In Siliguri, PM Modi says what happened in Cooch Behar is saddening, 'new low' for Didi
Mamata Didi and her goons have become jittery seeing the people’s support in favour of BJP: PM Modi
In Bengal, after we form the govt, you will be provided all benefits & schemes without cut-money: PM Modi
We are committed to free the 3Ts (Tea, Tourism and Timber) from the controls of mafia: PM Modi in Siliguri

भारत माता की
भारत माता की
आज मेरी जहां भी नजर पहुंच रही है मुझे लोग ही लोग नजर आ रहे हैं। यह जगह भी छोटी पड़ गई लग रहा है। बहुत बड़ी मात्रा में लोग धूप में तप रहे हैं। जो लोग धूप में तप रहे हैं उन्हें मैं विश्वास दिलाना चाहता हूं कि आपकी तपस्या बेकार नहीं जाने देंगे। हम विकस कर के आपके इस प्यार को डबल कर के लौटाएंगे।

नमस्कार भाइयों-बहनों, नमस्कार,
नॉर्थ बंगाल, भारत मां के गले में ऐसी भव्य माला है जिसमें अलग-अलग भाषा, जाति, भिन्न-भिन्न समुदाय के लोग अलग-अलग फूलों में इस माला में गुंथे हुए हैं। यहां एक भारत-श्रेष्ठ भारत की सुंदर तस्वीर दिखती है।
नमोस्कार उत्तर बोंगो ! केमोन आछेन आपनारा? आमार सौभाग्यो, जे आमी आबार आजके महाकाल बाबा, सींचेल देवी माँ आर जलपेश बाबा पुण्यो भूमि ते आस्ते पेरे छी! (Namaskar Uttar Banga! How are you all?I feel lucky that today once again, I am in able to visit the land blessed by Mahakal Baba, Sinchel Devi Maa and Jalpesh Baba)

यहां दार्जीलिंग, कलिम्पोंग, करसियान्ग जैसे पहाड़ी क्षेत्रों और आसपास के स्थानों से भी अनेक साथी हमें आशीर्वाद देने के लिए आए हैं। आपनारा जानेन जे आमी चा-वाला, गोटा उत्तर बंगो आमाय ओनेक-ओनेक स्नेह आर आशीर्वाद दिएछेन! आदरणीय गोरखा, आमा बाबा, दाजु भाई, दिदी बहिनी, भारतीय जनता पार्टी सदैव गोरखा समाजसंग उभिएको छै। (You know, I am a Chaiwala myself, and I have received so much of love from North Bengal, Respected Gorkha mothers and fathers, brothers and sisters BJP has always stood with the Gorkha community)

साथियो,
नॉर्थ बंगाल की इस धरती ने आज ऐलान कर दिया है- टीएमसी सरकार जा रही है, बीजेपी सरकार आ रही है। बंगाल में नव वर्ष शुरू होने वाला है। नव वर्ष में बुराई पर अच्छाई की जीत होने जा रही है, बीजेपी की जीत होने जा रही है। पहले तीन चरण में बंगाल में बहुत शांतिपूर्ण तरीके से बीजेपी के पक्ष में बंपर मतदान हुआ है। भारी संख्या में हो रहा ये मतदान आशोल पॉरिबोर्तोन के लिए है।

साथियो,
आज पूरा देश, बंगाल के लोगों की इच्छाशक्ति को देखकर गर्व कर रहा है। ये इच्छाशक्ति आशोल पॉरिबोर्तोन शक्ति की है। ये इच्छाशक्ति शोनार बांग्ला की शक्ति है। मैं जहां-जहां जा रहा हूं, हर जगह हर कोने में, ऐसा ही उत्साह, ऐसा ही उमंग, ऐसा ही नया विश्वास चारों तरफ दिखाई दे रहा है। खासकर के माताएं-बहनें, माताओं-बहनों का जो उत्साह देख रहा हूं। माताएँ-बहनें जिस तरह से आशीर्वाद दे रही हैं। मैं माताओं-बहनों को, इस मातृशक्ति को सिर झुकाकर के नमन करता हूं। यहां भी जनसामान्य हो, गोरखा हों, नेपाली साथी हों, राजबोंग्शी समाज हो, सभी, यानि मैं जिस किसी का नाम लूं, कोई ऐसा नहीं है, जो आज बढ़-चढ़ कर के बीजेपा को अपना आशीर्वाद न देता हो।

साथियो,
इस बीच कूचबिहार में जो हुआ है, वो बहुत ही दुखद है। जिन लोगों की मृत्यु हुई है, मैं उनके निधन पर दुख जताता हूं। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं। बीजेपी के पक्ष में जन समर्थन देख कर दीदी और उनके गुंडों में बौखलाहट हो रही है। अपनी कुर्सी जाते देख, दीदी इस स्तर पर उतर आई हैं। लेकिन मैं दीदी को, टीएमसी को, उनके गुंडों को साफ-साफ कह देना चाहता हूं। दीदी और टीएमसी की मनमानी बंगाल में नहीं चलने दी जाएगी। मेरा चुनाव आयोग से आग्रह है कि कूचबिहार में जो हुआ, उसके दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो। और दीदी, ये हिंसा लोगों को सुरक्षाबलों पर आक्रमण करने के लिए उकसाने के तरीके, चुनाव प्रक्रिया में रोड़े अटकाने के तरीके दीदी आपको नहीं बचा पाएंगे। आपके दस साल के कुकर्मों से ये हिंसा आपकी रक्षा नहीं कर सकती है।

साथियो,
यहां से निकली संतानों ने साहित्य से लेकर सेना तक, सभी को मजबूत किया है। आज उन्हीं की प्रेरणा से बंगाल ने आशोल पॉरिबोर्तोन का नारा बुलंद किया है। जिस बंगाल को डर के, भय के, अत्याचार के, अन्याय के बोझ तले दीदी और उनके दल ने दबा रखा था, आज वो कह रहा है- आशोल पॉरिबोर्तोन…आशोल पॉरिबोर्तोन। बंगाल की बीजेपी सरकार में सुनवाई होगी, न्याय मिलेगा आपके अधिकार का काम होगा, क्षेत्र का विकास होगा। बंगाल बीजेपी, यहां सरकार में ऐसा माहौल बनाएगी जिसमें पुलिस न्यायिक तरीके से अपना काम करेगी, प्रशासन जनता के प्रति जवाबदेह होकर अपना काम करेगा, सरकार अपनी जिम्मेवारियों को निभाएगी और कार्यकर्ता, जनता की सेवा में कभी पीछे नहीं हटेंगे। बंगाल में दशकों से जिस तरह का राजनीतिक वातावरण बना दिया गया है, वो बदलने का समय आ गया है। अब तोलाबाज मुक्त बंगाल बनेगा। अब सिंडिकेट मुक्त बंगाल बनेगा। अब कटमनी मुक्त बंगाल बनेगा।

साथियो,
हर चरण के मतदान के बाद आशोल पॉरिबोर्तोन की लहर जितनी प्रचंड होती जा रही है और दीदी की बौखलाहट भी उतनी ही बढ़ रही है।
साथियो, मैंने सोशल मीडिया में एक वीडियो देखा उस वीडियो में दीदी के करीबी, बंगाल के टूरिज्म मिनिस्टर और यहां पास के विधायक, लोगों को धमका रहे हैं। उन्होंने कहा कि - बीजेपी को वोट दिया तो लोगों को उठाकर बाहर फेंक दिया जाएगा। भाइयो-बहनों, क्या ये भाषा आपको मंजूर है, ये धमकी आपको मंजूर है, क्या लोकतंत्र में ऐसी धमकी को जगह है क्या, क्या मैं प्रधानमंत्री होने के बाद भी किसी हिन्दुस्तान के बेटे को बेटी को ये कह सकता हूं कि मैं तुम्हें उठाकर बाहर फेक दूंगा। क्या मुझे अधिकार है क्या, अरे लोकतंत्र है कानून का राज है, लेकिन दीदी का मंत्री कैमरे सामने... और सब कुछ कैमरे में कैद है, ये गुंडागर्दी खुलेआम है। ये दीदी के 10 साल के राज की यही सच्चाई है। बंगाल के लोगों को आपने क्या समझ रखा है? बंगाल के लोग आज बीजेपी को वोट दे रहे हैं तो टीएमसी के लोग उन्हें बाहर फेंक देंगे? इतनी हिम्मत? दीदी, ओ दीदी, बंगाल के लोग यहीं रहेंगे, लिखकर के रखो यहीं रहेंगे, अगर जाना ही है तो सरकार से आपको जाना होगा दीदी। दीदी ओ दीदी, दीदी आप बंगाल के लोगों की भाग्य विधाता नहीं हैं दीदी। बंगाल के लोग आपकी जागीर नहीं हैं दीदी। इसलिए बंगाल के लोगों ने तय कर दिया है कि आपको जाना ही होगा। ये बंगाल की जनता ने ठान लिया है। ये बंगाल की जनता आपको निकाल कर ही दम लेने वाली है। और दीदी ये भी याद रखिए, आप अकेली नहीं जाएंगी। दीदी ओ दीदी, आपके पूरे गिरोह को जनता हटाकर के रहने वाली है। आपके साथ-साथ जाएंगे तोलाबाज। आपके साथ-साथ ये सिंडिकेट को भी जाना है। आपके साथ जाएगी, नॉर्थ बंगाल से भेदभाव करने वाली आपकी दुर्नीति भी जाएगी। आपके साथ-साथ जाएगी बंगाल से वोट बैंक की, तुष्टिकरण की राजनीति जाएगी।

साथियो,
हर चरण के मतदान के बाद आशोल पॉरिबोर्तोन की लहर जितनी प्रचंड होती जा रही है और दीदी की बौखलाहट भी उतनी ही बढ़ रही है। साथियो, मैंने सोशल मीडिया में एक वीडियो देखा उस वीडियो में दीदी के करीबी, बंगाल के टूरिज्म मिनिस्टर और यहां पास के ही विधायक लोगों को धमका रहे हैं। उन्होंने कहा कि - बीजेपी को वोट दिया तो लोगों को उठाकर बाहर फेंक दिया जाएगा। भाइयो-बहनों, क्या ये भाषा आपको मंजूर है, ये धमकी आपको मंजूर है, क्या लोकतंत्र में ऐसी धमकी को जगह है क्या, क्या मैं प्रधानमंत्री होने के बाद भी किसी हिन्दुस्तान के बेटे को बेटी को ये कह सकता हूं कि मैं तुम्हें उठाकर बाहर फेक दूंगा। क्या मुझे अधिकार है क्या, अरे लोकतंत्र है कानून का राज है, लेकिन दीदी का मंत्री कैमरे के सामने... और सब कुछ कैमरे में कैद है, ये गुंडागर्दी खुलेआम है। ये दीदी के 10 साल के राज की यही सच्चाई है। बंगाल के लोगों को, दीदी, बंगाल के लोगों को आपने क्या समझ रखा है? बंगाल के लोग आज बीजेपी को वोट दे रहे हैं तो टीएमसी के लोग उन्हें बाहर फेंक देंगे? इतनी हिम्मत? दीदी, ओ दीदी, बंगाल के लोग यहीं रहेंगे, दीदी लिखकर के रखो यहीं रहेंगे, अगर जाना ही है तो सरकार से आपको जाना होगा दीदी। दीदी, ओ दीदी, दीदी आप बंगाल के लोगों की भाग्य विधाता नहीं हैं। बंगाल के लोग आपकी जागीर नहीं हैं दीदी। इसलिए बंगाल के लोगों ने तय कर दिया है कि आपको जाना ही होगा। ये बंगाल की जनता ने ठान लिया है। ये बंगाल की जनता आपको निकाल कर ही दम लेने वाली है। और दीदी ये भी याद रखिए, आप अकेली नहीं जाएंगी। दीदी ओ दीदी, आप अकेली नहीं जाएगी, आपके पूरे गिरोह को ये जनता हटाकर के रहने वाली है। आपके साथ-साथ ये तोलाबाज भी जाएंगे। आपके साथ-साथ ये सिंडिकेट को भी जाना है। आपके साथ-साथ जाएगी, नॉर्थ बंगाल से भेदभाव करने वाली आपकी दुर्नीति भी जाएगी। आपके साथ-साथ जाएगी बंगाल से वोटबैंक की, तुष्टिकरण की राजनीति जाएगी।

साथियो,
ये क्षेत्र देश की सुरक्षा के लिए बहुत अहम है। इसे देश के भीतर बैठी ताकतों द्वारा चुनौती दी जा रही है। तुष्टिकरण और वोटबैंक की राजनीति ने इस क्षेत्र की जो हालत की है, वो आप भली-भांति जानते हैं। केंद्र सरकार ऐसी ताकतों से सख्ती से निपट रही है। बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद, इस क्षेत्र से ऐसी हर ताकत को हटाया जाएगा, जिसे टीएमसी ने लाकर बसाया है और टीएमसी ने ऐसी नकारात्मक ताकतों को आगे बढ़ाया है। बंगाल की बीजेपी सरकार आपके अधिकारों, आपकी पहचान की रक्षा करेगी। गोरखा हो, राजबॉन्शी हो, आदिवासी हो, बंगाली हो, राभा-टोटो, मेछे-कोछे, सभी की रक्षा होगी।

साथियो,
दीदी और टीएमसी के नेताओं की सोच क्या है, ये अब खुलकर के सामने आ रहा है। एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ है, वो वीडियो देखकर के लोग चौंक गए हैं। ये वीडियो ऐसा है जिसमें दीदी की करीबी एक नेता ने अनुसूचित जाति के लोगों का एससी समुदाय का बहुत बड़ा अपमान किया है। उन्होंने कहा है कि बंगाल में जो अनुसूचित जाति है, Schedule Caste समुदाय है वो भिखारियों की तरह व्यवहार करता है। दीदी, इतना अहंकार? ऐसी सोच आपकी ? Schedules Caste समुदाय के मेरे भाइयों और बहनों, और उनके बच्चों के साथ आप, आपकी पार्टी, आपकी पार्टी के नेता इतनी नफरत करते हैं?

भाइयो और बहनो,
यही दीदी और उनके साथियों का यही असली चेहरा है। दीदी औऱ उनके लोग, Schedule Caste समुदाय से इसलिए भड़के हुए हैं क्योंकि वो बीजेपी के साथ खड़े हैं, बीजेपी को आशीर्वाद देने खुलकर घरों से निकल रहे हैं। दीदी, ओ दीदी,ईश्वर ने आपको बंगाल की सेवा करने का इतना बेहतरीन अवसर दिया। आपने इतने स्वर्णिम अवसर को गंवा दिया दीदी, गंवा दिया। गंवा दिया और बंगाल को बर्बाद कर दिया है।

साथियो,
अपनी हार सामने देख, दीदी का गुस्सा मुझ पर बढ़ता जा रहा है। बंगाल के लोगों का मुझ पर स्नेह देख, दीदी बंगाल के लोगों से भी नाराज हैं। 10 साल तक गरीबों को सताने वाले गुंडों पर, हत्यारों पर, लुटेरे तोलाबाज़ों पर दीदी को गुस्सा नहीं आया। लेकिन दीदी उन सुरक्षा बलों पर गुस्सा कर रही हैं जो बंगाल के लोगों के अधिकार की रक्षा कर रहे हैं। पंचायत चुनाव की तरह दीदी के गुंडे छप्पा भोट नहीं कर पा रहे, इसलिए दीदी नाराज हैं। अपने 10 साल के कामकाज का हिसाब-किताब तो उन्होंने आपको कभी दिया नहीं। इस चुनाव में उन्होंने जाकर बताना चाहिए था 10 साल में आपके लिए क्या काम किया। वो जहां जाती है बस मोदी को गालियां देती रहती है। उन्होंने हिसाब देना चाहिए कि नहीं देना चाहिए। अपने काम का हिसाब देना चाहिए कि नहीं देना चाहिए, देना चाहिए कि नहीं देना चाहिए। पल पल का हिसाब देना चाहिए कि नहीं देना चाहिए। पाई-पाई का हिसाब देना चाहिए कि नहीं देना चाहिए। वाइपो के कारनामो का हिसाब देना चाहिए कि नहीं देना चाहिए। अपने गुंडों के कारनामों का हिसाब देना चाहिए कि नहीं देना चाहिए। हिसाब देती है क्या, देती है क्या, कोई जवाब देती है क्या , सिर्फ गाली देती है। अब वो अपनी रैलियों में अपने छप्पा वोट गैंग को ट्रेनिंग देने लगी हैं। और सिखा रही है, आप हैरान हो जाएगी, एक राज्य की मुख्यमंत्री, दस साल सरकार में रहने के बाद क्या सिखा रही है, वो सिखा रही है। कैसे सुरक्षा बलों का घेराव करना है, कैसे सुरक्षा बलों को पीटना है और कैसे बूथ पर हमला करना है, ये सब बताया जा रहा है। अरे दीदी, ओ दीदी! देश के बहादुर सुरक्षा बल आतंकवादियों से नहीं डरते, नक्सलियों से नहीं डरते, तो आपके पाले-पोसे गुंडों से, आपकी धमकियों से डरेंगे क्या? ये उत्तरी बंगाल, हमारा गोरखा समाज तो राष्ट्र रक्षा में हमेशा अग्रणी रहता है। उसका बहुत बड़ा अपमान दीदी आप कर रही हैं। उत्तरी बंगाल तो केंद्रीय बलों में नारायणी सेना बटालियन का सपना सच देखना चाहता है। दीदी, आप इस भावना का भी अपमान कर रही हैं।

भाइयो और बहनो,
एक पुरानी कहावत है "न दिने बाजू ले आईताबार पनि बार छ’। जो कोई आपको कुछ अच्छा दे नहीं सकता, वो सिर्फ बहाने ढूंढता है। 10 साल दीदी को आपने पूरी ताकत दी, दीदी ने क्या दिया? क्या दीदी ने आपको ‘परचा पट्टा’ दिया? क्या दीदी ने चाय और सिनकोना बागानों में सही मजदूरी देना तय करवाया? क्या दीदी ने वनवासी साथियों के लिए Forest Rights Act लागू किया? क्या दीदी ने पहाड़ के विद्यार्थियों को सुविधाएं दीं? क्या दीदी ने ‘डीआई Fund’ सिस्टम को ख़त्म किया कि नहीं किया? दीदी ने आपको सिर्फ अभाव दिया, भेदभाव दिया। लॉकडाउन के समय केंद्र सरकार ने जो मुफ्त चावल भेजे, मुफ्त चना भेजा था, उसको भी तृणमूल के तोलाबाज़ों ने लूट लिया। माताएं-बहनें, मैंने जो चावल भेजा वो चावल आपको अच्छा लगा था कि नहीं लगा था। मैंने जो चावल भेजा वो अच्छा था कि नहीं था? उसमें भी कट कंपनी आ गई।

भाइयो और बहनो,
दीदी ने गरीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, किसी को उनका जायज़ हक नहीं दिया। दीदी ने घर में नल नहीं दिया, खेतों में सिचाई का पानी नहीं दिया। लेकिन, यहां की नदियों को माफिया के हवाले जरूर कर दिया। हर स्कीम में तोलबाज़ी, हर स्कीम में कटमनी ! यहीं सिलीगुड़ी में ही कुछ दिन पहले दीदी ने कहा कि उनके तोलाबाज़ तो सिर्फ 100, 200, 500 रुपए लेते हैं, इसमें क्या बड़ी बात है। बताओ भाई, बड़े आराम से दीदी कह रही है, तोलाबाज तो 100, 200, 500 रुपए लेते हैं तो इसमें इतना चिल्लाते क्यों हैं मोदी। भाइयों-बहनों, हम छोटे थे तो एक कथा सुनी थी उस कथा में एक बहुत बड़ा डाकू लुटेरा उसको फांसी की सजा हुई। जब फांसी की सजा हुई तो उसको पूछा तुम्हारी अंतिम इच्छा क्या है? तो उसने कहा मुझे मेरी मां को मिलना है। तो फिर सरकार ने व्यवस्था की कि फांसी पर जाने से पहले उसको उसकी मां से मिलवा दिया जाए। जब वो अपनी मां को मिला तो मां को झपट कर के उसने मां की नाक को काट लिया। अपनी मां की नाक को काट लिया। फांसी पर जाने से पहले काट लिया। तो लोगों ने पूछा कि भाई तुमने अपनी मां पर ये क्यों किया? तो उसने कहा जब मैं छोटी चोरी करता था उस दिन अगर मेरी मां ने रोका होता तो मैं इतना बड़ा लुटेरा ना बनता। मुझे फांसी पर जाने की नौबत नहीं आती। और दीदी कह रही हैं कि 100- 200-500 लेते हैं उसमें क्या है ? दीदी, ये वही खेल है जो फांसी पर लटकने वाले अपनी मां की नाक काट ली थी। अरे दीदी, ओ दीदी, अब आपको गरीब का दर्द दिखाई नहीं देता, गरीब की परेशानी दिखाई नहीं देती। गरीबों की दुश्मन ऐसी टीएमसी सरकार को जाना ही होगा।

भाइयो और बहनो,
यहां इतनी भारी संख्या में बहन-बेटियां आई हैं, आपसे भी दीदी को बहुत समस्या है। दीदी कहती हैं कि आप पैसे के लालच में यहां आती हैं ! मैं जरा आपसे पूछना चाहता हूं, क्या आप इस कार्यक्रम में पैसे लेकर के आए हैं क्या? जरा दीदी के कान फट जाए ऐसे जवाब दो। क्या आप पैसे लेकर के आए हो क्या?... आप पैसे लेकर के आए हो क्या? आप पैसे की लालच में आए हो क्या? पैसे की लालच में आए हो क्या? ये आपकी ईमानदारी पर उन्होंने घाव किया है कि नहीं किया है? ये आपका अपमान किया है कि नहीं किया है? आपके स्वाभिमान को चोट पहुंचाई है कि नहीं पहुंचाई है? दीदी, ये इसी राज्य के नागरिक है आप उनको गालियां दे रही हैं। ममता दीदी, हर कोई आपके तोलाबाजों की तरह लालची नहीं होता। ये तो स्वाभिमान लोग है स्वाभिमानी लोग है। ये बंगाल की स्वाभिमानी बहनें हैं जो हर दुख-तकलीफ के बावजूद अपनी मेहनत का खाती हैं, अपने स्वाभिमान से तकलीफों को सहन करती हैं लेकिन स्वाभिमान को नहीं छोड़ती है। आपका ये प्यार मेरे सर आंखों पर, आपका ये प्यार ये आशीर्वाद मुझे आपके लिए पल-पल जीने के लिए बहुत बड़ी ताकत देते हैं। आपका आशीर्वाद यही मेरी अमानत है। इतनी बड़ी संख्या में भाजपा की जनसभाओं में बहनें, बेटियां इसलिए आ रही हैं क्योंकि हिंसा और तोलाबाज़ी से सबसे ज्यादा परेशान हमारी माताएं और बहने हैं। तोलाबाज़ी के कारण, घर चलाना मुश्किल हुआ है। घर में पानी का नल नहीं है, इसके लिए बाहर जाना पड़ता है, समय लगाना पड़ता है। केंद्र सरकार पूरे देश में हर घर को पाइप से पानी पहुंचाने का अभियान चला रही है। लेकिन दीदी ने क्या किया? बंगाल में दीदी की सरकार ने हर घर जल योजना के पूरे पैसे ही खर्च नहीं किए। सैकड़ों करोड़ रुपए अब तक बंगाल सरकार की तिजोरी में ऐसे ही पड़ा हुआ है। ये पैसा केंद्र सरकार ने भेजा था, ये पैसा आप पर खर्च होना था, लेकिन किया ही नहीं गया।

भाइयो और बहनो,
भाजपा सरकार ने शौचालय बनवाए, ताकि बहनों को अंधेरे का इंतज़ार ना करना पड़े, बेटियों को अपमानित ना होना पड़े। हमने उज्जवला का गैस कनेक्शन दिया, ताकि गरीब बहनों को धुएं से मुक्ति मिले, उनका समय बचे। भाजपा ने गरीबों को दिए जा रहे घर की रजिस्ट्री बहनों के नाम की। लेकिन दीदी के तोलाबाज़ों ने इसमें भी आपको लूटने के तरीके खोज लिए। बंगाल में बीजेपी सरकार आने के बाद, आपको बिना कटमनी, सारी सुविधाओं और योजनाओं का लाभ मिलेगा।

साथियो,
बंगाल में बीजेपी की सरकार कैसे काम करेगी, ये आपने कोरोना काल में भी देखा है। कोरोना लॉकडाउन के दौरान बहनों के जनधन खातों में सीधे हजारों करोड़ रुपए केंद्र सरकार ने जमा किए। बिना कटमनी के हर बहन के खाते में सीधे पैसे पहुंचे। अब ऐसे ही पारदर्शी तरीके से बंगाल में बीजेपी की सरकार काम करेगी और आपकी आशा- अपेक्षाओं को पूरा करेगी। इसका लाभ हर क्षेत्र को होगा, हर वर्ग को होगा।

भाइयो और बहनो,
मैं दो एक दिन पहले जलपाईगुड़ी के टी गार्डन में काम करने वाली हमारी एक बहन की बातें पढ़ रहा था। मीडिया वालों को उन्होंने कहा कि हमारे पास शौचालय नहीं है, पक्के घर नहीं हैं, सड़कें नहीं हैं, बच्चों की शिक्षा के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। मैं इस क्षेत्र के टी गार्डन्स में काम करने वाले प्रत्येक श्रमिक भाई-बहन को भरोसा देता हूं कि बंगाल की बीजेपी सरकार,आपके लिए दिन रात काम करेगी। दीदी की सरकार ने आपके जीवन के संघर्षों को कम करने के लिए कुछ नहीं किया। असम में भाजपा की डबल इंजन सरकार ने चाय बगान में काम करने वाले साथियों को घर, अस्पताल, स्कूल, भूमि पट्टा, डायरेक्ट कैश ट्रांसफर और लगभग दोगुनी मज़दूरी सुनिश्चित की है। ऐसे ही काम 2 मई के बाद पश्चिम बंगाल में होने वाले हैं। बंगाल की बीजेपी सरकार ‘परचा पट्टा’ सुनिश्चित करने के साथ ही आपके जीवन को आसान बनाने के लिए हर काम करेगी। केंद्र की भाजपा सरकार ने पहले ही इस वर्ष के बजट में टी गार्डन के साथियों के लिए 1000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इसी तरह जो हमारे सिनकोना किसान हैं, श्रमिक हैं, उनको भी तृणमूल की दुर्नीति से बाहर निकालने के लिए बीजेपी सरकार की प्रतिबद्धता आप देख पाएंगे। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत आयुष को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, इसका लाभ सिनकोना किसानों को ज्यादा से ज्यादा मिलेगा।

साथियो,
मैं सिलीगुड़ी सहित नॉर्थ बंगाल के हर गरीब, हर कृषक परिवार के सामने अपना एक और वायदा दोहराना चाहता हूं। बंगाल में बीजेपी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही आपके हित में फैसले लेने का काम शुरू हो जाएगा। पीएम किसान सम्मान निधि का जो 18 हज़ार रुपए, 18 हजार टका दीदी ने रोका, वो भी तेज़ी से आपके खाते में जमा किया जाएगा। किसान के खाते में 18 हजार रुपया, एक-एक किसान के खाते में 18 हजार टका।

साथियो,
मुझे डेढ़ दो वर्ष पहले जलपाइगुड़ी की एक दुखद खबर आज भी याद है। एक पिता को अपने बेटे की जान लेनी पड़ी थी क्योंकि उसके पास अपने बीमार बेटे के इलाज के लिए पैसे नहीं थे। उस तकलीफ में पिता ने खुद भी अपनी जान ले ली थी। ये वाकया दिखाता है कि इस क्षेत्र में, नॉर्थ बंगाल में मेडिकल सुविधाओं की क्या हालत है। दीदी ने अगर आयुष्मान भारत योजना बंगाल में लागू की होती, तो गरीबों को ये दिन देखने न पड़ते। इस योजना के तहत गरीबों को 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा बीजेपी की केंद्र सरकार ने दे रखी है। सिर्फ सिलिगुड़ी-जलपाइगुड़ी ही नहीं, कोलकाता ही नहीं, वो पिता दिल्ली-मुंबई-चेन्नई कहीं पर भी अपने बेटे का मुफ्त इलाज करवा सकता था। लेकिन दीदी ने, उनकी दुर्नीति ने ऐसा होने नहीं दिया। बंगाल में बीजेपी की सरकार में नॉर्थ बंगाल में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर तो सुधारा ही जाएगा, तुरंत ही बंगाल में आयुष्मान भारत योजना भी लागू की जाएगी।

साथियो,
दार्जिलिंग हिल्स, तराई और दुआर क्षेत्र से बीजेपी का एक विशेष संबंध रहा है। बंगाल में ये क्षेत्र सबसे पहला है, जिसने बीजेपी पर विश्वास किया, बीजेपी को हमेशा प्यार दिया है। आपके इस प्यार का कर्ज चुकाने के लिए बंगाल में बीजेपी की सरकार हर प्रकार के प्रयास करेगी, सरकार इसको पूरा कर के रहेगी। और इसके लिए बीजेपी की सरकार बहुत जरूरी है। बंगाल बीजेपी के संकल्प पत्र में जो विशेष वायदे इस क्षेत्र के लिए किए गए हैं, वो सभी पूरे किए जाएंगे। शिक्षा हो, शिल्प हो, चाकरी हो या फिर भाषा, संस्कृति हो, आपकी हर आकांक्षा पर तेजी से काम होगा।

भाइयो और बहनो,
यहां की ब्लैक टी और यहां टॉय ट्रेन, दोनों विश्व की धरोहर हैं। टी और ट्रेन, दोनों से मेरा भी बचपन से संबंध रहा है। यहां की टॉय ट्रेन तो डबल इंजन से डबल आनंद के लिए जानी जाती है। भाजपा की डबल इंजन सरकार भी, डबल स्पीड से डबल लाभ, डबल विकास करने के लिए जानी जाती है। सिलीगुड़ी सहित इस पूरे क्षेत्र में Tripple T यानि Tea, Tourism और Timber को माफिया के शिकंजे से बाहर निकालना हमारी प्राथमिकता है। यहां इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी से जुड़े आधुनिक उद्योगों को बढ़ावा मिले, इसके लिए भाजपा की डबल इंजन सरकार नई ऊर्जा से काम करेगी।

साथियो,
आज पूरे नॉर्थ ईस्ट में ही नहीं, पड़ोसी देशों के साथ आधुनिक कनेक्टिविटी को बढ़ाया जा रहा है, इसका सीधा लाभ नॉर्थ बंगाल को मिलेगा। देश में उड़ान योजना के तहत छोटे से छोटे एयरपोर्ट को जोड़ा जा रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी और बेहतर कानून व्यवस्था से यहां का टूरिज्म सेक्टर फिर से नई बुलंदी की तरफ जाएगा। कनेक्टिविटी से लेकर टूरिज्म तक के सारे काम, यहां रोजगार बढ़ाएंगे, आपका जीवन आसान बनाएंगे। इसलिए आपको ये बात ध्यान में रखनी है- कमल छाप, टीएमसी साफ! कमल छाप, टीएमसी साफ!
टीएमसी…
टीएमसी…
मैं फिर कहूंगा- भॉय पाबेन ना !
आमरा आपनादेर शाथे आछी, शाथे थाकबो !
नोतून बोच्छोरे, नोतून बांग्लार उदॉय होबे !
नोतून प्रोजोन्मो -first time voters- नोतून बांग्ला के उज्जोलितो कोरबे!
आप इतनी बड़ी तादाद में आशीर्वाद देने आए, मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। मेरे साथ पूरी ताकत मुट्ठी बंद कर के बोलिए.. पूरी ताकत से बोलना है। बोलेंगे?
भारत माता की…
भारत माता की..
भारत माता की…
भारत माता की…
भारत माता की…
भारत माता की…
भारत माता की…
बहुत-बहुत धन्यवाद!

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Text of PM’s address at the Hindustan Times Leadership Summit
December 06, 2025
India is brimming with confidence: PM
In a world of slowdown, mistrust and fragmentation, India brings growth, trust and acts as a bridge-builder: PM
Today, India is becoming the key growth engine of the global economy: PM
India's Nari Shakti is doing wonders, Our daughters are excelling in every field today: PM
Our pace is constant, Our direction is consistent, Our intent is always Nation First: PM
Every sector today is shedding the old colonial mindset and aiming for new achievements with pride: PM

आप सभी को नमस्कार।

यहां हिंदुस्तान टाइम्स समिट में देश-विदेश से अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित हैं। मैं आयोजकों और जितने साथियों ने अपने विचार रखें, आप सभी का अभिनंदन करता हूं। अभी शोभना जी ने दो बातें बताई, जिसको मैंने नोटिस किया, एक तो उन्होंने कहा कि मोदी जी पिछली बार आए थे, तो ये सुझाव दिया था। इस देश में मीडिया हाउस को काम बताने की हिम्मत कोई नहीं कर सकता। लेकिन मैंने की थी, और मेरे लिए खुशी की बात है कि शोभना जी और उनकी टीम ने बड़े चाव से इस काम को किया। और देश को, जब मैं अभी प्रदर्शनी देखके आया, मैं सबसे आग्रह करूंगा कि इसको जरूर देखिए। इन फोटोग्राफर साथियों ने इस, पल को ऐसे पकड़ा है कि पल को अमर बना दिया है। दूसरी बात उन्होंने कही और वो भी जरा मैं शब्दों को जैसे मैं समझ रहा हूं, उन्होंने कहा कि आप आगे भी, एक तो ये कह सकती थी, कि आप आगे भी देश की सेवा करते रहिए, लेकिन हिंदुस्तान टाइम्स ये कहे, आप आगे भी ऐसे ही सेवा करते रहिए, मैं इसके लिए भी विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

इस बार समिट की थीम है- Transforming Tomorrow. मैं समझता हूं जिस हिंदुस्तान अखबार का 101 साल का इतिहास है, जिस अखबार पर महात्मा गांधी जी, मदन मोहन मालवीय जी, घनश्यामदास बिड़ला जी, ऐसे अनगिनत महापुरूषों का आशीर्वाद रहा, वो अखबार जब Transforming Tomorrow की चर्चा करता है, तो देश को ये भरोसा मिलता है कि भारत में हो रहा परिवर्तन केवल संभावनाओं की बात नहीं है, बल्कि ये बदलते हुए जीवन, बदलती हुई सोच और बदलती हुई दिशा की सच्ची गाथा है।

साथियों,

आज हमारे संविधान के मुख्य शिल्पी, डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर जी का महापरिनिर्वाण दिवस भी है। मैं सभी भारतीयों की तरफ से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

Friends,

आज हम उस मुकाम पर खड़े हैं, जब 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। इन 25 सालों में दुनिया ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। फाइनेंशियल क्राइसिस देखी हैं, ग्लोबल पेंडेमिक देखी हैं, टेक्नोलॉजी से जुड़े डिसरप्शन्स देखे हैं, हमने बिखरती हुई दुनिया भी देखी है, Wars भी देख रहे हैं। ये सारी स्थितियां किसी न किसी रूप में दुनिया को चैलेंज कर रही हैं। आज दुनिया अनिश्चितताओं से भरी हुई है। लेकिन अनिश्चितताओं से भरे इस दौर में हमारा भारत एक अलग ही लीग में दिख रहा है, भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। जब दुनिया में slowdown की बात होती है, तब भारत growth की कहानी लिखता है। जब दुनिया में trust का crisis दिखता है, तब भारत trust का pillar बन रहा है। जब दुनिया fragmentation की तरफ जा रही है, तब भारत bridge-builder बन रहा है।

साथियों,

अभी कुछ दिन पहले भारत में Quarter-2 के जीडीपी फिगर्स आए हैं। Eight परसेंट से ज्यादा की ग्रोथ रेट हमारी प्रगति की नई गति का प्रतिबिंब है।

साथियों,

ये एक सिर्फ नंबर नहीं है, ये strong macro-economic signal है। ये संदेश है कि भारत आज ग्लोबल इकोनॉमी का ग्रोथ ड्राइवर बन रहा है। और हमारे ये आंकड़े तब हैं, जब ग्लोबल ग्रोथ 3 प्रतिशत के आसपास है। G-7 की इकोनमीज औसतन डेढ़ परसेंट के आसपास हैं, 1.5 परसेंट। इन परिस्थितियों में भारत high growth और low inflation का मॉडल बना हुआ है। एक समय था, जब हमारे देश में खास करके इकोनॉमिस्ट high Inflation को लेकर चिंता जताते थे। आज वही Inflation Low होने की बात करते हैं।

साथियों,

भारत की ये उपलब्धियां सामान्य बात नहीं है। ये सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है, ये एक फंडामेंटल चेंज है, जो बीते दशक में भारत लेकर आया है। ये फंडामेंटल चेंज रज़ीलियन्स का है, ये चेंज समस्याओं के समाधान की प्रवृत्ति का है, ये चेंज आशंकाओं के बादलों को हटाकर, आकांक्षाओं के विस्तार का है, और इसी वजह से आज का भारत खुद भी ट्रांसफॉर्म हो रहा है, और आने वाले कल को भी ट्रांसफॉर्म कर रहा है।

साथियों,

आज जब हम यहां transforming tomorrow की चर्चा कर रहे हैं, हमें ये भी समझना होगा कि ट्रांसफॉर्मेशन का जो विश्वास पैदा हुआ है, उसका आधार वर्तमान में हो रहे कार्यों की, आज हो रहे कार्यों की एक मजबूत नींव है। आज के Reform और आज की Performance, हमारे कल के Transformation का रास्ता बना रहे हैं। मैं आपको एक उदाहरण दूंगा कि हम किस सोच के साथ काम कर रहे हैं।

साथियों,

आप भी जानते हैं कि भारत के सामर्थ्य का एक बड़ा हिस्सा एक लंबे समय तक untapped रहा है। जब देश के इस untapped potential को ज्यादा से ज्यादा अवसर मिलेंगे, जब वो पूरी ऊर्जा के साथ, बिना किसी रुकावट के देश के विकास में भागीदार बनेंगे, तो देश का कायाकल्प होना तय है। आप सोचिए, हमारा पूर्वी भारत, हमारा नॉर्थ ईस्ट, हमारे गांव, हमारे टीयर टू और टीय़र थ्री सिटीज, हमारे देश की नारीशक्ति, भारत की इनोवेटिव यूथ पावर, भारत की सामुद्रिक शक्ति, ब्लू इकोनॉमी, भारत का स्पेस सेक्टर, कितना कुछ है, जिसके फुल पोटेंशियल का इस्तेमाल पहले के दशकों में हो ही नहीं पाया। अब आज भारत इन Untapped पोटेंशियल को Tap करने के विजन के साथ आगे बढ़ रहा है। आज पूर्वी भारत में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और इंडस्ट्री पर अभूतपूर्व निवेश हो रहा है। आज हमारे गांव, हमारे छोटे शहर भी आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रहे हैं। हमारे छोटे शहर, Startups और MSMEs के नए केंद्र बन रहे हैं। हमारे गाँवों में किसान FPO बनाकर सीधे market से जुड़ें, और कुछ तो FPO’s ग्लोबल मार्केट से जुड़ रहे हैं।

साथियों,

भारत की नारीशक्ति तो आज कमाल कर रही हैं। हमारी बेटियां आज हर फील्ड में छा रही हैं। ये ट्रांसफॉर्मेशन अब सिर्फ महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, ये समाज की सोच और सामर्थ्य, दोनों को transform कर रहा है।

साथियों,

जब नए अवसर बनते हैं, जब रुकावटें हटती हैं, तो आसमान में उड़ने के लिए नए पंख भी लग जाते हैं। इसका एक उदाहरण भारत का स्पेस सेक्टर भी है। पहले स्पेस सेक्टर सरकारी नियंत्रण में ही था। लेकिन हमने स्पेस सेक्टर में रिफॉर्म किया, उसे प्राइवेट सेक्टर के लिए Open किया, और इसके नतीजे आज देश देख रहा है। अभी 10-11 दिन पहले मैंने हैदराबाद में Skyroot के Infinity Campus का उद्घाटन किया है। Skyroot भारत की प्राइवेट स्पेस कंपनी है। ये कंपनी हर महीने एक रॉकेट बनाने की क्षमता पर काम कर रही है। ये कंपनी, flight-ready विक्रम-वन बना रही है। सरकार ने प्लेटफॉर्म दिया, और भारत का नौजवान उस पर नया भविष्य बना रहा है, और यही तो असली ट्रांसफॉर्मेशन है।

साथियों,

भारत में आए एक और बदलाव की चर्चा मैं यहां करना ज़रूरी समझता हूं। एक समय था, जब भारत में रिफॉर्म्स, रिएक्शनरी होते थे। यानि बड़े निर्णयों के पीछे या तो कोई राजनीतिक स्वार्थ होता था या फिर किसी क्राइसिस को मैनेज करना होता था। लेकिन आज नेशनल गोल्स को देखते हुए रिफॉर्म्स होते हैं, टारगेट तय है। आप देखिए, देश के हर सेक्टर में कुछ ना कुछ बेहतर हो रहा है, हमारी गति Constant है, हमारी Direction Consistent है, और हमारा intent, Nation First का है। 2025 का तो ये पूरा साल ऐसे ही रिफॉर्म्स का साल रहा है। सबसे बड़ा रिफॉर्म नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी का था। और इन रिफॉर्म्स का असर क्या हुआ, वो सारे देश ने देखा है। इसी साल डायरेक्ट टैक्स सिस्टम में भी बहुत बड़ा रिफॉर्म हुआ है। 12 लाख रुपए तक की इनकम पर ज़ीरो टैक्स, ये एक ऐसा कदम रहा, जिसके बारे में एक दशक पहले तक सोचना भी असंभव था।

साथियों,

Reform के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए, अभी तीन-चार दिन पहले ही Small Company की डेफिनीशन में बदलाव किया गया है। इससे हजारों कंपनियाँ अब आसान नियमों, तेज़ प्रक्रियाओं और बेहतर सुविधाओं के दायरे में आ गई हैं। हमने करीब 200 प्रोडक्ट कैटगरीज़ को mandatory क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर से बाहर भी कर दिया गया है।

साथियों,

आज के भारत की ये यात्रा, सिर्फ विकास की नहीं है। ये सोच में बदलाव की भी यात्रा है, ये मनोवैज्ञानिक पुनर्जागरण, साइकोलॉजिकल रेनसां की भी यात्रा है। आप भी जानते हैं, कोई भी देश बिना आत्मविश्वास के आगे नहीं बढ़ सकता। दुर्भाग्य से लंबी गुलामी ने भारत के इसी आत्मविश्वास को हिला दिया था। और इसकी वजह थी, गुलामी की मानसिकता। गुलामी की ये मानसिकता, विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में एक बहुत बड़ी रुकावट है। और इसलिए, आज का भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पाने के लिए काम कर रहा है।

साथियों,

अंग्रेज़ों को अच्छी तरह से पता था कि भारत पर लंबे समय तक राज करना है, तो उन्हें भारतीयों से उनके आत्मविश्वास को छीनना होगा, भारतीयों में हीन भावना का संचार करना होगा। और उस दौर में अंग्रेजों ने यही किया भी। इसलिए, भारतीय पारिवारिक संरचना को दकियानूसी बताया गया, भारतीय पोशाक को Unprofessional करार दिया गया, भारतीय त्योहार-संस्कृति को Irrational कहा गया, योग-आयुर्वेद को Unscientific बता दिया गया, भारतीय अविष्कारों का उपहास उड़ाया गया और ये बातें कई-कई दशकों तक लगातार दोहराई गई, पीढ़ी दर पीढ़ी ये चलता गया, वही पढ़ा, वही पढ़ाया गया। और ऐसे ही भारतीयों का आत्मविश्वास चकनाचूर हो गया।

साथियों,

गुलामी की इस मानसिकता का कितना व्यापक असर हुआ है, मैं इसके कुछ उदाहरण आपको देना चाहता हूं। आज भारत, दुनिया की सबसे तेज़ी से ग्रो करने वाली मेजर इकॉनॉमी है, कोई भारत को ग्लोबल ग्रोथ इंजन बताता है, कोई, Global powerhouse कहता है, एक से बढ़कर एक बातें आज हो रही हैं।

लेकिन साथियों,

आज भारत की जो तेज़ ग्रोथ हो रही है, क्या कहीं पर आपने पढ़ा? क्या कहीं पर आपने सुना? इसको कोई, हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कहता है क्या? दुनिया की तेज इकॉनमी, तेज ग्रोथ, कोई कहता है क्या? हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कब कहा गया? जब भारत, दो-तीन परसेंट की ग्रोथ के लिए तरस गया था। आपको क्या लगता है, किसी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ को उसमें रहने वाले लोगों की आस्था से जोड़ना, उनकी पहचान से जोड़ना, क्या ये अनायास ही हुआ होगा क्या? जी नहीं, ये गुलामी की मानसिकता का प्रतिबिंब था। एक पूरे समाज, एक पूरी परंपरा को, अन-प्रोडक्टिविटी का, गरीबी का पर्याय बना दिया गया। यानी ये सिद्ध करने का प्रयास किया गया कि, भारत की धीमी विकास दर का कारण, हमारी हिंदू सभ्यता और हिंदू संस्कृति है। और हद देखिए, आज जो तथाकथित बुद्धिजीवी हर चीज में, हर बात में सांप्रदायिकता खोजते रहते हैं, उनको हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ में सांप्रदायिकता नज़र नहीं आई। ये टर्म, उनके दौर में किताबों का, रिसर्च पेपर्स का हिस्सा बना दिया गया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने भारत में मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम को कैसे तबाह कर दिया, और हम इसको कैसे रिवाइव कर रहे हैं, मैं इसके भी कुछ उदाहरण दूंगा। भारत गुलामी के कालखंड में भी अस्त्र-शस्त्र का एक बड़ा निर्माता था। हमारे यहां ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीज़ का एक सशक्त नेटवर्क था। भारत से हथियार निर्यात होते थे। विश्व युद्धों में भी भारत में बने हथियारों का बोल-बाला था। लेकिन आज़ादी के बाद, हमारा डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम तबाह कर दिया गया। गुलामी की मानसिकता ऐसी हावी हुई कि सरकार में बैठे लोग भारत में बने हथियारों को कमजोर आंकने लगे, और इस मानसिकता ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े डिफेंस importers के रूप में से एक बना दिया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री के साथ भी यही किया। भारत सदियों तक शिप बिल्डिंग का एक बड़ा सेंटर था। यहां तक कि 5-6 दशक पहले तक, यानी 50-60 साल पहले, भारत का फोर्टी परसेंट ट्रेड, भारतीय जहाजों पर होता था। लेकिन गुलामी की मानसिकता ने विदेशी जहाज़ों को प्राथमिकता देनी शुरु की। नतीजा सबके सामने है, जो देश कभी समुद्री ताकत था, वो अपने Ninety five परसेंट व्यापार के लिए विदेशी जहाज़ों पर निर्भर हो गया है। और इस वजह से आज भारत हर साल करीब 75 बिलियन डॉलर, यानी लगभग 6 लाख करोड़ रुपए विदेशी शिपिंग कंपनियों को दे रहा है।

साथियों,

शिप बिल्डिंग हो, डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग हो, आज हर सेक्टर में गुलामी की मानसिकता को पीछे छोड़कर नए गौरव को हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने एक बहुत बड़ा नुकसान, भारत में गवर्नेंस की अप्रोच को भी किया है। लंबे समय तक सरकारी सिस्टम का अपने नागरिकों पर अविश्वास रहा। आपको याद होगा, पहले अपने ही डॉक्यूमेंट्स को किसी सरकारी अधिकारी से अटेस्ट कराना पड़ता था। जब तक वो ठप्पा नहीं मारता है, सब झूठ माना जाता था। आपका परिश्रम किया हुआ सर्टिफिकेट। हमने ये अविश्वास का भाव तोड़ा और सेल्फ एटेस्टेशन को ही पर्याप्त माना। मेरे देश का नागरिक कहता है कि भई ये मैं कह रहा हूं, मैं उस पर भरोसा करता हूं।

साथियों,

हमारे देश में ऐसे-ऐसे प्रावधान चल रहे थे, जहां ज़रा-जरा सी गलतियों को भी गंभीर अपराध माना जाता था। हम जन-विश्वास कानून लेकर आए, और ऐसे सैकड़ों प्रावधानों को डी-क्रिमिनलाइज किया है।

साथियों,

पहले बैंक से हजार रुपए का भी लोन लेना होता था, तो बैंक गारंटी मांगता था, क्योंकि अविश्वास बहुत अधिक था। हमने मुद्रा योजना से अविश्वास के इस कुचक्र को तोड़ा। इसके तहत अभी तक 37 lakh crore, 37 लाख करोड़ रुपए की गारंटी फ्री लोन हम दे चुके हैं देशवासियों को। इस पैसे से, उन परिवारों के नौजवानों को भी आंत्रप्रन्योर बनने का विश्वास मिला है। आज रेहड़ी-पटरी वालों को भी, ठेले वाले को भी बिना गारंटी बैंक से पैसा दिया जा रहा है।

साथियों,

हमारे देश में हमेशा से ये माना गया कि सरकार को अगर कुछ दे दिया, तो फिर वहां तो वन वे ट्रैफिक है, एक बार दिया तो दिया, फिर वापस नहीं आता है, गया, गया, यही सबका अनुभव है। लेकिन जब सरकार और जनता के बीच विश्वास मजबूत होता है, तो काम कैसे होता है? अगर कल अच्छी करनी है ना, तो मन आज अच्छा करना पड़ता है। अगर मन अच्छा है तो कल भी अच्छा होता है। और इसलिए हम एक और अभियान लेकर आए, आपको सुनकर के ताज्जुब होगा और अभी अखबारों में उसकी, अखबारों वालों की नजर नहीं गई है उस पर, मुझे पता नहीं जाएगी की नहीं जाएगी, आज के बाद हो सकता है चली जाए।

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि आज देश के बैंकों में, हमारे ही देश के नागरिकों का 78 thousand crore रुपया, 78 हजार करोड़ रुपए Unclaimed पड़ा है बैंको में, पता नहीं कौन है, किसका है, कहां है। इस पैसे को कोई पूछने वाला नहीं है। इसी तरह इन्श्योरेंश कंपनियों के पास करीब 14 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। म्यूचुअल फंड कंपनियों के पास करीब 3 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। 9 हजार करोड़ रुपए डिविडेंड का पड़ा है। और ये सब Unclaimed पड़ा हुआ है, कोई मालिक नहीं उसका। ये पैसा, गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों का है, और इसलिए, जिसके हैं वो तो भूल चुका है। हमारी सरकार अब उनको ढूंढ रही है देशभर में, अरे भई बताओ, तुम्हारा तो पैसा नहीं था, तुम्हारे मां बाप का तो नहीं था, कोई छोड़कर तो नहीं चला गया, हम जा रहे हैं। हमारी सरकार उसके हकदार तक पहुंचने में जुटी है। और इसके लिए सरकार ने स्पेशल कैंप लगाना शुरू किया है, लोगों को समझा रहे हैं, कि भई देखिए कोई है तो अता पता। आपके पैसे कहीं हैं क्या, गए हैं क्या? अब तक करीब 500 districts में हम ऐसे कैंप लगाकर हजारों करोड़ रुपए असली हकदारों को दे चुके हैं जी। पैसे पड़े थे, कोई पूछने वाला नहीं था, लेकिन ये मोदी है, ढूंढ रहा है, अरे यार तेरा है ले जा।

साथियों,

ये सिर्फ asset की वापसी का मामला नहीं है, ये विश्वास का मामला है। ये जनता के विश्वास को निरंतर हासिल करने की प्रतिबद्धता है और जनता का विश्वास, यही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। अगर गुलामी की मानसिकता होती तो सरकारी मानसी साहबी होता और ऐसे अभियान कभी नहीं चलते हैं।

साथियों,

हमें अपने देश को पूरी तरह से, हर क्षेत्र में गुलामी की मानसिकता से पूर्ण रूप से मुक्त करना है। अभी कुछ दिन पहले मैंने देश से एक अपील की है। मैं आने वाले 10 साल का एक टाइम-फ्रेम लेकर, देशवासियों को मेरे साथ, मेरी बातों को ये कुछ करने के लिए प्यार से आग्रह कर रहा हूं, हाथ जोड़कर विनती कर रहा हूं। 140 करोड़ देशवसियों की मदद के बिना ये मैं कर नहीं पाऊंगा, और इसलिए मैं देशवासियों से बार-बार हाथ जोड़कर कह रहा हूं, और 10 साल के इस टाइम फ्रैम में मैं क्या मांग रहा हूं? मैकाले की जिस नीति ने भारत में मानसिक गुलामी के बीज बोए थे, उसको 2035 में 200 साल पूरे हो रहे हैं, Two hundred year हो रहे हैं। यानी 10 साल बाकी हैं। और इसलिए, इन्हीं दस वर्षों में हम सभी को मिलकर के, अपने देश को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करके रहना चाहिए।

साथियों,

मैं अक्सर कहता हूं, हम लीक पकड़कर चलने वाले लोग नहीं हैं। बेहतर कल के लिए, हमें अपनी लकीर बड़ी करनी ही होगी। हमें देश की भविष्य की आवश्यकताओं को समझते हुए, वर्तमान में उसके हल तलाशने होंगे। आजकल आप देखते हैं कि मैं मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान पर लगातार चर्चा करता हूं। शोभना जी ने भी अपने भाषण में उसका उल्लेख किया। अगर ऐसे अभियान 4-5 दशक पहले शुरू हो गए होते, तो आज भारत की तस्वीर कुछ और होती। लेकिन तब जो सरकारें थीं उनकी प्राथमिकताएं कुछ और थीं। आपको वो सेमीकंडक्टर वाला किस्सा भी पता ही है, करीब 50-60 साल पहले, 5-6 दशक पहले एक कंपनी, भारत में सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने के लिए आई थी, लेकिन यहां उसको तवज्जो नहीं दी गई, और देश सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में इतना पिछड़ गया।

साथियों,

यही हाल एनर्जी सेक्टर की भी है। आज भारत हर साल करीब-करीब 125 लाख करोड़ रुपए के पेट्रोल-डीजल-गैस का इंपोर्ट करता है, 125 लाख करोड़ रुपया। हमारे देश में सूर्य भगवान की इतनी बड़ी कृपा है, लेकिन फिर भी 2014 तक भारत में सोलर एनर्जी जनरेशन कपैसिटी सिर्फ 3 गीगावॉट थी, 3 गीगावॉट थी। 2014 तक की मैं बात कर रहा हूं, जब तक की आपने मुझे यहां लाकर के बिठाया नहीं। 3 गीगावॉट, पिछले 10 वर्षों में अब ये बढ़कर 130 गीगावॉट के आसपास पहुंच चुकी है। और इसमें भी भारत ने twenty two गीगावॉट कैपेसिटी, सिर्फ और सिर्फ rooftop solar से ही जोड़ी है। 22 गीगावाट एनर्जी रूफटॉप सोलर से।

साथियों,

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने, एनर्जी सिक्योरिटी के इस अभियान में देश के लोगों को सीधी भागीदारी करने का मौका दे दिया है। मैं काशी का सांसद हूं, प्रधानमंत्री के नाते जो काम है, लेकिन सांसद के नाते भी कुछ काम करने होते हैं। मैं जरा काशी के सांसद के नाते आपको कुछ बताना चाहता हूं। और आपके हिंदी अखबार की तो ताकत है, तो उसको तो जरूर काम आएगा। काशी में 26 हजार से ज्यादा घरों में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के सोलर प्लांट लगे हैं। इससे हर रोज, डेली तीन लाख यूनिट से अधिक बिजली पैदा हो रही है, और लोगों के करीब पांच करोड़ रुपए हर महीने बच रहे हैं। यानी साल भर के साठ करोड़ रुपये।

साथियों,

इतनी सोलर पावर बनने से, हर साल करीब नब्बे हज़ार, ninety thousand मीट्रिक टन कार्बन एमिशन कम हो रहा है। इतने कार्बन एमिशन को खपाने के लिए, हमें चालीस लाख से ज्यादा पेड़ लगाने पड़ते। और मैं फिर कहूंगा, ये जो मैंने आंकडे दिए हैं ना, ये सिर्फ काशी के हैं, बनारस के हैं, मैं देश की बात नहीं बता रहा हूं आपको। आप कल्पना कर सकते हैं कि, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, ये देश को कितना बड़ा फायदा हो रहा है। आज की एक योजना, भविष्य को Transform करने की कितनी ताकत रखती है, ये उसका Example है।

वैसे साथियों,

अभी आपने मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग के भी आंकड़े देखे होंगे। 2014 से पहले तक हम अपनी ज़रूरत के 75 परसेंट मोबाइल फोन इंपोर्ट करते थे, 75 परसेंट। और अब, भारत का मोबाइल फोन इंपोर्ट लगभग ज़ीरो हो गया है। अब हम बहुत बड़े मोबाइल फोन एक्सपोर्टर बन रहे हैं। 2014 के बाद हमने एक reform किया, देश ने Perform किया और उसके Transformative नतीजे आज दुनिया देख रही है।

साथियों,

Transforming tomorrow की ये यात्रा, ऐसी ही अनेक योजनाओं, अनेक नीतियों, अनेक निर्णयों, जनआकांक्षाओं और जनभागीदारी की यात्रा है। ये निरंतरता की यात्रा है। ये सिर्फ एक समिट की चर्चा तक सीमित नहीं है, भारत के लिए तो ये राष्ट्रीय संकल्प है। इस संकल्प में सबका साथ जरूरी है, सबका प्रयास जरूरी है। सामूहिक प्रयास हमें परिवर्तन की इस ऊंचाई को छूने के लिए अवसर देंगे ही देंगे।

साथियों,

एक बार फिर, मैं शोभना जी का, हिन्दुस्तान टाइम्स का बहुत आभारी हूं, कि आपने मुझे अवसर दिया आपके बीच आने का और जो बातें कभी-कभी बताई उसको आपने किया और मैं तो मानता हूं शायद देश के फोटोग्राफरों के लिए एक नई ताकत बनेगा ये। इसी प्रकार से अनेक नए कार्यक्रम भी आप आगे के लिए सोच सकते हैं। मेरी मदद लगे तो जरूर मुझे बताना, आईडिया देने का मैं कोई रॉयल्टी नहीं लेता हूं। मुफ्त का कारोबार है और मारवाड़ी परिवार है, तो मौका छोड़ेगा ही नहीं। बहुत-बहुत धन्यवाद आप सबका, नमस्कार।