Text of PM’s interaction with students at Education City, Dantewada

Published By : Admin | May 9, 2015 | 19:23 IST

प्रश्न- आप को काम करने की प्रेरणा कहाँ से मिलती है?

प्रधानमंत्री जी:
बहुत बार खुद की घटनाओं से ज्‍यादा और की घटनाओं से प्रेरणा मिलती है। लेकिन उसके लिए हमें उस प्रकार का स्‍वभाव बनाना पड़ता है। कठिन से कठिन चीज में किस प्रकार से जीवन को जीया जा सकता है। आप लोगों में से पढ़ने का शौक किस-किस को है? वो मास्‍टर जी कह रहे हैं, वो किताबें नहीं उसके सिवाय किताबें पढ़ने का शौक.. ऐसे कितने हैं.. हैं ! आप लोग कभी एक किताब जरूर पढि़ए Pollyanna…..Pollyanna कर के एक किताब है। मैंने बचपन में पढ़ी थी वो किताब। हर करीब-करीब सभी भाषाओं में उसका भाषांतर हुआ है। 70-80 पन्‍नों की वो किताब है, और उस किताब में एक बच्‍ची का पात्र है, और उसके मन में विचार आता है, कि हर चीज में से अच्‍छी बात कैसे निकाली जा सकती है।

तो उसने घटना लिखी है, उसके घर के बगीचे में जो माली काम कर रहे थे, वो बूढ़े हो गये और शरीर ऐसा टेढ़ा हो गया, तो एक बार बच्‍ची ने जाके पूछा कि दादा कैसे हो? तो उन्‍होंने कहा कि नहीं-नहीं अब तो बूढ़ा हो गया, देखिए मैं बड़ा ऐसे ऊपर खड़ा भी नहीं हो सकता हूं, मेरी कमर ऐसी टेढ़ी हो गई है, बस मौत का इंतजार कर रहा हूं। तो बच्‍ची ने कहा नहीं-नहीं दादा ऐसा मत करो। देखिए भगवान आप पर कितना मेहरबान है। पहले आप खड़े होते थे और बगीचे में काम करने के लिए आपको ऐसे मुड़ना पड़ता था। अब भगवान ने ऐसी व्‍यवस्‍था कर दी आपको बार-बार मुड़ना नहीं पड़ता है और अब बगीचे के काम आप आसानी से कर सकते हैं। यानी एक घटना एक के लिए दुख का कारण भी दूसरे के लिए वो प्रेरणा का कारण थी और इसलिए मैं मानता हूं कि घटना कोई भी हो हमारा उसके तरफ देखने का दृष्टिकोण कैसा है, उसके आधार पर जीवन की प्रेरणा बनती है। तो मैं आप सबको कहूंगा और यहां की व्‍यवस्‍था को कहूंगा लाइब्रेरी में पांच-छह किताबें Pollyanna की रखें और बारी-बारी से सब बच्‍चे पढ़ लें। कभी एसेंबलिंग में मीटिंग हो तो उसमें भी पर कोई न कोई प्रसंग बताएं। ठीक है!

प्रश्‍न – आप कितने घंटे काम करते हैं, तनाव का सामना कैसे करते हैं?

प्रधानमंत्री जी: मैं कितने घंटे काम करता हूं, इसका हिसाब-किताब तो मैंने किया नहीं है, और इसका आनंद इसलिए आता है कि मैं गिनता ही नहीं हूं कि मैंने कितने घंटे काम किया जब हम गिनना शुरू कर देते हैं कि मैंने इतने घंटे काम किया, ये काम किया, वो काम किया, तो फिर लगता है यार बहुत हो गया। दूसरा आप लोगों ने देखा होगा अपने अनुभव में जब मास्‍टर जी ने आपको कोई Home work दिया हो और उस Home work जब मास्‍टर जी लिखवाते हैं तो ओ ओ! ये तो Saturday-Sunday खराब हो जाएगा! सब टीचर ने इतना लिखवा कर दिया है। लेकिन जब कमरे में जा करके लिखना शुरू कर देते हैं और Home work पूरा कर देते हैं तो आपने देखा होगा जैसे ही Home work पूरा हो जाता होगा, आपकी थकान उतर जाती है। आपने देखा है कि नहीं ऐसा, काम पूरा होते ही थकान उतर जाती है या नहीं उतर जाती है। जब तक काम बाकी है तब तक थकान लगती है कि नहीं लगती है। तो ये बात पक्‍की है कि काम की थकान कभी नहीं होती, काम न करने की थकान होती है, एक बार कर देते हैं, तो काम का आनंद होता है। संतोष होता है, और इसलिए जितना ज्‍यादा काम करते हैं, उतना ज्‍यादा आनंद मिलता है। जितना ज्‍यादा काम करते हैं ज्‍यादा संतुष्‍ट होता है।

दूसरा, एक पुरानी कथा है बहुत बढि़या कथा है, कोई एक स्‍वामी जी, पहाड़ पर किनारे बैठे थे और एक आठ साल की बच्‍ची अपने तीन साल के भाई को उठा करके पहाड़ चढ़ने जा रही थी, तो स्‍वामी जी ने पूछा अरे बेटी तुम्‍हें थकान नहीं लगती क्‍या ? तो उसने जवाब में नहीं ये तो मेरा भाई है, तो स्‍वामी जी ने बोला मैं ये नहीं पूछ रहा हूं कि तुम्‍हारे साथ कौन है, मैं ये पूछ रहा हूं कि तुम्‍हें थकान नहीं लगती इतना बड़ा पहाड़ चढ़ना है, तुम अपने छोटे भाई को ले करके चढ़ रही हो, तुम्‍हें थकान नहीं लगती। नहीं नहीं पंडत जी मेरा भाई है। तो स्‍वामी जी ने फिर से पूछा। अरे मैं तुम्‍हें नहीं पूछ रहा हूं कि कौन है, मैं तुमसे पूछ रहा हूं कि तुझे थकान नहीं लग रही है, तो उसे अरे नहीं स्‍वामी जी मैं आपको बता रही हूं न की मेरा भाई है। कहने का तात्‍पर्य ये था कि जो अपनो के लिए जीते हैं, तो थकान कभी नहीं लगती। समझे! मुझे सवा सौ करोड़ देशवासी मेरे अपने लगते हैं। मेरे, मैं उन परिवार का सदस्‍य हूं सवा सौ करोड़ का देशवासियों का मेरा परिवार है। उनके लिए कुछ करने का आनंद आएगा या नहीं आएगा और मेहनत करने का मन करेगा या नहीं करेगा। अपनों के लिए जीने का मन करेगा या नहीं करेगा। फिर थकान लगेगी! बस यही है इसका कारण।

प्रश्‍न – जीवन की सबसे बड़ी सफलता किसे मानते हैं, श्रेय किसे देते हैं?

प्रधानमंत्री जी:
जीवन को सफलता और विफलता के तराजू से नहीं तौलना चाहिए, जिस दिन हम सफलता-विफलता, सफलता-विफलता इसी के हिसाब लगाते रहते हैं, तो फिर निराशा आ जाती है। हमारी कोशिश ये रहनी चाहिए कि एक ध्‍येय ले करके चलना चाहिए। कभी रूकावट आए, कभी कठिनाइयां आए, कभी दो कदम पीछे जाना पड़े, लेकिन अगर उस ध्‍येय को सामने रखते हैं तो फिर ये सारी बातें बेकार हो जाती हैं। तो एक तो सफलता और विफलता को जीवन के लक्ष्‍य को पाने के तराजू के रूप में कभी देखना नहीं चाहिए, लेकिन विफलता से बहुत कुछ सीखना चाहिए। ज्‍यादातर लोग सफल इसलिए नहीं होते है वो विफलता से कुछ सीखते नहीं है। हम विफलताओं से जितना ज्‍यादा सीख सकते हैं, शायद सफलता उतना हमें शिक्षा नहीं देती। मेरा जीवन ऐसा है जिसको हर कदम विफलताओं का ही सामना करना पड़ा और मैं सफलताओं का हिसाब लगाता नहीं हूं, न सफल होने के मकसद से काम करता हूं। एक लक्ष्‍य की प्राप्ति करनी है अपनी भारत मां की सेवा करना। सवा सौ करोड़ देशवासियों की सेवा करना। विफलता-सफलता आती रहती है। लेकिन कोशिश करता हूं, विफलता से ज्‍यादा से ज्‍यादा सीखने का प्रयास करता हूं।

प्रश्‍न - आप राजनीति में नहीं होते तो क्‍या होते?

प्रधानमंत्री जी:
देखिए जीवन का सबसे बड़ा आनंद ये होता है, बालक रहने का.. बालक बने रहने का कितना आनंद होता है और जब बड़े हो जाते हैं तब पता चलता है कि बालकपन छूटने का कितना नुकसान होता है तो अगर ईश्‍वर मुझे पूछता कि क्‍या चाहते हो तो मैं कहता जिन्‍दगी भर बालक बना रहूं।

प्रश्‍न – कठिनाइयों का सामना करते हुए सफलता का राज।

प्रधानमंत्री जी:
मैं समझता हूं अभी मुझे ये सवाल पूछा ही गया है, करीब-करीब वैसा ही सवाल है। जीवन में किसी को भी अगर कोई भी क्षेत्र हो अगर सफल होना है तो हमें पता होना चाहिए कि मुझे कहा जाना है, हमें पता होना चाहिए कि किस रास्‍ते जाना तय है, हमें पता होना चाहिए, हमें पता होना चाहिए कैसे जाना है, हमें पता होना चाहिए कब तक जाना है। अगर इन बातों में हमारी सोच एकदम स्‍पष्‍ट होगी तो फिर विफलताएं आएंगी तो भी, रूकावटें आएंगी तो भी आपका लक्ष्‍य कभी ओझल नहीं होगा। ज्‍यादातर लोगों को क्‍या होता है अगर आज कोई अच्‍छी movie देख करके आ गए तो आप पूछोगे कि आप क्‍या चाहते हो तो शाम को कह देगा, मैं actor बनना चाहता हूं।

आज कहीं world cup देख करके आया किसी ने पूछ लिया कि क्‍या चाहते हो तो बोले मुझे cricketer बनना है। युद्ध चल रहा है सेना के जवान शहीद हो रहे है, तो खबरें आ रही है तो मन करता है नहीं-नहीं अब तो बस सेना में जाना है और देश के लिए मर-मिटना है। ये जो रोज नए-नए विचार करते हैं उनके जीवन में कभी भी सफलता नहीं आती और इसलिए हमारी मन की जो इच्‍छा है वो seal होनी चाहिए। आज एक इच्‍छा कल दूसरी इच्‍छा परसों तीसरी इच्‍छा, तो फिर लोग कहते हैं- ये तो बड़ा तरंगिया! ये कल तो ये सोचता था-ये सोचता था, ये तो बेकार है.. तो इच्‍छा seal होनी चाहिए और जब इच्‍छा seal हो जाती है, तो अपने आप में संकल्‍प बन जाती है और एक बार संकल्‍प बन गया फिर पीछे मुड़ करके देखना नहीं चाहिए। बाधाएं हो कठिनाईयां हो, तकलीफें हो हमें लगे रहना है। सफलता आपके कदम चूमती हुई चली आएंगी।

अच्‍छा आप में से.. यहां रहते हो, इतना बड़ा परिसर है, आपमें से कभी किसी को बहुत अच्‍छे खिलाड़ी बनने की इच्‍छा होती है? Sports man! है किसी को.. हरेक को पढ़-लिख करके बाबू बनना है। अभी मैं पूछूंगा पुलिस अफसर किस को बनना है, तो सब हाथ ऊपर करेंगे, डॉक्‍टर किसने बनना है, सब हाथ ऊपर करेंगे, ऐसा ही होता है न! अच्‍छा आपके मन में.. कुछ बनने के लिए कर रहे हो काम क्‍या? क्‍या बनने के लिए कर रहे हो? जो डॉक्‍टर बनने के लिए कर रहे हैं, वो जरा खड़े हो जाएं, जो डॉक्‍टर बनने के लिए मेहनत कर रहे हैं.. बैठिए। जो कलेक्‍टर बनने के लिए काम कर रहे हैं वो कौन-कौन हैं? .. अच्‍छा। जो लोग आईआईटी में जाना चाहते हैं, उसके लिए कर रहे हैं वो कौन-कौन हैं? एक बात बताऊं? अगर सपने देखने हैं तो बनने के सपने कम देखो करने के सपने ज्‍यादा देखो और एक बार करने के सपने देखोगे तो आपको उसे करने का आनंद और आएगा।

लेकिन मैं चाहूंगा.. इतना बढि़या परिसर है, अभी से तय करना चाहिए कि तीन खेल में, तीन खेल के अंदर... तो ये हमारी धरती, ये हमारी आदिवासियों की भूमि.. हम दुनिया में नाम कमा करके ले आएंगे और आप देखिए ला सकते हैं। आपने एक साल पहले देखा होगा, पड़ोस में, झारखंड में अपनी बालिकाएं.. कोई साधन नहीं था उनके पास लेकिन अंतर्राष्‍ट्रीय जगत में गए। बेचारों के पास वो कपड़े भी नहीं थे, कुछ नहीं था, विमान क्‍या होता है ये मालूम भी नहीं था लेकिन दुनिया में नाम कमा करके आ गए, खेल के अंदर। .. झारखंड की आदिवासी बालिकाएं थी। हमारे मन में इरादा रहना चाहिए कि सिर्फ खेलने के लिए नहीं, एक अच्‍छा खिलाड़ी बनने के लिए मैं एक माहौल बनाऊंगा। मैं खुद एक अच्‍छा खिलाड़ी बनूंगा। .. और जहां ये परिसर होता है वहां अच्‍छे खिलाड़ी तैयार करने की संभावना होती है, talent search करने की संभावना होती है और मैं चाहूंगा कि इस बढि़या परिसर में.. ।

दूसरा, आपमें से कितने लोग हैं जो बिल्‍कुल सप्‍ताह में एक दिन भी खेलने की बात आए तो कमरे के बाहर नहीं निकलते, शर्मा जाते हैं, घबरा जाते हैं, कितने हैं? .. हां बताएंगे नहीं आप लोग। देखिए जीवन में खेल-कूद होना चाहिए, कितना भी पढ़ना क्‍यों न हो। दिन में तीन-चार बार तो पसीना आना ही चाहिए, इतनी मेहनत करनी चाहिए, दौड़ना चाहिए, खेल-कूद करना चाहिए। उससे पढ़ाई को कोई नुकसान नहीं होता। sports है, तो sports man spirit आता है और sports man spirit आता है तो जीने का भी एक अलग आनंद आता है। तो करेंगे? करेंगे? दिन में चार बार पसीना छूट जाए, ऐसा करेंगे? तो क्‍या इसके लिए धूप में जाकर खड़े रहेंगे क्‍या? ऐसा तो नहीं करेंगे न।

धन्‍यवाद

Explore More
Today, the entire country and entire world is filled with the spirit of Bhagwan Shri Ram: PM Modi at Dhwajarohan Utsav in Ayodhya

பிரபலமான பேச்சுகள்

Today, the entire country and entire world is filled with the spirit of Bhagwan Shri Ram: PM Modi at Dhwajarohan Utsav in Ayodhya
India's forex reserves jump $9 bn to $697.1 bn in week ended April 3

Media Coverage

India's forex reserves jump $9 bn to $697.1 bn in week ended April 3
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
The teacher recruitment scam has destroyed thousands of families’ dreams: PM Modi in Birbhum, West Bengal
April 09, 2026
TMC govt is destroying the agriculture of potatoes. Due to this, the farmers of potatoes are committing suicide: PM Modi in Birbhum
TMC has shown its arrogance by insulting the first woman President of India from the Adivasi community, says PM Modi in Birbhum
On 23 April and 29 April, the response will be given by the youth who faced lathi charge and pain in the past years under the TMC govt: PM

भारत माता की...

भारत माता की...

भारत माता की...

मैं मेरा भाषण शुरू करूं उससे पहले यहां मेरे कुछ युवा मित्र बढ़िया-भढ़िया चित्र बनाकर के लाए हैं। मैं एसपीजी के लोगों से कहंगा ये जो छोटे-छोटे मेरे बाल मित्र चित्र लाएं हैं उनसे ले लीजिए और अगर आपने पीछे अपना एड्रेस लिखा है तो मैं आपको चिट्ठी भेजूंगा... मैं आपका बहुत आभारी हूं इतने प्यार से आपलोग बनाकर ले आए हो... बोलिए भारत माता की... भारत माता की...इस चुनाव में यहां से जो उम्मीदवार हैं, उनसे मेरा आग्रह है कि आगे खड़े हो जाएं.. जो चुनाव लड़ रहे हैं कैंडिडेट हैं जो कैंडिडेट हैं... मैं आता हूं। मैं जरा सभी कैंडिडेट को मिलकर के आता हूं उसके बाद मेरा बाषण शुरू करूंगा।

भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की..

जॉय माँ तारा, जॉय बक्रोनाथ, जॉय जगोन्नाथ जॉय निताई

बीरभूम की धरती ऐतिहासिक है...क्रांतिकारी है...और प्रेरणाओं से भरी भी हुई है। दुकुड़ीबाला देवी... महान साधक बामाख्यापा...भारत रत्न प्रणब मुखर्जी... उपन्यासकार ताराशंकर बंदोपाध्याय...पद्मश्री तृप्ति मुखर्जी और तकदीरा बेगम...ऐसी अनेक प्रेरक संतानों की धरती, ये हमारी बीरभूम है। बीरभूम ने संथाल क्रांति को ऊर्जा दी थी। आज उसी बीरभूम में पोरिबॉर्तन की आंधी नज़र आ रही है...मेरे सामने ये विशाल जनसागर, ये परिवर्तन की घोषणा कर रहा है। अभी मैं हेलीकॉप्टर से उतरा और हेलीपैड से यहां तक आया। दोनों तरफ इससे भी ज्यादा भीड़ा वहां लगी हुई थी। ये क्या अद्भुत नजारा है। आप सब इतनी बड़ी तादाद में उत्साह, उमंग और जोश के साथ हम सबको आशीर्वाद देने के लिए आए हम आप सबका अभिनंदन करता हूं प्रणाम करता हूं।
हमारा ये बीरभूम...'बाउल' संगीत की भूमि है...और आज यहां एक ही संगीत, एक ही धुन गूंज रही है...एक ही गूंज... एक ही संगीत... एक ही आवाज पाल्टानो दोरकार! पाल्टानो दोरकार! पाल्टानो दोरकार!

साथियों,

गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर ऐसा समाज देखना चाहते थे...जहां हर कोई भय से मुक्त हो। लेकिन TMC के महाजंगलराज ने एकदम उलटा कर दिया है। ये मां, माटी और मानुष की बात करते थे... लेकिन मां आज रो रही है...माटी पर घुसपैठियों का कब्ज़ा हो रहा है...और मानुष, भयभीत है, डरा हुआ है, सहमा हुआ है। TMC के महाजंगलराज का साक्षी हमारा ये बीरभूम है।

साथियों,

बोगतुई में जो कुछ हुआ…वो सिर्फ एक घटना नहीं थी, वो मानवता के माथे पर कलंक था। निर्दोष महिलाओं और बच्चों को...जिंदा जला दिया गया। ये महा-जंगलराज नहीं है तो क्या है? ये महाजंगल राज है कि नहीं है… ये महाजंगल राज है कि नहीं है… ये महाजंगल राज जाना चाहिए कि नहीं चाहिए … ये महाजंगल राज का खात्मा होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए… साथियों, ये घटना टीएससी सिंडिकेट के गुंडाराज का बहुत ही खतरनाक सबूत है । माटी आपकी, हक आपका...लेकिन इस पर कब्जे के लिए ये गैंगवॉर चल रही है। बालू, पत्थर और कोयला...ये जो लूट चल रही है ये TMC के बड़े-बड़े नेताओं उनके आलाकमान, उनके आशीर्वाद से हो रहा है।


साथियों,

बंगाल की माटी पर घुसपैठियों का कब्जा... बहुत ही खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है। TMC का सिंडिकेट...घुसपैठियों को फर्जी सरकारी डॉक्यूमेंट दिलवा रहा है। पड़ोस से घुसपैठिए अंदर आते हैं...यहां पंचायत हो, अन्य सरकारी दफ्तर हों, वहां डरा-धमकाकर गलत काम कराए जा रहे हैं फर्ज़ी डॉक्यूमेंट बनाने का ये काला खेल...बंगाल की, देश की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है। इसलिए आज मैं बंगाल के लोगों से एक वायदा करता हूं। बंगाल में बीजेपी सरकार बनते ही...घुसपैठ के मददगार लोगों के खिलाफ एक विशेष जांच बिठाई जाएगी। ये मेरी गारंटी है आपसबको... घुसपैठियों के हर मददगार को... चाहे वो कितना ही ताकतवर क्यों न हो, उसकी पहचान की जाएगी। घुसपैठियों को भी खदेड़ा जाएगा... और घुसपैठियों के जो आका हैं, उनको भी जेल में भरा जाएगा।

साथियों,

सरकारी योजना हो...मजदूरी का काम हो...घुसपैठिए, कम पैसे में ये काम यहां के लोगों से छीन लेते हैं। और यहां के लोकल लोगों को काम की तलाश में कहीं और जाना पड़ता है। पलायन करना पड़ता है। लिख लो साथियों अब ये नहीं चलेगा। रामपुर हाट की क्या स्थिति है... ये तो आप सभी प्रत्यक्ष देख ही रहे हैं। मालदा में बीते दिनों क्या हुआ...ये भी पूरे देश ने देखा। SIR के काम में लगे जो न्यायाधीश हैं...उनको तक, बंधक बना दिया गया। इस भय से बंगाल के मानुष को मुक्ति दिलानी ज़रूरी है।

साथियों,

मां-माटी और मानुष में से...मां की स्थिति तो और भी खराब है। हमारे SC/ST/OBC समाज की बेटियों के लिए तो जीना मुश्किल हो गया है। जो TMC देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति जी तक का अपमान कर सकती है...उसकी मानसिकता क्या होगी? कितना अहंकार होगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी, संथाल समाज के एक बड़े कार्यक्रम के लिए यहां आई थीं। देश में किसी की भी सरकार हो...राष्ट्रपति जी को उचित सम्मान देना संविधान के तहत आपका दायित्व है। लेकिन ये अहंकारी TMC सरकार...देश की राष्ट्रपति तक को कुछ भी नहीं समझती। सिर्फ इसलिए क्योंकि वो आदिवासी समाज की बेटी हैं और इसलिए आपको अपमान करने का हक मिल जाता है। ये देश के सभी आदिवासियों का अपमान है। देश की सभी महिलाओं का अपमान है। ये देश के संविदान का अपमान है।

साथियों,

पिछले साल की घटना आप सभी को अच्छे से याद होगी। बीरभूम में ही, स्कूल में पढ़ने वाली एक आदिवासी बिटिया...उसके साथ जो हुआ, वो बहुत ही परेशान करने वाला है। जिसने अपनी बेटी को खोया है...उसकी भरपाई कोई भी योजना, कितना भी पैसा कोई दे.. भरपाई नहीं हो सकती है। नहीं हो सकती है। यही तो, आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुआ था। एक डॉक्टर बेटी को हमसे छीन लिया गया। मैं सभी माताओं-बहनों से कहूंगा...ये चुनाव बेटियों की सुरक्षा के लिए है।

भॉय नॉय, भोरशा चाई... मां-बोनेदेर शोम्मान चाई...

बाकी बहनों के लिए हर महीने मदद देने की बात हो...अन्य सुविधाएं हों...ये बीजेपी की हर राज्य सरकार देती है। बिना कट कमीशन देती है.. जिसका हक है उसके खाते में पहुंचाती है। बंगाल बीजेपी ने भी माताओं-बहनों के लिए अनेक घोषणाएं की हैं...इन सारी घोषणाओं को तेज़ी से लागू किया जाएगा...ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

TMC की निर्मम सरकार की विदाई.. निर्मम सरकार की विदाई..बंगाल की युवाशक्ति तय कर रही है। बीते सालों में यहां के नौजवानों को जितनी लाठियां पड़ीं... जितने आंसू बहाने पड़े हैं...23 अप्रैल को और 29 अप्रैल को इसका जवाब मिलेगा। मैं बीरभूम के आप सभी साथियों को भय रहित.. भय रहित बंगाल का विश्वास दिलाने आया हूं।

साथियों,

जिस बंगाल ने दुनिया को विश्व-भारती जैसा संस्थान दिया...वहां से युवा पढ़ाई के लिए, रोजगार के लिए पलायन करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। और ये बंगाल का दुर्भाग्य देखिए... कोई नई यूनिवर्सिटी यहां खुल नहीं रही है। जो खुली हैं, उनके रेगुलर कैंपस नहीं हैं। जहां कैंपस हैं, वहां टीचर नहीं हैं। और जो शिक्षक हैं, उनकी सैलरी का कोई ठिकाना नहीं है। स्कूल भी यहां एक-एक करके बंद हो रहे हैं।
जेखाने स्कूल बोंदो, जेखाने स्कूल बोंदो, भोविष्योत बोंदो,
बांग्ला चाय...भोय नोय, भोरशा..!

साथियों,

आज केंद्र सरकार देश में रोजगार मेले आयोजित करती है। जहां-जहां भाजपा सरकारें हैं...वहां भी रोजगार मेले लगते हैं। इसके तहत लाखों नौजवानों को सरकारी नौकरियों के अपॉइंटमेंट लैटर दिए जाते हैं। बीते दो-ढाई वर्षों में ही...रोजगार मेलों से 17 लाख से ज्यादा सरकारी नौकरियां दी गई हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल में...रोजगार मेला नहीं, नौकरियों की लूट का खेला चल रहा है। शिक्षक भर्ती घोटाले ने...हज़ारों परिवारों के सपनों को कुचल दिया। लाखों नौजवानों को भयभीत कर दिया, आशंका से भर दिया।

साथियों,

भारत, आज डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग में नए रिकॉर्ड बना रहा है। आप अखबारों में पढ़ते होंगे...टीवी पर देखते होंगे.. मेड इन इंडिया हथियार दुनियाभर में एक्सपोर्ट हो रहे हैं। लेकिन TMC की दुर्नीति देखिए... यहां क्या हो रहा है। देश हथियार एक्सपोर्ट कर रहा है... और TMC की दुर्नीति देखिए.. यहां फैक्ट्रियां क्या करती है.. यहां फैक्ट्रियां कच्चे बम बना रही है कच्चे बम.. गली-मोहल्ले में कच्चे बम की फैक्ट्रियां चल रही हैं। बीरभूम में ही, टीएमसी से जुड़े लोगों के घर से कच्चे बम के भंडार मिलते हैं। TMC ने कच्चे बम के निर्माण को ही कुटीर उद्योग बना दिया है। TMC के राज में...लघु और कुटीर उद्योग बंद हो रहे हैं...लेकिन कच्चे बम के उद्योग फैल रहे हैं।

साथियों,

अब ये नहीं चलेगा... अब ये नहीं चलेगा..

आर नोय! चुप थाकबो ना ! आर नोय! चुप थाकबो ना!

आप कमल छाप पर बटन दबाइए...बीजेपी, बंगाल में भी रोज़गार मेले शुरू करेगी। बीजेपी, सभी खाली पड़े पदों पर तेज़ी से भर्ती करेगी। और बीजेपी, बंगाल सरकार के कर्मचारियों को... सेवेंन्थ पे कमीशन का लाभ देगी।

साथियों,

पश्चिम बंगाल को कुदरत ने बहुत कुछ दिया है। इस धरती के नीचे प्राकृतिक संपदा के खजाने हैं। लेकिन इस संपदा को TMC का सिंडिकेट लूट रहा है। TMC के सिंडिकेट का ये गुंडाराज... केंद्र सरकार को भी रोड और रेल जैसे काम तेज़ी से नहीं करने देता। ताकि यहां इंडस्ट्री न लगे...ताकि, यहां जो माइनिंग होती है, उसपर TMC के सिंडिकेट का राज चलता रहे। डेउचा पाचमी के साथ क्या हुआ... इसका जवाब भी TMC के पास नहीं है।

साथियों,

मैं यहां के सभी युवा साथियों को...हमारे SC परिवारों, मेरे आदिवासी परिवारों को भरोसा देता हूं... कि TMC के सिंडिकेट का अंत 4 मई को होकर रहेगा। 4 मई को टीएमसी जाएगी। भाजपा आएगी... भाजपा... भाजपा... साथियों, बंगाल में बीजेपी सरकार कनेक्टिविटी का नया अध्याय शुरू करेगी। खड़गपुर-मोरेग्राम एक्सप्रेसवे...दुबराजपुर बायपास...सिउरी रेलवे स्टेशन...ऐसे प्रोजेक्ट्स से कनेक्टिविटी भी अच्छी हुई है...और युवाओं को रोजगार भी मिल रहा है। लेकिन अभी TMC ने 75 हज़ार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स रोक के रखे हैं। आपको आंकड़ा याद रहेगा...भारत सरकार 75 थाउजेंड करोड़ 75 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट यहां लाकर के खड़े किए हैं... लेकिन ये रोककर के बैठे हैं... आपको याद है ये आंकड़ा... कितने... 75 हजार करोड़... कितने... कितने...डबल इंजन सरकार बनते ही, ऐसे अनेक प्रोजेक्ट्स पर तेज़ी से काम होगा। जिससे बीरभूम में छोटे और बड़े, हर प्रकार के उद्योगों के लिए नए रास्ते बनेंगे।

साथियों,

आप सभी जानते हैं...TMC ने कैसे मनरेगा के नाम पर भी गरीब परिवारों, दलित परिवार और आदिवासी परिवारों को ठगा है। फर्जी जॉब कार्ड बनाए...कागज़ पर ही काम किया...बजट में हेराफेरी की...अब केंद्र सरकार जी राम जी कानून लेकर आई है। आप यहां बीजेपी सरकार बनाइए...हम, जी राम जी कानून लागू करेंगे। गरीबों को रोजगार देंगे... गांव-गांव रोजगार देंगे... इससे किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के लिए नई सुविधाएं बनेंगी। और गांव में एक सौ पचीस दिन का रोजगार भी मिलेगा...और मजदूरी का पूरा पैसा आपके बैंक खाते में आएगा। कोई सिंडिकेट हाथ नहीं लगा पाएगी... कोई कटमनी नहीं, कोई कमीशन नहीं। ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

बीरभूम के आलू पॉस्तो की बहुत चर्चा होती है। लेकिन TMC की निर्ममता, आलू की खेती को तबाह कर रही है। इसके कारण, आलू किसान अपनी जान तक दे रहे हैं। ये बहुत ही गंभीर संकट है। पहले आलू किसानों से उपज खरीदने का वायदा किया...और फिर आलू की फसल को सड़ने के लिए छोड़ दिया। TMC को इस धोखे की सज़ा मिलनी चाहिए। सज़ा मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए... टीएमसी को सज़ा मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए... सजा देंगे... सजा देंगे... और इसलिए यहां बदलाव चाहिए।
एखोन बदोल चाई... एखोन बदोल चाई...बदोल चाई…

साथियों,

केंद्र सरकार ने छोटे किसानों के लिए FPO... यानि किसान उत्पादक संघ की योजना बनाई है। छोटे-छोटे किसान समूह बना सकते हैं..

इसमें किसान ही, लोन, बीज, खाद, बाज़ार में बिक्री...ये सबकुछ मिलकर संभालते हैं। सरकार FPO को कोल्ड स्टोरेज और आलू चिप्स जैसे कृषि आधारित उद्योगों को लिए भी मदद देती है। यानि किसानों को ये FPO चिप्स के उद्योग भी लगा सकते हैं। यहां भी आप बीजेपी सरकार बनाइए. बंगाल में किसानों के नए FPO बनाए जाएंगे, जिससे अनेक समस्याओं का समाधान होगा।

साथियों,

आपको याद रखना है...TMC को PM शब्द से तो नफरत ही …नफरत है। ये पीएम शब्द मोदी के परिवार का शब्द नहीं है। ये पीएम शब्द मोदी की जागिर नहीं है। ये पीएम शब्द भारत के संविधान ने दिया है और जनता के आशीर्वाद से मिलता है। इनको किसान से, गरीब से, आदिवासी से, श्रमिक से सभी से नफरत है।मैं आपको कुछ उदाहरण देता हूं। बीजेपी सरकार की जिन भी योजनाओं में PM शब्द होता है..पीएम लगा है...TMC उनका फायदा यहां मिलने ही नहीं देती। जैसे, पीएम किसान सम्मान निधि है। शुरुआत के कई महीनों तक बंगाल के किसानों को इन्होंने इससे वंचित रखा। लेकिन जब किसानों ने दबाव डाला, तो निर्मम सरकार को झुकना पड़ा। अभी तक, इस योजना से बंगाल के छोटे किसानों को...14 हजार करोड़ रुपए से अधिक मिल चुके हैं। कोई कट नहीं, कोई कमिशन नहीं, कोई सिंडिकेट नहीं, 14 हजार करोड़ रुपए सीधा किसानों के खाते में पहुंच गया। और यहां बीरभूम के तीन लाख किसान परिवारों को भी...अभी तक करीब आठ सौ करोड़ रुपए मिल चुके हैं।

साथियों,

ऐसे ही, पीएम फसल बीमा योजना है। ये योजना यहां लागू होती, तो फसल बर्बाद होने पर किसानों को क्लेम मिलता। लेकिन इसमें पीएम है, तो यहां के सीएम को गुस्सा आ जाता है, पीएम का नाम सुनते ही सीएम भड़क जाती है। पीएम कुसुम योजना से, किसानों को सोलर पंप मिलते। ये भी, टीएमसी लागू नहीं करती है।

साथियों,

तृणमूल की नफरत हमारा आदिवासी समाज भी भुगत रहा है। पिछड़ी आदिवासी जनजातियों के लिए बीजेपी सरकार पीएम-जनमन योजना चला रही है। देशभर में इसके तहत काम हो रहा है। लेकिन बंगाल के आदिवासी परिवारों को इसका पूरी तरह से लाभ नहीं मिल पा रहा है। क्यो…..क्योंकि इस योजना में पीएम लगा हुआ है।

साथियों,

चुनावों में आपका आशीर्वाद बीजेपी का पीएम तो बनाता आ रहा है... लेकिन अब इस चुनाव में आपको बंगाल में बीजेपी का सीएम बनाना है। सीएम बनाएंगे...बीजेपी का सीएम बनाएंगे... आप यहां 4 मई को यहां बीजेपी का सीएम बनाएंगे ताकि पीएम और सीएम, दोनों मिलकर आपके फायदे के लिए डबल काम करके रहेंगे।

साथियों,

मैं बंगाल के सभी साथियों से कहूंगा...इस बार कमल छाप पर भरोसा करना है। TMC ने आपके साथ जो कुछ किया है...उसका हिसाब करने का ये सबसे उत्तम मौका है। 23 अप्रैल को और 29 अप्रैल को इन सभी साथियों को विजयी बनाना है। और आज मैं आपको वादा करता हूं। आपने हमेशा मेरे मुंह से सुना होगा, सबका साथ सबका विकास... सुना है ना... सबका साथ सबका विकास सुना है ना... ये विकास का मेरा मंत्र है... लेकिन बंगाल में मुझे और ज्यादा करना है.. और इसलिए सबका साथ... सबका विकास और जिन्होंने बंगाल को लूटा है सबका हिसाब। ये मोदी इनको चोड़ने वाला नहीं है। चुन-चुन कर के हिसाब मांगेगा। चुन-चुन के हिसाब मांगा जाएगा। जिन्होंने बंगाल को लूटा है, उनको लौटाना पड़ेगा... बंगाल के मेरे भाई बहनों आप मेरा एक करोगे... सबके सब हाथ ऊपर करके बताओ... मेरा एक काम करोगे... पक्का करोगे आप जिससे भी मिलें, उनसे कहना कि मोदी जी आए थे... उन्होंने आपको पॉइला बैशाख की शुभेच्छा दी है। पॉइला बैशाख की शुभेच्छा पहुंचाओगे... पॉइला बैशाख की शुभेच्छा पहुंचाओगे...

बोलो मेरे साथ..

भारत माता की...

भारत माता की...

दोनों हाथ ऊपर करके पूरी ताकत से बोलिए.. भारत माता की...

भारत माता की...

भारत माता की...

भारत माता की...

वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे...