ସେୟାର
 
Comments

माननीय श्री सुभाष नेंबंग पार्लियमेंट के स्पीकर श्री एवं माननीय सांसदगण और आदरणीय सभागृह ‘मै नेपाल म आउं न पायकोमा अत्यंत ही हर्षित छूं। धैरे-धैरे वर्षगी एक पथिक यातित तीर्थालुको रुकमा मय यहां आएको धीये। यो घनइष्ठ कि एक पतक तपइले नेपाल को भ्रमण करलो भयो भले यो जीवन पर्यंत संबंध मा बदलिन छो। प्रथमतया यश सुंदर देश को स्वाधिको रुकमा मफेरी फरकेल आएको छो। भारत को प्रधानमंत्री को हैसियत मा पुनः आउमो पावदा। वास्तव में मैले भाग्यशाली महसूस करछू। यो यस्तो यात्ताथियो जुनमें प्रधानमंत्री को कार्यालय म प्रवेश घर्लवित्तै की घर्ल चाहन थे, जिनकी हामरो नेपाल संघ को संबंधों मेरो सरकार को उच्चतम प्राथमिकता मदे हो। निमंत्रण अगर नूं भयको म मै सरकार न नेपाल का जनता राई धन्यवाद देना चाहन छो। मै संग मैले 125 करोड़ भारतीय जनता को मया शुभकामना और सदभावना लिए आयो छो।

आप कल्पना कर सकते हैं कि यह पल मेरे लिए कितने गर्व का पल है क्योंकि आपकी संसद में मैं पहला मेहमान हूं जिसको आपने बुलाया है और संबोधन करने का अवसर दिया है। यह सम्मान सिर्फ नरेंद्र मोदी का या भारत के प्रधानमंत्री का नहीं यह सवा सौ करोड़ भारतीयों का सम्मान है। मैं इसके लिए आदरणीय स्पीकर श्री का और आप अभी सभी सदस्यों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। भारत और नेपाल के संबंध उतने ही पुराने हैं, जितने हिमालय और गंगा पुराने हैं। और इसलिए हमारे संबंध कागज की किश्तियों से आगे नहीं बढ़े हैं हमारे संबंध दिलों की दास्तान कहते हैं। जन-जन के मन के प्रतिकोश के रूप में हम एक ही सांस्कृतिक विरासत के धनी हैं।

मैं मूलतः गुजरात का हूं सोमनाथ की भूमि है और सोमनाथ की भूमि से चलकर के मैंने राष्ट्रीय विश्वनाथ का फलक काशी विश्वनाथ की छत्रछाया से मैंने प्रारंभ किया, काशी से किया। और आज पशुपतिनाथ के चरणों में आकर के खड़ा हुआ हूं। यह वो भूमि है जहां किशोरी जी बचपन में खेला करती थी, और आज भी हम जनक का स्मरण करते हैं। यह भूमि है जिसने विश्व को अचंभित कर देने वाले भगवान बुद्ध को जन्म दिया है। ऐसी एक सांस्कृतिक विरासत की धनी है और इसलिए और जब मैं काशी का प्रतिनिधि बन गया तो मेरा तो नेपाल से नाता और जुड़ गया क्योंकि काशी में एक मंदिर है जहां पुजारी नेपाल का होता है और नेपाल में पशुपतिनाथ है जहां का पुजारी हिन्दुस्तान का होता है।

भारत का हर व्यक्ति 51 शक्तिपीठों के दर्शन की कामना करता है उन 51 शक्तिपीठों में दो पीठ नेपाल में हैं। यदि इतना अटूट नाता है हमारा, इतना ही नहीं, हिन्दुस्तान ने वो कोई लड़ाई जीती नहीं है, जिस जीत के साथ किसी नेपाली का रक्त न बहा हो। किसी नेपाली ने शहादत न दो हो। भारत के स्वाभिमान के लिए, भारत की रक्षा के लिए नेपाल का बहादुर मरने-मिटने के लिए कभी पीछे नहीं रहा। भारत के लिए जीने-मरने वाले उन बहादुर नेपालियों को मैं नमन करना चाहता हूं। भारत की सेना के फील्ड मार्शल एक बहुत बढ़िया बात बताते थे, वो कहते थे कि कोई सेना का जवान यह कहे कि मैं मृत्यु से डरता नहीं हूं तो मान लेना कि या तो वो झूठ बोल रहा है या तो वो गुरखा है। अगर गुरखा कहता है कि मैं मौत से नहीं डरता तो इसमें सच्चाई है। यह बात फील्ड मार्शल मानेक शॉ ने कही थी। ऐसी वीरों की भूमि है, सांस्कृतिक धारा है। और आज मैं कह सकता हूं नेपाल के नागरिकों की नहीं लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले पूरे विश्व का ध्यान नेपाल की तरफ केंद्रित हुआ है। और नेपाल की तरफ केंद्रित हुआ है मतलब इस सभागृह में बैठे आप सब पर केंद्रित हुआ है। लोकतंत्र में विश्वास करने वाला पूरा विश्व आज आपकी तरफ देख रहा है। बड़ी आशा भरी नजरों से देख रहा है। आपको लगता होगा कि आप इस सदन में बैठकर के संविधान के निर्माण की चर्चा कर रहे हैं भिन्न भिन्न धाराओं की चर्चा कर रहे हैं, समाज के भिन्न भिन्न वर्गों के हितों की चर्चा कर रहे हैं, इतना नहीं है। संविधान के निर्माता के रूप में आपको यह सौभाग्य मिलना। उस घटना को मैं अगर और तरीके से देखूं तो जिस परंपरा को हम जीते हैं, कभी कुछ ऋषिमुनियों ने वेद निर्माण किए किसी ने उपनिषद निर्माण किए किसी युग में संहिताओं का निर्माण हुआ और जिसके प्रकाश में हजारों साल से हम अपना जीवन निर्वह और आयोजन करते रहते हैं। उसी कड़ी में आधुनिक जीवन में राष्ट्र का संविधान भी एक नई संहिता के रूप में जन्म लेता है। नए युग को दिशा एवं दशा देने का काम संविधान के माध्यम से होता है, जो किसी जमाने में ऋषियों ने वेद के द्वारा, पुराणों के द्वारा, संहिताओं के द्वारा किया था, एक प्रकार से आप नई संहिता लिख रहे हैं। और इसलिए यह सौभाग्य प्राप्त करने वाले आप सबको मैं हृदय से अभिनंदन करना चाहता हूं, बधाई देना चाहता हूं। लेकिन संविधान निर्माण की एक पूर्व शर्त होती है। संविधान के निर्माण के लिए ऋषिमन होना जरूरी होता है। वो मन जो दूर का देख सकता है। वो मन समस्याओं का अंदाज लगा सकता है वो मन आज भी उन शब्दों में अंकित करेगा जो सौ साल के बाद भी समाज को सुरक्षित रखने की समाज की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा।

कितना पवित्र, कितना उम्दा, कितना व्यापक, कितना विशाल काम आप लोगों के पास है और इसलिए आप बहुत भाग्यशाली हैं, मैं आपको नमन करने आया हूं। मैं आपका अभिनंदन करने आया हूं। संविधान, एक किताब नहीं होती है, संविधान कल आज और कल को जोड़ता है। मैं कभी कभी सोचता हूं भारत का संविधान, वो हिमालय को समंदर के साथ जोड़ता है, भारत का संविधान कच्छ के रेगिस्तान को नागालैंड की हरी भरी पर्वतमालाओं के साथ जोड़ता है।

सवा सौ करोड़ नागरिकों के मन को आशाओं को आकांक्षाओं को पल्लवित करता है। आप जिस संविधान का निर्माण करने जा रहे हैं वह सिर्फ, सिर्फ नेपाल के नागरिकों के लिए नहीं बल्कि दुनिया के इतिहास में स्वर्णिम पृष्ठ लिखने जा रहे हो। आपको आश्चर्य होगा कि मोदी जी क्या बता रहे हैं, मैं सच बता रहा हूं। आपका संविधान जो बनेगा वो सिर्फ नेपाल के लिए नहीं विश्व के लिए एक स्वर्णिम पृष्ठ बनेगा क्योंकि इतिहास की धरोहर में देखें तो एक सम्राट अशोक हुआ करते थे, युद्ध के बाद शांति की तलाश में निकले, युद्ध छोड़ बुद्ध की शरण गए और एक नया स्वर्णिम पृष्ठ लिखा गया। मैं उन सबको बधाई देता हूं जिन्होंने बुलेट का रास्ता छोड़कर के बैलेट के रास्ते पर जाने का संकल्प किया नेपाल की धरती पर। मैं उन सबका अभिनंदन करता हूं जो युद्ध से बुद्ध की ओर प्रयाण किया है और इस सदन में आपकी मौजूदगी युद्ध से बुद्ध की तरफ की आपकी यात्रा का अनुमोदन करती है और इसलिए मैं आपको बधाई देने आया हूं।

आप जब संविधान का निर्माण करेंगे वो संविधान, और मुझे विश्वास है कि पीस प्रोसेस धर्म से, एक ऐसा उम्दा संविधान जन्म लेने वाला है जो कोटि-कोटि जनों की आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति करेगा। लेकिन इससे भी आगे आज दुनिया के हर भूभाग में छोटे मोटे कई गुट ऐसे पैदा हुए हैं, जिनका हिंसा में ही विश्वास है। शस्त्र के माध्यम से ही सुख प्राप्त करने का उनको मार्ग लगता है।

विश्व के सामने नेपाल वो देश बनेगा जब संविधान लेकर आएगा, वो दुनिया को विश्वास दिलाएगा कि शस्त्रों को छोड़कर के शास्त्रों के सहारे भी जीवन को बदला जा सकता है। ये उम्दा काम आप करने वाले हैं। हिंसा में विश्वास करने वाले दुनिया के उन गुटों को यह संदेश जाएगा कि बम, बंदूक और पिस्तौल के माध्यम से भलाई नहीं होती है, संविधान की सीमा में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के द्वारा इच्छित परिणामों को प्राप्त किया जा सकता है। और ऐसा उम्दा काम आपने शुरू किया है और उन लोगों ने इसमें हिस्सेदारी की है, जिन्होंने कभी शस्त्रों में भरोसा किया था। शस्त्रों को छोड़कर के, युद्ध को छोड़कर के बुद्ध के मार्ग पर जाने का रास्ता अपनाया और इसलिए एक ऐसा पवित्र काम आपके माध्यम से हो रहा है इस संविधान सभा के माध्यम से जो इस विश्व के हिंसा में विश्वास करने वाले लोगों को पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करेगा। और आपका प्रयोग अगर सफल रहा तो विश्व को हिंसा की मुक्ति का एक नया मार्ग बुद्ध की इस भूमि से मिलेगा। यह मुझे आपके संविधान में ताकत नजर आ रही है और इसलिए मैं उस रूप में इस संविधान सभा को देख रहा हूं। उस सामर्थ्य के रूप में देख रहा हूं। संविधान किसके लिए है। भारत प्रारंभ से मानता आया है हमारा काम आपके काम में दखल करने का नहीं है, भारत का काम, आप जो संकल्प करें, आप जो दिशा चुनें, उसमें हम अगर काम आ सकते हैं तो काम आना यही हमारा काम है। आपको दिशा देना यही हमारा काम नहीं है। आपको मंजिल पर ले जाना यह हमारा काम नहीं है।

नेपाल एक सार्वभौम राष्ट्र है। हमारी इच्छा इतनी ही है नेपाल जैसा सार्वभौम राष्ट्र, हिमालय जितनी ऊंचाइयों को प्राप्त करे और पूरा विश्व नेपाल को देखकर के गौरवान्वित हो, ऐसा नेपाल देखने की हमारी इच्छा है। और इसलिए आपके पड़ोस में बैठकर और हमारे लोकतंत्र के अनुभव के आधार पर हमें अच्छा लगता है कि आप इस दिशा में जा रहे हैं आनंद होता है। संविधान वो हो जो सर्वजन समावेशक हो। हर नेपाली नागरिक को गरीब हो, अमीर हो, पढ़ा लिखा हो, अनपढ़ हो, गांव में हो शहर में हो, पहाड़ में हो तराई में, हो कहीं पर भी हो, हर नेपाली को संविधान जब आए तो उसे लगना चाहिए कि यह एक ऐसा गुलदस्ता है जिस गुलदस्ते में मेरे भी पुष्प की महक हैं। और संविधान निर्माता ऐसा गुलदस्ता बनाएंगे कि जिसके कारण हर नेपाली को लगेगा हां ऐसा बढ़िया गुलदस्ता आया है, जिसमें मेरे फूल की महक मुझे महसूस हो रही है वो काम आप कर रहे हैं। संविधान वो हो जो सर्वजन हिताय हो, सर्वजन सुखाय हो। किसी एक का भला करने के लिए नहीं। संविधान जनसामान्य की आशा आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए हो। संविधान जोड़ता है, संविधान कभी तोड़ता नहीं है। संविधान विवादों को संवादों की और ले जाने का एक सबल माध्यम होता है और इसलिए चाहे पहाड़ हो तराई हो, संविधान जोड़ने का काम करेगा और अधिक ताकत पैदा करने का काम करेगा। उस दिशा में आप सिद्धि प्राप्त करेंगे ऐसा मेरा पूरा विश्वास है।

संविधान वर्तमान के बोझ से दबा हुआ नहीं होना चाहिए और ऋषि मन का मेरा तात्पर्य यही है, जो वर्तमान से मुक्ति की अनुभूति करता है और जो आने वाले कल को बहुत गहराई से देख सकता है वही ऋषि मन होता है, जो संविधान का निर्माण आने वाली पीढ़ियों के लिए करता है। और यही हमारी सोच होनी चाहिए। संविधान में हजारों चीजें अच्छी होती हैं, लेकिन एक कोमा एक फुलस्टोप कहीं पर भी ऐसा आ गया जो आज तो पता नहीं चले कि कोमा है फुलस्टोप पता नहीं रहे लिख दिया, लेकिन कभी 50 साल के बाद 100 साल के बाद कोमा, फुलस्टोप के तौर पर आया हुआ कोई एक चीज कहीं विष बीच न बन जाए विष बीज को जन्म न दें, जो नेपाल के इन सपनों को रौंद डाले। ऐसी स्थिति कभी आए नहीं, ये बारीकी की चिंता ये संविधान सभा करेगी ऐसा मुझे पूरा विश्वास है। और मैं मानता हूं कि आपने जो काम शुरू किया है वो अपने आप में गौरव का काम है। शस्त्र को छोड़कर के शास्त्रों को स्वीकार करना यही तो बुद्ध की भूमि से निकलने की आवाज है, संदेश है और उस अर्थ में भारत चाहेगा, और जो आप लोगों ने तय किया जो मैंने सुना है और मैं मानता हूं कि बहुत ही उत्तम काम संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र का है। आज उपलब्ध व्यवस्था में उत्तम रास्ता आप सबने चुना है और भारत हमेशा आपके इस संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र की कल्पना का पूरा-पूरा आदर करता है स्वागत करता है। इंतजार यही है कि जितना जल्दी हो। इंतजार इसी बात का है।

नेपाल और भारत के रिश्ते ऐसे हैं कि थोड़ी सी भी हवा इधर उधर हो जाए तो ठंड हमें भी लगती है। अगर सूरज यहां तप जाए तो गर्मी हमें भी लगती है। ऐसा अटूट नाता है। अगर आप चैन से न सोए हों तो हिन्दुस्तान भी चैन से नहीं सो सकता है। नेपाल का कोई मेरा भाई भूखा हो तो भारत कैसे आनंद ले सकता है। कल जब ये कोसी की घटना घटी, समाचार आए। मेरी पूरी सरकार लगी रही। इतना बड़ा हादसा हो गया, क्या हो रहा है इतनी बड़ी चट्टान गिरी है कोसी नदी का पानी रुक नहीं रहा है। पता नहीं क्या हो गया है, कितने लोग खो गए हैं, कितने लोग मारे गए हैं। जितनी चिंता आपको सताती थी, उतनी ही चिंता मुझे भी सताती थी। क्यों, क्योंकि ये कष्ट आपका है तो मेरा भी है। ये आपदा आपकी है तो आपदा मेरी भी है। और हिन्दुस्तान के किसी कौने में जितनी तेजी से मदद पहुंचे, उतनी ही तेजी से मदद पहुंचाने के लिए मैंने दिशा पकड़ी और लोगों को मैंने भेज भी दिया। क्योंकि आप मेरे हैं हमारे हैं। हम और आप अलग हो नहीं सकते। और इसलिए आपके विकास के अंदर भारत आपकी जितनी आशा आकांक्षाएं हैं उसकी पूर्ति के लिए प्रतिबद्ध है।

नेपाल जहां से जन्मे हुए बुद्ध ने मन के अंधेरे को दूर किया था, विचारों का प्रकाश दिया और मानव जाति को एक नई चेतना मिली। यह नेपाल पानी की शक्ति का ऐसा धनी है, जो बिजली के माध्यम से आज भी हिन्दुस्तान का अँधेरा दूर कर सकता है और हम बिजली मुफ्त में नहीं चाहते, हम खरीदना चाहते हैं। हम आपका पानी भी नहीं ले जाना चाहते, आपका पानी और वैसे तो मैं एक बात नहीं जानता कि नेपाल में यह बात किस रूप में देखी जाएगी। पानी और जवानी यह कभी पहाड़ के काम नहीं आते, पानी पहाड़ में रहता नहीं चला जाता है और जवानी भी, पहाड़ में जवानी, थोड़ा सी उम्र बढ़े तो मौका देखते है कि चलो कही चला जाए, बेचारों को वहां रोजी-रोटी नहीं है तो जवानी भी पहाड़ के कम नहीं आती और पानी भी पहाड़ के काम नहीं आता है। लेकिन किसी युग में कहा गया होगा। हमें इस बात को बदलना होगा वो पानी पहाड़ के काम कैसे आये और जवानी पहाड़ को कैसे नई रौनक दे वो नई-नई दिशा में हमको बदलना होगा और इसलिए विकास यही उसके लिए यह मार्ग है।

भारत युवा देश है नेपाल भी युवा देश है। यहां कितने नौजवानों की तादाद है अगर उन नौजवानों के हाथ में अवसर दिया जाए तो नेपाल का कल क्या नेपाल का आज बदलने का सामर्थ्य इन नौजवानों में है वो अवसर कैसे मिलेगा हम प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग करके विकास की एक दिशा तय नहीं करेंगे तो कैसे होगा। भारत इसके लिए आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहता है। निर्णय आप कीजिए आप अपने नेतृत्व का परिचय दीजिए। और अकेले हिन्दुस्तान को बिजली बेचकर भी नेपाल समृद्ध देशों में अपनी जगह बना सकता है। इतनी ताकत आपके पास है। हम इसमें आपके साथ हैं आपकी विकास यात्रा में जुड़ना चाहते हैं। यहां पर ट्रकों के द्वारा ऑयल आता है, युग बदल चुका है, पाइप लाइनों से क्यों न आये हम उस काम को पूरा करेंगे। शिक्षा के क्षेत्र में यहां के नौजवानों भारत आते हैं। भारत सरकार उनकों स्कालरशिप देती है। स्कॉलरशिप पाने वाले नौजवानों की संख्या में मैं बढ़ोत्तरी चाहता हूं । अधिक नौजवानों को अवसर मिले समझ लीजिए कि आज ही घोषणा कर रहा हूं इसका फायदा उठाइए।

जब लक्ष्मण जी मूर्छित हो गये तो हनुमान जी पौधा लेने यहां आये। आज पूरे विश्व में होलिस्टिक हेल्थकेयर की चर्चा चल रही है। हिमालय के गर्भ में जड़ी बूटियां पड़ी हैं। अगर उन जड़ी बूटियों से हम हर्बल मेडिसिन को बढ़ावा दें। क्यों न नेपाल विश्व में सबसे बड़ा हर्बल मेडिसिन का एक्सपोर्टर क्यों ना हो जाए? क्या क्या नहीं है आपके पास। मैं आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए तैयार हूं।

भारत जो मदद हो सके करने के लिए तैयार है क्योंकि आने वाले दिनों में विकास को किस दिशा में ले जाना आप जानते हैं मैं कुछ नया नहीं कह रहा। टूरिज्म की बात करें तो सवा सौ करोड़ देशवासी आपके पड़ोस में ऐसे हैं जो कभी न कभी पशुपतिनाथ आकर अपना सिर झुकाना चाहते हैं। भगवान बुद्ध के पास आकर शान्ति का संदेश देना चाहते हैं। क्यों ना नेपाल का टूरिज्म उस रूप में विकसित हो कि भारत से बहुत बड़ी मात्रा में टूरिस्ट नेपाल पहुंचें। टूरिज्म एक ऐसा क्षेत्र है कम से कम पूंजी में ज्यादा से ज्यादा रोजगार देने वाला कोई अगर क्षेत्र है तो वह टूरिज्म है। टूरिस्ट आता है तो चना बेचने वाला भी कमाता है और मूंगफली बेचने वाला भी कमाता है, ऑटो रिक्शा वाला भी कमाता है, टैक्सी वाला भी कमाता है और चाय बेचने वाला भी कमाता है। और जब चाय बेचने वाले की बात आती है तो मुझे ज्यादा आनंद आता है। कहने का मतलब यह है कि टूरिज्म के विकास में इतनी संभावनाएं भरी पड़ी हैं। एडवेंचर टूरिज्म के लिए, हिमालय से बढ़कर क्या हो सकता है। नेपाल से बढ़कर कौन सी जगह हो सकती है। पूरे विश्व के नौजवानों को पागल कर दे इतनी ताकत आप की धरती के पास पड़ी है। मैं आपसे आह्वान करता हूं , आइए आगे आइये। पूरे विश्व का एडवेंचर यूथ, जिसका एडवेंचर करने का मिज़ाज है, जिसको पहाड़ों पर जाने की इच्छा रखता है, आप पूरे विश्व के युवाओं को ललकार सकते हैं।

आईए, कितना बड़ अवसर है। हमें संविधान भी निर्माण करना है। हमें नेपाल को नई ऊंचाईयों पर भी ले जाना है और इसके लिए एक पड़ोसी का धर्म हम निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मेरे मन में आया कि नेपाल को हिट करें, मैंने सोचा अगर मैं अलग शब्दों का उपयोग करुंगा तो आपको बुरा लग जाएगा ये कौन होता है हिट करने वाला। लेकिन मैं जब हिट करने की बात करता हूं तो मेरे मन में तीन प्रमुख बातें हैं – एचआईटी। एक हाईबेस दूसरा आईबेस और तीसरा ट्रासबेस। नेपाल को भारत जितनी जल्दी ये गिफ्ट दें। आईबेस यानी इनफॉर्मेशन बेस, पूरे विश्व के भीतर नेपाल पीछे नहीं रहना चाहिए। नेपाल भी डिजिटल बनना चाहिए। नेपाल विश्व के साथ जुड्ना चाहिए। आईबेस चाहिए और ट्रांसबेस, ट्रांसमीशन लाईन्स। आज नेपाल को हम जितनी बिजली दे रहे हैं, उसको डबल करने का मेरा इरादा है और इसके लिए जितना जल्दी ट्रांसमीशन लाईन लगाएंगे, अभी हम नेपाल का अंधेरा दूर करेंगे और दशक के बाद, अंधेरा हिन्दुस्तान का नेपाल दूर करेगा, ये हमारा नाता है और इसीलिए मैंने कहा एचआईटी। एच-हाइवेज,आई-इन्फार्मेशन और टी-ट्रासमीशन। ये मैं हिट करना चाहूंगा और आप भी चाहेंगे कि ये हिट जल्दी हो।

मुझे लगता है कि हम जितना जल्दी नेपाल को अपने पास बुला सकें बुला लें पर अभी इसको खिसका कर ले जाने वाला कोई विज्ञान तो अभी आया नहीं है लेकिन अगर महाकाली नदी पर ब्रिज बन जाए तो मेरे और आपके बीच की दूरी बहुत खत्म हो जाएगी। आज एकदम हमारे पास आ जाएंगे। आज हमें घूम घामकर पहुंचना पड़ता है लेकिन महाकाली नदी पर अगर ब्रिज बन गया तो हमारी दूरियां कम हो जाएंगी। हम इस बात पर बल देकर आगे बढ़ना चाहते हैं। उसी प्रकार से सीमा यानी बार्डर जो हैं वो बैरियर नहीं हो सकते, बॉर्डर ब्रिज बनना चाहिए। हम चाहते हैं भारत और नेपाल की सीमाएं इस प्रकार से वाईब्रेंट हो, अच्छेपन की यहां लेनदेन होती रहे ताकि आपका भी विकास हो और भारत के भी आपके साथ जुड़े हुए छोटे-छोटे जो राज्य हैं, उनको भी विकास के अवसर मिलें। एक योजना जिसे मैं प्रधानमंत्री जी को आज बता रहा था। मैंने कहा कि हिमालय पर रिसर्च होना जरूरी है। इतनी बड़ी प्राकृतिक संपदा है। भारत ने उस पर एक काम शुरू किया है, हमने अपने बजट में भी इसकी घोषणा की है। नेपाल भी उसमें आगे बढ़े और हम मिलकर के हिमालय की शक्ति, मानव जाति के कैसे काम आ सकती है, उसके वेज और मीन्स क्या हों, उसके सामर्थ्य को हम पहचाने और मानव जाति के कल्याण की दिशा में हम जरूर काम करें। उसी प्रकार से हम प्रयास करना चाहते हैं।

कभी-कभी मैं हैरान हो जाता हूं कि अमेरिका टेलिफोन करना है तो बड़े सस्ते में हो जाता है लेकिन नेपाल फोन करना है तो बड़ा महंगा पड़ जाता है। हमें समझ नहीं आता कि यह क्या बात है। ऐसा कैसे हो सकता है और नेपाल के लाखों लोग हिन्दुस्तान में रहते हैं अपने परिवार से बात करना चाहते हैं कर नहीं पाते। नमस्ते करके फोन रख देते हैं। मैं यह स्थिति बदलना चाहता हूं। दोनों देशों में ये जो सर्विस प्रोवाइडर हैं उनसे मिलकर के हम भी बात करेंगे आप भी बात कीजिए। यह कनेक्टिविटी ऐसी नहीं होनी चाहिए। बड़े आराम से सहज तरीके से कम खर्चे में बात हो और उसी से तो नाता जुड़ता है। लाइव कम्युनिकेशन जितना बढ़ता है उतना ही नाता बनता है और हम उसको बढ़ावा देना चाहते हैं।

अभी आपने सुना होगा जब मैं, मेरा शपथ समारोह था जब मैं प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने वाला था तो मैंने सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्षों को निमंत्रित किया था और मैं आभारी हूं आदरणीय प्रधानमंत्री जी का कि बहुत ही कम नोटिस में तो आए और मैं मानता हूं कि सार्क देश मिलकर के गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने का एजेंडा लेकर एक साथ आगे क्यों न बढ़ें। गरीबी के खिलाफ लड़ने में हम दोनों हम सब सभी सार्क देश एक-दूसरे की मदद करें। और उसमें एक काम सार्क देशों को और भारत का दायित्व है हम कोई उपकार नहीं करते, हम मानते हैं कि हमारा दायित्व है कि हमारे-अड़ोस-पड़ोस के हमारे जितने भी छोटे भाई हैं हमारे साथी भाई हैं उनकी विकास यात्रा में हम मदद मुख्य रूप से करें।

और इसलिए अभी-अभी मैंने घोषणा की है कि स्पेस टेक्नोलॉजी का लाभ हमारे सार्क देशों को मिलना चाहिए। और इसलिए भारत की तरफ से एक सार्क सैटेलाइट लॉन्च किया जाएगा। इस सार्क सैटेलाइट का लाभ हैल्थ सेक्टर के लिए, एजुकेशन सेक्टर के लिए स्पेस टेक्नोलॉजी का लाभ सार्क देशों को मिले नेपाल को मिले उस दिशा में हमने कदम उठाना तय किया है। और इसलिए इसका आने वाले दिनों में जरूर लाभ मिलेगा।

उसी प्रकार से मैंने पहले ही कहा कि मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट, आपने देखा होगा, हम इतने पास में हैं आपके और हमारे बीच में कोई ज्यादा दूरी नहीं है फिर भी आते-आते 17 साल लग गए। यह अखरता है। मैं आपको वादा करता हूं कि अब ऐसा नहीं होगा। और मैं तो कुछ ही महीनों में वापस आ रहा हूं सार्क समिट के समय। और मैंने उस समय तय किया है कि मैं उस समय जब आउंगा तो राजा जनक को भी नमन करने जाउंगा और भगवान बुद्ध को भी नमन करने जाउंगा। यह खुशी की बात है कि पंचेश्वर प्रोजेक्ट बहुत समय पहले तय हुआ था फिर कितने रूपये की बढ़ गई, लेकिन अब अथॉरिटी का निर्माण दोनों देशों में हुआ है मैं मानता हूं कि एक साल के भीतर-भीतर 5600 मेगावॉट का यह प्रोजेक्ट, काम आरंभ हो जाए तो आप कल्पना कर सकते हैं कि नेपाल की कितनी बड़ी सेवा होगी। आज नेपाल के पास जितनी बिजली है उससे करीब-करीब पाँच गुना बिजली, छोटी बात नहीं है यह। विकास को कितनी नई ऊँचाई मिल सकती है। और उसके लिए भारत बिल्कुल प्रोएक्टिव होकर आपके साथ काम करने के लिए तैयार है। और हम आपको उस दिशा में आगे बढ़ाने के लिए पूरा प्रयास करेंगे।

एक बात मैं और चाहूंगा, जैसा मैंने कहा हर्बल मेडिसिन, एक बहुत बड़ा क्षेत्र है। वैसे भी ऑर्गेनिक फॉर्मिंग पुरी दुनिया के अंदर एक बहुत बड़ा मार्केट खड़ा हुआ है। जो माल रुपये में बिकता है वो अगर ऑर्गेनिक है तो डॉलरों में बिकने लग जाता है।

नेपाल एक ऐसी भूमि है जहां यह संभव है। भारत में सिक्किम एक राज्य, आपके पड़ोस में ही माना जाएगा। सिक्किम ने पूरा ऑर्गेनिक स्टेट बना दिया अपने आपको। और उसके कारण पूरे विश्व में उसका एक नया मार्केट खड़ा हुआ है। अगर नेपाल उस दिशा में जाना चाहता है तो मुझे खुशी होगी आपको मदद करने की, आपके साथ काम करने की। उसी प्रकार से हमने एक प्रयोग शुरू किया है हिन्दुस्तान में सोइल (मृदा) हैल्थ कार्ड का। हम जानते हैं कि भारत और नेपाल में हम नागरिकों के पास भी सोइल हैल्थ कार्ड नहीं है। लेकिन हम स्वाइल हैल्थ कार्ड किसानों को उसकी जमीन की तबीयत कैसी है, कोई बीमारी तो नहीं है, विशेषताएं क्या हैं किस प्रकार के फसल के लिए उपयोगी है। कौन सी दवाइंया वहां डालनी चाहिएं कौन सी दवाएं नहीं डालनी चाहिएं। कितना फर्टिलाइजर लिया जा सकता है ये सारी वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है। अगर नेपाल की रुचि होगी तो हम जो सोइल हैल्थ कार्ड के इस काम को जो हिन्दुस्तान में आगे बढ़ा रहे हैं यहां के किसानों को भी अगर उसका लाभ मिलेगा तो कृषि आधुनिक हो, कृषि वैज्ञानिक हो उसमें हम बहुत बड़ी मात्रा में उपयोगी हो सकते हैं। और मैं चाहता हूं कि आने वाले दिनों में आप इसके लिए जरूर ही कुछ न कुछ सोचेंगे।

और मैं मानता हूं। उसी प्रकार से आज जब मैं आपके बीच आया हूं तो मैं आज यह भी आपको घोषणा करके जाना चाहता हूं कि भारत नेपाल को 10,000 करोड़ नेपाली रुपये कंसेसनल लाइन ऑफ क्रेडिट की सहायता देने का हमने निर्णय किया है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इस क्रेडिट का उपयोग नेपाल की प्राथमिकता पर होगा। आप इसे हाइड्रो पावर, इंफ्रास्ट्रक्चर इन सारे क्षेत्रों में लगाएं तो यह करीब एक बिलियन डॉलर जैसी अमाउंट मैं आज और पहले इसका जो दिया हुआ है यह इससे अलग है उसको इससे मत जोड़ना वो अलग है, जो दे दिया। यह नया है।

फिर एक बार मैं, आपने मेरा स्वागत किया सम्मान किया इसलिए मैं आपका आभारी हूं। लेकिन मैं फिर से एक बार विश्वास दिलाता हूं कि दुनिया कि नजरें आपकी तरफ हैं। विश्व बड़ी आशा भरी नजरों से आपकी तरफ देख रहा है क्योंकि शस्त्र से मुक्ति का मार्ग, संविधान के माध्यम से आज शस्त्र के रास्ते पर चल पड़े लोगों को वापस लाने का काम आज नेपाल की सफलता से जुड़ा हुआ है। आप सफल हुए तो दुनिया को वापस लौटने का अवसर मिलेगा। शस्त्र छोड़ने की प्रेरणा मिलेगी।

लोकतांत्रिक व्यवस्था से भी जन-मन की आशाओं आकांक्षाओं की पूर्ति का रास्ता खुलेगा, नया विश्वास पैदा होगा। आप संविधान के इस काम को उस रूप में देखें। इसलिए मैं दोबारा इस बात का उल्लेख कर रहा हूं। आपका ऋषि मन 100 साल के बाद नेपाल कैसा होगा, नेपाल के लोग कैसे हों, नेपाल के लोगों को क्या मिले इसका निर्णय आप कर रहे हैं और उस निर्णय में आप सफल होंगे। भगवान बुद्ध की इस भूमि में विचारों की कोई कमी हो नहीं सकती। इरादों की कमी हो नहीं सकती। संकल्पशक्ति की कमी कभी नहीं हो सकती, और इसलिए एक नया इतिहास यहां से रचने जा रहा है। इसको इतना बड़ा लाभ मिलने वाला है। मुझे पूरा विश्वास है कि हम सबको, मैं यही कहूंगा कि हमारे जो संबंध हैं भारत-नेपाल मैत्री यह अमर रहें। भारत-नेपाल मैत्री युग-युग जीवे और यह सार्वभौम राष्ट्र नेपाल हिमालय से भी नई ऊंचाइयों पर ऊपर उठे। इसी शुभकामनाओं के साथ फिर एक बार आपके बीच आने का अवसर मिला बहुत बहुत धन्यवाद।

ଭାରତର ଅଲିମ୍ପିଆନମାନଙ୍କୁ ପ୍ରେରଣା ଦିଅନ୍ତୁ! #Cheers4India
Modi Govt's #7YearsOfSeva
Explore More
ଆମକୁ ‘ଚଳେଇ ନେବା’ ମାନସିକତାକୁ ଛାଡି  'ବଦଳିପାରିବ' ମାନସିକତାକୁ ଆଣିବାକୁ ପଡ଼ିବ :ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ମୋଦୀ

ଲୋକପ୍ରିୟ ଅଭିଭାଷଣ

ଆମକୁ ‘ଚଳେଇ ନେବା’ ମାନସିକତାକୁ ଛାଡି 'ବଦଳିପାରିବ' ମାନସିକତାକୁ ଆଣିବାକୁ ପଡ଼ିବ :ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ମୋଦୀ
PM Jan-Dhan Yojana: Number of accounts tripled, government gives direct benefit of 2.30 lakh

Media Coverage

PM Jan-Dhan Yojana: Number of accounts tripled, government gives direct benefit of 2.30 lakh
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Uttar Pradesh can become the powerhouse of India's growth engine: PM Modi
August 05, 2021
ସେୟାର
 
Comments
August 5 is becoming a significant date in the Indian History as abrogation of 370, and Ram Mandir are associated with this: PM
Our youth has taken a big step in re-establishing the glory of our national game hockey today: PM
Our youth is scoring goal of victory whereas some are doing self-goal due to political selfishness: PM
India’s youth has firm belief that both they and India are on the move.: PM
This great country cannot become hostage to selfish and anti-national politics: PM
Double engine government has ensured that the schemes made for the poor, downtrodden, backward, tribals are implemented expeditiously in UP: PM
Uttar Pradesh was always seen through the prism of politics. The confidence that UP can become the powerhouse of India's growth engine has emerged in recent years: PM
This decade is the decade of making up for the shortfall of the last 7 decades for Uttar Pradesh: PM

नमस्ते,

आज आप सभी से बात करके बहुत संतोष हो रहा है। संतोष इस बात का, कि दिल्ली से अन्न का जो एक-एक दाना भेजा गया, वो हर लाभार्थी की थाली तक पहुंच रहा है। संतोष इस बात का कि पहले की सरकारों के समय उत्तर प्रदेश में गरीब के अनाज की जो लूट हो जाती थी उसके लिए अब वो रास्ता नहीं बचा है। यूपी में जिस तरह प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को लागू किया जा रहा है, वो नए उत्तर प्रदेश की पहचान को और मजबूत करती है। मुझे आप से बात करकर के बहुत अच्छा लगा, और जिस हिम्मत के साथ आप बोल रहे थे, जिस विश्वास के साथ बोल रहे थे। और सच्चाई, आपके हर शब्द में सचचाई निकलती थी। उससे मुझे इतना संतोष मिला। आप लोगों के लिए काम करने के लिए मेरा उत्साह आज बढ़ गया है। चलिए आपसे बात करके तो बात जितनी बात करे कम पड जाएगी। आईए अब कार्यक्रम की और चलते हैं।

आज के इस कार्यक्रम में उपस्थित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी भी हैं, कर्मयोगी भी हैं। ऐसे हमारे योगी आदित्यनाथ जी, यूपी सरकार के हमारे सभी मंत्रिगण, संसद में मेरे सभी सहयोगी, सभी सांसद विधायक, मेयर, जिला पंचायत अध्यक्ष और विशाल संख्या में उत्तर प्रदेश के कोने-कोने में आज इकटठे हुए मेरे प्यारे भाइयों और बहनों, अगस्त का ये महीना भारत के इतिहास में उसकी शुरूआत ही देखिए, एक प्रकार से उपलब्धियां लेकर के आई है। ऐसा लग रहा है कि भारत की विजय की शुरूआत हो चुकी है। इसमें भी आज की ये 5 अगस्त की तारीख बहुत विशेष बन गई है। बहुत महत्वपूर्ण बन गयी है। इतिहास इसको सालों तक दर्ज करेगा। ये 5 अगस्त ही है, जब 2 साल पहले देश ने एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को और सशक्त किया था। करीब – करीब सात दशक के बाद दो साल पहले 5 अगस्त को ही, आर्टिकल-370 को हटाकर जम्मू कश्मीर के हर नागरिक को हर अधिकार, हर सुविधा का पूरा भागीदार बनाया गया था। यही 5 अगस्त है जब पिछले साल कोटि-कोटि भारतीयों ने सैकड़ों साल बाद भव्य राम मंदिर के निर्माण की तरफ पहला कदम रखा। आज अयोध्या में तेजी से राम मंदिर का निर्माण हो रहा है। और आज 5 अगस्त की तारीख, फिर एक बार हम सभी के लिए, उत्साह और उमंग लेकर आई है। आज ही, ओलंपिक के मैदान पर देश के युवाओं ने हॉकी के अपने गौरव को फिर से स्थापित करने की तरफ बड़ी छलांग लगाई है। करीब 4 दशक के बाद ये सवर्णिम पल आई है। जो हॉकी हमारी राष्ट्रीय पहचान रही है। आज हमारे युवाओं ने उस गौरव को पुन: हासिल करने की तरफ बहुत बड़ा देश को तोहफा दिया है। और ये भी संयोग है, कि आज ही यूपी के 15 करोड़ लोगों के लिए इतना पुण्य आयोजन हो रहा है। मेरे गरीब परिवार के भाइयों – बहनों को, 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को, अनाज तो करीब - करीब एक साल से ज्यादा समय से मुफ्त में मिल रहा है। लेकिन मुझे उसमे शरीक होकर के इस पुण्य कार्यक्रम में आकर के आप सबके दर्शन करने का आज मुझे अवसर मिला है।

भाइयों और बहनों,

एक तरफ हमारा देश, हमारे युवा, भारत के लिए नई सिद्धियां प्राप्त कर रहे हैं, जीत का Goal के बाद Goal कर रहे हैं, तो वहीं देश में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो राजनीति स्वार्थ में डूबकर ऐसी चीजें कर रहे हैं। लगता है Self Goal करने में जुटे हैं। देश क्या चाहता है, देश क्या हासिल कर रहा है, देश कैसे बदल रहा है इसमे इनको कोई सरोकार नहीं। ये लोग अपने स्वार्थ के लिए देश का समय और देश की भावना, दोनों को आहत करने में जुटे हैं। भारत की संसद का, जनभावनाओं की अभिव्यक्ति के पावन स्थान का, ये लोग अपने राजनीतिक स्वार्थ की वजह से निरंतर अपमान कर रहे हैं। आज पूरा देश, मानवता पर आए सबसे बड़े संकट से 100 साल में आया हुआ पहली बार आया हुआ इतने बड़े संकट से बाहर निकलने के लिए जी-जान से देश का हर नागरिक जुटा है। प्रयास कर रहा है। और ये लोग, कैसे देशहित के काम को रोका जाए, इसकी स्पर्धा में लगे हैं। इस होड़ में जुटे हैं। लेकिन साथियों, ये महान देश, इस देश की महान जनता ऐसी स्वार्थ और देशहित विरोधी राजनीति का बंधक नहीं बन सकता। ये लोग देश को, देश के विकास को रोकने की कितनी भी कोशिश कर लें, ये देश इनसे रुकने वाला नहीं है। वो संसद को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन 130 करोड़ की जनता देश को रुकने न देने में लगे हुए हैं। हर कठिनाई को चुनौती देते हुए, देश हर मोर्चे पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। सिर्फ बीते कुछ हफ्तों के कीर्तिमान ही देखें, और जरा देखिए जब देश नए किर्तिमान स्थापित कर रहा था। और कुछ लोग दिल्ली में संसद को रोकने में लगे हुए थे। कुछ ही सप्तहों में जो हमने किर्तिमान देखे तो भारतीयों का सामर्थ्य और सफलता चारों तरफ नजर आता है। ओलंपिक में अभूतपूर्व प्रदर्शन को पूरा देश उत्साहपूर्व देख रहा है। भारत टीकाकरण के मामले में भी 50 करोड़ के पड़ाव के बिल्कुल दरवाजे पर आकर के खड़ा हो गया है। देखते ही देखते उसको भी पार कर जाएगा। इस कोरोना कालखंड में भी भारतीयों का उद्यम नए प्रतिमान गढ़ रहा है। जुलाई में GST का कलेक्शन हो या हमारा एक्सपोर्ट हो, ये नई ऊंचाई छू रहे हैं। जुलाई में 1 लाख 16 हजार करोड़ रुपए का GST कलेक्शन होना ये बताता है कि अर्थव्यवस्था गति पकड़ रही है। वहीं आजादी के बाद पहली बार किसी एक महीने में भारत का एक्सपोर्ट ढाई लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा हो गया। ढाई लाख करोड़ से भी पार कर गया। ढाई लाख करोड़ रुपए से पार होना आजादी के बाद पहली बार इस महीने में हुआ है। कृषि निर्यात में हम दशकों बाद दुनिया के टॉप-10 देशों में शामिल हुए हैं। भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है। लेकिन दशकों बाद टॉप-10 में हमारा नाम आया है। भारत का गौरव, देश का पहला मेड इन इंडिया, विमान वाहक पोत विक्रांत, समंदर में अपना ट्रायल शुरु कर चुका है। हर चुनौती को चुनौती देते हुए भारत ने लद्दाख में दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल रोड का निर्माण पूरा किया है। हाल ही में भारत ने e-RUPI लॉन्च किया है, जो आने वाले समय में डिजिटल इंडिया को मजबूती देगा और welfare scheme को बिल्कुल targeted और purpose को परिपूर्ण करेगा।

साथियों,

जो लोग सिर्फ अपने पद के लिए परेशान हैं, वो अब भारत को रोक नहीं सकते। नया भारत, पद नहीं पदक जीतकर के दुनिया में छा रहा है। नए भारत में आगे बढ़ने का मार्ग परिवार नहीं, बल्कि परिश्रम से तय होगा। और इसलिए, आज भारत का युवा कह रहा है- भारत चल पड़ा है, भारत का युवा चल पड़ा है।

साथियों,

इस कड़ी में योगी जी और उनकी सरकार ने जो आज का ये कार्यक्रम रखा है वो और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इस मुश्किल समय में, एक भी गरीब ऐसा ना हो, जिसके घर में राशन ना हो, ये सुनिश्चित करना बहुत ज़रूरी है।

साथियों,

सौ साल का ये सबसे बड़ा संकट सिर्फ महामारी का ही नहीं है। बल्कि इसने कई मोर्चों पर देश और दुनिया की अरबों की आबादी को, पूरी मानवजात को अपनी चपेट में लिया है। और वो एक सबसे बड़ी चुनौतियां पैदा कर रहा है। अतीत में हमने अनुभव किया है कि जब देश पर पहले इस तरह का बड़ा संकट आता था तो देश की तमाम व्यवस्थाएं बुरी तरह से चरमरा जाती थी, हिल जाती थीं। लोगों का विश्वास भी डिग जाता था। लेकिन आज भारत, भारत का प्रत्येक नागरिक पूरी ताकत से इस महामारी का मुकाबला कर रहा है। मेडिकल सेवाओं से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर हो, दुनिया का सबसे बड़ा मुफ्त टीकाकरण अभियान हो या फिर भारतवासियों को भुखमरी से बचाने का सबसे बड़ा अभियान हो, लाखों करोड़ रुपए के ये कार्यक्रम आज भारत सफलता के साथ आगे बढ़ा रहा है। महामारी के इस संकट के बीच, भारत ने बड़ी संख्या में रोज़गार निर्माण करने वाले लोग और बड़े-बड़े मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को भी रुकने नहीं दिया। मुझे खुशी है कि यूपी और यूपी के लोगों ने देश के सामर्थ्य को बढ़ाने के लिए, कंधे से कंधा मिलाकर के काम किया। यूपी में चल रहे हाईवे, एक्सप्रेसवे और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और डिफेंस कॉरीडोर जैसे प्रोजेक्टस जिस गति से आगे बढ़ रहे हैं। ये उसका जीता - जागता उदाहरण हैं।

साथियों,

इतने संकट के बावजूद आज देश राशन से लेकर के दूसरे खाने-पीने के सामान की कीमतों को पूरी दुनिया में तूफान मचा हुआ है। ऐसे में हमे मालूम है छोटी सी भी ज्यादा बाढ़ भी आ जाये। दूध और सब्जी के भाव भी कितने बढ़ जाते हैं। थोड़ी भी असुविधा हो तो महंगाई कितनी बढ़ जाती है। हमारे सामने भी बड़ी चुनौती है। लेकिन मैं मेरे गरीब मध्यम वर्ग के भाई – बहनों को विश्वास दिलाता हूं। हम पूरी कोशिश कर रहे हैं। ताकि इसको नियंत्रण में हम रख पाएं, और ये भी आप सब को सहयोग से संभव होने वाला है। कोरोना काल में भी खेती और इससे जुड़े कामों को रुकने नहीं दिया गया, उन्हें पूरी सतर्कता के साथ जारी रखा गया। किसानों को बीज से लेकर खाद तक और फिर उपज बेचने तक समस्याएं ना हों, इसके लिए उचित प्रबंध किए गए। परिणाम हुआ कि हमारे किसानों ने रिकॉर्ड उत्पादन किया और सरकार ने भी MSP पर खरीदने के नए कॉर्ड स्थापित किए। और हमारे योगी जी की सरकार ने तो बीते 4 सालों में MSP पर खरीद में हर साल नए-नए रिकॉर्ड बनाए हैं। यूपी में इस साल गेहूं और धान की खरीद में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी संख्या में किसानों को MSP का लाभ पहुंचा है। यूपी के 13 लाख से अधिक किसान परिवारों को उनकी उपज का लगभग 24 हज़ार करोड़ रुपए सीधा उनके बैंक अकाउंट में पहुंचाया गया है।

साथियों,

केंद्र और उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार सामान्य जन की सुविधा और सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। कोरोना कालखंड के बावजूद गरीबों को सुविधाएं देने का अभियान मंद नहीं पड़ा। यूपी में अभी तक 17 लाख से अधिक ग्रामीण और शहरी गरीब परिवारों को अपने पक्के घर स्वीकृत हो चुके हैं। लाखों गरीब परिवारों को घर में ही शौचालय की सुविधा मिली है। लगभग डेढ़ करोड़ गरीब परिवारों को उज्जवला के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन और लाखों परिवारों को बिजली कनेक्शन दिए गए हैं। हर घर जल पहुंचाने का मिशन भी यूपी में तेज़ गति से आगे बढ़ रहा है। बीते 2 सालों के भीतर यूपी में 27 लाख ग्रामीण परिवारों तक पाइप से पानी पहुंचाया जा चुका है।

भाइयों और बहनों,

डबल इंजन की सरकार ने ये सुनिश्चित किया है कि गरीबों, दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों के लिए बनी योजनाएं ज़मीन पर तेज़ी से लागू हों। पीएम स्वनिधि योजना भी इसका एक बड़ा उदाहरण है। कोरोना से बनी परिस्थितियों में, इस कोरोना काल में जो परिस्थितियां बनी। रेहड़ी-पटरी-ठेला लगाने वाले बहनों-भाइयों की आजीविका फिर से पटरी पर आए इसके लिए उनको बैंकों से जोड़ा गया है। बहुत कम समय में ही इस योजना के तहत यूपी के लगभग 10 लाख साथियों को इसका लाभ देने की प्रक्रिया शुरू हुई है।

साथियों,

बीते दशकों में उत्तर प्रदेश की हमेशा क्या पहचान बनीं, क्या उल्लेख होता था उत्तर प्रदेश का आपको याद होगा। उत्तर प्रदेश को हमेशा राजनीति के चश्मे से देखा गया है। यूपी देश के विकास में भी अग्रणी भूमिका निभा सकता है, इसकी चर्चा तक ही नहीं होने दी गई। दिल्ली के सिंहासन का रास्ता, यूपी से होकर गुज़रता है, इसका सपना देखने वाले तो बहुत लोग आए और गए, लेकिन ऐसे लोगों ने कभी ये याद नहीं रखा कि भारत की समृद्धि का रास्ता भी यूपी से होकर ही गुज़रता है। इन लोगों ने उत्तर प्रदेश को सिर्फ राजनीति का ही केंद्र बनाए रखा गया। किसी ने वंशवाद के लिए, किसी ने अपने परिवार के लिए, किसी ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए, यूपी को सिर्फ इस्तेमाल किया गया। इन लोगों की संकीर्ण राजनीति में, भारत के इतने बड़े राज्य को भारत की आर्थिक प्रगति से जोड़ा ही नहीं गया। हां कुछ लोग जरुर समृद्ध हुए, कुछ परिवार जरूर आगे बढ़े। इन लोगों ने यूपी को नहीं बल्कि खुद को समृद्ध किया। मुझे खुशी है कि आज उत्तर प्रदेश, ऐसे लोगों के कुचक्र से बाहर निकलकर आगे बढ़ रहा है। डबल इंजन की सरकार ने यूपी के सामर्थ्य को एक संकुचित नज़रिए से देखने का तरीका बदल डाला है। यूपी भारत के ग्रोथ इंजन का पावर हाउस बन सकता है, ये आत्मविश्वास बीते सालों में पैदा हुआ है। यूपी के इतिहास में पहली बार सामान्य युवाओं के सपनों की बात हो रही है। यूपी के इतिहास में पहली बार अपराधियों में भय का माहौल पैदा हुआ है। यूपी के इतिहास में पहली बार, गरीबों को सताने वालों, कमज़ोर वर्गों को डराने-धमकाने और अवैध कब्जा करने वालों के मन में डर पैदा हुआ है।

जिस व्यवस्था को भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद की लत गई थी, उसमें सार्थक बदलाव की शुरुआत हुई है। आज यूपी में ये सुनिश्चित किया जा रहा है कि जनता के हिस्से का एक-एक पैसा सीधे जनता के खातों में पहुंचे, जनता को लाभ हो। आज यूपी निवेश का केंद्र बन रहा है। बड़ी-बड़ी कंपनियां आज यूपी आने के लिए लालाइत हो रही हैं। यूपी में इंफ्रास्ट्रक्चर के मेगा प्रोजेक्ट्स बन रहे हैं, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बन रहे हैं, रोज़गार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

भाइयों और बहनों,

उत्तर प्रदेश, यहां के परिश्रमी लोग, आत्मनिर्भर भारत, एक वैभवशाली भारत के निर्माण का बहुत बड़ा आधार हैं। आज हम आज़ादी के 75 वर्ष का पर्व मना रहे हैं, आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। ये महोत्सव सिर्फ आज़ादी का उत्सव भर ही नहीं है। बल्कि ये आने वाले 25 वर्षों के लिए बड़े लक्ष्यों, बड़े संकल्पों का अवसर है। इन संकल्पों में उत्तर प्रदेश की बहुत बड़ी भागीदारी है, बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। बीते दशकों में उत्तर प्रदेश जो हासिल नहीं कर पाया, अब उसे हासिल करने की बारी आई है। ये दशक एक तरह से उत्तर प्रदेश के पिछले 7 दशकों में जो कमी रह गई उसकी भरपाई करने का दशक है। ये काम यूपी के सामान्य युवाओं, हमारी बेटियों, गरीब, दलित, वंचित, पिछड़ों की पर्याप्त भागीदारी और उनको बेहतर अवसर दिए बगैर नहीं हो सकता। सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास इसी मंत्र के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं। बीते समय में शिक्षा से जुड़े दो बड़े फैसले ऐसे हैं, जिसका उत्तर प्रदेश बहुत बड़ा लाभार्थी होने वाला है। पहला फैसला इंजीनियरिंग की पढ़ाई से जुड़ा है। इंजीनियरिंग और टेक्निकल एजुकेशन से जुड़ी पढ़ाई से यूपी के गांव और गरीब की संतान बहुत हद तक भाषा की समस्या के कारण वंचित रह जाता था। अब इस बाध्यता को खत्म कर दिया गया है। हिंदी सहित अनेक भारतीय भाषाओं में इंजीनियरिंग और टेक्निकल एजुकेशन की पढ़ाई शुरु हो रही है। आधुनिक टेक्नॉलॉजी का उपयोग करते हुए, बेस्ट कोर्स, श्रेष्ठपाठ्यक्रम तैयार किया गया है। देश के अनेक राज्यों के संस्थानों ने ये सुविधा लागू करनी शुरू कर दी है।

भाइयों और बहनों,

एक और अहम फैसला है मेडिकल शिक्षा से जुड़ा। मेडिकल शिक्षा में अखिल भारतीय कोटे से ओबीसी को, पिछड़ों को आरक्षण के दायरे से बाहर रखा गया था। इस स्थिति को बदलते हुए हाल में हमारी सरकार ने इसमें ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया है। यही नहीं, सामान्य वर्ग के गरीब परिवारों के बच्चों के लिए भी जो 10 प्रतिशत आरक्षण है, उसको भी इसी सेशन से लागू किया गया है। इस फैसले से मेडिकल प्रोफेशन में जो डॉक्टर बनना चाहते हैं। उस क्षेत्र में एक बड़े टैलेंट पूल को अवसर मिलेगा और समाज के हर वर्ग को आगे बढ़ने के लिए, बेहतर करने के लिए, प्रोत्साहन मिलेगा। गरीब की बच्चें को डॉक्टर बनने का रास्ता खोला है।

भाइयों और बहनों,

हेल्थ सेक्टर में भी बीते सालों में उत्तर प्रदेश में अभूतपूर्व काम हुआ है। कल्पना कीजिए 4-5 साल पहले अगर कोरोना जैसी वैश्विक महामारी आती तो यूपी की क्या स्थिति होती? तब तो सामान्य सर्दी-बुखार, हैज़ा जैसी बीमारियां तक जीवन के लिए संकट बन जाती थीं। आज उत्तर प्रदेश कोरोना टीकाकरण के मामले में करीब-करीब सवा पाँच करोड़ के पड़ाव पर पहुंचने वाला पहला राज्य बन रहा है। वो भी तब जब राजनीतिक विरोध मात्र के लिए मेड इन इंडिया वैक्सीन को लेकर कुछ लोगों द्वारा भ्रम फैलाया गया, झूठ प्रचारित किया गया। लेकिन यूपी की समझदार जनता ने हर भ्रम, हर झूठ को नकार दिया। मुझे विश्वास है कि उत्तर प्रदेश, सबको वैक्सीन-मुफ्त वैक्सीन अभियान को और तेज़ गति से आगे बढ़ाएगा। और मास्क, दो गज़ की दूरी के नियमों में ढील नहीं आने देगा। एक बार फिर से पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के सभी लाभार्थियों को मैं बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। और आने वाला समय तो त्योहारों का समय है। दीवाली तक त्योहार ही त्योहार आ रहे हैं। और इसलिए हमने तय किया है। कि इन त्योहारों में हमारे किसी गरीब परिवार को तकलीफ न हो। इसलिए दीवाली तक ये मुफ्त राशन देने का चालू रहेगा। मैं फिर एक बार आप सबको आने वाले सभी त्योहारों के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। आप स्वस्थ रहें, आपका परिवार स्वस्थ रहे। बहुत बहुत धन्यवाद !!