Centre's free ration scheme will be extended by 5 more years: PM Modi in Ratlam

Published By : Admin | November 4, 2023 | 16:12 IST
Centre's free ration scheme, Pradhan Mantri Garib Kalyan Anna Yojana will be extended by 5 more years, says PM Modi in Ratlam
Be it the country or Madhya Pradesh, Congress is only left with false promises. Congress doesn't even know the roadmap for the development of Madhya Pradesh: PM Modi
In Ratlam, PM Modi says the bag of urea, which costs Rs 3,000 in foreign countries, today is available to Indian farmers for less than Rs 300
Congress leaders are filmy, their dialogues are also filmy. When the characters are filmy then the scene will also be filmy: PM Modi takes a dig at Congress leaders in Ratlam

भारत माता की...

भारत माता की...

मैं खाटूश्याम जी को शीश नवाकर प्रणाम करता हूं। श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ को भी मेरा प्रणाम। रतलाम की पहचान, स्वाद के लिए है। रतलाम आए और रतलामी सेव नहीं खाया तो उसे रतलाम आया माना नहीं जाता है। सही बात है ना? यही सच्चाई है ना? जब 3 दिसंबर को भाजपा सरकार की वापसी का जश्न मनेगा, तो लड्डू के साथ रतलामी सेव भी खूब खाया जाएगा।

मेरे परिवारजनों,
MP में भाजपा के समर्थन में चल रही ये आंधी अद्भुत है। जो लोग दिल्ली में बैठकर के गुणा-भाग करते रहते हैं ना आज उनका हिसाब-किताब बदल जाएगा। अब चर्चा ये नहीं होगी कौन जीतेगा? चर्चा ये होगी कि भाजपा दो तिहाई बहुमत लेगा या दो तिहाई बहुमत के कम रहेगा? ये भाजपा ही है जिसने MP को एग्रीकल्चर में इतना आगे बढ़ाया। ये भाजपा ही है जिसने MP को रोड और रेल नेटवर्क में इतना आगे बढ़ाया। ये भाजपा ही जिसने MP में औद्योगिक विकास किया, इसे आधुनिक शिक्षा का हब बनाया। इसलिए MP के लोग भाजपा पर अटूट विश्वास करते हैं। और भाजपा पर मध्य प्रदेश का ये भरोसा तब से है जब देश में भाजपा को बहुत कम लोग जानते थे। आज तो भाजपा, दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक दल है। आज केंद्र में करीब 10 साल से भाजपा की सरकार है। वो भाजपा सरकार, जिसने भारत को विश्व में 5वें नंबर की आर्थिक शक्ति बना दिया। वो भाजपा सरकार जिसने कोरोना के इतने बड़े महासंकट में देश को पिछड़ने नहीं दिया। वो भाजपा सरकार जिसके कार्यकाल में देश ने चंद्रमा पर अपना झंडा गाड़ा। आज भारत के गौरव को नई बुलंदी मिली है, नई पहचान मिली है। और इसमें मध्य प्रदेश का भी बहुत बड़ा योगदान है। इसलिए, लोग आज कहते हैं कि एमपी के मन में मोदी है और मोदी के मन में एमपी है। इसलिए, एमपी कह रहा है-
एक बार फिर... एक बार फिर... एक बार फिर... भाजपा सरकार !

मेरे परिवारजनों,
देश हो या फिर मध्य प्रदेश, कांग्रेस के पास सिर्फ झूठी घोषणाओं का भोंपू ही बच गया है। मध्य प्रदेश के विकास के लिए ठोस रोडमैप क्या होगा, ये कांग्रेस को पता तक नहीं है। इतनी दूर की कांग्रेस सोच ही नहीं सकती। कांग्रेस के नेता फिल्मी हैं। कांग्रेसियों के डायलॉग फिल्मी हैं। कांग्रेस की घोषणाएं भी फिल्मी हैं। और जब किरदार फिल्मी हैं, तब सीन भी तो फिल्मी ही होगा। यहां कांग्रेस के दो नेताओं के बीच, कपड़े फाड़ने का कंपटीशन चल रहा है। और अभी तो ये फिल्म का ट्रेलर है। ये अपने-अपने चेलों को बताते हैं कि एक बार अगर मौका मिल गया ना तो उसके वे खुद के तो फाड़ेंगे ही आपके भी फाड़ेंगे। 3 दिसंबर को भाजपा की जीत के बाद यहां कांग्रेस की असली पिक्चर दिखेगी, कांग्रेस की असली सिर-फुटव्वल होगी। अभी तो प्रैक्टिस चल रही है।

साथियों,
कांग्रेस की आपसी लड़ाई में हमें एक बात कभी भी भूलनी नहीं है। आप याद रखिए, ये जो आपस में गुथमगुत्था है ना, एक-दूसरे के कपड़े फाड़ रहे हैं ना। जहां भी उनको मौका मिला है ना उन्होंने जनता के ही कपड़े फाड़ दिए हैं और इनको अवसर देना बहुत बड़ा संकट होता है।

मेरे प्यारे परिवारजनों,
आप राजस्थान और छत्तीसगढ़ में देखिए, 5 साल तक इन्होंने इन राज्यों का क्या हाल कर के रखा दिया है। कांग्रेस मतलब राज्य में हजारों करोड़ के घोटाले, कांग्रेस मतलब राज्य में अपराधियों का बोल-बाला, कांग्रेस मतलब राज्य में गरीबों से विश्वासघात, कांग्रेस मतलब राज्य में दलितों-पिछड़ों-अदिवासियों पर अत्याचार, कांग्रेस मतलब राज्य को बीमार बनाने की गारंटी। कांग्रेस को ऐसे ही काम उनके चरित्र में बन गए उनके स्वभाव में बन गए उनके खून का हिस्सा बन गए। जानते हैं कि यहां के कांग्रेस के शीर्ष नेता आपस में क्यों लड़ रहे हैं? ये सीएम की कुर्सी के लिए नहीं लड़ रहे, उन्हें पता है कि MP में उनकी दाल गलने वाली नहीं है। इसलिए वे सीएम की कुर्सी के लिए नहीं ल़ड़ रहे हैं। ये जो अंदर गुत्थमगुत्थी चल रही है ना कपड़ा फाड़ काम चल रहा है ना, ये दोनों नेता तो अपने-अपने बेटों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं, कि आगे किसको मिलेगा। लड़ाई इस बात की है कि किसका बेटा, मध्य प्रदेश कांग्रेस पर कब्ज़ा करेगा। कांग्रेस सिर्फ परिवारवाद का परचम लहरा सकती है। मध्य प्रदेश का परचम लहराना कांग्रेस के बस की बात नहीं है।

साथियों,
भाजपा, आपके परिवार के वर्तमान, आपके बच्चों के भविष्य के लिए काम कर रही है। आपका सपना ही, मध्य प्रदेश के मेरे भाइयों और बहनों, मेरी गारंटी है आपका सपना ही मोदी का संकल्प है। इसलिए गरीब से गरीब परिवार को समर्थ बनाना भाजपा सरकार का मिशन है। इसलिए भाजपा सरकार, गरीब की हर चिंता का समाधान कर रही है, गरीब की हर छोटी-छोटी जरूरत को पूरा कर रही है। जैसे गरीब का बहुत बड़ा सपना होता है कि उसके पास अपना पक्का घर हो। जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तो गरीबों के घर बनाने में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं थी। ये भाजपा सरकार है जिसने पिछले 10 साल में 4 करोड़ से ज्यादा घर गरीबों को बनाकर के दिए हैं। मध्य प्रदेश में भी करीब-करीब 50 लाख गरीबों को पीएम आवास योजना के पक्के घर मिले हैं। यहां रतलाम में भी गरीबों के लिए 90 हजार घर बनाए गए हैं। ये लाखों रुपए के घर हैं और इनमें से अधिकतर घरों की रजिस्ट्री बहनों के नाम पर हुई है। और अब हमारा मध्य प्रदेश तो जब बहन को याद करो तो मामा याद आ ही जाता है। यानि, यहां की हज़ारों महिलाएं, लखपति बनी हैं, उनके नाम पर पहली बार कोई संपत्ति हुई है। हमारे शहरों में रहने वाले मध्यम वर्ग के लोगों का, अपने घर का सपना पूरा हो, इसके लिए भी केंद्र सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है। जिसकी 18 लाख रुपए की आय है, उसे घर खरीदने पर ब्याज में छूट देने वाली योजना चलाई जा रही है। और इस देश में आजादी के इतने सालों के बाद भी मध्यम वर्ग के लिए शहरी मध्यम वर्ग के लिए किसी सरकार ने योजना नहीं बनाई थी। ये मोदी पहला प्रधानमंत्री है जिसने इसकी चिंता की। इस योजना का लाभ लेने वाले मध्यम वर्ग के हर परिवार को लाखों रुपए की मदद हो रही है।

मेरे परिवारजनों,
जब मैं गरीबों की बात करता हूं, तो इसमें भी सबसे बड़ी संख्या, मेरे दलित भाई-बहन, मेरे पिछड़े भाई-बहन और मेरे आदिवासी परिवारों की रही है। ये भाजपा ही है जिसने कोरोना के संकट काल में भी गरीबों को मुफ्त राशन देने की योजना बनाई। एक वक्त के खाने की भूख क्या होती है, ये गरीबी से निकला व्यक्ति ही महसूस कर सकता है। देश की किसी मां को, किसी पिता को, अपने बच्चे को भूखा ना देखना पड़े, आज मोदी इसकी गारंटी बन गया है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत देश में पिछले तीन साल से गरीबों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है। मुफ्त राशन से जुड़ा एक और निश्चय, और मोदी तो गरीबी से निकला है ना, उसे मालूम है.. मेरा एक और निर्णय है, मेरा एक और निश्चय है। वैसे तो ये योजना एक महीने के बाद उसका समय पूरा हो रहा है। 80 करोड़ गरीबों को मुफ्त राशन देने वाली योजना दिसंबर में पूरी हो रही है, लेकिन मोदी का निश्चय है आने वाले पांच साल के लिए इसको बढ़ाया जाएगा। आने वाले पांच साल तक 80 करोड़ मेरे देशवासियों का चूल्हा जलता रहे। ये मोदी की गारंटी है। और अब ये योजना पांच साल के लिए आगे बढ़ेगी। गरीबों को राशन मुफ्त में मिलता रहेगा। उसे जो पैसे बचेंगे वो जीवन के और आवश्यकताओं के लिए मेरा गरीब लगाएगा। देश के हर गरीब को, हर माता-बहन को मोदी जब गारंटी देता है ना तो गारंटी पूरी करने की गारंटी साथ देकर आता है।

साथियों,
भाजपा की डबल इंजन सरकार की हर योजना के मूल में माताएं-बहनें और बेटियां हैं। शौचालय के अभाव में, गैस कनेक्शन के अभाव में, बिजली और पानी के अभाव में, सबसे अधिक परेशानी अगर किसी को होती है तो परिवार में हमारी माताओ, बहनों, और बेटियों को ही होती है। उज्जवला योजना के कारण आदिवासी परिवारों की, दलित-पिछड़े परिवारों की करोड़ों बहनों को धुएं से मुक्ति मिली है। और आपको कुछ ही दिन पहले रक्षाबंधन पर एक और खुशखबरी मैंने भेजी थी, उज्जवला की लाभार्थियों बहनों के लिए गैस सिलेंडर, 500 रुपए सस्ता कर दिया गया है। बहनों को पानी के लिए घर से दूर ना जाना पड़े, इसका बीड़ा भी आपके इस भाई ने ही उठाया है। हर घर जल अभियान, के तहत मध्य प्रदेश के लाखों परिवारों को नल से जल की सुविधा दी जा चुकी है। और वो दिन दूर नहीं, जब एमपी के हर घर में पाइप से पानी की सुविधा होगी।

साथियों,
डबल इंजन सरकार का क्या फायदा होता है, इसका एक और उदाहरण हमारे जनधन खाते हैं। मोदी ने महिलाओं के बैंकों में खाते खुलवाए, हर लाभ, उन बैंक खातों में पहुंचे इसकी व्यवस्था की। यहां मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने उन बैंक खातों के माध्यम से बहनों-बेटियों तक सीधी सहायता पहुंचाई। लाडली बहन योजना और लाडली लक्ष्मी योजना की प्रशंसा आज पूरे देश में हो रही है। गर्भवती माताओं को भी अच्छा पोषक आहार मिले, इसके लिए भी प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना चल रही है। इसके तहत भी मध्य प्रदेश की लाखों बहनों को 1600 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं।

मेरे परिवारजनों,
माताओं-बहनों के सशक्तिकरण की ये सच्ची कोशिश ही भाजपा सरकार की सही पहचान है। इसलिए भाजपा ने महिलाओं को दी गई अपनी एक-एक गारंटी पूरी की है। महिलाओं के लिए विधानसभा और लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग पर कांग्रेस बरसों तक बैठी रही। हमने नारीशक्ति वंदन अधिनियम लाकर महिलाओं की बरसों पुरानी मांग पूरी की। कांग्रेस तो ऐसी पार्टी है, जो एक परिवार से बाहर देख ही नहीं सकती। इसलिए आदिवासियों के सच्चे सशक्तिकरण के लिए भी उसने कभी काम नहीं किया। आप याद कीजिए, देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति जी का कांग्रेस ने कितना घनघोर विरोध किया था। भाजपा के ही एक पुराने नेता को उनके खिलाफ मैदान में उतारकर, कांग्रेस ने दिखाया कि वो आदिवासी बेटी को रोकने के लिए किस हद तक जा सकती है। इसलिए पूरे देश का आदिवासी समाज, कांग्रेस से बहुत नाराज़ है। कांग्रेस को सजा देने के मूड में है।

मेरे परिवारजनों,
आदिवासी हितों की रक्षा, आदिवासी भाई-बहनों का कल्याण, भाजपा की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। ये भाजपा है, जिसने देश की आजादी में आदिवासी समाज के योगदान को राष्ट्रीय पहचान दी है।
ये भाजपा सरकार ही है जिसने भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिन 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया है। कुछ दिन पहले ही हमने रानी दुर्गावती की 500वीं जन्म-जयंति को धूमधाम से मनाया है। मुझे जबलपुर में उनके भव्य स्मारक का, गोंड संस्कृति के स्मारक का शिलान्यास करने का अवसर मिला। मैं और शिवराज जी दोनों वहां जाकर के एक बहुत बड़े काम का आरंभ किया। आज भारत के आधुनिकतम रेलवे स्टेशन का नाम, रानी कमलापति के नाम पर है। आज जननायक टंट्याभील के नाम पर मध्य प्रदेश में अनेक संस्थान हैं, अनेक योजनाएँ हैं।

मेरे परिवारजनों,
भाजपा सरकार लोकल उत्पादों को देश-विदेश तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए, एक जिला, एक उत्‍पाद के तहत वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत रतलामी सेव को चुना गया है। यहां नमकीन क्‍लस्‍टर भी स्‍थापित किया गया है। जो नए औद्योगिक क्‍लस्‍टर बन रहे हैं, उससे भी छोटे-छोटे उद्योगों को बल मिलेगा। नए टेक्‍सटाइल पार्क से भी अनेक रोजगार बनने वाले हैं। भाजपा के शासन में 21वीं सदी का मध्य प्रदेश अब आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस हो रहा है। रतलाम से भी कभी 8 लेन का एक्सप्रेस वे होकर गुज़रेगा, पुरानी पीढ़ी ने ये सोचा भी नहीं होगा। लेकिन आज ये एक सच्चाई बन चुका है। दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस-वे की वजह से ये क्षेत्र कोटा और सूरत जैसे शहरों से भी कनेक्ट हो गया है। अब यहां उद्योगों के लिए नया गलियारा बनने जा रहा है। नया कॉरिडोर बनने जा रहा है। इससे यहां के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनने जा रहे हैं। इससे एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र के रूप में मालवा की, रतलाम की पहचान और सशक्त होगी।

मेरे परिवारजनों,
देश में ऐसा कोई नहीं है जिसे कांग्रेस ने कभी ठगा नहीं है। हर चुनाव में कांग्रेस, कर्जमाफी का झुनझुना लेकर आती रहती है। पिछली बार भी इन्होंने यही किया था। लेकिन कांग्रेस का इतिहास है कि कांग्रेस की कर्जमाफी का फायदा किसानों को नहीं कांग्रेसियों को उनके चेले चपाटों को ही मिलता है। जबकि भाजपा सरकार जो कहती है, वो करके दिखाती है। हम किसानों के हर छोटे-बड़े खर्चों की चिंता कर रहे हैं। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत देशभर के किसानों को 2 लाख 60 हज़ार करोड़ रुपए सीधे उनके बैंक खाते में भेजे गए हैं। मध्य प्रदेश में तो डबल इंजन सरकार के कारण, किसानों को डबल फायदा मिल रहा है। आज अनाज हो या फिर दलहन-तिलहन, कांग्रेस राज की तुलना में भाजपा सरकार, कहीं ज्यादा मात्रा में खरीद कर रही है। हाल ही में गेहूं, चना और दूसरी फसलों के MSP में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है। इसका लाभ भी मध्य प्रदेश के किसानों को होगा।
किसानों को महंगा यूरिया, महंगी खाद ना खरीदनी पड़े, इसके लिए भी भाजपा सरकार लगातार काम कर रही है। विदेशों में यूरिया की जो बोरी 3 हज़ार रुपए की है, आज वही बोरी भारत के किसानों को 300 रुपए से भी कम में मिलती है। इस पर भी भाजपा सरकार लाखों करोड़ रुपए खर्च कर रही है।

मेरे परिवारजनों,
समाज के हर वर्ग, हर क्षेत्र, हर परिवार के हित में जब ऐसे काम होते हैं, तभी भाजपा सरकार पर इतना अधिक भरोसा होता है। यहां रतलाम में जो कुछ मैं देख रहा हूं, वो भाजपा की प्रचंड विजय का उद्घोष है। साथियों मैं अभी छत्तीसगढ़ से आ रहा हूं। मेरा ये शब्द लिख लीजिए... छत्तीसगढ़ में भी भाजपा सरकार बनना तय है। लेकिन भाजपा की ये विजय सिर्फ सीटों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि शत-प्रतिशत बूथों में कमल खिलना चाहिए। आप इतनी बड़ी संख्या में आए। आपके दर्शन का मुझे सौभाग्य मिला। लेकिन मेरा एक काम यहां आए हैं तो करना पड़ेगा। करोगे? जो वहां टेंट के बाहर लोग बहुत खड़े हैं, सुन रहे हैं मेरी बात। जरा हाथ ऊपर करके बताइए मेरा काम करेंगे? मेरा एक काम करेगे आपलोग? ये वाले टेंट वाले भी करेंगे? ये वाले भी करेंगे? पक्का करेंगे? मैं भरोसा करूं? वाह.. तो मेरा ये काम करिए। ये जो मैं कह रहा हूं ना काम वो चुनावी काम नहीं है। करोगे ना? चुनाव के लिए नहीं कह रहा हूं मेरे लिए कह रहा हूं। करोगे पक्का? एक काम करिएगा। यहां से घर-घर जाइए.. और हर घर जाकर के कहिए कि मोदी जी रतलाम आए थे, मोदी जी ने आपको प्रणाम कहा है। इतना कह देंगे? मेरा प्रणाम पहुंचा देंगे? हर परिवार में जब मेरा प्रणाम पहुंचेगा वो माता वो बुजुर्ग, घरे के परिवार के मुखिया जब मुझे आशीर्वाद देते हैं ना तो काम करने की मेरी ताकत कई गुना बढ़ जाती है। साथियों आप इतनी बड़ी तादाद में आए, ये मोमेंटम बना रहे। मेरे साथ बोलिए भारत माता की...

भारत माता की...

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बहुत-बहुत धन्यवाद

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आप सभी को नमस्कार।

यहां हिंदुस्तान टाइम्स समिट में देश-विदेश से अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित हैं। मैं आयोजकों और जितने साथियों ने अपने विचार रखें, आप सभी का अभिनंदन करता हूं। अभी शोभना जी ने दो बातें बताई, जिसको मैंने नोटिस किया, एक तो उन्होंने कहा कि मोदी जी पिछली बार आए थे, तो ये सुझाव दिया था। इस देश में मीडिया हाउस को काम बताने की हिम्मत कोई नहीं कर सकता। लेकिन मैंने की थी, और मेरे लिए खुशी की बात है कि शोभना जी और उनकी टीम ने बड़े चाव से इस काम को किया। और देश को, जब मैं अभी प्रदर्शनी देखके आया, मैं सबसे आग्रह करूंगा कि इसको जरूर देखिए। इन फोटोग्राफर साथियों ने इस, पल को ऐसे पकड़ा है कि पल को अमर बना दिया है। दूसरी बात उन्होंने कही और वो भी जरा मैं शब्दों को जैसे मैं समझ रहा हूं, उन्होंने कहा कि आप आगे भी, एक तो ये कह सकती थी, कि आप आगे भी देश की सेवा करते रहिए, लेकिन हिंदुस्तान टाइम्स ये कहे, आप आगे भी ऐसे ही सेवा करते रहिए, मैं इसके लिए भी विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

इस बार समिट की थीम है- Transforming Tomorrow. मैं समझता हूं जिस हिंदुस्तान अखबार का 101 साल का इतिहास है, जिस अखबार पर महात्मा गांधी जी, मदन मोहन मालवीय जी, घनश्यामदास बिड़ला जी, ऐसे अनगिनत महापुरूषों का आशीर्वाद रहा, वो अखबार जब Transforming Tomorrow की चर्चा करता है, तो देश को ये भरोसा मिलता है कि भारत में हो रहा परिवर्तन केवल संभावनाओं की बात नहीं है, बल्कि ये बदलते हुए जीवन, बदलती हुई सोच और बदलती हुई दिशा की सच्ची गाथा है।

साथियों,

आज हमारे संविधान के मुख्य शिल्पी, डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर जी का महापरिनिर्वाण दिवस भी है। मैं सभी भारतीयों की तरफ से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

Friends,

आज हम उस मुकाम पर खड़े हैं, जब 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। इन 25 सालों में दुनिया ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। फाइनेंशियल क्राइसिस देखी हैं, ग्लोबल पेंडेमिक देखी हैं, टेक्नोलॉजी से जुड़े डिसरप्शन्स देखे हैं, हमने बिखरती हुई दुनिया भी देखी है, Wars भी देख रहे हैं। ये सारी स्थितियां किसी न किसी रूप में दुनिया को चैलेंज कर रही हैं। आज दुनिया अनिश्चितताओं से भरी हुई है। लेकिन अनिश्चितताओं से भरे इस दौर में हमारा भारत एक अलग ही लीग में दिख रहा है, भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। जब दुनिया में slowdown की बात होती है, तब भारत growth की कहानी लिखता है। जब दुनिया में trust का crisis दिखता है, तब भारत trust का pillar बन रहा है। जब दुनिया fragmentation की तरफ जा रही है, तब भारत bridge-builder बन रहा है।

साथियों,

अभी कुछ दिन पहले भारत में Quarter-2 के जीडीपी फिगर्स आए हैं। Eight परसेंट से ज्यादा की ग्रोथ रेट हमारी प्रगति की नई गति का प्रतिबिंब है।

साथियों,

ये एक सिर्फ नंबर नहीं है, ये strong macro-economic signal है। ये संदेश है कि भारत आज ग्लोबल इकोनॉमी का ग्रोथ ड्राइवर बन रहा है। और हमारे ये आंकड़े तब हैं, जब ग्लोबल ग्रोथ 3 प्रतिशत के आसपास है। G-7 की इकोनमीज औसतन डेढ़ परसेंट के आसपास हैं, 1.5 परसेंट। इन परिस्थितियों में भारत high growth और low inflation का मॉडल बना हुआ है। एक समय था, जब हमारे देश में खास करके इकोनॉमिस्ट high Inflation को लेकर चिंता जताते थे। आज वही Inflation Low होने की बात करते हैं।

साथियों,

भारत की ये उपलब्धियां सामान्य बात नहीं है। ये सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है, ये एक फंडामेंटल चेंज है, जो बीते दशक में भारत लेकर आया है। ये फंडामेंटल चेंज रज़ीलियन्स का है, ये चेंज समस्याओं के समाधान की प्रवृत्ति का है, ये चेंज आशंकाओं के बादलों को हटाकर, आकांक्षाओं के विस्तार का है, और इसी वजह से आज का भारत खुद भी ट्रांसफॉर्म हो रहा है, और आने वाले कल को भी ट्रांसफॉर्म कर रहा है।

साथियों,

आज जब हम यहां transforming tomorrow की चर्चा कर रहे हैं, हमें ये भी समझना होगा कि ट्रांसफॉर्मेशन का जो विश्वास पैदा हुआ है, उसका आधार वर्तमान में हो रहे कार्यों की, आज हो रहे कार्यों की एक मजबूत नींव है। आज के Reform और आज की Performance, हमारे कल के Transformation का रास्ता बना रहे हैं। मैं आपको एक उदाहरण दूंगा कि हम किस सोच के साथ काम कर रहे हैं।

साथियों,

आप भी जानते हैं कि भारत के सामर्थ्य का एक बड़ा हिस्सा एक लंबे समय तक untapped रहा है। जब देश के इस untapped potential को ज्यादा से ज्यादा अवसर मिलेंगे, जब वो पूरी ऊर्जा के साथ, बिना किसी रुकावट के देश के विकास में भागीदार बनेंगे, तो देश का कायाकल्प होना तय है। आप सोचिए, हमारा पूर्वी भारत, हमारा नॉर्थ ईस्ट, हमारे गांव, हमारे टीयर टू और टीय़र थ्री सिटीज, हमारे देश की नारीशक्ति, भारत की इनोवेटिव यूथ पावर, भारत की सामुद्रिक शक्ति, ब्लू इकोनॉमी, भारत का स्पेस सेक्टर, कितना कुछ है, जिसके फुल पोटेंशियल का इस्तेमाल पहले के दशकों में हो ही नहीं पाया। अब आज भारत इन Untapped पोटेंशियल को Tap करने के विजन के साथ आगे बढ़ रहा है। आज पूर्वी भारत में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और इंडस्ट्री पर अभूतपूर्व निवेश हो रहा है। आज हमारे गांव, हमारे छोटे शहर भी आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रहे हैं। हमारे छोटे शहर, Startups और MSMEs के नए केंद्र बन रहे हैं। हमारे गाँवों में किसान FPO बनाकर सीधे market से जुड़ें, और कुछ तो FPO’s ग्लोबल मार्केट से जुड़ रहे हैं।

साथियों,

भारत की नारीशक्ति तो आज कमाल कर रही हैं। हमारी बेटियां आज हर फील्ड में छा रही हैं। ये ट्रांसफॉर्मेशन अब सिर्फ महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, ये समाज की सोच और सामर्थ्य, दोनों को transform कर रहा है।

साथियों,

जब नए अवसर बनते हैं, जब रुकावटें हटती हैं, तो आसमान में उड़ने के लिए नए पंख भी लग जाते हैं। इसका एक उदाहरण भारत का स्पेस सेक्टर भी है। पहले स्पेस सेक्टर सरकारी नियंत्रण में ही था। लेकिन हमने स्पेस सेक्टर में रिफॉर्म किया, उसे प्राइवेट सेक्टर के लिए Open किया, और इसके नतीजे आज देश देख रहा है। अभी 10-11 दिन पहले मैंने हैदराबाद में Skyroot के Infinity Campus का उद्घाटन किया है। Skyroot भारत की प्राइवेट स्पेस कंपनी है। ये कंपनी हर महीने एक रॉकेट बनाने की क्षमता पर काम कर रही है। ये कंपनी, flight-ready विक्रम-वन बना रही है। सरकार ने प्लेटफॉर्म दिया, और भारत का नौजवान उस पर नया भविष्य बना रहा है, और यही तो असली ट्रांसफॉर्मेशन है।

साथियों,

भारत में आए एक और बदलाव की चर्चा मैं यहां करना ज़रूरी समझता हूं। एक समय था, जब भारत में रिफॉर्म्स, रिएक्शनरी होते थे। यानि बड़े निर्णयों के पीछे या तो कोई राजनीतिक स्वार्थ होता था या फिर किसी क्राइसिस को मैनेज करना होता था। लेकिन आज नेशनल गोल्स को देखते हुए रिफॉर्म्स होते हैं, टारगेट तय है। आप देखिए, देश के हर सेक्टर में कुछ ना कुछ बेहतर हो रहा है, हमारी गति Constant है, हमारी Direction Consistent है, और हमारा intent, Nation First का है। 2025 का तो ये पूरा साल ऐसे ही रिफॉर्म्स का साल रहा है। सबसे बड़ा रिफॉर्म नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी का था। और इन रिफॉर्म्स का असर क्या हुआ, वो सारे देश ने देखा है। इसी साल डायरेक्ट टैक्स सिस्टम में भी बहुत बड़ा रिफॉर्म हुआ है। 12 लाख रुपए तक की इनकम पर ज़ीरो टैक्स, ये एक ऐसा कदम रहा, जिसके बारे में एक दशक पहले तक सोचना भी असंभव था।

साथियों,

Reform के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए, अभी तीन-चार दिन पहले ही Small Company की डेफिनीशन में बदलाव किया गया है। इससे हजारों कंपनियाँ अब आसान नियमों, तेज़ प्रक्रियाओं और बेहतर सुविधाओं के दायरे में आ गई हैं। हमने करीब 200 प्रोडक्ट कैटगरीज़ को mandatory क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर से बाहर भी कर दिया गया है।

साथियों,

आज के भारत की ये यात्रा, सिर्फ विकास की नहीं है। ये सोच में बदलाव की भी यात्रा है, ये मनोवैज्ञानिक पुनर्जागरण, साइकोलॉजिकल रेनसां की भी यात्रा है। आप भी जानते हैं, कोई भी देश बिना आत्मविश्वास के आगे नहीं बढ़ सकता। दुर्भाग्य से लंबी गुलामी ने भारत के इसी आत्मविश्वास को हिला दिया था। और इसकी वजह थी, गुलामी की मानसिकता। गुलामी की ये मानसिकता, विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में एक बहुत बड़ी रुकावट है। और इसलिए, आज का भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पाने के लिए काम कर रहा है।

साथियों,

अंग्रेज़ों को अच्छी तरह से पता था कि भारत पर लंबे समय तक राज करना है, तो उन्हें भारतीयों से उनके आत्मविश्वास को छीनना होगा, भारतीयों में हीन भावना का संचार करना होगा। और उस दौर में अंग्रेजों ने यही किया भी। इसलिए, भारतीय पारिवारिक संरचना को दकियानूसी बताया गया, भारतीय पोशाक को Unprofessional करार दिया गया, भारतीय त्योहार-संस्कृति को Irrational कहा गया, योग-आयुर्वेद को Unscientific बता दिया गया, भारतीय अविष्कारों का उपहास उड़ाया गया और ये बातें कई-कई दशकों तक लगातार दोहराई गई, पीढ़ी दर पीढ़ी ये चलता गया, वही पढ़ा, वही पढ़ाया गया। और ऐसे ही भारतीयों का आत्मविश्वास चकनाचूर हो गया।

साथियों,

गुलामी की इस मानसिकता का कितना व्यापक असर हुआ है, मैं इसके कुछ उदाहरण आपको देना चाहता हूं। आज भारत, दुनिया की सबसे तेज़ी से ग्रो करने वाली मेजर इकॉनॉमी है, कोई भारत को ग्लोबल ग्रोथ इंजन बताता है, कोई, Global powerhouse कहता है, एक से बढ़कर एक बातें आज हो रही हैं।

लेकिन साथियों,

आज भारत की जो तेज़ ग्रोथ हो रही है, क्या कहीं पर आपने पढ़ा? क्या कहीं पर आपने सुना? इसको कोई, हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कहता है क्या? दुनिया की तेज इकॉनमी, तेज ग्रोथ, कोई कहता है क्या? हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कब कहा गया? जब भारत, दो-तीन परसेंट की ग्रोथ के लिए तरस गया था। आपको क्या लगता है, किसी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ को उसमें रहने वाले लोगों की आस्था से जोड़ना, उनकी पहचान से जोड़ना, क्या ये अनायास ही हुआ होगा क्या? जी नहीं, ये गुलामी की मानसिकता का प्रतिबिंब था। एक पूरे समाज, एक पूरी परंपरा को, अन-प्रोडक्टिविटी का, गरीबी का पर्याय बना दिया गया। यानी ये सिद्ध करने का प्रयास किया गया कि, भारत की धीमी विकास दर का कारण, हमारी हिंदू सभ्यता और हिंदू संस्कृति है। और हद देखिए, आज जो तथाकथित बुद्धिजीवी हर चीज में, हर बात में सांप्रदायिकता खोजते रहते हैं, उनको हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ में सांप्रदायिकता नज़र नहीं आई। ये टर्म, उनके दौर में किताबों का, रिसर्च पेपर्स का हिस्सा बना दिया गया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने भारत में मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम को कैसे तबाह कर दिया, और हम इसको कैसे रिवाइव कर रहे हैं, मैं इसके भी कुछ उदाहरण दूंगा। भारत गुलामी के कालखंड में भी अस्त्र-शस्त्र का एक बड़ा निर्माता था। हमारे यहां ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीज़ का एक सशक्त नेटवर्क था। भारत से हथियार निर्यात होते थे। विश्व युद्धों में भी भारत में बने हथियारों का बोल-बाला था। लेकिन आज़ादी के बाद, हमारा डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम तबाह कर दिया गया। गुलामी की मानसिकता ऐसी हावी हुई कि सरकार में बैठे लोग भारत में बने हथियारों को कमजोर आंकने लगे, और इस मानसिकता ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े डिफेंस importers के रूप में से एक बना दिया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री के साथ भी यही किया। भारत सदियों तक शिप बिल्डिंग का एक बड़ा सेंटर था। यहां तक कि 5-6 दशक पहले तक, यानी 50-60 साल पहले, भारत का फोर्टी परसेंट ट्रेड, भारतीय जहाजों पर होता था। लेकिन गुलामी की मानसिकता ने विदेशी जहाज़ों को प्राथमिकता देनी शुरु की। नतीजा सबके सामने है, जो देश कभी समुद्री ताकत था, वो अपने Ninety five परसेंट व्यापार के लिए विदेशी जहाज़ों पर निर्भर हो गया है। और इस वजह से आज भारत हर साल करीब 75 बिलियन डॉलर, यानी लगभग 6 लाख करोड़ रुपए विदेशी शिपिंग कंपनियों को दे रहा है।

साथियों,

शिप बिल्डिंग हो, डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग हो, आज हर सेक्टर में गुलामी की मानसिकता को पीछे छोड़कर नए गौरव को हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने एक बहुत बड़ा नुकसान, भारत में गवर्नेंस की अप्रोच को भी किया है। लंबे समय तक सरकारी सिस्टम का अपने नागरिकों पर अविश्वास रहा। आपको याद होगा, पहले अपने ही डॉक्यूमेंट्स को किसी सरकारी अधिकारी से अटेस्ट कराना पड़ता था। जब तक वो ठप्पा नहीं मारता है, सब झूठ माना जाता था। आपका परिश्रम किया हुआ सर्टिफिकेट। हमने ये अविश्वास का भाव तोड़ा और सेल्फ एटेस्टेशन को ही पर्याप्त माना। मेरे देश का नागरिक कहता है कि भई ये मैं कह रहा हूं, मैं उस पर भरोसा करता हूं।

साथियों,

हमारे देश में ऐसे-ऐसे प्रावधान चल रहे थे, जहां ज़रा-जरा सी गलतियों को भी गंभीर अपराध माना जाता था। हम जन-विश्वास कानून लेकर आए, और ऐसे सैकड़ों प्रावधानों को डी-क्रिमिनलाइज किया है।

साथियों,

पहले बैंक से हजार रुपए का भी लोन लेना होता था, तो बैंक गारंटी मांगता था, क्योंकि अविश्वास बहुत अधिक था। हमने मुद्रा योजना से अविश्वास के इस कुचक्र को तोड़ा। इसके तहत अभी तक 37 lakh crore, 37 लाख करोड़ रुपए की गारंटी फ्री लोन हम दे चुके हैं देशवासियों को। इस पैसे से, उन परिवारों के नौजवानों को भी आंत्रप्रन्योर बनने का विश्वास मिला है। आज रेहड़ी-पटरी वालों को भी, ठेले वाले को भी बिना गारंटी बैंक से पैसा दिया जा रहा है।

साथियों,

हमारे देश में हमेशा से ये माना गया कि सरकार को अगर कुछ दे दिया, तो फिर वहां तो वन वे ट्रैफिक है, एक बार दिया तो दिया, फिर वापस नहीं आता है, गया, गया, यही सबका अनुभव है। लेकिन जब सरकार और जनता के बीच विश्वास मजबूत होता है, तो काम कैसे होता है? अगर कल अच्छी करनी है ना, तो मन आज अच्छा करना पड़ता है। अगर मन अच्छा है तो कल भी अच्छा होता है। और इसलिए हम एक और अभियान लेकर आए, आपको सुनकर के ताज्जुब होगा और अभी अखबारों में उसकी, अखबारों वालों की नजर नहीं गई है उस पर, मुझे पता नहीं जाएगी की नहीं जाएगी, आज के बाद हो सकता है चली जाए।

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि आज देश के बैंकों में, हमारे ही देश के नागरिकों का 78 thousand crore रुपया, 78 हजार करोड़ रुपए Unclaimed पड़ा है बैंको में, पता नहीं कौन है, किसका है, कहां है। इस पैसे को कोई पूछने वाला नहीं है। इसी तरह इन्श्योरेंश कंपनियों के पास करीब 14 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। म्यूचुअल फंड कंपनियों के पास करीब 3 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। 9 हजार करोड़ रुपए डिविडेंड का पड़ा है। और ये सब Unclaimed पड़ा हुआ है, कोई मालिक नहीं उसका। ये पैसा, गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों का है, और इसलिए, जिसके हैं वो तो भूल चुका है। हमारी सरकार अब उनको ढूंढ रही है देशभर में, अरे भई बताओ, तुम्हारा तो पैसा नहीं था, तुम्हारे मां बाप का तो नहीं था, कोई छोड़कर तो नहीं चला गया, हम जा रहे हैं। हमारी सरकार उसके हकदार तक पहुंचने में जुटी है। और इसके लिए सरकार ने स्पेशल कैंप लगाना शुरू किया है, लोगों को समझा रहे हैं, कि भई देखिए कोई है तो अता पता। आपके पैसे कहीं हैं क्या, गए हैं क्या? अब तक करीब 500 districts में हम ऐसे कैंप लगाकर हजारों करोड़ रुपए असली हकदारों को दे चुके हैं जी। पैसे पड़े थे, कोई पूछने वाला नहीं था, लेकिन ये मोदी है, ढूंढ रहा है, अरे यार तेरा है ले जा।

साथियों,

ये सिर्फ asset की वापसी का मामला नहीं है, ये विश्वास का मामला है। ये जनता के विश्वास को निरंतर हासिल करने की प्रतिबद्धता है और जनता का विश्वास, यही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। अगर गुलामी की मानसिकता होती तो सरकारी मानसी साहबी होता और ऐसे अभियान कभी नहीं चलते हैं।

साथियों,

हमें अपने देश को पूरी तरह से, हर क्षेत्र में गुलामी की मानसिकता से पूर्ण रूप से मुक्त करना है। अभी कुछ दिन पहले मैंने देश से एक अपील की है। मैं आने वाले 10 साल का एक टाइम-फ्रेम लेकर, देशवासियों को मेरे साथ, मेरी बातों को ये कुछ करने के लिए प्यार से आग्रह कर रहा हूं, हाथ जोड़कर विनती कर रहा हूं। 140 करोड़ देशवसियों की मदद के बिना ये मैं कर नहीं पाऊंगा, और इसलिए मैं देशवासियों से बार-बार हाथ जोड़कर कह रहा हूं, और 10 साल के इस टाइम फ्रैम में मैं क्या मांग रहा हूं? मैकाले की जिस नीति ने भारत में मानसिक गुलामी के बीज बोए थे, उसको 2035 में 200 साल पूरे हो रहे हैं, Two hundred year हो रहे हैं। यानी 10 साल बाकी हैं। और इसलिए, इन्हीं दस वर्षों में हम सभी को मिलकर के, अपने देश को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करके रहना चाहिए।

साथियों,

मैं अक्सर कहता हूं, हम लीक पकड़कर चलने वाले लोग नहीं हैं। बेहतर कल के लिए, हमें अपनी लकीर बड़ी करनी ही होगी। हमें देश की भविष्य की आवश्यकताओं को समझते हुए, वर्तमान में उसके हल तलाशने होंगे। आजकल आप देखते हैं कि मैं मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान पर लगातार चर्चा करता हूं। शोभना जी ने भी अपने भाषण में उसका उल्लेख किया। अगर ऐसे अभियान 4-5 दशक पहले शुरू हो गए होते, तो आज भारत की तस्वीर कुछ और होती। लेकिन तब जो सरकारें थीं उनकी प्राथमिकताएं कुछ और थीं। आपको वो सेमीकंडक्टर वाला किस्सा भी पता ही है, करीब 50-60 साल पहले, 5-6 दशक पहले एक कंपनी, भारत में सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने के लिए आई थी, लेकिन यहां उसको तवज्जो नहीं दी गई, और देश सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में इतना पिछड़ गया।

साथियों,

यही हाल एनर्जी सेक्टर की भी है। आज भारत हर साल करीब-करीब 125 लाख करोड़ रुपए के पेट्रोल-डीजल-गैस का इंपोर्ट करता है, 125 लाख करोड़ रुपया। हमारे देश में सूर्य भगवान की इतनी बड़ी कृपा है, लेकिन फिर भी 2014 तक भारत में सोलर एनर्जी जनरेशन कपैसिटी सिर्फ 3 गीगावॉट थी, 3 गीगावॉट थी। 2014 तक की मैं बात कर रहा हूं, जब तक की आपने मुझे यहां लाकर के बिठाया नहीं। 3 गीगावॉट, पिछले 10 वर्षों में अब ये बढ़कर 130 गीगावॉट के आसपास पहुंच चुकी है। और इसमें भी भारत ने twenty two गीगावॉट कैपेसिटी, सिर्फ और सिर्फ rooftop solar से ही जोड़ी है। 22 गीगावाट एनर्जी रूफटॉप सोलर से।

साथियों,

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने, एनर्जी सिक्योरिटी के इस अभियान में देश के लोगों को सीधी भागीदारी करने का मौका दे दिया है। मैं काशी का सांसद हूं, प्रधानमंत्री के नाते जो काम है, लेकिन सांसद के नाते भी कुछ काम करने होते हैं। मैं जरा काशी के सांसद के नाते आपको कुछ बताना चाहता हूं। और आपके हिंदी अखबार की तो ताकत है, तो उसको तो जरूर काम आएगा। काशी में 26 हजार से ज्यादा घरों में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के सोलर प्लांट लगे हैं। इससे हर रोज, डेली तीन लाख यूनिट से अधिक बिजली पैदा हो रही है, और लोगों के करीब पांच करोड़ रुपए हर महीने बच रहे हैं। यानी साल भर के साठ करोड़ रुपये।

साथियों,

इतनी सोलर पावर बनने से, हर साल करीब नब्बे हज़ार, ninety thousand मीट्रिक टन कार्बन एमिशन कम हो रहा है। इतने कार्बन एमिशन को खपाने के लिए, हमें चालीस लाख से ज्यादा पेड़ लगाने पड़ते। और मैं फिर कहूंगा, ये जो मैंने आंकडे दिए हैं ना, ये सिर्फ काशी के हैं, बनारस के हैं, मैं देश की बात नहीं बता रहा हूं आपको। आप कल्पना कर सकते हैं कि, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, ये देश को कितना बड़ा फायदा हो रहा है। आज की एक योजना, भविष्य को Transform करने की कितनी ताकत रखती है, ये उसका Example है।

वैसे साथियों,

अभी आपने मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग के भी आंकड़े देखे होंगे। 2014 से पहले तक हम अपनी ज़रूरत के 75 परसेंट मोबाइल फोन इंपोर्ट करते थे, 75 परसेंट। और अब, भारत का मोबाइल फोन इंपोर्ट लगभग ज़ीरो हो गया है। अब हम बहुत बड़े मोबाइल फोन एक्सपोर्टर बन रहे हैं। 2014 के बाद हमने एक reform किया, देश ने Perform किया और उसके Transformative नतीजे आज दुनिया देख रही है।

साथियों,

Transforming tomorrow की ये यात्रा, ऐसी ही अनेक योजनाओं, अनेक नीतियों, अनेक निर्णयों, जनआकांक्षाओं और जनभागीदारी की यात्रा है। ये निरंतरता की यात्रा है। ये सिर्फ एक समिट की चर्चा तक सीमित नहीं है, भारत के लिए तो ये राष्ट्रीय संकल्प है। इस संकल्प में सबका साथ जरूरी है, सबका प्रयास जरूरी है। सामूहिक प्रयास हमें परिवर्तन की इस ऊंचाई को छूने के लिए अवसर देंगे ही देंगे।

साथियों,

एक बार फिर, मैं शोभना जी का, हिन्दुस्तान टाइम्स का बहुत आभारी हूं, कि आपने मुझे अवसर दिया आपके बीच आने का और जो बातें कभी-कभी बताई उसको आपने किया और मैं तो मानता हूं शायद देश के फोटोग्राफरों के लिए एक नई ताकत बनेगा ये। इसी प्रकार से अनेक नए कार्यक्रम भी आप आगे के लिए सोच सकते हैं। मेरी मदद लगे तो जरूर मुझे बताना, आईडिया देने का मैं कोई रॉयल्टी नहीं लेता हूं। मुफ्त का कारोबार है और मारवाड़ी परिवार है, तो मौका छोड़ेगा ही नहीं। बहुत-बहुत धन्यवाद आप सबका, नमस्कार।