ଆଷାଢ଼ ପୂର୍ଣ୍ଣିମା-ଧମ୍ମ ଚକ୍ର ଦିବସ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ବାର୍ତ୍ତା
କରୋନା ମହାମାରୀ ସମୟରେ ଭଗବାନ ବୁଦ୍ଧଙ୍କର ଅଧିକ ପ୍ରାସଙ୍ଗିକତା ରହିଛି: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ଆମେ ବୁଦ୍ଧଙ୍କ ମାର୍ଗରେ ଯାଇ ସବୁଠୁ କଠିନ ଆହ୍ୱାନର ମଧ୍ୟ କିଭଳି ସାମ୍ନାକୁ କରିପାରିବା, ତାହା ଭାରତ କରିଦେଖାଇଛି: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ସଂକଟ ସମୟରେ ସାରା ବିଶ୍ୱ ତାଙ୍କ ବାଣୀଗୁଡ଼ିକରେ ଥିବା ଶକ୍ତିର ଅନୁଭବ କରିଛି: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ

ନମୋ ବୁଦ୍ଧାୟା!

ନମୋ ଗୁରୁଭ୍ୟୋ!

ମାନନୀୟ ରାଷ୍ଟ୍ରପତି, ଅନ୍ୟ ଅତିଥିବୃନ୍ଦ, ଦେବୀ ଓ ସଜ୍ଜନ!

 

ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଧମ୍ମ ଚକ୍ର ଦିବସ ଓ ଆଷାଢ଼ ପୂର୍ଣ୍ଣିମା ଅବସରରେ ଅନେକ ଅନେକ ଅଭିନନ୍ଦନ । ଆଜି ଆମେ ଗୁରୁ ପୂର୍ଣ୍ଣିମା ମଧ୍ୟ ପାଳନ କରୁଛେ, ଏବଂ ଆଜିର ଦିନରେ ଭଗବାନ ବୁଦ୍ଧ ମହାଜ୍ଞାନ ପ୍ରାପ୍ତି କରିବା ପରେ ନିଜର ପ୍ରଥମ ଜ୍ଞାନ ସଂସାରକୁ ପ୍ରଦାନ କରିଥିଲେ । ଆମ ଦେଶରେ କୁହାଯାଇଛି ଯେ, ଯେଉଁଠି ଜ୍ଞାନ ଅଛି ସେଇଠି ପରିପୂର୍ଣ୍ଣତା ଅଛି । ଏବଂ ପ୍ରଚାରକ ଯେବେ ନିଜେ ବୁଦ୍ଧ ହୁଅନ୍ତି, ସେତେବେଳେ ଏହା ସ୍ୱାଭାବିକ ହୋଇଥାଏ ଯେ ଏହି ଦର୍ଶନ ବିଶ୍ୱର କଲ୍ୟାଣ ସହ ସମାନାର୍ଥକ ପାଲଟିଯାଏ । ତ୍ୟାଗ ଓ ସହନଶୀଳତାର ନିଅାଁରେ ଜଳି ବୁଦ୍ଧ ଯେବେ କୁହନ୍ତି, ତେବେ ତାଙ୍କ ମୁହଁରୁ କେବଳ ଶବ୍ଦ ବାହାରି ନ ଥାଏ, ବରଂ ଧମ୍ମ ଚକ୍ରର ପ୍ରାରମ୍ଭ ହୋଇଥାଏ । ସେତେବେଳେ ସେ ନିଜର କେବଳ ୫ ଶିଷ୍ୟଙ୍କୁ ଉପଦେଶ ପ୍ରଦାନ କରିଥିଲେ, କିନ୍ତୁ ଆଜି ପୂରା ବିଶ୍ୱ ତାଙ୍କ ଦର୍ଶନର ଅନୁଗାମୀ, ବୁଦ୍ଧରେ ଆସ୍ଥା ରଖୁଥିବା ଲୋକ ।

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ସାରନାଥରେ ଭଗବାନ ବୁଦ୍ଧ ପୂରା ଜୀବନର, ପୂରା ଜ୍ଞାନର ସୂତ୍ର ଆମକୁ ବତାଇଛନ୍ତି । ସେ ଦୁଃଖ ସମ୍ପର୍କରେ ଆମକୁ କହିଥିଲେ, ଦୁଃଖର କାରଣ କ’ଣ ତାହା ବୁଝାଇଥିଲେ, ଦୁଃଖଗୁଡ଼ିକ ଉପରେ କିଭଳି ବିଜୟ ମିଳିବ, ତାହା ବାବଦରେ ମଧ୍ୟ ବର୍ଣ୍ଣନା କରିଥିଲେ । ଏହି ବିଜୟ କିଭଳି ମିଳିବ, ତାହାର ରାସ୍ତା ବତାଇଥିଲେ ବୁଦ୍ଧ । ଭଗବାନ ବୁଦ୍ଧ ଆମକୁ ଜୀବନ ପାଇଁ ଅଷ୍ଟାଙ୍ଗ ସୂତ୍ର, ଆଠ ମନ୍ତ୍ର ପ୍ରଦାନ କରିଥିଲେ । ସେଗୁଡ଼ିକ ହେଉଛି ‘ସମ୍ମାଦିଠି’ (ଭଲ ଭାବେ ବୁଝିବା), ‘ସମ୍ମାସଂକପ୍ପା’ (ଠିକ ପ୍ରତିକାର), ‘ସମ୍ମାବଚା’ (ସୁବଚନ), ‘ସମ୍ମାକାମାନ୍ତ’ (ଉଚିତ ବ୍ୟବହାର), ସମ୍ମା ଆଜିଭା’ (ଉଚିତ ଜୀବିକା), ‘ସମ୍ମା ବାୟାମ’ (ଠିକ ଉଦ୍ୟମ), ‘ସମ୍ମା ସତୀ’ (ଉତ୍ତମ ମନ), ଏବଂ ‘ସମ୍ମା ସମାଧି’ (ଉଚିତ ଏକାଗ୍ରତା ସମାହିତ ଅଥବା ସଂଯୋଜନ ) । ମନ, ବାଣୀ ଓ ସଂକଳ୍ପରେ ଆମେ କର୍ମ ଓ ପ୍ରୟାସରେ ଯଦି ସନ୍ତୁଳନ ରଖିବା, ତେବେ ଆମେ ଦୁଃଖରୁ ବାହାରି ପ୍ରଗତି ଏବଂ ସୁଖକୁ ହାସଲ କରିପାରିବା । ଏହି ସନ୍ତୁଳନକୁ ଆମକୁ ସୁସମୟରେ ଜନ କଲ୍ୟାଣର ପ୍ରେରଣା ଦେଇଥାଏ, ଏବଂ ପ୍ରତିକୂଳ ପରିସ୍ଥିତିରେ ଧୈର୍ଯ୍ୟ ଧରିବା ପାଇଁ ଶକ୍ତି ପ୍ରଦାନ କରିଥାଏ ।

ବନ୍ଧୁଗଣ!

ଆଜି କରୋନା ମହାମାରୀ ସମୟରେ ଭଗବାନ ବୁଦ୍ଧ ପୁଣି ଅଧିକ ପ୍ରାସଙ୍ଗିକ ହୋଇଯାଇଛନ୍ତି । ବୁଦ୍ଧଙ୍କ ମାର୍ଗରେ ପରିଚାଳିତ ହୋଇ ଆମେ କେମିତି ସବୁଠୁ କଠିନ ପରିସ୍ଥିତିର ସାମ୍ନା କରିପାରିବା, ତାହା ଭାରତ କରିଦେଖାଇଛି । ଆଜି ସମସ୍ତ ଦେଶ ଏକତ୍ର ହୋଇ ଆଗକୁ ବଢୁଛନ୍ତି ଏବଂ ବୁଦ୍ଧଙ୍କ ବାଣୀକୁ ପାଥେୟ କରି ପରସ୍ପରର ଶକ୍ତି ବନୁଛନ୍ତି । ଏହିଭଳି ପରିପ୍ରେକ୍ଷୀରେ ଅନ୍ତର୍ଜାତୀୟ ବୌଦ୍ଧ ମହାସଂଘର ‘ପ୍ରାର୍ଥନା ସହ ଯତ୍ନ’ ବେଶ୍ ପ୍ରଶଂସାଯୋଗ୍ୟ ହୋଇଛି ।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଧମ୍ମପଦ କୁହେ-

ନ ହି ୱେରେନ୍ ୱେରାନି,

ସମ୍ମନ୍ତିଧ କୁଦାଚନମ୍ ।

ଅୱେରେନ ଚ ସମ୍ମାନ୍ତି,

ଏସ ଧମ୍ମୋ ସନନ୍ତତୋ  । ।

 

ଅର୍ଥାତ, ଶତ୍ରୁତା ଦ୍ୱାରା ଶତ୍ରୁତା ଶାନ୍ତ ପଡ଼ି ନ ଥାଏ । ବରଂ ପ୍ରେମ ଓ ବିଶାଳ ହୃଦୟ ଦ୍ୱାରା ଶତ୍ରୁତାର ଅନ୍ତ ଘଟିଥାଏ । ଦୁଃଖ ସମୟରେ, ବିଶ୍ୱ ଏହି ପ୍ରେମ ଓ ସଦଭାବର ଶକ୍ତିକୁ ଭଲ ଭାବେ ଅନୁଭବ କରିଛି । ବୁଦ୍ଧଙ୍କର ଏହି ଜ୍ଞାନ, ମାନବତାର ଏହି ଅନୁଭୂତି ଅଧିକ ସମୃଦ୍ଧ ହୋଇଚାଲିଲେ, ସଫଳତା ଓ ସମୃଦ୍ଧିର ନୂଆ ଉଚ୍ଚତାକୁ ବିଶ୍ୱ ଛୁଇଁପାରିବ ।

 

ଏହି ଶୁଭେଚ୍ଛା ସହ, ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଆଉଥରେ ଅନେକ ଅଭିନନ୍ଦନ ଜଣାଉଛି! ସୁସ୍ଥ ରୁହନ୍ତୁ ଏବଂ ମାନବତାର ସେବା କରନ୍ତୁ!

 

ଧନ୍ୟବାଦ!

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August 10, 2026

प्रधानमंत्री – मेरे यहां, मुझे यहां लगभग 12-13 साल हो गए इसी मकान में, अगर मैंने regularly और हर बार किसी को रिसिव किया है, किसी को मैं मिला हूं, तो खिलाड़ी हैं। पिछले 10-12 साल हो गए, आप लोगों के पुरुषार्थ के कारण, भारत को लगातार विजय दिलाने के आपके प्रयासों के कारण और उत्तरोत्तर सफलता में नई ऊंचाईयां पार करने की परंपरा के कारण, जो काम शायद हम स्कूलों में जाकर कहें कि नहीं नहीं भई खेलना चाहिए, ये करना चाहिए, वो काम स्कूलों में जाकर के हम कर सकते थे, उससे ज्यादा आपका मेडल उनको inspire करता है।

प्रधानमंत्री – तुमने मुझे वादा किया था पिछली बार कि तुम्हारी दोनों बेटियां खिलाड़ी बन जाएंगी?

खिलाड़ी - हाँ जी अभी वे उमर की छोटी हैं, अगले कॉमनवेल्थ में एक घर में तीन मेडल लाकर दिखाएंगी।

प्रधानमंत्री – पक्का।

खिलाड़ी – हाँ जी।

खिलाड़ी – जब मैं दौड़ रहा था, जब मेरा इवेंट था 29 को, तो उस दिन गुरुपूर्णिमा थी, तो उस दिन मेरे गुरू को मैंने एक गिफ्ट दे दिया।

प्रधानमंत्री – बड़ी शान बढ़ाई आपने। इतनी आंसू टपक रहे थे, मुझे लगता है कि आंसू के हर बूंद से जैसे गोल्ड मेडल टपक रहा है।

खिलाड़ी – मैं बहुत ज्यादा खुशी थी, इमोशनल भी थे उसी दिन, खुशी ज्यादा था और मैं इसलिए रोई थी कि मेरा पेरिस आलंपिक में मेरा 1 Kg में मेडल रह गई थी और एक प्लेयर्स की लाइफ में क्या क्या हमको फेस करना पड़ता है। तो ये 4 साल के अंदर में कितना क्या क्या कुछ मैंने फेस किया था, हर टाइम injury ही चल रहे थे और family problem, वो सब हो रहा था। तो बहुत मुश्किल से मैं ये 4 साल फेस किया था। तो वो सब जब पोडियम में जब मैं खड़ी थी सर और हमारी जो फ्लैग ऊपर जाते हैं और हमारे नेशनल एंथम जब बजते हैं तो सर हम रुक नहीं सकते सर, अपना आप आंसू निकलते हैं।

प्रधानमंत्री – बहुत बहुत बढ़िया

प्रधानमंत्री – आपके इस अचीवमेंट को सिर्फ आपका अचीवमेंट मानता हूं, ऐसा नहीं है, ये आपका विजय आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन जाता है।

खिलाड़ी – सब डर रहे थे हमसे कि इंडिया के साथ फाइट आ गई, अब तो हम पहली फाइट ही हार जायेंगे, हमारा मेडल भी नहीं आयेगा।

प्रधानमंत्री – यानी मान के चलते हैं।

खिलाड़ी – हाँ सर।

प्रधानमंत्री – क्या हुआ, वो restaurant वालों से झगड़ा कर रही थी?

खिलाड़ी – हम लोगों का जो इतना अच्छा परफॉर्मेंस था, लास्ट डे था और सब जीत के गए थे और पूरा इंडिया के लोग थे। तो थोड़ा सा मुझे बुरा लग रहा। तो मैंने उनको अच्छे से बोला रिक्वेस्ट किया था सर, फिर उन्होंने मान भी लिया, अभी चेंज भी हो गया सर।

प्रधानमंत्री – इस विजय की परिस्थिति खुशी, आनंद, अपने साथियों के साथ और गेम पूरे हो चुके हैं। तो हसी मजाक मस्ती का मूड ऐसे समय उस मैप पर नजर जाना और उसको रजिस्टर करना और तुरंत सिर्फ मेडल लेते समय देश खड़ा हो जाता है ऐसा नहीं, भीतर से देश का भाव मैं सच बताता हूँ ये वीडियो सामान्य नहीं है आपका, लंबे समय तक लोगों को याद रहेगा। ये बॉक्सिंग वालों से भी दुनिया के खिलाड़ी अब डरने लगे हैं।

खिलाड़ी – जरूर सर, पुरे सभी डरे हुए थे। एक के बाद एक गोल्ड मेडल गोल्ड मेडल आ रहे थे और मतलब पूरा लास्ट में ऐसे धमाका जैसा हो गया बिल्कुल। जिस तरीके से हम लोगों को सपोर्ट मिल रहा है, हमें बैक टू बैक कंपटीशन मिल रहा है वो एक बहुत बड़ी बात है और हमारे जितने भी यंग एथलीट है वो लोग सभी जैसे खेलो इंडिया स्कीम से आए हुए हैं और ये एक बहुत बड़ा changes ला रहा है पूरे स्पोर्ट्स में ही।

प्रधानमंत्री – अगर आप लोग खेलो इंडिया की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं और प्रतिष्ठा सिर्फ वहां जाकर के रिबिन काटने से नहीं होगी। आप वैसे ही खेलेंगे जैसे एक छोटा विद्यार्थी, एक छोटा नौजवान, छोटा खिलाड़ी खेलता है। यह बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन करेगा। क्योंकि अभी तो हमें बहुत आगे जाना है, बहुत मेडल लाना है। कारगिल विजय दिवस पर किसकी विजय हुई थी?

खिलाड़ी – उस दिन कारगिल डे था वैसे और जिस दिन मैंने पाकिस्तान के साथ फाइट किया था सर, वो उसी दिन का था। तो मैं एक इंडियन आर्मी से हूं, तो मैंने उस दिन मैं पहले से बहुत वो था कि सर पाकिस्तान को हराना है। तो मैंने वो पाकिस्तान एक तरफ मैंने 5-0 से हराया, तो मैंने हमारा इंडियन आर्मी का कारगिल हीरोज़ को मैंने डेडिकेट किया किया था सर।

प्रधानमंत्री – आपको यह याद रहना और आप स्वयं फौज से हैं तो, मैं जरूर मानता हूं कि देश के वीर जवानों को आपने जो भाव प्रकट किया ना कि, मैं कारगिल के विजेताओं को मेरा मेडल समर्पित करता हूं। उसने उस विजय पर चार चांद लगा दिए और जिसको पराजित करना था उसी को किया आपने।

खिलाड़ी – वो पाकिस्तान की बात चल रही है, मुझे किस्सा याद आ गया सर। 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे और मेरी पाकिस्तान के साथ पहली फाइट आ गई थी और वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे तो मिलिट्री वाले के फोन आए कि भई पाकिस्तान से नहीं हारना है। तो फिर मैं फर्स्ट राउंड 4-1 से जीत गया। सेकंड राउंड 3-2 से जीत गया, पर दोनों के सर लग गए आपस में, तो दोनों के लग गए कट और फाइट तो मैं जीत गया।

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – उसके बाद फिर दोनों चले गए हॉस्पिटल में टांके लगवाने के लिए। फिर 2014 में आप फर्स्ट टाइम प्रधानमंत्री जी बने थे और जो हमारे साथ आर्मी का कोच गया हुआ था उसका नाम नरेंद्र राणा था और फिर वो कई देर तक सोच के मेरे को बोला कि भाईजान एक बात बोलूं, मैं हां बोलो, बोला भाईजान आपका नाम नरेंद्र है। आपके कोच का नाम नरेंद्र है, आपके प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र है, तो मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है।

प्रधानमंत्री – सिर्फ आपने मेडल की संख्या बढ़ाई ऐसा नहीं है। आपने एक पीढ़ी को तैयार किया।

खिलाड़ी – मेरे मन में भी धक-धक धक-धक हो रहा है सर।

प्रधानमंत्री – आप चिंता मत कीजिए।

खिलाड़ी – पर..

प्रधानमंत्री – आप चाहें तो आपको बोलने में भी मेडल मिलने वाला है।

खिलाड़ी – मेरे फ्रेंड सर्कल में किसी ने बोला था कि मैं उनको कुछ बोलती थी भई तुम्हारे अच्छे के लिए तुम करो। तो अक्सर मुझे वो बोलते थे कि तू के मोदी ते मिल रही है?

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – हरियाणवी में बोल देते हैं सर कि क्या तू मोदी से मिली हुई है, कि तेरी बात माने। तो आज मैं आपसे मिली हूं सर। मैं उनको बोल पाऊंगी कि हां मैं मोदी जी से मिली हूं।

खिलाड़ी – कॉमनवेंल्थ गेम्स में मैंने सिल्वर मेडल जीता, फिर मैंने क्रेडिट साहब को दिया, सपना तो था एक बार मेडल जीत के लेके आने के लिए, बट ट्रेनिंग का सेंटर नहीं था, मैंने SAI आने के बाद मैं बहुत ट्रेनिंग करके मेडल जीत पा रहा, इसलिए बहुत खुशी से मैंने सर को क्रेडिट दिया था क्योंकि बहुत इंप्रूव हुआ।

प्रधानमंत्री – मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान का विषय है, मेहनत आपने की और मुझे याद किया, मैं आपका बहुत आभारी हूं दोस्त।

प्रधानमंत्री – वाराणसी में खेल तुम प्रैक्टिस कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – कैसा बना है स्टेडियम?

खिलाड़ी – सर अच्छा बना है, वहां पर मैं 10-12 दिन के लिए ट्रेनिंग करने गई थी, क्योंकि मैं मंदिर गई थी तो वहां पर ही ट्रेनिंग करके आई थी। और मैं वहां पे मतलब सेटल भी होना चाहती हूं क्योंकि मुझे काशी विश्वनाथ बहुत अच्छा लगता है सर।

प्रधानमंत्री – भोपाल में ट्रेनिंग कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – तो उज्जैन जाते थे कि नहीं?

खिलाड़ी – जी सर उज्जैन भी गई थी सर।

प्रधानमंत्री – अच्छा महाकाल के पास भी गई।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – काशी विश्वनाथ के पास हो आई एक बार।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – सावन महीना तो अभी है।

खिलाड़ी – वहां घर जाके फिर उसके बाद जाऊंगी सर।

प्रधानमंत्री – ठीक है।

खिलाड़ी – साई ने भी सर बहुत सपोर्ट किया है मुझे। इसके कारण ही मैं यहां तक पहुंची हूं सर। और मैं खेलो इंडिया स्कीम में भी थी 2018 में जो फर्स्ट खेलो इंडिया हुआ था, उसमें मेरा सिल्वर मेडल था, वहां पे भी मैंने आपको देखा था ओपनिंग सेरेमनी में, तो उसमें मेरा मेडल था, तो मेरे को स्कीम भी मिल गया और मैं यहां तक पहुंची हूं सर।

प्रधानमंत्री – स्पोर्ट्स व्यवस्था एक बात है, लेकिन देश मेडल तब प्राप्त करता है जब देश में स्पोर्ट्स कल्चर बनता है। दोस्तों आपने बहुत बड़ा काम किया है। देश का नाम रोशन किया है। आपको मैं बहुत बधाई देता हूं और आप विश्वास कीजिए आगे भी आप विजयी होंगे और फिर से एक बार यहीं पर हम मिलेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

प्रधानमंत्री – ये लगातार तीसरी बार देश को मेडल दिलवाया है।

खिलाड़ी – थैंक यू सर।

प्रधानमंत्री – बहुत आशीर्वाद बेटा।

खिलाड़ी – और थैंक यू सो मच मैं सर के हाथ से लड्डू खा रही मेरा कल बर्थडे था तो आज सर के हाथ से…

प्रधानमंत्री – बहुत बधाई वाह।

प्रधानमंत्री – मुस्कुराओ यार ।

प्रधानमंत्री – जो खेलेगा वो खिलेगा।