The BJP government at the Centre has continuously supported Bengal’s growth: PM Modi in Kolkata
TMC and Congress have surrendered to appeasement and encourage infiltrators for vote-bank politics: PM Modi exposed the opposition big time in Bengal
For the benefits of central schemes to reach Bengal too, a BJP government in the state is essential: PM’s promise of a double-engine government in Bengal
TMC’s mission is not to help people, but only to block BJP: PM Modi in Bengal rally
“TMC jabe, BJP ashbe!”: PM Modi’s reassurance in Bengal

भारत माता की, भारत माता की।

बोरोरा आमार// प्रोणाम नेबेन// छोटारा भालोबासा। दक्षिणेश्वर काली मंदिर और कालीघाट मंदिर, श्री श्री 108 करुणामयी काली माता मंदिर, दमदम बालाजी हनुमान, रामकृष्ण सेवा मंदिर, इन सभी पावन स्थानों में विराजमान देवी-देवताओं को मैं आस्थापूर्वक नमन करता हूं। आज कौशकी अमावस्या का पावन दिन भी है। मैं आप सभी को शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,
मैं ऐसे समय में कोलकाता आया हूं, जब दुर्गापूजा की तैयारियां शुरु हो गई हैं। कुमरटुली में, माता दुर्गा की प्रतिमा गढ़ी जा रही है। बड़ा बाजार से पार्क स्ट्रीट तक, कोलकाता नए रंग में, नई रौनक के साथ सज रहा है। आस्था और आनंद के पर्व के साथ, जब विकास का पर्व भी जुड़ जाता है, तो खुशी दोगुनी हो जाती है। यहां से कुछ ही दूरी पर मुझे कोलकाता मेट्रो और हाईवे से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण का अवसर मिला है। मैं दमदम के, कोलकाता के आप सभी लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,
पश्चिम बंगाल आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक है। इसलिए, जबतक पश्चिम बंगाल का सामर्थ्य नहीं बढ़ेगा तबतक विकसित भारत की यात्रा सफल नहीं हो पाएगी। क्योंकि बीजेपी का conviction है, बीजेपी मानती है, बीजेपी की श्रद्धा है... बांग्लार उदोय// तबेई// विकोशितो भारोतेर जॉय! इसलिए बीते 11 वर्षों में केंद्र की बीजेपी सरकार ने पश्चिम बंगाल के विकास के लिए लगातार हर प्रकार की मदद दी है। बंगाल में नेशनल हाईवे के निर्माण के लिए जितना पैसा कांग्रेस की यूपीए सरकार ने अपने 10 साल में दिया था, उससे तीन गुना ज्यादा पैसा भारत सरकार ने पश्चिम बंगाल को दिया। रेलवे के लिए भी बंगाल का बजट, पहले की तुलना में तीन गुणा बढ़ाया गया है। लेकिन साथियों, बंगाल में विकास कार्यों के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती भी है। चुनौती ये कि बंगाल के लिए जो पैसा हम राज्य सरकार को सीधे भेजते हैं, उसका ज्यादातर हिस्सा यहां लूट लिया जाता है। जो पैसा भारत सरकार दिल्ली से भेजती है वो पैसा आप पर नहीं खर्च होता, वो पैसा महिलाओं का जीवन आसान बनाने के लिए नहीं खर्च होता, वो पैसा TMC काडर पर खर्च होता है। इसलिए गरीब कल्याण की अनेक योजनाओं में बंगाल देश के दूसरे राज्यों से पिछड़ा हुआ है।

साथियों,
यही स्थिति कुछ साल पहले हमारे पड़ोस में असम की थी, त्रिपुरा की थी। लेकिन जब से असम और त्रिपुरा में भाजपा सरकार बनी है, गरीब कल्याण की योजनाओं का लाभ वहां जनता को मिलने लगा है। आज इन राज्यों में हर घर जल का काम तेजी से चल रहा है। आयुष्मान योजना के तहत 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज हर गरीब को मिल रहा है। गरीबों के पक्के घर बन रहे हैं। बंगाल में भी जनता तक सारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए जरूरी है कि यहां पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार होनी चाहिए। ये अब तय है टीएमसी जाबे//बीजेपी आशबे!

भाइयों और बहनों,
ये धरती सतीश चंद्र दासगुप्त, सुरेंद्रनाथ बंद्दोपाध्याय, गोष्ठ पाल और हरिनाथ डे...ऐसी अनेक विभूतियों की धरती है। इस धरती ने, देश को, समाज को समय-समय पर नई चेतना दी है। ये धरती पुनर्जागरण का केंद्र रही है। यहीं वो अमर वाणी गूंजी है, जो कहती है “जागो// ओठो// नबोजीबोनेर गाने नबो आलोक// जालाओ// प्राणे-प्राणे।”

साथियों,
आज पश्चिम बंगाल को सच में नई रोशनी की ज़रूरत है, सच्चे परिवर्तन की ज़रूरत है। पश्चिम बंगाल ने, आज़ादी के बाद पहले कांग्रेस और फिर लेफ्ट का लंबा दौर देखा है। इसके बाद, 15 साल पहले, पश्चिम बंगाल के आप लोगों ने परिवर्तन करने का फैसला किया था। आप लोगों ने मां-माटी-मानुष के नारे पर भरोसा किया था। लेकिन हालात पहले से भी ज्यादा खराब हो गए। भर्ती घोटालों से नौजवानों का भविष्य खराब हो गया। बहनों-बेटियों पर अत्याचार बढ़ गए। क्राइम और करप्शन, ये टीएमसी सरकार की पहचान बन गए। ये पक्का है कि जब तक बंगाल में TMC की सरकार रहेगी, तब तक बंगाल का विकास अवरुद्ध रहेगा, रुका रहेगा। इसलिए आज बंगाल का जन-जन कह रहा है- टीएमसी जाएगी तभी असली बदलाव आएगा। टीएमसी जाबे// तॉबेई,// आशोल // पोरिबोर्तोन //आशबे।

साथियों,
21वीं सदी के 25 साल तो बीत चुके हैं। आने वाले साल देश की तरह ही बंगाल के लिए भी बहुत अहम हैं। हमें ये समय ऐसे ही नहीं निकलने देना है। इसलिए बंगाल को चाहिए--सच्चा परिवर्तन। आशोल पोरिबोर्तोन परिवर्तन, जो नारे में नहीं, काम में दिखे। परिवर्तन, जो उद्योग लगाए, घर के बेटे-बेटी को बंगाल में ही नौकरी दे। परिवर्तन, जो बेटियों को सुरक्षा दे, मकान और दुकान को जलने से बचाए। परिवर्तन, जो किसान को सुविधा दे, सम्मान दे, फसल का सही दाम दे। परिवर्तन, जहां अपराधी और भ्रष्टाचारी, सरकार में नहीं जेल में होंगे। ऐसा परिवर्तन, जहां सुशासन होगा, गरीब से गरीब भी सम्मान का जीवन जीएगा। और ये सच्चा परिवर्तन सिर्फ और सिर्फ भाजपा ही ला सकती है। और इसीलिए बंगाल के घर-घर में हमें एक बात पहुंचानी है। बंगाल के हर कोने से एक ही आवाज आनी चाहिए- बाचते चाई,// बीजेपी ताई। यही बंगाल की असली पुकार है, यही बंगाल का भविष्य है।

साथियों,
ये वर्ष डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्म-जयंति का 125वां वर्ष है। भाजपा का तो जन्म ही डॉक्टर मुखर्जी के आशीर्वाद से हुआ है। वे भारत के औद्योगिक विकास के जनक रहे हैं। दुर्भाग्य से कांग्रेस ने कभी उनको इसका श्रेय नहीं दिया। देश के पहले उद्योग मंत्री के रूप में, भारत की पहली इंडस्ट्रियल पॉलिसी उन्होंने ही बनाई थी। उनकी नीतियों में बंगाल की इस धरती की कुशलता थी, यहां से मिला अनुभव था। अगर हम उसी नीति पर चले होते तो देश की तस्वीर कुछ और होती। लेकिन उन नीतियों को भुला दिया गया। फिर ऐसा भटकाव हुआ कि हम पूरी तरह से विदेशों पर निर्भर हो गए। मेरे प्यारे बंगाल के भाइयों-बहनों हमें गर्व है कि हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सैनिक हैं। हम मां भारती के सेवक हैं। जो सपने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देखे थे। उसके लिए एक सैनिक की तरह हम अपना जीवन खपा रहे हैं। बंगाल की प्रबुद्ध जनता जानती है कि दूसरों पर निर्भरता यानि आत्मसम्मान पर चोट। इस स्थिति से हमें देश को बाहर निकालना है। इसलिए आज देश ने आत्मनिर्भरता का मूलमंत्र लेकर के नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने का फैसला लिया है। मेक इन इंडिया आज एक बड़ी सिद्धि बन रहा है। जिसके लिए हमारा कोलकाता, हमारा बंगाल जाना जाता था। वो गौरवशाली अतीत हमें मिलकर फिर से लौटाना है। इसलिए आज बंगाल में एक ही गूंज है- टीएमसी के// शोराओ, बांग्ला के // बाचाओ !

साथियों,
भाजपा जो संकल्प लेती है, वो सिद्ध करके दिखाती है। इसका ताजा प्रमाण अभी हमने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखा है। हमारी सेना ने सीमापार आतंकियों और आतंक के आकाओं के अड्डों को खंडहर में बदल दिया। हमारी सेनाओं ने आतंकियों को ऐसा सबक सिखाया कि पाकिस्तान की आज भी नींद उड़ी हुई है। भारत की इस सफलता के पीछे बहुत बड़ी शक्ति, मेड इन इंडिया अस्त्र-शस्त्र की रही है। और मुझे गर्व है कि भारत की सेना को ताकत देने में बंगाल की, इस इलाके की भी बड़ी भूमिका है, बहुत बड़ा योगदान है। इच्छापुर में गुलामी के कालखंड में डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग का काम शुरु हुआ था। लेकिन कांग्रेस की सरकारों ने भारत की ऐसी डिफेंस इंडस्ट्री को बर्बाद कर दिया था। हमारी सेना को विदेशों पर निर्भर कर दिया था। अब भाजपा सरकार ने भारत की डिफेंस इंडस्ट्री को नई ऊर्जा दी। इसका लाभ, यहां की फैक्ट्री को भी मिला है। आज ये फैक्ट्री आधुनिक राइफल और अन्य हथियार बना रही है। इससे यहां छोटे-छोटे उद्यमियों के लिए भी नए अवसर बने हैं। इन कारखानों के कारण, दमदम–बैरकपुर क्षेत्र में हज़ारों लोगों को रोज़गार मिल रहा है।

साथियों,
इच्छापुर डिफेंस फैक्ट्री सिर्फ एक उदाहरण है। आप यहां 2026 में भाजपा सरकार बनाइए, हम बंगाल को डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का बंगाल बनाएंगे। बंद पड़े कारखाने फिर से खुलेंगे, नया निवेश और नए कारखाने लगेंगे और दमदम फिर से इंडस्ट्रियल हब बनेगा। ये भाजपा का संकल्प है। बीकोशितो// बांग्ला, मोदीर गारंटी।

साथियों,
भाजपा के पास पश्चिम बंगाल के विकास का एक ठोस प्लान है, एक रोडमैप है। लेकिन टीएमसी- विकास की दुश्मन है। इसका साक्षी ये दमदम क्षेत्र भी है। ये कोलकाता के सबसे अधिक भीड़भाड़ वाले इलाकों में से एक है। यहां की स्थिति क्या है, ये आप आए दिन महसूस करते हैं। देश के ऐसे शहरी क्षेत्रों के विकास के लिए स्मार्ट सिटी मिशन चल रहा है। लेकिन टीएमसी सरकार ने इस मिशन से जुड़ने से भी इनकार कर दिया है। लोगों को असुविधा होती रहे, विकास ठप्प होता रहे, लेकिन टीएमसी का मिशन, जैसे-तैसे बीजेपी को रोकना है, केंद्र की योजनाओं को रोकना है। मैं बंगाल के भद्रलोक से पूछता हूं। क्या ये तरीका सही है? क्या ऐसी पॉलिटिक्स से पश्चिम बंगाल का भला होगा? इसलिए, मुझे आप सभी का आशीर्वाद चाहिए। आप यहां भी भाजपा को एक बार अवसर देकर देखिए।

साथियों,
बंगाल में भाजपा आएगी, तो रेल और मेट्रो का तेज़ी से विस्तार होगा। मैं तो चाहूंगा कि यहीं पर इलेक्ट्रिक वीकल से जुड़ा व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर बने। यहां बहुत बड़ी मात्रा में इन्वेस्टमेंट आए, नौजवानों को रोजगार मिले। ये तभी होगा जब यहां कानून का राज आएगा। जब यहां भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और जब बंगाल में डबल इंजन की भाजपा सरकार होगी।

साथियों,
पश्चिम बंगाल के पास, इतिहास और संस्कृति की भी अनमोल धरोहर है। ये बांग्ला विरासत, विकसित बंगाल बनाने के अभियान को प्रेरणा देगी। बीजेपी सरकार पूरे गर्व के साथ बांग्ला भाषा और बांग्ला संस्कृति को सशक्त करने में जुटी है। ये हमारा सौभाग्य है कि हमें बांग्ला भाषा को, क्लासिकल लैंग्वेज यानि शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने का सौभाग्य मिला। साथियों, यहां बनने वाली भाजपा सरकार हैरिटेज टूरिज्म पर भी बल देगी।

साथियों,
हम गंगा जी पर जो इनलैंड वॉटरवे बना रहे हैं या फिर जो हमारा समंदर है, इसमें क्रूज़ टूरिज्म के लिए बहुत संभावनाएं हैं। ऐसी हर संभावना को भाजपा सरकार बनने के बाद तलाशा जाएगा। ताकि पश्चिम बंगाल के नौजवानों को काम के लिए कहीं और जाने के लिए मजबूर न होना पड़े।

साथियों,
इस बार लाल किले से मैंने देश की एक बहुत बड़ी चिंता की चर्चा की है। ये चिंता घुसपैठ के बढ़ते खतरे की है। कोलकाता के, पश्चिम बंगाल के लोग, समय से आगे की सोचते हैं। इसलिए आपके बीच मैं लगातार इस बहुत बड़ी राष्ट्रीय चुनौती की चर्चा करता रहा हूं। आजकल आप देखते हैं, जिन देशों को विकसित कहा जाता है, जिनके पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है, वहां घुसपैठियों के खिलाफ मुहिम चल रही है। ये देश अब घुसपैठियों को ज्यादा नहीं सह सकता। घुसपैठियों को निकालना चाहिए कि नहीं निकालना चाहिए? घुसपैठिए जाने चाहिए कि नहीं जाने चाहिए? उनको भगाना होगा कि नहीं भगाना होगा? कौन भगा सकता है? कौन भगा सकता है? घुसपैठियों से बंगाल को कौन मुक्त करा सकता है? साथियों, मोदी नहीं, भाजपा नहीं, आपका एक वोट करा सकता है, आपका एक वोट। एक बार वोट दे दीजिए, ये घुसपैठिए भाग जाने लग जाएंगे।

साथियों,
भारत के पास तो संसाधन सीमित हैं। हमें अपने नौजवानों को रोजगार देना है। अपने नागरिकों को सुविधाएं देनी हैं। जो घुसपैठिए, हमारे नौजवानों का रोजगार छीन रहे हैं, जो हमारे इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव डाल रहे हैं, जो हमारी बहनों-बेटियों के साथ आत्याचार कर रहे हैं, ऐसे घुसपैठियों को हम भारत में नहीं रहने देंगे। इसलिए भारत सरकार ने घुसपैठियों के खिलाफ इतना बड़ा अभियान चलाया हुआ है। लेकिन साथियों, मुझे हैरानी है कि TMC- कांग्रेस समेत कुछ इंडी अलायंस के राजनीतिक दल, तुष्टिकरण के आगे घुटने टेक चुके हैं। ये राजनीतिक दल, सत्ता की भूख के लिए घुसपैठ को बढ़ावा दे रहे हैं। कुछ जगह पर दिख रहा है, उन्होंने घुसपैठियों की शरण ले ली है।

साथियों,
पश्चिम बंगाल तो सीमावर्ती राज्य है। जिस प्रकार, बॉर्डर के इलाकों में डेमोग्राफी बदली जा रही है। ये पश्चिम बंगाल में सामाजिक संकट भी पैदा कर रहा है। खासतौर पर किसानों से धोखाधड़ी करके उनकी ज़मीन पर कब्जा किया जा रहा है। आदिवासियों को गुमराह करके उनकी जमीन हड़पी जा रही है। देश ये सहन नहीं कर सकता। इसको रोकना ही होगा। इसलिए, इस बार लाल किले से मैंने घुसपैठ के खिलाफ विशेष डेमोग्राफी मिशन की घोषणा की है। जो लोग सिर्फ यहां हमारे लोगों की रोज़ी-रोटी छीनने आए हैं, जो फर्जी तरीके से कागज बनाकर रुक गए हैं, उनको यहां से जाना ही होगा। और ये काम ईमानदारी से हो पूरा हो सके, इसके लिए टीएमसी सरकार को भी यहां से जाना ही होगा।

साथियों,
पिछले 11 साल से देश भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रहा है। अब इसी दिशा में देश ने एक और बड़ा कदम उठाया है। इस बार लोकसभा में भाजपा सरकार एक बहुत बड़ा एंटी करप्शन बिल लेकर आई है। मैं बंगाल के लोगों से इस बिल के बारे में विशेष तौर पर बात करूंगा। साथियों, आप भी जानते हैं... हमारे देश में, अगर एक छोटा सा सरकारी कर्मचारी...चाहे वो कर्मचारी ड्राइवर हो, प्यून हो, सरकार की किसी कैंटीन में काम करता हो, सरकार में कहीं साफ-सफाई का काम करता हो, अगर उस कर्मचारी को किसी पुलिस वाले ने जेल में बंद कर दिया तो करीब-करीब 50 घंटे में अगर उसको जमानत नहीं मिली और 50 घंटे जेल में रह गया, तो ऑटोमेटिक उसकी नौकरी चली जाती है, सस्पेंड हो जाता है। एक छोटा मुलाजिम दो दिन अगर जेल में रहे तो उसकी जिंदगी तबाह करने के कानून है, लेकिन कोई मुख्यमंत्री, कोई मंत्री, प्रधानमंत्री अगर जेल चला जाए तो उसके लिए कोई कानून नहीं है। और हालत तो देखिए, आजकल ये लोग, इतने गिरे हैं, इतने गिरे हैं कि जेल से भी सरकार चलाने की कोशिश कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल ने ये साक्षात देखा है। बार-बार कई बार अनुभव किया है। टीएमसी के एक मंत्री टीचर्स घोटाले में आज तक जेल में हैं। शिक्षक भर्ती का गंभीर घोटाला, घर से नोटों का पहाड़ मिला, लेकिन तब भी वो मंत्री कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं थे। जनता की हर भावना को यहां निर्ममता से कुचला जाता रहा। इसी तरह, टीएमसी के एक और मंत्री पर गरीबों का राशन लूटने का आरोप है। इनकी भी करोड़ों रुपए की संपत्ति ज़ब्त हो चुकी है। ये मंत्री भी जेल जाने के बाद कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं थे। इन्होंने भी जनता की भावना की, संविधान की भावना की कोई परवाह नहीं की।

साथियों,
आप मुझे बताइए, ऐसे लोग जो भ्रष्ट हैं, जो जनता को धोखा दे रहे हैं, क्या उन्हें सरकार में अपने पद पर रहने का हक है? हमने तो ये देखा है कि मुख्यमंत्री तक जेल जाते हैं लेकिन वो जेल से सरकार चलाते हैं। ये संविधान का, लोकतंत्र का सरासर अपमान है। और मोदी संविधान का ये अपमान होते नहीं देख सकता। इसलिए मैंने तय किया कि ये सब नहीं चल सकता। मंत्री और मुख्यमंत्री हो, और इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री को भी इस सख्त कानून के दायरे में ले आया हूं। अगर पीएम भी 30 दिन जेल में रहें और उन्हें जमानत ना मिले तो अगले दिन उनकी कुर्सी चली जाएगी। लेकिन साथियों, टीएमसी के लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ इस कार्रवाई पर भड़क गए हैं। वो इस कानून का विरोध कर रहे हैं। टीएमसी के लोगों ने संसद में इस बिल को फाड़ने की कोशिश की है। ये दिखाता है कि टीएमसी की पूरी राजनीति कैसे भ्रष्टाचार के पहाड़ पर टिकी है। इसलिए ये लोग इतने डरे हुए हैं भ्रष्टाचारियों को बचाने में जुटे हैं।

साथियों,
हर चुनौतियों को परास्त करते हुए पश्चिम बंगाल, फिर से भारत के विकास का पावर हाउस बनकर रहेगा। इस संकल्प को लेकर हमें आगे बढ़ना है। आप याद रखिए और औरों को भी बताइए, हर गली-मोहल्ले में, बंगाल के हर कोने में एक ही मंत्र एक ही नारा गूंजता रहना चाहिए ... बाचते चाई,// बीजेपी ताई। एक बार फिर, आप सभी को इतनी विशाल संख्या में, और इतनी ऊर्जा के साथ इस सभा को सफल बनाने के लिए मैं आपका आभार मानता हूं।

मेरे साथ बोलिए,

भारत माता की जय ! भारत माता की जय ! भारत माता की जय !
वंदे, वंदे, वंदे, वंदे, वंदे, वंदे, वंदे, वंदे, वंदे, वंदे, वंदे, वंदे।

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Text of PM’s remarks in the Rajya Sabha
March 18, 2026
In politics, there are no full stops; your experience and contribution will forever remain a part of the nation’s life: PM
There is much to learn from these senior leaders about staying entirely committed to the responsibilities given by society: PM
The legacy here is a continuous process that enriches our parliamentary system: PM
Parliamentary system gains immense strength from the concept of a second opinion; This second opinion is a massive contribution to our democracy that we must cherish: PM
The six years spent here are invaluable for shaping one's contribution to the nation and for self-growth: PM
The invaluable contributions of the retiring members to nation-building would continue to be felt whether they serve within the formal system or through independent social work: PM

इस विशेष अवसर पर आपने मुझे अपनी भावनाएं प्रकट करने के लिए जो अवसर दिया, इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

आदरणीय सभापति जी,

सदन के अंदर अनेक विषयों पर चर्चाएं होती हैं, हर किसी का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है, कुछ खट्टे-मीठे अनुभव भी रहते हैं। लेकिन आज जब ऐसा अवसर आता है, तो स्वाभाविक रूप से दलगत भावना से ऊपर उठकर के हम सबके भीतर एक समान भाव प्रकट होता है, क्या? ये हमारे साथी अब किसी और विशेष काम के लिए आगे बढ़ रहे हैं। यहां से जो साथी विदाई ले रहे हैं, कुछ फिर से आने के लिए विदाई ले रहे हैं, और कुछ विदाई के बाद यहां का अनुभव लेकर के समाज जीवन में कुछ ना कुछ विशेष योगदान के लिए जा रहे हैं। जो जा रहे हैं, लेकिन आने वाले नहीं है, उनको भी मैं कहना चाहूंगा कि राजनीति में कोई फुल स्टॉप नहीं होता है, भविष्य आपका भी इंतजार कर रहा है, और आपका अनुभव, आपका योगदान राष्ट्र जीवन में हमेशा-हमेशा बना रहेगा।

आदरणीय सभापति जी,

इस सदन में, जो भी सदस्य माननीय हमारे विदाई ले रहे हैं, कुछ सदन सदस्य ऐसे हैं, जिनको शायद उस समय जाने का समय कार्यकाल आएगा जब सदन नहीं चलता होगा, कुछ है जिनको ऑलरेडी सदन के दरमियान ही विदाई मिल रही है। लेकिन ये जाने वाले सभी माननीय सांसदों का बहुत ही उत्तम योगदान है, इसलिए, लेकिन मैं जरूर कहूंगा, आदरणीय देवगोड़ा जी, आदरणीय खड़गे जी, आदरणीय शरद पवार जी, ये ऐसे वरिष्ठ लोग हैं, जिनके जीवन का आधे से अधिक उम्र संसदीय कार्य प्रणाली में गई है, और इतने लंबे अनुभव के बाद भी सभी नए सांसदों ने सीखना चाहिए, वैसे समर्पित भाव से सदन में आना, जो भी हमसे-उनसे बन सकता है, उतना योगदान करना, यानी समाज में से जो जिम्मेवारी मिली है, उसके प्रति पूरी तरह समर्पित रहना। ये इन सब वरिष्ठ लोगों से हम जैसे सबको सीखने जैसा है। और मैं उनके योगदान की भूरी-भरी सराहना करूंगा, क्योंकि इतना लंबा कार्यकाल छोटा नहीं होता जी, बहुत महत्वपूर्ण है। उसी प्रकार से हमारे उपसभापति जी, हरिवंश जी विदाई ले रहे हैं। हरिवंश जी को लंबे समय तक इस सदन में अपनी जिम्मेवारी निभाने का अवसर मिला है। बहुत ही मृदुभाषी, सदन को चलाने में सबका विश्वास जितने का निरंतर जिन्होंने प्रयास किया और मैंने देखा है कि संकट के समय ज्यादातर उपसभापति के ही जिम्मे आ जाता है कि भाई आप संभाल लेना जरा, तो उनको एक लंबा एक्सपीरियंस होता है, सबको जान भी लेते हैं, भली-भांति जान लेते हैं। लेकिन उनका भी योगदान है। और जब भी, और मैंने देखा कि जब सदन का समय नहीं होता है, तो देश के कोने में, कोने में, कहीं ना कहीं वो यूथ के साथ मिलना- जुलना, देश की परिस्थितियों के संबंध में उनको अवगत कराना, उनमें एक देश के प्रति संवेदनाएं पैदा करना, वो भी निरंतर काम है। वो कलम के धनी तो है ही है, लेकिन कर्म कठोर के नाते भी मैं कहूंगा कि उन्होंने भारत के हर कोने में जाकर के अपना काम किया है।

आदरणीय सभापति जी,

कभी-कभी किसी समय हम सुनते थे कि सदन में बहुत ही हास्य विनोद व्यंग का अवसर मिलता रहता है। इन दिनों शायद धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, क्योंकि 24x7 मीडिया की दुनिया ऐसी है कि हर कोई कॉनशियस रहता है, लेकिन हमारे अठावले जी, है जी, सदा बहार है, अठावले जी जा रहे हैं, लेकिन यहां पर किसी को खोट महसूस नहीं होगी, वो व्यंग विनोद भरपूर परोसते रहेंगे, ऐसा मुझे पूरा भरोसा है।

आदरणीय सभापति जी,

सदन में से हर दो साल के अंतराल के बाद एक बड़ा समूह हमारे बीच से जाता है, लेकिन ये ऐसी व्यवस्था है कि जो नया समूह आता है, उनको बाकी जो लंबे समय से, चार साल से बैठे हुए साथी हैं, अनुभव है, नए लोगों को तुरंत उनसे कुछ ना कुछ सीखने का अवसर मिलता है, और इसलिए एक प्रकार से यहां की जो विरासत है, वो कंटिन्यू प्रोसेस हमेशा रहती है, यह बहुत बड़ा लाभ होता है। मुझे पक्का विश्वास है कि जिनको इस बार जाना नहीं है, वो भी जो नए माननीय सांसद आएंगे, उनको, उनके अनुभव का लाभ मिलेगा और उनका योगदान भी सदन को और समृद्ध करेगा, ऐसा मेरा पूरा विश्वास है।

आदरणीय सभापति जी,

हम लोग जानते हैं कि जीवन में या सार्वजनिक जीवन में, जब भी कोई महत्वपूर्ण निर्णय करना होता है, तो परिवार के लोग बैठकर के मन बना लेते हैं कि ऐसा करना है, लेकिन फिर भी कहते हैं, अरे ऐसा करो, उनसे जरा पूछ लीजिए, एक सेकेंड ओपिनियन ले लीजिए, किसी वरिष्ठ से और घर में वरिष्ठ कहेंगे, मोहल्ले में देखो भाई, वो काफी अनुभवी है, जरा उनसे पूछ लो, एक बार उनका मन क्या करता है। अगर कोई बीमार है, तो भी कहते हैं यार ऐसा करो भाई, एक और डॉक्टर से जरा ओपिनियन ले लो, सेकेंड ओपिनियन का बहुत महत्व होता है। मैं समझता हूं, हमारे संसदीय प्रणाली में इस सेकेंड ओपिनियन की बहुत बड़ी ताकत रही है। एक सदन में कुछ निर्णय होता है, दूसरे सदन में फिर आता है, सेकेंड ओपिनियन के लिए। अगर इस सदन में होता है, तो उस सदन में जाता है सेकेंड ओपिनियन के लिए, और ये सेकेंड ओपिनियन उस सारी बहस को, उस सारे निर्णय प्रक्रिया को एक बहुत बड़ा नया आयाम दे देती है, और वो मैं समझता हूं कि हमारी निर्णय प्रक्रिया को समृद्ध करती है। तो इसलिए, सदन में जो माननीय सांसद बैठते हैं, उनके लिए एक खुलापन रहता है कि भाई चलो इस सदन में नहीं तो, उस सदन में एक अच्छा ओपिनियन नया आएगा, उस सदन में नहीं तो, इस सदन में एक नया ओपिनियन आएगा। तो ये सेकेंड ओपिनियन, ये हमारे लोकतंत्र में एक बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन है, जो जिस विरासत को हमें संभालना, हमारे जो माननीय सांसद विदाई ले रहे हैं, उनका तो योगदान रहा ही है, और इसके लिए भी मैं उनका साधुवाद करता हूं।

आदरणीय सभापति जी,

जो हमारे माननीय सांसद विदाई ले रहे हैं, बहुत आने वाले दिनों में तो शायद ये अवसर रहने वाला ही नहीं है, लेकिन ये माननीय सांसद ऐसे हैं कि जिनको पुराने संसद के भवन में भी बैठने का मौका मिला और नए संसद भवन में भी बैठने का मौका मिला। उनको दोनों इमारतों में, उनको राष्ट्र के कल्याण के लिए अपना योगदान देने का अवसर मिला है, और उनके कार्यकाल में ही, उनको इस नए सदन के निर्माण प्रक्रिया में और नए सदन की निर्णय प्रक्रिया में भी हिस्सा बनने का अवसर मिला है, ये एक विशेष उनके जीवन में याद रहेगी, नई स्मृति रहेगी।

आदरणीय सभापति जी,

मैं सभी माननीय सांसदों के और मैं मानता हूं कि ये सदन अपने आप में एक बहुत बड़ी ओपन यूनिवर्सिटी है, राष्ट्र जीवन की कई बारीकियों से परिचित होने का अवसर सदन में प्राप्त होता है। एक प्रकार से हमारे यहां शिक्षा भी होती है, हमारी दीक्षा भी होती है। ये 6 साल यहां जो रहने का अवसर मिलता है, वो जीवन को गढ़ने का, राष्ट्र जीवन के गढ़तम्य योगदान का तो महत्व है ही है, क्योंकि निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन स्वयं के जीवन को गढ़ने का भी एक अमूल्य अवसर होता है। और इसलिए जब माननीय सांसद यहां आते हैं, उस समय की उनकी जो भी सोच-समझ और क्षमता है, जब जाते हैं, तो अनेक गुना वो बढ़ती है, उसका विस्तार होता है, और अनुभव की एक बहुत बड़ी ताकत होती है। अब तब जाकर के जाने के बाद राष्ट्र जीवन का उनका निरंतर योगदान बना रहे हैं। वो अपने तरीके से व्यवस्था के तहत हो सकते हैं, व्यवस्था के तहत ना भी हो सके, लेकिन उनका अमूल्य योगदान मिलता ही रहे, राष्ट्र जीवन के निर्माण में उनका अनुभव हमेशा-हमेशा उपयोगी हो, ये मेरी उन सभी माननीय सांसदों को मेरी शुभकामनाएं हैं। और मैं फिर से एक बार सभी माननीय सांसदों के योगदान का गौरव गान करता हूं, साधुवाद करता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद।