Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana can provide a solution for the farmers problems, in times of difficulty: PM
Shortcomings of previous crop insurance schemes have been eliminated: PM Modi
We want to create trust among farmers with regard to crop insurance: PM
Technology will be used extensively with Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana to ensure early settlement of claims: PM Modi
When we talk about technology and a #DigitalIndia, we see the welfare of the farmers at the core: PM
Welfare of the farmers is at the core of Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana, says Prime Minister Modi
Digital Platform for National Agriculture Market to be launched on Babasaheb Ambedkar's birth anniversary on April 14th: PM
Digital Platform for National Agriculture Market to enable farmers get a better price for their produce
#StartupIndia not restricted to IT. There is immense scope for agriculture sector also: PM Modi
Per drop, more crop is what we are giving importance to: PM Modi
We want to increase the reach of soil health card scheme: PM

विशाल संख्‍या में पधारे हुए मेरे प्‍यारे किसान भाइयो और बहनों,

मैं जब हेलीकॉप्‍टर से आ रहा था तो मैं देख रहा था कि मीलों तक बसों की कतार लगी थी, वो यहां पहुंचना चाहते थे। मैं नहीं मानता हूं वो पहुंच पाए होंगे। जो मेरे किसान भाई-बहन यहां पांच किलोमीटर-दस किलोमीटर दूरी पर अटक गए है, उनको भी मैं यहां से नमन करता हूं। मैं सामने की तरफ देखने की कोशिश कर रहा हूं, लोग ही लोग नज़र आ रहे हैं। इस तरफ भी वो ही हाल है, इस तरफ भी वो ही हाल है। और ये Sehore एक छोटा-सा कस्‍बा जहां इतना बड़ा कार्यक्रम आयोजित करना और राज्‍य भर से इतनी बड़ी मात्रा में किसानों का आना, हमें आशीर्वाद देना, मैं हृदय से इन मेरे किसान भाइयो-बहनों का वंदन करता हूं, अभिनंदन करता हूं। मैं आज विशेष रूप से मध्‍य प्रदेश के किसानों का दर्शन करने के लिए आया हूं। मध्‍य प्रदेश के किसानों को नमन करने के लिए आया हूं, उनका अभिनंदन करने के लिए आया हूं।

दस साल पहले हिन्‍दुस्‍तान के Agriculture के नक्‍शे पर मध्‍य प्रदेश का नामो-निशान नहीं था। कृषि क्षेत्र में योगदान करने वाले राज्‍यों में पंजाब, हरियाणा, गंगा-यमुना के तट या कृष्‍ण-गोदावरी के तट, यही इलाके हिन्‍दुस्‍तान में कृषि क्षेत्र के इलाके माने जाते थे। लेकिन मध्‍य प्रदेश के किसानों ने अपनी सूझबूझ से, अपने परिश्रम से, नए-नए प्रयोगों से और मध्‍य प्रदेश की शिवराज जी की सरकार ने अनेक वित्‍त किसान लक्ष्‍य योजनाओं के रहते, ग्रामीण विकास की योजनाओं के रहते और किसान की जो मूलभूत आवश्‍यकता है, उस पानी पर बल देने के कारण राज्‍य सरकार और किसानों ने मिलकर के एक नया इतिहास रचा है और आज हिन्‍दुस्‍तान के कृषि जगत में मध्‍य प्रदेश सिरमौर बन गया है और इसलिए मैं मध्‍य प्रदेश के किसानों को आज नमन करने आया हूं।

चार-चार-चार साल लगातार, कृषि क्षेत्र का अवॉर्ड एक राज्‍य जीतता चला जाए, यह छोटी बात नहीं है और उनका growth भी देखिए। कभी zero पर से दस पर पहुंचना सरल होता है, लेकिन 15-17-18 पर से 20-22 या 24 पर पहुंचना बहुत कठिन होता है। जो लोग कृषि अर्थशास्‍त्र को समझते हैं, वो भली-भांति जान सकते हैं कि मध्‍य प्रदेश ने भारत की आर्थिक विकास की यात्रा में मध्‍य प्रदेश के कृषि जगत का कितना बड़ा योगदान किया है। इसलिए मैं विशेष रूप से आज यहां आकर के लाखों किसानों की हाजिरी में ‘कृषि कर्मण अवॉर्ड’ दे रहा हूं। यह अवॉर्ड तो मैंने मुख्‍यमंत्री के हाथ में दिया, राज्‍य के कृषि मंत्री के हाथ में दिया, लेकिन हकीकत में तो यह जो ‘कृषि कर्मण अवॉर्ड’ है, वो मैं मध्‍य प्रदेश के कोटि-कोटि लाखों मेरे किसान भाइयो-बहनों को देते हुए कोटि-कोटि वंदन करता हूं।

आपने अद्भुत काम किया है, लेकिन भाइयो-बहनों इन सब के बावजूद भी पिछले दो साल वर्षा की स्‍थिति ठीक नहीं रही। कहीं सूखा रहा तो कहीं बाढ़ रही, इसके बावजूद भी देश के किसानों ने फसल की पैदावार मे कमी नहीं आने दी। ऊपर से कुछ मात्रा में बढ़ोत्‍तरी हुई। यह किसानों के पुरुषार्थ का परिणाम है कि आज देश में विपरीत मौसम के बावजूद भी हमारा किसान विपरीत परिस्‍थितियों से जूझते हुए भी देश के अन्‍न के भंडार भरने में कोई कमी नहीं रखता है।

आज मेरा यहां आने का एक और कारण है कि संपूर्ण देश के किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, उसकी guidelines आज मध्‍य प्रदेश के किसानों की हाजिरी में समग्र देश के किसानों को अर्पित की जा रही है। इसका हक मध्‍य प्रदेश के किसानों का बनता है जिन्‍होंने एक नया इतिहास रचा है और इसलिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का आरंभ भी मध्‍य प्रदेश से करना बहुत ही उचित मुझे लगता है और उसके कारण आज इस कार्यक्रम की रचना की गई।

हमारे देश में अटल जी की सरकार जब थी, तब सबसे पहले फसल बीमा योजना आई थी और किसानों का भला करने का एक प्रमाणित प्रयास भारतीय जनता पार्टी, NDA, अटल जी की सरकार ने किया था। बाद में सरकार बदल गई। उन्‍होंने उसमें कुछ परिवर्तन किए और परिवर्तन करने के कारण सरकार का तो भला हुआ, लेकिन किसान के मन में आशंकाएं पैदा हो गई। परिणाम यह आया कि किसान फसल बीमा योजनाओं से दूर भागने लगा। इस देश के इतने किसान प्राकृतिक संकटों को झेलते है, उसके बावजूद भी वो फसल बीमा लेने के लिए तैयार नहीं होते हैं। पूरे हिन्‍दुस्‍तान में 20 प्रतिशत से ज्‍यादा किसान बीमा लेने के लिए तैयार नहीं है। उनको पता है कि यह करने के बाद भी कुछ मिलने वाला नहीं है। हमारे सामने सबसे पहली चुनौती थी कि हिन्‍दुस्‍तान के किसान के अंदर विश्‍वास पैदा किया जाए। बीमा योजना की एक ऐसी product दी जाए कि जिसके कारण कि‍सान की सारी आशंकाओं का समाधान हो जाए और इस देश में पहली बार ऐसी फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना आई है। जो लोग सुबह-शाम मोदी को कि‍सान वि‍रोधी कहने के लि‍ए भांति‍-भांति‍ के प्रयोग करते हैं, ऐसे लोगों ने भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की आलोचना करने की हि‍म्‍मत नहीं की क्‍योंकि‍ ऐसी योजना बनी है कि जि‍समें कि‍सान की सारी मुसीबतों का समाधान है।

एक समय था कि‍ कि‍सान फसल बीमा कुछ इलाकों में तो 14% तक जाना पडा। कुछ इलाकों में 6%-8% गया। बीमा कंपनि‍यां तय करती थी, मजबूरी का फायदा उठाती थी। इस सरकार ने नि‍र्णय कर लि‍या कि‍ हम जब बीमा योजना करेंगे, तो रबी फसल के लि‍ए डेढ percent से ज्‍यादा कि‍सान से प्रीमि‍यम नहीं लि‍या जाएगा और खरीफ में 2% से ज्‍यादा नहीं लि‍या जाएगा। कहां 12-14% तक लूटा जाता था और कहां 2% का cap लगा दि‍या। उन्‍होंने क्‍या कि‍या था? भुगतान के ऊपर cap लगा दी थी, एक दीवार लगा दी थी कि‍ इससे ज्‍यादा भुगतान नहीं होगा। हमने प्रीमि‍यम पर तो cap लगा दी, लेकि‍न कि‍सान को जब मि‍लने की नौबत आएगी, उस पर कोई cap नहीं रहेगी। जि‍तना बीमा वो कराएगा, उतना ही पैसा उसका हक बनेगा और उसको देने का काम होगा। यह बहुत बड़ा नि‍र्णय है।

और एक बात भी। आज स्‍थि‍ति‍ ऐसी है कि‍ एक गांव में अगर 100 कि‍सान है। 80 कि‍सान बीमा योजना से जुड़ते नहीं है, सिर्फ 20 कि‍सान जुड़ते हैं और फसल का नुकसान भी 12-15-25 गांव के बीच में क्‍या स्‍थि‍ति‍ है उसका हि‍साब लगाया जाता था। हमने इस बार निर्णय कि‍या - अकेला एक कि‍सान होगा गांव में और मान लीजि‍ए उसी के खेत में मुसीबत आ गई, ओले गि‍र गए, पानी का भराव हो गया, भूस्‍खलन हो गया तो अगल-बगल में क्‍या हुआ है वो नहीं देखा जाएगा, जि‍स कि‍सान का नुकसान हुआ है, बीमा योजना का लाभ वो अकेला होगा तो भी उसको मि‍लेगा। यह बड़ा ऐति‍हासि‍क नि‍र्णय कि‍या।

पहले की योजना में फसल बीमा में अगर बारि‍श नहीं, हुई तो कि‍सान मेहनत नहीं करता था, बीज खराब नहीं करता था, वो जाता ही नहीं था खेत में। क्‍योंकि‍ मालूम था कि‍ भई कुछ होना ही नहीं है तो क्‍यों जाऊं। ऐसी स्‍थि‍ति‍ में कि‍सान क्‍या करेगा? बीज बोने के बाद फसल खराब हो तब तो बीमा हो सकता था। यह ऐसी बीमा योजना है कि‍ अगर बारि‍श नहीं हुइ है और उसके कारण कि‍सान ने बोनी नहीं की है तो भी उसको कुछ मात्रा में मदद देने का प्रयास इस बीमा योजना से होगा।

इस बीमा योजना के तहत एक और महत्‍वपूर्ण नि‍र्णय कि‍या कि‍ एक बार फसल काट दी। तब तक मौसम अच्‍छा था, सब अच्‍छा था, खेत के अंदर फसल के ढेर लगे हुए है और अचानक बारि‍श आ गई, फसल काटने के बाद बारि‍श आ गई। हि‍न्‍दुस्‍तान की कोई बीमा कंपनी उसके लि‍ए कि‍सान की मुसीबत को देखने के लि‍ए तैयार नहीं है। पहली बार हि‍न्‍दुस्‍तान में ऐसा नि‍र्णय कि‍या गया है कि‍ फसल काटने के बाद अगर खेत में ढेर पड़ा है और 14 दि‍न के भीतर-भीतर अगर बारि‍श आ गई, ओले गि‍र गए और वो फसल बर्बाद हुई तो उसका भी बीमा दि‍या जाएगा, उसके लि‍ए भी कि‍सान को भुगतान कि‍या जाएगा।

भाइयो-बहनों, पहले बीमा लेते थे तो बीमा मंजूर होने में चार-चार season चले जाते थे, नि‍र्णय नहीं होता था, बीमा कंपनी, सरकार और कि‍सान के बीच कागज ही चलते रहते थे। हमने नि‍र्णय कि‍या है कि‍ technology का उपयोग कि‍या जाए, तत्‍काल survey करने में technology का उपयोग कि‍या जाएगा और 25 प्रति‍शत राशि‍ उसको तत्‍काल दी जाएगी और बाद की प्रक्रि‍या कम से कम समय में पूर्ण करके कि‍सान को दी जाएगी।

भाइयो-बहनों इससे बड़ी गारंटी, risk लेने की गारंटी कभी भी नहीं हो सकती है। यह जो कि‍सानों ने करके दि‍खाया है। भाइयो-बहनो मेरी एक अपेक्षा है। आजादी के इतने साल हो गए, कि‍सान का बीमा पर वि‍श्‍वास नहीं रहा है। मुझे आपकी मदद चाहि‍ए। आप बीमा योजना पर वि‍श्‍वास करे, एक बार प्रयोग करके देखे और आज 20 प्रति‍शत से ज्‍यादा लोग बीमा नहीं लेते। क्‍या हि‍न्‍दुस्‍तान के 50 प्रति‍शत कि‍सान बीमा योजना में जुड़ने को, आगे आने को तैयार है? जि‍तने ज्‍यादा कि‍सान जुड़ेंगे, इतना सरकार की ति‍जोरी पर बोझ बढ़ने वाला है। जि‍तने ज्‍यादा कि‍सान बीमा लेंगे, सरकार की ति‍जोरी से उतना पैसा ज्‍यादा जाने वाला है। उसके बावजूद भी मैं कि‍सानों से आग्रह करता हूं कि‍ आप इस बीमा योजना के साथ जुड़ि‍ए। हि‍न्‍दुस्‍तान में पहली बार कि‍सानों की भलाई के लि‍ए इतनी बड़ी योजना लाई गई है और एक बार कि‍सान इस योजना से जुड़ गया तो आने वाले दि‍नों में प्राकृति‍क संकट कि‍सान को कभी डुला नहीं पाएंगे, हि‍ला नहीं पाएंगे, डरा नहीं पाएंगे, सरकार उसके साथ कंधे से कंधा मि‍लाकर के खड़ी रहेगी।

भाइयो-बहनों, हमारे देश में कोई वर्ष ऐसा नहीं होता है कि‍ जब देश के कि‍सी न कि‍सी इलाके में प्राकृति‍क आपदा न आई हो और कि‍सानों को भयंकर नुकसान होता है। कि‍सी न कि‍सी इलाके में होता ही होता है, लेकि‍न पहले नि‍यम ऐसे थे कि‍ अगर उस इलाके में 50 प्रति‍शत से ज्‍यादा नुकसान हुआ होगा, तब जाकर के सरकार वहां पर हि‍साब-कि‍ताब शुरू करेगी। भाइयो-बहनों, हमने इस नि‍र्णय को बदल दि‍या और हमने कहा कि‍ 50 प्रति‍शत नहीं, एक-ति‍हाई भी अगर नुकसान हुआ है तो भी कि‍सान को इस नुकसान का मुआवजा दि‍या जाएगा। यह बहुत बड़ा ऐति‍हासि‍क नि‍र्णय कि‍या गया है। पहले कि‍सान को जो मुआवजा दि‍या जाता था, इसको करीब-करीब तीन गुना कर दि‍या गया है। भाइयो-बहनों, कि‍सान का कल्‍याण कैसे हो, कि‍सान के जीवन को कैसे बदला जाए, गांव की आर्थि‍क स्‍थि‍ति‍ में कैसे बदलाव लाया जाए, उन बातों को प्राथमि‍कता देते हुए इस सरकार ने इन कामों को आगे बढ़ाया है।

सरकार ने एक और नया काम लि‍या है। हमारे देश में आधुनि‍क कृषि‍ की तरफ हम जाना चाहते हैं। हम कृषि‍ जगत में technology लाना चाहते हैं। हम हमारे agriculture sector को mechanize करना चाहते है, लेकि‍न साथ-साथ हमारी सदि‍यों के जो अनुभव है, हमारे कि‍सान के पास जो बुद्धि‍ धन है, जो परंपरागत knowledge है इसको भुलाया नहीं जा सकता है। देश का सबसे बड़ा नुकसान हुआ है कि‍ हम नया तो ला नहीं पाए और पुराना छोड़ दि‍या और इसलि‍ए मैं वि‍शेष रूप से हमारे कृषि‍ मंत्री राधा मोहन सिंह जी को बधाई देना चाहता हूं। यह उनकी कल्‍पना थी कि‍ परंपरागत जो कृषि‍ है, जो progressive farmers है, उनके अनुभवों का भी लाभ लि‍या जाए और आधुनि‍क वि‍ज्ञान और पंरपरागत कृषि‍, इन दोनों का मेल कि‍या जाए और उस काम के लि‍ए हमारे कृषि‍ मंत्री बहुत बड़ा योगदान दे रहे हैं।

भाइयो-बहनों, हमारा कि‍सान मेहनत करता है, फसल पैदा करता है लेकि‍न उसको दाम नहीं मि‍लता है। इतना बड़ा देश है। एक ही फसल एक जगह पर भाव गि‍र जाते है तो दूसरी जगह पर भाव ज्‍यादा होते है, दाम ज्‍यादा होते है। लेकि‍न कि‍सान के पास choice नहीं रहता है। उसको तो, बेचारे को अपने गांव के बगल में जो मंडी है उसी में माल बेचना पड़ता है। हम जो technology की बात करते है, Digital India की बात करते हैं वो मेरे कि‍सान भाइयों-बहनों के लि‍ए करते हैं। आने वाले दि‍नों में हम एक National Agriculture Market, इसका पूरा virtual platform खड़ा कर रहे हैं, Digital platform खड़ा कर रहे हैं। हि‍न्‍दुस्‍तान के कि‍सी भी कोने में मेरा कि‍सान अपने मोबाइल फोन पर देख पाएगा कि‍ उसके यहां अगर गेहूं है तो आज हि‍न्‍दुस्‍तान के कि‍स कोने में गेहूं कि‍तने दाम से बि‍क रहे हैं और वो तय कर सकता है। वो यहां मध्‍य प्रदेश में बैठे-बैठे तय कर सकता है कि‍ मुझे मध्‍य प्रदेश में गेहूं नहीं बेचना है, मुझे तो तमि‍लनाडु में ज्‍यादा दाम मि‍लते हैं, तमि‍लनाडु में बेचना है। वो बेच सकता है। पहली बार सारे देश की करीब साढ़े पाँच सौ मंडि‍यों को technology से जोड़कर के Digital India का पहला फायदा मेरे कि‍सान भाइयो-बहनों को मि‍ले। इसके लि‍ए ऐसी मंडि‍यों को Online network बनाकर के एक National Agriculture Market खड़ा करना है।

भाइयो-बहनों, 14 अप्रैल डॉ. भीमराव बाबा साहेब अम्‍बेडकर की जन्‍म जयंती है। हमारे Mhow में, हमारे मुख्‍यमंत्री शि‍वराज जी ने बाबा साहेब अम्‍बेडकर का तीर्थ खड़ा कि‍या है। उस 14 अप्रैल, बाबा साहेब अम्‍बेडकर जी की जयंती के दि‍न हम हि‍न्‍दुस्‍तान में ये National Agriculture Market का Online प्रारंभ करेंगे। उसकी शुभ शुरूआत कर देंगे।

भाइयो-बहनों, हमारे देश में गन्ना कि‍सानों को लेकर के हमेशा चि‍न्‍ता बनी रही। जब हम सरकार में आए, बेहि‍साब पैसे कि‍सानों के भुगतान बाकी थे। जहां कि‍सान गन्‍ना पैदा करता था, बेहि‍साब भुगतान बाकी था। कोई कहता था 50 हजार करोड़ बाकी है, कोई कहता था 60 हजार करोड़ बाकी है, कोई कहता था 65 हजार करोड़ बाकी है। हर दि‍न नए-नए आंकड़ें आते थे। हमारे सामने चुनौती थी कि‍ इन गन्‍ना कि‍सानों को पैसे कैसे मि‍ले। एक के बाद एक योजना बनाई। दुनि‍या में में चीनी का दाम गि‍र गया था, भारत में चीनी भरपूर थी। दुनि‍या चीनी खरीदने को तैयार नहीं थी। कारखानों के पास पैसा नहीं था। कि‍सान के पैसे का कोई भुगतान नहीं करता था। हमने एक के बाद एक योजनाएं बनाई और आज 18 महीने के भीतर-भीतर मैं बड़े संतोष के साथ कहता हूं कि‍ जहां 50 हजार करोड़, 60 हजार करोड़ के भुगतान की बातें होती थी, आज, कल तक का मैंने हि‍साब लि‍या, एक हजार करोड़ से भी कम भुगतान अब बाकी रहा है। मेरे गन्‍ना कि‍सानों को यह भुगतान हो जाएगा।

इतना ही नहीं भाइयो-बहनों, हम कि‍सान को ताकतवर बनाने के नि‍र्णय करते हैं। गन्‍ना कि‍सान, चीनी के कारखानेदारों की इच्‍छा पर जि‍न्‍दा या मरा यह अवस्‍था ठीक नहीं है। हमने एक नि‍यम बनाया कि‍ गन्‍ने से इथनॉल बनाया जाए, वो इथनॉल पेट्रोल में मि‍क्‍स कि‍या जाए। 10 प्रति‍शत इथनॉल बनाकर के पेट्रोल में मि‍क्‍स करने का नि‍र्णय कि‍या। देश को जो खाड़ी से तेल लाना पड़ता है, मेरे हि‍न्‍दुस्‍तान का गन्‍ना कि‍सान झाड़ी से तेल पैदा करेगा। खाड़ी के तेल के सामने, मेरा झाड़ी का तेल काम आएगा और वो पर्यावरण की दृष्‍टि‍ से उत्‍तम होगा, आर्थि‍क दृष्‍टि‍ से देश का भला करने वाला होगा और कि‍सान को गन्‍ना ज्‍यादा पैदा हो गया तो जो मुसीबत में फंसना पड़ता था, उससे वो बाहर आ जाएगा।

चीनी के लि‍ए export के लि‍ए योजनाएं बनाई, import कम करने के लि‍ए योजना बनाई, brown चीनी जो होती है उसके लि‍ए योजना बनाई। भारतीय जनता पार्टी की सरकारें जब भी आती है, कि‍सानों का कल्‍याण यह उनकी प्राथमि‍कता रहती है और उसी का परि‍णाम है कि‍ मध्‍य प्रदेश ने एक नया वि‍क्रम कर दि‍या। गुजरात जो रेगि‍स्‍तान है, वहां के कि‍सानों ने कमाल करके दि‍खाया।

भाइयो-बहनों, आज कृषि‍ क्षेत्र में अनेक नए प्रयास, नए प्रयोगों की आवश्‍यकता है, नए innovation होने चाहि‍ए। हमने एक ‘Start-up India, Stand-up India’ का अभि‍यान चलाया है, लेकि‍न यह ‘Start-up India, Stand-up India’ सि‍र्फ Information Technology के लि‍ए नहीं है। यह कोई औजार बनाने के लि‍ए ‘स्‍टार्ट-अप इंडि‍या, स्‍टैंड-अप इंडि‍या’ नहीं है। कृषि‍ क्षेत्र में भी ‘Start-up India, Stand-up India’ का काम हो सकता है। मैं नौजवानों से आग्रह करता हूं, एक बहुत बड़ा अवसर हमारे सामने है। हम कृषि‍ क्षेत्र में नए-नए आवि‍ष्‍कार करे, नए-नए साधनों को बनाए, नई-नई technology का innovation करे, कि‍सानों के लि‍ए करे, फसल के लि‍ए करे, पशुपालन के लि‍ए करे, मत्‍स्‍य उद्योग के लि‍ए करे, dairy farming के लि‍ए करे, Poultry farming के लि‍ए करे और ‘Start-up’ योजना का लाभ उठाए, यह हमारे कि‍सानों की नए ताकत बनेगी।

आज अगर हमारा कि‍सान Organic Farming में जाता है तो दुनि‍या में उसको एक नया मार्कि‍ट मि‍लेगा। हि‍न्‍दुस्‍तान का सि‍क्‍कि‍म state देश का पहला Organic State बना है और पूरा नॉर्थ-ईस्‍ट, नागालैंड हो, मि‍जोरम हो, मेघालय हो, यह सारा इलाका वो दुनि‍या का Organic Capital बनने की ताकत रखता है। इस काम पर हमने बल दि‍या है।

हमारी एक इच्‍छा है – प्रधानमंत्री कृषि‍ सिंचाई योजना। हि‍न्‍दुस्‍तान के कि‍सान को अगर पानी मि‍ल जाए तो मेरे कि‍सान में वो दम है, वो मि‍ट्टी में से सोना पैदा कर सकता है। और इसलि‍ए दि‍ल्‍ली में हमारी सरकार ने सर्वाधि‍क बजट कृषि‍ सिंचाई योजना पर लगाया है और उसमें जल संचय पर बल है, जल सींचन पर बल है, Micro irrigation पर बल है, per drop more crop, एक-एक बूंद से अधि‍कतम फसल पैदा करने का इरादा लेकर के हम आगे बढ़ रहे हैं और उसके लि‍ए मैं शि‍वराज जी का वि‍शेष अभि‍नंदन करता हूं। यह जो कृषि‍ क्रान्‍ति‍ मध्‍य प्रदेश में आई है उसका मूल कारण है, उन्‍होंने सिंचाई योजना पर बल दि‍या है, Irrigation पर बल दि‍या और कहां 12 लाख से 32 लाख पहुंचा दि‍या। मैं मध्‍य प्रदेश मुख्‍यमंत्री शि‍वराज जी और उनके नेतृत्‍व की टीम को बहुत-बहुत बधाई देता हूं कि‍ उन्‍होंने कि‍सानों की जरूरत को समझा। उन्‍होंने प्राथमि‍कता दी और यह परि‍णाम आया है। पूरे देश में इसी काम को आगे बढ़ाना है।

मैं आपसे आग्रह करता हूं हम technology का भी उपयोग करते हैं। आज सेटेलाइट के द्वारा आपके गांव में पानी कहां से कहां जा सकता है, उसका Contour plan आसानी से बन सकता है। गांव का पानी गांव में, यह मंत्र लेकर के हमें चलना चाहि‍ए। बारि‍श में जि‍तना भी पानी गि‍रे उसको रोकने का प्रबंध होना चाहि‍ए। अगर आपको ज्‍यादा खर्चा नहीं करना है, तो मैं आपको एक सुझाव देता हूं। मेरे कि‍सान भाई-बहन उसको करे, फर्टि‍लाइजर के जो खाली बैग होते हैं, सीमेंट के जो खाली बैग होते हैं, बोरे होते हैं, उसमें पत्‍थर और मि‍ट्टी भर दो और जहां से पानी जाता है वहां पर पानी को रोक लो। 25-50 ठेले लगा दो, पानी रुक जाएगा। 10 दि‍न-15 दि‍न में वो पानी जमीन में उतर जाएगा। जमीन का पानी का स्‍तर ऊपर आ जाएगा, आपकी कृषि‍ को बहुत फायदा होगा। पूरे मध्‍य प्रदेश में, पूरे हि‍न्‍दुस्‍तान में, हमारे सामान्‍य प्रयोगों के द्वारा हम पानी को बचाने का काम अब उठाए।

उसी प्रकार से, यह हम जो Flood Irrigation करते हैं, मैं कि‍सान भाइयों से आग्रह करता हूं Flood Irrigation की जरूरत नहीं है। यह हमारे दि‍माग में भर गया है कि‍ खेत अगर पानी से लबालब भरा हुआ है, तभी फसल पैदा होती है, ऐसा नहीं है। मैं आपको एक उदाहरण से समझाना चाहता हूं। अगर कि‍सी परि‍वार में कोई बच्‍चा, 5 साल-6 साल की उम्र हुई हो, लेकि‍न शरीर उसका एक या दो साल की उम्र जैसा दि‍खता है, वज़न बढ़ता नहीं है, चेहरे पर चेतना नहीं है। एकदम ढीला-ढाला है और मां को बड़ी इच्छा है कि‍ बेटा जरा हंसते-खेलने लगे, वज़न बढ़ने लगे, खून बढ़ने लगे और मां अगर यह सोचे कि‍ बाल्‍टी भर पि‍स्‍ता-बादाम वाला दूध तैयार करूंगी और बच्‍चे को केसर, पि‍स्‍ता, बादाम के दूध से दि‍न में चार-चार बार नहलाऊंगी, दूध की बाल्‍टी में उसको आधा दि‍न बैठाकर के रखूंगी, क्‍या वो बच्‍चे के शरीर में वज़न बढ़ेगा, खून बढ़ेगा, शरीर में बदलाव आएगा? नहीं आएगा। दूध हो, बादाम हो, पि‍स्‍ता हो, केसर हो, उसको नहलाया जाए, लेकि‍न बच्‍चे के शरीर में फर्क नहीं आएगा। लेकि‍न समझदार मां बच्‍चे को दि‍न में चम्‍मच से 10 चम्‍मच-15 चम्‍मच दूध पि‍लाती जाएगी तो शाम तक भले 200 ग्राम दूध ले ले, लेकि‍न वज़न बढ़ने लगेगा, शरीर बढ़ने लगेगा, खून बढ़ने लगेगा। दूध से नहलाने से बदन नहीं बदलता है, लेकि‍न दूध अगर दो-दो चम्‍मच पि‍ला दि‍या तो बदलाव आता है। यह फसल का भी वैसा ही स्‍वभाव है जैसा बालक का होता है। फसल को पानी में डुबोकर के रखोगे तो फसल ताकतवर बनेगी, यह सोचना गलत है। अगर बूंद-बूंद फसल को पानी पि‍लाओगे तो फसल तेजी से बढ़ेगी और इसलि‍ए एक-एक बूंद पानी से फसल कैसे बनाई जाए, उस पर ध्‍यान देना और इसलि‍ए per drop more crop, यह Irrigation पर हम बल दे रहे हैं।

मेरे भाइयो-बहनों, मैं 2014 में प्रधानमंत्री बना, मुख्‍यमंत्रि‍यों की मुझे जो सबसे ज्‍यादा चि‍ट्ठि‍यां आई, सबसे ज्‍यादा चि‍ट्ठि‍यां क्‍या आई कि‍ प्रधानमंत्री जी हमारे राज्‍य में यूरि‍या की कमी है, तत्‍काल हमें यूरि‍या भेजि‍ए। हमें यूरि‍या की आवश्‍यकता है। भाइयों-बहनो, 2015 में हि‍न्‍दुस्‍तान के एक भी मुख्‍यमंत्री की तरफ से मुझे यूरि‍या की मांग को लेकर के चि‍ट्ठी नहीं आई, हि‍न्‍दुस्‍तान के कि‍सी कोने से नहीं आई। पहले के आप अख़बार नि‍कालकर के देख लीजि‍ए कि‍सी न राज्‍य में, कि‍सी न कि‍सी जि‍ले में, यूरि‍या लेने के लि‍ए कि‍सानों की कतार के फोटो आते थे। कि‍सान यूरि‍या को ब्‍लैक मार्कि‍ट में खरीदता था और कुछ स्‍थानों पर तो यूरि‍या लेने के लि‍ए आते थे, झगड़ा हो जाता था और पुलि‍स को लाठी चार्ज करना पड़ता था। यह बहुत दूर की बात नहीं बताता हूं, 2014 के पहले तक यह होता रहता था। पहली बार मेरे भाइयो-बहनों, हि‍न्‍दुस्‍तान के कि‍सान को यूरि‍या के लि‍ए इंतजार नहीं करना पडा, मुख्‍यमंत्री को चि‍ट्ठी नहीं लि‍खनी पड़ी। पुलि‍स को डंडा नहीं चलाना पडा, कि‍सान को कतार में खड़ा नहीं रहना पडा, यह काम इस सरकार ने करके दि‍खाया है भाइयो-बहनों। और इतना ही नहीं देश आजाद होने के बाद सबसे ज्‍यादा यूरिया की पैदावार, देश आजाद होने के बाद सबसे ज्‍यादा यरिया खाद की पैदावार अगर कभी हुई है तो 2015 में हुई है भाइयों और बहनों! कालाबाजारी बन्‍द हो गयी, बेईमानी का कारोबार बन्‍द हो गया, किसान के हक की चीज किसान को पहुँचे इसके लिए प्रबंध किया गया और उसके कारण यूरिया किसानों को पहुँच गया।

भाइयो-बहनों! हम यहीं पर अटके नहीं हैं हमने आते ही यूरिया का उत्‍पादन बढ़ाने के लिए यूरिया के जो कारखाने बंद पड़े थे उसको चालू करने को फैसला किया है जहॉं नए कारखाने लगाने की आवश्‍यकता है उसको लगाने के लिए तैयार है सरकार लेकिन साथ-साथ हमने एक और काम किया है जिस काम के तहत यूरिया का नीम कोटिंग कर रहे हैं, नीम का जो पेड़ होता है उसमें से जो फल में से तेल निकलता है वो यूरिया पर चढ़ाया जाता है नीम का तेल उसके कारण यूरिया की ताकत बढ़ जाती है। किसान अगर पहले दस किलो उपयोग यूरिया लेता था तो नीम कोटिंग वाला 6 किलो 7 किलो से भी काम चल जाता है किसान का 3 - 4 किलो यूरिया का पैसा बच जाता है। दूसरा नीम कोटिंग वाला यूरिया डालने से फसल को अतिरिक्‍त फायदा होता है, जमीन को अतिरिक्‍त फायदा होता है, जमीन को जो नुकसान हुआ है उसमें मदद करने में नीम कोटिंग यूरिया काम आता है और तीसरा सबसे बड़ा फायदा, पहले जो यूरिया आता था वो किसानों के खेत में तो कम जाता था केमिकल के कारखानों में चोरी होकर के चला जाता था subsidy वाला यूरिया केमिकल कंपनियों को काम आता था, अब नीम कोटिंग होने के बाद एक ग्राम भी यूरिया खेती के सिवाय कहीं पर भी काम नहीं हा सकता सिर्फ किसानों को काम आ सकता है, इतना बड़ा काम इस सरकार ने कर दिया।

भाइयों और बहनों! लेकिन मेरी किसानों से आग्रह है कि आप सिर्फ यूरिया के fertilizer से मत चलिए सरकार ने एक बहुत बड़ी योजना बनाइ है। ये जो शहरों का कूड़ा-कचरा है उसमें से fertilizer बनाना और वो भी किसानों को पहॅुंचाना और वो भी सस्‍ते में मिले इसके लिए कुछ concession देना ताकि मेरे किसान की जमीन बरबाद न हो जाए।

भाइयो-बहनों, हमने soil health card निकाला है सारे देश के किसानों के पास soil health card पहॅुचाने का सपना है। अगर आप अपना Blood test करवाएं और डॉक्‍टर कहे कि आप को diabetes है, report लाएं लेकिन मिठाई खाना बन्‍द न करें, तो उस report का कोई उपयोग है क्‍या, कोई उपयोग नहीं है अगर आप Blood test करवाते हैं Urine Test करवाते हैं और report आता है तो उस report के अनुसार शरीर में खान-पान की आदत डालते हैं तो बीमारी control रहती है। जमीन का भी वैसा ही है। soil health card हमारे जमीन की तबीयत कैसी है कहीं हमारी ये भारत माता ये बीमार तो नहीं है ये जमीन, इसमें कोई नई बीमारी तो घुस नहीं गयी है ये soil health card से पता चलता है। मेरे खेत की जमीन किस पैदावार के लायक नहीं है, मेरे पिता जी जब जिन्‍दा थे तब हो सकता है वो गेहूँ के लिए अच्‍छी रही हो,गी लेकिन इतने सालों में बरबाद होते होते अब वो गेहूँ के लायक नहीं रही है, वो दलहन के लायक हो गयी है, वो तिलहन के लायक हो गयी है तो मुझे गेहॅूं से वहॉं shift करना होगा ये सलाह soil health card से मिलती है और इसलिए soil health card इसका भरपूर उपयोग मेरे किसान भाई, बहन करें। मेरे किसान कौन-सी फसल के लिए मेरी जमीन उपयुक्‍त है, इसके आधार पर अगर पैदावार करेंगे तो कभी किसान को रोने की नौबत नहीं आएगी। ये फसल बीमा के साथ-साथ soil health card ये आप को बहुत बड़ी सुरक्षा देता है।

और इसलिए मेरे भाइयो-बहनों मैं आप से आग्रह करने आया हूँ कि आप इस बात को आगर कर करिए। मुझे खुशी हुई स्‍वच्‍छ भारत का जो अभियान चला है, उसमें यहीं नजदीक में जहॉं से हमारे मुख्‍यमंत्री चुनाव जीतते हैं वो Budhni Open-defecation free हो गया है और इसके लिए मैं बधाई देता हॅू और जिन्‍होंने इस काम को किया है उन सभी गॉंव वालों को सभी अधिकारियों को खुले में शौच नहीं जाने का जो निर्णय किया है इसके लिए मैं अभिनंन्‍दन देता हॅूं। इंदौर के इलाके में भी ये काम हुआ है ऐसा मुझे हमारे स्‍पीकर महोदया सुमित्रा जी बता रही थीं मैं उनको और इंदौर के इलाके के लोगों को भी अभिनंन्‍दन देता हॅूं कि खुले में शौच जाना बन्‍द हो रहा है। मैं मध्‍य प्रदेश के सभी मेरे गॉंव के लोग यहॉं आए हैं हम संकल्‍प करें कि हमारे गॉव में हमारी बहन, बेटियों को खुले में शौच नहीं जाना पड़ेगा। हम शौचालय बनाएंगे भी शौचालय का उपयोग भी करेंगे और ये Open-defecation free ये काम पूरा करने में मध्‍य प्रदेश के गॉंव उन्‍होंने बीड़ा उठाया है, जल्‍द से उसको पूरा करें ये मेरी अपेक्षा है।

भाइयो-बहनों क्‍या हम एक संकल्‍प कर सकते हैं क्‍या ये संकल्‍प प्रधानमंत्री भी करे, ये संकल्‍प मुख्‍यमंत्री भी करे, ये संकल्‍प कृषि मंत्री भी करे, ये संकल्‍प देश के किसान भी करें, ये संकल्‍प देश के सवा सौ करोड़ नागरिक भी करें। 2022 भारत की आजादी के 75 साल होंगे। हमारे देश की आजादी के 75 साल होंगे, क्‍या हम सब मिल करके एक संकल्‍प कर सकते हैं कि 2022 में जब भारत की आजादी के 75 साल होंगे, 2022 में जब हम पहुँचेंगे, हमारे किसानों की जो आय है, हमारे किसानों की जो Income है वो 2022 तक हम दो-गुना करके छोड़ेंगे, दो-गुना करके छोड़ेंगे ये संकल्‍प कर सकते हैं। मेरे किसान भाई संकल्‍प कीजिए, राज्‍य सरकारें संकल्‍प करें, सारे मुख्‍यमंत्री, कृषि मंत्री संकल्‍प करें एक बीड़ा उठाएं कि 2022 जब आजादी के 75 साल होंगे मेरे देश के किसान की आय हम दो-गुना करके रहेंगे उसके लिए जो भी करना पड़ेगा हम करेंगे, ये आज का संदेश हम ले करके जाएं। ये संकल्‍प ले करके जाएं।

मैं फिर एक बार आप सबका हृदय से बहुत-बहुत अभिनंन्‍दन करता हॅूं और मैं आशा करता हूँ कि आपने चार बार अवॉर्ड जीता है आने वाले वर्षों में भी ये अवॉर्ड किसी के हाथों जाने मत दीजिए। कुछ कमाल करके दिखाइए अभी थोड़े दिन पहले अबूधाबी से, UAE से जो हम यूएई अबूधाबी जानते हैं वहॉं के Crown Prince यहॉं आए थे। उनसे मैं बातें कर रहा था ये किसानों को समझने जैसी बात है Crown Prince यहॉं आए थे तो हम दोनों बैठे थे बातें कर रहे थे, उन्‍होंने मेरे सामने एक चिंता जताई उन्‍होंने कहा मोदी जी हमारे यूएई के पास बहुत बड़ी मात्रा में तेल के भंडार हैं, पैसे भी अपरंपार है लेकिन न हमारे नसीब में बारिश है और जमीन भी रेगीस्‍तान के सिवाय कुछ नहीं है। हमारी जनसंख्‍या बढ़ रही है दस पंद्रह साल के बाद हमें हमारे लोगों का पेट भरने के लिए अनाज भी बाहर से लाना पड़ेगा, सब्‍जी भी बाहर से लानी पड़ेगी, दलहन, तिलहन भी बाहर से लाने पड़ेंगे क्‍या भारत ने सोचा है कि Gulf Country की मांग को कैसे पूरा करने की तैयारी कर रहे हो, मैं हैरान था! UAE के Crown Prince दस साल पंद्रह साल के बाद वहॉं की जनता जनार्दन की जो आवश्‍यकताएं हैं उसकी पूर्ति के लिए भारत आज से तैयारी करे भारत अपना तो पेट भरे लेकिन भारत UAE का भी पेट भरे ये प्रस्‍ताव उन्‍होंने मेरे सामने रखा।

मेरे कि‍सान भाइयो-बहनों, दुनि‍या आज हमसे अपेक्षा कर रही है। सारी दुनि‍या को भारत काम आ सकता है। हम अगर कोशि‍श करे, हम हमारे उत्‍पादन को बढ़ाए, हम दुनि‍या के बाजार को कब्‍जा कर सकते हैं। उस सपने को लेकर के आगे चले, इसी एक अपेक्षा के साथ मैं आप सबका हृदय से अभि‍नंदन करता हूं और ‘जय जवान, जय कि‍सान’, जि‍स मंत्र ने हि‍न्‍दुस्‍तान के कि‍सानों के भारत के अन्‍न के भंडार भर दि‍ए थे, वो मेरा कि‍सान हि‍न्‍दुस्‍तान को आर्थि‍क ऊंचाइयों पर ले जाने का भी एक बहुत बड़ी ताकत बनकर उभरेगा। बहुत-बहुत धन्‍यवाद, बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

 

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Our united voice for peace and dialogue should resonate across the world: PM Modi in Rajya Sabha on West Asia conflict
March 24, 2026
Many ships are stranded in the Strait of Hormuz, with a large number of Indian crew members on board. This is a major cause of concern for India: PM
In such a critical situation, it is essential that a united voice of peace and dialogue goes out to the entire world from this Upper House of India's Parliament: PM
Around one crore Indians live and work in the Gulf countries, The safety of their lives and livelihoods is also a very big concern for India: PM
More than three weeks have passed since this war began in West Asia , This war has created a serious energy crisis across the entire world: PM
Attacks on commercial ships and disruption of international waterways like the Strait of Hormuz is unacceptable: PM
India has condemned attacks on civilians, on civil infrastructure, and on energy and transport-related infrastructure: PM
Since the start of the war, I have held two rounds of phone conversations with the heads of state of most countries in West Asia: PM
We are in constant touch with all the Gulf countries, We are also in contact with Iran, Israel, and the United States: PM
Our goal is to restore peace in the region through dialogue and diplomacy: PM
We have also discussed de-escalation and the reopening of the Strait of Hormuz with them: PM
India is making continuous efforts, through diplomacy, to ensure the safe passage of Indian ships even in this atmosphere of war: PM
Since the war began, ship movement through the Strait of Hormuz has become very challenging, but the government is seeking a way forward through dialogue and diplomacy: PM
The effort is to ensure that oil and gas supplies reach India from wherever possible, The country is witnessing the results of every such effort: PM
In the past few days, ships carrying crude oil and LPG have arrived in India from many countries around the world, Our efforts in this direction will continue in the coming days: PM
The fundamentals of our economy are strong,the government is closely monitoring the rapidly changing situation: PM
The government is working with a strategy to address every impact in the short term, medium term, and long term: PM
The government has made the necessary preparations to ensure an adequate supply of fertilizers: PM
The government is making continuous efforts to ensure that farmers do not bear the burden of any crisis: PM
I would like to reassure the farmers of the country once again that the government stands with them to resolve every challenge: PM

Honourable Chairman,

We are all familiar with the war currently taking place in West Asia and the circumstances arising from it. Today, I stand before the Upper House of Parliament and before my fellow citizens to share the government’s position on these grave circumstances. This war has now continued for more than three weeks. It has created a severe energy crisis across the world. For India too, this situation is worrisome. Our trade routes are being affected. Routine supplies of essential goods such as petrol, diesel, gas, and fertilizers are disrupted. Nearly one crore Indians live and work in Gulf countries. Ensuring their safety and livelihood is a major concern for India. Many ships are stranded in the Strait of Hormuz, with a large number of Indian crew members aboard. This too is a matter of serious concern for India. In such dire circumstances, it is essential that from this Upper House of Parliament, a united voice for peace and dialogue reaches the entire world.

Honourable Chairman,

Since the beginning of the war, I have spoken twice on the phone with the heads of most countries in West Asia. We are in continuous contact with all Gulf countries. We are also in touch with Iran, Israel, and the United States. Our goal is to restore peace in the region through dialogue and diplomacy. We have spoken with them about de-escalation and reopening the Strait of Hormuz. Attacks on commercial ships and obstruction in international waterways like the Strait of Hormuz are unacceptable. India has opposed attacks on civilians, civil infrastructure, and energy and transport-related infrastructure. Through diplomacy, India is making continuous efforts to ensure the safe passage of Indian ships even in this war-like environment. India has suggested dialogue as the only path to resolving this problem. Any threat to human life in this war is not in the interest of humanity. Therefore, India’s constant effort is to encourage all parties to reach a peaceful solution as soon as possible.

Honourable Chairman,

In times of crisis, the safety of Indians both at home and abroad is our highest priority. Since the war began, more than 375,000 Indians have safely returned to India. From Iran alone, more than 1,000 Indians have returned safely, including over 700 young students pursuing medical education. Our government is working with full sensitivity during this crisis. All countries have assured us of the safety of Indians present there. However, it is deeply saddening that some Indians have lost their lives due to attacks, and some have been injured. In such difficult circumstances, necessary assistance is being provided to their families. Those injured are being ensured the best possible medical treatment.

Honourable Chairman,

The Strait of Hormuz is one of the largest routes of global trade. In particular, the transport of crude oil, gas, and fertilizers takes place in huge quantities through this region. Since the war began, the movement of ships through the Strait of Hormuz has become highly challenging. Yet, despite adverse circumstances, our government has tried to create pathways through dialogue and diplomacy. Our effort is to ensure that oil and gas supplies reach India from wherever possible. The results of these efforts are visible to the nation. In recent days, ships carrying crude oil and LPG from many countries have arrived in India. Our efforts in this direction will continue in the coming days as well.

Honourable Chairman,

India’s effort is to ensure that ships carrying essential goods such as oil, gas, and fertilizers reach India safely. But if the global circumstances created by this war persist for a long time, serious consequences are inevitable. Therefore, India is accelerating the resilience-building measures it has undertaken in recent years.

Honourable Chairman,

Every crisis tests both our courage and our efforts. To enable the country to face such crises better, continuous decisions have been taken over the past 11 years. Diversification of energy imports is part of these efforts. Earlier, India imported crude oil, LNG, and LPG from 27 countries. Today, India imports energy from 41 countries. In the past decade, India has also prioritized crude oil reserves for times of crisis. Our oil companies maintain significant reserves of petrol and diesel for emergencies. Over the past 11 years, more than 5.3 million metric tonnes of strategic petroleum reserves have been developed, and the country is working on arrangements for reserves exceeding 6.5 million metric tonnes. Alongside this, India’s refining capacity has also been substantially increased in the past decade. Through you, I wish to assure the House and the nation that India has adequate crude oil storage and arrangements for continuous supply.

Honourable Chairman,

Our government is striving to ensure that there is no excessive dependence on any single source of fuel. Alongside LPG, the government is also emphasizing PNG for domestic gas supply. In the past decade, unprecedented work has been done to expand PNG connections, and this effort has been further accelerated in recent days. At the same time, large-scale efforts are being made to increase domestic production of LNG.

Honourable Chairman,

In recent years, the government has consistently worked to minimize dependence on other countries in every sector. Becoming increasingly self-reliant is the only option. For example, more than 90% of India’s oil is transported on foreign ships, which makes India’s situation even more serious during any global crisis. Therefore, the government has launched a campaign worth about 70,000 crore rupees to build Made in India ships. India is now rapidly developing facilities for shipbuilding, shipbreaking, maintenance, and overhauling. India is also making its defense sector more resilient. Due to efforts made in the past decade, India today manufactures most of the weapons it needs domestically. There was a time when India was heavily dependent on other countries even for raw materials of life-saving medicines, namely APIs. In recent years, the country has made many efforts to build an API ecosystem within India itself. Similarly, major steps are being taken to reduce foreign dependence in rare earth minerals.

Honourable Chairman,

The current crisis has shaken the global economy. The damage already caused in West Asia will take the world a long time to recover from. Continuous efforts are being made to ensure that India suffers the least possible impact. The fundamentals of our economy are strong, and the government is closely monitoring the rapidly changing situation. The government is working with a strategy to address short-term, medium-term, and long-term impacts. An inter-ministerial group has also been formed, which meets regularly to assess every difficulty arising in our imports and exports, and continuously works on necessary solutions. Just as empowered groups of experts and officers were formed during the pandemic to tackle challenges in different sectors, yesterday seven new empowered groups were also constituted. These groups will act swiftly and strategically on issues such as supply chains, petrol and diesel, fertilizers, gas, and inflation. I am confident that through these collective efforts, we will be able to face the circumstances more effectively.

Honourable Chairman,

The government is also working to ensure that farmers receive adequate fertilizer in the upcoming sowing season. Necessary preparations have been made for sufficient supply of fertilizers. The government’s constant effort is that farmers should not bear the burden of any crisis. I once again assure the farmers of the country that the government stands with them in finding solutions to every challenge.

Honourable Chairman,

This is the House of States. In the coming times, this crisis will be a major test for our country, and the cooperation of states will be crucial for success. Therefore, through this House, I would like to make a few requests to all state governments. In times of crisis, the poor, workers, and migrant companions are most affected. Therefore, it must be ensured that the benefits of the PM Garib Kalyan Anna Yojana reach them on time. Proactive steps should be taken to ease the difficulties of migrant workers wherever they are employed. If state governments make special arrangements to monitor such situations, it will provide significant relief. State governments must also pay close attention to another challenge: in such times, black-marketeers and hoarders become very active. Wherever such complaints arise, immediate action must be taken. Ensuring uninterrupted supply of essential goods must be the top priority of every state.

Honourable Chairman,

I would also like to make another request to all state governments. No matter how severe the crisis, maintaining India’s rapid growth is our collective responsibility. For this, every necessary step and every necessary reform must be carried out swiftly. This is also a great opportunity for state governments. This is a major test for Team India. During the great crisis of the pandemic, the Centre and the states together presented an excellent model of COVID management. Despite governments of different political parties, testing, vaccination, and supply of essential goods were ensured through Team India’s efforts. We must continue to work in the same spirit. With the combined efforts of all state governments and the central government, the country will be able to face this grave global crisis effectively.

Honourable Chairman,

This crisis is of a different nature, and its solutions are also being determined in a different way. We must face every challenge with patience, restraint, and a calm mind.

Honourable Chairman,

As we can see, the situation regarding this war is changing moment by moment. Therefore, I would also say to my fellow citizens that we must be prepared for every challenge. There is a strong possibility that the adverse effects of this war will last for a long time. But I assure the people of the country that the government is alert, ready, and working with full seriousness on strategy, taking every necessary decision. The welfare of the people is paramount for us. This is our identity, this is our strength. With this spirit, I conclude my statement.

Thank you very much!