एक तरफ श्री अमरनाथ यात्रा चल रही है, बड़ा पवि‍त्र माहौल है दूसरी तरफ रमजान का पवि‍त्र महीना चल रहा है और तीसरी तरफ आज माता वैष्‍णों देवी के चरणों में भारत भर से भक्‍तों को लाने की सुवि‍धा प्रदान करने का एक मंगल प्रारंभ हो रहा है। एक प्रकार से सब ओरएक पवि‍त्रता का माहौल हैऔर पवि‍त्रता के माहौल में इस मंगल कार्य का आरंभ हो रहा है। प्रदेश के माता वैष्‍णों देवी के चरणों में आने वाले करोड़ों-करोड़ों भक्‍तों को शुभकामनाएं देता हूँ और आज ये सुवि‍धा सि‍र्फ जम्‍मू-कश्‍मीर के लि‍ए सुवि‍धा नहीं है और न ही यह सि‍र्फ जम्‍मू-कश्‍मीर को भेंट है, यह भेंट पूरे हि‍न्‍दुस्‍तान को है,सवा सौ करोड़ देशवासि‍यों को है जो जम्‍मू-कश्‍मीर आने के लि‍ए लालायि‍त रहते हैं, जो माता वैष्‍णों देवी के चरणों में आने के लि‍ए आतुर रहते हैं। ऐसे कोटि-कोटि‍जनों के लि‍ए ये सुवि‍धा है और उनके चरणों में ये समर्पि‍त करते हुए मैं गर्व महसूस कर रहा हूँ और उनको मंगल कामनाएं देता हूँ। ये रेल सुवि‍धा आज प्रारंभ हो रही है। 

मैंने रेल मंत्री को सुझाया था कि‍दि‍ल्‍ली से कटरा तक की जो सुवि‍धा है और आगे चलकर और स्‍थानों से भी जुड़करकेदेश के भि‍न्‍न-भि‍न्‍न कोने से यात्रि‍यों को कटरा तक लाने का जो प्रबंध हो रहा है। इस ट्रेन को “श्री शक्‍ति‍एक्‍सप्रेस” के रूप में जाना जाए ताकि‍माता वैष्‍णों देवी के चरणों में हम जा रहे हैं इसकी अनुभूति‍यात्रि‍यों को लगातार होती रहे। मैं ‘माता वैष्‍णों देवी श्राइन बोर्ड’ का भी अभि‍नंदन करना चाहता हूँ। गवर्नर साहब का भी अभि‍नंदन करना चाहता हूँ कि‍यहां रेलवे स्‍टेशन पर भी यात्रि‍यों के लि‍ए आवश्‍यक आई-कार्ड नि‍कालने की सुवि‍धाओं का प्रबंध हुआ है। टैक्‍नोलॉजी का प्रबंध हुआ है और इसीलि‍ए हि‍न्‍दुस्‍तान के कि‍सी भी कोने से आने वाले यात्री के लि‍ए ये बहुत सुनि‍श्‍चि‍त हो जाएगा कि‍यात्री का समय न खराब होते हुए उसके आगे की यात्रा के लि‍ए जो भी प्रबंध होना चाहि‍ए उसके लि‍ए पूरी व्‍यवस्‍था मि‍लेगी, पूरा मार्गदर्शन मि‍लेगा। 

जब वि‍कास होता है तो कभी-कभार ऐसा लगता है कि‍वहां पर ये हुआ तो मेरा क्‍या होगा जैसे मुख्‍यमंत्री जी ने जम्‍मू के लोगों की चिंता का जि‍क्र कि‍या। मैं अनुभव से कह सकता हूँ कि‍जम्‍मू के वि‍कास को कभी कोई रूकावट नहीं आएगी। जब सुवि‍धाएं बढ़ती है तो लोग भी अपने समय का सदुपयोग और जगह पर जाने के लि‍ए करते हैं और इसीलि‍ए जो सीधा कटरा आएगा वो जम्‍मू गए बि‍ना जाएगा नहीं ऐसा मैं नहीं मानता और इसलि‍ए जम्‍मू की वि‍कास यात्रा और अधि‍क क्‍वालि‍टी की बन पाएगी, ऐसा मेरा पूरा वि‍श्‍वास है और साथ-साथ जम्‍मू-कश्‍मीर की वि‍कास यात्रा में कटरा का जुड़ना, कटरा का सेंटर स्‍टेज पर आना, आने वाले 10 साल की आप कल्‍पना कीजि‍ए कटरा इतनी तेजी से वि‍कास करेगा, इतनी तेजी से वि‍कास करेगा जो पूरे जम्‍मू-कश्‍मीर के वि‍कास के अंदर एक नया योगदान करने वाला एक आर्थि‍क प्रभुत्‍ति‍का केन्‍द्र बन जाएगा। जब व्‍यवस्‍था वि‍कसि‍त होती है और वि‍कास के केन्‍द्र बिंदु में हमेशा इनफ्रास्‍ट्रक्‍चर का सबसे बड़ा महत्‍व होता है। जैसे ही इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर बना आप मानके चलि‍ए कि‍उसके अगल-बगल में व्‍यवस्‍थाएं वि‍कसि‍त होना शुरू हो जाएगी। मुझे अभी बताया जा रहा था कि‍ट्रेन तो अभी आज शुरू हो रही है लेकि‍न स्‍टेशन के अगल-बगल व्‍यापारि‍यों ने अपनी-अपनी जगह बना ली है और काम शुरू कर दि‍या है। अगर उनको समय दे कि‍वि‍कास के अंदर कैसे फायदा उठाना, वि‍कास को कैसे भागीदार बनाना है और इसलि‍ए ये सि‍र्फ एक रेलवे है, एक यात्रा करने की सुवि‍धा है ऐसा नहीं है। 

ये एक प्रकार से वि‍कास की जननी बन जाती है और मेरे हि‍साब से जम्‍मू-कश्‍मीर को रेल से जोड़ने का अटल बि‍हारी वाजपेयी जी ने जो शुभारंभ कि‍या है उसको हमें और आगे बढ़ाना है और आने वाले दि‍नों में बनि‍हाल तक जाने की जो व्‍यवस्‍था है उसको भी आगे बढ़ाने के लि‍ए सरकार प्रति‍बद्ध है। इतना ही नहीं, हि‍न्‍दुस्‍तान में पहली बार राज्‍य और केन्‍द्र मि‍ल करके एक नवीन व्‍यवस्‍था को आज प्रारंभ कर रहे हैं। एक प्रकार से हाइब्रि‍ड व्‍यवस्‍था है। रेल और बस की कनेक्‍टि‍वि‍टी को कॉम्‍बि‍नेशन बनाया गया है। अब जो लोग श्रीनगर जाना चाहते होंगे उनको रेलवे से ही रेलवे की भी टि‍कट मि‍लेगी और कटरा से बनि‍हाल तक जो कि‍जहां रेल-मार्ग नहीं है वहां बस की भी टि‍कट मि‍लेगी, कटरा वो उतरेगा, बस उपलब्‍ध होगी, बनि‍हाल पहुंचेगा, रेल उपलब्‍ध होगी और तुरंत वो आगे श्रीनगर पहुंचेगा। एक ही टि‍कट में रेल और बस दोनों का ट्रेवलिंग हो और पैसेंजर को कठि‍नाई न हो, यात्री को कठि‍नाई न हो ऐसी सुवि‍धा का आरंभ राज्‍य और केन्‍द्र की रेल मि‍ल करके ये दे रहे हैं और भवि‍ष्‍य में भी रेलवे का वि‍कास करने के लि‍ए केन्‍द्र और राज्‍य की पार्टनरशि‍प का मॉडल जि‍तना ज्यादा वि‍कसि‍त होगा उतना फायदा होने वाला है। 

मैं मुख्‍यमंत्री जी की इस बात से सहमत हूँ कि‍हमारे रेलवे स्‍टेशन ऐसे पुराने क्‍या होने की जरूरत है,क्‍यों न हि‍न्‍दुस्‍तान के महत्‍वपूर्ण स्‍थानों के रेलवे स्‍टेशन एयरपोर्ट से भी बढ़ि‍या क्‍यों न हो और मैं आपको वि‍श्‍वास दि‍लाता हूँ,‍सि‍र्फ जम्‍मू वासि‍यों को नहीं, मैं देशवासि‍यों को वि‍श्‍वास दि‍लाता हूँ कि‍हम रेलवे के वि‍कास में, प्राथमि‍कता मेट्रो सि‍टीज़ में जम्‍मू जैसे महत्‍वपूर्ण स्‍टेशन को और उसके जैसे रेलवे स्‍टेशनों को अति‍आधुनि‍क बनाना, एयरपोर्ट से भी रेलवे स्‍टेशन ज्‍यादा अधि‍क सुवि‍धाजनक हो, ये बनाने का हमारा सपना है और ये बन सकता है। ये कोई कठि‍न काम नहीं है और ये इकनॉमि‍कली वाइबल प्रोजेक्‍ट बन सकता है। मैंने पि‍छले दि‍नों रेलवे के मि‍त्रों के साथ बड़े वि‍स्‍तार से समय नि‍कालकर चर्चा की है और मैंने इसके वि‍षय पर उनको डि‍टेल में प्रारूप दि‍या है और अब देखि‍ए देखते ही देखते आपको बदलाव नजर आएगा और इसमें प्राइवेट पार्टी भी इनवेस्‍टमेंट करने के लि‍ए तैयार हो जाएगी क्‍योंकि‍ये आर्थि‍क रूप से एक अच्‍छी योजना होगी। जो सबको लाभ पहुंचाने वाली होगी एक विन-वि‍न सि‍चुएशन वाला प्रोजेक्‍ट होगा। उस दि‍शा में हम आने वाले दि‍नों में जरूर आगे बढ़ना चाहते हैं, आज जब हम इस रेल सुवि‍धा को दे रहे हैं यह भी मेरे लि‍ए अत्‍यंत खुशी की बात है। भारत के वि‍भि‍न्‍न राज्‍यों से कटरा तक छह जोड़ी रेल गाड़ि‍याँ तुरंत चलाई जाएगी। यानि उसका वि‍स्‍तार और जगहों पर भी किया जाएगा। उसके अति‍रि‍क्‍त जम्‍मू और उधमपुर तक चलने वाली तीनजोड़ी डेमू रेलगाड़ि‍यों का कटरा तक, आज से वि‍स्‍तार भी कि‍या जा रहा है। जो जम्‍मू से चलने वाली उधमपुर वाली जो डेमू ट्रेन्‍स है उसको भी कटरा से जोड़ने का काम हो रहा है। 

आने वाले दि‍नों में जम्‍मू-कश्‍मीर में वि‍कास एक नयी ताकत कैसे बनेगी, देखि‍ए आज का दि‍न एक प्रकारसे महत्‍वपूर्ण है। महत्‍वपूर्ण इसलि‍ए है कि‍आज का दि‍वस जम्‍मू कश्‍मीर को नयी गति‍भी देने जा रहा है और आज का दि‍न जम्‍मू कश्‍मीर को नयी ऊर्जा भी देने जा रहा है। आज मुझे दो कार्यक्रम करने का अवसर मि‍ला है एक इस रेल कनेक्‍टि‍वि‍टी, जो जम्‍मू कश्‍मीर को गति‍देगा और उरी में जा करके पावर प्रोजेक्‍ट का उद्घाटन जो जम्‍मू कश्‍मीर को ऊर्जा देगा, वि‍कास की ऊर्जा देगा और जम्‍मू कश्‍मीर को वि‍कास की ऊर्जा चाहि‍ए, जम्मू कश्‍मीर को वि‍कास की गति‍चाहि‍ए और एक प्रकार से आज के ये दोनों कार्यक्रम उस नि‍मि‍त्‍त बड़े महत्‍वपूर्ण हैं। 

मैं मानता हूँ कि‍हमारे देश के जो हि‍मालयन स्‍टेट्स हैं, उन हि‍मालयन् स्‍टेट्स के वि‍कास के लि‍ए एक अलग से रूप-रेखा की आवश्‍यकता है। सारे हि‍मालयन् रेजिंग स्‍टेटस की कई एक समान कठि‍नाइयां है कई प्रकार की एक समान अवसर भी हैं अगर उनका एक कॉमन मॉडल वि‍कसि‍त कि‍या जाएगा तो समस्‍याओं का समाधान भी बहुत जल्‍दी होगा। केंद्र के पास भी स्‍पष्‍ट वि‍ज़न होगा। राज्‍यों की अपेक्षाओं को समझने में केन्‍द्र सामर्थ बनेगा और हि‍मालयन स्‍टेट्स जो है उसके वि‍कास में इस नयी परि‍धि‍में हम जाना चाहते हैं और जि‍सका लाभ जम्‍मू कश्‍मीर को भी मि‍लेगा और उधर नार्थ-ईस्‍ट तक हि‍मालयन रेंज की वि‍कास की यात्रा का लाभ उन सभी राज्‍यों को मि‍लेगा और उस दि‍शा में भी हम आगे बढ़ने के लि‍ए प्रति‍बद्ध हैं। आज मैं जम्‍मू कश्‍मीर की धरती पर आया हूँ माता वैष्‍णोदेवी के चरणों में आया हूँ और जब चुनाव अभि‍यान प्रारंभ कि‍या था तब भी माता वैष्‍णोदेवी का आशीर्वाद ले करके गया था और आज वि‍कास यात्रा का आरंभ कर रहा हूँ वो भी माता वैष्‍णोदेवी के आशीर्वाद से कर रहा हूँ और इसलि‍ए मुझे वि‍श्‍वास है कि‍भारत की वि‍कास यात्रा को और अधि‍क शक्‍ति‍मि‍लेगी, और अधि‍क ताकत मि‍लेगी और अधि‍क सामर्थ्‍यवान वि‍स्‍तार के साथ हम इस वि‍कास यात्रा को आगे बढ़ाएंगे। 

टूरि‍ज्म में यात्रि‍यों की सुवि‍धा के साथ रेलवे एक प्रकार से Environment Friendly व्‍यवस्‍था होती है और जम्‍मू-कश्‍मीर में Environment Friendly Transportation, वो दुनि‍या को आकर्षि‍त करने का कारण बनता है। हम इस मार्ग के माध्‍यम से वि‍श्‍व के अंदर जम्‍मू-कश्‍मीर में Environment Friendly यातायात को भी बल दे रहे हैं यह अपने आप में एक अच्‍छे प्रयोग के रूप में हम दुनि‍या के सामने प्रस्‍तुत कर सकते हैं। 

और हिमालयन में जितना विकास हम करना चाहेंगे, वो Environment Friendly विकास हो सकता है। उसको हम बल भी दे सकते है, उसकी सुरक्षा करते हुए यात्रियों की सुविधा भी बढ़ा सकते हैं, Environment की सुरक्षा भी हो, यात्रियों की सुविधा भी बढ़े, उस दिशा में हम प्रयास करते हैं, मैं जब यहां रेलवे स्‍टेशन का उद्घाटन करने गया, वहां का जो मैंने द़श्‍य ऐसा, ऐसा रेलवे स्‍टेशन देखने को मिलता बहुत कम है, क्‍योंकि ऊपर पहाड़ से नीचे स्‍टेशन पर जाना होता है, तो छोटी पहाड़ी पर से पूरा स्‍टेशन दिख रहा है, तो कितना बड़ा तामझाम है उसका दर्शन होता है। मैंने तुरंत कहा-हिंदुस्‍तान का ये ऐसा रेलवे स्‍टेशन बन सकता है कि जिसको पूरा हम सोलर रेलवे स्‍टेशन के रूप में कनवर्ट कर सकते हैं। इतनी संभावनाएं पड़ी है। रेलवे चेयमैन ने मुझे कहा मैं साहब, तुरंत इस काम को हाथ में लूंगा और मैं कटरा का पूरा रेलवे स्‍टेशन, देश का एक रेलवे स्‍टेशन, Environment Friendly Movement का एक हिस्‍सा... और बहुत संभावना पड़ी है, उसको जब करेंगे तो जब यात्री आएंगे और ऊपर स्‍टेशन पे जब जाते होंगे तो उसको देखकर कोर्ठ भी जान लेगा कि सोलर एा उपयोग कैसे और कहां हो सकता है और मुझे विश्‍वास है कि बहुत जल्‍दी रेलवे विभाग पूरे रेलवे स्‍टेशन पर सोलर पैनल का उपयोग करके एक-एक इंच की जगह का उपयोग कर करके उस ऊर्जा का भी उपयोग आने वाले दि‍नों में कैसे कर सके उस पर प्रयास होगाऔर ऐसा मुझे पूरा वि‍श्‍वास है। 

जम्‍मू-कश्‍मीर अनेक समस्‍याओं से गुजरा है, अनेक कठि‍नाईयों से गुजरा है और एक भारत के हर नागरि‍क की इच्‍छा है, भारत के हर नागरि‍क का दायि‍त्‍व है कि‍हमारा जम्‍मू-कश्‍मीर सुखी हो, समृद्ध हो। हर एक की इच्‍छा है और इसको पूरा करना हम सबका दायि‍त्‍व है। चाहे हम शासन व्‍यवस्‍था में हो तो भी, हम शासन व्‍यवस्‍था में न हो तो भी। यह हम सबका दायि‍त्‍व है। यहां के नौजवानों को रोजगार मि‍ले, रोजगार के नए अवसर मि‍ले। उनको नई जिंदगी जीने का अवसर मि‍ले। मैं अभी जब कटरा स्‍टेशन पर बच्‍चे ट्रेन में जा रहे थे तो उनको मैंने पूछा कि‍आपमें से कि‍तने लोग है जि‍न्‍होंने पहले कभी ट्रेन देखी है, कि‍तने है जो ट्रेन में बैठे है। 21वीं सदी का पहला दशक चला गया उन बच्‍चों में 80 प्रसेंट बच्‍चों ने हाथ ऊपर कि‍या कि‍हमने पहली बार ट्रेन में बैठे है आज। उन बच्‍चों के लि‍ए आनंद का वि‍षय है। लेकि‍न हमारे लि‍ए सोचने का वि‍षय है कि‍हमवि‍कास यात्रा को कैसे चलाया कि कटरा, इतने निकट के भी बच्‍चों को जीवन में पहली बार रेल को देखने का 21वीं सदी आने के बाद अवसर मि‍ला है। हमारा दायि‍त्‍व बनता है कि‍हमारे देश के दूर-सूदूर कोने में बैठे हुए लोगों को भी वि‍कास का लाभ मि‍लना चाहिए। वि‍कास से प्राप्‍त सुवि‍धाएं सामान्‍य मानव तक पहुंचनी चाहिए, आखिरी छोर पर बैठे हुए मानव तक पहुंचनी चाहिए। हम लोगों का प्रयास यही है और मुझे विश्‍वास है देश की जनता ने जो आशीर्वाद दि‍ए हैं उस आर्शीवाद के बलबूते पर अंति‍म छोर पर बैठे हुए गरीब से गरीब व्‍यक्‍ति‍के कल्‍याण में ये वि‍कास की यात्रा आगे बढ़ेगी, वि‍कास के नए मार्ग स्‍थापि‍त होंगे और सामान्‍य व्‍यक्‍ति‍के जीवन को.. उसकी Quality of life में चेंज आएगा। 

उसकी आशा अपेक्षा के अनुकूल जीवन व्‍यवस्‍था विकसित हो, उस दिशा में हम प्रयास करेंगे। मैं जम्‍मू कश्‍मीर के नागरिकों को यही संदेश देना चाहता हूं, अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जिस यात्रा को प्रारंभ किया है, उस यात्रा को हम आगे बढ़ाना चाहते हैं और हमारा मकसद राजनीति‍क जय-पराजय वाला नहीं होता है। हमारा मकसद होता है जम्‍मू-कश्‍मीर के हर नागरि‍क का दि‍ल जीतना है और मैं जम्‍मू-कश्‍मीर के नागरि‍कों का दि‍ल जीतना यही मेरी प्राथमि‍कता है और यह प्राथमि‍कता उसी को वि‍कास के माध्‍यम से करना है यहां के लोगों के कल्‍याण के माध्‍यम से करना है। यहां के लोगों की भलाई के माध्‍यम से करना है और मुझे वि‍श्‍वास है इस स्‍वप्‍न को हम बहुत ही जल्‍द, बहुत तेजी गति‍से पूरा करते जाएंगे। इसी सद्भावना के साथ फि‍र एक बार यह श्री शक्‍ति‍एक्‍सप्रेस राष्‍ट्र को समर्पि‍त कर रहा हूँ। माता वैष्‍णों देवी के चरणों में आने वाले कोटि‍कोटि‍भक्‍तों को समर्पि‍त करता हूँ और जम्‍मू-कश्‍मीर के टूरि‍ज्‍म के वि‍कास के लि‍ए यह यात्रा अहम भूमि‍का अदा करेगी। जम्‍मू–कश्‍मीर के टूरि‍ज्‍म को बहुत बल मि‍लेगा। जम्‍मू-कश्‍मीर के वि‍कास को बहुत बल मि‍लेगा। इस शुभकामनाओं के साथ बहुत-बहुत धन्‍यवाद। 

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August 10, 2026

प्रधानमंत्री – मेरे यहां, मुझे यहां लगभग 12-13 साल हो गए इसी मकान में, अगर मैंने regularly और हर बार किसी को रिसिव किया है, किसी को मैं मिला हूं, तो खिलाड़ी हैं। पिछले 10-12 साल हो गए, आप लोगों के पुरुषार्थ के कारण, भारत को लगातार विजय दिलाने के आपके प्रयासों के कारण और उत्तरोत्तर सफलता में नई ऊंचाईयां पार करने की परंपरा के कारण, जो काम शायद हम स्कूलों में जाकर कहें कि नहीं नहीं भई खेलना चाहिए, ये करना चाहिए, वो काम स्कूलों में जाकर के हम कर सकते थे, उससे ज्यादा आपका मेडल उनको inspire करता है।

प्रधानमंत्री – तुमने मुझे वादा किया था पिछली बार कि तुम्हारी दोनों बेटियां खिलाड़ी बन जाएंगी?

खिलाड़ी - हाँ जी अभी वे उमर की छोटी हैं, अगले कॉमनवेल्थ में एक घर में तीन मेडल लाकर दिखाएंगी।

प्रधानमंत्री – पक्का।

खिलाड़ी – हाँ जी।

खिलाड़ी – जब मैं दौड़ रहा था, जब मेरा इवेंट था 29 को, तो उस दिन गुरुपूर्णिमा थी, तो उस दिन मेरे गुरू को मैंने एक गिफ्ट दे दिया।

प्रधानमंत्री – बड़ी शान बढ़ाई आपने। इतनी आंसू टपक रहे थे, मुझे लगता है कि आंसू के हर बूंद से जैसे गोल्ड मेडल टपक रहा है।

खिलाड़ी – मैं बहुत ज्यादा खुशी थी, इमोशनल भी थे उसी दिन, खुशी ज्यादा था और मैं इसलिए रोई थी कि मेरा पेरिस आलंपिक में मेरा 1 Kg में मेडल रह गई थी और एक प्लेयर्स की लाइफ में क्या क्या हमको फेस करना पड़ता है। तो ये 4 साल के अंदर में कितना क्या क्या कुछ मैंने फेस किया था, हर टाइम injury ही चल रहे थे और family problem, वो सब हो रहा था। तो बहुत मुश्किल से मैं ये 4 साल फेस किया था। तो वो सब जब पोडियम में जब मैं खड़ी थी सर और हमारी जो फ्लैग ऊपर जाते हैं और हमारे नेशनल एंथम जब बजते हैं तो सर हम रुक नहीं सकते सर, अपना आप आंसू निकलते हैं।

प्रधानमंत्री – बहुत बहुत बढ़िया

प्रधानमंत्री – आपके इस अचीवमेंट को सिर्फ आपका अचीवमेंट मानता हूं, ऐसा नहीं है, ये आपका विजय आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन जाता है।

खिलाड़ी – सब डर रहे थे हमसे कि इंडिया के साथ फाइट आ गई, अब तो हम पहली फाइट ही हार जायेंगे, हमारा मेडल भी नहीं आयेगा।

प्रधानमंत्री – यानी मान के चलते हैं।

खिलाड़ी – हाँ सर।

प्रधानमंत्री – क्या हुआ, वो restaurant वालों से झगड़ा कर रही थी?

खिलाड़ी – हम लोगों का जो इतना अच्छा परफॉर्मेंस था, लास्ट डे था और सब जीत के गए थे और पूरा इंडिया के लोग थे। तो थोड़ा सा मुझे बुरा लग रहा। तो मैंने उनको अच्छे से बोला रिक्वेस्ट किया था सर, फिर उन्होंने मान भी लिया, अभी चेंज भी हो गया सर।

प्रधानमंत्री – इस विजय की परिस्थिति खुशी, आनंद, अपने साथियों के साथ और गेम पूरे हो चुके हैं। तो हसी मजाक मस्ती का मूड ऐसे समय उस मैप पर नजर जाना और उसको रजिस्टर करना और तुरंत सिर्फ मेडल लेते समय देश खड़ा हो जाता है ऐसा नहीं, भीतर से देश का भाव मैं सच बताता हूँ ये वीडियो सामान्य नहीं है आपका, लंबे समय तक लोगों को याद रहेगा। ये बॉक्सिंग वालों से भी दुनिया के खिलाड़ी अब डरने लगे हैं।

खिलाड़ी – जरूर सर, पुरे सभी डरे हुए थे। एक के बाद एक गोल्ड मेडल गोल्ड मेडल आ रहे थे और मतलब पूरा लास्ट में ऐसे धमाका जैसा हो गया बिल्कुल। जिस तरीके से हम लोगों को सपोर्ट मिल रहा है, हमें बैक टू बैक कंपटीशन मिल रहा है वो एक बहुत बड़ी बात है और हमारे जितने भी यंग एथलीट है वो लोग सभी जैसे खेलो इंडिया स्कीम से आए हुए हैं और ये एक बहुत बड़ा changes ला रहा है पूरे स्पोर्ट्स में ही।

प्रधानमंत्री – अगर आप लोग खेलो इंडिया की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं और प्रतिष्ठा सिर्फ वहां जाकर के रिबिन काटने से नहीं होगी। आप वैसे ही खेलेंगे जैसे एक छोटा विद्यार्थी, एक छोटा नौजवान, छोटा खिलाड़ी खेलता है। यह बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन करेगा। क्योंकि अभी तो हमें बहुत आगे जाना है, बहुत मेडल लाना है। कारगिल विजय दिवस पर किसकी विजय हुई थी?

खिलाड़ी – उस दिन कारगिल डे था वैसे और जिस दिन मैंने पाकिस्तान के साथ फाइट किया था सर, वो उसी दिन का था। तो मैं एक इंडियन आर्मी से हूं, तो मैंने उस दिन मैं पहले से बहुत वो था कि सर पाकिस्तान को हराना है। तो मैंने वो पाकिस्तान एक तरफ मैंने 5-0 से हराया, तो मैंने हमारा इंडियन आर्मी का कारगिल हीरोज़ को मैंने डेडिकेट किया किया था सर।

प्रधानमंत्री – आपको यह याद रहना और आप स्वयं फौज से हैं तो, मैं जरूर मानता हूं कि देश के वीर जवानों को आपने जो भाव प्रकट किया ना कि, मैं कारगिल के विजेताओं को मेरा मेडल समर्पित करता हूं। उसने उस विजय पर चार चांद लगा दिए और जिसको पराजित करना था उसी को किया आपने।

खिलाड़ी – वो पाकिस्तान की बात चल रही है, मुझे किस्सा याद आ गया सर। 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे और मेरी पाकिस्तान के साथ पहली फाइट आ गई थी और वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे तो मिलिट्री वाले के फोन आए कि भई पाकिस्तान से नहीं हारना है। तो फिर मैं फर्स्ट राउंड 4-1 से जीत गया। सेकंड राउंड 3-2 से जीत गया, पर दोनों के सर लग गए आपस में, तो दोनों के लग गए कट और फाइट तो मैं जीत गया।

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – उसके बाद फिर दोनों चले गए हॉस्पिटल में टांके लगवाने के लिए। फिर 2014 में आप फर्स्ट टाइम प्रधानमंत्री जी बने थे और जो हमारे साथ आर्मी का कोच गया हुआ था उसका नाम नरेंद्र राणा था और फिर वो कई देर तक सोच के मेरे को बोला कि भाईजान एक बात बोलूं, मैं हां बोलो, बोला भाईजान आपका नाम नरेंद्र है। आपके कोच का नाम नरेंद्र है, आपके प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र है, तो मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है।

प्रधानमंत्री – सिर्फ आपने मेडल की संख्या बढ़ाई ऐसा नहीं है। आपने एक पीढ़ी को तैयार किया।

खिलाड़ी – मेरे मन में भी धक-धक धक-धक हो रहा है सर।

प्रधानमंत्री – आप चिंता मत कीजिए।

खिलाड़ी – पर..

प्रधानमंत्री – आप चाहें तो आपको बोलने में भी मेडल मिलने वाला है।

खिलाड़ी – मेरे फ्रेंड सर्कल में किसी ने बोला था कि मैं उनको कुछ बोलती थी भई तुम्हारे अच्छे के लिए तुम करो। तो अक्सर मुझे वो बोलते थे कि तू के मोदी ते मिल रही है?

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – हरियाणवी में बोल देते हैं सर कि क्या तू मोदी से मिली हुई है, कि तेरी बात माने। तो आज मैं आपसे मिली हूं सर। मैं उनको बोल पाऊंगी कि हां मैं मोदी जी से मिली हूं।

खिलाड़ी – कॉमनवेंल्थ गेम्स में मैंने सिल्वर मेडल जीता, फिर मैंने क्रेडिट साहब को दिया, सपना तो था एक बार मेडल जीत के लेके आने के लिए, बट ट्रेनिंग का सेंटर नहीं था, मैंने SAI आने के बाद मैं बहुत ट्रेनिंग करके मेडल जीत पा रहा, इसलिए बहुत खुशी से मैंने सर को क्रेडिट दिया था क्योंकि बहुत इंप्रूव हुआ।

प्रधानमंत्री – मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान का विषय है, मेहनत आपने की और मुझे याद किया, मैं आपका बहुत आभारी हूं दोस्त।

प्रधानमंत्री – वाराणसी में खेल तुम प्रैक्टिस कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – कैसा बना है स्टेडियम?

खिलाड़ी – सर अच्छा बना है, वहां पर मैं 10-12 दिन के लिए ट्रेनिंग करने गई थी, क्योंकि मैं मंदिर गई थी तो वहां पर ही ट्रेनिंग करके आई थी। और मैं वहां पे मतलब सेटल भी होना चाहती हूं क्योंकि मुझे काशी विश्वनाथ बहुत अच्छा लगता है सर।

प्रधानमंत्री – भोपाल में ट्रेनिंग कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – तो उज्जैन जाते थे कि नहीं?

खिलाड़ी – जी सर उज्जैन भी गई थी सर।

प्रधानमंत्री – अच्छा महाकाल के पास भी गई।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – काशी विश्वनाथ के पास हो आई एक बार।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – सावन महीना तो अभी है।

खिलाड़ी – वहां घर जाके फिर उसके बाद जाऊंगी सर।

प्रधानमंत्री – ठीक है।

खिलाड़ी – साई ने भी सर बहुत सपोर्ट किया है मुझे। इसके कारण ही मैं यहां तक पहुंची हूं सर। और मैं खेलो इंडिया स्कीम में भी थी 2018 में जो फर्स्ट खेलो इंडिया हुआ था, उसमें मेरा सिल्वर मेडल था, वहां पे भी मैंने आपको देखा था ओपनिंग सेरेमनी में, तो उसमें मेरा मेडल था, तो मेरे को स्कीम भी मिल गया और मैं यहां तक पहुंची हूं सर।

प्रधानमंत्री – स्पोर्ट्स व्यवस्था एक बात है, लेकिन देश मेडल तब प्राप्त करता है जब देश में स्पोर्ट्स कल्चर बनता है। दोस्तों आपने बहुत बड़ा काम किया है। देश का नाम रोशन किया है। आपको मैं बहुत बधाई देता हूं और आप विश्वास कीजिए आगे भी आप विजयी होंगे और फिर से एक बार यहीं पर हम मिलेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

प्रधानमंत्री – ये लगातार तीसरी बार देश को मेडल दिलवाया है।

खिलाड़ी – थैंक यू सर।

प्रधानमंत्री – बहुत आशीर्वाद बेटा।

खिलाड़ी – और थैंक यू सो मच मैं सर के हाथ से लड्डू खा रही मेरा कल बर्थडे था तो आज सर के हाथ से…

प्रधानमंत्री – बहुत बधाई वाह।

प्रधानमंत्री – मुस्कुराओ यार ।

प्रधानमंत्री – जो खेलेगा वो खिलेगा।