प्रधानमंत्री मोदी ने रानी गाईदिन्ल्यू के जन्म शताब्दी समारोह के उद्घाटन कार्यक्रम में भाग लिया
हम रानी मां की जन्म शताब्दी मना रहे हैं। मैं रानी गाईदिन्ल्यू के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके योगदान को याद करता हूँ: प्रधानमंत्री
रानी मां का जीवन हमारे लिए प्रेरणास्त्रोत है। उन्होंने राष्ट्र की एकता बनाए रखते हुए विकास की नई ऊंचाइयां प्राप्त करने का रास्ता दिखाया: पीएम
भारत को यहाँ के राजाओं या शासकों ने नहीं बल्कि यहाँ के लोगों ने इस देश को बनाया है: नरेन्द्र मोदी
रानी मां ने प्रकृति की आराधना की और उसकी सेवा में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया: प्रधानमंत्री
रानी गाईदिन्ल्यू ने महात्मा गांधी के विचारों को पूर्वोत्तर राज्यों में फैलाया: प्रधानमंत्री मोदी

उपस्थित सभी महानुभाव,

रानी मां की शताब्‍दी हम मनाने जा रहे हैं। मैं नतमस्‍तक हो करके रानी मां को आदर पूर्वक अंजलि देता हूं और रानी मां का जीवन हम सबको प्रेरणा देता रहे, देश की एकता, अखंडता बरकरार रखते हुए विकास की नई ऊंचाइयों को हम कैसे पार करते चलें - उन सपनों को जिन्‍होंने संजोया था उनमें एक रानी मां भी थीं।

ये हमारे देश का बड़ा दुर्भाग्‍य रहा कि आजादी के इतने सालों के बाद भी आजादी के अनेक वीर सेनानी हिन्‍दुस्‍तान के अनेक कोने में, वे अभी भी इतिहास के झरोखे से ओझल हैं। किसी भी जीवन समाज का ये दायित्‍व बनता है कि अपने महान पराक्रमों की, महान इतिहास की पूंजी को संजोए रखना चाहिए और पीढ़ी-दर-पीढ़ी उसका संक्रमण होता रहना चाहिए। गाथाएं जुड़ती जानी चाहिए। और तभी समाज के लिए जीने की, मरने की प्रेरणा मिलती है।



और कभी-कभार ये भी सोच रही है कि इतिहास राजघरानों के आस पास, शासकों के आस-पास ही चि‍त्रित होता रहता है। भारत एक अलग प्रकार की परम्‍परा से पला-बढ़ा देश है। यहां जन-सामान्‍य के पराक्रमों को अधिक महत्‍व दिया जाता है। इस देश की सोच कभी ये नहीं रही है कि ये देश राजाओं-महाराजाओं ने बनाया है, ये देश शासकों ने बनाया है। इस देश की मूलभूत सोच ये है कि यह देश सामान्‍य जनों ने बनाया है। उनके पुरूषार्थ से, उनके पराक्रम से, उनके पसीने की महक से ये देश पल्‍लवित हुआ है। और इसलिए जब तक हम इन शासकों के दायरे से बाहर नहीं आते, राजकर्ताओं के दायरे से बाहर नहीं आते, हमारा कैमरा वहां से बाहर नहीं हटता, तब तक हमें जन-सामान्‍य की शक्ति का एहसास नहीं होता है।

और जब रानी मां की शताब्‍दी मना रहे हैं तब, दिल्‍ली में भी कई लोग सवाल पूछते थे कि भई ये कौन है? क्‍या है? ये क्‍या कर रहे हो आप? दोष उनका नहीं है जो सवाल पूछते थे। दोष हमारी व्‍यवस्‍थाओं में जो विकृति आई है उसका है। और उसके कारण ऐसे अनगिनत महापुरूष जो हमें पल-पल प्रेरणा दे सकते हैं - या तो हम उन्‍हें भूल गए है या जान-बूझ करके उनको भूला दिया गया है। और किसी भी समाज को ये भूलना ऐसी बातों पर दुर्लक्ष करना शक्ति नहीं देता है, प्रेरणा नहीं देता है। मैं मानता हूं कि अगर पिछले 60 साल में रानी मां जैसे नार्थ इस्‍ट के अनेक महापुरूष है, रानी मां के अतिरिक्‍त भी अनेक महापुरूष है। नार्थ इस्‍ट की मैं बात हर रहा हूं। जिनका जीवन इतना प्रेरक रहा है। अगर पिछले 60 साल में हमारी सभी पीढि़यों को - दो पीढ़ी, तीन पीढ़ी, चार पीढ़ी जिसका भी हिसाब लगा लें - उनको अगर उनकी शिक्षा मिली होती, उनकी बातों को जानने का अवसर मिला होता तो मैं नहीं मानता हूं कि उस भूमि में कभी अलगाववाद का विचार भी पैदा हो सकता था। क्‍योंकि ये लोग थे जो देश की एकता के लिए जीते थे, मरते थे।

कोई कल्‍पना कर सकता है कि एक परम्‍परा और इस परम्‍परा के मुखिया जादोनांग - उनको भर जवानी में फांसी हो जाए क्‍योंकि वे आजादी का आवाज बने थे। और एक प्रकार से ऐसी स्थिति में पूरा संगठन बिखर सकता है। लोगों को लग सकता है कि भई इतनी छोटी आयु में ये तो फांसी पर चढ़ गए, अब हम क्‍या कर सकते है? मन में तीव्र इच्‍छा होन के बाद भी बिखराव संभव है। हम कल्‍पना करें कि रानी मां में वो कौन सा संगठन कौशल्‍य था कि उन्‍होंने 12-15 साल की उम्र के बीच में अपने गुरु जी की फांसी के बाद उस झंडे को झुकने नहीं दिया, संगठन को बिखरने नहीं दिया परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए अपने आप को झोंक दिया?

गुरु की इच्छा अनुसार, शिष्य जीवन लगा देते हैं। और उनके संवाद की भी चर्चा होती है। मैं मानता हूँ गुरु-शिष्य परम्परा का कोई इससे बड़ा उदाहरण नहीं हो सकता है, कि अपने गुरु फांसी के तख्ते पर चढ़ जाएँ और एक १३ साल की युवती उस झंडे को हाथ में ले, और शिष्या के नाते, गुरु के आदर्शों का पालन करने के लिए अपनी ज़िन्दगी खपा दे, ये बहुत कम होता है। जवानी के महत्‍त्‍वपूर्ण वर्ष जेल में गुजार दे। और ये व्‍यक्तित्‍व छोटा नहीं होगा कि पंडित नेहरू उनको मिलने के लिए जेल चले जाएं - ये असामान्‍य व्‍यक्तित्व होगा, तभी तो ये संभव हुआ होगा। जब सुभाष बाबू कांग्रेस के अध्‍यक्ष बने तब गुजरात के हरिपुरा कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार कांग्रेस के जीवन में... वरना जो सशस्त्र क्रांति में विश्‍वास रखते थे, उनके लिए एक वर्ग था कुछ बोलने का साहस नहीं करता था। लेकिन रानी मां एक अपवाद थी कि गुजरात के अंदर जब हरिपुरा कांग्रेस हुई सुभाष बाबू अध्‍यक्ष बने, रानी मां की मुक्ति के लिए वहां प्रस्‍ताव किया गया। ये अपने आप में कांग्रेस पार्टी का उस समय का एक बहुत बड़ा अहम निर्णय था।

लेकिन देश आजाद होने के बाद भी रानी मां को जेल से बाहर निकलने में तीन-चार महीने लग गए थे। आजादी के बाद भी तीन-चार महीने रानी मां जेल में थी। और इससे भी बड़ा दुर्भाग्‍य - इससे भी बड़ा दुर्भाग्‍य ये था कि आजादी के बाद रानी मां को राजनीतिक कारणों से... और हमारे यहां जो राजनीति में विकृतियां आई हैं, उन विकृतियों के दर्शन वहां होते है कि आजादी के बाद रानी मां को उनके गांव में प्रवेश नहीं दिया गया।

आजादी के.. हिन्‍दुस्‍तान में जो रानी मां आजादी के लिए अपने जीवन को खपाने के लिए तैयार थीं, जिसने कभी अंग्रेजों के सामने सर नहीं झुकाया था उस रानी मां को 10 साल तक अपने ही आजाद हिन्‍दुस्‍तान में भूगर्भ में रहना पड़ा था। और कारण? सांप्रदायिक असहिष्णुता थी। वे प्र‍कृति में पूजा करती थी, वो प्रकृति को परमात्‍मा मानती थी। और आज जो ग्‍लोबल वार्मिंग के कारण दुनिया संकट में है, उनको अगर रानी मां के उपदेश है, जो कि प्रकृति प्रेम के उपदेश है, वो अगर समझे, तो आज environment के जो issues हैं, उसका जवाब भी रानी मां की philosophy में मिलता है।



वे प्रकृति की पूजा का पुष्‍कार थीं। और उनकी सारी जो परम्‍परा थी उनका जो हरा का संप्रदाय रहा, वो प्रकृति पूजा का संप्रदाय रहा है। लेकिन उसको नकारने वालों ने उनका जीना दुष्‍कृत कर दिया था। और हिन्‍दुसतान में 10 साल तक उनको भू-गर्भ में जीवन बिताना पड़ा था। और बाद में जा करके स्थितियां थोड़ी संभली। वो अपने सेवा कार्य में जीवन खपाती रही थी। समय-समय पर मान-सम्‍मान के कारण कभी-कभार वो खबरों में आया करती थीं। लेकिन उन्‍होंने जीवन के अंत तक समाज सेवा का अपना मार्ग नहीं छोड़ा था।

प्रकृति पूजा विपरीत माहौल में भी उस मार्ग को बनाए रखना, लोगों को प्रेरित करते रहना। और संघर्ष का राह अपना करके नहीं, वो वीरांग्‍ना थीं, लेकिन समन्‍वय का मार्ग अपना करके उन्‍होंने आजादी के काल में पूरा जीवन समाज के उत्‍कर्ष के लिए लगाया था। और उस अर्थ में, मैं मानता हूं कि खास करके हमारे इन-इन इलाके - सिर्फ नार्थ-इस्‍ट नहीं हिन्‍दुस्‍तान के ऐसे कई कोने है - जहां के महापुरूषों को हम अगर हमारे प्रेरणा पुरूष के रूप में हमारे प्रेरक व्‍यक्तित्‍व के रूप में अगर प्रस्‍तुत करते रहते तो हमारी नई पीढि़यों का.. महात्‍मा गांधी को रानी मां सशस्‍त्र क्रांति के कारण जेल गई थीं। उनके गुरूदेव को फांसी हुई थी। लेकिन रानी मां खुद 1932-35 के कालखंड में महात्‍मा गांधी का गौरव गान पूरे नार्थ-ईस्‍ट में किया करती थी। एक प्रकार से महात्‍मा गांधी को पूरे नार्थ ईस्‍ट में परिचित कराने का बड़ा काम रानी मां ने किया था।

और वो हमेशा सपना देखती थी, वो कहती थी कि नागा कल्‍चर, नागा परंपरा ये सब बना रहना चाहिए। मुझे नागा होने का गर्व है। लेकिन ये सब देश की एकता और अखंडता के लिए होना चाहिए। ये रानी मां उस समय कहती थीं। वो संपूर्ण भारत की आजादी की बात करती थी। और वो उनकी भाषा में कहा करती थी कि गांधी एक दिन राजा बनेगा, महात्‍मा गांधी एक दिन राजा बनेगा। क्‍योंकि वो लोकतंत्र की परिभाषा जो उनके वहां थी, उसके हिसाब से, लेकिन मूल बात ये थी कि भारत स्‍वतंत्र होगा। और महात्‍मा गांधी उसका सुकांत समाज का नेतृत्‍व करेगें। ये सपने रानी मां लगातार बोलती रहती थीं। अपने लोगों को वो प्रशिक्षित करती रहती थीं।

जिन्‍होंने इस प्रकार का जीवन दिया, हम सबका दायित्‍व बनता है कि ऐसे हमारे जितने भी अज्ञात महापुरूष है... आज कभी हम अंडमान-निकोबार के सेल्‍युलर जेल में चले जाए, और वहां देश की आजादी पर मर-मिटने वालों की सूची देखें, तो पता तक नहीं चलता है कि इतिहास के किस कोने में होगा। वहां तो एक पत्‍थर पर उनके नाम छपे हुए हैं। लेकिन शायद देश के और कोने में, शायद जिस गांव में वो पैदा हुए होंगे, उन गांव के बच्‍चों को भी मालूम नहीं होगा कि हमारे गांव का कोई व्‍यक्ति था जो आज से 100 साल पहले अंडमान-निकोबार की जेल में जा करके, भारत मां की आजादी के लिए लड़ रहा होगा - पता नहीं होगा।

ये जो हमने बहुत बड़ा... हमारे समाज जीवन का घाटा रहा गया है, कमी रह गई है। इसको हम सबने पूरा करना है। हमारी यूनिवर्सिटीज़ Research scholars research करते है। क्‍यों न हमारी universities में हर batch में एक-दो, एक-दो students ऐसे भी हो, कि जो समाज के ऐसे लोगों पर research करें, Ph.D. करें? अगर नार्थ-ईस्‍ट के इन महानुभावों, सामाजिक क्रांति करने वाले, राष्‍ट्रीय क्रांति करने वाले, अगर इन पर हमारी universities research करें - और उस इलाके की नहीं दूसरे छोर की - साउथ से, पश्चिम से, उत्‍तर से, तो जा करके उनको लगेगा “अच्‍छा भई, ऐसे-ऐसे लोग यहां थे?”

ये integration के लिए भी बहुत बड़ा काम आता है। और मुझे विश्‍वास है कि आने वाले दिनों में जो बात मणिपुर के मुख्‍यमंत्री जी ने कही है, नागालैंड के मुख्‍यमंत्री जी ने कही है। उनकी भावना, उसको आदर करते हुए हम कैसे आगे बढ़ाएं हम इन चीजों को? ये पूरे देश का दायित्‍व बनता है। जिसको हमें पूरा करना चाहिए।

उसी प्रकार से आखीर रानी मां ने अपनी जिंदगी अपनी जेल में क्‍यों खपा दी? व्‍यक्तिगत तो कुछ पाने के लिए नहीं था। सपना यही था कि हमारा देश नई ऊँचाइयों को पार करे, प्रगति करे। और देश तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब कि पूर्वी भारत प्रगति नहीं करता, जब कि उत्‍तर-पूर्व प्रगति नहीं करता, जब तक ये हमारी अष्‍ट लक्ष्‍मी प्रगति नहीं करती है।

और इसलिए विकास की इस बात को लेकर के आपने देखा होगा इस सरकार ने infrastructure के लिए सबसे ज्‍यादा धन नार्थ-इस्‍ट के लिए लगाया है। क्‍योंकि एक बार infrastructure बन जाएगा तो वहां तो... मैं उस इलाके में रहा हूँ मुझे मालूम है क्‍या परमात्‍मा के आशीर्वाद हैं देश के अन्‍य भू-भाग को पता तक नहीं है कि क्‍या ईश्‍वर के अशीर्वाद इस भू-भाग पर है। थोड़ा सा Connectivity का मामला बन जाए, आप देखिए मैंने इन दिनों University के Students को कहा था कि जरा टूरिस्‍ट के नाते आप वहां जाने की आदत तो डालो।

पिछले साल गए काफी विद्यार्थी। वो हैरान हो गए वहां के जीवन को देख करके। वो आकर के लोगों को बताते रह गए कि अरे भई हमने वहां ये, देखा वो देखा। हमें लगातार जोड़ना है। जैसे अरूण जी ने कहा, बंग्‍लादेश सीमा विवाद का समाप्‍त होना उसका जो सबसे महत्‍त्‍वपूर्ण पहलू है, जो भारत के हित में है, वो ये है कि अब हमें हमारे नार्थ-इस्‍ट के साथ जुड़ने में जो कठिनाइयां थी, उस कठिनाइयों से मुक्ति मिल गयी है। एक प्रकार से Geographically, नार्थ-इस्‍ट हमारे बहुत निकट आ गया है। वरना वो इलाका था जो बंग्‍लादेश में होने के कारण, हमारी Connectivity नहीं थी, अब सरल हो गया है। जैसे ही Infrastructure बनेगा, इसका फायदा मिलने वाला है।

नार्थ-इस्‍ट के State Capitals को Railway से जोड़ने में बहुत तेजी से काम चल रहा है। नार्थ-इस्‍ट हिंदुस्‍तान का Organic Capital बन सके, इतना सामर्थ्‍य रखता है। आपने दुनिया भर के पाइनेपल टेस्‍ट किए होंगे कभी एक बार नार्थ-इस्‍ट जा करके वहां पाइनेपल का टेस्‍ट कीजिएगा, पता चलेगा कि परमात्‍मा ने क्‍या दिया है, क्‍या दिया है!

मैं एक बात का उल्‍लेख करता हूँ ....देखिए, हमारे जेलियांग जी कहते है कि आप सिर्फ पाइनेपल का उल्‍लेख क्‍यों करते हैं? हमारे मिर्ची का उल्‍लेख क्‍यों नहीं करते हैं? बहुत कम लोगों को मालूम होगा, सारी दुनिया में सबसे हॉट चिली कहीं की है तो वो नागालैंड की है। ये-ये विविधताओं भरा हुआ देश है। आर्थिक विकास में ये क्षेत्र बहुत बड़ी भूमिका अदा कर सकते हैं। ऐसा नहीं है कि हिंदुस्‍तान उनका विकास करेगा। उनका विकास, हिंदुस्‍तान के विकास का एक नया कारण बनेगा - ऐसा मैं देख रहा हूँ।

और इसलिए नार्थ-इस्‍ट के विकास को हम प्राथमिकता दे करके आगे बढ़ रहे हैं। नागालैंड, यहां पर आजादी के पहले से ही, अतिवाद, उग्रवाद, अलगाववाद - ये स्‍वर उसके साथ शस्‍त्र जुड़ गये। हर सरकारों ने कोई-न-काई प्रयास किया। कुछ, कभी सुधार आया, कभी फिर रूकावट आयी, सुधार आया, फिर रूकावट आयी - क्रम चलता रहा। हर किसी का अपना-अपना सहयोग रहा है। किसी एक सरकार को इसकी क्रेडिट न जाती है, और न लेनी चाहिए। हर किसी ने अच्‍छा करने में कोई न कोई योगदान किया है। और उसी का परिणाम है कि आज नागालैंड में उन लोगों के साथ सफल वार्ता हुई है। मुख्‍य धारा से जुड़ करके कंधे-से-कंधा मिला करके, न सिर्फ नागालैंड का विकास, न सिर्फ नार्थ-इस्‍ट का विकास - पूरे हिंदुस्‍तान के विकास का सपना सबने देखा है।

मुझे विश्‍वास है कि ये जो यात्रा प्रारंभ हुई है, साथ-साथ चलने की यात्रा प्रारंभ हुई है, वो उत्‍तम परिणाम दे करके रहेगी। और देश नई ऊँचाइयों को प्राप्‍त करेगा। आज रानी मां की स्‍मृति में, ये coin... यहां बैठे हुए लोगों को अंदाज नहीं होगा, नार्थ-इस्‍ट के घरों में इस coin का क्‍या सात्विक मूल्‍य होगा, जिसका हम अंदाज नहीं कर सकते हैं।

उनके लिए ये एक ऐसी पवित्र घटना के रूप में देखा जाएगा। इतना बड़ा ये प्रेरक व्‍यक्तित्‍व रहा है। सरकार के लिए खुशी की बात है कि हम इस महान विभुति की जीवन के साथ वर्तमान को जोड़ने में सफल हो रहे हैं, और भविष्‍य के निर्माण के लिए उन व्‍यक्तित्‍व से हमेशा-हमेशा हमें प्रेरणा मिलती रहेगी, ताकत मिलती रहेगी, इसी शुभभाव के साथ मैं फिर एक बार रानी मां के चरणों में वंदन करता हूँ। उनका आशीर्वाद बन रहे, और हम सब मिल करके रानी मां का “देश समृद्ध हो, देश एक हो, देश अखंड हो” - उन सपनों को पूरा करने के लिए कोई कमी न रहे, इसी एक कल्‍पना के साथ, बहुत-बहुत शुभ कामनाएं।

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ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में युवाओं के साथ मजबूती से खड़ी है सरकार: पीएम मोदी
August 02, 2026
मैं प्रत्येक नागरिक, विशेषकर हमारे युवाओं से, इस आंदोलन में शामिल होने का आग्रह करता हूं: प्रधानमंत्री
आज जब देश ने 'विकसित भारत' का लक्ष्य तय किया है, तो यह बहुत जरूरी है कि देश के युवा फिट रहें, उनमें भरपूर आत्मविश्वास हो और वे नशीले पदार्थों से हमेशा दूर रहें: पीएम मोदी
हमें हर युवा को नशे के जाल में फंसने से बचाना होगा: प्रधानमंत्री
समाज का सहयोग, योग और ध्यान हमें नशे की लत से लड़ने के लिए अंदर से मजबूत बनाते हैं और आज नशा-मुक्ति केंद्र जैसी सुविधाएँ भी लत छोड़ने में मदद करती हैं: पीएम मोदी
यदि कोई युवा अनजाने में नशे के जाल में फंस भी गया है, तो इसका बिल्कुल भी यह अर्थ नहीं है कि उसके लिए सभी दरवाजे बंद हो गए हैं: प्रधानमंत्री
हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि अगर घर का कोई बच्चा नशे की लत का शिकार हो जाता है, तो हमें इसे छिपाना नहीं चाहिए, बल्कि उसे लत से मुक्त कराने के लिए डॉक्टरी मदद लेनी चाहिए: पीएम मोदी
हमें परिवार में बच्चों के साथ खुलकर संवाद करने की संस्कृति भी विकसित करनी चाहिए, ताकि आप उन्हें इस तरह के दुष्चक्र में फंसने से पहले ही सहारा दे सकें: प्रधानमंत्री
मैं अपने प्रोफेसरों से अपील करता हूँ कि वे अपने छात्रों के साथ नशीले पदार्थों के सेवन के खतरों पर चर्चा करें और अच्छे नतीजे पाने के लिए कैंपस में नशे के खिलाफ एक अभियान चलाएँ: पीएम मोदी


नमस्‍कार!

आज हम सभी देशवासी एक महान और महत्वपूर्ण संकल्प के लिए एकजुट हुए हैं। इस संकल्प को लेकर, इसक कार्यक्रम से जुड़े सभी पूज्य संतजन, अलग-अलग राज्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे सभी राज्यपाल, सभी मुख्यमंत्री, अन्‍य सभी जनप्रतिनिधिगण, 28 हजार से अधिक स्थानों से जुड़े एक करोड़ से युवा साथी, मैं आज इस शुभ घड़ी पर, शुभ संकल्प के लिए करोड़ों-करोड़ों नौजवानों का विशेष रूप से अभिनंदन करता हूं। आज हम सभी जिस अभियान के साक्षी बन रहे हैं, वह अभियान व्यक्ति के लिए हैं, परिवार के लिए हैं, समाज के लिए भी है और सबसे बड़ी बात है, यह राष्‍ट्र के लिए है।

साथियों,

विकसित भारत संकल्प अभियान के लिए ‘नशा मुक्त युवा’ इस मूवमेंट का नाम ही इसके संकल्प को स्पष्ट करता है, क्योंकि आज जब देश ने विकसित भारत का लक्ष्य तय किया है, तो इसके लिए आवश्यक है, देश का युवा तन से स्वस्थ हो, मन से स्वस्थ हो, आत्‍मविश्‍वास से भरपूर हो और ड्रग्स जैसी घातक आदत से हमेशा-हमेशा दूर ही रहे, दूर हो। यही इस अभियान का उद्देश्य है। इसलिए हम सबको यह संकल्प लेना है, हमारे युवा नशे और ड्रग्स के खतरों को समझे, हर तरह से जागरूक रहे और उससे दूर रहें और इस संकल्प में अब ‘राष्‍ट्रीय नशा मुक्त युवा’ अभियान की बड़ी भूमिका है।

साथियों,

काशी का सांसद होने के नाते मुझे खुशी है कि यह अभियान का पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पिछले साल काशी की पवित्र धरती से शुरू हुआ था। इसलिए वैज्ञानिक स्‍पष्‍टता के साथ-साथ इसमें आध्यात्मिक ऊर्जा भी है, संतों के आशीर्वाद भी हैं और महान सांस्कृतिक विरासत भी हैं। इसमें वह सांस्कृतिक समर्पण भी है, जिसने सदियों से नशे को खारिज किया है। यही वजह है, देश के 125 से अधिक आध्यात्मिक संगठन करोड़ों-करोड़ों देशवासियों के हित के लिए आज हमारे साथ जुड़ चुके हैं। सामाजिक संगठनों ने, NGOs ने इस दिशा में संकल्प लिया है। सबने मिलकर ‘काशी डिक्लेरेशन’ के जरिए रोडमैप तैयार किया है और आज हम देख रहे हैं, काशी से उठा वो कल्याणकारी विचार अब यह एक नेशनल प्रोजेक्ट्स बन गया है। आज से देशभर में ‘नशा मुक्त युवा’ अभियान आरंभ हो रहा है।

साथियों,

कुछ काम ऐसे होते हैं, जो व्यक्तिगत रूप से कोई प्रयास करे, तो कभी-कभी निराश हो जाता है, थकान महसूस करता है, लंबी दूरी चलने में मन तैयार नहीं होता है, लेकिन जब सामूहिक अभियान बन जाता है, कंधे से कंधा मिलाकर करोड़ों लोग चल पड़ते हैं, तो ऐसे सभी जो व्यक्तिगत रूप से अपने आप कुछ नहीं कर पाते हैं, उनको भी एक नई ऊर्जा मिल जाती है। सामूहिकता की एक ताकत होती है और आज उस ताकत को लेकर के यह अभियान हर युवा मन को छूने वाला है। थोड़ी देर पहले देश के लाखों युवाओं ने नशा मुक्ति की शपथ ली है। आपने अपने जीवन को नशे से दूर रखने का संकल्प लिया है। आपने अपने स्कूल, अपने कॉलेज और अपने समाज में नशा मुक्ति का संदेश पहुंचाने का संकल्प लिया है।

साथियों,

आज लिया गया यह संकल्प आने वाले 100 सप्ताह तक लगातार ऐसे ही आगे बढ़ेगा। हर रविवार, कला, संस्‍कृति, स्पोर्ट्स, मेडिटेशन, आध्यात्म और सेवा से जुड़ी गतिविधियां होंगी। नशा मुक्ति का संदेश नए लोगों तक पहुंचेगा। आने वाले 100 रविवार नशा मुक्त भारत की दिशा में 100 मजबूत कदम होंगे, हंड्रेड मजबूत स्‍टेप्‍स।

साथियों,

आज हजारों स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज़ के लाखों विद्यार्थी इस कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़े हैं। माई भारत के वॉलंटियर्स भी लाखों की तादाद में आज इससे जुड़े हैं। मेरे एनएसएस के नौजवान भी आज हमारे साथ शामिल हैं। देश के अलग-अलग क्षेत्रों से, अलग-अलग संस्‍थानों से, अलग-अलग बैकग्राउंड के एक करोड़ से अधिक युवा आज एक साथ हैं। मेरा आप सभी से आग्रह है, आप सब इस बड़े मोवमेंट के लीडर हैं। आपने मेरे इस विश्वास को और मजबूत किया है कि भारत का युवा कितना जागरूक है, कितना समझदार है और अपने कर्तव्यों के प्रति कितना गंभीर है। मैं आप सभी को इस अभियान के लिए अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

मेरे युवा साथियों,

आप भारत की अमृत पीढ़ी हैं। आप अगले 20-25 वर्षों में अपने जीवन को भी दिशा देंगे और आप ही 2047 में देश को विकसित भारत की मंजिल तक लेकर जाएंगे और उसको शिखर पर आप ही बैठे होंगे, उसका सारा रसपान करने का अवसर आप ही को मिलने वाला है। देश को आपकी ऊर्जा, आपकी कल्पनाशक्ति और आपके टैलेंट की जरूरत है। इसलिए, देश के लिए और अपने जीवन के लिए, खुद को नशा मुक्त रखना बहुत जरूरी है। नशा फोकस को भटकाता है, और धीरे-धीरे युवा को उसके अपने सपनों से दूर ले जाता है। अभी जिन नौजवानों ने नाट्य मंचन किया, बहुत कम समय में, बहुत अच्छे तरीके से नाट्य मंचन में उन्होंने समस्या भी बताई, समस्या के कारण पैदा हुए संकट भी बताए और बाहर निकलने के सामूहिक प्रयत्न का रास्ता भी दिखाया। नाट्य मंचन छोटा था, लेकिन जैसा उन्होंने कहा, आओ हम नाटक देखें! यह नाटक नहीं था, यह हम लोगों के लिए एक बहुत बड़ा संदेश था। हमें जगा रहा था, हमें जूझने के लिए प्रेरित कर रहा था।

साथियों,

आजकल हम देखते हैं, आज के युवा स्‍टार्टअप्‍स की दुनिया में छाए हैं, AI को लीड कर रहे हैं, Sports में तिरंगा लहरा रहे हैं, स्‍पेस से लेकर Science तक नए कीर्तिमान बना रहे हैं। लेकिन साथियों, जब कोई युवा, अगर ड्रग्स के एडिक्‍शन में फंस जाए, तो केवल एक युवा नहीं हारता, एक सपना हार जाता है, एक सपने की बाल मृत्यु हो जाती है, एक परिवार हार जाता है, पूरा का पूरा परिवार टूट जाता है, समाज से भी नफरत का शिकार बन जाता है। नशा केवल शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाता, नशा एक माँ की मुस्कान छीन लेता है। नशा एक पिता के सपनों को चूर-चूर कर देता है। एक बहन की राखी की उम्मीद को कमजोर कर देता है। एक छोटे भाई का आदर्श छीन लेता है। घर के बुजुर्ग हर दिन इस दर्द को जीते हैं कि उनका अपना बच्चा धीरे-धीरे खुद को खो रहा है, खुद को गला रहा है, तिल-तिल गल रहा है, आंखों के सामने उसे बर्बाद होते देख रहे हैं और जब परिवार में, समाज में ऐसा होता है और कहीं न कहीं, राष्ट्र की शक्ति भी कमजोर पड़ जाती है और इसलिए दुश्मन देश भी षड्यंत्र करके हमारे देश के युवाओं को इस नशे की लत में खींचने के लिए कोई कोशिश बाकी नहीं रखते हैं। ड्रग्स सप्लाई कर-करके कमाई करना और हमारे जैसे देश को तबाह करना, यह भी उनकी आतंकी साजिश का हिस्सा होता है और इसलिए हमें हर एक युवा को नशे के चंगुल में फंसने से बचाना है।

साथियों,

नशा मुक्त रहकर आपको अपने पोटेंशियल को प्रोटेक्ट करना है! आपको ध्यान रखना है, ड्रग्स कुछ समय के लिए 'High' देता है। लेकिन आपके करियर और फैमिली लाइफ को 'Low' कर देता है। हमें नशे को किसी भी तरह की स्वीकार्यता नहीं देनी है।

साथियों,

हमारे समाज में भी हमेशा नशे को एक बुराई के रूप में देखा है। हमारे संतों ने, गुरुओं ने हमें इससे बचने के लिए चेताया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब में भी कहा गया है- "जितु पीतै मति दूरि होइ बरलु पवै विचि आइ। आपणा पराइआ न पछाणई खसमहु धके खाइ॥'' अर्थात, जिस पदार्थ के सेवन से बुद्धि और विवेक साथ छोड़ दें, इंसान अपने और पराए की पहचान भूल जाए, ऐसा नशा उसे पतन की ओर ले जाता है।

साथियों,

हमारी संस्कृति में बचाव के लिए चेतावनी भी दी गईं है और नशे की आदत लगने पर उससे निकलने के रास्ते भी बताए गए हैं। समाज का सहयोग, योग और ध्यान की ताकत, यह नशे के खिलाफ हमारे अंतर्मन को ताकत देते हैं। और आज तो हमारे पास नशा छोड़ने के लिए rehabilitation center जैसी सुविधाएं भी हैं। इसलिए, अगर कोई युवा गलती से नशे में फंस भी गया है, तो इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि उसके सारे रास्ते बंद हो गए हैं। हमें हमेशा इस बात का ध्यान रखना है, घर का कोई बच्चा अगर नशे का शिकार बन गया है, तो इसे सामाजिक प्रतिष्ठा की आड़ में छिपाएं नहीं। जिसकी जरूरत हो, उसका सहयोग मांगे, मन खोलकर के उससे बात करें, जो एक्सपर्ट्स हैं, उनका सहयोग लें। मेडिकल हेल्प से अपने बच्चे को नशे से मुक्त कराने का प्रयास करें। हमें परिवार में बच्चों से खुलकर संवाद की संस्कृति भी बनानी चाहिए, ताकि ऐसे भंवर में फंसने से पहले ही आप उसका हाथ थाम सके। आपको भनक आ जाएगी, थोड़ा ध्यान रखिए पता चलेगा, उसमें बदलाव आ रहा है, वो खोया-खोया लग रहा है, वो मुँह छुपा रहा है, कमरे में बंद हो जा रहा है, देर रात आ रहा है, पैसे अनाब-शनाब मांग रहा है, यह सारी चीजों से पता चल जाता है, भनक आ जाती है, कुछ मामला गड़बड़ है।

साथियों,

एक आवाहन मैं कॉलेज और यूनिवर्सिटीज़ के हमारे प्रोफेसर्स साथियों से भी करना चाहता हूँ, आप भी कोर्स की पढ़ाई के साथ-साथ स्टूडेंट्स के साथ ड्रग्स के खतरों पर बात करें। नशे के खिलाफ अपने कैम्पस में एक मूवमेंट चलाएं। आपके प्रयास बड़े-बड़े परिणाम ला सकते हैं। और साथियों, हमें एक और बात ध्यान रखनी है, जो युवा नशे से लड़कर बाहर निकलते हैं, वह कमजोर नहीं होते, जो नशे को परास्‍त करके निकला है न, वह असली योद्धा होता है, समाज को उनका सम्मान करना चाहिए, अपनापन देना चाहिए, उसे दूसरा अवसर देना चाहिए क्योंकि ड्रग्स से जुड़ा किसी का अतीत उसकी पहचान नहीं हो सकता, उसका साहस उसकी पहचान होता है।

साथियों,

ड्रग्स के खिलाफ अभियान में आज सरकार भी मजबूती से युवाओं के साथ खड़ी है। देश में नशे के कारोबारियों और तस्करों पर सख्ती के साथ कार्रवाई हो रही है। पहले की तुलना में कई गुना ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं। हजारों करोड़ रुपए की ड्रग्स भी जब्त की गई है। यह दिखाता है कि, ड्रग्स के खिलाफ हमारी सरकार कितनी सख्त है। मुझे विश्वास है, केन्‍द्र सरकार, राज्य सरकार, हर कोई इसे मिशन मोड में करेंगे। मुझे विश्वास है, हमारे देश का युवा नशे से मुक्त रहकर अपनी युवा ऊर्जा को न केवल संरक्षित करेगा, बल्कि विकसित भारत के संकल्पों को भी आगे बढ़ाएगा। और जब मैं आज अनेक महान संतों को मेरे सामने देख रहा हूं, दूर से मैं मन से उनको प्रणाम करता हूं। मैं इन सभी सामाजिक संस्‍थाएं, आध्यात्मिक संस्‍थाएं, आध्यात्मिक गुरुजन, आपका देश के कोने-कोने में संगठन है, आपके युवा साथी डिवोटीज हैं। आने वाले 100 दिन में हर एक संगठन, एक सप्ताह अपने जिम्मे ले सकता है, पूरा सप्ताह पूरे देश में वह संगठन नेतृत्व करे, बाकी सब शक्तियां उसके साथ जुड़े और रविवार को बहुत बड़ा कार्यक्रम करें। दूसरे सप्ताह, दूसरा संगठन, दूसरी शक्ति, सप्ताह भर प्रयोग करें, कार्यक्रम करे और रविवार को बड़ा कार्यक्रम करे। अगर 100 सप्ताह हमारे देश के ऐसे आध्यात्मिक, सामाजिक संगठन, युवा संगठन एक-एक सप्ताह अपने जिम्मे ले लें और बाकी सारी शक्तियां वह जुड़े और रविवार सब मिलकर के करें, आप कल्पना कर सकते हैं, देश में कितना बड़ा आंदोलन खड़ा हो जाएगा। मैं एक बार फिर आप सबने समय निकाला, इस पवित्र कार्य में हम सबको आशीर्वाद दिए, इसके लिए संतों का, आचार्यो का, संगठन के महारथियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। मैं इन एक करोड़ से ज्यादा जुटे नौजवानों का विशेष रूप से अभिनंदन करता हूं, आपने यह बहुत बड़ा काम किया है। मैं माई भारत के वॉलंटियर्स की बधाई करता हूं, वो जो भी ठान लेते हैं, आजकल करके दिखाते हैं। अभी पिछले दिनों मुझे माई भारत के वॉलंटियर्स को मिलने का मौका मिला, वह हिन्‍दुस्‍तान के सीमावर्ती गांवों में जाकर के एक-एक सप्ताह रूक करके आए हैं। जिसे कभी देश का आखिरी गांव कहा जाता है, जाता था जिसको आज हम देश का पहला गांव कहते हैं, वहां जाकर के आए। उनके अनुभव बड़े प्रेरक थे और आज इतना बड़ा कार्यक्रम माई भारत के वॉलंटियर्स कर पाते हैं, यह अपने आप में उनकी राष्‍ट्र के प्रति जागरूक समर्पित भावना का प्रतीक है, मैं उनकी बधाई देता हूं, उनका भी अभिनंदन करता हूं। और मुझे पूरा विश्वास है कि आप सबके सामूहिक प्रयत्नों से यह हमारी मोवमेंट घर-घर पहुंचेगी, हर युवा के दिन में पहुंचेगी और यह ड्रग्स के कारोबारियों के लिए बहुत बड़ा खौफ भी बन जाएगी। आइए, हम सब मिलकर के आगे चलें, मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!