PM Modi addresses a public meeting in Ratlam, Madhya Pradesh

Published By : Admin | November 4, 2023 | 15:30 IST
Centre's free ration scheme, Pradhan Mantri Garib Kalyan Anna Yojana will be extended by 5 more years, says PM Modi in Ratlam
Be it the country or Madhya Pradesh, Congress is only left with false promises. Congress doesn't even know the roadmap for the development of Madhya Pradesh: PM Modi
In Ratlam, PM Modi says the bag of urea, which costs Rs 3,000 in foreign countries, today is available to Indian farmers for less than Rs 300
Congress leaders are filmy, their dialogues are also filmy. When the characters are filmy then the scene will also be filmy: PM Modi takes a dig at Congress leaders in Ratlam

Amidst his ongoing election campaign, Prime Minister Narendra Modi today addressed a huge public meeting in Ratlam, Madhya Pradesh. Witnessing the massive crowd, PM Modi remarked, “The tremendous wave of support for the BJP in Madhya Pradesh is truly remarkable. It's the BJP that has propelled Madhya Pradesh to great heights in agriculture, enhanced its road and rail infrastructure, fostered industrial growth, and transformed it into a center of modern education. This unwavering faith of the people in the BJP is a testament to our achievements."

“The sentiment prevailing today is that Madhya Pradesh is on the mind of Modi, and Modi is on the mind of Madhya Pradesh. Therefore, the MP is saying- ‘Phir Ek Baar, Bhajpa Sarkar’,” the PM added.

PM Modi criticized the Congress, stating that they rely on false promises, be it in the country or Madhya Pradesh, lacking a concrete development plan. He characterized Congress leaders as filmy and their announcements as filmy. He said, “And when the characters are filmy, then the scene will also be filmy. Here, a competition of tearing clothes is going on between two Congress leaders. And right now, this is the trailer of the film. After the victory of BJP on 3rd December, the real picture of Congress will be visible here; the real conflict of Congress will take place.”

PM Modi accused the Congress of being associated with massive scams, criminal dominance, the mistreatment of the poor, oppression of Dalits, backward classes, and tribals in the state. He claimed that Congress is incapable of truly representing Madhya Pradesh and is primarily focused on promoting dynastic politics.

Talking about the government’s initiatives, PM Modi asserted, “It is the BJP which planned to give free ration to the poor even during the Corona crisis. Under the Pradhan Mantri Garib Kalyan Anna Yojana, free ration has been given to the poor in the country for the last three years. We have taken another decision related to free ration. It has been decided that the scheme providing free ration to 80 crore poor people will now be extended for the next 5 years.”

Emphasizing the schemes benefiting women in the state, PM Modi mentioned, "The Ujjwala Yojana has reduced the cost of gas cylinders by Rs 500 for its beneficiaries. Through the Har Ghar Jal Abhiyan, countless families in Madhya Pradesh now have access to tap water. Women have had bank accounts opened for them, and arrangements were made to ensure that every benefit reached those bank accounts. Ladli Behan Yojana and Ladli Lakshmi Yojana are also being praised all over the country today.”

In his address, PM Modi highlighted the achievements of the Modi government in the context of tribals. He mentioned that it was the BJP that acknowledged and honoured the contribution of tribal society to India's struggle for independence. The BJP government designated November 15, the birthdate of Bhagwan Birsa Munda, as Janjatiya Gaurav Divas.

“Recently, we celebrated the 500th birth anniversary of Rani Durgavati with great pomp. I have had the opportunity to lay the foundation stone of his grand memorial, a memorial of Gond culture, in Jabalpur. Today, India's most modern railway station is named after Rani Kamlapati,” he said.

Accusing the Congress party, PM Modi said, “There is no one in the country who Congress has never cheated. In every election, Congress brings a bunch of loan waivers. They did the same last time also. But the history of Congress is that it is not the farmers who benefit from Congress' loan waiver but only their people.”

He further said, “Under PM Kisan Samman Nidhi, Rs 2,60,000 crores have been sent directly to the bank accounts of farmers across the country. The BJP government ensures farmers do not have to buy expensive urea and fertilizers. The bag of urea, which costs Rs 3,000 in foreign countries, today is available to Indian farmers for less than Rs 300. The BJP government is spending lakhs of crores of rupees on this also.”

PM Modi emphasized that the trust in the BJP is a result of its commitment to work in the best interest of all sections of society, every region, and every family. He declared that what he witnessed in Ratlam signifies a massive victory for the BJP.

Click here to read full text speech

Explore More
77வது சுதந்திர தினத்தை முன்னிட்டு செங்கோட்டை கொத்தளத்தலிருந்து பிரதமர் திரு நரேந்திர மோடி நிகழ்த்திய உரையின் தமிழாக்கம்

பிரபலமான பேச்சுகள்

77வது சுதந்திர தினத்தை முன்னிட்டு செங்கோட்டை கொத்தளத்தலிருந்து பிரதமர் திரு நரேந்திர மோடி நிகழ்த்திய உரையின் தமிழாக்கம்
India is top performing G-20 nation in QS World University Rankings, research output surged by 54%

Media Coverage

India is top performing G-20 nation in QS World University Rankings, research output surged by 54%
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
PM Modi's interview to Asianet News
April 23, 2024

एंकरः नमस्कार प्रधानमंत्री जी, एशियानेट सुवर्णा न्यूज, एशियानेट न्यूज कनाडा प्रभा और एशियानेट न्यूज डॉट कॉम से बात करने के लिए।

पीएम मोदीः नमस्कार।

एंकरः 2014 और 2019 में बहुत डिसाइसिव विक्ट्री मिली आपको। फिर से आप वही बात कर रहे हैं कि डिसाइसिव विक्ट्री इस बार बहुत जरूरी है और आप उसमें इंडिया की ग्रोथ स्टोरी की बात करते हैं। ग्रोथ स्टोरी और डिसाइसिव विक्ट्री का क्या मेल है?

पीएम मोदीः देखिए पहली बात है कि लोकतंत्र में मैं तो चाहूंगा हर एक राजनीतिक दल में ये एस्पिरेशन होना चाहिए कि भाई हम चुनाव लड़े, लोगों का विश्वास जीते और सत्ता में आकर के हमारे जो उसूल हैं, हमारे जो रूल्स है जो भी अपने सपने हैं उसको लागू करने का प्रयास करें। तो किसी भी राजनीतिक दल में अगर यह महत्वाकांक्षा ही नहीं है तो तो फिर लोकतंत्र के लिए ही ठीक नहीं है। लोकतंत्र की आवश्यकता है कि सभी राजनीतिक दल जो भी है इनके मन में भाव रहना चाहिए कि भई कभी ना कभी सत्ता में आकर के अपने विचारों के आधार पर देश की सेवा करेंगे। ये लोकतंत्र की आवश्यकता होती है। जहां तक बीजेपी का सवाल है, देखिए 2014 में जब हम आए थे तब पांच-छह दशक का कांग्रेस को राज करने का अवसर मिला और शायद उनको कोई विपक्ष जैसा कुछ था ही नहीं। इतना मीडिया भी नहीं था और ना इतनी मीडिया में वाइब्रेंसी थी यानि एक प्रकार से उनके लिए ऐसा खुला मैदान था और देश भी उनके साथ था क्योंकि आजादी के आंदोलन के बाद जो भाव थे वो जो चाहते वो देश कर लेता। लेकिन वो मौका गंवा दिया और धीरे धीरे धीरे डिटरोरिएशन पर आया। और उस परिस्थिति में 2013 में जबकि मेरे पर एक आरोप था, इस आदमी को हिंदुस्तान का क्या पता है, इस आदमी को दुनिया का क्या पता है। यह सारे नकारात्मक मुद्दे होने के बावजूद भी लोगों ने हमें सेवा करने का अवसर दिया है। और मैं कह सकता हूं कि 2014 वो उम्मीद का कालखंड था लोगों के दिल में भी उम्मीद थी और मेरे मन में भी उम्मीद थी कि हम उनकी उम्मीदों को पूरा करें। और 5 साल में सरकार चलाना मतलब मैं शासन नहीं करता हूं मैं सेवा करता हूं। सरकार चलाने का मतलब मैं पद पर बैठ कर के मौज करने के पक्ष में नहीं हूं। मैं एक सामान्य नागरिक से भी ज्यादा मेहनत करने का प्रयास करता हूं। लोगों के लिए लोगों ने बड़े निकट से हमारी सरकार के कामों को देखा। 2014 में उम्मीद का वातावरण था, 2019 में एक प्रकार से विश्वास में पलट गया। जन सामान्य का इतना विश्वास उसने मेरे भीतर एक नया आत्मविश्वास भर दिया। मुझे लगा कि हम सही दिशा में है हम सबके लिए जो काम करने का सबका साथ सबका विकास सबका प्रयास का मंत्र लेकर चले उसको जमीन पर हम उतार पाए हैं और उसका परिणाम ये आया कि 2019 का कालखंड एक विश्वास का कालखंड रहा और आज जब मैं 2024 में देशवासियों के पास गया हूं तो मेरा 13-14 साल का एक राज्य के मुख्यमंत्री नाते अनुभव 10 साल का प्रधानमंत्री के नाते अनुभव और इसमें किए हुए कामों के आधार पर मैं कह सकता हूं कि मैं इस बार गारंटी लेकर गया हूं। यानि कभी उम्मीद फिर विश्वास और अब गारंटी। और जब गारंटी होती है ना तो बहुत बड़ी जिम्मेवारी होती है। और मुझे लगता है कि आज दुनिया में जो भारत का के प्रति भरोसा बना है। आखिर विश्व ने हिंदुस्तान ने 30 साल तक अस्थिर सरकारों को देखा है। अस्थिर सरकारों ने देश का बहुत नुकसान किया है। विश्व में भी भारत का पूरी तरह देखने का नजरिया बहुत ही एक प्रकार से कोई वैल्यू ही नहीं था। लेकिन स्थिर सरकार क्या कर सकती है वह देश के मतदाताओं ने देखा है और इसलिए मुझे लगता है कि 2024 यह चुनाव मोदी नहीं लड़ रहा है, बीजेपी नहीं लड़ रही है। देश की जनता का इनिशिएटिव है देश की जनता साल के अनुभव के आधार पर निर्णय कर चुकी है और इसलिए यह चुनाव का उस अर्थ में अत्यंत महत्व है।


एंकरः तो आप जगह-जगह जा रहे मोदी जी, सभाएं कर रहे हैं, रैलीज कर रहे हैं, माहौल क्या लग रहा है आपको?

पीएम मोदीः देखिए मैं सार्वजनिक जीवन में लंबे समय से काम करता हूं। मैं संगठन का कार्यकर्ता रहा हूं तो मैं माहौल को समझ पाता हूं। मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूं लेकिन उस वाइब्रेशन को समझ पाता हूं और उसके आधार पर मैं कह सकता हूं कि मैं जहां-जहां गया हूं और मैं कोई चुनाव के समय दौरा करने वाला इंसान नहीं हूं। मैं हफ्ते में नॉर्मली हर फ्राइडे, सैटरडे, संडे कहीं ना कहीं जाता हूं। सरकार के कामकाज करता हूं वो भी मैं जनता के बीच में करता हूं। और उसके कारण मुझे बदलता हुआ माहौल...उसका मुझे अंदाज आता है। और इसलिए मैं देख रहा हूं कि यह जो एकतरफा वातावरण दिख रहा है व चुनाव डिक्लेयर होने के बाद पैदा नहीं हुआ है यह पिछले 10 साल में निरंतर बढ़ता गया है और लोगों का अप्रत्याशित समर्थन। दूसरी तरफ मुझे बताइए, सामान्य मतदाता आप अगर मतदाता हैं तो आप मतदाता के नाते वोट करने जाएंगे तो क्या सोचेंगे। पहले तो आप सोचेंगे कि देश किसको दे रहा हूं, किसके हाथ सुपुर्द कर रहा हूं, तो आप जो भी लोग दिखते हैं कंपेरिजन करेंगे। फिर आप तय करेंगे कि इनको देश सुपुर्द कर सकते हैं। क्यों, उनका ट्रैक रेकॉर्ड है, वो जो बात बताते हैं और जो करते हैं उन सब के आधार पर एक मन बनता है। दूसरा हमारे साथी कौन हैं, हमारी सोच क्या है, हमारा एजेंडा क्या है, दूसरे स्टेज पर वह देखता है। औरों के कारनामे कैसे रहे हैं, अनुभव कैसा रहा है ,वो देखते हैं। दूसरा इस बार के चुनाव का एक सदभाग्य है कि 2014 में मतदाताओं को कंपेरिजन के लिए अवसर बहुत कम था। एक गुस्सा था मोदी को लाओ। अब उनके पास कंपेरिजन... अच्छा वो ऐसा करते थे मोदी ऐसा करता है, वो यह गलती करते थे मोदी य गलती नहीं करता है, वो बुराई करते थे मोदी नहीं करता है और इसलिए कंपेरिजन के बाद वो नतीजे पर पहुंच रहे और इसलिए मैं उनकी आंखों में प्रेम तो देखता ही हूं, आकर्षण भी देखता हूं लेकिन साथ-साथ उनकी आंखों में जिम्मेवारी में देखता हूं। वो जिम्मेवारी कहते हैं कि ये चुनाव हम जिताएंगे मोदी जी, आप शांत रहिए, आप चिंता मत कीजिए। यह मैसेजिंग...उम्मीद से भी अनेक गुना ज्यादा है।


एंकरः आपकी अभी तक की सरकार, बहुत ही 2014 से ही है टोटली एंटी करप्ट कभी किसी ने कुछ लांछन लगाया, कभी कुछ लगता नहीं है, बिलीफ है कि आप बिल्कुल टोटली नॉन करप्ट गवर्नमेंट रन करते हैं उसके बाद भी अभी जैसे ईडी के अरेस्ट वगैरह हुए हैं कई लोग उसमें कहते हैं कि मिसयूज हो रही है सेंट्रल एजेंसी आपके पॉलिटिकल रीजन्स के लिए। एंटी करप्शन का है प्लैंक लेकिन इसके लिए हो रही है आप उसके बारे में क्या कहना चाहेंगे?

पीएम मोदीः मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने इस चीज को आब्जर्व किया क्योंकि मैं 13 साल तक एक राज्य में भारी बहुमत के साथ सरकार चलाता था। आर्थिक रूप से अच्छा राज्य उसमें सेवा करने का मुझे अवसर मिला और पिछले 10 साल से यहां हूं। तो लोग मेरे जीवन को भी देखते हैं तो मेरे साथ वाले वो भी मेरा जीवन देखते हैं वो मेरे उसूलों को देखते हैं और बाय इन लार्ज हमारा तो यहां थोड़ा-बहुत... लीडर का अगर एक है कि चीजों में मेरे वैल्यूज हैं तो फिर कोई सर्कल के बाहर पैर नहीं रखता है। दूसरा मैं प्रारंभ से मेरा एक आग्रह रखा है कि मेरी गवर्नमेंट पॉलिसी ड्रिवन होनी चाहिए, एडहोकिज्म नहीं होना चाहिए। ब्लैक एंड वाइट में पॉलिसी रखो, पॉलिसी में गलती हो सकती है, लोगों को आलोचना करने का हक है लेकिन जब पॉलिसी होती है, ब्लैक एंड वाइट में होती है तो किसी भी अफसर को इफ्स एंड बट्स का अवसर नहीं मिलता है, डिस्क्रिमिनेशन का अवसर नहीं मिलता है। उसको मानना पड़ता है ये तो बाएं जाएं या दाएं जाएं और इसके कारण जो नागरिक है उसको भी लगता है भई ये मेरे हक का है मुझे मिलेगा, यह मेरे हक का नहीं है तो नहीं मिलेगा, तो उससे विश्वास भी बढ़ता है। दूसरा आपने देखा होगा हमने कुछ कदम भी उठाए। पहले रिक्रूटमेंट में क्लास थ्री, क्लास फोर के लिए साब इंटरव्यू होते थे। अब इंटरव्यू 30 सेकंड का होता था। मैं तो दुनिया में ऐसा कोई तेजस्वी-तपस्वी देखा नहीं कि 30 सेकंड में तय कर ले कि ये अच्छा है और बुरा है। मैंने कहा नो इंटरव्यू। लोग अपना जो भी बायोडाटा है इसके आधार पर अप्लाई करें और कंप्यूटर तय करेगा कि कौन योग्य लोग हैं। पहले 200 आएंगे कंप्यूटर से उनको ऑर्डर दे दो। हो सकता है दो-चार लोग हमारी अपेक्षा से वीक आ जाएंगे लेकिन कम से कम उसको यह तो लगेगा कि मुझे तो ट्रांसपेरेंसी से मौका मिला है। मैं अपनी क्षमता बढ़ाऊं, मैं अपना काम करूं, और आज उसके कारण लोअर लेवल पर ऐसी कोई चीज... अब जैसे इनकम टक्स असेसमेंट है। सबसे ज्यादा शिकायतें रहती थी, करप्शन का अवसर तो वहीं होता है। हमने फेसलेस कर दिया,टेक्नोलॉजी कर दी। आज मुंबई की फाइल गुवाहाटी में देखी जाती होगी या चेन्नई में देखी जाती होगी या कोच्चि में किसी को मालूम ही नहीं है। और इसलिए वो मेरिट के आधार पर चीजें देखता है तो लोगों का विश्वास भी बनता है और काम भी। सर्विसेस में हमने डिजिटल अप्रोच लिया। ह्यूमन इंटरवेंशन को हम मिनिमाइज करने की कोशिश कर रहे है। अब जैसे हमारा जैम पोर्टल है आप जैम पोर्टल पर आइए, सरकार को जो भी खरीदी करनी है, जैम पोर्टल पर जाएं। कोई करप्शन नहीं और स्पीड भी होती है। क्वालिटी भी मिलती है तो मैं समझता हूं कि हमारा जो ऑनलाइन मैकेनिज्म है एक मल्टी फेसेटेड हमारी एक्टिविटी है। उन सारी चीजों का परिणाम है। अब जैसे हम... किसी प्रधानमंत्री ने कहा था एक रुपया भेजते हैं तो 15 पैसा जाता है तो बीच में कोई न कोई पंजा तो खा ही जाता था। अब हम डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर कर रहे हैं। एक रुपया भेजते हैं 100 पैसा पहुंचता है, तो सामान्य मानवी को भी लगता है मेरे हक का मुझे मिलेगा। तो उसके कारण अब मुझे बताइए कोरोना के इतने बड़े संकट में भी देश पूरी तरह सरकार के साथ क्यों रहा। उसको विश्वास था कि संकट बड़ा आया है लेकिन ये भी हमारी तरह मेहनत करते हैं तो इसका फायदा होता है।


एंकरः ईडी और सीबीआई के मिसयूज के बारे में कुछ सवाल उठ रहे थे।

पीएम मोदीः मैं हैरान हूं जी कि कोई भी... अगर मान लीजिए रेलवे है। रेलवे में टिकट चेकर का एक पोस्ट है। अब कोई ये कहे कि यह क्यों चेक करता है टिकट। क्या हम बेईमान हैं क्या। टिकट चेकर का दायित्व है टिकट चेक करना चाहिए उसने। वैसे आपने ईडी बनाया क्यों, सीबीआई बनाया क्यों, उनका दायित्व है। सरकार ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए उनको रोकना नहीं चाहिए, उनमें अड़ंगे नहीं डालने चाहिए। उनको स्वतंत्र रूप से काम करना देना चाहिए। जैसे एक टिकट चेकर को करने देते हैं, उसको भी करने देना चाहिए। दूसरी बात है आखिर ईडी ने काम क्या किया है। ईडी ने करप्शन के खिलाफ मामले किए और वो हर प्रकार के होते हैं। सरकारी बाबुओं के होते हैं, ड्रग माफियाओं के होते हैं, कई प्रकार के होते हैं। इसमें सिर्फ 3 परसेंट वो लोग हैं जिनका राजनीतिक जीवन है या राजनीति से जुड़े हुए लोग हैं, 3 परसेंट। 97 परसेंट वो लोग हैं जो बेईमानी में कहीं न कहीं धरे गए। कई अफसर घर गए हैं, कई अफसर जेलों में पड़े हैं। इसकी कोई चर्चा ही नहीं करता है। अगर देश में करप्शन के खिलाफ काम करने के लिए एक संस्था को जन्म दिया आपने। वो तो पुरानी सरकारों ने दिया है हमने नहीं बनाई है। वो अगर काम ना करे तो सवाल पूछना चाहिए, काम करे इसलिए सवाल पूछा जाए यह लॉजिक बैठता नहीं। अच्छा 3 परसेंट सिर्फ हैं जिनको अभी तक ईडी पहुंची है। 97 पर दूसरा है। दूसरी बात है भ्रष्टाचार से रुपया पैसा का न्याय होता है ऐसा नहीं है। मान लीजिए एक ब्रिज है भ्रष्टाचार के तहत ऐसे ही किसी को कांट्रैक्ट दे द गया। और ऐसे ही उसने ब्रिज बना दिया और कुछ साल में वो ब्रिज गिर गया। मुझे बताइए कितना भयंकर नुकसान होगा। उसी प्रकार से एक सामान्य नागरिक बड़ी मेहनत करके उसने अपनी एग्जाम पास की। लेकिन चूंकि भ्रष्टाचार नहीं कर पा रहा है क्योंकि उसकी सिफारिश नहीं है इसलिए उसको हक नहीं मिलता और किसी फालतू व्यक्ति को नौकरी मिल जाती है। यह असंतोष जो है वह देश में लंबे समय तक नहीं चलता है। दूसरा ईडी ने 2014 से पहले पीएमएलए जिसके अंतर्गत ईडी ऑपरेट करती है। 1800 से कम उन्होंने केसेस किए थे। अब देखिए जबकि उनको काम करना था जबकि उस समय तो सरकार पर बहुत आरोप लग रहे थे भ्रष्टाचार के, 1800 किया। 2014 के बाद हमने 10 साल में हमारे कालखंड में ईडी ने 5000 से ज्यादा केसेस किए हैं। ये उसकी एफिशिएंसी है उसकी एक्टिविटी दिखाता है। 2014 से पहले ओनली 84 सर्चेज कंडक्ट की गई थी ओनली 84, इतना बड़ा डिपार्टमेंट सोया पड़ा था। 2014 के बाद 7000 सर्चेज हुई है। 2014 के पहले मैंने उनके 10 साल में करीब 5000 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी अटैच की गई थी। 2014 के बाद सवा लाख करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी अटैच की गई है। ये देश की संपत्ति है जी। अब मुझे बताइए ईडी का ट्रैक रिकॉर्ड क्या बताता है। ईडी का ट्रैक रेकॉर्ड बताता है एफिशिएंसी, बड़े स्केल पर एक्टिविटी और स्वतंत्र रूप से अगर हम देश में करप्शन हटाना चाहते हैं तो आपको जो संस्था जिस काम के लिए बनी है उसको आपने काम करने देना चाहिए। पॉलिटिशियन ने ऐसी संस्थाओं को अंदर अपनी टांग नहीं अड़ानी चाहिए और इसलिए भले मैं प्रधानमंत्री हूं लेकिन मेरा कोई हक नहीं बनता है कि मैं ईडी के काम के अंदर रुकावट डालूं।


एंकरः क्लियर फोकस साउथ दिखाई दे रहा है मोदी जी, दक्षिण के राज्यों के ऊपर फोकस दिखाई दे रहा है आपका। मगर कर्नाटक में विधानसभा चुनाव घटे और आपने बहुत जमकर प्रचार किया, नतीजे उतने आप जैसे चाहते थे, ऐसा नहीं आया, तेलंगाना का ऐसे हुआ। अब 131 जो कांस्टीट्यूएंसी आते हैं, उनमें से 50 से ज्यादा जीतने की उम्मीद रख रहे हैं, पॉसिबल लग रहा है।

पीएम मोदीः हमारे देश में एक नैरेटिव बना दिया गया बहुत समय से कि भाजपा याने अपरकास्ट की पार्टी। रियलिटी यह है कि भाजपा में सबसे ज्यादा एससी हैं, सबसे ज्यादा एसटी हैं, सबसे ज्यादा ओबीसी, ये सारे हमारे... सबसे ज्यादा मेरे मिनिस्ट्री में ओबीसी हैं। फिर बना दिया कि भाजपा अर्बन पार्टी है। आज मेरी पार्टी का पूरा कैरेक्टर ऐसा है कि जिसमें ग्रामीण लोग सबसे ज्यादा हैं। फिर भाजपा का एक कैरेक्टर बना दिया कि ये तो बहुत ही पुरान पंथी पार्टी है, नया सोच ही नहीं सकती है। आज डिजिटल मूवमेंट का नेतृत्व पूरा अगर दुनिया में कोई करता है तो बीजेपी रूल भारतीय जनता पार्टी की सरकार कर रही है। तो ये जो भ्रम फैलाए हुए हैं वो गलत है। दूसरा आप तेलंगाना देखिए, तेलंगाना में हमारा जो वोट शेयर था आज हमारा वोट शेयर डबल हो चुका है। 2019 में पार्लियामेंट के जो इलेक्शन हुए, यह लोगों को जानकारी दीजिए आप। 2019 के पार्लियामेंट इलेक्शन में साउथ में सिंगल लार्जेस्ट पार्टी बीजेपी है। सबसे ज्यादा सांसद बीजेपी के हैं। 2024 भी होगी और मैं मानता हूं ये पहले की तुलना में वोट शेयर तो बहुत बढ़ेगा, सीटें भी बहुत बढ़ेगी, ये मैं मानता हूं। दूसरा साउथ में जो सरकारें है उनकी पहचान क्या बन गई है। चाहे कांग्रेस हो, चाहे एलडीएफ हो चाहे डीएम के हो सब जगह पर क्या पहचान है। आज हम पडुचेरी में सरकार में हैं। पुडुचेरी साउथ में है, पता होना चाहिए हम सरकार में हैं। और आप अंडमान निकोबार... हमारा संसद जीत करके आता है, जहां पर सबसे ज्यादा हमारे साउथ इंडियन भाई भी रहते हैं और बंगाली भाई भी रहते हैं। और इसलिए यह जो सिंपलीफिकेशन हो रहा है, अब इनकी सरकारों का तरीका क्या है। पूरी तरह ये फैमिली रन सरकारें हैं। भ्रष्टाचार, आकंठ भ्रष्टाचार है जी। अब आप देखिए वहां हाल क्या है साउथ में। कांग्रेस के युवराज उत्तर से भाग करके दक्षिण में आश्रय लिया उन्होंने, वायनाड में निकल गए। इस बार उनकी हालत यह है कि वह इंतजार कर रहे हैं कि जैसे ही 26 तारीख को वायनाड का पोलिंग हो जाएगा, किसी और सीट की घोषणा उनके लिए होगी। वो दूसरी सीट की तलाश में हैं ये पक्का लिख के रखिए मेरे शब्द। और मैंने एक बार घोषणा की थी पार्लियामेंट में कि उनके बड़े-बड़े नेता अब लोकसभा लड़ने वाले नहीं हैं वो राज्यसभा में जाएंगे। और मेरे कहने के एक महीने के बाद उनके सबसे बड़े नेता को राज्यसभा से आना पड़ा, लोकसभा छोड़ देनी पड़ी तो ये पराजय पहले से स्वीकार कर लिया है जी। और इसलिए मैं इस बार पूरी तरह आश्वस्त हूं कि और मैं जब ये राम मंदिर को लेकर के मेरा अनुष्ठान चल रहा था। और जब मैं साउथ में अनुष्ठान के समय गया तो मैं देखा कि वहां पर जो लोगों का प्यार मैं देख रहा था, लोगों का विश्वास देख रहा था वो मैं मानता हूं कि अनप्रेसिडेंटेड था और मैं पक्का मानता हूं कि जो मिथ है वो टूटेगा। बहुत जल्द भारतीय जनता पार्टी को सेवा करने का अवसर भी मिलेगा और इस चुनाव में ज्यादा से ज्यादा हमारे प्रतिनिधि संसद में मेरे साथ काम करने के लिए आएंगे। वोट शेयर तो बहुत ही ज्यादा बढ़ेगा।


एंकरः कर्नाटक से आता हूं मैं और कर्नाटक के बारे में सवाल, कर्नाटक की कांग्रेस सरकार इस पर निर्भर है कि उन्होंने पांच गारंटी दिए हैं। दो हजार रुपये महिलाओं को जाती है। यह सब गारंटी स्कीम, फ्रीबी आप कैसे देखते हैं मोदी जी। और इसमें खाली ये क्या इंडिया ग्रोथ स्टोरी को सपोर्ट कर सकती है ऐसी फ्रीबी। कैन इंडिया अफोर्ड सच फ्रीबी। इस बार लोकसभा चुनाव में एक लाख रुपये हर महिला को, 25 गारंटी की बात कर रहे हैं। How do you see this?

पीएम मोदीः ऐसा है कि उनकी क्या मजबूरी है, वो जानें। निराशा की गर्त में डूबे हुए राजनीतिक दल हाथ पैर मारने का प्रयास कर रहे हैं। मैं मेरी बात बताता हूं। देखिए मुझे लंबे अरसे तक गुजरात में एक मुख्यमंत्री के नाते काम करने का अवसर मिला है और 10 साल से मुझे प्रधानमंत्री के रूप में लोगों ने काम करने का मौका दिया है। मेरे पास इतना लंबा अनुभव है और मेरा अनुभव है कि हमने कभी भी हमारे देश के नागरिकों के सामर्थ्य को कम नहीं आकना चाहिए। मैंने एक बार लाल किले से कहा कि भाई जो अफोर्ड कर सकते हो गैस की सब्सिडी छोड़ दे। इस देश में एक करोड़ से ज्यादा लोग आए जिन्होंने गैस की सब्सिडी छोड़ दी यानि मेरे देश के लोग... किसी समय शायद हमने कहा, लालबहादुर शास्त्री ने कहा खाना छोड़ो, खाना छोड़ा था। आज भी मेरा देश, मेरे देश के नागरिक हमसे ज्यादा देश को प्यार करते हैं, हमसे ज्यादा देश के लिए करने को तैयार है जी। हम कम से कम उनको कम ना आकें। अब देखिए कोविड के समय मैंने पार्लियामेंट में रिक्वेस्ट की सांसदों को कि भाई आपकी सैलरी छोड़ दीजिए। मेरे देश के सांसदों को कभी-कभी लोग कान पकड़ते हैं कि तुम अपना तनखा बढ़ाते हो, मेरे देश के सांसदों ने अपनी सैलरी छोड़ दी थी। ये सारी चीजें हैं जो प्रेरणा देती हैं। गरीब की हैंड होल्डिंग होनी चाहिए। इस देश के नागरिक की हैंड होल्डिंग चाहिए और हमारा मॉडल है देश के हर नागरिक को एंपावर करना, गरीबों को विशेष रूप से एंपावरमेंट मिलना चाहिए और देखिए बहुत सी चीज ऐसी होती है आप सिस्टमेटिक... जनता पर का बोझ कम करना सरकार का दायित्व है। ये कोई उपकार नहीं है। हमारा दायित्व है। लेकिन तरीके क्या हैं, जैसे हमने जन औषधि केंद्र खोले हैं, करीब 11000 जन औषधि केंद्र खोले हैं और मैं 25000 तक ले जाना चाहता हूं। जन औषधि केंद्र में करीब 2000 दवाइयां मिलती है। करीब 300 से ज्यादा मेडिकल इक्विपमेंट मिलते हैं और 80 परसेटं डिस्काउंट मतलब आपके परिवार में बुजुर्ग हैं और आपके परिवार के बुजुर्ग को अगर महीने का 2000-3000 की दवाई लगती है तो मध्यम वर्ग के परिवार पर बहुत बड़ा बजट...आज 80 पर डिस्काउंट हो गया तो उसको भी लगता है मां बाप की सेवा करूंगा। अब देखिए बिजली बिल... बिजली बल कम करने के लिए मैंने एलईडी बल्ब योजना लाई जो एलईडी बल्ब कांग्रेस के जमाने में 400 रुपये में मिलता था, मेरे जमाने में 40 पर आ गया। एलईडी बल्ब के कारण उसका 20 परसेंट, 30 परसेंट बिजली का बिल कम हो गया और अभी, अभी मैं पीएम सूर्य घर योजना लेके आया हूं। आप सोलर पैनल लगाइए जीरो बिजली बिल। इतना ही नहीं आगे का कालखंड इलेक्ट्रिक व्हीकल का आने वाला है तो आप सोलर एनर्जी से अपने घर की बिजली का उपयोग करिए और आपके व्हीकल को भी आप इलेक्ट्रिक व्हीकल को चार्जिंग कर सकते हैं उसी से। इसका मतलब उसका ट्रांसपोर्टेशन भी जीरो बजट वाला हो सकता है। अब ये एंपावरमेंट भी है at the same time उसके सर पर आर्थिक जो बोझ हैं, वो कम करने का लगातार प्रयास। और इन सब प्रोजेक्ट का परिणाम क्या आया है। पहले गरीबी हटाओ के नारे पांच दशक तक सुने हैं। पहली बार देश सुन रहा है कि 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले। यह एंपावरमेंट से होता है। देश का सामान्य नागरिक बहुत सामर्थ्यवान है। मेरा देश के सामान्य नागरिक पर ज्यादा भरोसा है।


एंकरः क्योंकि आप जनऔषधि केंद्रों पर बोले एक वीडियो देख रहा था मैं। कोई बुजुर्ग खड़े होकर बोलते हैं वीडियो कॉन्फ्रेंस था आपका। 5000 रुपये पहले औषधि का खर्च आता था अब 1600 पे कम हुआ है। और मैं बचे हुए पैसों से फल खा पा रहा हूं। आप भी बात करते-करते बहुत भावुक हुए थे। लगता है ऐसे बहुत सुकून देते हैं ऐसी योजनाएं।

एंकर 2: आई एम फ्रॉम केरला एंड मोर इंटरेस्टेड इन केरला. यू सीम टू बी मोर फोकस्ड इन केरला देन प्रीवियस इयर्स एंड व्हेन एवर यू कम टू केरला यू फोकस ऑन द कोऑपरेटिव सेक्टर एंड द लूटिंग ऑफ पब्लिक मनी इट इज, कैन आई एक्सपेक्ट सम एक्शन सर?

पीएम मोदीः पहली बात तो है कि भारतीय जनता पार्टी और जनसंघ के जमाने से हम पूरे देश की सेवा करना चाहते हैं। देश के हर हिस्से की सेवा करना चाहते हैं। राजनीतिक फायदा हो वहां करो काम, राजनीतिक फायदा ना हो वहां ना करो काम। यह हमारे सिद्धांत नहीं है। 1967 में जनसंघ का सबसे बड़ा राष्ट्रीय अधिवेशन केरल में हुआ था। क्या मतलब हम, हमारे लिए केरल सत्ता पाने के लिए मैदान है ऐसा नहीं है। हमारे लिए केरल भी वैसे ही सेवा क्षेत्र हैं और हम सेवा करते हैं और हम उतने ही लगन से पहले से कर रहे हैं। हमारे सैकड़ों कार्यकर्ताओं को गोलियों से भून दिया गया है। पॉलिटिकल मर्डर किए गए हैं उसके बावजूद भी हम आज भी वहां सेवा, मां भारती की सेवा करने के भाव से कर रहे हैं। और लेफ्ट की कैडर पर अदालतों ने सजाएं फरमाई हमारे लोगों की हत्याओं के खिलाफ। कई लोग उनके जेल में है। तो उसके बावजूद, क्यों हम हमारे लिए कच्छ हो या गुवाहाटी, कश्मीर हो या कन्याकुमारी हमारे देश का हर कोना हमारा है इसलिए हम गए हैं। और दूसरी बात है आपने देखा होगा त्रिपुरा किसी जमाने में लेफ्ट... तीन चार दशक तक उनका था। जैसे ही बीजेपी आई तो लोगों को पता चला ये तो लूटते थे। त्रिपुरा में बीजेपी इतना अच्छा काम कर रही है लोगों के और बार-बार बीजेपी को त्रिपुरा में लोग अब जिताने लगे हैं। वैसा ही केरल के अंदर इतना भ्रष्टाचार की गंद भरी पड़ी है लेकिन इकोसिस्टम ऐसी बनाई हुई है कि कोई चीज बाहर आने नहीं देते हैं और इसलिए चुनाव में जब गया। मैं कोऑपरेटिव को लेकर के इसलिए बोला हूं कि सामान्य मानवी के साथ बहुत बड़ा क्राइम है ये। इसको माफ नहीं किया जा सकता। गरीब परिवार बैंक में पैसा रखता है ना तो उसको लगता है चलो ब्याज यहां ज्यादा मिलेगा। उसको लगता है कि पैसे रखता हूं तो बेटी बड़ी होगी तो शादी करवा लूंगा और बड़ी मेहनत से वो कमा करके पैसे रखता है। फिशरमैन के पैसे हैं, किसान के पैसे, मजदूर के पैसे हैं। और करीब 300 कोऑपरेटिव बैंक है जो पूरी तरह ये लेफ्टिस्ट लोग चलाते हैं और करीब एक लाख करोड़ रुपया केरल के गरीबों का,सामान्य मानवी का उसमें पड़ा हुआ है। अब आप उसमें देखिए कि इन्होंने क्या किया उसके संचालन करने वालों ने उनके पैसों की चिंता नहीं की बड़ी बड़ी प्रॉपर्टी खरीद ली। अभी एक बैंक में हमने जो कार्रवाई की तो उसमें करीब 90 करोड़ रुपये हमने अटैच किया है और मैंने अभी लीगल एडवाइज मैं ले रहा यह जो 90 करोड़ रुपया है जिनके पैसे बैंक में थे इनको वापस कैसे मिले। मैंने ईडी से भी आग्रह किया हम देना शुरू करें और जो लूट रहे हैं उनकी प्रॉपर्टी अटैच करें। हमने अब तक 17 हजार करोड़ रुपये जो इस प्रकार से पकड़े थे वो संबंधित जिसका था उसको वापस किया है 17 हजार करोड़ रुपये। और इसलिए मैं केरल में 300 बैंक का जो घपला इन्होंने किया है अरबों खरबों रुपयों की जो एक लाख करोड़ रुपया ये छोटी अमाउंट नहीं है गरीब हैं। और मैं मानता हूं उसको मैं गंभीरता से मैंने लिया है और मेरे लिए ये चुनाव का मुद्दा नहीं है सामान्य मानवी के जीवन का मुद्दा है।


एंकरः There is a lot of discussion between this North South divide and it is alleged that the Central Government is showing a step mother attitude to the Southern States like Karnataka and Kerala. Kerala also filed case in the Supreme Court.कर्नाटक में गवर्नमेंट आपके ऊपर आरोप लगाती है कि जितना टैक्स हम देते हैं उसमें से बहुत कम हमें वापस मिल रहा है अगर ऐसे ही चलता रहा तो सेपरेट नेशन करने की...

पीएम मोदीः पहली बात है कि हम सब मां भारती के कल्याण के लिए हैं। हम सबका दायित्व है चाहे राज्य सरकार हो केंद्र सरकार हो, 140 करोड़ देशवासियों के हमारा जिम्मा है। व्यवस्था के लिए अलग-अलग लोगों को अलग-अलग काम मिले हैं लेकिन हम सबका लक्ष्य भारत सरकार का भी लक्ष्य यह होना चाहिए कि केरल के भी किसी गांव के व्यक्ति को सुविधा के लिए जो योजना बननी चाहिए उसको मिलना चाहिए। कर्नाटक के भी किसी व्यक्ति को लाभ मिलना चाहिए तो मिलना चाहिए। तो ये हमारी मूलभूत संविधान का स्पिरिट यही है। अब मुझे बताइए, हिमालय से नदियां निकल रही हैं और हिमालय के जो राज्य हैं वो कह दे कि पानी कहीं कोई मालिक है तो कहीं कोई तो देश चलेगा क्या। कोयला की खदानें हमारी एक स्थान पर है और हम कह दें कि मेरे यहां से कोयला बाहर नहीं जाएगा तो और राज्य अंधेरे में डूब जाएंगे कि नहीं। यह सोच ठीक नहीं है यह संपत्ति सब देश की है। कोई हम उसमें मालिक नहीं। दूसरी बात है यह व्यवस्थाएं संविधान में निर्धारित नियमों से चलती है। कोई सरकार अपनी मर्जी से नहीं करती है। जब 14 फाइनेंस कमीशन आया उसने ऐसा बड़ा जबरदस्त निर्णय किया। पहले 32 परसेंट डीवलूशन था उन्होंने 42 कर दिया। अब सब तरफ से मेरे पर दबाव था, साब 42 कर ही नहीं सकते देश चल नहीं सकता है। आप सरकार चला नहीं पाओगे फेल हो जाओगे। और सरकार को हक है उसमें से 10 में से पांच चीजें लेनी तीन लेनी दो लेनी दसों द लेनी न लेनी सरकार के पास अधिकार है। पार्लियामेंट को अधिकार है। लेकिन जब मेरे सामने आया मैंने कहा भाई मैं जानता हूं... अफसरों ने कहा साहब ये तो बहुत मुश्किल होगा, भारत सरकार चलाना ही मुश्किल होगा, इतना डीवलूशन हो जाएगा। मैंने कहा जी नहीं ये मेरा प्रारंभ है मुझे राज्यों पर भरोसा है, राज्य भी अच्छा करेंगे, पैसे जाने दो राज्यों के पास। और हमने 32 का 42 वैसा का वैसा फाइनेंस कमीशन के रिपोर्ट को स्वीकार किया। अब यूपीए के कालखंड में मनमोहन सिंह जी जब थे और रिमोट सरकार चलती थी तब कर्नाटका को डीवलूशन का 10 साल में 80 हजार करोड़ रुपये मिले थे हमारी सरकार ने करीब करीब 3 लाख करोड़ रुपए दिए हैं। केरला यूपीए के समय 46 हजार करोड़ रुपये दिए गए थे, हमारी सरकार ने एक लाख 50 हजार करोड़ रुपये दिए हैं। अब आंकड़े तो बताते हैं... तमिलनाडु यूपीए के समय तमिलनाडु को 95 हजार करोड़ रुपये मिले थे जबकि वो सरकार में पार्टनर थे, ये केरल वाले भी सरकार में दिल्ली में पार्टनर थे हम नहीं बैठे थे वो बैठे थे। उस समय करीब 95 हजार करोड़ रुपया तमिलनाडु को मिला था। आज करीब करीब 3 लाख करोड़ यानि 2 लाख 90 हजार करोड़ रुपये तमिलनाडु को मिला है। ये आंकड़े बताते हैं कि ये झूठ फैलाया जा रहा है राजनीतिक स्वार्थ के लिए नफरत का वातावरण पैदा किया जा रहा है। दुर्भाग्य ये है कि कांग्रेस पार्टी ऐसे लोगों के साथ बैठी है जो नेशनल पार्टी है जो पांच-छह दशक तक देश चला चुकी है और ऐसी हरकत और ऐसी गंदी प्रवृत्तियों में हिस्सेदार बन गई है।


एंकरः अभी जिस तरह बात की आपने समझाया कि फैलाया जा रहा है वो ईस्ट वेस्ट डिवाइड की आजकल बहुत ही ज्यादा बात होने लग गई। आपने देखा है कर्नाटका में एक एमपी ने तो खड़े होकर कुछ कहा जैसे कि देश के बंटवारे की बात होने लगती है। आप इस तरह के बिल्कुल अजीब सी और इन इन सब चीजों को कैसे देखते हैं। How Do You Want to handle the Strange Comments People Make.

पीएम मोदीः पहली बात है, देश के राजनीतिक दल भारत के संविधान को समर्पित होने चाहिए। और भारत का संविधान हम सबको देश की एकता और अखंडता का दायित्व देती है। अगर कोई इस प्रकार से प्रवृत्ति करता है उसको उस राजनीतिक दलों ने बड़ी गंभीरता से लेना चाहिए। और कभी-कभी लगता है कि कोई एकाध बार बोल गया, लेकिन ये जो बीज है न, पता नहीं कब कौन सी ताकत आ करके उसको खाद पानी डाल कर के वटवृक्ष बना देंगे तो तत्कालीन स्वार्थ के लिए ऐसी भाषा से बचना चाहिए। ऐसे इरादों से बचना चाहिए और ये देश को बहुत बड़ा नुकसान...कोई भी सरकार रहे यह भाषा कभी भी लाभ नहीं करेगी। मैं जब गुजरात में था मेरे साथ बहुत से अन्याय होते थे केंद्र सरकार से। हर प्रकार के अन्याय हुए थे लेकिन मेरा एक ही मंत्र रहता था और पब्लिकली रहता था। भारत के विकास के लिए गुजरात का विकास। हम सब मिलकर के इस देश को बहुत आगे बढ़ाना है। तो इसमें हमने कोई कंप्रोमाइज नहीं करना चाहिए।


एंकरः और कर्नाटक में सूखा पड़ा है सर, ऐसे मामले सुप्रीम कोर्ट तक जाने लगी है, सूखा पड़ा है, और जैसे फंडस केंद्र सरकार से जो आने चाहिए नहीं आए हैं। ऐसे करके रिट पिटीशन डाले हैं और चर्चा बहुत हो रही है कर्नाटक से, हुआ क्या है मोदी जी।

पीएम मोदीः देखिए यह हमारे समय से नहीं, लंबे अरसे से कुछ व्यवस्थाएं निर्धारित हो चुकी है। देखिए कोई भी आपदा उसको लाइट नहीं लेना चाहिए। किसी भी इलाके में आपदा हो कैलेमिटी हो उसको अत्यंत संवेदनशीलता के साथ गंभीरता से लेना चाहिए। और यह नहीं सोचना चाहिए कि वहां की सरकार है भुगतेगी, जी नहीं। आपदा आती है कैलेमिटी आती है तो सरकार तो बाद में सबसे पहले नागरिक परेशान होता है। और हम सबकी जिम्मेवारी नागरिकों के प्रति है और इसलिए यह राजनीतिक खेल का मैदान ही नहीं है, होना नहीं चाहिए, यह अत्यंत संवेदनशील। दूसरा पद्धति क्या है एसडीआरएफ 900 करोड़ रुपये का फंड ऐसी कैलेमिटी के लिए केंद्र सरकार का हिस्सा समय पर उनको जा चुका है। कोई बकाया नहीं है। दूसरा एक इंटर मिनिस्ट्रियल टीम जब ऐसी विशेष कैलेमिटी आती है चाहे बहुत बाढ़ आ जाए या चाहे ड्राउट हो या कोई और बात हो तो एक इंटर मिनिस्ट्रियल टीम होती है जो सभी सरकारों की परंपरा है, ये कोई मेरी सरकार की परंपरा नहीं है। वो वहां जाती है, अफेक्टेड एरिया में जाती है उसका सर्वे करती है, दौरा करती है, सरकार अपना पिटीशन देती है। फिर एक कमेटी होती है जिसमें पॉलिटिशियन नहीं होते हैं प्रोफेशनल होते हैं वे मिलकर के जायजा लेते हैं। अगर ऐसी विशिष्ट परिस्थिति आई जो 900 करोड़ के उपरांत भी कोई जरूरत है तो उसको दिया जाता है। भारत सरकार ने इलेक्शन कमीशन को लिखा कि भाई ऐसे संकट के समय हम और अधिक मदद करना चाहते हैं। इलेक्शन कमीशन हमें परमिशन दे। लेकिन राजनीतिक हथियार के फायदा ले गए, आजकल फैशन हो गई है सुप्रीम कोर्ट में जाकर के अड़ंगे डाल दो। अब केरल के लोग गए थे कैसी उनको डांट पड़ी है जी। कैसी बेइज्जती हो गई, सुप्रीम कोर्ट ने कैसा उनको लताड़ दिया। अब ये पॉलिटिकल माइलेज लेने के लिए कुछ भी कर लो। सत्य पता है लोगों को और मैं मानता हूं यह मीडिया का काम है कि हकीकतों को सच्चे अर्थ में लोगों के सामने रखना चाहिए ताकि देश का नुकसान ना हो। ना भारत सरकार के भलाई के लिए करना चाहिए ना राज्य सरकार की भलाई के लिए करना चाहिए, लोगों की भलाई के लिए सच्चे तराजू से तोल करके रखना चाहिए।


एंकरः बहुत ज्यादा आजकल बातें हो रही हैं कि जो नॉन बीजेपी रन स्टेट है उनके गवर्नर में और सरकारों में बहुत तनातनी चलती है। आपका उसके बारे में क्या कहना है। यह किस तरह क्यों ऐसा हो रहा है।

पीएम मोदीः मैं गवर्नर के पहले एक बात बताना चाहता हूं। मैं जरा इनको पूछना चाहता हूं, पांच-छह दशक जो सरकारें चलाने का जिनको अनुभव है। दुनिया के दुश्मन देश भी हो ना, होस्टाइल कंट्री हो, विरोधी कंट्री हो, वहां भी जो हमारे मिशन होते हैं ना उन मिशन की पूरी चिंता वह रिस्पेक्टिव कंट्री करती है, उनकी सुरक्षा उनकी व्यवस्था सब। उनको कोई दिक्कत ना आए इसके लिए पूरी व्यवस्था करती है। दुश्मन देश के यहां भी हमारे देश के एंबेसडर को या हमारी टीम को उतना ही सुरक्षा सम्मान दिया जाता है। ये तो मेरा देश है मेरे राज्य है और संविधान द्वारा निर्मित गवर्नर की पोस्ट है। क्या उसका मान सम्मान मर्यादा उन राज्य सरकारों का दायित्व नहीं है। यह कैसे चलेगा। अब आप कल्पना कीजिए कि केरल के गवर्नर एयरपोर्ट जा रहे हैं और लेफ्ट के साथी मिलकर उनको सामने हुड़दंग कर दें। यह क्या शोभा देता है क्या उनकी सरकार को। मुझे तो कभी मैंने किसी अखबार में कहीं कॉलम पढ़ा मुझे हमारे गवर्नर साहब तो बेचारे बहुत सहन करते हैं इसलिए बोलते नहीं है लेकिन आरिफ साहब को जो उनके यहां बजेटरी प्रोविजन का पैसा मिलना चाहिए वो नहीं, खाना बंद करवा दिया था केरल में गवर्नर के यहां। अब आप कल उठ कर के इतने गुस्से आ जाएंगे पोलिटिकल, उनकी लाइट बिजली सब बंद कर दो क्या होगा मुझे याद है महाराष्ट्र में एक बार गवर्नर को ट्रैवल करना था उनको हेलीकॉप्टर नहीं दिया विमान नहीं दिया। पहले से तय कार्यक्रम था लास्ट मोमेंट कैंसिल कर दिया। यानि आप इस प्रकार से अब मुझे बताइए गवर्नर का घर तमिलनाडु में उनके राजभवन के बाहर बम फूटे पेट्रोल बम फेंका जाए क्या राज्य सरकार ये शोभा देता है क्या। और संविधान पदों की जो सैंटिटी होती है वो बनाए रखनी चाहिए मैं तो राज्य में रहा हूं जी। मेरे ऊपर सारे कांग्रेस के गवर्नर थे। मुझे कभी प्रॉब्लम नहीं आता था, मैं उनका मान सम्मान रखता तो वो मेरा मान सम्मान रखते थे और ये सालों से चलता आया है अब आज सहन नहीं कर पाते हैं। अच्छा गलत होगा वो तो उसका संवैधानिक पद पर है उसका दायित्व है, करेगा अपना जिम्मेवारी।


एंकरः Seeking your attention to Kerala back again, BJP is finding it very difficult to get a foot hold in Kerala and for the last 10 years you are also focusing on Kerala but it is very difficult to get a terrain there, why is it so difficult.

पीएम मोदीः पहली बात है कि चुनाव में क्या होता है इसके आधार पर हमारी पार्टी सेवा नहीं कर पा रही, ऐसा नहीं है। आप देख लीजिए पिछले दिनों जब भी केरल में कैलेमिटीज आई सर्वाधिक लोग अगर मैदान में रहकर के काम किया तो हमारे लोगों ने क्या किया है और इसलिए आज स्थिति ये है कि केरल में लेफ्ट की जमीन खिसक रही है और वहां की जनता को पता चल रहा है कि वहां के मतदाताओं की आंख में धूल झोंकी जा रही है। एलडीएफ यूडीएफ इकट्ठा हो तमिलनाडु में, एलडीएफ यूडीएफ आमने सामने लड़ते हों केरल में, अब एशियानेट तमिलनाडु में खबर देगा साथ है। एशियानेट केरल में खबर देगा लड़ रहे हैं तो लोगों का विश्वास टूट जाता है। 2011 विधानसभा चुनाव एनडीए को 6 परसेंट वोट मिला था। 2014 के बाद लोकसभा विधानसभा लोकल बॉडी हर चुनाव में बीजेपी को करीब करीब 15 परसेंट वोट मिल रहा है मतलब हम लगातार प्रगति कर रहे हैं लेकिन वही एक मापदंड नहीं है। हम जिस प्रकार से वहां के लोगों की सेवा करते भरपूर सेवा करते हैं करते रहेंगे। और मैं मानता हूं कि गुड गवर्नेंस और नैरेटिव मिस इंफॉर्मेशन इसके बीच में लड़ाई है। इन्होंने अब हवा बना दी थी कोविड में बहुत सफलता की और सबसे ज्यादा लोग वहां मरे, फेल हो गए। तो आप मीडिया को कंट्रोल करके हवा फैला दोगे इससे नीचे की स्थितियां सुधरती नहीं है जी।


एंकरः BJP is trying to reach out to the Christian minority in Kerala but it is not getting the desired levels where it...

पीएम मोदीः पहली बात है कि भारतीय जनसंघ, भारतीय जनता पार्टी हम समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर के चलने वाली पार्टी है। हम सैद्धांतिक रूप से समाज के सभी वर्गों का साथ लेकर के चलना यह हमारा मूलभूत सिद्धांत है। अब देखिए गोवा में कई दशकों से हमारी सरकार चल रही है। लगातार सरकार चल रही है और वह क्रिश्चियन कम्युनिटी के मदद से ही चल रही है उनके सहयोग से ही चल रही है। आज नॉर्थ ईस्ट में देखिए, नॉर्थ ईस्ट में हमारी जितनी सरकारें हैं व ज्यादातर हमारे मुख्यमंत्री या तो ईसाई हैं हमारे मंत्रिमंडल के अंदर ईसाई सदस्य हैं या तो ईसाई समाज ही तो वहां है वोटर सबसे ज्यादा। उनके वोट से ही हमारी सरकारें बन रही है और इसलिए क्रिश्चियन समाज का हमारे से सहयोग नहीं है ऐसा आरोप मैं क्रिश्चियन समाज पर नहीं लगा सकता हूं हमारे प्रयत्न और ज्यादा करने चाहिए हमको हम कर रहे हैं। अब केरला में बूथ से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक हमारी लीडरशिप में क्रिश्चियन साथी हैं। क्रिश्चियन लीडर्स बिशप्स शायद साल में पांच छह बार मेरे से मिलना जुलना होता है। मेरे यहां क्रिसमस भी मैं बड़ा अच्छा फेस्टिवल करता हूं। एलडीएफ यूडीएफ के झूठ से क्रिश्चियन कम्युनिटी तंग आ गई है और मेरे पास आकर के वो उन्हीं की शिकायत करते हैं। बोले हमारे चर्चों के बीच में इतनी लड़ाई करवा दी है, हमारी चर्च की प्रॉपर्टी को इतना संकट में डाला हुआ है आप हमारी मदद कीजिए। वो भारत सरकार से मदद चाहते हैं, ये मुसीबत में हैं। और इतनी मुसीबत में वहां चर्च जी रहा है उनकी मुसीबतें मैं देख रहा हूं। हम उसकी चिंता करने... अब जैसे फिशरमैन है, मैंने अलग अलग फिशरी डिपार्टमेंट बनाया है ताकि हमारे कोस्टल एरिया के लोगों की मदद हो सके। अब इसका स्वागत करते हैं लोग। और ये मेरी कोशिश है कि इस प्रकार के प्रयत्नों से उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी बने, उनको मॉडर्न टेक्नोलॉजी का फायदा मिले और ब्लू इकोनॉमी का जो मेरा क्षेत्र है उसमें भी उस समाज के काफी लोगों को होने की संभावना है। अच्छा क्रिश्चियन समुदाय का स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों से गहरा जुड़ाव रहा है। अच्छा मैं वेटिकन गया तो होली पोप को मिलने गया था। बड़ी लंबी चर्चा हुई और उनको मेरी सरकार के कामों की काफी जानकारियां थी काफी विषयों पर। और बहुत से मुद्दों में हम बोर्ड पर थे और मैं तो उनसे कहा कि भारत आइए मैंने निमंत्रण दिया उनको। हो सकता है शायद अगले साल वो अपना कार्यक्रम बना ही लें।


एंकरः And the Congress and the UDF allege that you are going soft with CM Pinarayi Vijayan and his family especially in the case of gold smuggling your response.

पीएम मोदीः ऐसा है कि हमारा मोदी का सॉफ्ट होना या हार्ड होने का कोई मतलब ही नहीं है। ये काम इंस्टिट्यूशन करती हैं, स्वतंत्र रूप से करती है और ना मेरी सरकार ने, ना प्रधानमंत्री ने, ऐसी चीजों में टांग अड़ानी चाहिए, ये मेरा सिद्धांत है। जहां तक कांग्रेस और कम्युनिस्ट का सवाल है, मैं कहता हूं ये एक ही सिक्के के दो पहलू हैं यह कोई अलग है ही नहीं। भ्रष्टाचार में डूबी पिनाराई सरकार को हमने हमेशा बेनकाब किया है, मेरे यूनिट ने किया है हमने भी किया है क्योंकि अब देखिए 15 अप्रैल का भाषण सीएमआरएल के साथ सौदे का मुद्दा उठाया हमने डिटेल में उठाया। गोल्ड स्मगलिंग मामले में सीएम ऑफिस की ओर हमने बिल्कुल इशारा किया, साफ-साफ बता दिया। कम्युनिस्ट पार्टी दो बुराइयों के उस पर कभी पहचान नहीं थी ना परिवारवाद का आरोप होता था कम्युनिस्ट पार्टी पर ना भ्रष्टाचार का आरोप होता था। आज इन दोनों में केरल कम्युनिस्ट पार्टी औरों को भी उन्होंने पीछे छोड़ दिया है। यानि बिहार के कुछ राजनेता जो बदनाम राजनेता है उससे भी बुरा हाल परिवारवाद का केरल के कम्युनिस्ट पार्टी में दिखता है उससे भी बुरा हाल दिखता है। अब देखिए सीपीएम ने कोऑपरेटिव बैंक को लूटा है उसको बेनकाब करने का काम हमने किया है और आने वाले दिनों में भी लोगों को न्याय दिलाने के लिए हम भरपूर प्रयास करेंगे। और कांग्रेस केरला में बोलेगी इन्हें जेल डालो और अगर मैं जेल डालूंगा तो दिल्ली आ कर के बयान करेंगे कि देखिए राजनीति के प्रति विंडिक्टिव है। अब यह दो प्रकार की बातें करने वाले लोगों को देश कभी स्वीकार नहीं कर सकता है।


एंकरः And I would like to ask about some projects of the Central Government like the Housing Scheme. It is mandatory that your prime minister picture Shall be pestered on the house and in Kerala people and the political parties feel its humiliation for the beneficiaries Your response to that please.

पीएम मोदीः पहली बात है कोई फोटो वगैरह का विषय है नहीं। सवाल है उसका नाम, पीएम आवास योजना नाम का सवाल है। उसका एक लोगो होता है ताकि उसकी आइडेंटिटी हो। बजट जो भारत सरकार का बनता है, वह बजट संसद पारित करती है, योजनाओं, स्कीम उनके नाम पर पारित करती है। अगर आप वहां नाम बदल देंगे तो यहां मेरे पास ऑडिट रिपोर्ट निकलेगा कि केरल में तो पीएम आवास है ही नहीं। आपने पैसे कैसे दे दिए तो मैं सीएजी को क्या रिपोर्ट दूंगा मुझे बताइए। मेरी जिम्मेवारी है कि मुझे पार्लियामेंट ने जो पैसा खर्च करने का हक दिया है वो मैं वही खर्च करूंगा क्योंकि सीएजी ऑडिट करेगा। तो हम स्कीम में कोई हमारे नाम के लिए नहीं कह रहे जिस नाम से स्कीम बनती है। और यहां किसी व्यक्ति का नाम नहीं है पीएम तो कोई भी पीएम जैसे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जब अटल जी की सरकार थी तब बनी। उसके बाद मनमोहन सिंह जी की सरकार आई तो भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना रही। कोई जरूरत नहीं थी बदलने की। तो यह पीएम कोई व्यक्ति नहीं है एक व्यवस्था है उसको भी अगर वो विरोध करेंगे तो इसका मतलब आपका नफरत का और निराशा का तत्व कितना दूर है। अच्छा स्टीकर लगा देने से क्या फायदा है, ये क्यों तनाव पैदा करते हैं। राज्य सरकारों के पास 42 परसेंट डिवोलूशन मिला हुआ है वो अपनी योजनाएं चलाएं कौन मना करता है। और इसलिए हमारे कोऑपरेटिव फेडरेलिज्म में दोनों की जिम्मेवारी होती है। अब केरल को लगता है कि इन जिम्मेवारियों को नहीं निभाएंगे। आप मुझे बताइए, हमने आयुष्मान आरोग्य मंदिर यह योजना बनाई। बजट से हमको उस काम के लिए पैसा मिला हुआ है। अब केरल ने कह दिया हम मंदिर नहीं लिखेंगे। मंदिर का मतलब पूजा नहीं है जी। आप मेरे यहां बड़ोदा में जाइए, हाई कोर्ट को वहां कोर्ट जो हैं उसको न्याय मंदिर कहते हैं। हमारे यहां पहले जो बच्चे जाते थे प्री प्राइमरी तो बाल मंदिर बोलते थे। अब बाल मंदिर को वर्शिप का स्थान थोड़े है। तो यह आरोग्य मंदिर कहा तो सामान्य हमारे यहां टर्मिनोलॉजी है। वह कहते हम नहीं करेंगे। अब ये तरीका जो है वह नफरत का वातावरण है, वह उचित नहीं है।


एंकरः You concentrating on bettering the relationship with Middle East and many of the Middle East countries honoured you with the highest award. Why it has never happened earlier.

पीएम मोदीः देखिए देश का दुर्भाग्य रहा कि पिछली सरकारों ने हमारे वेस्ट एशिया के साथ जो संबंधों को मजबूत करना चाहिए उसकी दिशा में कभी ध्यान नहीं दिया। हम दो ही काम करते थे एक ऑयल इंपोर्ट करते थे और सस्ते मैन पावर को मजदूरी के लिए एक्सपोर्ट करते थे। अब ये कोई समझदारी का काम नहीं था। आज हमारा रास्ता बहुत ही मजबूत है और सेलर-बायर से निकल करके एक कंप्रिहेंसिव डेवलपमेंट की ओर जा रहा है। अब हमारा यूएई के साथ हमारा ट्रेड एग्रीमेंट हुआ है। यानि मल्टी डायमेंशनल एक्टिविटी ये हम आज कर रहे हैं। आज टेक्नोलॉजी और सर्विसेस भी हम एक्सपोर्ट कर रहे हैं। एजुकेशन सेक्टर हमारी यूनिवर्सिटी वहां काम करने लगी है। एग्रीकल्चर प्रोडक्ट के लिए हमारा समझौता हुआ है, फूड प्रोसेसिंग में लोग यहां इन्वेस्टमेंट करने के लिए तैयार हुए। 2015 में मैंने यूएई का दौरा किया था प्रधानमंत्री बनने के बाद। आप जानकर के चौक जाएंगे जिस देश में मेरे देश के 25-30 लाख लोग रहते हैं। मेरा केरल सबसे ज्यादा वहां रहता है लेकिन मेरे देश का प्रधानमंत्री 30 साल तक वहां नहीं गया था। 30 साल तक मेरे देश का प्रधानमंत्री अगर उस देश में नहीं जाता है तो मेरे वहां जो भारतीय भाई-बहन काम कर रहे हैं उनकी क्या इज्जत रहेगी, उनको क्या सम्मान मिलेगा, उनको क्या हक मिलेगा। तो मेरे दिल में एक दर्द था कि जहां मेरे केरल के भाई इतनी सारी संख्या में काम कर रहे हैं मैं उनकी खबर पूछने के लिए जाऊंगा और मैं गया। और पिछले 10 साल में मैं 13 बार मिडल ईस्ट गया हूं क्योंकि मैं मानता हूं कि इससे हमारे लोगों को...अब जैसे कोविड के समय वहां से लोग भाग रहे थे, ये सभी देशों के लोगों ने मुझे मैसेज किया कि मोदी जी यह हमारे भी भाई हैं, आप चिंता मत कीजिए कोविड में हम उनकी केयर करेंगे। और इन सभी देशों ने जैसे हम हमारे देश में कोविड के लोगों की केयर करते थे न, वैसे केयर की। तो संबंधों का लाभ मेरे देश के नागरिकों को मिलना चाहिए, और मैं दे रहा हूं। अब देखिए यमन में बहुत भारी बमबारी चल रही थी। बहुत बड़ी मात्रा में हमारे लोग थे। मुझे 5000 लोगों की इवैकुएट करना था। यह संबंध थे ना तो मैं बमबारी को रुकवाने में सफल हुआ और उस समय में उनको लेकर के वापस आया। 2023 में सूडान में भारतीय नागरिक और वो तो वहां आंतरिक रूप से दो फोर्सेस लड़ रहे थे, उनको हम निकाल करके। सऊदी जेलों में हमारे ज्यादातर केरल के लोग थे। करीब 850 लोग जेलों में सड़ रहे थे। मैंने सऊदी से बात की और मेरी रिक्वेस्ट पर 850 लोगों को उन्होंने बरी कर दिया। वो वापस हिंदुस्तान में आ गए अपने परिवार के साथ रह रहे। कतर में आठ नेवी वेटरन को फांसी हुई थी। मैं वहां के राजा का आभारी हूं, उन्होंने उनको पार्डन किया। तो हमारे संबंधों की ताकत होती है। मैं मानता हूं कि हमें... अब देखिए हज यात्रा। मैं सउदी प्रिंस, क्राउन प्रिंस उस समय थे आए थे, तो मैंने उनसे कहा, मैंने कहा हमारे यहां जनसंख्या बहुत है, हमारे मुस्लिम भाई-बहन को हज के लिए कोटा बढ़ा दीजिए। मेरी रिक्वेस्ट पर उन्होंने कोटा बढ़ा दिया। यूएई में वहां के भारतीय समुदाय की मंदिर बनाने की इच्छा थी। मैंने यूएई को रिक्वेस्ट की कि हमारे लोग मंदिर बनाना चाहते हैं, सिर्फ जमीन चाहिए, इजाजत चाहिए। उन्होंने इजाजत भी दी, जमीन भी दी और कंस्ट्रक्शन में जो भी मदद कर सकते थे सुविधा की, वो की और भव्य मंदिर आज यूएई में बन गया। लाखों लोग वहां दर्शन यात्रा करने जाते हैं। अभी मुझे फरवरी में वहां उसका उद्घाटन के लिए जाने का मौका मिला। यानि मैं मानता हूं कि उन्होंने शायद कई देश हैं जिन्होंने मेरा सम्मान किया है, अवार्ड दिए हैं। (हाइएस्ट सिविलियन अवार्ड्स)। और मैं कहता हूं ये मेरा नहीं है, ये 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है। और उसके कारण आज हमारा इतना संबंध बना है और उसका लाभ सबसे ज्यादा लाभ मेरे केरल के भाई-बहन को मिल रहा है।


एंकरः संबंध तो दिखाई देते हैं कोई आपको भाई बोलता है कोई आपको फैमिली मेंबर बोलता है। ऐसे मिशन्स कितने मुश्किल होते हैं मोदी जी। क्योंकि मैं मेरा रुचि क्राइम रिपोर्टिंग में है, एक्सटर्नल इंटरनल डिफेंस में होता है, देखते हैं सब। यूक्रेन से बच्चे आ रहे तो बात करते थे कैसे आए वो बोलते हैं बस तिरंगा दिखाए और छोड़ दिए हमें। मिशन बहुत मुश्किल मिशन होती है।

पीएम मोदीः देखिए, आज भारत की एक क्रेडिबिलिटी है। दुनिया भारत को विश्व बंधु के तौर पर यानी फील कर रही है, सिर्फ शब्दों नहीं भाव से फील कर रही है। और किसी भी संकट के समय भारत हमेशा फर्स्ट रिस्पांडर रहा है। अब मैंने अभी कावेरी ऑपरेशन चलाया था। मेरे कर्नाटका के लोग वहां थे, सूडान से मुझे लाना था। (उनको हक्की पिक्की बोलते हैं, हां) उन सबको हम लेकर के आए जी। और वो तो बेचारे ऐसा काम करते थे मेहनत का कि उनके लिए तो अगर रोजी रोटी बंद हो जाए तो क्या खाना वो भी मुश्किल था लेकिन हम लेकर के आए। और इसलिए विदेश नीति का जो पर्सपेक्टिव है वो हमने पूरी तरह बदल दिया है। हमने हमारे नीति में हमारे डायस्पोरा को भी उतना ही महत्व दिया है जितने कि हमारे डायस्पोरा की ताकत है उसको हमने जोड़ना चाहिए। डायस्पोरा में कोई भी संकट हो, हम कहते हैं पासपोर्ट का रंग कोई भी होगा, मेरे लिए वह हिंदुस्तान की... ब्लड जो है न वो हिंदुस्तानी है। अगर हिंदुस्तानी ब्लड है तो मैं उसके लिए करूंगा। पहले डायस्पोरा का या रेस्क्यू फॉरेन पॉलिसी का हिस्सा ही नहीं था। लोग अपना नसीब अपना जाने वो पूछ करके थोड़ी गए थे ये भाव था पुरानी सरकारों का। मैं कहता हूं नहीं भई वो गया है अब मेरा काम है, मैं इसकी चिंता करूंगा। और हम एंड टू एंड प्लानिंग करके चलते हैं ऐसे नहीं चलते हम लोग। दूसरे देशों के लोग भी हमारी क्रेडिबिलिटी इतनी है जी, एक बार तिरंगा लेकर चल पड़े ना, भारत माता की जय बोले तो कोई पूछता नहीं किस देश का नागरिक है उसको जाने देता है। 2015 में यमन संकट हो सउदी किंग से बात की और हजारों लोगों को वापस लाने का काम हमने किया। यूक्रेन संकट तो अभी भी ताजी बात है, लोग जानते हैं, इन दिनों मैंने देखा कि शायद कहीं पर एक कैंडिडेट को चुनाव के लिए जो डिपॉजिट देनी थी तो यूक्रेन से जो बच्चे वापस आए थे उन्होंने इकट्ठे करके उनको पैसा दिया। तो ये अब देखिए, आपको मालूम होगा शायद, केरल के लोगों को मालूम होगा, फादर टॉम की कथा पता होगा। फादर टॉम लंबे अरसे तक आईएसआईएस आतंकवादियों के कब्जे में थे। हमने लगातार डिप्लोमेटिक... हर कोशिश की और लंबे समय के बाद उनको वापस लाए हम, जिंदा वापस लाए। एक बंगाल की बेटी अफगानिस्तान में काम करती थी ईसाइयों के लिए। जुड डिसूजा करके। उसका अपहरण हो गया था, अब एक बेटी का अपरण हो तो हरेक को चिंता रहती है, हमारे लिए भी चिंता थी पता नहीं इसके साथ क्या होगा। महीनों तक वह आतंकवादियों के कब्जे में रही। हमने हर प्रकार के हमारे संबंधों का उपयोग किया, हम उसको सुरक्षित घर लेकर के आ गए। एक फादर प्रेम थे, उस फादर प्रेम को भी उसी प्रकार से, वो तो लंबे अरसे तक रहे थे और जब फादर प्रेम मुझे मिलने... मैंने उनके घर फोन किया, उनकी बहन ने उठाया, मैंने कहा आपके भाई आज दिल्ली पहुंच जाएंगे तो वो मानने को तैयार नहीं थी। क्योंकि तब तक हमने सीक्रेट रखा था, वो मानने को तैयार नहीं थे कि हम तो सोच रहे थे तो जिंदा कभी आएगा ही नहीं। तो ये जो संबंध है उसका उपयोग हम अपने व्यक्तिगत लिए नहीं करते हैं। मेरे देश के नागरिक दुनिया में हैं उनके उनके लिए लगना चाहिए कि देश मेरे साथ खड़ा है। यह बहुत जरूरी होता है।


एंकरः पहले हम सोचते थे विदेश नीति से आम आदमी का कुछ लेना देना नहीं है। सोच ऐसा रहता था, हमसे क्या लेना देना। अब समझ में आ रहा है कि...।

पीएम मोदीः हां-हां, उनको समझ आ रहा है जी। अब किसी देश के साथ करार करते है, एग्रीमेंट करते हैं अब जैसे ऑस्ट्रेलिया के साथ एग्रीमेंट किया तो पहले तो ऐसा लगा अब ऑस्ट्रेलिया के साथ एग्रीमेंट ऐसा है कि हमारा बारबर भी जाकर ऑस्ट्रेलिया में काम करना है तो कर सकता है। हमारा कुक भी ऑस्ट्रेलिया में जाकर काम करना है तो कर सकता है, ऑफिसियली। यानि एक प्रकार से हर सामान्य व्यक्ति को अपॉर्चुनिटी मिल रही है, तो कॉमन मैन के लिए होता है।


एंकरः हेल्थ केयर के ऊपर वापस आपने काफी बात करी। बहुत बड़ा मुद्दा है फॉर द मिडिल क्लास और आपने बहुत कुछ किया है। Are You Satisfied Where We Have Reached.

पीएम मोदीः ऐसा है जिस दिन मोदी सटिस्फाई हो जाए ना, तब लिख लेना कि आपको उसको श्रद्धांजलि देनी है, वो जिंदा नहीं है। मैं जीवन के आखरी तक असंतोष को पालता रहता हूं, मेरे भीतर कभी संतोष आने नहीं देता हूं क्यों, मैं वो असंतोष पालता हूं ताकि मुझे नया करने की प्रेरणा मिले। तो मुझे कभी संतोष की बात कहना ही मत, क्योंकि मुझे बहुत कुछ करना है। देखिए जहां तक हेल्थ का सवाल है, गरीब परिवारों तक क्वालिटी हेल्थ केयर की पहुंच यह मेरे लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। भारत में दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत योजना 60 करोड़ से अधिक लोगों को बेस्ट ट्रीटमेंट अच्छे से अच्छी हॉस्पिटल में। और मान लीजिए केरल का व्यक्ति अहमदाबाद गया वहां बीमार हो गया तो सिर्फ उसको मोदी का कार्ड दिखाना है उसको वहां ट्रीटमेंट मिल जाएगी। उसके रिश्तेदार आए, पैसे लेकर के आए, फिर ट्रीटमेंट होगी ऐसा नहीं है। और आउट ऑफ पॉकेट, पहले हमारे बहुत खर्च होता था सामान्य नागरिक का। 2014-15 में एवरेज 62 परसेंट खर्च आउट ऑफ पॉकेट, हरेक को अपनी जेब से हेल्थ के लिए खर्च करना पड़ता था। 62 परसेंट, आज वो कम होते-होते 47 परसेंट हो गया है। मतलब यह व्यवस्था विकसित हुई, सुविधा हुई है। 2014-15 में हेल्थ सेक्टर पर पर कैपिटा भारत सरकार का जो बजट खर्च होता था वो 1100 रुपये होता था। आज हेल्थ सेक्टर का पर कैपिटा खर्च करीब-करीब दो गुना हमने कर दिया है। आयुष्मान भारत से लाभार्थियों के सवा लाख करोड़ रुपए बचे हैं, देश के नागरिकों के क्योंकि सरकार ने खर्चा किया। इससे ज्यादा कभी-कभी परिवार में बुजुर्ग लोग हैं न बताते नहीं, मैं बीमार हूं क्यों, उनको लगता है बेटे पर बोझ हो जाएगा, कर्ज हो जाएगा। अब वो निश्चिंत होकर के ट्रीटमेंट करा रहा है। और सवा लाख करोड़ रुपया बचा है। 11000 से ज्यादा आज जन औषधि केंद्र हैं, मैंने कहा 80 परसेंट डिस्काउंट से दवाई देते हैं। और वो जन औषधि केंद्र मैं 25000 तक ले जाने वाला हूं। 70 वर्ष से ऊपर के लोगों के लिए मैंने इस बार घोषणा पत्र में कहा कि किसी भी आर्थिक बैकग्राउंड का हो, कोई भी सामाजिक हिंदुस्तान का कोई भी नागरिक, जो 70 साल से ऊपर हैं उसको अब आयुष्मान कार्ड मिलेगा, उसकी हेल्थ की पूरी जिम्मेवारी, इलाज की जिम्मेवारी भारत सरकार लेगी। इसका मतलब हुआ उसको तो लाभ हुआ ही लेकिन उसके परिवार को बहुत बड़ा लाभ होता है कि चलो पिताजी दादाजी मां माता जो खर्चा होता था वो अब बच्चों के लिए खर्च करूंगा। यह बहुत बड़ा बोझ मैंने कम कर दिया है। 10 वर्षों में अब ह्यूमन रिसोर्स का हो या इंफ्रास्ट्रक्चर का हो, मेडिकल कॉलेज में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, 20 14 में 387 मेडिकल कॉलेजेस थे हमारे देश में। आज बढ़कर के 706 हो गई है इतने कम समय में। 2014 में एमबीबीएस सीटों की संख्या करीब-करीब 51000 थी, अब वो एक लाख से ज्यादा हो गई है। मतलब ज्यादा डॉक्टर मिलेंगे ज्यादा सेवा होगी और डॉक्टर की संख्या बढ़ेगी तो गांव को तक ट्रीटमेंट की व्यवस्था होगी। पीजी सीटों की संख्या बढ़कर दोगुनी से ज्यादा हो गई है ताकि आगे चलकर के अच्छे मेडिकल कॉलेज के लिए प्रोफेसर भी मिलेंगे। यानि इंफ्रास्ट्रक्चर की बात हो, ह्यूमन रिसोर्स की बात हो, पॉलिसी की बात हो, बजट की बात हो,एग्जीक्यूशन की बात हो, हेल्थ सेक्टर को हमने कांप्रिहेंसिव वे में आगे बढ़ाया है।


एंकरः Kerala has huge tourism potential, what efforts will be taken to boost this tourism potential of Kerala and India.

पीएम मोदीः आपने बहुत अच्छा सवाल पूछा। देखिए मैं मानता हूं कि आने वाले दिनों में भारत के ग्रोथ में बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन टूरिज्म का होने वाला है। टूरिज्म इंडस्ट्री बहुत फलने हैं, क्योंकि जी20 में मैंने अनुभव किया। मेरी कोशिश थी कि जी20 के द्वारा मेरे राज्यों को दुनिया के सामने एक्सपोजर मिले। दुनिया मेरे राज्यों की ताकत देखे और इसलिए हमने जी20 की 200 के मीटिंगें हिंदुस्तान के अलग-अलग स्थानों पर की। तो दुनिया के लोगों को लगा यार हिंदुस्तान यानी दिल्ली नहीं, हिंदुस्तान यानि आगरा नहीं, हिंदुस्तान यानि बहुत कुछ है। तो मैंने ग्राउंड बनाने की दिशा में एक के बाद... आज दुनिया के कोई भी देश के नेता आते हैं तो मैं स्टेट में लेकर जाता हूं ताकि, आपने देखा होगा मैं अफ्रीका में एक बेटी की आंख की ट्रीटमेंट केरल में करवाई थी। एक राष्ट्रपति वहां के थे उनकी। बाद में उसका बहुत मैंने ब्रांडिंग किया कि हमारे यहां केरल का आयुर्वेद है, जो बीमारी आपकी होती नहीं है आप यहां आइए। तो मैं खुद एक प्रकार से ब्रांड एंबेसडर केरल का बन गया हूं। मैं काम करता रहता हूं। अब देखिए केरल में क्या नहीं है। क्या वाइल्ड लाइफ है, क्या बढ़िया समंदर है, कितने बढ़िया पहाड़ी इलाके हैं लेकिन उसका हमने सही इस्तेमाल नहीं किया। देखिए एडवेंचर स्पोर्ट्स हो यानी मैं मानता हूं हर प्रकार में, इवन टेंपल स्पिरिचुअल टूरिज्म आप देखिए गुरुवायुर पद्मनाभ स्वामी मंदिर, शबरीमाला मंदिर, क्या नहीं है जी। उसी प्रकार से भारत का सबसे पुराना चर्च केरल में है। चेरामन जुमा मस्जिद भारत में बनने वाली यह पहली मस्जिद है। अब हमारे यहां मार्शल आर्ट कलारै पटम दुनिया में क्यों ना जाए, कथकली मोहिनी अट्टम, क्या नहीं है। मैं समझता हूं टूरिज्म में भी वेलनेस टूरिज्म शायद केरल से बढ़कर कोई जगह नहीं। आज योग और आयुर्वेद का इतना दुनिया में आकर्षण बना है। आयुर्वेद हेल्थ सेंटर हमारा केरल बन सकता है यानि केरल एक प्रकार से दुनिया के लिए आकर्षण का नहीं, हो सकता है एक कंपलशन हो जाएगा उनकी जिंदगी में कि एक बार तो केरल जाना चाहिए यहां तक हम उसको आगे बढ़ाना चाहते हैं। मेरी कोशिश है।


एंकरः युवाओं के साथ आपके लगाव मोदी जी अब जो 18 साल का बच्चा है वो जब आप सत्ता में आए थे 8 साल का था और उसके अलग-अलग प्रेफरेंसेस बन चुके हैं। आप भी कंटेंट क्रिएटर के साथ एक प्रोग्राम किया बहुत सेंस ऑफ प्रेजेंस बहुत बढ़िया था आपका। और हाल ही में गेमर्स के साथ भी आपने एक कन्वेंशनल किया आई। I Mean Why Do You Think It's Important.

पीएम मोदीः 21वीं सेंचुरी जो है वो टेक्नोलॉजी ड्रिवन है, आपको मान के चलना पड़ेगा। अगर मैं नॉर्मली मेरा जो एज ग्रुप के व्यक्ति हैं और जिस युग से वो निकल कर के आए हैं, वहां ये कुछ था नहीं। अगर मुझे सरकार चलानी है तो मुझे इसका प्राइमरी नॉलेज तो होना चाहिए, पर्सनल एक्सपीरियंस होना चाहिए। अब मुझे रूटीन में किसी ने पूछा होता गेमिंग तो मैं बच्चों को कहता टाइम खराब मत करो। मैं उसमें डिटेल में जाने लगा, स्टडी करने लगा तो मुझे लगा कि परसेप्शन ठीक नहीं है। हमें उसको रिस्ट्रिक्शन देने के बजाय हमने उसको चैनेलाइज करना चाहिए, प्रॉपर वे में डायवर्ट करना चाहिए। दूसरा गेमिंग की दुनिया में आज हिंदुस्तान के लोग सबसे ज्यादा हैं लेकिन गेमिंग का मार्केट बाहर के लोगों के कब्जे में है। मेड इन इंडिया गेमिंग क्यों ना हो। भारत के पास इतनी कथाएं हैं, इतनी चीजें हैं, दूसरा गेमिंग का उपयोग हमारी नई पीढ़ी को हम संस्कारित भी कर सकते हैं। उसको हम जैसे स्कूल कॉलेज में आजकल उनको एक प्रोजेक्ट देते हैं बच्चों को तुम्हारा असाइनमेंट है एक हफ्ते में करके लाओ तो बच्चा बेचारा स्टडी करता है। गेमिंग में ऐसा असाइनमेंट दे सकते हैं और वो अच्छे रिजल्ट आ सकता है। अब आपके शायद कर्नाटका में ही गेमिंग वालों ने एक नदी की गंदगी को लेकर एक गेम बनाई थी और उसकी सफाई का। तो मुझे अच्छा लगा था तो मैं समझता हूं उसके कारण लोग जुड़े ऑनलाइन जुड़े कि हां एक नदी गंदी हुई तो उसको साफ ऐसे किया जा सकता है। एक के बाद एक स्टेप करते गए, अब हो सकता है वो उनके संस्कार बन जाए और वो नदी साफ भी करें। तो बहुत सारी अच्छी हैबिट्स के लिए, अच्छी सोच के लिए हमें एक अहेड ऑफ द कर्व सोचने की जरूरत होती है। और मैं खुद उनको मिला, उनके साथ मैंने समय बिताया, मैंने उनको कहा मैं स्टूडेंट की तरह समझना चाहता हूं, बताइए मुझे। मुझे इसमें कोई संकोच नहीं होता है। और मैं देखता हूं उसका पोटेंशियल है अब मैं आने वाले दिनों में उस पर सोचूंगा। दूसरा मेरा अपना स्वयं का मत है कि मैं एक प्रकार से बंधी हुई सोच वाला इंसान नहीं, बंधी हुई जिंदगी जीने वाला इंसान नहीं हूं। मैं नई चीज सीखना, नया चीज प्रयोग करना यह मेरी फितरत है। अब 2012 में पहली बार मैंने पॉलिटिकल लाइफ में शायद मैं पहला व्यक्ति था जिसने गूगल हैंगआउट किया था। गूगल हैंगआउट का उस समय तो कोई पता ही नहीं था फिर मैंने एक थ्रीडी होलोग्राम किया था। दुनिया का कोई राजनेता ऐसा नहीं होगा, जिसने मुझे पूछा नहीं कि थ्रीडी होलोग्राम होता है क्या? करते कैसे हो ? और बोले, ये जो नाच-गान वाले होते हैं, वो डांसिंग वगैरहा उसमें तो कर लेते हैं, ये कैसे करते हैं आप। जब मैं उनको बताया कि मेरा इतना बड़ा देश है। इतने मेरे, जैसे देखिए आप मेरा नमो इन कन्नड़ा, नमो इन मलयालम, नमो इन तमिल तो मैं एआई का उपयोग कर रहा हूं इन दिनों, और मेरा एप भी एआई का यूज अपनी तरह का बेहद खास ऐप है। इवन आप मेरी फोटो आपके साथ कभी निकली होगी। आप नमो ऐप पर जाकर के एआई टूल का मेरा उपयोग करोगे और अपनी खुद की फोटो लगाओगे तो मेरे साथ जितनी फोटो है आपकी, पिछले 30-40 साल की। सारी फोटो एक साथ आपको मिल जाएगी। तो मैं एआई का उपयोग करता हूं। तो मैं उसी प्रकार से देखिए जी, एक कंटेंट क्रिएटर हैं। वो भी देश के लिए बहुत बड़ी एसेट होते हैं और वो ग्लोबली इंपैक्ट क्रिएट कर सकते हैं जी। और तो मुझे उनके सामर्थ्य को जानना चाहिए। फर्स्ट हैंड जानना चाहिए। अच्छा एक बहुत बड़ी इकॉनोमी भी है। मैं इस मैं चाहता हूं देश के ग्रोथ में वो भी अपना रोल को करे। और स्वाभाविक है कि यह यंग जनरेशन से जुड़ी है तो मुझे भी अपने आप को उसी उम्र के लेवल पर ले जाकर के तैयार करना पड़ता है।


एंकरः देश में वीआईपी कल्चर की तो बहुत लेगेसी है। और आई हैव नोटिस्ड उसके बारे में काफी बात होती है। कैसे उसको खत्म किया जाए आपका क्या कहना उसके बारे में ?

पीएम मोदीः यह बहुत ही चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बात है। क्योंकि ये वीआईपी कल्चर का ओरिजिन जितनी मेरी समझ है। एक कॉलोनियल काल से एक प्रकार से जुड़ गया। अंग्रेजों के लिए एक प्रकार के कानून। सामान्य लोग, जनता के लिए दूसरा कानून। उनका रहन-सहन एक, बाकियों का रहन-सहन एक। उनकी जगह एक, बाकी उनकी गाड़ी निकलेगी तो अलग उनका टांगा निकलेगा तो अलग। यह एक प्रकार से और अंग्रेजों के जाने के बाद यह सब जाना चाहिए था, लेकिन नहीं गया। हमारे नेताओ ने उसको जारी रखा। अब मैं जब आया तो मैंने पहला काम किया नो लाल बत्ती। मैंने कैबिनेट निर्णय किया, कोई लाल बत्ती रेड लाइट नहीं होगी। गाड़ियों पर ये चलते हैं और सायरन बजाते झूम झूम झूम करके, क्या मतलब है। मैं गुजरात में था, मेरे सभी मिनिस्टर को नियम था कि कोई सायरन नहीं बजाएगा। बहुत बड़ा ट्रैफिक हुआ, जरूरत पड़ गई तो थोड़ा हल्का सा एक करके बंद करो भाई। ये कौन हम बड़े बादशाह है कि हम सायरन बजा के चलेंगे। देखिए, मैं मानता हूं अब वीआईपी नहीं मेरे लिए तो ईपीआई है। और जब मैं ईपीआई कहता हूं तो एवरी पर्सन इज इंपॉर्टेंट। और यही हो रहा, लाल बती से लेकर हर एक्शन में वीआईपीज्म को खत्म करने का मेरा प्रयास रहा है। कुछ चीजें जरूरत पड़ती है। वो तो मैं समझ सकता हूं कि एकदम से आप यह चाहोगे कि देश के राष्ट्रपति जी ऐसे फुटपाथ पर पैदल चले जा रहे हैं। ऐसा तो मैं नहीं चाहूंगा। यह कोई तरीका ठीक नहीं है। लेकिन हमारा, अब देखिए वैक्सीनेशन हुआ। जीवन-मरण का सवाल था कोविड का। मैं भी वैक्सीन ले सकता था, लेकिन मैंने तय किया कि मेरा जो नियमों में नंबर लगेगा उसी दिन मैं जाऊंगा और मैंने तब तक वैक्सीन नहीं लिया था। इतना ही नहीं साब, मेरी माता जी 100 साल की हुई। मेरी माता जी का स्वर्गवास सरकारी अस्पताल में हुआ। उसने आखिरी जीवन में कभी, उसको अस्पताल जाना नहीं पड़ा आखिरी जाना पड़ा, एक वीक के लिए। लेकिन वह सरकारी अस्पताल में गईं..


एंकरः और उस दिन मैं था और आप गाड़ी में जिस गाड़ी में जा रहे थी। गाड़ी भी बहुत मामूली-सी गाड़ी थी, मैं देख रहा था।

पीएम मोदीः और उनकी अंत्येष्टि भी जो सरकारी श्मशान होता है पब्लिक का, वहीं किया। तो वीआईपी कल्चर के खिलाफ मैं अपने व्यवहार से जितना कर सकता हूं, मैं करता हूं और मैं मानता हूं अब जैसे रिपब्लिक डे परेड, हमारे इनवाइटी कौन होते हैं। मैंने जिन्होंने सेंट्रल विस्टा बनाया ना, इन सबको मेरा स्पेशल गेस्ट बनाया था। मैं यूनिवर्सिटी में जाता हूं, कन्वोकेशन के लिए तो मैं यूनिवर्सिटी वालों को कहता हूं कि पहली 50 सीट मेरे गेस्ट के लिए चाहिए। तो कहते कि 50 सीट साहब। तो उनको जरा ये रहता है कि 50 सीट। मैं 50 सीट मांगता हूं और फिर मैं करता हूं उस यूनिवर्सिटी के नजदीक में जो झुग्गी-झोंपड़ी होती है, वहां जो स्कूल होती है। उन बच्चों को मैं कन्वोकेशन में बैठता हूं। सींइंग इज बिलीविंग...उसी समय उसके मन में होता है मैं भी कैसे ऐसा टोपा पहन के जाऊंगा। मैं भी ऐसा कुर्ता पहन के जाऊंगा। मैं भी ऐसा सर्टिफिकेट लूंगा। यह मैं संस्कार करता हूं तो मेरे लिए आप देखिए, पहले स्कूल में प्रवेश के लिए एमपी का कोटा रहता था। मैंने खत्म कर दिया। इवन हज यात्रा के लिए जी कोटा रहता था, मैंने वो भी खत्म कर दिया। हमारी पार्लियामेंट की कैंटीन सब अखबार वाले दुनिया भर की चीजें लेते थे। मैंने सब कैंटीन की सब्सिडी खत्म कर दी। अब एमपी पूरा पैसा देता है। तो देखिए हमने पद्मश्री, देखिए स्टडी हो रहा आज पद्मश्री की तारीफ हो रही है। क्यों ऐसे-ऐसे लोगों को मैं खोजता हूं जी ये पीपल पद्मा बनना चाहिए। वरना पहले ज्यादातर पद्मा दिल्ली में ही जाते थे और वही जो नेताओं का परिचय रहता था। उन्हीं को जाता था। सब बदल दिया हमने। तो एक बहुत बड़ा रिफॉर्म है ये, समाज जीवन की ताकत का एक बहुत बड़ा और इसमें राजनीति नहीं है जी। इतना बड़ा देश है जैसे मन की बात आप सुनते होंगे। मैं उन छोटे-छोटे छोटे लोगों की जिंदगी को जो भी मेरे पास जानता हूं मैं उसको एमप्लीफाई करता हूं। दुनिया के सामने बताता हूं। मेरा देश, उसकी ताकत।


एंकरः मोदी जी, चुनाव टाइम में इतना समय निकाल के हमसे बात करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। थैंक्यू सो मच।

पीएम मोदीः मैं बहुत आभारी हूं और केरल का चुनाव महत्त्वपूर्ण है। उस प्रकार उस समय केरल की महत्त्वपूर्ण चैनल से बात हो। कन्नड़ा के महत्वपूर्ण अखबार आप सब यहां आए। मैंने अपनी बातें बताने का प्रयास किया है। लेकिन मैं मतदाताओं से प्रार्थना करूंगा कि चुनाव को सामान्य ना लें। ये बहुत ही महत्त्वपूर्ण चुनाव है। गर्मी बहुत है। फिर भी मतदान अवश्य करें। मैं सभी राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं को कहूंगा। इन चुनावों के दिनों में देखा पत्रकारों की सबसे ज्यादा दौड़-धूप होती है। सबसे ज्यादा फील्ड में दौड़ते हैं। उन पत्रकारों को भी, पॉलिटिकल वर्कर्स को भी मैं जरूर कहूंगा कि बहुत पानी पीजिए। इस धूप में इतना काम करते हैं, अपने आप को संभालिए। धन्यवाद फिर से।

 

Following is the clipping of the interview published in Kannada Prabha