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"CM speaks at the launch of series of health schemes for the state. "
"I want to assure the poor that even in their worst illness, the state Government is with them: Shri Modi"
"When one calls 108 he or she is not asked if they are Hindu or Muslim, rich or poor, urban or rural, upper caste or not. I feel very glad when people tell me 108 saved my husband or my son: Shri Modi "
"As Gujarat is shining, some sections are getting sore about it: Shri Modi "
"Lok Bhagidari is key to Gujarat’s success and our people are 2 steps ahead of the Government: Shri Modi "
"Shri Modi seeks active support for Gutka Mukti Abhiyan. Asks people to give missed call on 8000980009 and save youth from cancer."

On the morning of 4th September 2012, Shri Narendra Modi inaugurated a series of heath schemes and initiatives of the Gujarat Government. Shri Modi shared some of the steps taken by the state towards creating a healthier Gujarat and sought people’s support in the Gutka Mukti Abhiyan.

The schemes that are launched are the Mukhyamantri Amrutam Yojana, (which provides poor patients with health protection cover up to Rs. 2 lakhs), the Gujarat Medical Services Corporation and ‘Khilkhilat’, that celebrates the homecoming  of infants and mothers are the delivery. 

The Chief Minister spoke about how latest technology has been used in creating smart cards that will enable the poor of Gujarat to avail of health care treatment during times of illness. Shri Modi assured the poor that even in their worst illness, the Government is with them. He added that such initiatives are usually associated with the West but today, Gujarat has achieved the same in the state.

Shri Modi remarked that when the rich fall ill, there are lines of doctors outside their homes but the same is not the case with the poor. That is why the Government has taken these steps, to ensure the best health of each and every citizen of the state.

Talking about the 108 Ambulance Service, Shri Modi stated that a 108 Ambulance does not ask if you are Hindu or Muslim, rich or poor, urban or rural, upper caste or not, but it is there only to serve the people. Shri Modi said he experiences deep joy when people call him and say that the 108 services has saved their sons, husbands etc.

Talking about the schemes, Shri Modi stated that these initiatives worth Rs. 200 crore that are being dedicated to the people are not instant schemes. It is not as if they appeared all of a sudden but have been accounted for in the year’s Budget. Shri Modi said that these were not mere announcements but their implementation! Shri Modi spoke of a work culture that has made a qualitative difference in ensuring better health facilities for the people.

On the Corporation for Medical Services, the Chief Minister said that too has been accounted for in the last Budget.

Shri Modi affirmed that while Gujarat is shining, others are getting sore creating bankruptcy of ideas among many sections. He said that being an election year, everything is seen through the prism of politics due to which knowledge of many good initiatives fail to reach the people and that is why such a programme has been organized.

Shri Modi sought support in the Gutka Mukti Abhiyan and asked everyone to give a missed call of 8000980009. 

He said that Lok Bhagidari is the key to success and in case of Gujarat, he can say with confidence that the people are two steps ahead of the Government in this regard.

Cabinet Ministers Smt. Anandiben Patel, Shri Jay Narayan Vyas, other dignitaries and officials were present on the occasion.

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PM's speech at the launch of e-RUPI digital payment solution
August 02, 2021
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e-RUPI voucher is going to play a major role in strengthening the DBT scheme: PM Modi
e-RUPI will help in assuring targeted, transparent and leakage-free delivery for all: PM Modi
e-RUPI is a person as well as a purpose-specific payment platform: PM Modi

नमस्‍कार,

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में देशभर से जुड़े सभी राज्‍यपाल महोदय, लेफ्टिनेंट गवर्नर्स, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथीगण, रिजर्व बैंक के गवर्नर, राज्यों के मुख्य सचिव, अलग अलग Industry Associations से जुड़े साथी गण, Start Up, FinTech की दुनिया से जुड़े मेरे युवा साथी, बैंकों के वरिष्ठ अधिकारीगण और मेरे प्‍यारे भाइयों और बहनों,

आज देश, डिजिटल गवर्नेंस को एक नया आयाम दे रहा है। e-RUPI वाउचर, देश में Digital Transaction को, DBT को और प्रभावी बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाने वाला है। इससे Targeted, Transparent और Leakage Free Delivery में सभी को बड़ी मदद मिलेगी। 21वीं सदी का भारत, आज कैसे आधुनिक टेक्नोलॉजी की मदद से आगे बढ़ रहा है, टेक्नोलॉजी को लोगों के जीवन से जोड़ रहा है, e-RUPI उसका भी एक प्रतीक है। और मुझे खुशी है कि ये शुरुआत, उस समय हो रही है, जब देश आजादी के 75 वर्ष पर अमृत महोत्सव मना रहा है। और ऐसे समय में देश ने Futuristic Reform का एक और अहम कदम बढ़ाया है।

साथियों,

सरकार ही नहीं, अगर कोई सामान्य संस्था या संगठन किसी के इलाज में, किसी की पढाई में या दूसरे काम के लिए कोई मदद करना चाहता है तो, वो कैश के बजाय e-RUPI दे पाएगा। इससे सुनिश्चित होगा कि उसके द्वारा दिया गया धन, उसी काम में लगा है, जिसके लिए वो राशि दी गई है। अभी शुरुआती चरण में ये योजना देश के हेल्थ सेक्टर से जुड़े बेनिफिट्स पर लागू की जा रही है।

मान लीजिए, कोई ऑर्गनाइजेशन, सेवा भाव से, सरकार, भारत सरकार के द्वारा जो मुफ्त वैक्‍सीन दे जा रही है उसका लाभ लेना नहीं चाहता है, लेकिन जो प्राइवेट अस्‍पतालों में जहां कुछ कीमत दे करके वैक्‍सीन चल रही है, उसमें भेजना चाहता है। अगर वो 100 गरीबों को वैक्‍सीन लगवाने की उसकी इच्‍छा है तो वो उन 100 गरीबों को e-RUPI वाउचर दे सकता है। e-RUPI वाउचर ये सुनिश्चित करेगा कि उसका इस्तेमाल वैक्सीन लगवाने में ही हो, किसी औऱ काम में नहीं। समय के साथ इसमें और भी चीजें जुड़ती चली जाएंगी। जैसे कोई किसी के इलाज पर खर्च करना चाहता है, कोई टीबी के मरीज को सही दवाओं और भोजन के लिए आर्थिक मदद देना चाहता है, या फिर बच्चों को, गर्भवती महिलाओं को भोजन और पोषण से जुड़ी दूसरी सुविधाएं पहुंचाना चाहता है, तो e-RUPI उनके लिए बहुत मददगार साबित होगा। यानि e-RUPI, एक तरह से Person के साथ-साथ Purpose Specific भी है।

जिस मकसद से कोई मदद या कोई बेनिफिट दिया जा रहा है, वो उसी के लिए प्रयोग होगा, ये e-RUPI सुनिश्चित करने वाला है। कोई अब अगर चाहेगा कि वो वृद्धाश्रम में 20 नए बेड लगवाना चाहता है, तो e-RUPI वाउचर उसकी मदद करेगा।

कोई किसी क्षेत्र में 50 गरीबों के लिए भोजन की व्यवस्था करना चाहता है, तो e-RUPI वाउचर उसकी मदद करेगा। अगर कोई गौशाला में चारे की व्यवस्था करना चाहता है, तो e-RUPI वाउचर उसकी भी मदद करेगा।

इसे अब अगर राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में देखें तो, अगर सरकार द्वारा किताबों के लिए पैसा भेजा गया है, तो e-RUPI ये सुनिश्चित करेगा कि किताबें ही खरीदी जाएं। अगर यूनिफॉर्म के लिए पैसा भेजा है, तो उससे यूनिफॉर्म ही खरीदी जाए।

अगर सब्सिडाइज्ड खाद के लिए मदद दी है, तो वो खाद खरीदने के ही काम आए। गर्भवती महिलाओं के लिए दिए गए कैश से सिर्फ पोषक आहार ही खरीदा जा सके। यानि पैसा देने के बाद, हम उसका जो इस्तेमाल चाहते हैं, e-RUPI वाउचर उसे सिद्ध करेगा।

साथियों,

पहले हमारे देश में कुछ लोग चाहते थे और वो कहते भी थे कि technology तो केवल अमीरों की चीज है, भारत तो गरीब देश है, इसलिए भारत के लिए टेक्नोलॉजी का क्या काम? जब हमारी सरकार technology को mission बनाने की बात करती थी तो बहुत से राजनेता, कुछ खास किस्म के एक्सपर्ट्स उस पर सवाल खड़ा करते थे। लेकिन आज देश ने उन लोगों की सोच को नकारा भी है, और गलत भी साबित किया है।

आज देश की सोच अलग है, नई है। आज हम technology को गरीबों की मदद के, उनकी प्रगति के एक टूल के रूप में देख रहे हैं। आज दुनिया देख रही है-कैसे भारत में technology पारदर्शिता और ईमानदारी ला रही है! कैसे technology नए अवसरों को पैदा करने में, उन्हें गरीबों को सुलभ बनाने का काम कर रही है। और कैसे technology सरकार और लालफीता-शाही पर सामान्य मानवी की निर्भरता को कम कर रही है।

आप आज के ही unique product को देखिए, आज हम यहाँ तक इसलिए पहुंचे हैं क्योंकि देश ने जनधन खातों को खोलने, उन्हें मोबाइल और आधार से जोड़ने, और JAM जैसी व्यवस्था के लिए वर्षों मेहनत की है। जब JAM को शुरू किया गया था तब बहुत से लोग इसके महत्व को नहीं समझ पा रहे थे। लेकिन इसकी अहमियत को हमने लॉकडाउन के समय देखा। जब दुनिया के बड़े बड़े देश परेशान थे कि लॉकडाउन में कैसे अपने गरीबों की मदद करें। लेकिन भारत के पास एक पूरी व्यवस्था तैयार थी। दूसरे देश अपने यहां के पोस्ट ऑफिस और बैंक खुलवा रहे थे तो वहीं भारत, महिलाओं के बैंक खातों में सीधे आर्थिक मदद भेज रहा था।

भारत में अब तक Direct benefit transfer के जरिए करीब साढ़े सत्रह लाख करोड़ रुपए सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजे जा चुके हैं। आज केंद्र सरकार 3 सौ से ज्यादा योजनाओं का लाभ डीबीटी के माध्यम से लोगों तक पहुंचा रही है। लगभग 90 करोड़ देशवासियों को इसके तहत किसी ना किसी रूप में लाभ हो रहा है। राशन हो, एलपीजी गैस हो, इलाज हो, स्कॉलरशिप हो, पेंशन हो, मज़दूरी हो, घर बनाने के लिए मदद हो, ऐसे अनेक लाभ डीबीटी से मिल रहे हैं। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 1 लाख 35 हज़ार करोड़ रुपए सीधे किसानों के बैंक अकाउंट में पहुंचाए गए हैं। इस बार तो किसानों से जो गेहूं की सरकारी खरीद हुई है, उसका लगभग 85 हज़ार करोड़ रुपए सीधा किसानों के बैंक खातों में ही ट्रांसफर किया गया है। इन सारे प्रयोगों का बहुत बड़ा लाभ ये हुआ है कि देश के क़रीब क़रीब पौने दो लाख करोड़ रुपए से अधिक, गलत हाथों में जाने से बचे हैं।

साथियों,

भारत आज दुनिया को दिखा रहा है कि technology को adopt करने में, उससे जुडने में वो किसी से भी पीछे नहीं हैं। Innovations की बात हो, service डिलीवरी में technology का इस्तेमाल हो, भारत दुनिया के बड़े देशों के साथ मिलकर Global leadership देने की क्षमता रखता है। पिछले 7 सालों में भारत ने अपनी प्रगति को जो गति दी है, उसमें technology के सही इस्तेमाल की बड़ी भूमिका है। आप सोचिए, क्या 8-10 साल पहले किसी ने कल्पना की थी कि टोल बूथ्स पर करोड़ों गाडियाँ बिना किसी फ़िज़िकल transaction के, लेन-देन के निकलेंगी? आज के Fastag से ये संभव हुआ है।

क्या 8-10 साल पहले किसी ने सोचा था कि दूर-सुदूर गांव में बैठा कोई हस्तशिल्पी, अपने प्रॉडक्ट दिल्ली के किसी सरकारी दफ्तर में सीधे बेच पाएगा? आज GeM यानि गवर्नमेंट ई मार्केट प्लेस पोर्टल से ये मुमकिन है।

क्या 8-10 साल पहले किसी ने सोचा था कि हमारे certificates, documents हर समय digitally हमारी जेब में होंगे, और हर जगह एक क्लिक पर इस्तेमाल हो पाएंगे? आज ये Digi-locker से मुमकिन है।

क्या 8-10 साल पहले किसी ने सोचा था कि भारत में MSME सेक्टर के उद्यमियों को सिर्फ 59 मिनट में लोन approve  हो पाएगा। आज भारत में ये भी मुमकिन है। और इसी तरह, 8-10 साल पहले क्या आपने सोचा था कि आप किसी काम के लिए एक डिजिटल वाउचर भेजेंगे, और काम हो जाएगा? आज ये भी e-Rupi के जरिए मुमकिन हो चुका है।

मैं ऐसे कितने ही उदाहरण आपको गिना सकता हूं। इस महामारी के दौरान भी देश ने तकनीक की ताकत को महसूस किया है। आरोग्य सेतु ऐप का उदाहरण भी हमारे सामने है। आज ये ऐप सबसे ज्यादा downloaded apps में से एक है। इसी तरह कोविन पोर्टल भी आज हमारे वैक्सीनेशन प्रोग्राम में, वैक्सीनेशन सेंटर के चयन में, रजिस्ट्रेशन में, वैक्सीन certificate प्राप्त करने में देशवासियों की बड़ी मदद कर रहा है।

पुरानी व्यवस्था चल रही होती तो वैक्सीनेशन लगवाने के बाद सर्टिफिकेट के लिए दौड़ना पड़ रहा होता। दुनिया के कई बड़े देशों में भी आज पेपर पर हाथ से लिखकर सर्टिफिकेट दिये जा रहे हैं। लेकिन भारत के लोग एक क्लिक में डिजिटल सर्टिफिकेट डाउनलोड कर रहे हैं। इसीलिए, आज भारत का कोविन सिस्टम, दुनिया के कई देशों को आकर्षित कर रहा है। भारत इसे दुनिया के साथ साझा भी कर रहा है।

साथियों,

मुझे याद है कि 4 साल पहले जब BHIM app लॉन्च किया गया था, तब मैंने कहा था कि वो दिन दूर नहीं जब अधिकांश बिजनेस ट्रांजेक्शन नोट और सिक्कों के बजाय डिजिटली होंगे। तब मैंने ये भी कहा था कि इस बदलाव से सबसे अधिक गरीबों, वंचितों, छोटे व्यापारियों, किसानों, आदिवासियों का सशक्तिकरण होगा, वो Empower होंगे। आज हम ये साक्षात अनुभव कर रहे हैं। हर महीने UPI Transaction के नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। जुलाई महीने में 300 करोड़ से अधिक Transaction UPI से हुए हैं, जिसमें 6 लाख करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ है। आज चाय, जूस और फल-सब्ज़ी का ठेला लगाने वाले भी इसका उपयोग कर रहे हैं।

वहीं भारत का RuPay कार्ड भी देश का गौरव बढ़ा रहा है। सिंगापुर-भूटान में भी इसे लॉन्च किया जा चुका है। आज देश में 66 करोड़ RuPay कार्ड हैं और देश में हजारों करोड़ रुपए का Transaction RuPay कार्ड से भी हो रहा है। इस कार्ड ने गरीब को भी सशक्त किया है। उसे इस भावना से भरा है कि वो भी अपने पास डेबिट कार्ड रख सकता है, उसका इस्तेमाल कर सकता है।

साथियों,

Technology कैसे गरीबों को सशक्त करती है, इसका एक और उदाहरण है- पीएम स्वनिधि योजना। हमारे देश में जो रेहड़ी-पटरी वाले, ठेला चलाने वाले भाई-बहन हैं, उनके Financial Inclusion के बारे में पहले कभी नहीं सोचा गया था। अपना काम आगे बढ़ाने के लिए उन्हें बैंक से मदद मिलना असंभव था। जब Digital Transaction की कोई हिस्ट्री ही नहीं हो, कोई Document ना हो, तो बैंक से लोन लेने के लिए हमारे रेहड़ी-पटरी वाले साथी, पहला कदम भी नहीं बढ़ा पाते थे। इसी को समझते हुए हमारी सरकार ने पीएम स्वनिधि योजना की शुरुआत की। आज देश के छोटे-बड़े शहरों में, 23 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी और ठेले वालों को इस योजना के तहत मदद दी गई है। इसी कोरोना काल में करीब-करीब 2300 करोड़ रुपए उन्हें दिए गए हैं। ये गरीब साथी अब Digital Transaction कर रहे हैं और अपना लोन चुका रहे हैं। यानि अब उनके लेन-देन की एक Digital History बन रही है।

पीएम स्वनिधि में ये व्यवस्था की गई है कि 10 हजार रुपए का पहला लोन चुकाने पर 20 हजार का दूसरा लोन और दूसरा लोन चुकाने पर 50 हजार का तीसरा लोन रेहड़ी-पटरी वाले साथियों को दिया जाएगा। आपको जानकर खुशी होगी कि आज सैकड़ों रेहड़ी-पटरी और ठेले वाले भाई-बहन अब तीसरा लोन प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

साथियों,

देश में Digital Infrastructure और Digital Transaction के लिए जो काम पिछले 6-7 वर्षों में हुआ है, उसका लोहा आज दुनिया मान रही है। विशेषकर भारत में फिनटेक का बहुत बड़ा आधार तैयार हुआ है। ऐसा आधार तो बड़े-बड़े देशों में भी नहीं है। देशवासियों का पॉजिटिव माइंडसेट, FinTech Solutions को adopt करने की उनकी क्षमता भी असीम है। इसलिए ये आज भारत के युवाओं, भारत के स्टार्ट अप इकोसिस्टम के लिए भी बेहतरीन मौका है। भारत के स्टार्ट अप्स के लिए फिनटेक में अनेकों संभावनाएं हैं।

साथियों,

मुझे विश्वास है कि e-Rupi वाउचर भी सफलता के नए अध्याय लिखेगा। इसमें हमारे बैंकों और दूसरे पेमेंट गेटवे का बहुत बड़ा रोल है। हमारे सैकड़ों प्राइवेट अस्पतालों, कॉर्पोरेट्स, उद्योग जगत, NGOs और दूसरे संस्थानों ने भी इसको लेकर बहुत रुचि दिखाई है। मेरा राज्य सरकारों से भी आग्रह है कि अपनी योजनाओं का सटीक और संपूर्ण लाभ सुनिश्चित करने के लिए e-RUPI का अधिक से अधिक उपयोग करें। मुझे विश्वास है कि हम सभी की ऐसी ही सार्थक साझेदारी एक ईमानदार और पारदर्शी व्यवस्था के निर्माण को और गति देगी।

एक बार फिर सभी देशवासियों को इस बड़े रिफॉर्म के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

धन्यवाद !