सवाल : चुनाव खत्म होने में गिनती के दिन शेष हैं। मौजूदा चुनावों में आप किस तरह का बदलाव देखते हैं?

जवाब : सबसे बड़ा बदलाव यह है कि आज मतदाता 21वीं सदी की राजनीति देखना चाहता है। इसमें परफॉर्मेंस की बात हो, देश को आगे ले जाने वाले विजन की बात हो और जिसमें विकसित भारत बनाने के रोडमैप की चर्चा हो। अब लोग जानना चाहते हैं कि राजनीतिक दल हमारे बच्चों के लिए क्या करेंगे? देश का भविष्य बनाने के लिए नेता क्या कदम उठाएंगे?

राजनेताओं से आज लोग ये सब सुनना चाहते हैं। लोग पार्टियों का ट्रैक रिकॉर्ड भी देखते हैं। किसी पार्टी ने क्या वादे किए थे, और उनमें से कितने पूरे कर पाई, इसका हिसाब भी मतदाता लगा लेता है। लेकिन कांग्रेस और ‘इंडी गठबंधन’ के नेता अब भी 20वीं सदी में ही जी रहे हैं। आज लोग ये पूछ रहे हैं कि आप हमारे बच्चों के लिए क्या करने वाले हैं तो ये अपने पिता, नाना, परदादा, नानी, परनानी की बात कर रहे हैं। लोग पूछते हैं कि देश के विकास का रोडमैप क्या है तो ये परिवार की सीट होने का दावा करने लगते हैं। वे लोगों को जातियों में बांट रहे हैं, धर्म से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं, तुष्टीकरण की राजनीति कर रहे हैं। ये ऐसे मुद्दे ला रहे हैं, जो लोगों की सोच और आकांक्षा से बिल्कुल अलग हैं।
 
सवाल : क्या आपको लगता नहीं कि चुनाव व्यवस्था और राजनीतिक आचार-व्यवहार में सुधार की आवश्यकता है। अपनी ओर से कोई पहल करेंगे?

जवाब : देश के लोग लगातार उन राजनीतिक दलों को खारिज कर रहे हैं जो नकारात्मक राजनीति में विश्वास रखते हैं। जो सकारात्मक बात या अपना विजन नहीं बताते, वो जनता का विश्वास भी नहीं जीत पाते। जो सिर्फ विरोध की राजनीति में विश्वास रखते हैं, जो सिर्फ विरोध के लिए विरोध करते हैं, ऐसे लोगों को जनता लगातार नकार रही है। ऐसे में उन लोगों को जनता का मूड समझना होगा और अपने आप में सुधार लाना होगा। मैं आपको कांग्रेस का उदाहरण दे रहा हूं। कांग्रेस आज जड़ों से बिलकुल कट चुकी है। वो समझ ही नहीं पा रही है कि इस देश की संस्कृति क्या है। इस चुनाव के दौरान पार्टी नेताओं ने जैसी बातें बोली हैं, उससे पता चलता है कि वो भारतीय लोकतंत्र के मूल तत्व को पकड़ नहीं पा रही।

कांग्रेस नेता विभाजनकारी बयानबाजी, व्यक्तिगत हमले और अपशब्द बोलने से बाहर नहीं निकल पा रहे। उन्हें लग रहा होगा कि उनके तीन-चार चाटुकारों ने अगर उस पर ताली बजा दी तो इतना काफी है। वो इसी से खुश हैं, लेकिन उनको ये नहीं पता चल रहा है कि जनता में इन सारी चीजों को लेकर बहुत गुस्सा है। कांग्रेस तो अहंकारी है, जनता की बात सुनने वाली नहीं है। वो तो नहीं बदल सकती। लेकिन जो उनके सहयोगी दल हैं, वो देखें कि जनता का मूड क्या है, वो क्या बोल रही है। उन्हें समझना होगा कि इस राह पर चले तो लगातार रिजेक्शन ही मिलने वाला है। मुझे लगता है कि लोग इन्हें रिजेक्ट कर-कर के इनको सिखाएंगे। राजनीति में जो सुधार चाहिए वो लोग ही अपने वोट की शक्ति से कर देते हैं। लोग ही राजनीतिक दलों, खासकर नकारात्मक राजनीति करने वालों को सिखाएंगे और बदलाव लाएंगे।
 
सवाल : क्या इस चुनाव में जातीय और धार्मिक विभाजन के सवाल ज्यादा उभर आए हैं? जब चुनाव शुरू हुआ था तो एजेंडा अलग था, आखिरी चरण आने तक अलग?

जवाब : ये सवाल उनसे पूछा जाना चाहिए, जिन्होंने पहले धर्म के आधार पर देश का विभाजन कराया। अब भी 60-70 साल से ये विभाजन की राजनीति ही कर रहे हैं। एक तरफ उनकी कोशिश होती है कि किसी समाज को जाति के आधार पर कैसे तोड़ा जाए? दूसरी तरफ वो देखते हैं कि कैसे एक वोट बैंक को जोड़कर मजबूत वोट बैंक बनाए रखा जाए। दूसरा, ये सवाल उनसे पूछा जाना चाहिए जो सिर्फ तुष्टीकरण की राजनीति के लिए एससी, एसटी और ओबीसी का आरक्षण छीनकर धर्म के आधार आरक्षण देना चाहते हैं। इसके लिए वो संविधान के विरुद्ध कदम उठाने को तैयार हैं।

ये सवाल कांग्रेस और ‘इंडी गठबंधन’ वालों से पूछा जाना चाहिए, क्योंकि वही हैं जो वोट जिहाद की बात कर रहे हैं। ये सवाल उनसे पूछा जाना चाहिए जो अपने घोषणा पत्र में खुलेआम ये लिख रहे हैं कि वो जनता की संपत्ति छीन लेंगे और उसका बंटवारा दूसरों में कर देंगे। ये जो बंटवारे की राजनीति है, विभाजन की सोच है उसे अब विपक्ष खुलकर सामने रख रहा है। अब वो इसे छिपा भी नहीं रहे हैं। वो खुलकर इसका प्रदर्शन कर रहे हैं, तो ये सारे सवाल उनसे पूछे जाने चाहिए। देश और समाज को बांटने वाले ऐसे लोगों को जनता इस चुनाव में कड़ा सबक सिखाएगी।
 
सवाल :  एक देश, एक चुनाव के लिए आपने पहल की थी। क्या आपको लगता है कि इतने बड़े देश में यह संभव है। अगर हां..तो किस तरह से ये लागू हो सकेगा?

जवाब : एक देश, एक चुनाव भाजपा का और हमारी सरकार का विचार रहा है, लेकिन हम ये चाहते हैं कि इसके आसपास एक आम सहमति बने। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने जो रिपोर्ट सौंपी है, उसमें विस्तार से एक देश एक चुनाव के बारे समझाया गया है। इस पर पूरे देश में चर्चा हो, वाद हो, संवाद हो, इसके लाभ और हानि पर बात हो, इसमें क्या किया जा सकता है और कैसे किया जा सकता है। फिर इस पर एक आम सहमति बने। इससे हम एक अच्छे सकारात्मक समाधान पर पहुंच सकते हैं। जो अभी का सिस्टम है उसमें हर समय कहीं ना कहीं चुनाव होता रहता है। ये जो वर्तमान सिस्टम है, ये उपयुक्त नहीं है। ये गवर्नेंस को बहुत नुकसान पहुंचाता है। इसे बदलने की जरूरत तो है ही, पर हम कैसे करेंगे, इस पर संवाद की जरूरत है।

आपने ये भी पूछा कि क्या हमारे देश में ये संभव है। तो आप इतिहास में देख लीजिए कि जब संसाधन, टेक्नॉलजी कम थी तब भी हमारे देश में एक देश, एक चुनाव हो रहे थे। आजादी के बाद पहले के कुछ चुनाव इसी तरह हुए। उसके कुछ वर्ष बाद ही बदलाव हुए हैं। अब भी एक-दो राज्यो में लोकसभा के साथ राज्य विधानसभाओं के चुनाव हो रहे हैं। चुनाव आयोग एक चुनाव कराने के लिए पूरे देश में काम कर रहा है तो उसी में राज्यों का चुनाव भी कराया जा सकता है। इसमें कोई समस्या नहीं है, ये संभव है।
 
सवाल : गर्मी के कारण कम मतदान के चलते फिर से मांग उठी है कि इस मौसम में चुनाव नहीं होना चाहिए। क्या आप भी चुनाव के कैलेंडर में किसी तब्दीली के पक्षधर हैं?

जवाब : गर्मी के कारण कुछ समस्याएं तो होती हैं। आप देख सकते हैं कि मैंने अपनी पार्टी में सभी उम्मीदवारों को और सामान्य लोगों को जो पत्र लिखा है, उसमें मैंने गर्मी का जिक्र किया है। पत्र में लिखा है कि गर्मियों में बहुत समस्या होती है, आप अपने आरोग्य का ख्याल रखें। फिर भी लोकतंत्र के लिए जो हमारा कर्तव्य है, हमें उसे निभाना चाहिए।

मुझे पता है कि गर्मियों में क्या समस्या होती है। लेकिन इसमें क्या होना चाहिए, क्या बदलाव होना चाहिए, होना चाहिए या नहीं होना चाहिए, ये किसी एक व्यक्ति का, एक पार्टी का या सिर्फ सरकार का निर्णय नहीं हो सकता। पूरे सिस्टम, लोगों, मतदाता, राजनीतिक दलों, कार्यकर्ताओं की सहमति बननी चाहिए। जब एक सामूहिक राय बनेगी कि इसमें कुछ बदलाव लाना चाहिए या नहीं लाना चाहिए, तभी कुछ हो सकता है।

सवाल : आखिरी चरण में पूर्वी उत्तर प्रदेश की 13 और बिहार की 8 सीटों पर चुनाव शेष है। आपने कहा है कि गरीबी और अभाव झेलने वाला पूर्वांचल दस साल से प्रधानमंत्री चुन रहा है। इसके लिए अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है। वह बहुत कुछ क्या है, बताना चाहेंगे?

जवाब : देखिए, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रति पिछली सरकारों का रवैया बहुत ही निराशाजनक रहा है। इन इलाकों से वोट लिए गए, अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं पूरी की गयीं पर जब विकास की बारी आई तो इन्हें पिछड़ा कहकर छोड़ दिया गया। पूर्वांचल में बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए लोगों को तरसाया गया। देश के 18000 गांवों में बिजली नहीं थी। इनमें पूर्वांचल और बिहार के बहुत से इलाके थे। जब मैंने बहनों-बेटियों की गरिमा के लिए टायलेट्स का निर्माण कराया तो बड़ी संख्या में उसका लाभ हमारे पूर्वांचल के लोगों को मिला।

आज हम इसी इलाके में विकास की गंगा बहा रहे हैं। एक्सप्रेसवे से लेकर ग्रामीण सड़क तक हम इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार रहे हैं, बदल रहे हैं। हम हेल्थ इंफ्रा भी बना रहे हैं। आज पूर्वांचल और बिहार दोनों ही जगह पर एम्स है। इसके अलावा हम इन इलाकों में मेडिकल कॉलेज का नेटवर्क बना रहे हैं। हम पुराने इंफ्रा को अपग्रेड भी कर रहे हैं। अब हम यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा दे रहे हैं। हमें आगे बढ़ना है, लेकिन हमारा बहुत सारा समय, संसाधन और ऊर्जा पिछले 60-70 वर्षों के गड्ढों को भरने में खर्च हो रही है। हम इसके लिए लगातार तेजी से काम कर रहे हैं। मैं वो दिन लाना चाहता हूं, जब शिक्षा और रोजगार के लिए इन इलाकों के युवाओं को पलायन ना करना पड़े। उनका मन हो तो चाहे जहां जाएं पर उनके सामने किसी तरह की मजबूरी ना हो।   

सवाल : गंगा निर्मलीकरण योजना के साथ ही वरुणा, असि और अन्य नदियों की सफाई की कितनी जरूरत मानते हैं आप?

जवाब : हमारे देश में नदियों की पूजा होती है। हमारी परंपराओं, संस्कारों में प्रकृति का महत्व स्थापित किया गया है। इसके बावजूद नदियों की साफ-सफाई को लेकर सरकार और समाज में उदासीनता बनी रही। ये बड़े दुर्भाग्य की बात है कि दशकों तक देश की सरकारों ने नदियों को एक डंपिंग ग्राउंड की तरह इस्तेमाल किया। नदियों की स्वच्छता को लेकर कोई जागरुकता अभियान चलाने का प्रयास नहीं हुआ।

गंगा, वरुणा, असि समेत देश की सभी नदियों को स्वच्छ बनाने और उनकी सेहत को बेहतर करने के प्रयास जारी हैं। मैंने बहुत पहले नदियों के एक्वेटिक इकोसिस्टम को बदलने की जरूरत बताई थी। आज देश नदियों की स्वच्छता को लेकर गंभीर है। वाटर मैनेजमेंट, सीवेज मैनेजमेंट और नदियों का प्रदूषण कम करने के लिए लोग भी अपना योगदान देने को तैयार हैं। इस दिशा में जन भागीदारी से हमें अच्छे परिणाम मिलेंगे।

सवाल : 2014 में जब आपके पास देश के अलग-अलग हिस्सों से चुनाव लड़ने के प्रस्ताव आ रहे थे, तब आपने काशी को क्यों चुना?

जवाब : मैं मानता हूं कि मैंने काशी को नहीं चुना, काशी ने मुझे चुना है। पहली बार वाराणसी से चुनाव लड़ने का जो निर्णय हुआ था, वो तो पार्टी ने तय किया था। मैंने पार्टी के एक सिपाही के तौर पर उसका पालन किया, लेकिन जब मैं काशी आया तो मुझे लगा कि इसमें नियति भी शामिल है। काशी उद्देश्यों को पूरा करने की भूमि है। अहिल्या बाई होल्कर ने बाबा का भव्य धाम बनाने का संकल्प पूरा करने के लिए काशी को चुना था। मोक्ष का तीर्थ बनाने के लिए महादेव ने काशी को चुना। इस नगरी में तुलसीदास राम का चरित लिखने का उद्देश्य लेकर पहुंचे। महामना यहां सर्वविद्या की राजधानी बनाने आए। शंकराचार्य ने काशी को शास्त्रार्थ के लिए चुना। इन सबकी तपस्या से प्रेरणा लेकर और इनके आशीर्वाद से काशी की सेवा के काम को आगे बढ़ा रहा हूं।

मुझे काशी में जिस तरह की अनुभूति हुई, वो अभूतपूर्व है। इसी वजह से जब मैं यहां आया तो मैंने कहा कि मुझे मां गंगा ने बुलाया है, अब तो मैं ये भी कहता हूं कि मां गंगा ने मुझे गोद ले लिया है। वाराणसी में मुझे बहुत स्नेह मिला। काशीवासियों ने एक भाई, एक बेटे की तरह मुझे अपनाया है। शायद काशीवासियों को मुझमें उनके जैसे कुछ गुण दिखे हों। जो स्नेह और अपनापन मुझे यहां मिला है, उसे मैं विकास के रूप में लौटाना चाहता हूं और लौटा रहा हूं।

दूसरी बात, काशी पूरे देश और दुनिया की सांस्कृतिक राजधानी है। हजारों सदियों से यहां पूरे भारत से लोग आते रहे हैं। यहां के लोगों का हृदय इतना विशाल है कि जो भी यहां आता है, लोग उसे अपना लेते हैं। काशी में ही आपको एक लघु भारत मिल जाएगा। देश के अलग-अलग क्षेत्रों से यहां आकर बसे लोग काशी को निखार रहे हैं, संवार रहे हैं। वो अभी भी अपनी जड़ों से जुडे़ हैं, लेकिन दिल से बनारसी बन गये हैं। कोई कहीं से भी आए, काशी के लोग उसे बनारसी बना देते हैं। काशी और काशीवासियों ने मुझे भी अपना लिया है।
 
सवाल : हरित काशी और इको फ्रेंडली काशी के लिए आपकी क्या सोच है?

जवाब :  जब काशी के पूरे वातावरण और पर्यावरण की चर्चा होती है तो उसमें गंगा नदी की स्वच्छता एक महत्वपूर्ण बिंदु होता है। आज गंगा मां कितनी निर्मल हैं, उसमें कितने जल जीवन फल-फूल रहे हैं, ये परिवर्तन सबको दिखने लगा है। गंगा की सेहत सुधर रही है ये बहुत महत्वपूर्ण आयाम है।

हम गंगा एक्शन प्लान फेज-2 के तहत सीवर लाइन बिछाने का काम कर रहे हैं। इसके अलावा 3 सीवेज पंपिंग स्टेशनों और दीनापुर 140 एमएलजी के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण हुआ है। पुरानी ट्रंक लाइन का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। कोनिया पंपिंग स्टेशन, भगवानपुर एसटीपी, पांच घाटों का पुनर्रुद्धार किया गया है। ट्रांस वरुणा सीवेज योजना पर भी तेजी से काम चल रहा है। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत रमना में एसटीपी का निर्माण, रामनगर में इंटरसेप्शन, डायवर्जन और एसटीपी का निर्माण हुआ है। इस तरह की रिपोर्ट भी बहुत बार आ चुकी है कि गंगा में एक्वेटिक लाइफ सुधर रही है। गैंगटिक डॉल्फिन फिर से दिखनी शुरू हो गई हैं और उनकी संख्या बढ़ी है। इसका मतलब है कि मां गंगा साफ हो रही हैं। यहां पर सोलर पावर बोट्स देने का अभियान भी हम तेजी से चला रहे हैं। इससे पर्यावरण बेहतर होगा।

हमारी सरकार ने प्रकृति के साथ प्रगति का मॉडल दुनिया के सामने रखा है। हम क्लीन एनर्जी पर काम कर हैं, हम कार्बन इमिशन को लेकर अपने लक्ष्यों से आगे हैं, हम सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ काम कर रहे हैं। हमारी सरकार में देश में ग्रीन प्लांटेशन और वनों की संख्या बढ़ी है। काशी में भी हरियाली बढ़ाने के सभी प्रयास किए जा रहे हैं।
 
सवाल : काशी समेत पूरे पूर्वांचल के हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?

जवाब : आजादी के बाद पूर्वांचल को पिछड़ा बताकर सरकारों ने इससे पल्ला झाड़ लिया था। हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई काम नहीं हुआ था। स्वास्थ्य सेवाओं को बदहाल बनाकर रखा गया था। यहां पर किसी को गंभीर समस्या होती थी तो लोग लखनऊ या दिल्ली भागते थे। हमने पूर्वांचल की स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया। पिछले 10 साल में पूर्वांचल के हेल्थ इंफ्रा के लिए जितना काम हुआ है, उतना आजादी के बाद कभी नहीं हुआ। आज पूरे पूर्वांचल में दर्जनों मेडिकल कॉलेज हैं। जब मैं काशी आया तो मैंने देखा कि ये पूरे पूर्वांचल के लिए स्वास्थ्य का बड़ा हब बन सकता है। हमने काशी की क्षमताओं का विस्तार किया। आज बहुत से मरीज हैं जो पूरे यूपी, बिहार से काशी में आकर अपना इलाज करा रहे हैं। कैंसर के इलाज के लिए पहले यूपी के लोग दिल्ली, मुंबई भागते थे। आज वाराणसी में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर सेंटर है। लहरतारा में होमी भाभा कैंसर अस्पताल चल रहा है। बीएचयू में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल है।

150 बेड का क्रिटिकल केयर यूनिट बन रहा है। पांडेयपुर में सुपर स्पेशियलिटी ईएसआईसी हॉस्पिटल सेवा दे रहा है। बीएचयू में अलग से 100 बेड वाला मैटरनिटी विंग बन गया है। इसके अलावा भदरासी में इंटीग्रेटेड आयुष हॉस्पिटल, सारनाथ में सीएचसी का निर्माण हुआ है। अन्य सीएचसी में बेड की संख्या और ऑक्सीजन सपोर्ट बेड की संख्या बढ़ाई गई है। कबीर चौरा में जिला महिला चिकित्सालय में नया मैटरनिटी विंग, बीएचयू में मानसिक बीमारियों के लिए मनोरोग अस्पताल बनाए गये हैं। नवजातों की देखभाल, मोतियाबिंद ऑपरेशन जैसे तमाम काम किए जा रहे हैं।

हमारी कोशिश है कि एक होलिस्टिक सोच से हम लोगों को बीमारियों से बचा सकें और अगर उनको बीमारियां हों तो उनका खर्च कम से कम हो। इसी सोच के तहत यहां वाराणसी में करीब 10 लाख लोगों को आयुष्मान कार्ड बनाकर दिए जा रहे हैं। इस कार्यकाल में हम 70 साल से ऊपर से सभी बुजुर्गों को आयुष्मान भारत के सुरक्षा घेरे में लाने जा रहे हैं, जिससे हर साल 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज हो सकेगा।

पहले अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं को लग्जरी बनाकर रख दिया गया था। हम स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ, सस्ता और गरीबों की पहुंच में लाना चाहते हैं। स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ हों, इसके लिए हम ज्यादा से ज्यादा संस्थान बना रहे हैं। वर्तमान संस्थानों की क्षमता बढ़ा रहे हैं। इसके साथ जन औषधि केंद्र से लोगों को सस्ती दवाएं मिलने लगी हैं। हमारी सरकार ने ऑपरेशन के उपकरण सस्ते किए हैं। हम आयुष को बढ़ावा दे रहे हैं, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं हर व्यक्ति की पहुंच में हों।

सवाल : पहली बार शहर के प्रमुख और प्रबुद्ध जनों को आपने पत्र लिखा है। वे इस पत्र को लेकर आम लोगों तक जा रहे हैं। इस पत्र का उद्देश्य और लक्ष्य क्या है?

जवाब : काशी के सांसद के तौर पर मेरा ये प्रयास रहता है कि बनारस में समाज के हर वर्ग की पहुंच मुझ तक हो और मैं उनके प्रति जबावदेह रहूं। ये आज की बात नहीं है, मैंने पहले भी इस तरह के प्रयास किए हैं। लोगों से जुड़ने के लिए मैंने सम्मेलनों का आयोजन किया है। 2022 में मैंने प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन किया, उससे पहले भी मैं काशी के विद्वानों और प्रबुद्ध लोगों से मिला हूं। मैंने महिला सम्मेलन किया है, मैं बुनकरों से मिला हूं। मैंने बच्चों से मुलाकात की। गोपालकों, स्वयं सहायता समूह की बहनों से भी मिल चुका हूं। मैं हर समय कोशिश करता हूं कि वाराणसी में समाज के हर वर्ग के लोगों से जुड़ सकूं। आज आप जिस पत्र की बात कर रहे हैं वो वाराणसी के लोगों से जुड़ने का, संवाद का ऐसा ही एक प्रयास है। दूसरा, ये लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बहुत जरूरी है कि समाज के प्रमुख और प्रबुद्ध लोगों के माध्यम से जन-जन तक लोकतंत्र में भागीदारी का संदेश पहुंचे। काशी के विकास के संबंध में संदेश जाए। जब ऐसा संदेश जाता है कि काशी के विकास के लिए वोट करना है, तो इससे लोकतंत्र समृद्ध होता है। इससे लोग मतदान के प्रति, संवैधानिक व्यवस्था के प्रति अपनी जिम्मेदारी महसूस करते हैं।

Following is the clipping of the interview:

Source: Hindustan

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Excellencies, Honourable Ministers, Industry Leaders, Innovators, Entrepreneurs, Researchers, डेलिगेट्स, अन्य सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों! नमस्ते !

दुनिया की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक AI इंपैक्ट समिट में आप सभी का हार्दिक अभिनंदन है। ये समिट जिस भारत में हो रही है, वो भारत One sixth of humanity को रिप्रजेंट करता है। भारत, दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी का देश है, सबसे बड़े Tech talent pool का केंद्र है, सबसे बड़े tech-enabled eco-system का उदाहरण है। भारत नई टेक्नोलॉजी बनाता भी है, और उसे अभूतपूर्व तेजी से अपनाता भी है। नई टेक्नोलॉजी के प्रति उत्सुक 140 करोड़ भारतीयों की ओर से, मैं आप सभी Heads of Governments, Global AI eco-system के leaders और Innovators का इस समिट में स्वागत करता हूं, आपका आभार व्यक्त करता हूं।

इस समिट का भारत में होना, भारत के साथ ही पूरे ग्लोबल साउथ के लिए गर्व का विषय है। इस समिट में AI जगत के who’s who यहां पर मौजूद हैं। दुनिया के 100 से ज्यादा देशों का Representation, दुनिया के कोने-कोने से यहां आए महानुभाव, इसकी सफलता को नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं। इसमें Young Generation की जो उपस्थिति हमने देखी है, वो एक नया विश्वास पैदा करती है। आमतौर पर नई टेक्नोलॉजी को लेकर कुछ लोगों में, शुरुआती में संदेह होता है, लेकिन जिस तेजी और भरोसे के साथ दुनिया की युवा पीढ़ी AI को स्वीकार कर रही है, उसकी ownership ले रही है, AI का इस्तेमाल कर रही है, वो अभूतपूर्व है। यहां AI समिट की Exhibition को लेकर भी बहुत उत्साह रहा है। खासकर Young Talent बहुत बड़ी संख्या में आया है। एग्रीकल्चर, सिक्योरिटी, दिव्यांगजनों की मदद, मल्टी-लिंगुवल Population की तमाम जरूरतों से जुड़े, जो भी सॉल्यूशंस यहां प्रेजेंट किए गए हैं, वो इस फील्ड में ‘मेड इन इंडिया’ की ताकत और भारत की Innovative Capabilities का बहुत बड़ा उदाहरण हैं।

साथियों,

मानव इतिहास में हर कुछ शताब्दियों के बाद एक turning point आता है, और वो turning point सभ्यता की दिशा reset करता है, और वहीं से विकास की रफ्तार बदलती है, सोचने, समझने और काम करने के पैराडाइम्स बदलते हैं। और दिलचस्प बात यह है, जब हम transformation के उस दौर में होते हैं, तब उसके वास्तविक impact का अंदाज़ा भी नहीं होता। जब पत्थरों से पहली बार स्पार्क निकला, किसी ने नहीं सोचा था कि वही चिंगारी civilizational की foundation बनेगी। जब बोली को पहली बार लिपि में बदला गया, किसी ने नहीं जाना था कि written नॉलेज, future systems की back-bone बनेगी। जब पहली बार signals को wire-less ट्रांसमिट किया गया, किसी ने कल्पना नहीं की थी कि एक दिन पूरी दुनिया real-time में connect होगी।

साथियों,

Artificial Intelligence मानव इतिहास का ऐसा ही transformation है। आज जो हम देख रहे हैं, जो predict कर रहे हैं, वो इसके impact का सिर्फ प्रारंभिक संकेत है। AI मशीनों को intelligent बना रही है, लेकिन उससे भी अधिक, मानव सामर्थ्य को कई गुना बढ़ा रही है। अंतर सिर्फ एक है, इस बार speed भी अभूतपूर्व है और scale भी अप्रत्याशित है। पहले technology का impact दिखने में दशकों लगते थे, आज machine learning से learning machines तक का सफर तेज़ भी है, गहरा भी है, व्यापक भी है। इसलिए, हमें vision भी बड़ा रखना है और जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी निभानी है। वर्तमान पीढ़ी के साथ ही हमें इस बात की भी चिंता करनी है कि आने वाली पीढ़ियों के हाथों में हम AI का क्या स्वरूप सौंपकर जाएंगे। इसलिए, आज असली प्रश्न यह नहीं कि भविष्य में Artificial Intelligence क्या कर सकती है, प्रश्न यह है कि वर्तमान में हम Artificial Intelligence के साथ क्या करते हैं। ऐसे प्रश्न मानवता के सामने पहले भी आए हैं। सबसे सशक्त उदाहरण है nuclear power, हमने उसका destruction भी देखा है, और सकारात्मक contribution भी देखा है। AI भी एक transformative power है। दिशाहीन हुई तो disruption, सही दिशा मिली तो solution. AI को machine-centric से human-centric कैसे बनाएं, संवेदनशील और उत्तरदायी कैसे बनाएं, यही इस Global AI Impact Summit का मूल उद्देश्य है।

साथियों,

भारत AI को किस दृष्टि से देखता है, उसका स्पष्ट प्रतिबिंब इस समिट की थीम में है- सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय ! Welfare for all, Happiness of all. यही हमारा benchmark है। AI के लिए इंसान सिर्फ data point न बन जाए, इंसान सिर्फ raw material तक सीमित न रह जाए, इसलिए AI को डेमोक्रेटाइज करना होगा। इसे inclusion और empowerment का माध्यम बनाना होगा, और विशेष रूप से ग्लोबल साउथ में।

साथियों,

हमें AI को open sky भी देना है, और command भी अपने हाथ में रखना है। जैसे G.P.S. होता है, G.P.S. हमें रास्ता सुझाता है, लेकिन हमें किस डायरेक्शन में जाना है, इसकी फाइनल कॉल हमारी ही होती है। आज हम AI को जिस दिशा में लेकर जाएंगे, वैसा ही हमारा भविष्य तय होगा।

साथियों,

आज न्यू दिल्ली AI इंपैक्ट समिट में, मैं AI के लिए M.A.N.A.V,MANAV, मानव, मानव विजन प्रस्तुत करता हूँ। मानव का अर्थ होता है- ह्यूमन, और मानव विजन कहता है- M – Moral and Ethical Systems, यानि AI ethical guidelines पर आधारित हो। A – Accountable Governance, यानि Transparent Rules, रॉबस्ट ओवरसाइट। N – National सॉवरनिटी, यानि जिसका डेटा, उसका अधिकार। A – Accessible and Inclusive, यानि AI monopoly नहीं, multiplier बने। V – Valid and Legitimate, यानि AI lawful और वेरिफाय-एबल हो। भारत का ये ‘मानव’ विजन 21वीं सदी की AI आधारित दुनिया में, मानवता के कल्याण की अहम कड़ी बनेगा।

साथियों,

दशकों पहले जब इंटरनेट की शुरुआत हुई, तो कोई सोच भी नहीं पाता था कि इससे कितनी Jobs बनेंगी, यही बात AI में है। आज कल्पना करना मुश्किल है कि आने वाले समय इस फील्ड में किस तरह की Jobs पैदा होंगी। AI का Future of work प्रि-डिफाइन्ड नहीं है, ये हमारे निर्णय पर, हमारे कोर्स ऑफ़ एक्शन पर निर्भर होगा। मैं समझता हूं, हमारे लिए Future of work एक नई opportunity है। ये humans और intelligent systems के साथ मिलकर काम करने का युग है। “We are entering an era where humans and intelligent systems co-create, co-work, and co-evolve”. AI हमारे काम को और अधिक smart, efficient और impactful बनाएगा। हम बेहतर design करेंगे, तेज़ build करेंगे और बेहतर decisions ले सकेंगे। इससे और ज्यादा लोगों को higher-value, creative और meaningful roles भी मिलेंगे। ये innovation, entrepreneurship और new industries के लिए बड़ा मौका है। इसलिए, हमें skilling, reskilling और lifelong learning को mass movement बनाना होगा।

साथियों,

Future of work - inclusive, trusted और human-centric होगा। अगर हम मिलकर आगे बढ़ें, तो Artificial intelligence पूरी मानवता की क्षमता को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी।

साथियों,

कहा जाता है- Sunlight is the best disinfectant, यानी पारदर्शिता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। कुछ देश और कंपनियाँ मानती हैं कि AI एक “strategic asset” है, इसलिए इसे confidential तरीके से develop किया जाना चाहिए, लेकिन भारत की सोच अलग है। हम मानते हैं कि AI जैसी तकनीक तभी दुनिया के लिए लाभकारी होगी, जब उसे शेयर किया जाएगा, जब code Open होंगे और शेयर किए जाएंगे, तभी हमारे मिलियंस ऑफ यंग माइंड्स उन्हें बेहतर और सुरक्षित बना पाएंगे। इसलिए, आइए हम ये संकल्प लें कि AI को Global Common Good के रूप में विकसित किया जाएगा।

साथियों,

आज की एक बहुत बड़ी आवश्यकता global standards बनाने की भी है। Deep-fakes और फैब्रिकेटेड कॉन्टेंट, open societies में अस्थिरता ला रहे हैं। Physical world में हम food पर न्यूट्रीशन लेबल्स देखते हैं, ताकि हमें पता हो कि हम क्या खा रहे हैं। ठीक उसी तरह, digital world में content पर भी ऑथेन्टिसिटी लेबल्स होने चाहिए, ताकि लोगों को पता हो कि क्या असली है और क्या AI से बनाया गया है। जैसे-जैसे AI ज़्यादा text, images और videos बना रहा है, वैसे-वैसे इंडस्ट्री में Water-marking और Clear source standards की ज़रूरत बढ़ती जा रही है। इसीलिए, ये जरूरी है कि ये विश्वास टेक्नोलॉजी में शुरू से built-in हो।

साथियों,

हमें children safety के प्रति और अधिक सजग होना होगा। जैसे स्कूल का syllabus क्यूरेटेड होता है, वैसे ही AI space भी child-safe और family-guided होना चाहिए।

Friends,

आज दुनिया में दो तरह के लोग हैं, एक जिन्हें AI में भय दिखता है, वो हमेशा वैसी ही बात करते हैं, ऐसे लोग जिन्हें AI में भय दिखता है, औऱ दूसरे वो जिन्हें AI में भाग्य दिखता है।

और साथियों,

मैं जिम्मेवारी के साथ कहता हूं, गर्व के साथ कहता हूं, हमें भय नहीं, भारत को AI में भाग्य दिखता है, भारत को AI में भविष्य दिखता है। हमारे पास talent भी है, energy capacity भी है और policy clarity भी है। और मुझे आपको ये बताते हुए खुशी है कि इस समिट में 3 भारतीय कंपनियों ने अपने AI मॉडल्स और Apps लॉन्च किए हैं। ये मॉडल्स, हमारे Youth के टैलेंट को दिखाते हैं और भारत जो सॉल्यूशंस दे रहा है, उसकी depth और diversity का भी प्रतिबिंब है।

साथियों

भारत semi-conductor और chip making से लेकर क्वांटम कंप्यूटिंग तक एक रिजिलिएंट eco-system बना रहा है। Secure डेटा सेंटर्स, मजबूत IT back-bone, डायनामिक startup eco-system, भारत को affordable, scalable और secure AI solutions का natural hub बनाते हैं। भारत के पास diversity भी है, demography भी है और democracy भी है। जो AI model भारत में सक्सीड करता है, वो globally डिप्लॉय हो सकता है। इसलिए, मैं आप सभी को आमंत्रित करता हूँ - Design and Develop in India. Deliver to the World. Deliver to Humanity. एक बार फिर आप सभी को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।

Thank You !

धन्यवाद !