एक तरफ श्री अमरनाथ यात्रा चल रही है, बड़ा पवित्र माहौल है दूसरी तरफ रमजान का पवित्र महीना चल रहा है और तीसरी तरफ आज माता वैष्णों देवी के चरणों में भारत भर से भक्तों को लाने की सुविधा प्रदान करने का एक मंगल प्रारंभ हो रहा है। एक प्रकार से सब ओरएक पवित्रता का माहौल हैऔर पवित्रता के माहौल में इस मंगल कार्य का आरंभ हो रहा है। प्रदेश के माता वैष्णों देवी के चरणों में आने वाले करोड़ों-करोड़ों भक्तों को शुभकामनाएं देता हूँ और आज ये सुविधा सिर्फ जम्मू-कश्मीर के लिए सुविधा नहीं है और न ही यह सिर्फ जम्मू-कश्मीर को भेंट है, यह भेंट पूरे हिन्दुस्तान को है,सवा सौ करोड़ देशवासियों को है जो जम्मू-कश्मीर आने के लिए लालायित रहते हैं, जो माता वैष्णों देवी के चरणों में आने के लिए आतुर रहते हैं। ऐसे कोटि-कोटिजनों के लिए ये सुविधा है और उनके चरणों में ये समर्पित करते हुए मैं गर्व महसूस कर रहा हूँ और उनको मंगल कामनाएं देता हूँ। ये रेल सुविधा आज प्रारंभ हो रही है।
मैंने रेल मंत्री को सुझाया था किदिल्ली से कटरा तक की जो सुविधा है और आगे चलकर और स्थानों से भी जुड़करकेदेश के भिन्न-भिन्न कोने से यात्रियों को कटरा तक लाने का जो प्रबंध हो रहा है। इस ट्रेन को “श्री शक्तिएक्सप्रेस” के रूप में जाना जाए ताकिमाता वैष्णों देवी के चरणों में हम जा रहे हैं इसकी अनुभूतियात्रियों को लगातार होती रहे। मैं ‘माता वैष्णों देवी श्राइन बोर्ड’ का भी अभिनंदन करना चाहता हूँ। गवर्नर साहब का भी अभिनंदन करना चाहता हूँ कियहां रेलवे स्टेशन पर भी यात्रियों के लिए आवश्यक आई-कार्ड निकालने की सुविधाओं का प्रबंध हुआ है। टैक्नोलॉजी का प्रबंध हुआ है और इसीलिए हिन्दुस्तान के किसी भी कोने से आने वाले यात्री के लिए ये बहुत सुनिश्चित हो जाएगा कियात्री का समय न खराब होते हुए उसके आगे की यात्रा के लिए जो भी प्रबंध होना चाहिए उसके लिए पूरी व्यवस्था मिलेगी, पूरा मार्गदर्शन मिलेगा।
जब विकास होता है तो कभी-कभार ऐसा लगता है किवहां पर ये हुआ तो मेरा क्या होगा जैसे मुख्यमंत्री जी ने जम्मू के लोगों की चिंता का जिक्र किया। मैं अनुभव से कह सकता हूँ किजम्मू के विकास को कभी कोई रूकावट नहीं आएगी। जब सुविधाएं बढ़ती है तो लोग भी अपने समय का सदुपयोग और जगह पर जाने के लिए करते हैं और इसीलिए जो सीधा कटरा आएगा वो जम्मू गए बिना जाएगा नहीं ऐसा मैं नहीं मानता और इसलिए जम्मू की विकास यात्रा और अधिक क्वालिटी की बन पाएगी, ऐसा मेरा पूरा विश्वास है और साथ-साथ जम्मू-कश्मीर की विकास यात्रा में कटरा का जुड़ना, कटरा का सेंटर स्टेज पर आना, आने वाले 10 साल की आप कल्पना कीजिए कटरा इतनी तेजी से विकास करेगा, इतनी तेजी से विकास करेगा जो पूरे जम्मू-कश्मीर के विकास के अंदर एक नया योगदान करने वाला एक आर्थिक प्रभुत्तिका केन्द्र बन जाएगा। जब व्यवस्था विकसित होती है और विकास के केन्द्र बिंदु में हमेशा इनफ्रास्ट्रक्चर का सबसे बड़ा महत्व होता है। जैसे ही इंफ्रास्ट्रक्चर बना आप मानके चलिए किउसके अगल-बगल में व्यवस्थाएं विकसित होना शुरू हो जाएगी। मुझे अभी बताया जा रहा था किट्रेन तो अभी आज शुरू हो रही है लेकिन स्टेशन के अगल-बगल व्यापारियों ने अपनी-अपनी जगह बना ली है और काम शुरू कर दिया है। अगर उनको समय दे किविकास के अंदर कैसे फायदा उठाना, विकास को कैसे भागीदार बनाना है और इसलिए ये सिर्फ एक रेलवे है, एक यात्रा करने की सुविधा है ऐसा नहीं है।
ये एक प्रकार से विकास की जननी बन जाती है और मेरे हिसाब से जम्मू-कश्मीर को रेल से जोड़ने का अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जो शुभारंभ किया है उसको हमें और आगे बढ़ाना है और आने वाले दिनों में बनिहाल तक जाने की जो व्यवस्था है उसको भी आगे बढ़ाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इतना ही नहीं, हिन्दुस्तान में पहली बार राज्य और केन्द्र मिल करके एक नवीन व्यवस्था को आज प्रारंभ कर रहे हैं। एक प्रकार से हाइब्रिड व्यवस्था है। रेल और बस की कनेक्टिविटी को कॉम्बिनेशन बनाया गया है। अब जो लोग श्रीनगर जाना चाहते होंगे उनको रेलवे से ही रेलवे की भी टिकट मिलेगी और कटरा से बनिहाल तक जो किजहां रेल-मार्ग नहीं है वहां बस की भी टिकट मिलेगी, कटरा वो उतरेगा, बस उपलब्ध होगी, बनिहाल पहुंचेगा, रेल उपलब्ध होगी और तुरंत वो आगे श्रीनगर पहुंचेगा। एक ही टिकट में रेल और बस दोनों का ट्रेवलिंग हो और पैसेंजर को कठिनाई न हो, यात्री को कठिनाई न हो ऐसी सुविधा का आरंभ राज्य और केन्द्र की रेल मिल करके ये दे रहे हैं और भविष्य में भी रेलवे का विकास करने के लिए केन्द्र और राज्य की पार्टनरशिप का मॉडल जितना ज्यादा विकसित होगा उतना फायदा होने वाला है।
मैं मुख्यमंत्री जी की इस बात से सहमत हूँ किहमारे रेलवे स्टेशन ऐसे पुराने क्या होने की जरूरत है,क्यों न हिन्दुस्तान के महत्वपूर्ण स्थानों के रेलवे स्टेशन एयरपोर्ट से भी बढ़िया क्यों न हो और मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ,सिर्फ जम्मू वासियों को नहीं, मैं देशवासियों को विश्वास दिलाता हूँ किहम रेलवे के विकास में, प्राथमिकता मेट्रो सिटीज़ में जम्मू जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन को और उसके जैसे रेलवे स्टेशनों को अतिआधुनिक बनाना, एयरपोर्ट से भी रेलवे स्टेशन ज्यादा अधिक सुविधाजनक हो, ये बनाने का हमारा सपना है और ये बन सकता है। ये कोई कठिन काम नहीं है और ये इकनॉमिकली वाइबल प्रोजेक्ट बन सकता है। मैंने पिछले दिनों रेलवे के मित्रों के साथ बड़े विस्तार से समय निकालकर चर्चा की है और मैंने इसके विषय पर उनको डिटेल में प्रारूप दिया है और अब देखिए देखते ही देखते आपको बदलाव नजर आएगा और इसमें प्राइवेट पार्टी भी इनवेस्टमेंट करने के लिए तैयार हो जाएगी क्योंकिये आर्थिक रूप से एक अच्छी योजना होगी। जो सबको लाभ पहुंचाने वाली होगी एक विन-विन सिचुएशन वाला प्रोजेक्ट होगा। उस दिशा में हम आने वाले दिनों में जरूर आगे बढ़ना चाहते हैं, आज जब हम इस रेल सुविधा को दे रहे हैं यह भी मेरे लिए अत्यंत खुशी की बात है। भारत के विभिन्न राज्यों से कटरा तक छह जोड़ी रेल गाड़ियाँ तुरंत चलाई जाएगी। यानि उसका विस्तार और जगहों पर भी किया जाएगा। उसके अतिरिक्त जम्मू और उधमपुर तक चलने वाली तीनजोड़ी डेमू रेलगाड़ियों का कटरा तक, आज से विस्तार भी किया जा रहा है। जो जम्मू से चलने वाली उधमपुर वाली जो डेमू ट्रेन्स है उसको भी कटरा से जोड़ने का काम हो रहा है।
आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर में विकास एक नयी ताकत कैसे बनेगी, देखिए आज का दिन एक प्रकारसे महत्वपूर्ण है। महत्वपूर्ण इसलिए है किआज का दिवस जम्मू कश्मीर को नयी गतिभी देने जा रहा है और आज का दिन जम्मू कश्मीर को नयी ऊर्जा भी देने जा रहा है। आज मुझे दो कार्यक्रम करने का अवसर मिला है एक इस रेल कनेक्टिविटी, जो जम्मू कश्मीर को गतिदेगा और उरी में जा करके पावर प्रोजेक्ट का उद्घाटन जो जम्मू कश्मीर को ऊर्जा देगा, विकास की ऊर्जा देगा और जम्मू कश्मीर को विकास की ऊर्जा चाहिए, जम्मू कश्मीर को विकास की गतिचाहिए और एक प्रकार से आज के ये दोनों कार्यक्रम उस निमित्त बड़े महत्वपूर्ण हैं।
मैं मानता हूँ किहमारे देश के जो हिमालयन स्टेट्स हैं, उन हिमालयन् स्टेट्स के विकास के लिए एक अलग से रूप-रेखा की आवश्यकता है। सारे हिमालयन् रेजिंग स्टेटस की कई एक समान कठिनाइयां है कई प्रकार की एक समान अवसर भी हैं अगर उनका एक कॉमन मॉडल विकसित किया जाएगा तो समस्याओं का समाधान भी बहुत जल्दी होगा। केंद्र के पास भी स्पष्ट विज़न होगा। राज्यों की अपेक्षाओं को समझने में केन्द्र सामर्थ बनेगा और हिमालयन स्टेट्स जो है उसके विकास में इस नयी परिधिमें हम जाना चाहते हैं और जिसका लाभ जम्मू कश्मीर को भी मिलेगा और उधर नार्थ-ईस्ट तक हिमालयन रेंज की विकास की यात्रा का लाभ उन सभी राज्यों को मिलेगा और उस दिशा में भी हम आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आज मैं जम्मू कश्मीर की धरती पर आया हूँ माता वैष्णोदेवी के चरणों में आया हूँ और जब चुनाव अभियान प्रारंभ किया था तब भी माता वैष्णोदेवी का आशीर्वाद ले करके गया था और आज विकास यात्रा का आरंभ कर रहा हूँ वो भी माता वैष्णोदेवी के आशीर्वाद से कर रहा हूँ और इसलिए मुझे विश्वास है किभारत की विकास यात्रा को और अधिक शक्तिमिलेगी, और अधिक ताकत मिलेगी और अधिक सामर्थ्यवान विस्तार के साथ हम इस विकास यात्रा को आगे बढ़ाएंगे।
टूरिज्म में यात्रियों की सुविधा के साथ रेलवे एक प्रकार से Environment Friendly व्यवस्था होती है और जम्मू-कश्मीर में Environment Friendly Transportation, वो दुनिया को आकर्षित करने का कारण बनता है। हम इस मार्ग के माध्यम से विश्व के अंदर जम्मू-कश्मीर में Environment Friendly यातायात को भी बल दे रहे हैं यह अपने आप में एक अच्छे प्रयोग के रूप में हम दुनिया के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं।
और हिमालयन में जितना विकास हम करना चाहेंगे, वो Environment Friendly विकास हो सकता है। उसको हम बल भी दे सकते है, उसकी सुरक्षा करते हुए यात्रियों की सुविधा भी बढ़ा सकते हैं, Environment की सुरक्षा भी हो, यात्रियों की सुविधा भी बढ़े, उस दिशा में हम प्रयास करते हैं, मैं जब यहां रेलवे स्टेशन का उद्घाटन करने गया, वहां का जो मैंने द़श्य ऐसा, ऐसा रेलवे स्टेशन देखने को मिलता बहुत कम है, क्योंकि ऊपर पहाड़ से नीचे स्टेशन पर जाना होता है, तो छोटी पहाड़ी पर से पूरा स्टेशन दिख रहा है, तो कितना बड़ा तामझाम है उसका दर्शन होता है। मैंने तुरंत कहा-हिंदुस्तान का ये ऐसा रेलवे स्टेशन बन सकता है कि जिसको पूरा हम सोलर रेलवे स्टेशन के रूप में कनवर्ट कर सकते हैं। इतनी संभावनाएं पड़ी है। रेलवे चेयमैन ने मुझे कहा मैं साहब, तुरंत इस काम को हाथ में लूंगा और मैं कटरा का पूरा रेलवे स्टेशन, देश का एक रेलवे स्टेशन, Environment Friendly Movement का एक हिस्सा... और बहुत संभावना पड़ी है, उसको जब करेंगे तो जब यात्री आएंगे और ऊपर स्टेशन पे जब जाते होंगे तो उसको देखकर कोर्ठ भी जान लेगा कि सोलर एा उपयोग कैसे और कहां हो सकता है और मुझे विश्वास है कि बहुत जल्दी रेलवे विभाग पूरे रेलवे स्टेशन पर सोलर पैनल का उपयोग करके एक-एक इंच की जगह का उपयोग कर करके उस ऊर्जा का भी उपयोग आने वाले दिनों में कैसे कर सके उस पर प्रयास होगाऔर ऐसा मुझे पूरा विश्वास है।
जम्मू-कश्मीर अनेक समस्याओं से गुजरा है, अनेक कठिनाईयों से गुजरा है और एक भारत के हर नागरिक की इच्छा है, भारत के हर नागरिक का दायित्व है किहमारा जम्मू-कश्मीर सुखी हो, समृद्ध हो। हर एक की इच्छा है और इसको पूरा करना हम सबका दायित्व है। चाहे हम शासन व्यवस्था में हो तो भी, हम शासन व्यवस्था में न हो तो भी। यह हम सबका दायित्व है। यहां के नौजवानों को रोजगार मिले, रोजगार के नए अवसर मिले। उनको नई जिंदगी जीने का अवसर मिले। मैं अभी जब कटरा स्टेशन पर बच्चे ट्रेन में जा रहे थे तो उनको मैंने पूछा किआपमें से कितने लोग है जिन्होंने पहले कभी ट्रेन देखी है, कितने है जो ट्रेन में बैठे है। 21वीं सदी का पहला दशक चला गया उन बच्चों में 80 प्रसेंट बच्चों ने हाथ ऊपर किया किहमने पहली बार ट्रेन में बैठे है आज। उन बच्चों के लिए आनंद का विषय है। लेकिन हमारे लिए सोचने का विषय है किहमविकास यात्रा को कैसे चलाया कि कटरा, इतने निकट के भी बच्चों को जीवन में पहली बार रेल को देखने का 21वीं सदी आने के बाद अवसर मिला है। हमारा दायित्व बनता है किहमारे देश के दूर-सूदूर कोने में बैठे हुए लोगों को भी विकास का लाभ मिलना चाहिए। विकास से प्राप्त सुविधाएं सामान्य मानव तक पहुंचनी चाहिए, आखिरी छोर पर बैठे हुए मानव तक पहुंचनी चाहिए। हम लोगों का प्रयास यही है और मुझे विश्वास है देश की जनता ने जो आशीर्वाद दिए हैं उस आर्शीवाद के बलबूते पर अंतिम छोर पर बैठे हुए गरीब से गरीब व्यक्तिके कल्याण में ये विकास की यात्रा आगे बढ़ेगी, विकास के नए मार्ग स्थापित होंगे और सामान्य व्यक्तिके जीवन को.. उसकी Quality of life में चेंज आएगा।
उसकी आशा अपेक्षा के अनुकूल जीवन व्यवस्था विकसित हो, उस दिशा में हम प्रयास करेंगे। मैं जम्मू कश्मीर के नागरिकों को यही संदेश देना चाहता हूं, अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जिस यात्रा को प्रारंभ किया है, उस यात्रा को हम आगे बढ़ाना चाहते हैं और हमारा मकसद राजनीतिक जय-पराजय वाला नहीं होता है। हमारा मकसद होता है जम्मू-कश्मीर के हर नागरिक का दिल जीतना है और मैं जम्मू-कश्मीर के नागरिकों का दिल जीतना यही मेरी प्राथमिकता है और यह प्राथमिकता उसी को विकास के माध्यम से करना है यहां के लोगों के कल्याण के माध्यम से करना है। यहां के लोगों की भलाई के माध्यम से करना है और मुझे विश्वास है इस स्वप्न को हम बहुत ही जल्द, बहुत तेजी गतिसे पूरा करते जाएंगे। इसी सद्भावना के साथ फिर एक बार यह श्री शक्तिएक्सप्रेस राष्ट्र को समर्पित कर रहा हूँ। माता वैष्णों देवी के चरणों में आने वाले कोटिकोटिभक्तों को समर्पित करता हूँ और जम्मू-कश्मीर के टूरिज्म के विकास के लिए यह यात्रा अहम भूमिका अदा करेगी। जम्मू–कश्मीर के टूरिज्म को बहुत बल मिलेगा। जम्मू-कश्मीर के विकास को बहुत बल मिलेगा। इस शुभकामनाओं के साथ बहुत-बहुत धन्यवाद।
स्वर साधना, मनोकामना, आराधना। एक बहुत ही शुभ शुरुआत के बाद। अच्छा होता आप ही का कार्यक्रम चलता। आप सबको नमस्कार।
रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के सभी दर्शक और अब तो बहुत सारी भाषाओं में भी है, तो उन सबको भी मेरा प्रणाम! मैं इस समिट में हिस्सा लेने आए सभी साथियों का भी अभिनंदन करता हूं। 24 घंटे चलने वाले चैनलों में ब्रेकिंग न्यूज इसका बहुत बड़ा महत्व होता है। और आजकल तो दुनिया में ही, पूरी दुनिया में कहीं पर भी नजर डालो, पूरी दुनिया ब्रेकिंग न्यूज के मोड पर ही है, और इतनी भागदौड़ में आप सभी, इस समिट को होस्ट कर रहे हैं, इसका हिस्सा बने हैं। और इसलिए आप विशेष बधाई के पात्र हैं। और इस बार आपकी चर्चा का विषय भी उतना ही अहम है...Great Power India: Nation First...

साथियों,
हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है...यतो धर्मस्ततो जयः ! यानि जय का, शक्ति का, मूल धर्म है। और धर्म यानि ड्यूटी, धर्म यानि जस्टिस, धर्म यानि समभाव, धर्म यानि संवाद, धर्म यानि संवेदना और यही तो नेशन फर्स्ट की भावना में भी समाहित है। भारत, अपनी पावर को इसी लैंस से देखता है, इसी तराज़ू पर तौलता है।
साथियों,
भारत की एक और विशेषता है और अब तो दुनिया ने भी मान लिया है। हम किसी क्षणिक घटना पर उतावले होने वाले देश नहीं है, हम वो हैं जिसने विकास और विनाश, देखा भी झेला भी है। हम वो देश हैं, जिसके जेहन में युगों की मेमरी चिप लगी हुई है, हम युगों की मेमरी चिप वाले नेशन हैं। और इसलिए भारत आज जो कर रहा है, और ये मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ, भारत जो कर रहा है वो आने वाले एक हज़ार वर्ष का फ्यूचर लिखने वाला है। और यही दुनिया के लिए सबसे बड़ी भारत की गारंटी है। भारत, Fast-Growing Economy भी है। एक Credible Economy भी है। और भारत, rising power के साथ-साथ और अभी आप तो ढेर सारी डिक्शनरी लेकर बैठ गए थे, सुपर पावर तक ले गए। लेकिन मैं इतना जरूर कहूँगा कि भारत Reliable power है। मैं अभी दो-तीन दिन पहले G7 समिट से लौटा हूं और दुनिया का हर नेता हर देश इस बात को भली-भांति समझता है कि आज के भारत के लिए नेशन फर्स्ट ही सबसे बड़ा मंत्र है, सबसे बड़ा सिद्धांत है।
साथियों,
कुछ दिन पहले ही, हमारी सरकार को 12 साल पूरे हो चुके हैं। उसके लिए भी अर्नब ने आपको तालियाँ बजाने के लिए मजबूर कर दिया। पिछले बारह वर्षों की जो भी सिद्धियां देश की रही हैं, उनके मूल में अगर आप तराजू से तौलोगे, हर निर्णय, हर कदम, हर प्रयास उनके मूल में राष्ट्र प्रथम की भावना ही केंद्र में है। स्वच्छ भारत अभियान से लेकर मेक इन इंडिया खादी खरीदने पर जोर स्थानीय वस्तुएं खरीदने पर जोर ये सारे Initiative इसलिए सफल हुए क्योंकि देश की जनता ने देश को सबसे ऊपर रखते हुए अपना कर्तव्य निभाया। देश के नागरिकों को मैं सलाम करता हूँ।

साथियों,
यहां हमारे साथी श्रीधर वेंबु जी बैठे हैं। जब हमारे उद्यमी नेशन फर्स्ट की भावना के साथ चलते हैं, जब वो देश की आवश्यकताओं को समझते हुए अपने लक्ष्य बनाते हैं तो संस्थाएं भी बनती हैं और देश भी समृद्ध होता है। श्रीधर वेंबु जी ने क्या काम किया है, शायद यहाँ बातों में कितना निकला होगा मुझे मालूम नहीं, लेकिन अभी मैं फ़्रांस में vivatech में गया था, करीब डेढ़ 2 लाख नौजवान वहाँ होंगे, चलने के लिए भी मैं और फ्रांस के राष्ट्रपति अलग अलग स्टॉल पर जा रहे थे, देखने के लिए भई नौजवानों ने क्या काम किया है। तो हम जोहो के स्टॉल पर गए, मैं हैरान था जी, और गर्व होता था कि जोहो के स्टाल पर यूरोप के नौजवानों की जो भीड़ लगी थी और वो समझना चाहते है कि क्या है ये दुनिया में नई चीज, भारत में शायद उतनी चर्चा नहीं होगी, जितनी मैंने वहाँ फ्रांस में देखी, बधाई हो आपको।
साथियों,
सरकार की नीति और निर्णयों में नेशन फर्स्ट का क्या प्रभाव होता है, इसका एक उदाहरण हमारा आदिवासी क्षेत्र है। मैं आज कोई फिलोस्फी झाड़ने वाला नहीं हूँ, कुछ बातें जो हुई है वो हल्की फुल्की बता दूंगा और उससे आप अंदाज लगा लेंगे कि काम कैसे होता है। मैं आदिवासी क्षेत्र की बात करता हूँ। भारत के 10 करोड़ से अधिक आबादी की चर्चा, मतलब कि आदिवासी समाज की चर्चा और हम सबको पता है कि दशकों से माओवादी आतंक वहाँ अपने डेरा तंबू डालकर बैठ हुआ था। जहां 21वीं सदी में भी इन आतंकियों ने एक भी सुविधा पहुंचने नहीं दी, सरकारी एक वेहिकल नहीं गुजर सकता था वहाँ से। गोलियों से भून दिया जाता था। अनेक सरकारें आई-गईं, कई पीढ़ियां आई-गईं, लगता था कि हिंसा का ये दुर्भाग्य ऐसे ही रहेगा। आप कल्पना कर सकते हैं, 2004 से 2014 के बीच, मैं उस दस साल का हिसाब बताता हूँ, 2004 से 2014 के बीच माओवादी आंतक के कारण, 17 हज़ार से भी अधिक हिंसक घटनाएं हुईं थीं। और करीब-करीब 7 हज़ार से ज्यादा जानें गईं थी।
साथियों,
आज आपके लिए वन लाइन न्यूज होगा या टीवी पर आधे घंटे डिबेट होगी कि माओवाद आतंकवाद खत्म हो गया, चीजें ऐसी नहीं होती। उसके लिए खपना पड़ता है और इसलिए मैं बताना चाहता हूँ। और इसलिए मैं बताना चाहता हूं और आजकल जो लोग, कुछ लोग संविधान दिखाते रहते हैं, लेकिन जब ये लोग सरकार में थे और नक्सल प्रभावित इलाकों में संविधान का नाम लेने पर गोली मार दी जाती थी और तब ये लोग चुप बैठे थे, तब उनके हाथो में संविधान नहीं दिखता था, कांप रहे थे उनके हाथ। उस दर्दनाक स्थिति से कांग्रेस को कोई खास फर्क नहीं पड़ता था।

साथियों,
2014 के बाद, हालात को बदलने के लिए हम राष्ट्र प्रथम के भाव से आगे बढ़े, हम निकल पड़े। बोलते नहीं थे, बताते भी नहीं थे, करते जरूर थे। हमने संकल्प लिया कि नक्सलवाद-माओवाद को जड़ से उखाड़ फेकेंगे और आज पूरा देश नतीजा देख रहा है, आज देश में माओवादी आतंक, अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।
और साथियों,
कई बार अंतिम परिणाम इतना बड़ा और व्यापक होता है कि उसके पीछे की मेहनत पर ध्यान नहीं जाता। रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को मैं खासतौर पर इसके बारे में बताना चाहता हूं।
साथियों,
जिन नक्सल प्रभावित इलाकों में दिन में जाने से भी, यानी सामान्य मानवी डरा रहता था, उसको लगता था कहीं अपहरण हो जाएगा तो, कभी वसूली का डर रहता था, कभी साथ में जो कुछ भी है वो लूट लेने का डर रहता था। और जहां पर विकास की बात बोल तक नहीं सकते थे आप, लेकर के जा नहीं सकते थे, सब नामुमकिन था, ऐसे क्षेत्रों में हम हम विकास का संकल्प लेकर आगे बढ़े। वहां बीते 12 वर्षों में हमारी सरकार ने 12 हज़ार किलोमीटर से अधिक की सड़कें बनाईं। और कई बार तो हमने देखा, कई बार तो हमने देखा कि सड़क बनाने के जो हमारा साजो सामान होता है उसको जला दिया जाता था। कांट्रेक्टर को भगा दिया जाता था। अगर 25 लोग रोड पर काम करते तो 200 लोग पुलिस सुरक्षा रखते थे ताकि काम चले। यह सब इसलिए करते थे- तय किया था।
साथियों,
साढ़े 9 हज़ार से अधिक मोबाइल टावर बनाए। एक टावर नहीं लगने और लगा हुआ टावर तोड़ देते थे। क्योंकि उनको हमेशा वहां आक्रोश पैदा करना था। करीब 45,000 गांव में मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाई। नक्सल प्रभावित जिलों में 1800 से अधिक बैंक ब्रांच खोली गई। करीब 75,000 बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट और 6000 से अधिक नए पोस्ट ऑफिस बनाए गए। सिर्फ बम, बंदूक और गोली के सहारे काम नहीं किया है साथियों, हमने दिलों को जीतने के लिए, ईश्वर ने जो भी शक्ति दी थी उसको खपाया था।

साथियों,
हम बुलंद इरादों के साथ नक्सल प्रभावित इलाकों में जनसामान्य की आशा, आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए जा रहे थे। आप हैरान हो जाएंगे एक मशहूर नक्सली, करोड़ों रुपए का इनाम थे उसके, उसकी मां के पास हम पहली बार राशन कार्ड लेकर गए। बेटा अपनी मां को राशन कार्ड लेने नहीं देता था, आतंकवाद अपना चलाने के लिए। इतनी घटनाएं हैं, मैं हैरान था। और सरकार चुप बैठी थी, उनको संविधान उस समय तो दिखता नहीं था। लेकिन इन सारे प्रयासों का परिणाम यह आया कि जन सामान्य में एक विश्वास का नया दौर आया। आज आप देखिए बस्तर जैसे इलाकों में बम बंदूक नहीं बस्तर ओलंपिक्स की धूम है। और अब तक इस ओलंपिक के दो एडिशन हो चुके हैं। पहली बार डेढ़ लाख से अधिक युवाओं ने और दूसरी बार करीब 4 लाख युवाओं ने बस्तर ओलंपिक्स में हिस्सा लिया। यानी जहां कभी टेरर था, वहां टैलेंट को अवसर मिल रहा है, वहां स्पोर्ट्स फल-फूल रहा है।
साथियों,
12 वर्षों के इस सेवाकाल की एक और बड़ी सिद्धि रही है, यह सिद्धि है, निराशा से निकलकर आशा-आकांक्षा सबसे भरे भारत का निर्माण।
साथियों,
नक्सल कहीं और होगा लेकिन घटनाओं की पीड़ा हिंदुस्तान के हर कोने में होती थी और जिस समय नक्सल खत्म होने की बातें आने लगी तो विश्वास सिर्फ नक्सली इलाके का नहीं, हिंदुस्तान के कोने-कोने में जगने लगा। 2014 से पहले के 10 वर्षों में जो कांग्रेस सरकार चली, उससे नाराजगी केवल गवर्नेंस की नहीं थी। तब देश की निराशा इससे कहीं अधिक थी, देश उम्मीद खो चुका था, लोगों को लगता था कि कुछ हो ही नहीं सकता, कुछ बदल ही नहीं सकता।
साथियों,
पिछले 12 वर्षों में भारत ने उसी निराशा को आशा में बदला है और मुझे इस बात का सबसे ज्यादा संतोष है। आज हर किसी को यह लगता है कि थोड़ी और मेहनत करेंगे, तो यह हो सकता है। वो दिन चले गए जब एक ही बात सुनाई देती थी, कतई नहीं हो सकता, कतई नहीं हो सकता, वो जमाना चला गया, आज ये होकर रहेगा। ये जो भाव आया है यही भारत की असली सिद्धि है, और यही रियल पावर है। चुनौतियां तो आज भी बहुत है और हमेशा रहेगी और चुनौतियां बहुरूपिया होती है, वो नए-नए अवतार में सामने आती रहती है, अरे आएगी, जिस रूप में आएगी, जंग उससे भी लड़ लेंगे जी और जीत भी लेंगे। लेकिन यह हो सकता है और हम यह करके रहेंगे, जब इस भाव से देश आगे बढ़ता है, तब सपने पूरे होते हैं।
साथियों,
मैं यहां भारत के 100 से ज्यादा जिलों और 500 से ज्यादा ब्लॉक्स की चर्चा करना चाहूंगा। यह विकास के हर पैरामीटर पर पीछे छूट गए थे और पहले की सरकार ने इन पर पिछड़ा होने का ठप्पा लगा दिया था, यह तो बैकवर्ड डिस्ट्रिक्ट है, ये तो बैकवर्ड इलाका है। हमने देश के इस बहुत बड़े क्षेत्र को पिछड़ेपन की निराशा से बाहर निकालकर डेवलपमेंट की एस्पिरेशन जगाई। सबसे पहले तो हमने पहचान ही बदल दी, हमने कहा ये एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट है, ये एस्पिरेशनल ब्लॉक है, हमने एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट का प्रोग्राम बनाया, एस्पिरेशनल ब्लॉक का प्रोग्राम बनाया और सरकार ने विकास के हर पैरामीटर पर बहुत बारीकी से काम शुरू किया। इस डिस्ट्रिक्ट में ये तीन पहलू है, पहले उसमें से बाहर निकलो। यहां छह पहलू है, पहले इसमें से बाहर निकलो। बड़ा फोकस वे में काम शुरू किया। आज यह एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट और ब्लॉक्स राज्य की ओवरऑल ग्रोथ को आगे बढ़ाने का काम करने लगे हैं। जो पहले ग्रोथ को पीछे खींचते थे, इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट में बहुत बड़ी आबादी गरीब थी, अभाव में थी। बीते वर्षों में 25 करोड़ गरीबों ने गरीबी को परास्त किया है। तो इसमें इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट की एक बहुत बड़ी भूमिका है।

साथियों,
हम देखते हैं कि जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो सिर्फ घर का वो व्यक्ति ठीक होता है ऐसा नहीं है। जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो पूरा परिवार ठीक हो जाता है। ऐसे ही, जब घर का कोई एक बेटा-बेटी कुछ अचीव करता है, तो सिर्फ वो व्यक्ति अचीव करके नहीं आता, वो पूरा परिवार, पूरा परिवार अचीवमेंट से भर जाता है, विश्वास बदल जाता है। ऐसे ही, जब कोई गरीबी से बाहर आता है, तो सम्पूर्ण समाज का फायदा होता है, देश का फायदा होता है। 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, निओ मिडिल क्लास में आए हैं, तो इसका फायदा केवल उन परिवारों तक नहीं रहता, बल्कि मिडिल क्लास का भी इसमें फायदा होता है। क्योंकि यह नया कंज्यूमर है, जो इकोनॉमी को ड्राइव करता है, उससे अल्टीमेटली मिडिल क्लास के लिए अवसर बनते हैं। यानी गरीबी कम होना केवल वेलफेयर का ही विषय नहीं है, यह अवसरों के विस्तार की गाथा है, नई एस्पिरेशंस की प्रेरणा है।
साथियों,
पिछले 12 वर्ष में जो इतना विशाल मिडिल क्लास देश में तैयार हुआ है, वो सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता रहा है। मिडिल क्लास की Ease of Living के लिए सरकार ने हर स्तर पर काम किया है। अब जैसे अपने घर का सपना है। हर मिडिल क्लास परिवार की एक इच्छा रहती है कि भई खुद का घर हो, हर किसी को पूछोगे एक मन में रहता है मेरा अपना घर हो। 2014 में अगर किसी परिवार को अपना घर खरीदना होता था, तो होम लोन डबल डिजिट के इंटरेस्ट रेट पर मिलता था। लेकिन आज किसी भी बैंक से होम लोन 7-8 परसेंट के रेट पर मिल जाता है। पहले लोन लेना भी किसी युद्ध जीतने जैसा था, युद्ध जीतने में जितनी ताकत लगती थी, उतनी लोन लेने में लगती थी। आज यह घर बैठे ही संभव हो पा रहा है। मैं यहीं की बात बताता हूं, यह दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोग जानते हैं कि कैसे शहरी मिडिल क्लास के हजारों घर अधूरे अटके हुए थे। पैसे दे दिए थे, पूरे जिंदगी भर की कमाई बिल्डर को दे दी थी। उसने भी बढ़िया-बढ़िया पम्पलेट दिखाए, सपने दिखाए। अभी किराए पर घर में रहते हैं, तो किराया भी देना है, घर जल्दी मिलेगा। उधर किराया रहता है, घर मिल नहीं रहा, घर बन नहीं रहा, यह बहुत बुरा हाल था। इन अधूरे घरों को पूरा करने के लिए हमने 25 हजार करोड़ रुपए का स्पेशल फंड बनाया। और आपको जानकर खुशी होगी कि देश में बरसों से अटके करीब 60 हजार घरों को डिलीवरी किया जा चुका है।
साथियों,
एक और चीज है, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है। यह जरूरत है, कनेक्टिविटी की, ट्रांसपोर्ट की। आज आप सोशल मीडिया में देखिए, दुनियाभर से जो भी टूरिस्ट आता है, भारत आता है, वो हमारे मेट्रो सिस्टम को देखकर हैरान रह जाता है।
साथियों,
वर्ष 2014 में करीब 28 लाख लोग, हर रोज मेट्रो से सफर करते थे। आज करीब एक करोड़ अठाइस लाख लोग हर रोज मेट्रो से सफर कर रहे हैं। अब वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत जैसी हाई स्पीड ट्रेन्स देश को कनेक्ट कर रही हैं। अच्छी सड़कों, अच्छे हाईवे से, समय तो बच ही रहा है, गाड़ियों की मैंटेनेंस पर होने वाला खर्चा भी कम हुआ है। बीते वर्षों में एयरपोर्ट्स की संख्या डबल हुई है। इससे कई छोटे-छोटे शहरों में भी मिडिल क्लास को हवाई यात्रा की सुविधा पहली बार मिली है।
साथियों,
पिछले 12 साल, मिडिल क्लास के लिए कमाई के साथ-साथ बचत के भी रहे हैं। 2013-14 में, लगभग 2 लाख रुपए तक की आय होने पर टैक्स लगता था, आप सबको वो नसीब रहा होगा। और यह टैक्स मिडिल क्लास देता रहता था। आज 12 लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। यानी टैक्स फ्री इनकम कई गुणा बढ़ गई है।

साथियों,
GST रिफॉर्म्स के कारण भी मिडिल क्लास को बहुत सुविधा हुई है। टैक्स फाइलिंग का समय और खर्चा भी बच गया है। क्योंकि यह बहुत ही आसान हो गया है। घर बैठे ही ITR फाइल हो रहे हैं, अगर कोई सेटलमेंट का इश्यू है, तो वो फेसलेस हो रहा है।
साथियों,
मिडिल क्लास परिवारों में एक बड़ा खर्चा डायबिटीज या ऐसी लाइफस्टाइल से जुड़े इलाज का भी रहता है। जन औषधि केंद्रों पर 80 परसेंट डिस्काउंट पर ऐसी दवाएं मिल रही हैं। अगर आपका पहले हजार रुपया खर्चा होता था, तो आज 200 रुपये में काम हो जाता है, 800 रुपये बच रहा है और इससे बीते वर्षों में करीब 40 हज़ार करोड़ रुपए की बचत देश के अनेक परिवारों की हुई है। मिडिल क्लास के बजट का एक बड़ा हिस्सा बुजुर्गों के इलाज पर भी जाता है। आज 70 वर्ष से ऊपर के हर नागरिक के लिए 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध है।
साथियों,
एक सामान्य स्वभाव है कि जब कोई सुविधा लगातार मिलती है, तो इंसान पहले की परेशानी भूल जाता है। अब 2 लाख रुपये पर आप टैक्स देते थे, अब 12 लाख तक नहीं देना पड़ रहा, लेकिन जब मैं कहूं, तब ताली बजती है। और बस में, ट्रेन में थोड़ी देर भी अगर कुछ मुसीबत आ गई, तो ढेर सारी गालियां देना शुरू हो जाते हैं और यही क्लास सबसे ज्यादा बोलता है।
साथियों,
मैंने जैसा कहा ना कि भई पुरानी तकलीफे भूल जाता है आदमी। आप लोगों को आज ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट से जुड़ी परेशानियां बिल्कुल याद नहीं होंगी। पहले ड्राइविंग लाइसेंस लेना होता था, तो कितनी दिक्कत होती थीं, पासपोर्ट लेना होता था, तो क्या-क्या कुछ नहीं करना पड़ता था, कितने पापड़ बेलने पड़ते थे। आज ड्राइविंग लाइसेंस लेना भी आसान हुआ है और तत्काल पासपोर्ट भी औसतन 3 दिन में ही मिल जाता है।
साथियों,
मैं जानता हूं, हमारी सरकार जिस तरह काम कर रही है, उसने देश के लोगों की एस्पिरेशन बहुत बढ़ा दी है। एक काम हुआ, तो लोगों की डिमांड वहीं खत्म नहीं हो जाती है। वो उससे भी बेहतर काम चाहते है, उससे भी अपग्रेड सुविधा चाहते हैं। अगर पहले डिमांड नई सड़क की थी, तो सड़क बनने के बाद लोग पूछते हैं, मेट्रो कब आएगी? पहले अपेक्षा होती थी कि ट्रेन समय पर पहुंच जाए, ट्रेन में बैठने की साफ-सुथरी जगह मिल जाए। आज डिमांड है कि हमारे रूट पर वंदे भारत क्यों नहीं चल रही है?
साथियों,
कुछ लोगों को ये असंतोष लगता है, यह एस्पिरेशन है, हमारे देश में एक फौज ऐसी है, उसको लगता है कि यह सब मामला कुछ गड़बड़ है। लेकिन लोग आखिरकार यह अपेक्षाएं किसके पास करेंगे भई, जो करता है, उससे ही करेंगे ना! सामान्य लोग हीनहीं, पूरी कांग्रेस पार्टी कहती है कि जरा मोदी जी, यह हो जाना चाहिए, यह होना चाहिए, कहते रहते हैं ना! उनको भरोसा है, करेगा तो ये ही करेगा!

साथियों,
एस्पिरेशंस वहीं होती है, जहां लोगों को लगता है कि सपने पूरे हो सकते हैं। और भारत के युवाओं की, भारत के गरीब और मिडिल क्लास की यही एस्पिरेशन है। आज भाजपा-एनडीए सरकारों की ऊर्जा बनी हुई है।
साथियों,
एक तरफ, देश का बहुत बड़ा वर्ग एस्पिरेशनल है, तो दूसरी तरफ, राजनीति की एक टोली है, जिसका जीवन मंत्र बन गया है- ऑलवेज अगेंस्ट! यह टोली, क्रॉनिक डिससैटिस्फैक्शन यानी स्थाई असंतोष से भरी हुई है। आज मैं रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को जरा इस टोली के लक्षण बताने जा रहा हूं। Symptoms पता चलेगा, तो आपको समझ आ जाएगा कि मैं क्या कह रहा हूं। आप आसानी से पहचान लेंगे। जैसे मैं उदाहरण देता हूं, आप समझ जाएंगे। इनको आप अक्सर कहते सुनेंगे, अरे फलां जगह तो चौबीस घंटे बिजली आती है, यहां क्यों नहीं? और अगले ही दिन ये लोग डैम्स का, सोलर पार्क का, थर्मल का, न्यूक्लियर प्लांट का विरोध करने के लिए ढपली लेकर के आ जाएंगे। यानी पहले दिन बिजली क्यों नहीं और दूसरे दिन तुम हाइड्रो पावर का डैम क्यों बना रहे हो, यह जमात ऐसी है। यह वो लोग हैं, जो खनिजों के खनन का विरोध करते थे, लेकिन आज पूछते हैं कि भारत का रेयर अर्थ मिनरल्स भंडार कहां है, सप्लाई चेन कहां है? और भारत में फलाने देश की तरह, इलेक्ट्रिक व्हीकल का इकोसिस्टम क्यों नहीं है? यह वही लोग हैं, जो कभी डेटा या आटा, इसकी डिबेट चलाते थे। पहले डाटा कि आटा, डाटा कि आटा, बड़ा मजा आता था। आज यही लोग पूछते हैं कि बताओ मोदी जी, AI में क्या काम हुआ? हद देखिए, एक सांस में कहते हैं, एक ही सांस में कहते हैं कि AI में यह होना चाहिए था, वो होना चाहिए था, हुआ क्यों नहीं? लेकिन दूसरी सांस में वही लोग कहते मिलेंगे, अरे यह डेटा सेंटर क्यों बना रहे हो? यह सेमीकंडक्टर प्लांट क्यों लगा रहे हो? और फिर यह लोग उसके 100 नुकसान गिनाने के लिए घंटे-घंटे भर सोशल मीडिया के स्क्रीन पर दिखेंगे, टीवी डिबेट पर दिखेंगे, अखबारों में भरे रहेंगे।
साथियों,
यह लोग करप्शन को लेकर दुनियाभर के इंडेक्स उठाकर लाते हैं, भारत को कटघरे में खड़ा करते हैं, इनके इकोसिस्टम का मीडिया भी 24-24 घंटे उछालता रहता है, लेकिन जब करप्शन के विरुद्ध एक्शन होता है, जब कार्रवाई होती है, तो यही लोग चिल्लाते हैं, सबसे पहले हल्ला मचाने का काम कौन करते हैं, यही गलत हो रहा है, फलाना गया ढीकना गया, रेड कर दी, जांच कर दी, harass कर दिया। सवाल उठाए जाते हैं, कार्रवाई ऐसे क्यों हो रही है, वैसे क्यों नहीं, अब क्यों हो रही है, तब क्यों नहीं, A पर क्यों हो रही है, B पर क्यों नहीं हो रही है, यही उनका खेल है।
साथियों,
इन लोगों का कैरेक्टर समझना देश के लिए बहुत जरूरी है। खासतौर पर मेरे देश के युवाओं को इनको पहचानने की जरूरत है और हमारी जेन जी को तो बहुत जल्दी समझना चाहिए, जल्दी समझो वरना अब सूर्यवंशी आया है, वो तेज गति से समझाता है।
साथियों,
यह लोग एक तरफ कहेंगे कि देश की सेनाओं को छूट नहीं है, हथियार नहीं मिल रहे हैं, लेकिन जब सरकार कोई डिफेंस डील करेगी, कोई आधुनिक हथियार खरीदती है, तो सबसे पहले आकर कहते हैं कि यह क्यों खरीदा? यह दुनिया भर में भारत की कूटनीति पर सवाल करेंगे, लेकिन जब भारत कूटनीति के लिए, सुरक्षा के लिए कहीं कोई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाने लगेगा, तो यह लोग ढोल-ढपली लेकर हल्ला मचाना शुरू कर देते हैं।

साथियों,
आज भारत जिस अहम कालखंड में है, इसमें ऐसे लोगों को पहचानना होगा, उनके कुतर्क को समझना होगा और उनसे सतर्क रहना बहुत जरूरी होगा। और आज दुर्भाग्य से, आज देश के मुख्य विपक्षी दल, कांग्रेस पर, ऐसे ही लोगों का कब्जा हो गया है। कांग्रेस कभी नेशन फर्स्ट की बात करेगी, यह सोचना भी अब झूठे सपने जैसा हो गया है। कल्पना ही नहीं कर सकते क्या कभी कांग्रेस में यह फिर से आएगी बात, जो गांधी जी के जमाने में थी।
साथियों,
आज दुनिया पुरानी धाराओं को चैलेंज कर रही है, डिसरप्शन्स की स्केल बहुत बड़ी हो गई है, लेकिन इसका एक और पक्ष है। यह चुनौतियां, नए अवसर भी ला रही है। भारत के हर युवा, हर उद्यमी, हर इनोवेटर, हर स्टार्टअप को, इन्हीं अवसरों पर फोकस करना है और इसमें सरकार, नेशन फर्स्ट की भावना के साथ पूरी तरह देश के लोगों के साथ है। भारत आज रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार हो चुका है। यह गति आगे और तेज होगी, मैं रिपब्लिक टीवी के इस मंच से देशवासियों से फिर कहूंगा कि हमारा सपना जितना बड़ा है, हमारे प्रयास भी उतने ही विराट होंगे और 140 करोड़ देशवासियों का यही साझा प्रयास, विकसित भारत बनाकर रहेगा। और आप सब लोग, मैं विश्वास से कहता हूं, अपनी आंखों से विकसित भारत देखने वाले हैं। आने वाली पीढ़ियों तक इंतजार करना पड़े, इस प्रकार से मैं काम नहीं करता, आप खुद अपनी आंखों से देखकर के जाएंगे। इसी विश्वास के साथ, मैं फिर एक बार रिपब्लिक टीवी को, उसके दर्शकों को और आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं! बहुत-बहुत धन्यवाद!


