షేర్ చేయండి
 
Comments
Numerous measures undertaken in the last four years to enhance the quality of life of our citizens: PM Modi
Human rights should not be about only slogans but it should be an integral part of our values: PM Modi
For us, ‘Sabka Saath, Sabka Vikas’ is about serving the people: PM Modi
With focus on justice for all, the government is increasing the number of e-Courts, strengthening the National Judicial Data Grid: Prime Minister Modi
With the use of technology, we are making the system transparent and protecting the rights of citizens: PM Modi
To empower the Divyangs, we have strengthened the Rights of Persons with Disabilities Act: PM Modi

मंच पर विराजमान मंत्रीपरिषद के मेरे साथी श्रीमान राजनाथ सिंह जी, श्री मनोज सिन्‍हा जी, NHRC Chairperson जस्टिस एस.एल.दत्‍तू जी, आयोग के सदस्‍य गण, यहां उपस्थित सभी नए महानुभाव, देवियो और सज्‍जनो !

राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग आज 25 वर्ष पूर्ण कर रहा है। इस अहम पड़ाव पर पहुंचने के लिए आप सभी को, देश के जन-जन को बहुत-बहुत बधाई। इस महत्‍वपूर्ण अवसर पर आप सभी के बीच आकर मुझे बहुत ही अच्‍छा लग रहा है।

साथियो, बीते ढाई दशक में राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सामान्‍यमानवी के गरीब, पीड़ित, वंचित, शोषित की आवाज बनकर राष्‍ट्र निर्माण को दिशा दिखाई है। न्‍याय और नीति के पद पर चलते हुए आपने जो भूमिका निभाई है, उसके लिए International Human Rights Institutions ने निरंतर आपकी संस्‍था को ‘A’Status दिया है। ये भारत के लिए गर्व की बात है।

साथियो, मानव अधिकार की रक्षा हमारी संस्‍कृति का अहम हिस्‍सा है। हमारी परम्‍पराओं में हमेशा व्‍यक्ति के जीवन निमित समता, समानता उसकी गरिमा के प्रति सम्‍मान, इसको स्‍वीकृति मिली हुई है। अब यहां प्रारंभ में जिस श्‍लोक का उच्‍चार हुआ, वो बाद में राजनाथ जी ने भी विस्‍तार से कहा – ‘सर्वे भवन्‍तु सुखेन’ की भावना हमारे संस्‍कारों में रही है।

गुलामी के लंबे कालखंड में जो आंदोलन हुए उनका भी ये महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा रहा है। साथियों आजादी के बाद इन आदर्शों के संरक्षण के लिए ही एक मजबूत तंत्र विकसित किया गया था। हमारे यहां तीन स्‍तरीय शासन व्‍यवस्‍था है- एक स्‍वतंत्र और निष्‍पक्ष न्‍याय व्‍यवस्‍था है, active media है और सक्रिय civil society है। अधिकारों को सुनिश्चित करने वाले NHRCजैसे अनेक संस्‍थान, कमीशन और tribunal भी हैं। हमारी व्‍यवस्‍था उन संस्‍थाओं की आभारी है जो गरीबों, महिलाओं, बच्‍चों, पीड़ितों, वंचितों, आदिवासियों समेत हर देशवासी के अधिकार को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा पंचायत राज सिस्‍टम या फिर स्‍थानीय निकायों से जुड़ी व्‍यवस्‍था मानव अधिकारों के सुरक्षा तंत्र का एक महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। ये संस्‍थाएं सामान्‍य जन के हम को, विकास के लाभ को, जन कल्‍याणकारी योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। ये संस्‍थाएं महिलाएं, वंचित वर्गों के सशक्तिकरण और भागीदारी में भी बहुत बड़ा योगदान दे रही हैं।

साथियो, मानव अधिकारों के प्रति इसी समर्पण ने देश को 70 के दशक में बहुत बड़े संकट से उबारा था। Emergency, आपातकाल के उस काले कालखंड में जीवन का अधिकार छीन लिया गया था, बाकी अधिकारों की तो बात ही क्‍या करें। उस दौरान सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले हजारों-लाखों लोग जेलों में भर दिए गए थे, लेकिन भारतीयों ने अपनी परिपाटी के इस मत्‍वपूर्ण पहलू को, मानव अधिकारों को अपने प्रयत्‍नों से फिर हासिल किया। मानव अधिकारों, मूल अधिकारों की श्रेष्‍ठता को फिर से स्‍थापित करने वाली उन सभी संस्‍थाओं को, सभी जनों को मैं आज के इस पावन अवसर पर आदरपूर्वक नमन करता हूं।

साथियो, मानव अधिकार सिर्फ नारा नहीं होना चाहिए, ये संस्‍कार होना चाहिए, लोकनीति का आधार होना चाहिए। मैं मानता हूं कि पिछले साढ़े चार वर्षों की ये बहुत बड़ी उपलब्धि रही है कि इस दौरान गरीब, वंचित, शोषित समाज के दबे-कुचले व्‍यक्ति की गरिमा को, उसके जीवन-स्‍तर को ऊपर उठाने के लिए गंभीर प्रयास हुए हैं। बीते चार वर्षों में जो भी कदम उठाए गए हैं, जो भी अभियान चलाए गए हैं, जो योजनाए बनी हैं, उनका लक्ष्‍य यही है और हासिल भी यही है।

सरकार का फोकस इस बात पर रहा है कि सामान्‍य मानवी की मूल आवश्‍यकताओं की पूर्ति उसकी जेब की शक्ति से नहीं बल्कि सिर्फ भारतीय होने भर से ही स्‍वाभाविक रूप से हो जाए। हमारी सरकार ‘सबका साथ-सबका विकास’ इस मंत्र को सेवा का माध्‍यम मानती है। ये अपने-आप में ही मानव अधिकारों की सुरक्षा की गारंटी की तरह काम कर रही है।

सा‍थियो, आप सभी इस बात से भलीभांति परिचित रहे हैं कि बेटियों के जीवन के अधिकार को लेकर कितने सवाल थे। बेटी को अवांछित मानकर गर्भ में ही हत्‍या करने की विकृत मानसिकता समाज के कुछ संकुचित-सीमित लोगों में बंट रही थी।

आज मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान की वजह से हरियाणा-राजस्‍थान समेत अनेक राज्‍यों में बेटियों की संख्‍या में भारी वृद्धि हुई है। अनेक मासूमों के जीवन को अधिकार मिला है। जीवन का अर्थ सिर्फ सांस लेने से नहीं है, सम्‍मान भी उतना ही महत्‍वपूर्ण है।

मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है कि दिव्‍यांग, ये ‘दिव्‍यांग’ शब्‍द आज कुछ भारतीयों के लिए सम्‍मान का सूचक बन गया है। इतना ही नहीं, उनके जीवन को सुगम बनाने के लिए ‘सुगम्‍य भारत’ अभियान के तहत, सरकारी बिल्डिंग्‍स हों, एयरपोर्टस हों, रेलवे स्‍टेशन हों, वहां पर विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। गरीब को खुले आसमान के नीचे झुग्‍गी में जीवन बिताना पड़े, मौसम के थपेड़े उसको सहन करने पड़ें, ये भी तो उसके अधिकार का हनन है। इस स्थिति से उसको बाहर निकालने के लिए ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत हर बेघर गरीब को आवास देने का अभियान चल रहा है। और सपना है 2022 में जब भारत की आजादी के 75 साल होंगे, हिन्‍दुस्‍तान में हर उस व्‍यक्ति को मकान मिलना चाहिए, जिसके सिर पर छत नहीं है।अब तक सवा सौ करोड़ से अधिक भाई-बहनों को घर की चाबी मिल चुकी है।

साथियो, घर के अलावा गरीब को ‘उज्‍ज्‍वला योजना’ के तहत मुफ्त गैस कनेक्‍शन भी दिया जा रहा है। ये योजना सिर्फ एक welfare scheme भर नहीं है। इसका संबंध समानता से है, गरिमा के साथ जीवनयापन करने से है। इससे देश की साढ़े पांच करोड़ से अधिक गरीब माताओं-बहनों को आज साफ-सुथरी धुंआमुक्‍त रसोई का अधिकार मिला है। ये परिवार इस अधिकार से सिर्फ इसलिए वंचित थे क्‍योंकि उनका सामर्थ्‍य नहीं था, उनका जेब खाली था।

इतना ही नहीं, जब देश में बिजली की व्‍यवस्‍था है, बिजली पैदा हो रही है, तब भी हजारों गांव, करोड़ों परिवार अंधेरे में थे।सिर्फ इसलिए क्‍योंकि वो गरीब थे, दूर-सुदूर के इलाकों में बसे थे। मुझे खुशी है कि बहुत ही कम समय में उन 18 हजार गांवों तक बिजली पहुंची है, जो आजादी के इतने वर्षों बाद भी 18वीं शताब्‍दी में जीने के लिए मजबूर थे।

इतना ही नहीं, ‘सौभाग्‍य योजना’ के तहत 10-11 महीनों के भीतर ही डेढ़ करोड़ से अधिक परिवारों को रोशनी की समानता मिली है, उनके घर में बिजली का लट्टू जल रहा है।

सा‍थियो, अंधकार के साथ-साथ खुले में शौच की समस्‍या भी गरिमापूर्ण जीवन के रास्‍ते में एक बहुत बड़ा रोड़ा थी। शौचालय न होने की मजबूरी में जो अपमान वो गरीब भीतर ही भीतर महसूस करता था, वो किसी को बताता नहीं था। विशेषतौर पर मेरी करोड़ों बहन-बेटियां, उनके लिए dignity से जीने के अधिकार का हनन तो था ही, बल्कि जीने के अधिकार को ले करके भी गंभीर सवाल था। बीते चार वर्षों में देशभर के गांव-शहरों में जो सवा नौ करोड़ से अधिक toilet बने हैं, इससे गरीब बहनों-भाइयों के लिए स्‍वच्‍छता के अलावा सम्‍मान के साथ जीवन का अधिकार भी सुनिश्चित हुआ है। और उत्‍तर प्रदेश की सरकार ने तो, उत्‍तर प्रदेश सरकार ने तो शौचालय को ‘इज्‍जतघर’ नाम दिया है। हर शौचालय के ऊपर लिखते हैं ‘इज्‍जतघर’।

गरीब के जीवन, उसके स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ा एक और अधिकार, जो हाल में ही मिला है और जिसका जिक्र श्रीमान राजनाथ जी ने किया, वो है PMJAY यानी आयुष्‍मान भारत योजना। ये कितना बड़ा अधिकार है इसका प्रमाण आपको हर रोज मिल रहा है। मीडिया में देश के कोने-कोने से आ रही खबरें बहुत संतोष देने वाली हैं। बेहतरीन अस्‍पतालों की सुविधा होने के बाद भी जो व्‍यक्ति संसाधन के अभाव में अच्‍छे इलाज से वंचित था उसको आज इलाज का हक मिला है।Launch होने के सिर्फ दो-ढाई हफ्ते के भीतर ही 50 हजार से अधिक बहन-भाइयों का इलाज या तो हो चुका है या इलाज चल रहा है।

सा‍थियो, स्‍वास्‍थ्‍य के साथ-साथ आजादी के अनेक दशकों तक करोड़ों देशवासियों की आर्थिक आजादी एक छोटे से दायरे में सीमित थी। सिर्फ कुछ लोग बैंक का उपयोग कर पा रहे थे, ऋण ले पा रहे थे। लेकिन बहुत बड़ी आबादी अपनी छोटी-छोटी बचत भी रसोई के डिब्‍बे में छुपाने के लिए मजबूर थी। हमने स्थिति की गंभीरता को समझा। ‘जनधन अभियान’ चलाया। और आज देखते ही देखते करीब 35 करोड़ जनों को बैंक से जोड़ा, आर्थिक आजादी के अधिकार को सुनिश्चित किया।

इतना ही नहीं ‘मुद्रा योजना’ के माध्‍यम से उन लोगों को स्‍वरोजगार के लिए बैंकों से गारंटी फ्री लोन दिया जा रहा है जो कभी सिर्फ साहूकारों पर निर्भर हुआ करते थे।

भाइयो और बहनों, हमारी सरकार ने कानून के माध्‍यम से अपनी सरकार की नीति और निर्णयों में भी निरंतर मानव अधिकारों को सुनिश्चित किया है। उन्‍हें और मजबूत करने का प्रयास किया है। अभी हाल ही में मुस्लिम महिलाओं को ‘तीन तलाक’ से मुक्ति दिलाने वाला कानून इस कड़ी का हिस्‍सा है। मुझे उम्‍मीद है कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों से जुड़े इस अहम प्रयास को संसद द्वारा भी स्‍वीकृति मिलजाएगी।

गर्भवती महिलाओं को वेतन के साथ मिलने वाले अवकाश को 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते करने का फैसला भी हमारी इसी सोच का नतीजा है। एक प्रकार से वो नवजात शिशु के अधिकार की हमने रक्षा की है। उसके पास उसकी मां 6 महीने तक रह पाएं, ये अपने-आप में बड़ा निर्णय है। दुनिया की progressive countries में भी अभी ये होना बाकी है।

हमारी महिलाओं को night shift में काम करने में आने वाली कानूनी अड़चनों को दूर करने और इस दौरान उन्‍हें पर्याप्‍त सुरक्षा मिले, ये काम भी इस सरकार ने ही किया है।

दिव्‍यांगों के अधिकार को बढ़ाने वाला ‘Rights of Person with Disabilities’ Act’ उनके लिए नौकरियों में आरक्षण बढ़ाना हो या फिर Transgender Persons Protection of Rights Bill, ये मानव अधिकारों के प्रति हमारी सरकार की प्रतिबद्धता के उदाहरण हैं।

एचआईवी पीड़ित लोगों के साथ किसी तरह का भेदभाव न हो, उन्‍हेंसमान उपचार मिले, उसे भी कानून द्वारा सुनिश्चित करने का काम हमने किया है।

साथियो, न्‍याय पाने के अधिकार को और मजबूत करने के लिए सरकार e-courts की संख्‍या बढ़ा रही है, national judicial data grid को सशक्‍तकर रही है। National judicial data grid से अब तक देश की 17 हजार से ज्‍यादा अदालतों को जोड़ा जा चुका है। केस से संबंधित जानकारियां, फैसलों से जुड़ी जानकारियां ऑनलाइन होने से न्‍याय प्रक्रिया में और तेजी आई है और लंबित मामलों की संख्‍या में कमी आई है। देश के दूर-दराज वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को tele-law scheme के माध्‍यम से कानूनी सहायता भी दी जा रही है।

भाइयो और बहनों, नागरिकों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए सरकार आधुनिक टेक्‍नोलॉजी के इस्‍तेमाल और व्‍यवस्‍था में पारदर्शिता बढ़ाने पर निरंतर जोर दे रही है। UIDAI act, इसे लाकर सरकार ने न सिर्फ आधार को कानूनी रूप से मजबूत किया है बल्कि आधार का उपयोग बढ़ाकर देश के गरीबों तक सरकार योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाने का प्रयास सफलतापूर्वक किया है।

आधार एक तरह से देश का सबसे बड़ा टेक्‍नोलॉजी आधारित सशक्तिकरण कार्यक्रम बन गया है। हाल ही में सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने सरकार के कार्यों की प्रशंसा भी की है। इसी तरह public distribution system को टेक्‍नोलॉजी द्वारा पारदर्शी बनाकर सरकार ने गरीबों को सस्‍ताअनाज मिलना सुनिश्चित किया है। वरना, पहले क्‍या होता था, कैसे होता था, ये भी हम सभी भलीभांति जानते हैं।

इसी तरह लोगों को अपने अधिकार प्राप्‍त करने में दिक्‍कत न हो, इसके लिए अनेक प्रक्रियाओं को भी सुधारा गया है, अनेक नियमों में भी बदलाव किया गया है।Self attestation को बढ़ावा देना या फिर भारतीय सशस्‍त्र सेनाओं में Short Service Commissionके माध्‍यम से नियुक्‍त महिला अधिकारियों को पुरुष समकक्षों की तरह स्‍थाई कमीशन का फैसला सरकार की इसी approach का हिस्‍सा है।

नियमों में ऐसे बहुत छोटे-छोटे बदलावों ने बहुत बड़े स्‍तर पर प्रभाव डाला है। जैसे बांस की परिभाषा बदलने की वजह से देश में दूर-दराज वाले इलाकों में रहने वाले आदिवासी भाई-बहनों को अब बांस काटने और बांस के परिवहन का अधिकार मिला है। इससे उनकी आय वृद्धि पर व्‍यापक असर पड़ रहा है।

सा‍थियो, सबको कमाई, सबको पढ़ाई, सबको दवाई और सबकी सुनवाई, इस लक्ष्‍य के साथ ऐसे अनेक काम हुए हैं जिससे करोड़ों भारतीय भीषण गरीबी से बाहर निकल रहे हैं। देश बहुत तेज गति से मध्‍यम वर्ग की बहुत बड़ी व्‍यवस्‍था की तरफ बढ़ रहा है। ये सफलता अगर मिली है तो उसके पीछे सरकार के प्रयास तो हैं ही, उससे भी अधिक जन-भागीदारी है। देश के करोड़ों लोगों ने अपने कर्तव्‍यों को समझा है। अपने व्‍यवहार में परिवर्तन के लिए खुद को प्रेरित किया है।

भाइयो और बहनों, हमारे फैसले, हमारे कार्यक्रम तभी स्‍थाई रूप से सफल हो सकते हैं अगर जनता उनसे जुड़ती है। मैं अपने अनुभव के आधार पर कह सकता हूं कि जन-भागीदारी से बड़ा सफलता का मंत्र कुछ भी नहीं हो सकता।

मुझे बताया गया है कि अपने रजत जयंती समारोह के दौरान NHRC द्वारा देशभर में जन-जागरण के अनेक अभियान चलाए गए हैं। इसमें तकनीक की मदद भी ली जा रही है। थोड़ी देर पहले ही एक डाक टिकट का लोकार्पण किया गया। NHRC की website के नए version को भी launch किया गया है। इससे उन लोगों को निश्चित रूप से सुविधा होगी जिनको मदद की आवश्‍यकता है। मेरा सुझाव है कि सोशल मीडिया के माध्‍यम से भी NHRC व्‍यापक प्रचार-प्रसार का लाभ उठाएं। मानव अधिकारों के प्रति जागरूकता तो जरूरी है ही, साथ में नागरिकों को उनके कर्तव्‍यों, उनके दायित्‍वों की याद दिलाना भी उतना ही जरूरी है। जो व्‍यक्ति अपने दायित्‍वों को समझता है, वो दूसरे के अधिकारों का भीसम्‍मान करना जानता है।

मुझे ये भी एहसास है कि आपके पास बहुत बड़ी संख्‍या में शिकायतें आती हैं, जिनमें कई गंभीर भी होती हैं। आप हर शिकायत की सुनवाई करते हैं, उनका निपटारा करते हैं। लेकिन क्‍या ये संभव है कि

जिस वर्ग या जिस क्षेत्र से जुड़ी शिकायतें आती हैं, उनके बारे में एक databaseतैयार हो, उसका एक विस्‍तृत अध्‍ययन किया जाए। मुझे विश्‍वास है कि इस प्रक्रिया के दौरान कई ऐसी समस्‍याएं भी मिलेंगी जिनका एक व्‍यापक समाधान संभव है।

Sustainable Development Goalsहासिल करने के लिए आज सरकार जो भी प्रयास कर रही है, उसमें NHRC की भूमिका बहुत महत्‍वपूर्ण है। आपके सुझावों का सरकार ने हमेशा स्‍वागत किया है। देश के लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए, उनके अधिकार सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिपल प्रतिबद्ध है। एक बार फिर NHRC को, आप सभी कोSilver Jubileeके इस अवसर पर बहुत-बहुत बधाई देता हूं, बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। देश में रचनात्‍मक परिवर्तन के लिए हम सभी मिलकर आगे बढ़ते रहेंगे।

इसी कामना के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

'మన్ కీ బాత్' కోసం మీ ఆలోచనలు మరియు సలహాలను ఇప్పుడే పంచుకోండి!
సేవా ఔర్ సమర్పన్ యొక్క 20 సంవత్సరాల నిర్వచించే 20 చిత్రాలు
Explore More
జమ్మూ కశ్మీర్ లోని నౌషేరాలో దీపావళి సందర్భంగా భారత సాయుధ బలగాల సైనికులతో ప్రధాన మంత్రి సంభాషణ పాఠం

ప్రముఖ ప్రసంగాలు

జమ్మూ కశ్మీర్ లోని నౌషేరాలో దీపావళి సందర్భంగా భారత సాయుధ బలగాల సైనికులతో ప్రధాన మంత్రి సంభాషణ పాఠం
Indian economy shows strong signs of recovery, upswing in 19 of 22 eco indicators

Media Coverage

Indian economy shows strong signs of recovery, upswing in 19 of 22 eco indicators
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Double engine government doubles the speed of development works: PM Modi
December 07, 2021
షేర్ చేయండి
 
Comments
Inaugurates AIIMS, Fertilizer Plant and ICMR Centre
Double engine Government doubles the speed of Developmental works: PM
“Government that thinks of deprived and exploited, works hard as well get results”
“Today's event is evidence of determination new India for whom nothing is impossible”
Lauds UP Government for the work done for the benefit of sugarcane farmers

भारत माता की –  जय, भारत माता की –  जय, धर्म अध्यात्म अउर क्रांति क नगरी गोरखपुर क, देवतुल्य लोगन के हम प्रणाम करत बानी। परमहंस योगानंद, महायोगी गोरखनाथ जी, वंदनीय हनुमान प्रसाद पोद्दार जी, अउर महा बलीदानी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल क,ई पावन धरती के कोटि-कोटि नमन। आप सब लोग जवने खाद कारखाना, अउर एम्स क बहुत दिन से इंतजार करत रहली ह, आज उ घड़ी आ गईल बा ! आप सबके बहुत-बहुत बधाई।

मेरे साथ मंच पर उपस्थित उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल जी, उत्तर प्रदेश के यशस्वी कर्मयोगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डॉक्टर दिनेश शर्मा, भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष श्री स्वतंत्रदेव सिंह जी, अपना दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष और मंत्रिमंडल में हमारी साथी, बहन अनुप्रिया पटेल जी, निषाद पार्टी के अध्यक्ष भाई संजय निषाद जी, मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी श्री पंकज चौधरी जी, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री श्री जयप्रताप सिंह जी, श्री सूर्य प्रताप शाही जी, श्री दारा सिंह चौहान जी, स्वामी प्रसाद मौर्या जी, उपेंद्र तिवारी जी, सतीश द्विवेदी जी, जय प्रकाश निषाद जी, राम चौहान जी, आनंद स्वरूप शुक्ला जी, संसद में मेरे साथीगण, यूपी विधानसभा और विधान परिषद के सदस्यगण, और विशाल संख्या में हमें आर्शीवाद देने के लिए आए हुए मेरे प्यारे भाइयों और बहनों!

जब मैं मंच पर आया तो मैं सोच रहा था ये भीड़ है। यहां नजर भी नहीं पहुंच रही है। लेकिन जब उस तरफ देखा तो मैं हैरान हो गया, इतनी बड़ी तादाद में लोग और में नहीं मानता हूं शायद उनको दिखाई भी नहीं देता होगा, सुनाई भी नहीं देता होगा। इतने दूर-दूर लोग झंडे हिला रहे हैं। ये आपका प्यार, ये आपके आर्शीवाद हमें आपके लिए दिन-रात काम करने की प्रेरणा देते हैं, ऊर्जा देते हैं, ताकत देते हैं। 5 साल पहले मैं यहां एम्स और खाद कारखाने का शिलान्यास करने आया था। आज इन दोनों का एक साथ लोकार्पण करने का सौभाग्य भी आपने मुझे ही दिया है। ICMR के रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर को भी आज अपनी नई बिल्डिंग मिली है। मैं यूपी के लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

गोरखपुर में फर्टिलाइजर प्लांट का शुरू होना, गोरखपुर में एम्स का शुरू होना, अनेक संदेश दे रहा है। जब डबल इंजन की सरकार होती है, तो डबल तेजी से काम भी होता है। जब नेक नीयत से काम होता है, तो आपदाएं भी अवरोध नहीं बन पातीं। जब गरीब-शोषित-वंचित की चिंता करने वाली सरकार होती है, तो वो परिश्रम भी करती है, परिणाम भी लाकर दिखाती है। गोरखपुर में आज हो रहा आयोजन, इस बात का भी सबूत है कि नया भारत जब ठान लेता है, तो इसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है।

साथियों,

जब 2014 में आपने मुझे सेवा का अवसर दिया था, तो उस समय देश में फर्टिलाइजर सेक्टर बहुत बुरी स्थिति में था। देश के कई बड़े- बड़े खाद कारखाने बरसों से बंद पड़े थे, और विदेशों से आयात लगातार बढ़ता जा रहा था। एक बड़ी दिक्कत ये भी थी कि जो खाद उपलब्ध थी, उसका इस्तेमाल चोरी-छिपे खेती के अलावा और भी कामों में गुप-चुप चला जाता था। इसलिए देशभर में यूरिया की किल्लत तब सुर्खियों में रहा करती थी, किसानों को खाद के लिए लाठी-गोली तक खानी पड़ती थी। ऐसी स्थिति से देश को निकालने के लिए ही हम एक नए संकल्प के साथ आगे बढ़े। हमने तीन सूत्रों पर एक साथ काम करना शुरू किया। एक-    हमने यूरिया का गलत इस्तेमाल रोका, यूरिया की 100 प्रतिशत नीम कोटिंग की। दूसरा-   हमने करोड़ों किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड दिए, ताकि उन्हें पता चल सके कि उनके खेत को किस तरह की खाद की जरूरत है और तीसरा-  हमने यूरिया के उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया। बंद पड़े फर्टिलाइजर प्लांट्स को फिर से खोलने पर हमने ताकत लगाई। इसी अभियान के तहत गोरखपुर के इस फर्टिलाइजर प्लांट समेत देश के 4 और बड़े खाद कारखाने हमने चुने। आज एक की शुरुआत हो गई है, बाकी भी अगले वर्षों में शुरू हो जाएंगे।

साथियों,

गोरखपुर फर्जिलाइजर प्लांट को शुरू करवाने के लिए एक और भगीरथ कार्य हुआ है। जिस तरह से भगीरथ जी, गंगा जी को लेकर आए थे,वैसे ही इस फर्टिलाइजर प्लांट तक ईंधन पहुंचाने के लिए ऊर्जा गंगा को लाया गया है। पीएम ऊर्जा गंगा गैस पाइपलाइन परियोजना के तहत हल्दिया से जगदीशपुर पाइपलाइन बिछाई गई है। इस पाइपलाइन की वजह से गोरखपुर फर्टिलाइजर प्लांट तो शुरू हुआ ही है, पूर्वी भारत के दर्जनों जिलों में पाइप से सस्ती गैस भी मिलने लगी है।

भाइयों और बहनों,

फर्टिलाइजर प्लांट के शिलान्यास के समय मैंने कहा था कि इस कारखाने के कारण गोरखपुर इस पूरे क्षेत्र में विकास की धुरी बनकर उभरेगा। आज मैं इसे सच होते देख रहा हूं। ये खाद कारखाना राज्य के अनेक किसानों को पर्याप्त यूरिया तो देगा ही, इससे पूर्वांचल में रोज़गार और स्वरोज़गार के हजारों नए अवसर तैयार होंगे। अब यहां आर्थिक विकास की एक नई संभावना फिर से पैदा होगी, अनेक नए बिजनेस शुरू होंगे। खाद कारखाने से जुड़े सहायक उद्योगों के साथ ही ट्रांसपोर्टेशन और सर्विस सेक्टर को भी इससे बढ़ावा मिलेगा।

साथियों,

गोरखपुर खाद कारखाने की बहुत बड़ी भूमिका, देश को यूरिया के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में भी होगी। देश के अलग-अलग हिस्सों में बन रहे 5 फर्टिलाइजर प्लांट शुरू होने के बाद 60 लाख टन अतिरिक्त यूरिया देश को मिलेगा। यानि भारत को हजारों करोड़ रुपए विदेश नहीं भेजने होंगे, भारत का पैसा, भारत में ही लगेगा।

साथियों,

खाद के मामले में आत्मनिर्भरता क्यों जरूरी है, ये हमने कोरोना के इस संकट काल में भी देखा है। कोरोना से दुनिया भर में लॉकडाउन लगे, एक देश से दूसरे देश में आवाजाही रुक गई, सप्लाई चेन टूट गई। इससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खाद की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ गईं। लेकिन किसानों के लिए समर्पित और संवेदनशील हमारी सरकार ने ये सुनिश्चित किया कि दुनिया में फर्टिलाइज़र के दाम भले बढ़ें, बहुत बढ़ गए लेकिन वे बोझ हम किसानों की तरफ नहीं जाने देंगे। किसानों को कम से कम परेशानी हो। इसकी हमने जिम्मेवारी ली है। आप हैरान हो जाएंगे सुनके भाईयो- बहनों,  इसी साल N.P.K. फर्टिलाइज़र के लिए दुनिया में दाम बढने के कारण 43 हज़ार करोड़ रुपए से ज्यादा सब्सिडी हमें किसानों के लिए बढ़ाना आवश्यक हुआ और हमने किया। यूरिया के लिए भी सब्सिडी में हमारी सरकार ने 33 हज़ार करोड़ रुपए की वृद्धि की। क्यों, कि दुनिया में दाम बढ़े उसका बोझ हमारे किसानों पर न जाये। अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में जहां यूरिया 60-65 रुपए प्रति किलो बिक रहा है, वहीं भारत में किसानों को यूरिया 10 से 12 गुना सस्ता देने का प्रयास है।

भाइयों और बहनों,

आज खाने के तेल को आयात करने के लिए भी भारत, हर साल हज़ारों करोड़ रुपए विदेश भेजता है। इस स्थिति को बदलने के लिए देश में ही पर्याप्त खाद्य तेल के उत्पादन के लिए राष्ट्रीय मिशन शुरु किया गया है। पेट्रोल-डीजल के लिए कच्चे तेल पर भी भारत हर वर्ष 5-7 लाख करोड़ रुपए खर्च करता है। इस आयात को भी हम इथेनॉल और बायोफ्यूल पर बल देकर कम करने में जुटे हैं। पूर्वांचल का ये क्षेत्र तो गन्ना किसानों का गढ़ है। इथेनॉल, गन्ना किसानों के लिए चीनी के अतिरिक्त कमाई का एक बहुत बेहतर साधन बन रहा है। उत्तर प्रदेश में ही बायोफ्यूल बनाने के लिए अनेक फैक्ट्रियों पर काम चल रहा है। हमारी सरकार आने से पहले यूपी से सिर्फ 20 करोड़ लीटर इथेनॉल, तेल कंपनियों को भेजा जाता था। आज करीब-करीब 100 करोड़ लीटर इथेलॉन, अकेले उत्तर प्रदेश के किसान, भारत की तेल कंपनियों को भेज रहे हैं। पहले खाड़ी का तेल आता था। अब झाड़ी का भी तेल आने लगा है।  मैं आज योगी जी सरकार की इस बात के लिए सराहना करूंगा कि उन्होंने गन्ना किसानों के लिए बीते सालों में अभूतपूर्व काम किया है। गन्ना किसानों के लिए लाभकारी मूल्य, हाल में साढ़े 3 सौ रुपए तक बढ़ाया है। पहले की 2 सरकारों ने 10 साल में जितना भुगतान गन्ना किसानों को किया था, लगभग उतना योगी जी की सरकार ने अपने साढ़े 4 साल में किया है।

भाइयों और बहनों,

सही विकास वही होता है, जिसका लाभ सब तक पहुंचे, जो विकास संतुलित हो, जो सबके लिए हितकारी हो। और ये बात वही समझ सकता है, जो संवेदनशील हो, जिसे गरीबों की चिंता हो। लंबे समय से गोरखपुर सहित ये बहुत बड़ा क्षेत्र सिर्फ एक मेडिकल कॉलेज के भरोसे चल रहा था। यहां के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को इलाज के लिए बनारस या लखनऊ जाना पड़ता था। 5 साल पहले तक दिमागी बुखार की इस क्षेत्र में क्या स्थिति थी, ये मुझसे ज्यादा आप लोग जानते हैं। यहां मेडिकल कॉलेज में भी जो रिसर्च सेंटर चलता था, उसकी अपनी बिल्डिंग तक नहीं थी।

भाइयों और बहनों,

आपने जब हमें सेवा का अवसर दिया, तो यहां एम्स में भी, आपने देखा इतना बड़ा एम्स बन गया। इतना ही नहीं रिसर्च सेंटर की अपनी बिल्डिंग भी तैयार है। जब मैं एम्स का शिलान्यास करने आया था तब भी मैंने कहा था कि हम दिमागी बुखार से इस क्षेत्र को राहत दिलाने के लिए पूरी मेहनत करेंगे। हमने दिमागी बुखार फैलने की वजहों को दूर करने पर भी काम किया और इसके उपचार पर भी। आज वो मेहनत ज़मीन पर दिख रही है। आज गोरखपुर और बस्ती डिविजन के 7 जिलों में दिमागी बुखार के मामले लगभग 90 प्रतिशत तक कम हो चुके हैं। जो बच्चे बीमार होते भी हैं, उनमें से ज्यादा से ज्यादा का जीवन बचा पाने में हमें सफलता मिल रही है। योगी सरकार ने इस क्षेत्र में जो काम किया है, उसकी चर्चा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है। एम्स और ICMR रिसर्च सेंटर बनने से अब इंन्सेफ्लाइटिस से मुक्ति के अभियान को और मजबूती मिलेगी। इससे दूसरी संक्रामक बीमारियों, महामारियों के बचाव में भी यूपी को बहुत मदद मिलेगी।

भाइयों और बहनों,

किसी भी देश को आगे बढ़ने के लिए, बहुत आवश्यक है कि उसकी स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती हों, सर्व सुलभ हों, सबकी पहुंच में हों। वर्ना मैंने भी इलाज के लिए लोगों को एक शहर से दूसरे शहर तक चक्कर लगाते, अपनी जमीन गिरवी रखते, दूसरों से पैसों की उधारी लेते, हमने भी बहुत देखा है। मैं देश के हर गरीब, दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित, चाहे वो किसी भी वर्ग का हो, किसी भी क्षेत्र में रहता हो, इस स्थिति से बाहर निकालने के लिए जी-जान से जुटा हूं। पहले सोचा जाता था कि एम्स जैसे बड़े मेडिकल संस्थान, बड़े शहरों के लिए ही होते हैं। जबकि हमारी सरकार, अच्छे से अच्छे इलाज को, बड़े से बड़े अस्पताल को देश के दूर-सुदूर क्षेत्रों तक ले जा रही है। आप कल्पना कर सकते हैं, आज़ादी के बाद से इस सदी की शुरुआत तक देश में सिर्फ 1 एम्स था, एक। अटल जी ने 6 और एम्स स्वीकृत किए थे अपने कालखंड में। बीते 7 वर्षों में 16 नए एम्स बनाने पर देशभर में काम चल रहा है। हमारा लक्ष्य ये है कि देश के हर जिले में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज जरूर हो। मुझे खुशी है कि यहां यूपी में भी अनेक जिलों में मेडिकल कॉलेज का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। और अभी योगी जी पूरा वर्णन कर रहे थे, कहां मेडिकल कॉलेज का काम हुआ है। हाल में ही यूपी के 9 मेडिकल कॉलेज का एक साथ लोकार्पण करने का अवसर आपने मुझे भी दिया था। स्वास्थ्य को दी जा रही सर्वोच्च प्राथमिकता का ही नतीजा है कि यूपी लगभग 17 करोड़ टीके के पड़ाव पर पहुंच रहा है।

भाइयों और बहनों,

हमारे लिए 130 करोड़ से अधिक देशवासियों का स्वास्थ्य, सुविधा और समृद्धि सर्वोपरि है। विशेष रूप से हमारी माताओं-बहनों-बेटियों की सुविधा और स्वास्थ्य जिस पर बहुत ही कम ध्यान दिया गया। बीते सालों में पक्के घर, शौचालय, जिसको आप लोग इज्जत घर कहते हैं। बिजली, गैस, पानी, पोषण, टीकाकरण, ऐसी अनेक सुविधाएं जो गरीब बहनों को मिली हैं, उसके परिणाम अब दिख रहे हैं। हाल में जो फैमिली हेल्थ सर्वे आया है, वो भी कई सकारात्मक संकेत देता है। देश में पहली बार महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक हुई है। इसमें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की भी बड़ी भूमिका है। बीते 5-6 सालों में महिलाओं का ज़मीन और घर पर मालिकाना हक बढ़ा है। और इसमें उत्तर प्रदेश टॉप के राज्यों में है। इसी प्रकार बैंक खाते और मोबाइल फोन के उपयोग में भी महिलाओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।

साथियों,

आज आपसे बात करते हुए मुझे पहले की सरकारों का दोहरा रवैया, जनता से उनकी बेरुखी भी बार-बार याद आ रही है। मैं इसका जिक्र भी आपसे जरूर करना चाहता हूं। सब जानते थे कि गोरखपुर का फर्टिलाइजर प्लांट, इस पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए, यहां रोजगार के लिए कितना जरूरी था। लेकिन पहले की सरकारों ने इसे शुरू करवाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। सब जानते थे कि गोरखपुर में एम्स की मांग बरसों से हो रही थी। लेकिन 2017 से पहले जो सरकार चला रहे थे, उन्होंने एम्स के लिए जमीन देने में हर तरह के बहाने बनाए। मुझे याद है, जब बात आर या पार की हो गई, तब बहुत बेमन से, बहुत मजबूरी में पहले की सरकार द्वारा गोरखपुर एम्स के लिए जमीन आवंटित की गई थी।

साथियों,

आज का ये कार्यक्रम, उन लोगों को भी करारा जवाब दे रहा है, जिन्हें टाइमिंग पर सवाल उठाने का बहुत शौक है। जब ऐसे प्रोजेक्ट पूरे होते हैं, तो उनके पीछे बरसों की मेहनत होती है, दिन रात का परिश्रम होता है। ये लोग कभी इस बात को नहीं समझेंगे कि कोराना के इस संकट काल में भी डबल इंजन की सरकार विकास में जुटी रही, उसने काम रुकने नहीं दिया।

मेरे प्यारे भाईयों - बहनों,

लोहिया जी, जय प्रकाश नारायण जी के आदर्शों को, इन महापुरुषों के अनुशासन को ये लोग कब से छोड़ चुके हैं। आज पूरा यूपी भलिभांति जानता है कि लाल टोपी वालों को लाल बत्ती से मतलब रहा है, उनको आपके दुख-तकलीफ से कोई लेना देना नहीं है। ये लाल टोपी वालों को सत्ता चाहिए, घोटालों के लिए, अपनी तिजोरी भरने के लिए, अवैध कब्जों के लिए, माफियाओं को खुली छूट देने के लिए। लाल टोपी वालों को सरकार बनानी है, आतंकवादियों पर मेहरबानी दिखाने के लिए, आतंकियों को जेल से छुड़ाने के लिए। और इसलिए, याद रखिए, लाल टोपी वाले यूपी के लिए रेड अलर्ट हैं, रेल अलर्ट। यानि खतरे की घंटी है!

साथियों,

यूपी का गन्ना किसान नहीं भूल सकता है कि योगी जी के पहले की जो सरकार थी उसने कैसे गन्ना किसानों को पैसे के भुगतान में रुला दिया था। किश्तों में जो पैसा मिलता था उसमें भी महीनों का अंतर होता था। उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों को लेकर कैसे-कैस खेल होते थे, क्या-क्या घोटाले किए जाते थे इससे पूर्वांचल और पूरे यूपी के लोग अच्छी तरह परिचित है।

साथियों,

हमारी डबल इंजन की सरकार, आपकी सेवा करने में जुटी है, आपका जीवन आसान बनाने में जुटी है। भाईयों – बहनों आपको विरासत में जो मुसीबतें मिली हैं। हम नहीं चाहते हैं कि आपको ऐसी मुसीबतें विरासत में आपके संतानों को देने की नौबत आये। हम ये बदलाव लाना चाहते हैं। पहले की सरकारों के वो दिन भी देश ने देखे हैं जब अनाज होते हुए भी गरीबों को नहीं मिलता था। आज हमारी सरकार ने सरकारी गोदाम गरीबों के लिए खोल दिए हैं और योगी जी पूरी ताकत से हर घर अन्न पहुंचाने में जुटे हैं। इसका लाभ यूपी के लगभग 15 करोड़ लोगों को हो रहा है। हाल ही में पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना को, होली से आगे तक के लिए बढ़ा दिया गया है।

साथियों,

पहले बिजली सप्लाई के मामले में यूपी के कुछ जिले VIP थे, VIP। योगी जी ने यूपी के हर जिले को आज VIP बनाकर बिजली पहुंचाने का काम किया है।आज योगी जी की सरकार में हर गांव को बराबर और भरपूर बिजली मिल रही है। पहले की सरकारों ने अपराधियों को संरक्षण देकर यूपी का नाम बदनाम कर दिया था। आज माफिया जेल में हैं और निवेशक दिल खोल कर यूपी में निवेश कर रहे हैं। यही डबल इंजन का डबल विकास है। इसलिए डबल इंजन की सरकार पर यूपी को विश्वास है। आपका ये आशीर्वाद हमें मिलता रहेगा, इसी अपेक्षा के साथ एक बार फिर से आप सबको बहुत-बहुत बधाई।मेरे साथ जोर से बोलिये, भारत माता की जय ! भारत माता की जय ! भारत माता की जय ! बहुत – बहुत धन्यवाद।