliu in New Delhi
We are celebrating the birth centenary of Rani Maa. I bow to Rani Gaidinliu and remember her contribution: PM
Rani Maa's life is an inspiration for us. She showed the way of attaining newer heights of development while maintaining unity in the Nation: PM
India has not been made by kings or rulers, but by its people: Shri Narendra Modi
Rani Maa worshipped nature and devoted herself to service for her entire life: PM
Mahatma Gandhi's thoughts were spread across the Northeast by Rani Gaidinliu, says PM Modi

उपस्थित सभी महानुभाव,

रानी मां की शताब्‍दी हम मनाने जा रहे हैं। मैं नतमस्‍तक हो करके रानी मां को आदर पूर्वक अंजलि देता हूं और रानी मां का जीवन हम सबको प्रेरणा देता रहे, देश की एकता, अखंडता बरकरार रखते हुए विकास की नई ऊंचाइयों को हम कैसे पार करते चलें - उन सपनों को जिन्‍होंने संजोया था उनमें एक रानी मां भी थीं।

ये हमारे देश का बड़ा दुर्भाग्‍य रहा कि आजादी के इतने सालों के बाद भी आजादी के अनेक वीर सेनानी हिन्‍दुस्‍तान के अनेक कोने में, वे अभी भी इतिहास के झरोखे से ओझल हैं। किसी भी जीवन समाज का ये दायित्‍व बनता है कि अपने महान पराक्रमों की, महान इतिहास की पूंजी को संजोए रखना चाहिए और पीढ़ी-दर-पीढ़ी उसका संक्रमण होता रहना चाहिए। गाथाएं जुड़ती जानी चाहिए। और तभी समाज के लिए जीने की, मरने की प्रेरणा मिलती है।



और कभी-कभार ये भी सोच रही है कि इतिहास राजघरानों के आस पास, शासकों के आस-पास ही चि‍त्रित होता रहता है। भारत एक अलग प्रकार की परम्‍परा से पला-बढ़ा देश है। यहां जन-सामान्‍य के पराक्रमों को अधिक महत्‍व दिया जाता है। इस देश की सोच कभी ये नहीं रही है कि ये देश राजाओं-महाराजाओं ने बनाया है, ये देश शासकों ने बनाया है। इस देश की मूलभूत सोच ये है कि यह देश सामान्‍य जनों ने बनाया है। उनके पुरूषार्थ से, उनके पराक्रम से, उनके पसीने की महक से ये देश पल्‍लवित हुआ है। और इसलिए जब तक हम इन शासकों के दायरे से बाहर नहीं आते, राजकर्ताओं के दायरे से बाहर नहीं आते, हमारा कैमरा वहां से बाहर नहीं हटता, तब तक हमें जन-सामान्‍य की शक्ति का एहसास नहीं होता है।

और जब रानी मां की शताब्‍दी मना रहे हैं तब, दिल्‍ली में भी कई लोग सवाल पूछते थे कि भई ये कौन है? क्‍या है? ये क्‍या कर रहे हो आप? दोष उनका नहीं है जो सवाल पूछते थे। दोष हमारी व्‍यवस्‍थाओं में जो विकृति आई है उसका है। और उसके कारण ऐसे अनगिनत महापुरूष जो हमें पल-पल प्रेरणा दे सकते हैं - या तो हम उन्‍हें भूल गए है या जान-बूझ करके उनको भूला दिया गया है। और किसी भी समाज को ये भूलना ऐसी बातों पर दुर्लक्ष करना शक्ति नहीं देता है, प्रेरणा नहीं देता है। मैं मानता हूं कि अगर पिछले 60 साल में रानी मां जैसे नार्थ इस्‍ट के अनेक महापुरूष है, रानी मां के अतिरिक्‍त भी अनेक महापुरूष है। नार्थ इस्‍ट की मैं बात हर रहा हूं। जिनका जीवन इतना प्रेरक रहा है। अगर पिछले 60 साल में हमारी सभी पीढि़यों को - दो पीढ़ी, तीन पीढ़ी, चार पीढ़ी जिसका भी हिसाब लगा लें - उनको अगर उनकी शिक्षा मिली होती, उनकी बातों को जानने का अवसर मिला होता तो मैं नहीं मानता हूं कि उस भूमि में कभी अलगाववाद का विचार भी पैदा हो सकता था। क्‍योंकि ये लोग थे जो देश की एकता के लिए जीते थे, मरते थे।

कोई कल्‍पना कर सकता है कि एक परम्‍परा और इस परम्‍परा के मुखिया जादोनांग - उनको भर जवानी में फांसी हो जाए क्‍योंकि वे आजादी का आवाज बने थे। और एक प्रकार से ऐसी स्थिति में पूरा संगठन बिखर सकता है। लोगों को लग सकता है कि भई इतनी छोटी आयु में ये तो फांसी पर चढ़ गए, अब हम क्‍या कर सकते है? मन में तीव्र इच्‍छा होन के बाद भी बिखराव संभव है। हम कल्‍पना करें कि रानी मां में वो कौन सा संगठन कौशल्‍य था कि उन्‍होंने 12-15 साल की उम्र के बीच में अपने गुरु जी की फांसी के बाद उस झंडे को झुकने नहीं दिया, संगठन को बिखरने नहीं दिया परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए अपने आप को झोंक दिया?

गुरु की इच्छा अनुसार, शिष्य जीवन लगा देते हैं। और उनके संवाद की भी चर्चा होती है। मैं मानता हूँ गुरु-शिष्य परम्परा का कोई इससे बड़ा उदाहरण नहीं हो सकता है, कि अपने गुरु फांसी के तख्ते पर चढ़ जाएँ और एक १३ साल की युवती उस झंडे को हाथ में ले, और शिष्या के नाते, गुरु के आदर्शों का पालन करने के लिए अपनी ज़िन्दगी खपा दे, ये बहुत कम होता है। जवानी के महत्‍त्‍वपूर्ण वर्ष जेल में गुजार दे। और ये व्‍यक्तित्‍व छोटा नहीं होगा कि पंडित नेहरू उनको मिलने के लिए जेल चले जाएं - ये असामान्‍य व्‍यक्तित्व होगा, तभी तो ये संभव हुआ होगा। जब सुभाष बाबू कांग्रेस के अध्‍यक्ष बने तब गुजरात के हरिपुरा कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार कांग्रेस के जीवन में... वरना जो सशस्त्र क्रांति में विश्‍वास रखते थे, उनके लिए एक वर्ग था कुछ बोलने का साहस नहीं करता था। लेकिन रानी मां एक अपवाद थी कि गुजरात के अंदर जब हरिपुरा कांग्रेस हुई सुभाष बाबू अध्‍यक्ष बने, रानी मां की मुक्ति के लिए वहां प्रस्‍ताव किया गया। ये अपने आप में कांग्रेस पार्टी का उस समय का एक बहुत बड़ा अहम निर्णय था।

लेकिन देश आजाद होने के बाद भी रानी मां को जेल से बाहर निकलने में तीन-चार महीने लग गए थे। आजादी के बाद भी तीन-चार महीने रानी मां जेल में थी। और इससे भी बड़ा दुर्भाग्‍य - इससे भी बड़ा दुर्भाग्‍य ये था कि आजादी के बाद रानी मां को राजनीतिक कारणों से... और हमारे यहां जो राजनीति में विकृतियां आई हैं, उन विकृतियों के दर्शन वहां होते है कि आजादी के बाद रानी मां को उनके गांव में प्रवेश नहीं दिया गया।

आजादी के.. हिन्‍दुस्‍तान में जो रानी मां आजादी के लिए अपने जीवन को खपाने के लिए तैयार थीं, जिसने कभी अंग्रेजों के सामने सर नहीं झुकाया था उस रानी मां को 10 साल तक अपने ही आजाद हिन्‍दुस्‍तान में भूगर्भ में रहना पड़ा था। और कारण? सांप्रदायिक असहिष्णुता थी। वे प्र‍कृति में पूजा करती थी, वो प्रकृति को परमात्‍मा मानती थी। और आज जो ग्‍लोबल वार्मिंग के कारण दुनिया संकट में है, उनको अगर रानी मां के उपदेश है, जो कि प्रकृति प्रेम के उपदेश है, वो अगर समझे, तो आज environment के जो issues हैं, उसका जवाब भी रानी मां की philosophy में मिलता है।



वे प्रकृति की पूजा का पुष्‍कार थीं। और उनकी सारी जो परम्‍परा थी उनका जो हरा का संप्रदाय रहा, वो प्रकृति पूजा का संप्रदाय रहा है। लेकिन उसको नकारने वालों ने उनका जीना दुष्‍कृत कर दिया था। और हिन्‍दुसतान में 10 साल तक उनको भू-गर्भ में जीवन बिताना पड़ा था। और बाद में जा करके स्थितियां थोड़ी संभली। वो अपने सेवा कार्य में जीवन खपाती रही थी। समय-समय पर मान-सम्‍मान के कारण कभी-कभार वो खबरों में आया करती थीं। लेकिन उन्‍होंने जीवन के अंत तक समाज सेवा का अपना मार्ग नहीं छोड़ा था।

प्रकृति पूजा विपरीत माहौल में भी उस मार्ग को बनाए रखना, लोगों को प्रेरित करते रहना। और संघर्ष का राह अपना करके नहीं, वो वीरांग्‍ना थीं, लेकिन समन्‍वय का मार्ग अपना करके उन्‍होंने आजादी के काल में पूरा जीवन समाज के उत्‍कर्ष के लिए लगाया था। और उस अर्थ में, मैं मानता हूं कि खास करके हमारे इन-इन इलाके - सिर्फ नार्थ-इस्‍ट नहीं हिन्‍दुस्‍तान के ऐसे कई कोने है - जहां के महापुरूषों को हम अगर हमारे प्रेरणा पुरूष के रूप में हमारे प्रेरक व्‍यक्तित्‍व के रूप में अगर प्रस्‍तुत करते रहते तो हमारी नई पीढि़यों का.. महात्‍मा गांधी को रानी मां सशस्‍त्र क्रांति के कारण जेल गई थीं। उनके गुरूदेव को फांसी हुई थी। लेकिन रानी मां खुद 1932-35 के कालखंड में महात्‍मा गांधी का गौरव गान पूरे नार्थ-ईस्‍ट में किया करती थी। एक प्रकार से महात्‍मा गांधी को पूरे नार्थ ईस्‍ट में परिचित कराने का बड़ा काम रानी मां ने किया था।

और वो हमेशा सपना देखती थी, वो कहती थी कि नागा कल्‍चर, नागा परंपरा ये सब बना रहना चाहिए। मुझे नागा होने का गर्व है। लेकिन ये सब देश की एकता और अखंडता के लिए होना चाहिए। ये रानी मां उस समय कहती थीं। वो संपूर्ण भारत की आजादी की बात करती थी। और वो उनकी भाषा में कहा करती थी कि गांधी एक दिन राजा बनेगा, महात्‍मा गांधी एक दिन राजा बनेगा। क्‍योंकि वो लोकतंत्र की परिभाषा जो उनके वहां थी, उसके हिसाब से, लेकिन मूल बात ये थी कि भारत स्‍वतंत्र होगा। और महात्‍मा गांधी उसका सुकांत समाज का नेतृत्‍व करेगें। ये सपने रानी मां लगातार बोलती रहती थीं। अपने लोगों को वो प्रशिक्षित करती रहती थीं।

जिन्‍होंने इस प्रकार का जीवन दिया, हम सबका दायित्‍व बनता है कि ऐसे हमारे जितने भी अज्ञात महापुरूष है... आज कभी हम अंडमान-निकोबार के सेल्‍युलर जेल में चले जाए, और वहां देश की आजादी पर मर-मिटने वालों की सूची देखें, तो पता तक नहीं चलता है कि इतिहास के किस कोने में होगा। वहां तो एक पत्‍थर पर उनके नाम छपे हुए हैं। लेकिन शायद देश के और कोने में, शायद जिस गांव में वो पैदा हुए होंगे, उन गांव के बच्‍चों को भी मालूम नहीं होगा कि हमारे गांव का कोई व्‍यक्ति था जो आज से 100 साल पहले अंडमान-निकोबार की जेल में जा करके, भारत मां की आजादी के लिए लड़ रहा होगा - पता नहीं होगा।

ये जो हमने बहुत बड़ा... हमारे समाज जीवन का घाटा रहा गया है, कमी रह गई है। इसको हम सबने पूरा करना है। हमारी यूनिवर्सिटीज़ Research scholars research करते है। क्‍यों न हमारी universities में हर batch में एक-दो, एक-दो students ऐसे भी हो, कि जो समाज के ऐसे लोगों पर research करें, Ph.D. करें? अगर नार्थ-ईस्‍ट के इन महानुभावों, सामाजिक क्रांति करने वाले, राष्‍ट्रीय क्रांति करने वाले, अगर इन पर हमारी universities research करें - और उस इलाके की नहीं दूसरे छोर की - साउथ से, पश्चिम से, उत्‍तर से, तो जा करके उनको लगेगा “अच्‍छा भई, ऐसे-ऐसे लोग यहां थे?”

ये integration के लिए भी बहुत बड़ा काम आता है। और मुझे विश्‍वास है कि आने वाले दिनों में जो बात मणिपुर के मुख्‍यमंत्री जी ने कही है, नागालैंड के मुख्‍यमंत्री जी ने कही है। उनकी भावना, उसको आदर करते हुए हम कैसे आगे बढ़ाएं हम इन चीजों को? ये पूरे देश का दायित्‍व बनता है। जिसको हमें पूरा करना चाहिए।

उसी प्रकार से आखीर रानी मां ने अपनी जिंदगी अपनी जेल में क्‍यों खपा दी? व्‍यक्तिगत तो कुछ पाने के लिए नहीं था। सपना यही था कि हमारा देश नई ऊँचाइयों को पार करे, प्रगति करे। और देश तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब कि पूर्वी भारत प्रगति नहीं करता, जब कि उत्‍तर-पूर्व प्रगति नहीं करता, जब तक ये हमारी अष्‍ट लक्ष्‍मी प्रगति नहीं करती है।

और इसलिए विकास की इस बात को लेकर के आपने देखा होगा इस सरकार ने infrastructure के लिए सबसे ज्‍यादा धन नार्थ-इस्‍ट के लिए लगाया है। क्‍योंकि एक बार infrastructure बन जाएगा तो वहां तो... मैं उस इलाके में रहा हूँ मुझे मालूम है क्‍या परमात्‍मा के आशीर्वाद हैं देश के अन्‍य भू-भाग को पता तक नहीं है कि क्‍या ईश्‍वर के अशीर्वाद इस भू-भाग पर है। थोड़ा सा Connectivity का मामला बन जाए, आप देखिए मैंने इन दिनों University के Students को कहा था कि जरा टूरिस्‍ट के नाते आप वहां जाने की आदत तो डालो।

पिछले साल गए काफी विद्यार्थी। वो हैरान हो गए वहां के जीवन को देख करके। वो आकर के लोगों को बताते रह गए कि अरे भई हमने वहां ये, देखा वो देखा। हमें लगातार जोड़ना है। जैसे अरूण जी ने कहा, बंग्‍लादेश सीमा विवाद का समाप्‍त होना उसका जो सबसे महत्‍त्‍वपूर्ण पहलू है, जो भारत के हित में है, वो ये है कि अब हमें हमारे नार्थ-इस्‍ट के साथ जुड़ने में जो कठिनाइयां थी, उस कठिनाइयों से मुक्ति मिल गयी है। एक प्रकार से Geographically, नार्थ-इस्‍ट हमारे बहुत निकट आ गया है। वरना वो इलाका था जो बंग्‍लादेश में होने के कारण, हमारी Connectivity नहीं थी, अब सरल हो गया है। जैसे ही Infrastructure बनेगा, इसका फायदा मिलने वाला है।

नार्थ-इस्‍ट के State Capitals को Railway से जोड़ने में बहुत तेजी से काम चल रहा है। नार्थ-इस्‍ट हिंदुस्‍तान का Organic Capital बन सके, इतना सामर्थ्‍य रखता है। आपने दुनिया भर के पाइनेपल टेस्‍ट किए होंगे कभी एक बार नार्थ-इस्‍ट जा करके वहां पाइनेपल का टेस्‍ट कीजिएगा, पता चलेगा कि परमात्‍मा ने क्‍या दिया है, क्‍या दिया है!

मैं एक बात का उल्‍लेख करता हूँ ....देखिए, हमारे जेलियांग जी कहते है कि आप सिर्फ पाइनेपल का उल्‍लेख क्‍यों करते हैं? हमारे मिर्ची का उल्‍लेख क्‍यों नहीं करते हैं? बहुत कम लोगों को मालूम होगा, सारी दुनिया में सबसे हॉट चिली कहीं की है तो वो नागालैंड की है। ये-ये विविधताओं भरा हुआ देश है। आर्थिक विकास में ये क्षेत्र बहुत बड़ी भूमिका अदा कर सकते हैं। ऐसा नहीं है कि हिंदुस्‍तान उनका विकास करेगा। उनका विकास, हिंदुस्‍तान के विकास का एक नया कारण बनेगा - ऐसा मैं देख रहा हूँ।

और इसलिए नार्थ-इस्‍ट के विकास को हम प्राथमिकता दे करके आगे बढ़ रहे हैं। नागालैंड, यहां पर आजादी के पहले से ही, अतिवाद, उग्रवाद, अलगाववाद - ये स्‍वर उसके साथ शस्‍त्र जुड़ गये। हर सरकारों ने कोई-न-काई प्रयास किया। कुछ, कभी सुधार आया, कभी फिर रूकावट आयी, सुधार आया, फिर रूकावट आयी - क्रम चलता रहा। हर किसी का अपना-अपना सहयोग रहा है। किसी एक सरकार को इसकी क्रेडिट न जाती है, और न लेनी चाहिए। हर किसी ने अच्‍छा करने में कोई न कोई योगदान किया है। और उसी का परिणाम है कि आज नागालैंड में उन लोगों के साथ सफल वार्ता हुई है। मुख्‍य धारा से जुड़ करके कंधे-से-कंधा मिला करके, न सिर्फ नागालैंड का विकास, न सिर्फ नार्थ-इस्‍ट का विकास - पूरे हिंदुस्‍तान के विकास का सपना सबने देखा है।

मुझे विश्‍वास है कि ये जो यात्रा प्रारंभ हुई है, साथ-साथ चलने की यात्रा प्रारंभ हुई है, वो उत्‍तम परिणाम दे करके रहेगी। और देश नई ऊँचाइयों को प्राप्‍त करेगा। आज रानी मां की स्‍मृति में, ये coin... यहां बैठे हुए लोगों को अंदाज नहीं होगा, नार्थ-इस्‍ट के घरों में इस coin का क्‍या सात्विक मूल्‍य होगा, जिसका हम अंदाज नहीं कर सकते हैं।

उनके लिए ये एक ऐसी पवित्र घटना के रूप में देखा जाएगा। इतना बड़ा ये प्रेरक व्‍यक्तित्‍व रहा है। सरकार के लिए खुशी की बात है कि हम इस महान विभुति की जीवन के साथ वर्तमान को जोड़ने में सफल हो रहे हैं, और भविष्‍य के निर्माण के लिए उन व्‍यक्तित्‍व से हमेशा-हमेशा हमें प्रेरणा मिलती रहेगी, ताकत मिलती रहेगी, इसी शुभभाव के साथ मैं फिर एक बार रानी मां के चरणों में वंदन करता हूँ। उनका आशीर्वाद बन रहे, और हम सब मिल करके रानी मां का “देश समृद्ध हो, देश एक हो, देश अखंड हो” - उन सपनों को पूरा करने के लिए कोई कमी न रहे, इसी एक कल्‍पना के साथ, बहुत-बहुत शुभ कामनाएं।

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ఉత్తర ప్రదేశ్‌లోని హర్దోయిలో గంగా ఎక్స్‌ప్రెస్‌వే ప్రారంభోత్సవం సందర్భంగా ప్రధానమంత్రి ప్రసంగం
April 29, 2026
This transformative infrastructure project will boost connectivity and drive progress across Uttar Pradesh: PM
Just as Maa Ganga has been the lifeline of UP and this country for thousands of years, similarly, in this era of modern progress, this expressway passing near her, will become the new lifeline of UP's development: PM
Recently, I had the opportunity to dedicate the Delhi-Dehradun Expressway to the nation.
I had then remarked that these emerging expressways are the lifelines shaping the destiny of a developing India, and these modern pathways are today heralding India's bright future: PM
Ganga Expressway will not only connect one end of UP to the other, it will also bring limitless possibilities of the NCR closer: PM

భారత్ మాతాకీ జై.
భారత్ మాతాకీ జై.

భారత్ మాతాకీ జై.

ఉత్తరప్రదేశ్ గవర్నర్ ఆనందీబెన్ పటేల్ గారు, ముఖ్యమంత్రి యోగి ఆదిత్యనాథ్ గారు, ఉప ముఖ్యమంత్రులు కేశవ్ ప్రసాద్ మౌర్య గారు, బ్రజేష్ పాఠక్ గారు, కేంద్ర మంత్రివర్గంలోని నా సహచరులు జితిన్ ప్రసాద గారు, పంకజ్ చౌదరి గారు, యూపీ ప్రభుత్వ మంత్రులు, పార్లమెంటు సభ్యులు, శాసనసభ్యులు, ఇతర ప్రజా ప్రతినిధులు, ఇక్కడికి భారీ సంఖ్యలో విచ్చేసిన నా ప్రియమైన సోదరసోదరీలారా!

ముందుగా నేను నరసింహ స్వామి వారి ఈ పుణ్య భూమికి శిరస్సు వంచి ప్రణామం చేస్తున్నాను. ఇక్కడికి కొద్ది కిలోమీటర్ల దూరంలోనే గంగా మాత అనుగ్రహం ప్రవహిస్తోంది. అందుకే ఈ ప్రాంతమంతా ఒక పుణ్యక్షేత్రం కంటే తక్కువేమీ కాదు. ఉత్తరప్రదేశ్‌కు దక్కిన ఈ ‘గంగా ఎక్స్‌ప్రెస్‌వే’ వరం కూడా ఆ గంగా మాత ఆశీర్వాదమేనని నేను నమ్ముతున్నాను. ఇప్పుడు మీరు కేవలం కొన్ని గంటల్లోనే సంగమానికి చేరుకోవచ్చు. అలాగే కాశీలో బాబా విశ్వనాథుని దర్శించుకుని తిరిగి రావచ్చు.

 

మిత్రులారా,

వేలాది ఏళ్లుగా ఉత్తరప్రదేశ్‌కు, ఈ దేశానికి గంగా మాత ఎలాగైతే జీవనాధారంగా నిలిచిందో... అలాగే ఆధునిక ప్రగతి పథంలో, ఆమెకు సమీపంగా వెళ్లే ఈ ఎక్స్‌ప్రెస్‌వే కూడా యూపీ అభివృద్ధికి కొత్త జీవనాడిగా కాబోతోంది. గత నాలుగు, అయిదు రోజులుగా నేను గంగా మాత సాన్నిధ్యంలోనే ఉండటం ఒక అద్భుతమైన యాదృచ్ఛికం. ఏప్రిల్ 24న నేను బెంగాల్‌లో ఉన్నప్పుడు గంగా మాతను దర్శించుకున్నాను. నిన్న నేను కాశీలో ఉన్నాను. ఈ రోజు ఉదయమే మళ్ళీ నాకు బాబా విశ్వనాథుడు, అన్నపూర్ణ మాత, గంగా మాతల దర్శనం చేసుకునే భాగ్యం కలిగింది. ఇప్పుడు గంగా మాత పేరు మీద నిర్మించిన ఈ ఎక్స్‌ప్రెస్‌వేను ప్రారంభించే అవకాశం లభించింది. ఉత్తర ప్రదేశ్ ప్రభుత్వం ఈ ఎక్స్‌ప్రెస్‌వేకు గంగా మాత పేరు పెట్టడం నాకు చాలా సంతోషంగా ఉంది. ఇందులో అభివృద్ధిపై మా దార్శనికత, మన వారసత్వానికి గౌరవం కూడా కనిపిస్తుంది. ఈ గంగా ఎక్స్‌ప్రెస్‌వే సందర్భంగా ఉత్తరప్రదేశ్‌లోని కోట్లాది మంది ప్రజలకు అభినందనలు తెలియజేస్తున్నాను.

మిత్రులారా,

నేడు ప్రజాస్వామ్య పండుగలో ఒక ముఖ్యమైన రోజు. బెంగాల్‌లో ప్రస్తుతం రెండో దశ పోలింగ్ జరుగుతోంది. ప్రస్తుత సమాచారం ప్రకారం... బెంగాల్‌లో భారీ స్థాయిలో పోలింగ్ నమోదవుతోంది. మొదటి దశలో మాదిరిగానే ప్రజలు తమ ఇళ్ల నుంచి పెద్ద సంఖ్యలో బయటకు వచ్చి ఓటు వేస్తున్నారు. పోలింగ్ కేంద్రాల వద్ద బారులు తీరిన లైన్లకు సంబంధించిన చిత్రాలు సోషల్ మీడియాలో కనిపిస్తున్నాయి. గత 6,7 దశాబ్దాల్లో ఎన్నడూ జరగని రీతిలో, కనీసం ఊహించడానికి కూడా కష్టంగా అనిపించిన విధంగా ఈసారి బెంగాల్‌లో పోలింగ్ అత్యంత నిర్భయ వాతావరణంలో జరుగుతోంది. ప్రజలు ఎటువంటి భయం లేకుండా స్వేచ్ఛగా ఓటు వేస్తున్నారు. ఇది దేశ రాజ్యాంగానికి, బలపడుతున్న దేశ ప్రజాస్వామ్యానికి ఒక పవిత్రమైన సంకేతం. తమ హక్కుల పట్ల ఇంతటి చైతన్యాన్ని కలిగి, పెద్ద సంఖ్యలో ఓటు వేస్తున్న బెంగాల్ ప్రజలకు నేను కృతజ్ఞతలు తెలియజేస్తున్నాను. పోలింగ్ ముగియడానికి ఇంకా చాలా గంటల సమయం ఉంది. బెంగాల్ ప్రజలు ఇదే ఉత్సాహంతో ఈ ప్రజాస్వామ్య పండుగలో పాల్గొనాలని విజ్ఞప్తి చేస్తున్నాను.

మిత్రులారా,
కొంతకాలం కిందట బిహార్‌లో ఎన్నికలు జరిగినప్పుడు బీజేపీ-ఎన్‌డీఏ భారీ విజయాన్ని నమోదు చేసి చరిత్ర సృష్టించింది. నిన్ననే గుజరాత్‌లోని మున్సిపల్ కార్పొరేషన్లు, మున్సిపాలిటీలు, జిల్లా పంచాయతీలు, నగర పంచాయతీలు, తహసీల్ పంచాయతీల ఎన్నికల ఫలితాలు వచ్చాయి. ఉత్తరప్రదేశ్ ప్రజలైన మీరు సంతోషించే విషయం ఏమిటంటే... అక్కడ 80 నుండి 85 శాతం మున్సిపాలిటీలు, పంచాయతీలను బీజేపీ కైవసం చేసుకుంది. ఇప్పుడు జరుగుతున్న ఈ అయిదు రాష్ట్రాల ఎన్నికల్లో కూడా బీజేపీ చారిత్రాత్మక హ్యాట్రిక్ విజయం సాధించబోతోందని నేను నమ్ముతున్నాను. మే 4న వెలువడే ఫలితాలు వికసిత్ భారత్ సంకల్పాన్ని మరింత బలోపేతం చేస్తాయి. దేశ అభివృద్ధి వేగానికి సరికొత్త శక్తినిస్తాయి.

 

మిత్రులారా,

దేశం వేగంగా అభివృద్ధి చెందాలంటే మనం ఆధునిక మౌలిక సదుపాయాలను కూడా అంతే వేగంగా నిర్మించుకోవాలి. డిసెంబర్ 2021లో నేను గంగా ఎక్స్‌ప్రెస్‌వేకు శంకుస్థాపన చేయడానికి షాజహాన్‌పూర్‌కు వచ్చాను. కనీసం 5 ఏళ్లు కూడా గడవకముందే దేశంలోని అతిపెద్ద ఎక్స్‌ప్రెస్‌వేలలో ఒకటిగా, రాష్ట్రంలోనే అత్యంత పొడవైన గ్రీన్ కారిడార్ ఎక్స్‌ప్రెస్‌వేగా ఇది 5 ఏళ్లలోపే పూర్తయింది. ఈ రోజు హర్దోయి నుంచి దీని ప్రారంభోత్సవం కూడా జరుగుతోంది. గంగా ఎక్స్‌ప్రెస్‌వే నిర్మాణం పూర్తి కావడమే కాకుండా, దాని విస్తరణ ప్రణాళిక పనులు కూడా ప్రారంభమయ్యాయి. త్వరలోనే గంగా ఎక్స్‌ప్రెస్‌వే మీరట్ దాటి హరిద్వార్ వరకు చేరుకుంటుంది. దీనిని మరింత మెరుగ్గా ఉపయోగించుకోవడానికి, ఫరూఖాబాద్ లింక్ ఎక్స్‌ప్రెస్‌వే నిర్మించి ఇతర ఎక్స్‌ప్రెస్‌వేలతో అనుసంధానం చేస్తారు. ఇదే డబుల్ ఇంజిన్ ప్రభుత్వ దార్శనికత. ఇదే బీజేపీ ప్రభుత్వ పనితీరులోని వేగం. ఇదే బీజేపీ ప్రభుత్వం పనిచేసే విధానం.

సోదరసోదరీలారా,

కేవలం కొన్ని రోజుల క్రితమే నాకు ఢిల్లీ-డెహ్రాడూన్ ఎక్స్‌ప్రెస్‌వేను ప్రారంభించే అవకాశం లభించింది. అప్పుడే నేను ఒక మాట చెప్పాను. ఈ కొత్తగా నిర్మిస్తున్న ఎక్స్‌ప్రెస్‌వేలు అభివృద్ధి చెందిన భారత్‌కు విజయరేఖలని, ఈ ఆధునిక రేఖలే నేడు దేశ ఉజ్వల భవిష్యత్తును చాటిచెబుతున్నాయని అన్నాను.

మిత్రులారా,

ఒక రహదారి కోసం దశాబ్దాల తరబడి వేచి చూడాల్సిన ఆ రోజులు ఇప్పుడు పోయాయి. ఒకప్పుడు ప్రకటన వెలువడితే ఫైళ్లు కదలడానికే ఏళ్లు పట్టేది. ఎన్నికల కోసం శంకుస్థాపన రాళ్లు వేసేవారు. ఆ తర్వాత ప్రభుత్వాలు వచ్చేవి, పోయేవి కానీ పనుల ప్రారంభం మాత్రం ఉండేది కాదు. కొన్నిసార్లు పాత ఫైళ్లను వెతకడానికే పెద్ద పెద్ద అధికారులకు కూడా రెండేళ్ల పాటు కష్టపడాల్సి వచ్చేది. కానీ ఈ డబుల్ ఇంజిన్ ప్రభుత్వంలో శంకుస్థాపనలు జరుగుతున్నాయి. అలాగే నిర్ణీత సమయంలోనే ప్రారంభోత్సవాలు కూడా జరుగుతున్నాయి. అందుకే ఈ రోజు ఉత్తర ప్రదేశ్ ఎక్స్‌ప్రెస్‌వేల వేగం కంటే ఎక్కువ వేగం అయినది ఏదైనా ఉందంటే, అది యూపీ అభివృద్ధి వేగమే.

 

మిత్రులారా,

ఈ ఎక్స్‌ప్రెస్‌వే కేవలం ఒక అధిక వేగంతో కూడిన రోడ్డు మాత్రమే కాదు. సరికొత్త అవకాశాలకు, కొత్త కలలకు, కొత్త మార్గాలకు ముఖద్వారం. గంగా ఎక్స్‌ప్రెస్‌వే సుమారు 600 కిలోమీటర్ల పొడవు ఉంటుంది. పశ్చిమ యూపీలోని మీరట్, బులంద్‌షహర్, హాపూర్, అమ్రోహా, సంభాల్, బదౌన్; మధ్య యూపీలోని షాజహాన్‌పూర్, హర్దోయి, ఉన్నావ్, రాయ్‌బరేలీ; తూర్పు యూపీలోని ప్రతాప్‌గఢ్, ప్రయాగ్‌రాజ్ వంటి ప్రాంతాలతో పాటు ఇతర సమీప జిల్లాల్లోని కోట్ల మంది ప్రజల జీవితాలను ఈ గంగా ఎక్స్‌ప్రెస్‌వే మార్చబోతుంది.

మిత్రులారా,

ఈ ప్రాంతాలు గంగా నది, దాని ఉపనదుల వల్ల సారవంతమైన నేలలతో ఆశీర్వాదం పొందాయి. కానీ గత ప్రభుత్వాలు రైతులను నిర్లక్ష్యం చేయడం వల్ల, ఇక్కడి రైతులు కష్టాల్లో కూరుకుపోయారు. ఇక్కడి రైతుల పంటలు పెద్ద మార్కెట్లకు చేరుకోలేకపోయేవి. శీతలీకరణ గిడ్డంగుల కొరత ఉండేది. రవాణా సదుపాయాలు లేవు. రైతులు పడే కష్టానికి సరైన ధర దక్కేది కాదు. ఇప్పుడు ఆ కష్టాలన్నింటికీ పరిష్కారాలు వేగంగా దొరుకుతాయి. గంగా ఎక్స్‌ప్రెస్‌వే ద్వారా తక్కువ సమయంలోనే పెద్ద మార్కెట్లకు చేరుకోవచ్చు. వ్యవసాయానికి అవసరమైన మౌలిక సదుపాయాలు ఇక్కడ అభివృద్ధి చెందుతాయి. దీనివల్ల మన రైతుల ఆదాయం పెరుగుతుంది.

మిత్రులారా,

గంగా ఎక్స్‌ప్రెస్‌వే ఉత్తరప్రదేశ్‌లోని ఒక చివరను మరో చివరతో కలపడమే కాకుండా, ఎన్‌సీఆర్ ప్రాంతంలోని అపారమైన అవకాశాలను కూడా మనకు దగ్గర చేస్తుంది. గంగా ఎక్స్‌ప్రెస్‌వేపై వాహనాలు పరుగులు తీయడమే కాకుండా, దానికి ఇరువైపులా కొత్త పారిశ్రామిక అవకాశాలు అభివృద్ధి చెందుతాయి. దీనికోసం హర్దోయి వంటి జిల్లాల్లో పారిశ్రామిక కారిడార్లను అభివృద్ధి చేస్తున్నాం. దీని ద్వారా హర్దోయి, షాజహాన్‌పూర్, ఉన్నావ్ సహా మొత్తం 12 జిల్లాల్లో కొత్త పరిశ్రమలు రాబోతున్నాయి. ఔషధం, టెక్స్‌టైల్ వంటి వివిధ రంగాలకు చెందిన క్లస్టర్లు ఇక్కడ అభివృద్ధి చెందడం ద్వారా మన యువతకు కొత్త ఉపాధి అవకాశాలు కూడా లభిస్తాయి.

 

మిత్రులారా,

ముద్రా యోజన,  ఓడీఓపీ వంటి పథకాల అండతో మన యువత సరికొత్త రికార్డులు సృష్టిస్తున్నారు. ఇక్కడ చిన్న పరిశ్రమలను, ఎంఎస్ఎంఈలను ప్రోత్సహిస్తున్నారు. మెరుగైన రవాణ సౌకర్యాలతో వారికి కొత్త మార్గాలు కూడా తెరుచుకుంటాయి. మీరట్ క్రీడా పరిశ్రమ, సంభాల్ హస్తకళలు, బులంద్‌షహర్ సిరామిక్స్, హర్దోయి చేనేత, ఉన్నావ్ తోలు, ప్రతాప్‌గఢ్ ఉసిరి ఉత్పత్తులన్నీ దేశ, ప్రపంచ మార్కెట్లకు పెద్ద ఎత్తున చేరుతాయి. దీని వల్ల లక్షలాది కుటుంబాల ఆదాయం పెరుగుతుంది. గతంలో సమాజ్‌వాదీ పార్టీ ప్రభుత్వంలో హర్దోయి, ఉన్నావ్ వంటి జిల్లాల్లో పారిశ్రామిక కారిడార్లు నిర్మిస్తారని ఎవరైనా ఊహించగలిగారా? మన హర్దోయి గుండా ఒక ఎక్స్‌ప్రెస్‌వే వెళ్తుందని ఎవరైనా ఎప్పుడైనా అనుకున్నారా? ఈ పని బీజేపీ ప్రభుత్వంలో మాత్రమే సాధ్యం.

మిత్రులారా,

గతంలో ఉత్తరప్రదేశ్‌ను వెనుకబడిన, ‘బీమారు’ రాష్ట్రంగా పిలిచేవారు. అదే ఉత్తరప్రదేశ్ నేడు 1 ట్రిలియన్ డాలర్ల ఆర్థిక వ్యవస్థగా ఎదగడానికి ముందుకు సాగుతోంది. ఇది చాలా పెద్ద లక్ష్యం, కానీ దీని వెనుక అంతే పెద్ద సన్నద్ధత ఉంది. ఎందుకంటే యూపీకి అపారమైన సామర్థ్యం ఉంది. దేశంలోనే అతిపెద్ద యువ జనాభా శక్తి యూపీ సొంతం. యూపీని తయారీ కేంద్రంగా మార్చడానికి మేం ఈ శక్తిని ఉపయోగిస్తున్నాం.  రాష్ట్రానికి భారీ పెట్టుబడులు వచ్చినప్పుడు మాత్రమే కొత్త పరిశ్రమలు, కర్మాగారాలు స్థాపితమవుతాయి. అప్పుడే ఆర్థిక పురోగతికి ద్వారాలు తెరుచుకుంటాయి, దేశ యువతకు ఉపాధి అవకాశాలు లభిస్తాయి.

సోదరసోదరీలారా,

ఈ దార్శనికతను కేంద్రంగా చేసుకొని.. గత కొన్ని సంవ్సరాలుగా నిరంతరం పనులు జరుగుతున్నాయి. దీనిని మీరే స్వయంగా గమనిస్తున్నారు. గతంలో వలసలకు నిలయంగా ప్రసిద్ధి చెందిన యూపీ... నేడు పెట్టుబడిదారుల సదస్సులు, పారిశ్రామిక కారిడార్లకు పేరుగాంచింది. యూపీ పెట్టుబడిదారుల సదస్సుకు దేశ విదేశాల నుంచి దిగ్గజ కంపెనీలు వస్తున్నాయి. రాష్ట్రానికి వేల కోట్ల రూపాయల పెట్టుబడులు వస్తున్నాయి. ఈ రోజు మొబైల్ తయారీలో భారత్ ప్రపంచంలోనే రెండో అతిపెద్ద దేశంగా ఉందంటే, అందులో యూపీ సహకారం ఎంతో ఉంది. దేశంలో తయారవుతున్న మొబైల్ ఫోన్లలో సగం మన యూపీలోనే తయారవుతున్నాయి. కేవలం కొన్ని వారాల క్రితమే నేను నోయిడాలో ఒక సెమీకండక్టర్ కేంద్రానికి శంకుస్థాపన చేశాను.

 

మిత్రులారా,

ఈ కృత్రిమ మేధ యుగంలో సెమీకండక్టర్లు ఎంతటి కీలక రంగంగా మారుతున్నాయో మీ అందరికీ తెలుసు. ఆ రంగంలో కూడా నాయకత్వం వహించడానికి యూపీ ముందుకు సాగుతోంది. భవిష్యత్తులో యూపీ ప్రజలకు అపారమైన అవకాశాలు ఉన్న ఒక అతిపెద్ద రంగం తెరుచుకోబోతోంది.

మిత్రులారా,

ఉత్తరప్రదేశ్ పారిశ్రామిక అభివృద్ధి నేడు దేశ వ్యూహాత్మక శక్తిగా మారుతోంది. దేశంలోని రెండు రక్షణ కారిడార్లలో ఒకటి నేడు యూపీలోనే ఉంది. పెద్ద పెద్ద రక్షణ రంగ కంపెనీలు ఇక్కడ తమ కర్మాగారాలను ఏర్పాటు చేస్తున్నాయి. ప్రపంచమే గుర్తించిన బ్రహ్మోస్ క్షిపణులు రాష్ట్రంలోనే తయారవుతున్నాయి. రక్షణ పరికరాల తయారీకి అవసరమైన చిన్న చిన్న విడిభాగాలను ఇక్కడి ఎంఎస్ఎంఈలు సరఫరా చేస్తున్నాయి. దీనివల్ల ఉత్తరప్రదేశ్‌లోని సూక్ష్మ, చిన్న తరహా పరిశ్రమల రంగానికి ఎంతో మేలు జరుగుతోంది. ఇప్పుడు చిన్న జిల్లాల్లో ఉండే యువత కూడా పెద్ద పెద్ద పరిశ్రమలతో మమేకం కావాలనే కలలు కనగలుగుతున్నారు.

మిత్రులారా,

పాత రాజకీయాలను వదిలేసి ఒక కొత్త గుర్తింపును సృష్టించుకోవడం వల్లే నేడు ఉత్తరప్రదేశ్ ఇంత వేగంగా అభివృద్ధి చెందుతోంది. ఒకప్పుడు యూపీ అంటే గుంతల రోడ్లకు నిలయమనేవారు. నేడు అదే యూపీ దేశంలోనే అత్యధిక ఎక్స్‌ప్రెస్‌వేలు కలిగిన రాష్ట్రంగా అవతరించింది. గతంలో పొరుగు జిల్లాలకు వెళ్లడం కూడా చాలా కష్టంగా ఉండేది. కానీ నేడు ఉత్తరప్రదేశ్‌లో 21 విమానాశ్రయాలు, 5 అంతర్జాతీయ విమానాశ్రయాలు ఉన్నాయి. ఇప్పుడు నోయిడా అంతర్జాతీయ విమానాశ్రయం ప్రారంభోత్సవం కూడా జరిగింది. గంగా ఎక్స్‌ప్రెస్‌వే ద్వారా నోయిడా అంతర్జాతీయ విమానాశ్రయానికి కేవలం కొన్ని గంటల్లోనే చేరుకోవచ్చు.

 

సోదరసోదరీలారా

మన ఉత్తర ప్రదేశ్ శ్రీరాముడి,  శ్రీకృష్ణుల జన్మభూమి. కానీ గత ప్రభుత్వాల దర్భర పరిపాలన కారణంగా నేరాలు, అరాచక పాలనను గుర్తింపుగా యూపీ మారింది.  ఒకప్పుడు రాష్ట్ర మాఫియాలపై సినిమాలు తీసేవారు. కానీ ఇప్పుడు యూపీ శాంతిభద్రతలు దేశవ్యాప్తంగా ఒక ఉదాహరణగా నిలుస్తున్నాయి.

సోదరసోదరీలారా,

అధికారాన్ని అడ్డం పెట్టుకుని వనరులను పంచుకున్న సమాజ్‌వాదీ పార్టీ సభ్యులకు యూపీ సాధిస్తున్న ఈ ప్రగతి అస్సలు నచ్చడం లేదు. వారు రాష్ట్రాన్ని మళ్లీ పాత కాలంలోకి నెట్టాలని చూస్తున్నారు.  సమాజాన్ని మరోసారి విభజించి, ముక్కలు చేయాలని కోరుకుంటున్నారు.

మిత్రులారా,

సమాజ్‌వాదీ పార్టీ అభివృద్ధికి వ్యతిరేకి మాత్రమే కాదు, మహిళా వ్యతిరేకి కూడా. ఇటీవలే దేశం మరోసారి ఎస్పీ, కాంగ్రెస్ వంటి పార్టీల అసలు స్వరూపాన్ని చూసింది. కేంద్రంలోని ఎన్డీయే ప్రభుత్వం పార్లమెంటులో నారీ శక్తి వందన్ సవరణ బిల్లును తీసుకువచ్చింది. ఈ సవరణ గనుక పాస్ అయ్యి ఉంటే 2029 ఎన్నికల నుంచే శాసనసభలు, లోక్‌సభలో మహిళలకు రిజర్వేషన్లు లభించేవి. ఏ ఇతర కేటగిరీ సీట్లను తగ్గించకుండానే మన తల్లులు, సోదరీలు పెద్ద సంఖ్యలో ఎంపీలు, ఎమ్మెల్యేలుగా ఎన్నికై ఢిల్లీ, లక్నోలకు చేరుకునేవారు. కానీ సమాజ్‌వాదీ పార్టీ ఈ సవరణ బిల్లుకు వ్యతిరేకంగా ఓటు వేసింది.

మిత్రులారా,

ఈ బిల్లు ద్వారా అన్ని రాష్ట్రాల్లోనూ సీట్ల సంఖ్య పెరిగేది. అన్ని రాష్ట్రాల్లోనూ ఒకే నిష్పత్తిలో సీట్లు పెరుగుతాయని మేం పార్లమెంటులో స్పష్టంగా చెప్పాం. కానీ ఉత్తరప్రదేశ్‌ను తిడుతూ రాజకీయం చేసే డీఎంకే వంటి పార్టీలు, యూపీలో సీట్లు ఎందుకు పెరగాలని అభ్యంతరం వ్యక్తం చేశాయి. సమాజ్‌వాదీ పార్టీ కూడా పార్లమెంటులో అదే పాట పాడింది. ఈ ఎస్పీ నాయకులు ఇక్కడ మీ ఓట్లు వేయించుకుంటారు, కానీ పార్లమెంటులో మాత్రం యూపీ ప్రజలను దూషించే వారి పక్కన నిలబడతారు. అందుకే సమాజ్‌వాదీ పార్టీ ఎప్పటికీ మారదని రాష్ట్ర ప్రజలు అంటుంటారు. వీరు ఎప్పుడూ మహిళా వ్యతిరేక రాజకీయాలే చేస్తారు. ఎప్పుడూ బుజ్జగింపు విధానాలకు, నేరస్థులకు అండగా నిలుస్తారు. ఎస్పీ ఎన్నటికీ కుటుంబ రాజకీయాలు, కుల రాజకీయాలకు అతీతంగా ఎదగలేదు. వీరు ఎల్లప్పుడూ అభివృద్ధి వ్యతిరేక రాజకీయాలే చేస్తారు. యూపీ ప్రజలు ఎస్పీ, దాని మిత్రపక్షాల పట్ల చాలా అప్రమత్తంగా ఉండాలి.

 

మిత్రులారా,

అభివృద్ధి చెందిన భారత్ అనే సంకల్పంతో నేడు దేశం ముందుకు సాగుతోంది. ఈ సంకల్పాన్ని నెరవేర్చడంలో ఉత్తరప్రదేశ్ పాత్ర చాలా కీలకం. నేడు ప్రపంచమంతా యుద్ధాలు, అశాంతి, అస్థిరతలో చిక్కుకుపోయి ఉంది. ప్రపంచంలోని పెద్ద దేశాల్లో కూడా పరిస్థితులు దారుణంగా ఉన్నాయి. కానీ భారత్ మాత్రం అదే వేగంతో అభివృద్ధి పథంలో ముందుకు సాగుతోంది. బయట ఉన్న శత్రువులకు ఇది అస్సలు నచ్చడం లేదు. మన దేశంలో ఉంటూనే అధికారం కోసం ఆశపడే కొందరు వ్యక్తులు కూడా దేశాన్ని తక్కువ చేసి చూపించడానికి ప్రయత్నిస్తున్నారు. అయినప్పటికీ మనం సురక్షితంగా ఉండటమే కాకుండా, అభివృద్ధిలో సరికొత్త రికార్డులను సృష్టిస్తున్నాం. ఆత్మనిర్భర్ భారత్ ఉద్యమాన్ని ముందుకు తీసుకెళ్తున్నాం. అత్యంత ఆధునిక మౌలిక సదుపాయాలను నిర్మిస్తున్నాం. గంగా ఎక్స్‌ప్రెస్‌వే ఈ దిశలో వేసిన మరో బలమైన అడుగు. గంగా ఎక్స్‌ప్రెస్‌వే మన ముంగిటకు తెచ్చే అవకాశాలను యూపీ ప్రజలు తమ కష్టంతో, ప్రతిభతో నిజం చేసుకుంటారని నేను నమ్ముతున్నాను. ఈ సంకల్పంతో మీ అందరికీ మరోసారి అనేక అభినందనలు తెలియజేస్తున్నాను. చాలా ధన్యవాదాలు.

భారత్ మాతాకీ జై.

భారత్ మాతాకీ జై.

వందేమాతరం, వందేమాతరం, వందేమాతరం, వందేమాతరం, వందేమాతరం

అందరికీ ధన్యవాదాలు...!