PM Narendra Modi launches IDFC Bank
PM Modi compliments IDFC for its successful journey of 18 years
The main aim of this bank is to venture out to the villages: PM Narendra Modi
Our villages have the ability to become great growth centres: PM Modi
From helping to build infrastructure, IDFC is now progressing to building lives: PM
Future of banking would not just be premises-less & paper-less, but also, eventually, currency-less: PM
Govt will bring improvements in appointments at top levels of banks. This improves efficiency: PM

उपस्थित सभी वरिष्‍ठ महानुभाव,

मैं आईडीएफसी बैंक को बधाई देता हूं कि 18 साल की यात्रा कोई बहुत बड़ी नहीं होती, लेकिन 18 साल की इस छोटी सी यात्रा में भी भारत के नक्‍श्‍ो पर अपनी एक जगह बनाई है। लेकिन अब तक जो उन्‍होंने जगह बनाई थी वो ईंट, चूना, माटी, पत्‍थर, तार इसी के द्वारा बनाई थी। कभी रोड बनाएं कभी बिल्डिंग बनाएं, कभी port बनाए लेकिन अब वो जीवन निर्माण की दिशा में कदम रख रहे हैं। और मैं मानता हूं कि 18 साल में जो चुनौतियां आपको मिली हैं, अब शायद ज्‍यादा चुनौतियां आपके सामने हैं। क्‍योंकि वो एक limited clientele होता है और आपको अपनी गाड़ी को आगे बढ़ाना होता है। और कुछ चीजें उसमें assured होती हैं, पहले से पता होता है कि भई इस Project का क्‍या होगा, क्‍या refund होगा, क्‍या revenue होगा, बैंक की क्‍या स्थिति रहेगी। ये वो क्षेत्र नहीं है। और इसलिए एक इंजीनियर का काम सरल होता है, लेकिन एक शिक्षक का काम बड़ा भारी होता है क्‍योंकि शिक्षक को जीवन तैयार करना होता है, इंजीनियर को इमारत बनानी होती है। IDFC अब तक जो काम करती थी अब उसको शिक्षक का रोल भी अदा करना होगा और इसलिए मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में ये चुनौतियों के बावजूद भी, एक सही दिशा में कदम होगा।

ये बैंक का मूल उद्देश्‍य तो गांव में जाना है और मैं मानता हूं ये देश का दुर्भाग्‍य है कि देश को नियम बनाना पड़ा कि 25% जब तक आप बैंक में गांव नहीं खोलते हैं आपको permission नहीं मिलेगी। मैं मानता हूं ये नियम बनाने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए थी, लेकिन पड़ी। क्‍योंकि हम लोगों ने कभी भी हमारे ग्रामीण जीवन के potential को समझा नहीं और urban life, governments, government machinery, वहां पर इन कारोबार को चलाने के लिए बहुत अवसर होता है और इसलिए एक प्रकार से बैंक को चलाना, बैंक का growth continue करना ये ज्‍यादा challenging work नहीं है और इस तरफ ध्‍यान नहीं गया। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ये ध्‍यान में आया है और हर किसी की नजर गई है कि भारत में ग्रामीण जीवन भी एक बहुत बड़ा growth centre बना है। आपको मालूम होगा जब telecom industry आई और उनको जब भी spectrum दिया जाता था और गांव की बात कहते थे तो आगे-पीछे, आगे-पीछे होते थे। या तो किसी को sub-contract दे देते थे और अपनी गाड़ी चला लेते थे। लेकिन जब गांव में गए तो उनके लिए surprise था कि telecom के growth का शहरी percentage से ग्रामीण percentage ज्‍यादा ऊंचा था। Spread भी ज्‍यादा था, गति भी तेज थी। और इस अर्थ में उनके लिए वो.. अच्‍छा! गांव के व्‍यक्ति का communication ज्‍यादातर अन्‍य शहरों से होता है, इसलिए Income का level भी ज्‍यादा था। शहर का गांव, शहर में ही शहर में करता था, लेकिन उनका Income level….लेकिन ये बातें उनको ध्‍यान आईं, बाद में जाने के बाद। मैं समझता हूं बैंकिग sector के लिए भी अब ये अनुभव आने वाला है। बहुत तेजी से ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था भारत के जीवन को एक ताकत दे रही है। बड़ा बदलाव आ रहा है।

एक बात और भी है, जैसे अरुण जी ने बड़ा विस्‍तार से बताया कि अब, अब banking जीवन बदल चुका है, अब वो mobile banking ही चलने वाला है। premises-less, paper-less, ये ही बैंक की पहचान होने वाली है। न जिसमें कोई premises होगा और न ही कोई paper होगा। और उसके बाद भी बैंक चलेगी, लोगों को पैसे मिलेंगे, लोगों का कारेाबार चलेगा। और धीरे-धीरे हमारे देश में ये स्थिति आने वाली है कि currency भी, शायद आज जो currency print करने का खर्चा होता है, वो भी धीरे-धीरे-धीरे-धीरे कम होता जाएगा क्‍योंकि ये कारोबार इस प्रकार से बढ़ने वाला है। और हमने भी देश को उस दिशा में ले जाना है। और जैसे-जैसे हम technology के सहारे banking करेंगे, जब हम paper-less bank की व्‍यवस्‍था करेंगे, currency-less कारोबार चलाएंगे तो काले धन की संभावनाएं धीरे-धीरे-धीरे जीरो की तरफ चली जाएंगी। और इसलिए इस सारी व्‍यवस्‍था का उपयोग एक उस दायरे में होने वाला है जो देश की मूलभूत कुछ बाते हैं जिसको address करने वाला है। IDFC उसकी beginning कर रहा है। मध्‍यप्रदेश से उनका प्रारंभ हो रहा है, वो भी उस इलाके, जो एक प्रकार से आदिवासी क्षेत्र से जुड़े हुए हैं, नर्मदा के तट के साथ जुड़े हुए हैं, वहां से इस काम का आंरभ हो रहा है। ये भी आवश्‍यक है।

आज सारा विश्‍व आर्थिक दृष्टि से भारत के प्रति एक बड़े संतोष की नजर से देख रहा है, सिर्फ आशा की नजर से नहीं, एक संतोष की नजर से। और उसको लगता है कि पूरे विश्‍व में इतना turmoil आ रहा है लेकिन एक भारत है जो स्थिर खड़ा रह पाया है और global economy में भी किसी राष्‍ट्र का स्थिर economy को handle करना ये भी अपने-आप में विश्‍व में संतुलन बनाने के लिए बहुत बड़ी भूमिका अदा करता है। और वो भूमिका भारत ने इस पूरे वैश्विक संकट के समय अदा की है। इतने बड़े तूफान के बीच भारत अपने आप को बना पाया है। और बना पाया है तो आगे बढ़ने की संभावना भी उसमें बहुत ज्‍यादा है।

विश्‍व भारत के संबंध में ये अनुमान लगाता है कि भारत का potential इतना अपरम्‍पार है अभी तक आप tap नहीं कर पाए। लोग ये नहीं करते हैं कि भई आप कैसे आगे बढ़ोगे, आप कुछ टिक पाओगे के नहीं पाओगे, बचोगे कि नहीं बचोगे, ये चर्चा नहीं। चर्चा ये है, अरे भाई इतना मौका है, आप, आप ठंडे क्‍यों ? ये सवाल पूछा जा रहा है। यानी सारे विश्‍व को लग रहा है कि आज विश्‍व के आर्थिक जीवन में सबसे अगर कोई potential area है जहां growth story है तो वो हिंदुस्‍तान में है। और हमने भी देखा है World Bank हो, IMF हो, बाकी जितनी Rating Agencies हों, सबने कहा है कि भारत आज दुनिया की, बड़े देशों की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली कम्‍पनी है। अगर ये ताकत हमारे पास है, तो हमारा काम है कि हम foundation को भी मजबूत करें और vertical भी जाएं। Horizontal and vertical, दोनों तरफ हमें आगे बढ़ना पड़ेगा और Horizontal जाने के लिए ये ग्रामीण जीवन में हम कैसे प्रवेश ? हमारा व्‍याप कैसे बढ़ाएं? उसी प्रकार से हम नए-नए क्षेत्रों को कैसे चुनें? अगर हम priority sector देखें, priority sector को पैसे देना, ये सरकार के कुछ नियम हैं, जाते हैं लेकिन मान लीजिए कहा गया कि भाई agriculture sector को पैसा देना है, लेकिन एक fertilizer कारखाने को दे दिया, माना जाएगा agriculture sector और हिसाब ठीक हो जाएगा तो agriculture sector को दे दिया। इससे हमें बाहर आना है। हम एक सामान्‍य agriculturist को या गांव को ध्‍यान में रख करके या दो, चार, दस गांव के बीच में cold storage कैसे बनें? Warehousing की व्‍यवस्‍था कैसे हो? उसमें banking कैसे? हम value addition में कैसे मदद कर सकते? हम सिर्फ agriculture sector को पकड़ें, आज मैं समझता हूं कि इतनी संभावनाएं पड़ी हुई हैं, हिन्‍दुस्‍तान का किसान आज दुनिया के साथ अपने-आप में तालमेल करने की कोशिश कर रहा है। आपने देखा होगा, कि एक महिला अपना नम्‍बर अंग्रेजी में बता रही थी, Mobile Number अंग्रेजी में बता रही थी। अब ये कोई जरूरी नहीं है कि उन्‍होंने किसी स्‍कूल में जा करके पढ़ा होगा। लेकिन अब धीरे-धीरे करके सब चीजें समाज, जीवन में सहज हिस्‍सा बन रही हैं। ये इस ताकत को पहचानना, यही तो सबसे बड़ी खूबी है। हम इसको अगर ताकत मानते हुए, हां ये बदलाव है क्‍योंकि मेरा तो ये अनुभव है।

मैंने एक बार कहीं वर्णन भी किया था, में गुजरात में जब मुख्‍यमंत्री था तो एक बहुत ही पिछड़ा तहसील है हमारे यहां, धर्मपुर के पास, बलसाड़ जिले में, tribal belt है। अब मेरा मुख्‍यमंत्री रहते हुए वहां कभी कार्यक्रम नहीं हुआ था तो मैंने आग्रह किया, मैंने कहा मुझे वहां जाना है। न एक दिन कोई कार्यक्रम नहीं होगा तो ऐसे ही जा करके एक पेड़ लगा करके वहां से वापिस आऊंगा। तो फिर एक chilling centre के उद्घाटन के लिए कार्यक्रम बन गया। अब chilling centre क्‍या 50 लाख का होता है, छोटा सा क्‍या होता है, जो दूध लोग देने आते हैं, उसको, ट्रक आने तक उसको संभालते हैं। इतना ही होता है। मैंने कहा मैं उसके लिए जाऊंगा। फिर वहां करनी थी तो जगह नहीं थी, क्‍योंकि जंगल है तो कोई जगह नहीं थी, तो एक स्‍कूल थी दूर, दो-ढाई किलोमीटर, स्‍कूल में function था। लेकिन इस कार्यक्रम के लिए उन्‍होंने 50 करीब आदिवासी महिलाओं को बुलाया था। दूध भरने वाली जो महिलाएं होती हैं, 50 को बुलाया था। जहां chilling centre था, वहां। सब वहां तो अलग था माहौल। मैं हैरान था जब chilling center में उद्घाटन वगैरह हुआ, ये महिलाएं सारी मोबाइल से फोटो निकालती थी। आदिवासी महिलाएं फोन से फोटो निकालती थी। मुझे जरा surprise हुआ। मैं उनके पास गया। मैंने कहा ये फोटो निकाल कर क्‍या करोगे? उन्‍होंने जो जवाब दिया वो और आश्‍चर्यजनक था। उन्‍होंने कहा, हम इसको download करवा देंगे। अब ये download शब्‍द उनको मालूम था। download कैसे होता है, कहां होता है, ये पता था। इसका मतलब ये हुआ कि हम कहां तक पहुंचे। इसको हम किस प्रकार से आने वाले दिनों में हमारी growth story का हिस्‍सा कैसे बनाए और उस दिशा में हम कैसे काम करे?

उसी प्रकार से हमारे नौजवान। उनको पढ़ाई के लिए सरलता से Bank loan की व्‍यवस्‍था क्‍यों न हो? मेरा मत है ये women self-help groups....Women self-help group को पैसा मिलता है, अगर उनको बुधवार को पैसा जमा करवाना है 100 रुपए तो मंगल को आकर के दे जाते हैं कि लीजिए साहब मेरा पैसा कल पता नहीं कहीं और खर्च हो जाएगा। ये sensitivity है हमारे यहां, ग्रामीण जीवन में। इसका जितना लाभ लेना चाहिए हमने लिया नहीं और साहूकारों ने इस पर अपनी पकड़ा जमा दी और उसने हमारी economy को भी बहुत बड़ा नुकसान किया है। तो हमने एक विश्‍वास पैदा करना है, एक गारंटी पैदा करनी है। मैं समझता हूं ये जो प्रयास है, वो प्रयास उस परिणामों को जरूर अवश्‍य फल देगा।

Banking sector में हमारी ये कोशिश रही है कि bank nationalize हुई। तब तो बताया गया था कि भई गरीबों के लिए हुआ, लेकिन हमने जो देखा कि वो बहुत सीमित रहा। जैसे मध्‍यम वर्ग के परिवारों तक family doctor होता है, वैसे उच्‍च परिवारों का एक Banker होता है। बड़े ऊंचे घरानों का और बीमार भी होंगे लेकिन अगर Banker ने कहीं lunch-dinner रखा है तो जरूर जाएंगे क्‍योंकि उनको पता है कि भई इसका उनका कारोबार कितना महत्‍वपूर्ण है। ये अच्‍छा है, बुरा है लेकिन है। मैं समझता हूं कि अब हमारे यहां Neo-Middle Class कहो या मध्‍यम वर्ग कहो, ये एक बहुत बड़ी ताकत होती है। हम उनकी तरफ ध्‍यान केन्‍द्रित करके, ऐसी व्‍यवस्‍थाओं को कैसे विकसित करें। मान लीजिए आप, आपके सामने दो proposal है। एक है कि कोई भवन बनाना है, सरकारी दफ्तर बनाना है और दूसरी proposal है कि इसने प्राइवेट में कहा है कि मैं यहां एक कॉलेज खड़ा करना चाहता हूं, एक Higher-Secondary School चालू करना चाहता हूं, मुझे बैंक से पैसा चाहिए। अगर मैं बैंक में हूं तो मैं पहली priority उस स्‍कूल वाले को दूंगा। क्‍योंकि मुझे मालूम है कि वहां स्‍कूल बनता है तो फिर ऐसे 50 दफ्तर बनाने की ताकत उनसे अपने आप आ जाने वाली है। इसलिए हमारे investment की priority क्‍या बने? पैसे देने की priority क्‍या बने? ये अगर हमने chain शुरू की जिसके multiple हमें benefit हो। अगर ये होगा तो मैं मानता हूं कि बहुत ही लाभ होगा।

हमने जो financial inclusion का जो मिशन उठाया है। अब जैसे अरुण जी बता रहे थे कि प्रधानमंत्री की जो हमने योजना बनाई जिसमें हमने मध्‍यम वर्ग, गरीब, धोबी हो, नाई हो, दूध बेचने वाला हो, अखबार बेचने वाला हो उसको मुद्रा योजना के तहत finance कैसे हो। इस देश में करीब 6 करोड़ लोग ऐसे हैं, इस प्रकार के काम में और उनका average कर्ज 17 हजार रुपए है। कोई ज्‍यादा नहीं है, लेकिन वे ये पैसे साहूकार से लेते हैं, बहुत ब्‍याज देते हैं और वो अपना विकास-विस्‍तार नहीं कर पाते हैं। मुद्रा योजना के तहत हमारी कोशिश है कि ऐसे लोगों को इस ब्‍याज के चक्‍कर से मुक्‍ति दिलाना और उनको financial help liberally करना। हमने 50 हजार, 5 लाख, 10 लाख तक की, उसकी व्‍यवस्‍थाएं की, 50 लाख तक की की। अभी तो मैं समझता हूं मुश्‍किल से 100 दिन हुए होंगे इस योजना को launch किए। अब तक 61 लाख clients and करीब 35 thousand crore rupees, ये वहां गया है। 35 हजार करोड़ रुपया बाजार के अंदर नीचे जाना मतलब economy को कितनी बड़ी ताकत देता है वो। 35 हजार करोड़ किसी एक शहर में डालने से उतना change नहीं आता है जितना कि हजारों गांवों के अंदर 35 हजार करोड़ रुपया जाता है, तो economy में एक vibrancy आना शुरू हो जाता है, नीचे से शुरू हो जाता है और ये आने वाले दिनों में देखेंगे और हमारी कोशिश यही है कि हम उसको आगे बढ़ाना चाहते हैं।

हमारे देश में Banking sector के संबंध में पचासों प्रकार के सवालिया निशान उठे हैं। Appointment से लेकर के, governance से लेकर के, पैसे देने के संबंध में पचासों प्रकार के सवालिया निशान लगे हैं। हमने आने के बाद एक दिन round-table conference किया, चिंतन शिविर की, सभी बैंक के लोगों के साथ detail में चर्चा की। उनकी समस्‍याएं क्‍या हैं, सरकार से अपेक्षाएं क्‍या हैं, कानूनी मुसीबतें क्‍या हैं। सारी चीजों की विस्‍तार से चर्चा की। RBI भी मौजूद था, मैं भी था, अरुण जी भी थे, काफी विस्‍तार से चर्चा की और उसमें से जो बातें आईं उस बातों को हमने लागू करने का प्रयास किया है। हमने एक सप्‍तसूत्री योजना बनाई है, जिस योजना का मैं समझता हूं कि हमारे देश में ऐसी चीजों की चर्चा बहुत कम होती है। लेकिन इसका बहुत बड़ा निर्णय है और A B C D E F G, ये सप्‍तसूत्री मेरा कार्यक्रम है। ये सप्‍तसूत्री कार्यक्रम बैंकों के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव लाने वाला है।

एक है हमारा A – Appointments. बैंकों में उच्‍च पदों पर नियुक्‍तियों में सुधार लाने का हमने फैसला किया है और इसलिए हमने 1969 के बाद nationalised bank में private sector के लोगों को भी लिया है, वरना nationalised bank से लोग private में चले जाते थे। पहली बार ये reverse trend शुरू हुआ है, जिसमें efficiency को हमने महत्‍व दिया है।

B – B for Bank, Board, Bureau. ये B3 पहली बार हम इस देश में लाए हैं कि बैंकों में जो भी नियुक्‍तियां हुईं उसका selection top rank के लिए, ये board करेगा। Politically मुझे ये पसंद आया, उसको मैं एक director बना दू और वो वहां बैठ जाए और फिर बाद में जब loan देनी हो तो वाया उसी से आ जाए proposal और फिर पता चले भई ये तो PM का आदमी बोल रहा है, देना ही पड़ेगा। ये डूबने के पीछे कारण यही है और इसलिए हमने कहा है कि ये कतई हम नहीं करेंगे, सारे professional लोगों को हम इस काम में लगाएंगे।

C – Capitalization. पिछले कुछ वर्षों में दिए गए loans में bad loans हैं। उसके कारण संकट आया है। अब रोते-बैठने का कोई अर्थ नहीं है इसलिए हमने करीब आने वाले कुछ वर्षों में 70 हजार करोड़ रुपया बैंक के अंदर डालकर के ये bad loans के कारण जो संकट है, उसमें से हम बाहर लाने का कार्यक्रम कर रहे हैं।

D – De-stress of assets. कुछ क्षेत्रों में जहां ये समस्‍या गंभीर है, हमने import duties बढ़ाने का domestic producer को सहारा दिया है। आपने देखा होगा हमने Steel में अभी किया। ताकि जिसके कारण Steel जो बैंक के साथ Steel उद्योग पैसा लेता था, उसको एक ताकत मिले। तो हमने De-stress के लिए कई कदम उठाने की दिशा में काम किया है।

6 है -नए debt recovery tribunal. जिसमें हम bad loans recovery इन सारे कामों को मैंने कहा है जैसे Power sector. हम बहुत तेज गति से निर्णय पर जा रहे हैं। Power sector जो NPA की समस्‍या से जुड़ा हुआ है उसको कैसे handle करना है।

E – Empower. Empower का मेरा सीधा-सीधा मतलब था, जब मैं पुणे में गया था इस मीटिंग में तब मैंने कहा था, Zero interferes. आपको political leadership और establishment से कभी फोन नहीं आएगा कि इसके loan का क्‍या करना है लेना, देना और आज तक इतने महीने हो गए, एक भी जगह से खबर नहीं आई है कि ऐसा कोई pressure है। purely, professionally चलाइए और बाहर लाइए। तो इस प्रकार से बैंकों को Empower करने की दिशा में हमने काम किया है।

F – Framework for accountability. बैंकों का performance monitor करने के लिए key performance indicator हमने set किए हैं ताकि हमें regularly पता चले कि भई कहां जा रहे हैं, किस दिशा में जा रहे हैं। कितना जा रहे हैं, वो नहीं। कितना तो संतोष कभी-कभी दे देता है, लेकिन कहां और कैसे और कितने समय में। उस दिशा में indicators को हमने बल दिया है।

और last है G – Governance. हमारे banking sectorमें governance को बल देना है। हमने technology पर जाना है, transparency को लाना है। cyber crime की सबसे ज्‍यादा संभावनाएं banking sector, financial world में हैं या तो data चोरी करने की। ये दो ही सबसे बड़े क्षेत्र हैं और इसलिए हमको assure करना होगा हमारे governance को।

तो ऐसी सप्‍तसूत्री हमारी योजना के द्वारा इन seven pillars पर पूरा banking sector को ताकत कैसे मिले। सरकार ने इतने महत्‍वपूर्ण initiative लिए हैं। मुझे विश्‍वास है कि आने वाले दिनों में भारत जिस तेज गति से आगे बढ़ रहा है बैंक कंधे से कंधा मिलाकर के उसके साथ चलेगा। कुछ क्षेत्रों में बैंक दो कदम आगे होगा और मैं समझता हूं कि ये ताकत ultimately भारत के जो निर्धारित लक्ष्‍य हैं और जिन माध्‍यमों से हैं, उन सबको मिलकर के हम पूरा कर सकते हैं।

आने वाले दिनों में IDFC को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं वो इस क्षेत्र में बहुत-बहुत प्रगति करें। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

Explore More
శ్రీరామ జన్మభూమి ఆలయ ధ్వజారోహణ ఉత్సవం సందర్భంగా ప్రధానమంత్రి ప్రసంగం

ప్రముఖ ప్రసంగాలు

శ్రీరామ జన్మభూమి ఆలయ ధ్వజారోహణ ఉత్సవం సందర్భంగా ప్రధానమంత్రి ప్రసంగం
From strategic partnership upgrade to defence roadmap: Key outcomes of PM Modi–Meloni meeting in Rome

Media Coverage

From strategic partnership upgrade to defence roadmap: Key outcomes of PM Modi–Meloni meeting in Rome
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
India is becoming a global hub for MRO, green shipping and maritime services: PM Modi at the Norway-India Business and Research Summit
May 18, 2026

Your Royal Highness,

Your Excellency Prime Minister,

दोनों देशों के व्यापार जगत के साथियों,

Norway और India के business और research leaders के बीच बातचीत करने का आज अवसर मिला है। इस समिट के भव्य आयोजन के लिए मैं नॉर्वे के प्रधान मंत्री का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।

आज नॉर्वे और भारत के बिजनस और रिसर्च कम्यूनिटी के बीच होना, मेरे लिए बहुत खुशी की बात है। कुछ साथियों को मैंने सुना, यह सुनकर विश्वास होता है कि हमारी पार्ट्नर्शिप की नींव बहुत मजबूत है।

यह केवल संभावनाओं की ही नहीं, यह एक proven पार्ट्नर्शिप है। आज जब फूड, फ्यूएल और फर्टिलाइज़र सिक्युरिटी ग्लोबल चैलेंज बन गए है, तो भारत और नॉर्वे इनका मिलकर समाधान कर रहें हैं। चाहे वो ओर्क्ला का भारत के फूड सेक्टर में निवेश हो, इक्विनोर से भारत को LPG और LNG सप्लाइ की बात हो, या यारा का भारत के फर्टिलाइज़र क्षेत्र में योगदान।

मुझे बहुत खुशी है, कि आप में से कई CEO’s, भारत के वाइब्रन्ट गुजरात और अन्य इन्वेस्टर summits में भी बड़े उत्साह के साथ हमेशा भाग लेते रहें हैं। अब हमे इस पार्ट्नर्शिप की इन्टेन्सिटी बढ़ाकर, इसे न्यू frontiers की ओर ले जाना चाहिए।

और हमें अब एक एक कदम से चलने से कोई बात नहीं बनने वाली है। हमें गति भी बढ़ानी होगी, और लक्ष्य भी बहुत ऊंचे तय करने होंगे।

Friends,

आप में से जो सब साथी भारत से जुड़े हुए हैं , और यहाँ जो भारत के साथ आपसे बातचीत हुई ... में समझता हूँ कि इससे बढ़िया कोई समय नहीं हो सकता है। आज एक ऐसा समय है जिसका सही समय का सही उपयोग का एक अवसर है।

अकतूबर 2025 में हमने यूरोपियन फ्री ट्रैड एसोसिएशन के साथ, ट्रैड एण्ड इकनॉमिक पार्ट्नर्शिप अग्रीमन्ट, यानि "टेपा” लागू किया। यह यूनीक और स्पेशल अग्रीमन्ट, हमारे बीच, टैलेंट, टेक्नॉलजी और म्यूचूअल ट्रस्ट का अग्रीमन्ट है।

इस अग्रीमन्ट के माध्यम से एफ्टा कंट्रीस से भारत में, अगले पंद्रह वर्षों में one hundred बिलियन डॉलर इनवेस्टमेंट, और one मिलियन jobs क्रीऐट करने का लक्ष्य है। यह ambitious target है, लेकिन achievable भी है। और भारत में आपके इन्वेस्टमेंट को outcomes में बदलना, में आपको विश्वास से कहता हूँ, यह हमारी गारंटी है।

Friends,

मैं दो सेक्टर का उल्लेख करूँगा, जो आपके लिए उपयोगी हो सकते है। भारत की rapidly growing middle class, नूट्रिशन और हेल्थ sectors में मेजर डिमैन्ड create कर रही है। नॉर्वे की फूड, फिशेरीस और health-care कम्पनीस इस demand को पूरा करने में भारत के मजबूत partners बन सकती हैं।

इसी तरह, क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में भारत की aspiration को विश्व मे कोई मैच नहीं कर सकता। 2030 तक हमने 500 गिगा वॅाट क्लीन एनर्जी, और 5 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन produce करने का टार्गेट रखा है। क्लीन एनर्जी इन्वेस्टमेंट नॉर्वे वेल्थ फंड की भी प्राथमिकता है। मैं नॉर्वे को भारत के क्लीन एनर्जी फ्यूचर में एहम हिस्सेदार बनने के लिए आमंत्रित करता हूँ।

Friends,

रिफॉर्म, perform और ट्रैन्स्फॉर्म, इस मंत्र को लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं, तब ... अगर पीछे की तरफ देखें तो पिछले 12 वर्षों में हमने भारत का इकनॉमिक DNA पूरी तरह चेंज कर दिया है।

हम Compliances लगातार कम कर रहें हैं, और Ease of Doing Business उसको बढ़ाने के लिए सरकार की तरफ से बहुत proactive कदम लिए जा रहे हैं।

हाल ही में हमने, टैक्सेशन, लेबर कोड, और गवर्नेंस जैसे विषयों में, नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स किए हैं। अब भारत में मैन्युफैक्चरिंग को अगले स्तर पर ले जाने के लिए, मैं समझता हूँ की उत्तम से उत्तम अवसर हम प्रदान कर रहे हैं। हम कई महत्वपूर्ण सेक्टर में incentives भी दे रहे हैं।

इसका एक उज्ज्वल उदाहरण, हमारी शिपबिल्डिंग सेक्टर है। हम इस सेक्टर को एक strategic manufacturing sector के रूप में बहुत तेजी से आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। हम शिपबिल्डिंग क्लस्टर विकसित कर रहें हैं, और end-to-end एकोसिस्टम बना रहें हैं।

shipbuilding के साथ-साथ, भारत MRO, ग्रीन शिपिंग, और maritime services- सभी में एक ग्लोबल हब बन रहा है।

आज नॉर्वे के करीब 10 पर्सेन्ट शिप इंडिया में बनती है। क्या हम इसको, अगले 5 वर्ष में, 25 पर्सेन्ट तक ले जा सकते हैं? मैं मानता हूँ मुश्किल काम नहीं हैं। अब गति पकड़ ली हैं। हमें बड़े टारगेट के साथ बड़े कदम की ज़रुरत हैं।

मैँ आप सभी को भारत की पॉलिसी स्टेबिलिटी और incentives का लाभ उठाते हुए, इस क्षेत्र में मेजर पार्टनर बनने के लिए invite करता हूँ।

Friends,

आज, प्रधान मंत्री जी और मैंने, भारत-नॉर्वे संबंधों को, एक ग्रीन स्ट्रटीजिक पार्ट्नर्शिप के रूप में elevate किया है। इस स्ट्रटीजिक पार्ट्नर्शिप से नॉर्वे की कम्पनीस को, क्रिटिकल मिनरल्स, AI, cyber, स्पेस, और डिफेन्स जैसे क्षेत्रों में भी पूरा पूरा समर्थन मिलेगा। इन सभी क्षेत्रों में, मैं आपको भारत को एक इनोवैशन और मैन्युफैक्चरिंग base बनाने के लिए invite करता हूँ।

Friends,

आज हम भारत-नॉर्वे संबंधों को, लैब to लैब यूनिवर्सिटी to यूनिवर्सिटी और scientist to scientist पार्ट्नर्शिप भी बना रहें है। भारत की CSIR, स्टार्ट-अप फंड, और Norway की रिसर्च संस्थाएं, आपस में सहयोग बढ़ा रहीं हैं। इससे दोनों देशों के रिसर्च और स्टार्ट-अप एकोसिस्टम कनेक्ट होंगे।

Friends,

नॉर्वे के लिए हमने भारत के इन्वेस्ट इंडिया मे एक dedicated ट्रैड फेसिलिटेशन डेस्क खोला है, ताकि हम specially उसको address कर सके। यह desk भारत में आपकी इन्वेस्टमेंट यात्रा को और सुगम, तेज और effective बनाएगा।

इस प्रकार की एक डेडिकेटेड व्यवस्था के कारण बहुत सुविधा रहती हैं। even राज्यों के साथ coordination करना है तो उसमें भी आपको सुविधा रहती हैं। और आपको आवश्यकता हैं, जो कुछ भी … निर्णय प्रक्रिया में आपको बदलाव की जरूरत होती हैं। वोह भी बहुत तेज़ी से हो सकता हैं। और इसीलिये हमने एक special व्यवस्था की हैं।

अब मेरा आप सभी को मुख्य मैसेज यही है- आइए, भारत में अपना स्कोप और ऐम्बिशन दोनों को बढ़ाइए। मैं भारत में आने केलिए आपको निमंत्रण दे रहा हूँ।

इन सबकी अनुभव भी आपको जानने को मिलेंगे। मैंने भी आपको अपने तरफ से विश्वास दिया हैं। और एक प्रकार से the ball is in your court.

Thank you.